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सेलिब्रिटी फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा, जो बॉलीवुड में कई बड़े स्टार्स के फेवरेट डिज़ाइनर हैं, ने एक हफ्ते में ही कोरोना को हरा दिया है. 54 वर्षीय मनीष मल्होत्रा की कोविड रिपोर्ट एक हफ्ते पहले ही पॉजिटिव आई थी और मात्र 7 दिन में वो कोरोना नेगेटिव हो चुके हैं.

Manish Malhotra

उन्होंने ये खुशखबरी खुद सोशल मीडिया पर शेयर की और जल्दी ठीक होने की वजह भी बताई. साथ ही उन्होंने सबको वैक्सीन लेने की भी सलाह दी.

Manish Malhotra

मनीष ने एक मास्क के साथ इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी शेयर की और लिखा कि उनकी रिपोर्ट दो बार नेगेटिव आ चुकी है. फ़ोटो शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा- ‘दो बार कोव‍िड टेस्ट न‍िगेट‍िव आया…आप सभी के दुआओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार… मैं वैक्सीन लेने की वजह से इतनी जल्दी ठीक हो पाया…इसलिए वैक्सीनेशन सभी के लिए बहुत जरूरी है…सुरक्ष‍ित रहें’.

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मनीष मल्होत्रा के कोरोना से ठीक होने पर कई बॉलीवुड सेलेब्स ने खुशी जाह‍िर की है, जिसमें जाह्नवी कपूर, रिद्ध‍िमा कपूर साहनी, गौहर खान समेत और भी कई सेलेब्स शामिल हैं.

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बता दें कि मनीष ने 17 अप्रैल को कोरोना पॉज‍िट‍िव होने की न्यूज़ शेयर की थी और लिखा था- ‘मैं कोरोना पॉज‍िट‍िव हो गया हूं. मैंने आपको आइसोलेट कर लिया है और होम क्वारनटीन में रहूंगा. मैं डॉक्टर्स द्वारा दिए गए सभी सेफ्टी प्रोटोकॉल्स का पालन कर रहा हूं. प्लीज आप सब भी सुरक्ष‍ित रहें और अपना ख्याल रखें’. 

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बता दें कि वैक्‍सीन लगवाने के बाद भी कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की खबरों के बाद लोग वैक्सीन लगवाने से डरने लगे हैं और लोगों को लगने लगा है कि वैक्सीन के बाद भी अगर कोरोना होता है तो वैक्सीन लगाने का क्या फायदा. जबकि डॉक्टर्स बार बार कह रहे हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद भी आपको कोरोना से जुड़े सभी नियमों का पालन करना पड़ेगा. और इसके बाद आप पॉजिटिव हो भी जाते हैं तो भी संक्रमण हल्का होगा और रिकवरी भी फ़ास्ट होगी. मनीष मल्होत्रा इस बात की बहुत अच्छी मिसाल हैं. इसलिए अगर कोरोना को हराना है तो सभी अपनी बारी आने पर वैक्सीन ज़रूर लें.



कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारत ने वैक्सीन लगाने की मुहिम शुरू तो कर दी है, पर अब भी कई पहलुओं पर ध्यान देना है. तकनीक बातों के अलावा वैक्सीन को लेकर अफ़वाह और भ्रम से संभलना होगा. इसलिए बड़े पैमाने पर टीका देने हेतु तकनीक के उपयोग करने में भारत की ताकत और अनुभव का लाभ उठाते हुए सरकार ने अपने टीकाकरण अभियान पर हर समय निगरानी रखने के लिए कोविड वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (को-विन) बनाया और इसे लॉन्च किया.
हर किसी को टीका देने के लिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म एक आधार बनाता है. को-विन ऐप को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि अनूठे डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिज़ाइन करते समय विशिष्टता, गति और प्रसार को ध्यान में रखा गया है, जिसके साथ ही यह बहुत ज़्यादा और अनावश्यक निर्भरता के बिना पोर्टेबल, सिक्रोनस होगा. जैसा कि टीकाकरण शुरू हो गई है और यह पाया गया कि डिजिटल सिस्टम में कुछ गड़बड़ियां हैं और इस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है.
मज़बूत वैक्सीन वितरण इकोसिस्टम बनाने हेतु सभी हितधारकों के बीच एकजुट सहयोग के लिए सरकार द्वारा डिज़ाइन और विकसित किए गए, को-विन ऐप में हाल ही में कुछ गड़बड़ी हुई. भारत में 1.3 अरब लोगों को वैक्सीन देना एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम है. इसकी सफलता काफ़ी हद तक लोगों की सक्रिय भागीदारी और कई हितधारकों के जुड़ने पर निर्भर होगी. दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू करने से पहले सरकार को एहसास था कि इसे सफल बनाने के लिए तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
शुरुआत में यह पाया गया कि सरकार ने पहले कुछ दिनों में टीकाकरण के लिए पंजीकरण करनेवाले लोगों को शामिल नहीं किया था, बल्कि उन्हें प्रकट भी नहीं किया था. अनुपस्थित लोगों के प्रबंधन के लिए प्रावधान की कमी से संबंधित तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं. अनुपस्थित लोगों की जगह लेने हेतु किसी अन्य व्यक्ति को जोड़ने के लिए एक डिजिटल पंजीकरण सिस्टम बनाने की ज़रूरत थी. अनुपस्थित लोगों को कवर करने के लिए सूची को रियल टाइम में अपडेट और प्रमाणित करने की ज़रूरत है. अब आधार के माध्यम से रियल टाइम प्रमाणीकरण भी इस सुविधा के लिए पेश किया जा रहा है.

