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Personal Problems: पीरियड्स में होनेवाले दर्द के लिए क्या कोई ख़ास टेस्ट कराना होगा? (Menstrual Cramps- Diagnosis And Treatments)

मेरी उम्र 36 वर्ष है और मेरे दो बच्चे हैं. माहवारी (Menstruation) के दौरान मुझे असहनीय दर्द (Pain) होता है, जिससे राहत पाने के लिए मुझे दर्दनिवारक गोलियां लेनी पड़ती हैं? इसकी क्या वजह है? क्या मुझे किसी ख़ास तरह के टेस्ट की ज़रूरत है?
– शशिबाला, इंदौर.

हो सकता है कि आपको यूटेरस में फायब्रॉइड हो. यह एक प्रकार की गांठ होती है, जो अक्सर युवतियों के गर्भाशय में बन जाती है. फायब्रॉइड की स्थिति और आकार की वजह से ही माहवारी के दौरान दर्द और ज़्यादा ब्लीडिंग होती है. इसके अलावा ओवरी, पेल्विक या गर्भाशय में रक्त जमा होने से वहां सूजन आ जाती है और यह भारी रक्तस्राव और दर्द का कारण बन जाती है. पेल्विक सोनोग्राफ़ी से इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है. इसका इलाज सर्जरी से ही होता है. लेकिन इन दिनों लेप्रोस्कोपिक (कीहोल) सर्जरी से भी इसका इलाज किया जाता है.

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Menstrual Cramps

मैं 18 वर्ष की हूं. शुरू से ही मुझे अनियमित माहवारी की समस्या थी. 1-4 महीने के बीच में कभी भी हो जाती है. इन दिनों मेरे चेहरे पर ख़ूब सारे बाल भी हो गए हैं. कृपया सलाह दें. मैं क्या करूं?
– नुपूर बबेरवाल, हरियाणा.

शुरुआत के एक-दो साल तक पारियड अनियमित हो सकता है. इसके बाद धीरे-धीरे नियमित होने लगता है. यदि आपका पीरियड शुरू से नियमित रहा और अब अनियमित है, तो आपको हार्मोनल प्रॉब्लम हो सकता है. हो सकता है कि आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो. इस तरह की समस्या में अनियमित माहवारी, चेहरे पर बहुत बाल, एक्ने और वज़न बढ़ने जैसे लक्षण होते हैं. समस्या के बारे में जानने के लिए आपको सोनोेग्राफ़ी व हार्मोनल टेस्ट करवा लेने चाहिए. दवाइयों से इस समस्या का निदान हो सकता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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Personal Problems: एंडोमेटिरियोसिस क्या होता है? (Endometriosis: Symptoms, Causes And Treatment)

मैं 24 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. पिछले कई सालों से पीरियड्स (Periods) के दौरान मुझे काफ़ी दर्द (Pain) होता था, तो मैं पेनकिलर ले लेती थी. पर जब ज़्यादा तकलीफ़ बढ़ी, तो गायनाकोलॉजिस्ट को दिखाया. उन्होंने चेकअप करके बताया कि मुझे एंडोमेटिरियोसिस (Endometriosis) है. यह क्या है, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें.
– प्रभा अवस्थी, मुंबई.

यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग के टिश्यूज़ को एंडोमेट्रियम कहते हैं. जब ये टिश्यूज़ यूट्र्स के बाहर ओवरीज़ या पेल्विक एरिया में चले जाते हैं, तब उस अवस्था को एंडोमेटिरियोसिस कहते हैं. इसके सही कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. आमतौर पर यह 25-40 की उम्र की महिलाओं में होता है. इसके कारण महिलाओं को पेड़ू में और पीरियड्स के दौरान काफ़ी दर्द होता है. यह एक वंशानुगत समस्या है. ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के सेवन से इसके होने की संभावना कम हो जाती है.

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Endometriosis

मैं 41 वर्षीया महिला हूं. मुझे अक्सर योनिमार्ग से स़फेद स्राव निकलता है और कभी-कभी बहुत खुजली भी होती है. मुझे क्या करना चाहिए?
– ख़ुशबू कुकरेजा, देहरादून.

