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यूं रीस्टार्ट करें अपनी डिजिटल लाइफ (Restart Your Digital Life Now)

हमारी वर्क लाइफ (Work Life) हो या पर्सनल लाइफ (Personal Life) सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. रोज़ नए-नए ऐप्स हमें बहुत कुछ सिखाने के लिए आतुर रहते हैं. हमारी डिजिटल लाइफ दिन-ब-दिन एडवांस होती जा रही है, तो क्यों न इस साल बची-खुची कसर भी पूरी कर दें और नए साल में अपनी डिजिटल लाइफ (Digital Life) को रीस्टार्ट करके ख़ुद को दें बेस्ट न्यू ईयर गिफ्ट. 

Digital Life

रीस्टार्ट करें डिजिटल लाइफ

अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत सुंदर-सी पंक्ति पढ़ी, जिसमें लिखा था- ‘सेल्फी ने झूठा ही सही, मगर लोगों को मुस्कुराना सिखा दिया.’ पढ़कर लगा भले ही हम डिजिटल लाइफ को कुछ भी कहें, पर आज यह हमारी पहचान बन चुकी है.

–   ऑनलाइन दुनिया में हमारा अपना एक डिजिटल आईडी कार्ड है ये डिजिटल लाइफ. फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, स्नैप चैट जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हमारी डिजिटल लाइफ की झलक देखने को मिलती है.

–     कभी ख़ुशी-कभी ग़म, कभी नखरे, कभी जलन, कभी भावुक होना, तो कभी ग़ुस्सा करना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारी डिजिटल लाइफ कई रंगों से गुज़रती है. भले ही सोशल मीडिया पर बहुत कुछ बनावटी होता है, पर हमारी असल ज़िंदगी की एक झलक तो सभी को मिल ही जाती है.

चेहरे पर मुस्कान लाती है डिजिटल लाइफ

ज़रा सोचिए आजकल हमारे चेहरे पर मुस्कान कब आती है-

–     जब कोई अपना हमें व्हाट्सऐप पर याद करता है.

–     जब कोई दोस्त फेसबुक की फोटो पर ईमोजी या कमेंट शेयर करता है.

–    कोई रिश्तेदार अपनी बहुत पुरानी फोटो शेयर करता है, जिसमें हम भी हों.

–    कोई आपके स्टेटस की तारीफ़ करता है.

–     कोई वीडियो कॉल करके कुछ स्पेशल शेयर करता है.

हमारी डिजिटल लाइफ ने हमें एक नया जहां दे दिया है, जहां लोग अपनी लाइफ को उस नज़रिए से सबके सामने रखते हैं, जैसा वो दिखना चाहते हैं. अपनी हसरतों को सबके सामने रखने का प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया ने ही तो दिया है. इस डिजिटल लाइफ को नए साल में यूं रीस्टार्ट करें.

अपलोड करें फ्रेशनेस

–     एक और नया साल अपने साथ कई नए मौ़के लेकर आया है, तो इस बार इन्हें अपने हाथ से न जाने दें. फेसबुक पर अपने बचपन या स्कूल के दिनों के पुराने दोस्तों को ढूंढ़ें. नए साल में पुराने दोस्तों का साथ आपकी डिजिटल लाइफ में नई फ्रेशनेस भर देगा.

–    अब तक आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बहुत कम शेयर करते थे, जैसे- महीने में एक बार प्रोफाइल पिक्चर चेंज करना, सालों तक एक ही कवर लगाए रखना आदि, शुरुआत यहीं से करें.

–    बीच-बीच में कभी कुछ स्टेटस डाल दें. कभी कोई बात, कभी कोई फोटो हमें बहुत अच्छी लगती है. उसे दूसरों के साथ शेयर करेंगे, तो उसके रिएक्शन हमें अलग ही ख़ुशी देते हैं.

–     नई-नई कम्यूनिटीज़ से जुड़ें, ताकि आपको कुछ नया जानने को मिले.

–     अपनी हॉबी से जुड़े पेजेज़ को लाइक और फॉलो करें, ताकि हर दिन आप अपनी हॉबी से जुड़े रहें.

–    अगर आपको लगता है कि कई सालों से आपका एक ही पासवर्ड है, जो दूसरों को भी पता है, तो नए साल में उसे भी नया कर दें. यह आपकी डिजिटल सेफ्टी के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

डिजिटल कचरा साफ़ करें

–     फेसबुक के ऐसे दोस्तों को ब्लॉक कर दें, जिनकी पोस्ट आपको अच्छा फील नहीं कराती.

–     थोड़ा समय निकालकर अपनी फ्रेंड्स लिस्ट देखें और ग़ैरज़रूरी दोस्तों को लिस्ट से छांट दें. थोड़ा डिजिटल कचरा आपकी लाइफ से साफ़ हो जाएगा.

–    ऐसे कुछ लोग होते हैं, जिन्हें हम कॉमन फ्रेंड के ज़रिए जानते हैं और वो अक्सर अपनी फोटो डालकर भी 20 लोगों को टैग कर देते हैं. ऐसे लोगों से दूरी ही अच्छी.

–     व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर न जाने कैसे-कैसे फोटोज़ और वीडियोज़ आते रहते हैं, इसलिए ऐप में जाकर ऑटो डाउनलोड बंद कर दें, ताकि उन्हें बैठकर डिलीट न करना पड़े.

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Digital Life
अपडेट करें स्टाइल और ट्रेंड

–     इस साल अपनी डिजिटल लाइफ को थोड़ा अलग बनाएं. पुराने और बोरिंग स्टाइल को कहें बाय-बाय.

–   डिजिटल लाइफ के प्रोफाइल से लेकर अपने पर्सनल प्रोफाइल तक में कुछ नया करें.

–     नया साल आपके लिए एक नया मौक़ा लेकर आया है, लीक से हटकर कुछ अलग करने के लिए. रोज़मर्रा के अपने बोरिंग रूटीन को बदलने के लिए.

–     नए साल में नए-नए गैजेट्स और स्मार्टफोन्स भी आपको लुभाएंगे, तो अपने स्मार्टफोन को अपडेट करने का समय भी आ गया है.

–     जो कुछ भी करें, यह याद रखें कि आपको अपनी लाइफ को बेहतरीन बनाना है.

रीचार्ज करें पर्सनल लाइफ

हमारी डिजिटल लाइफ सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं है. हमारी पर्सनल और वर्क लाइफ में भी यह काफ़ी मायने रखती है.

–     इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे यह पता हो कि वो ईश्‍वर से कितने सालों का रीचार्ज करवा के आया है, पर इतना यक़ीन है कि यह अनलिमिटेड नहीं है. तो हर पल ख़ुश रहें और अपनों को भी ख़ुश रखें, क्योंकि ख़ुशियां ही आपकी ज़िंदगी को रीचार्ज करती हैं.

–    हेल्थ और फिटनेस सबसे ज़रूरी है, इसलिए एक अच्छा-सा फिटनेस ऐप डाउनलोड करें. योग व एक्सरसाइज़ न स़िर्फ आपकी सेहत को रीचार्ज करेंगे, बल्कि आपकी डिजिटल लाइफ भी अपडेट हो जाएगी.

–     लाइफ को रीचार्ज करने का बेस्ट तरीक़ा है, ऐसे लोगों के साथ रहें, जो आपसे प्यार करते हैं और इसके लिए व्हाट्सऐप से बेहतर क्या हो सकता है.

–    व्हाट्सऐप की मदद से आप अपनों से 24 घंटे जुड़े रहते हैं. दिल में जो आया शेयर कर दिया, आपके अपनों के लिए इससे अच्छा क्या होगा कि आप उनसे 24ु7 जुड़े रहेंगे.

–    हर रोज़ कुछ नया सीखने की कोशिश करें. आप चाहें, तो कुछ ऐप्स डाउनलोड करें और उनके नोटिफिकेशन आपको हर रोज़ कुछ न कुछ नया सिखाएंगे. यूट्यूब और पिनट्रेस्ट पर भी आपको बहुत कुछ रोज़ाना सीखने को मिलेगा.

–     गेम्स आपकी क्रिएटिविटी और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाते हैं. इसलिए नए साल में कुछ ऐसे डिजिटल और आउटडोर गेम्स को अपनी लाइफ में शामिल करें, जो डीस्ट्रेस करने के साथ-साथ आपके माइंड को शार्प भी बनाएंगे.

–     डायटिंग कर रहे हैं, तो ऐसा ऐप डाउनलोड करें, जो आपको बता सके कि आपने कितनी कैलोरीज़ खाई. इससे आप सचेत हो जाएंगे.

–    पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो बुक्स के बहुत से ऐप्स ऑनलाइन मौजूद हैं. बस, उन्हें डाउनलोड करें और अपनी मनपसंद कहानियों व उपन्यास में खो जाएं.

–     कोई बिरला ही होगा, जिसे म्यूज़िक का शौक़ न हो. नए साल में अपने मनपसंद गानों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो कोई म्यूज़िक ऐप डाउनलोड करें.

अपग्रेड करें वर्क लाइफ

–     बिज़नेस प्लान बनाना हो या लेटेस्ट प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के लिए भी आइडियाज़ की ज़रूरत हो, डिजिटल वर्ल्ड में ये चीज़ें चुटकी बजाते हो जाती हैं.

–     ऑफिस के काम को मैनेज करने के लिए आपका स्मार्टफोन आपकी काफ़ी मदद कर सकता है. दरअसल, आप अपनी फील्ड से संबंधित ज़रूरी ऐप्स डाउनलोड करके भी अपनी वर्क लाइफ को अपग्रेड कर सकते हैं.

– संतारा सिंह

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सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं ये गैजेट्स (These Gadgets Can Be Harmful To Your Health)

हाल ही हुए एक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि औसतन एक वयस्क 24 घंटे की अवधि में से 8 घंटे 21 मिनट की नींद लेने की तुलना में डिजिटल वर्ल्ड/सोशल मीडिया पर उतना ही व़क्त (यानी 8 घंटे 21 मिनट) व्यस्त रहता है. दूसरे शब्दों में कहें तो अगर हम 16-17 घंटे जागते हैं, तो उसका आधा व़क्त तो हम डिजिटल प्लेफार्म पर ही घूमते रहते हैं. ऐसा करके हम न केवल गैेजेट्स (Gadgets) तक सिमट कर रह गए हैं, बल्कि अनेक बीमारियों (Diseases) को न्योता दे रहे हैं. आइए जाने कैसे?

