Tax

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जब भी कोई नई चीज़ शुरू होती है, तो उसके अच्छे-बुरे दोनों ही पहलुओं पर गौर किया जाना बेहद ज़रूरी हो जाता है, जैसे जीएसटी. देशभर में इसे लेकर चर्चाएं हो रही हैं. आइए, थोड़े में इसके बारे में जानें.
जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने पर हर सामान व सेवा पर एक ही टैक्स लगेगा. वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह एक ही टैक्स लगेगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लिए जा रहे 15 से अधिक अप्रत्यक्ष टैक्स के बदले में लगाया जा रहा है. यह देशभर में आज रात बारह बजे यानी 1 जुलाई, 2017 से लागू हो जाएगा.
इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि अब उपभोक्ताओं यानी कस्टमर को हर सामान पर एक ही टैक्स चुकाना होगा. पहले हर सामान पर राज्य अपने हिसाब से टैक्स लगाते रहते थे, अब वैसा नहीं रहेगा. यानी भारतभर में आपको किसी भी वस्तु के एक ही दाम देने होंगे, फिर चाहे आप उसे मुंबई से ख़रीदें या दिल्ली से.

जीएसटी लागू होने पर क्या होगा?
– जीएसटी लागू होने पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि अब आम आदमी को सस्ता सामान मिल सकेगा.
– सभी तरह के अन्य टैक्स सर्विस टैक्स, सेल्स टैक्स, वैल्यू एडेड टैक्स, एंटरटेन्मेंट टैक्स, ऑक्ट्राय एंड एंट्री टैक्स, सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी, परचेस टैक्स, लग्ज़री, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडीशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम समाप्त हो जाएंगे.
– केंद्र सरकार को मिलनेवाली एक्साइज़ ड्यूटी, सर्विस टैक्स भी ख़त्म हो जाएगी.
– राज्यों को मिलनेवाले वैट, मनोरंजन कर, लक्ज़री टैक्स, एंट्री टैक्स, टोल टैक्स आदि भी ख़त्म हो जाएगा.
– टैक्स की बोझ से महंगे होते अधिकतर सामान सस्ते हो जाएंगे.
– पहले जहां हमें किसी भी वस्तु को ख़रीदने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कई तरह के टैक्स भरने पड़ते थे. अब ऐसा नहीं होगा.
– ग्राहक कोई भी सामान ख़रीदने पर 30-35 % टैक्स के रूप में चुकाते थे. कहीं-कहीं पर तो यह टैक्स 50% तक पहुंच जाता था. अब जीएसटी लागू होने पर उम्मीद की जा रही है कि यह घटकर 12-14 % रह जाएगा.

जीएसटी के फ़ायदे
– टैक्स भरना आसान हो जाएगा.
– टैक्स चोरी की संभावनाएं ना के बराबर रहेगी.
– किसी भी प्रोडक्ट पर लगनेवाला टैक्स एक सा ही होगा.
– इसका सीधा असर देश की जीडीपी पर पड़ेगा.
– देश की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी.
– इससे कमोबेश हर किसी को फ़ायदा होगा.
– कंपनियों के ख़र्च व परेशानियां कम होंगी.
– अब व्यापारियों को सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में कोई परेशानी नहीं होगी.
– एक टैक्स फॉर्मेट होने के कारण बिज़नेसवालों को टैक्स भरना भी आसान होगा.
– साथ ही इसके कारण सामान बनाने की लागत भी घटेगी, जिससे सामान की दाम भी सस्ते हो जाएंगे.

