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सेल्फी लेना तो हर किसी का शौक़ होता है, पर कहीं यह शौक़ आपको शॉक न दिला दे. चौंकिए नहीं, क्योंकि बार-बार सेल्फी लेना और सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करते रहना एक मेंटल डिस्ऑर्डर यानी मानसिक विकार है. सेल्फी के इस मानसिक विकार की क्या है कहानी और आपके लिए कितना ख़तरनाक हो सकता है यह? आइए जानते हैं.

 Selfitis, Mental Disorder

क्या है सेल्फीटिस?

बारबार सेल्फी लेना और सोशल मीडिया पर पोस्ट करना एक गंभीर मानसिक अवस्था है, जिसे सायकोलॉजिस्ट्स ने ‘सेल्फीटिस’ का नाम दिया है. पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल 2014 में किया गया, जब अमेरिकन सायकैट्रिक एसोसिएशन इसे डिस्ऑर्डर घोषित करने पर विचार कर रही थी. इसके बाद नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी और थियागराजर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने अमेरिकन रिसर्च में कितनी सच्चाई है, उसका पता लगाने के लिए आगे स्टडी की. अपनी स्टडी में इन्होंने पाया कि वाक़ई ‘सेल्फीटिस’ एक मानसिक विकार है. इसके बाद रिसर्चर्स ने एक बिहेवियर स्केल बनाया, ताकि इस बात की जांच की जा सके कि सेल्फीटिस किस लेवल पर है.

सेल्फीटिस के लेवल्स

बॉर्डरलाइन: दिनभर में कम से कम 3 बार सेल्फी लेना, पर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट न करना. अगर आप भी सुबह, दोपहर, शाम सेल्फी लेते हैं, तो समझ जाइए कि आप बॉर्डरलाइन पर हैं.

अक्यूट: दिनभर में कम से कम 3 बार सेल्फी लेना और हर बार सोशल मीडिया पर पोस्ट करना गंभीर अवस्था है. अगर आप ऐसा कुछ करते हैं, तो इसे अवॉइड करना शुरू करें.

क्रॉनिक: दिनभर सेल्फी लेने से ख़ुद को रोक न पाना. बारबार सेल्फी लेते रहना और सोशल मीडिया पर 6 बार से ज़्यादा पोस्ट करना क्रॉनिक लेवल है. इन पर सेल्फी लेने का जुनून हर व़क्त सवार रहता है.

इंटरनेशनल जरनल ऑफ मेंटल हेल्थ में छपी स्टडी में इस बात की पुष्टि की गई है कि सेल्फीटिस एक मेंटल या सायकोलॉजिकल डिस्ऑर्डर है. हालांकि अभी भी कुछ लोग हैं, जो इसका विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक किसी भी रवैये को नाम देने भर से वह विकार में परिवर्तित नहीं हो जाता.

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सेल्फीटिस बिहेवियर स्केल

ख़ुद को 1-5 तक की रैंकिंग दें, जहां 5 का मतलब है आप उस बात से पूरी तरह सहमत हैं, वहीं 1 का मतलब है कि आप उससे बिल्कुल सहमत नहीं. आपका स्कोर जितना ज़्यादा होगा, सेल्फीटिस की संभावना उतनी ज़्यादा होगी.

सेल्फी लेने से मेरा मूड अच्छा हो जाता है.

फोटो एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करती हूं, ताकि दूसरों से बेहतर दिख सकूं.

इससे मैं कॉन्फिडेंट महसूस करती हूं.

अलगअलग पोज़ेज़ में सेल्फी शेयर करने पर मेरा सोशल स्टेटस बढ़ जाता है.

सेल्फी पोस्ट करते रहने से मैं ख़ुद को पॉप्युलर महसूस करती हूं.

इससे मेरा तनाव दूर होता है.

ज़्यादा सेल्फी पोस्ट करती हूं, ताकि ज़्यादा लाइक्स और कमेंट्स मिलें.

सोशल मीडिया पर दोस्तों की तारीफ़ सुनने के लिए सेल्फी पोस्ट करती हूं.

ख़ूब सेल्फी लेती हूं, फिर अकेले में देखती हूं, इससे मेरा आत्मविश्‍वास बढ़ता है.

अगर सेल्फी नहीं लेती हूं, तो अपने पीयर ग्रुप से अलगथलग महसूस करती हूं.

Selfitis, Mental Disorder

सेल्फी न बन जाए ‘किलफी’

हाल ही में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पूरी दुनिया में सेल्फी लेने के चक्कर में सबसे ज़्यादा लोगों की मौत भारत में ही होती है, जिसे ‘किलफी’ कहते हैं. इस बात की गंभीरता का पता इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया में होनेवाली सभी सेल्फी डेथ्स के 50% मामले भारत में होते हैं.

2014-2016 के बीच सेल्फी के कारण 127 मौतें हुईं, जिनमें से 76 इंडिया में हुईं.

ज़्यादातर सेल्फी डेथ का कारण समंदर या नदी में सेल्फी लेते हुए या टू व्हीलर पर स्टंट करते हुए या फिर बिल्डिंग से गिरने से हुई.

क्या है सोल्यूशन?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्योंकि यह एक एडिक्शन या लत है, इसलिए इसे छुड़ाने के लिए सायकोलॉजिस्ट्स वही तरीक़ा अपनाते हैं, जो व्यसन मुक्ति के लिए किया जाता है.

सेल्फी लें, पर कोशिश करें कि सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें.

– ख़ुद को कैमरे के लेंस से देखना बंद करें. आप जैसे हैं, वैसे ख़ुद को स्वीकारें.

अगर आप ख़ुद को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो किसी मनोचिकित्सक से मिलें.

दिनेश सिंह

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टेक्नोलॉजी के दौर में स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ बातचीत या वेब ब्राउज़िंग तक ही सीमित नहीं रह गया है. पेमेंट व मनी ट्रांसफर करने के लिए पहले आपको घंटों लाइनों में लगना पड़ता था, लेकिन अब आप उन्हीं कामों को मिनटों में स्मार्टफोन की सहायता से निपटा सकते हैं मोबाइल पेमेंट ऐप के ज़रिए, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल द्वारा भुगतान करते समय आपको सतर्क रहने की ज़रूरत है, आइए जानें कैसे?

 

 Tips For Safe Mobile Payments

1. सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग न करें

अगर आप सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करके अपने मोबाइल द्वारा के्रडिट कार्ड की सूचनाएं, जैसे- बैंक अकाउंट नंबर, पिन नंबर आदि मेन्युली टाइप कर रहे हैं या फिर कार्ड स्वाइप करके दर्ज़ कर रहे हैं, तो आपका डाटा लीक होने की संभावना हो सकती है, क्योंकि आपको यह पता नहीं होता है कि आप जिस वाई-फाई रूट से भुगतान कर रहे हैं, वो सेफ डाटा सोर्स है या नहीं. इसलिए सार्वजनिक जगहों पर उपलब्ध वाई-फाई का उपयोग मोबाइल द्वारा भुगतान करने के लिए न करें.
इसके अलावा सार्वजनिक वाई-फाई द्वारा मोबाइल पेमेंट करने से हैकर्स के लिए आपका पासवर्ड/पिन हैक करना आसान हो जाएगा.

2. पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होना चाहिए: अगर आप अपने मोबाइल का इस्तेमाल वित्तीय

लेन-देन करने के लिए करते हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आपका पासवर्ड स्ट्रॉन्ग हो, जिसे कोई आसानी से हैक न कर सके. पासवर्ड बनाते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारियां, जैसे- जन्म तिथि, फ्लैट नंबर, मोबाइल नंबर, गली/रोड का नाम, बच्चों के नाम के अलावा ऐसा कोई भी नंबर, जो आपसे जुड़ा हो- उसे पासवर्ड में न डालें. इन जानकारियों को हासिल करना हैकर्स के लिए बहुत आसान होता है.
सुरक्षा की दृष्टि से आजकल स्मार्टफोन में अनेक सुविधाएं दी जाती हैं, जैसे- चेहरे की पहचान, फिंगर प्रिंट अनलॉक आदि.
इन सुविधाओं के द्वारा भी आप अपने पासवर्ड/पिन को सुरक्षित रख सकते हैं.

3. अनऑथोराइज़ ऐप डाउनलोड करने से बचें

पेमेंट और मनी ट्रांसफर करने के लिए कोई भी अनऑथोराइज़ ऐप डाउनलोड न करें. अगर आपने कोई अनऑथोराइज़ या फर्ज़ी ऐप
डाउनलोड किया है, तो आपके वन टाइम पासवर्ड का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है. इसलिए किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्‍वसनीयता की जांच अच्छी तरह कर लें.

4. केवल विश्‍वसनीय ऐप ही डाउनलोड करें

अगर आप किसी विश्‍वसनीय ऐप में अपनी भुगतान संबंधी जानकारी शेयर करते हैं, तो अपने मोबाइल पर डाउनलोड किए गए अन्य ऐप के बारे में सावधान रहें, क्योंकि इनमें कुछ स्पाइवेयर हो सकते हैं, जो भुगतान संबंधी जानकारी को कैप्चर करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और हैकर्स इनका फ़ायदा उठा सकते हैं.

