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सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर ने लोगों को एक बार ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि डिप्रेशन (Depression) जैसी गंभीर समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए. हैरानी की बात ये है कि आज भी अधिकतर लोग डिप्रेशन को लेकर उतने संजीदा नहीं हैं, जितना होना चाहिए. ख़बरों के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत को छह महीने पहले डिप्रेशन की शिकायत शुरू हो गई थी, लेकिन सुशांत ने इसका पूरा इलाज नहीं कराया, दवाइयां भी समय पर नहीं ली, जिससे उनका डिप्रेशन बढ़ता चला गया और अब डिप्रेशन ने उनकी ज़िंदगी ले ली. बॉलीवुड इंडस्ट्री में मानसिक तनाव बहुत होता है. अक्सर जब बॉलीवुड सितारों का करियर आगे नहीं बढ़ पाता, तो स्टार्स इसे सहन नहीं कर पाते और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. ग्लैमर की चकाचौंध में रहने वाले ये सितारे कई बार अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं और कई बार इसका परिणाम जानलेवा भी हो जाता है. आइए, आज हम आपको उन बॉलीवुड सितारों के बारे में बताते हैं, जो डिप्रेशन के शिकार हो चुके हैं. सुशांत सिंह राजपूत ही नहीं ये फिल्मी सितारे भी हो चुके हैं डिप्रेशन के शिकार.

11 Bollywood Celebrities Who Have Suffered From Depression

1) सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput)
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर से पूरा देश स्तब्ध है. आखिर ऐसा क्या हुआ सुशांत सिंह राजपूत के साथ कि उन्होंने फांसी लगाकर अपनी ज़िंदगी को ख़त्म कर दिया. बता दें कि उन्होंने अपने बांद्रा स्थित घर पर फांसी लगाकर जान दे दी. सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, वे पिछले छह महीनों से डिप्रेशन से गुजर रहे थे.

Sushant Singh Rajput

2) दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone)
बॉलीवुड की सुपरस्टार दीपिका पादुकोण डिप्रेशन की शिकार हो चुकी हैं और इसके बारे में वो अक्सर बताती रहती हैं. अपनी इस बीमारी का ख़ुलासा ख़ुद दीपिका ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था. उन्होंने बताया था कि जब वो डिप्रेशन का दर्द झेल रही थीं, तब उन्हें कुछ समझ नहीं आता था कि वो कहां जाएं, क्या करें ? वो बस रोती रहती थीं. ख़ास बात ये है कि दीपिका पादुकोण इस गंभीर बीमारी से लड़कर बाहर आई हैं और अब वो मेंटल हेल्थ के बारे में लोगों को जागरूक करती रहती हैं. इसी कड़ी में दीपिका ने ‘द लिव लव लाफ फाउंडेशन’ (The Live Love Laugh Foundation) भी लॉन्च किया है.

Deepika Padukone

3) अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी डिप्रेशन के दर्द से गुजर चुके हैं. 90 के दशक में जब बिग बी ने बतौर निर्माता अपनी कंपनी शुरू की थी, लेकिन एक के बाद एक कई फिल्में फ्लॉप होने के कारण जब उनकी कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई, तो इस नुकसान को वे सहन नहीं कर पाए और डिप्रेशन में चले गए. बिग बी इसके कारण शारीरिक- मानसिक रूप से काफी कमज़ोर हो गए थे.

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Amitabh Bachchan

4) अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma)
अनुष्का शर्मा ने बहुत कम समय में बॉलीवुड में अपनी अलग जगह बनाया है, लेकिन अनुष्का को भी डिप्रेशन के दौर से गुजरना पड़ा है. अपनी इस मानसिक स्थिति के बारे में अनुष्का ने खुद ट्वीट करके बताया था कि वो एंज़ायटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से गुज़र रही हैं और उनका इलाज चल रहा है. उन्होंने इस विषय पर बेबाक़ी से कहा कि जब आपके पेट में दर्द होता है तो क्या आप डॉक्टर के पास नहीं जाते, तो फिर मेंटल हेल्थ से जुड़े मुद्दों पर ख़ुलकर बात करने में शर्म कैसी?