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इसके बारे में एपीएसी रीजन- डे टूडे हेल्थ के प्रेसिडेंट राजीव मिश्रा का कहना है कि वैक्सीन के निर्माण की लोकेशन से लेकर नागरिकों के टीकाकरण तक वैक्सीन की खुराक की ट्रैकिंग और ट्रेसेबिलिटी दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए ज़रूरी है. इस प्रोग्राम की लाइव ट्रैकिंग होने चाहिए और हर कदम पर इस पर निगरानी रखी जानी चाहिए. पहले दिन से लेकर 21वें दिन के अगले राउंड तक ट्रैकिंग, डेटा प्रबन्धन, एनालिटिक्स के लिए बहुत ज़रूरी है. यह किसी भी तरह की खामियों से बचने के लिए भी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा सुरक्षा और गुणवत्ता का सुनिश्चित करने तथा कालाबाज़ारी और भ्रष्टाचारी को रोकने के लिए भी ट्रैकिंग और ट्रेसिंग ज़रूरी है. हालांकि सरकार सही दिशा में प्रयास कर रही है. प्रभावी और अनुकूल परिस्थितियों के लिए मज़बूत आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स और मशीन लर्निंग सिस्टम को मज़बूत बनाना आवश्यकत है. पैमाना बढ़ाने के लिए सरकार को अपनी प्रभाविता के लिए थर्ड पार्टी सेवा प्रदाताओं पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे उत्पाद के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए, जो अपना प्रयोजन पूरा करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करे.‘’
को-विन प्लेटफॉर्म निश्चित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN) का विस्तार है. यह नेटवर्क वैक्सीन स्टॉक को डिजिटाइज़ करता है और स्मार्टफोन एप्लिकेशन के माध्यम से कोल्ड चेन के तापमान पर नज़र रखता है. साल 2012 में इसकी शुरुआत की गई थी, तब कोल्ड चेन पॉइंट्स पर कुशल वैक्सीन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का समर्थन करने के लिए बारह राज्यों में इसका व्यापक रूप से उपयोग किया गया था. इनोवेटिव नेटवर्क भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम का समर्थन करता है और देशभर में सभी कोल्ड चेन पॉइंट्स पर वैक्सीन स्टोरेज, स्टॉक और फ्लो और स्टोरेज के तापमान पर रियल टाइम डेटा प्रदान करता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण करवानेवाले व्यक्ति की स्पष्ट रूप से पहचान करना और यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि किसे, किसने, कब और कौन-सा टीका लगाया. पहले चरण में, निर्धारित किए गए प्राथमिकतावाले समूह- स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों (70 लाख) और फ्रंटलाइन वर्कर्स (2.1 करोड़) को टीका लगाया जाएगा. 21 अगस्त तक केवल पहले चरण में ही 30 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाएगा, जिसमें 50 वर्ष से ज़्यादा उम्रवाले लोग (26 करोड़) और किसी अन्य बीमारीवाले अन्य लोग (1.2 करोड़) शामिल होंगे. कुल मिलाकर दो साल में सभी वयस्क आबादी (60%) को कवर करना इसका लक्ष्य है.