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Tips For Safe Mobile Payments

5. सुरक्षित पेमेंट ऐप यूज़ करें

अगर आप अपने स्मार्टफोन में भुगतान संबंधी जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो स्वयं के मोबाइल में मौजूद सॉफ्टवेयर (एप्पल पे या एंड्रॉइड पे) का इस्तेमाल करें. मोबाइल में मौजूद सॉफ्टवेयर में विश्‍वसनीयता की गारंटी होती है. इसके अलावा प्रतिष्ठित और आधिकारिक मोबाइल भुगतान ऐप कंपनियां आपके क्रेडिट कार्ड विवरण को संग्रहित करके नहीं रखती हैं.

6. केवल एक पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करें

भुगतान करने के लिए अपने मोबाइल पर अनेक पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की ग़लती न करें. ध्यान रखें कि आप जो भी पेमेंट ऐप डाउनलोड करते हैं, वे सुरक्षित व विश्‍वसनीय होना चाहिए. बहुत सारे पेमेंट ऐप का इस्तेमाल एक साथ करने से डाटा लीक होने की संभावना हो सकती है.

7. ऑफिशियल ऐप स्टोर से डाउनलोड करें

अगर आप अपने मोबाइल में पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की सोच रहे हैं, तो ऑफिशियल ऐप स्टोर, जैसे- गूगल प्ले स्टोर, एप्पल प्ले स्टोर और विंडोज़ स्टोर में जाकर ही डाउनलोड करें.

8. अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो

अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो तुरंत पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज़ करें और बैंक को भी सूचित करके अपनी ई बैंकिंग पर रोक लगवाएं, ताकि मोबाइल द्वारा किए जानेवाले भुगतान को रोका
जा सके.

9. मोबाइल पेमेंट करते समय क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें

क्रेडिट कार्ड की अपेक्षा, डेबिट कार्ड में धोखा होने की संभावना अधिक होती है. इसलिए मोबाइल द्वारा भुगतान करते समय के्रडिट कार्ड का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए.

10. अपने क्रेडिट कार्ड अकाउंट पर नज़र रखें

हमेशा अपने क्रेडिट कार्ड अकाउंट के लेन-देन को चेक करते रहें. चाहे आप मोबाइल द्वारा भुगतान कर रहे हों या नहीं. अगर आपको लगता है कि मोबाइल पेमेंट ऐप द्वारा किए लेन-देन के साथ कोई छेड़खानी की गई है, तो तुरंत अपना पासवर्ड बदल दें.

– देवांश शर्मा

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आजकल हर स्मार्ट फोन में जीपीएस नाम का ऐप होता है, लेकिन हम में से अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता है कि जीपीएस क्या होता है? और आप रोज़मर्रा की जिंदगी में इसका यूज़ किस तरह से कर सकते हैं? तो कोई बात नहीं. हम आपको बताते हैं कि जीपीएस का सही इस्तेमाल आप कैसे और कहां पर कर सकते हैं?

क्या है जीपीएस?

जीपीएस (ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम) एक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है, जिसका प्रयोग वाहन में ड्राइवर को रास्ते की जानकारी और उसकी ट्रैकिंग के लिए किया जाता है. इसके अतिरिक्त कोई अप्रत्याशित दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मदद के लिए पहुंचने पर भी जीपीएस काफ़ी मददगार साबित होता है. इसकी मदद से आप अपने वाहन पर नज़र रख सकते हैं. इसके द्वारा सही रास्ते का पता चलता है, यहां तक कि जीपीएस ड्राइवर को दाएं और बाएं मुड़ने के निर्देश भी देता है.

जीपीएस कैसे काम करता है?

जीपीएस डिवाइस एक सिम के ज़रिए सैटेलाइट से जुड़ा रहता है. इसके माध्यम से वह संदेशों का आदान-प्रदान करता है. आज सभी स्मार्टफोन जीपीएस से लैस हैं. जीपीएस को वाहन में हैंडल के पास या फिर किसी अन्य जगह पर सेट किया जा सकता है. स्मार्टफोन में मौजूद जीपीएस टेक्नीक से यूज़र अपने लोकेशन का पता लगा सकता है. जीपीएस डिवाइस सैटेलाइट से प्राप्त सिग्नल द्वारा उस जगह को मैप में दर्शाता है, जिसके द्वारा ड्राइवर अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकता है.

कैसे करें जीपीएस का इस्तेमाल?

–    जीपीएस को प्रयोग करने के लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में जीपीएस के ऑप्शन को ऑन करें

–    आप जिस स्थान पर जाना चाहते हैं, उस जगह का नाम नीचे सर्च बॉक्स में टाइप करें.

–    अगर आप अपनी लोकेशन की स्थिति जानना चाहते हैं, मोबाइल की स्क्रीन पर (मैप में) ग्रीन कलर का पॉइंट दिखाई देगा. मैप में जहां पर वह ग्रीन कलर बना होगा, वही पॉइंट आपकी लोकेशन होगी.

–    जीपीएस में अकांउट में अन्य सेटिंग ऑप्शन्स भी होते हैं, जैसे- आप अपनी पसंदीदा जगहों (एक ही शहर के होटल, रेस्टॉरेंट, पार्क, सिनेमा हॉल और मॉल्स आदि) सेट कर सकते हैं, ताकि शहर के किसी कोने में क्यों न हों, बस एक क्लिक करते ही आपको पता चल जाएगा कि आप उस लोकेशन से कितनी दूरी पर हैं.

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जीपीएस से कर सकते हैं आप ये 7 काम

फाइंड माईफोन: अधिकतर स्मार्टफोन में ये फीचर मौजूद होता है. इस ऐप के ज़रिए आप अपने फोन का लोकेशन ट्रैक कर सकते

हैं. अगर आपका फोन चोरी हो जाए या फिर कहीं छूट जाए, तो ऐसे में आप अपनी गूगल आईडी से लॉग इन करके अपने फोन को ट्रैक कर सकते हैं.

कार सेफ्टी: अगर आप अपनी कार को ट्रैक करना चाहते हैं, तो मैपमाईइंडिया की सहायता से कर सकते हैं.

की एंड वॉलेट ट्रैकिंग: अगर आप अपनी चाभियां और पर्स कहीं पर रखकर भूल जाते हैं, तो इस ट्रैकर की मदद से उन्हें बड़ी आसानी से ढूंढ़ सकते हैं.

फाइंड वेहिकल्स: आप अपने टू व्हीलर में ‘लेट्सट्रैक बाइक सीरीज़’ का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी सहायता से आप अपने बाइक की स्पीड मॉनिटर कर सकते हैं, पार्किंग नोटिफिकेशन रिसीव कर सकते हैं, फ्यूल-माइलेज आदि की डिटेल्स को ट्रैक कर सकते हैं. इसमें आप 24 घंटे की हिस्ट्री भी देख सकते हैं.

फॉर योर पेट्स: आप अपने पेट्स, जैसे- डॉग, कैट आदि को ट्रैक करना चाहते हैं, तो इसके लिए जीपीएस पेट ट्रैकर का यूज़ कर सकते हैं. इस ट्रैकर को आप अपने पेट के गले पर बांध दें, जिससे आप कभी उसका रियल टाइम लोकेशन और डिस्टेंस अपने मोबाइल पर देख सकते हैं.

फॉर योर किड्स: अगर आप अपने बच्चों पर या किसी अन्य व्यक्ति पर नज़र रखना चाहते हैं, तो ट्रैकआईडी या लेट्सट्रैक की मदद ले सकते हैं. इसे आप बच्चे/व्यक्ति के कपड़ों, बेल्ट आदि पर लगाकर उसकी लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं.

फाइंड शेयर योर लोकेशन: अपनी लोकेशन को किसी दूसरे व्यक्तिके साथ शेयर करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप गूगल मैप पर पहले अपनी लोकेशन को ट्रेस करें, फिर उसे पिन करके आप अपने ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं.

जीपीएस ऐप को 5 श्रेणी में बांटा जाता है

–   लोकेशन: स्थिति का निर्धारण करने के लिए.

–    नेविगेशन: एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए.

–    ट्रैकिंग के लिए: किसी वस्तु, पेट्स या व्यक्ति की निगरानी के लिए.

–    मैपिंग: दुनिया में कहीं भी जाने के लिए मैप बनाने के लिए.

–    टाइमिंग: सही समय के बारे में.

किन क्षेत्रों में जीपीएस का यूज़ किया जाता है?

एस्ट्रोनॉमी, ऑटोमेटेड वेहिकल्स, वेहिकल्स के नेविगेशन, मोबाइल फोन, ट्रैकिंग, जीपीएस एयर क्राफ्ट ट्रैकिंग, डिज़ास्टर रिलीफ, इमर्जेंसी रिलीफ, रोबोटिक्स और टेक्टोनिक्स आदि.

– नागेश चमोली

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ज़िंदगी में हर कोई कभी न कभी डिप्रेशन से गुज़रता ही है. यह स्थिति कभी-कभार हो, तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि यह ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो दिल का सुकून, ख़ुशी, उमंग-उत्साह सब कुछ छीन लेता है. मेट्रो सिटीज़ में तो यह जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाया जाए. ऐसे कई ऐप्स हैं, जो इसमें आपकी मदद करते हैं.

