Tag Archives: triple test

Personal Problems: ट्रिपल टेस्ट क्या होता है? (What Is Triple Test?)

मैं 35 वर्षीया महिला हूं, पर अभी तक मां नहीं बन पाई हूं. कुछ समय पहले मैंने कंसीव किया था, पर ट्यूब में प्रेग्नेंसी होने के कारण तुरंत सर्जरी करवानी पड़ी थी. मुझे यह जानना है कि क्या इसके बाद मैं नेचुरली कंसीव कर पाऊंगी?
– राजेश्‍वरी पांडेय, पालमपुर.

महिलाओं में दो ट्यूब्स होती हैं, जिन्हें फैलोपियन ट्यूब्स कहते हैं. ये क़रीब 10 सेंटीमीटर लंबी होती हैं. ट्यूबरकुलोसिस (टीबी), प्रमेह, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ और अन्य यौन रोगों के कारण ट्यूब्स में इंफेक्शन हो सकता है या वो पूरी तरह ख़राब भी हो सकती हैं. जैसा कि आपने बताया कि आपकी इमर्जेंसी में सर्जरी की गई थी, दरअसल उसमें आपकी डैमेज्ड ट्यूब निकाल दी गई होगी. सबसे पहले आपकी दूसरी ट्यूब को चेक करना होगा कि उसमें कोई इंफेक्शन तो नहीं, क्योंकि अगर आपकी एक ट्यूब भी सही-सलामत है, तो आपके नेचुरली कंसीव करने के अभी भी 50% चांसेस हैं. इस बारे में अधिक जानकारी के लिए किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें.

यह भी पढ़ें: क्या विटामिन डी3 लेवल चेक कराने की ज़रूरत है? (Do You Need To Go For A Vitamin D3 Test?)

Triple Test

मैं 36 वर्षीया महिला हूं और मेरी पहली प्रेग्नेंसी को 2 महीने हो गए हैं. सोनोग्राफी के बाद डॉक्टर ने सब नॉर्मल बताया, पर चौथे महीने में ट्रिपल टेस्ट कराने की सलाह भी दी है. यह टेस्ट किसलिए है?
– चेतना पटवा, आगरा.

यह प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में किया जानेवाला एक ब्लड टेस्ट है. दरअसल, आपकी उम्र 35 साल से ज़्यादा है और इस उम्र के बाद प्रेग्नेंसी में कुछ असामान्यताएं आ सकती हैं, इसलिए डॉक्टर ने आपको यह टेस्ट कराने की सलाह दी है. ट्रिपल टेस्ट के ज़रिए यह जानने की कोशिश की जाती है कि कहीं गर्भवती मां को कोई क्रोमोज़ोमल असामान्यताएं या फिर न्युरल ट्यूब डिफेक्ट्स की संभावना तो नहीं. आमतौर पर इस टेस्ट के साथ अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है. अगर किसी तरह की असामान्यता पाई गई और टेस्ट पॉज़ीटिव आया तो,  आपको एक और टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: मेनोपॉज़ के क्या लक्षण होते हैं? (What Are The Signs And Symptoms Of Menopause?)

Dr. Rajshree Kumar

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या एबॉर्शन के बाद कंसीव करने में समस्या आती है? (Does a Past Abortion Affect Chances of Getting Pregnant?)

Pregnancy Problems

 

मैं 29 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. शादी के तुरंत बाद मैंने कंसीव कर लिया था, पर हम दोनों ही इस ज़िम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए एबॉर्शन करा लिया. पर पिछले 2 सालों से हम प्रेग्नेंसी प्लान करना चाहते हैं, पर कंसीव नहीं कर पा रही हूं, इसलिए बहुत ग्लानि महसूस करती हूं. क्या पिछले एबॉर्शन के कारण ऐसा हो रहा है? कृपया, मेरी मदद करें.

– पावनी वर्मा, गुड़गांव.

एबॉर्शन के बाद कुछ महिलाएं आप ही की तरह ग्लानि महसूस करती हैं, पर याद रखें कि यह ़फैसला आपने सोच-समझकर लिया था, इसलिए उसे दिमाग़ से निकाल दें. आप एक बार पहले भी कंसीव कर चुकी हैं, इसलिए दोबारा भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं, पर आप कंसीव क्यों नहीं कर पा रही हैं, उसका कारण पता करने के लिए आप दोनों को ही सीमेन एनालिसेस, ट्यूबल पेटेंसी और ओवेरियन फंक्शन जैसे कुछ ज़रूरी टेस्ट कराने होंगे, जिसके बाद ही सही कारणों का पता चल पाएगा.

यह भी पढ़ें: क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान गर्भनिरोधक की ज़रूरत नहीं पड़ती?

 

Pregnancy Problems

मैं 36 वर्षीया महिला हूं और मेरी पहली प्रेग्नेंसी को 2 महीने हो गए हैं. सोनोग्राफी के बाद डॉक्टर ने सब नॉर्मल बताया, पर चौथे महीने में ट्रिपल टेस्ट कराने की सलाह भी दी है. यह टेस्ट किसलिए है?

– चेतना पटवा, आगरा.

यह प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में किया जानेवाला एक ब्लड टेस्ट है. दरअसल, आपकी उम्र 35 साल से ज़्यादा है और इस उम्र के बाद प्रेग्नेंसी में कुछ असामान्यताएं आ सकती हैं, इसलिए डॉक्टर ने आपको यह टेस्ट कराने की सलाह दी है. ट्रिपल टेस्ट के ज़रिए यह जानने की कोशिश की जाती है कि कहीं गर्भवती मां को कोई क्रोमोज़ोमल असामान्यताएं या फिर न्युरल ट्यूब डिफेक्ट्स की संभावना तो नहीं. आमतौर पर इस टेस्ट के साथ अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है. अगर किसी तरह की असामान्यता पाई गई और टेस्ट पॉज़ीटिव आया तो,  आपको एक और टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है.

यह भी पढ़ें: क्या हीमोग्लोबिन की कमी के लिए हार्मोनल पिल्स लेनी चाहिए ?

पीरियड्स के  दौरान इनसे दूर रहें महिलाएं

  • नमकीन पदार्थ: पीरियड्स के दौरान सबसे पहले खाने में नमक की मात्रा कम करनी चाहिए. इसके अलावा अन्य नमकीन पदार्थ, जैसे- पोटैटो चिप्स, सोडा, चीज़, सोया सॉस आदि. इस दौरान बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि होटल्स आदि में खाने में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे पेट में सूजन आदि की समस्या बढ़
    जाती है.
  • कैफीन: चाय, कॉफी, चॉकलेट जैसे कैफीनयुक्त पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. माना कि इन दिनों चॉकलेट आदि खाने का बहुत मन करता है, पर कैफीन के ज़्यादा सेवन से पेट में मरोड़ के साथ दर्द, तनाव व थकान आदि की समस्या बढ़ जाती है.
  • तला-भुना व मसालेदार: महीने के उन ख़ास दिनों में तला-भुना व अधिक मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए. इन दिनों पाचनशक्ति धीमी पड़ जाती है, इसलिए गरिष्ठ भोजन से दूर ही रहें. इसके अलावा फैट से भरपूर चीज़ें, जैसे- चीज़ व बटर आदि से बचें.
  • डेयरी प्रोडक्ट्स: पीरियड्स के दौरान डेयरी प्रोडक्ट्स, वेजीटेबल ऑयल, रेड मीट से दूर ही रहें. इसमें पाए जानेवाले अनसैचुरेटेड फैट दर्द बढ़ाते हैं.
यह भी पढ़ें: इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव (IUD) का इस्तेमाल कितने सालों तक कर सकते हैं?
rajeshree-kumar-167x250
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें