Tag Archives: technology

गुम होता प्यार… तकनीकी होते एहसास… (This Is How Technology Is Affecting Our Relationships?)

अभी कुछ दशकों पहले तक हाल यह था कि त्योहारों की आहट सुनाई देते ही घर-परिवार, समाज- हर जगह रौनक़ की झालरें लहराने लगती थीं, ख़ुशी, उमंग और ऊर्जा से भरे चेहरों की चमक व उत्साह यहां-वहां बिखर जाता था. क्या करना है, कहां जाना है, किसे क्या उपहार देने हैं और रसोई में से कितने पकवानों की ख़ुुशबू आनी चाहिए- सबकी सूची बनने लगती थी. महीनों पहले से बाज़ार के चक्कर लगने लगते थे और ख़रीददारी का लंबा सिलसिला  चलता था.

Technology and Relationships

समय बदला, हमारी परंपराओं, संस्कृति और सबसे ज़्यादा हमारी सोच पर तकनीक ने घुसपैठ कर ली. हर समय किसी-न-किसी रूप में तकनीक हमारे साथ रहने लगी और फिर वह हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. अब आलम यह है कि त्योहारों का आगमन होता है, तो माहौल में चहल-पहल बेशक दिखाई देती है, पर उसमें से उमंगवाला अंश गायब हो गया है और तनावभरा एक शोर यहां-वहां बिखरा सुनाई देता है. दूसरों से बढ़-चढ़कर दिखावा करने की होड़ ने त्योहारों के महत्व को जैसे कम कर दिया है. त्योहार अब या तो अपना स्टेटस दिखाने के लिए, दूसरों पर रौब जमाने के लिए कि देखो हमने कितना ख़र्च किया है, मनाया जाता है या फिर एक परंपरा निभाने के लिए कि बरसों से ऐसा होता आया है, इसलिए मनाना तो पड़ेगा.

फॉरवर्डेड मैसेजेस का दौर

पहले लोग त्योहारों की शुभकामनाएं अपने मित्र-संबंधियों के घर पर स्वयं जाकर देते थे. बाज़ारवाद के कारण पहले तो इसका स्थान बड़े और महंगे ग्रीटिंग कार्ड्स ने लिया, फिर ई-ग्रीटिंग्स ने उनकी जगह ली. ग्रीटिंग कार्ड या पत्र के माध्यम से अपने हाथ से लिखकर जो बधाई संदेश भेजे जाते थे, उसमें एहसास की ख़ुशबू शामिल होती थी, लेकिन उसकी जगह अब फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजे जाने लगे हैं. ये मैसेज भी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किए हुए होते हैं, जो आगे फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. कई बार तो बिना पढ़े ही ये मैसेजेस फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. उनमें न तो कोई भावनाएं होती हैं, न ही भेजनेवाले की असली अभिव्यक्ति. ये तो इंटरनेट से लिए मैसेज ही होते हैं. इसी से पता लगाया जा सकता है कि तकनीक कितनी हावी हो गई है हम पर, जिसने संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है.

रिश्तों की गढ़ती नई परिभाषाएं

परस्पर प्रेम और सद्भाव, सामाजिक समरसता, सहभागिता, मिल-जुलकर उत्सव मनाने की ख़ुुशी, भेदभावरहित सामाजिक शिष्टाचार आदि अनेक ख़ूबियों के साथ पहले त्योहार हमारे जीवन को जीवंत बनाते थे और नीरसता या एकरसता को दूर कर स्फूर्ति और उत्साह का संचार करते थे, पर आजकल परिवार के टूटते एकलवाद तथा बाज़ारवाद ने त्योहारों के स्वरूप को केवल बदला नहीं, बल्कि विकृत कर दिया है. सचमुच त्योहारों ने संवेदनशील लोगों के दिलों को भारी टीस पहुंचाना शुरू कर दिया है.

सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने जहां हमारी एकाग्रता को भंग किया है, वहीं सामाजिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. फोन कर बधाई देना भी अब जैसे आउटडेटेड हो गया है. बेवजह क्यों किसी को फोन कर डिस्टर्ब किया जाए, इस सोच ने मैसेज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर सामाजिकता की अवधारणा पर ही प्रहार कर दिया है. लोगों का मिलना-जुलना जो त्योहारों के माध्यम से बढ़ जाता था, उस पर विराम लग गया है. ज़ाहिर है जब सोशल मीडिया बात कहने का ज़रिया बन गया है, तो रिश्तों की संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है.

हो गई है सामाजिकता ख़त्म

‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है’, यह वाक्य हमें बचपन से रटाया गया, परंतु तकनीक ने शायद अब हमें असामाजिक बना दिया है. सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व ने मनुष्य की सामाजिकता को ख़त्म कर दिया है. देखा जाए, तो सोशल मीडिया आज की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है. व्हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और न जाने क्या-क्या? स़िर्फ एक टच पर दुनिया के इस हिस्से से उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. देश-दुनिया की दूरियां सिमट गई हैं, लेकिन रिश्तों में दूरियां आ गई हैं.

संवादहीनता और अपनी बात शेयर न करने से आपसी जुड़ाव कम हो गया है और इसका असर त्योहारों पर पड़ा है. माना जाता था कि त्योहारों पर सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते थे. एक-दूसरे से गले मिलकर, मिठाई खिलाकर मन की सारी कड़वाहट ख़त्म हो जाती थी. पर अब किसी के घर जाना समय की बर्बादी लगने लगा है, इसलिए बहुत ज़रूरी है तो ऑनलाइन गिफ़्ट ख़रीद कर भेज दिया जाता है.

यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

Technology and Relationships
रसोई से नहीं उठती ख़ुशबू

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में बाज़ारवाद हावी हो रहा है. इस बनावटी माहौल में भावनाएं गौण हो गई हैं. ऑनलाइन संस्कृति ने अपने हाथों से उपहार को सजाकर, उसे स्नेह के धागे से बांधकर और अपनी प्यार की सौग़ात के रूप में अपने हाथों से देने की परंपरा को पीछे धकेल दिया है. बाज़ार में इतने विकल्प मौजूद हैं कि ख़ुद कुछ करने की क्या ज़रूरत है.

एक समय था कि त्योहारों पर घर में न जाने कितने तरह के पकवान बनाए जाते थे. न जाने कितने नाते-रिश्तेदारों के लिए लड्डू, मठरी, नमकपारे, नमकीन, बर्फी, गुलाब जामुन और न जाने कितने डिब्बे पैक होते थे और यह भी तय किया जाता था कि कौन किसके घर जाएगा.

पर एकल परिवारों ने त्योहारों की रौनक़ को अलग ही दिशा दे दी. महंगाई की वजह से त्योहार फ़िज़ूलख़र्ची के दायरे में आ गए हैं. ऐसे में मिठाइयां या अन्य चीज़ें बनाने का कोई औचित्य दिखाई नहीं पड़ता. पहले के दौर में संयुक्त परिवार हुआ करते थे और घर की सारी महिलाएं मिलकर पकवान घर पर ही बना लिया करती थीं. लेकिन अब न लोगों के पास इन सबके लिए व़क्त है और न ही आज की हेल्थ कॉन्शियस पीढ़ी को वह पारंपरिक मिठाइयां पसंद ही आती हैं.

कोई घर पर आ जाता है, तो झट से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर उनकी आवभगत करने की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाता है. कौन झंझट करे खाना बनाने का. यह सोच हम पर इसीलिए हावी हो पाई है, क्योंकि तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है. बस फ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करने की ही तो बात है. फिर खाना क्या, गिफ़्ट क्या, घर को सजाने का सामान भी मिल जाएगा और घर आकर लोग आपका हर काम भी कर देंगे. यहां तक कि पूजा भी ऑनलाइन कर सकते हैं. डाक से प्रसाद भी आपके घर पहुंच जाएगा. हो गया फेस्टिवल सेलिब्रेशन- कोई थकान नहीं हुई, कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी- तकनीक के एहसास ने मन को झंकृत कर दिया. बाज़ार से आई मिठाइयों ने मुंह का स्वाद बदल दिया और बाज़ारवाद ने उपहारों की व्यवस्था कर रिश्तों को एक साल तक और सहेजकर रख दिया- नहीं हैं इनमें जुड़ाव का कोई अंश तो क्या हुआ, एक मैसेज जगमगाते दीयों का और भेज देंगे और त्योहार मना लेंगे.

– सुमन बाजपेयी

यह भी पढ़े: घर को मकां बनाते चले गए… रिश्ते छूटते चले गए… (Home And Family- How To Move From Conflict To Harmony)

यह भी पढ़ें: मां बनने वाली हैं तो पति को 10 अलग अंदाज़ में दें मां बनने की ख़ुशखबरी (10 Cute Ways To Tell Your Husband You’re Pregnant)

क्या आपके पास हैं ये बेस्ट एंटीवायरस ऐप्स? (Best Antivirus Apps For Android Phones)

अगर आपका मोबाइल फोन (Mobile Phone) सुरक्षित नहीं है, तो उसमें वायरस अटैक (Virus Attack) का ख़तरा है. साथ ही कोई आपके मोबाइल से ज़रूरी डाटा भी चुरा सकता है, इसलिए ज़रूरी है कि अपने मोबाइल को एंटी वायरस और एंटी मालवेयर से हमेशा सुरक्षित रखें. कौन-से हैं बेस्ट एंटी वायरस ऐप्स (Best Antivirus Apps) आइए जानते हैं.         

Best Antivirus Apps

बिटडिफेंडर एंटी वायरस (Bitdefender Antivirus)

– यह एक पावरफुल एंटी वायरस एैप है, जो एंड्रॉइड से जुड़ी सभी समस्याओं का हर निकलता है.

– यह अब तक का सबसे लाइट वेट ऐप है. इसमें इन द क्लाउड स्कैनिंग टेक्नोलॉजी है, जिसके कारण सुपरफास्ट स्कैनिंग होती है.

– यह आपके मोबाइल की बैटरी को ज़्यादा ड्रेन नहीं करता, जिससे वो सालों-साल चलती है.

मालवेयरबाइट्स एंटी मालवेयर (Malware bytes Anti Malware)

– कंप्यूटर का इस्तेमाल करनेवालों के लिए यह नया नाम नहीं है. कंप्यूटर्स की ही तरह एंड्रॉएड फोन्स में भी यह काफ़ी कारगर साबित हो रहा है.

– एंटीवायरस, एंटीमालवेयर और एंटीस्पाईवेयर के ज़रिए मोबाइल को स्कैन करके रियल टाइम प्रोटेक्शन देता है.

– कोई भी ऐप या फोटो डाउनलोड करते व़क्त आपके ज़रूरी व पर्सनल डाटा को चोरी होने से बचाता है.

– इसकी मदद से ऑनलाइन सर्फिंग आसान हो जाती है, क्योंकि किसी भी तरह के मालवेयर या ग़ैरज़रूरी प्रोग्राम के संपर्क में आने पर यह आपको एलर्ट भेजकर सतर्क करता है.