 

Harmful Gadgets

लैपटॉप/कंप्यूटर

घंटों लैपटॉप/कंप्यूटर पर बैठकर काम करने से सिरदर्द, कमर-गर्दन-कंधों में दर्द होेने लगता है. इतना ही नहीं, यदि आपके बैठने का पोश्‍चर और डेस्क डिज़ाइनिंग भी सही नहीं है, तो भविष्य में जोड़ों व मांसपेशियों संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके साथ ही लैपटॉप/कंप्यूटर से आंखों पर बुरा असर पड़ता है और कार्पल टर्नल सिंड्रोम का ख़तरा भी बढ़ जाता है, जिससे हाथों की संवेदनशीलता कम होती है और कलाइयों पर दर्द की शिकायत रहती है.

कैसे बचें?

– कंप्यूटर/लैपटॉप पर काम करते हुए हर एक-डेढ़ घंटे के बाद ब्रेक लें.
– हर 1 घंटे के बाद 2-3 मिनट के लिए आंखों को आराम दें.
– ऑफिस वर्क के लिए बड़ी स्क्रीनवाले लैपटॉप का इस्तेमाल करें. इससे पोश्‍चर पर अधिक दबाव नहीं पड़ता.
– लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के लेवल पर होनी चाहिए, ताकि स्क्रीन को देखने के लिए गर्दन को घुमाना या मोड़ना न पड़े.
– कीबोर्ड को सही लेवल पर रखें, जिससे
कोहनी को आराम मिले.
– माउस यूज़ करते समय स़िर्फ कलाई का नहीं, पूरे हाथ का इस्तेमाल करें.
– स्पीड में टाइप करने की बजाय हल्के व धीरे से करें.
– डेस्क पर बैठे-बैठे स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.
– कंप्युटर पर काम करते समय विशेष रूप से डिज़ाइन की गई कुर्सी का इस्तेमाल करें, जिससे बैठते व़क्त स्पाइन को स्पोर्ट मिले.
– काम के दौरान 10 मिनट का ब्रेक लेकर वॉक करें.
– घर पर लैपटॉप/कंप्यूटर पर काम करने का समय निर्धारित करें.

मोबाइल

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों द्वारा किए गए शोधों से अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि मोबाइल से निकलनेवाली रेडिशएन से किसी को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या (कैंसर आदि) हुई हो, लेकिन मोबाइल एडिक्ट होने के कारण नींद पूरी न होना, एकाग्रता में कमी, सिरदर्द, गर्दन व कंधों में दर्द, आंखों पर दबाव, धंधलापन, ड्राई आइज़, रेडनेस, इरिटेशन, ब्रेन एक्टिविटी में बाधाएं और सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि जैसी समस्याएं ज़रूर बढ़ गई है.

कैसे बचें?

– मोबाइल सिलेक्ट करते समय ऐसे मॉडल का चुनाव करें, जिसका स्पेसिफिक ऑबज़र्वेशन रेट (एसएआर) कम हो.
– बात करते समय मोबाइल को कान से
सटाकर रखने की बजाय थोड़ी दूरी पर रखें.
– लेटकर बात करते समय मोबाइल को छाती या पेट के ऊपर न रखें.
– मोबाइल पर बात करने के लिए हैंड्स-फ्री डिवाइस (ईयरफोन) का इस्तेमाल करें.
– जहां तक संभव हो मोबाइल की बजाय लैंडलाइन का प्रयोग करें.
– कोशिश करें कि मोबाइल पर 15 मिनट से ज़्यादा समय तक बात न करें.
– सेलफोन पर बहुत देर तक बात करने की बजाय टैक्स्ट मैसेज करें.
– 1 घंटे तक लगातार मैसेज/चैटिंग करने से भी उंगलियों के टिप पर दर्द होने लगता है. इसलिए बेवजह मैसेज/चैटिंग करने से बचें.
– छोटे बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल न दें.
– सड़क पर चलते समय और ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात न करें. यह छोटी-सी भूल आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

 

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टेलीविजन

हाल ही में ‘हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में किए गए शोध से यह साबित हुआ है कि बहुत अधिक टेलिविजन देखने से शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती है, जिससे अनहेल्दी फूड हैबिट, मोटापा, दिल से जुड़ी बीमारियां और टाइप2 डायबिटीज़ के होने का ख़तरा 20% तक बढ़ जाता है.

कैसे बचें?

– टीवी देखने की बजाय कोई हॉबी क्लास जाएं.
– वर्कआउट के लिए जिम, जॉगिंग, ऐरोबिक्स, स्विमिंग, टेनिन जाएं.
– टीवी देखते समय मंचिंग से बचें.
– डिनर टाइम को फैमिली टाइम बनाएं यानी डिनर के समय टीवी बंद रखें.
– यदि आपके पास पर्याप्त खाली समय है, तो कोई पार्ट-टाइम बिज़नेस या काम शुरू करें.
– बच्चों को टीवी की बजाय फिज़िकल एक्टिव़िटीज़ में हिस्सा लेने के प्रोत्साहित करें.
– टीवी देखने का समय निर्धारित करें, जिससे आपकी टीवी देखने की बुरी आदत धीरे-धीरे कम हो जाए.
– टीवी देखने की बजाय परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं, जैसे- कैरम बोर्ड, चैस आदि गेम खेलें.
– टीवी की बजाय अपना फेवरेट म्यूज़िक सुनें.

वीडियो गेम

बहुत देर तक वीडियो गेम्स खेलने से मांसपेशियों में दर्द, मोटापा, विटामिन डी की कमी और नींद में बाधा उत्पन्न होती है. ‘द पीडियाट्रिक्स इंटरनेशनल जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, घंटों तक वीडियो गेम्स खेलने से कंधों की मांसपेशियों में जकड़न बढ़ जाती है. इसके अलावा अनेक वीडियो गेम्स का प्रेजेटेंशन इतना आकर्षक होता है कि बच्चों में गेम जीतने का तनाव, उत्तेजना और मानसिक तनाव हावी होने लगता है.

कैसे बचें?

– वीडियो गेम्स खेलते समय बच्चों पर नज़र रखें कि वह किस तरह के गेम खेल रहे हैं.
– उम्र के अनुसार गेम का चुनाव करें.
– गेम खेलते समय जब वह तनाव या निराशा महसूस करें, तो गेम बंद कर दें.
– उन्हें उत्तेजित व आक्रामक गेम्स खेलने से रोकें.
– 1-2 घंटे तक गेम खेलने की बजाय उनका समय निर्धारित करें.
– उन्हें वीडियो गेम में व्यस्त रखने की बजाय फिजिकल एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें.
– सोने से पहले वीडियो गेम न खेलने दें. उन्हें समझाएं कि उत्तेजक व आक्रमक गेम खेलने से नींद में बाधा उत्पन्न होती है.
– बच्चों को वीडियो गेम खेलने दें, लेकिन इसकी लत न लगने दें. पैरेंट्स ख़ासतौर से इस बात का ध्यान दें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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होममेकर्स के लिए बेस्ट इंटीरियर डिज़ाइन वेबसाइट्स (Best Interior Design Websites For Homemakers)

 

Interior Design Websites

होममेकर्स के लिए बेस्ट इंटीरियर डिज़ाइन वेबसाइट्स (Best Interior Design Websites For Homemakers)

अपने घर (Home) को देना चाहते हैं एक ख़ास लुक, पर समझ नहीं पा रहे हैं कि आपके घर के लिए बेस्ट (Best) क्या होगा? तो फ़िक्र न करें. इंटरनेट (Internet) का ख़ज़ाना है ना. जी हां, बस एक क्लिक और अनगिनत इंटीरियर डिज़ाइन वेबसाइट्स (Interior Design Websites) आपके सामने. तो देर किस बात कि आज ही क्लिक करें इन वेबसाइट्स पर और बन जाएं इंटीरियर डिज़ाइनर. इंटरनेट के झरोखे से सजाएं अपना आशियाना यहां हम आपको कुछ वेबसाइट्स के बारे में बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप सजा सकते हैं अपने सपनों का घर.

– डिज़ायर टू इंस्पायर डॉट नेट

इस वेबसाइट पर बहुत ही अच्छे-अच्छे इंटीरियर डिज़ाइन आइडियाज़ हैं, जिनसे आप अपना घर बहुत ही ख़ूबसूरती से सजा सकते हैं. अपने नाम के मुताबिक इस वेबसाइट पर इतने बेहतरीन आइडियाज़ हैं कि आप कुछ नया करने के लिए तुरंत इंस्पायर
हो जाएंगे.

– हाउज़ डॉट कॉम

अपने घर को ख़ूबसूरत एक्सेसरीज़ से सजाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह वेबसाइट बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकती है. इस वेबसाइट पर लाखों की संख्या में इंटीरियर आइडियाज़ हैं. यहां आप कंटेम्पररी, एक्लेक्टिक, ट्रेडिशनल, मॉडर्न, एशियन, मेडिटेरेनियन, ट्रॉपिकल आदि स्टाइल के बेडरूम डिज़ाइन्स हैं. बच्चों के कमरे के ही 19 हज़ार से ज़्यादा फोटोग्राफ्स हैं. इसके अलावा एक्सटीरियर और एक्सेसरीज़ के हज़ारों आइडियाज़ हैं.

– अपार्टमेंट थेरेपी डॉट कॉम

इस वेबसाइट पर इंटीरियर, रेनोवेशन, डेकोर, टेक्नोलॉजी, गार्डेनिंग, शॉपिंग से जुड़ी बहुत-सी बेहतरीन जानकारियां दी गई हैं. इसमें बच्चों के लिए एक अलग से सेक्शन दिया गया है. इसके अलावा इस वेबसाइट की यह भी एक ख़ासियत है कि इसमें होम टूर्स सेक्शन है, जहां आप अपने घर की फोटोग्राफ्स अपलोड कर सकते हैं, ताकि दुनिया आपके हुनर को जान सके.

