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दीपावली में विंड चाइम से लाएं घर में सौभाग्य (Wind Chime For Diwali Decoration)

Wind Chime

दीपावली में विंड चाइम से लाएं घर में सौभाग्य (Wind Chime For Diwali Decoration)

दीपावली (Diwali) में घर की सजावट का सामान ख़रीदते समय अपनी शॉपिंग लिस्ट में विंड चाइम (Wind Chime) को ज़रूर शामिल करें. विंड चाइम से घर की ख़ूबसूरती निखरती है और घर में सौभाग्य भी आता है. हां, विंड चाइम ख़रीदते समय कुछ बातों का ध्यान दीपावली में घर की सजावट का सामान ख़रीदते समय अपनी शॉपिंग लिस्ट में विंड चाइम को ज़रूर शामिल करें. विंड चाइम से घर की ख़ूबसूरती निखरती है और घर में सौभाग्य भी आता है. हां, विंड चाइम ख़रीदते समय कुछ बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

* मार्केट में कई तरह की भारी, हल्की, बड़ी, छोटी और रंगीन विंड चाइम्स (पवन घंटियां) उपलब्ध हैं, लेकिन आप जब विंड चाइम चुनें, तो खोखली व पतली नलीवाली विंड चाइम ही चुनें. ये हवा में आसानी से लहराकर मधुर आवाज़ करती हैं. यदि आप घर में 6 या 7 रॉडवाली विंड चाइम लगाएंगे, तो इससे घर में संपन्नता आती है.

* धातु से बनी विंड चाइम हमेशा पश्‍चिम या उत्तर-पश्‍चिम दिशा में लगाएं. ये दिशाएं धातुओं की होती हैं, इसलिए इन दिशाओं में विंड चाइम लगाने से भाग्योदय होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

* आप चाहें तो लकड़ी की बनी विंड चाइम भी ख़रीद सकते हैं. लकड़ी, ख़ासतौर से बांस से बनी विंड चाइम्स ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ घर-गृहस्थी के मामले में शुभ मानी जाती हैं. इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है. लकड़ी या बांस की बनी विंड चाइम में भी रॉड की संख्या बहुत मायने रखती है. इसमें रॉड की संख्या तीन या चार हो तो विंड चाइम शुभ फल प्रदान करती है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और हर कार्य निर्बाध रूप से पूरा होता है.

* कांच की बनी विंड चाइम भी घर की शोभा बढ़ा सकती है, लेकिन यह अगर भारी हुई तो मधुर आवाज़ पैदा नहीं करेगी.

* घर में पांच नलियों या पांच घंटियोंवाली विंड चाइम लगाना हर तरह से शुभ माना जाता है. इससे नकारात्मकता समाप्त होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा अलग-अलग उद्देश्यों के लिए 4, 7, 9, 11 नलियोंवाली विंड चाइम्स भी घर के लिए शुभ मानी जाती हैं.

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* अगर आप अपना सोया हुआ भाग्य जगाना चाहते हैं, तो 6 या 8 रॉडवाली विंड चाइम घर में लगाएं. ये आपके भाग्योदय की बाधाओं को दूर करेगी और आपकी सोई हुई किस्मत को जगा देगी. फेंशगुई और वास्तु में इनका काफ़ी महत्व है.

* अगर आप 2 या 9 घंटियों या नलियों वाली विंड चाइम लगाना पसंद करते हैं, तो सिरामिक की बनी विंड चाइम लेकर आएं. ये विंड चाइम मान-प्रतिष्ठा और यश प्रदान करती है. इसे घर की दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में लगाना शुभ होता है.

* आपसी रिश्तों की परेशानियों को हल करने के लिए भी विंड चाइम आपके लिए सहायक साबित हो सकती है.

* अपने बच्चों को सकारात्मक और क्रिएटिव बनाने के लिए उनके कमरे में भी विंड चाइम ज़रूर लगाएं. इसकी मधुर आवाज़ माहौल को ख़ुशनुमा बनाए रखती है.

* अगर आप अपना सामाजिक दायरा बढ़ाना चाहते हैं, तो सिल्वर कलर की विंड चाइम को घर की पश्‍चिम दिशा में लगाएं. इसमें अगर 7 रॉड लगे हों, तो यह काफ़ी लाभ प्रदान करेगी.

* नाम और पैसे की चाहत हो, तो घर की  उत्तर-पश्‍चिम दिशा में पीले रंग की 6 रॉड वाली विंड चाइम लगाएं.

* आप चाहें तो अलग-अलग कलरवाली रंग-बिरंगी विंड चाइम भी लगा सकते हैं. ये आपके घर का माहौल ख़ुशनुमा बनाए रखेगी और सकारात्मकता के साथ-साथ उत्साह का भी संचार करेगी.

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वास्तु के अनुसार कलर स्कीम सिलेक्शन(Colour Scheme Selection as per Vastu Shashtra)

आपके जीवन में हमेशा ख़ुशियां शामिल हों… सुख-संपत्ति और स्वास्थ्य प्राप्त हो, इसके लिए ज़रूरी है घर को वास्तु शास्त्र से सजाना… कलर स्कीम वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार तय करना.

 

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– आसमानी रंग का इस्तेमाल मकान के उत्तर दिशा में करना चाहिए.
– लाल रंग का इस्तेमाल घर के दक्षिणी या दक्षिण-पूर्वी हिस्से में करें.

 

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– अगर इस हिस्से में अगर बेडरूम हो तो वहां लाइट पिंक रंग लगाएं.
– हरे रंग का प्रयोग घर के उत्तर में करना चाहिए. इससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा.

