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बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने के लिए स्मार्ट एक्टिविटीज़ (Smart Activities To Improve Child Concentration)

 

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बच्चों की मासूमियत और चंचलता हम सभी को लुभाती है, लेकिन ऐसा भी न हो कि बच्चों की चंचलता इतनी भी न बढ़ जाए कि पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान ही न दे पाएं. सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में सबसे आगे रहे, जिसके लिए बहुत ज़रूरी है कि बच्चा पूरी तरह एकाग्र होकर पढ़ाई करे, क्योंकि एकाग्र हुए बिना अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता. सफलता के लिए एकाग्रता आवश्यक है.

 

आजकल के टेक्नोसेवी युग में टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम्स जैसे डिवाइस आ गए हैं, जो बच्चे को विचलित करने के लिए काफ़ी हैं. इससे उनका ध्यान एक जगह नहीं टिक पाता. कई बार बच्चे के तंग करने पर हम ही उन्हें ये चीज़ें पकड़ा देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि बच्चे में ना तो धैर्य है और ना ही एकाग्र होने की क्षमता.
जब बच्चा 1 से 3 साल का होता है, तो उसके कौशल सीमित होते हैं. उसे दिखनेवाली हर चीज़ नई प्रतीत होती है. इससे उसका ध्यान एक साथ अनेक चीज़ों पर होता है. वह इन चीज़ों और आसपास के वातावरण को समझने की कोशिश करता रहता है. इसलिए उसका ध्यान अलग-अलग चीज़ों में बंटने लगता है.
3 से 7 साल के बच्चे में एकाग्रता बढ़ने लगती है. वह अपनी पसंद की चीज़ों पर ध्यान लगाना और नापसंद चीज़ों को इग्नोर करना सीख जाता है. यही वह समय है, जब नीचे बताई गई कुछ एक्टिविटीज़ करके खेल-खेल में ही बच्चे की समझने की क्षमता बढ़ाकर उसकी एकाग्रता बढ़ाई जा सकती है.

1. मेमरी गेम
* इस गेम को खेलने के लिए बच्चों को चीज़ों, फलों, सब्ज़ियों आदि के नाम पता होने चाहिए, तभी वे यह गेम खेल सकते हैं. इस गेम के लिए टेबल पर कुछ चीज़ें- पेन, पेंसिल, कॉपी, बुक या अन्य कोई भी चीज़ रखें. बच्चे को 30 सेकंड तक ध्यान से देखने के लिए कहें. बाद में वे चीज़ें हटा दें या उन्हें कपड़े से ढंक दें. अब बच्चे से उन चीज़ों के नाम पूछें.
* यदि ज़्यादा बच्चे खेल रहे हों, तो जो बच्चा पूरे नाम या ज़्यादा से ज़्यादा नाम बताए, उसे इनाम दें.
* इसमें बदल-बदलकर कभी फल, सब्ज़ियां, खिलौनेवाले पक्षी, जानवर या घर की चीज़ें रखी जा सकती हैं, ताकि खेल में नवीनता रहे.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से बच्चे में याद रखने और फोकस करने की क्षमता बढ़ती है.

2. मिसिंग लेटर/वर्ड
* बच्चे के सामने चित्रवाली या स्पेलिंगवाली क़िताब रखें. क़िताब में उसे कोई 1 चित्र या स्पेलिंग या कोई लेटर अथवा वर्ड ढूंढ़ने के लिए कहें. 30 सेकंड या चाहें, तो उससे कम समय दें.
* इसे दूसरी तरह से भी खेला जा सकता है. कुछ चीज़ों की स्पेलिंग लिखें और जान-बूझकर एक शब्द ना लिखें. बच्चे से वही मिसिंग वर्ड लिखने के लिए कहें. हां, समय अवश्य निर्धारित कर दें.
* आजकल मार्केट में ऐसे गेम्स की क़िताबें उपलब्ध हैं. इस एक्टिविटी को घर बैठे ही आसानी से करवाया जा सकता है.
फ़ायदा- मिसिंग चीज़ें/लेटर ढूंढ़ने के लिए, कम समय देने से बच्चे ज़्यादा ध्यान से ढूंढ़ते हैं. इससे उनका कान्संट्रेशन बढ़ता है.

3. अंताक्षरी
* गानों की अंताक्षरी तो सभी खेलते हैं, बच्चों के लिए अलग तरह की खेलें. अंताक्षरी किसी जानवर के नाम से शुरू करें. नाम के अंतिम अक्षर को बोलें. दूसरा बच्चा उस अक्षर से नाम कहे, फिर उसके अंतिम अक्षर को चुनकर तीसरा बच्चा कोई नाम कहे, जैसे-डॉग, गोरिल्ला, लोमड़ी आदि.
* बच्चों को अंताक्षरी का अभ्यास होने के बाद, अंताक्षरी का टाइप चुनें. कभी जानवरों की, कभी पक्षियों की, कभी फल-सब्ज़ियों, कभी लोगों के नामों की अंताक्षरी खेलें. बच्चे बहुत एंजॉय करेंगे.
फ़ायदा- इस गेम में बच्चों को बहुत मज़ा आता है. चूंकि यह बहुत तेज़ी से फटाफट खेला जाता है, अतः यह बच्चे के मस्तिष्क को उत्तेजित और प्रोत्साहित करने का कार्य करता है.

4. मिसिंग नंबर्स
* इस गेम में नंबर्स (संख्याएं) बोले जाते हैं, जिसमें जान-बूझकर एक-दो नंबर छोड़ दिए जाते हैं. इसे ही बच्चे को पहचानना है, जैसे- 3, 4, 5, 7, 9. इसमें 6 और 8 मिसिंग है. यदि बच्चा नहीं पहचान पाता, तो फिर से शुरू करें.
* अभ्यास होने पर 2 संख्याओं 12 से 19 तक मिसिंग नंबर्स खेलें. इसके बाद पहाड़ों (टेबल्स) 2, 4, 6, 8 से अभ्यास करवाएं.
फ़ायदा- इससे सोचने, याद रखने और फोकस करने की शक्ति बढ़ती है. बच्चों को तेज़ी से पहाड़े सिखाने का यह बहुत अच्छा तरीक़ा है.

