Unity

आओ दीया (Diya) जलाएं… सब देशवासी मिलकर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए आज रात 9:00 बजे 9 मिनट तक दीया ज़रूर जलाएंगे. इस दरमियान घर की सभी लाइट-बत्तियां बंद कर देंगे. सभी आह्वान करेंगे प्रकाश का.. आशा की उस रोशनी का, जो यह एहसास कराती है कि कोरोना की लड़ाई में कोई अकेला नहीं, हम सब साथ हैं.. एकजुट हैं.. अटल बिहारी वाजपेयीजी की कविता- आओ फिर से दीया जलाएं… यहां पूरी तरह से सटीक बैठ रही है. साथ ही वक़्त की सार्थकता को भी परिभाषित कर रही है. 

यह उम्मीद की रोशनी प्रेरित करेगी.. देश में सुख-समृद्धि आए और यह बीमारी जड़ सहित निकल जाए.. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने इसलिए भी ऐसा करने के लिए कहा है कि प्रकाश का यह दीया हर उस व्यक्ति तक रोशनी लेकर पहुंचे, जो ख़ुद को अकेला समझ रहा है.. हम सब मिलकर यह आस्था-विश्वास जगाएं कि हम 130 करोड़ भारतीय एक हैं. वायरस क्या, दुनिया की कोई ताकत हमें हरा नहीं सकती.

जब से पीएम मोदीजी ने दीये जलाने का आह्वान किया है, तब से पूरा देश उत्साह-उमंग से भर गया है. हर कोई पीएम के इस मुहिम में अपना सिपाही बना हुआ है और अपना सहयोग व योगदान दे रहा है. नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, आम व ख़ास ही क्यों ना हो, हर कोई अपनी तरफ से सहयोग दे रहा है और हर कोई इससे जुड़ना चाहता है और इसे सफल बनाना चाहता है. मोदीजी के इस प्रकाश पर्व को लेकर सोशल मीडिया पर धन्यवाद और साथ देने का सिलसिला सा चल पड़ा. सभी ने पीएम के साथ होने और इसे निभाने का संकल्प लिया. फिर सुपरस्टार क्रिकेटर विराट कोहली हो, अनिल कपूर, अनुपम खेर, निर्देशक करण जौहर हो, गीतकार प्रसून जोशी हो, हमारी दादी चंद्र तोमर… सभी ने लोगों से गुज़ारिश की है इस मुहिम से जुड़ने की और इसे बड़े पैमाने पर सफल बनाने की.
मशहूर आरजे रौनक ने लोगों से अपील की है कि प्रकाश की रोशनी का एक दीया हर कोई जलाएं और अपने तरफ से एक सहयोग और योगदान दें. सब देशवासी करोना वायरस से लड़ने के लिए आशा, सेहत, कृतज्ञता, साथ से भरपूर यह दीया आज राज 9 बजे 9 मिनट तक जलाएंगे. इस दरमियान सभी लाइट ऑफ कर देंगे और आह्वान करेंगे कि देश में आरोग्य आए और जो बीमारी है मिट जाए.

जब-जब हमारे देश में कोई विपदा-संकट आया है, कोई महामारी-परेशानी हुई, तब-तब पूरा देश एक हो गया है. इसी का नजारा 22 मार्च को जनता कर्फ्यू में 5:00 बजे देखने को भी मिला था. जब पूरे देशवासियों ने मिलकर कोरोना वायरस से लड़ रहे डॉक्टर, नर्स, पुलिस, सफाई कर्मचारी और वे सब जो कोरोना से बचाने की मुहिम में काम कर रहे हैं, सहयोग दे रहे हैं, उनके लिए धन्यवाद, शुक्रिया और थैंक्यू का आभार व्यक्त किया था. किसी ने घंटी बजाकर, किसी ने ताली बजाकर, किसी ने शंख बजाकर, तो कोई ड्रम बजाकर, जिसकी जो श्रद्धा-भक्ति रही, उन सभी लोगों का जो हमारे कोरोना कमांडो है, वॉरियर्स है, को धन्यवाद और शुक्रिया कहा. इसी तरह हमें आज भी सभी को रात को 9:00 बजे 9 मिनट तक दीए जलाने हैं और रोग संकट के इस अंधकार को मिटाना है.
प्रकाश की रोशनी में सब स्वस्थ रहें, ख़ुश रहें… ऐसी प्रार्थना करनी है. यह घर-परिवार, देश ही नहीं, पूरे विश्व में सुख-शांति और आरोग्य की रोशनी फैले, यही सभी की दुआ होनी चाहिए, प्रार्थना होनी चाहिए. हमारी संस्कृति और सभ्यता भी है, जो वसुदेव कुटुंब में आस्था रखती है. हम पूरी दुनिया के भलाई के लिए हमेशा ही प्रार्थना करते रहे हैं. भारतीय संस्कृति में जब भी कोई पूजा-पाठ करते हैं, कोई भी कार्य करते हैं, तब हम पूजा होने के बाद एक आभार व्यक्त करते, तब हम पूरे विश्व के कल्याण और आरोग्य की भी प्रार्थना करते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने इसलिए भी कहा है कि प्रकाश का दीया उस व्यक्ति को भी रोशनी पहुंचाएगा, जो ख़ुद को अकेला समझ रहा है. हम सब एहसास कराएं कि हम 130 करोड़ भारतीय एक है. आओ हम सब मिलकर प्रकाश की रोशनी से अंधकार रूपी बीमारी को नेस्तनाबूद कर दें. देखना जीत हमारी ज़रूर होगी. Him होंगे कामयाब… इसका हमें है पूरा विश्वास…