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दो साल की लंबी टीकाकरण मुहिम की सफलता के लिए भारत को न केवल ट्रैकिंग उद्देश्यों के लिए, बल्कि लाभार्थियों को प्राथमिकता देने, लक्षित इलाकों की पहचान करने, अनुपस्थित लोगों का प्रबंधन करने, और लक्षित सेगमेंट में पूरे टीका वितरण सिस्टम को बेहतर बनाने हेतु एक योजना बनाने और पूर्वानुमान लगाने के एनालिटिक्स के लिए भी एक मज़बूत एनालिटिक्स इंजन में निवेश करना होगा.
स्वास्थ्य पेशेवरों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं सहित आम जनता वैक्सीन लगवाने के लिए भयभीत हैं. इस डर का मुख्य कारण यह है कि भारतीय नियामक ने कैंडिडेट्स आपातकालीन उपयोग के लिए दो वैक्सीन उम्मीदवारों कोविशिल्ड (Covidshield) और कोवैक्सीन (Covexin) को मंज़ूरी दे दी है. इसका तीसरा चरण परीक्षण डेटा अभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए लोग इसकी प्रभावकारिता पर असंबद्ध हैं. टीके को विकसित होने में लम्बा समय लग जाता है और इसमें एक दशक भी लगता है. मानव पैपिलोमावायरस (सर्वाइकल कैंसर के लिए) और रोटावायरस के लिए 25 साल (गैस्ट्रोएंटेरिटिस के ख़िलाफ) के लिए एक टीका विकसित करने में 26 साल लग गए. पिछले 40 वर्षों में पैंतीस मिलियन लोगों की एड्स से मृत्यु हो गई है. 1987 से 30 वैक्सीन उम्मीदवारों का मानव नैदानिक परीक्षणों में परीक्षण किया गया है, लेकिन किसी भी उम्मीदवार ने तीसरे चरण के परीक्षण को आज तक मंज़ूरी नहीं दी है. भारी निवेश के बावजूद मलेरिया और SARS और MERS जैसे अन्य कोरोनविरस के लिए कोई टीका नहीं है.
सरकार टीकाकरण (AEFI) के बाद प्रतिकूल घटना के ख़िलाफ जांच पर स्पष्ट रुख के साथ नहीं आई है, इसलिए टीकाकरण के प्रभावों पर आम जनता को संदेह और डर है. हालांकि वे मामूली प्रभावों या दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं, जो किसी भी टीकाकरण के साथ आते हैं. जहां पहले काफ़ी लोग टीका लगाने से हिचक रहे थे, अब बड़ी तादाद में लोग आगे आकर लगवा रहे हैं.

ऊषा गुप्ता

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कोरोना ने जहां पूरे संसार की रफ़्तार को धीमा कर दिया वहीं मानव जाति पर भी यह एक बड़ा संकट है यह कहना ग़लत नहीं होगा, ऐसे में सभी को इंतज़ार है तो बस वैक्सीन का. इसकी कोशिशें भी हो रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही वैक्सीन के रूप में हमारे पास कोरोना को हराने का हथियार होगा.

कई देशों में वैक्सीन के निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी भी इस ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रही है और भारत में सिरम इंस्टिट्यूट और आईसीएमआर के साथ मिलकर एक सशक्त वैक्सीन- ‘कोविशील्ड’ के निर्माण की दिशा में वो काफ़ी आगे बढ़ चुकी है क्योंकि उसने ह्यूमन वैक्सिनेशन भी लगभग पूरा कर लिया है और अब वो इसके असर और प्रभाव पर नज़र बनाए हुए है.
ह्यूमन ट्रायल के लिए कुल भारत में 1600 वॉलंटियर्स की ज़रूरत थी और केईएम में 100, जिसमें से एक हैं महाराष्ट्र के नामी डॉक्टर सुरेश सुंदर जिनसे हमारी इस प्रक्रिया को लेकर बात हुई और हमें इस विषय को बेहतर तरीक़े से समझने में मदद मिली.

COVID-19 Vaccine

इतने महत्वपूर्ण मिशन के लिए वॉलंटियर बनने की क्या शर्तें और मानक होते हैं?

मैं भी डॉक्टर हूं तो ज़ाहिर है हमारा संपर्क और बातचीत होती रहती है इस तरह की कोशिशों से जुड़े लोगों से, इसीलिए मुझे भी अवसर मिला कि मैं इस अच्छे काम का हिस्सा बनूं.

आप कैसे इस मिशन से जुड़े?

आप एडल्ट हों और पूरी तरह हेल्दी हों. आपको कोरोना ना हुआ हो और आप मानसिक रूप से भी मज़बूत हों. पहले स्टेप में स्क्रीनिंग होती है जिसमें आपका हेल्थ चेकअप, कोविड टेस्टिंग वैग़ैरह होता है और दूसरा स्टेप होता है काउन्सलिंग का जिसमें आपको पूरी प्रक्रिया की गंभीरता और साइडइफ़ेक्ट्स की संभावनाओं के बारे में मानसिक रूप से तैयार किया जाता है.

इसके रिस्क फ़ैक्टर्स के बारे में कुछ बताइए?

चूंकी यह पूरी तरह नई वैक्सीन है तो इसके बारे में हमें ज़्यादा कुछ पता नहीं होता, ऐसे में इसके साइडइफ़ेक्ट्स भी कई तरह के हो सकते हैं, जैसे- मसल वीकनेस, किसी तरह की कमज़ोरी और यहां तक कि जान को भी ख़तरा हो सकता है.

