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रवि दुबे और सरगुन मेहता की प्रेम कहानी (Love Story Of Ravi Dubey And Sargun Mehta)

Love Story Of Ravi Dubey And Sargun Mehta

मनचाहा जीवनसाथी, मनचाहा प्रोफेशन, मनचाही ख़ुशियां… यदि ये सब हासिल हो जाएं तो ज़िंदगी से और क्या चाहिए? टेलीवुड के मेड फॉर ईच अदर कहलाए जाने वाले कपल रवि और सरगुन को भी ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं. वो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ में स्टेप बाई स्टेप क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे हैं और ज़िंदगी का खुलकर लुत्फ़ उठा रहे हैं. एनर्जी से भरपूर इस सुपर स्टाइलिश कपल की प्रेम कहानी कैसे शुरू हुई? आइए, हम आपको बताते हैं.

एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम बनकर एक-दूसरे की क़ामयाबी के हिस्सेदार कैसे बना जा सकता है, ये कोई रवि और सरगुन से सीखे. दोनों बहुत बिज़ी रहते हैं, फिर भी बहुत ख़ुश और एक-दूसरे से कनेक्टेड रहते हैं. दोनों ही बहुत आशावादी हैं और अपनी मंज़िल तक पहुंचना अच्छी तरह जानते हैं. आइए, रवि और सरगुन की ज़िंदगी को और क़रीब से जानें.

कैसी थी आप दोनों की पहली मुलाक़ात?
रवि दुबे: सरगुन से मैं पहली बार करोल बाग़ के सेट पर मिला. बहुत जल्दी हमारी दोस्ती हो गई और उतनी ही जल्दी मुझे ये एहसास हो गया मुझे सरगुन से प्यार हो गया है. फिर क्या था, मैंने सरगुन को प्रपोज़ किया और जल्दी ही हमने शादी कर ली.
सरगुन मेहता: पहली नज़र में तो हम इंसान का रूप-रंग ही देखते हैं. मैंने जब रवि को पहली बार देखा तो वो अपनी वैन से उतर रहे थे, वो करोल बाग़ की शूटिंग के लिए दिल्ली आए थे. ब्लैक कलर के जैकेट और ब्लू डेनिम में रवि को देखकर मैं सोचने लगी, ङ्गओह माय गॉड, ये हैंडसम लड़का कौन है!फ मेज़े की बात ये है कि जब मैंने रवि का लुक टेस्ट देखा था तो मेरा रिएक्शन था, ङ्गये चश्मिस लड़का कौन है?फ लुक टेस्ट में रवि एकदम ऑर्डिनरी लग रहे थे, क्योंकि वो फोटोग्राफ्स उनके कैरेक्टर की थी, लेकिन असल में उन्हें देखकर मैं देखती ही रह गई. फिर जल्दी ही हमारी दोस्ती हो गई. करोल बाग़ के बाद जब हम दिल्ली से मुंबई आए तो मैंने देखा कि रवि हमेशा मेरे आसपास रहते हैं, घर ढूंढ़ने से लेकर सेटल होने तक हर चीज़ में मेरी मदद कर रहे हैं, उनकी ये तमाम बातें मुझे अच्छी लगने लगीं. तब मेरे मन में भी मोहब्बत का एहसास जागने लगा था.

शादी के बाद कितनी बदली ज़िंदगी?
रवि दुबे: कुछ भी नहीं बदला है शादी के बाद, सिवाय इसके कि हम एक घर में रहने लगे हैं. हम दोनों शादी के पहले भी अपने पैरेंट्स से दूर अकेले रह रहे थे. घर और करियर दोनों संभाल रहे थे इसलिए शादी के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ी नहीं हैं, बल्कि बंटी हैं. अब हम साथ मिलकर अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं. हां, इतना ज़रूर है कि शादी के बाद इंसान अपनी लाइफ को लेकर और ज़्यादा क्लियर हो जाता है, उसे पता होता है कि उसे अपनी फैमिली के लिए क्या करना है.
सरगुन मेहता: शादी के बाद ज़िंदगी में कोई बदलाव नहीं आया. शादी से पहले मैं मुंबई में अकेली रह रही थी इसलिए काम के साथ-साथ घर ढूंढ़ने से लेकर, फोन, लाइट के बिल भरना, खाने-पीने बंदोबस्त… सबकुछ मैं अकेले ही मैनेज कर रही थी. शादी के बाद भी मैं वही सारे काम कर रही हूं. अब रवि साथ है तो बल्कि ज़्यादा आसानी हो गई है.

