The Dirty Picture

 

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परिणीता, ‘कहानी, डर्टी पिक्चर, कहानी-2 जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में धाक जमाने वाली अभिनेत्री विद्या बालन अपनी फिल्म की सफलता के लिए किसी लोकप्रिय पुरुष कलाकार की मोहताज नहीं हैं. उन्होंने इस बात को साबित कर दिया है कि अगर काम का जुनून और कड़ी मेहनत करने की प्रतिभा आप में है, तो आप पूरी फिल्म को अपने दम पर चलाने की काबिलियत रखती हैं.

1 जनवरी को जहां, पूरा विश्व नए साल का जश्न मना रहा होगा, वहीं विद्या नए साल के साथ-साथ अपना 42वां जन्मदिन भी मनाएंगी. मुंबई के चेम्बूर में तमिल परिवार में 1 जनवरी 1979 को जन्मीं विद्या के पिता पी.आर. बालन ‘डिजिकेबल’ के कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं और उनकी मां सरस्वती बालन एक गृहिणी हैं. उनके घर में मलयालम और तमिल, दोनों भाषाओं में बात की जाती है. ख़ास बात यह कि विद्या अच्छी हिंदी भी बोल लेती हैं.f6dd1-vidyabalanknowrare-blogspot-in1माधुरी दीक्षित और शबाना आजमी से इंस्पायर्ड विद्या ने कम उम्र में ही बॉलीवुड में काम करने का मन बना लिया था. 16 साल की उम्र में उन्होंने एकता कपूर के टेलीविजन शो हम पांच में काम किया था. हालांकि, वह फिल्मों में करियर बनाना चाहती थीं. उनके माता-पिता ने उनके इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन साथ ही पढ़ाई पूरी करने की शर्त भी रखी. विद्या के लिए फिल्मों में करियर बनाने की राह आसान नहीं थी. मलयालम और तमिल फिल्मों में कई प्रयासों के बाद भी वह असफल रहीं. विद्या को बांग्ला फिल्म भालो थेको से पहचान मिली. इस फिल्म में निभाए आनंदी के किरदार के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का आनंदलोक पुरस्कार भी जीता. बॉलीवुड में उन्होंने परिणीता फिल्म से कदम रखा. इसके बाद उन्होंने लगे रहो मुन्ना भाई, गुरु और सलाम-ए-इश्क जैसी कई फिल्में की, लेकिन उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. साल 2007 में आई प्रियदर्शन की फिल्म भूल-भुलैया उनके करियर के लिए नया मोड़ साबित हुई. इसमें निभाए गए अवनी के किरदार की आलोचकों ने भी प्रशंसा की. इसके बाद 2009 में आई पा और विशाल भारद्वाज की इश्किया ने उन्हें बेस्ट ऐक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. यहां से विद्या के लिए सफलता के रास्ते खुल गए. इसके बाद उन्हें 2011 में आई फिल्म द डर्टी पिक्चर के लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला.

विद्या ने एक इंटरव्यू में कहा था, ”डर्टी पिक्चर में सिल्क स्मिता के किरदार में ढल पाना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल था. हम दोनों का व्यक्तित्व एक-दूसरे से बिल्कुल अलग था, लेकिन सिल्क के किरदार ने मुझे मेरे अंदर के एक नए पहलू से मिलावाया. इसे निभाने के दौरान मैं अपने अंदर की हिचकिचाहट और डर से निकल पाई.”

सुजॉय घोष की 2012 में आई फिल्म कहानी में विद्या द्वारा निभाया गया विद्या बागची नामक गर्भवती महिला का किरदार हर ओर सराहा गया और इसने विद्या को एक हीरो भी साबित कर दिया.

विद्या कई बार अपने वजन को लेकर भी आलोचना का शिकार हुईं, लेकिन विद्या के लिए ये बातें महत्व नहीं रखतीं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म कहानी-2 में विद्या ने दुर्गा रानी सिंह का किरदार निभाया है, जो उनके लिए अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार रहा है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से विद्या बालन को जन्मदिन और नए साल की ढेर सारी बधाइयां.

 

10 महिला प्रधान फिल्में (Women Oriented Films) हर महिला को जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि इन फिल्मों ने महिलाओं के जीवन के ऐसे कई पहलुओं को उजागर किया है, जिन पर इससे पहले बात तक नहीं की जाती थी. 10 महिला प्रधान फिल्मों ने कई सामाजिक मान्यताओं को तोड़ा है और समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है. यदि आपने अभी तक ये फिल्में नहीं देखी हैं, तो आपको ये महिला प्रधान फिल्में जरूर देखनी चाहिए.

Women Oriented Bollywood Films

1) क्वीन (Queen)
महिला प्रधान फिल्मों की बात हो और कंगना रनौत की फिल्म क्वीन का ज़िक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. क्वीन फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत है इस फिल्म का मैसेज. इस फिल्म में ये बताया गया है महिलाओं की चाहतें पुरुषों के सहारे की मोहताज नहीं हैं और कंगना रनौत ने अपनी अदाकरी से महिलाओं की भावनाओं को बहुत दमदार तरीके से प्रस्तुत किया है. यदि आपने अभी तक क्वीन फिल्म नहीं देखी है, तो आपको ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए.