Dr. Suresh Sundar

ऐसे में आप और आपके परिवार वाले कैसे तैयार हुए?

मेरी पत्नी भी डॉक्टर हैं और मैं भी तो ज़ाहिर है ये वैक्सीन कितनी ज़रूरी है आज हमारे पूरे देश, दुनिया और समाज के लिए हम समझ सकते हैं. यह गर्व की बात है कि मुझे मौक़ा मिला इस तरह के कार्य का हिस्सा बनने का. चूंकी वैक्सीन को बिना ट्रायल के बाज़ार में उतारा नहीं जा सकता तो यह प्रक्रिया बेहद ज़रूरी हो जाती है.

COVID-19 Vaccine


मेरे परिजनों और दोस्तों ने मुझे हौसला दिया और यह भी कहना चाहूंगा कि प्रोफ़ेसर डॉक्टर गोगटे और केईएम डीन डॉक्टर देशमुख जिस तरह के प्रयास कर रहे हैं इस वैक्सीन के निर्माण व ट्रायल में वो क़ाबिले तारीफ़ है.

आपने अपना ट्रायल पूरा कर लिया?

मुझे 2 शॉट्स वैक्सीन के लग चुके हैं और नियम के मुताबिक़ 28 दिनों के अंतराल पर इसे लगाया जाता है. दो ही बार इसे इंजेक्ट किया जाता है और उसके बाद 5 महीनों तक मॉनिटर किया जाता है कि हमें किसी तरह के कॉम्प्लिकेशन्स या साइडइफ़ेक्ट तो नहीं हो रहे.
यह ट्रायल 5 महीनों तक चलता रहेगा और अभी तक वॉलंटियर्स को वैक्सिनेशन का काम पूरा हुआ है.

COVID-19 Vaccine

अब तक तो मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और उम्मीद है कि यह वैक्सीन जल्द ही मानकों पर खरी उतरेगी और लोगों तक पहुंचेगी!

लेकिन तब तक सभी ध्यान रखें, सुरक्षित रहें, मास्क सही तरह से मुंह और नाक ढंककर पहनें, सोशल डिसटैंसिंग का पालन करें और स्वच्छता का पूरा ख़्याल रखें, सतर्क रहें!

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मेरी दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र 10 और 6 साल है. कृपया, बताएं कि उन्हें सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) का वैक्सीन लगवाना कितना ज़रूरी है?
 – मिताली तंवर, पंचकुला.

सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के अगेनस्ट सर्वाइकल कैंसर का वैक्सीन केवल 70% प्रोटेक्शन देता है. वैसे तो इस टीके को 10 से 45 साल तक किसी भी उम्र में लगवा सकती हैं, लेकिन किशोरावस्था में सर्वाइकल कैंसर का टीका लगवाना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि बढ़ती उम्र में यह वैक्सीन उतना प्रोटेक्शन नहीं देता, जितना कि किशोरावस्था में देता है. आप अपनी 10 वर्षीया बेटी को सर्वाइकल कैंसर का वैक्सीन लगवा सकती हैं. लेकिन 6 वर्षीया बेटी को तभी लगवाएं, जब वह 10 साल की हो जाए. यदि आप भी यह लगवाना चाहें और अगर आपकी उम्र 35 साल से अधिक है, तो डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही यह वैक्सीन लगवाएं. यदि आप इस वैक्सीन को नहीं लगवाना चाहती हैं तो इसकी जगह सर्वाइकल कैंसर के लिए की जानेवाली रेग्युलर स्क्रीनिंग के तौर पर पैप स्मीयर टेस्ट करवाएं.

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Vaccinating against Cervical Cancer

मैं 40 वर्ष की हूं. मेरी दोनों डिलीवरी सामान्य हुई थी. इन दिनों मुझे एक परेशानी हो रही है. जब भी मैं खांसती या छींकती हूं तो यूरिन लीकेज हो जाता है. इससे मुझे इतनी शर्मिंदगी होती है कि मैंने बाहर जाना कम कर दिया है. कृपया, सलाह दें कि मैं क्या करूं?
– रेवती अय्यर, चेन्नई.

आपको स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या है. जिन महिलाओं की डिलीवरी नॉर्मल होती है, उन्हें अक्सर ऐसा होता है. इसका कारण है डिलीवरी के दौरान पेल्विक मसल्स व टिशूज़ में खिंचाव. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ व सर्जिकल ट्रीटमेंट से इसका इलाज संभव है. नए इलाज, जैसे- ट्रांस वेजाइनल टेप व ट्रांस ऑब्टयूरेटर से 15 मिनट में इसका परमानेंट उपचार हो सकता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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