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– पीले रंग का इस्तेमाल घर के पूर्वोत्तर में स्थित किसी भी कमरे में किया जा सकता है.

 

– अगर इस दिशा में स्टडी रूम, लाइब्रेरी या बच्चों का कमरा हो तो डार्क पीले की जगह हल्के पीले रंग का इस्तेमाल करें.
– छोटे बच्चों, लड़कियों और नवविवाहित जोड़ों के कमरे में हल्के बैंगनी रंग का इस्तेमाल करें.
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ध्यान रखें-

 

– दक्षिण पूर्व में कभी हल्के या गहरे ब्लू रंग का इस्तेमाल न करें.
– पूर्वोत्तर या उत्तर दिशा में कभी लाल या ऑरेंज रंगों का इस्तेमाल न करें.
– एक ही बेडरूम की चारों दीवारों पर अलग-अलग कलर न करें. इससे रिश्तोें में तनाव आता है.
– मकान के बाहरी दीवारों पर ग्रे, ब्राउन या काले रंग का इस्तेमाल कभी न करें.
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45 फेंगशुई टिप्स से लाएं घर में सुख-समृद्धि (45 fengshui tips for happiness)

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यदि आपके जीवन में बार-बार परेशानियां और रुकावटें आती रहती हैं, तो आप फेंगशुई शास्त्र की मदद से इसमें काफ़ी हद तक परिवर्तन ला सकते हैं यानी दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं और परेशानियों से भी निज़ात पा सकते हैं. इसी के बारे में संक्षेप में बता रहे हैं वास्तुशास्त्री डॉ. प्रेम गुप्ता. आइए, सौभाग्य से जुड़े फेंगशुई टिप्स के बारे में जानें.

फेंगशुई द्वारा बताए गए विभिन्न उपायों को अपनाकर सौभाग्य की प्राप्ति की जा सकती है. फेंगशुुई के अनुसार, जब हवा से विंड चाइम्स बजती है, तो इसकी आवाज़ से घर में सुख-समृद्धि आती है और अनेक वास्तु दोष दूर हो जाते हैं. फेंगशुई में विंड चाइम, क्रिस्टल, ड्रैगन, लाफिंग बुद्धा, प्लास्टिक के फूल, कछुआ, जहाज़, सिक्कों आदि का बहुत महत्व है. इन्हें अपने घर या ऑफिस में किसी निर्धारित दिशा में रखकर जहां आप अपने घर-परिवार और नौकरी में सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं, वहीं शांति-सुकून भी पा सकते हैं. आइए, फेंगशुई से जुड़े विभिन्न उपयोगी टिप्स के बारे में जानें.

* शुभ व सौभाग्य प्राप्ति के लिए ड्रॉइंगरूम के प्रवेश द्वार के कोने पर दाईं तरफ़ 6 छड़वाली विंड चाइम्स लटकाना लाभदायक होता है. दरअसल, छह छड़ोंवाली विंड चाइम्स को ड्रॉइंगरूम में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है और पूरे घर में फैलती है. 

* ग्रीनरी फेंगशुई के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती है. इनडोर पौधे घर में ख़ुशियां लाते हैं और घर के हर कोने को उत्साह और उमंग से सराबोर कर देते हैं. फेंगशुई में पौधों को नौ आधारभूत सुरक्षा सावधानियों में से एक माना गया है, इसलिए घर के खाली हिस्सों में पौधे लगा देने चाहिए.

* घर के दक्षिण-पूर्व कोने को धन व समृद्धि का कोना माना जाता है, इसलिए यहां चौड़े पत्तियोंवाले पौधे लगाएं.

* यदि परिवारिक सदस्यों को बार-बार परेशानी व निराशा का सामना करना पड़ता है, तो ड्रॉइंगरूम में नौ छड़ोंवाली विंड चाइम्स लगाएं. इससे सभी को  लाभ होगा.

* चढ़नेवाली बेलें, जिन्हें क्लाइम्बर्स कहा जाता है, जैसे- मनी प्लांट को कोने में लगाकर उस जगह की उदासीनता को कम
कर सकते हैं.

* लाफिंग बुद्धा, जो फेंगशुई में बहुत शुभ माना जाता है, उसे ड्रॉइंगरूम में ठीक सामने की ओर रखें, ताकि घर में प्रवेश करते ही आपकी नज़र सबसे  पहले उस पर पड़े.

* फेंगशुई के अनुसार, पुराना कबाड़ा व बेकार पड़ी चीज़ें परिवार में लड़ाई-झगड़े, मतभेद उत्पन्न करती हैं, इसलिए विशेषकर कपल्स अपने पलंग के  नीचे से पुराना कबाड़ तुरंत निकालकर बाहर फेंक दें, क्योंकि फेंगशुई के अनुसार, इससे पति-पत्नी के बीच मतभेद पैदा होते हैं.

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* गोलाकार डाइनिंग टेबल फेंगशुई में शुभ मानी जाती है, परंतु ध्यान रखें कि टेबल के साथ लगी कुर्सियों की संख्या सम हो.

* भोजन करते समय टीवी देखना हमारे सेहत की दृष्टि से भी नुक़सानदेह होता है, इसलिए टीवी को डाइनिंग रूम में न रखें.

* घर के दरवाज़े के हैंडल में सिक्के लटकाना घर में धन-संपत्ति और सौभाग्य लाने का बेहतरीन उपाय है.

* तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे या रिबन में बांधकर दरवाज़े के हैंडल में लटका दें. इससे घर के सभी लोगों को लाभ मिलता है. हां, ये  सिक्के दरवाज़े के अंदर की ओर लटकाएं, न कि बाहर की ओर.

