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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जो गुटबाज़ी, भाई-भतीजावाद और इनसाइडर-आउटसाइडर पर बहस शुरू हुई थी, अब उसने एक नया मोड़ ले लिया है. अब तक फैन्स स्टार किड्स और उनकी फिल्मों को बायकॉट करने की मांग कर रहे थे, लेकिन इसी बीच आर्टिकल 15, मुल्क और थप्पड़ जैसी बेहतरीन फिल्में बनानेवाले अनुभव सिन्हा ने ‘बॉलीवुड छोड़ो’ की मुहिम शुरू कर दी है. अनुभव सिन्हा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए ऐलान किया कि मैं बॉलीवुड से इस्तीफ़ा दे रहा हूं. आख़िर क्यों दिया अनुभव सिन्हा ने बॉलीवुड से इस्तीफ़ा और क्या है पूरा मामला आइए जानते हैं.

Anubhav Sinha

अनुभव सिन्हा ने एक नई शुरुआत करते हुए ट्वीट किया- बस बहुत हो गया, मैं बॉलीवुड से इस्तीफ़ा देता हूं. इसका चाहे जो भी मतलब हो. इस ट्वीट के बाद ही उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपने यूज़रनेम के आगे ब्रैकेट में नॉट बॉलीवुड भी जोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने कहा कि वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए काम करेंगे, पर अब वो बॉलीवुड का हिस्सा नहीं हैं. उनके इस ट्वीट पर लोगों ने काफ़ी रिएक्शन दिया, जहां बहुत से लोगों ने उन्हें सपोर्ट किया, वहीं कुछ ने उन्हें ट्रोल भी किया.

अनुभव सिन्हा की इस मुहिम को और भी बड़े डायरेक्टर्स का साथ मिल रहा है. उनके ट्वीट को सपोर्ट करते हुए हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी और चमेली जैसी फिल्में बनानेवाले डायरेक्टर सुधीर मिश्रा ने भी अपनी बात रखते हुए ट्वीट किया, क्या है बॉलीवुड? मैं यहां आया था ताकि सत्यजीत रे, राज कपूर, गुरु दत्त, ऋत्विक घातक, बिमल रॉय, मृणाल सेन, ऋषिकेश मुखर्जी, के आसिफ, विजय आनंद, जावेद अख्तर, तपन सिन्हा, गुलज़ार, शेखर कपूर, केतन मेहता, भारतन एंड अरविंदन जैसों से प्रभावित सिनेमा का हिस्सा बन सकूं. मैं हमेशा वहीं रहूंगा, जहां वो हैं.

सुधीर मिश्रा के ट्वीट का जवाब देते हुए अनुभव सिन्हा ने फिर कहा- चलो दो लोग बॉलीवुड से बाहर. अपन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रहकर फिल्में बनाएंगे. यह ले अपनी लकुटी कमरिया बहुत ही नाच नचायो.

शाहिद, अलीगढ़ और सिटीलाइट्स जैसी फिल्में बनानेवाले सिनेमा के बड़े डायरेक्टर हंसल मेहता ने भी अनुभव सिन्हा को सपोर्ट किया. उन्होंने भी लिखा- छोड़ दिया. दरअसल, यह कभी अस्तित्व में था ही नहीं.

Anubhav Sinha

इसके बाद सभी अटकलें लगा रहे थे कि क्या अनुभव सिन्हा ने काम ही छोड़ दिया है, तो ऐसी अटकलों को विराम लगाते हुए उन्होंने ख़ुद कहा कि मैं बॉलीवुड छोड़ रहा हूँ, फिल्में बनाना नहीं. बल्कि अब मैं पहले से और भी ज़्यादा फिल्में बनाऊंगा. अपने इस मुहिम में वो कुछ बेहतर और नए फिल्ममेकर्स के साथ जुड़ने और कुछ नया दिखाने को बेताब है. यकीनन ये ऐसे डायरेक्टर्स हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों के ज़रिए हमेशा एक संदेश देने और समाज में हो रहे बदलावों को दिखाने की कोशिश की है.

Anubhav Sinha

कंगना रनौत ने हाल ही में एक टीवी चैनल में दिए इंटरव्यू में मूवी माफिया का ज़िक्र किया और कहा कि सब उनके इशारों पर होता है. उन्होंने अपने पद्मश्री सम्मान को दांव पर लगाते हुए यह भी कहा कि अगर अपनी बातें साबित न कर पाई, तो पद्मश्री लौटा दूंगी. यकीनन फ़िल्म इंडस्ट्री में एक नई बयार बह रही है और इसमें मेहनती और टैलेंटेड लोगों को तवज्जो दी जाएगी.