Panchtantra Story

बहुत समय पहले की बात है, कबूतरों का एक झुंड खाने की तलाश में आसमान में उड़ता हुआ जा रहा था. कुछ दूर जाने के बाद ग़लती से भटककर ये झुंड ऐसे प्रदेश के ऊपर से गुजरा, जहां भयंकर अकाल पड़ा था. कबूतरों का सरदार चिंतित हो गया. कबूतरों के शरीर की शक्ति समाप्त होती जा रही थी. जल्द ही कुछ दाना मिलना ज़रूरी था. झुंड का युवा कबूतर सबसे नीचे उड़ रहा था. भोजन नज़र आने पर उसे ही बाकी दल को सूचित करना था. बहुत देर उड़ने के बाद वो लोग सूखाग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकल आए. वहां उन्हें नीचे हरियाली नज़र आने लगी. ये देखकर उन्हें लगा कि अब भोजन मिल जाएगा. दल का युवा कबूतर और नीचे उड़ान भरने लगा. तभी उसे नीचे खेत में बहुत सारा अन्न बिखरा नज़र आया. वह बोला, “चाचा, नीचे एक खेत में बहुत सारा दाना बिखरा हुआ है. हम सबका पेट भर जाएगा.”
सरदार ने सूचना पाते ही कबूतरों को नीचे उतरकर खेत में बिखरा दाना चुनने का आदेश दिया. सारा दल नीचे उतरा और दाना चुनने लगा. दरअसल, वह दाना एक बहेलिए ने बिखेर रखा था ताकि वो पक्षियों का शिकार कर सके. नीचे दाना डालने के साथ ही उसने ऊपर पेड़ पर जाल डाला हुआ था. जैसे ही कबूतरों का झुंड दाना चुगने लगा, जाल उनपर आ गिरा. सारे कबूतर फंस गए.
कबूतरों के सरदार ने माथा पीटा, ‘ओह! यह तो हमें फंसाने के लिए फैलाया गया जाल था. भूख ने मेरी अक्ल पर पर्दा डाल दिया था. मुझे सोचना चाहिए था कि इतना अन्न बिखरे होने के पीछे कोई वजह ज़रूर होगी, मगर अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत?”
एक कबूतर रोने लगा, “अब हम सब मारे जाएंगे.”

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बाकी कबूतर तो हिम्मत हार बैठे थे, पर सरदार गहरी सोच में डूबा था. एकाएक उसने कहा, “सुनो, जाल मज़बूत ज़रूरी है, लेकिन इसमें इतनी भी शक्ति नहीं कि एकता की शक्ति को हरा सके. हम अपनी सारी शक्ति को जोड़े तो मौत के मुंह में जाने से बच सकते हैं.”
युवा कबूतर फड़फड़ाया, “चाचा! साफ़-साफ़ बताओ तुम क्या कहना चाहते हो. जाल में फंसकर हम असहाय हो गए हैं, शक्ति कैसे जोडे?”
सरदार बोला, “तुम सब चोंच से जाल को पकडो, फिर जब मैं फुर्र कहूं तो एक साथ ज़ोर लगाकर उड़ना.”
सबने ऐसा ही किया. तभी जाल बिछाने वाला बहेलियां आता नज़र आया. जाल में कबूतरों को फंसा देखकर वह बहुत ख़ुश हुआ. उपने डंडे को मज़बूती से पकड़े वह जाल की ओर दौड़ा.
बहेलिया जाल से कुछ ही दूरी पर था कि कबूतरों का सरदार बोला, “फुर्रर्रर्र!”
सारे कबूतर एकसाथ ज़ोर लगाकर उड़े, तो पूरा जाल हवा में ऊपर उठा और सारे कबूतर जाल को लेकर ही उड़ने लगे. कबूतरों को जाल सहित उड़ते देखकर बहेलिया हैरान रह गया. कुछ देर बाद संभला, तो जाल के पीछे दौड़ने लगा. कबूतरों के सरदार ने बहेलिए को नीचे जाल के पीछे दौड़ते देखा, तो उसका इरादा समझ गया. सरदार भी जानता था कि कबूतरों के लिए जाल सहित ज़्यादा देर उड़ते रहना संभव नहीं होगा, पर सरदार के पास इसका उपाय था. पास ही एक पहाड़ी पर बिल बनाकर उसका एक चूहा मित्र रहता था. सरदार ने कबूतरों को तेज़ी से पहाड़ी की ओर उड़ने का आदेश दिया. पहाड़ी पर पहुंचते ही सरदार का संकेत पाकर जाल समेत कबूतर चूहे के बिल के निकट उतर गए.
सरदार ने मित्र चूहे को आवाज़ दी. सरदार ने संक्षेप में चूहे को सारी घटना बताई और जाल काटकर उन्हें आज़ाद करने के लिए कहा. कुछ ही देर में चूहे ने वह जाल काट दिया. सरदार ने अपने मित्र चूहे को धन्यवाद दिया और सारा कबूतर दल आकाश की ओर आज़ादी की उड़ान भरने लगा.

सीख- एकजुट होकर बड़ी से बड़ी विपत्ति का सामना किया जा सकता है.

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