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2018 चार धाम यात्राः कैसे पहुंचें और किन बातों का रखें ख़्याल ( Char Dham Yatra, How To reach)

Char Dham Yatra

अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी, लेकिन केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल रविवार और 30 अप्रैल सोमवार को खुले. चारों मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही आधिकारिक रूप से चार धाम की यात्रा शुरू हो गई है. इन चारों तीर्थ स्थलों पर आप कैसे पहुंच सकते हैं और यात्रा के दौरान आपको कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए. आइए जानते हैं.

Char Dham Yatra

यमुनोत्री है पहला पड़ाव 

यमुनोत्री को चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव कहा जाता है. यहां यमुना का पहाड़ी शैली में बना खूबसूरत मंदिर है और मंदिर के पास ही खौलते पानी का स्रोत है जो तीर्थ यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है. यमुनोत्री पहुंचने के लिए आप दिल्ली से देहरादून या ऋषिकेश तक हवाई यात्रा या रेल यात्रा से पहुंच सकते हैं.यहां से आगे सड़क मार्ग और आखिरी कुछ किलोमीटर पैदल चलकर यमुनोत्री पहुंच सकते हैं.

गंगोत्री है दूसरा पड़ाव 

चारधाम यात्रा का दूसरा पड़ाव गंगोत्री है. यमुनोत्री के दर्शन कर तीर्थ यात्री गंगोत्री में गंगा माता की पूजा के लिए पहुंचते हैं. गंगा का प्राकृतिक स्रोत गोमुख ग्लेश्यिर गंगोत्री से 18 किलोमीटर दूर है. यमुनोत्री से गंगोत्री की सड़क मार्ग से दूरी 219 किलोमीटर है जबकि ऋषिकेश से गंगोत्री की दूरी 265 किलोमीटर है और वहां से वाहन से सीधे पहुंचा जा सकता है.

कैसे पहुंचे केदारनाथ?
चारधाम यात्रा का तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है जो उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में आता है. ऋषिकेश से गौरीकुण्ड की दूरी 76 किलोमीटर है और यहां से 18 किलोमीटर की दूरी तय करके केदारनाथ पहुंच सकते हैं. केदारनाथ और लिंचैली के बीच 4 मीटर चौड़ी सीमेंटेड सड़क बना दी गई है जिससे श्रद्धालु आसानी से केदारनाथ पहुंच सकते हैं.

कैसे पहुंचे बद्रीनाथ?
बद्रीनाथधाम तक गाड़ियां जाती हैं, इसलिए यहां मौसम अनुकूल होने पर पैदल नहीं जाना पड़ता. बद्रीनाथ को बैकुण्ठ धाम भी कहा जाता है. यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली और गोविन्दघाट होते हुए पहुंचा जा सकता है.

कब जाएं ?

वैसे तो चारधाम यात्रा हर साल अप्रैल महीने में शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर में खत्म हो जाती है, लेकिन सितंबर का महीना इस यात्रा का पीक सीजन होता है क्योंकि जून से अगस्त के बीच इस इलाके में भारी बारिश होती है, जिसकी वजह से तीर्थ यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सितंबर चारधाम यात्रा पर जाने का सबसे बेस्ट समय है क्योंकि बारिश के बाद पूरी घाटी धुली हुई और फ्रेश हो जाती है, चारों तरफ हरियाली नजर आने लगती है और यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही बनती है.

इन बातों का रखें खास ख्याल 

चारधाम यात्रा ही नहीं बल्कि किसी भी यात्रा के दौरान आपको अपनी जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखनी चाहिए.

इसके अलावा छोटी-मोटी सामान्य परेशानियों जैसे- पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द, बुखार की दवा के अलावा क्रीम और पेनरिलीफ स्प्रे भी साथ रखना चाहिए.

यात्रा के दौरान गर्म और ऊनी कपड़े साथ रखें क्योंकि इस क्षेत्र का मौसम हमेशा ठंडा रहता है और ऊंचाई पर तो ठंड ज्यादा बढ़ जाती है.

इसके अलावा एक अच्छा टॉर्च भी साथ जरूर रखें.

चारधाम की यात्रा अकेले करने की बजाए दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ करें क्योंकि रूट चैलेंजिंग होने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

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विलेज टूर ताकि बच्चे जुड़े रहें अपनी संस्कृति से (Try To Visit Your Village With Kids)

विलेज टूर

विलेज टूर

लंदन देखा, पेरिस देखा, और देखा जापान….सारे जहां मे कहीं नहीं है दूसरा हिंदुस्तान… बॉलीवुड का ये गाना आज भी देश के प्रति सम्मान और प्रेम से भर देता है. इस धरती पर दूसरा हिंदुस्तान आपको नहीं मिलेगा, क्योंकि हिंदुस्तान का दिल उसके गांवों में धड़कता है. असली भारत तो गांवों में ही नज़र आता है, लेकिन अफ़सोस आपके बच्चे इस सुखद अनुभूति से कोसों दूर हो चुके हैं. दुनिया घूमकर क्या करेंगे जनाब, जब बच्चों की रगों में देश के प्रति प्रेम नहीं भर पाएंगे. जी हां, विदेशों की सैर करके अपने बच्चों के दिलों में आप विदेशी तौर-तरी़के तो भर रहे हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर अपनी सभ्यता और संस्कृति से दूर हो रहे हैं. अभी भी व़क्त है. चलिए, आज़ादी के इस महीने में बच्चों के साथ विलेज टूर पर.चलिए आज़ादी के इस माहौल में अपने बच्चों के साथ कुछ दिन हिंदुस्तान के गांवों में बिताइए.

मलाना, हिमाचल प्रदेश
देश में ही अगर आपको ग्रीक कल्चर देखना है, तो हिमाचल प्रदेश का मलाना गांव आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन है. यहां के लोग ख़ुद को एलेक्ज़ेंडर के वंशज मानते हैं. इतना ही नहीं मलाना गांव में लोकल कोर्ट भी है. कोर्ट का सिस्टम प्राचीन ग्रीक सिस्टम से मेल खाता है.

कैसे पहुंचे?
मलाना पहुंचने के लिए आप दिल्ली से मनाली के लिए बस/टैक्सी ले सकते हैं. मनाली से मलाना 90 किलोमीटर की दूरी पर है. मनाली से जरी या नेरंग तक आप टैक्सी से पहुंच सकते हैं. दिल्ली से ही आप फ्लाइट के ज़रिए कुल्लु एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं. वहां से लोकल टैक्सी के ज़रिए मलाना पहुंच सकते हैं.

मस्ट डू
– मलाना जाने के बाद जमदग्नी मंदिर ज़रूर जाएं. इस बात का ध्यान रखें कि भूलकर भी दीवारों को हाथ न लगाएं.
– अगर आप ट्रेकिंग के शौक़ीन हैं, तो मलाना आपके लिए बेहतर जगह है.
– पडाड़ों से सनसेट और सन राइज़ ज़रूर देखें.

मलाना को छुआ, तो पैसे लगेंगे
जी हां, मलाना अपीन ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां रहने वाले लोग आपका आदर तो करेंगे, लेकिन जैसे ही आप वहां की कोई चीज़ छूने की कोशिश करेंगे, तो आपका फाइन देना पड़ेगा, इसलिए गांव को दूर से ही देखें. कुछ भी छूने की ग़लती न करें.

विलेज टूर

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अनोखा मलाना
मलाना की कुछ ऐसी बातें भी हैं, जो आपका दिल जीत लेंगी.
यहां के लोग पेड़ पर नाख़ून नहीं लगाते. उनके अनुसार इस
तरह से पेड़ को तकलीफ़ होती है. इतना ही नहीं जंगल में
लकड़ियां नहीं जलाते और तो और स़िर्फ और स़िर्फ सूखी
लकड़ियों का ही उपयोग करते हैं, वो भी जंगल से बाहर.

विलेज टूर

मावाल्यान्नॉन्ग, मेघालय
शिलॉन्ग से 90 किलोमीटर दूर दक्षिण में बसा मावाल्यान्नॉन्ग गांव पूरे विश्‍व में साफ़-सुथरा गांव के रूप में प्रसिद्ध है. बहते पानी के ऊपर पेड़ों की जड़ों से बना ब्रिज आपको यहीं देखने को मिलेगा. इस गांव में आपको प्रकृति की इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना देखने को मिलेगा. 2003 में इसे एशिया के सबसे साफ़-सुथरे गांव के अवॉर्ड से नवाज़ा गया था. ईको टूरिज़्म का एहसास करने के लिए मावाल्यान्नॉन्ग ज़रूर जाएं.