आप दोनों के बीच नोकझोंक कितनी होती है?
रवि दुबे: नोकझोंक तो हर कपल के बीच होता है, लेकिन हमारे साथ ख़ास बात ये है कि हमें दूसरी चीज़ों पर भले ही ग़ुस्सा आ जाए, लेकिन एक-दूसरे पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता.
सरगुन मेहता: डे टु डे लाइफ की नोंकझोक तो हर रिश्ते में होती है, उससे आप बच नहीं सकते. सोफे के कलर, एक्स्ट्रा टीवी या फिर किसी काम को लेकर नोंकझोंक हो ही जाती है, लेकिन वो उतनी ही जल्दी खत्म भी हो जाती है.

डेली सोप में काम करते हुए पर्सनल लाइफ के लिए कितना टाइम मिल पाता है?
रवि दुबे: हर इंसान के पास दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं, ये आप पर है कि आप अपने काम को कितना और कैसे इस्तेमाल करते हैं. मेरी पत्नी मेरी प्राथमिकता है और मैं ये अच्छी तरह जातना हूं कि मैं उसके साथ क्वालिटी टाइम कैसे बिता सकता हूं. दरअसल, जो लोग ढीले होते हैं वो बहुत टाइम पास करते हैं और काम न कर पाने हज़ार एक्सक्यूज़ देते हैं, लेकिन जो लोग एक साथ कई काम करते हैं, वो अपने हर काम के लिए टाइम निकाल ही लेते हैं और टाइम मैनेज करना भी अच्छी तरह जानते हैं.
सरगुन मेहता: आप कितने घंटे काम करते हैं इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप अपने काम से कितना प्यार करते हैं, उसे कितना एंजॉय करते हैं. हम लकी हैं कि हम वही काम कर रहे हैं जो हमें पसंद है. साथ ही मैं उस इंसान के साथ रह रही हूं जिसे मैं प्यार करती हूं इसलिए मैं ख़ुद को बहुत लकी मानती हूं. फिलहाल मेरे पास टाइम ज़्यादा है, क्योंकि मुझे मेरी फिल्म की डेट्स के हिसाब से काम करना पड़ता है, लेकिन रवि डेली सोप कर रहे हैं इसलिए उनके पास बिल्कुल भी टाइम नहीं है, हम दोनों एक छत के नीचे रह रहे हैं, हमारे लिए इतना ही काफ़ी है.

प्रोफेशनल लाइफ में एक-दूसरे को कितना सपोर्ट करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों एक ही प्रोफेशन में हैं इसलिए अपने काम और शेड्यल को अच्छी तरह समझते हैं. अब कुछ ही दिनों में सरगुन अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए बीस दिनों के लिए चली जाएगी और मैं इसके लिए मेंटली तैयार हूं, क्योंकि यही हमारे काम का पैटर्न है. मेरे शहर से बाहर जाने पर सरगुन भी सबकुछ संभाल लेती है.
सरगुन मेहता: रवि और मेरी बॉन्डिग इतनी मज़बूत है कि हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं. आप हमें एक-दूसरे का बैक बोन कह सकते हैं. हम एक-दूसरे को उसकी ख़ासियत और कमी दोनों बताते रहते हैं, ताकि हम साथ मिलकर आगे बढ़ सकें. रवि जानते हैं कि मैं क्या कर सकती हूं और मैं जानती हूं कि रवि में कितना पोटेंशियल है.

प्यार क्या है आपकी नज़र में?
रवि दुबे: मेरी नज़र में प्यार कंपैनियनशिप है. व़क्त के साथ आपके रिलेशनशिप के सारे पिलर्स टूटते जाते हैं, फिर चाहे वो लुक्स हो, फिज़िकैलिटी, लव-अफेयर का यूफोरिया… सबकुछ ध्वस्त हो जाता है. उसके बाद स़िर्फ एक-दूसरे की कंपनी बच जाती है. यदि आप दोनों को वाकई एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है, दुनिया में ऐसा कोई टॉपिक नहीं जो आप एक-दूसरे के साथ शेयर नहीं करते, तो आपका रिश्ता मज़बूत है और आप अपने रिश्ते में हमेशा ख़ुश रहते हैं. यदि आप के बीच कंपैनियनशिप नहीं है, तो जब आपके रिश्ते के सारे पिलर्स ढलते चले जाएंगे, तो आपको अपने रिश्ते को जस्टिफाई करने की वजहें ढूंढ़नी पड़ेंगी.
सरगुन मेहता: मेरी नज़र में प्यार वो है जो अपने आप होता चला जाए, जहां आपको सोच-समझकर या एफर्ट लगाकर कुछ करना न पड़े. आप अपने पार्टनर से दुनिया की हर बात शेयर कर सकें.

