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बढ़ाएं रिश्तों का बैंक बैलेंस (Grow your relationships bank balance)

Grow your relationships

शादी होते ही जीवन में एक बड़ा बदलाव आता है. जहां एक तरफ़ असंख्य सपनों को पंख लग जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ज़िम्मेदारियां भी आ जाती हैं. शुरुआती दिनों में तो पति-पत्नी को एक-दूसरे को समझने में ही गुज़र जाते हैं. लड़की के लिए तो नए घर में ढलने की कोशिश और भी कठिन होती है. लेकिन इस दौरान अगर इस बदलाव को बोरियत या बोझ का जामा पहना दिया जाए, तो समस्याओं के रास्ते खुल जाते हैं. इसलिए ज़रूरी है कि शादी के आरंभिक दिनों से ही अपने रिश्ते का बैंक बैलेंस बढ़ाना शुरू कर दें. माना कि शादी में धन-गहने और बेशक़ीमती सामान मिले हैं, पर उससे बैंक बैलेंस रिश्तों का नहीं बढ़ता, वह तो प्यार, भरोसे और कमिटमेंट से बढ़ता है.

मनोवैज्ञानिक सुलभा राय के अनुसार, “रिश्ते बैंक अकाउंट (Grow your relationships) की तरह होते हैं. अन्य व्यक्ति आपके अकाउंट में अगर डिपॉज़िट कर सकता है, तो विड्रॉ भी कर सकता है. यह धन तो नहीं होता है. यहां डिपॉज़िट और विड्रॉ करने का अर्थ है- प्यार, सहयोग, समय, प्रोत्साहन, कमिटमेंट और भरोसा. अगर पति-पत्नी ये चीज़ें डिपॉज़िट करेंगे, तभी रिश्ते का बैंक बैलेंस बढ़ेगा, अन्यथा वह बहुत जल्दी ही खाली हो जाएगा. बहुत ज़्यादा या बहुत कम संबंधों में नहीं चलता है, इसके लिए एक निश्‍चित बैलेंस होना ज़रूरी है. ‘गिव एंड टेक’ पर आधारित रिश्ता ही जीवन को सुखमय बना सकता है.”

ईमानदार रहें: अपने साथी से कोई भी बात न छुपाएं, आप जो भी सोच रही हैं या महसूस कर रही हैं, उसे अवश्य शेयर करें. यह उम्मीद रखना कि बिना बताए ही साथी आपके मन की बात समझ लेगा, अपने व साथी दोनों के साथ ही ग़लत होगा. इसके अलावा अगर साथी कोई सच आपसे शेयर करता है, तो उसकी ईमानदारी का सम्मान करते हुए, उसे स्वीकारें. अगर आप सच नहीं सुनना चाहती हैं, तो साफ़ है कि आप रिश्ते को पूरी तरह से अपनाना नहीं चाहती हैं. पर आप कुछ चीज़ों को अनदेखा करना चाहती हैं, तो ऐसे में आप कैसे अपेक्षा रख सकती हैं कि आपके संबंधों का बैंक बैलेंस बढ़ेगा. इसलिए अपने रिश्ते में ईमानदारी को इन्वेस्ट करें.

कम्यूनिकेशन गैप न आने दें: कम्यूनिकेशन गैप मन में ग़ुस्सा तो पैदा करता ही है, साथ ही न कह पाने की पीड़ा मन में ऐसे विचार ले आती है, जो बेमानी होने के बावजूद रिश्ते में खटास लाने का कारण बनते हैं. अपनी बात न कहकर आप अपने अंदर निगेटिव इमोशंस को पलने का अवसर देते हैं, जो रिश्ते में किसी ज़हर की तरह काम करते हैं. बेहतर यही होगा कि खुलकर अपने दिल की बात कहें और साथी की फीलिंग्स की भी रिस्पेक्ट करते हुए उसकी बातों को सुनें.

साथ-साथ ज़िम्मेदारियां उठाएं: विवाह किया है, तो ज़िम्मेदारियां भी सिर पर आएंगी और उन्हें निभाना दोनों का काम होता है. ‘हम साथ-साथ हैं’ के कॉन्सेप्ट को दिमाग़ में रखते हुए ज़िम्मेदारियां निभाएं, उनसे कतराएं नहीं. याद रखें साथ मिलकर चलने व सहयोग की भावना आपके रिश्ते(Grow your relationships) को तो मज़बूत बनाती ही है, साथ ही उसके बैंक बैलेंस को भी बढ़ाती है.