Top Apps To Combat Depression

हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं.

– डिप्रेशन बायो-सायको-सोशल प्रॉब्लम है यानी यह खानदानी भी हो सकता है, जो अवसादग्रस्त व्यक्ति व पारिवारिक-सामाजिक तनाव के कारण उत्पन्न होता है.

– शोध के अनुसार तीन में से दो वयस्क अपने जीवन में एक बार अवसाद से ग्रस्त ज़रूर होते हैं.

– 4% बच्चे भी टेंशन के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं.

– डिलीवरी व मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाएं हार्मोनल बदलाव के कारण डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं.

– डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन) के अनुसार, भारत में भी क़रीब 36% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.

– हमारे देश में टीनएज भी डिप्रेशन के शिकार हैं. देश की जनसंख्या 131.11 करोड़ है, जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के टीनएजर्स की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें, तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त हैं.

बेहतरीन ऐप्स जिनसे डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है

1. डिप्रेशन सीबीटी सेल्फ हेल्प गाइड (Depression CBT Self-Help Guide)

– यह ऐप डिप्रेशन के मरीज़ को बीमारी से उबरने व सही मार्गदर्शन देने में मदद करता है.

– इस ऐप में डिप्रेशन को कंट्रोल करने से जुड़े टिप्स और टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें डिप्रेशन मूड को मॉनिटर करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, क्लीनिकल डिप्रेशन व कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) से जुड़े लेख हैं.

2. स्टार्ट ऐप (Start App)

– कई बार हमें पता ही नहीं होता कि हमें डिप्रेशन की समस्या है.

– इस स्थिति में यह ऐप काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें डिप्रेशन टेस्ट की सुविधा से लेकर हर रोज़ आपके प्रोग्रेस का भी ट्रैक रखा जाता है.

– इसमें डिप्रेशन से जुड़ी मेडिसिन लेने के लिए अलर्ट भी है.

– इसके अलावा यह ऐप आप जो मेडिसिन ले रहे हैं, उसके फ़ायदे व साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बताता है.

– साथ ही इसमें मेडिकल प्रोफेशनल्स व फार्मासिस्ट द्वारा हर रोज़ डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी हैं.

– यह ऐप एंड्रायड व आईओएस यूज़र के लिए उपलब्ध है.

3. स्टॉप, ब्रीद एंड थिंक (Stop, Breathe & Think)

– यह ऐप टेंशन व डिप्रेशन को दूर करने में सहायक है. इसमें सांस किस तरह से लेनी चाहिए, इसके उपाय बताते हैं.

– ध्यान लगाने के लिए मार्गदर्शन भी किया जाता है.

– इस ऐप के ज़रिए आप मेडिटेशन से पहले व बाद में अपनी भावनाओं को भी चेक कर सकते हैं.

– इसे ख़ासतौर पर स्ट्रेस-डिप्रेशन, सेल्फ हीलिंग, सेल्फ मोटिवेशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

– यह आपके मूड के अनुसार मेडिटेशन टिप्स भी बताता है.

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Top Apps To Combat Depression
4. मूड टूल्स (MoodTools)

– यदि आप बहुत तनाव में हैं और लगातार अवसाद से घिर जाते हैं, तो यह मूड टूल्स आपकी काफ़ी मदद कर सकता है.

– इसमें कई रिसर्च सपोर्टेड टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें दिए गए थॉट डायरी टूल में आपके विचारों व सोच के प्रकार के अनुसार आपके मूड को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, के उपाय बताए गए हैं.

– इस ऐप के बिहेवियर एक्टिवेशन थेरेपी में किसी एक्टिविटीज़ से पहले व बाद की स्थिति को जांचा-परखा जाता है.

– साथ ही सेफ्टी प्लान को आत्महत्या सुरक्षा के नज़रिए से विकसित किया गया है.

– इस ऐप के ज़रिए आप डिप्रेशन के शिकार हैं या नहीं, इसके लिए पीएचक्यू 9 टेस्ट में पार्ट भी ले सकते हैं.

5. मेडिटेशन म्यूज़िक (Meditation Music)

– डिप्रेशन के कारण हद से ज़्यादा परेशान हैं, तो इस ऐप का सहारा ले सकते हैं.

– यह आपके मन को सुकून देने के साथ ही आराम भी देता है.

– ऐप में मेडिटेशन से जुड़ी उच्च स्तर के संगीत व दिल को सुकून देनेवाली धुनें भी दी गई हैं.

– इस ऐप से आपको नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद मिलेगी.

– साथ ही मेडिटेशन के लिए अलग-अलग साउंड भी हैं, जैसे- परफेक्ट रेन, सॉफ्ट पियानो, लेक, सनलाइज, हेवन साउंड, नेचर फॉरेस्ट मेलोडीज़ आदि.

इन सब के अलावा और भी कई ऐप हैं, जो डिप्रेशन के इलाज में कारगर हैं

6. पॉज़िटिव थींकिंग (Positive Thinking)- यह एंड्रॉयड ऐप पॉज़िटिव नज़रिया रखने में मदद करता है. ज़रूरत पड़ने पर यह दोस्ताना सलाह भी देता है.

7. डिप्रेशनचेक (Depressioncheck)- यह आईफोन ऐप न केवल आपकी बीमारी का कंप्लीट रिकॉर्ड रखता है, बल्कि डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी बताता है.

8. डिफीट डिप्रेशन (Defeat depression)– इसमें डिप्रेशन से छुटकारा पाने व निपटने के लिए उपयोगी टिप्स व जानकारियां मिल जाएंगी. सोशल मीडिया में फेसबुक पर भी डिप्रेशन, बेचैनी, मेंटल हेल्थ व बीमारी को दूर करने से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है. यहां पर अवसाद के अलावा दिमाग़ से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याओं के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं.

9. यूट्यूब यानी www.youtube.com पर ऐसे कई वीडियोज़ हैं, जिनकी मदद से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है.

10. माय थेरेपी (MyTherapy)- यह डिप्रेशन के लिए बेहतरीन डायरी ऐप है. ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉम्प्लिेमेंट्री मेडिसिन और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में किए गए रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन से लोगों को मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने, उसे जानने-समझने व ज़रूरी इलाज करने में मदद मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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आज की फास्ट लाइफ में हम सभी इस कदर बिज़ी रहते हैं कि ख़ुद के मनोरंजन के लिए अधिक समय ही नहीं निकाल पाते हैं. ऐसे में यदि हम अपने मोबाइल फोन पर ही फ्री ऐप्स के ज़रिए लाइव टीवी शोज़ एंजॉय कर सकें, तो क्या बात है. 

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1.  नेक्सजी टीवी ऐप के ज़रिए 140 से भी अधिक लाइव टीवी चैनल्स के कार्यक्रमों को देखने का आनंद उठा सकते हैं. इसमें हिंदी, मराठी, बंगाली से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक के चैनल्स हैं. कई सीरियल्स के स्पेशल कवरेज भी हैं. इसमें आप शॉर्ट मूवी का भी मज़ा ले सकते हैं.

2. टाटा स्काई एवरीवेयर टीवी ऐप के ज़रिए 80 लाइव टीवी चैनल्स को फ्री में देखने का आनंद उठा सकते हैं. इसके लिए अपने स्मार्ट डिवाइस में ऐप डाउनलोड करना होगा. फिर सर्विस को डिवाइस में एक्टिवेट करना होगा. इसके लिए टाटा स्काई की ओर से सब्सिक्रप्शन आईडी पर एक एसएमएस आएगा. इस एसएमएस की जानकारी को ऐप में डालने के बाद आप फ्री लाइव चैनल्स को एंजॉय कर सकेंगे.

3. डिश टीवी ने भी एक नया एप्लीकेशन लॉन्च किया है, जिससे स्मार्टफोन यूज़र्स अपने सेल फोन और टैबलेट लाइव टीवी देख सकेंगे. यह ऐप एंड्रॉयड और एप्पल दोनों ऐप स्टोर पर उपलब्ध हैं. इसमें 35 से अधिक लाइव चैनल्स को एंजॉय कर सकते हैं.  डिश टीवी ने अलग-अलग डिश टीवी पैक भी मोबाइल यूज़र्स की ज़रूरत के मुताबिक़दिए हैं.

4. रिलायंस जियो के फ्री डाटा और कॉलिंग सुविधा द्वारा भी आप फ्री लाइव टीवी देख सकते हैं. जियो के नए फीचर से यूज़र्स स्मार्टफोन पर छह हज़ार से अधिक फिल्में डाउनलोड कर सकते हैं और जब चाहे, अपनी पसंद की मूवी देख सकते हैं. जियो सिनेमा भी बेस्ट ऑप्शन है. इसमें क़रीब एक लाख से अधिक मूवीज़ हैं. इसे आप ऑफलाइन मोड में भी देख सकते हैं. यदि आप जियो यूज़र्स नहीं हैं, तो भी आप जियो की मूवी, लाइव टीवी का आनंद ले सकतेे हैं. इसके लिए आपको कंप्यूटर पर RemixOS डाउनलोड करना होगा. फिर ओएस को अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉल करना है. RemixOS एंड्रॉयड एम्यूलेटर एंड्रॉयड ऐप को कंप्यूटर पर चलाने की सुविधा देता है.