Anubhav Sinha

अब इस पर भी बहस हो रही है कि बॉलीवुड आखिर है क्या? बहुत से बड़े बड़े फ़िल्म जर्नलिस्ट भी बॉलीवुड की बजाय हिंदी फिल्म इंडस्ट्री या फ़िल्म इंडस्ट्री संबोधित करना ज़्यादा बेहतर समझते हैं. सुधीर मिश्रा ने यहां तक कहा कि बॉलीवुड शब्द में क्रिएटिविटी की कम और धंधे की बू ज़्यादा आती है, जिससे अलग होना बहुत ज़रूरी है. सालों से सिनेमा से जुड़े लोगों का यही मानना है कि सिनेमा का मतलब सिर्फ़ पैसा कमाना नहीं है, यह समाज का आईना भी है. यह मुहिम क्या रंग लाएगी और क्या भारतीय सिनेमा में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है, यह तो आनेवाला वक़्त ही बताएगा.

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वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है. वर्ष 2019 ही नहीं 2020 भी महिला प्रधान फिल्मों के नाम रहनेवाला है यानी इस साल भी एक से बढ़कर एक महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ के लिए तैयार हैं. इस साल आपको ये महिला प्रधान फिल्में ज़रूर देखनी चाहिए:

1) छपाक
जनवरी 2020 में रिलीज़ हुई दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. ये फिल्म आज की ज़रूरत है. इस फिल्म के माध्यम से एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने का संदेश दिया गया है और लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई है. हालांकि दीपिका पादुकोण के जेएनयू दौरे के कारण कई जगहों पर फिल्म के प्रदर्शन में द़िक्क़त आई, लेकिन इस फिल्म को एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म कहा जा सकता है.

2) पंगा
जनवरी 2020 में ही एक और महिला प्रधान फिल्म पंगा रिलीज़ हुई. ये फिल्म भारतीय महिला कबड्डी टीम की भूतपूर्व कप्तान रह चुकी जया निगम की कहानी है. फिल्म में जया निगम का क़िरदार कंगना रनौत ने निभाया है. फिल्म पंगा को भी दर्शकों ने पसंद किया. इस फिल्म में ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि महिला को यदि अपने परिवारवालों का सपोर्ट मिले, तो वो अपने सपनों को आसानी से पूरा कर सकती है और सपनों को हासिल करने में उम्र कभी बाधा नहीं बनती.

3) थप्पड़
महिला प्रधान फिल्मों में तापसी पन्नू का होना ही फिल्म को स्पेशल बनाता है. फिल्म थप्पड़ में भी तापसी पन्नू ने दमदार अभिनय किया है. फरवरी 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म थप्पड़ एक ड्रामा थ्रिलर है और एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म भी.

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4) गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल
इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इसकी चर्चा 2019 में भी काफ़ी हो चुकी है. गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल फिल्म में जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं. यह फिल्म महिलाओं के लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है. वर्ष 2020 की महिला प्रधान फिल्मों में गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल एक महत्वपूर्ण फिल्म है.

5) धाकड़
कंगना रनौत का शानदार एक्शन आप पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं. फिल्म धाकड़ में एक बार फिर कंगना एक्शन करती नज़र आएंगी. महिला प्रधान फिल्मों में कंगना रनौत का हमेशा से विशेष योगदान रहा है और इस फिल्म में भी वो अपनी एक अलग पहचान बनाती नज़र आएंगी.

6) शकुंतला देवी
बॉलीवुड की मोस्ट टैलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन जल्द ही फिल्म शकुंतला देवी में नज़र आनेवाली हैं. इस फिल्म की कहानी महान गणितज्ञ शकुंतला देवी पर आधारित है. शकुंतला देवी तेज़ी से गणित का हिसाब करने की कला में माहिर थीं. इसी वजह से उन्हें मानव कंप्यूटर का उपनाम भी दिया गया था. फिल्म में विद्या बालन के पति का क़िरदार बांग्ला फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता जीशु सेनगुप्ता निभाएंगे.