5. मिसिंग थिंग्स
* बच्चे को कमरे की चीज़ें दिखाकर याद रखने के लिए कहें और उसे बाहर भेज दें. अब 1-2 चीज़ें हटा दें और उसे पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से, घर में या बच्चे के स्कूल बैग में एक भी चीज़ मिसिंग हो जाए, तो बच्चे को पता चल जाता है. इससे याद रखने की क्षमता बढ़ती है.

6. टंग ट्विस्टर
* पहले सरल टंग ट्विस्टर, ‘कच्चा पापड़, पक्का पापड़’ बोलने को कहें. जब बच्चे की ज़ुबान पलटने लगे, तो कठिन, ‘चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदनी रात में चांदी की चम्मच से चटनी चटाई.’ इसी तरह अंग्रेज़ी टंग ट्विस्टर की प्रैक्टिस करवाएं ‘she sells sea shells on the sea shore’. इस तरह के बहुत से टंग ट्विस्टर आपको मिल जाएंगे.
फ़ायदा- यह बहुत तेज़ी से कहना होता है. ग़लतियां होंगी, तो भी आपका बच्चा आनंद उठाएगा और सही कहने की पूरी कोशिश से ध्यान लगाएगा. इससे एकाग्रता के
साथ-साथ उसका शब्द भंडार भी बढ़ेगा.

7. अपोज़िट्स (विरुद्धार्थी)
* इस गेम में बच्चे को अपोज़िट्स कहना होता है, जैसे- मोटा-पतला, हैपी-सैड आदि. इसे खेलने के लिए आपके बच्चे को अपोज़िट्स पहले से पता होने चाहिए.
फ़ायदा- इससे एकाग्रता बढ़ने के साथ-साथ शब्दों की समझ भी बढ़ती है.

8. माइंड-बॉडी समन्वय
* बच्चों द्वारा खेला जानेवाला गेम ‘स्टेच्यू और ओवर’ बेहद फ़ायदेमंद है, जिसमें ‘स्टेच्यू’ में 1 ही स्थिति में लंबे समय तक बिना
हिले-डुले खड़ा होना होता है.
फ़ायदा- इस गेम में बॉडी और माइंड यानी शरीर और मस्तिष्क दोनों को एक साथ काम करना होता है. इससे ‘सेल्फ कंट्रोल’ बढ़ता है.
यह एक्टिविटी बॉडी और ब्रेन के बीच के नर्व (नाड़ी) संबंधों को मज़बूत करती है. इससे फोकस बढ़ता है.

9. कॉइन गेम
* इस गेम में अलग-अलग सिक्कों का ढेर बनाएं- 1, 2 या 5 के सिक्के, जिसमें से 5 सिक्के अलग निकालकर एक निश्‍चित क्रम में (1,2,5) एक के ऊपर एक रखें. बच्चे से इसी क्रम में सिक्के रखने को कहें. आप देखेंगे कि अभ्यास के बाद बहुत कम समय में वह गेम पूरा कर लेगा.
फ़ायदा- इससे बच्चे की सोचने की शक्ति, याद रखने की क्षमता और ध्यान (अटेंशन) बढ़ता है. बच्चा जितना ज़्यादा खेलेगा, उसकी स्मरणशक्ति और फोकस उतना ही बढ़ेगा.

10. उल्टा-पुल्टा
* इस खेल में बच्चे को हफ़्ते के दिन, साल के महीने, नंबर्स, इंद्रधनुष के रंग उल्टे-पुल्टे बताएं. अब उन्हें सही क्रम में बताने को कहें.
फ़ायदा- इससे याद रखने की क्षमता व एकाग्रता बढ़ती है.

11. पहेलियां (पज़ल्स)
* शुरुआत सरल पहेली से करें. बच्चे को पहेली में कोई संकेत दें और पहचानने के लिए कहें, जैसे- मैं स़फेद हूं, तुम मुझे पी सकते हो (दूध). इसी तरह सरल से कठिन पहेलियां बूझने दें.
फ़ायदा- इससे बच्चे की क्रिएटिविटी व एकाग्रता बढ़ेगी.

12. आवाज़ पहचानना
* यह छोटे बच्चों के लिए बेहतर है. बच्चे को आंख बंद करने के लिए कहें. अब पक्षियों या जानवरों की आवाज़ निकालें. इस तरह के कैसेट भी मार्केट में मिलते हैं. अब बच्चे को आवाज़ पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- चूंकि इस गेम में आंखें बंद होती हैं और ध्यान पूरी तरह से आवाज़ पर होता है, तो इससे एकाग्रता बढ़ती है.

ध्यान दें…

* बच्चों से एक्टिविटीज़ करवाते समय आसपास शोर ना हो, न तो म्यूज़िक बज रहा हो, ना ही टेलीविज़न चल रहा हो.
* हमेशा शुरुआत छोटे व सरल गेम से करें, धीरे-धीरे उसे लंबा और कठिन बनाते जाएं.
* अकेले बच्चे से एक्टिविटीज़ करवाने की बजाय 1-2 बच्चे और बुला लें. आपस में स्पर्धा से बच्चे और अच्छा करने की कोशिश करेंगे और दोस्तों के होने से एंजॉय भी करेंगे.

– डॉ. सुषमा श्रीराव
अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 

धनतेरस पर क्या ख़रीद रहे हैं आपके चहेते स्टार्स? (What TV stars are buying on dhanteras?)