5. हॉट स्टार एप्लीकेशन काफ़ी समय से बेहद चर्चा में रहा है. यह एप्लीकेशन फ्री है और इस पर आप स्टार चैनल के सभी प्रोग्राम्स को भी फ्री में देख सकते हैं.  यदि आप चाहें, तो पुराने एपिसोड्स भी देख सकते हैं.

6. सोनी लाइव एप्लीकेशन में आप सोनी, सब टीवी और पल टीवी के सभी प्रोग्राम्स को अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं. इसकी सबसे अच्छी बात यह कही जा सकती है कि आप हाई डेफिनेशन में भी सीरियल को देख सकते हैं. इसमें आप अपना प्ले लिस्ट बना सकते हैं और वीडियो को फेवरेट में भी रख सकते हैं.

7. यूटीवी भी नेक्सजी टीवी की तरह भी मोबाइल फोन पर लाइव टीवी की सर्विस देता है. इससे आप 170 से भी अधिक भारतीय चैनल्स देख सकते हैं. एप्लीकेशन में ऑन डिमांड टीवी शोज़ के अलावा कई अन्य तरह की सेवाएं भी हैं. इसके साथ ही इसमें 1000 से भी अधिक बॉलीवुड यानी हिंदी मूवी फ्री में उपलब्ध हैं.

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– टाटा स्काई के डीटीएच सेवा का भी फ़ायदा उठाया जा सकता है. टाटा स्काई भी सेल फोन पर एप्लीकेशन मुहैया करवाती है. इस एप्लीकेशन के माध्यम से आप अपने फोन पर लाइव टीवी देख सकते हैं. इसमें ऑन डिमांड वीडियो की भी सेवा है, जहां आप अपने फोन के लिए भी सौ से अधिक वीडियो स्ट्रीम कर देख सकते हैं. ऑन डिमांड वीडियो के तहत आप पांच दिन पुराने एपिसोड को भी अपने मोबाइल फोन कर देख सकते हैं. यह आपके टाटा सेट टॉप बॉक्स से कनेक्ट भी होता है और इस एप्लीकेशन के ज़रिए उसे कंट्रोल भी कर सकते हैं.

– इन सब के अलावा शोबॉक्स, व्यूस्टर, क्रैकल फ्री, फ्लिप्स, स्नैग फिल्म्स जैसे ऐप्स के ज़रिए फ्री में देश-विदेश के लाइव टीवी प्रोग्राम्स, मूवी आदि देख सकते हैं.

– सावित्री गुप्ता

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दिन-रात फोन से चिपके रहने की आदत भले ही आपको दूर-दराज़ बैठे लोगों से जोड़ रही हो, लेकिन ये आपकी आंखों की सेहत बड़ी तेज़ी से बिगाड़ रहा है. आंखों का एकटक मोबाइल फोन पर टिके रहना, उसकी सेहत को डैमेज कर रही है. आइए, हम आपको बताते हैं कि कैसे मोबाइल फोन बहुत स्मार्टली आपकी आंखों को ख़राब कर रहा है. स्मार्टफोन की स्क्रीन आंखों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है. स्मार्टफोन के आने से आंखों की परेशानी में इज़ाफ़ा हुआ है. नई-नई तरह की बीमारियां सुनने और देखने को मिल रही हैं.

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रेटिना पर अटैक

रात में जब आप अपना फोन यूज़ करते हैं, तो उससे निकलनेवाली लाइट सीधे रेटिना पर असर करती है. इससे आपकी आंखें जल्दी ख़राब होने लगती हैं. देखने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है.

ड्राईनेस

दिनभर काम करते रहने से आंखों को आराम नहीं मिलता, ऐसे में रात में भी सोने की बजाय फोन पर देर तक बिज़ी रहना आंखों को ड्राई कर देती है. इससे आंखों में खुजली और जलन होने लगती है. लगातार ऐसा करने से आंखों की अश्रु ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

आईसाइट डैमेज

क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन हमेशा के लिए आंखों की रोशनी छीन सकता है? जी हां, कई शोधों में ये बात साबित हो चुकी है. फोन से निकलनेवाली ब्लू लाइट (कएत श्रळसहीं) आंखों को पूरी तरह से डैमेज कर सकती है.

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आंखों से पानी गिरना

घंटों स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों से पानी गिरने लगता है. ऐसा मोबाइल से निकलनेवाली किरणों के कारण होता है. लगातार मोबाइल पर देखते रहने से पलकों का झपकना लगभग कम हो जाता है. इससे आखों को आराम नहीं मिलता और आंखों से पानी गिरने लगता है.

चश्मा लगना

ये मोबाइल फोन आपको भले ही सोशल साइट्स से जोड़कर सुकून पहुंचाते हों, लेकिन आपकी आंखों पर जल्द ही चश्मा चढ़ा देते हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे आंखों का नंबर बढ़ने लगता है और पतला चश्मा मोटा होने लगता है. कुछ सालों के बाद आपको आंखों का ऑपरेशन तक करवाना पड़ सकता है.

पुतलियों का सिकुड़ना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग करने से न केवल पलक झपकाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, बल्कि आंखों की पुतलियां भी सिकुड़ने लगती हैं. आंखों की नसें सिकुड़ने लगती हैं. इससे आंखों की रोशनी के साथ सिरदर्द की समस्या भी होने लगती है.

आंखों का लाल होना

लगातार फोन की स्क्रीन पर देखते रहने से आंखों का स़फेद भाग लाल होने लगता है. आईड्रॉप डालने से भी ये समस्या कम नहीं होती. लाल होने के साथ ही आंखें हमेशा सूजी हुई भी लगती हैं.

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टेंपरेरी ब्लाइंडनेस

लगातार फोन की तरफ़ देखने से जब अचानक आप कहीं और देखते हैं, तो कुछ देर के लिए सब ब्लैक दिखता है. आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. यह आपकी आंखों के लिए अच्छा संकेत नहीं है.

धुंधला दिखना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग आपको इतना नुक़सान पहुंचाता है कि आपको धुंधला दिखने लगता है. अंग्रेज़ी में इसे ब्लर्ड विज़न कहते हैं. यह प्रक्रिया आगे चलकर गंभीर हो जाती है और आपको दिखने में समस्या होने लगती है

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कैसे बचें?

अगर आप चाहते हैं कि आपकी आंखें ख़राब न हों, तो आप नीचे दिए गए सुझावों को अपनाएं.

दूरी मेंटेन करें

आप अचानक तो फोन का यूज़ करना बंद या कम नहीं कर सकते. ये सच भी है लेकिन फोन को आंखों से दूर रखकर कुछ हद तक आंखों को सेफ रख सकते हैं. जब भी फोन यूज़ करें इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि फोन आंखों के बेहद क़रीब न हो.

20 सेकंड का ब्रेक

दिनभर ऑफिस में कंप्यूटर पर काम करने के बाद वैसे ही आपकी आंखें थक जाती हैं. ऐसे में फोन की स्क्रीन से चिपके रहने पर आंखों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. जब भी फोन इस्तेमाल करें, तब हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें. यह ब्रेक आंखों को रिलैक्स करेगा.

नो नाइट वॉच

क्या आपको नहीं लगता कि रात सोने के लिए बनी है. दिनभर काम और रात को फोन पर चैटिंग, वीडियो वॉचिंग आदि आपको कितना थका देता है. ख़ुद ही एक लिमिट तय करें. रात में एक समय के बाद फोन यूज़ न करें. देर रात तक फोन यूज़ करने से नींद ख़राब होती है और बाद में ये आदत-सी हो जाती है. इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल, पफनेस आदि होने के साथ आईसाइट पर भी बुरा असर होता है.

लाइट कम करें

शुरुआत में फोन की लत से बचना बहुत मुश्किल है. हां, धीरे-धीरे इस आदत को आप कम कर सकते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि फोन यूज़ करते समय फोन की ब्राइटनेस कम करें. इससे आंखों पर प्रेशर कम पड़ेगा.

– श्‍वेता सिंह

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पल-पल की ख़बर देनेवाला सोशल मीडिया (Social Media) आज युवाओं के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. इसके प्रभाव से कोई भी अछूता नहीं है. सोशल मीडिया जहां एक ओर हमें जोड़ने का काम करता है, वहीं कुछ धोखेबाज़ व आपराधिक क़िस्म के लोग इसका दुरुपयोग अपने फ़ायदे के लिए भी करते हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते समय ऐसी ग़लतियां न करें, जिनका ख़ामियाज़ा आपको भविष्य में भुगतना पड़े.

