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समझदारी की सेल्फी से सुधारें बिगड़े रिश्तों की तस्वीर (Smart Ways To Get Your Relationship On Track)

Relationship On Track

चल बेटा सेल्फी ले ले रे… जी हां, ज़माना सेल्फी का है. हम ख़ुद को कैमरे में कैद करने का एक मौक़ा भी नहीं चूकते. हमारी पूरी कोशिश होती है कि हर तस्वीर में हम अच्छे दिखें. तो चलिए, हम भी आपसे सेल्फी लेने के लिए कहते हैं, पर यह सेल्फी होगी आपके व्यवहार की. कितना अच्छा होता अगर कोई ऐसा कैमरा भी होता, जो हमारी सेल्फी में हमारी अंदरूनी ख़ूबसूरती दिखाता या हमारी गलतियां भी दिखाता. आप शायद समझ ही गए होंगे कि यहां बात हो रही है आत्मविश्‍लेषण की.

Relationship On Track
क्यों ज़रूरी है समझदारी की सेल्फी?

अमूमन हमारे जितने मन-मुटाव होते हैं, अधिकतर में हम दूसरों पर सारा दोष मढ़ कर बड़ी आसानी से आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन आगे बढ़ते समय हम यह भूल जाते हैं कि कई सारे रिश्ते पीछे ही छूट गए. हमें ऐसा लगता है कि हमें इन रिश्तों की, सगे-संबंधियों की कोई ज़रूरत ही नहीं, पर क्या आप जानते हैं कि आपकी यही सोच आपकी सबसे बड़ी ग़लती है. और ना स़िर्फ ग़लती है, बल्कि समाज के लिए यह सोच बहुत बड़ा ख़तरा भी है, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है.

रिश्तों से अपने आपको अलग कर लेना या उनसे दूर जाना हमारे सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. तो यह तो तय है कि रिश्तों को सहेजना बहुत ही आवश्यक है, तो क्यों ना रिश्तों की इस तस्वीर को सुंदर बनाएं.

आजकल किताबी ज्ञान की हम में कोई कमी नहीं, पर याद रखिए किताबें समझदारी नहीं बांटतीं, इसके लिए हमारे अंतर्मन का जागृत होना ज़रूरी है. लेकिन इसे जागृत किया कैसे जाए, यह बहुत आसान नहीं, पर हां मुश्किल भी नहीं. इसके लिए आपको किसी और को नहीं, बल्कि ख़ुद को पहचानने की ज़रूरत है. साथ ही यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम ना होकर निरंतर प्रक्रिया है. आपको बस, करना इतना है कि रोज़ अपनी एक सेल्फी
खींचनी है और यह सेल्फी आप कैसे और कौन-से कैमरे से खीचेंगे, यह हम आपको बताएंगे.

कैसे खींचें समझदारी से सेल्फी?

सच्चाई की फ्लैश लाइट चमकाएं

सच्चाई बहुत ज़रूरी है, क्योंकि झूठ आपको कमज़ोर बनाता है. झूठा अहंकार आपको बार-बार झूठ बोलने पर मजबूर करेगा. इसलिए जब भी किसी से बात करें, तो अपना सच के फ्लैशवाला कैमरा साथ ले जाना ना भूलें. सच बोलना आपको ताक़त देगा. जब कभी आप झूठ का सहारा लेने की कोशिश करें, तो अपने आपको रोक लें. यह स़िर्फ आप कर सकते हैं, क्योंकि केवल आप ही जानते हैं कि आप कब झूठ का सहारा ले रहे हैं. इसके लिए आप ख़ुद को एक छोटी-सी चुनौती भी दे सकते हैं. सोने से पहले किसी काग़ज़ पर दिनभर में आपके द्वारा बोले छोटे से छोटे झूठ की ़फेहरिस्त बनाएं और अगले दिन पिछले दिन से कम झूठ बोलने की कोशिश करें.

अपनी तस्वीर में लाएं अच्छाई की ब्राइटनेस

बेवजह की जलन, दूसरों की नाकामयाबी में ख़ुश होना… ये सभी चीज़ें आपकी अच्छाई को ख़त्म करती है. इस तरह की भावनाएं आपके समझदारी के आईने को धूमिल कर सकती हैं. ये सभी भावनाएं ना स़िर्फ आपके रिश्ते को प्रभावित करती हैं, बल्कि आपके
सोचने-समझने की क्षमता को कमज़ोर करती हैं. जब आपकी अच्छाई चमकेगी, तो आपके अंतर्मन की तस्वीर भी उजली-उजली होगी.
इसके लिए भी एक काम किया जा सकता है. रोज़ कम से कम एक अच्छा काम करें, जैसे- बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद.

दूर करें शिकायतों की उदासी

अपनी सेल्फी में यह ज़रूर ध्यान से देखें कि कहीं आप हमेशा जीवन से शिकायतें तो नहीं करते रहते. जिसे अपने जीवन से हमेशा स़िर्फ शिकायतें ही होती हैं, उसका ख़ुश रहना असंभव है. शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करने से अच्छा है कि आप उन उपायों पर ध्यान दें, जिनसे शिकायतों को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह ध्यान में रखें कि कुछ भी परफेक्ट नहीं होता. अपने जीवन को कुछ कमियों के साथ स्वीकार करें.

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खींचें हाई डेफिनेशन तस्वीर

जब समझदारी के कैमरे से सेल्फी लेनी है, तो कोशिश करें कि आपकी तस्वीर हाई डेफिनेशन हो यानी छोटी-छोटी बातों में ना फंसें. यही छोटी बातें हमें छोटा बना देती हैं. अपने जीने के स्तर को ऊंचा उठाएं. झगड़े या छोटी-मोटी नोंक-झोंक, मान-अपमान इन चीज़ों से ऊपर उठकर सोचें. अगर यह छोटी बातें तस्वीर से चली जाएं, तो ख़ुशियों के रंग निखरकर आएंगे.

कहीं तस्वीर में शिकन ना आ जाए

अगर आप जल्दी किसी को माफ़ नहीं कर सकते हैं या किसी बुरी घटना को जल्दी भूल नहीं सकते, तो संभल जाएं, आपकी सेल्फी की ख़ूबसूरती ख़तरे में है. तो करना बस इतना है कि जल्दी से अपनी समझदारी के कैमरे को चार्ज करिए और अपने चेहरे पर आई इस शिकन को मिटा दीजिए. दरअसल, दूसरों को माफ़ करना और कुछ क़िस्से-कहानियों को भूल जाना किसी और के लिए नहीं, बल्कि आपके अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. अंग्रेज़ी में कहते हैं ना ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ ये चीज़ें ना स़िर्फ आपको ऊपर उठाती हैं, बल्कि कई सारे रिश्तों को फिर से संवारने का एक और मौक़ा भी देती हैं.

माफ़ी मांग लें

जिस तरह माफ़ करके आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, उसी तरह अपनी ग़लती होने पर या कभी-कभी स़िर्फ परिस्थितियों को संभालने के लिए माफ़ी मांगना ज़रूरी है. माफी मांगने को अपने अहम् के साथ ना जोड़ें यानी माफ़ी मांगने से आप छोटे नहीं होते.

संवार लें बिगड़ी हुई तस्वीर

अगर इतनी जद्दोज़ेहद के बाद भी सेल्फी बिगड़ ही जाए, तो उसे वैसा ही मत छोड़ें, बल्कि अपनी समझदारी से उसे ठीक कर लें. कई बार ऐसा होता है कि लाख संभालने के बावजूद कुछ रिश्ते हाथ से फिसलने लगते हैं. ना चाहते हुए भी हममें वह चीज़ें आ जाती हैं, जो हमारे व्यक्तित्व को ख़राब करती हैं. अगर ऐसा होता भी है, तो वहीं पर रुककर पहले आत्मविश्‍लेषण करें. अपने स्वभाव की बुरी आदतों को दूर करने की कोशिश करें और फिर आगे बढ़ें. इस सेल्फी में आपको ख़ूबसूरत तो दिखना है, पर बाहरी मेकअप से नहीं, बल्कि प्राकृतिक निखार से. याद रखिए कि आपको तस्वीर में सुंदर कैमरा या तस्वीर खींचनेवाला नहीं बनाता, बल्कि आप ख़ुुद बनाते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि जब आप अपने जीवन में ख़ुश ना हों, तो किसी और पर दोष मढ़ने से पहले एक बार ख़ुद को परख लें.

– विजया कठाले निबंधे

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यह भी पढ़ें: क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं?

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बेहतर रिश्ते के लिए पति-पत्नी जानें एक-दूसरे के ये 5 हेल्थ फैक्ट्स( Couples Know These 5 Health Facts- Keep your Relationship Strong)

Keep your Relationship Strong

बेहतर रिश्ते के लिए प्यार, केयर और दूसरी कई बातों के साथ ही ज़रूरी है एक-दूसरे के हेल्थ (Keep your Relationship Strong) की पूरी जानकारी, ताकि हेल्थ भी ठीक रहे और रिश्तो भी हेल्दी बना रहे.

Keep your Relationship Strong

क्या पार्टनर की फैमिली हेल्थ फाइल की जानकारी है?