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धनतेरस के शुभ अवसर पर आम से लेकर ख़ास सभी कुछ न कुछ ख़रीदते हैं, ताकि उनका यह दिन और भी शुभ हो जाए. क्या आप जानते हैं कि आपके चहेते सेलेब धनतेरस के दिन क्या ख़रीदना पसंद करते हैं? नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

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अर्जुन बिजलानी
हॉट एंड डैशिंग एक्टर अर्जुन बिजलानी इस दिन स़िर्फ गोल्ड ख़रीदने की बजाय और भी कुछ स्पेशल करते हैं. अर्जुन इस दिन ग़रीब बच्चों के साथ रहते हैं और उन्हें अच्छा खाना खिलाते हैं.

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दिव्यांका त्रिपाठी
नई नवेली दुल्हन और ख़ूबसूरत अदाकारा दिव्यांका की शादी के बाद यह पहला धनतेरस है. इस दिन दिव्यांका गोल्ड कॉइन ख़रीदेंगी. उनके अनुसार यह बेस्ट तरीक़ा है इन्वेस्टमेंट का. भई बात भी सही है. दिव्यांका की शादी हो गई है. ऐसे में फ्यूचर प्लानिंग करना तो बनता ही है.

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शिविन नारंग
क्यूट शिविन बेहद ट्रेडिशनल हैं और सभी त्योहार मनाते हैं. धनतेरस के शुभ मौ़के पर शिविन गोल्ड रिंग ख़रीदेंगे.

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दीपिका सिंह
दीया और बाती हम की लीड एक्टर आप सब की लाडली बहू संध्या उ़र्फ दीपिका सिंह दिव्यांका की ही तरह गोल्ड का कोई सामान ख़रीदेंगी. हो सकता है कि गोल्ड कॉइन ख़रीदें या फिर गोल्ड ज्वेलरी.

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करनवीर शर्मा
करनवीर शर्मा इस दिन लोगों से ज़रा हटकर करने में विश्‍वास करते हैं. वो कहते हैं कि मुझे मालूम है कि धनतेरस के नाम पर जो पहली चीज़ लोगों के दिमाग़ में आती है वह है गोल्ड, लेकिन मैं गोल्ड नहीं ख़रीदूंगा, बल्कि ज़रूरतमंदों के लिए अपनी सैलरी से कुछ गर्म कपड़े खरीदूंगा.

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शरद मल्होत्रा
क़सम मेरे प्यार की सीरियल के लीड एक्टर शरद मल्होत्रा धनतेरस के दिन अपने घर के लिए कोई सामान ख़रीदते हैं. हर साल की तरह इस साल भी वो अपने घर के लिए कोई पेंटिंग या फिर कुछ और ख़रीदेंगे. इसके अलावा वो अपने लिए सिल्वर चेन भी ख़रीद सकते हैं.

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विवियन डिसेना
टीवी सीरियल के एरोगेंट बट हॉट हीरो विवियन इस धनतेरस गोल्ड के बिस्किट ख़रीदेंगे. ऐसा ये इसलिए करेंगे, क्योंकि इससे उन्हें पॉज़िटिव एनर्र्‍जी मिलती है

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देवलीना भट्टाचार्य
देवलीना गुड डॉटर हैं. धनतेरस के दिन वो अपने पैरेंट्स को शॉपिंग कराएंगी और इसके साथ ही अपने भगवानजी के लिए कुछ ख़रीदेंगी.

ते देखा आपके चहेते स्टार भी अपने बिज़ी शेड्यूल से व़क्त निकालकर कैसे इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं. त्योहार का एक भी मौक़ा वो जाने नहीं देते. तो आप भी अपनी फैमिली के साथ इस दिन को सेलिब्रेट कीजिए और ख़ुश रहिए.

– श्वेता सिंह

स्त्रियों की 10 बातें, जिन्हें पुरुष कभी समझ नहीं पाते (10 Things Men Don’t Understand About Women)

Things Men Don't Understand About Women

मुझे आज आइस्क्रीम खाने का नहीं, बल्कि कॉफी पीने का मन कर रहा है… हमेशा बोलकर बताना क्यों पड़ता है? क्या आप कभी बिना कहे समझ नहीं सकते… आप नहीं समझोगे…  (Things Men Don’t Understand About Women)इस तरह की बातें कई बार पुरुषों को महिलाओं से सुनने को मिलती हैं. क्या वाकई महिलाओं को समझना बहुत मुश्किल है? आइए, नारी-मन को टटोलने की कोशिश करें. women

Things Men Don't Understand About Women

स्त्री-मन एक तरफ़ जहां बहुत सरल है, वहीं बहुत जटिल भी है. स्त्री और पुरुष केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफ़ी भिन्न हैं. कई बार स्त्री जो कहती है, उसका मतलब वह नहीं होता है, जो वो कहना चाहती है. तो आइए जानें, स्त्री-मन के कुछ ऐसे राज़, जिन्हें शायद पुरुष कभी जान ही ना पाएं.

1. पर स्त्री प्रशंसाः चाहे कभी भी स्त्री खुलेतौर पर यह ना कहे, पर अगर स्त्री को कोई बात सबसे ज़्यादा बुरी लगती है, तो वह है दूसरी स्त्री की प्रशंसा. फिर वह स्त्री चाहे आपकी मां-बहन, दोस्त-सहकर्मी या पड़ोसन ही क्यों न हो. इसलिए अब आगे किसी भी स्त्री की प्रशंसा करने से पहले दो बार सोचिएगा ज़रूर या फिर यदि आप किसी की प्रशंसा कर भी रहे हैं, तो साथ ही अपनी पत्नी की प्रशंसा भी कर देें. स्त्री, ख़ासकर एक पत्नी कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति किसी और की तारीफ़ करे. हो सकता है कि वो इस बात को कभी सबके सामने ज़ाहिर न करे, लेकिन इसे आपको समझना होगा.