Anushka Sharma

डिप्रेशन से बचने और डिप्रेशन को दूर करने के उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो

5) शाहरुख ख़ान (Shahrukh Khan)
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख ख़ान भी डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं. शाहरुख ख़ान ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि साल 2010 में कंधे की सर्जरी कराने के बाद कुछ समय के लिए वो डिप्रेशन में चले गए थे, लेकिन अब वो पूरी तरह से इससे बाहर आ चुके हैं.

Shahrukh Khan

6) वरुण धवन (Varun Dhawan)
बहुत कम लोगों को ये बात मालूम है कि सुपरस्टार वरुण धवन भी डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक स्थिति से गुजर चुके हैं. वरुण धवन ने बताया कि फिल्म बदलापुर की शूटिंग के दौरान उन्हें डिप्रेशन की समस्या हो गई थी. एक इंटरव्यू के दौरान अपने इस दर्द को बयां करते हुए वरुण ने कहा था कि मैं अचानक दुखी हो जाता था, अकेलापन महसूस करता था. इस बीमारी ने मेरे मानसिक स्वास्थ्य को काफ़ी हद तक प्रभावित किया था. यह एक गंभीर समस्या है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

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Varun Dhawan

7) टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff)
बॉलीवुड के युवा अभिनेता टाइगर श्रॉफ भी ख़ुलकर अपने डिप्रेशन का दर्द बयां कर चुके हैं. एक इंटरव्यू के दौरान टाइगर ने कहा था कि उनकी फिल्म ‘अ फ्लाइंग जट्ट’ के फ्लॉप होने के बाद वो ज़बरदस्त डिप्रेशन में चले गए थे. उनका कहना था कि उनकी फिल्म ‘बाग़ी’ को सफलता मिली थी, लेकिन ‘अ फ्लाइंग जट्ट’ की असफलता ने उन्हें डिप्रेशन का शिकार बना दिया था. हालांकि उन्होंने डिप्रेशन के आगे हार नहीं मानी और इससे लड़ने का फैसला किया. आख़िरकार ‘मुन्ना माइकल’ की शूटिंग के दौरान वो ख़ुद को डिप्रेशन से पूरी तरह उबारने में सफल रहे.

Tiger Shroff

8) इलियाना डिक्रूज़ (Ileana D cruz)
इलियाना भी डिप्रेशन का शिकार हो चुकी हैं. इलियाना डिक्रूज़ ने एक इंटरव्यू में अपने 15 सालों के डिप्रेशन के बारे में बताया था. इलियाना ने बताया कि वो जब इंडस्ट्री में आई थीं तो खुद को यहां मिसफिट पाती थीं. उन्होंने इस बात को एक्सेप्ट किया कि वो डिप्रेशन में हैं. उनका कहना है कि इस बात को एक्सपेप्ट करना, बेहतर होने की दिशा में एक कदम है.

Ileana D cruz

9) आलिया भट्ट की बड़ी बहन शाहीन (Shaheen)
आलिया भट्ट बॉलीवुड की बड़ी बहन शाहीन भी डिप्रेशन की शिकार रह चुकी हैं. शाहीन ने अपनी इस जर्नी पर किताब भी लिखी है. इस किताब का नाम है Have Never Been (Un)Happier. शाहीन और आलिया भट्ट जब एक इवेंट में शामिल हुई थी, वहां पर उन्होंने मेंटल हेल्थ के बारे में बात की. उसी दौरान इस बारे में बात करते-करते आलिया भट्ट इतनी इमोशनल हो गईं कि वे फूट-फूटकर रोने लगीं. आलिया ने ये भी कहा, “हालांकि मुझे डिप्रेशन की समस्या नहीं है, लेकिन कभी-कभी मुझे एंज़ायटी होती है, पिछले 5-6 महीनों से मुझे यह समस्या हो रही है.”

