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महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन? (How To Prevent Urinary Tract Infection- UTI)

आज भी ज़्यादातर महिलाएं यूरिन इंफेक्शन के बारे में बात करने से कतराती हैं, लेकिन जब तकलीफ़ बढ़ जाती है, तो कई बार इसके ट्रीटमेंट के लिए उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट तक होना पड़ता है. यूरिन इंफेक्शन का इलाज बहुत आसान है, लेकिन समय पर इलाज न करने से समस्या जटिल हो सकती है, इसलिए इसके इलाज में देर बिल्कुल न करें.

Urinary Tract Infection

 

 

यदि किसी महिला को यूरिन इंफेक्शन हुआ है, तो ज़रूरी नहीं कि वो यूरिन संबंधी शिकायत ही करे. उसे पैरों में दर्द, कमर में दर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है. ऐसे में जब वो डॉक्टर के पास जाती है, तो कई बार डॉक्टर उसे कैल्शियम और विटामिन्स की दवाइयां देते हैं, वो उससे ये नहीं पूछते कि तुम्हारी यूरिन से बदबू तो नहीं आ रही है. ऐसे में जानकारी के अभाव में उसका सही इलाज नहीं हो पाता और समस्या जटिल हो जाती है. महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन कब, कैसे और क्यों होता है, बता रहे हैं कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड फिज़िशियन डॉ. अरुण शाह और डॉ. वसी शेख़.

Urinary Tract Infection

जानें यूटीआई (UTI) के रिस्क फैक्टर्स
* यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक ऐसा इंफेक्शन है, जो यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- किडनी, ब्लैडर, गर्भाशय आदि. लगभग 50% महिलाओं को जीवन में कभी-न-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता ही है, इसलिए महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन के कारण, बचाव और इसके सही इलाज के बारे में जानकारी होनी चाहिए.
* आमतौर पर यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है, लेकिन इसका इलाज यदि समय पर नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है.
* यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या तब और जटिल हो जाती है, जब इसके लक्षण असामान्य होते हैं, जैसे- कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि. ऐसी स्थिति में कई बार यूरिन इंफेक्शन का पता नहीं चल पाता और समस्या बढ़ जाती है.

यूटीआई (UTI) के कारण
आमतौर पर यूटीआई का प्रमुख कारण है बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग से मूत्राशय में प्रवेश करना. महिलाओं में यूटीआई के निम्न कारण हैं:
* पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मूत्रमार्ग की लंबाई छोटी होने के कारण उनमें यूटीआई का ख़तरा अधिक रहता है.
* सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं को यूटीआई होने की संभावना ज़्यादा होती है. सेक्स पार्टनर बदलने से भी यूटीआई होने की संभावना बढ़ जाती है.
* शुक्राणुनाशक क्रीम का उपयोग करने से यूटीआई हो सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कई महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन हो जाता है.
* जो लड़कियां पानी कम पीती हैं या पेशाब को रोककर रखती हैं, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
* जिन महिलाओं को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज़ है या जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं रहता, उनका ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.

यह भी पढ़ें: वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Home Remedies To Cure Vaginal Infection)

 

Urinary Tract Infection

यूटीआई (UTI) के लक्षण
जब तक यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक सीमित रहता है, तब यूटीआई के ये लक्षण दिखाई देते हैं:
* पेशाब करते समय जलन होना.
* योनि में खुजली होना और बदबू आना.
* बार-बार पेशाब जाना.
* पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना.
* पेशाब में खून आना.
* यूरिन इंफेक्शन के किडनी तक फैल जाने पर ठंड लगना और कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आना, पेटदर्द, थकान, बदनदर्द, मतली, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं.

यूटीआई (UTI) का इलाज
* यूटीआई का इलाज यूरिन और ब्लड टेस्ट के बाद ही किया जा सकता है. उसके बाद इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर इलाज करते हैं.
* महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, यूटीआई का इतिहास देखते हुए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं.
* यदि आपको हल्का बुख़ार है, आप खाने-पीने में सक्षम हैं, तो आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक्स का एक छोटा कोर्स भी पर्याप्त हो सकता है.
* असहनीय पेटदर्द, तेज़ बुख़ार, खाने-पीने में असमर्थता जैसी स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है.
* अच्छा महसूस करने पर भी इलाज बीच में न रोकें, वरना फिर से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* एंटीबायोटिक्स के अलावा बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने के लिए ख़ूब सारा पानी पीएं.

यह भी पढ़ें: वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से कैसे छुटकारा पाएं? (How To Get Rid Of Vaginal Yeast Infection)

Urinary Tract Infection
यूटीआई (UTI) से बचाव
जिन महिलाओं को बार-बार यूटीआई की तकलीफ़ होती है, उन्हें इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
* ख़ूब पानी पीएं.
* लंबे समय तक पेशाब न रोकें.
* प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें.
* शौच के समय जननांग की सफ़ाई आगे से पीछे की तरफ़ करें. ऐसा करने से मलद्वार की गंदगी योनि तक नहीं पहुंचती और संक्रमण की संभावना कम रहती है.
* यदि आपको कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो समय-समय पर पेट साफ़ करने की दवा लेते रहें.
* सेक्स से पहले और सेक्स के बाद पेशाब के समय जननांग साफ़ करें.
* सेक्स के समय शुक्राणुनाशक क्रीम के प्रयोग से बचें.
* जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो गया है, उन्हें वेजाइनल एस्ट्रोजन से फ़ायदा हो सकता है.
* यदि आपको बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाता है, तो एहतियात के तौर पर आप डॉक्टर की बताई हुई एंटीबायोटिक्स ले सकती हैं.

महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन, जानने के लिए देखें वीडियो:

महिलाओं में उम्र के अनुसार यूरिन इंफेक्शन
महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन कभी भी हो सकता है, लेकिन हर उम्र में इसके कारण और संकेत अलग-अलग होते हैं.
* पांच साल तक की बच्ची यदि पेशाब रोककर रखती है, तो उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में यदि वो बिना सर्दी-ज़ुकाम के बार-बार बीमार पड़ती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.
* पांच से दस साल की लड़की की पैंटी के रंग में यदि बदलाव नज़र आए, यदि उसकी टीचर शिकायत करे कि वो बार-बार पेशाब जाती है, वो रात में बार-बार पेशाब जाने के लिए उठती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं. ऐसे में उस लड़की को बुख़ार हो, ये ज़रूरी नहीं.
* प्यूबर्टी पीरियड में जब लड़की को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो हाइजीन के अभाव में उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. इस समय यूरिन इंफेक्शन के संकेत होते हैं- व्हाइट डिस्चार्ज, खुजली, पैंटी और वेजाइनल एरिया से बदबू आना.
* शादीशुदा महिलाओं में शादी के छह महीने से लेकर एक साल तक यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, इसे हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं. इस समय तक महिला के शरीर को बाहरी ऑर्गन की आदत नहीं होती, इसलिए सेक्स के दौरान उनका ब्लड फ्लो बढ़ सकता है. हाइजीन के अभाव में भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद हाइजीन के अभाव में अक्सर महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन हो जाता है. प्रेग्नेंसी के समय यूरिन इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के अभाव में महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है. इस समय कई महिलाओं को डायबिटीज़ हो जाता है, जिसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* जिन महिलाओं को डायबिटीज़ या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा होती है.

डॉक्टर से न छुपाएं सेक्स की बात
सेक्सुअली एक्टिव अविवाहित लड़कियों को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है. ऐसे में जब लड़कियां यूरिन इंफेक्शन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाती हैं और सेक्स की बात छुपाती हैं, तो उनका सही इलाज नहीं हो पाता और उनकी हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है. अत: जो लड़कियां सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें डॉक्टर से ये बात नहीं छुपानी चाहिए और अपना सही उपचार कराना चाहिए.
– कमला बडोनी

क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) से बचने के 10 घरेलू उपाय (10 Best Home Remedies To Cure White Discharge In Women)

व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) (श्‍वेत प्रदर) से बचने के 10 घरेलू उपाय (Home Remedies) आज़माकर आप आसानी से व्हाइट डिस्चार्ज से छुटकारा पा सकती हैं. व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) महिलाओं (Women) की एक आम समस्या (Common Problem) है. हर महिला को कभी न कभी व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या हो ही जाती है, ऐसे में व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) से बचने के 10 घरेलू उपाय आपके बहुत काम आएंगे.

Home Remedies To Cure White Discharge

व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या मानसिक भी हो सकती है
क्या आप जानती हैं कि महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या पति-पत्नी में आपसी मतभेद या तनाव के कारण भी हो सकती है? जी हां, यदि आपके अपने पार्टनर से रिश्ते मधुर नहीं हैं, तो इसके कारण भी आपको व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या हो सकती है. व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या के क्या कारण होते हैं और इससे कैसे छुटकारा पाया जाए, बता रही हैं साइकोलॉजिस्ट और वुमन हेल्थ काउंसलर नम्रता जैन.

व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) के कारण और उससे बचने के उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) से बचने के 10 घरेलू उपाय:
1) रोज़ाना दो-तीन केला खाने से श्‍वेतप्रदर की समस्या दूर होती है.
2) 3 ग्राम आंवले का पाउडर शहद के साथ दिन में तीन बार चाटने से लाभ होता है.
3) गूलर का फूल पीसकर और उसमें मिश्री व शहद मिलाकर दो-तीन बार सेवन करने से फ़ायदा मिलता है.
4) स़फेद मूसली पाउडर या ईसबगोल को सुबह- शाम शर्बत के साथ पीने से आराम मिलता है.
5) हरे आंवले को पीस कर उसे जौ के आटे में मिलाकर उसकी रोटी एक महीने तक खाने से श्‍वेतप्रदर से आराम मिलता है.