* एक बात और घर के सभी दरवाज़ों के हैंडल में सिक्के न लटकाएं, स़िर्फ मुख्यद्वार के हैंडल में ही सिक्के लटकाएं.

* इसके अलावा दरवाज़े के बाहरवाले हैंडल में छोटी-सी घंटी भी लटका सकते हैं.

* सिक्के घर में धन आने के प्रतीक हैं, पिछले दरवाज़े पर आपको एक भी सिक्का नहीं लटकाना है, क्योंकि पिछला दरवाज़ा इस बात का सूचक है कि इस मार्ग से होकर आपका कुछ न कुछ बाहर चला जाता है.

* फेंगशुई में फिश क़ामयाबी का प्रतीक है. फेंगशुई के अनुसार, घर में फिश एक्वेरियम रखने से सुख-समृद्धि आती है. घर में एक छोटे से फिश

* एक्वेरियम में गोल्ड फिश रखना सौभाग्यवर्द्धक होता है.

* उत्तर-पूर्व क्षेत्र धन संपदा व समृद्धि दायक क्षेत्र है. यह जल तत्व का प्रतीक है. इस क्षेत्र में एक्केरियम रखना शुभ रहता है.

* ध्यान रहे कि एक्वेरियम में 8 फिश गोल्डन और 1 ब्लैक कलर की हो. यदि कोई गोल्डन फिश मर जाए, तो माना जाता है कि घर पर आई कोई मुसीबत वह अपने साथ ले गई यानी गोल्डन फिश का मरना अपशगुन नहीं होता.

* अपने ऑफिस में पूर्व दिशा में लकड़ी से बनी ड्रैगन रखें. इससे एनर्जी लेवल बढ़ता है और उमंग-उत्साह बना रहता है.

* फेंगशुई के अनुसार, क्रिस्टल-ट्री का उपयोग घर में सुख-समृद्धि, प्रतिष्ठा व शांति के लिए किया जाता है.

* फेंगशुई स्टोन ट्री सुनने में भले ही काल्पनिक लगे, किन्तु वास्तविकता यही है कि चीनी पद्धति मेंं इस पौधे का अधिक महत्व है. यह पौधा तरह-तरह  के रत्नों व स्फटिकों का बना होता है. इसकी कई वेरायटीज़ होती हैं. रंग-बिरंगे रत्नों से सजे इस पौधे को यदि घर के उत्तर-पश्‍चिम एरिया में रखें, तो निश्‍चित रूप से घर में सौभाग्य में वृद्धि होती है.

* नवरत्न पेड़ नवग्रहों की शांति, सुख व पारिवारिक शांति के लिए इस्तेमाल करते हैं.

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* वैसे इसे घर में दक्षिण-पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है. इसे व्यावसायिक स्थल पर रखने से संपदा मिलती है. इसे बैठक में भी रखा जा सकता है.  इसका एक और महत्वपूर्ण कार्य नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना भी है.

* यदि घर में निगेटिव एनर्जी फैली हुई है, तो ऐसी स्थिति में चीनी बैंबू ट्री का इस्तेमाल करें. बैंबू का पेड़ घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में बढ़ोतरी  करता है.

* फेंगशुई के अनुसार, कछुए को घर में रखना क़ामयाबी और सेहत के लिए लाभदायक है.

* पानी से भरे एक कटोरे में धातु का बना फेंगशुई कछुआ रखकर इस कटोरे को उत्तर दिशा में रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती है.

* तीन टांगोंवाले मेंढ़क को भी फेंगशुई में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है.

* फेंगशुई में ड्रैगन को बहुत सम्मान दिया जाता है और इसे शुभ मानते हैं. ड्रैगन येंग यानी पुरुषत्व, हिम्मत और बहादुरी का प्रतीक है. यह
ड्रैगन लकड़ी, सिरेमिक व धातु में उपलब्ध है. कई पीढ़ियों से ड्रैगन शक्ति, अच्छे भाग्य व सम्मान का प्रतीक है. ड्रैगन एक क़ीमती कास्मिक ची बनाता है, जिसे शेंग ची भी कहते हैं, जिससे घर-ऑफिस में भाग्य साथ देता है.

* डबल ड्रैगन को यूं तो किसी भी दिशा में रखा जा सकता है, लेकिन इसे पूर्व दिशा में रखना सबसे ज़्यादा लाभदायक है.

* दो ड्रैगन का जोड़ा समृद्धि का प्रतीक है. इनके पैर के पंजों में ज़्यादा मोती सबसे अधिक एनर्जी संजोए हैं.

* लकड़ी का ड्रैगन दक्षिण-पूर्व या पूर्व में, सिरेमिक, क्रिस्टल के ड्रैगन को दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्‍चिम में रखें.

* यदि घर का मुख्यद्वार उत्तर, उत्तर-पश्‍चिम या पश्‍चिम में हो, तो उसके ऊपर बाहर की तरफ़ घोड़े की नाल लगा देनी चाहिए. इससे सुरक्षा एवं  सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

* फेंगशुई के अनुसार, घर के पूर्वोत्तर कोण में तालाब या फव्वारा शुभ होता है, लेकिन इसके पानी का बहाव घर की ओर होना चाहिए, न कि बाहर की ओर.

* घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए पूर्व दिशा में मिट्टी के एक छोटे-से पात्र में नमक भरकर रखें और हर चौबीस घंटे के बाद नमक बदल दें.

* बाथरूम में रखी बाल्टी हमेशा पानी से भरी रहे, इस बात का ख़ास ख़्याल रखें. यह उपाय आपके जीवन में ख़ुशियां के स्थायित्व को बनाए रखने में मददगार होगा. बाथरूम डेकोर के लिए आप प्राकृतिक या पानी के दृश्यों को दर्शाती सीनरी लगा सकते हैं. कहते हैं, इससे पानी की कमी जैसी समस्याएं परेशान नहीं करतीं.