– फैमिली में किसे कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं या रह चुकी हैं, इसकी जानकारी बेहद ज़रूरी है. डायबिटीज़ से लेकर कैंसर व हार्ट प्रॉब्लम तक पैरेंट्स से बच्चों में आ सकती हैं.
– ऐसे में आप अगर इसे नज़रअंदाज़ करेंगे, तो पार्टनर को व उसके बाद आपके बच्चों तक को आप अंजाने में ही बीमारियां देते जाएंगे.
– यदि समय रहते आप फैमिली हेल्थ फाइल्स पर आपस में बात करें, तो नियमित चेकअप व डायट से बीमारी से बचा जा सकता है, साथ ही अपने बच्चों को भी आप इन बीमारियों की चपेट में आने से बचा सकते हैं.
– यदि आपने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया, तो आपके पार्टनर की हेल्थ के साथ-साथ आपके रिश्ते की सेहत भी ख़राब हो सकती है.
– आपको यह भी लग सकता है कि आपको धोखे में रखा गया या जान-बूझकर आपसे यह बात छिपाई गई. जबकि सच्चाई यह होती है कि अक्सर पार्टनर्स इस ओर ध्यान ही नहीं देते और बाद में पता चलने पर उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होता है.
– अच्छा होगा कि आप समय-समय पर एक-दूसरे को ध्यान दिलाते रहें व साथ में चेकअप कराते रहें.
– साथ ही एक्सपर्ट की सलाह भी लेते रहें.

ये भी पढें: हाथ की रेखाओें से जानें महिलाओं की सेक्स लाइफ

कहीं पार्टनर ओवरवेट तो नहीं?

– अक्सर साथ रहते-रहते फिटनेस कब लापता हो जाती है, पता ही नहीं चलता. लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत ज़रूरी है कि आपको फिटनेस फैक्ट्स का पता हो.
– अगर पार्टनर का वज़न बढ़ रहा है और वो ओवरवेट हो गया है, तो इसका असर उसकी पूरी हेल्थ पर पड़ेगा. बढ़ता वज़न कई बीमारियां लेकर आता है, जिससे सेक्स लाइफ प्रभावित होती है. साथ ही स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आता है.
– बेहतर होगा कि आप दोनों नियम बना लें और समय-समय पर वज़न चेक कराएं.
– अगर वज़न बढ़ रहा है, तो डायट प्लान करें और एक साथ एक्सरसाइज़, जॉगिंग या जिमिंग करें, इससे साथ में व़क्त भी गुज़ार पाएंगे और एक-दूसरे को मोटिवेट भी कर पाएंगे.

क्या पार्टनर का स्लीप पैटर्न चेंज हो रहा है?

– सोने की आदत में अगर बदलाव नज़र आने लगे, तो अलर्ट हो जाइए, क्योंकि हो सकता है कि पार्टनर फिज़िकली हेल्दी नज़र आ रहा हो, लेकिन कहीं न कहीं वो या तो स्ट्रेस में है या फिर उसे कोई हेल्थ प्रॉब्लम है.
– अगर लगातार पार्टनर स्ट्रेस में रहेगा या ठीक से सो नहीं पाएगा, तो वो धीरे-धीरे ग़ुस्सैल स्वभाव का होता जाएगा. उसे अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स भी होने लगेंगी, जिससे आपकी पर्सनल लाइफ काफ़ी प्रभावित होगी.
– पार्टनर से बात करें और पता करें कि उसके स्ट्रेस का कारण क्या है.
– उसे सहयोग दें और हौसला बढ़ाएं.
– अगर उसे ख़ुद को अंदाज़ा नहीं कि उसका स्लीप पैटर्न क्यों बदल रहा है, तो एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें.

पार्टनर को कोई सेक्सुअल डिसीज़ तो नहीं?

– यह जानना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह बात आपकी सेक्सुअल हेल्थ व आपके रिश्ते को भी प्रभावित करेगी.
– अक्सर पार्टनर इस तरह की बातें एक-दूसरे से छिपाते हैं, उन्हें लगता है कि उनका साथी उनको ग़लत समझेगा.
– लेकिन इस तरह से वो अपने पार्टनर को भी वो बीमारी दे देते हैं.
– इस तरह हेल्थ के साथ-साथ रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
– बेहतर होगा कि चाहे जो भी बात हो, अपने पार्टनर से शेयर करें. अपनी सेक्सुअल डिसीज़ को छिपाने की बजाय उसका इलाज कराएं.
– इस मामले में बहुत अधिक देर करना ठीक नहीं.
– पार्टनर से खुलकर बात करें और उन्हें विश्‍वास में लें.

मेंटल हेल्थ के बारे में भी जानना ज़रूरी है.

– पार्टनर का टेम्परामेंट, उसके स्वभाव को प्रभावित करता है. वो कितना सहनशील है, प्रेशर को कितना हैंडल कर पाता है, विपरीत परिस्थितियों में कैसे व्यवहार करता है, ये तमाम बातें पार्टनर की मेंटल हेल्थ व स्ट्रेंथ को दर्शाती हैं.
– तनाव या ग़ुस्से में पार्टनर की प्रतिक्रिया कैसी रहती है?
– क्या वाद-विवाद के बाद वो अपनी ग़लती स्वीकारता है या सॉरी बोलकर बात को ख़त्म करने की कोशिश करता है?
– बेहतर होगा कि एक-दूसरे को मानसिक रूप से आप दोनों मज़बूत बनाएं, इससे आपका रिश्ता भी मज़बूत होगा.
– ऐसा करने के लिए एक-दूसरे की कमज़ोरी व ताक़त को पहचानना भी ज़रूरी है.
– आपस में बात करें और कोशिश करें कि बिना किसी को हर्ट किए, आप अपनी बात कह सकें, साथी की कमज़ोरी व उसकी स्ट्रेंथ पर चर्चा करें.
– साथ ही अपनी कमज़ोरियों के बारे में भी साथी को बताएं. इसके अलावा कैसे आप दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकते हो, इस पर भी ज़रूर बात करें.

– विजयलक्ष्मी

बातें जो अच्छी हैं आपके रिश्ते के लिए (Things That Make A Good Relationship)

Things That Make A Good Relationship

पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े, बहस, नोंक-झोंक, प्यार-तकरार बहुत ही आम बात है, जो उनके रिश्ते की मिठास को कम करने की बजाय बढ़ाती ही है, लेकिन कई बार ऐसी बातें, जिन्हें ग़ैरज़रूरी समझ या अपने ईगो की वजह से हम नज़रअंदाज़ करते जाते हैं, वे रिलेशनशिप (Things That Make A Good Relationship) के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं. यह समझना ज़रूरी है कि कुछ बातें आपके संबंध को मज़बूत व परिपक्व बनाने के लिए अनिवार्य हैं.

Things That Make A Good Relationship

क्यों हैं आप साथ-साथ?

  • शादी के कुछ वर्षों बाद हो सकता है आपको यह लगे कि इस व्यक्ति से शादी करके बड़ी भूल हुई है. ऐसा इसलिए लगता है, क्योंकि दोनों के स्वभाव और आदतें भिन्न होती हैं.
  • उस समय उन बातों को याद करें, जो कभी आप दोनों को एक-दूसरे की बातें बहुत ही अच्छी लगती थीं.
  • उन बातों, उन पलों को याद करें, जिनकी वजह से आप एक-दूसरे के बिना एक पल भी गुज़ारना नहीं चाहते थे.
  • आपने एक लंबा सफ़र उन्हीं आदतों और अच्छाइयों के साथ तय किया है, इस बात को न भूलें.
  • व़क्त के साथ बहुत-सी आदतें बदलती हैं. हो सकता है आज किन्हीं कारणों से एक-दूसरे को इतना व़क्त नहीं दे पा रहे, जितना कभी देते थे, लेकिन इसका मतलब रिश्ते का अंत नहीं है. इन्हें ही याद करके, आपसी समझदारी से रिलेशनशिप को फिर से एक मौक़ा दें.
    ईगो को आड़े न आने दें
  • किसी भी रिलेशनशिप के बिखराव का सबसे बड़ा कारण ईगो होता है.
  • अगर आपसे कोई ग़लती हो जाती है, तो बेहिचक साथी को सॉरी कह दें. यह मानकर चलें कि सॉरी बोलना एक ऐसी अच्छी बात है, जो आपके ईगो को सिर उठाने नहीं देता और आपके संबंधों में भी प्यार व विश्‍वास बना रहता है.
  • मनोवैज्ञानिक नीलिमा पाठक के अनुसार, पुरानी ग़लतियों, बातों को याद करके लड़ने-झगड़ने से बेहतर है, उन्हें भूलकर या उन्हें माफ़ कर रिश्ते को एक और मौक़ा दें.
  • यक़ीनन एक माफ़ी रिलेशनशिप को बचाने का कारगर फॉर्मूला साबित होगा, क्योंकि ग़लतियों को नज़रअंदाज करना बिल्कुल सही नहीं, लेकिन उन्हें माफ़ कर देना बहुत ही बड़ी वजह बन सकती है रिलेशनशिप को दोबारा शुरू करने में.

ज़िम्मेदारियों का बंटवारा

  • पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना आज की जीवनशैली को मेंटेन रखने के लिए एक ज़रूरत बन गया है.
  • जिस तरह से दोनों मिल-जुलकर आर्थिक ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं, उसी तरह से घरेलू काम में भी एक-दूसरे की मदद
    अवश्य करें.
  • अगर पत्नी वर्किंग ना भी हो, तो भी घर में इतने काम होते हैं कि वह थक जाती है, लेकिन आमतौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि घर का काम करने का ज़िम्मा स़िर्फ महिलाओं का है, पर यह ज़रूरी नहीं है कि घर का सारा काम केवल पत्नी ही करे. ऐसे में अगर आप उसकी थोड़ी-सी मदद कर दें, तो उसके मन में आपके प्यार की डोर और ज़्यादा मज़बूत होगी.
  • आपकी यह छोटी-सी पहल आपकी पत्नी के मन में प्यार के साथ-साथ आपके प्रति सम्मान भी बनाए रखेगी. हमेशा ये कोशिश करनी चाहिए कि आप अपने साथी के चेहरे से उनकी प्यारी मुस्कान को कभी न जाने दें.