भाग्य या ईश्‍वर में विश्‍वास करते हैं?
रवि दुबे: आपकी लाइफ वैसे डिज़ाइन होती है जैसे आप सोचते हैं. यदि आपको लगता है कि ये इंडस्ट्री आपकी दोस्त नहीं दुश्मन है, तो आपको वैसे ही लोग मिलेंगे, लेकिन आप यदि पॉज़िटिव रहेंगे तो आपके साथ सबकुछ पॉज़िटिव होता चला जाएगा. मैं और सरगुन बहुत आशावादी हैं, हम हर चीज़ में पॉज़िटिविटी ही ढूंढ़ते हैं.
सरगुन मेहता: ईश्‍वर कह लीजिए या यूनिवर्स मेरा उसमें अटूट विश्‍वास है. ओपरा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं मेहनत करती जा रही थी और मेरे लिए लक सही समय पर सही जगह रखा हुआ था. मैं भी यही मानती हूं, आपको मेहनत करते हुए ख़ुद को अपने लक के लिए तैयार रखना चाहिए, वो ज़रूर आपके पास आएगा. यदि आप सच्चे दिल से पूरी ताक़त लगाकर कोई काम करते हैं, तो यूनिवर्स आपको आपकी चीज़ उतनी ही शिद्दत से सौंप देता है.

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आपका स्टाइल स्टेटमेंट क्या है?
रवि दुबे: मेरा स्टाइल बहुत सिंपल है. मैं बहुत एक्सपेरिमेंट नहीं करता. कैजुअल वेयर में मुझे बसिक डेनिम और टी-शर्ट पहनना पसंद है. फॉर्मल वेयर में क्लासिक थ्री पीस सूट पहनना पसंद है. कपड़ों के मामले में मैं फिर भी समझौता कर लूंगा, लेकिन एक्सेसरीज़ मैं बेस्ट क्वालिटी की ही ख़रीदता हूं. मेरे पास वॉचेस और ग्लेयर्स का अच्छा-खासा कलेक्शन है.
सरगुन मेहता: रवि बहुत कॉन्शियस रहते हैं कि उन्होंने क्या पहना है, लेकिन मुझे सबकुछ चलता है. मैं शूटिंग के बीच में ही कोई ड्रेस ख़रीद लूंगी और उसे अगले अवॉर्ड फंक्शन के लिए रख दूंगी. मैं स्टाइल के लिए इतना एफर्ट नहीं लगाती कि डिज़ाइनर या स्टाइलिश के पास जाऊं.

पार्टनर की किस बात से चिढ़ जाते हैं?
रवि दुबे: सरगुन बहुत ही ऑर्गनाइज़्ड लड़की है और मैं बहुत ही कैजुअल हूं. अक्सर वो मेरे सामने सौ-दो सौ पेपर लाकर रख देती है और डेडलाइन दे देती है कि सुबह तक इन सब पर साइन हो जाना चाहिए. सच कह रहा हूं, उस व़क्त मुझे बहुत खीझ होती है. (हंसते हुए) सरगुन जानती है कि वो यदि मुझे डेडलाइन नहीं देगी तो वो काम 10-15 दिनों तक टल जाएगा. मुझे पेपर वर्क बिल्कुल भी पसंद नहीं. सरगुन ना हो तो मैं ये सब कर ही नहीं पाऊंगा.
सरगुन मेहता: रवि फोन एडिक्ट हैं, हर पल फोन से चिपके रहते हैं, उनकी इस आदत से मुझे बहुत चिढ़ होती है.

आपकी अपनी वीकनेस क्या है?
रवि दुबे: कई बार मैं बहुत ढीला हो जाता हूं. वैसे तो मैं बहुत एक्टिव हूं, मेरा दिन सुबह छह बजे शुरू हो जाता है और रात एक-डेढ़ बजे ही ख़त्म होता है और उस दौरान लगातार कुछ न कुछ चलता ही रहता है, कई बार तो बैठने की भी फुर्सत नहीं होती, लेकिन कई बार मैं बहुत आलसी हो जाता हूं, फिर मुझे ख़ुद को उस मूड से बाहर धकेलना पड़ता है.
सरगुन मेहता: मेरी भी यही वीकनेस है, कई बार मैं बहुत आलसी हो जाती हूं.