– आपके बहुत-से ऐप्स आपके ज़रूरी डाटा और कॉन्टैक्स की जानकारी रखते हैं. ऐसे में कोई ऐप उस जानकारी का ग़लत फ़ायदा न उठा पाए, इसके लिए यह सभी ऐप्स को ट्रैक करते रहता है.

– प्रोटेक्शन डाटाबेस को ऑटोमैटिकली अपडेट करते रहता है.

– यूसेज हिस्ट्री और ग़ैरज़रूरी फाइल्स को क्लीन करके मोबाइल को स्लो या हैंग होने से बचाता है.

नॉर्टन सिक्योरिटी एंड एंटीवायरस (Nortan Security and Antivirus) 

– आपके मोबाइल को नुक़सान पहुंचानेवाले वायरस/मालवेयर को स्कैन करके ख़त्म कर देता है.

– सिम कार्ड निकालते ही यह आपके मोबाइल को लॉक कर देता है, जिससे कोई उसका ग़लत इस्तेमाल न कर सके.

– ग़ैरज़रूरी फोन कॉल्स और मैसेजेस को ब्लॉक कर देता है.

– फ्रॉड वेबसाइट्स द्वारा आपके ज़रूरी डाटा के ग़लत इस्तेमाल से बचाता है.

– मोबाइल की बैटरी लो होने पर अपनी लोकेशन को तुरंत सेव कर लेता है.

नोट: इसके अलावा अवास्त, एवीजी, अवीरा एंटीवायरस सिक्योरिटी, ईएसईटी मोबाइल सिक्योरिटी एंड एंटीवायरस, एवीएल आदि कई मोबाइल सिक्योरिटी और एंटीवायरस ऐप है, जिन्हें इंस्टॉल करके आप अपने मोबाइल को हर ख़तरे से बचा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

Best Antivirus Apps
सीएम सिक्योरिटी (CM Security)

– एंटीवायरस ऐप के क्षेत्र में पिछले कई सालों से लगातार इस ऐप ने अपनी नंबर 1 पोज़ीशन को बरकरार रखा है.

– इसमें मल्टी लेयर प्रोटेक्शन की ख़ूबी है. यह नए ऐप्स को स्कैन करने के साथ-साथ इंस्टॉल किए सिस्टम फाइल्स को स्कैन करके किसी भी तरह के ख़तरे से आपको आगाह करता रहता है.

– ऑनलाइन सर्फिंग के दौरान असुरक्षित वेबसाइट्स को ब्लॉक करके आपको नोटिफिकेशन भेजता है.

– बाकी ऐप्स की तरह ग़ैरज़रूरी जंक फाइल्स को डिलीट करने और मेमोरी बूस्टर की तरह काम करता है.

– यह टैबलेट और मोबाइल फोन दोनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

– ऐप लॉक के ज़रिए आप अपनी चैट हिस्टी, प्राइवेट मैसेज़ेस, फोटोज़ और गैलरी को लॉक कर सकते हैं. अगर कोई और मोबाइल को अनलॉक करने की कोशिश करता है, तो यह ऐप उसका फोटो क्लिक करके आपको सूचित करता है कि इस व्यक्ति ने आपके मोबाइल को अनलॉक करने की कोशिश की.

– माबेाइल में किसी भी तरह की गड़बड़ी से अपने  फेवरेट फोटोज़ आदि को बचाने के लिए उनका बैकअप लेकर रख सकते हैं.

– इस ऐप के ज़रिए जहां फाइंड फोन (एंटी थेफ्ट) के ज़रिए फोन चोरी होने पर पता लगा सकते हैं,  वहीं शेड्यूल्ड स्कैन के ज़रिए ऑटोमैटिक स्कैन ऑन कर सकते हैं. इसमें कॉल ब्लॉकिंग की सुविधा भी है.

 360 सिक्योरिटी (360 Security)

– यह सबसे लोकप्रिय एंटीवायरस ऐप्स में से एक है.

– अब तक 100 मिलियम से भी अधिक लोगों ने इसे डाउनलोड कर इस्तेमाल किया है.

– इसमें जंक फाइल क्लीनर, मेमोरी बूस्टर, पावर सेविंग ऑप्शन, ऐप मैनेजमेंट, एंटी थेप्ट टूल्स जैसी कई सुविधाएं हैं. आप जो भी ऐप्स

डाउनलोड करते हैं, वो आपके मोबाइल के सेफ हैं या नहीं आदि की जानकारी देता है.

– आपके सभी ऐप्स को स्कैन करके किसी भी तरह के ख़तरे के लिए आपको सिग्नल देता है.

– इस ऐप की सबसे ख़ास बात है, ऐप लॉक. ऐप लॉक के ज़रिए आप अपने सारे ऐप्स या चुनिंदा ऐप्स को लॉक करके रख सकते हैं, ताकि दूसरे आपकी प्राइवेसी में दख़ल न दे सकें.

मैकएफी सिक्योरिटी एंड पावर बूस्टर (McAfee Security and Power Booster)

– यह आपके मोबाइल फोन व टैबलेट को हर प्रकार के ख़तरे से बचाने के साथ-साथ मोबाइल के परफॉर्मेंस को भी बेहतर बनाता है.

– इसमें इंटेल द्वारा अवॉर्ड विनिंग एंटी थेफ्ट, फाइंड डिवाइस, ऐप प्राइवेसी प्रोटेक्शन,

एंटीवायरस, सिक्योरिटी सिस्टम जैसे स्मार्ट फीचर्स हैं.

– इसका एंटी थेफ्ट सिस्टम मोबाइल चोरी होने पर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ होने पर उस व्यक्ति का फोटो क्लिक करके उसके लोकेशन के साथ आपको ईमेल करता है.

– बैटरी ख़त्म होने की स्थिति में फोन बंद होने से पहले मोबाइल लास्ट लोकेशन आपको ईमेल करता है.

– समय-समय पर आपके कॉन्टैक्स और मैसेजेस का बैकअप लेकर उन्हें खोने से बचाता है.

– ऐप लॉक के ज़रिए आपके कौन-से ऐप्स दूसरे देख सकते हैं, कौन-से नहीं, आपकी ज़रूरत व सहूलियत के मुताबिक काम करता है.

– फाइल्स, ऐप्स, एसएमएस, ऑनलाइन सर्फिंग के ज़रिए कोई वायरस या ख़तरनाक लिंक आपके मोबाइल में इंस्टॉल न हो, इसका ध्यान रखता है.

– मेमोरी क्लीनअप के ज़रिए बैटरी बचाकर मोबाइल के परफॉर्मेंस को बेहतर बनाता है.

 

– शैलेन्द्र सिंह

यह भी पढ़ें: ट्रैवल के शौकीन लोगों के लिए ख़ास हैं ये 8 ऐप्स (8 Must Have Travel Apps In India)

टॉप 10 टिप्स ऑनलाइन रोमांस स्कैम से बचने के (Top 10 Tips To Protect Yourself Against Online Romance Scams)

एक ओर जहां रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इंटरनेट (Internet) का उपयोग तेज़ी से बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट पर धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले भी तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. कुछ धोखाबाज़ किस्म के लोग अपना फ़ायदा कमाने के चक्कर में इंटरनेट के द्वारा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ई बैंकिंग जैसी तकनीक के द्वारा लोेगों को आर्थिक नुक़सान पहुंचा रहे हैं. हम यहां ऐसे कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप ऑनलाइन स्कैम (Online Scams) से बच सकते हैं.

Online Romance Scams

आज भारत में करोड़ों लोग ऑनलाइन रोमांस स्कैम के शिकार हो रहे हैं. देखा गया है कि इनमें से केवल 10 या 20% मामलों में ही ऑनलाइन स्कैम की शिकायत पुलिस के साइबर क्राइम सेल में की जाती है, जबकि इनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है. वैसे तो इन मामलों में रकम वापसी की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन फिर भी कुछ बातों को ध्यान में रख आप ऑनलाइन रोमांस स्कैम से बच सकते हैं.

1. फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने से पहले यह सुनिश्‍चत करें

यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि वह आपका (म्युचुअल) दोस्त है, तो पहले यह तय करें कि वह सच बोल रहा है या नहीं. ऐसा व्यक्ति, जिसके बहुत कम फ्रैंड्स हैं और इंटरनेट पर उसके व्यक्तिगत फोटोज़ ही है, तो सावधान हो जाएं. यह भी हो सकता है कि उसने नया-नया सोशल मीडिया अकाउंट खोला हो. यह भी हो सकता है कि वे फ्रॉड हो. अत: फ्रैंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने से पहले अपने अन्य दोस्तों से उसके बारे में सारी जानकारी हासिल कर लें.

2. बातचीत हमेशा डेटिंग साइट पर ही करें

यदि किसी व्यक्ति से आप डेटिंग साइट पर हाल ही में मिले हो और वह व्यक्तिइस चैट साइट को छोड़कर किसी अन्य मैसेज़िंग प्लेटफार्म पर जाना चाहता है, तो सावधान हो जाएं. आप ऐसा करने की ग़लती न करें. वह फ्रॉड भी हो सकता है.

3. ऑनलाइन फ्रेंड के फोटोज़ चेक करें

फ्री सर्च इंजन में जाकर सर्च करके देखें कि क्या इस व्यक्ति के फोटोज़ कहीं दूसरी जगह भी दिखाई दे रहे हैं. इसके लिए सबसे पहले सर्च बॉक्स में जाकर कैमरा आइकॉन पर क्लिक करें. पिक्चर अपलोड करें. सर्च इंजन आपको बताएगा कि यह पिक्चर ऑनलाइन दूसरी जगहों पर कहां-कहां पोस्ट की गई है. इसके अतिरिक्त आप यह भी देख सकते हैं कि क्या यह पिक्चर अलग नाम से पोस्ट की गई है या स्कैम में रिपोर्ट की गई है.

4. ऑनलाइन फ्रेंड की कही बातों की जांच पड़ताल करें

सर्च इंजन की सहायता से ऑनलाइन फ्रेंड द्वारा, उसके बारे में कही गई हर बात की जांच करें. रिकॉर्ड्स चैक करें, क्योंकि आजकल शादी और तलाक नेट पर रिकॉर्ड किए जाते हैं. इसी तरह से क्रिमिनल रिकॉर्ड्स भी होते हैं. थोड़ा-सा अतिरिक्त समय सर्च इंजन पर बिताकर आप आनेवाली परेशानी से बच सकती हैं.

5. टैक्स्ट मैसेज जांचें

रोमांस स्कैमर्स हमेशा बने-बनाए मैसेज ही फॉरवर्ड करते हैं. यदि आपको लग रहा है कि आपको धोखा दिया जा रहा है, तो अच्छी तरह से इसकी जांच-पड़ताल करें. इसके लिए ऑनलाइन फ्रेंड के मैसेेज कॉपी करें और ऑनलाइन सर्च करें. यदि आपको वैसा ही या उससे मिलता-जुलता मैसेज दूसरे लिंक पर मिले, तो सतर्क हो जाएं.