कैसे पहुंचे?
यहां जाने के लिए दिल्ली और मुंबई से फ्लाइट के ज़रिए आप शिलॉन्ग एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं. शिलॉन्ग से टैक्सी के ज़रिए आप मावाल्यान्नॉन्ग पहुंच सकते हैं. ट्रेन के ज़रिए भी आप पहले शिलॉन्ग रेलवे स्टेशन जा सकते हैं. फिर वहां से लोकल टैक्सी के ज़रिए आप पहुंच सकते हैं.

मस्ट डू
– ट्रेकिंग के दीवानों के लिए ये जगह बहुत अच्छी है. मावाल्यान्नॉन्ग से लिविंग ब्रिज तक की ट्रेकिंग ज़रूर करें.
– प्रकृति की सुंदर कृति बहते झरनों की नीचे नहाएं.
– गुफाओं की लाइफ जानने के लिए गुफाओं की सैर ज़रूर करें.

विलेज टूर

दांडी, गुजरात
गुजरात का नन्हा-सा गांव, जो कभी गुजरात में ही फेमस नहीं था, महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह ने उसे दुनिया के मानचित्र पर लाकर खड़ा कर दिया. ऐतिहासिक रूप से इस गांव का महत्व तो है ही साथ में प्राकृतिक रूप से भी ये संपन्न है. बच्चों को दांडी की यात्रा ज़रूर कराएं.

कैसे पहुंचे?
फ्लाइट, रेल, बस से आप दांडी पहुंच सकते हैं. आप सूरत पहुंचकर वहां से दांडी जा सकते हैं.

मस्ट डू
– दांडी बीच पर जाकर नमक सत्याग्रह यादें ताज़ा ज़रूर करें.
– होटल के कमरे तक सीमित रहने की बजाय बच्चों को गांव की सैर कराएं.
– वहां के लोगों से नमक सत्याग्रह के बारे में जानें.
– हो सके तो दांडी से साबरमती तक की यात्रा करें. इससे आप उस समय को जीने में सफल रहेंगे.

विलेज टूर

याना, कर्नाटक
जंगलों और पहाड़ों के बीच शान से बना कर्नाटक का ये गांव आपको प्रकृति के अप्रतिम दृश्य का अवलोकन कराएगा. स्कूल के किताबों में पेड़ों और पहाड़ों को देखने और उन्हें रंगों से भरने वाले बच्चों के लिए ये गांव किसी सपने से कम नहीं लगेगा. ये एक हिल स्टेशन है. दुनियाभर से पर्यटक याना का रॉक फॉरमेशन देखने आते हैं.

कैसे पहुंचे?
याना गांव पहुंचने के लिए बैंग्लोर नज़दीकी
एयरपोर्ट है. ट्रेन से जाने के लिए कोंकण रेलवे का चुनाव करें. कुम्टा नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

मस्ट डू
– बच्चों के साथ विबुति झरना देखने ज़रूर जाएं.
– पहाड़ों के बीच बने याना मंदिर में बच्चों के साथ पूजा करने ज़रूर जाएं.
– जंगलों के बीच में बने गुफा में बच्चों के साथ सैर ज़रूर करें.
– ट्रेकिंग के शौक़ीन हैं, तो याना में ट्रेकिंग ज़रूर करें.

बहुत कुछ सीखेंगे बच्चे
आमतौर पर शहरों के दो कमरों के घरों में रहने वाले
बच्चों की दुनिया स़िर्फ आप तक ही सीमित होती है.
देश के गांव किस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं,
उस पर उनका ध्यान नहीं जाता. इस ट्रिप के
माध्यम से बच्चे हक़ीकत से रू-ब-रू होंगे
और वापस आने के बाद अपने में सुधार
करेंगे. उदाहरण के लिए पानी बचाना,
इलेक्ट्रीसिटी बचाना, महंगे कपड़ों,
खिलौने आदि की ज़िद्द करने से
पहले कई बार सोचेंगे.

विलेज टूर

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स्मार्ट टिप्स
– गांव का सैर करते समय अपने बैगपैक में कुछ देसी आउटफिट ज़रूर रखें.
– हील्स आदि रखने की बजाय फ्लैट फुटवेयर और स्पोर्ट्स शूज़ रखें.
– बैग में फर्स्टएड ज़रूर रखें.
– अगर बच्चों को कहीं का भी पानी सूट नहीं करता, तो साथ में पैक्ड पानी ले जाएं.
– जिस गांव की सैर करने जा रहे हैं, वहां की जानकारी लोकल गाइड से पहले ही ले लें. हो सके तो इंटरनेट के माध्यम से वहां की जानकारी ले लें.
– अपने साथ किसी लोकल गाइड को ज़रूर ले जाएं. इससे आप वहां के लोगों से आसानी से बात कर सकेंगे.
– इस ट्रिप पर कैमरा साथ रखें.
– अभी भी हमारे गांवों में इलेक्ट्रीसिटी की काफ़ी दिक्क़त होती है. ऐसे में मोबाइल को फुल चार्ज रखें औऱ हो सके तो घूमने के समय इंटरनेट का उपयोग कम करें. इससे बैटरी बचेगी.
– गांव के लोगों से बात करते समय नम्रता बरतें.
– किसी भी अनजान पर विश्‍वास करने की ग़लती न करें.

विलेज टूर

न उड़ाएं मज़ाक
शहर और गांव के कल्चर में बहुत फर्क़ होता है.
कपड़ों से लेकर बातचीत, खान-पान आदि में
विभिन्नता होती है. ऐसे में वहां के लोगों को
देखकर हंसने या उनका मज़ाक उड़ाने
की ग़लती न करें.

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Top 4 किड्स प्लैनेट (Top 4 Kids Plannet)

Kids Amusement Park

एग्ज़ाम के बाद बच्चों को रिफ्रेशमेंट की ज़रूरत होती है. ऐसे में उन्हें कुछ ऐसी जगहों की सैर कराएं, जिससे वो पूरे साल के लिए रिचार्ज हो जाएं. तो चलिए चलते हैं किड्स प्लैनेट की सैर पर.

Kids Amusement Park

हैलो किटी थीम पार्क, जापान

सालों से आप सभी का मनोरंजन करने वाली किटी की दुनिया भी बहुत रोमांचक है. जापान के टोक्यो में स्थित ये हैलो किटी पार्क आपके बच्चे को रोमांच से भर देगा. तो देर किस बात की इस छुट्टी बच्चे को सैर कराएं किटी वर्ल्ड की. ये एक इंडोर थीम पार्क है.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों से आप जापान की राजधानी टोक्यो पहुंच सकते हैं. इसके बाद आप वहां से टामा सेंटर रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर वहां से किटी थीम पार्क पहुंच सकते हैं.

मुख्य आकर्षण
– हैलो किटी बोट राइड
– किटीज़ हाउस
– फूड मशीन रेस्टोरेंट
– फेस्टिवल प्लाज़ा

Kids Amusement Park

Must Do
– हैलो किटी थीम पार्क की सभी राइड्स का आनंद अवश्य लें.
– किटी कैफे में बैठकर कॉफी ज़रूर पीएं.
– हैलो किटी प्लेन से सफ़र करें.
– हैलो किटी बस की सैर भी आपके लिए मज़ेदार होगी.
– टोक्यो में बने हैलो किटी स्टोर पर ज़रूर जाएं. यहां 8 फिट की किटी आपका स्वागत करने के लिए खड़ी रहेगी.

शॉपिंग भी है ज़रूरी
किटी वर्ल्ड में जाने के बाद शॉपिंग ज़रूर करें. किटी की दुनिया से अपने बच्चों के लिए बहुत-सी चीज़ें ख़रीदें.

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पेप्पा पिग वर्ल्ड, इंग्लैंड

इंग्लैंड के हैम्पशायर में 140 एकड़ में बना पेप्पा पिग वर्ल्ड कार्टून पेप्पा पिग पर आधारित है. यह थीम पार्क बच्चों को कार्टून की दुनिया की सैर कराती है. 60 से अधिक राइड्स वाला ये थीम पार्क बच्चों के साथ-साथ आपका भी मनोरंजन करने के लिए तैयार है.

कैसे जाएं?
पेप्पा पिग वर्ल्ड पहुंचने के लिए आप दिल्ली, मुंबई, चेन्नई आदि महानगरों से सीधे हीथ्रो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर सकते हैं. एयरपोर्ट से लोकल कैब के ज़रिए आप डेढ़ घंटे में पिग वर्ल्ड पहुंच जाएंगे.