आपके पार्टनर की वो कौन-सी ख़ासियत है जिस पर आप गर्व महसूस करते हैं?
रवि दुबे: सरगुन मेरी स्ट्रेंथ है. मैं बहुत आशावादी हूं, लेकिन जब मैं लो फील करता हूं तो सरगुन ही मुझे समझा पाती है, क्योंकि वो भी मुझसे ज़्यादा आशावादी है.
सरगुनः रवि को आप गूगल मैन कह सकती हैं, वो बहुत अपडेटेड रहते हैं, उनके साथ आपको कुछ भी सर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

घूमने के कितने शौकीन हैं और कहां घूमना पसंद करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों ही घूमने के बहुत शौकीन हैं और टाइम मिलने पर घूमने निकल जाते हैं. हमारे हनीमून का टूर बहुत यादगार था, हम हनीमून के लिए यूरोप गए थे जहां हमने एक साथ कई यादगार पर बिताए, बहुत सारे नए दोस्त बनाए, यूरोप को पूरी तरह से एक्सप्लोर किया. मैं सरगुन के साथ फिर से यूरोप टूर पर जाना चाहूंगा.
सरगुन मेहता: हमें नई-नई जगहों पर घूमने जाना बहुत पसंद है. हालांकि हमें बहुत ज़्यादा टाइम नहीं मिल पाता, फिर भी हम टाइम निकालकर शॉर्ट ट्रिप तो प्लान कर ही लेते हैं. हां, हमारा हनीमून ट्रिप बहुत ख़ास था.

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कितने फिटनेस कॉनिशयस हैं?
रवि दुबे: एक्टिंग के फील्ड में फिटनेस बहुत मायने रखती है. हमें फिटनेस के लिए अलग से टाइम निकालना ही पड़ता है. मैं सुबह लगभग दो घंटे रोज़ वर्कआउट करता हूं. मैं खाने का बहुत शौकीन हूं इसलिए खाने की क़ीमत वर्कआउट करके चुकाता हूं, क्योंकि मुझे इसके लिए ज़्यादा वर्कआउट करना पड़ता है. मुझे मीठा बहुत पसंद है, ख़ासकर चॉकलेट्स.
सरगुन मेहता: हम दोनों फूडी हैं इसलिए हमें रोज़ जिम में बहुत टाइम बिताना पड़ता है. बटर चिकन-बटर नान हम दोनों बहुत चाव से खाते हैं.

जब मैंने ख़ुद को पहली बार स्क्रीन पर देखा: रवि दुबे
पहली बार मैंने ख़ुद को एक ऐड फिल्म में स्क्रीन पर देखा था और वो ख़ुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती. मुझसे पहले हमारे परिवार में कोई भी इस इंडस्ट्री में नहीं था इसलिए ऐसा लग रहा था कि मैंने कुछ स्पेशल अचीव किया है. इससे पहले ख़ुद को दूसरों की शादी के वीडियोज़ में देखा था.
जब से मैंने होश संभाला, तभी से मैं इस इंडस्ट्री में आना चाहता था, लेकिन कैसे आना है ये तब तय नहीं था. दिल्ली से ग्रैज्युएशन करने के बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई आया. पढ़ाई के दौरान एक ऐड फिल्म में काम करने का मौक़ा मिला और उसके बाद एक के बाद एक मौ़के मिलते गए और मैं आगे बढ़ता गया.

…और मैंने एक्टिंग को चुन लिया: सरगुन मेहता
मेरे पैरेंट्स बहुत मॉडर्न ख़यालात के हैं. उन्होंने हम पर कभी अपने ़फैसले नहीं थोपे. हां, ये ज़रूर बताया कि क्या सही है और क्या ग़लत. जब मुझे इस इंडस्ट्री में पहला ब्रेक मिला, तो मैं पोस्ट ग्रैज्युएशन की पढ़ाई के लिए विदेश जा रही थी. जब मैंने अपने पैरेंट्स से इस ब्रेक के बारे में बात की, तो उन्होंने कहा कि तुम करना चाहती हो तो ज़रूर करो. अगर इस इंडस्ट्री में तुम नहीं चली तो पोस्ट ग्रैज्युएशन एक साल बाद कर लेना, लेकिन ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. मेरा एक्टिंग करियर चल पड़ा.
– कमला बडोनी

Exclusive Interview: शांतनु माहेश्वरी का ये नया रोल आपको बहुत पसंद आएगा (Exclusive Interview: Are You Curious To Know KKK Winner Shantanu Maheshwari New Role?)