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6) टमाटर का रोज़ाना सेवन करने से भी फ़ायदा मिलता है.
7) फालसे का शर्बत पीने से श्‍वेत प्रदर में आराम मिलता है.
8) मुलहठी 10 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम, जीरा 5 ग्राम, अशोक की छाल 10 ग्राम- इन सभी का चूर्ण बनाकर रख लें. इसमें 3 से 4 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार खाएं.
9) कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लें. उसमें समान मात्रा में गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार कुछ दिन तक लेने से आराम मिलता है.
10) सिंघाड़ा, गोखरू, बड़ी इलायची, बबूल की गोंद, शक्कर, सेमल की गोंद समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम लें.

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वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से कैसे छुटकारा पाएं? (How To Get Rid Of Vaginal Yeast Infection)

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) (Vaginal Infections) महिलाओं को कभी न कभी हो ही जाता है और इससे उन्हें कई परेशानियां होती हैं, जैसे- योनि में दर्द (Pain In Vagina), खुजली, सूजन… और इसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर भी पढ़ता है. कई महिलाओं को बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, जिसके कारण वो चिड़चिड़ी हो जाती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में भी परेशानियां आने लगती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि इलाज के बावजूद बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है.

Vaginal Yeast Infection

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कई कारण हो सकते हैं, मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होना, स्ट्रेस, पति से मनमुटाव, हाइजीन का ध्यान का रखना, डायट सही न होना. यदि आपको भी बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, तो इसके लिए आपको क्या करना चाहिए? किस तरह की लाइफ स्टाइल से वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से बचा जा सकता है? मानसिक स्वास्थ्य का वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) पर कितना असर होता है? वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) होने पर आपको और आपके पति को क्या करना चाहिए? ऐसे तमाम सवालों के जवाब दे रही हैं साइकोलॉजिस्ट एंड वुमन हेल्थ काउंसलर नम्रता जैन.

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वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कारण और उपचार जानने के लिए देखें वीडियो:

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Home Remedies To Cure Vaginal Infection)

वजाइनल इंफेक्शन (योनि में संक्रमण) से राहत पाने के घरेलू उपाय आपको जल्दी ही वजाइनल इंफेक्शन से राहत दिलाएंगे. वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) महिलाओं को होने वाली एक आम समस्या है, इसके बारे में महिलाएं जल्दी खुलकर बात भी नहीं करतीं. ऐसे में वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के घरेलू उपाय आपके बहुत काम आएंगे.

Cure Vaginal Infection

 

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के आसान और उपयोगी घरेलू उपाय:
* धनिया का 5-10 ग्राम चूर्ण रात को भिगोकर रख दें. सुबह इसे छानकर पीएं.
* खट्टी-मीठी चीज़ें, तेल-मिर्च, ज़्यादा मसालेदार चीज़ों से परहेज़ करें.
* गुप्तांगों को नियमित साफ़ करें.
* ख़ून की कमी को पूरा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें.
* बंदगोभी, पालक, टमाटर, सिंघाड़ा, गूलर आदि फलों का नियमित सेवन करें.

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वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है? (Vaginal Discharge: Causes, Symptoms & Diagnosis?)

पर्सनल प्रॉब्लम्स: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?
मैं 38 वर्षीया स्वस्थ महिला हूं. रोज़ाना संतुलित आहार लेती हूं और हाइजीन का भी पूरा ख़्याल रखती हूं, फिर भी वेजाइनल डिस्चार्ज की समस्या से जूझ रही हूं. इसका क्या कारण हो सकता है? क्या मुझे डॉक्टर से मिलना चाहिए?
– गायत्री चावला, सागर.

वेजाइनल डिस्चार्ज के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- बैक्टीरियल वजिनोसिस, कैंडीडा इंफेक्शन, ट्रिकोमोनस इंफेक्शन आदि. अगर आप डायबिटीज़ और अस्थमा के कारण लंबे समय से स्टेरॉइड थेरेपी पर हैं या फिर लंबे समय से एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रही हैं, तो आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है. जैसा कि आपने बताया कि आप हाइजीन का ख़्याल रखती हैं, तो भी गर्मियों में आपको ज़्यादा अलर्ट रहने की ज़रूरत है, क्योंकि गर्मियों में उमस और पसीने के कारण वेजाइनल इंफेक्शन की संभावना और भी बढ़ जाती है. इसलिए वेजाइना को साफ़ व सूखा रखने की कोशिश करें.