– इंडियन होम डिज़ाइन डॉट कॉम

इस वेबसाइट पर इंटीरियर से लेकर एक्सटीरियर तक की तमाम जानकारियां उपलब्ध हैं. अगर आप अपने घर को रेनोवेट करके नया लुक देना चाहते हैं, तो इसमें ख़ास इंडियन्स की पसंद को ध्यान में रखते हुए ट्रेडिशनल घरों के डिज़ाइन्स भी दिए गए हैं. इसके अलावा लेटेस्ट ट्रेंड के इंटीरियर के साथ ट्रेडिशनल इंटीरियर की झलक भी है. रेनोवेशन टिप्स, वुडेन आर्किटेक्चर के साथ-साथ होम डिज़ाइन बुक्स की एक लंबी लिस्ट है.

– फ्रेश होम डॉट कॉम

यह एक बेहतरीन वेबसाइट है, जहां आपको इंटीरियर डेकोरेशन के लेटेस्ट व क्रिएटिव आइडियाज़ मिलेंगे. इस वेबसाइट पर कई आइडियाज़ हैं, जिनकी मदद से आप अपने घर को और भी ख़ूबसूरत बना सकते हैं. साथ ही होमकेयर टिप्स से जुड़े कई बेहतरीन लेख भी हैं. फ्रेश होम डॉट कॉम के फोटोग्राफ्स को देखकर आप भी अपने घर को बनाएं फ्रेश होम.

– इंटीरियर्स इंडियन इटी ज़ोन डॉट कॉम

रेसिडेंशियल, कमर्शियल, विक्टोरियन, कंटेम्प्ररी और मॉडर्न इंटीरियर डिज़ाइन्स से सजे इस वेबसाइट से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं. इसके अलावा फर्नीचर्स व फ्लोरिंग की एक ख़ास रेंज भी शामिल है. यहां पर इंटीरियर से जुड़े कई लेख भी हैं, जिन्हें पढ़कर आप इंटीरियर डिज़ाइनर्स के सिक्रेट्स जान सकते हैं.

– सुनीता सिंह

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15 बेस्ट ईमेल एटिकेट रूल्स (15 Best Email Etiquette Rules)

चैट (Chat) या ईमेल (Email) लिखते हुए अधिकतर लोग कई तरह की ग़लतियां (Mistakes) करते हैं. हम यहां पर ऐसे ही कुछ पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स के बारे में आपको विस्तार से बता रहे, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने इंप्रेशन को ख़राब होने से बचा सकते हैं.

Email Etiquette Rules

जनरल ईमेल एटीकेट्स टिप्स

1. इंट्रोडक्शन बहुत ज़रूरी है

ईमेल में सबसे महत्वपूर्ण होता है इंट्रोडक्शन यानी परिचय. यदि आप किसी अंजान व्यक्ति को ईमेल लिख रहे हैं, तो सबसे पहले उसे अपना परिचय दें, फिर किस संदर्भ या विषय पर आप उससे बात करना चाहते हैं, इस बारे में उसे कम शब्दों में विस्तार से बताएं. इंट्रोडक्शन तब और भी ज़रूरी होता है, जब अंजान लोगों से किसी सर्वे, प्रश्‍नोत्तरी या क्विज़ के बारे में पूछ रहे होते हैं.

2. स्पेलिंग चेक करना न भूलें

ईमेल चाहे पर्सनल हो या ऑफिशियल, भेजने से पहले पूरे मेल की स्पेलिंग ज़रूर चेक करें. ख़ासकर जब आप मोबाइल से ईमेल कर रहे हों तो, क्योंकि टचस्क्रीन मोबाइल होने के कारण कई बार ग़लत टाइप हो जाता है. यदि आप बार-बार होनेवाली ग़लत स्पेलिंग से बचना चाहते हैं, तो ‘ऑटोकरेक्ट’ का ऑप्शन यूज़ करें. इस ऑप्शन की मदद से आप स्पेलिंग के ग़लत होने से बच सकते हैं.

3. इसी तरह से ईमेल लिखते समय:

– सही व्याकरण का प्रयोग करें.

– विराम चिह्नों का ज़्यादा इस्तेमाल करने से बचें.

– ईमेल कैपिटल लेटर्स में न लिखें.

– लिखते समय अशिष्ट भाषा का प्रयोग न करें.

– मुख्य बातों को पॉइंट में लिखें.

उपरोक्त बताई गई बातों का ध्यान ज़रूर रखें, विशेष रूप से तब, जब आप ऑफिशियल मेल लिख रहे हों.

4. ‘रिप्लाई-ऑल’ फीचर का प्रयोग सावधानी से करें

जब आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल का जवाब देना हो, तभी इस फीचर का प्रयोग करें. इस फीचर का प्रयोग सावधानी से करें, क्योंकि ‘रिप्लाई ऑल’ करते समय कई बार मेल ऐसे व्यक्तियों को भी पहुंच जाता है, जिन्हें उस मेल का रिप्लाई नहीं करना होता है. इसलिए इस फीचर का प्रयोग सावधानी के साथ करें.

5. जनरल मेल्स के लिए ‘बीसीसी’ यूज़ करें

यदि आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल भेजना है, तो ईमेल बॉक्स में दिए गए ‘बीसीसी’ ऑप्शन का इस्तेमाल करें.

6. ज़िप फाइल बनाएं

ईमेल से 8-10 हैवी अटैचमेंट एक साथ न भेजें. हैवी और बहुत सारी अटैचमेंट भेजने से प्राप्तकर्ता का इनबॉक्स अवरुद्ध हो सकता है. इसलिए हैवी अटैचमेंट्स को ‘फाइल-हॉस्टिंग सर्विस’ से भेजें. इसके अलावा हैवी फाइलों की ‘ज़िप फाइल’ या ‘रिसाइज़ पिक्चर’ बनाकर भी भेज सकते हैं. यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल कर रहे हैं, जो अपने मोबाइल से ईमेल एक्सेस कर रहा है, तो उसे ज़्यादा अटैचमेंट एक साथ न भेजें.

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Email Etiquette

एब्रिविएशन (संक्षिप्त शब्दों) का

7. इस्तेमाल कम करें: ईमेल लिखते समय संक्षिप्त शब्दों (एब्रिविएशन्स) का प्रयोग कम से कम करें. एब्रिविएशन्स, जैसे- एफवाईआई (ऋधख), पीएफए (झऋअ), पीडीएफ (झऊऋ) और एफवाईआर (ऋधठ), सीयू (उण), एनपी (छझ), डब्ल्यूयू (थण) आदि लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि ईमेल प्राप्तकर्ता (रिसीवर) इन एब्रिविएशन्स के अर्थ समझता भी हो. इसलिए मेल लिखते समय केवल उन्हीं एब्रिविएशन्स का प्रयोग करें, जो प्रचलित हों.

8. फॉन्ट को फॉरमेट करें: ईमेल लिखते समय कैपिटल लेटर्स और बोल्ड फॉन्ट का इस्तेमाल न करें. बोल्ड फॉन्ट और कैपिटल लेटर्स में लिखने से ईमेल प्राप्तकर्ता पर आपका ख़राब इंप्रेशन पड़ सकता है. इसी तरह से टेक्स्ट को बीच-बीच में अंडरलाइन करना, फैंसी फॉन्ट या मल्टीपल फॉन्ट का प्रयोग करने से बचें.

9. ईमेल के टाइप को पहचानें: कोई भी ईमेल पढ़ते समय सावधानीपूर्वक पढ़ें यानी मेल की टोन को पहचानें. हो सकता है वह ऑफिशियल मेल हो या फिर वह पर्सनल मेल भी हो सकता है, जो अशिष्ट व कड़े शब्दों में लिखा गया हो. इसलिए जब भी आप परेशान हों या जब आपका मूड ख़राब हो, तो मेल न लिखें. इन मेल को ‘ड्राफ्ट’ में सेव कर लें या दोबारा पढ़कर शांत दिमाग़ से और अच्छी तरह सोच-समझकर रिप्लाई करें.

10. ‘फॉरवर्ड’ करने से पहले: कोई भी मेल अन्य व्यक्तियों को फॉरवर्ड करने से पहले उसका पहले का पिछला मैटर और मेल-एड्रेस आदि डिलीट (क्लीन-अप) कर लें. इससे प्राप्तकर्ता को आपके द्वारा भेजा गया मेल पढ़ने में आसानी होगी और उसके समय की बचत भी.

11. ‘सेंड’ करने से पहले: पूरा मेल लिखने के बाद ‘टू’ वाला फील्ड चेक करें. कहीं सेंडर की ईमेल-आईडी ग़लत टाइप तो नहीं किया है. कई बार सेंडर के पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल-आईडी 2-3 होने के कारण इस तरह की समस्या हो सकती है.

ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स

12. सब्जेक्ट लाइन: प्राप्तकर्ता के इनबॉक्स में सबसे पहले सब्जेक्ट लाइन ही दिखाई देती है. इस सब्जेक्ट लाइन को पढ़कर प्राप्तकर्ता को ईमेल की महत्ता समझ में आ जाती है कि वह मेल कितना महत्वपूर्ण है और किस संदर्भ में लिखा गया है. इसलिए सब्जेक्ट ज़रूर लिखें.

13. सोल्यूशन: ईमेल में मुद्दे की बात लिखने से पहले प्राप्तकर्ता के नाम के आगे ‘डियर’ या पीछे ‘जी’ कहकर संबोधित करें. अगर आप प्राप्तकर्ता का फर्स्ट नेम नहीं जानते हैं, तो उन्हें उनके सरनेम या टाइटल से संबोधित करें.

14. कंसाइज़ बॉडी: इसमें सीधे कम शब्दों में मुद्दे की बात लिखें. यदि आप एक से अधिक विषयों पर अपनी बात कहना चाहते हैं, तो सबसे पहले सबसे महत्वपूर्ण बात लिखें, फिर पॉइंट वाइज़ अन्य बातों का ज़िक्र करें.

15. साइन ऑफ: यदि आप फॉर्मल मेल लिख रहे हैं, तो मेल के अंत में ‘यॉअर्स सिन्सियर्ली’, ‘यॉअर्स फेदफुली’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. यदि ऑफिशियल मेल या अन्य स्थितियों में मेल लिख रहे हैं, तो अंत में ‘बेस्ट रिगार्ड्स’ और ‘काइन्ड रिगार्ड्स’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. इससे प्राप्तकर्ता पर आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा. आख़िर में सबसे अहम् बात- पूरा मेल लिखने और भेजने के बाद ‘साइन ऑफ’ करके बंद करें.