Exclusive Interview, KKK Winner, Shantanu Maheshwari

हाल ही में एक से बढ़कर एक स्टंट करके खतरों के खिलाड़ी सीज़न 8 (Khatron Ke Khiladi 8) जीतने वाले शांतनु माहेश्‍वरी (Shantanu Maheshwari) को अब बच्चों का साथ लुभा रहा है. जी हां, बहुत जल्दी आप शांतनु माहेश्‍वरी को एक कार्टून कैरेक्ट में देखेंगे. इन दिनों शांतनु माहेश्वरी एम टीवी के न्यू शो लव ऑन द रन (Love On The Run) के होस्ट के रूप में भी टेलीविज़न पर नज़र आ रहे हैं. शांतनु के इस न्यू लुक और नए किरदार के बारे में आइए, शांतनु से ही जानते हैं.

Exclusive Interview, KKK Winner, Shantanu Maheshwari

आप पहली बार कार्टून कैरेक्टर प्ले कर रहे हैं. कैसा लग रहा है ये अनुभव?
सच में बहुत मज़ा आ रहा है. कार्टून कैरेक्टर प्ले करना, डांस करना… मेरे लिए ये एक्सपीरियंस बहुत अलग है. मुझे ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा है. मेरा ये न्यू लुक आप निकलोडियन चैनल पर गट्टू-बटूटू शो में देख सकेंगे. मैं गट्टू का रोल प्ले कर रहा हूं और मेरे साथ बट्टू का रोल योगेश प्ले कर रहे हैं. अब हम सब मिलकर परफॉर्म करेंगे और बच्चों को खूब एंटरटेन करेंगे.

बचपन में अपके फेवरेट कार्टून कैरेक्टर कौन-से थे?
बचपन में मेरे फेवरेट कार्टून कैरेक्टर टॉम एंड जेरी थे. मैं ये कार्टून शो बहुत देखता था. दरअसल, मैं उन्हें ख़ुद से कनेक्ट कर पाता हूं. मैं भी टॉम एंड जेरी की तरह भागता रहता हूं और किसी न किसी को पकड़ता रहता हूं. आजकल मुझे मोटू-पतलू कार्टून कैरेक्टर अच्छे लगते हैं. और हां, जिनका रोल मैं प्ले करूंगा गट्टू-बट्टू, वो भी मुझे बहुत पसंद हैं.

क्या आपको बच्चों का साथ अच्छा लगता है?
हां, मुझे बच्चों की कंपनी बहुत पसंद है, ख़ासकर जब बच्चे झुंड में होते हैं. उस समय उनके साथ ज़्यादा मज़ा आता है. उस समय वो सब अलग-अलग हरकतें करते रहते हैं, शैतानियां करते रहते हैं, जिसे देखना बहुत अच्छा लगता है. मुझे बच्चों को हंसाना और कभी-कभी उन्हें डराना भी अच्छा लगता है.

क्या आप भी बचपन में शरारती थे?
मैं आपको अपनी एक अजीब आदत के बारे में बताता हूं. बचपन में मुझमें एक बड़ी अजीब आदत थी. मैं मम्मी-पापा को घर से कोई भी चीज़ फेंकने ही नहीं देता था. वो जो भी चीज़ें डस्टबिन में फेंकते थे, मैं उन्हें उठा लेता था और उनसे कुछ न कुछ नया बना देता था, जैसे- कभी तराजू बना लिया, कभी कैमरा बना लिया… आज ये सब याद करता हूं तो बहुत हंसी आती है, लेकिन उस व़क्त मुझे ये सब करने में बहुत मज़ा आता था.

अपने फैन्स से आपको किस तरह के कॉम्प्लिमेंट्स मिलते हैं?
लोग कहते हैं कि मैं बॉय नेक्स्ट डोर लगता हूं, उन्हें लगता है कि मैं उनके घर का ही बच्चा हूं, उन्हें लगता है जैसे वो मुझे पहले से जानते हैं… मेरे फैन्स जब मुझे इस तरह के कॉम्प्लिमेंट्स देते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. वो मुझे स्वीट, क्यूट… जाने क्या-क्या कहते हैं. हां, लड़कियां जब अपने प्यार का इज़हार करती हैं, तो थोड़ा अजीब ज़रूर लगता है. दरअसल, लोग हमें टेलीविज़न पर रोज़ देखते हैं इसलिए वो हमारे कैरेक्टर से कनेक्ट हो जाते हैं. वो हमें बहुत प्यार देते हैं. मैं जब भी कहीं जाता हूं और लड़कियां मुझसे पहली बार मिलने पर अपने प्यार का इज़हार करने लगती हैं, तो मुझे ख़ुशी होती है, लेकिन मैं थोड़ा एम्बेरेस (असहज) भी हो जाता हूं. इस सिचुएशन में मुझे समझ नहीं आता कि कैसे रिएक्ट करूं.

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Exclusive Interview, KKK Winner, Shantanu Maheshwari

क्या आपने सोचा था कि आप खतरों के खिलाड़ी सीज़न 8 (Khatron Ke Khiladi 8) जीत जाएंगे?
मैंने खतरों के खिलाड़ी सीज़न 8 में ये सोचकर हिस्सा नहीं लिया था कि मैं जीतूंगा ही. हां, मैंने ये ज़रूर सोचा था कि मैं अपना बेस्ट करूंगा. मैं जानता था कि खतरों के खिलाड़ी शो में मुझे बहुत सारे खतरों को फेस करना है, लेकिन मैं इसके लिए मेंटली तैयार था. खतरों के खिलाड़ी में हिस्सा लेना मेरे लिए स्पेन घूमने का मौका था, लोगों से मिलने का मौका था, अलग-अलग स्टंट करने का मौका था… इन सबका एक्सपीरियंस बहुत अच्छा था. मैं फ्लो के साथ आगे बढ़ता चला गया और जीत भी गया. खतरों के खिलाड़ी सीज़न 8 मेरे लिए एक बड़ा अचीवमेंट है.

खतरों के खिलाड़ी 8 (Khatron Ke Khiladi 8) शो के दौरान कौन-से स्टंट्स आपके लिए चैलेंजिंग थे?
मुझे चिकन वाला स्टंट बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. और हां, पानी वाला टास्क भी मेरे लिए मुश्किल था. मैं अच्छा स्विमर नहीं हूं इसलिए उसे करने में मुझे बहुत तकलीफ़ हुई.

शांतनु माहेश्‍वरी और डांस को कैसे डिसक्राइब करेंगे?
मैं डांस के लिए इतना ही कह सकता हूं कि डांस के बिना शांतनु माहेश्‍वरी जी नहीं सकता.

आपको डांस का शौक कब हुआ?
मेरी मां को डांस का बहुत शौक था, लेकिन उन्हें उनके बचपन में डांस करने का मौका नहीं दिया गया, इसलिए वो चाहती थीं कि उनके बच्चों में ये टैलेंट हो. तो बस, उनके इस बच्चे में डांस का टैलेंट आ गया. मेरे डांस में मेरी मां बहुत बड़ा योगदान है, मां ने हमेशा मेरे डांस को बढ़ावा देने की हर मुमकिन कोशिश की है.

क्या आप सिंगल चाइल्ड हैं?
(हंसते हुए) नहीं, मैं ड्वेल चाइल्ड हूं. हम दो भाई हैं. हम ज्वाइन फैमिली में रहते हैं, इसलिए एक और भैया भी हैं, मैं घर में सबसे छोटा था इसलिए इन सबके काम मैं ही किया करता था. (हंसते हुए) जैसे ऑफिस में रनर बॉय होता है ना, बस समझ लीजिए मैं अपने घर का रनर बॉय ही था. ख़ास बात ये है कि हम सब में बहुत अच्छी बॉन्डिंग है.

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क्या आपको बचपन में कभी मार पड़ी है?
मैंने बचपन में शैतानियां बहुत की हैं इसलिए घर में सबसे ज़्यादा मार भी मुझे ही पड़ी है और मैं घर का सबसे छोटा बेटा था, इसलिए सबसे ज़्यादा प्यार भी मुझे ही मिला है.

क्या आपको गुस्सा आता है?
हां, मुझे गुस्सा तो बहुत आता है, लेकिन मैं अपने गुस्से को कंट्रोल कर लेता हूं. लेकिन जब कोई झूठ बोलता है, तब मैं अपना गुस्सा कंट्रोल नहीं कर पाता.

ऐसी कौन-सी चीज़ है जो आपको अपनी पर्सनैलिटी में सबसे अच्छी लगती है?
मैं बहुत मेहनती हूं और अपना हर काम पूरी मेहनत और लगन से करता हूं.

