teach keep thing in place

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बच्चों को बाकी अनुशासन सिखाने के साथ ही अच्छा मेहमान बनने के गुण भी सिखाएं ताकि कभी किसी दूसरे के घर में रहने पर उन्हें असुविधा और आपको उनके व्यवहार के लिए शर्मिंदा न होना पड़े. बच्चों को अच्छा गेस्ट बनाने के लिए कौन-से रूल्स सिखाने चाहिए? बता रही हैं डॉ. सुषमा श्रीराव.

छुट्टियों में किसी रिश्तेदार के घर जाने पर शायद कई बार आपको अपने बच्चे के व्यवहार की वजह से शर्मिंदा होना पड़ा होगा या फिर गर्मी की छुट्टियों में उसे अकेले नानी/मामी या दादी के पास भेजने पर आपको इस बात का डर सताता होगा कि पता नहीं वो वहां कैसे रहेगा? अपने घर में बच्चे बिल्कुल बिंदास रह सकते हैं, पैरेंट्स उनकी हर अच्छी-बुरी हरक़त को बर्दाश्त कर लेते हैं, मगर दूसरे ऐसा नहीं करेंगे और न ही ऐसा करना बच्चों के ही हित में होगा. यदि आप चाहती हैं कि दूसरों के घर में आपका बच्चा सलीके से पेश आए, तो एक दिन में आप उसे अनुशासन का पाठ घोलकर नहीं पिला सकतीं, धीरे-धीरे और रोज़ाना उसे छोटी-छोटी बातें सिखाने पर ही उसका व्यवहार बदलेगा. अतः अपने बच्चे में अच्छी आदतों का विकास आज से ही शुरू कर दीजिए.

रूल्स फॉलो करना सिखाएं

बच्चों के लिए घर में कुछ नियम बनाएं और उन्हें फॉलो करने की आदत डालें, जैसे- कितने बजे तक सोना है, टीवी देखने का समय, पढ़ने का समय आदि. इस तरह नियम में बंधे रहने पर दूसरों के घर जाने पर बच्चों को दिक्क़त नहीं होगी.
अपने घर में बच्चा अक्सर सोकर देर से उठता है, मगर हो सकता है, वो जहां जा रहा है वहां ऐसा न हो. नानी के घर पर बाकी बच्चे शायद सुबह जल्दी उठ जाते हों, इसलिए अपने बच्चे को भी सुबह जल्दी उठने की आदत डालें.
बच्चे को उठने के बाद अपनी चादर तह करने और बिस्तर ठीक करने की आदत लगाएं. चाहे बच्चा छोटा ही क्यों ना हो. ऐसा करने पर वो जहां जाएगा वहां उसकी तारीफ़ तो होगी ही, साथ ही लोग आपकी परवरिश की भी सराहना करेंगे.
कई बच्चे, ख़ासकर जो सुबह स्कूल जाते हैं वो अक्सर बिना नहाए स्कूल चले जाते हैं. यदि आपका बच्चा भी ऐसा करता है, तो उसकी आदत बदलिए और सुबह ही नहाने की आदत लगाएं. इससे वो तरोताज़ा महसूस करेगा.
आप हाउसवाइफ हों या वर्किंग वुमन, इस बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ता, बच्चे की उम्र व क्षमता के अनुसार उसे थोड़ा-बहुत घर का काम करने के लिए कहें, जैसे एक्वागार्ड से पानी की बोतल भरना, डिनर टेबल लगाना, खाने के बाद अपने बर्तन उठाकर सिंक में डालना आदि. इस तरह के छोटे-छोटे काम बच्चों को आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बनाते हैं.

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सब तरह का खाना खाने की आदत डालें

खाने के मामले में बच्चे बहुत नखरे करते हैं, अतः छोटी उम्र से ही उनकी खाने से संबंधित आदत सुधारने की कोशिश करें.
खाने की टेबल पर बच्चों के नखरे किसी भी मां के लिए नई बात नहीं है. बच्चे अक्सर खाने के मामले में बहुत चूज़ी होते हैं, ये अच्छा नहीं है, वो नहीं खाना, इसका कलर कैसा है? ऐसे तमाम बहाने पैरेंट्स के लिए सिरदर्द से कम नहीं होते. यदि आपने बच्चे को हर तरह की सब्ज़ियां और खाना खाने की आदत डाली है, तो आप बधाई की पात्र हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, तो बच्चे को समझाएं कि बाहर किसी के घर जाने पर यदि उनकी पसंद का खाना या सब्ज़ी न हो, तो वहां ज़िद्द करने की बजाय सामने वाले से शिष्टता से कहें कि वो चीज़ उसकी प्लेट में कम डालें, क्योंकि उसे वो पसंद नहीं है. उसका ऐसा व्यवहार सामने वाले पर भी अच्छा प्रभाव डालेगा.
बच्चे को घर में ही डाइनिंग टेबल मैनर्स सिखाएं और उनका पालन करवाएं. इससे बाहर जाने पर समस्या नहीं होगी.
यदि बच्चा छोटा है और आपने उसे डाइनिंग टेबल मैनर्स नहीं सिखाए हैं, तो कोई बात नहीं. उसे बाहर भेजने से 2 हफ़्ते पहले बेसिक चीज़ें, जैसे- कैसे उठना/बैठना है, क्रॉकरी, चम्मच, नैपकीन का इस्तेमाल करना आदि सिखाएं. बच्चे बहुत जल्दी सीख लेते हैं.
कई बार घर पर मां के सामने खाने में नखरे करने वाले बच्चे दोस्तों/पड़ोसियों के घर पर उनकी देखादेखी में ऐसी चीज़ें भी बड़े चाव से खाने लगते हैं, जो उन्हें पसंद नहीं. अतः छोटी उम्र से ही बच्चों को समाज में घुलना-मिलना सिखाएं.