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कुछ ख़ास बातें
– भारत में साल 2006-7 के आम बजट में पहली बार जीएसटी का ज़िक्र हुआ था.
– जीएसटी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी लॉन्च करेंगे.
– राज्य पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, रसोई गैस के लिए टैक्स लेते रहेंगे.
– साथ ही शुरुआती पांच साल तक राज्य के नुक़सान की भरपाई केंद्र सरकार करेगी.
– जीएसटी से जो टैक्स मिलेगा, वो राज्य और केंद्र में तय अनुसार बंटेगा.
– जीएसटी लागू होने पर टैक्स प्रणाली ट्रांस्परेंट हो जाएगी और असमानता नहीं रहेगी.
– काफ़ी हद तक टैक्स विवाद ख़त्म होंगे.
– ढरों टैक्स क़ानून और रेगुलेटरों का झंझट दूर हो जाएगा.
– इससे कई राज्यों में रेवैन्यू (राजस्व) बढ़ेंगे.
– अब तक 1200 से अधिक सामानों और 500 से अधिक सेवाओं पर लगनेवाले टैक्स की दर तय हो चुकी है.
– रोज़मर्रा की चीज़ों पर जीएसटी का असर नहीं पड़ेगा, जबकि कुछ सिलेक्टेड कंज़्यूमर गुड्स पर 5% अधिक टैक्स लगेगा.

ये सभी होंगे महंगे…
– फाइनेंशियल सर्विसेज़ 15 से बढ़कर 18% टैक्स
– सोना पर 2 से 3%, बनवाने पर 5% टैक्स
– होटल्स में ठहरना
– ट्रेन में एसी में सफ़र करना
– फाइव स्टार रेस्टोरेंट्स में खाना
– टेलिकॉम सेक्टर
– बैंकिंग सेवाएं
– परफ्यूम व शैंपू
– मोबाइल फोन बिल
– फ्लैट या शॉप ख़रीदना
– सलोन, ट्यूशन फीस, कपड़े आदि

ये सभी होंगे सस्ते…
अनाज, शक्कर, चाय, कॉफी, दूध, दही, सब्ज़ियां, शहद, अचार, पापड़, हेयर ऑयल, साबुन, पोस्टेज, रेवेन्यू स्टैंप, कटलरी, कैचअप, सॉसेज, एयर ट्रैवेल, हज़ार रुपए से कम के कपड़े सस्ते होंगे.

* लगभग 81% सामान 18% कम के स्लैब में होंगे.
* 12% के स्लैब में कैरम बोर्ड, चेस बोर्ड, प्लेइंग कार्डस आदि.
* 5% के स्लैब में जीवनरक्षक दवाओं को रखा गया है.
* बच्चों के कलर व ड्रॉइंग बुक्स, पिक्चर्स, सॉल्ट आदि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है.

तीन तरह के टैक्स होंगे
* सीजीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) जो केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा.
* एसजीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स), जो राज्य सरकार वसूलेगी.
* आईजीएसटी (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स), जब दो राज्यों के बीच कोई व्यापार होगा, तब यह टैक्स लगेगा.

माना जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक कड़ी चुनौती रहेगी, पर इसमें भी कोई दो राय नहीं कि इससे जहां कारोबारी माहौल सुधरेगा, वहीं विकास दर में मज़बूती भी आएगी. इससे भविष्य में होनेवाली बेहतरीन संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता.

– ऊषा गुप्ता

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इंश्योरेंस से लेकर फिक्स्ड डिपॉज़िट, होम लोन और निवेश के अन्य विकल्पों के अलावा भी आप टैक्स बचा सकते हैं, बशर्ते आपकी पत्नी वर्किंग हो. वर्किंग वाइफ से कैसे होगी डबल टैक्स सेविंग? जानने के लिए हमने बात की चार्टर्ड अकाउंटेंट उमाशंकर यादव से.