– नागेंद्र शर्मा 

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हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whatsapp Everyone Must Know)

 

Hidden Features Of Whatsapp

हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whattsapp Everyone Must Know)

माना कि आप व्हाट्सऐप (Whatsapp) रोज़ाना या फिर यूं कहें कि हर व़क्त इस्तेमाल करते हैं, पर इसके ऐसे कई फीचर्स (Features) हैं, जिनसे आप अब तक अंजान होंगे. क्या हैं वो स्मार्ट फीचर्स (Smart Features) आइए, आपको बताते हैं.

– ग्रुप चैट के बिना भेजें ग्रुप मैसेजेस

व्हाट्सऐप पर आजकल हर किसी के फैमिली से लेकर, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, बिल्डिंग और न जाने कितने ग्रुप्स होते हैं. पर कभी-कभी ऐसा होता है कि ग्रुप के कुछ लोगों से बात करनी है, पर आप नहीं चाहते कि सबको वो बातें पता चलें तो आपको करना होगा ग्रुप मैसेज. इसके लिए मेनू में जाकर न्यू ब्रॉडकास्ट पर क्लिक करें और जिन-जिन लोगों से बात करनी है, उन्हें ऐड करें. बातचीत करके आप तुरंत उसे डिलीट भी कर सकते हैं, ताकि किसी को पता न चले कि आप लोगों के बीच क्या बातचीत हुई.

– फोटो-वीडियो में टाइम और लोकेशन ऐड करें

आईओएस यूज़र्स की तरह ही एंड्रॉयड यूज़र्स भी अपने फोटो और वीडियो में टाइम और लोकेशन ऐड कर सकते हैं. चैट में जाकर फोटो गैलेरी से कोई फोटो भेजने के लिए सिलेक्ट करें. भेजने से पहले देखें, फोटो के ऊपर आपको स्माइली का सिंबल दिखेगा. उसे क्लिक करें. वहां आपको टाइम और लोकेशन दिखेगा, उस पर क्लिक करें. फोटो पर अपने मनमुताबिक उसे सेट करें.

– ज़रूरी मैसेजेस को सेव करें

व्हाट्सऐप अब स़िर्फ चैटिंग ऐप न रहकर हमारे रोज़मर्रा के कामों में काफ़ी उपयोगी साबित हो रहा है. ऐसे में कई बार कुछ ज़रूरी डॉक्यूमेंट, कोई बात या कोई फोटो जो हमें लगता है कि बाद में इसकी ज़रूरत पड़ेगी, तो उसे सेव करके रखना चाहिए. उस फोटो या बात को आप स्टार्ड करके भी सेव कर सकते हैं. जिस बात को स्टार मार्क करना है, उसे लॉन्ग प्रेस करें, सिलेक्ट होने पर ऊपर आपको स्टार का सिंबल दिखेगा, उस पर क्लिक करते ही आपका मैटर स्टार मार्क होकर सेव हो जाएगा. उसे देखने के लिए व्हाट्सऐप ओपन करें. राइट साइड के तीन डॉट्स को क्लिक करें आपको स्टार्ड मैसेजेस का ऑप्शन दिखेगा. उसे ओपन करके आप अपने सारे स्टार्ड मैसेजेस देख सकते हैं.

– ऑटो डाउनलोड बंद करके सेव करें डाटा

व्हाट्सऐप पर जितने फोटो, वीडियो या ऑडियो आते हैं, व्हाट्सऐप उन्हें ऑटोमैटिकली डाउनलोड करके आपकी गैलरी में सेव कर देता है, जिससे न स़िर्फ आपका डाटा बेवजह ख़र्च होता है, बल्कि गैलरी में भी ग़ैरज़रूरी चीज़ें भर जाती हैं. इससे छुटकारा पाने का बेस्ट तरीक़ा है, ऑटो डाउनलोड बंद करना. ऐसा करने के लिए व्हाट्सऐप में जाकर राइट साइड के तीन डॉट को ओपन करें. सेटिंग्स पर जाएं, वहां आपको डाटा एंड स्टोरेज यूसेज दिखेगा, उस पर क्लिक करें. वहां आपको मीडिया ऑटो डानलोड का सेक्शन दिखेगा, जिसमें व्हेन यूज़िंग मोबाइल डाटा, व्हेन केनक्टेड ऑन वाई-फाई और व्हेन रोमिंग के ऑप्शन दिखेंगे. अगर आप चाहते हैं कि मोबाइल डाटा से कुछ भी ऑटोमैटिकली सेव न हो, तो उसमें जाकर सारे ऑप्शन्स को अनटिक कर दें. जब तक आप ख़ुद डाउनलोड नहीं करेंगे, तब तक कोई फोटो या वीडियो डाउनलोड नहीं होगा.

– अपनी लोकेशन शेयर करें

आप कहीं पर हैं और कोई आपसे मिलना चाहता है, लेकिन वो सही रास्ता समझ नहीं पा रहा है, तो सबसे बेस्ट ऑप्शन है लोकेशन शेयर करना. अपने व्हाट्सऐप में जाकर उस व्यक्ति के चैट में जाएं. पेपर क्लिप आइकॉन पर क्लिक करेंगे, तो आपको कई ऑप्शन्स दिखेंगे, उसी में एक है लोकेशन. उसे क्लिक करेंगे, तो शेयर लाइव लोकेशन के अलावा सेंड योर करंट लोकेशन भी है. उस पर क्लिक करते ही आपका लोकेशन सामनेवाले को मिल जाएगा, फिर वो आसानी से आप तक पहुंच सकता है.

– अनीता सिंह

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9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

जिम में कड़ी एक्सरसाइज़ और कठोर डायट प्लान फॉलो करने के बाद भी यदि आपका वज़न कम (Weight Loss) नहीं हो रहा है, तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है… ज़रूरत है तो बस, अपने स्मार्टफोन में वेट लॉस ऐप्स (Weight Loss Apps) डाउनलोड करने की. ये ऐप्स न केवल आपके वज़न और डायट पर पैनी नज़र रखेंगे, बल्कि आपके द्वारा ली जानेवाली कैलोरीज़ की जानकारी भी देंगे.

Best Weight Loss Apps

Lose It! (लूज़ इट!)

इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वेट लॉस के दौरान आपकी डायट पर कड़ी नज़र रखना है. लूज़ इट! की मदद से आप अपनी उम्र, वज़न और फिटनेस से जुड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद उसमें आपको अपना मौजूदा वज़न टाइप करना होगा. आप कितना वज़न कम करना चाहते हैं, वो लिखना होगा. इसके बाद यह ऐप आपको बताएगा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपको प्रतिदिन कितनी कैलोरीज़ चाहिए. इस ऐप की विशेषता ये है कि इसमें उपलब्ध कराए गए फूड प्रोडक्ट के बारकोड के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि उसमें कोैन-कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं और उस फूड में कितनी कैलोरीज़ हैं.

Weight Watchers (वेट वॉचर्स)

इस ऐप में आपको वेट लॉस करने और उसके बाद उसे मेंटेन करने के अनगिनत विकल्प आसानी से मिल जाएंगे. वास्तव में यह ऐप आपके द्वारा सेवन की जानेवाली शक्कर, कैलोरीज़ और सैचुरेटेड फैट्स बेस्ड खाद्य पदार्थों को अधिक से अधिक ‘पॉइंट्स’ देता है, ताकि आप कैलोरी का सेवन कम से कम करें. वेट वॉचर्स की विशेषता ये है कि यह ऐप व्यक्तिगत रूप से आपके वज़न कम करने के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आपके डायट चार्ट में शामिल खाद्य पदार्थों को पॉइंट्स देता है, ताकि आप ऐसे फूड्स न खाएं, जिनसे आपका वज़न बढ़े. इस ऐप में भी आप बारकोड की मदद से फूड में शामिल पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

FatSecret (फैटसीक्रेट)

यह ऐप आपके स्मार्टफोन पर न केवल आपके द्वारा ली जानेवाली दैनिक कैलोरीज़ के सेवन को दिखाता है, बल्कि औसतन मासिक कैलोरीज़ के सेवन को भी दिखाता है. फैटसीक्रेट में आप अपने फूड चार्ट को लॉग इन करने के बाद अपने वज़न को मॉनिटर कर सकते हैं. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप चैट फीचर का इस्तेमाल करके अपने फैटसीक्रेट कम्युनिटी के बाक़ी सदस्यों से चैट कर सकते हैं. इस ऐप में हेल्दी रेसिपीज़ का बहुत बड़ा संग्रह है, जिसे आप सेव कर सकते हैं. इसके अलावा इस ऐप में आपको वेट लॉस से संबंधित टिप्स, लेख व जानकारियां भी मिलेंगी.

HealthyOut (हेल्दीआउट)

अगर आप अपने बढ़े हुए वज़न से परेशान हैं और वेट लॉस करना चाहते हैं, तो हेल्दीआउट आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा. इस ऐप को डाउनलोड करके आप अपने वेट लॉस के लक्ष्य को आसान बना सकते हैं और अपने लिए बेस्ट फूड का चुनाव कर सकते हैं. यह ऐप उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो डायट संबंधी फूड के बारे में जानना चाहते हैं या फिर जिन्हें किसी फूड विशेष से एलर्जी होती है.

Fooducate (फूड्यूकेट)

इस वेट लॉस ऐप के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि आप जो भोजन खा रहे हैं, वह आपके उपयुक्त है या नहीं. उस भोजन में कितनी कैलोरीज़ और फैट्स हैं, जो आपके वज़न को कम नहीं होने देते हैं. इस ऐप के द्वारा यह जानकारी प्राप्त करने के बाद आप उन फूड्स से दूर रहेंगे, जिनसे आपका वज़न बढ़ सकता है. इसके लिए आपको उस फूड प्रोडक्ट का बारकोड डालना होगा. तुरंत आपके स्मार्टफोन में कैलोरीज़ से जुड़ी सारी जानकारियां आ जाएंगी.