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Shaheen Alia Bhatt

10) ज़ायरा वसीम (Zaira Wasim)
फिल्म ‘दंगल’ और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में नज़र आ चुकी एक्ट्रेस ज़ायरा वसीम ने भी सोशल मीडिया पर अपने डिप्रेशन का खुलासा किया था. ज़ायरा सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया था कि पिछले कई सालों से वो डिप्रेशन यानी अवसाद से जूझ रही हैं और उन्हें हर रोज़ इसके लिए 5 गोलियां खानी पड़ती है.

Zaira Wasim

11) मनीषा कोइराला (Manisha Koirala)
बॉलीवुड की कई बेहतरीन फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी डिप्रेशन के दर्द को झेल चुकी हैं. उन्हें सिर्फ डिप्रेशन ने ही नहीं, बल्कि गर्भाशय के कैंसर ने भी अपना शिकार बना लिया था. हालांकि समय पर इलाज के साथ-साथ परिवार और दोस्तों के सहयोग ने उन्हें दोनों बीमारियों से लड़ने की हिम्मत दी. मनीषा का कहना है कि वे निराशावादी नहीं हैं, इसलिए डिप्रेशन से लड़ना जानती हैं. बता दें कि डिप्रेशन ने उनके रंग-रूप को भी काफ़ी हद तक प्रभावित किया था.

Manisha Koirala

 

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भागदौड़ भरी ज़िंदगी, काम का दबाव, दिन-ब-दिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने न स़िर्फ बड़ों को, बल्कि बच्चों को भी प्रभावित किया है. आज के दौर में युवा और बुज़ुर्ग ही नहीं, बच्चे भी तनाव और डिप्रेशन की चपेट में आसानी से आ जाते हैं. बच्चों में बढ़ता डिप्रेशन इसी बात का संकेत है कि अब सचेत हो जाना चाहिए, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है. कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो बच्चों के दिलो-दिमाग़ पर बहुत गहरा असर छोड़ जाती हैं. और यही मेंटल स्ट्रेस, धीरे-धीरे डिप्रेशन का रूप ले लेता है. कहीं आपका बच्चा भी इसी समस्या से तो नहीं गुज़र रहा? आइए, डिप्रेशन का शिकार हो रहे बच्चों की मनोस्थिति व समाधान के बारे में जानें.

मनोचिकित्सकों की मानें, तो डिप्रेशन की बीमारी किसी को भी हो सकती है. सायकोलॉजी की प्रो़फेसर डॉ. विद्या शेट्टी के अनुसार, डिप्रेशन के लिए मुख्य रूप से बदलती जीवनशैली, बच्चों में संस्कारों की कमी और बढ़ता पढ़ाई का बोझ काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं. आज बच्चों पर हर तरफ़ से दबाव है. पैरेंट्स की उम्मीदों को पूरा करने की चिंता, प्रतिस्पर्धा में अव्वल आना, पढ़ाई में 90% लाना या टीनएजर्स में रिलेशनशिप में धोखे का डर आदि. ये सभी ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं, जो बच्चों के दिमाग़ में घर कर जाएं, तो उनकी जान तक की दुश्मन बन जाती हैं. हालांकि डिप्रेशन का सही इलाज मुमकिन है, बशर्ते समय रहते इलाज शुरू कर दिया जाए.
सायन हॉस्पिटल, मुंबई के सायकोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. निलेश शाह कहते हैं, “डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है और यह किसी को भी हो सकती है. इंसान के दिमाग़ में न्यूरोटर्मिक नाम का केमिकल बनता है, दिमाग़ में इसकी मात्रा कम होने के कारण डिप्रेशन की बीमारी हो जाती है. कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जिनसे शुरुआती दौर में ही आप अपने बच्चे के दिमाग़ में पनप रहे डिप्रेशन को पहचान सकते हैं.”