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* बाथरूम में साबूत नमक या फिटकरी से भरा एक कटोरा रखें. हर महीने इस कटोरे के नमक को बदलती रहें. कहते हैं, हवा में मौजूद नमी के साथ-  साथ यह नमक आसपास की नकारात्मक ऊर्जाओं को भी अपने अंदर समाहित कर लेता है.

* यदि आपको लगता है कि आपकी आय के सारे स्त्रोत बंद हो गए हैं, तो आप तीन रंगोंवाले फेंगशुई मेंढ़क (जिसके मुंह में सिक्के लगे हों) को अपने घर में इस प्रकार रखें कि मेंढ़क की पूरी दृष्टि आपके घर की ओर हो. ऐसा करने से आपकी भाग्य वृद्धि और आय बढ़ेगी.

* यदि आपका भाग्य आपसे रूठ गया हो, तो मकान या बिज़नेसवाली जगह के मुख्यद्वार पर चीनी फेंगशुई की विंड चाइम्स और चीनी सिक्के लगाएं.
इन बातों पर भी ध्यान दें.

* मुरझाए हुए या सूख गए पौधों को तुरंत हटा देना चाहिए. इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है.

* घर के सामनेवाले हिस्से में कांटेदार या नुकीले पत्तोंवाले पौधे न लगाएं. ये नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं.

* घर या ऑफिस में झाड़ू का इस्तेमाल न हो रहा हो, तो उसे नज़रों के सामने से हटाकर रखें.

* बाथरूम के दरवाज़े के ठीक सामने आईना न लगाएं, क्योंकि स्नान करने जाते समय हमारे साथ-साथ कुछ निगेटिव एनर्जी भी बाथरूम में प्रवेश कर जाती है.

* घर में जो घड़ियां बंद पड़ी होंं, उन्हें या तो घर से हटा दें या चालू करें. बंद घड़ियां हानिकारक होती हैं. इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है.

* कमरों में पूरे फर्श को घेरते हुए कालीन आदि बिछाने से लाभदायक ऊर्जा का प्रवाह रुकता है.

* फेंगशुई के तहत ईशान कोण पर बाथरूम बनाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है. वैसे, घर के बाथरूम के लिए उत्तम दिशाएं दक्षिण, पश्‍चिम और  पूर्व मानी गई हैं.

वास्तु और फेंगशुई के जानकारी से भरपूर आर्टिकल्स के लिए यहां क्लिक करें: Vastu and Fengshui

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14 आसान वास्तु टिप्स से ख़ुशहाल बनाएं बेटी का वैवाहिक जीवन (14 easy vastu tips for daughter’s happy married life)

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क्या कभी आपने सोचा है कि वास्तु दोष से भी वैवाहिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं? मगर ये सच है, तो आइए जानते हैं वास्तु की सहायता से कैसे करें इन अड़चनों को दूर?

* वास्तु नियमों के अनुसार वायव्य कोण वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका गुणधर्म तत्काल या यथाशीघ्र एक स्थान से हटकर दूसरे स्थान  में चले जाना है.

* वास्तु नियमों के अनुसार दिशा, स्वामी और ग्रह देवता की उपयोगिता की दृष्टि से अगर हम अपने घर का उपयोग करें, तो गृहस्वामी सहित उसके  माता-पिता और बेटे-बेटियां अपने जीवन में सही समय पर सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं.

* यदि आपके घर का वास्तु सही है, तो आपकी बेटी बिना असमंजस के सही निर्णय ले सकेगी. उसकी शादी भी समय पर अच्छी तरह से हो सकती है.

* कई बार प्रेम-विवाह के मामलेे मेेें लड़कियां ग़लत निर्णय ले लेती हैं और बाद में सिवाए पछतावे के कुछ हाथ नहीं आता. अतः बेटी की बेहतर निर्णय  क्षमता के लिए बेटी का कमरा माता-पिता के कमरे के पूर्व की दिशा में रखना चाहिए.

* जहां तक संभव हो, बेटी को उसके अपने कमरे में सोने दें. यही नहीं उसकी पढ़ने की दिशा भी पूर्व दिशा होनी चाहिए. इसके अलावा उसके कमरे में  रचनात्मक, सुंदर और आकर्षक पेंटिंग लगी होनी चाहिए, जिन्हें देखकर उसमें आत्मविश्‍वास की भावना पनपे.

* कमरे में गहरे या भड़काऊ पर्दे न हों. पर्याप्त रोशनी हो. जहां तक हो, लाल रंग का प्रयोग कम-से-कम करें. यदि संभव हो, तो पीले रंग का प्रयोग करें.

* कुछ घरों में देखा जाता है कि कमरे को खोलने से लेकर शयनकक्ष तक जाने में कहीं सोफे में पैर अटकता है तो कहीं-कहीं दरवाज़ा खोलने में  आलमारी रुकावट बनती है. यह ठीक नहीं, बल्कि घर की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सुगम हो, आपका हर क़दम सुगमता से पड़े, इससे आपकी  मानसिकता प्रभावित होती है.

* वास्तु संतुलन का इसलिए भी विशेष महत्व है कि माता-पिता के व्यवस्थित रहने और उनके घर का वास्तु सही रहने का प्रभाव बेटी की शादी और  उसके सुखी जीवन पर भी पड़ता है. बेटी के घर मेेें कितना भी वैभव हो, अगर बेटी के माता-पिता परेशान हैं, उनका वास्तु ग़लत है, तो बेटी के दांपत्य  पर उसका प्रभाव पड़ेगा.