Kids Amusement Park

राइड्स
पेप्पा पिग वर्ल्ड में जाने के बाद बच्चों के साथ आप भी राइड करना न भूलें. कुछ मुख्य राइड्स इस प्रकार हैं:
– विंडी कैसल राइड
– ग्रैंडपा पिग्स लिटिल ट्रेन
– ग्रैंडपा पिग्स बोट ट्रिप
– पेपाज़ बिग बलून राइड
– मिस रैबिट्स हेलिकॉप्टर फ्लाइट

मुख्य आकर्षण
– मम्मी पिग एंड डैडी पिग
– पेप्पाज़ हाउस
– द स्कूल
– ग्रैंडपा पिग्स हाउस
– पेप्पाज़ टॉय शॉप

फोटोग्राफी है ज़रूरी
पेप्पा पिग वर्ल्ड में जाने के बाद सभी राइड्स का आनंद ज़रूर लें. राइड्स करते समय फोटो निकालना न भूलें.

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डिज़्ज़ी वर्ल्ड, चेन्नई

चेन्नई से 35 किलोमीटर दूर ईस्ट कोस्ट रोड पर बना डिज़्ज़ी वर्ल्ड देश के बड़े अम्यूज़मेंट पार्क में से एक है. 45 एकड़ में बना ये पार्क बच्चों के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन है. पढ़ाई के प्रेशर को कम करने के लिए बच्चों को यहां ज़रूर ले जाएं.

कैसे जाएं?
किसी भी शहर से आप फ्लाइट/ट्रेन/बस/कार के माध्यम से चेन्नई पहुंच सकते हैं. उसके बाद वहां से डिज़्ज़ी वर्ल्ड जा सकते हैं.

Kids Amusement Park

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राइड्स
– बैट मैन जेट
– डिज़्ज़ी एक्सप्रेस
– टोरा स्पिन
– एलिफैंट सफ़ारी
– ग्रैनी बग
– रॉकेट टावर

मुख्य आकर्षण
– रेन ट्री
– ट्री हाउस
– कार्निवल गेम्स
– इमैजिन

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वन्ड्रेला पार्क, कोचि

बच्चों को मैजिकल चीज़ें बहुत पसंद आती हैं. ऐसे में उन्हें कोचि का वन्ड्रेला अम्यूज़मेंट पार्क बहुत पसंद आएगा. बच्चों के साथ फन टाइम स्पेंड करना चाहते हैं, तो कोचि के इस पार्क में ज़रूर जाएं. कोचि शहर से 12 किलोमीटर दूर पल्लिक्कर पहाड़ी की चोटि पर बना ये पार्क आपके हॉलिडे को और भी मज़ेदार बनाने के लिए तैयार है.

कैसे जाएं?
वन्ड्रेला अम्यूज़मेंट पार्क पहुंचने के लिए आप देश के किसी भी महानगर से सीधे फ्लाइट के ज़रिए कोचि एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं. एयरपोर्ट से लोकल वेहिकल के ज़रिए आप आसानी से पार्क पहुंच सकते हैं. ट्रेन से यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो कोचि रेलवे स्टेशन नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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राइड्स
– फ्लाइंग अम्मू
– बलून टॉवर
– हैप्पी कंगारू
– मैजिक प्लेन
– जंपिंग फ्रॉग

मुख्य आकर्षण
– बलराम केव
– रॉकिन टग
– एक्सडी मैक्स
– म्यूज़िकल फाउंटेन एंड लेज़र शो
– सिनेमैजिक राइड

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टॉप 4 पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन (Top 4 Paragliding Destination)

Paragliding Destinations in India

Paragliding Destinations in India

आज मैं ऊपर…आसमां नीचे…इस गाने की तर्ज पर अगर आप भी मन में अक्सर ऐसा सोचते हैं कि आप भी आसमान में पंछियों की तरह उड़ें, तो चलिए आपके इस शौक़ को हम पूरा कर देते हैं. जी हां, अक्टूबर के इस सुहाने मौसम में अपने पंखों को दीजिए उड़ान और उड़िए खुले आसमान में. कैसे? अरे पैराग्लाइडिंग करके. आसमान में उड़ने की आपकी हसरत को पूरा करने के लिए हम बता रहे हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में, जो पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध और पूरी तरह से सुरक्षित हैं. 
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बीर बिलिंग- हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में स्थित बीर बिलिंग स़िर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर है. यहां पर हर साल दुनियाभर से पर्यटक आते हैं. इसे भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी भी कहते हैं. ख़ूबसूरत
पहाड़ों से घिरा बीर बिलिंग का दृश्य बहुत ही मनोहर दिखता है. पहाड़ों पर इतराते और अटखेलियां करते मेघ आपके टूर को और भी ख़ूबसूरत बना देते हैं.

कैसे पहुंचे?
बीर बिलिंग पहुंचने के लिए आप दिल्ली से बाई रोड पहुंच सकते हैं. न्यू दिल्ली से यहां के लिए डायरेक्ट बसें चलती हैं. आप इन बसों के माध्यम से भी यहां पहुंच सकते हैं. ये बसें आपको बैजनाथ छोड़ेंगी. वहां से आपको टैक्सी के ज़रिए बीर जाना होगा. आपके पास अगर समय की कोई कमी नहीं है, तो आप ट्वाय ट्रेन से भी जा सकते हैं. ये ट्रेन सात घंटे के आसपास आपको बीर छोड़ेगी.

ये भी देखें
बीर बिलिंग जाने के बाद स़िर्फ पैराग्लाइडिंग करना और वापस आ जाना सही नहीं लगता, इसलिए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में जो हैं फेमस और आपकी जर्नी को यादगार बना देंगी.
– कंकलेश्‍वर मंदिर
– बैजनाथ मंदिर
– ताशीजोंग मॉनेस्टरी

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ट्रेकिंग का लें आनंद
अगर आपको पहाड़ों पर चढ़ना अच्छा लगता है, तो बीर में अपनी ये इच्छा ज़रूर पूरी करें. टूरिस्ट गाइड आपको ट्रेकिंग के लिए मदद करते हैं. ग्रुप में ट्रेकिंग करके आप अपनी ट्रिप को और भी आनंददायक बना सकते हैं.

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नंदी हिल- कर्नाटक

नंदी हिल कर्नाटक में चिकबलपुर शहर से मात्र 10 किलोमीटर दूर है. बैंग्लोर से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह बहुत ही आकर्षक पहाड़ है. यहां हर साल दुनियाभर से हज़ारों सैलानी पैराग्लाइडिंग के लिए आते हैं. कुछ दिन के लिए अगर शहरी लाइपस्टाइल से दूर प्रकृति की गोद में बिताना चाहते हैं, तो नंदी हिल आपके लिए परफेक्ट है.

कैसे पहुंचे?
फ्लाइट, ट्रेन या बस के ज़रिए आप बैंग्लोर पहुंच सकते हैं. वहां से फिर आप बसों/टैक्सी के माध्यम से नंदी हिल पहुंच सकते हैं.

ये भी देखें
नंदी हील पहुंचने के बाद पैराग्लाइडिंग से अगर समय बच जाए, तो इन जगहों पर ज़रूर जाएं:
– टीपू सुल्तान का किला
– नंदी टेंपल
– मुदेनहल्ली म्यूज़ियम
– टीपूज़ ड्रॉप

करें साइकलिंग और ट्रेकिंग
आपको अगर साइकलिंग का शौक़ है और नेचर की गोद में साइकलिंग करना चाहते हैं, तो नंदी हिल जाने के बाद साइकलिंग का मौक़ा बिल्कुल न गवाएं. इतना ही नहीं आप यहां ट्रेकिंग का आनंद भी उठा सकते हैं.

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पावना- महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 65 किलोमीटर दूर पावना में पैराग्लाइडिंग करने का आनंद ही कुछ और है. पहाड़ों से अपने पंख लगाकर जब आप पावना लेक के ऊपर उड़ान भरते हैं, तो नज़ारा ही कुछ और होता है. यहां पर आना बहुत ही आसान है. पैराग्लाइडिंग के लिए आपको ज़्यादा दिन का इंतज़ार नहीं करना पड़ता. मखमली पहाड़ और स़फेद झील के आसपास उड़ना बहुत ही अच्छा लगता है.

कैसे पहुंचे?
आप देश के किसी भी शहर से पहले मुंबई या पुणे पहुंच जाइए. उसके बाद आसानी से आप पावना पहुंच सकते हैं. ट्रेन, बस या फिर प्राइवेट टैक्सी करके भी आप वहां पहुंच सकते हैं.

ये भी देखेेंं
– पावना लेक ज़रूर देखें.
– यहां के रिसॉर्ट में ज़रूर जाएं.
– यहां से आप लोनावला भी जा सकते हैं.