आपसी जुड़ाव की निशानी

  • अगर पति-पत्नी के बीच तकरार होती रहती है, तो इसे वैचारिक भिन्नता से ज़्यादा इस बात की निशानी मानना चाहिए कि उनके बीच जुड़ाव बहुत अधिक है. मनोवैज्ञानिक आराधना मलिक के अनुसार, “झगड़ा इस बात का प्रतीक होता है कि संबंधों में जीवंतता बरक़रार है. वे चाहे कितना ही झगड़ें, पर एक-दूसरे से अलग नहीं हैं.
  • सच्चाई तो यह है कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता है. कमी हर रिश्ते की तरह पति-पत्नी के रिश्ते में भी होती है.”
  • आपसी जुड़ाव तभी उत्पन्न होता है, जब एक साथी को यह पता हो कि दूसरा साथी क्या सोच रहा है या क्या महसूस कर रहा है. इसका अर्थ यह हुआ कि विचारों की भिन्नता को एक-दूसरे के समक्ष लाना, न कि चुप रहकर मन ही मन घुलते रहना. बोलकर, अपनी राय देकर इस नतीजे पर पहुंचना कि क्या सही है और क्या ग़लत, एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी है.

रखें ध्यान पसंद-नापसंद का

  • एक सुदृढ़ और सम्मानजनक रिलेशनशिप के लिए साथी की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि   आप स्वयं की इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं.
  • उसे आपकी कोई बात अच्छी नहीं लगती है, तो उसे बदलने की कोशिश करें.
  • इसी तरह से इस बात का ख़्याल रखें कि ऐसी कौन-सी बातें हैं, जिनके ज़िक्र मात्र से आपके जीवनसाथी के चेहरे पर मुस्कान छा जाती है और कौन-सी ऐसी बातें हैं, जिनसे वह परेशान या दुखी हो जाता है.
  • यही नहीं, साथी को क्या खाना पसंद है, उसका पसंदीदा रंग कौन-सा है जैसी छोटी-छोटी बातें आप दोनों के प्यार को और बढ़ाएंगी.
  • नीलिमा पाठक के अनुसार, आप इस बात को भी ध्यान में रखें कि आपका साथी आपसे कैसे व्यवहार की उम्मीद करता है या किस चीज़ में उसकी रुचि ज़्यादा है.
  • इन बातों के पता होने से आप अपने साथी को कभी भी दुख देने के बारे में नहीं सोच पाते हैं.
  • कोई भी व्यक्ति अपने स्वभाव को एक दिन में नहीं बदल सकता, इसलिए उसे समय व सहयोग दें.

खुलकर बात करें

  • दांपत्य जीवन में कई बार ऐसा होता है कि एक छोटी-सी बात इतनी बढ़ जाती है कि वो एक बड़े मुद्दे का रूप ले लेती है. तब पति-पत्नी एक-दूसरे से बोलना तक छोड़ देते हैं और चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन जब ये चुप्पी टूटती है, तो इससे घर एक जंग के मैदान में बदल जाता है.
  • कभी भी अपने दांपत्य जीवन में ऐसी स्थिति न आने दें. अपने साथी के साथ हर बात शेयर करें.
  • वैसे भी साथी का अर्थ ही ये है कि जो हमेशा आपके सुख और दुख में आपके साथ हो, साथ ही जिससे आप अपने दिल की हर बात को खुलकर कह सकें.
  • आपस  की  प्रॉब्लम्स  को  ख़त्म  करने  का  इससे  बेहतर  तरीक़ा  शायद  ही  कोई दूसरा हो.
  • रिलेशनशिप को निभाने में क्या परेशानियां आ रही हैं, किन बातों को लेकर झगड़े हो रहे हैं, इन सभी बातों के पीछे की वजहों को जानने की कोशिश करें.
  • किन तरीक़ों से उन्हें सुलझाया जा सकता है, इसके बारे में भी सोचें और मिलकर बातचीत करें. साथ ही एक-दूसरे की बातों को
    भी सुनें.
  • कई बार बेवजह की ग़लतफ़हमियों से भी रिश्ते में दरार आ जाती है, जिन्हें बातचीत के ज़रिए बड़ी ही आसानी से दूर किया जा सकता है. अपने साथी से मन की बात कहने में आख़िर बुराई ही क्या है और अगर इस वजह से तक़रार हो भी जाए, तो मुद्दा सुलझ भी तो जाता है.
  • बात चाहे छोटी ही क्यों न हो, चुप रहने की बजाय बात सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. बहस से बचने के चक्कर में अगर झगड़ा न किया जाए, तो समस्या गंभीर बन सकती है और रिश्ते में दरार भी आ सकती है.
  • मैरिज काउंसलर मणिका मानती हैं कि झगड़ा करना स्वास्थ्यवर्द्धक भी होता है और अगर उसका उपयोग ठीक तरह से किया जाए, तो वह रिश्ते को पुख्ता करने और ऊर्जावान बनाने में भी सहायक होता है. पर इसका अर्थ यह नहीं है कि जब भी आपको लगे कि रिश्ते में गरमाहट की कमी हो रही है, आप झगड़ा करने लगें.
  • पति-पत्नी का संबंध ऐसा होता है कि उनके बीच कोई भी विवाद बहुत लंबे समय तक चल ही नहीं सकता है, इसलिए अगर तक़रार हो भी गई हो, तो उसे तूल न दें और न ही यह उम्मीद रखें कि साथी आपको मनाए. बिना हिचक के साथी से माफ़ी मांग लें. इससे आप किसी भी तरह से उसकी नज़रों में छोटे नहीं होंगे, बल्कि आपकी पहल आपके संबंधों को और प्रगाढ़ता देगी.

सीमाएं तय करें

  • एक-दूसरे पर पाबंदियां लगाने की बजाय, एक-दूसरे को और उनके विचारों को आज़ादी दें.
  • रिलेशनशिप को जितना बांधकर रखा जाएगा, उतनी ही दूरियां बढ़ेंगी.
  • मैरिज काउंसलर अदिती छाबड़ा का मानना है कि जो गाइडलाइन्स आपने पार्टनर के लिए तय की हैं, उन्हें ख़ुद भी फॉलो करें. अपनी बात साथी पर थोपें नहीं.

टच में रहें

  • आप चाहे अपने घर में हों या ऑफिस में, दिन में कम से कम एक बार तो पार्टनर से फोन पर बात ज़रूर करें.
  • उनसे पूछें कि दिन कैसा गुज़र रहा है,  उनकी तबियत कैसी है इत्यादि.
  • मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ये छोटी-छोटी बातें दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाती हैं और इन्हीं छोटी-छोटी बातों से उनके बीच के रिश्ते की अहमियत हमेशा बनी रहती है.

एक-दूसरे के परिवार का सम्मान करें

  • अगर आप चाहते हैं कि आपका साथी आपको प्यार करे और आपकी बात को मान दे, तो इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि आप अपने जीवनसाथी से जुड़े सारे संबंधों को खुले दिल से स्वीकार करें.
  • उसके परिवार के सदस्यों का सम्मान करें. जब आप अपने जीवनसाथी के माता-पिता को अपने माता-पिता की तरह मान-सम्मान देंगे और उसके भाई-बहनों को अपने भाई-बहन की तरह प्यार करेंगे, तो यक़ीनन आपके संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी.

 

  • सुमन बाजपेयी

7 वजहें जब एक स्त्री को दूसरी स्त्री की ज़रूरत होती है (7 Reasons when a woman needs woman)

Reasons when a woman needs woman

Reasons when a woman needs woman

अक्सर नारी मन को सच्चा सुकून मिलता है, तो बस मां-बहन, सहेली की प्यारभरी स्नेह (Reasons when a woman needs woman) की छांव में… कारणों की क्या बात करें? बस यह कह सकते हैं कि यह तो कभी ख़ुशी, तो कभी ग़म से जुड़ा साझा रिश्ता है एक स्त्री का दूसरी स्त्री से.

एक ख़ुशहाल जीवन जीने के लिए हमें प्यार, अपनापन, साथ… जैसी न जाने कितनी ही छोटी-छोटी बातों की आवश्यकता होती है. ऐसे में कितने ही मामलों में एक स्त्री को दूसरी स्त्री की ही बेहद ज़रूरत महसूस होती है, ख़ासकर शॉपिंग करते समय. आइए, और भी वजहों के बारे में जानते हैं.

1. तनावमुक्त रहने के लिएः महिलाओं से जुड़ी ऐसी कई बातें होती हैं, जिसे वे चाहकर भी पुरुषों से शेयर नहीं कर पातीं. ऐसे नाज़ुक समय में उन्हें किसी नारी के साथ की ही बहुत ज़रूरत होती है. फिर चाहे वो पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी कोई समस्या या संवेदनशील मुद्दा हो, पीरियड्स की प्रॉब्लम्स हों या फिर आपसी अहम् की बात हो, पति-पत्नी की आपसी कहा-सुनी हो, पारिवारिक सास-बहू, ननद-जेठानी से जुड़े वाद-विवाद हों या अविवाहित बेटी से तनाव… इन तमाम विषयों पर अपनी क़रीबी स्त्री से ही बात कर एक स्त्री ख़ुद को काफ़ी हल्का महसूस करती है. एक नारी को नारी के साथ की ज़रूरत ख़ासतौर पर स्ट्रेस फ्री होने, मन को हल्का करने यानी तनाव को दूर करने के लिए होती ही है.