यह भी पढ़ें: प्रियंका चोपड़ा का फेमिनिस्ट डेटिंग ऐप-बम्बल: क्या है ख़ास? (Smart Features Of Priyanka Chopra’s Dating App Bumble)

Online Romance Scams
6. ऑनलाइन फ्रेंड से वीडियो चैट करें

सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि अपने ऑनलाइन फ्रेंड को वीडियो चैट के लिए आमंत्रित करें. स्कैमर्स कभी भी आमने-सामने बात नहीं करते, ना ही कभी अपना चेहरा दिखाना चाहते हैं.

7. फोटो के बैक राउंड की पड़ताल करें

कई बार आपके ऑनलाइन फ्रेंड कहते हैं कि यह फोटो लंदन या दुबई में क्लिक की गई है, लेकिन उसका बैक राउंड भारत या अन्य जगह का दिख रहा है, तो सतर्क हो जाएं, अगर आप बैक राउंड पहचान नहीं पा रही है, तो वेबसाइड की मदद से जानकारी हासिल कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करना थोड़ा कठिन होता है.

8. ईमेल चेक करें

हर कंप्युटर, स्मार्ट फोन या टेबलेट जहां से ईमेल भेजा गया है, उसका एक आईपी ऐड्रेस होता है, जिससे उस जगह, राज्या या देश का पता चलता है. हर ईमेल का हेडर होता है, जो भेजे गए ईमेल के उपकरण का आईपी ऐड्रेस बताता है. आप हेडर ढूंढ़कर उसका विश्‍लेषण कर सकते हैं और सेंडर का पता लगा सकते हैं.

9. रुपये मांगनेवालों से हो जाएं सावधान

कई बार दोस्ती हो जाने के बार पर रुपयों की मांग की जाती है. यह भी देखा गया है कि कुछ फ्रॉड किस्म के लोग फौजी और सैनिकों के फोटोज़ अपलोड करके देशभक्तिकी दुहाई देते हैं और स्कैमर्स कोई भी भावनात्मक कारण बताकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. जब भी कोई रुपयों की बात करें, तो सावधान हो जाएं. उनके जाल में फंसकर पैसे देने की ग़लती न करें.

10. रिपोर्ट करें

यदि आपको लग रहा है कि आप रोमांस स्कैम के शिकार हो रहे हैं, तुरंत पुलिस के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज़ कराएं. भले ही आपको आर्थिक नुक़सान ना हुआ हो, परंतु याद रखें शक़ की बिना पर भी आप शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं और अन्य लोगों को स्कैम या फ्रॉड का शिकार होने से बचा सकते हैं. यदि आप किसी स्कैम में फंस गए हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक अकांउट, क्रेडिट या डेबिट कार्ड को ब्लॉक कराएं.

– डॉ. सुषमा श्रीराव

यह भी पढ़ें:  9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

यह भी पढ़ें: पासवर्ड सिलेक्ट करते समय न करें ये ग़लतियां (Avoid These Password Selection Mistakes)

सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं ये गैजेट्स (These Gadgets Can Be Harmful To Your Health)

हाल ही हुए एक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि औसतन एक वयस्क 24 घंटे की अवधि में से 8 घंटे 21 मिनट की नींद लेने की तुलना में डिजिटल वर्ल्ड/सोशल मीडिया पर उतना ही व़क्त (यानी 8 घंटे 21 मिनट) व्यस्त रहता है. दूसरे शब्दों में कहें तो अगर हम 16-17 घंटे जागते हैं, तो उसका आधा व़क्त तो हम डिजिटल प्लेफार्म पर ही घूमते रहते हैं. ऐसा करके हम न केवल गैेजेट्स (Gadgets) तक सिमट कर रह गए हैं, बल्कि अनेक बीमारियों (Diseases) को न्योता दे रहे हैं. आइए जाने कैसे?

 

Harmful Gadgets

लैपटॉप/कंप्यूटर

घंटों लैपटॉप/कंप्यूटर पर बैठकर काम करने से सिरदर्द, कमर-गर्दन-कंधों में दर्द होेने लगता है. इतना ही नहीं, यदि आपके बैठने का पोश्‍चर और डेस्क डिज़ाइनिंग भी सही नहीं है, तो भविष्य में जोड़ों व मांसपेशियों संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके साथ ही लैपटॉप/कंप्यूटर से आंखों पर बुरा असर पड़ता है और कार्पल टर्नल सिंड्रोम का ख़तरा भी बढ़ जाता है, जिससे हाथों की संवेदनशीलता कम होती है और कलाइयों पर दर्द की शिकायत रहती है.

कैसे बचें?

– कंप्यूटर/लैपटॉप पर काम करते हुए हर एक-डेढ़ घंटे के बाद ब्रेक लें.
– हर 1 घंटे के बाद 2-3 मिनट के लिए आंखों को आराम दें.
– ऑफिस वर्क के लिए बड़ी स्क्रीनवाले लैपटॉप का इस्तेमाल करें. इससे पोश्‍चर पर अधिक दबाव नहीं पड़ता.
– लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के लेवल पर होनी चाहिए, ताकि स्क्रीन को देखने के लिए गर्दन को घुमाना या मोड़ना न पड़े.
– कीबोर्ड को सही लेवल पर रखें, जिससे
कोहनी को आराम मिले.
– माउस यूज़ करते समय स़िर्फ कलाई का नहीं, पूरे हाथ का इस्तेमाल करें.
– स्पीड में टाइप करने की बजाय हल्के व धीरे से करें.
– डेस्क पर बैठे-बैठे स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.
– कंप्युटर पर काम करते समय विशेष रूप से डिज़ाइन की गई कुर्सी का इस्तेमाल करें, जिससे बैठते व़क्त स्पाइन को स्पोर्ट मिले.
– काम के दौरान 10 मिनट का ब्रेक लेकर वॉक करें.
– घर पर लैपटॉप/कंप्यूटर पर काम करने का समय निर्धारित करें.

मोबाइल

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों द्वारा किए गए शोधों से अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि मोबाइल से निकलनेवाली रेडिशएन से किसी को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या (कैंसर आदि) हुई हो, लेकिन मोबाइल एडिक्ट होने के कारण नींद पूरी न होना, एकाग्रता में कमी, सिरदर्द, गर्दन व कंधों में दर्द, आंखों पर दबाव, धंधलापन, ड्राई आइज़, रेडनेस, इरिटेशन, ब्रेन एक्टिविटी में बाधाएं और सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि जैसी समस्याएं ज़रूर बढ़ गई है.

कैसे बचें?

– मोबाइल सिलेक्ट करते समय ऐसे मॉडल का चुनाव करें, जिसका स्पेसिफिक ऑबज़र्वेशन रेट (एसएआर) कम हो.
– बात करते समय मोबाइल को कान से
सटाकर रखने की बजाय थोड़ी दूरी पर रखें.
– लेटकर बात करते समय मोबाइल को छाती या पेट के ऊपर न रखें.
– मोबाइल पर बात करने के लिए हैंड्स-फ्री डिवाइस (ईयरफोन) का इस्तेमाल करें.
– जहां तक संभव हो मोबाइल की बजाय लैंडलाइन का प्रयोग करें.
– कोशिश करें कि मोबाइल पर 15 मिनट से ज़्यादा समय तक बात न करें.
– सेलफोन पर बहुत देर तक बात करने की बजाय टैक्स्ट मैसेज करें.
– 1 घंटे तक लगातार मैसेज/चैटिंग करने से भी उंगलियों के टिप पर दर्द होने लगता है. इसलिए बेवजह मैसेज/चैटिंग करने से बचें.
– छोटे बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल न दें.
– सड़क पर चलते समय और ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात न करें. यह छोटी-सी भूल आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

 

यह भी पढ़ें: प्रियंका चोपड़ा का फेमिनिस्ट डेटिंग ऐप-बम्बल: क्या है ख़ास? (Smart Features Of Priyanka Chopra’s Dating App Bumble)

टेलीविजन

हाल ही में ‘हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में किए गए शोध से यह साबित हुआ है कि बहुत अधिक टेलिविजन देखने से शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती है, जिससे अनहेल्दी फूड हैबिट, मोटापा, दिल से जुड़ी बीमारियां और टाइप2 डायबिटीज़ के होने का ख़तरा 20% तक बढ़ जाता है.

कैसे बचें?

– टीवी देखने की बजाय कोई हॉबी क्लास जाएं.
– वर्कआउट के लिए जिम, जॉगिंग, ऐरोबिक्स, स्विमिंग, टेनिन जाएं.
– टीवी देखते समय मंचिंग से बचें.
– डिनर टाइम को फैमिली टाइम बनाएं यानी डिनर के समय टीवी बंद रखें.
– यदि आपके पास पर्याप्त खाली समय है, तो कोई पार्ट-टाइम बिज़नेस या काम शुरू करें.
– बच्चों को टीवी की बजाय फिज़िकल एक्टिव़िटीज़ में हिस्सा लेने के प्रोत्साहित करें.
– टीवी देखने का समय निर्धारित करें, जिससे आपकी टीवी देखने की बुरी आदत धीरे-धीरे कम हो जाए.
– टीवी देखने की बजाय परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं, जैसे- कैरम बोर्ड, चैस आदि गेम खेलें.
– टीवी की बजाय अपना फेवरेट म्यूज़िक सुनें.

वीडियो गेम

बहुत देर तक वीडियो गेम्स खेलने से मांसपेशियों में दर्द, मोटापा, विटामिन डी की कमी और नींद में बाधा उत्पन्न होती है. ‘द पीडियाट्रिक्स इंटरनेशनल जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, घंटों तक वीडियो गेम्स खेलने से कंधों की मांसपेशियों में जकड़न बढ़ जाती है. इसके अलावा अनेक वीडियो गेम्स का प्रेजेटेंशन इतना आकर्षक होता है कि बच्चों में गेम जीतने का तनाव, उत्तेजना और मानसिक तनाव हावी होने लगता है.

कैसे बचें?

– वीडियो गेम्स खेलते समय बच्चों पर नज़र रखें कि वह किस तरह के गेम खेल रहे हैं.
– उम्र के अनुसार गेम का चुनाव करें.
– गेम खेलते समय जब वह तनाव या निराशा महसूस करें, तो गेम बंद कर दें.
– उन्हें उत्तेजित व आक्रामक गेम्स खेलने से रोकें.
– 1-2 घंटे तक गेम खेलने की बजाय उनका समय निर्धारित करें.
– उन्हें वीडियो गेम में व्यस्त रखने की बजाय फिजिकल एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें.
– सोने से पहले वीडियो गेम न खेलने दें. उन्हें समझाएं कि उत्तेजक व आक्रमक गेम खेलने से नींद में बाधा उत्पन्न होती है.
– बच्चों को वीडियो गेम खेलने दें, लेकिन इसकी लत न लगने दें. पैरेंट्स ख़ासतौर से इस बात का ध्यान दें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

यह भी पढ़ें: हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whatsapp Everyone Must Know)

यह भी पढ़ें: 7 कुकिंग ऐप्स जो बनाएंगे कुकिंग को आसान (7 Apps To Make Cooking Easy)

15 बेस्ट ईमेल एटिकेट रूल्स (15 Best Email Etiquette Rules)

चैट (Chat) या ईमेल (Email) लिखते हुए अधिकतर लोग कई तरह की ग़लतियां (Mistakes) करते हैं. हम यहां पर ऐसे ही कुछ पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स के बारे में आपको विस्तार से बता रहे, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने इंप्रेशन को ख़राब होने से बचा सकते हैं.

Email Etiquette Rules

जनरल ईमेल एटीकेट्स टिप्स

1. इंट्रोडक्शन बहुत ज़रूरी है

ईमेल में सबसे महत्वपूर्ण होता है इंट्रोडक्शन यानी परिचय. यदि आप किसी अंजान व्यक्ति को ईमेल लिख रहे हैं, तो सबसे पहले उसे अपना परिचय दें, फिर किस संदर्भ या विषय पर आप उससे बात करना चाहते हैं, इस बारे में उसे कम शब्दों में विस्तार से बताएं. इंट्रोडक्शन तब और भी ज़रूरी होता है, जब अंजान लोगों से किसी सर्वे, प्रश्‍नोत्तरी या क्विज़ के बारे में पूछ रहे होते हैं.

2. स्पेलिंग चेक करना न भूलें

ईमेल चाहे पर्सनल हो या ऑफिशियल, भेजने से पहले पूरे मेल की स्पेलिंग ज़रूर चेक करें. ख़ासकर जब आप मोबाइल से ईमेल कर रहे हों तो, क्योंकि टचस्क्रीन मोबाइल होने के कारण कई बार ग़लत टाइप हो जाता है. यदि आप बार-बार होनेवाली ग़लत स्पेलिंग से बचना चाहते हैं, तो ‘ऑटोकरेक्ट’ का ऑप्शन यूज़ करें. इस ऑप्शन की मदद से आप स्पेलिंग के ग़लत होने से बच सकते हैं.

3. इसी तरह से ईमेल लिखते समय:

– सही व्याकरण का प्रयोग करें.

– विराम चिह्नों का ज़्यादा इस्तेमाल करने से बचें.

– ईमेल कैपिटल लेटर्स में न लिखें.

– लिखते समय अशिष्ट भाषा का प्रयोग न करें.

– मुख्य बातों को पॉइंट में लिखें.

उपरोक्त बताई गई बातों का ध्यान ज़रूर रखें, विशेष रूप से तब, जब आप ऑफिशियल मेल लिख रहे हों.

4. ‘रिप्लाई-ऑल’ फीचर का प्रयोग सावधानी से करें

जब आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल का जवाब देना हो, तभी इस फीचर का प्रयोग करें. इस फीचर का प्रयोग सावधानी से करें, क्योंकि ‘रिप्लाई ऑल’ करते समय कई बार मेल ऐसे व्यक्तियों को भी पहुंच जाता है, जिन्हें उस मेल का रिप्लाई नहीं करना होता है. इसलिए इस फीचर का प्रयोग सावधानी के साथ करें.

5. जनरल मेल्स के लिए ‘बीसीसी’ यूज़ करें

यदि आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल भेजना है, तो ईमेल बॉक्स में दिए गए ‘बीसीसी’ ऑप्शन का इस्तेमाल करें.

6. ज़िप फाइल बनाएं

ईमेल से 8-10 हैवी अटैचमेंट एक साथ न भेजें. हैवी और बहुत सारी अटैचमेंट भेजने से प्राप्तकर्ता का इनबॉक्स अवरुद्ध हो सकता है. इसलिए हैवी अटैचमेंट्स को ‘फाइल-हॉस्टिंग सर्विस’ से भेजें. इसके अलावा हैवी फाइलों की ‘ज़िप फाइल’ या ‘रिसाइज़ पिक्चर’ बनाकर भी भेज सकते हैं. यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल कर रहे हैं, जो अपने मोबाइल से ईमेल एक्सेस कर रहा है, तो उसे ज़्यादा अटैचमेंट एक साथ न भेजें.

यह भी पढ़ें: हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whatsapp Everyone Must Know)

Email Etiquette

एब्रिविएशन (संक्षिप्त शब्दों) का

7. इस्तेमाल कम करें: ईमेल लिखते समय संक्षिप्त शब्दों (एब्रिविएशन्स) का प्रयोग कम से कम करें. एब्रिविएशन्स, जैसे- एफवाईआई (ऋधख), पीएफए (झऋअ), पीडीएफ (झऊऋ) और एफवाईआर (ऋधठ), सीयू (उण), एनपी (छझ), डब्ल्यूयू (थण) आदि लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि ईमेल प्राप्तकर्ता (रिसीवर) इन एब्रिविएशन्स के अर्थ समझता भी हो. इसलिए मेल लिखते समय केवल उन्हीं एब्रिविएशन्स का प्रयोग करें, जो प्रचलित हों.

8. फॉन्ट को फॉरमेट करें: ईमेल लिखते समय कैपिटल लेटर्स और बोल्ड फॉन्ट का इस्तेमाल न करें. बोल्ड फॉन्ट और कैपिटल लेटर्स में लिखने से ईमेल प्राप्तकर्ता पर आपका ख़राब इंप्रेशन पड़ सकता है. इसी तरह से टेक्स्ट को बीच-बीच में अंडरलाइन करना, फैंसी फॉन्ट या मल्टीपल फॉन्ट का प्रयोग करने से बचें.

9. ईमेल के टाइप को पहचानें: कोई भी ईमेल पढ़ते समय सावधानीपूर्वक पढ़ें यानी मेल की टोन को पहचानें. हो सकता है वह ऑफिशियल मेल हो या फिर वह पर्सनल मेल भी हो सकता है, जो अशिष्ट व कड़े शब्दों में लिखा गया हो. इसलिए जब भी आप परेशान हों या जब आपका मूड ख़राब हो, तो मेल न लिखें. इन मेल को ‘ड्राफ्ट’ में सेव कर लें या दोबारा पढ़कर शांत दिमाग़ से और अच्छी तरह सोच-समझकर रिप्लाई करें.

10. ‘फॉरवर्ड’ करने से पहले: कोई भी मेल अन्य व्यक्तियों को फॉरवर्ड करने से पहले उसका पहले का पिछला मैटर और मेल-एड्रेस आदि डिलीट (क्लीन-अप) कर लें. इससे प्राप्तकर्ता को आपके द्वारा भेजा गया मेल पढ़ने में आसानी होगी और उसके समय की बचत भी.

11. ‘सेंड’ करने से पहले: पूरा मेल लिखने के बाद ‘टू’ वाला फील्ड चेक करें. कहीं सेंडर की ईमेल-आईडी ग़लत टाइप तो नहीं किया है. कई बार सेंडर के पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल-आईडी 2-3 होने के कारण इस तरह की समस्या हो सकती है.

ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स

12. सब्जेक्ट लाइन: प्राप्तकर्ता के इनबॉक्स में सबसे पहले सब्जेक्ट लाइन ही दिखाई देती है. इस सब्जेक्ट लाइन को पढ़कर प्राप्तकर्ता को ईमेल की महत्ता समझ में आ जाती है कि वह मेल कितना महत्वपूर्ण है और किस संदर्भ में लिखा गया है. इसलिए सब्जेक्ट ज़रूर लिखें.

13. सोल्यूशन: ईमेल में मुद्दे की बात लिखने से पहले प्राप्तकर्ता के नाम के आगे ‘डियर’ या पीछे ‘जी’ कहकर संबोधित करें. अगर आप प्राप्तकर्ता का फर्स्ट नेम नहीं जानते हैं, तो उन्हें उनके सरनेम या टाइटल से संबोधित करें.

14. कंसाइज़ बॉडी: इसमें सीधे कम शब्दों में मुद्दे की बात लिखें. यदि आप एक से अधिक विषयों पर अपनी बात कहना चाहते हैं, तो सबसे पहले सबसे महत्वपूर्ण बात लिखें, फिर पॉइंट वाइज़ अन्य बातों का ज़िक्र करें.

15. साइन ऑफ: यदि आप फॉर्मल मेल लिख रहे हैं, तो मेल के अंत में ‘यॉअर्स सिन्सियर्ली’, ‘यॉअर्स फेदफुली’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. यदि ऑफिशियल मेल या अन्य स्थितियों में मेल लिख रहे हैं, तो अंत में ‘बेस्ट रिगार्ड्स’ और ‘काइन्ड रिगार्ड्स’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. इससे प्राप्तकर्ता पर आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा. आख़िर में सबसे अहम् बात- पूरा मेल लिखने और भेजने के बाद ‘साइन ऑफ’ करके बंद करें.

– नागेंद्र शर्मा 

यह भी पढ़ें: 9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whatsapp Everyone Must Know)

 

Hidden Features Of Whatsapp

हर किसी को जानने चाहिए व्हाट्सऐप के ये 5 हिडेन फीचर्स (5 Hidden Features Of Whattsapp Everyone Must Know)

माना कि आप व्हाट्सऐप (Whatsapp) रोज़ाना या फिर यूं कहें कि हर व़क्त इस्तेमाल करते हैं, पर इसके ऐसे कई फीचर्स (Features) हैं, जिनसे आप अब तक अंजान होंगे. क्या हैं वो स्मार्ट फीचर्स (Smart Features) आइए, आपको बताते हैं.

– ग्रुप चैट के बिना भेजें ग्रुप मैसेजेस

व्हाट्सऐप पर आजकल हर किसी के फैमिली से लेकर, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, बिल्डिंग और न जाने कितने ग्रुप्स होते हैं. पर कभी-कभी ऐसा होता है कि ग्रुप के कुछ लोगों से बात करनी है, पर आप नहीं चाहते कि सबको वो बातें पता चलें तो आपको करना होगा ग्रुप मैसेज. इसके लिए मेनू में जाकर न्यू ब्रॉडकास्ट पर क्लिक करें और जिन-जिन लोगों से बात करनी है, उन्हें ऐड करें. बातचीत करके आप तुरंत उसे डिलीट भी कर सकते हैं, ताकि किसी को पता न चले कि आप लोगों के बीच क्या बातचीत हुई.

– फोटो-वीडियो में टाइम और लोकेशन ऐड करें

आईओएस यूज़र्स की तरह ही एंड्रॉयड यूज़र्स भी अपने फोटो और वीडियो में टाइम और लोकेशन ऐड कर सकते हैं. चैट में जाकर फोटो गैलेरी से कोई फोटो भेजने के लिए सिलेक्ट करें. भेजने से पहले देखें, फोटो के ऊपर आपको स्माइली का सिंबल दिखेगा. उसे क्लिक करें. वहां आपको टाइम और लोकेशन दिखेगा, उस पर क्लिक करें. फोटो पर अपने मनमुताबिक उसे सेट करें.