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मसूरी- उत्तराखंड

मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है. ये क्षेत्र पढ़ाई, व्यवसाय और टूरिज़्म के लिए जाना जाता है. हो सकता है आफ मसूरी कई बार गए हों और वहां के ख़ूबसूरत पहाड़ों का नज़ारा देखा हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मसूरी में पैराग्लाइडिंग करना कितना सुखद और अद्भुत अनुभव होता है. जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने, इसलिए इस बार आप मसूरी ख़ासतौर पर पैराग्लाइडिंग के लिए जाएं.

कैसे पहुंचे?
आप बस, ट्रेन और फ्लाइट के ज़रिए मसूरी पहुंच सकते हैं. फ्लाइट से जाने के लिए आपको देहरादून के जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर जाना होगा.

ये भी देखेेंं
– मसूरी लेक
– कंपनी गार्डन
– ज्वालाजी मंदिर
– क्लाउड हिल

पैराग्लाइडिंग करने से पहले कुछ बातों का ध्यान ज़रूर रखें.
– ट्रेन्ड और अच्छे इंट्रक्टर के निगरानी में पैराग्लाइडिंग करें.
– उंचाई से डर लगता है, तो दोस्तों के दबाव में आकर पैराग्लाइडिंग बिल्कुल न करें.
– बूट्स, हेलमेट और ग्लोब्स ज़रूर पहनें.
– स्मार्टनेस दिखाने के चक्कर में बादलों के बीच में उड़ान न भरें.
– ख़ुद उड़ान भरने से पहले दूसरों को टेकऑफ और लैंडिंग करते देखें. इससे आपको मनोबल बढ़ेगा और आप सही तरह से उड़ान भर सकेंगे.

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टॉप 4 आईलैंड (Top 4 Island)

आईलैंड
हमसफ़र के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की सोच रहे हैं और उन्हें सरप्राइज़ देना चाहते हैं, तो उन्हें कराइए आईलैंड की सैर. एक नज़र दुनिया के ख़ास आईलैंड पर.इस साल को और भी यादगार बनाने के लिए अपने हमसफ़र के साथ जाएं आईलैंड की ट्रिप पर. आईलैंड की ख़ूबसूरत और रोमांटिक वादियां आप दोनों को और भी क़रीब ले आएगी.
आईलैंड
फीजी

टरक्वाइश वॉटर, ग्लिटरिंग सैंड्स के साथ फीजी पर्यकटों को अपनी ओर आकर्षित करता है. हमसफ़र के साथ यहां जाना किसी रोमांटिक ट्रिप से कम नहीं होगा. यहां के वर्ल्डक्लास रिसॉर्ट आपका मूड ही बदल देंगे.

आकर्षण के केंद्र
गार्डन ऑफ स्लीपिंग जाएंट्स, फायरवॉकिंग सेरिमनी, फीजी म्यूज़ियम, कोरल कोस्ट, द यसावस, पोर्ट देनारू मरीना आदि फीजी के मुख्य आकर्षण हैं.

कैसे जाएं?
मुंबई, दिल्ली, चेन्नई आदि महानगरों से आप फ्लाइट के माध्यम से फीजी के नजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंच सकते हैं. उसके बाद वहां के लोकल वेहिकल से आप फीजी के अलग-अलग आईलैंड की सैर कर सकते हैं.

पार्टनर के साथ फीजी के सुहाने मौसम
में घूमते समय वहां का लोकल ड्रिंक
कावा पीना न भूलें.

आईलैंड
बोरा बोरा

दुनिया के सुंदर आईलैंड में से बोरा बोरा एक है. लग्ज़ीरियस रिसॉर्ट, सनी स्काई, रोमांटिक व्यू के साथ बोरा-बोरा आईलैंड आपको आकर्षित करने के लिए तैयार है. पार्टनर के साथ कुछ पल अकेले में बिताने के लिए ये आईलैंड आपके लिए बहुत ही रोमांटिक जगह है. हरी झाड़ियों से घिरा समुद्र का नीला पानी पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिए आकर्षित करते हैं.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, बैंग्लोर, चेन्नई से आप हवाई जहाज़ के माध्यम से बोरा बोरा पहुंच सकते हैं. बोरा बोरा मोटू म्यूट एयरपोर्ट यहां का इंटरनेशनल एयरपोर्ट है.

बोरा बोरा की सैर करते व़क्त वहां का स्थानीय
खाना खाना न भूलें. कोकोनट मिल्क और
लाइम जूस में बनी माही-माही फिश
का स्वाद ज़रूर चखें.

आईलैंड

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सैंटोरिनी या सदोरिनी

ग्रीस से 200 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र के बीच में बना सैंटोरिनी आईलैंड अपनी सुंदरता के नाते दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है. यहां की ख़ूबसूरत वादियां बॉलीवुड निर्देशकों को भी बहुत पसंद आती हैं. तो अगर आप भी अपने हमसफ़र को स्पेशल फील कराना चाहते हैं, तो यहां ज़रूर जाएं.

आकर्षण के केंद्र
एनसिएंट थिरा, कमारी बीच, रेड बीच,
अमोडी बे आदि यहां की ख़ूबसूरत जगहें हैं.
इसके साथ ही यहां का रेड और ब्लैक सैंड
बीच भी पर्यटकों को ख़ासा पसंद आता है.

कैसे जाएं?
मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली, चेन्नई आदि महानगरों से आप ग्रीस के लिए उड़ान भर सकते हैं. एथेंस एयरपोर्ट से आप सैंटोरिनी के लिए उड़ान भर सकते हैं. या फिर फेरी के माध्यम से भी आप सैंटोरिनी पहुंच सकते हैं.

बॉलीवुड फिल्म चलते-चलते के कुछ दृश्यों की शूटिंग ग्रीस में हुई थी.
इस फिल्म के माध्यम से आप इस आईलैंड की ख़ूबसूरती का
अंदाज़ा लगा सकते हैं. बॉलीवुड फिल्म टशन, बैंग-बैंग,
वॉन्टेड की शूटिंग भी ग्रीस में हुई है.

आईलैंड
मालदीव

क्रिस्टल ब्लू वॉटर में ऑरेंज सनसेट का नज़ारा आपको मालदीव में ही मिल सकता है. हमसफ़र के साथ अपने ख़ास पल को और भी रोमांटिक बनाने की चाह रखते हैं, तो मालदीव की सैर ज़रूर करें. समुद्र के अंदर व्हेल और कुछ अन्य जीवों को देखने के लिए बोट की सैर ज़रूर करें.

आकर्षण के केंद्र
राजधानी माले के अलावा
माले फिश मार्केट, नेशनल
म्यूज़ियम, हुकुरू मीस्की
आदि पर्यटकों को सालभर
मालदीव आने के लिए आकर्षित करते रहते हैं.

कैसे जाएं?
मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली, बैंग्लोर से आप माले इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंच सकते हैं.

मालदीव घूमते समय वहां के लोकल
फूड का ज़ायका लेना न भूलें. फिश
करी के साथ राइस ज़रूर खाएं.
ऐसा स्वाद आपको कहीं और
नहीं मिलेगा.

श्वेता सिंह

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टॉप 4 मोस्ट रोमांटिक हनीमून डेस्टिनेशन (top 4 most romantic honeymoon destination)

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शादियों का सीज़न चल रहा है. ऐसे में लाज़मी है कि अपनी स्वीटहार्ट को आप किसी स्पेशल जगह ले जाना चाहते हों. आप सोच रहे होंगे कि आपका हनीमून डेस्टिनेशन कुछ ऐसा हो कि ताउम्र आपकी पार्टनर को याद रहे. तो चलिए, हम बताते हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में, जो आपके हनीमून को बना देंगे बेहद रोमांटिक और ख़ास.

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उदयपुर
सर्दी की सुहानी धूप के साथ उदयपुर का नज़ारा और भी आकर्षक हो जाता है. उदयपुर घूमने का सही मौसम यही है. ख़ूबसूरत महल और झीलों के इस शहर का नज़ारा तब और ख़ास हो जाता है, जब आपके हाथों में पार्टनर का हाथ हो.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर आदि से आप सीधे उदयपुर के लिए फ्लाइट ले सकते हैं. इसके साथ ही देश के दूसरे शहरों से ट्रेन की सुविधा भी है.

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क्या देखें?
झीलों और महलों के इस शहर में ऐसी बहुत-सी जगहें हैं जिन्हें आप अपनी यादों के एल्बम में कैद कर सकते हैं.
दुनिया के सबसे रोमांटिक पैलेस में से एक उदयपुर लेक पैलेस की सैर करना न भूलें.
पार्टनर के साथ गुलाब बाग में दो पल ज़रूरी बैठें.
पिचोला झील के किनारे बना उदयपुर सिटी पैलेस भागदौड़ से दूर आपको सुख और चैन का एहसास दिलाएगा.