Grow your relationships

लविंग एंड केयरिंग बनें: शादी के बाद जो चीज़ सबसे ज़्यादा रिश्ते को मज़बूत बनाती है, वह है प्यार व केयर. अपने साथी के अंदर इग्नोर किए जाने या ग़ैैरज़रूरी होने की फीलिंग न आने दें. उन्हें यह न लगे कि आपको उनकी कोई परवाह ही नहीं है. जब ऐसी भावना मन में आ जाए, तो अकाउंट खाली होते देर नहीं लगती. अपनी बातों, व्यवहार व प्यार से पार्टनर को हमेशा एहसास कराएं कि आपको उनकी ज़रूरत है और उनके बिना आप अधूरे हैं.

आलोचना करें, मगर प्यार से: साथी की कोई बात पसंद नहीं या आप उनकी ग़लती की ओर उनका ध्यान खींचना चाहते हैं या फिर किसी बात के लिए ज़िम्मेदार ठहराना चाहते हैं, तो थोड़ा प्यार से ऐसा कर लिया जाए, तो क्या बुरा है. आलोचना करते समय खीझ या दूसरे के प्रति नफ़रत का समावेश न करें. हो सकता है, आपके साथी का नज़रिया अपने हिसाब से ठीक हो, लेकिन आपको वह ग़लत लग रहा हो, इसलिए आप शांति से अपनी बात कहें, ‘देखो, तुम्हारी यह बात मुझे पसंद नहीं है या इसे अगर ऐसे कर लिया जाए, तो ज़्यादा ठीक होगा.’ किसी काम के लिए साथी को टोक रहे हों, तो भी शब्दों पर ध्यान दें.

कॉम्प्लीमेंट दें: पूरे दिन में साथी को एक बार तो अवश्य ही कॉम्प्लीमेंट दें. किसी बात पर उनकी प्रशंसा करें या काम को सराहें. उन्हें इससे ख़ुशी मिलेगी कि आप उनकी कद्र करते हैं, उनकी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते हैं. यही नहीं, दिनभर उन्हें यह एहसास प्रफुल्लित बनाए रखेगा कि आप उनके साथ जीवन गुज़ारते हुए ख़ुश हैं. कॉम्प्लीमेंट्स के आदान-प्रदान से जीवन में एक नयापन बना रहता है. ‘इस साड़ी में तुम बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो या यह शर्ट पहनकर तुम किसी हीरो से कम नहीं लग रहे हो.’ ये कॉम्प्लीमेंट्स बहुत साधारण से हैं, पर सुननेवाले के जीवन में रस घोल देते हैं. हर युगल एक-दूसरे से इस तरह के कॉम्प्लीमेंट्स सुनने को लालायित रहता है. ‘तुम सुंदर हो या मैं जैसा जीवनसाथी चाहती थी, तुम में वो सारे गुण हैं.’ जैसे वाक्य आपसी प्यार को बढ़ाते हैं. ‘मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूं,’ पत्नी जब यह कहती है, तो पति को भी घर आने की जल्दी रहती है.

ग़लती मान लें: जिस तरह साथी के काम करने पर आप ‘थैंक्यू’ कहना नहीं भूलते, उसी तरह ग़लती होने पर ‘सॉरी’ कहना भी न भूलें. जाने-अनजाने दांपत्य जीवन में कोई न कोई ग़लती हो ही जाती है, उसे नकारने की बजाय, मान लें. दांपत्य जीवन में उत्पन्न सारे मतभेदों और कड़वाहट धोने के लिए सॉरी सबसे उपयोगी साधन है. पार्टनर से अगर कोई ग़लती हो गई है, तो उसका प्रयोग पार्टनर को नीचा दिखाने या उसे बुरा साबित करने के लिए न करें.

दूसरों का हस्तक्षेप न सहें: जब दूसरे लोग, चाहे वे आपके ही परिवार के सदस्य हों या मित्र, रिश्तेदार आपकी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने लगते हैं, तो ग़लतफ़हमियां खड़ी हो जाती हैं. पति-पत्नी का रिश्ता चाहे कितना ही मधुर क्यों न हो, उसमें कितना ही प्यार क्यों न हो, पर असहमति या झगड़े तो फिर भी होते हैं और यह अस्वाभाविक भी नहीं है. जब ऐसा हो, तो किसी तीसरे को शामिल करने की बजाय दोनों बैठकर उन मुद्दों को सुलझाएं.