– ज़रूरी मैसेजेस को सेव करें

व्हाट्सऐप अब स़िर्फ चैटिंग ऐप न रहकर हमारे रोज़मर्रा के कामों में काफ़ी उपयोगी साबित हो रहा है. ऐसे में कई बार कुछ ज़रूरी डॉक्यूमेंट, कोई बात या कोई फोटो जो हमें लगता है कि बाद में इसकी ज़रूरत पड़ेगी, तो उसे सेव करके रखना चाहिए. उस फोटो या बात को आप स्टार्ड करके भी सेव कर सकते हैं. जिस बात को स्टार मार्क करना है, उसे लॉन्ग प्रेस करें, सिलेक्ट होने पर ऊपर आपको स्टार का सिंबल दिखेगा, उस पर क्लिक करते ही आपका मैटर स्टार मार्क होकर सेव हो जाएगा. उसे देखने के लिए व्हाट्सऐप ओपन करें. राइट साइड के तीन डॉट्स को क्लिक करें आपको स्टार्ड मैसेजेस का ऑप्शन दिखेगा. उसे ओपन करके आप अपने सारे स्टार्ड मैसेजेस देख सकते हैं.

– ऑटो डाउनलोड बंद करके सेव करें डाटा

व्हाट्सऐप पर जितने फोटो, वीडियो या ऑडियो आते हैं, व्हाट्सऐप उन्हें ऑटोमैटिकली डाउनलोड करके आपकी गैलरी में सेव कर देता है, जिससे न स़िर्फ आपका डाटा बेवजह ख़र्च होता है, बल्कि गैलरी में भी ग़ैरज़रूरी चीज़ें भर जाती हैं. इससे छुटकारा पाने का बेस्ट तरीक़ा है, ऑटो डाउनलोड बंद करना. ऐसा करने के लिए व्हाट्सऐप में जाकर राइट साइड के तीन डॉट को ओपन करें. सेटिंग्स पर जाएं, वहां आपको डाटा एंड स्टोरेज यूसेज दिखेगा, उस पर क्लिक करें. वहां आपको मीडिया ऑटो डानलोड का सेक्शन दिखेगा, जिसमें व्हेन यूज़िंग मोबाइल डाटा, व्हेन केनक्टेड ऑन वाई-फाई और व्हेन रोमिंग के ऑप्शन दिखेंगे. अगर आप चाहते हैं कि मोबाइल डाटा से कुछ भी ऑटोमैटिकली सेव न हो, तो उसमें जाकर सारे ऑप्शन्स को अनटिक कर दें. जब तक आप ख़ुद डाउनलोड नहीं करेंगे, तब तक कोई फोटो या वीडियो डाउनलोड नहीं होगा.

– अपनी लोकेशन शेयर करें

आप कहीं पर हैं और कोई आपसे मिलना चाहता है, लेकिन वो सही रास्ता समझ नहीं पा रहा है, तो सबसे बेस्ट ऑप्शन है लोकेशन शेयर करना. अपने व्हाट्सऐप में जाकर उस व्यक्ति के चैट में जाएं. पेपर क्लिप आइकॉन पर क्लिक करेंगे, तो आपको कई ऑप्शन्स दिखेंगे, उसी में एक है लोकेशन. उसे क्लिक करेंगे, तो शेयर लाइव लोकेशन के अलावा सेंड योर करंट लोकेशन भी है. उस पर क्लिक करते ही आपका लोकेशन सामनेवाले को मिल जाएगा, फिर वो आसानी से आप तक पहुंच सकता है.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: 9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

यह भी पढ़ें: 7 कुकिंग ऐप्स जो बनाएंगे कुकिंग को आसान (7 Apps To Make Cooking Easy)

हर महिला के फोन में होने चाहिए ये 5 सेप्टी ऐप्स (5 Safety Apps Every Woman Should Download)

Safety Apps For Women

Safetipin (सेफ्टीपिन)

बात जब महिलाओं (Women) की सेफ्टी (Safety) और सुरक्षा की हो, तो सेफ्टीपिन एक बेहतरीन ऑप्शन है. महिलाओं की पर्सनल सेफ्टी को ध्यान में रखकर यह ऐप बनाया गया है. इसमें उनकी सुरक्षा से जुड़ी सभी ज़रूरी बातों को शामिल किया गया है. इसमें जीपीएस ट्रैकिंग, इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स, सेफ लोकेशन के डायरेक्शन्स आदि की सुविधा है. इस ऐप में सभी सुरक्षित जगहों को पिन किया गया है, ताकि ज़रूरत के व़क्त आप सुरक्षित स्थान पर पहुंच सको. इसके अलावा यूज़र्स अनसेफ लोकेशन्स को भी पिन कर सकते हैं, ताकि बाकी के लोग सतर्क रहें. यह ऐप हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध है.

Raksha – women safety alert (रक्षा- वुमेन सेफ्टी अलर्ट)

यह ऐप भी ख़ासतौर से महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. इस ऐप में एक बटन है, जिसे प्रेस करने से आपके अपनों को आपका लोकेशन मिल जाएगा, इमर्जेंसी के व़क्त आप इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. इस ऐप की एक ख़ास बात और है कि अगर इमर्जेंसी के व़क्त आपका मोबाइल स्विचऑफ हो गया हो, तो भी आप वॉल्यूम बटन को 3 सेकंड तक प्रेस करके रखने पर ऐप अलर्ट भेज देता है. अगर आप नो इंटरनेट एरिया में चली जाएं, तो यह ऐप आपके इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट्स को एसएमएस भेजता है.

Himmat (हिम्मत)

दिल्ली पुलिस का महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह एक और फ्री मोबाइल ऐप है. ऐप को इस्तेमाल करने के लिए यूज़र को दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करना होगा. रजिस्ट्रेशन पूरा होते ही आपको ओटीपी मिलेगी, जिसे फीड करके आप ऐप को इंस्टॉल कर पाएंगी. अगर कभी इमर्जेंसी के हालात बनें, तो आप एसओएस एलर्ट के ज़रिए पुलिस को इतल्ला कर सकती है. जैसे ही आप एसओएस एलर्ट जारी करेंगे, दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में आपकी लोकेशन, ऑडियो और वीडियो अपनेआप पहुंच जाएंगे, जिसकी मदद से पुलिस आपकी लोकेशन पर जलद से जल्द पहुंच जाएगी.

Women safety (वुमन सेफ्टी)

वुमन सेफ्टी के लिए यह एक और उपयोगी ऐप है. बाकी ऐप्स की ही तरह यह भी ज़रूरत के व़क्त आपके बारे में आपके करीबी लोगों को जानकारी देगा. आपको स़िर्फ एक बटन दबाना होगा और आपके लोकेशन की पूरी जानकारी आपके करीबियों के पास पहुंच जाएगी. एसएमएस के साथ-साथ गूगल मैक के ज़रिए आपकी लोकेशन का लिंक भी आपके आपनों के पास पहुंच जाएगा. आपके मोबाइल का फ्रंट कैमरा आपका सेफ्टी डिवाइस बन जाता है, यह पिक्चर्स क्लिक करके तुरंत सर्वर को भेज देता है. इसमें तीन कलर के बटन्स हैं, आप अपनी सुविधानुसार और हालात की गंभीरता के मुताबिक बटन प्रेस कर सकती हैं.

VithU (विदयू)

यह चैनल वी के प्रोग्राम गुमराह द्वारा शुरू किया गया ऐप है. बाकी ऐप्स की तरह इसे भी डाउनलोड करके एक्टिवेट करें. ज़रूरत के व़क्त मदद के लिए एक्टिवेट बटन पर दो बार क्लिक करें. एक्टिवेट होते ही ऐप आपके सेव किए हुए कॉन्टैक्ट्स को ऑटोमैटिकली मदद के लिए मैसेज और लोकेशन भेजना शुरू कर देता है और जब तक स्टॉप न किया जाए, हर दो मिनट में मैसेज भेजता रहता है. इसके अलावा इस ऐप में कई सेफ्टी टिप्स भी दिए गए हैं, जो महिलाओं के लिए काफ़ी उपयोगी सिद्ध होंगे.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: स्मार्ट महिलाओं के लिए मोबाइल वॉलेट टिप्स (Mobile Wallet Tips For Smart Women)

यह भी पढ़ें: 7 कुकिंग ऐप्स जो बनाएंगे कुकिंग को आसान (7 Apps To Make Cooking Easy)

स्मार्ट महिलाओं के लिए मोबाइल वॉलेट टिप्स (Mobile Wallet Tips For Smart Women)

मोबाइल वॉलेट (Mobile Wallet) महिलाओं के लिए एक वरदान की तरह है. हमें हर दिन कितने सारे लेन-देन के काम करने होते हैं. दूध, सब्ज़ी, ग्रॉसरी का सामान, टैक्सी किराया, बिजली का बिल, डीटीएच का बिल, इंटरनेट और मोबाइल रिचार्ज जैसे जाने कितने ट्रांज़ैक्शन हम लगातार करते रहते हैं. इन सारे बिलों का भुगतान करके मोबाइल वॉलेट हमारे जीवन को सरल कर देता है. इनके भुगतान के लिए ना आपको किसी लाइन में खड़ा होना होगा और न चेक काटना होगा और ना ही अलग-अलग वेबसाइट पर जाना पड़ेगा. बस, मोबाइल वॉलेट का ऐप खोला और आप चुटकियों में बिल का भुगतान कर सकती हैं. इसे इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ख़ास ध्यान, बता रही हैं मोबिक्विक की को-फाउंडर उपासना टाकू.

Mobile Wallet Tips

 

–    अपने फोन और वॉलेट दोनों को ही लॉक करके रखें. अपने मोबाइल में कोई ख़ास पैटर्न या लॉक की लगाकर रखें, ताकि आपकी इजाज़त के बिना कोई आपका वॉलेट इस्तेमाल न कर पाए.

–     अपना वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) कभी किसी से शेयर न करें. अगर कोई फोन करके यह कहता है कि वह मोबाइल वॉलेट कंपनी या आपके बैंक से बोल रहा है, तो भी उससे अपना ओटीपी शेयर न करें.

–     अपने लिए हमेशा बेस्ट मोबाइल वॉलेट सिलेक्ट करें. आप किन कामों के लिए मोबाइल वॉलेट डाउनलोड कर रही हैं, वह सुविधा उसमें है या नहीं, पहले चेक करें. अगर आपको इलेक्ट्रिसिटी बिल भरना है या कैब बुक करना है, तो पहले देखें कि उस ऐप में यह सुविधा कैसी है.

–     मोबाइल वॉलेट को अपने ज़रूरी ऐप्स से लिंक करें. हर ऐप से वॉलेट को लिंक करने की ज़रूरत नहीं, लेकिन जिनका उपयोग आप ज़्यादा करती हैं, उन्हें लिंक करें.

–     आपका मोबाइल वॉलेट यूज़र फ्रेंडली और ईज़ी है, तो इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं कि आप ग़ैरज़रूरी शॉपिंग कर लें. अपने मंथली बजट का हमेशा ध्यान रखें.