कई बार योनिमार्ग से स़फेद स्राव निकलता है, पर अगर आपको उससे कोई समस्या नहीं है, तोउसके इलाज की कोई ज़रूरत नहीं होती है, वो अपने आप ठीक हो जाता है. योनि में खुजली होना और यूरिन पास करते समय जलन होना किसी इंफेक्शन के कारण हो सकता है और इसके कारण भी स़फेद स्राव होता है. अगर आपको डायबिटीज़ आदि कोई समस्या है, तो काफ़ी हद तक मुमकिन है कि यह फंगल इंफेक्शन हो. सबसे पहले फंगल इंफेक्शन का इलाज कराएं, इसके लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं. इसके बाद आपको अपने डायबिटीज़ पर नियंत्रण करना होगा. योनि से होनेवाले स्राव के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जल्द से जल्द किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें.

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Dr. Rajshree Kumar

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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जानिए सीने में जलन के लक्षण, कारण, उपचार और परहेज (Heartburn Causes, Symptoms, Diagnosis, Treatment and Prevention)

सीने (Chest) में जलन (Burning) व दर्द (Pain), खट्टी डकार आना, उल्टी और पेट में भारीपन महसूस होना जैसी समस्याएं हार्टबर्न (Heartburn) की ओर इशारा करती हैं. हार्टबर्न को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिज़ीज़ (Gastroesophageal Reflux Disease) (जीईआरडी) कहा जाता है. हालांकि कई बार लोग इसके लक्षणों को हृदय से संबंधित परेशानियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सही मायने में हार्टबर्न का हृदय की परेशानियों से कोई संबंध नहीं है. हार्टबर्न वैसे तो कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता. चलिए जानते हैं, आख़िर किन वजहों से होता है हार्टबर्न और कैसे इससे निजात मिल सकती है?

Heartburn

क्या है हार्टबर्न?
हार्टबर्न की समस्या पेट में बनने वाले एसिड की वजह से होती है. अगर आप एक ही बार में आवश्कता से अधिक भोजन करते हैं, तो आपके पेट और इसोफेगस (भोजन नली) के बीच एक वाल्व द्वार बन जाता है. जब यह वाल्व पेट में बनने वाले एसिड को इसोफेगस की तरफ़ धकेलता है तो हार्टबर्न की परेशानी शुरू हो जाती है. ऐसी स्थिति में कई बार मरीज़ को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है. हालांकि यह अपेक्षाकृत मामूली स्थिति होती है, जिसे एंटीएसिड दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है या फिर खान-पान की आदतों में सुधार लाकर भी इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है.

Heartburn prevention
कारण
हार्टबर्न की समस्या आमतौर पर अपच से जुड़ी होती है और इसके लिए हमारे खान-पान में शामिल कई चीज़ें ज़िम्मेदार हो सकती हैं, जैसे
1. मसालेदार भोजनप प्याज़ का सेवन
2. खट्टे व अम्लीय पदार्थप टमाटर से निर्मित चीज़ें
3. ऑयली और फ्राइड फूड अत्यधित वसा वाली चीज़ें
4. पुदीने का उपयोगप चॉकलेट का सेवन प अल्कोहल
5. कार्बोनेटेड ड्रिंक्सप कॉफी या कैफीन युक्त पेय पदार्थप मोटापा
6. गर्भावस्था
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर हार्टबर्न की समस्या कभी-कभी हो तो इससे स्वास्थ्य को कोई गंभीर ख़तरा नहीं होता है, लेकिन अगर आपको बार-बार सीने में दर्द या जलन की समस्या हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. इसके अलावा निम्न लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करें.
1. हफ़्ते में दो से अधिक बार हार्टबर्न होने पर.
2. अगर दवा लेने के बावजूद इसके लक्षण कम न हों.
3. खाद्य पदार्थों को खाने या निगलने में कठिनाई होने पर.
4. लगातार उल्टी और मितली जैसा महसूस होने पर.
5. भूख न लगने या खाने में दिक्कत होने व वज़न घटने पर.

Heartburn Causes
करें परहेज़ 
अपने डायट और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके आप हार्टबर्न की समस्या से आसानी से निजात पा सकते हैं. अगर आप हार्टबर्न की समस्या को बढ़ाने वाले कारणों के बारे में जानते हैं तो उनसे बचने की कोशिश करें. इसके अलावा अपने डेली रूटीन में कुछ तरीक़ों को अपनाकर आप इस समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं.
 न करें अम्लीय पदार्थों का सेवन
खट्टे फल, टमाटर, प्याज़, फैटी फूड और कैफीन जैसी चीज़ों का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है और इन चीज़ों का अत्यधिक सेवन हार्टबर्न का कारण भी बन सकता है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप इन चीज़ों का सेवन बहुत सोच-समझकर करें.
भोजन को अच्छे से चबाएं
खाना खाते समय इस बात का विशेष ख़्याल रखना चाहिए कि हर एक निवाले को ठीक तरह से चबाकर खाया जाए, क्योंकि जो लोग बिना चबाए खाने को जल्दबाज़ी में खाते हैं उनमें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं. आगे चलकर ये समस्याएं हार्टबर्न का कारण बनती हैं. इनके अलावा कम पानी पीने से भी सीने में जलन हो सकती है.

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शराब और सिगरेट से तौबा 
स्मोकिंग करना और शराब का अत्यधिक सेवन करना हार्टबर्न की समस्या को जन्म देता है. इतना ही नहीं, यह पाचनतंत्र और शरीर के आंतरिक अंगों को प्रभावित कर अन्य गंभीर रोगों को भी जन्म दे सकता है. ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप शराब और सिगरेट से दूरी बना लें.
अत्यधिक तनाव से बचें
हार्टबर्न के प्रमुख कारणों में से एक कारण तनाव भी है. अत्यधिक तनाव लेने की आदत या फिर डिप्रेशन आपको हार्टबर्न की समस्या दे सकता है, इसलिए तनाव मुक्त रहने के लिए योग करें और मेडिटेशन का सहारा लें. टाइट कपड़े न पहनेंअत्यधिक फिटिंग वाले टाइट कपड़े पहनने से हार्टबर्न की समस्या हो सकती है. टाइट कपड़ों के चलते कई बार पेट में बनने वाला एसिड फिर से भोजन नली में प्रवेश कर जाता है, जिसके कारण हार्टबर्न हो सकता है और आप सीने में जलन महसूस कर सकते हैं.
ग़ौर करें इन बातों पर
1. कई बार लोग हार्ट अटैक के लक्षणों को भी हार्टबर्न समझने की ग़लती कर बैठते हैं और समय पर इलाज नहीं कराते, जिसके चलते वो मौत के शिकार हो जाते हैं.
2.कुछ डकारों के बाद अगर स्थिति सुधर जाती है तो कोई बात नहीं, अन्यथा यह सुनिश्‍चित ज़रूर करें कि सीने में दर्द आपको पेट में गैस के कारण था या किसी और वजह से.
3. सीने में अगर असहजता बकरार रहे तो समय गवाएं बगैर तत्काल किसी डॉक्टर से संपर्क करें, वरना आगे चलकर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
4 . एंटी एसिड दवा लेने के 20 मिनट बाद भी आराम न मिले तो यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है. ऐसे में मरीज़ को ईसीजी कराने के लिए तत्काल किसी नज़दीकी अस्पताल जाना चाहिए.
5. एसिड इनडाइजेशन के कारण सीने में होने वाले दर्द को कई लोग हार्ट अटैक समझकर भ्रमित हो जाते हैं. ऐसे में किसी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलकर यह सुनिश्‍चित करें कि आपमें दिखाई देने वाले लक्षण गंभीर तो नहीं हैं.

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क्या आपके शरीर में आयरन की कमी है? (Signs and Symptoms of Iron Deficiency)

मिनरल्स, विटामिन व प्रोटीन जैसे पोषक तत्व हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं. इनकी कमी होने पर व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. आयरन भी शरीर के लिए बेहद ज़रूरी है. आयरन शरीर को स्वस्थ रखने, लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने और मांसपेशियो को
प्रोटीन पहुंचाने का काम करता है. शरीर में इसकी मात्रा कम होने पर ख़ून की कमी होने लगती हैं, जिसके कारण किडनी, कैंसर, कुपोषण व एनीमिया जैसी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं व बीमारियां होती हैं. पौष्टिक आहार न लेनेे या किसी बीमारी के कारण शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. हम आपको आयरन की कमी के कुछ प्रमुख संकेत बता रहे हैं.

Signs and Symptoms of Iron Deficiency
अत्यधिक थकानः थकान आयरन की कमी का प्रमुख संकेत है. शरीर में आयरन की कमी होने पर लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन का उत्पादन कम हो जाता है. हीमोग्लोबिन फेफड़ों व शरीर के अन्य अंगों तक ऑक्सिजन पहुंचाने का काम करता है. जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है तो मांसपेशियों और अन्य कोशिकाओं तक ऑक्सिज़न नहीं पहुंच पाता, नतीज़तन थकान महसूस होती है. थकान एक आम समस्या है इसलिए यह पता लगा पाना मुश्क़िल होता है कि थकान आयरन की कमी से हो रही है या फिर अन्य कारण से. यदि थकान के साथ कमज़ोरी, ऊर्जा की कमी, एकग्रता की कमी जैसी समस्याएं हों तो यह आयरन की कमी का संकेत है.

मुरझाई त्वचाः रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन हमारी त्वचा को सेहतमंद और लाल बनाए रखने में मदद करता है. आयरन की कमी होने पर हमारा शरीर रक्त कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिसके कारण त्वचा मुरझाई व बुझी हुई दिखती है. चाहे आपकी रंगत कैसी भी हो, अगर आपके होंठ, मसूढ़े, नाख़ून और आंखों का अंदरूनी हिस्सा सामान्य से कम लाल दिखाई दे तो इसका अर्थ हुआ कि आपके शरीर में आयरन की कमी है.

सांस चढ़ना या सीने में दर्दः कोई शारीरिक ऐक्टिविटी करने पर सांस चढ़ने लगे या सीने में दर्द हो तो यह आयरन की कमी का संकेत है. लाल रक्त कोशिकाओं में सीमित मात्रा में हीमोग्लोबिन होने के कारण शरीर के दूसरे अंगों तक ऑक्सिज़न की सप्लाई भी सीमित हो जाती है, जिससे अन्य अंगों तक ऑक्सिज़न पहुंचाने के लिए शरीर को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसके कारण सांस फूलने या सीने में दर्द की समस्या होती है.

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सिरदर्दः शरीर में आयरन की कमी होने पर सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिज़न नहीं मिलता, जिसके कारण रक्त कोशिकाएं सूज जाती हैं, नतीज़तन मस्तिष्क पर ज़्यादा दबाव पड़ता है और सिरदर्द शुरू हो जाता है. इसके अलावा आयरन की कमी होने पर चक्कर भी आता है. जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर अचानक कम हो जाता है या लगातार बहुत दिनों तक कम रहता है तो शरीर ऑक्सिज़न प्राप्त करने के लिए बैचेन हो जाता है, जिसके कारण चक्कर आता है.

बार-बार इंफेक्शन होनाः आयरन हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाने में मदद करता है. यही वजह है कि शरीर में आयरन की कमी होने पर बार-बार इंफेक्शन होता है. लाल रक्त कोशिकाएं शरीर में मौजूद लसीकाओं तक ऑक्सिज़न पहुंचाने का काम करती हैं. इन लसीकाओं में इंफेक्शन से लड़ने वाले व्हाइट ब्लड सेल्स होते हैं. जब किसी के शरीर में आयरन की कमी होती है, तो व्हाइट ब्लड सेल्स पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाते हैं और ऑक्सिज़न न मिल पाने के कारण वे स्ट्रॉन्ग नहीं रह पाते. नतीज़तन जल्दी इंफेक्शन पकड़ लेता है.

जीभ और मुंह में सूजनः मूंह देखकर बहुत से रोगों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, आयरन की कमी उनमें से एक है. उदाहरण के लिए यदि आपकी जीभ सूजी हुई है और उसका रंग बदला हुआ दिखाई दे तो इसका अर्थ हुआ कि आपके शरीर में आयरन की कमी है. जीभ की मासंपेशियों में मायग्लोबिन नामक प्रोटीन पाया जाता है. मायग्लोबिन का स्तर कम होने पर जीभ सूजी व फूली हुई नज़र आती है. आयरन की कमी होने से मुंह सूखने और फटने की समस्या भी होती है.

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विश्‍व एड्स डे पर विशेष: एड्स से डरें नहीं….(World Aids Day special)

World Aids Day

हर साल 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस (World Aids Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना, एड्स पीड़ित लोगों के लिए फंड जुटाना और इससे जुड़े मिथ्स को दूर कर इस बीमारी के प्रति लोगों को एजुकेट करना है.

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एड्स क्या है?
– एड्स बीमारी एचआईवी वायरस से होती है.
– यह वायरस इंसान के इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर देता है.
– एचआईवी पाज़िटिच प्रेग्नेंट स्त्री से उसके बच्चे, असुरक्षित सेक्स और इंफेक्टेड इंजेक्शन के यूज़ से होता है.
कारण
– इसका मुख्य कारण है एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति से अनसेफ सेक्स.
– इश्रेेव ढीरपीर्षीीळेप यानी एचआईवी से संक्रमित रक्त चढाए जाने पर
– एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का इस्तेमाल करने पर.
– एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला के शिशु को भी इसके इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.
– इसके अलावा ब्लड या शरीर के अन्य फ्लूइड जैसे वीर्य के दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने पर, एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के ब्लड, उस्तरा या टूथ ब्रश के इस्तेमाल से भी इसका ख़तरा रहता है.

 

एड्स के लक्षण
शुरुआत में वैसे एड्स के कोई ख़ास लक्षण नहीं दिखते. हां, दूसरी बीमारियों में होनेवाले लक्षण इसमें ज़रूर दिखते हैं, आमतौर पर टर्मिनल स्टेज में इसके लक्षण कमज़ोरी के रूप में नज़र आने लगते हैं.
– मरीज़ का वज़न घट जाता है.
– एक मीने से ज़्यादा समय तक उसे डायरिया रहती है.
– मरीज़ को लगातार बुख़ार बना रहता है.
– रोगी को लगातार खांसी रहती है.
– वह सिरदर्द से भी परेशान रहता है.
– स्किन इंफेक्शन भी हो जाता है.
– हरपीज, ग्लैंड्स वृद्धि व दस्त शिकायत होती है
– मरीज़ के गले की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है.
– मुंह में खुजली होती रहती है.
– रात में सोते समय बहुत ज़्यादा पसीना आने लगता है.
हालांकि ये सभी लक्षण दूरी बीमारियों में भी नज़र आते हैं, इसलिए अलर्ट रहना चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से हर ऐंगल से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करवा लेनी चाहिए.
उपचार
इसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है सारे टेस्ट्स करवाना
एड्स से संबंधित टेस्ट्स
– एलीसा टेस्ट
– वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
– एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन(पीसीआर)
– सीडी-4 काउंट
कैसे करते हैं उपचार
इसके उपचार के लिए कई दवाओं को इस्तेमाल किया जाता है. एचआईवी के उपचार का मुख्य उद्देश्य एड्स के विषाणु को ख़त्म करना, इम्युन सिस्टम को मज़बूत करना और लोगों के मन को डर को दूर करना होता है.

 

कैसे करें बचाव
फिर भी उपचार से बेहतर है सावधानी बरतें.
– अपने पार्टनर के प्रति वफादार रहें.
– एक से अधिक पार्टनर के साथ सेक्स संबंध न रखें.
– अनसेफ सेक्स से बचें.
– हॉस्पिटल में हमेशा नई सीरिंज इस्तेमाल करने को कहें.
– बाहर शेविंग आदि करवाने से बचें. अगर बाहर शेव करा ही रहे हैं, तो नए ब्लेड का इस्तंमाल करने को कहें.
– अगर ब्लड चढवाने की ज़रूरत हो तो पहले कंफर्म कर लें कि जो ब्लड आपको चढाया जा रहा है, वो इंफेक्टेड न हो.
ये सिर्फ मिथक हैं, न करें इन पर यक़ीन
– एड्स के संक्रमण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी हैं. इन पर विश्‍वास न करें.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को छूने, गले लगने या हाथ मिलाने से संक्रमण नहीं होता.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना खाने या उनके साथ रहने से.
– छींकने या खांसने से.
– मच्छर के काटने से.
– आंसू या थूक से भी एड्स फैलने के ख़तरे का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

 

क्या एड्स हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा?
कल्पना कीजिए, दुनिया में एड्स बीमारी ही न हो. यानी धरती पर कोई भी व्यक्ति एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव से पीड़ित न हो. जी हां, अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में एड्स के उन्मूलन के लिए गेटिंग टू जीरो अभियान शुरू किया गया है और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में ये मिशन चलाया जाएगा.
चूंकि एचआईवी पॉज़िटिव अथवा एड्स जेनेटिक बीमारी नहीं है, इसलिए अगर इस बीमारी का इनफेक्शन पूरी तरह रुक जाए यानी कोई नया व्यक्ति इससे इनफेक्टेड न हो तो 25-30 साल बाद दुनिया में एड्स का नामोनिशान भी नहीं रह जाएगा.

 

एड्स के मरीज़ों के लिए सरकार की पहल
एड्स के बारे में लोगों के मन में ग़लत धारणाएं होती हैं. इसका बड़ा दुष्प्रभाव यह होता है कि समाज एड्स मरीज़ों को भय की नज़र से देखता है. वैसे भी यौन विषयों पर बातचीत भारतीय समाज में वर्जित है. ऐसे में यौन संक्रमण से फैलनेवाली इस बीमारी के प्रति भी लोगों का नकारात्मक रुख होता है. इस भयावह स्थिति से निपटने का महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक बदलाव लाना था, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने एचआईवी-एड्स संशोधन बिल-2014 को मंजूरी दी है.
कह सकते हैं कि जो लोग, संगठन या अस्पताल अब तक एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ों को हेय दृष्टि से देखते या उनके साथ पक्षपात या उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करते रहे हैं, उनकी शामत आने वाली है. ऐसा करनै वाले व्यक्ति को अब तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल की सज़ा सुनिश्चित करने के लिए क़ानून बन रहा है. कहने का मतलब देर से ही सही समाज में उपेक्षित तब़के को सरकार का साथ मिल ही गया.
दरअसल, जब किसी को पता चलता है कि अमुक व्यक्ति एचआईवी पॉज़िटिव या एड्स से पीड़ित है, तब उसके प्रति हर किसी की धारणा ही बदल जाती है. लोग हर कोई उस व्यक्ति को हेय दृष्टि से देखने लगता है. इस पक्षपात और उपेक्षा का ख़ौफ़ इस कदर है कि कई लोग यह पता चलने पर कि उन्हें एड्स हो गया है, मौत का वरण कर लेते हैं. बहरहाल, एचआईवी-एड्स मरीज़ों को सरकार का संबल मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन बदनसीब लोगों के प्रति ,माज की धारणा बदलेगी, क्योंकि सरकार की ओर से एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव के मरीज़ों के साथ भेदभाव करने वाले पर सख़्त सज़ा और ज़ुर्माने का प्रावधान किया गया है.
संसद में पेश किए जाने वाले बिल के मुताबिक, एचआइवी से संक्रमित लोगों की सूचना का रिकॉर्ड रखने वाले संस्थानों को डेटा सुरक्षा संबंधी क़दम उठाने होंगे. 18 वर्ष से कम आयु के एचआइवी संक्रमित या पीड़ित मरीज़ को शेयरिंग होम में रहने और घर की सुविधाओं का अधिकार है. बिल में एड्स मरीज़ों और उनके साथ रहने वाले के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने की वकालत करने या उनसे संबंधित सूचना प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
विधेयक में बच्चों और नाबालिग एड्स संक्रमितों को भी संरक्षण मुहैया देने की कोशिश की पूरी कोशिश की गई है. एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति रखने का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीज़ों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा. नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज़ को अपनी बीमारी के बारे में बताना ज़रूरी नहीं होगा. अगर मरीज़ जानकारी देता भी है तो उसका नाम सार्वजनिक करने वाले के लिएसज़ा और जुर्माना के प्रावधान है.