आपकी पर्सनैलिटी की बुरी बात क्या है?
मैं बहुत ज़्यादा इमोशनल हूं, इतना ज़्यादा सेंसिटिव होना शायद ठीक नहीं है.

क्या आप कभी झूठ बोलते हैं?
वैसे तो मैं झूठ नहीं बोलता, लेकिन छोटे-मोटे झूठ बोल लेता हूं, जैसे- भले ही मुझे पहुंचने में एक घंटा लगने वाला हो, लेकिन मैं कह देता हूं, बस पहुंचने ही वाला हूं.

– कमला बडोनी

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ये रिश्ता क्या कहलाता है सीरियल की टीम पहुंची ग्रीस! (Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece!)

Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece

जब किसी सीरियल की शूटिंग आउटडोर लोकेशन पर होती है, तो सीरियल की ख़ूबसूरती तो निखरती ही है, सीरियल के कलाकार भी ख़ुश हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ ये रिश्ता क्या कहलाता है (Ye Ristha Kya Kehlata Hai) सीरियल में. जी हां, मोहसिन ख़ान (Mohsin Khan) और शिवानी जोशी (Shivani Joshi) को अब आप ग्रीस (Greece) के लोकेशन में देखेंगे. राजन शाही ने अपने सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है की शूटिंग के लिए ग्रीस के ख़ूबसूरत नज़ारों को चुना है.

Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece

मोहसिन ख़ान और शिवानी जोशी ने शूटिंग के साथ-साथ ग्रीस के ख़ूबसूरत नज़ारों का लुत्फ़ उठाने का मौक़ा हाथ से जाने नहीं दिया.

Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece

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ग्रीस के ट्रेडिशनल अटायर में ये दोनों बहुत प्यारे लग रहे हैं. फिल्म तमाशा के गीत मटरगश्ती खुली सड़क पर… की तर्ज़ पर दोनों जमकर लुत्फ़ उठाते नज़र आ रहे हैं.

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Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece

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शूटिंग के दौरान मोहसिन ख़ान और शिवानी जोशी को ग्रीस के लोकल कलाकारों से मिलने का मौक़ा भी मिला. ग्रीस के कलाकारों ने इन दोनों को ग्रीस में घूमने के टिप्स भी दिए.

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Ye Ristha Kya Kehlata Hai rocks in Greece

भई, इसे कहते हैं आम के आम और गुठलियों के दाम. शूटिंग के साथ यदि ग्रीस जैसे ख़ूबसूरत देश में घूमने का मौका मिल जाए, तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है.

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टीवी सितारे ऐसे सेलिब्रेट करते हैं नवरात्रि (Festive Mood: TV Actors Celebrate Navratri)

Indian TV Actors Celebrate Navratri

नवरात्रि यानी श्रद्धा-भक्ति, रंग, उल्लास का त्योहार. भक्ति के रंग में डूबे इस कलरफुल फेस्टिवल को कैसे सेलिब्रेट करते हैं टीवी सेलिब्रिटीज़? आइए, उन्हीं से जानते हैं.

Indian TV Actors Celebrate Navratri

रश्मि देसाई (Rashami Desai)
नवरात्रि गुजरातियों का सबसे शाही और कलरफुल त्योहार है. मैं गुजराती हूं इसलिए मेरे लिए नवरात्रि रेग्युलर पूजा के साथ ही सजने-संवरने, दोस्तों से मिलने, डांडिया और गरबा का लुत्फ़ उठाने का बेस्ट टाइम है. अब मैं हर दिन गरबा खेलने नहीं जा सकती, लेकिन मैं हर साल कम से कम तीन दिन गरबा खेलने ज़रूर जाती हूं. मैं सालों से नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखती हूं. नवरात्रि में मैं स़िर्फ फ्रूट्स खाती हूं. इन दिनों मैं अपने फेवरेट फ्रूट्स सेब, केला और कीवी खाती हूं. नवरात्रि की यादों मेरे बचपन की सबसे अनमोल यादें वो हैं जब नवरात्रि के दिनों में मां मुझे गरबा और डांडिया की शॉपिंग के लिए ले जाती थीं. तब मैं कलरफुल कपड़े और ज्वेलरी पहनकर पूरे नौ दिन गरबा खेलने जाती थी. मैं व्रत भी रखती थी इसलिए मां मुझे व्रत में खाई जाने वाली टेस्टी डिशेज़ बनाकर खिलाती थीं. हम नवरात्रि में गरबी (मिट्टी का डेकोरेट किया हुआ छोटा घड़ा, जिसके अंदर दीया रखकर पूरे नौ दिन तक जलाए रखना होता है) भी लेकर आते थे और पूरे नौ दिन पूजा-आरती करते थे. नवरात्रि के दिनों में मैं बहुत एक्साइटेड हो जाती हूं.