चीज़ों को जगह पर रखना सिखाएं

चाहे खिलौने हों, कपड़े, क़िताबें या कोई भी सामान बच्चे इस्तेमाल के बाद यहां-वहां फेंक देते हैं. दूसरों के घर जाने पर भी वो ऐसा न करें इसके लिए उन्हें घर पर ही सभी सामान सही जगह पर रखना सिखाएं.
बच्चे अक्सर खेलने के बाद खिलौने वैसे ही इधर-उधर बिखरे हुए छोड़ देते है, जिससे घर बेतरतीब लगता है. अतः उन्हें प्यार से सिखाएं कि खेलने के बाद सारे खिलौने जमा करके अपनी जगह पर वापस रख दें. खिलौनों के अलावा अन्य चीज़ें, जैसे- कपड़े, क़िताबें आदि के बारे में ऐसा ही करें. शुरू से ही ऐसा करने पर बच्चे को अपनी चीज़ें सहेजने की आदत हो जाएगी. बाहर जाने पर भी वो अपनी चीज़ें संभालकर रखेगा. हां, बच्चे को स़िर्फ सिखाना ही काफ़ी नहीं, बल्कि बीच-बीच में उसके काम की प्रशंसा भी करें. इससे उसका मनोबल बढ़ेगा और उसे अच्छा महसूस होगा.
बच्चे को एक बात अवश्य सिखाएं कि वो दूसरों की चीज़ें उनसे पूछे बिना ना ले. यदि वो दोस्तों के घर जाता है तो उनसे पूछे, “क्या मैं तुम्हारे खिलौनों से खेल सकता हूं?” या “क्या मैं यह नॉवेल पढ़ने के लिए ले सकती हूं?” ऐसा करने पर बच्चे की तारीफ़ होगी और लोग आपके दिए संस्कारों के भी कायल हो जाएंगे.

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बच्चों को सिखाएं अच्छी बातें

बच्चे को कुछ बेसिक मैनर्स भी सिखाएं ताकि बाहर जाने पर लोग उसके व्यवहार की प्रशंसा करें.
बच्चे का व्यक्तित्व एक रात में नहीं बदल सकता, इसके लिए आपको रोज़ मेहनत करनी पड़ेगी. पैरेंट्स को ख़ुद भी वैसा ही व्यवहार करना पड़ेगा, जैसा वो बच्चे से चाहते हैं. सबसे पहले बच्चे को ‘थैंक यू’ और ‘प्लीज़’ का महत्व समझाएं.
बड़ों से मिलने पर ‘नमस्ते’ करना सिखाएं. साथ ही अन्य मैनर्स भी सिखाएं.
बच्चे को महसूस होना चाहिए कि अपनी उपस्थिति दर्शाने के लिए, एक अच्छी मुस्कुराहट या ‘हैलो’ कहना ही काफ़ी होता है. यदि घर पर बच्चा इस तरह का व्यवहार करेगा, तो निश्‍चित ही बाहर भी वह ऐसा ही करेगा.

मुश्किल में दें बच्चे का साथ

बच्चे को सब कुछ सिखाने के साथ ही आपको उसे समझना भी होगा. अतः उसकी भावनाओं को समझें और उसे ये एहसास दिलाएं कि आप हमेशा उसके साथ हैं.
आजकल बच्चों के सेक्सुअल एब्यूज़ की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं. अतः तसल्ली कर लें कि जिस जगह आप बच्चे को अकेला भेज रही हैं वो पूरी तरह सुरक्षित हो. बच्चे की क्षमता और स्मार्टनेस पर विश्‍वास रखें कि अगर कोई समस्या आती है तो वह हैंडल कर लेगा. साथ ही उसे ये भी विश्‍वास दिलाएं कि यदि वो हैंडल नहीं कर पाता है तो उसके पैरेंट्स सब संभाल लेंगे. अपनी परेशानी वो आपके साथ बांट सकता है.
आजकल स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत बच्चों को विदेश जाने का भी मौक़ा मिल रहा है, जिससे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. वे आत्मविश्‍वासी और आत्मनिर्भर बनते हैं. यदि आपके बच्चे को ऐसा मौक़ा मिले, तो भेजने में हिचकिचाएं नहीं.