2. सुझाव देनाः यह ऐसी चीज़ है, जिसे स्त्रियां पसंद नहीं करतीं या शायद नफ़रत करती हैं. यदि आपको कोई स्त्री अपनी किसी परेशानी या समस्या के बारे में बताती है, तो इसका मतलब है कि वह चाहती है कि आप उसकी बातें किसी अच्छे श्रोता की तरह सुनें और उस पर कोई सुझाव न दें. अगर आपको अपनी पत्नी के चेहरे पर शिकन और परेशानी दिखे, तो समझ जाएं कि वह चाहती है कि आप अपने सारे काम छोड़कर उससे पूछें कि समस्या क्या है और स़िर्फ सुनें. उस पर तब तक सुझाव न दें, जब तक सामने से मांगा न जाए.

3. ख़र्चों का हिसाबः यहां मामला ज़रा हटकर है. एक बात हमेशा याद रखें कि लड़कियों और स्त्रियों को दूसरों के ख़र्चों का हिसाब रखना तो पसंद होता है, लेकिन यदि कोई उनसे ख़र्चों का हिसाब मांगे और ख़ासकर अगर हिसाब मांगनेवाला पति या बॉयफ्रेंड हो, तो उन्हें पसंद नहीं आता. इसलिए आगे से अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को कभी भी फ़िज़ूलख़र्च करनेवाली ना कहें. अपने ख़र्चों की तुलना कभी भी उसके ख़र्चों से न करें. वे कभी भी आपसे इस बारे में नहीं कहेंगी, पर ऐसा कोई ज़िक्र होते ही उनका मूड ख़राब ज़रूर हो जाएगा.

4. बिन कहे समझ लेंः थोड़ा अजीब है ना, पर यह सौ फ़ीसदी सही है. सभी स्त्रियां चाहती हैं कि उन्हें किसी भी ज़रूरत या किसी भी चीज़ के लिए अपने पार्टनर से कहना न पड़े. वे चाहती हैं कि पुरुष बिना कहे ही उनकी सारी ज़रूरतों को समझ ले और उन्हें पूरा कर दे. फिर वह ज़रूरत प्यार की हो, सहारे की या फिर कोई और. ऐसा इसलिए है कि स्त्रियां ख़ुद भी ऐसी ही होती हैं, वे बिना कहे ही अपने साथी की सारी ज़रूरतों को समझ लेती हैं. स्त्रियों के लिए प्यार मांगने के लिए नहीं होता है. वे बिना मांगे मिलनेवाले प्यार में विश्‍वास रखती हैं.

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5. सेंटर ऑफ अट्रैक्शनः स्त्री चाहे कई सारी सहेलियों-रिश्तेदारों से घिरी रहे, पर वह हमेशा अपने पति या साथी का पूरा ध्यान पाना चाहती है. वह चाहती है कि उनके साथी का केंद्रबिंदु वो ही रहे. स्त्री की ख़ुद की दुनिया बहुत छोटी होती है. वो हर छोटी से छोटी बात में अपने साथी का प्रोत्साहन चाहती है.

6. सही संकेत देंः हमेशा याद रखें कि स्त्रियां अवलोकन करने में माहिर होती हैं. वे कही हुई बातों से ज़्यादा अपने अवलोकन पर विश्‍वास करती हैं. स्त्रियों को ख़ामोशी और संकेतों को पढ़ना अच्छा लगता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आप बच्चों के साथ ज़्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं, तो इसका उनकी नज़र में मतलब है कि आपमें मैरिज मटेरियल नहीं हैं. फिर आप उन्हें लाख समझाने की कोशिश करें कि आप उनसे शादी करके उन्हें ख़ुश रखेंगे. यदि आप किसी स्त्री के साथ हैं, तो उन्हें अपनी तरफ़ से सही संकेत दें.

7. स्पर्श की भाषाः पुरुष चाहे इसमें विश्‍वास रखे या न रखे, पर स्त्री स्पर्श की भाषा में बहुत विश्‍वास रखती है. हल्की-सी छुअन भी उसे रोमांचित कर सकती है या फिर किसी के ग़लत इरादों के बारे में बता सकती है. स्त्री के स्पर्श के मायने काफ़ी अलग हैं. पति का उनका स़िर्फ हाथ पकड़ना या ऑफिस से आने के बाद उन्हें बांहों में भर लेना, उनके लिए किसी ऐसे संवाद से कम नहीं, जिसमें शब्द न हो. इसलिए वे समय-समय पर चाहती हैं कि उनका साथी उन्हें प्यार से छूए या फिर बांहों में भर ले.

8. ग़ुस्से का मतलब हमेशा ग़ुस्सा नहीं होताः पुरुषों को शायद इसे समझने में थोड़ी मुश्किल हो, क्योंकि वे अपनी भावनाओं को सीधे तौर पर ज़ाहिर करते हैं, पर स्त्रियों के मामले में यह थोड़ा उल्टा है. यदि किसी दिन आप घर आएं और आपकी श्रीमतीजी ग़ुस्से में हैं, बात-बात पर आप पर बरस रही हैं, तो इसका मतलब यह मत निकालिए कि वे आपसे नाराज़ हैं. हो सकता है कि दिनभर में कुछ ऐसा हुआ हो, जिससे वह परेशान हो या हो सकता है कि उनके ग़ुस्से के पीछे कोई बहुत बड़ी पीड़ा छुपी हो. कई बार तो स्त्री अपनी किसी कमज़ोरी या बीमारी को छिपाने के लिए भी ग़ुस्सा करती है. अतः जब कभी आपको लगे कि आपकी पत्नी बेवजह ग़ुस्सा कर रही है, तो उससे लड़ने की बजाय यह जानने की कोशिश करें कि कौन-सी बात उसे परेशान कर रही है.

9. भावनात्मक प्यारः सेक्स स्त्रियों के मामले में ज़रा संवेदनशील मसला है. पहले ही यह बताया गया है कि स्त्रियां बहुत भावुक होती हैं. वे रिश्ते के हर स्तर पर पहले भावनाओं से जुड़ती हैं. सेक्स में भी ऐसा ही है. स्त्रियों के लिए सेक्स कोई प्रक्रिया या ज़रूरत नहीं है. उनके लिए सेक्स एक ऐसा माध्यम है, जिससे वे किसी पुरुष के साथ भावनात्मक स्तर पर जुड़ती हैं. वे सेक्स को शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर अधिक महत्व देती हैैं. इसलिए सेक्स के मामले में उनकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. उन्हें सेक्स से पहले फोरप्ले पसंद है. वे चाहती हैं कि सेक्स के दौरान पार्टनर उन्हें पैंपर करे और सेक्स के बाद उनसे ख़ूब बातें भी करे.

10. जेंटलमैन पहली पसंदः आज स्त्री-पुरुष समानता का ज़माना है, बाहर स्त्री चाहे जितना पुरुषों की तरह सबल और कठोर दिखने की कोशिश कर ले, पर अपना पार्टनर वो ऐसा चाहती है, जिस पर वो निर्भर हो सके. वह ऐसा पुरुष चाहती है, जो न केवल उसकी अच्छाइयों को, बल्कि उसकी कमज़ोरियों को भी जाने. और न स़िर्फ उन्हें जाने, बल्कि उन्हें आत्मसात् कर ले और स्वीकार कर ले. वह चाहती है कि उसका पार्टनर कभी उसकी कमज़ोरियों को किसी बाहरवाले के सामने न आने दे.

– विजया कठाले निबंधे

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बातें जो अच्छी हैं आपके रिश्ते के लिए (Things That Make A Good Relationship)

Things That Make A Good Relationship

पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े, बहस, नोंक-झोंक, प्यार-तकरार बहुत ही आम बात है, जो उनके रिश्ते की मिठास को कम करने की बजाय बढ़ाती ही है, लेकिन कई बार ऐसी बातें, जिन्हें ग़ैरज़रूरी समझ या अपने ईगो की वजह से हम नज़रअंदाज़ करते जाते हैं, वे रिलेशनशिप (Things That Make A Good Relationship) के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं. यह समझना ज़रूरी है कि कुछ बातें आपके संबंध को मज़बूत व परिपक्व बनाने के लिए अनिवार्य हैं.

Things That Make A Good Relationship

क्यों हैं आप साथ-साथ?

  • शादी के कुछ वर्षों बाद हो सकता है आपको यह लगे कि इस व्यक्ति से शादी करके बड़ी भूल हुई है. ऐसा इसलिए लगता है, क्योंकि दोनों के स्वभाव और आदतें भिन्न होती हैं.
  • उस समय उन बातों को याद करें, जो कभी आप दोनों को एक-दूसरे की बातें बहुत ही अच्छी लगती थीं.
  • उन बातों, उन पलों को याद करें, जिनकी वजह से आप एक-दूसरे के बिना एक पल भी गुज़ारना नहीं चाहते थे.
  • आपने एक लंबा सफ़र उन्हीं आदतों और अच्छाइयों के साथ तय किया है, इस बात को न भूलें.
  • व़क्त के साथ बहुत-सी आदतें बदलती हैं. हो सकता है आज किन्हीं कारणों से एक-दूसरे को इतना व़क्त नहीं दे पा रहे, जितना कभी देते थे, लेकिन इसका मतलब रिश्ते का अंत नहीं है. इन्हें ही याद करके, आपसी समझदारी से रिलेशनशिप को फिर से एक मौक़ा दें.
    ईगो को आड़े न आने दें
  • किसी भी रिलेशनशिप के बिखराव का सबसे बड़ा कारण ईगो होता है.
  • अगर आपसे कोई ग़लती हो जाती है, तो बेहिचक साथी को सॉरी कह दें. यह मानकर चलें कि सॉरी बोलना एक ऐसी अच्छी बात है, जो आपके ईगो को सिर उठाने नहीं देता और आपके संबंधों में भी प्यार व विश्‍वास बना रहता है.
  • मनोवैज्ञानिक नीलिमा पाठक के अनुसार, पुरानी ग़लतियों, बातों को याद करके लड़ने-झगड़ने से बेहतर है, उन्हें भूलकर या उन्हें माफ़ कर रिश्ते को एक और मौक़ा दें.
  • यक़ीनन एक माफ़ी रिलेशनशिप को बचाने का कारगर फॉर्मूला साबित होगा, क्योंकि ग़लतियों को नज़रअंदाज करना बिल्कुल सही नहीं, लेकिन उन्हें माफ़ कर देना बहुत ही बड़ी वजह बन सकती है रिलेशनशिप को दोबारा शुरू करने में.

ज़िम्मेदारियों का बंटवारा

  • पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना आज की जीवनशैली को मेंटेन रखने के लिए एक ज़रूरत बन गया है.
  • जिस तरह से दोनों मिल-जुलकर आर्थिक ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं, उसी तरह से घरेलू काम में भी एक-दूसरे की मदद
    अवश्य करें.
  • अगर पत्नी वर्किंग ना भी हो, तो भी घर में इतने काम होते हैं कि वह थक जाती है, लेकिन आमतौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि घर का काम करने का ज़िम्मा स़िर्फ महिलाओं का है, पर यह ज़रूरी नहीं है कि घर का सारा काम केवल पत्नी ही करे. ऐसे में अगर आप उसकी थोड़ी-सी मदद कर दें, तो उसके मन में आपके प्यार की डोर और ज़्यादा मज़बूत होगी.
  • आपकी यह छोटी-सी पहल आपकी पत्नी के मन में प्यार के साथ-साथ आपके प्रति सम्मान भी बनाए रखेगी. हमेशा ये कोशिश करनी चाहिए कि आप अपने साथी के चेहरे से उनकी प्यारी मुस्कान को कभी न जाने दें.

आपसी जुड़ाव की निशानी

  • अगर पति-पत्नी के बीच तकरार होती रहती है, तो इसे वैचारिक भिन्नता से ज़्यादा इस बात की निशानी मानना चाहिए कि उनके बीच जुड़ाव बहुत अधिक है. मनोवैज्ञानिक आराधना मलिक के अनुसार, “झगड़ा इस बात का प्रतीक होता है कि संबंधों में जीवंतता बरक़रार है. वे चाहे कितना ही झगड़ें, पर एक-दूसरे से अलग नहीं हैं.
  • सच्चाई तो यह है कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता है. कमी हर रिश्ते की तरह पति-पत्नी के रिश्ते में भी होती है.”
  • आपसी जुड़ाव तभी उत्पन्न होता है, जब एक साथी को यह पता हो कि दूसरा साथी क्या सोच रहा है या क्या महसूस कर रहा है. इसका अर्थ यह हुआ कि विचारों की भिन्नता को एक-दूसरे के समक्ष लाना, न कि चुप रहकर मन ही मन घुलते रहना. बोलकर, अपनी राय देकर इस नतीजे पर पहुंचना कि क्या सही है और क्या ग़लत, एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी है.

रखें ध्यान पसंद-नापसंद का

  • एक सुदृढ़ और सम्मानजनक रिलेशनशिप के लिए साथी की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि   आप स्वयं की इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं.
  • उसे आपकी कोई बात अच्छी नहीं लगती है, तो उसे बदलने की कोशिश करें.
  • इसी तरह से इस बात का ख़्याल रखें कि ऐसी कौन-सी बातें हैं, जिनके ज़िक्र मात्र से आपके जीवनसाथी के चेहरे पर मुस्कान छा जाती है और कौन-सी ऐसी बातें हैं, जिनसे वह परेशान या दुखी हो जाता है.
  • यही नहीं, साथी को क्या खाना पसंद है, उसका पसंदीदा रंग कौन-सा है जैसी छोटी-छोटी बातें आप दोनों के प्यार को और बढ़ाएंगी.
  • नीलिमा पाठक के अनुसार, आप इस बात को भी ध्यान में रखें कि आपका साथी आपसे कैसे व्यवहार की उम्मीद करता है या किस चीज़ में उसकी रुचि ज़्यादा है.
  • इन बातों के पता होने से आप अपने साथी को कभी भी दुख देने के बारे में नहीं सोच पाते हैं.
  • कोई भी व्यक्ति अपने स्वभाव को एक दिन में नहीं बदल सकता, इसलिए उसे समय व सहयोग दें.

खुलकर बात करें

  • दांपत्य जीवन में कई बार ऐसा होता है कि एक छोटी-सी बात इतनी बढ़ जाती है कि वो एक बड़े मुद्दे का रूप ले लेती है. तब पति-पत्नी एक-दूसरे से बोलना तक छोड़ देते हैं और चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन जब ये चुप्पी टूटती है, तो इससे घर एक जंग के मैदान में बदल जाता है.
  • कभी भी अपने दांपत्य जीवन में ऐसी स्थिति न आने दें. अपने साथी के साथ हर बात शेयर करें.
  • वैसे भी साथी का अर्थ ही ये है कि जो हमेशा आपके सुख और दुख में आपके साथ हो, साथ ही जिससे आप अपने दिल की हर बात को खुलकर कह सकें.
  • आपस  की  प्रॉब्लम्स  को  ख़त्म  करने  का  इससे  बेहतर  तरीक़ा  शायद  ही  कोई दूसरा हो.
  • रिलेशनशिप को निभाने में क्या परेशानियां आ रही हैं, किन बातों को लेकर झगड़े हो रहे हैं, इन सभी बातों के पीछे की वजहों को जानने की कोशिश करें.
  • किन तरीक़ों से उन्हें सुलझाया जा सकता है, इसके बारे में भी सोचें और मिलकर बातचीत करें. साथ ही एक-दूसरे की बातों को
    भी सुनें.
  • कई बार बेवजह की ग़लतफ़हमियों से भी रिश्ते में दरार आ जाती है, जिन्हें बातचीत के ज़रिए बड़ी ही आसानी से दूर किया जा सकता है. अपने साथी से मन की बात कहने में आख़िर बुराई ही क्या है और अगर इस वजह से तक़रार हो भी जाए, तो मुद्दा सुलझ भी तो जाता है.
  • बात चाहे छोटी ही क्यों न हो, चुप रहने की बजाय बात सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. बहस से बचने के चक्कर में अगर झगड़ा न किया जाए, तो समस्या गंभीर बन सकती है और रिश्ते में दरार भी आ सकती है.
  • मैरिज काउंसलर मणिका मानती हैं कि झगड़ा करना स्वास्थ्यवर्द्धक भी होता है और अगर उसका उपयोग ठीक तरह से किया जाए, तो वह रिश्ते को पुख्ता करने और ऊर्जावान बनाने में भी सहायक होता है. पर इसका अर्थ यह नहीं है कि जब भी आपको लगे कि रिश्ते में गरमाहट की कमी हो रही है, आप झगड़ा करने लगें.
  • पति-पत्नी का संबंध ऐसा होता है कि उनके बीच कोई भी विवाद बहुत लंबे समय तक चल ही नहीं सकता है, इसलिए अगर तक़रार हो भी गई हो, तो उसे तूल न दें और न ही यह उम्मीद रखें कि साथी आपको मनाए. बिना हिचक के साथी से माफ़ी मांग लें. इससे आप किसी भी तरह से उसकी नज़रों में छोटे नहीं होंगे, बल्कि आपकी पहल आपके संबंधों को और प्रगाढ़ता देगी.