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7) थलाइवी
जानी-मानी राजनीतिज्ञ और फिल्म अभिनेत्री रहीं जयललिता की बायोपिक थलाइवी में कंगना रनौत उनका क़िरदार निभाएंगी. इस फिल्म को ए एल विजय निर्देशित कर रहे हैं. 2020 में थलाइवी फिल्म को तमिल, तेलुगू और हिंदी में एक साथ रिलीज़ किया जाएगा.

8) गंगूबाई काठियावाड़ी
संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी भी वर्ष 2020 की एक प्रमुख महिला प्रधान फिल्म है. इस फिल्म में आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में हैं. मुंबई के कमाठीपुरा में रहनेवाली एक माफिया क्वीन गंगूबाई पर आधारित फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी हुसैन ज़ैदी की क़िताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई से ली गई है.

वर्ष 2019 की ये महिला प्रधान फिल्में हर महिला को देखनी चाहिए
वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है.

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1) सांड की आंख
तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की फिल्म सांड की आंख वर्ष 2019 की सबसे बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म थी. इस फिल्म की सबसे ख़ास बात ये थी कि पहली बार कोई महिला प्रधान फिल्म दीपावली के समय रिलीज़ हुई और सांड की आंख फिल्म को दर्शकों ने ख़ूब पसंद भी किया. इस फिल्म में दोनों अभिनेत्रियों ने शूटर दादी का ज़बर्दस्त क़िरदार निभाया. फिल्म की कहानी और तापसी-भूमि की शानदार एक्टिंग के लिए फिल्म को काफी सराहना मिली. फिल्म सांड की आंख ने बॉक्स आफिस पर शानदार कमाई की.

2) मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी
बॉलीवुड की क्वीन कही जानेवाली एक्ट्रेस कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी इस साल की सबसे बड़ी महिला प्रधान फिल्म है. यह फिल्म झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है. इस फिल्म में कंगना ने झांसी की रानी की भूमिका निभाई है और फिल्म में कंगना के काम को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. हालांकि फिल्म अपने कुछ अंदरूनी मसलों के कारण विवादों में रही, लेकिन इसके बावजूद फिल्म को दर्शकों की अच्छी सराहना मिली. महिला प्रधान फिल्म होने के साथ ही इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इस फिल्म की निर्देशक भी कंगना रनौत ही हैं.

3) मिशन मंगल
इसरो की पहली ही कोशिश में मंगल पहुंचने की कहानी पर आधारित फिल्म मिशन मंगल में मुख्य क़िरदार में विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी और नित्या मेनन हैं. हालांकि फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य अभिनेता के रूप में थे, लेकिन ये फिल्म पूरी तरह से महिला प्रधान है. मार्स मिशन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था और मिशन मंगल फिल्म में यही बताया गया है. हालांकि फिल्म के प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार के नाम का सहारा लेने के लिए इस फिल्म की आलोचना भी हुई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और सभी एक्ट्रेस की एक्टिंग की ख़ूब तारीफ़ भी हुई.

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4) बदला
ये एक ऐसी महिला प्रधान फिल्म है, जिसने ये साबित कर दिखाया कि कम बजट में भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है. कम बजट में बनी शाहरुख ख़ान के रेड चिलीज़ प्रोडक्शन की फिल्म बदला ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की. फिल्म में तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म में तापसी एक कत्ल के इल्ज़ाम में फंस जाती है और ख़ुद को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन से मदद मांगती है. फिल्म बदला की कहानी और कलाकारों की एक्टिंग इतनी अच्छी है कि इसी कारण कम बजट में इतनी बेहतरीन फिल्म बन पाई है.

5) द स्काई इज़ पिंक
देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा लंबे समय से हिंदी फिल्मों में नज़र नहीं आईं, लेकिन जब उनकी फिल्म द स्काई इज़ पिंक रिलीज़ हुई, तो एक बार फिर दर्शक उनकी एक्टिंग के कायल हो गए. फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने जिस तरह एक प्रेमिका और मां की भूमिका निभाई है, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया. फिल्म में प्रियंका के साथ फरहान अख़्तर भी हैं. इस फिल्म की कहानी और प्रियंका चोपड़ा की एक्टिंग इतनी भावुक है कि द स्काई इज़ पिंक फिल्म की तारीफ़ न स़िर्फ दर्शकों ने की, बल्कि कई कलाकारों ने भी की.