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शीबा (Sheeba) 
मेरे लिए नवरात्रि फेस्टिविटी की ख़ूबसूरत शुरुआत है. इस दौरान मुझमें अपने आप ही एक अलग तरह की ऊर्जा आ जाती है. मैं नवरात्रि के दौरान हर दिन देवी का हर रंग पहनने की कोशिश करती हूं. हां, शूटिंग के लिए मुझे अपने रोल के अनुरूप कपड़े बदलने पड़ते हैं, फिर भी मैं घर से परफेक्ट कलर पहनकर निकलती हूं. मैं नवरात्रि में पूरे नौ दिन का व्रत रखती हूं और इस दौरान मैं स़िर्फ फलाहार लेती हूं. इस साल मैं नवरात्रि में दिल्ली में हूं इसलिए रामलीला का भी जमकर लुत्फ़ उठाऊंगी.

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सुप्रिया कुमारी (Supriya Kumari) 
मुझे बहुत ज़्यादा भीड़ पसंद नहीं है इसलिए मैं डांडिया नहीं खेलती. हां, मेरी मां दुर्गा में बहुत आस्था है इसलिए मैं पूरे नौ दिन दुर्गा पूजा सेलिब्रेट करती हूं. मैं कलर पैटर्न में भी विश्‍वास नहीं करती इसलिए मैं नवरात्रि में अपनी पसंद के कलरफुल कपड़े पहनती हूं.

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Indian TV Actors Celebrate Navratri

जैसमीन भसीन (Jasmin Bhasin)
मेरी नवरात्रि से जुड़ी बहुत ही ख़ूबसूरत यादें हैं. मुझे याद है, हम स्कूल में नवरात्रि ऑर्गनाइज़ करते थे और सब मिलकर डांडिया खेलते थे. मुझे इस फेस्टिवल का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. इस बार मैं नवरात्रि में मुंबई में हूं और काम में बहुत बिज़ी हूं, लेकिन काम से यदि फुर्सत मिली, तो मैं ज़रूर डांडिया के लिए बाहर जाऊंगी.

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बिग बॉस 9 की सदस्य और एक वीर की अरदास… वीरा की एक्ट्रेस दिगंगना सूर्यवंशी का गृह प्रवेश (Bigg Boss 9 And Ek Veer Ki Ardaas… Veera Actress Digangana Suryavanshi’s Griha Pravesh!)

Digangana Suryavanshi

जी हां, बिग बॉस 9 की सदस्य और स्टार प्लस के पॉप्युलर सीरियल एक वीर की अरदास… वीरा की एक्ट्रेस दिगंगना सूर्यवंशी ने मुंबई में घर ख़रीदा है. हाल ही उनके गृह प्रवेश फंक्शन में कई टीवी सेलिब्रिटीज़ उनकी इस ख़ुशी में शामिल होने उनके घर आए. 

Digangana Suryavanshi Grih Pravesh A

 

मुंबई में अपना घर ख़रीदना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. घर ख़रीदने की ख़ुशी में दिगंगना ने एक छोटा-सा गेट टुगेदर रखा, जिसमें टेलीविज़न के उनके ख़ास फ्रेंड्स उनके इस स्पेशल फंक्शन में शामिल हुए.

Digangana Suryavanshi with family and Manish Raisinghania- Avika Gor

दिगंगना के गृह प्रवेश फंक्शन में जिया मानेक, अविका गोर, फैज़ल ख़ान, सना अमीन शेख़, भावेश बलचंदानी, मनीष रायशिंघन आदि शामिल हुए.

Gia Manek- Digangana Suryavanshi- Sana Amin Sheikh - Bhavesh Balchandani -Faisal Khan

दिगंगना और उनके पैरेंट्स (नीरज सूर्यवंशी और सरिता सूर्यवंशी) अपनी मेहमांनवाज़ी के लिए बहुत मशहूर हैं और इस बार भी उन्होंने घर आए सभी मेहमानों का जमकर स्वागत किया.

Group picture (2)

दिगंगना अब फिल्मों में काम करना चाहती हैं. देखें, दिगंगना के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनका नया घर कितना लकी साबित होता है.

Digangana Suryavanshi Grih Pravesh

Digangana Suryavanshi