* शोधों से यह प्रमाणित हुआ है कि जिस घर में माता-पिता परेशान थे या जिनके घर का वास्तु असंतुलित था, उन बेटियों का दांपत्य जीवन भी  मुश्किल दौर से गुज़रता है, इसलिए अपने घर के वास्तु संतुलन पर पूरा ध्यान दें.

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वास्तु के अनुसार वैवाहिक स्थल

* ध्यान दें कि वैवाहिक स्थल का मुख्य प्रवेशद्वार पूर्व ईशान, दक्षिण आग्नेय, पश्‍चिम वायव्य या उत्तर ईशान में
होना चाहिए.

* वैवाहिक परिसर में जनरेटर, विद्युत मीटर, अन्य विद्युत उपकरण इत्यादि की व्यवस्था आग्नेय कोण में करनी चाहिए.

* दूल्हा-दुलहन के बैठने एवं आर्केस्ट्रा के लिए स्टेज की व्यवस्था दक्षिण से पश्‍चिम मध्य के बीच वास्तु सिद्धांत के अनुसार हो, जहां दूूल्हा-दुलहन पूर्व  या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ सकें.

* विवाह का अग्नि कुंड रिसेप्शन एरिया के आग्नेय कोण में रखना चाहिए. रसोई बनाने का स्थान एवं तंदूर भी रसोेई परिसर के आग्नेय कोण में ही  रखें.

* भोजन की व्यवस्था उत्तर या पश्‍चिम में रखनी चाहिए. खाने-पीने के स्टॉल का क्रम क्लॉक वाइज ही रखें.
सलाद एवं प्लेट्स रखने का स्टॉल समारोह क मध्य में नहीं रखें. परिसर व गार्डन के मध्य का ब्रह्म स्थान खाली रहना चाहिए.

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वास्तु अलर्ट (Vastu Alert)

घर की सुख-शांति व समृद्धि के लिए वास्तु के नियमों का पालन करने के साथ ही कुछ ग़लतियों से बचना भी ज़रूरी है.

 

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* शुक्रवार व पूर्णिमा के दिन भूल कर भी न रोएं. इस दिन रोने से प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है और घर में भी क्लेश हो सकता है.

* घर में कभी मकड़ी के जाले न लगें इसका ख़ास ध्यान रखें, इससे लक्ष्मी का आगमन रुक सकता है.

* तिजोरी का मुंह उत्तर या पूर्व में शुभ होता है और यदि सामने खिड़की हो तो और भी उत्तम होता है. तिजोरी में किसी व्यक्ति से प्राप्त इत्र या सुगंधित  द्रव्य आदि न रखें, इससे आर्थिक त्रासदी व ऋण बढ़ सकता है.

* घर में टूटी मशीनें, टूटी कुर्सियां, टूटे कांच इत्यादि को संजोकर न रखें. ऐसा करने से कर्ज़ से कभी मुक्ति नहीं मिलती.

* सीढ़ियां मकान के दक्षिण, पश्‍चिम या नैऋत्य कोण में होनी चाहिए. सीढ़ियां ईशान कोण में बिल्कुल न हों. सीढ़ियों का चढ़ाव पश्‍चिम या दक्षिण में  होना चाहिए. सीढ़ियों की संख्या 10, 20, 30 इस प्रकार न हो.

* नए मकान में नए सामान का ही प्रयोग करना चाहिए. लोहा, लकड़ी, ईंट, पत्थर इत्यादि पुराना प्रयोग नहीं करना चाहिए. आजकल आर्थिक कारणों  से पुराने लोहे व लकड़ी का इस्तेमाल भी नये मकानों में लोग करते हैं, परन्तु यह उचित नहीं. ऐसा करने से वास्तुदोष का प्रभाव बढ़ सकता है.

* फर्श का ढलान किसी भी हालत में दक्षिण में न हो. इससे क़ानून या संबंधों में वाद-विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है.

* यदि आप भी अक्सर दरवाज़े के पीछे खूंटी पर अपनी ड्रेस या कपड़े आदि टांग देते हैं, तो अपनी इस आदत को बदल दीजिए, क्योंकि ऐसा करने से  आप बेवजह अपमानित हो सकते हैं.

* यदि मटका चटक गया है, तो उसी दिन इसे हटा दें. इसी तरह चप्पल के ऊपर चप्पल न रखें. ये मानसिक अशांति के संकेत माने जाते हैं.

* ईशान भाग अधिक ऊंचा हो तो आर्थिक प्रगति में बाधा आएगी. साथ ही अन्य परेशानियां भी आ सकती हैं.

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* फर्नीचर का आकार गोल, त्रिकोण या षट्कोण न हो. इससे बनते कार्य रुक सकते हैं.

* घर के अंदर रामायण, महाभारत एवं अन्य प्रकार के युद्ध दृश्य आदि के चित्र या इसी तरह की कलाकृति या फिर उदास अथवा रुदन करते मनुष्य का  चित्र एवं अशुभ पक्षियों तथा कबूतर, कौआ, बाज, उल्लू आदि के चित्रों को भी नहीं लगाना चाहिए. स़िर्फ सौम्य स्वरूप चित्रों को ही सजावट हेतु घर में  लगाना चाहिए. ऐसा करने से घर का वातावरण ख़ुशहाल बना रहता है.

* कभी भी रोता हुआ चेहरा दर्पण में न देखें. ऐसा करने से कार्यों में बाधाएं आती हैं तथा अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है.

* झा़ड़ू को पैर न लगाएं और न ही उसे क्रॉस करें, ऐसा करने से धन में कमी व कमरदर्द की समस्या हो सकती है.