डिप्रेशन के लक्षण

* आपका हंसता-खेलता बच्चा अचानक से अलग बर्ताव करने लगे.
* बहुत ही चंचल स्वभाव का बच्चा शांत रहने लगे.
* वो चिड़चिड़ा हो जाए या छोटी से छोटी बात पर उसे ग़ुस्सा आने लगे या वह रिएक्ट करने लगे.
* खेल-कूद से कभी न थकनेवाला बच्चा बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलने से जी चुराने लगे.
* जो बच्चा तन्हाई में एक पल न बिताता हो, उसे अचानक अकेले रहने का मन करने लगे.
* भाई-बहन से हमेशा मिल-जुलकर रहनेवाला हंसमुख बच्चा उनसे कन्नी काटने लगे या पैरेंट्स या रिश्तेदारों से बातचीत करने में घबराए या बात ही न करना चाहे.
* दिन में काफ़ी समय टीवी के सामने बैठ अपने पसंदीदा कार्टून को देखना या वीडियो गेम को अपने से भी अधिक प्यार करनेवाला बच्चा अचानक से इन चीज़ों की तरफ़ देखे भी न.
* बच्चा बिना किसी ख़ास वजह के स्कूल जाने से बार-बार इनकार करने लगे और ज़बरदस्ती स्कूल भेजने पर कोई न कोई बीमारी का बहाना बना दे.
* भूख लगने पर भी खाने-पीने का उसका मन नहीं करे.
* भरपूर नींद न ले पाए. छोटी उम्र में जब बच्चे 8 से 10 घंटे की नींद पूरी करते हों, तब आपके बच्चे को नींद न आने जैसी शिकायत रहने लगे.

डिप्रेशन का इलाज

डॉ. निलेश शाह का कहना है कि जैसे ही आपको अपने बच्चे में डिप्रेशन के लक्षण दिखाई दें, उसे बिल्कुल नज़रअंदाज न करें. उसे मनोचिकित्सक या मेंटल हेल्थ सेंटर लेकर जाएं, ताकि समय पर बच्चे का सही इलाज शुरू किया जा सके, क्योंकि डिप्रेशन का सही इलाज न होने पर यह बच्चे को या पीड़ित व्यक्ति को ख़ुदकुशी जैसे गंभीर क़दम उठाने पर भी मजबूर कर सकता है. डिप्रेशन का इलाज संभव है. इसके इलाज के लिए दवाइयां और काउंसलिंग दोनों की ही ज़रूरत होती है. बच्चे के दिमाग़ में चल रहे नकारात्मक विचार का कारण जानकर उसे सायको थेरेपी से या उसके लिए उपयुक्त उपचार से ठीक किया जाता है.

डिप्रेशन से बाहर आने में बच्चे की मदद करें

डिप्रेशन से मुक़ाबला कर सकनेवाली बातों को सीखने में बच्चे की मदद करें-
* कम उम्र के हो या टीनएज, आख़िर बच्चे तो बच्चे ही होते हैं. आप उन्हें अपने ग़ुुस्से पर नियंत्रण रखना सिखाएं.
* आप बच्चे को ग़ुस्सा आने पर 1 से 10 तक उल्टी गिनती गिनने की सलाह दें. यह काफ़ी कारगर उपाय है.
* छोटी-छोटी चीज़ों या बातों पर कैसे रिएक्ट किया जाए, बच्चे को यह सिखाकर उसे आप डिप्रेशन से बचने में काफ़ी हद तक मदद कर सकते हैं.
* जितना हो सके अपने बच्चे से उसकी परेशानी के बारे में बात करें, न कि उसकी परेशानी का कारण बने.
* इसके अलावा गाने सुनकर ग़ुस्से या उदासी को कम किया जा सकता है, जिसे म्यूज़िक थेरेपी भी कहते हैं.