Queen

2) द डर्टी पिक्चर (The Dirty Picture) 
बॉलीवुड की मोस्ट टेलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन की बेहतरीन फिल्मों में से एक द डर्टी पिक्चर 80 के दशक की दक्षिण भारतीय फिल्मों की कलाकार सिल्क स्मिता के जीवन पर आधारित थी. द डर्टी पिक्चर फिल्म में रुपहले पर्दे के की चमक के पीछे छुपे अंधेरे को उजागर किया गया. साथ ही महिला के शरीर के प्रति लोगों की मानसिकता को भी दर्शाया गया. इस फिल्म में विद्या बालन की एक्टिंग को खूब सराहा गया.

The Dirty Picture

 

3) लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (Lipstick Under My Burka) 
विवादों से घिरी फिल्म लिपस्टिक अंडर माय बुर्का अलग-अलग उम्र की चार ऐसी महिलाओं को कहानी है, तो अपने हिसाब से आज़ादी से ज़िंदगी गुज़ारने में विश्‍वास रखती हैं. कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह, आहना कुमरा, पल्बिता बोरठाकुर ने लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म में दमदार अभिनय किया है. हालांकि इस फिल्म को रिलीज़ होने से पहले सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के लिए काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा था, लेकिन जब भी महिला प्रधान फिल्म की बात की जाएगी, तो लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म का ज़िक्र ज़रूर होगा.

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Lipstick Under My Burka

4) पार्चड (Parched) 
पार्चड यानी सूखा और इस फिल्म में गांव की तीन स्त्रियों के माध्यम से इस शब्द को भलीभांति प्रस्तुत किया गया है. पार्चड फिल्म में पुरुष प्रधान मानसिकता, महिलाओं पर अत्याचार, बाल विवाह जैसी समस्याओं का कटु सत्य को बहुत तीखे अंदाज़ में पेश किया गया है. पार्चड फिल्म को 24 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया और इस फिल्म ने 18 अवॉर्ड्स हासिल किए.

Parched

5) ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस (Angry Indian Goddesses)
ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस फिल्म की कहानी पांच लड़कियों के ईर्दगिर्द घूमती है. ये लड़कियां हंसती भी हैं और रोती भी हैं, मस्ती भी करती हैं और दर्द भी झेलती हैं. इस फिल्म में लड़कियों के साथ छेड़छाड़, कोर्ट में इंसाफ न मिलना, मां-बाप का प्यार न मिलना जैसी कई सामाजिक समस्याओं को उजागर किया गया है. महिलाओं को ये फिल्म भी ज़रूर देखनी चाहिए.

Angry Indian Goddesses

6) चांदनी बार (Chandni Bar) 
चांदनी बार फिल्म मुंबई की बार बालाओं के जीवन पर आधारित है. मधुर भंडारकर की फिल्म चांदनी बार में तब्बू ने अपनी दमदार अदाकारी से मुंबई की बार बालाओं के जीवन को बहुत ही सटीक तरीके से प्रस्तुत किया है. चांदनी बार फिल्म के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला और इस फिल्म को चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले.

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Chandni Bar

7) फायर (Fire)
दीपा मेहता की फिल्म फायर दो महिलाओं के समलैंगिग रिश्तों पर आधारित कहानी है. इस फिल्म को दो साल तक सेंसर बोर्ड की हरी झंडी का इंतज़ार करना पड़ा और दो साल बाद इस फिल्म को एडल्ट कैटेगरी में सिनेमाघरों में दिखाया गया. इस फिल्म में शबाना आज़मी और नंदिता दास की एक्टिंग को बहुत सराहा गया था.

Fire

8) नीरजा (Neerja)
नीरजा फिल्म को सोनम कपूर की बेस्ट फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म में प्लेन हाइजैक के दौरान एक एयर होस्टेस किस तरह बहादुरी से अपनी नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाती है, इसका बेहतरीन प्रस्तुतिकरण किया गया है. नीरजा फिल्म की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस फिल्म में कहीं से भी हीरो या अभिनेता की कमी नहीं महसूस होती.

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Neerja

9) मॉम (Mom)
बॉलीवुड की चांदनी श्रीदेवी जी भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी फिल्म मॉम महिलाप्रधाान फिल्मों में खास स्थान रखती है. इस फिल्म में बताया गया है कि एक मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर सकती है. पूरी फिल्म श्रीदेवी यानी मॉम के ईर्दगिर्द घूमती है. इस फिल्म में भी हीरो की ज़रूरत महसूस नहीं होती.

Mom

10) पिंक (Pink)
तापसी पन्नू की फिल्म पिंक भी लीक से हटकर थी. इस फिल्म की कहानी तीन महिलाओं के ईर्दगिर्द घूमती है और समाज को महिलाओं के बारे में काफी कुछ सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म पिंक में बिग बी अमिताभ बच्चन ने भी दमदार अभिनय किया है.

Pink

27 नवम्बर 1952 में जन्मे बप्पी(Bappi Lahiri) दा के जन्म का नाम आलोकेश लहिरी था. म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान लाजवाब है. उनके जन्मदिन पर मेरी सहेली (MERI SAHELI) टीम की ओर से उन्हें शुभकामनाएं !

संगीत के इस बादशाह के बर्थडे पर उनके बेस्ट songs के कलेक्शन के वीडियोज़ का लुत्फ़ उठाएं !

फिल्म- द डर्टी पिक्चर (2011)

फिल्म- डिस्को डांसर (1982)

https://www.youtube.com/watch?v=7JdEZoffm-Q

फिल्म- साहेब (1985)

https://www.youtube.com/watch?v=FZKwV9gJz4A

फिल्म- वारदात (1980)

https://www.youtube.com/watch?v=vlv9O4HB15s

फिल्म- सुरक्षा (1979)