SPARKPEOPLE (स्पार्कपीपल)

इस ऐप में यूज़र को डेली मील, एक्सरसाइज़ और वेट  संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए ट्रेकिंग टूल के द्वारा लॉग इन करना होता है. इस ऐप का न्यूट्रीशनल डाटाबेस बहुत बड़ा है, जिसमें तीन लाख से भी अधिक खाद्य पदार्थों की लिस्ट है. इस ऐप में बारकोड स्कैनर भी है, जिससे आप फूड की न्यूट्रीशनल वैल्यू को ट्रैक कर सकते हैं. इस ऐप को साइन इन करते समय आपको एक्सरसाइज़ के डेमो फोटोज़ और उनके विवरण भी मिलेंगे, ताकि आप यह जान सकें कि एक्सरसाइज़ के दौरान आपको कौन-कौन-सी तकनीक इस्तेमाल करनी है.

MyFitnessPal (मायफिटनेसपाल)

इस ऐप को एक बार अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड करने के बाद मायफिटनेसपाल आपके वज़न, लंबाई, डायट और वेट लॉस के लक्ष्यों का पूरा रिकॉर्ड रखता है. इसके अलावा समय-समय पर अधिक कैलोरीज़वाले फूड न खाने का अलर्ट भी देता है. डायट प्लान के साथ-साथ यह ऐप एक्सरसाइज़ करने के लिए भी प्रेरित करता है. वेट लॉस के दौरान यदि आपका मन घर का बना खाना खाने का नहीं है, तो मायफिटनेसपाल ऐप की मदद से आप अपने एरिया के आसपास के रेस्टोरेंट्स में मिलनेवाले फूड के पोेषक तत्वों के बारे में जान सकते हैं.

ideal weight (आइडियल वेट)

यह ऐप आपके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कैलकुलेट करता है और इस बात की जानकारी देता है कि आपका आइडियल वज़न कितना होना चाहिए. आइडियल वज़न को जानने के बाद आप अपनी इच्छानुसार एक्सरसाइज़ और डायट प्लान कर सकते हैं. इस ऐप में आप अपनी लंबाई, उम्र और अन्य फैक्टर्स भी ऐड कर सकते हैं.

MYFITNESS (मायफिटनेस)

इस ऐप में आपको न केवल नए-नए फिटनेस टिप्स मिलेंगे, बल्कि वेट लॉस करने के लिए डायट प्लान और खानपान संबंधी बातों की जानकारी और लेख  भी मिलेंगे. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप स्लाइड शो और वीडियो के द्वारा भी दिलचस्प अंदाज़ में जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

– देवांश शर्मा

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पासवर्ड सिलेक्ट करते समय न करें ये ग़लतियां (Avoid These Password Selection Mistakes)

 

पासवर्ड यानी कुछ नंबर, कुछ अक्षर और सांकेतिक चिह्नों का मिला-जुला कॉम्बिनेशन. पासवर्ड बनाते समय अक्सर आप यही सोचते होंगे कि आपके द्वारा बनाए गए पासवर्ड को कोई हैक नहीं कर सकता, लेकिन ऐसा हो सकता है. कई बार पासवर्ड बनाते समय हम छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा हैकर्स उठाते हैं. अगर आप हैकर्स से सावधान रहना चाहते हैं, तो पासवर्ड बनाते समय इन
ग़लतियों से बचें.

Password Selection Mistakes

कैसा हो पासवर्ड?

–     अगर आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो इंटरनेट बैंकिंग का य़ूजर आईडी और पासवर्ड गोपनीय रखें.

–     समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें. लंबे समय तक एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते रहने से उसके क्रैक होने की संभावना अधिक होती है.

–     एक अकाउंट के लिए केवल एक पासवर्ड का प्रयोग करें.

पासवर्ड बनाते समय रखें कुछ बातों  का ख़ास ख़्याल

–     अपनी व्यक्तिगत जानकारी- नाम, मोबाइल नंबर, एडे्रस आदि कभी किसी के साथ शेयर न करें.

–     मकान नंबर, जन्मदिन, शादी की सालगिरह, मोबाइल नंबर, पत्नी व बच्चों के नाम के आधार पर पासवर्ड बनाने की ग़लती न करें. आपका जान-पहचानवाला कोई भी व्यक्ति इन सूचनाओं के आधार पर आपका अकाउंट हैक कर सकता है.

–     अपने फेवरेट स्टार्स और प्लेस के नाम पर  भी पासवर्ड न बनाएं.

–     उपरोक्त व्यक्तिगत जानकारी के अलावा अपनी मां का सरनेम भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें. इसका कारण है कि यूज़र अपने डेबिट कार्ड का पासवर्ड रिसेट करता है, तो सिक्युरिटी क्वेश्‍चन में सबसे पहले आपकी मां का सरनेम या पेट नेम पूछा जाता है.

–     बैंक अपने ग्राहकों को समय-समय पर मैसेज भेजकर सचेत करते रहते हैं कि अगर कोई आपसे व्यक्तिगत जानकारी मांगे, तो उनसे शेयर करने की बजाय तुरंत बैंक को सूचित करें.

–     एक ही पासवर्ड को अलग-अलग अकांउट के लिए यूज़ करना ज़ोख़िम भरा हो सकता है. यदि हैकर्स आपके एक अकाउंट का पासवर्ड जान लेता है, तो उसे अन्य खातों को साइन इन करना आसान हो जाएगा.

–     एक बार साइन इन करने के बाद हैकर्स आपके ईमेल और एड्रेस से आपके बैंक अकाउंट को भी एक्सेस कर सकता है.

–     ईज़ी पासवर्ड बेशक याद रखने में आसान होते हैं, लेकिन इन्हें बनाने से अकाउंट हैैक होने का ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि हैकर्स सरल पासवर्ड को आसानी से क्रैक कर लेते हैं.

–     पासवर्ड बनाते समय ऐसी निजी जानकारी शेयर न करें, जिसे अन्य लोग आपके बारे में जानते हों, जैसे- आपका निक नेम, आपके घर की गली व रोड का नाम व नंबर, मोबाइल नंबर, आपके पेट एनिमल का नाम आदि.

–     पासवर्ड बनाते समय आसान शब्दों (जैसे- रिीीुेीव) और वाक्यों, कीबोर्ड पैटर्न (जैसे- िुंशीींू या रिंूुीु) और अनुक्रम (जैसे- रललव या 1234) का इस्तेमाल करने से बचें.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए वाक्यों व मुहावरों का प्रयोग करें. वाक्य या मुहावरे ऐसे होने चाहिए, जिसे दूसरे लोग नहीं जानते हों.

–     अपने पर्सनल और प्रोफेशनल अकाउंट के पासवर्ड अलग-अलग बनाएं. यदि आपका प्रोफेशनल अकाउंट हैक हो गया या फिर प्रोफेशनल स्तर पर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन भी लीक हो जाएगा.

स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए क्या करें?

–    अगर आप कुछ वर्णों को जोड़कर पासवर्ड बना रहे हैं, तो उस पासवर्ड में 8 या उससे अधिक वर्ण होने चाहिए.

–     अक्षर, अंक और प्रतीक चिह्नों का संयोजन करके पासवर्ड बनाएं.

–    पासवर्ड बनाते समय अक्षरों को अंकों के साथ बदलें.

–     पासवर्ड हमेशा लंबे बनाएं. लंबे यानी जिनमें कम से कम 10 अक्षरों, अंकों व प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल किया गया हो.

–     लंबे पासवर्ड बनाने का एक फ़ायदा यह भी है कि ये पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होते हैं, जिन्हें हैक करना मुश्किल होता है.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड को याद रखना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए आप पासवर्ड मैनेजर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं.

–     यह ऐप आपका पासवर्ड सेव कर लेता है, जिसे सिंगल पासवर्ड या ओटीपी से एक्सेस किया जा सकता है.

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Password Selection Mistakes
कैसे रखें अपना पासवर्ड सुरक्षित?

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के बाद उसे पर्स, वॉलेट या डेस्क आदि जगहों पर लिखकर रखने की ग़लती न करें. कोई भी इस पासवर्ड को चोरी करके आपके अकाउंट को साइन इन कर सकता है.

–     अपने महत्वपूर्ण अकाउंट, जैसे- ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड बनाएं. कुछ वेबसाइट्स ओटीपी का ऑप्शन देती हैं, जिससे आपकी सिक्योरिटी और मज़बूत हो जाती है.

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल जाते हैं, तो पासवर्ड मैनेजर ऐप्स की सहायता से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं.

–     हमेशा पासवर्ड मैनेजर ऐप्स डाउनलोड करने से पहले इनका रिव्यू चेक कर लें.

कब ज़रूरत है पासवर्ड रिसेट करने की?

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल गए हैं या आपका पासवर्ड लॉक हो गया है, तो अपने अकाउंट को दोबारा ओपन करने के लिए आपको अपना पासवर्ड रिसेट करना पड़ेगा.

–     यदि आपको ऐसा महसूस हो कि कोई अन्य व्यक्ति भी आपके अकाउंट को एक्सेस कर रहा है, तो तुरंत अपना पासवर्ड रिसेट करें.

–     यदि आप अपना अकाउंट किसी कारण से साइन इन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको पासवर्ड रिसेट करने की आवश्यकता है.

– नागेश चमोली

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6 बेस्ट ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप्स (6 Best Grocery Shopping Apps)

6 बेस्ट ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप्स (6 Best Grocery Shopping Apps)

ग्रॉसरी शॉपिंग करने के लिए अब आपको ग्रॉसरी स्टोर में जाकर न तो घंटों समय बर्बाद करने की ज़रूरत है और न ही लंबी-लंबी लाइनों में लगकर बिल बनवाने की. आपकी इन सभी समस्याओं का हल है ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप्स. इन ऐप्स की मदद से आप घर बैठे-बैठे ऑर्डर कर सकते हैं. आइए जानें कैसे?