2. जब ज़िम्मेदारीभरा कार्य करना होः तीज-त्योहार हो या शादी-ब्याह, तब महिलाओं का साथ ही माहौल को ख़ूबसूरत व आकर्षक बनाता है. हमारे यहां शादी की रस्में और ज़िम्मेदारियां काफी होती हैं, जहां पर न जाने कितने काम ऐसे होते हैं, जो महिलाओं को ही करने होते हैं. ऐसे में एक स्त्री को दूसरी स्त्री का साथ मिल जाने पर मानो सोने पे सुहागा वाली स्थिति हो जाती है. वैसे इस तरह के कार्यों में हर किसी की अपनी बहुत सारी जवाबदेही होती है, पर दो नारी के साथ भर से भी कई काम आसानी से हो जाते हैं.

3. जो सच्चाई से अवगत करा सकेः हम चाहे कितने ही अच्छे और समझदार हों, पर हम सभी में कुछ-न-कुछ कमी तो होती ही है. स्त्री के इस पहलू को एक स्त्री ही बेहतर ढंग से कह व समझ पाती है. अतः हमें अक्सर ऐसे शख़्स की ज़रूरत होती है, जो हमसे कड़वा सच कहने की हिम्मत रखता हो, जो बिना लाग-लपेट के हमारी अच्छी-बुरी दोनों ही बातों के बारे में हमें स्पष्ट रूप से बता सके, जो सही मायने में शुभचिंतक-आलोचक हो.

Reasons when a woman needs woman

4. परवरिश का नैसर्गिक गुणः चूंकि मातृत्व सुख का सौभाग्य एक स्त्री को ही मिलता है, इसलिए जाने-अनजाने में सहेजने, संवारने, परवरिश करने जैसे गुण उसमें स्वाभाविक रूप से होते हैं. हरेक स्त्री अपने इस स्वभाव को कभी मां, तो कभी बहन-बेटी, सहेली आदि के रूप में जीती है. वो अपने रिश्ते की इस पौध को प्यार व स्नेह के खाद-पानी से सींचती है. उसका यह नैसर्गिक गुण ताउम्र उसके साथ रहता है और रिश्तों के कई नए आयाम लिखता है.

5. जब जीवनसाथी से सब कुछ कहना न हो मुमकिनः एक पत्नी अपने पति से अपना सब कुछ कह-सुन ले, यह संभव नहीं. उस पर यह ज़रूरी भी नहीं कि पति महोदय के पास अपनी पत्नी की आपबीती सुनने-समझने के लिए वक़्त हो. ऐसे में पत्नी की कोई बेस्ट फ्रेंड या फिर कोई क़रीबी महिला ही उसकी सबसे बड़ी राज़दार होती है. वैसे भी यह कहां तक उचित है कि किसी एक शख़्स से ही हम सब कुछ कहने-सुनने की अपेक्षा रखें.

6. सुखद लंबी आयु के लिएः हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, स्त्रियों के लंबे जीवन जीने में उनकी टेंशन फ्री लाइफ की बहुत बड़ी भूमिका रही है. और ऐसा जीवन जीने में किसी स्त्री का साथ होना व एक अच्छी सोशल लाइफ जीना काफ़ी मायने रखता है यानी घर-गृहस्थी, सामाजिक कार्यक्रम, फेस्टिवल आदि में आपका एक्टिव होना, महिलाओं का संग-साथ, उन्हें हेल्दी, ख़ुशमिज़ाज और ख़ुशहाल लंबा जीवन जीने में मदद करता है. ये सभी बातें आपके हर दिन को ख़ुशगवार व ऊर्जा से भर देती हैं.

7. लक्ष्य के सहयोग में मदद के लिएः कहते हैं, हर कामयाब पुरुष के पीछे किसी स्त्री का सहयोग होता है. लेकिन यही बात महिलाओं पर भी लागू होती है. एक स्त्री के आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य को पूरा करने, उद्देश्यपूर्ण जीवन की सार्थकता में भी किसी दूसरी स्त्री का भरपूर सहयोग रहा है. नारी को उसके लक्ष्य की ओर बढ़ने में प्रोत्साहित करने में नारी का भी उल्लेखनीय योगदान रहता है. समय-समय पर एक मां, बहन, सहेली या फिर कोई ऐसी स्त्री, जो बेहद क़रीबी होती है, स्त्री को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है.

– ऊषा गुप्ता

 

होम सेफ्टी के 21 बेस्ट रूल्स (21 Home Safety Best Rules)

ये उम्मीदें, जो हर पत्नी अपने पति से रखती है (Things wife expect from husband)

wife expect from husband

रिश्ता ताउम्र साथ निभाने का… सुख-दुख में साथ-साथ चलने का… एक-दूसरे से अपेक्षाओं का… जी हां, ऐसा ही होता है पति-पत्नी का रिश्ता, जिसमें जाने कितनी ख़्वाहिशें, ख़्वाब, उम्मीदें होती हैं. इसी फेहरिस्त में एक पत्नी की भी अपने पति से बहुत-सी उम्मीदें (wife expect from husband) रहती हैं. वे क्या हैं? आइए, जानते हैं.

भावनात्मक रूप से हमेशा साथ देंः शादी के अटूट बंधन में बंधने के साथ ही पत्नी सबसे अधिक जिस बात की उम्मीद(wife expect from husband) पति से रखती है, वो है भावनात्मक साथ की. हर छोटी-बड़ी बात पर, सुख-दुख में, विपरीत व कठिन परिस्थितियों में वो पति से आशा करती है कि वो उसे इमोशनल सपोर्ट दें. उनका भावनात्मक साथ पत्नी को परिस्थितियों के तनाव-अवसाद से जल्दी उबार देता है.

रिलेशनशिप अलर्टः कई बार पत्नी को भावनात्मक सहयोग न मिलने के कारण रिश्तों में दूरियां व मतभेद बढ़ने लगते हैं. लेकिन पति का भावनात्मक सहारा पत्नी को ख़ुश रखने में बेहद मददगार होता है.

जन्मदिन-शादी की सालगिरह याद रखेंः हर पत्नी की यह ख़्वाहिश रहती है कि पति महोदय उसके बर्थडे व एनीवर्सरी की तारीख़ ज़रूर याद रखें, क्योंकि पत्नियां इनसे काफ़ी इमोशनली जुड़ी होती हैं. इसके अलावा उन्हें यह जानकर भी बेहद ख़ुशी होती है कि पति को उनके साथ की पहली मुलाक़ात, पहली बार दिया गया तोहफ़ा, बीते हुए यादगार लम्हे शादी के काफ़ी समय बीत जाने के बाद भी आज तक याद हैं.

रिलेशनशिप अलर्टः पत्नी को ख़ास मौक़ों पर सरप्राइज़ देते रहें. इससे रिश्तों में ताउम्र ताज़गी बनी रहती है.

तारीफ़ करेंः कहते हैं, प्रशंसा सुनना महिलाओं की सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है, उस पर पत्नी हो, तो मामला और भी संवेदनशील हो जाता है. इसलिए जब कभी पत्नी ने आपके लिए प्यार से लज़ीज़ भोजन बनाया हो, घर-परिवार से जुड़ा उल्लेखनीय कार्य किया हो, किसी भी छोटे-मोटे, पर ख़ास काम को अच्छी तरह से पूरा किया हो, तो उसकी प्रशंसा ज़रूर करें. इससे पत्नी को न केवल ख़ुशी होगी, बल्कि उसका आत्मविश्‍वास भी बढ़ेगा.

रिलेशनशिप अलर्टः सोसायटी में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो बेवजह पत्नी में ग़लतियां ढ़ूंढ़ते रहते हैं और ग़लती न होने पर भी उसके हर कार्य में मीन-मेख निकालते रहते हैं. ऐसा न करें. प्रशंसा-सराहना जहां पत्नी के आत्मविश्‍वास को बढ़ाती है, वहीं वैवाहिक जीवन को भी ख़ुशहाल बनाती है.

शॉपिंग के लिए साथ जाएंः ऐसी शायद ही कोई महिला होगी, जिसे शॉपिंग का शौक़ न हो. एक सर्वे के अनुसार, अधिकतर महिलाएं अपनी टेंशन व परेशानी को दूर करने के लिए शॉपिंग करना अधिक पसंद करती हैं. वैसे भी हर पत्नी की यह इच्छा होती है कि वो पति की पसंद की चीज़ें पहनें, फिर चाहे वो ज्वेलरी हो या ड्रेस.

wife expect from husband

रिलेशनशिप अलर्टः पतियों को शॉपिंग करना कम ही पसंद आता है, पर जब आप अपनी पत्नी के साथ शॉपिंग करते हैं, तो इससे आपसी लगाव और भी बढ़ जाता है.

बिहेवियर को ड्रामा न समझेंः अमूमन कई पतियों की आदत होती है कि वे अपनी पत्नी की स्वाभाविक क्रिया-प्रतिक्रिया, मांगों आदि को ड्रामा बताकर मज़ाक उड़ाते हैं, जबकि पत्नी उम्मीद करती है कि कोई समझे न समझे, पर पति उनकी हर बात-व्यवहार को ज़रूर जानें-समझें.