6) मर्दानी 2
पिछले कुछ समय से रानी मुखर्जी लगातार महिला प्रधान फिल्मों में काम कर रही हैं. मर्दानी, हिचकी जैसी संवेदनशील फिल्मों में काम करने के बाद 2019 में रानी मुखर्जी फिल्म मर्दानी 2 में इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी राव बनकर महिलाओं पर ज़ुल्म करनेवाले अपराधियों पर कहर बरपाती नज़र आईं. मर्दानी 2 फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया और इसे रिलीज़ के पहले दिन से ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला.

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7) एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
इस फिल्म में यूं तो सोनम कपूर के साथ अनिल कपूर और राजकुमार राव भी मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन अपने नाम और कहानी के कारण फिल्म सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा फिल्म की कहानी लेस्बियन यानी समलैंगिकता पर आधारित है. फिल्म का विषय अच्छा होते हुए भी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन वर्ष 2019 की महिला प्रधान फिल्मों में इस फिल्म को शामिल किए बिना महिला प्रधान फिल्मों की बात अधूरी रह जाएगी.

8) द ज़ोया फैक्टर
सोनम कपूर ने वर्ष 2019 में दो महिला प्रधान फिल्मों (एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा और द ज़ोया फैक्टर) में काम किया, लेकिन अफ़सोस उनकी दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाईं. फिल्म द ज़ोया फैक्टर में सोनम कपूर ने एक ऐसी लड़की का क़िरदार निभाया है, जो इंडियन क्रिकेट टीम का लकी चार्म होती है, उसकी मौजूदगी में टीम सारे मैच जीतने लगती है. हालांकि फिल्म में सोनम कपूर के साथ दुलकर सलमान भी हैं, लेकिन फिल्म की कहानी पूरी तरह से सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. सोनम कपूर की ये फिल्म भी ख़ास नहीं चली, लेकिन इस फिल्म को भी महिला प्रधान फिल्मों की कैटेगरी में रखना ज़रूरी है.
कमला बडोनी

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ऐसा बहुत कम ही होता है, जब एक ही दिन कई सारी बेहतरीन, मज़ेदार, रोमांच से भरपूर बातें होती हैं. जी हां, आज शुक्रवार को विकी कौशल व भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म भूत पार्ट वन- द हॉन्टेड शिप का डर व रोंगटे खड़े कर देनेवाला टीज़र रिलीज़ हुआ. वहीं तापसी पन्नू की समाज की सोच पर तमाचा जड़नेवाली थप्पड़ मूवी का ट्रेलर भी बेहद दिलचस्प रहा. हमारी प्यारी डिंपल छब्बी गर्ल प्रिटी ज़िंटा का आज जन्मदिन भी है. इसके अलावा हिमेश रेशेमिया की लाजवाब अदाकारीवाली संगीतमय पिक्चर हैप्पी, हार्डी एंड हीर ने भी ज़बर्दस्त ओपनिंग की. वैसे भी इसके सभी गाने पहले से ही सुपर-डुपर हिट हो गए हैं, ख़ासकर हिमेश व रानू मंडल द्वारा गाया गाना तेरी मेरी कहानी…

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लेकिन अभी पिक्चर बाकी है मेरे दोस्त… जी हां, इसके अलावा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता व एक्टिविस्ट मलाला युसुफजई पर आधारित गुल मकई फिल्म भी रिलीज़ हुई. इसमें मलाला का क़िरदार रीमा शेख ने निभाया है. पगले आज़म, डांस बार और हॉलीवुड की हिंदी डब के साथ विल स्मिथ की बैड बॉयज़ फॉर लाइफ भी प्रदर्शित हुई है. कुछ दिन पहले रोहित शेट्टी व कई सितारे जैसे अक्षय कुमार, अजय देवगन, रणवीर सिंह आदि ने इस फिल्म की रिलीज़ से जुड़ा दिलचस्प वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था, जिसे लोगों ने ख़ूब पसंद किया था.