* भूमि के आसपास ज़मीन में रहनेवाले जानवरों के बिल, गड्ढे, कीचड़, गंदा नाला नहीं होना चाहिए. इससे संतान पक्ष को हानि हो सकती है.

* किसी भी कमरे में झूमर या पंखा ठीक बीचोंबीच न लगाएं.

* दान या दक्षिणा देते समय मुंह पूर्व की ओर रखें, पश्‍चिम या दक्षिण में बिल्कुल न करें.

* चौराहे पर स्थित घरों में किसी-न-किसी कारण से अपयश बना रहता है. अतः इससे बचें.

* मकान बनवाते समय सबसे पहले ईशान कोण में भूमिगत पानी की टंकी या कुआं बनवाएं और उसी जल से चारदीवारी बनवाएं.

वास्तु शास्त्र के नियम (Rules of vastu)

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आपके घर में ख़ुशियां ही ख़ुशियां हों, इसके लिए प्यार और समझदारी के साथ-साथ घर को वास्तुशास्त्र के अनुसार सजाना भी ज़रूरी है. घर का वास्तु करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

* उत्तर दिशा में दक्षिण दिशा से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए. इसी तरह पूर्व में पश्‍चिम से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए.

* मकान की ऊंचाई दक्षिण और पश्‍चिम में ज़्यादा होनी चाहिए. मकान की सबसे ऊपरी मंज़िल उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोण में होनी चाहिए.

* उत्तर और पूर्व में बरामदा होना चाहिए व उस ओर की ज़मीन सामान्य ज़मीन से निचले स्तर पर होनी चाहिए. इसी तरह दूसरी छत भी अन्य हिस्से  से निचले स्तर पर होनी चाहिए.

* छत हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम में नहीं होनी चाहिए.

* मकान की चारदीवारी उत्तर और पूर्व में नीची और पश्‍चिम व दक्षिण में ऊंची होनी चाहिए.

* कार पार्किंग, नौकरों के लिए कमरा, आउटहाउस आदि दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्‍चिम कोण में होने चाहिए. उनके कमरों की दीवारों से उत्तर और पूर्व  की दीवार जुड़नी नहीं चाहिए और उनकी ऊंचाई प्रमुख भवन से छोटी होनी चाहिए.

* पोर्च, पोर्टिको या बालकनी उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए. सुख, समृद्वि व स्वास्थ्य के लिए यह लाभदायक है.

* बेडरूम में बेड के लिए आदर्श स्थिति कमरे का मध्य स्थान माना गया है या फिर दक्षिण-पश्‍चिम कोना. बेड को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार से दूर  रखना चाहिए. दक्षिण या पश्‍चिम की दीवार से सटाकर रखा जा सकता है.

* मकान का ज़्यादा खुला हिस्सा पूर्व और उत्तर में होना चाहिए.

* रसोई में फ्रिज, मिक्सर और भारी सामान दक्षिण और पश्‍चिम दीवार से सटाकर रखें.

* मकान के सभी दर्पण उत्तर या पूर्व की दीवार पर होने चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम की दीवार पर दर्पण नहीं लगाना चाहिए. टॉयलेट के वॉश बेसिन  भी उत्तर या पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए.

* पहली मंज़िल पर दरवाज़े और खिड़कियां ग्राउंड फ्लोर से कम या ज़्यादा होनी चाहिए, एक समान नहीं होनी चाहिए. संभव हो, तो अपना मकान  बनवाते समय अपनी जन्मपत्रिका के अनुसार प्रवेशद्वार बनवाएं, परंतु इतना ज़रूर ध्यान रखें कि प्रवेशद्वार मकान के किसी भी कोण में न हो.

* द़फ़्तर या अध्ययन कक्ष में टेबल को दक्षिण या पश्‍चिम दिशा में रखें, जिससे उसमें बैठनेवाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे.

* मकान के उत्तर-पूर्व कोण में कचरा बिल्कुल न डालें. उस जगह को साफ़-सुथरा रखें.

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* प्रमुख बैठक के कमरे में सोफा आदि बैठने का फ़र्नीचर पश्‍चिम या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए. मकान मालिकों को पूर्व या उत्तर दिशा में मुख  करके बैठना चाहिए.

* तिजोरी इस तरह रखनी चाहिए कि उसकी पीठ दक्षिण दिशा में हो अर्थात् खोलते समय तिजोरी का मुंह उत्तर में और हमारा मुंह दक्षिण में होना  चाहिए.

* मकान के पश्‍चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्‍चिम भाग में वज़नी सामान रखा जाना चाहिए.

* डाइनिंग रूम में भोजन करते समय पूर्व या पश्‍चिम की ओर मुख करके भोजन करें.

* हमेशा दक्षिण या पूर्व में सिर रखकर ही सोना चाहिए.

* सोलार हीटर मकान के दक्षिण-पूर्व में रखना चाहिए. मकान पर स्थित पानी की टंकी हमेशा दक्षिण-पश्‍चिम कोने में होनी चाहिए. सीढ़ी और ल़िफ़्ट  पश्‍चिम, दक्षिण दिशा में होनी चाहिए.

* बरसाती पानी की निकासी पश्‍चिम से पूर्व, दक्षिण से उत्तर और अंत में मकान के उत्तर-पूर्व कोने से होनी चाहिए.

* यदि आपके घर में लाल फूल उगते हों तो वे बाहर से दिखाई नहीं देेने चाहिए.

* बगीचे में यदि पत्थर की मूर्ति या पत्थर सजाकर बगीचा बनाया गया हो तो उसे दक्षिण-पश्‍चिम कोने में बनाना चाहिए. यह कोना भारी सामान  रखने के लिए उपयुक्त है.