रिलेशनशिप अलर्टः यदि आप भी इस तरह के पतियों में से हैं, तो संभल जाएं. क्योंकि पति के उपेक्षित व ग़लत व्यवहार से भी पत्नी ग़ुस्सैल व झगड़ालू प्रवृत्ति की बन जाती है. इसलिए पत्नी की बात को अनदेखा करने, उसका मखौल उड़ाने की बजाय शांति व धैर्य से स्थिति को समझने की कोशिश करें.

मायके की आलोचना न करेंः मायका पत्नी का वो ख़ास भावनात्मक पहलू होता है, जिसके बारे में वो कभी भी बात कर सकती है. साथ ही वो आशा करती है कि पतिदेव मायकेवाले की तारीफ़ भले ही न कर सकें, पर आलोचना या व्यंग्य बिल्कुल न करें.

रिलेशनशिप अलर्टः पत्नी के मायकेवालों की उपेक्षा या उलाहना वैवाहिक जीवन को तनावपूर्ण बना सकती है. इसलिए बेहतर यही होगा कि पत्नी को सदा ख़ुश रखने के लिए उसके मायकेवालों की तारीफ़ करें, जैसे- माता-पिता, भाई-बहन या फिर जीजाजी ही क्यों न हों.

प्यार-मनुहार करनाः महिलाओं को प्यार से गले लगाना, रूठना, मान-मनुहार करना बहुत अच्छा लगता है. इससे यह भी पता चलता है कि आप अपने पार्टनर को कितना प्यार करते हैं. पार्टनर को प्यार से गले लगाने पर दोनों एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से भी जुड़ते हैं.

रिलेशनशिप अलर्टः प्यार करना केवल सेक्सुअल रिलेशन ही नहीं होता है, बल्कि पति पत्नी को गले लगाकर, किस करके, लाड़-दुलार दिखाकर भी अपने संबंधों में अधिक मिठास व मज़बूती ला सकते हैं.

कुछ बातें, जो पत्नी पति से छिपाती हैं या नहीं बताना चाहतीं-

* पत्नियां अपने पहले प्यार को शायद ही भूल पाती हैं. उनके मन में वो पहला प्यार, वो एहसास हमेशा रहता है, पर इस बारे में वे अपने पति को कभी नहीं बतातीं.

* पत्नियां हमेशा अपने घर ख़र्च से थोड़ा-बहुत सेविंग करती रहती हैं. उनके इस सीक्रेट मनी से पति अनजान ही रहते हैं और कई बार आर्थिक परेशानियों के समय ये सेविंग्स बहुत काम आती हैं.

* पत्नी अपने पति को कभी भी ये नहीं बताती है कि उसे उन ख़ास पलों (सेक्स) में कैसा लगा. यदि कुछ बताती भी हैं, तो वो पूरा सच नहीं होता है.

* ज़रूरी नहीं कि पत्नी पति की हर बात से सहमत हो. अक्सर मनमुटाव-झगड़े आदि से बचने के लिए पति के निर्णय से असहमत होने के बावजूद पत्नी उनकी हां में हां मिला देती है.

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता

कितना मैच्योर है आपका लाइफ पार्टनर (How mature is your life partner)

How mature is your life partner

जब दो लोग एक साथ ज़िंदगी गुज़ारने का निर्णय लेते हैं, तो बहुत-से एडजस्टमेंट्स करने पड़ते हैं. यदि वे मानसिक रूप से परिपक्व (How mature is your life partner) हैं, तो ये एडजस्टमेंट्स आसानी से करके अपने बंधन को और मज़बूत बनाने में सक्षम रहते हैं और यदि परिपक्वता की कमी है, तो इसका प्रभाव सीधे-सीधे आपसी संबंधों पर पड़ता है. ऐसे में यह जानने की कोशिश ज़रूर की जा सकती है कि आपका पार्टनर कितना मैच्योर है, ताकि आप बेहतर तरी़के से एडजस्ट करके अपने बंधन को भी मैच्योर व मज़बूत बना सकें.

पार्टनर को पहले इन पहलुओं पर परखें (How mature is your life partner)

कितना धैर्य हैः किसी भी समझदार व मैच्योर इंसान की पहली निशानी होती है उसका धैर्य. चाहे बातचीत करने में हो या किसी भी काम को अंजाम देने में, यदि पार्टनर बेवजह अपना आपा नहीं खोता और धीरज से काम करता है, तो वो मानसिक रूप से काफ़ी प्रबल व मैच्योर है.
टिप्स: यदि पति-पत्नी दोनों में से ही किसी एक में धैर्य की कमी है, तो आपसी सहायता व स्वयं भी कोशिश करके अपनी इस आदत में बदलाव ला सकते हैं.
– ध्यान, योग व प्राणायाम करें. ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ से बहुत मदद मिलेगी.
– अपनी सोच बदलें. नकारात्मक सोच और ऐसे लोगों से भी दूर रहें, जो नकारात्मकता बढ़ाते हों.
– पार्टनर की सोच बदलने के लिए उन्हें कुछ अच्छी क़िताबें भी गिफ्ट करें, जिससे उनमें पॉज़िटिव बदलाव आएं.

दूसरों से किस तरह का व्यवहार करता हैः अगर आपकी पत्नी आपसे बहुत अदब से पेश आती है, लेकिन आपके परिवारवालों या अन्य लोगों से उसका व्यवहार ठीक नहीं है, तो इसका अर्थ होगा कि वो संबंधों में परिपक्वता के महत्व को नहीं समझ रही.इसी तरह यदि आप भी अपनी पत्नी के घरवालों व रिश्तेदारों के साथ अदब से पेश नहीं आते, तो सजग हो जाइए.
टिप्स: स़िर्फ यह उम्मीद न करें कि आपकी पत्नी की ही ज़िम्मेदारी बनती है कि वो आपके परिवार को अपना परिवार माने, आपकी भी उतनी ही ज़िम्मेदारी है उसके रिश्तेदारों को उतने ही खुले दिल से स्वीकारने की.

फ्यूचर प्लानिंग नहीं करता: क्या आपका पार्टनर दूर की सोच नहीं रखता? चाहे बजट प्लानिंग हो, इंश्योरेंस हो या भविष्य को लेकर सुरक्षा की बात हो- यदि आपका पार्टनर इन चीज़ों को महत्वहीन मानता है या इन पर ध्यान ही नहीं देता, तो वो अपने रिश्ते को लेकर या तो गंभीर नहीं है या फिर वो इतना समझदार है ही नहीं कि इन चीज़ों की अहमियत समझ सके.
टिप्स: आप इस स्थिति को किस तरह हैंडल करते हैं, इससे भी इस बात का अंदाज़ा होगा कि आप ख़ुद कितनी समझदार और मैच्योर हैं. आपको शांति से उन्हें यह एहसास करवाना होगा कि ये तमाम बातें कितनी ज़रूरी हैं और उन्हें ज़िंदगी के इन पहलुओं पर भी ग़ौर करना होगा, क्योंकि आपके भविष्य की सुरक्षा अब उनकी भी ज़िम्मेदारी है.

अपनी ग़लती नहीं मानता: बहुत-से लोग इतने अपरिपक्व होते हैं कि अपनी ग़लतियों का दोष भी दूसरों पर डालने का प्रयास करते हैं. इसकी प्रमुख वजह यही होती है कि वो मानसिक रूप से कमज़ोर होते हैं. उनमें इतना साहस नहीं होता कि ग़लती होने पर मान लें और माफ़ी मांग लें.
टिप्स: यदि आपके पार्टनर में यह कमज़ोरी है, तो उन्हें कुछ लोगों के उदाहरण देकर समझाएं या उन्हें क़िताबों, फिल्मों या अन्य तरह से परोक्ष रूप से यह समझाएं कि अपनी ग़लती मानना भी बहुत बड़ी बात है.

बहुत ज़्यादा रोक-टोक करता है: बहुत-से पार्टनर्स यह भूल जाते हैं कि उनके साथी का एक अलग व्यक्तित्व है. वो उन्हें अपने जैसा बनाना चाहते हैं और यह सोचते हैं कि उनके विचार और उनका तरीक़ा ही सही है. यही वजह है कि वो बात-बात पर टोकते हैं.
टिप्स: आप उन्हें यह एहसास करवाएं कि जैसा व्यवहार वो आपके साथ करते हैं, यदि वैसा कोई उनके साथ करे, तो उन्हें कैसा महसूस होगा.
– उन्हें पॉज़ीटिव बनाएं कि दूसरों के गुणों पर ध्यान दें, तारीफ़ करना सीखें. चाहें तो आप दोनों ही पर्सनैलिटी ग्रूमिंग की क्लासेस जॉइन करें.

कितने खुले विचारों का हैः अगर आपका पार्टनर दक़ियानूसी व फ़िज़ूल की बातों पर मात्र परंपरा के नाम पर विश्‍वास करता है और आपको भी उन्हीं बातों पर विश्‍वास करने को कहता है, तो यह बेव़कूफ़ी है.
टिप्स: आप यह सोचकर उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट दे सकते हैं कि उनकी परवरिश अलग परिवेश में हुई होगी, जिससे उनकी ऐसी सोच बन गई. आप धीरे-धीरे उनकी सोच में परिवर्तन ला सकते हैं. जब वे बाहरी दुनिया में कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आएंगे, जिनके विचार काफ़ी खुले हैं, तो उन पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा.