सीमाएं तय करें

  • एक-दूसरे पर पाबंदियां लगाने की बजाय, एक-दूसरे को और उनके विचारों को आज़ादी दें.
  • रिलेशनशिप को जितना बांधकर रखा जाएगा, उतनी ही दूरियां बढ़ेंगी.
  • मैरिज काउंसलर अदिती छाबड़ा का मानना है कि जो गाइडलाइन्स आपने पार्टनर के लिए तय की हैं, उन्हें ख़ुद भी फॉलो करें. अपनी बात साथी पर थोपें नहीं.

टच में रहें

  • आप चाहे अपने घर में हों या ऑफिस में, दिन में कम से कम एक बार तो पार्टनर से फोन पर बात ज़रूर करें.
  • उनसे पूछें कि दिन कैसा गुज़र रहा है,  उनकी तबियत कैसी है इत्यादि.
  • मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ये छोटी-छोटी बातें दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाती हैं और इन्हीं छोटी-छोटी बातों से उनके बीच के रिश्ते की अहमियत हमेशा बनी रहती है.

एक-दूसरे के परिवार का सम्मान करें

  • अगर आप चाहते हैं कि आपका साथी आपको प्यार करे और आपकी बात को मान दे, तो इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि आप अपने जीवनसाथी से जुड़े सारे संबंधों को खुले दिल से स्वीकार करें.
  • उसके परिवार के सदस्यों का सम्मान करें. जब आप अपने जीवनसाथी के माता-पिता को अपने माता-पिता की तरह मान-सम्मान देंगे और उसके भाई-बहनों को अपने भाई-बहन की तरह प्यार करेंगे, तो यक़ीनन आपके संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी.

 

  • सुमन बाजपेयी

क्या आप जानते हैं सिंधु की पर्सनल लाइफ से जुड़ी ये 30 दिलचस्प बातें?(Do you know these 30 interesting things about Sindhu)

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रियो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर दुनियाभर में देश का नाम रोशन करनेवाली पी. वी. सिंधु बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी हैं. खिलाड़ी के रूप में सिंधु का इंटरव्यू तो कई जगह छप चुका है, लेकिन मेरी सहेली अपने रिडर्स के लिए पी. वी. सिंधु की कुछ ऐसी बातें लेकर आयी है, जो आप नहीं जानते होंगे. अपने रिडर्स को पी. वी. सिंधु के एक अलग रूप से मिलवाने के लिए हमने उनसे बात की. बातचीत के दौरान लगा ही नहीं कि किसी स्टार प्लेयर से बात हो रही है. मेडल जीतने के साथ ही सिंधु ने इस छोटे से इंटरव्यू के दौरान हमारा दिल भी जीत लिया. मेरी सहेली से सिंधु ने एक ख़ास सहेली की तरह दिल खोलकर अपनी बातें कीं. पूरे इंटरव्यू के दौरान सिंधु कई बार हंसती और खिलखिलाती हुई  नज़र आईं.

अगर आप बैडमिंटन प्लेयर न होतीं, तो क्या होतीं?
हूं… जब मैं छोटी थी, तो डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन अब बैडमिंटन के अलावा कोई दूसरा सपना नहींहै. इसी में आगे… बहुत आगे जाना चाहती हूं.

मैच से पहले होनेवाले स्ट्रेस को कैसे कम करती हैं आप?
मैच से पहले होनेवाले स्ट्रेस को मैं अपने कोच से शेयर करती हूं और फ्री महसूस करती हूं. उस खिलाड़ी और अपने गेम स्ट्रैटजी के बारे में अपने कोच से खुलकर बातचीत करती हूं और ख़ुद को रिलैक्स करती हूं.

आपका स्ट्रॉन्ग पॉइंट क्या है?
अटैक. मैं अपने गेम में विरोधी खिलाड़ी पर शुरुआत से ही अटैक करने की कोशिश करती हूं, ताकि शुरुआत से ही मेरा प्रेशर उस पर बना रहे.

आपका वीक पॉइंट क्या है?
(सोचते हुए) फिलहाल तो ऐसा कुछ भी नहीं है.

आपका फेवरेट फूड क्या है?
(मुस्कुराती हुई) इटैलियन. मुझे इटैलियन फूड बहुत पसंद है. इसके अलावा मुझे बिरयानी बहुत पसंद है. मां के हाथ की बिरयानी की बात ही कुछ और होती है.

लाखों प्रशंसकों की फेवरेट हैं आप. क्या आपका भी कोई फेवरेट प्लेयर है?
(हंसती हुई) हां, बिल्कुल. टेनिस स्टार रॉजर फेडरर मेरे फेवरेट प्लेयर हैं.

इंडियन प्लेयर में किसी का नाम बताइए.
विराट कोहली, धोनी और सचिन तेंदुलकर पसंद हैं.

मैच प्रैक्टिस के अलावा क्या करना अच्छा लगता है?
वैसे तो मेरा बहुत-सा समय प्रैक्टिस में ही जाता है, लेकिन इससे समय मिलने पर मैं फैमिली के साथ फिल्म देखना, कज़िंस से मिलना और दोस्तों के साथ एंजॉय करना पसंद करती हूं.

क्या आपको लगता है कि रियो में मेडल जीतने से पहले तक सायना नेहवाल और ज्वाला गुट्टा जैसी खिलाड़ियों की शैडो में आपकी पर्सनैलिटी कहीं दबी हुई सी थी?
(सोचती हुई) हूं… ऐसा नहीं है. हर खिलाड़ी का दिन होता है. इस बार मेरा था. फिलहाल मैं अपने प्रदर्शन से ख़ुश हूं. मुझे बाकी बातों से कोई फर्क़ नहीं पड़ता.

रियो अलिंपिक के बाद लाइफ कितनी बदल गई?
(हंसती हुई) ड्रीम था, जो सच हो गया. मैं बता नहीं सकती कि मैं कितनी ख़ुश हूं.