–     ज़्यादातर वॉलेट ऐप्स कैशबैक के अलावा बहुत-से डिस्काउंट्स भी देते रहते हैं. उनका ट्रैक रखकर आप भी उनके ऑफर्स का फ़ायदा उठा सकती हैं.

–     मोबिक्विक (Mobikwik), पेटीएम (PayTM), फोनपे (PhonePe), भीम (BHIM) और पेयूमनी (PayUMoney) कुछ पॉप्युलर मोबाइल वॉलेट्स हैं.

यह भी पढ़ें: 7 कुकिंग ऐप्स जो बनाएंगे कुकिंग को आसान (7 Apps To Make Cooking Easy)

यह भी पढ़ें: क्या आपके पास हैं ये 8 Best ब्यूटी ऐप्स? (8 Best Beauty Apps For Your Smartphone)

अब डिप्रेशन दूर भगाएगा किराये का बॉयफ्रेंड… रेंट ए बॉयफ्रेंड ऐप, एक अनोखी पहल! (RABF: This App Lets You Rent A Boyfriend To Cure Depression)

RABF App
अब डिप्रेशन दूर भगाएगा किराये का बॉयफ्रेंड… रेंट ए बॉयफ्रेंड ऐप, एक अनोखी पहल! (RABF: This App Lets You Rent A Boyfriend To Cure Depression)

आज की तारीख़ में हर दूसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. कहीं न कहीं हम भी अपने जीवन में कभी न कभी तो डिप्रेशन यानी अवसाद के दौर से गुज़रते हैं, उस व़क्त ज़िंदगी बेकार लगने लगती है और यही डिप्रेशन यदि बढ़ता जाता है, तो सुसाइड तक पहुंच सकता है.
डिप्रेशन को दूर करने का एक अनोखा तरीक़ा कौशल प्रकाश ने खोज निकाला है. उन्होंने मुंबई में एक ऐप लॉन्च किया है, जो अकेलेपन से जूझ रहे डिप्रेस्ड लोगों को पार्टनर यानी साथी प्रोवाइड करता है. रेंट ए बॉयफ्रेंड (RABF) यह ऐप मुंबई बेस्ड है. इसमें शारीरिक यानी फिज़िकल रिलेशन नहीं होता, इमोशनल स्तर पर आपको बेहतर महसूस करवाया जाता है.
कौशल प्रकाश को यह आइडिया अपने अनुभव के आधार पर ही आया. वो ख़ुद डिप्रेशन का शिकार थे और अब वो दूसरों की मदद करना चाहते हैं.

यह भी पढ़ें: भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

RABF App
यही नहीं इस ऐप में टोल फ्री नंबर भी होगा, जहां लोग कॉल करके प्रोफेशनल्स की मदद ले सकेंगे और उनसे अपनी समस्या शेयर कर सकेंगे.

RABF की वेबसाइट पर इससे संबंधित सारी डिटेल्स हैं. आप सेलिब्रिटी, मॉडल से लेकर आम आदमी को चुन सकते हैं. सेलेब्स का रेट 3000 प्रति घंटे के हिसाब से होगा, मॉडल्स 2000, वहीं आम आदमी आपको 300-400 तक में मिल सकेंगे. यह वेबसाइट पूरी तरह से कमिशन बेसिस पर काम करती है, जहां 70% कमाई बॉफ्रेंड्स को दी जाती है.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: आपके ख़र्चों पर नज़र रखेंगे ये 9 ऐप्स (9 Smart Apps For Your Monthly Budget)

पासवर्ड सिलेक्ट करते समय न करें ये ग़लतियां (Avoid These Password Selection Mistakes)

 

पासवर्ड यानी कुछ नंबर, कुछ अक्षर और सांकेतिक चिह्नों का मिला-जुला कॉम्बिनेशन. पासवर्ड बनाते समय अक्सर आप यही सोचते होंगे कि आपके द्वारा बनाए गए पासवर्ड को कोई हैक नहीं कर सकता, लेकिन ऐसा हो सकता है. कई बार पासवर्ड बनाते समय हम छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा हैकर्स उठाते हैं. अगर आप हैकर्स से सावधान रहना चाहते हैं, तो पासवर्ड बनाते समय इन
ग़लतियों से बचें.

Password Selection Mistakes

कैसा हो पासवर्ड?

–     अगर आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो इंटरनेट बैंकिंग का य़ूजर आईडी और पासवर्ड गोपनीय रखें.

–     समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें. लंबे समय तक एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते रहने से उसके क्रैक होने की संभावना अधिक होती है.

–     एक अकाउंट के लिए केवल एक पासवर्ड का प्रयोग करें.

पासवर्ड बनाते समय रखें कुछ बातों  का ख़ास ख़्याल

–     अपनी व्यक्तिगत जानकारी- नाम, मोबाइल नंबर, एडे्रस आदि कभी किसी के साथ शेयर न करें.

–     मकान नंबर, जन्मदिन, शादी की सालगिरह, मोबाइल नंबर, पत्नी व बच्चों के नाम के आधार पर पासवर्ड बनाने की ग़लती न करें. आपका जान-पहचानवाला कोई भी व्यक्ति इन सूचनाओं के आधार पर आपका अकाउंट हैक कर सकता है.

–     अपने फेवरेट स्टार्स और प्लेस के नाम पर  भी पासवर्ड न बनाएं.

–     उपरोक्त व्यक्तिगत जानकारी के अलावा अपनी मां का सरनेम भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें. इसका कारण है कि यूज़र अपने डेबिट कार्ड का पासवर्ड रिसेट करता है, तो सिक्युरिटी क्वेश्‍चन में सबसे पहले आपकी मां का सरनेम या पेट नेम पूछा जाता है.

–     बैंक अपने ग्राहकों को समय-समय पर मैसेज भेजकर सचेत करते रहते हैं कि अगर कोई आपसे व्यक्तिगत जानकारी मांगे, तो उनसे शेयर करने की बजाय तुरंत बैंक को सूचित करें.

–     एक ही पासवर्ड को अलग-अलग अकांउट के लिए यूज़ करना ज़ोख़िम भरा हो सकता है. यदि हैकर्स आपके एक अकाउंट का पासवर्ड जान लेता है, तो उसे अन्य खातों को साइन इन करना आसान हो जाएगा.

–     एक बार साइन इन करने के बाद हैकर्स आपके ईमेल और एड्रेस से आपके बैंक अकाउंट को भी एक्सेस कर सकता है.

–     ईज़ी पासवर्ड बेशक याद रखने में आसान होते हैं, लेकिन इन्हें बनाने से अकाउंट हैैक होने का ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि हैकर्स सरल पासवर्ड को आसानी से क्रैक कर लेते हैं.

–     पासवर्ड बनाते समय ऐसी निजी जानकारी शेयर न करें, जिसे अन्य लोग आपके बारे में जानते हों, जैसे- आपका निक नेम, आपके घर की गली व रोड का नाम व नंबर, मोबाइल नंबर, आपके पेट एनिमल का नाम आदि.

–     पासवर्ड बनाते समय आसान शब्दों (जैसे- रिीीुेीव) और वाक्यों, कीबोर्ड पैटर्न (जैसे- िुंशीींू या रिंूुीु) और अनुक्रम (जैसे- रललव या 1234) का इस्तेमाल करने से बचें.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए वाक्यों व मुहावरों का प्रयोग करें. वाक्य या मुहावरे ऐसे होने चाहिए, जिसे दूसरे लोग नहीं जानते हों.

–     अपने पर्सनल और प्रोफेशनल अकाउंट के पासवर्ड अलग-अलग बनाएं. यदि आपका प्रोफेशनल अकाउंट हैक हो गया या फिर प्रोफेशनल स्तर पर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन भी लीक हो जाएगा.

स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए क्या करें?

–    अगर आप कुछ वर्णों को जोड़कर पासवर्ड बना रहे हैं, तो उस पासवर्ड में 8 या उससे अधिक वर्ण होने चाहिए.

–     अक्षर, अंक और प्रतीक चिह्नों का संयोजन करके पासवर्ड बनाएं.

–    पासवर्ड बनाते समय अक्षरों को अंकों के साथ बदलें.

–     पासवर्ड हमेशा लंबे बनाएं. लंबे यानी जिनमें कम से कम 10 अक्षरों, अंकों व प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल किया गया हो.

–     लंबे पासवर्ड बनाने का एक फ़ायदा यह भी है कि ये पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होते हैं, जिन्हें हैक करना मुश्किल होता है.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड को याद रखना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए आप पासवर्ड मैनेजर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं.

–     यह ऐप आपका पासवर्ड सेव कर लेता है, जिसे सिंगल पासवर्ड या ओटीपी से एक्सेस किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: Wow! पोर्न साइट को ब्लॉक करेगा हर हर महादेव ऐप

Password Selection Mistakes
कैसे रखें अपना पासवर्ड सुरक्षित?

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के बाद उसे पर्स, वॉलेट या डेस्क आदि जगहों पर लिखकर रखने की ग़लती न करें. कोई भी इस पासवर्ड को चोरी करके आपके अकाउंट को साइन इन कर सकता है.

–     अपने महत्वपूर्ण अकाउंट, जैसे- ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड बनाएं. कुछ वेबसाइट्स ओटीपी का ऑप्शन देती हैं, जिससे आपकी सिक्योरिटी और मज़बूत हो जाती है.

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल जाते हैं, तो पासवर्ड मैनेजर ऐप्स की सहायता से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं.

–     हमेशा पासवर्ड मैनेजर ऐप्स डाउनलोड करने से पहले इनका रिव्यू चेक कर लें.

कब ज़रूरत है पासवर्ड रिसेट करने की?

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल गए हैं या आपका पासवर्ड लॉक हो गया है, तो अपने अकाउंट को दोबारा ओपन करने के लिए आपको अपना पासवर्ड रिसेट करना पड़ेगा.

–     यदि आपको ऐसा महसूस हो कि कोई अन्य व्यक्ति भी आपके अकाउंट को एक्सेस कर रहा है, तो तुरंत अपना पासवर्ड रिसेट करें.

–     यदि आप अपना अकाउंट किसी कारण से साइन इन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको पासवर्ड रिसेट करने की आवश्यकता है.

– नागेश चमोली

यह भी पढ़ें: ‘वाहन’ से जानें किसी भी वाहन की जानकारी
यह भी पढ़ें: हर वक्त सेल्फी लेना है ‘मेंटल डिस्ऑर्डर’

कहीं डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी में अंतर आपके रिश्ते को बिगाड़ तो नहीं रहा? (Difference In Digital and Real Personality May Affect Your Relationship)

Difference In Digital and Real Personality

कहीं डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी (Difference In Digital and Real Personality) में अंतर आपके रिश्ते को बिगाड़ तो नहीं रहा?