 

कितनी और किस तरह की अपेक्षाएं रखता हैः बहुत-से पार्टनर्स एक-दूसरे से ऐसी अपेक्षाएं रखते हैं, जिन्हें पूरा करना संभव नहीं. कोई भी परफेक्ट नहीं होता, इस तथ्य को स्वीकारें और फिल्मी दुनिया की कल्पनाओं से हटकर यथार्थ की ज़मीनी हक़ीक़त को स्वीकारें.
टिप्स: न आप सुपरमैन हैं और न ही आपकी पत्नी सुपरवुमन, तो फिर एक-दूसरे पर इतनी उम्मीदें क्यों लादें कि सामनेवाले का दम ही घुटने लगे.

How mature is your life partner

कितना फ्लेक्सिबल हैः आपका पार्टनर यदि हर चीज़ को सहजता से लेकर अपना रवैया आसानी से बदलने को तैयार हो जाता है, तो यह उसकी परिपक्वता को ही दर्शाता है.
टिप्स: आपकी समझदारी व व्यक्तित्व का सकारात्मक पहलू आपके पार्टनर को भाता है, इससे वो आपके और क़रीब आकर आपका सम्मान भी करने लगता है. इसलिए कोशिश करें कि हर बदलाव पर या कोई चीज़ न मिलने पर हर बार शिकायत ही न करें, कभी-कभी इसे सहजता से भी लें और ज़िंदगी से प्यार करें.

कितना ईमानदार हैः यदि साथी एक-दूसरे से बातें, अपनी समस्याएं व पैसों को लेकर सभी चीज़ें शेयर करते हैं, तो समस्या नहीं है, लेकिन जहां वो एक-दूसरे से बातें छिपाते हैं, वहां आपके रिश्ते में अपरिपक्वता साफ़ झलकती है.
टिप्स: आप दोनों को ही यह विश्‍वास हासिल करना होगा कि आप एक-दूसरे को समझते हैं, तभी आप दोनों एक-दूसरे से सारी बातें बेझिझक शेयर कर सकेंगे.

अपने रिश्ते को कितनी गंभीरता से लेता हैः क्या आपका पार्टनर आपकी चाहतों व आपकी राय को महत्व देता है? यदि नहीं, तो वो अपरिपक्व (How mature is your life partner) है.
टिप्स: उन्हें समझाएं कि जहां एक की राय है, वहां दो लोगों की राय सही निर्णय लेने में और भी मदद कर सकती है. आपकी ज़िंदगी अब उनसे ही जुड़ी है, तो उनके निर्णयों का असर आप पर भी पड़ता है.

प्रोफेशनल लाइफ में आगे बढ़ने की चाह नहीं है: कुछ लोग सोचते हैं कि जो नौकरी है, जो आमदनी है उसमें ठीक-ठाक गुज़ारा तो हो ही रहा है, तो अब ज़्यादा मेहनत करने से क्या फ़ायदा.
टिप्स: बात स़िर्फ पैसों या सुख-सुविधाओं की नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं व गुणों के विकास की भी है, ऐसे में एक मैच्योर इंसान आगे की ही सोचेगा.

हीनभावना से ग्रस्त हैः क्या वो आपके गुणों व तऱक्क़ी से ईर्ष्या करता है? आपको बात-बात पर नीचा दिखाने की कोशिश करता है? यदि हां, तो यह भावना भी मानसिक रूप से अपरिपक्व लोगों की निशानी है.
टिप्स: आपको समझदारी से काम लेना होगा. आप उनकी बातों पर प्रतिक्रिया देना कम कर दें. उनके सामने अपनी तऱक्क़ी का बहुत ज़्यादा ढिंढोरा न पीटें. उनके गुणों की तारीफ़ करें और उन्हें सपोर्ट करें. अगर ऐसा करने से उनमें परिवर्तन आता है, तो समझें कि आपकी मेहनत रंग लाई है, वरना आपको पहले तो इस विषय पर उनसे खुलकर बात करनी होगी. ज़रूरत हो, तो काउंसलर की मदद भी लें.

दूसरों से तुलना करता हैः बहुत-से लोग इतने अपरिपक्व (How mature is your life partner) होते हैं कि वो अंजाने में ही अपने पार्टनर की तुलना हमेशा दूसरों से करते रहते हैं और यहां तक कह देते हैं कि उसकी ड्रेसिंग सेंस तुमसे अच्छी है या वो तुमसे अच्छा खाना बनाती है या पत्नी कह देती है कि आपका वो दोस्त कितना स्मार्ट है, उसका सेंस ऑफ ह्यूमर कितना अच्छा है आदि.
टिप्स: कभी भी भूलकर अकेले में भी और लोगों के सामने भी दूसरे की तारीफ़ न करके एक-दूसरे की ही तारीफ़ करें.

स्वार्थ की भावना: कुछ लोग इतने सेल्फ सेंटर्ड होते हैं कि अपने अलावा किसी और के बारे में सोचते ही नहीं. भले ही वो ये सब अंजाने में करते हों, लेकिन इससे क़रीबी लोग आहत होते हैं.
टिप्स: स्वार्थी होना एक नकारात्मक भाव है. यह आपको उन्हें एहसास करवाना होगा. आप उन्हें यह बता सकते हैं कि यदि आप भी इसी तरह स्वार्थी हो जाएं, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी?
– उनका कोई ऐसा व्यवहार, जो स्वार्थ के बिना किया गया हो, उसकी तारीफ़ करें, उन्हें गिफ्ट दें, इससे धीरे-धीरे उनमें बदलाव आने लगेगा.

– ब्रह्मानंद शर्मा

क्या करें जब सेक्स के लिए दिल कहे ना? (What Is Sexual Aversion Disorder?)

छोटी-छोटी बातें चुभेंगी, तो भला बात कैसे बनेगी? (Overreaction Is Harmful In Relationship)

Overreaction In Relationship

ज़ुबान का वार ही काफ़ी होता है किसी भावुक व्यक्ति के मन को आहत करने के लिए. उनका अति संवेदनशील (Overreaction In Relationship) होना और छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेना, अक्सर उनके तन-मन दोनों पर तकलीफ़ पहुंचाता है. लेकिन यदि क़दम-क़दम पर इसी तरह छोटी-छोटी बातें चुभती रहेंगी, तो जीना मुश्किल हो जाएगा. 

Overreaction In Relationship
जिस तरह हमें छोटी-छोटी बातों से भी ढेर सारी ख़ुशियां मिलती हैं और दिल को सुकून मिलता है, ठीक उसी तरह हमारे जीवन से जुड़ी ऐसी कई छोटी-छोटी बातें भी होती होती हैं, जो हमें दुखी और तनावग्रस्त कर देती हैं. जबकि खुले दिमाग़ और सकारात्मक सोच के साथ देखें, तो उन बातों का उतना महत्व भी नहीं रहता. जिस तरह ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाने के लिए बड़ी नहीं, बल्कि छोटी-छोटी ख़ुशियां मायने रखती हैं, उसी तरह कई छोटी-छोटी बातें ऐसी भी होती हैं, जिनसे जाने-अनजाने में हम आहत हो, ख़ुद के लिए ही फ़िज़ूल की परेशानी खड़ी कर देते हैं.
साइकोलॉजिस्ट रोहिणी कुंदर के अनुसार, ओवर सेंसिटिव होना ग़लत नहीं है, पर स्थिति-परिस्थितियों में आपकी क्रिया-प्रतिक्रियाएं काफ़ी मायने रखती हैं. क्योंकि किसी भी बात या फिर माहौल पर की गई आपकी प्रतिक्रिया और व्यवहार आपके जीवन की बेहतरी और ख़ुशियों को अधिक प्रभावित करती हैं.
हां, यह भी मानी हुई बात है कि हम सभी कहीं न कहीं भावुक होते ही हैं. हम सभी पर अच्छी-बुरी बातों का प्रभाव पड़ता है. बस, अंतर इतना है कि कुछ लोग ओवर सेेंसिटिव होते हैं, तो उन पर बातेें बुरी तरह से हावी रहती हैं और अधिक प्रभाव डालती हैं और दूसरी तरफ़ ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो छोटी-छोटी बातों के प्रति लापरवाह होते हैं और उन्हें अनदेखा कर देते हैं.
अतः इस बात का ख़्याल रखें कि ओवर सेंसिटिव होना कभी-कभी आपकी व्यक्तिगत और प्रोफेशनल लाइफ दोनों को ही प्रभावित करती हैं.

बातों को दिल पर लेना और परेशान रहना
हाल ही के एक रिसर्च के अनुसार, यदि ओवर सेंसिटिव लोगों के काम के परफॉर्मेंस में उनकी सेल्फ एस्टीम को जोड़ा जाता है, तो वे परेशान से हो जाते हैं.
मनोचिकित्सक अमरीश श्रीवास्तव का मानना है कि जो व्यक्ति ओवर सेंसिटिव होते हैं, उनमें नकारात्मक बातों या सलाह को लेकर इतना अधिक संवेदनशीलता होती है कि ये उनके दिमाग़ के उसी हिस्से में रिकॉर्ड हो जाती हैं, जहां शारीरिक दर्द के लिए जगह होती है. इसलिए वे दिनभर में कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर अपसेट होते रहते हैं. दरअसल, इस रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि प्रैक्टिकल अप्रोच के नाम पर मेट्रोज़ में लोगों के बिहेवियर में इतनी बेरूखी है कि सेंसिटिव व्यक्ति ख़ुद को बदले बगैर सुकून से जी नहीं सकते. वैसे भी देखा गया है कि जो लोग अति संवेदनशील होते हैं, वे स्वयं को ही अधिक तनाव और दर्द देते रहते हैं. उन्हें मूड डिसऑर्डर से भी अधिक तकलीफ़ पहुंचती है.

क्रिएटिविटी की ओर ध्यान दें
ओवर सेंसिटिव(Overreaction In Relationship) व्यक्तियों को चाहिए कि वे अपनी संवेदनशीलता को क्रिएटिव कामों के लिए सहेजकर रखें. इससे न केवल आपका दिलो-दिमाग़ व्यस्त रहता है, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर भी अधिक ध्यान नहीं जाता.
इस संदर्भ में साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव आनंद का कहना हैं कि यदि आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीख लें, तो आपकी कई मुसीबतें आसान हो सकती हैं. बेहतर होगा कि आप बेवजह किसी के व्यंग्य-कटाक्ष आदि को गंभीरता से लेने की बजाय अनदेखा कर दें. आमतौर पर ओवर सेंसटिव लोग तब अधिक आहत होते हैं, जब उन्हें लगता है कि उन्हें ग़लत तरी़के से कोई बात कहीं गई है या उन पर कमेंट किया गया है. अपने पीठ पीछे की गई बातों को सुनकर भी वे घंटों परेशान हो रहते हैं.
ऐसी स्थिति में आप इस तरह से सोच सकते हैं कि जिसकी बातों से आप आहत महसूस कर रहे हैं, हो सकता है कि वह ख़राब मूड में रहा हो या उसने सोच-समझकर कोई बात न कही हो.

आत्मविश्‍वास हैै बेहद ज़रूरी
सेंसिटिव(Overreaction In Relationship) होने से बचने के लिए आपको अपने कॉन्फिडेंस लेवल पर काम करने की ज़रूरत है. मनोवैज्ञानिक डॉ. जीतलाल साहू के अनुसार, “यह रातोंरात नहीं हो सकता, लेकिन प्रैक्टिस से आप ऐसा कर सकते हैं. अगली बार जब किसी का कमेंट ख़राब लगे, तो दुखी या उदास होने की बजाय उसे सिंपली जवाब दे दें. और उसी उधेड़बुन में न उलझे रहें. किसी भी बात को पर्सनली न लें. ऑफिस हो या घर, जिसकी जो चीज़ बुरी लगे, उसे वहीं पर स्पष्ट कर दें. कई बार लोग आपके बारे में ऐसी बातें भी कह देते हैं, जो आपने कहीं नहीं होती है. जिसने कहा है कि उसे उसी समय बुलाकर तुरंत बातों को सुलझा लें. इससे एक तो वह आगे आपके बारे में कुछ भी बोलने से पहले सोचेगा, दूसरा चीज़ें स्पष्ट हो जाने से आपको वे बात लंबे समय तक परेशान नहीं करेगी.

ख़ुद से बात करें
यदि आप हमेशा ख़ुश रहना चाहते हैं, तो ख़ुद से बात करने की आदत डालें. अपना आंकलन ख़ुद करें और इसका अधिकार किसी को न दें. यदि आप अपने विचारों में बदलाव लाएंगे, तो ख़ुद-ब-ख़ुद फीडबैक मिलने शुरू हो जाएंगे. इससे आपको अपने काम में परफेक्शन लाने में भी आसानी रहेगी.
साइकोलॉजिस्ट अर्चना जम्बूरिया इस बात पर रोशनी डालते हुए कहती हैं कि हर काम में परफेक्शन की तलाश भी सही नहीं है. इसके चक्कर में ढेर सारी मेहनत के बाद भी ज़िंदगी में जब कुछ मनचाहा नहीं होता, तब आप तनाव और अवसाद से घिर जाते हैं. और हां, अपने सेंसिटिव होने के टैग पर ख़राब महसूस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह ख़ूबी यह भी
जताती है कि आप दूसरों की भावनाओं की भी क्रद करते हैं.

संवेदनशीलता में महिलाएं सबसे आगे
एक सर्वे के मुताबिक़, महिलाएं पुरुष के मुक़ाबले ज़्यादा संवेदनशील होती हैं. इसलिए छोटी-छोटी बातों पर वह तुरंत अपनी प्रतिक्रियाएं देती हैं. अमूमन वो किसी से भी भावनात्मक रूप से अधिक जुड़ जाती हैं. ऐसे में जब उन्हें कोई चीज़ ग़लत लगती है, तो वे तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं. भले ही समस्या दूसरे की ही क्यों न हो, पर वे स्वयं भी परेशान हो जाती हैं. यदि आपके साथ भी ऐसा ही कुछ है, तो अपनी इस आदत में बदलाव लाएं. सेंसिटिव होना बुरा नहीं, लेकिन उसी के लिए सेंसिटिव हो, जो इसके लायक हो. नहीं तो, आपके इस स्वभाव का फ़ायदा घर-परिवार के लोगों के अलावा आपके बॉस से लेकर कलीग तक उठा सकते हैं.

स्मार्ट भी होते हैं सेंसिटिव लोग
यदि आप अपने संवेदनशील स्वभाव को लेकर परेशान हैं, तो इसके फ़ायदे जानकर आप ज़रा ख़ुश भी हो जाएं. शोधों के अनुसार, ऐसे लोग शॉपिंग करने में बहुत स्मार्ट होते हैं और उनकी पसंद की सभी तारीफ़ करते हैं. वहीं, इन्हें म्यूज़िक की भी अच्छी जानकारी और समझ होती है. वहीं ये आर्ट और लिट्रेचर को भी पसंद करनेवाले होते हैं और अपनी संवेदनशीलता की वजह से दूसरों की बातों को बेहतरीन तरी़के से समझ पाते हैं. इसलिए इनके क़रीबी भी अक्सर अपनी समस्याओं को इनसे शेयर करते हैं.

– ऊषा गुप्ता

पारंपरिक रिश्तों के बदल रहे हैं मायने (Changing Culture of Relationship)

Changing Culture of Relationship

Changing Culture of Relationship
ग्लोबल हुई है सोचः यह सच है कि विकास और आधुनिकता की तीव्र लहर ने सबसे ज़्यादा असर अगर किसी पर डाला है, तो वे हैं हमारे आपसी रिश्ते (Changing Culture of Relationship). इंटरनेट, तकनीक, एक्सपोज़र और बढ़ती महत्वाकांक्षाएं- ये तमाम ऐसे पहलू हैं, जिन्होंने इंसान की सोच को बदलाव की ओर उन्मुख किया है. हर चीज़ एक क्लिक पर उपलब्ध होने के कारण दुनिया सिमट गई है.

बदलाव को खुले दिल से स्वीकारा जा रहा हैः रिश्तों के बीच जो एक समय में व्यापक दूरियां हुआ करती थीं, वे अब कम हो गई हैं और किसी-किसी रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में तो ख़त्म ही हो गई हैं. सोच के ग्लोबल होने के साथ-साथ पति-पत्नी, भाई-बहन, सास-बहू, ससुर-बहू, मां-बेटी, पिता-पुत्र/पुत्री- कहने का अर्थ यह है कि हर तरह के पारंपरिक रिश्तों में एक बदलाव आया है, जिसे हम सबने खुले दिल से स्वीकारा भी है.
पिता-पुत्र/पुत्री का रिश्ता: एक ज़माना था जब बच्चों के लिए पिता किसी तानाशाह से कम नहीं होते थे. बच्चों कोकोई बात अपने पिता तक पहुंचानी होती थी, तो वे मां के माध्यम से पहुंचाते थे. सुखद बात तो यह है कि इस रिश्ते में एक बहुत ही प्यारा बदलाव देखने को मिल रहा है. बच्चे अपने पिता से अब दूरी बनाकर नहीं चलते. उनके बीच अब एक मित्रवत् व्यवहार कायम हो गया है. वे अपनी हर बात पिता से शेयर करने लगे हैं. इस रिश्ते में अब हंसी-मज़ाक भी होता है और रूठना-मनाना भी. इस रिश्ते में अब डर की जगह एक बेबाकी और प्यार ने ले ली है.

सास-बहू का रिश्ता: यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसे लेकर सबसे ज़्यादा डर और अनिश्‍चितता बनी रहती थी. बहू को सास के नाम से डर लगता था और सास को बहू के अस्तित्व से, पर अब न तो टिपिकल सास का ज़माना रहा है और न ही सास के दबदबे को चुनौती देनेवाली बहू का. शिक्षित और वर्किंग सास न स़िर्फ अब बहू को अपनी तरह से जीने की आज़ादी देती है, बल्कि उसके साथ हर तरह से एडजस्ट करने की कोशिश भी करती है. वह उसकी इच्छाओं को समझती है और उसे मनचाहा करने के लिए बढ़ावा भी देती है. इसी तरह बहू का व्यवहार भी सास के प्रति बदल गया है. वह उसे मां की तरह सम्मान भी देती है और एक दोस्त का दर्जा भी. दोनों के रिश्ते में जो खुलापन इस समय देखने को मिल रहा है, वह सराहनीय है.

पति-पत्नी का रिश्ता: जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में जो बदलाव आया है, उसने तो वैैवाहिक समीकरणों को भी परिवर्तित कर दिया है. पति अब पत्नी को डॉमीनेट नहीं करता, न ही उसे अपने से कमतर समझता है. पहले माना जाता था कि घर के दायित्वों को पूरा करना पत्नी का काम है. अब पति घर के कामों में तो पत्नी को सहयोग देता ही है, साथ ही बेबी सिटिंग भी करता है. बच्चा बीमार हो, तो ज़रूरत के हिसाब से वह छुट्टी लेता है और पत्नी काम पर जाती है. आपसी रिश्तों में अब पहले की तरह घुटन नहीं रही है, बल्कि दोनों एक-दूसरे को स्पेस देते हैं. पति अपनी पत्नी के काम से जुड़ी कमिटमेंट्स को समझता है और उसे बात-बात पर टोकता भी नहीं है. पति-पत्नी अब दोस्तों की तरह व्यवहार करने लगे हैं.