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पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा लिया आपने और पहली बार में ही देश को सिल्वर मेडल दिलाया, लेकिन आपके कोच गोपीचंद कहते हैं कि आप अभी भी अनफिनिश्ड प्रोडक्ट हैं. क्या ये सुनकर बुरा लगता है?
बिल्कुल नहीं. अभी तो मेरी शुरुआत है. मुझे बहुत से टूर्नामेंट खेलने हैं. कोच सर जो कहते हैं सही कहते हैं.

कोर्ट पर और कोर्ट के बाहर भी आपको काफ़ी शांत प्लेयर के रूप में देखा जाता है. रियल सिंधु कैसी हैं?
हूं… सच कहूं तो रियल में भी मैं बहुत शांत हूं. हां, ये बात अलग है कि कोर्ट पर अब मैं अटैक के मूड में रहती हूं. ऐसा पहले नहीं था.

फेवरेट फिल्म कौन-सी है?
मुझे सारी फिल्में अच्छी लगती हैं. चाहे वो बॉलीवुड हो या तेलगु या तमिल.

आपका पसंदीदा बॉलीवुड ऐक्टर कौन है?
(ख़ुश होते हुए) मुझे ऋतिक रोशन पसंद हैं. और हां, रणबीर कपूर भी.

आपकी फेवरेट बॉलीवुड एक्ट्रेस कौन हैं?
दीपिका पादुकोण.

आपका फेवरेट डेस्टिनेशन क्या है?
(हंसती हुई) ओह! ये बता पाना बहुत मुश्किल है. मुझे घूमने का बहुत शौक़ है. हर जगह मुझे पसंद आ जाती है.

ख़ास मौक़ों पर क्या पहनना पसंद करती हैं आप?
मेरे मूड पर डिपेंड करता है. जब जो मूड करता है पहन लेती हूं.

क्या आपको त्योहार पसंद हैं?
हां, मुझे फेस्टिवल्स बहुत अच्छे लगते हैं. दशहरा, दीपावली और गणेश चतुर्थी मेरे पसंदीदा त्योहार हैं.

घर पर रहने पर क्या करना पसंद करती हैं आप?
टीवी देखना और गाना सुनना. इससे मुझे बहुत सुकून मिलता है.

अपने पैरेंट्स की कोई अच्छी बात बताइए.
बहुत ही सपोर्टिव हैं और प्यार करनेवाले हैं. मुझे बहुत मोटीवेट करते हैं.

बाहर जाते समय पर्स में क्या रखना पसंद करती हैं?
(हंसती हुई) पैसा. वैसे मुझे लिपग्लॉस बहुत पसंद है. मेरे पर्स में ये रहता ही है.

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टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा अपने गेम के साथ ही अपनी ग्लैमरस पर्सनैलिटी से भी लोगों को अट्रैक्ट करती हैं. क्या आप भी ग्लैमराइज़्ड होने में दिलचस्पी रखती हैं?
(हंसती हुई) हा..हा..हा.. क्यों नहीं. वैसे मेरे लिए खेल पहले है. मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मैं मैच जीतूंगी ग्लैमर अपने आप आ जाएगा. वैसे ग्लैमराइज़्ड होना कोई बुरी बात नहीं है.

क्या आप गैजेट्स लवर हैं?
(मुस्कुराती हुई) हां, मुझे मेरा मोबाइल बहुत पसंद है. रियो ओलिंपिक में मुझे इससे दूर रखा गया था.

आज की लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
अच्छा करो. जो जी में आए, उसी फील्ड में करियर बनाओ.

लड़कियों के पैरेंट्स के लिए कोई संदेश?
हां, बेटों की ही तरह अपनी बेटियों को प्रोत्साहित कीजिए. उन्हें आपके सपोर्ट की ज़रूरत है. उन पर विश्‍वास कीजिए और उन्हें आगे बढ़ने में मदद कीजिए. वो आपको कभी निराश नहीं करेंगी.

क्या मेडल जीतने के बाद दोस्तों के बीच अब दूसरी सिंधु दिखती है?
(हंसती हुई) बिल्कुल नहीं, मैं अपने दोस्तों के लिए कभी चेंज नहीं हो सकती.

क्या आपको ड्राइविंग आती है? सचिन द्वारा गिफ्ट की गई कार को आपने चलाया?
हां, मुझे ड्राइविंग आती है, लेकिन अभी तक मैंने वो कार नहीं चलाई है.

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कम उम्र में नेम-फेम के साथ बहुत सारा पैसा भी आपने कमा लिया, तो क्या अब आप आत्मनिर्भर बनकर अलग से उन पैसों को इन्वेस्ट करेंगी या पैरेंट्स को दे दिया है?
(हंसती हुई) जी बिल्कुल भी नहीं, मैंने अपने पैरेंट्स को ये ज़िम्मेदारी दी है. उन्हें जो करना होगा वो करेंगे. मेरा काम स़िर्फ मैच खेलना है.

क्या आप चैरिटी में इंटरेस्ट रखती हैं?
जी, मुझे चैरिटी करना पसंद है, ख़ासतौर पर बूढ़े, ग़रीब, अनाथ बच्चों और लड़कियों के लिए बहुत कुछ करने की इच्छा है और मैं करती भी हूं.

रियो में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक की शादी की चर्चा ज़ोरों पर हैं. ऐसा लगता है साक्षी बहुत जल्द ही जीवन की दूसरी इंनिंग की शुरुआत करेंगी. क्या आपका भी ऐसा कुछ प्लान है?
(ज़ोर से हंसती हुई) वेल, अभी नहीं. अभी तो मेरा पूरा ध्यान अपनी गेम पर है और आनेवाले ओलिंपिक के साथ दूसरे टूर्नामेंट पर. शादी को अभी टाइम है.

– श्वेता सिंह