सोशल मीडिया की दस्तक ने हमारी निजी ज़िंदगी को बहुत प्रभावित किया है. अधिकांश व़क्त हम यहां जो भी कुछ देखते हैं, करते हैं, वह हक़ीक़त से बिल्कुल विपरीत होता है. डिजिटल दुनिया की जो हमारी पर्सनैलिटी है, वह रियल लाइफ से अक्सर मेल नहीं खाती है. क्यों ऐसा करते हैं हम? और क्या है इसकी वजह? इसी के बारे में जानने की हमने यहां कोशिश की है.

Difference In Digital and Real Personality

लीला एक हाउसवाइफ हैं. वे बताती हैं कि पति के शोरूम और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद मैं खाली व़क्त में इंटरनेट, व्हाट्सऐप और फेसबुक पर समय बिताती थी. मेरे दोस्तों की संख्या सैकड़ों में थी. घर पर रहूं, तो लैपटॉप और बाहर निकली, तो मोबाइल में उंगलियां चलती ही रहती थीं. कुछ महीनों बाद यह स्थिति बन गई कि हमारा दांपत्य जीवन प्रभावित होने लगा. मैं बच्चों की केयर और परिवार की ज़िम्मेदारियों से दूर भागने लगी. पति की नाराज़गी और पैरेंट्स के समझाने पर मुझे आभास हुआ कि मैं ग़लत कर रही हूं. मुझे इससे निकलने में काफ़ी व़क्त लगा. लीला मात्र एक उदाहरण है, कमोबेश आज हर दूसरा व्यक्ति डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी के बीच उलझा हुआ है.

निजी ज़िंदगी हो रही है प्रभावित

आज के दौर में हम सोशल मीडिया को पसंद या नापसंद तो कर सकते हैं, लेकिन उसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते. आज लोग इंसानों के साथ कम और सोशल साइट्स ज़्यादा समय बिता रहे हैं. इस पर रिश्ते बनने से ज़्यादा बिगड़ने लगे हैं.

आपको बता दें कि 55 से 60 फ़ीसदी लोगों का तलाक़ आज के समय में सोशल साइट्स की वजह से हो रहा है. यह खुलासा अमेरिका के क़ानूनी फर्म के सर्वे में किया गया है. इसमें बताया गया है कि आजकल रिश्ते जल्द टूटने की वजह सोशल साइट्स के प्रति लोगों का एडिक्शन है.

आपके दोस्त अपनी लव लाइफ की शानदार तस्वीरें पोस्ट कर सकते हैं, लेकिन आपको इस बात का एहसास भी नहीं होता कि उनकी निजी यानी ऑफलाइन ज़िंदगी कितनी भयानक हो सकती है. उन्हें देखकर आपको भी लगता है कि आप भी अपने साथी के साथ ऐसी फोटो खिंचवाकर पोस्ट करें. हो सकता है आपका साथी ऐसा करने के ख़िलाफ़ हो या फिर आपके रिश्ते में थोड़ीबहुत तल्ख़ी हो, लेकिन इसके बावजूद आप चाहते हैं कि दुनिया को बताएं कि आप एक हैप्पी कपल हैं.

डिजिटल पर्सनैलिटी की बड़ी उम्मीदें 

डिजिटल पर्सनैलिटी बड़ी उम्मीदों को जन्म देती है. हो सकता है कि रियल लाइफ में आपकी लव लाइफ बहुत दिलचस्प या संतोषजनक न हो, पर डिजिटल लाइफ पर आप अपनी लव लाइफ को सबसे बेहतरीन और दिलचस्प दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. अक्सर कपल्स जिन स्माइली और इमोशंस का इस्तेमाल डिजिटल लाइफ में अपना प्रेम ज़ाहिर करने के लिए करते हैं, उनका रियल लाइफ में मतलब तभी होता है, जब हक़ीक़त की ज़िंदगी में भी आप अपने साथी को प्यार करते हैं. दिखावटी प्रेम जो डिजिटल दुनिया में चलता है, वह रियल ज़िंदगी में कई बार नज़र तक नहीं आता है. लेकिन इससे उत्पन्न उम्मीदें आपके रिश्तों में सेंध लगाकर उन्हें बिगाड़ सकती हैं.

यह भी पढ़ें:  क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?

मन-मुटाव का बनता कारण

बच्चे हों या बड़े, घर, कॉलेज, ऑफिस, ड्राइविंग यहां तक कि देर रात बिस्तर तक में आराम नहीं है. जिसे देखो, वही उलझा है डिजिटल दुनिया के रिश्तों में. जिनमें भले ही सच्चाई की संभावना न के बराबर हो, लेकिन सभी चैटिंग, फोटो शेयरिंग और कमेंट्स में सुकून और अपने सवालों के उत्तर ढूंढ़ने में लगे हैं. संवाद और एकदूसरे के संपर्क में रहने के नएनए तकनीकी तरीक़ों में बुरी तरह उलझी है आज की ज़िंदगी. टीनएजर्स ही नहीं, उम्रदराज़ लोगों की संख्या भी कम नहीं है, तकनीक के इस जाल में. शायद यही वजह है कि क़रीबी और सामाजिक रिश्ते गौण हो रहे हैं और लोग अवास्तविक दुनिया के सागर में डूब रहे हैं.

प्रभावित हो रही है सेक्स लाइफ

मनोवैज्ञानिक शमा अग्निहोत्री कहती हैं, आपके जीवनसाथी के साथ के अंतरंग पलों के दौरान स्मार्टफोन पर आई एक बेव़कूफ़ीभरी पोस्ट का नोटिफिकेशन आपसी रिश्तों में दरार पैदा करने के लिए काफ़ी है. युवा जोड़ों, विशेषकर

नौकरीपेशा की संख्या एकाएक तेज़ी से बढ़ी है और इनकी सेक्स लाइफ पर जिस तरह से डिजिटल दुनिया की वजह से असर पड़ा है, वह संबंधों में मनमुटाव उत्पन्न कर रहा है. सोशल मीडिया पर मित्रों के लगातार अपडेट्स के चलते लोग अपने जीवनसाथी के साथ क्वालिटी टाइम बिताने में असफल हो रहे हैं. यही नहीं, दूसरों को देखकर यह जीवनसाथी में बेमतलब की कमियां ढूंढ़ने को भी उकसा रहा है.

हक़ीक़त से अलग है यह दुनिया

जब आपको अपने बेडरूम की चारदीवारी के अंदर प्रेम नहीं मिलता, तो आप इसे कहीं बाहर खोजने लगते हैं. रिश्तों की ख़त्म होती गर्माहट और ऑनलाइन दुनिया में आसानी से मेलजोल बढ़ाने से अपने लिए एक नया साथी तलाशना काफ़ी आसान हो गया है. साथ ही यह आपको एक ग़लत क़दम उठाने में भी ज़्यादा व़क्त नहीं लगने देता, जिसके चलते आप अपने निजी रिश्तों को भी दांव पर लगा देते हैंसच तो यह है कि हम अपनी रियल पर्सनैलिटी से दूर होते जा रहे हैं और एक दिखावटी दुनिया का हिस्सा बन रहे हैं. उस दिखावटी दुनिया में हमारी सोच, हमारी मानसिकता और पर्सनैलिटी हमारी रियल पर्सनैलिटी से एकदम भिन्न होती है. लेकिन हम अपनी स्वाभाविक भावनाओं को ताक पर रख ऑनलाइन वीडियो या पोस्ट को पढ़ ख़ुश हो जाते हैं.

ज़िंदगी सोशल मीडिया नहीं

समाजशास्त्री नीरू यादव का मानना है कि एक ऑनलाइन वीडियो को देखकर अकेले हंसने में उतना मज़ा कहां है, जो आप अपने जीवनसाथी के साथ बैठकर एक पुराने चुटकुले पर उठा सकते हैं. सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का केवल एक हिस्सा भर है, जबकि हमारी ज़िंदगी सोशल मीडिया का हिस्सा बिल्कुल भी नहीं है, इसलिए इस दूरी को बरकरार रखने की कोशिश करते हुए चीज़ों की प्राथमिकता तय करनी होगी.

यह समझना ज़रूरी है कि आपकी फ़िक्र करनेवाला या आपको प्यार करनेवाला इंसान आपके आसपास होगा.

वे जो आपकी पोस्ट पर लाइक और कमेंट करते हैं, वे केवल आपको दिखावटी प्यार ही मैसेज कर भेज सकते हैं.

अपने साथी की अहमियत समझें और उन्हें केवल उनके लिए (जो आपकी निजी ज़िंदगी की सार्वजनिक रूप में चर्चा करते हैं) दूर न जाने दें.

ड्रीमवर्ल्ड में जीते लोग

डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी एक ही इंसान द्वारा निभाए जानेवाले दो तरह के क़िरदार हैं. फेसबुक पर हम ऐसी ही चीज़ें पोस्ट करते हैं, जो हम लोगों को दिखाना चाहते हैं यानी हम एक में जी रहे होते हैं. वहां हमारी एक अलग छवि बनती है और उस छवि के अनुरूप ही हमारे पोस्ट होते हैं भले ही असल ज़िंदगी में हम वैसे न भी हों.

Difference In Digital and Real Personality

सार्वजनिक न बनाएं अपनी ज़िंदगी

जब हम डिजिटल की दिखावटी दुनिया में प्रवेश करते हैं, तो हम दूसरों की अच्छी चीज़ों को देखकर हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं और फिर ख़ुद को उनके बराबर दिखाने के लिए या उनसे बेहतर दिखाने के लिए अपनी एक झूठी छवि सोशल मीडिया पर पेश करते हैं.

असल में हम भूल जाते हैं कि जो कुछ सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है, वह वास्तविकता नहीं है. वह किसी व्यक्ति की ज़िंदगी का एक लम्हा भर है, जिसे उसने सोशल मीडिया पर शेयर किया. ज़िंदगी की वास्तविक छवि इससे अलग हो सकती है. हमारी ख़ुशी दूसरों पर निर्भर करने लगती है. यह इसलिए भी ख़तरनाक है, क्योंकि हम हर चीज़ का सर्टिफिकेट दूसरों से लेने लगते हैं.

किसी पल को आपने एंजॉय किया या नहीं, यह प्राथमिकता होने की बजाय प्राथमिकता यह हो जाती है कि उस पल की तस्वीर को सोशल मीडिया पर कितना रिस्पॉन्स मिल रहा है. उदाहरण के लिए यदि आप किसी जगह डिनर पर गए, तो आपको इस बात की ख़ुशी होनी चाहिए की डिनर टेस्टी था और आपने इसे अपने फैमिली/दोस्तों के साथ एंजॉय किया. न कि यह कि आपकी डिनरवाली तस्वीर पर 100 लाइक्स आए.

सच यह है कि आपकी डिजिटल पर्सनैलिटी आपको अपने वास्तविक संबंधों को मज़बूत करने की बजाय आपको एक ऐसी नकली दुनिया का आदी बना देती है, जिसमें आप अपने विचारों की अभिव्यक्ति उतने बेहतर तरी़के से नहीं कर पाते, जितना आप वास्तविक दुनिया में कर सकते हैं.