शिक्षा ख़र्च
आयकर अधिनियम (इनकम टैक्स एक्ट) की धारा 80सी के तहत एक व्यक्ति किसी विश्‍वविद्यालय, स्कूल और शैक्षणिक संस्थान में किए गए ख़र्च पर टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकता है. छूट की सीमा एक लाख रुपए है. हालांकि ये छूट केवल दो बच्चों के लिए ही उपलब्ध है, लेकिन पत्नी यदि वर्किंग है और दो से ज़्यादा बच्चे हैं, तो पत्नी भी टैक्स छूट का फ़ायदा क्लेम कर सकती है, क्योंकि बच्चों की सीमा प्रति करदाता (टैक्स अदा करने वाला) पर निर्भर करती है न कि प्रति परिवार पर. यदि आपके दो बच्चे हैं और शिक्षा का ख़र्च सालाना एक लाख रुपए से ज़्यादा है, तो पति-पत्नी इस ख़र्च को आपस में बांटकर एक लाख की सीमा को बनाए रखकर टैक्स बचा सकते हैं.

सेहत से जुड़े ख़र्च
आयकर अधिनियम की धारा 80डी के मुताबिक, एक करदाता मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 15000 रुपए तक की टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकता है. हालांकि आजकल स्वास्थ्य संबंधी ख़र्चों को देखते हुए मेडिकल इंश्योरेंस पर 15000 रुपए की टैक्स छूट की सीमा बहुत कम है. इतना ही नहीं, 15000 रुपए की टैक्स छूट में से 5000 रुपए की छूट प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप पर मिलती है यानी आपको वास्तविक टैक्स छूट केवल 10000 रुपए की ही मिल रही है. ऐसे में वर्किंग वाइफ होने पर आपको ज़्यादा फ़ायदा मिलेगा. इसके लिए आपको पॉलिसी की ख़रीददारी और प्रीमियम का भुगतान इस तरह करना होगा कि ख़र्च दोनों में बंट जाए और आप दोनों को ही टैक्स छूट का फ़ायदा मिले.

लोन रिपेमेंट के फ़ायदे
धारा 80सी के तहत एक करदाता कई आइटम पर टैक्स छूट का फ़ायदा क्लेम कर सकता है. इसके अंतर्गत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, प्रोविडेंट फंड, हाउसिंग लोन के रिपेमेंट पर ज़रूरी छूट का फ़ायदा उठाया जा सकता है. प्रॉपर्टी की क़ीमतों में काफ़ी इज़ाफा हुआ है. ऐसे में होम लोन के रिपेमेंट के ज़्यादातर मामलों में प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) एक लाख रुपए से ज़्यादा होता है, जबकि आपको एक लाख रुपए मूलधन तक ही टैक्स छूट मिलती है. ऐसे में यदि पत्नी कामकाजी और प्रॉपर्टी की को-ओनर है, तो आपको ज़्यादा टैक्स बेनिफिट मिल सकता है.

हाउस प्रॉपर्टी के संबंध में फ़ायदे
यदि आपके पास एक मकान है जिसका इस्तेमाल आप ख़ुद कर रहे हैं, तो ऐसे में आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा, लेकिन आपयदि एक से ज़्यादा प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको नोशनल रेंट के आधार पर टैक्स देना होगा, भले ही आपको प्रॉपर्टी से कोई किराया न मिल रहा हो. इस स्थिति में यदि पत्नी भी वर्किंग है, तो दूसरी प्रॉपर्टी पत्नी के नाम की जा सकती है. पति और पत्नी के बीच दो प्रॉपर्टी को सेल्फ ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी की श्रेणी में डाला जा सकता है और इस पर कोई नोशनल रेंट भी नहीं देना पड़ेगा. ठीक इसी तरह टैक्स क़ानून के अंतर्गत, एक रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी पर वेल्थ टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है. यदि करदाता एक से ज़्यादा रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी हासिल कर लेता है, तो उसे दूसरे घर के मूल्य पर वेल्थ टैक्स चुकाना पड़ता है, लेकिन दूसरा घर पत्नी के नाम पर करने पर इससे बचा जा सकता है.

महिलाओं को टैक्स बेनिफिट

* महिलाओं को बिज़नेस या प्रोफेशनल कार्यों के लिए दिए गए कैश पेमेंट पर टैक्स छूट मिलती है. आयकर नियम की धारा 6डीडी के तहत महिलाओं को रोज़ाना 20,000 रुपए तक के कैश पेमेंट पर टैक्स छूट मिल सकती है.