कहां से करें शापिंग?
इतने सालों बाद पार्टनर के साथ इस रोमांटिक जगह पर घूमने का मज़ा शॉपिंक के साथ दुगुना हो जाता है. आप इन जगहों से शॉपिंग कर सकते हैं.
उदयपुर का क्लॉक मार्केट गोल्ड, सिल्वर, कॉपर आदि से बनी आकर्षक वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है.
एम्ब्रॉयडरी, टेक्स्टाइल आदि वस्तुएं ख़रीदने के लिए लेक पैलेस रोड पर शॉपिंग करना न भूलें.
हैंडीक्राफ्ट्स के लिए जगदीश टेम्पल स्ट्रीट मार्केट ज़रूर जाएं.
कपड़ों की ख़रीददारी के लिए आप घंटा घर मार्केट जा सकते हैं.

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औली
समुद्र से 9 हज़ार फीट की उंचाई पर बसा औली उत्तराखंड का बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल है. कुछ लोग सालभर इंतज़ार करने के बाद ठंड के मौसम में औली घूमने का प्लान बनाते हैं. आप भी अगर प्रकृति की गोद में बर्फ की चादर पर बैठकर दो पल बिताना चाहते हैं, तो औली आपके लिए बेस्ट हनीमून डेस्टीनेशन है. पूरी दुनिया में औली स्कीइंग के लिए मशहूर है.

कैसे जाएं?
औली जाने के लिए सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांटरोड है. इसके अलावा आप ट्रेन से भी औली जा सकते हैं. हरिद्वार सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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क्या देखें?
त्रिशूल पीक यहां के आकर्षण का केंद्र है.
औली स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है. अल्पाइन स्कीइंग, नार्डिक स्कीइंग और टेलीमार्क स्कीइंग का आनंद लेना न भूलें.
एशिया की सबसे लंबी केबल कार औली में ही है. बर्फिले मौसम में इसका आनंद लेना न भूलें.
नंदा देवी नेशनल पार्क ज़रूर देखें.
जोशीमठ ट्रैकिंग भी आकर्षण का केंद्र है.

कहां से करें शॉपिंग?
औली से लौटते व़क्त आप जोशीमठ के लोकल बाज़ार से वुलन कैप्स, ब्लैंकेट्स, शॉल आदि ख़रीद सकते हैं.

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हवाई
दुनिया के बड़े और आकर्षक हनीमून डेस्टीनेशन में से हवाई एक है. यह जगह कपल्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं. ट्रॉपिकल बीचेस, जंगल, सर्फिंग, लक्ज़ीरियस होटल आदि चीज़ें हवाई को और जगहों से अलग करती हैं.

कैसे जाएं?
हवाई जाने के लिए आप दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंग्लोर आदि जगहों से फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं.

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क्या देखें?
हवाई का सबसे व्यस्त आईलैंड ओआहू घूमने के लिए बहुत ही बेहतरीन जगह है.
पार्टनर के साथ माउई जाना न भूलें. पूरी तरह से प्रकृति की गोद में समाई माउई में जगह-जगह वाटरफॉल और हरियाली इसके आकर्षण का केंद्र है.
वॉलकेनो लेशनल पार्क देखने के लिए बिग आईलैंड ज़रूर जाएं.
काउआई में हेलीकॉप्टर विज़िट करना न भूलें.
हवाई के बीचेज़ दुनिया के रोमांटिक बीचेज़ में माने जाते हैं. ऐसे में बीचेज़ पर घूमने ज़रूर जाएं.

कहां से शॉपिंग करें?
हवाई के वाईकीकी इंटरनेशनल मारकेट में ख़रीददारी करने का चांस मिस न करें. यहां की लोकल चीज़ों की शॉपिंग आपके लिए बेहतर होगी. हैंडीक्राफ्ट से लेकर फाइन आर्ट तक हर तरह की वस्तुएं यहां आपको मिलेंगी.

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पेरिस
फ्रांस की राजधानी पेरिस किसी स्वप्न लोक की तरह है. शहर के बीच में बहती सोन नदी और उसके किनारे पर खड़ा एफिल टावर दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. पेरिस को फैशन की राजधानी माना जाता है. फैशन की शुरुआत यहीं से होती है.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, बैंग्लोर, चेन्नई आदि बड़े शहरों से फ्लाइट की सीधे सुविधा है.

क्या देखें?
एफिल टावर की झलक के बिना पेरिस टूर की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
सैकड़ों तरह के फूल और पौधों की सुंदरता वाला ट्यूलेरी गार्डन घूमने ज़रूर जाएं.
दुनिया का सबसे बड़ा चित्र संग्रहालय लूब्रु देखने ज़रूर जाएं.

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कहां से शॉपिंग करें?
आर्टिस्टिक ज्वेलरी और डेकोर आइटम्स की शॉपिंग के लिए बेस्टील आर्ट मार्केट प्रसिद्ध है.
डिज़ाइनर कपड़ों और एक्सेसरीज़ के लिए कैनल सेंट मार्टीन मार्केट जाएं.
कुछ एंटीक और सेकंडहैंड चीज़ों की ख़रीददारी के लिए आप फ्ली मार्केट जा सकते हैं.

– श्वेता सिंह 

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टॉप 4 मस्ट गो वीकेंड डेस्टिनेशन (Top 4 Must Go Weekend Destination)

Weekend Destinations

Weekend Destinations

क्या आप भी उन लोगों में से हैं, जिनके पास ऑफिस के काम के अलावा किसी चीज़ के लिए व़क्त नहीं रहता और 24/7 बिज़ी रहते हैं? इसके कारण परिवार आपसे बार-बार शिकायतें करता रहता है कि आप उन्हें कहीं घुमाने नहीं ले जाते. चलिए, हम आपको एक उपाय बताते हैं, जिससे आपका टाइम भी बच जाएगा और परिवार की शिकायत भी दूर हो जाएगी. फैमिली के साथ प्लान करें वीकेंड ट्रिप. जी हां, कहीं दूर नहीं, बल्कि अपने ही शहर के आसपास की चुनिंदा जगहों की सैर कराके आप परिवार का दिल जीतने के साथ-साथ अपना समय भी बचा सकते हैं.

मुंबई के आसपास
कभी न सोने वाली मुंबई नगरी में रहनेवालों को तो पता ही होगा कि ख़ुद के लिए समय निकालना कितना मुश्किल होता है. ऐसे में कहीं न जा पाने का मलाल छोड़कर परिवार के साथ आसपास की जगहों की सैर पर निकल जाइए. यकीन मानिए, तरोताज़ा होने का ये बेस्ट आइडिया है.

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खंडाला
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट जब प्यार से अपनी रील लाइफ हीरोइन रानी मुखर्जी को खंडाला घुमाने की बात करते हैं, तो आती क्या खंडाला… गाना लोगों की ज़ुबां पर चढ़ जाता है. इस गाने ने इस जगह की डिमांड और बढ़ा दी. आप भी अपनी सोलमेट और फैमिली के साथ खंडाला की ट्रिप पर निकल पड़िए. अरे जनाब, ये आपके शहर से महज़ 110 किलोमीटर की दूरी पर ही है.

कैसे जाएं?
प्राइवेट टैक्सी या अपनी कार से आप यहां पहुंच सकते हैं.

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कहां जाएं?
र्टाइगर्स लीप
अमृतांजन पॉइंट
रिवर्सिंग स्टेशन
भुशी लेक
ड्यूक्स नोज़

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जयपुर के आसपास
अगर आप जयपुर में या उसके आसपास रहते हैं, तो वीकेंड में आप फैमिली के साथ माउंट आबू का ट्रिप प्लान कर सकते हैं. ये एक बेहतरीन जगह है.

माउंट आबू
रेत के टीलों में एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू साल के 12 महीनों आपका स्वागत करता है. यह जगह आपको मानसिक शांति के साथ रोमांचित भी करती है. वीकेंड में फैमिली के साथ माउंट आबू की सैर करें.

कैसे जाएं?
जयपुर से टैक्सी/बस से माउंट आबू जा सकते हैं. आप अपनी कार से भी जा सकते हैं. आप ट्रेन के ज़रिए भी माउंट आबू पहुंच सकते हैं, लेकिन रोड ट्रिप का आनंद लेने के लिए टैक्सी/बस से ही जाएं.

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कहां जाएं?
दिलवाड़ा के मंदिर
नक्की झील
टोड रॉक

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भोपाल के आसपास
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में या इसके आसपास रहते हैं, तो वीकेंड में पचमढ़ी आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन होगा.

पचमढ़ी
यह मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है. सतपुड़ा की पहाड़ियों से घिरे इस हिल स्टेशन में प्राकृतिक सौंदर्य की कोई कमी नहीं है.