Shopping Apps

1. ZopNow (ज़ॉपनाउ)

यह भारत के मोस्ट पॉप्युलर ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप्स में से एक है. ख़रीददारी के शौक़ीन लोगों के लिए यह फ्री ऐप बहुत ही फ़ायदेमंद है. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आपको फैशन, ट्रैवलिंगमूवी टिकट बुकिंग, फूड, मोबाइल रिचार्ज आदि अनगिनत श्रेणियां एक ही शॉपिंग साइट में मिल जाएंगी. इसके अलावा

इस ऐप को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि उपभोक्ता आसानी से किसी भी कैटेगरी में जाकर अपना ऑर्डर कर सकता है.

ऑर्डर करने के 3 घंटे के भीतर उपभोक्ता को ऑर्डर मिल जाता है.

उपभोक्ता कोई भी मिनिमम साइज़ और क़ीमतवाला ऑर्डर कर सकता है.

यह ऐप अपने उपभोक्ताओं को डिस्कांउट ऑफर भी देता है. अगर कोई नया कस्टमर 1 हज़ार रुपए से अधिक का ऑर्डर करता है, तो ज़ॉपनाउ उसे 100 रुपए का डिस्कांउट देता है.

इस ऐप में उपभोक्ताओं को किराना और खाद्य पदार्थ ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स, ज्वेलरी शॉपिंग साइट्स, फ़र्नीचर और होम डेकोर साइट्स, होम सर्विस साइट्स, लिंगरीज़ शॉपिंग, मूवीट्रैवलिंग टिकट बुकिंग साइट, मोबाइल रिचार्ज साइट्स के अतिरिक्तऔर भी बहुत सारी साइट्स मिलेंगी, जिनकी ऑनलाइन शॉपिंग वे घर बैठे कर सकते हैं.

2. AaramShop (आरामशॉप)

इस ऐप में आप पॉप्युलर व टॉप ग्रॉसरी ब्रान्ड्स के हज़ारों प्रोडक्ट्स को सर्च कर सकते हैं. उसके बाद अपने एरिया के खुदरा विक्रेता को सिलेक्ट करके ऑर्डर कंफर्म कर सकते हैं. ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के दौरान उपभोक्ता अपने फेवरेट ग्रॉसरी स्टोर में मिलनेवाले सामान की डिटेल्स, आकर्षक डिस्काउंट और ऑफर्स को भी इस ऐप में चेक कर सकते हैं.

3. Godrej Nature’s Basket (गोदरेज नेचर्स बास्केट)

इस ऐप में केवल इंडियन फूड से संबंधित ग्रॉसरी ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल कुज़िन्स से संबंधित ग्रॉसरी आसानी से मिल जाती है, जैसेथाई फूड में डाले जानेवाले ख़ास मसाले, विभिन्न प्रकार के चीज़, विनेगर, ऑयल्स और फ्रेश ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स आदि. इस ऐप की विशेषता है कि इसमें ऐड किए जानेवाले नएनए प्रोडक्ट्स को

एक्सपर्ट्स की विशेष टीम द्वारा समयसमय पर अपडेट किया जाता है, जो पूरे विश्‍व में नएनए लेटेस्ट फूड आइटम्स की तलाश करते रहते हैं. इन लेटेस्ट फूड आइटम्स की बिक्री बढ़ाने के लिए विशेष टीम के सदस्य उपभोक्ताओं को ख़ास अवसर पर प्रोडक्ट के साथसाथ ‘स्पेशल गिफ्ट हैंपर’, जैसेटी एंड कॉफी गिफ्ट हैंपर, आर्गेनिक एंड हेल्थ गिफ्ट हैंपर, गेट वेल सून गिफ्ट हैंपर और वर्ल्ड कुज़िन गिफ्ट हैंपर आदि देते हैं.

इस ऐप की एक यूएसपी यह है कि इसमें वेट मैनेजमेंट फूड, वेलनेस और इम्यूनिटी बूस्टर फूड, हेल्दी हार्ट फूड और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए खाद्य पदार्थों की बहुतसी श्रेणियां हैं, जिनमें आप अपनी इच्छानुसार खाद्य पदार्थों का चुनाव कर सकते हैं.

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Shopping Apps

4. PepperTap (पेपरटैप)

अगर आप हमेशा ऑनडिमांड ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप चाहते हैं, तो यह आपके लिए आइडियल ऑप्शन है. इस यूज़र फ्रेंडली ऐप में जाकर अपना ऑर्डर कर सकते हैं और ऑर्डर देने के 2 घंटे के भीतर होम डिलीवरी हो जाती है. इस ऐप के ज़रिए आप अच्छी क्वालिटी के फल, सब्ज़ियां, डेयरी प्रोडक्ट्स, ग्रॉसरी आइटम्स, हाउसहोल्ड आइटम्स, किचन से संबंधित आइटम्स, बेबी केयर प्रोडक्ट्स मंगा सकते हैं. अगर आप किसी सामान की क्वालिटी से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप उसे रिटर्न भी कर सकते हैं. बदले में आपसे बिना कोई सवाल पूछे, आपकी रक़म आपको वापस कर दी जाती है.

5. BigBasket (बिगबास्केट)

इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद ग्रॉसरी लिस्ट का ऑर्डर करें. ऑर्डर देने के 3 घंटे के अंदर सामान आपके घर डिलीवर हो जाएगा. होम डिलीवरी कराने के लिए कम से कम आपको एक हज़ार रुपए का ऑर्डर करना होगा. इनका डिलीवरी शेड्यूल फ्लेक्सिबल है. डिलीवरी टाइम स्लॉट में सुबह 7 बजे से लेकर रात 10 बजे तक 4 अलगअलग टाइम स्लॉट होते हैं. आप अपनी इच्छानुसार टाइम स्लॉट चुन सकते हैं. इस ऐप के ज़रिए खाद्य पदार्थों की डिलीवरी उसी दिन चुनने का विकल्प भी है या फिर अगले दिन भी डिलीवरी मंगा सकते हैं. इस ऐप के द्वारा आप ताज़े फल, सब्ज़ियां (कटी व पैक्ड सब्ज़ियां भी), ड्रिंक एंड बेवरेजेस और मीट आदि सहित 14 हज़ार से भी अधिक प्रोडक्ट्स ख़रीद सकते हैं. इसके अतिरिक्त डिलीवरी के समय आप ‘सोडेक्सो फूड कूपन’ का यूज़ करके भुगतान कर सकते हैं.

6. LocalBanya (लोकलबनिया)

इस फ्री मोबाइल ऐप के द्वारा यदि आप फ्री होम डिलीवरी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 500 रुपए तक ग्रॉसरी ऑर्डर करना होगा. अगर आपका ऑर्डर 500 रुपए से कम यानी 450 रुपए तक का है, तो आपको 50 रुपए डिलीवरी चार्ज देना होगा. इस ऐप में आप 14 हज़ार से भी अधिक ग्रॉसरी और हाउसहोल्ड प्रोडक्ट्स की ख़रीददारी कर सकते हैं. बस, आपको फल, सब्ज़ियां, किराने का सामान, इंटरनेशनल कुज़िन आदि विभिन्न श्रेणियों में जाकर ब्राउज़ करना होगा और फिर लोकलबनिया ऐप के द्वारा फाइनल ऑर्डर करना होगा. अन्य ग्रॉसरी शॉपिंग ऐप्स की तरह ही इनका डिलीवरी शेड्यूल बहुत फ्लेक्सिबल है. डिलीवरी टाइम स्लॉट में जाकर आप सुबह 7 बजे से लेकर रात 11.30 बजे तक के किसी भी डिलीवरी टाइम स्लॉट को चुन सकते हैं.

इस ऐप की विशेषता है कि यदि आप डिलीवरी के समय घर पर नहीं हैं, तो आपके ग्रॉसरी ऑर्डर को रिशेड्यूल किया जाता है, ताकि आपका ऑर्डर आप तक पहुंचाया जा सके. इसके अलावा अगर आप ऑर्डर डिस्पैच होने के बाद टाइम स्लॉट में बदलाव करना चाहते हैं, तो बदले में आपको 30 रुपए अलग से चार्ज देना होगा. उपरोक्त ऐप्स की तरह इसमें भी आप बिल का भुगतान कैश ऑन डिलीवरी, क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड व अन्य ऑनलाइन पेमेंट के द्वारा कर सकते हैं. बिगबास्केट की तरह इसमें भी आप ‘सोडेक्सो मील पास’ यूज़ करके भुगतान कर सकते हैं.

पूनम नागेंद्र

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मोबाइल से पेमेंट करते समय अपनाएं ये 10 सेफ्टी टिप्स (10 Must Follow Tips For Safe Mobile Payments)

Tips For Safe Mobile Payments
टेक्नोलॉजी के दौर में स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ बातचीत या वेब ब्राउज़िंग तक ही सीमित नहीं रह गया है. पेमेंट व मनी ट्रांसफर करने के लिए पहले आपको घंटों लाइनों में लगना पड़ता था, लेकिन अब आप उन्हीं कामों को मिनटों में स्मार्टफोन की सहायता से निपटा सकते हैं मोबाइल पेमेंट ऐप के ज़रिए, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल द्वारा भुगतान करते समय आपको सतर्क रहने की ज़रूरत है, आइए जानें कैसे?

 

 Tips For Safe Mobile Payments

1. सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग न करें

अगर आप सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करके अपने मोबाइल द्वारा के्रडिट कार्ड की सूचनाएं, जैसे- बैंक अकाउंट नंबर, पिन नंबर आदि मेन्युली टाइप कर रहे हैं या फिर कार्ड स्वाइप करके दर्ज़ कर रहे हैं, तो आपका डाटा लीक होने की संभावना हो सकती है, क्योंकि आपको यह पता नहीं होता है कि आप जिस वाई-फाई रूट से भुगतान कर रहे हैं, वो सेफ डाटा सोर्स है या नहीं. इसलिए सार्वजनिक जगहों पर उपलब्ध वाई-फाई का उपयोग मोबाइल द्वारा भुगतान करने के लिए न करें.
इसके अलावा सार्वजनिक वाई-फाई द्वारा मोबाइल पेमेंट करने से हैकर्स के लिए आपका पासवर्ड/पिन हैक करना आसान हो जाएगा.

2. पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होना चाहिए: अगर आप अपने मोबाइल का इस्तेमाल वित्तीय

लेन-देन करने के लिए करते हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आपका पासवर्ड स्ट्रॉन्ग हो, जिसे कोई आसानी से हैक न कर सके. पासवर्ड बनाते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारियां, जैसे- जन्म तिथि, फ्लैट नंबर, मोबाइल नंबर, गली/रोड का नाम, बच्चों के नाम के अलावा ऐसा कोई भी नंबर, जो आपसे जुड़ा हो- उसे पासवर्ड में न डालें. इन जानकारियों को हासिल करना हैकर्स के लिए बहुत आसान होता है.
सुरक्षा की दृष्टि से आजकल स्मार्टफोन में अनेक सुविधाएं दी जाती हैं, जैसे- चेहरे की पहचान, फिंगर प्रिंट अनलॉक आदि.
इन सुविधाओं के द्वारा भी आप अपने पासवर्ड/पिन को सुरक्षित रख सकते हैं.

3. अनऑथोराइज़ ऐप डाउनलोड करने से बचें

पेमेंट और मनी ट्रांसफर करने के लिए कोई भी अनऑथोराइज़ ऐप डाउनलोड न करें. अगर आपने कोई अनऑथोराइज़ या फर्ज़ी ऐप
डाउनलोड किया है, तो आपके वन टाइम पासवर्ड का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है. इसलिए किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्‍वसनीयता की जांच अच्छी तरह कर लें.

4. केवल विश्‍वसनीय ऐप ही डाउनलोड करें

अगर आप किसी विश्‍वसनीय ऐप में अपनी भुगतान संबंधी जानकारी शेयर करते हैं, तो अपने मोबाइल पर डाउनलोड किए गए अन्य ऐप के बारे में सावधान रहें, क्योंकि इनमें कुछ स्पाइवेयर हो सकते हैं, जो भुगतान संबंधी जानकारी को कैप्चर करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और हैकर्स इनका फ़ायदा उठा सकते हैं.

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Tips For Safe Mobile Payments

5. सुरक्षित पेमेंट ऐप यूज़ करें

अगर आप अपने स्मार्टफोन में भुगतान संबंधी जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो स्वयं के मोबाइल में मौजूद सॉफ्टवेयर (एप्पल पे या एंड्रॉइड पे) का इस्तेमाल करें. मोबाइल में मौजूद सॉफ्टवेयर में विश्‍वसनीयता की गारंटी होती है. इसके अलावा प्रतिष्ठित और आधिकारिक मोबाइल भुगतान ऐप कंपनियां आपके क्रेडिट कार्ड विवरण को संग्रहित करके नहीं रखती हैं.

6. केवल एक पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करें

भुगतान करने के लिए अपने मोबाइल पर अनेक पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की ग़लती न करें. ध्यान रखें कि आप जो भी पेमेंट ऐप डाउनलोड करते हैं, वे सुरक्षित व विश्‍वसनीय होना चाहिए. बहुत सारे पेमेंट ऐप का इस्तेमाल एक साथ करने से डाटा लीक होने की संभावना हो सकती है.

7. ऑफिशियल ऐप स्टोर से डाउनलोड करें

अगर आप अपने मोबाइल में पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की सोच रहे हैं, तो ऑफिशियल ऐप स्टोर, जैसे- गूगल प्ले स्टोर, एप्पल प्ले स्टोर और विंडोज़ स्टोर में जाकर ही डाउनलोड करें.

8. अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो

अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो तुरंत पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज़ करें और बैंक को भी सूचित करके अपनी ई बैंकिंग पर रोक लगवाएं, ताकि मोबाइल द्वारा किए जानेवाले भुगतान को रोका
जा सके.

9. मोबाइल पेमेंट करते समय क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें

क्रेडिट कार्ड की अपेक्षा, डेबिट कार्ड में धोखा होने की संभावना अधिक होती है. इसलिए मोबाइल द्वारा भुगतान करते समय के्रडिट कार्ड का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए.

10. अपने क्रेडिट कार्ड अकाउंट पर नज़र रखें

हमेशा अपने क्रेडिट कार्ड अकाउंट के लेन-देन को चेक करते रहें. चाहे आप मोबाइल द्वारा भुगतान कर रहे हों या नहीं. अगर आपको लगता है कि मोबाइल पेमेंट ऐप द्वारा किए लेन-देन के साथ कोई छेड़खानी की गई है, तो तुरंत अपना पासवर्ड बदल दें.

– देवांश शर्मा

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जीपीएस का सही इस्तेमाल किसी लोकेशन को यूं करें ट्रैक (Track Your Locations With Help Of GPS)

Track Your Locations With Help Of GPS

 

Track Your Locations With Help Of GPS

आजकल हर स्मार्ट फोन में जीपीएस नाम का ऐप होता है, लेकिन हम में से अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता है कि जीपीएस क्या होता है? और आप रोज़मर्रा की जिंदगी में इसका यूज़ किस तरह से कर सकते हैं? तो कोई बात नहीं. हम आपको बताते हैं कि जीपीएस का सही इस्तेमाल आप कैसे और कहां पर कर सकते हैं?

क्या है जीपीएस?

जीपीएस (ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम) एक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है, जिसका प्रयोग वाहन में ड्राइवर को रास्ते की जानकारी और उसकी ट्रैकिंग के लिए किया जाता है. इसके अतिरिक्त कोई अप्रत्याशित दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मदद के लिए पहुंचने पर भी जीपीएस काफ़ी मददगार साबित होता है. इसकी मदद से आप अपने वाहन पर नज़र रख सकते हैं. इसके द्वारा सही रास्ते का पता चलता है, यहां तक कि जीपीएस ड्राइवर को दाएं और बाएं मुड़ने के निर्देश भी देता है.

जीपीएस कैसे काम करता है?

जीपीएस डिवाइस एक सिम के ज़रिए सैटेलाइट से जुड़ा रहता है. इसके माध्यम से वह संदेशों का आदान-प्रदान करता है. आज सभी स्मार्टफोन जीपीएस से लैस हैं. जीपीएस को वाहन में हैंडल के पास या फिर किसी अन्य जगह पर सेट किया जा सकता है. स्मार्टफोन में मौजूद जीपीएस टेक्नीक से यूज़र अपने लोकेशन का पता लगा सकता है. जीपीएस डिवाइस सैटेलाइट से प्राप्त सिग्नल द्वारा उस जगह को मैप में दर्शाता है, जिसके द्वारा ड्राइवर अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकता है.

कैसे करें जीपीएस का इस्तेमाल?

–    जीपीएस को प्रयोग करने के लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में जीपीएस के ऑप्शन को ऑन करें

–    आप जिस स्थान पर जाना चाहते हैं, उस जगह का नाम नीचे सर्च बॉक्स में टाइप करें.

–    अगर आप अपनी लोकेशन की स्थिति जानना चाहते हैं, मोबाइल की स्क्रीन पर (मैप में) ग्रीन कलर का पॉइंट दिखाई देगा. मैप में जहां पर वह ग्रीन कलर बना होगा, वही पॉइंट आपकी लोकेशन होगी.

–    जीपीएस में अकांउट में अन्य सेटिंग ऑप्शन्स भी होते हैं, जैसे- आप अपनी पसंदीदा जगहों (एक ही शहर के होटल, रेस्टॉरेंट, पार्क, सिनेमा हॉल और मॉल्स आदि) सेट कर सकते हैं, ताकि शहर के किसी कोने में क्यों न हों, बस एक क्लिक करते ही आपको पता चल जाएगा कि आप उस लोकेशन से कितनी दूरी पर हैं.

Track Your Locations With Help Of GPS

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जीपीएस से कर सकते हैं आप ये 7 काम

फाइंड माईफोन: अधिकतर स्मार्टफोन में ये फीचर मौजूद होता है. इस ऐप के ज़रिए आप अपने फोन का लोकेशन ट्रैक कर सकते

हैं. अगर आपका फोन चोरी हो जाए या फिर कहीं छूट जाए, तो ऐसे में आप अपनी गूगल आईडी से लॉग इन करके अपने फोन को ट्रैक कर सकते हैं.

कार सेफ्टी: अगर आप अपनी कार को ट्रैक करना चाहते हैं, तो मैपमाईइंडिया की सहायता से कर सकते हैं.

की एंड वॉलेट ट्रैकिंग: अगर आप अपनी चाभियां और पर्स कहीं पर रखकर भूल जाते हैं, तो इस ट्रैकर की मदद से उन्हें बड़ी आसानी से ढूंढ़ सकते हैं.

फाइंड वेहिकल्स: आप अपने टू व्हीलर में ‘लेट्सट्रैक बाइक सीरीज़’ का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी सहायता से आप अपने बाइक की स्पीड मॉनिटर कर सकते हैं, पार्किंग नोटिफिकेशन रिसीव कर सकते हैं, फ्यूल-माइलेज आदि की डिटेल्स को ट्रैक कर सकते हैं. इसमें आप 24 घंटे की हिस्ट्री भी देख सकते हैं.

फॉर योर पेट्स: आप अपने पेट्स, जैसे- डॉग, कैट आदि को ट्रैक करना चाहते हैं, तो इसके लिए जीपीएस पेट ट्रैकर का यूज़ कर सकते हैं. इस ट्रैकर को आप अपने पेट के गले पर बांध दें, जिससे आप कभी उसका रियल टाइम लोकेशन और डिस्टेंस अपने मोबाइल पर देख सकते हैं.

फॉर योर किड्स: अगर आप अपने बच्चों पर या किसी अन्य व्यक्ति पर नज़र रखना चाहते हैं, तो ट्रैकआईडी या लेट्सट्रैक की मदद ले सकते हैं. इसे आप बच्चे/व्यक्ति के कपड़ों, बेल्ट आदि पर लगाकर उसकी लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं.

फाइंड शेयर योर लोकेशन: अपनी लोकेशन को किसी दूसरे व्यक्तिके साथ शेयर करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप गूगल मैप पर पहले अपनी लोकेशन को ट्रेस करें, फिर उसे पिन करके आप अपने ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं.

जीपीएस ऐप को 5 श्रेणी में बांटा जाता है

–   लोकेशन: स्थिति का निर्धारण करने के लिए.

–    नेविगेशन: एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए.

–    ट्रैकिंग के लिए: किसी वस्तु, पेट्स या व्यक्ति की निगरानी के लिए.

–    मैपिंग: दुनिया में कहीं भी जाने के लिए मैप बनाने के लिए.