भाई-बहन का रिश्ता: हालांकि इस रिश्ते में सदा ही एक मधुरता रही है, फिर भी बहनें भाई से डरा करती थीं, लेकिन इस रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में भी अब मित्रता ने जगह ले ली है. वे एक-दूसरे के साथ अपनी बातें शेयर करते हैं और समस्या का हल भी मिलकर ढूंढ़ते हैं. बहन भी अब इतनी सक्षम हो गई है कि वह अपने भाई की रक्षा कर सके, उसे गाइड कर सके और वह ऐसा करती भी है.

दोस्ती का रिश्ता: दोस्ती के रिश्ते में अब व्यापक परिवर्तन आ गया है. केवल पुरुष-पुरुष ही नहीं, स्त्री-पुरुष की दोस्ती में भी परिवर्तन आया है. चैटिंग, पार्टी और साथ घूमना आम बात हो गई है. इस खुलेपन की वजह से, जहां संकीर्णता पर उन्होंने प्रहार किया है, वहीं दूसरी ओर इन रिश्तों के बीच व्याप्त हिचक टूटने से बहुत सारी परेशानियां भी कम हुई हैं. वे एक-दूसरे के मददगार साबित हो रहे हैं.

बदलाव का अन्य पहलू भी हैतमाम पारंपरिक रिश्तों में आए बदलाव का प्रभाव पॉ़ज़िटिव ही हुआ है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है. इस बदलाव के कई अन्य पहलू भी हैं.

  • रिश्तों में आए खुलेपन ने सीमाएं तोड़ने को विवश किया है, जिससे मर्यादाएं आहत हुई हैं.
  • हमारी संवेदनशीलता में कमी आई है, जिसकी वजह से लोग एक-दूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगे हैं.
  • सहज होना अच्छा है, पर इतना नहीं कि उससे दूसरे की भावनाएं आहत हों.
  • रिश्ता चाहे जो हो, वह अत्यधिक नाज़ुक और संवेदनशील होता है. केवल निभाना ही नहीं, उसे संभालना भी आवश्यक है.
  • दिल की बात खुलकर कहें, पर रिश्तों में ऐसा खुलापन न आए, जो अश्‍लीलता या बेशर्मी की झलक दिखाए.
  • हालांकि बदलते परिवेश में रिश्तों के मायने बदले अवश्य हैं, पर रिश्तों की अहमियत पहले जितनी ही है.
  • हर स्थिति में अपने रिश्ते को सदाबहार रखने का एक ही मंत्र है, हर रिश्ते को समुचित आदर देना.

– सुमन बाजपेयी

पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पहचानें अपने रिलेशनशिप की केमेस्ट्री ( Compatibility and Chemistry in Relationships )

Relationship chemistry

Relationship chemistry
रिश्ते के समीकरणों में जहां ग़ुस्से और झगड़े का तीखापन है, तो वहीं एक-दूसरे की परवाह की मिठास भी है. यदि इसमें मतभेदों की कड़वाहट है, तो शरारतों का चटपटापन भी है. कभी-कभी रिश्ते द्वेष की आग से जब कुछ ज़्यादा गर्म हो जाते हैं, तो साथी के छुअन की ठंडक उसे ठंडा कर देती है. पर जनाब क्या आप जानते हैं कि इस तरह के रिश्ते वहीं परिपक्व होते हैं, जहां पति-पत्नी के बीच की केमेस्ट्री यानी तालमेल अच्छा होता है. अब आप पूछेंगे कि पति-पत्नी क्या तत्व या यौगिक हैं, जो उनकी केमिस्ट्री होगी. तो जवाब है, जी हां, पति-पत्नी रिश्ते के तत्व भी हैं और यौगिक भी.
क्या होती है रिश्तों की केमेस्ट्री?
कैसा लगता है आपको, जब आपका साथी भीड़ में सड़क पार करते समय आपका हाथ झट से थाम लेता है? कैसा लगता है आपको, जब आपके दुख के समय आपका साथी आपकी पीठ को सहलाते हुए बिना कुछ कहे आपको सांत्वना देता है? ज़रा सोचिए किसी दिन आपको ऑफिस से आने में देर हो जाए, थकी-हारी आप घर लौटें और पति ने रात का सारा खाना बना लिया हो… ये सभी और इनके जैसे कई और पल रिश्ते के सबसे मधुर पल होते हैं. इस आपसी तालमेल और समझदारी को हम केमेस्ट्री कहते हैं, जिसमें कोई एक-दूसरे से कोई भी न ही कुछ मांगता है और न बोलता है, बस, आंखों ही आंखों में सारी बातें हो जाती हैं.
क्यों ज़रूरी है रिश्ते में तालमेल?
अच्छ तालमेल होना सुखी वैवाहिक जीवन का आधार हो सकता है. रिश्ते में तालमेल की ज़रूरत शादी के कुछ सालों के बाद ज़्यादा पड़ती है, क्योंकि तब शादी में प्यार की जगह कई तरह की ज़िम्मेदारियां ले लेती हैं.
पति-पत्नी एक-दूसरे को उतना समय नहीं दे पाते या यूं कहें कि शादी के कुछ सालों के बाद प्यार का रूपांतर ही केमेस्ट्री में हो जाता है. और यही बात आपके समय के साथ बूढ़े हो रहे रिश्ते को तरोताज़ा और जवां बनाती है. कहने का तात्पर्य यह है कि स़िर्फ प्यार के आधार पर रिश्तों को जीवित रखना मुश्किल है, लंबी रेस के लिए सही तालमेल का होना ज़रूरी है.
कैसे पहचानें अपने रिश्ते को?
क्या आप सेल्फी हैं?
सेल्फी का अर्थ है ख़ुद की ही तस्वीरें उतारनेवाला. क्या आप ख़ुद की तस्वीरों में ही गुम रहते हैं? इसका मतलब क्या आप ख़ुद के काम, कपड़ों, पसंद-नापसंद, परेशानियों या ख़ुशियों के अलावा कुछ सोच नहीं पाते. तो सचेत हो जाइए, आपका रिश्ता ख़तरे में है. बेहतर रिश्ते के लिए ख़ुद के खोल से बाहर निकलना ज़रूरी होता है.
क्या आप डाउटिंग थॉमस हैं?
क्या आप किसी शक के चलते अक्सर अपने पति का मोबाइल चेक करती हैं या आप अपनी पत्नी के किसी पुरुष सहकर्मी के साथ बात करने पर या घर आने पर रातभर सो नहीं पाते. तो इसका मतलब साफ़ है कि दोनों ही परिस्थितियों में आपका रिश्ता कमज़ोर है.
मन की बात
यदि आपके रिश्ते में कोई अपेक्षाएं नहीं हैं और फिर भी आप ख़ुश हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आप एक-दूसरे की अपेक्षाओं को बिना कहे ही पूरा कर रहे हैं. इसे ही अपने साथी के मन की बात को पहचानना कहते हैं. अपने साथी के ख़ुशी-ग़म और ज़रूरतों को बिना कहे समझ लेना भी एक कला है. यह कला यदि आपको आ गई, तो यह अच्छी बात है.
निर्भरता
जीवन की छोटी-मोटी ज़रूरतों के लिए अपने साथी पर निर्भर रहने में कोई बुराई नहीं है. इससे जीवन में एक-दूसरे की ज़रूरत और ज़िम्मेदारी बनी रहती है. यदि आप एक-दूसरे पर निर्भर हैं, तभी आप एक-दूसरे को समझने की कोशिश करेंगे. यह निर्भरता आर्थिक, भावनात्मक या किसी भी अन्य तरह की हो सकती है.
पास भी, दूर भी
आजकल पति-पत्नी को साथ बिताने के लिए उतना समय नहीं मिलता, उस पर डिस्टेंस मैरिजेस का बोझ भी है. ऐसे में अगर दूर रहकर भी आपके साथी के पास होने का एहसास बना हुआ है, तो यह अच्छा है.
अच्छी केमेस्ट्री के लिए कुछ मज़ेदार, पर कारगर एक्सरसाइज़
* महीने में एक बार अपने साथी के साथ अकेले बैठें और उससे अपने बारे में ऐसी 5 चीज़ें पूछें, जो उसे पसंद-नापसंद हैं. उन्हें आप लिख लें और किसी भी बात का बुरा न मानें. फिर उसे भी ऐसा करने
को कहें.अब अपनी लिखी हुई चीज़ों पर काम करें.
* कोई ऐसी एक्टिविटी करें, जिसमें आपसी तालमेल की ज़रूरत हो, जैसे- कोई खेल, डबल्स टेनिस या पार्टनरशिप में कैरम या तो डांस, जैसे- सालसा आदि.
* यदि यह सब भी मुमकिन ना हो, तो घर के काम अकेले करने की जगह साथ
मिलकर करें.
अक्सर यह देखा गया है कि अपेक्षाएं रिश्तों को कमज़ोर बना देती हैं. अपेक्षाएं रखना बुरी बात नहीं है, बशर्ते वे वास्तविकता के धरातल पर हों.

– विजया कठाले निबंधे

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