न छिपाएं अपनी इच्छाएं: सेक्स की चाह वैसी ही है जैसी कि खाने-पीने व जीवन की अन्य ज़रूरतों की पूर्ति की होती है. जितना इस इच्छा को दबाने या छिपाने की कोशिश की जाती है, यह उतनी ही तीव्रता से बलवती होती है. सेक्स संबंध शादीशुदा ज़िंदगी में ग़लतफ़हमी की सबसे अहम् वजह है. पति-पत्नी दोनों ही चाहते हैं कि उनका साथी उन्हें प्यार करे और साथ दे. जब आप सेक्स संबंधों से दूरियां बनाने लगते हैं, तो शक और ग़लतफ़हमी रिश्ते को खोखला करने लगती है. आपका साथी आपसे ख़ुश नहीं है या आपसे दूर रहना पसंद करता है, यह रिश्ते में आई सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी बन सकती है.

फ्रीडम दें: रिश्तों का बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए एक-दूसरे को आज़ादी या स्पेस देना बहुत ज़रूरी है. शादी के बाद भी आप दोनों की एक अलग पहचान बनी रहे, इसके लिए ज़रूरी है कि आप एक-दूसरे पर न तो हावी हों और न ही अपनी बात दूसरे पर थोपें. कंट्रोल करने की भावना रिश्तों को खोखला करती है, फिर चाहे आप कितनी ही कोशिश क्यों न कर लें, बैंक बैलेंस खाली ही रहता है.

अपने रिश्ते की स्टॉक चेकिंग भी करें: रिश्तों के बैंक बैलेंस के साथ-साथ समय-समय पर उनकी स्टॉक चेकिंग भी करते रहें. हो सकता है, आप दोनों अलग-अलग तरह से सोचने लगे हों और आपस में एक दूरी बना ली हो. अलग सोच होना बुरी बात नहीं है, पर चीज़ों को डिस्कस कर उन्हें सुलझा लें. उसके लिए आपको समय और कोशिश दोनों ही इन्वेस्ट करने होंगे. स्टॉक चेकिंग करने से आपको पता लगता रहेगा कि कहां ग़लती हो रही है या किसकी ग़लती है और उसे कैसे सुधारा जाना चाहिए. बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि समय-समय पर रिश्ते की स्टॉक चेकिंग करते रहें. पूरा हिसाब-क़िताब रखने से अकाउंट ठीक रहता है और आगे भी गड़बड़ी होने की कोई संभावना नहीं रहती है.

– सुमन बाजपेयी

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रिश्तों को संभालने की फुर्सत क्यों नहीं हमें (Relationship Problems and How to Solve Them)

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फास्ट युग में समय की तेज़ रफ़्तार के साथ चाहे-अनचाहे हम सभी को तालमेल बैठाना ही है. यह मजबूरी भी है और ज़रूरत भी, लेकिन क्या यह सच नहीं कि इस तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी के आदी हो चुके हम, इसे ही अपनी ढाल बनाकर रिश्तों को और यहां तक कि ख़ुद को भी समय न दे पाने के बहाने बनाते हैं?

भागदौड़ में कहां खो गई है फुर्सत?

* यह सच है कि हम पहले से कहीं ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं, लेकिन यह व्यस्तता हमारी ख़ुद की ही बढ़ाई हुई है.

* हमने सुविधाओं और ज़रूरतों के अंतर को ख़त्म कर दिया है.

* सारी सुविधाएं जुटाने के चक्कर में पैसा कमाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि इन सुविधाओं को भोगने तक का समय नहीं रहता.

* हमें ख़ुद ही नहीं पता कि हम कहां और क्यों भाग रहे हैं. बस, सब भाग रहे हैं, इसलिए हमें भी भागना है.

* कहीं किसी से पीछे न रह जाएं, इसलिए भागना है. कहीं कोई आगे न निकल जाए, इसलिए भी भागना है. बहुत कुछ भोगने के लालच में भागना है. हर ख़्वाहिश पूरी करनी है, तो भागना है.

* अपनी ख़्वाहिश पूरी नहीं हुई, तो बच्चों की ख़ातिर भागना है. फिर भले ही उन बच्चों से बात तक करने की फुर्सत भी न हो.