* महिलाएं अगर चैरिटेबल शिक्षण संस्था खोलना चाहती हैं, तो ऐसे शिक्षण संस्था की आय पर टैक्स नहीं लगेगा. साथ ही इस संस्था के लिए लोन लिया है तो इसके ब्याज़ पर भी टैक्स छूट मिल सकती है.

* यदि किसी महिला को पुश्तैनी जायदाद मिलती है, तो इस संपत्ति को बेचने के बाद मिली रकम पर वह टैक्स बचा सकती है, बशर्ते पुरानी संपत्ति बेचकर आप रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी में ही निवेश करें.

 

– कंचन सिंह

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बचत न स़िर्फ आपके सुरक्षित भविष्य के लिए ज़रूरी है, बल्कि बचत करके आप टैक्स भी बचा सकते हैं. टैक्स सेविंग के लिए कौन-सा इन्वेस्टमेंट होगा आपके लिए फ़ायदेमंद? आइए, हम बताते हैं.

बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट
यदि आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो साधारण फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी) की बजाय 5 साल के लॉक-इन पीरियड वाली एफडी करवाएं. इस पर बैंक अच्छा रिटर्न देते हैं साथ ही टैक्स की भी बचत होती है.

  • इसमें आप न्यूनतम रू.100 से लेकर अधिकतम रू.1,00,000 तक का निवेश कर सकते हैं, कुछ बैंकों में न्यूनतम राशि रू.1000 है.
  • आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम रू. 10,000 से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.
  • लॉक-इन होने की वजह से 5 साल से पहले आप पैसे नहीं निकाल सकते हैं. साथ ही इस पर आपको लोन भी नहीं मिलता है. जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते उनके लिए ये अच्छा विकल्प है, क्योंकि टैक्स बचाने के साथ ही ये सुरक्षित है और रिटर्न भी सुनिश्‍चित मिलता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
ये सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित टैक्स सेविंग विकल्प है. इसमें निवेश की हुई रकम पर टैक्स रिबेट मिलता है. साथ ही इंटरेस्ट भी टैक्स फ्री है और आप अगर कुछ पैसे निकालते हैंं तो उस पर भी टैक्स नहीं लगता.

  •  पीपीएफ में आप एक साल में 1.5 लाख रुपए तक का निवेश कर सकते हैं.
    साल में कम से कम 500 रूपए का निवेश करना ज़रूरी है, ऐसा न करने पर बैंक पेनल्टी चार्ज करता है.
  •  पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. हालांकि ज़रूरत पड़ने पर आप 5 साल बाद पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन ये रकम चौथे साल के आख़िर या पिछले साल के बैलेंस के 50% में से जो भी कम हो,  उतनी ही हो सकती है.
  •  किसी फायनांशियल ईयर में आप इसमें से एक बार ही पैसे निकाल सकते हैं. इस पर मिलने वाला ब्याज़ टैक्स फ्री होता है.
  •  पीपीएफ पर आप लोन भी ले सकते हैं, मगर ये पिछले बैलेंस के 25% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
ये डाक विभाग द्वारा जारी निवेश प्रमाण-पत्र होता है जिसकी अवधि 5 और 10 वर्ष की होती है यानी इस अवधि के पहले आप पैसे निकाल नहीं सकते. पीपीएफ की तरह इस पर मिलने वाला ब्याज़ भी टैक्स फ्री होता है. पीपीएफ में आप हर साल अपनी सहूलियत के हिसाब से पैसे डाल सकते हैं, मगर इसमें ये सुविधा नहीं है. इसमें एकसाथ ही निश्‍चित समयावधि के लिए निवेश करना होता है.

