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बैचलर करण जौहर बने दो जुड़वां बच्चों के सिंगल डैड, अब ये टीवी कपल भी कर रहे हैं कुछ ऐसा (After Karan Johar Tv couple become proud parents)

करण जौहर

करण जौहरसिंगल डैड बन गए हैं करण जौहर. दो जुडवां बच्चों के पिता बनने की ख़ुशी करण ने ख़ुद एक लेटर के ज़रिए सोशल मीडिया पर ज़ाहिर की. यश और रूही के पापा बने करण एक बड़ी ज़िम्मेदार के लिए तैयार हैं. उनके बॉलीवुड फ्रेंड्स ने उन्हें टि्वटर पर बधाईयां भी दी. करण का लेटर आप भी पढ़ें.

करण जौहर

करण सेरोगेसी के ज़रिए पिता बने हैं. बात करें अगर टीवी कपल गुरमीत और देबीना की, तो अब ख़बरे हैं कि उन्होंने दो बेटियों को गोद लिया है, जिनके नाम हैं लता और पूजा. दोनों बिहार के जरमपुर की रहने वाली हैं. इन दोनों का एडमिशन गुरमीत ने पटना के बड़े स्कूल में भी करवाया है. अगले साल तक वो अपनी इन दोनों बेटियों को मुंबई ले आएंगे. गुरमीत-देबीना का ये कदम वाक़ई सराहनीय है.

बंद होगा सरोगेसी का कारोबार ( Surrogacy business will close)

Surrogacy business

लंबे समय से सरोगेसी को लेकर चल रही बहस पर विराम लगाते हुए कैबिनेट ने सरोगेसी बिल पास कर दिया है यानी अब हर किसी को आसानी से किराए की कोख उपलब्ध नहीं होगी. Surrogacy business

 

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सरोगेसी बिल

बिल में साफ़ कहा गया है कि विदेशियों को भारत में किराए की कोख नहीं मिल पाएगी. साथ ही भारतीय कपल्स को भी आसानी से ये सुविधा नहीं मिल सकती. सरोगेसी का सहारा लेने से पहले उन्हें साबित करना होगा कि वो नेचुरल तरी़के से बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं. मेडिकली अनिफट होने की बात साबित होने पर ही उन्हें सरोगेसी की इजाज़त मिलेगी, लेकिन अविवाहित, समलैंगिक दंपति और लिव इन में रहनेवाले कपल्स को सरोगेसी की इजाज़त नहीं होगी. बिल में कहा गया है कि किसी महिला को एक ही बार सरोगेसी की अनुमति होगी. सरोगेसी के लिए पुरुष की उम्र 26 से 55 के बीच और महिला की उम्र 23 से 50 साल के बीच होनी चाहिए. शादी के पांच साल बाद ही इसकी इजाज़त होगी और यह काम रजिस्टर्ड क्लीनिकों में ही होगा. सरकार ने सरोगेसी के बढ़ते व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक के मक़सद से ही सरोगेसी बिल पास किया. साथ ही सरोगेसी के मामलों की निगरानी के लिए एक बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी है.

ज़रूरत शौक़ बन गई है

बिल पास होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि सरोगेसी कुछ सेलेब्रिटीज़ के लिए एक शौक़ बन गया है और जिनके पास बेटे और बेटियां हैं वे भी सरोगेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि उनकी पत्नियां प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं. सरकार आगे से इसकी इजाज़त नहीं देगी. दरअसल, सरोगेसी का मकसद ज़रूरतमंद कपल्स की मदद करना था, मगर धीरे-धीरे ये पूरी तरह से व्यवसायिक बन गया है, इतना ही नहीं अब तो अधिकांश महिलाएं प्रेग्नेंसी के दर्द से बचने के लिए इस आसान रास्ते का इस्तेमाल करने लगी हैं.

बिल की अहम बातें

* स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड का गठन किया जाएगा.

* सरोगेसी बोर्ड में दो सांसद सदस्य होंगे.

* स़िर्फ भारतीय नागरिकों को सरोगेसी का अधिकार होगा.

* यह अधिकार एनआरआई और ओसीआई होल्डर को नहीं मिलेगा.

* सिंगल पैरेंट्स, होमोसेक्सुअल जोड़े, लिव इन में रहनेवालों को सरोगेसी की इजाज़त नहीं होगी.

* सरोगेसी के अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी, गरीब महिलाओं की कोख किराए पर लेना गुनाह होगा.

* सरोगेसी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगेगा.