काम में व्यस्त रखें

बच्चे को छोटे-मोटे काम में व्यस्त रखें. इससे उसका ध्यान बंटा रहेगा. उसे उसके ख़ुद के कमरे की सफ़ाई करने को कह सकते हैं या फिर होमवर्क पूरा करना या शॉवर लेने जैसे काम करके वह अपने आपको व्यस्त रख सकता है. यदि आपको ज़रा भी महसूस हो कि आपका बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो रहा है, तो आप उसे चद्दर से मुंह ढंककर सोने की इजाज़त न दें. यह हालात को और भी गंभीर बना सकता है.

ज़िम्मेदारियां समझाएं

बच्चों को उनकी ज़िम्मेदारियों का एहसास कराना ठीक उतना ही ज़रूरी है, जितना कि उन्हें चलना-बोलना सिखाना. रोज़ के काम जैसे कि स्कूल का होमवर्क करने में उसकी मदद करें. उसे उसकी ज़िम्मेदारियां समझाएं, ताकि वह इसे निभा सके. उसे रोज़ नई-नई चीज़ें सिखाएं. यदि आपका बच्चा डिप्रेशन में है, तो आपको उसके साथ अच्छे टीचर या कोच जैसा बर्ताव करना पड़ेगा.

क्यों ज़रूरी है शांत कमरा?

बच्चे से शोर-शराबेवाली जगह में बात करने की कोशिश न करें, यह उसे और भी चिड़चिड़ा बना सकता है. आजकल कई स्कूलों में ‘क्वाइट रूम’ बनाया जाता है, जहां बच्चा आराम से बैठकर अपने दिलो-दिमाग़ को शांत कर सके. शांत कमरे में बैठकर अपने बच्चे से उसके ख़राब मूड या परेशानी के बारे में जानने की कोशिश करें.

बच्चा मूड़ी भी हो सकता है

बढ़ते बच्चे अक्सर मूड़ी होते हैं, किसी ज़माने में आप भी रहे होंगे. यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने बच्चे के बदलते मूड़ को कैसे समझें. आप उसे समझा सकते हैं कि ठीक है तुम मूड़ी हो सकते हो, झुंझला सकते हो, दुखी भी हो सकते हो, लेकिन अपने काम और ज़िम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते.

दुखी होना बुरा नहीं है

बच्चे को यह एहसास दिलाना बहुत ही ज़रूरी होता है कि दुखी होना इंसान की प्रवृत्ति है, ठीक वैसे ही जैसे कि ख़ुुश होना. हालांकि अधिक दुखी होने का एहसास भी डिप्रेशन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह इंसान की प्रवृत्ति का ही हिस्सा है. बच्चों को यह पता होना चाहिए कि कभी कोई काम उनके मुताबिक न हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि वे सबसे मुंह मोड़ लें या दुखी हो जाएं. बच्चों को अपनी भावनाओं पर काबू करना पैरेंट्स ही सिखा सकते हैं. उनसे बातें करें. उन्हें समझाएं कि अलग-अलग हालात को किस प्रकार हैंडल किया जाए.
डिप्रेशन की बीमारी कई प्रकार की होती है, लेकिन घबराने की बात नहीं है. आप केवल इस बात का ख़्याल रखें कि इसका इलाज है और इसे भी अन्य बीमारियों की तरह जड़ से ठीक किया जा सकता है. डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति भी एक आम इंसान की तरह जीवन व्यतीत कर सकता है. ज़रूरत है, तो बस थोड़े-से प्यार और सही इलाज की.
नेशनल रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 वर्षों में (2006 से 2010 तक) विद्यार्थियों में आत्महत्या का ट्रेंड 26% बढ़ गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010 में देश में रोज़ाना 20 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है. मनोचिकित्सकों और शिक्षकों ने काफ़ी हद तक आत्महत्या का कारण मेंटल हेल्थ व डिप्रेशन को बताया है.

– अमृता केसरी