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  1. सोशल मीडिया पर एकसाथ ढेरों फोटोज़ शेयर न करें. अक्सर लोग इस तरह की ग़लतियां करते हैं. किसी के पास इतना समय नहीं होता है कि वह आपकी इतनी फोटोज़ के लिए ख़ास समय निकाले. आपके फ्रेंड्स व रिश्तेदार भी केवल चुनिंदा और अच्छी फोटोज़ देखना ही पसंद करते हैं.
  2. सोशल साइट पर अपने अंतरंग व भद्दे फोटोज़ शेयर न करें, जिससे आपके फ्रेंड्स व रिश्तेदार असहज महसूस करें.
  3. अक्सर लोग घूमने के लिए जाते समय सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस डालते हैं, जो बहुत बड़ी ग़लती है. हो सकता है, कुछ आपराधिक क़िस्म के लोग आपके स्टेटस पर अपनी पैनी नज़र रखे हों. आपके स्टेटस को पढ़कर आपकी गैरहाज़री में वे आपके घर पर किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं.
  4. अक्सर लोग सोशल मीडिया (फेसबुक आदि) पर धर्म व भगवान के नाम की पोस्ट शेयर करते हैं. इस तरह की पोस्ट को लाइक करने की ग़लती न करें. जैसे ही आप उस पोेस्ट को लाइक करेंगे, पोस्ट करनेवाले को नोटिफिकेशन मिलेगा और वह आपके नाम पर ‘क्लिक’ करके आपका प्रोफाइल देख सकता है. फोटो सेक्शन में जाकर आपकी अच्छी फोटोज़ को ‘सेव’ करके अश्‍लील वेबसाइट पर अपलोड करके उनका दुरुपयोग कर सकता है.
  5. इसके अलावा आपकी फोटो के साथ अश्‍लील व गंदे टाइटल लगाकर भी वह अश्‍लील वेबसाइट पर अपलोड कर सकता है.
  6. कुछ धोखेबाज़ व घटिया मानसिकतावाले लोग फोटोशॉप में जाकर आपकी फोटो को आपत्तिजनक स्थिति में लगाकर भी दूसरी साइट्स पर अपलोड कर सकते हैं.
  7. सोशल मीडिया पर धर्म से जुड़ी बातें/शहीद सैनिक/कोई प्यारा-सा बच्चा, जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया जाता है, इस तरह की पोस्ट को लाइक और शेयर करने की भूल न करें.
  8. इस तरह की पोस्ट आपकी भावनाओं का लाभ उठाने के लिए की जाती है. आप इमोशनल होकर या देशभक्ति की भावना दिखाने के उद्देश्य से इन पोस्ट को लाइक और शेयर करके भूल जाते हैं, लेकिन इस तरह की पोस्ट करनेवाले धोखेबाज़ लोगों व कंपनियों को आपका प्रोफाइल मिल जाता है और वे आपकी फोटोज़ को सेव करके उनका दुरुपयोग भी कर सकते हैं.
  9. कुछ फ़र्जी कंपनियां अपनी मार्केटिंग के लिए आपकी फोटोज़ का दुरुपयोग कर सकती हैं. इन कंपनियों का कंटेंट कुछ ख़ास नहीं होता, लेकिन विज्ञापन होने की वजह से ये कंपनियां भरपूर कमाई करती हैं. इसलिए अपनी सेटिंग में अपनी फोटोज़ को ‘पब्लिक’ करने की ग़लती न करें.
  10. इसी तरह से सोशल मीडिया पर सस्ते दर पर लोन लेने और घर ख़रीदनेवाली पोस्ट्स आती रहती हैं. इन पोस्ट्स को लाइक और शेयर करने से बचें.
  11. न ही अपने जानकारों व रिश्तेदारों के साथ इन पोस्ट्स को शेयर करें.
  12.  इस तरह की पोस्ट में आपकी पर्सनल डिटेल्स (नाम, पता, मोबाइल नंबर, बैंक
    अकाउंट नंबर, पिन नंबर आदि) मांगी जाती हैं और आपके द्वारा पर्सनल डिटेल्स शेयर करने पर सारी जानकारी उनके डाटा बेस में चली जाती है. फिर वे बार-बार एसएमएस भेजकर परेशान करते हैं.
  13. अकाउंट नंबर और पिन नंबर शेयर करने पर फ्रॉड लोग आपके अकांउट से रुपए भी निकाल सकते हैं.
  14. सोशल मीडिया पर अंजानी डेटिंग साइट्स की भरमार रहती है. इन साइट्स पर ग़लती से भी क्लिक न करें. ये फेक डेटिंग साइट्स लड़कियों व महिलाओं की फोटो को सेव करके उनका मिसयूज़ करती हैं.
  15. सोशल साइट्स पर कोई विवादास्पद फोटो शेयर न करें, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों.
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सोशल मीडिया अलर्ट
  • ध्यान रखें, अपनी फोटो को केवल अपने फैमिली व फ्रेंड्स के साथ ही शेयर करें.
  • इसी तरह से आपकी पुरानी फोटोज़ का दुरुपयोग न हो सके, उनकी शेयरिंग को भी ‘फ्रेंड्स’ कर दें.
  • फैमिली व पर्सनल फोटोज़ को स़िर्फ ‘कस्टमाइज़्ड’ ग्रुप में ही शेयर करें.
  • हमेशा अपनी फोटोज़ और जानकारियां पोस्ट करते समय ‘फ्रेंड्स’ सिलेक्ट करें ‘पब्लिक’ नहीं.
  • अनजान फोटोज़ या पोस्ट पर लाइक, शेयर या कमेंट न करें.
  • इस तरह की पोस्ट को नज़रअंदाज़ करें.
  • अपने दोस्तों व रिश्तेदारों को भी इस तरह की पोस्ट पर लाइक, शेयर या कमेंट करने के लिए मना करें.
  • उन्हें भी इस तरह की पोस्ट या मैसेज को आगे फॉरवर्ड करने से रोकें.
  • सोशल साइट्स पर अपनी पर्सनल डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करें.
  • ऑनलाइन शॉपिंग करते समय पर्सनल डिटेल्स सोच-समझकर शेयर करें.
  • शेयर करने से पहले कंपनी की विश्‍वसनीयता ज़रूर जांच लें.
  • ऐसे पोस्ट व मैसेज आगे शेयर न करें, जिसमें ज़रूरत से ज़्यादा कम क़ीमत पर सामान बेचने का दावा किया जा रहा हो.
  • अगर किसी अंजान नंबर से कोई मैसेज आया हो, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें.
– पूनम नागेंद्र शर्मा

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लोगों के पास सब कुछ होने के बाद भी चैन की नींद (Sleep) नहीं है. अक्सर आप भी लोगों को कहते सुनते होंगे कि रात में नींद नहीं आती. इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन उन कारणों से ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है कि रात में चैन की नींद आए, ताकि आप स्वस्थ रह सकें. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आप चैन की नींद ले सकते हैं.

Best Sleep Tracker Apps

स्लीप साइकल (Sleep Cycle

चैन की नींद और अच्छी सुबह के लिए आप स्लीप साइकल ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड करें. ये ऐप स्लीप साइकल थियरी यूज़ करते हुए आपको साउंड स्लीप देता है और सुबह सही समय पर जगाता है. आपके स्लीपिंग पैटर्न को यह रिकॉर्ड करता है फिर उसके अनुसार काम करता है.

स्लीप ऐज़ एंड्रॉयड (Sleep As Android)

रात में सोते समय आपकी बॉडी एक निश्‍चित स्लीप साइकल कंप्लीट करती है. लाइट स्लीप, डीप स्लीप और आरईएम स्लीप. इस ऐप में ऐक्सेलरोमीटर सेंसर लगा होता है, जो आपकी नींद के ग्राफ को रात में रिकॉर्ड करता है. सुबह जब आप लाइट स्लीप में होते हैं, तभी ये ऐप आपको जगाता है.

स्लीपबोट (SleepBot)

स्लीपबोट पूरी तरह से फ्री ऐप है. यह आईओएस और एंड्रॉॅयड दोनों के लिए फ्री है. आपकी स्लीपिंग एक्टिविटी के अनुसार ये ऐप काम करता है.

स्लीप टाइम प्लस (Sleep Time +)

स्लीप ट्रैकिंग और स्मार्ट अलार्म क्लॉक का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है स्लीप टाइम प्लस ऐप. यह आपके क्वालिटी ऑफ स्लीप को मेज़र करके सुबह सही समय पर उठाता है.

स्लीप साइकल पावर नैप (Sleep Cycle Power Nap)

अगर आपको लगता है कि जितनी नींद आपको चाहिए, वो आप नहीं ले पाए हैं, तो यह ऐप आपको पावर नैप देने में यूज़फुल है. यह ऐप यूज़र्स को शॉर्ट और कंफर्टेबल नैप देने में हेल्पफुल होता है. इस ऐप में आप पावर नैप (20 मिनट्स), रिकवरी नैप (45 मिनट्स) या फुल स्लीप साइकल (90 मिनट्स) सेट कर
सकते हैं.

गो टु बेड (Go To Bed)

ये एक ऐसा ऐप है, जो आपको समय से पहले रात में सोने के लिए रिमाइंड करवाता है. इस ऐप में आप अपना आइडियल बेड टाइम डालें. उस समय के 30 मिनट पहले यह ऐप आपको रिमाइंड करवाएगा.

स्लीप (Sleep)

इस ऐप में 100 से भी ज़्यादा सूदिंग साउंड्स, रिलैक्स करनेवाला म्यूज़िक, लोरियां होती हैं, जो अच्छी नींद लाने में सहायक होते हैं. इस ऐप मेें स्लीप टाइमर के साथ वेकअप टाइमर भी होता है.