भागें नहीं, तो क्या करें?

* थोड़ा रुककर सोचें कि क्या ज़रूरी है और क्या ग़ैरज़रूरी. ख़ुद से प्यार करने की कला सीखें.

* यह ज़रूरी नहीं कि जब तबीयत साथ न दे, बैंक का काम हो या किसी रिश्तेदार की शादी हो, तभी ब्रेक लिया जाए. किसी दिन यूं ही काम से छुट्टी लें, घर पर व़क्त बिताएं. म्यूज़िक सुनें. शॉपिंग करें या मूवी देखें.

* अपनी प्राथमिकताएं तय कर लेंगे, तो काफ़ी बोझ हल्का हो जाएगा.

* ब्रेक लेना सीख लेंगे, तो सुकून के कुछ पल अपने लिए भी मिलेंगे.

* प्रतिस्पर्धा जहां ज़रूरी हो, वहीं करें. हर बात में दूसरों से मुक़ाबला करना ज़रूरी नहीं.

क्या सच में समय नहीं हैं?

* समय कम है, लेकिन समय है ही नहीं, यह सच नहीं है.

* हम इतने तनाव में रहते हैं कि काम की थकान मिटाने के लिए वीकेंड्स पर दोस्तों के साथ क्लब जाना ज़रूरी लगता है.

* वहीं अगर वीकेंड पर किसी रिश्तेदार से मिलना हो या अपने पैरेंट्स को डॉक्टर के पास ले जाना हो, तो हम थकान का बहाना बनाते हैं.

* भले ही हम दावा करते हैं कि हमें सांस तक लेने की फुर्सत नहीं, लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि अगर यह सच होता, तो हम घंटों लैपटॉप पर चैटिंग न करते.

* हम अपने मोबाइल पर देर रात तक लगातार दोस्तों से यहां-वहां की बातें न करते रहते.

* वीकेंड पर दोस्तों के साथ पार्टीज़ न करते यानी फुर्सत तो है, लेकिन अपनों के लिए नहीं है.

* अपनी परेशानियां, अपने दुख सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनजान लोगों से शेयर करते हैं, लेकिन अपने पैरेंट्स, अपने पार्टनर या अपने बच्चों के साथ बात भी करने की फुर्सत नहीं.

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ये तो एक बहाना है…

* समय न होने का यह बहाना नहीं तो और क्या है कि हम फिटनेस के लिए जिम जाते हैं. हॉबी के लिए डान्स क्लास भी जाते हैं.

* रिलैक्स होने के लिए स्विमिंग पूल जाते हैं, लेकिन अपनों को समय देने की बात से ही हम अपना तनाव बढ़ाते हैं. हालांकि हॉबी या फिटनेस के लिए व़क्त निकालना ग़लत नहीं है. लेकिन इतनी ही शिद्दत से अपनों के लिए भी समय निकालने की कोशिश ज़रूर की जानी चाहिए.

कैसे निकालें समय?

* ऑफिस जाते समय ट्रेन या बस में ज़रूरी फोन निपटा लें.

* अपने रिश्तेदारों का हालचाल पूछ लें. किसी दिन हाफ डे लेकर घरवालों को कहीं बाहर ले जाएं.

* शुक्रवार की शाम दोस्तों के नाम होती है, तो शनिवार की शाम अपनों के नाम पर रिज़र्व रखें.

* सारे ज़रूरी काम शनिवार को दिन में कर लें. संडे को घर पर रहकर सबके साथ समय बिताएं.

* फोन और लैपटॉप को भी छुट्टी के दिन छुट्टी मनाने दें. उन्हें स्विच ऑफ कर दें.

* जिस दिन हम इस बात से संतोष कर लेंगे कि सभी को सब कुछ नहीं मिलता, उस दिन हमें फुर्सत भी मिलेगी और सुकून भी. यह सकारात्मक सोच ख़ुशियों की चाबी ही नहीं, बल्कि मास्टर की है, जिससे तमाम ताले खुल सकते हैं. तो देर किस बात की, अपने दिल से बात करें, दिमाग़ को थोड़ा-सा रेस्ट दें और अपनी ख़ुशियों की चाबी ढूंढ़ लें… जहां फुर्सत के चंद नहीं, ढेर सारे पल छिपे आपका इंतज़ार कर रहे हैं.

– गीता शर्मा