इंश्योरेंस प्लान
इंश्योरेंस पॉलिसी को हालांकि विशेषज्ञ निवेश का बेहतर विकल्प नहीं मानते, मगर जीवन से सुरक्षा के साथ ही ये आपको टैक्स बचाने में भी मदद करता है. पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. आपात स्थिति से निपटने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी है.

होम लोन
कुछ लोग ज़रूरत के लिए नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी ख़रीदते हैं. दरअसल, टैक्स छूट का फ़ायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश बहुत लोकप्रिय विकल्प है. होम लोन के लिए अदा किए गए प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) पर 1 लाख रुपए और इंटरेस्ट पर डेढ़ लाख रुपए तक छूट मिल सकती है. यदि पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं, तो ज्वाइंट लोन लेकर दोनों टैक्स बेनिफिट ले
सकते हैं. प लॉक-इन होने की वजह से 5 साल से पहले आप पैसे नहीं निकाल सकते हैं. साथ ही इस पर आपको लोन भी नहीं मिलता है. जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते उनके लिए ये अच्छा विकल्प है, क्योंकि टैक्स बचाने के साथ ही ये सुरक्षित है और रिटर्न भी सुनिश्‍चित मिलता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
ये सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित टैक्स सेविंग विकल्प है. इसमें निवेश की हुई रकम पर टैक्स रिबेट मिलता है. साथ ही इंटरेस्ट भी टैक्स फ्री है और आप अगर कुछ पैसे निकालते हैंं तो उस पर भी टैक्स नहीं लगता.

* पीपीएफ में आप एक साल में 1.5 लाख रुपए तक का निवेश कर सकते हैं.

* साल में कम से कम ञ्च्500 का निवेश करना ज़रूरी है, ऐसा न करने पर बैंक पेनल्टी चार्ज करता है.

* पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. हालांकि ज़रूरत पड़ने पर आप 5 साल बाद पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन ये रकम चौथे साल के आख़िर या पिछले साल के बैलेंस के 50% में से जो भी कम हो, उतनी ही हो सकती है.

* किसी फायनांशियल ईयर में आप इसमें से एक बार ही पैसे निकाल सकते हैं. इस पर मिलने वाला ब्याज़ टैक्स फ्री होता है.

* पीपीएफ पर आप लोन भी ले सकते हैं, मगर ये पिछले बैलेंस के 25% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
ये डाक विभाग द्वारा जारी निवेश प्रमाण-पत्र होता है जिसकी अवधि 5 और 10 वर्ष की होती है यानी इस अवधि के पहले आप पैसे निकाल नहीं सकते. पीपीएफ की तरह इस पर मिलने वाला ब्याज़ भी टैक्स फ्री होता है. पीपीएफ में आप हर साल अपनी सहूलियत के हिसाब से पैसे डाल सकते हैं, मगर इसमें ये सुविधा नहीं है. इसमें एकसाथ ही निश्‍चित समयावधि के लिए निवेश करना होता है.

इंश्योरेंस प्लान
इंश्योरेंस पॉलिसी को हालांकि विशेषज्ञ निवेश का बेहतर विकल्प नहीं मानते, मगर जीवन से सुरक्षा के साथ ही ये आपको टैक्स बचाने में भी मदद करता है. पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. आपात स्थिति से निपटने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी है.

होम लोन
कुछ लोग ज़रूरत के लिए नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी ख़रीदते हैं. दरअसल, टैक्स छूट का फ़ायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश बहुत लोकप्रिय विकल्प है. होम लोन के लिए अदा किए गए प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) पर 1 लाख रुपए और इंटरेस्ट पर डेढ़ लाख रुपए तक छूट मिल सकती है. यदि पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं, तो ज्वाइंट लोन लेकर दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं.

– कंचन सिंह

 

How-to-save-income-tax-with-insurance - tax, investment, saving

हर कोई अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बचाने का प्रयास करता है, मगर आपने यदि सही तरी़के से, सही जगह पर इन्वेस्टमेंट नहीं किया है, तो टैक्स के रूप में आपकी आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है. अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए कैसा इन्वेस्टमेंट करें जो टैक्स फ्री हो और आपको रिटर्न भी मिले? आइए, जानते हैं.