नॉइज़्ली (Noisli)

यह ऐप आपको रिलैक्स करके दिमाग़ को शांत करता है, जिससे आपको अच्छी नींद आती है. इसमें कई तरह की सॉफ्ट नॉइज़ होती हैं, जो सोने में मदद करती हैं.

ज़िज़्ज़ (Pzizz)

डिस्ट्रेस और रीएनर्जाइज़ करने के साथ ही ये ऐप आपको साउंड स्लीप देता है. कई तरह के स्लीपिंग साउंड ट्रैक्स सुनाकर यह ऐप आपको अच्छी नींद देता है. इस ऐप में आप सुनने का समय (10 मिनट्स-10 घंटे तक) सेट कर सकते हैं.

स्लीप जीनियस (Sleep Genius)

इस ऐप को बनानेवाले इसे बेस्ट स्लीप ट्रैकर कहते हैं. उनके अनुसार ये एक ऐसा ऐप है, जिसकी ज़रूरत दुनिया को है, क्योंकि तनाव के चलते लोगों में नींद की कमी होने लगी है, जिससे कई तरह की बीमारियां हो रही हैं. इस ऐप में बेहतरीन साउंड ट्रैक्स, लोरियां और रिवाइव साइकल अलार्म हैं.

रिलैक्स एंड स्लीप वेल (Relax & Sleep Well)

नींद की गोली खाने की आदत छोड़िए और स़िर्फ अपने मोबाइल पर डाउनलोड कीजिए रिलैक्स एंड स्लीप वेल ऐप. इससे आपको मिलेगी चैन की नींद और सुबह होगी ताज़गीभरी. आपको बता दें कि यह ऐप पूरी तरह से फ्री है और इसे आईओएस और एंड्रॉयड, दोनों में डाउनलोड किया जा सकता है.

– श्‍वेता सिंह

कई बार अपनी बात सही ढंग से न कह पाने… सामनेवाले शख़्स को न समझ पाने के कारण हमारे रिश्तों में दरार आ जाती है. अब इन मामलों में आपकी मदद करेंगे मोबाइल ऐप्स (apps) और आपके रिश्ते (relationship) को बनाएंगे रिफ्रेशिंग और फॉरएवर यंग. कुछ कहने, ख़ासकर पत्र, ईमेल, सोशल साइट्स पर अपनी बात को सही तरी़के से न कह पानेवालों के लिए एक ख़ुशख़बरी है कि वे ऐप के ज़रिए अपनी इस कमज़ोरी से निजात पा सकेंगे. यूं देखा जाए, तो वर्तमान समय में हम एक-दूसरे से आमने-सामने कम ही बात कर पाते हैं. हमारी अधिकतर बातें ईमेल, चैटिंग, फेसबुक, टेक्स्ट मैसेज, वीडियो चैटिंग आदि से होती है. ऐसे में यह बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप इलेक्ट्रॉनिक टूल्स की मदद से ही सही, पर अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखें. आइए, उन ऐप के बारे में जानते हैं, जो इनमें आपकी मदद कर सकते हैं.

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‘इमोशनल लेबर’

अमेरिका के जोआन मैक्नील ने ‘इमोशनल लेबर’ नाम का एक प्लगइन फीचर डेवलप किया है, जो जीमेल के साथ कनेक्टेड है. यह आपके मैसेज, ईमेल के मैटर को न केवल बेहतर बनाता है, बल्कि सामनेवाले पर इम्प्रेशन भी डालता है.
– इमोशनल लेबर आपके मैटर में फेर-बदल कर, उसमें ढेर सारे डॉट्स, एक्सक्लेमेशन मार्क, प्रश्‍नचिह्न आदि लगाकर आपकी बात को प्रभावशली ढंग से रखता है.
– मैटर में तरह-तरह के इमेजेज़, फेसेस यानी इमोजी आदि का उपयोग करता है, जिससे आपकी बातें सामनेवाले शख़्स को अधिक प्रभावित कर सकें.
– यानी आप कह सकते हैं कि इमोशनल लेबर आपके इमोशन को बेहतर तरी़के से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश
करता है.
– इस ऐप की कामयाबी ने यह साबित कर दिखाया है कि आज अधिक से अधिक लोग अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने की ख़्वाहिश रखते हैं, फिर चाहे वो गर्लफ्रेंड को मनाना हो, ईमेल के ज़रिए बीमार दोस्त का हालचाल जानना हो या फिर पत्नी की ग़ैरज़रूरी डिमांड को ख़ूबसूरती से इंकार करना हो… आपके हर तरह की भावनाओं को शब्दों का ख़ूबसूरत जामा पहनाने में यह ऐप आपकी मदद करता है.

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‘क्राउडपायलट’

कैलिफोर्निया यूनिवसिर्टी की प्रोफेसर लॉरेन मैकार्थी ने भी ‘क्राउडपायलट’ नामक ऐप (app) तैयार किया है. इस ऐप की ख़ासियत-
– यह आपको बताता है कि आपका बिहेवियर कैसा है और आपको अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र, प्रेमिका, पत्नी आदि के साथ किस तरह व्यवहार करना चाहिए.
– आपको अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या करना है और क्या नहीं
करना है.
– यदि आप डेट पर जा रहे हैं, तो आपको उस समय किस तरह की बातें
करनी चाहिए.
– इस ऐप के ज़रिए आप अपने दोस्त और अजनबियों से जुड़े रहते हैं.
– लॉरेन ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी बनाया है, जो लोगों के बीच काफ़ी मशहूर रहा.

‘यूएसप्लस’

लॉरेन मैकार्थी ने ही अपने मित्र काइल मैक्डॉनल्ड के साथ मिलकर ‘यूएसप्लस’ नाम से एक और ऐप बनाया है.
– यह ऐप वीडियो चैटिंग के दौरान आपकी मदद करता है और सामनेवाले के चेहरे को पढ़कर यह बख़ूबी बता देता है कि अगला आपसे बात करके आनंदित हो रहा है
या निराश.
– यह ऐप काफ़ी मज़ेदार है. यह आपको दिलचस्प ढंग से यह बताएगा कि आपको किससे दोस्ती रखनी है और
किससे नहीं.
– जो ग़लत क़िस्म के दोस्त हैं या फिर बहुत बोर करते हैं, उनके फोन नंबर और ईमेल आईडी ये ऐप आपके फोन से हटा देगा.

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दिलचस्प ऐप्स (apps)

पीपलकेपीआर’

– ‘पीपलकेपीआर’ ऐप आपके स्मार्टफोन के जीपीएस डाटा और आपकी कलाई में बंधे वेयरेबल जैसे ऐप की सहायता से आपके रिश्ते को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

‘क्रिस्टलनोज़’

– ‘क्रिस्टलनोज़’ ऐप आपके लिंक्डइन अकाउंट को किस तरह से बेहतर बना सकते हैं के बारे में उपयोगी जानकारी देता है. साथ ही बिज़नेस में किस तरह से रिलेशन को मेंटेन करें यानी अपने रिश्ते को किस तरह मज़बूत बनाएं, इसके लिए ज़रूरी गाइडेंस देता है.

– रुचि गुप्ता

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दिनोंदिन सोशल मीडिया का क्रेज़ युवाओं में तेज़ी से ब़ढ़ता जा रहा है. अपनी हर छोटी से छोटी पर्सनल बातों और गतिविधियों से फैमिली व फ्रेंड्स को रू-ब-रू करना उनकी आदत बनती जा रही है. मिनट-मिनट की अपडेट्स देकर वे अपनी फैमिली व फ्रेंड्स के साथ संवाद तो क़ायम रख सकते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि कोई अजनबी शख़्स उनकी प्रोफेशनल और पर्सनल प्राइवेसी में सेंध लगा रहा है, जिससे वे अंजान हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आपकी प्राइवेसी में किसी का कोई दख़ल न हो, इसलिए ज़रूरी है कि ऑनलाइन प्राइवेसी का ध्यान रखा जाए. कैसे, आइए जानें? social networking sites

social

फेसबुक

गोपनीयता की जांच करने के लिए अपने पीसी वेब ब्राउज़र में फेसबुक पेज खोलें. फेसबुक मेनू बार (फेसबुक पर दिखनेवाली ब्लू पट्टी) के राइट कॉर्नर में दिए लॉक सिंबल (प्राइवेसी शॉर्टकट) पर जाएं. क्लिक करने पर Privacy Check-up आएगा, जिसके 3 स्टेप्स हैं:

 पहला स्टेप

आपकी पोस्ट कौन-कौन देख सकते हैं: यहां पर क्लिक करने पर यदि “Public’ आता है, तो इसका अर्थ है कि इंटरनेट पर मौजूद हर व्यक्ति आपकी पोस्ट देख सकता है. इसलिए वहां पर “Friends’ ऑप्शन सिलेक्ट करें. इससे आपके फ्रेंड्स ही देख सकते हैं.

दूसरा स्टेप

चेक करें कि कौन से ऐप्स आपकी टाइमलाइन पर इंफॉर्मेशन पोस्ट कर सकते हैं: यहां पर दिए गए ऑप्शन्स में से “Only Me’ सेट करें.

तीसरा स्टेप

अपने प्रोफाइल (ईमेल एड्रेस, बर्थडे और रिलेशनशिप स्टेटस) को दोबारा चेक करें: जिसमें फे्रंड्स को आपकी विज़ीबिलिटी दिखाई दे, अपनी कौन-सी पोस्ट गोपनीय रखना चाहते हैं- इनका सिलेक्शन करें.

कौन-से फे्रंडस आपसे कॉन्टैक्ट करना चाहते हैं, पहले उसे कंट्रोल करें.

– क्लिक करें Privacy Shortcut >Who Can Contact Me?

– वहां पर दिए गए ऑप्शन पर क्लिक करें कि आपको कौन-कौन लोग फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भेज सकते हैं. इसके लिए Privacy Shortcut >Who Can Contact Me? को सिलेक्ट करें.

जो ऐप्स आपके बारे में जानकारी देते हैं, उन्हें चेक करें
– पीसी वेब ब्राउज़र में www.facebook.com/setting/?tab=application पर जाएं.

– Logged in with Facebook पर क्लिक करें.

– किसी ऐप पर क्लिक करके चेक करें कि आपने कौन-सी इंफॉर्मेशन (अपनी प्रोफाइल डिटेल्स, फें्रड लिस्ट आदि) शेयर की है, इस ऐप के ज़रिए आप यह जान सकते हैं कि किसने आपकी पोस्ट देखी है और किसने आपको नोटिफिकेशन भेजा है.

कैसे चेक करें कि लोग आपके बारे में क्या कहते हैं?

– फेसबुक मेनू बार के राइट कॉर्नर के आख़िर में प्राइवेसी शॉर्टकट के बाद आपको Triangular drop-down list (ट्रायएंगुलर ड्राप-डाउन लिस्ट) दिखाई देगी. इस पर क्लिक करने पर कई ऑप्शन्स मिलेंगे. उनमें से “Activity Log’ को क्लिक करें.

– फिर लेफ्ट साइडबार में जाकर “Timeline Review’ पर क्लिक करें. फिर अप्रूव/रिजेक्ट या ऐड/इग्नोर का ऑप्शन आएगा.

– फिर Tag Review को क्लिक करके अपने टैग्स को मैनेज करें.

– अंत में, “Post you are Tagged in’ में क्लिक करें. इसमें क्लिक करने पर आप सभी पोस्ट को देख सकते हैं, जिन्हें आपने टैग-अनटैग किया है.

गूगल: गोपनीयता की जांच करने के लिए

– myaccount.google.com/privacycheckup पर जाएं.

– आप Google+ पर कौन-सी इंफॉर्मेशन दूसरों के साथ शेयर करना चाहते हैं. फिर “Dont feature my publicly shared Google+Photos as background
images को सिलेक्ट करें.

– उसके बाद “Edit Your Shared Endorsement Setting’ पर क्लिक करें. वहां पर दिए गए ऑप्शन को अनचेक करें.

– फिर उन लोगों को allow/disallow करें, जो Google पर आपकी पर्सनल
इंफॉर्मेशन को देख रहे थे और आपका फोन नंबर सर्च कर रहे थे.

– इसी तरह से यूट्यूब पर भी आप अपनी गोपनीयता बनाए रख सकते हैं. उसके लिए Manage your Google Photos Settings पर क्लिक करके उसे डिसेबल करें.

ऐप्स और साइट्स की प्राइवेसी को कैसे कंट्रोल करें?

– myaccount.google.com/security#connectedapps पर जाएं.

– “Manage app’ को क्लिक करें. इससे मालूम चलेगा कि कौन-से ऐप्स आपके गूगल अकाउंट से कनेक्टेड हैं.

– जिन ऐप्स को आप ज़्यादा यूज़ नहीं करते, उन्हें डिलीट करने के लिए रिमूव पर क्लिक करें.

– अंत में Allow Less Secure Apps सेट करके उसे “OFF’ करें.

ट्विटर: गोपनीयता की जांच करने के लिए

– twitter.com/setting/security पर जाएं और Privacy सेक्शन पर स्क्रोल करें.

– Photo Tagging पर क्लिक करें कि कौन-कौन आपकी फोटो को टैग कर सकते हैं?

– फिर Tweet Privacy को लॉक करें. इससे आपकी पोस्ट को केवल आपके द्वारा अप्रूव्ड फॉलोवर्स ही देख पाएंगे.

– Tweet Location को डिसेबल करें. चाहें, तो आप अपने पिछले ट्वीट के लोकेशन संबंधी डाटा को भी डिलीट कर सकते हैं.

– यह जानने के लिए कि ट्विटर पर कौन आपको, आपका फोन नंबर और ईमेल एड्रेस सर्च कर रहा है, इसके लिए Discoverability को सेट करें.

– Personalization को डिसेबल करें. ऐसा करने पर कोई भी आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री को नहीं देख पाएगा.

– Promote Content को भी डिसेबल करें, जिसमें आपके पर्सनल इंफॉर्मेशन और इंट्रेस्ट बेस्ड विज्ञापन दिखाई देते हैं.

– फिर Direct Message में जाकर “receive direct messages from
anyone’ ऑप्शन को डिसेबल करें.

ऐप्स को एक्सेस करें

– twitter.com/setting/application पर जाएं.

– अपने ट्विटर अकाउंट पर जाकर “Revoke access’ पर क्लिक करके अनट्रस्टेड ऐप्स एंड सर्विस को स्टॉप करें, जिन्हें आपने कभी-कभी एक्सेस किया हो.

इंस्टाग्राम पर गोपनीयता की जांच

कंट्रोल करें कि कौन आपकी पोस्ट देख रहा है?

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर “Private>’ सेट करने के लिए: अपने इंस्टाग्राम मोबाइल ऐप को ओपन करें. Profile टाइप करने पर तीन वर्टिकल
डॉट्स दिखाई देंगे फिर Options में जाकर Private Account सेट करें. अब
फॉलोवर्स को आपकी इंस्टाग्राम फीड देखने के लिए आपके अप्रूवल की
ज़रूरत होगी.

टैग्ड को कैसे कंट्रोल करें?

– अपनी फोटो को अनटैग करने के लिए: इंस्टाग्राम ऐप में फोटो पर क्लिक करें. फिर Options>Photo Options>Remove Tag करें.

– अपनी सभी फोटोज़ को टैग करने के लिए Profile>Photo of you>Options करें.

यहां पर आप मैन्युअली भी अपनी इच्छानुसार किसी भी फोटो को टैग कर सकते हैं. इसके लिए Tagging Options>Add Manually करना होगा. इसके अलावा, आप उन सभी फोटोज़ को रिमूव कर सकते हैं, जो आपने कुछ समय पहले/हाल ही में टैग की हैं. इसके लिए आपको Profile>Photo of you>Options>Hide Photo करना होगा.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

स्मार्टफोन और कंप्यूटर्स ने हमारे काम को बहुत हद तक आसान बना दिया है. लेटेस्ट फ्री ऐप्स को यूज़ करके हम कम समय में अधिक काम कर सकते हैं. आइए जानें, ऐसे ही कुछ ऐप्स और टाइम सेविंग ट्रिक्स के बारे में.

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स्पैम को डिलीट करें

रोज़ाना ढेरों आनेवाले मेल को एक-एक करके डिलीट करना थोड़ा मुश्किल व बोरिंग काम है. अब इस बोरिंग काम को आसान बनाने के लिए आप अपने स्पैम बॉक्स में जाकर ‘स्पैम फिल्टर’ बना सकते हैं या फिर www.unroll.me में जाकर ‘फ्री अनरोल’ सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह सर्विस ईमेल इनबॉक्स को कुछ ही मिनटों में स्कैन कर देती है और उन लोगों की लिस्ट शो करती है, जो आपको बार-बार मेल भेजते हैं. इस सर्विस का इस्तेमाल करके उन अनवॉन्टेड मेल्स को अनसबस्क्राइब कर सकते हैं, जिनकी आपको ज़रूरत
नहीं है.

मोबाइल कैमरे का सही प्रयोग करें

विदेश यात्रा के दौरान यदि आपको उस देश की भाषा, वहां पर लिखे नोटिस व साइन बोर्ड को समझने में परेशानी हो रही हो, तो अपने मोबाइल में ‘गूगल ट्रांसलेट ऐप’ डाउनलोड करें. इस ऐप में सोर्स और आउटपुट लैंग्वेज को सिलेक्ट
(उदाहरण: जर्मन टू इंग्लिश) करने के बाद कैमरा आइकॉन को क्लिक करें. इससे आपका फोन कैमरा साइन बोर्ड की तरफ़ संकेत करेगा और ऑटोमैटिकली कुछ ही मिनटों में लैंग्वेज इंग्लिश में ट्रांसलेट हो जाएगी. इस फीचर के लिए आपके मोबाइल में 3G और 4G डाटा कनेक्शन होना ज़रूरी है, तभी यह सुचारु रूप से काम करेगा.

ऐड को ब्लॉक करें

मोबाइल पर ब्राउज़ करते समय हमें कई बार फुल पेज ऐड दिखाई देता है, तो कभी कोई ऐड लगातार पॉपअप हो रहा है या फिर कोई ऑटो प्ले वीडियो ऐड होता है. यदि आप चाहते हैं कि आपके मोबाइल पर ये ऐड न दिखाई दें, तो ङ्गऐड ब्लॉकर्सफ की मदद से आप इन्हें ब्लॉक कर सकते हैं. एंड्रॉयड फोन में ईवाईईओ (EYEO) में ब्राउज़ करके ‘ऐडब्लॉक्स’ डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकते हैं. इसी तरह से एप्पल आईफोन में भी ‘ऐड ब्लॉर्क्स’ डाउनलोड कर
सकते हैं.