धर्मा प्रोडक्शन की भूत फिल्म डराने के साथ-साथ उत्सुकता भी पैदा करती है. पहली बार करण जौहर हॉरर फिल्म बनाने की तरफ़ कदम बढ़ा रहे हैं. कल इस फिल्म के पोस्टर्स ने तो लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा की ही थी. लेकिन आज फिल्म का टीज़र देख पूरी फिल्म देखने की बेताबी भी बढ़ गई है. विकी कौशल कैसे एक पानी के जहाज में नीचे की तरफ़ अंधेरे में टार्च लेकर आते हैं, उन्हें परछाई, फिर कई हाथ दिखाई देते हैं, साथ ही उनका ही विभत्स चेहरा… बैकग्राउंड म्यूज़िक, विकी कौशल की भाव-भंगिमाएं और माहौल सब कुछ डरावना तो लगता ही है, लेकिन मज़ा तो तब आएगा, जब इसे सिनेमा हॉल के बड़े पर्दे पर देखा जाएगा. फ़िलहाल आप तस्वीरों व टीज़र का मज़ा लीजिए…

“हां, एक थप्पड़, लेकिन नहीं मार सकता…” तापसी पन्नू का फिल्म थप्पड़ का यह संवाद पूरी कहानी बयां कर देता है. पति द्वारा भरी महफ़िल में पत्नी को थप्पड़ मारने पर उनकी ख़ुशहाल ज़िंदगी पर ग्रहण लग जाता है. तापसी अपने आत्मसम्मान के लिए पति पर केस करना चाहती है, लेकिन किसी भी वकील को उनका केस मज़बूत नहीं लगता, क्योंकि आज भी समाज में पत्नी पर हाथ उठाना या मारने को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता. किस तरह एक छोटी-सी बात से तापसी के जीवन में कोहराम मच जाता है. सभी उसे ही समझाने की कोशिश करते हैं, फिर चाहे वो मायकेवाले हो या ससुरालवाले. अनुभव सिन्हा के निर्देशन का कमाल तो हम हाल ही के मुल्क व आर्टिकल 15 फिल्मों में देख ही चुके हैं. अब वे समाज की ग़लत सोच व विचारधारा पर करारा प्रहार करते हुए थप्पड़ लेकर आए हैं. पिंक, नाम शबाना, मुल्क, सांड की आंख के बाद एक बार फिर तापसी पन्नू ने अपने सशक्त अभिनय का लोहा मनवाया है. इसमें कोई संशय नहीं है कि थप्पड़ का ट्रेलर हमारी सोसाइटी की मानसिकता पर कठोर तमाचा जड़ता है. आप भी देखें और ख़ुद फैसला करें…

हिमेश रेशेमिया ने व़क्त के साथ अभिनय में ख़ुद को काफ़ी संवारा है फिल्म हैप्पी, हार्डी एंड हीर देखकर तो यही लगता है. उनके अभिनय में निखार आया है और सुर में तो बहार हमेशा से ही रहा है. फिल्म में दोहरी भूमिका में होने के बावजूद उन्होंने अपने अनोखे अंदाज़ से कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होने दी. हैप्पी यानी हिमेश रेशेमिया हीर (सोनिया मान) को प्यार करते हैं. दोनों बचपन से एक-दूसरे के अच्छे दोस्त है. फिर हीर लंदन जाती है, तो हैप्पी भी वहां पहुंचता है. वहीं हार्डी हिमेश डबल रोल में है, से हीर की मुलाक़ात होती है और वो उसे पसंद करने लगती है. हैप्पी जहां जीवन में असफल रहा है, वहीं हार्डी कामयाब बिज़नेसमैन है. हीर के लिए दोनों अज़ीज़ है, अब वो अपने लिए किसे चुनती है, जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी. सोनिया मान की यह पहली फिल्म है और उन्होंने ठीक-ठाक काम किया है. फिल्म में कॉमेडी, म्यूज़िक, रोमांस सब कुछ है. दिल को लुभानेवाले लंदन के ख़ूबसूरत नज़ारे फिल्म के आकर्षण को और भी बढ़ाते हैं.

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प्रिटी ज़िंटा ने हिंदी फिल्मों अपने मासूम, चुलबुली व गंभीर अभिनय से सभी को प्रभावित किया है. क्या कहेना, कल हो न हो, वीर ज़ारा जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई. आईपीएल में टीम किंग्स इलेवन पंजाब की मालिक भी हैं प्रिटी. अक्सर क्रिकेट मैच में उन्हें टीम का उत्साह बढ़ाते देखा जाता है. शादी के बाद यूं तो फिल्मों से थोड़ा दूर हैं. लेकिन हाल ही में सलमान ख़ान की दंबग 3 को प्रमोट करते हुए अलग अंदाज़ में नज़र आई थीं. जन्मदिन मुबारक हो..बोल्ड, चार्मिंग व प्रिटी इस अदाकारा के दिलकश अदाओं को देखते हैं…

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