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?
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मैं 40 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि मेरे लिए इस उम्र में कौन-से टेस्ट्स करवाने ज़रूरी हैं?
– पल्लवी राणा, इंदौर.

किसी भी हेल्थ प्रोफेशनल से आप अपना जनरल चेकअप करवा सकती हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, चेस्ट व हार्ट की जांच के अलावा सिर से पैर तक की जांच की जाती है. इसके साथ ही पैप स्मियर टेस्ट व पेल्विक की जांच भी ज़रूर करवाएं. अगर कुछ डिटेक्ट हुआ, तो आपको सोनोग्राफी भी करानी पड़ सकती है. इसके अलावा साल में एक बार बेसिक एक्ज़ामिनेशन, जैसे ब्लड टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, लिवर और किडनी प्रोफाइल, चेस्ट एक्स-रे और ईसीजी ज़रूर करवाएं. अगर आप फिट और हेल्दी हैं, फिर भी हर साल आंख और दांत की जांच ज़रूर करवाएं.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: बार-बार वेजाइनल इंफेक्शन क्यों होता है? (Personal Problems: what to do for recurrent vaginal infection ?)

irregular periods during exams
मैं 43 वर्षीया महिला हूं. मैं  बार-बार होनेवाले वेजाइनल इंफेक्शन (Vaginal infection) से परेशान हूं. एक साल पहले डॉक्टर ने मुझे एक वेजाइनल टैबलेट दी थी, जब उसका इस्तेमाल करती हूं, तो ठीक हो जाता है, पर कुछ दिनों बाद वापस से डिस्चार्ज और खुजली शुरू हो जाती है. साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी हो जाता है. कृपया, बताएं कि इन टैबलेट्स का इस्तेमाल मैं कितने दिनों में कर सकती हूं?
– रुचिका मल्होत्रा, जयपुर.
जैसा कि आपने बताया आप काफ़ी समय से इस समस्या से परेशान हैं, ऐसे में सबसे पहले आपको अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करवा लेना चाहिए, क्योंकि आपके बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और वेजाइनल इंफेक्शन (vaginal infection) के पीछे कोई और कारण हो सकता है. इसलिए टैबलेट लेने की बजाय पहले अपना टेस्ट करवाएं.

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 vaginal infection
मैं 16 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मुझे बहुत ज़्यादा वेजाइनल डिस्चार्ज होता है. कई बार तो व्हाइट ड्रेस पहनना मेरे लिए मुसीबत बन जाता है. मेरी एक सहेली ने गायनाकोलॉजिस्ट से मिलने की सलाह दी है, पर मुझे डॉक्टर से मिलने में झिझक हो रही है. कृपया, मेरी मदद करें.
– कारुण्या महाजन, पुणे.
लड़कियों में वेजाइनल डिस्चार्ज होना सामान्य बात है, पर मेंस्ट्रुअल साइकल के मुताबिक़ हर महिला का वेजाइनल डिस्चार्ज भी अलग-अलग होता है. अगर डिस्चार्ज के कारण खुजली, जलन या बदबू नहीं आ रही है, तो डरने की कोई बात नहीं है. कॉटन अंडरगार्मेंट्स पहनें. बहुत ज़्यादा सेंटेड सोप इस्तेमाल न करें. प्राइवेट पार्ट को अच्छी तरह क्लीन करें और सूखा रखने की कोशिश करें. अगर फिर भी आपकी समस्या कम नहीं होती, तो आपको डॉक्टर से मिलना ही होगा.

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व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या के 5 आसान घरेलू उपाय- देखें वीडियो: 

 

ज़रूरी नहीं आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो!

वेजाइनल इंफेक्शन को लेकर महिलाओें में काफ़ी भ्रांतियां हैं. अगर आपको सामान्य से थोड़ा ज़्यादा डिस्चार्ज हो रहा है, तो ज़रूरी नहीं कि वो इंफेक्शन हो. पीरियड्स के क़रीब 10-15 दिनों बाद एग व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जो कुछ दिनों में बदलकर गाढ़ा हो जाता है. अगर आपको फंगल इंफेक्शन होगा, तो वह गाढ़ा होगा और साथ में खुजली भी होगी. हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें और बहुत ज़्यादा सोप के इस्तेमाल से बचें. वेजाइना को क्लीन करने के लिए माइल्ड सोप या इंटीमेट सोप का इस्तेमाल करें. अगर आपको डायबिटीज़ है और आप गर्भनिरोधक गोलियां ले रही हैं, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है. ब्लड शुगर कंट्रोल में रखें, इससे बार-बार इंफेक्शन भी नहीं होगा. हमेशा कॉटन अंडरगार्मेंट्स ही पहनें.
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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

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