सुकन्या समृद्धि योजना
सरकार द्वारा ख़ासतौर से स़िर्फ बेटियों के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना से आप बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलवाएं. इसमें आप हर साल कम से कम 1000 और अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं. इस पर 9.2 फ़ीसदी की दर से ब्याज़ मिलता है और बेटी के 21 साल के होने पर ही आप ये पैसे निकाल सकते हैं.

एनपीएस
सेक्शन 80सी के तहत डेढ़ लाख टैक्स बचाने के साथ ही आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में सालाना 50,000 रुपए तक निवेश करके टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. 2015 के बजट में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 सीसीडी के तहत सालाना 50,000 रुपए एनपीएस में निवेश को करमुक्त कर दिया.

पीपीएफ
टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहा है, क्योंकि पीपीएफ में 15 साल का लॉक इन पीरियड होता है, तो इसमें पैसे डालकर आप अपना भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. पीपीएफ में निवेश की गई राशि का 50 फ़ीसदी हिस्सा आप 7 साल बाद निकाल सकते हैं. पीपीएफ में किया गया इन्वेस्टमेंट तो टैक्स फ्री होता ही है, इस पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं लगता. साथ ही मैच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि भी करमुक्त होती है.

इंश्योरेंस प्रीमियम
अपने, पत्नी या बच्चों के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर भी आप टैक्स बचा सकते हैं. इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. इंश्योरेंस निवेश के हिसाब से बहुत फ़ायदेमंद भले ही न हो, मगर आपात स्थिति से निपटने के लिए ये ज़रूरी है.

मेडिकल इंश्योरेंस
यदि आप अपने, पत्नी या बच्चों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस लेते हैं, तो इस पर भी आप टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80डी के तहत 25,000 रुपए तक का प्रीमियम टैक्स फ्री है. यदि आपने अपने माता-पिता का भी मेडिक्लेम किया है और उनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है, तो 30,000 रुपए तक की प्रीमियम राशि करमुक्त होगी यानी साल में आप 55 हज़ार टैक्स बचा सकते हैं.

फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी)
यदि आप ये सोचते हैं कि हर तरह की एफडी टैक्स फ्री है, तो ऐसा नहीं है. 5 साल की लॉक इन पीरियड वाली एफडी ही टैक्स फ्री होती है. आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम 10,000 रुपए से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.

होम लोन
यदि आपने घर ख़रीदने के लिए लोन लिया है, तो आपको टैक्स छूट का फ़ायदा मिलेगा. होम लोन के लिए अदा किए गए ब्याज़ पर सालाना 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट है. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो दोनों के नाम पर लोन होने से दोनों को टैक्स बेनिफिट मिलेगा.

स्मार्ट टिप्स
– 80सी के तहत आप कुल डेढ़ लाख रुपए तक टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं.

– बच्चों की स्कूल फीस (ट्यूशन फीस) पर भी टैक्स छूट मिलती है. इसकी लिमिट 2 बच्चों तक है. यदि आप 80सी के तहत इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाए हैं, लेकिन बच्चे की फीस भर रहे हैं, तो आपको टैक्स छूट का लाभ मिलेगा.

– 80 सीसीडी के तहत एनपीएस के रूप में 50,000 का निवेश टैक्स फ्री है.

– ख़ुद की प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए होम लोन पर दिया गया 2 लाख तक का ब्याज करमुक्त होगा.

– यदि कंपनी आपको ट्रैवलिंग अलाउंस देती है, तो 19,200 रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा.

– हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए भी टैक्स सेविंग का ज़रिया है. यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो रेंट स्लिप दिखाकर एक निश्‍चित सीमा तक टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं.