Tulsi Is Good For Health

आपने देखा ही नहीं ख़ुद अनुभव भी किया होगा कि लोग अपनी सेहत का ख़्याल कई तरह की थेरेपी के मुताबिक करते हैं. मसलन कोई एलोपैथिक मेडिसिन्स ले रहा है, कोई होमियोपैथी, तो कोई आयुर्वेद से अपना इलाज करवाता है, इसी क्रममें स्वस्थ रहने के लिए आज हम आपको मंत्र और ख़ासतौर से तुलसी मंत्र के बारे में जानकारी देंगे, ताकि आप भी मंत्रों केहेल्थ और साइंटिफिक कनेक्शन को बेहतर तरी़के से समझ सकें.

दरअसल, तुलसी एक होली प्लांट तो है ही इस पौधे के अनेक हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं. लेकिन यह तुलसी जब तुलसी मंत्रसे सिंक्रोनाइज़्ड होता है, तब यह बीमारियों को ठीक करने में अद्भुत परिणाम देता है.

तुलसी मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

तुलसी मंत्र के सही जाप करने वाले की सेहत भी दुरुस्त रहती है और अगर उसे कोई बीमारी है तो तुलसी मंत्र के जाप सेबीमारी भी भाग जाती है.

आपको पता ही होगा कि प्राचीन काल में भारतीय ऋषियों और मुनियों ने मंत्र विज्ञान का आविष्कार किया था. दरअसल, तपस्या से समाधि की यात्रा के दौरान ऋषियों-मुनियों का ध्वनि के प्रभाव का अद्भुत ज्ञान हो गया था. उन्हें पता चल गयाथा कि ध्वनि के प्रभावों का इस्तेमाल इंसान की सेहत ठीक रखने में किया जा सकता है. लिहाज़ा, ईसा पूर्व 1700 से1300 ईसवी के दौरान, जिसे भारतीय इतिहास में वैदिक काल के रूप में जाना जाता है, अनेक मंत्र बनाए गए. संस्कृत मेंलिखे गए इन मंत्रों को इस तरह पिरोया गया था कि इन तमाम मंत्रों के जाप से हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम में एक रिदमपैदा होता है. इस रिदम का कनेक्शन दिमाग़ से होता है और दिमाग़ बहुत ज़्यादा ऐक्टिव हो जाता है. ऐक्टिव दिमाग़ शरीरमें ऊर्जा का अतिरक्त संचार करता है. कमोबेश तुलसी मंत्र भी इसी थ्यौरी के मुताबिक काम करता है.

इतना ही नहीं तुलीस मंत्रों के जाप यानी उच्चारण के दौरान जीभ और होंठ में जो मूवमेंट होता है यानी तुलसी मंत्र के जापसे जो फ्रीक्वेंसी पैदा होती है. इस फ्रीक्वेंसी का सकारात्मक असर जाप करने वाले के मन और शरीर पड़ता है. आपनेदेखा होगा, या जब जाप करेंगे तो देखेंगे, तुलसी मंत्र के लगातार जाप से जीभ और तालू बार-बार एक दूसरे को एक ख़ासरिदम से टच करते हैं. इस रिदम का असर इंसान की नाभि या बेलीबटन पर भी पड़ता है. इसका अल्टीमेट असर शरीर केहर प्रेशर पॉइंट पर पड़ता है.. अंततोगत्वा शरीर का हर अंग ऐक्टिव और एनर्जेटिक हो जाता है. इससे हर अंग को ज़रूरीऑक्सीजन मिलने लगता है और ऑक्सीजन मिलते से इंसान स्वस्थ्य महसूस करने लगता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें… तुलसी मंत्र किसी ख़ास बीमारी को दूरी नहीं करता… बल्कि यह अद्भुत मंत्र इंसान केपूरे शरीर को निरोग रखने में मदद करता है. आपको हम बताते चलें कि तुलसी मंत्र का सबसे ज़्यादा असर तुलसी के पौधेके सानिध्य में होता है. इसीलिए, इसीलिए हर थेरेपी की दवा बनाते समय तुलसी के पौधे को भी लिया जाता है.

Tulsi Mantra

सनातन धर्म में तुलसी का पौधा वैदिक काल से ही विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है. इसीलिए तुलसी ही नहीं उसकेपौधे को धार्मिक, पावन, शुद्ध और शुभ माना जाता है. मानयता के अनुसार तुलसी के पत्तों को आमतौपर पर सूर्योदय होनेके बाद ही तोड़ा जाता है. यह भी मान्यता है कि तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक बासी नहीं माने जाते. इसीलिए इन पत्तियों कोरोज़ाना जल से धोकर फिर से भगवान को चढ़ाया जा सकता है. 

अगर आप अपने घर-परिवार को खुशहाल, रोगमुक्त और धन धान्य से संपन्न करना चाहते हैं तो तुलसी मंत्र का जाप करे्ं।अगर मैक्सिमम हेल्थ बेनिफिट्स चाहते हैं, तो विशेष तौर पर एकादशी तिथि पर तुलसी मंत्र का सही जाप ज़रूर करें… 

तुलसी मंत्र का जाप तुलसी के पौधे को जल चढ़ाते हुए करने से ज़्यादा लाभ स्वास्थ्य लाभ मिलता है. सुबह नहा-धोकरतुलसी के पौधे में जल चढ़ाते हुए तुलसी मंत्र का 108 बार जाप करने से घर में जाप करने वाला सुखी और निरोग रहता हीहै, उसके घर में वैभव भी बढ़ता है.

अगर आप अपने शरीर को तंदरुस्त रखना चाहते हैं तो रोजाना सुबह नहाने के बाद तुलसी के पौधे को पानी देते हुए तुलसीमंत्र का 108 बार जाप ज़रूर करें…

– रिंकु शर्मा

Health Benefits Of Tulsi

मनुष्य के लिए तुलसी (Health Benefits Of Tulsi) वास्तव में प्रकृति का सबसे बड़ा वरदान है. हर पल आपका साथ देने के लिए आपके आंगन में यह है ही. आइए, तुलसी के घरेलू नुस्ख़े से आम बीमारियों को दूर करें.

खांसी और ज़ुकाम

* तुलसी, अदरक, प्याज़- इन तीनों के रस में शहद मिलाकर चाटें.

* 3 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते और 1 ग्राम अदरक रस की चाय पीने से खांसी व ज़ुकाम में आराम मिलता है.

* सूखी खांसी होने पर तुलसी के बीज और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर 3-3 ग्राम फांकें और पानी पी लें.

गला बैठना

* तुलसी, प्याज़ तथा अदरक पीसकर रस निकाल लें. इसमें शहद मिलाकर धीरे-धीरे चाट जाएं.

* तुलसी दल आंच पर तपाकर नमक के साथ चबाने से भी लाभ होता है.

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आंखों की तकलीफ़

* थोड़ी-सी फिटकरी पीसें. तुलसी दल का काढ़ा बनाकर उसमें मिला दें. हल्का गर्म रह जाने पर रुई के फाहों से पलकों को सेकें. सूजन
दूर हो जाएगी.

* आंख आना (कंजेक्टिवाइटिस), आंख दुखना आदि शिकायत होने पर तुलसी का रस आंखों में काजल की तरह लगाएं या तुलसी रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर आंखों में 1-1 बूंद डालें. ऐसा करने से आंख ठीक हो जाती है.

अरुचि

* कभी-कभी कुछ भी खाने का मन नहीं करता. एक प्रकार से अरुचि उत्पन्न हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज व पीपल बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और 3 ग्राम पाउडर में शहद मिलाकर चाटें.

* तुलसी के पत्तों से बनी गरम-गरम चाय पीने से पसीना निकलकर अरुचि दूर हो जाती है.

उल्टी

* एक चम्मच तुलसी रस पीने से उल्टी थम जाती है.

* तुलसी रस में शहद मिलाकर चाटने से भी तुरंत लाभ होता है.

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अजीर्ण

* 1 ग्राम काला नमक और 10 ग्राम तुलसी को एक साथ पीस लें. इसे खाकर पानी पी लें.

* अजीर्ण के साथ पेट में दर्द भी उठे, तो तुलसी और अदरक का रस मिलाकर एक-एक चम्मच, दो-दो घंटे के अंतराल पर तीन बार लें. यदि यह रस गुनगुना कर पी लें तो तुरंत लाभ होता है.

* 5 ग्राम तुलसी को 5 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीसकर चाट जाएं, फिर भरपेट पानी पी लें.

अम्ल-पित्त

* तुलसी की बौर, काली मिर्च, नीम की छाल और पीपल बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें. 3 ग्राम एक बार में सुबह-सवेरे फांककर ताज़ा पानी पी लें. अम्लता व पित्त से राहत मिलेी.

– मूरत गुप्ता

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