कैसे जाएं?
भोपाल और छिंदवाड़ा से बस के ज़रिए आप पिपरिया पहुंच सकते हैं. यहां से टैक्सी के ज़रिए आप अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच सकते हैं.

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कहां जाएं?
अप्सरा विहार
प्रियदर्शनी पॉइंट
बी फॉल्स
आइरिन पूल
धूपगढ़
पांडव गुफाएं

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दिल्ली के आसपास
राजधानी की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से इस वीकेंड ब्रेक लीजिए और निकल पड़िए फैमिली टूर पर.

गढ़ मुक्तेश्‍वर
ऐतिहासिक गढ़ मुक्तेश्‍वर आपके लिए कूल वीकेंड पॉइंट बन सकता है. प्रकृति का बेहतरीन रूप आपको यहां देखने को मिलेगा. शहर की चकाचौंध से दूर इस शांत जगह पर आकर आपको सुकून मिलेगा. फैमिली के साथ वीकेंड एंजॉय करने यहां ज़रूर जाएं. यह दिल्ली से स़िर्फ 97 किलोमीटर दूर है.

कैसे जाएं?
ट्रेन से आप गढ़ मुक्तेश्‍वर स्टेशन पहुंच सकते हैं. आप चाहें तो अपनी कार या फिर टैक्सी बुक करके भी वहां पहुंच सकते हैं.

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कहां जाएं?
गंगा मंदिर
उंछागांव का किला
पाटना बर्ड सेंक्चुरी

– श्वेता सिंह 

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क्यों कहते हैं ताइवान को ‘हार्ट ऑफ एशिया’? (Taiwan: why it is known as ‘Heart of Asia’?)

अपनी गगनचुंबी इमारतों के लिए विश्‍व प्रसिद्ध ताइवान अपनी प्राकृतिक छटा व सुंदरता से पर्यटकों को आत्ममुग्ध कर देता है. इस देश का समृद्ध इतिहास दुनियाभर के इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस देश की इन्हीं विविधताओं के कारण इसे ‘हार्ट ऑफ एशिया’ कहा जाता है. आइए देखें, इस देश की कुछ ऐसी ही ऐतिहासिक व प्राकृतिक विविधताओं को.

3

सन मून लेक

सन मून लेक ताइवान की सबसे बड़ी और सबसे ख़ूबसूरत झील है. चारों ओर पहाड़ों से ढंकी व कोहरे के धुंध से घिरी इस झील के ऊपर से जब काले बादल तैरते हुए जाते हैं, तो लगता है, जैसे किसी चित्रकार की बेहतरीन चित्रकारी का नमूना सजीव हो उठा हो. हर साल लाखों की संख्या में लोग इस झील को देखने आते हैं. दरअसल, जब आप इस झील को पूरब की ओर से देखते हैं, तो यह सूरज के आकार की दिखाई देती है, जबकि पश्‍चिम की ओर से देखने पर इसका आकार अर्द्ध चंद्र जैसा दिखाई देता है, इसीलिए इस लेक का नाम सन मून लेक पड़ा है. दुनियाभर से नए शादीशुदा जोड़े इस झील पर अपनी नई ज़िंदगी की ख़ूबसूरत शुरुआत करने आते हैं, जिसके कारण यह ङ्गहनीमून लेकफ और ङ्गलवर्स लेकफ के नाम से भी जानी जाती है.

2

 

द नेशनल पैलेस म्यूज़ियम

तायपई शहर में स्थित इस म्यूज़ियम में 5000 साल पुरानी कई ऐतिहासिक धरोहर सहेजकर रखी गई हैं. इसमें हर तरह की पेंटिंग्स, दुर्लभ व मूल्यवान ऐतिहासिक दस्तावेज़, क़िताबें, मिट्टी से बनी चीज़ें, विविध कलाकृतियां, जेड और तांबे से बनी अनूठी कलाकृतियां देखने को मिलेंगी. म्यूज़ियम में रखी लगभग 6 लाख 20 हज़ार से अधिक धरोहर व नमूने दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं.

 

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फो गुआंग शैन बुद्धा मेमोरियल सेंटर

आधुनिकता व प्राचीनता का संगम, पूर्व और पश्‍चिम की संस्कृति और सभ्यता की झलक लिए फो गुआंग शैन बुद्धा मेमोरियल सेंटर के मुख्य हॉल में चार स्तूप हैं, जो बोध गया के महाबोधी मंदिर की याद दिलाते हैं. भगवान बुद्ध की विशाल मूर्ति पर्यटकों को सम्मोहित कर देती है. इस सेंटर में भगवान बुद्ध की जीवनगाथा, बौद्ध धर्म को दर्शाती आर्ट गैलरीज़, फो गुआंग शैन का ऐतिहासिक म्यूज़ियम, बौद्ध धर्म से जुड़े त्योहारों आदि की मनोहर झलक देखने को मिलती है. चाइनीज़ पैलेस स्टाइल में बनी यहां की इमारतें पर्यटकों को काफ़ी लुभाती हैं. यहां मौजूद 8 पगौड़ा भगवान बुद्ध के पवित्र मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं.

1

तायपेई 101

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का ख़िताब सालों तक अपने नाम रखनेवाली तायपेई 101 ताइवान की मशहूर स्काई हाई है. 508 मीटर लंबा यह टावर ताइवान का फाइनेंशियल सेंटर है, जिसमें 101 फ्लोर हैं. हालांकि इसमें कुल 106 फ्लोर हैं, पर 5 फ्लोर अंडरग्राउंड हैं, इसलिए यह 101 के नाम से ही मशहूर है. 2003 में बना यह टावर 2004 से 2010 तक दुनिया का सबसे ऊंचा टावर रहा है. यह टावर कितना ऊंचा होगा, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 30 किलोमीटर दूर पहाड़ियों से भी इस टावर को देखा जा सकता है. इस टावर में कुल 50 एलिवेटर्स हैं, जो 1010 मीटर/प्रति मिनट की स्पीड से चलते हैं. इस टावर में एंटी-अर्थक्वेक स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल किया गया है, ताकि किसी भी तरह के भूकंप के झटकों को यह आसानी से सह सके.

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फोर्ट प्रोविंशिया (चिहकन टावर्स)

ताइवान के ताइनान में स्थित फोर्ट प्रोविंशिया ताइवान की सबसे पुरानी व ऐतिहासिक इमारत है. यह चिहकन टावर्स के नाम से भी प्रसिद्ध है. 1653 में पुर्तगालियों द्वारा बनवाई गई यह इमारत ताइवान के उपनिवेशवाद के समय को दर्शाती है. सन 1945 में इसका नाम बदलकर चिहकन टावर्स रख दिया गया, जो पुर्तगालियों के यहां आने से पहले इस स्थान का नाम था.

7

चियांग कई शेक मेमोरियल हॉल

नेशनल चियांग कई शेक मेमोरियल हॉल रिपब्लिक ऑफ चाइना के पूर्व राष्ट्रपति चियांग कई शेक की याद में बनाया गया है. ताइपेई के
ज़ोंगज़िंग ज़िले में स्थित यह ताइवान की राष्ट्रीय धरोहर है. इसमें एक लाइबे्ररी और म्यूज़ियम है, जहां चियांग कई शेक की जीवन गाथा, चीन का इतिहास, ताइवान का इतिहास और उसके विकास को देखा जा सकता है. दर्शकों के लिए यह एक सुनहरा मौक़ा होता है, जब उन्हें ताइवान के साथ-साथ चीन के इतिहास की झलक भी देखने को मिलती है.

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नेशनल म्यूज़ियम ऑफ मरीन बायोलॉजी एंड एक्वेरियम

यह ताइवान के पिंगटुंग काउंटी के शेशेंग टाउनशिप में स्थित है. ताइवान की धरती व समुद्र पर पाई जानेवाली अनेक प्रजातियों को देखने और समझने का यह म्यूज़ियम एक वर्च्युअल वर्ल्ड है. इस म्यूज़ियम में तीन एक्ज़िबिट्स हैं- वॉटर्स ऑफ ताइवान, कोरल किंगडम और वॉटर्स ऑफ द वर्ल्ड. इस म्यूज़ियम में 81 मीटर लंबा अंडरवॉटर टनल मूविंग ट्रैक है, जो एशिया का सबसे लंबा अंडरवॉटर टनल है.

वॉटर्स ऑफ ताइवान

1 मिलियन गैलन पानी से बना यह टैंक हर पर्यटक को समुद्री जीवन को क़रीब से देखने का मौक़ा देता है. इसमें टच पूल्स भी हैं, जहां लोग स्टारफिश, क्रैब्स, सी कुकुंबर आदि को छूकर देख सकते हैं.

कोरल किंगडम

यहां आप कई वेरायटी के कोरल रीफ देख सकते हैं, साथ ही इसमें अंडरवॉटर टनल और डुबा हुआ जहाज लोगों को आकर्षित करता है.

वॉटर्स ऑफ द वर्ल्ड

इस एक्ज़िबिट में पर्यटकों को थ्रीडी एनिमेशन के ज़रिए समुद्री जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां देखने को मिलती हैं.

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नाइट मार्केट्स की चहल-पहल 

पॉप्युलर डेस्टिनेशन्स के साथ-साथ ताइवान अपने नाइट मार्केट्स के लिए काफ़ी लोकप्रिय है. दुनियाभर से लोग यहां के नाइट मार्केट्स का लुत्फ़ उठाने आते हैं. नाइट मार्केट्स में ताइवानी फूड से लेकर फैशन व स्टाइल से जुड़ी कई चीज़ें आप ख़रीद सकते हैं. ताइवान में 100 से भी ज़्यादा नाइट मार्केट्स हैं.

– अनीता सिंह

ताइवान: “हार्ट ऑफ एशिया” एक्साइटिंग वेकेशन डेस्टिनेशन्स (Taiwan: Heart of Asia, Exciting & Beautiful Vacation Destinations)

हार्ट ऑफ एशिया के नाम से मशहूर इस देश में चारों ओर विविधताओं का भंडार है. कहीं दूर-दूर तक फैले पहाड़ और झीलें प्राकृतिक छटा बिखेरती हैं, तो कहीं बड़ी-बड़ी इमारतें और स्मारक पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. जहां एक ओर यहां के संग्रहालयों में इस देश के संपन्न इतिहास की झलक देखने को मिलती है, तो वहीं दूसरी ओर हाई स्पीड ट्रेन इनके आधुनिक अस्तित्व को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती हैं. ताइवान की ऐसी ही कुछ ख़ूबियों और लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स की यहां हमने एक झलक दी है.

 

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नेशनल म्यूज़ियम ऑफ मरीन बायोलॉजी एंड एक्वेरियम

यह ताइवान के पिंगटुंग काउंटी के शेशेंग टाउनशिप में स्थित है. ताइवान की धरती व समुद्र पर पाई जानेवाली अनेक प्रजातियों को देखने और समझने का यह म्यूज़ियम एक वर्च्युअल वर्ल्ड है. इस म्यूज़ियम में तीन एक्ज़िबिट्स हैं- वॉटर्स ऑफ ताइवान, कोरल किंगडम और वॉटर्स ऑफ द वर्ल्ड. इस म्यूज़ियम में 81 मीटर लंबा अंडरवॉटर टनल मूविंग ट्रैक है, जो एशिया का सबसे लंबा अंडरवॉटर
टनल है.

 

वॉटर्स ऑफ ताइवान

1 मिलियन गैलन पानी से बना यह टैंक हर पर्यटक को समुद्री जीवन को क़रीब से देखने का मौक़ा देता है. इसमें टच पूल्स भी हैं, जहां लोग स्टारफिश, क्रैब्स, सी कुकुंबर आदि को छूकर देख सकते हैं.

कोरल किंगडम

यहां आप कई वेरायटी के कोरल रीफ देख सकते हैं, साथ ही इसमें अंडरवॉटर टनल और डुबा हुआ जहाज लोगों को आकर्षित करता है.

वॉटर्स ऑफ द वर्ल्ड

इस एक्ज़िबिट में पर्यटकों को थ्रीडी एनिमेशन के ज़रिए समुद्री जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां देखने को मिलती हैं. इसमें एंशियंट ओशियन, केल्प फॉरेस्ट, डीप सी, पोलार सी और बच्चों के लिए डिस्कवरी ज़ोन भी हैं.

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चियांग कई शेक मेमोरियल हॉल

 

नेशनल चियांग कई शेक मेमोरियल हॉल रिपब्लिक ऑफ चाइना के पूर्व राष्ट्रपति चियांग कई शेक की याद में बनाया गया है. ताइपेई के ज़ोंगज़िंग ज़िले में स्थित यह ताइवान की राष्ट्रीय धरोहर है. इसमें एक लाइबे्ररी और म्यूज़ियम है, जहां चियांग कई शेक की जीवन गाथा, चीन का इतिहास, ताइवान का इतिहास और उसके विकास को देखा जा सकता है. दर्शकों के लिए यह एक सुनहरा मौक़ा होता है, जब उन्हें ताइवान के साथ-साथ चीन के इतिहास की झलक भी देखने को मिलती है. इस धरोहर के चारों तरफ़ गार्डन है. साथ ही इसमें नेशनल थियेटर और नेशनल कॉन्सर्ट हॉल भी है.

 

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फोर्ट प्रोविंशिया (चिहकन टावर्स)

ताइवान के ताइनान में स्थित फोर्ट प्रोविंशिया ताइवान की सबसे पुरानी व ऐतिहासिक इमारत है. यह चिहकन टावर्स के नाम से भी प्रसिद्ध है. 1653 में पुर्तगालियों द्वारा बनवाई गई यह इमारत ताइवान के उपनिवेशवाद के समय को दर्शाती है. सन 1945 में इसका नाम बदलकर चिहकन टावर्स रख दिया गया, जो पुर्तगालियों के यहां आने से पहले इस स्थान का नाम था.

 

‘हार्ट ऑफ एशिया’ ताइवान के लिए एक्सक्लूसिव ट्रैवेल गाइड

हार्ट ऑफ एशिया के नाम से मशहूर इस देश में चारों ओर विविधताओं का भंडार है. कहीं दूर-दूर तक फैले पहाड़ और झीलें प्राकृतिक छटा बिखेरती हैं, तो कहीं बड़ी-बड़ी इमारतें और स्मारक पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. जहां एक ओर यहां के संग्रहालयों में इस देश के संपन्न इतिहास की झलक देखने को मिलती है, तो वहीं दूसरी ओर हाई स्पीड ट्रेन इनके आधुनिक अस्तित्व को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती हैं. ताइवान की ऐसी ही कुछ ख़ूबियों और लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स की यहां हमने एक झलक दी है.

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फो गुआंग शैन बुद्धा मेमोरियल सेंटर

 

आधुनिकता व प्राचीनता का संगम, पूर्व और पश्‍चिम की संस्कृति और सभ्यता की झलक लिए फो गुआंग शैन बुद्धा मेमोरियल सेंटर के मुख्य हॉल में चार स्तूप हैं, जो बोध गया के महाबोधी मंदिर की याद दिलाते हैं. भगवान बुद्ध की विशाल मूर्ति पर्यटकों को सम्मोहित कर देती है. इस सेंटर में भगवान बुद्ध की जीवनगाथा, बौद्ध धर्म को दर्शाती आर्ट गैलरीज़, फो गुआंग शैन का ऐतिहासिक म्यूज़ियम, बौद्ध धर्म से जुड़े त्योहारों आदि की मनोहर झलक देखने को मिलती है. चाइनीज़ पैलेस स्टाइल में बनी यहां की इमारतें पर्यटकों को काफ़ी लुभाती हैं. यहां मौजूद 8 पगौड़ा भगवान बुद्ध के पवित्र मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं. तालाब के बीचोबीच बने दो मंज़िला गुंबजदार इमारतें यहां की पवित्र शांति को पर्यटकों के दिलों में उतार देती हैं. मानसिक शांति की तलाश में अक्सर लोग यहां आते हैं. अगर आप भी भगवान बुद्ध की जीवनी, उनके ज्ञान और शिक्षा को समझना चाहते हैं, तो
यहां एक बार ज़रूर आएं.

8

तायपेई 101

 

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का ख़िताब सालों तक अपने नाम 1रखनेवाली तायपेई 101 ताइवान की मशहूर स्काई हाई है. 508 मीटर लंबा यह टावर ताइवान का फाइनेंशियल सेंटर है, जिसमें 101 फ्लोर हैं. हालांकि इसमें कुल 106 फ्लोर हैं, पर 5 फ्लोर अंडरग्राउंड हैं, इसलिए यह 101 के नाम से ही मशहूर है. 2003 में बना यह टावर 2004 से 2010 तक दुनिया का सबसे ऊंचा टावर रहा है. यह टावर कितना ऊंचा होगा, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 30 किलोमीटर दूर पहाड़ियों से भी इस टावर को देखा जा सकता है.
इस टावर में कुल 50 एलिवेटर्स हैं, जो 1010 मीटर/प्रति मिनट की स्पीड से चलते हैं. इस टावर में एंटी-अर्थक्वेक स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल किया गया है, ताकि किसी भी तरह के भूकंप के झटकों को यह आसानी से सह सके. दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के लिए 2011 में इसे यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के लीडरशिप इन एनर्जी एंड एंवायरन्मेंटल डिज़ाइन की तरफ़ से प्लेटिनम सर्टिफिकेट दिया गया.

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ताइवान: हार्ट ऑफ एशिया (Taiwan: Heart of Asia)

एशिया का दिल कहे जानेवाले इस देश में चारों ओर विविधताओं का भंडार है. कहीं दूर-दूर तक फैले पहाड़ और झीलें प्राकृतिक छटा बिखेरती हैं, तो कहीं बड़ी-बड़ी इमारतें और स्मारक पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. जहां एक ओर यहां के संग्रहालयों में इस देश के संपन्न इतिहास की झलक देखने को मिलती है, तो वहीं दूसरी ओर हाई स्पीड ट्रेन इनके आधुनिक अस्तित्व को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती हैं. ताइवान की ऐसी ही कुछ ख़ूबियों और लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स की यहां हमने एक झलक दी है.

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सन मून लेक

सन मून लेक ताइवान की सबसे बड़ी और सबसे ख़ूबसूरत झील है. चारों ओर पहाड़ों से ढंकी व कोहरे के धुंध से घिरी इस झील के ऊपर से जब काले बादल तैरते हुए जाते हैं, तो लगता है, जैसे किसी चित्रकार की बेहतरीन चित्रकारी का नमूना सजीव हो उठा हो. हर साल लाखों की संख्या में लोग इस झील को देखने आते हैं. दरअसल, जब आप इस झील को पूरब की ओर से देखते हैं, तो यह सूरज के आकार की दिखाई देती है, जबकि पश्‍चिम की ओर से देखने पर इसका आकार अर्द्ध चंद्र जैसा दिखाई देता है, इसीलिए इस लेक का नाम सन मून लेक पड़ा है.
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दुनियाभर से नए शादीशुदा जोड़े इस झील पर अपनी नई ज़िंदगी की ख़ूबसूरत शुरुआत करने आते हैं, जिसके कारण यह ङ्गहनीमून लेकफ और ङ्गलवर्स लेकफ के नाम से भी जानी जाती है. हांलाकि सन-मून लेक में स्विमिंग की मंज़ूरी नहीं है, पर सालाना यहां 3 किलोमीटर का स्विमिंग कार्निवल मनाया जाता है, जिसमें हज़ारों की संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं. इसी समय यहां लेज़र शोज़ और कॉन्सर्ट्स किए जाते हैं.

 

द नेशनल पैलेस म्यूज़ियम

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तायपई शहर में स्थित इस म्यूज़ियम में 5000 साल पुरानी कई ऐतिहासिक धरोहर सहेजकर रखी गई हैं. इसमें हर तरह की पेंटिंग्स, दुर्लभ व मूल्यवान ऐतिहासिक दस्तावेज़, क़िताबें, मिट्टी से बनी चीज़ें, विविध कलाकृतियां, जेड और तांबे से बनी अनूठी कलाकृतियां देखने को मिलेंगी. म्यूज़ियम में रखी लगभग 6 लाख 20 हज़ार से अधिक धरोहर व नमूने दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं. अगर आपको ऐतिहासिक कलाकृतियों को देखने का शौक़ है, तो द नेशनल पैलेस म्यूज़ियम आपके लिए परफेक्ट टूरिस्ट स्पॉट है.

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ट्रैवलिंग में कैसे करें बचत? (How to save money during travelling)

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क्या आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें हमेशा यात्रा करनी पड़ती है? कभी ऑफिस का काम, तो कभी फैमिली ट्रिप. अब ऐसे में आपकी जेब पर भार तो पड़ेगा ही, लेकिन कुछ स्मार्ट तरी़के से आप इससे बच सकते हैं. बढ़ती महंगाई में बचत करने की आपकी आदत को तब क्या हो जाता है, जब आप टूर पर निकलते हैं. सालभर की बचाई रकम यूं मिनटों में एक ही ट्रिप पर उड़ा देना समझदारी नहीं है. असली बचत तो तब होगी, जब आप ट्रैवलिंग में भी बचत कर सकें. चलिए, जानते हैं क्या हैं वो टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप स्मार्ट ट्रैवलर बन सकते हैं.

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ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें
किसी भी जगह का टूर प्लान करते समय ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. जिस तरह आप शॉपिंग करने के लिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, ठीक उसी तरह ट्रैवलिंग के लिए ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. इसे आप बैंक के ज़रिए बनवा सकते हैं. बेहतर होगा कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक से ट्रैवल कार्ड बनवाएं. इस ट्रैवल कार्ड की ख़ासियत यह है कि ज़रूरत पड़ने पर आप इसे रिचार्ज भी करा सकते हैं. हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए आपको कैश देने की ज़रूरत नहीं. इससे आप टेंशन फ्री रहेंगे और सफ़र का आनंद भी उठा पाएंगे.

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अपने वॉलेट में ज़्यादा पैसे न रखें
आमतौर पर किसी भी ट्रिप पर जाने से पहले लोग अपने पर्स में एक्स्ट्रा अमाउंट रख लेते हैं. वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि इमर्जेंसी के व़क्त अगर कोई एटीएम मशीन आसपास न दिखे, तो वो इस कैश का इस्तेमाल कर सकें. हो सकता है, आपकी आदत भी कुछ ऐसी ही हो, लेकिन ये सही तरीक़ा नहीं है. इस तरह आपका पूरा ध्यान आपके पर्स पर ही रहता है और आप घूमने का आनंद नहीं ले पाते.

बैंक को इंफॉर्म करें
ट्रैवलिंग में पैसे बचाने का ये एक बेहतरीन तरीक़ा है. ट्रैवलिंग के बारे में अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनी को जानकारी दें. पूरा ट्रैवल प्लान बताएं. ऐसे में ग़लती से अगर आपका कार्ड खो जाता है, तो बैंक उसे ब्लॉक करके आपको दूसरी आईडी मुहैया कराती है ताकि आप आसानी से अपनी ट्रिप एंजॉय कर सकें. कई बार बैंक के पास घूमने के अच्छे प्लान होते हैं. ऐसे में आप काफ़ी पैसे बचा सकते हैं.

फ़र्जी एटीएम से बचें
आप अपने साथ चाहे जितना भी कैश ले जाएं, लेकिन यात्रा करते समय पैसों की कमी हो सकती है. ऐसे में पैसों को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी एटीएम मशीन से पैसे नहीं निकालें. उसी एटीएम से पैसा निकालें जिस बैंक के बारे में आपको जानकारी हो. कोशिश करें कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें.

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पब्लिक कंप्यूटर का यूज़ न करें
कई बार ऐसा होता है कि सफ़र के दौरान हमें नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में आप अपना लैपटॉप लेकर जाएं. कभी भी होटल या साइबर कैफे के कम्प्यूटर का इस्तेमाल न करें. आपके नेट बैंकिंग की निजी जानकारी आसानी से कोई भी हैक कर सकता है, इसलिए पब्लिक कंप्यूटर से नेट बैंकिंग न करें. प्रकित नंदी जो एक एडवर्टाइज़िंग कंपनी में काम करते हैं, उनका कहना है कि एक साल पहले वो अपने परिवार के साथ सिंगापुर छुट्टियां बिताने गए थे. वहां उन्होंने होटल के कंप्यूटर से नेट बैंकिंग की. जब वो सफ़र से वापस आए, तो कुछ दिनों बाद उन्हें पता लगा कि उनके अकाउंट से 15,000 रुपए किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हुए थे. आपके साथ ऐसा कुछ न हो, इसलिए सतर्क रहें.

स्मार्ट टिप्स

  • सफ़र के दौरान अपने बैंक का पासवर्ड, एटीएम पिन आदि की जानकारी फोन पर किसी को न दें.
  • सफ़र पर जाने के बाद अगर बैंक का कस्टमर केयर आपसे आपका पासवर्ड मांगे, तो भूल से भी उन्हें अपना पासवर्ड या एटीएम पिन न बताएं. ये फ़र्जी कॉल हो
    सकता है.
  • अगर आपको और पैसों की ज़रूरत लगे, तो आप मनी ट्रांसफर में जाएं और अपने किसी ख़ास दोस्त या रिश्तेदार को पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहें.
  • बहुत से देशों में अपने राष्ट्रीयकृत बैंक आपको मिल जाएंगे. उन्हीं बैंकों से पैसे निकालें. ऐसा करने से पहले एक बार छानबीन अवश्य करें.
  • अगर दूसरे देश में कोई आपको आपकी करेंसी के बदले उनकी करेंसी देने को कहे, तो भूलकर भी ऐसा न करें. वो आपको धोखा देकर फेक करेंसी दे सकता है.

– सुषमा विश्वकर्मा

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