आप अपनी असल ज़िंदगी का मज़ा लेना ही भूलने लगते हैं. कई ख़ूबसूरत जगहों पर घूमते हुए वहां की ख़ूबसूरती का मज़ा लेने की बजाय लोग सेल्फी लेने और फोन से तस्वीरें खींचने में व्यस्त हो जाते हैं, जो उन्हें उस वास्तविक पलों को जीने से रोक देता है. ऐसे में आप अपने साथी का साथ क्या एंजॉय कर पाएंगे, तो रिश्तों पर आंच आना स्वाभाविक ही है.

अपनी जिंदगी के हर पहलू को सार्वजनिक करना कहां तक ठीक है. यह समझने की ज़रूरत है कि असल ज़िंदगी साढ़े पांच इंच की स्क्रीन में नहीं है, बल्कि उसके बाहर है.

सुमन बाजपेयी

यह भी पढ़ें: किस राशिवाले किससे करें विवाह?

इंटरनेट ने छीनी ज़िंदगी की फ़ुर्सत … (Internet Has Taken Over Our Lives)

disadvantages of internet
न जाने कितने ही पल यूं ही तारों को तकते-तकते साथ गुज़ारे थे हमने… न जाने कितनी ही शामें यूं ही बेफिज़ूल की बातें करते-करते बिताई थीं हमने… न जाने कितनी ऐसी सुबहें थीं, जो अलसाते हुए एक-दूजे की बांहों में संवारी थी हमने… पर अब न वो रातें हैं, न वो सुबह, न वो तारे हैं और न वो बातें… क्योंकि अब वो पहले सी फ़ुर्सत कहां, अब वो पहले-सी मुहब्बत कहां…!

disadvantages of internet

जी हां, हम सबका यही हाल है आजकल, न व़क्त है, न ही फ़ुर्सतक्योंकि ज़िंदगी ने जो रफ़्तार पकड़ ली है, उसे धीमा करना अब मुमकिन नहीं. इस रफ़्तार के बीच जो कभीकभार कुछ पल मिलते थे, वो भी छिन चुके हैं, क्योंकि हमारे हाथों में, हमारे कमरे में और हमारे खाने के टेबल पर भी एक चीज़ हमारे साथ रहती है हमेशा, जिसे इंटरनेट कहते हैं. ज़ाहिर है, इंटरनेट किसी वरदान से कम नहीं. आजकल तो हमारे सारे काम इसी के भरोसे चलते हैं, जहां यह रुका, वहां लगता है मानो सांसें ही रुक गईं. कभी ज़रूरी मेल भेजना होता है, तो कभी किसी सोशल साइट पर कोई स्टेटस या पिक्चर अपडेट करनी होती हैऐसे में इंटरनेट ही तो ज़रिया है, जो हमें मंज़िल तक पहुंचाता है. लेकिन आज यही इंटरनेट हमारे निजी पलों को हमसे छीन रहा है. हमारे फुर्सत के क्षणों को हमसे दूर कर रहा है. हमारे रिश्तों को प्रभावित कर रहा है. किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

चाहे ऑफिस हो या स्कूलकॉलेज, पहले अपनी शिफ्ट ख़त्म होने के बाद का जो भी समय हुआ करता था, वो अपनों के बीच, अपनों के साथ बीतता था.

आज का दिन कैसा रहा, किसने क्या कहा, किससे क्या बहस हुईजैसी तमाम बातें हम घर पर शेयर करते थे, जिससे हमारा स्ट्रेस रिलीज़ हो जाता था.

 लेकिन अब समय मिलते ही अपनों से बात करना या उनके साथ समय बिताना भी हमें वेस्ट ऑफ टाइम लगता है. हम जल्द से जल्द अपना मोबाइल या लैपटॉप लपक लेते हैं कि देखें डिजिटल वर्ल्ड में क्या चल रहा है.

कहीं कोई हमसे ज़्यादा पॉप्युलर तो नहीं हो गया है, कहीं किसी की पिक्चर को हमारी पिक्चर से ज़्यादा कमेंट्स या लाइक्स तो नहीं मिल गए हैं…?

और अगर ऐसा हो जाता है, तो हम प्रतियोगिता पर उतर आते हैं. हम कोशिशों में जुट जाते हैं फिर कोई ऐसा धमाका करने की, जिससे हमें इस डिजिटल वर्ल्ड में लोग और फॉलो करें.

भले ही हमारे निजी रिश्ते कितने ही दूर क्यों न हो रहे हों, उन्हें ठीक करने पर उतना ध्यान नहीं देते हम, जितना डिजिटल वर्ल्ड के रिश्तों को संजोने पर देते हैं.

 

आउटडेटेड हो गया है ऑफलाइन मोड

आजकल हम ऑनलाइन मोड पर ही ज़्यादा जीते हैं, ऑफलाइन मोड जैसे आउटडेटेडसा हो गया है.

यह सही है कि इंटरनेट की बदौलत ही हम सोशल साइट्स से जुड़ पाए और उनके ज़रिए अपने वर्षों पुराने दोस्तों व रिश्तेदारों से फिर से कनेक्ट हो पाए, लेकिन कहीं न कहीं यह भी सच है कि इन सबके बीच हमारे निजी रिश्तों और फुर्सत के पलों ने सबका ख़ामियाज़ा भुगता है.

शायद ही आपको याद आता हो कि आख़िरी बार आपने अपनी मॉम के साथ बैठकर चाय पीते हुए स़िर्फ इधरउधर की बातें कब की थीं? या अपने छोटे भाईबहन के साथ यूं ही टहलते हुए मार्केट से सब्ज़ियां लाने आप कब गए होंगे?

बिना मोबाइल के आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ कब डायनिंग टेबल पर बैठे थे?

अपनी पत्नी के साथ बेडरूम में बिना लैपटॉप के, बिना ईमेल चेक करते हुए कब यूं ही शरारतभरी बातें की थीं?

याद नहीं आ रहा नआएगा भी कैसे? ये तमाम ़फुर्सत के पल अब आपने सूकून से जीने जो छोड़ दिए हैं.

अपने बच्चे के लिए घोड़ा बनकर उसे हंसाने का जो मज़ा है, वो शायद अब एक जनरेशन पहले के पैरेंट्स ही जान पाएंगे, क्योंकि आजकल स़िर्फ पिता ही नहीं, मम्मी भी इंटरनेट के बोझ तले दबी हैं.

वर्किंग वुमन के लिए भी अपने घर पर टाइम देना और फुर्सत के साथ परिवार के साथ समय बिताना कम ही संभव हो गया है.

लेकिन फिर भी कहीं न कहीं वो मैनेज कर रही हैं, पर जहां तक पुरुषों की बात है, युवाओं का सवाल है, तो वो पूरी तरह इंटरनेट की गिरफ़्त में हैं और वहां से बाहर निकलना भी नहीं चाहते.

यही नहीं, आजकल जिन लोगों के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता या फिर जो लोग सोशल साइट्स पर नहीं होते, उन पर लोग हैरान होते हैं और हंसते हैं, क्योंकि उन्हें आउटडेटेड व बोरिंग समझा जाता है.

यह भी पढें: पति की इन 7 आदतों से जानें कितना प्यार करते हैं वो आपको

स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है

रिसर्च बताते हैं कि सोशल साइट्स पर बहुत ज़्यादा समय बिताना एक तरह का एडिक्शन है. यह एडिक्शन ब्रेन के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरेक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.

यही वजह है कि इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करनेवालों में स्ट्रेस, निराशा, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. उनकी नींद भी डिस्टर्ब रहती है. वो अधिक थकेथके रहते हैं. ऐसे में ज़िंदगी का सुकून कहीं खोसा जाता है.

इन सबके बीच आजकल सेल्फी भी एक क्रेज़ बन गया है, जिसके चलते सबसे ज़्यादा मौतें भारत में ही होने लगी हैं.

लोग यदि परिवार के साथ कहीं घूमने भी जाते हैं, तो उस जगह का मज़ा लेने की बजाय पिक्चर्स क्लिक करने के लिए बैकड्रॉप्स ढूंढ़ने में ज़्यादा समय बिताते हैं. एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम गुज़ारने की जगह सेल्फी क्लिक करने पर ही सबका ध्यान रहता है, जिससे ये फुर्सत के पल भी यूं ही बोझिल होकर गुज़र जाते हैं और हमें लगता है कि इतने घूमने के बाद भी रिलैक्स्ड फील नहीं कर रहे.

मूवी देखने या डिनर पर जाते हैं, तो सोशल साइट्स के चेकइन्स पर ही ध्यान ज़्यादा रहता है. इसके चलते वो ज़िंदगी की ़फुर्सत से दूर होते जा रहे हैं.

सार्वजनिक जगहों पर भी लोग एकदूसरे को देखकर अब मुस्कुराते नहीं, क्योंकि सबकी नज़रें अपने मोबाइल फोन पर ही टिकी रहती हैं. रास्ते में चलते हुए या मॉल मेंजहां तक भी नज़र दौड़ाएंगे, लोगों की झुकी गर्दन ही पाएंगे. इसी के चलते कई एक्सीडेंट्स भी होते हैं.

यह भी पढ़ें:  क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?

इंटरनेट की देन: पोर्न साइट्स भी पहुंच से दूर नहीं

 आजकल आसानी से पोर्न वीडियोज़ देखे जा सकते हैं. चाहे आप किसी भी उम्र के हों. इंटरनेट के घटते रेट्स ने इन साइट्स की डिमांड और बढ़ा दी है. बच्चों पर जहां इस तरह की साइट्स बुरा असर डालती हैं, वहीं बड़े भी इसकी गिरफ़्त में आते ही अपनी सेक्स व पर्सनल लाइफ को रिस्क पर ला देते हैं. इसकी लत ऐसी लगती है कि वो रियल लाइफ में भी अपने पार्टनर से यही सब उम्मीद करने लगते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि इन वीडियोज़ को किस तरह से बनाया जाता है. इनमें ग़लत जानकारियां दी जाती हैं, जिनका उपयोग निजी जीवन में संभव नहीं.

– यही नहीं, अक्सर एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर्स भी आजकल ऑनलाइन ही होने लगे हैं. चैटिंग कल्चर लोगों को इतना भा रहा है कि अपने पार्टनर को चीट करने से भी वो हिचकिचाते नहीं. इससे रिश्ते टूट रहे हैं, दूरियां बढ़ रही हैं.

कुछ युवतियां अधिक पैसा कमाने के चक्कर में इन साइट्स के मायाजाल में फंस जाती हैं. बाद में उन्हें ब्लैकमेल करके ऐसे काम करवाए जाते हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए संभव नहीं होता.

इंटरनेट फ्रॉड के भी कई केसेस अब आम हो गए हैं, ये तमाम बातें साफ़तौर पर यही ज़ाहिर करती हैं कि इंटरनेट ने वाक़ई ज़िंदगी की फुर्सत छीन ली है…!

योगिनी भारद्वाज

यह भी पढ़ें: अपने दरकते रिश्ते को दें एक लव चांस