* दो कमरों के दरवाज़े एकदम आमने-सामने नहीं होने चाहिए.

* चौकोर या आयताकार प्लॉट सर्वश्रेष्ठ है, किंतु बहुत ज़्यादा लंबी आयताकार जगह उचित नहीं है.

* पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ऊंची दीवार या अन्य कोई निर्माण नहीं करना चाहिए. ये वास्तु के नियमों का उल्लंघन होगा.

* पूजा स्थान के लिए घर का उत्तर-पूर्व कोना या ईशान कोण सर्वोत्तम स्थान है. मूर्ति का मुंह पूर्व या पश्‍चिम की दिशा में होना चाहिए.

* रसोई के लिए सर्वोत्तम स्थान पूर्व-दक्षिण कोना यानी अग्नि कोण माना गया है.

* भवन का मध्य भाग खुला रहने देें, अथवा अन्य कमरों में आने-जाने के रास्ते की तरह इस्तेमाल करें, क्योंकि इसे ब्रह्मस्थान माना गया है.

* उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम कभी भी नहीं होना चाहिए, विशेषकर टॉयलेट. जिस फ्लैट में भी ऐसा है, वहां के लोग कभी भी प्रगति व समृद्धि प्राप्त नहीं  कर पाते हैं.

वास्तु में दिशाओं का महत्व (Directions in architectural significance)

architectural significance

architectural significance

वास्तु से जीवन में ख़ुशहाली लाने के लिए सबसे पहले दिशाओं का ज्ञान बेहद ज़रूरी है. दिशाओं के अनुसार ही घर का इंटीरियर डिज़ाइन कराएं, इससे काफ़ी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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उत्तर दिशा
इस दिशा में भूमि तुलनात्मक रूप से नीची होनी चाहिए तथा बालकनी भी इसी दिशा में हो, तो बेहतर है. इसी तरह ज़्यादा से ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियां इसी दिशा में होने चाहिए. बरामदा, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि भी इसी दिशा में होने चाहिए. उत्तर में वास्तुदोष हो तो धन हानि या करियर में बाधाएं आती हैं. ऐसी स्थिति में घर में बुध यंत्र रखें, बुधवार को व्रत रखें और दीवारों पर हल्का रंग करवाएं.

उत्तर-पूर्व दिशा
इस दिशा को ईशान भी कहते हैं. इस दिशा में ज़्यादातर स्थान खुला होना चाहिए. पढ़ाई का कमरा, पूजास्थल, बोरिंग एवं स्विमिंग पूल आदि इसी दिशा में होने चाहिए. घर का मुख्य द्वार भी यदि इसी दिशा में हो तो बेहद शुभ माना जाता है. ईशान में वास्तुदोष हो तो द्वार पर रुद्र तोरण लगाएं, शिव उपासना करें तथा सोमवार का व्रत रखें.

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पूर्व दिशा
इस दिशा में खुला स्थान तथा प्रवेश द्वार हो, तो गृहस्वामी को लंबी उम्र, मान-सम्मान तथा संतान सुख मिलता है. इस दिशा में भूमि नीची होनी चाहिए. बरामदा, दरवाज़े, खिड़कियां बालकनी, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि इस दिशा में बनाए जा सकते हैैं. बच्चे भी इसी दिशा की तरफ मुंह करके पढ़ें तो विद्यालाभ होता है. पूर्व में वास्तु दोष हो तो सूर्य यंत्र की स्थापना करें, सूर्य को अर्घ्य दें, सूर्य की उपासना करें तथा पूर्वी दरवाज़े पर मंगलकारी तोरण लगाएं.

 

दक्षिण-पूर्व दिशा
इसे आग्नेय भी कहते हैं. इस दिशा में अग्नि से संबंधित कार्य करने चाहिए. किचन, ट्रांसफ़ॉर्मर, जनरेटर, बॉयलर आदि इसी दिशा में होने चाहिए. इसके अलावा नौकर का कमरा, टॉयलेट आदि भी इस दिशा में बनाए जा सकते हैं. इस दिशा में वास्तुदोष हो तो प्रवेश द्वार पर मंगलकारी यंत्र लगाएं, गणेश जी की पूजा करें, हरे रंग के गणपति दरवाज़े के अंदर-बाहर स्थापित करें.

 

 

दक्षिण दिशा
इस दिशा में खुलापन, किसी भी प्रकार के गड्ढे अथवा शौचालय आदि बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए. यदि इस दिशा में भवन ऊंचा और भारी हो तो गृहस्वामी को सुखी, समृद्ध और निरोगी रखता है. इस दिशा में उत्तर की ओर मुख करके तिजोरी रखने से धन की बढ़ोत्तरी होती है. दक्षिण दिशा में यदि वास्तुदोष हो तो घर में या दरवाज़े पर मंगल यंत्र स्थापित करें, मंगलकारी तोरण या सूंड वाले गणपति दरवाज़े के बाहर स्थापित करें. हनुमान या भैरव की उपासना करें.

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उत्तर-पश्चिम दिशा
इसे वायव्य भी कह सकते हैं. इस दिशा में गोशाला, बेडरूम, गैरेज आदि बनाए जा सकते हैं. नौकर का कमरा भी इसी दिशा में होना चाहिए. वायव्य में यदि वास्तु दोष हो तो दरवाज़े के अंदर-बाहर श्‍वेत गणपति तथा श्री यंत्र की स्थापना करें. घर में चंद्र यंत्र लगाएं.