–    टाइमिंग: सही समय के बारे में.

किन क्षेत्रों में जीपीएस का यूज़ किया जाता है?

एस्ट्रोनॉमी, ऑटोमेटेड वेहिकल्स, वेहिकल्स के नेविगेशन, मोबाइल फोन, ट्रैकिंग, जीपीएस एयर क्राफ्ट ट्रैकिंग, डिज़ास्टर रिलीफ, इमर्जेंसी रिलीफ, रोबोटिक्स और टेक्टोनिक्स आदि.

– नागेश चमोली

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डिप्रेशन दूर भगाएंगे ये Top 10 ऐप्स (Top 10 Apps To Combat Depression)

Top Apps To Combat Depression

ज़िंदगी में हर कोई कभी न कभी डिप्रेशन से गुज़रता ही है. यह स्थिति कभी-कभार हो, तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि यह ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो दिल का सुकून, ख़ुशी, उमंग-उत्साह सब कुछ छीन लेता है. मेट्रो सिटीज़ में तो यह जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाया जाए. ऐसे कई ऐप्स हैं, जो इसमें आपकी मदद करते हैं.

Top Apps To Combat Depression

हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं.

– डिप्रेशन बायो-सायको-सोशल प्रॉब्लम है यानी यह खानदानी भी हो सकता है, जो अवसादग्रस्त व्यक्ति व पारिवारिक-सामाजिक तनाव के कारण उत्पन्न होता है.

– शोध के अनुसार तीन में से दो वयस्क अपने जीवन में एक बार अवसाद से ग्रस्त ज़रूर होते हैं.

– 4% बच्चे भी टेंशन के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं.

– डिलीवरी व मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाएं हार्मोनल बदलाव के कारण डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं.

– डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन) के अनुसार, भारत में भी क़रीब 36% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.

– हमारे देश में टीनएज भी डिप्रेशन के शिकार हैं. देश की जनसंख्या 131.11 करोड़ है, जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के टीनएजर्स की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें, तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त हैं.

बेहतरीन ऐप्स जिनसे डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है

1. डिप्रेशन सीबीटी सेल्फ हेल्प गाइड (Depression CBT Self-Help Guide)

– यह ऐप डिप्रेशन के मरीज़ को बीमारी से उबरने व सही मार्गदर्शन देने में मदद करता है.

– इस ऐप में डिप्रेशन को कंट्रोल करने से जुड़े टिप्स और टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें डिप्रेशन मूड को मॉनिटर करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, क्लीनिकल डिप्रेशन व कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) से जुड़े लेख हैं.

2. स्टार्ट ऐप (Start App)

– कई बार हमें पता ही नहीं होता कि हमें डिप्रेशन की समस्या है.

– इस स्थिति में यह ऐप काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें डिप्रेशन टेस्ट की सुविधा से लेकर हर रोज़ आपके प्रोग्रेस का भी ट्रैक रखा जाता है.

– इसमें डिप्रेशन से जुड़ी मेडिसिन लेने के लिए अलर्ट भी है.

– इसके अलावा यह ऐप आप जो मेडिसिन ले रहे हैं, उसके फ़ायदे व साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बताता है.

– साथ ही इसमें मेडिकल प्रोफेशनल्स व फार्मासिस्ट द्वारा हर रोज़ डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी हैं.

– यह ऐप एंड्रायड व आईओएस यूज़र के लिए उपलब्ध है.

3. स्टॉप, ब्रीद एंड थिंक (Stop, Breathe & Think)

– यह ऐप टेंशन व डिप्रेशन को दूर करने में सहायक है. इसमें सांस किस तरह से लेनी चाहिए, इसके उपाय बताते हैं.

– ध्यान लगाने के लिए मार्गदर्शन भी किया जाता है.

– इस ऐप के ज़रिए आप मेडिटेशन से पहले व बाद में अपनी भावनाओं को भी चेक कर सकते हैं.

– इसे ख़ासतौर पर स्ट्रेस-डिप्रेशन, सेल्फ हीलिंग, सेल्फ मोटिवेशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

– यह आपके मूड के अनुसार मेडिटेशन टिप्स भी बताता है.

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Top Apps To Combat Depression
4. मूड टूल्स (MoodTools)

– यदि आप बहुत तनाव में हैं और लगातार अवसाद से घिर जाते हैं, तो यह मूड टूल्स आपकी काफ़ी मदद कर सकता है.

– इसमें कई रिसर्च सपोर्टेड टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें दिए गए थॉट डायरी टूल में आपके विचारों व सोच के प्रकार के अनुसार आपके मूड को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, के उपाय बताए गए हैं.

– इस ऐप के बिहेवियर एक्टिवेशन थेरेपी में किसी एक्टिविटीज़ से पहले व बाद की स्थिति को जांचा-परखा जाता है.

– साथ ही सेफ्टी प्लान को आत्महत्या सुरक्षा के नज़रिए से विकसित किया गया है.

– इस ऐप के ज़रिए आप डिप्रेशन के शिकार हैं या नहीं, इसके लिए पीएचक्यू 9 टेस्ट में पार्ट भी ले सकते हैं.

5. मेडिटेशन म्यूज़िक (Meditation Music)

– डिप्रेशन के कारण हद से ज़्यादा परेशान हैं, तो इस ऐप का सहारा ले सकते हैं.

– यह आपके मन को सुकून देने के साथ ही आराम भी देता है.

– ऐप में मेडिटेशन से जुड़ी उच्च स्तर के संगीत व दिल को सुकून देनेवाली धुनें भी दी गई हैं.

– इस ऐप से आपको नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद मिलेगी.

– साथ ही मेडिटेशन के लिए अलग-अलग साउंड भी हैं, जैसे- परफेक्ट रेन, सॉफ्ट पियानो, लेक, सनलाइज, हेवन साउंड, नेचर फॉरेस्ट मेलोडीज़ आदि.

इन सब के अलावा और भी कई ऐप हैं, जो डिप्रेशन के इलाज में कारगर हैं

6. पॉज़िटिव थींकिंग (Positive Thinking)- यह एंड्रॉयड ऐप पॉज़िटिव नज़रिया रखने में मदद करता है. ज़रूरत पड़ने पर यह दोस्ताना सलाह भी देता है.

7. डिप्रेशनचेक (Depressioncheck)- यह आईफोन ऐप न केवल आपकी बीमारी का कंप्लीट रिकॉर्ड रखता है, बल्कि डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी बताता है.

8. डिफीट डिप्रेशन (Defeat depression)– इसमें डिप्रेशन से छुटकारा पाने व निपटने के लिए उपयोगी टिप्स व जानकारियां मिल जाएंगी. सोशल मीडिया में फेसबुक पर भी डिप्रेशन, बेचैनी, मेंटल हेल्थ व बीमारी को दूर करने से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है. यहां पर अवसाद के अलावा दिमाग़ से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याओं के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं.

9. यूट्यूब यानी www.youtube.com पर ऐसे कई वीडियोज़ हैं, जिनकी मदद से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है.

10. माय थेरेपी (MyTherapy)- यह डिप्रेशन के लिए बेहतरीन डायरी ऐप है. ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉम्प्लिेमेंट्री मेडिसिन और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में किए गए रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन से लोगों को मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने, उसे जानने-समझने व ज़रूरी इलाज करने में मदद मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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क्या आपने देखे ‘फ्यूचर ऑफ स्मार्टफोन’ आईफोन X के ये बेहतरीन फीचर्स? ( iPhone X- Loaded With Best Smartphone Features)

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अपनी 10वीं सालगिरह पर ऐप्पल कंपनी ने आईफोन X (आईफोन टेन) लॉन्च किया. दुनिया के बेहतरीन फोन्स के स्मार्ट फीचर्स की ख़ूबियों से भरपूर आईफोन टेन किसी का भी दिल जीत सकता है. इसके फीचर्स के बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. ऑल ग्लास डिज़ाइन, नो होम बटन और सुपर रेटिना डिस्प्ले जैसी अनगिनत ख़ूबियों वाले इस फोन की कीमत भारत में 89 हज़ार और 1 लाख, 2 हज़ार है. आइए जानें इसकी अन्य ख़ूबियां-

– ऑल ग्लास डिज़ाइन में सुपर रेटिना 5.8 डिस्प्ले है. यकीनन ग्लास डिज़ाइन सबको आकर्षित करेगा.

– नो होम बटन, जैसे कि सबको उम्मीद थी, इसमें से होम बटन ग़ायब हो गया है. इसकी बजाय इसमें होम बार होगा. यानी नीचे से ऊपर तक पूरे स्क्रीन पर कोई बटन नहीं.

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– फेस आईडी का नया फीचर इसमें शामिल किया गया है. आपके स्मार्टफोन की सुरक्षा और आपकी प्राइवेसी के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके, इसलिए ऐप्पल ने आपके फेस को ही बतौर अनलॉक रखा है यानी आपका फोन स़िर्फ आपके चेहरे को पहचानकर ही अनलॉक होगा.

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– फोन के दोनों कैमरा को रीइंवेंट किया गया है. इसमें ट्रू डेप्थ सेंसिंग फीचर है, जिसके कारण अंधेरे में भी फोन आपका चेहरा पहचान लेगा.

 

– इसमें एनिमेटेड ईमोजी हैं, जिनका नाम ऐनिमोजी रखा गया है. इसमें मौजूद एनिमोजी आपके चेहरे के भावों को पहचानकर उसी तरह व्यवहार करेगा, जैसा आप करना चाहते हैं. यानी अगर आप किसी को सिर हिलाता हुआ एनिमोजी भेजना चाहता हैं, तो मनपसंद एनिमोजी सिलेक्ट करके सिर हिलाएं और भेज दें.

– अब आपकी दुनिया भी होगी वायरलेस. जी हां, इसमें वायरलेस चार्जिंग मौजूद है.

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– यह सिल्वर और स्पेस ग्रे कलर्स में मौजूद है.

– इसका 64 जीबी फोन 89 हज़ार में, जबकि 256 जीबी वर्जन 1 लाख, 2 हज़ार में मिलेगा.

– भारत में यह फोन 3 नवंबर को लॉन्च होगा.

– दिनेश सिंह

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