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टाइपिंग स्पीड बढ़ाना सीखें

कंप्यूटर पर काम करते हुए दो तरीक़ों से आप अपनी टाइपिंग स्पीड बढ़ा सकते हैं: पहला- वेबसाइट और दूसरा सॉफ्टवेयर.

वेबसाइट्स

आजकल अनेक ऐसी वेबसाइट्स हैं, जिन पर टाइपिंग प्रैक्टिस करके आप स्पीड को बढ़ा सकते हैं. यदि आप टाइपिंग की शुरुआत कर रहे हैं, तो www.keybr.com आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है,क्योंकि इस प्रोग्राम में टाइप करते हुए आप अपनी टाइपिंग स्पीड और ग़लतियों की संख्या भी चेक कर सकते हैं. इसके अलावा www.typingweb.com में यूज़र्स के ‘बिगनर्स’, ‘इंटरमीडिएटेड’ और ‘एडवांस’ कोर्स हैं. इस प्रोग्राम में टाइप करके आप अपनी टाइपिंग स्पीड और ग़लतियां चेक कर सकते हैं.

सॉफ्टवेयर

www.nchsoftware.com में ‘क्विक प्रोग्राम सर्च’ को सिलेक्ट करके ‘कीब्लेज़-टाइपिंग ट्यूटर’ सर्च करें. यह प्रोग्राम बहुत ही ईज़ी टाइपिंग ट्यूटर सॉफ्टवेयर है, जिसमें लगातार टाइपिंग करके अपनी स्पीड बढ़ा सकते हैं. इस प्रोग्राम में यूज़र्स के लिए ‘बिगनर’ और ‘एडवांस’ कोर्स भी है. यह फ्री टाइपिंग ट्यूटर मैक और विंडो पीसी दोनों पर उपलब्ध है.

– पूनम नागेंद्र

Technology effecting on relationships
वर्तमान में पति-पत्नी, माता-पिता, बच्चे या फिर दोस्त ही क्यों न हों, सभी टेक्नोलॉजी (Technology effecting on relationships) की चपेट में इस कदर आ गए हैं कि वे चाहकर भी इससे निकल नहीं पा रहे. ऐसा क्यों? इसी विषय पर मनोचिकित्सक रेनू कुंदर से हमने बात की. उन्होंने कई छोटी-छोटी बातों के ज़रिए टेक्नोलॉजी के फ़ायदे-नुक़सान की पैरवी की.

* ग्लोबली हमें अपनी पोज़ीशन बनाए रखनी है, तो टेक्नोलॉजी को अपनाना ही पड़ेगा, वरना हम अपने ही दायरे में सिमट
जाएंगे. इसके प्रभाव और फ़ायदों को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स भी कम नहीं हैं.

* आज सोशल साइट्स पर एक्टिव रहना, अपडेट करते रहना, हर किसी का शग़ल बनता जा रहा है. इसका साइड इफेक्ट यह हो रहा है कि हमारे पास अपनों से बात तक करने का व़क्त नहीं मिल पाता है.

* पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हैं, तो वैसे ही वे एक-दूसरे को कम व़क्त दे पाते हैं, उस पर जो समय मिलता है, उसमें पति महाशय सोशल साइट्स में बिज़ी रहते हैं, वहीं पत्नी अपने फेवरेट सीरियल्स का मोह छोड़ नहीं पाती.

* आज बच्चों के पास पैरेंट्स ही नहीं, अपने ग्रैंड पैरेंट्स के लिए भी बिल्कुल व़क्त नहीं है. वे अपने स्कूल-कॉलेज, पढ़ाई, दोस्तों के बाद जो भी व़क्त मिलता है, उसे घंटों सेल फोन पर गेम्स (Technology effecting on relationships) खेलने, कंप्यूटर पर सर्फिंग करने, चैटिंग करने आदि में बिताते हैं.

Technology effecting on relationships

* अब तो आलम यह है कि कइयों को रात को सोने से पहले और सुबह उठने पर बिना अपने सेल फोन पर मैसेज देखे, दोस्तों व सोशल गु्रप्स को ‘गुड मॉर्निंग’ कहे बगैर दिन की शुरुआत ही नहीं होती. वहीं क़रीब बैठे पार्टनर से दो मीठे बोल कहने का भी व़क्त
नहीं रहता.

* ताज्जुब होता है तब कॉलेज स्टूडेंट लता कहती हैं- “मैं बिना खाए-पीए रह सकती हूं, पर अपने सेल फोन, लैपटॉप और आईपॉड की दूरी बर्दाश्त नहीं कर सकती.” यानी गैजेट्स हम पर डिपेंड हैं या हम गैजेट्स के ग़ुलाम(Technology effecting on relationships) हो गए हैं.

* एक ज़माना था, जब शादी के निमंत्रण कार्ड दूर तो नहीं, पर क़रीबी रिश्तेदारों को पर्सनली मिलकर मिठाई के साथ दिए जाते थे, पर अब तो ईमेल और सोशल साइट्स के ज़रिए ही इन्वाइट कर दिया जाता है. सफ़ाई यह दी जाती है कि इससे व़क्त, पैसे और ग़ैरज़रूरी परेशानी से बच जाते हैं.

* आज की पीढ़ी का यह मानना है कि टेक्नोलॉजी न केवल आपको सहूलियत देती है, बल्कि आपका स्टेटस भी बढ़ाती है. इसलिए न चाहते हुए भी आपको इसे मेंटेन तो करना ही पड़ेगा.

Technology effecting on relationships

टेक्नोलॉजी एडिक्शन से कैसे बचें?

– इसमें टाइम मैनेजमेंट अहम् भूमिका निभाती है. सेल फोन का अधिक इस्तेमाल, नेट पर सर्फिंग करना, लैपटॉप पर चैटिंग करना इत्यादि बातें ग़लत नहीं, पर इसका एडिक्ट हो जाना नुक़सानदायक होता है. इसलिए अपना रोज़ का शेड्यूल कुछ इस तरह बनाएं कि इन सब बातों को व़क्त देने के साथ-साथ अपनों के साथ भी क्वॉलिटी टाइम बिताएं.

– पार्टनर के साथ हों, तो जितना कम हो, उतना गैजेट्स के साथ व़क्त बिताएं.

– ऐसा भी न हो कि जीवनसाथी आपको अपनी ऑफिस से जुड़ी कोई समस्या बता रहा हो और आप सेल फोन पर चैटिंग करने में मशगूल हैं. तब तो यही बात हो जाएगी कि क़रीब के दूर होते चले गए और जो कोसों दूर थे, वे न जाने कितने पास आ गए.

– अक्सर कहा जाता है कि बच्चों का अपना सर्कल होता है, वे उसी में एंजॉय करते हैं और उनके पास न अपने पैरेंट्स के लिए व़क्त रहता है और न ही ग्रैंड पैरेंट्स के लिए. लेकिन यह सही नहीं है. यह तो हमारी सोच है, जो जाने-अनजाने में बच्चों ने भी उस पर सहमति की मोहर लगा दी. यदि घर का एक नियम बन जाए कि चाहे सुबह का नाश्ता, दोपहर या शाम का खाना हो, कोई भी एक समय पूरा परिवार साथ मिलकर खाएं और क्वॉलिटी टाइम बिताएं, एक-दूसरे की दिनभर की एक्टिविटीज़ को जानें-समझें, तो इसमें ग़लत क्या है?

Amitabh.Bachchan

– सेलिब्रिटीज़ भी आपसी संवाद के महत्व को समझते हैं, तभी तो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के बाऊजी ने भी अपने दौर में यह नियम बना दिया था कि दिनभर कोई भी एक समय पूरा परिवार साथ हो. फिर चाहे वो खाने का समय हो या रात को सोने के लिए जाते समय. हां, आउटडोर शूटिंग या कोई और कारणों से कोई सदस्य आउट ऑफ स्टेशन है, तो यह और बात है. बकौल अमितजी के, “यही छोटी-छोटी बातें आपसी रिश्तों को जोड़ती हैं और रिश्तों में आपसी मिठास और अपनापन बनाए रखती हैं.”

– माना सोशल साइट्स की अलग ही दीवानगी और एडिक्शन है, जो छूटता ही नहीं, पर जीवंत रिश्तों को दांव पर लगाकर बेजान चीज़ों से मोह भला कहां की समझदारी है.

– क्यों न एक बार फिर अपने रिश्तों को रिवाइव किया जाए, जिनसे बरसों न बात हुई और न ही मुलाक़ात, उनसे मिला जाए. देखिए, यक़ीनन उस सुखद एहसास से आप ही नहीं, वे भी सराबोर हो जाएंगे.

– याद रहे, टेक्नोलॉजी हमारे कामों को आसान करने और सुविधा मुहैया कराने के लिए ज़रूरी है, न कि रिश्तों से दूर होने और संवेदनशीलता को मारने के लिए.

– ऊषा गुप्ता

रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)