* सरोगेसी का प्रावधान केवल निःसंतान दंपतियों के लिए.

* निःसंतान दंपति को भी केवल एक बार ही सरोगेसी की इजाज़त होगी.

* एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी. उसका विवाहित होना और एक स्वस्थ बच्चे की मां होना ज़रूरी है.

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बॉलीवुड सेलिब्रेटी ने भी ली सरोगेसी की मदद

* हाल ही में तुषार कपूर सरोगेसी के ज़रिए एक बेटे के पिता बनें, जबकि अभी तक उन्होंने शादी नहीं की है.

* शाहरुख़ ख़ान के तीसरे बेटे अब्राहम ख़ान का जन्म आईवीएफ तकनीक के ज़रिए सरोगेसी से हुआ है.

* आमिर ख़ान व किरण राव के बेटे आज़ाद राव ख़ान का जन्म भी आईवीएफ तकनीक के ज़रिए सरोगेसी से ही हुआ है.

* फराह ख़ान ने भी अपने तीनों बच्चे के आईवीएफ तकनीक से होने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी.

क्या है सरोगेसी?

गर्भधारण में दिक्क़त होने की वजह से जो लोग मां-बाप नहीं बन पाते, वे किराए की कोख से बच्चा पैदा करते हैं. यही सरोगेसी है. पैरेंट्स के स्पर्म और एग को बाहर फर्टिलाइज़ करके सरोगेट मदर के गर्भ में पहुंचा दिया जाता है.

तेज़ी से बढ़ता सरोगेसी कारोबार

पिछले कुछ सालों से भारत में सरोगेसी का कारोबार बहुत तेज़ी से बढ़ रहा था. आकड़ों के अनुसार हर साल विदेशों से आए दंपतियों के 2000 बच्चे यहां होते हैं. क़रीब 3000 क्लीनिक इस काम में लगे हुए हैं, लेकिन नए क़ानून के बाद इसमें मजबूर महिलाओं के शोषण की गुंजाइश नहीं रहेगी. सरकार देश में सरोगेसी को रेग्यूलेट करने के लिए एक नया क़ानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है. अब अगली चुनौती बिल के प्रारूप पर राजनीतिक सहमति बनाकर इसे संसद के शीतकालीन सत्र में पारित कराने की होगी.

सरोगेसी के लिए भारत क्यों है विदेशियों की पसंद?

– अमेरिका में सरोगेसी की लागत 1.20 लाख डॉलर (54.67 लाख रु.) तक हो सकती है, जबकि भारत में इसका खर्च 10 से 25 लाख रुपए के बीच ही है. सिंपल सरोगेसी की लागत गुजरात के आणंद में 7 लाख रुपए है.

– भारत में सरोगेसी पर किसी तरह की पाबंदी लगाने वाला कोई क़ानून नहीं है. ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों में सरोगेट मदर को मां का दर्जा मिलता है, जबकि भारत में इच्छुक पैरेंट्स का नाम बर्थ सटिर्फिकेट पर होता है.

– फ्रांस, नीदरलैंड और नॉर्वे जैसे यूरोपीय देशों में कमर्शियल सरोगेसी की इजाज़त नहीं है.

 

– कंचन सिंह

सिंगल पैरेंट बने तुषार कपूर (Tushar Kapoor became a single parent)

Tushar Kapoor

Tushar Kapoor

12कपूर परिवार में है ख़ुशी का माहौल. जितेन्द्र और शोभा कपूर के यहां पोता जो हुआ है. जी हां, बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं आप, तुषार कपूर पिता बन गए हैं. दरअसल, तुषार ने पिता बनने के लिए आईवीएफ और सेरोगेसी का सहारा लिया है. जसलोक अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद तुषार बेहद ख़ुश हैं. यूं तो फिल्म इंडस्ट्री में आमिर खान और शाहरुख खान भी सेरोगेसी के ज़रिए पिता बन चुके हैं, लेकिन यह निर्णय उन्होंने शादी के बाद लिया था, जबकि तुषार अनमैरिड हैं. सिंगल पैरेंट बने तुषार ने अपने बेटे का नाम लक्ष्य रखा है. तुषार के माता-पिता ने इस निर्णय में उनका साथ दिया और वे पोते के आने से बेहद ख़ुश हैं. अस्पताल के डॉक्टर्स की मानें तो तुषार ने हर कदम पर बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में पूरी जानकारी ली. फ़िलहाल लक्ष्य अपने पिता और दादा-दादी के साथ घर पर है और पूरी तरह से स्वस्थ है.