दक्षिण-पश्चिम दिशा
इस दिशा को नैऋत्य दिशा भी कहते हैं. परिवार के मुखिया का कमरा इसी दिशा में होना चाहिए, लेकिन भूलकर भी नौकर के रहने के लिए यह स्थान न चुनें. मशीनें, कैश कांउटर आदि इस दिशा में रखे जा सकते हैं. इस दिशा में खुलापन, जैसे- खिड़की, दरवाज़े आदि बिल्कुल नहीं होने चाहिए. नैऋत्य में वास्तुदोष हो तो घर में राहु यंत्र स्थापित करके पूजा करें, प्रवेश द्वार पर भूरे रंग के गणपति स्थापित करें.

पश्चिम दिशा
इस दिशा में भवन व भूमि तुलनात्मक रूप से ऊंची हो तो घर के लोगों को सफलता और कीर्ति मिलती है. भोजन कक्ष, टॉयलेट आदि इस दिशा में होने चाहिए. पश्चिम में वास्तुदोष हो तो घर में वरुण यंत्र की स्थापना करें तथा शनिवार का व्रत रखें.

 

बेडरूम के लिए वास्तु गाइड ( Architectural Guide to the bedroom)

Architectural Guide

यदि आप वैवाहिक जीवन में ख़ुशी चाहते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम हवादार और शांत हो. कमरे में होनेवाली बातचीत की आवाज़ बाहर न जाने पाए. इससे दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ती है. यहां वास्तुशास्त्री डॉ. प्रेम गुप्ता बेडरूम के वास्तु से जुड़ी कई उपयोगी बातों की जानकारी दे रहे हैं. Architectural Guide

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* हर पूर्णिमा के दिन सोने के पानी (कोई भी गोल्ड ज्वेलरी को पानी में डालकर निकाल लें और इस पानी का इस्तेमाल करें) से स्वस्तिक बनाएं.

* बेडरूम घर का सबसे ख़ास हिस्सा होता है. यहां रखी हर चीज़ का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जैसे- फोटो, फ्लावर पॉट, पलंग आदि. यहां  पति-पत्नी अपना मुस्कुराता हुआ साथ का फोटो लगा सकते हैं, पर फोटो पैरों की ओर न लगाएं.

* कमरे में रोमांटिक पोज़वाले युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं.

* रोमांटिक पोज़वाले सेक्सी क्रिस्टल जोड़े व फोटो से बेडरूम को सजाएं.

* हर अमावस्या को काले तिल उत्तर/पश्‍चिम कोने में रखें.

* रोमांस व प्राइवेसी बनी रहे, इसके लिए ध्यान रहे कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले.

* चांदी की कटोरी में कपूर रखें.

* आपसी प्यार और बेडरूम की ख़ूबसूरती के लिए मनी प्लांट्स भी लगाए जाते हैं. ये शुक्र के कारक हैं. मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर  होते हैं.

* बेडरूम में हल्की गुलाबी रंग की रोशनी होने से कपल्स में प्रेम बना रहता है.

* शिव रूद्राक्ष गुलाबजल में भिगोकर रखें.

* वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोएं, ताकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार आप दीर्घायु और गहरी नींद प्राप्त कर सकें  आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है.

* पत्नी पति के बाईं ओर सोए.

* यदि कमरे में ड्रेसिंग टेबल हो, तो इस बात का ख़्याल रखें कि सोते समय आपका प्रतिबिंब आईने पर न पड़ने पाए. यदि ऐसा हो, तो आईने कोढंक दें.

* लव बर्ड, मैंडरीन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं. इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा कमरे में रखें.

* बेडरूम में हल्की व ख़ूबसूरत लाइट व्यवस्था हो, पर रोशनी सीधी पलंग पर न पड़े.

* वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.

* फिर भी बेडरूम में बाथरूम रखना चाहते हों, तो नैऋत्य कोण में बनवाएं. यदि ऐसा संभव न हो, तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्‍चिम) में भी बाथरूम  बनवाया जा सकता है.

* अगर बेडरूम में बाथरूम है, तो हर पूर्णिमा या शुक्रवार को नमक के पानी से बाथरूम धोएं.

* ऐसे कपल्स, जो संतान सुख पाना चाहते हैं, वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शानेवाली फोटो अपने बेडरूम में लगाएं.

* बेड के नीचे मोर पंख रखें.

* बेडरूम में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है, फिर भी यदि चाहें,
तो राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं.

* यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह सेे दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है, तो सुंदर से बाउल मेें पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के  साथ मिलाकर रखें.

* क्रिस्टल क्वार्ट्ज़ स्टोन के बने शोपीस पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ाते हैं. ये क्रिस्टल गुलाबी रंग के होते हैं और इनसे सकारात्मक ऊर्जा का स्तर बहुत  अच्छा होता है.

* लाल कपड़े की थैली में तांबे व पीतल के सिक्के रखें.

* कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं, जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि. ऐसे दृश्यों से  बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें.

यह भी पढ़ें: टॉप 25 वास्तु टिप्स: बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?

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ऐसा न करें

* बेडरूम में आईना न लगाएं.

* कमरे में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं रखें.

* उत्तर दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए. यदि है, तो मोतियों का बंदनवार लगाएं.

* पलंग दरवाज़े के सामने न हो. यदि हो, तो उत्तर/पश्‍चिम कोने में पिरामिड के नीचे मूंगा रत्न रखें.

* बेडरूम के दरवाज़े को खोलते या बंद करते समय किसी तरह की कोई आवाज़ नहीं होनी चाहिए.

* कैंची, प्रेस और सुई बेड से दूर ही रखें. बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं.

* ख़राब एयर कंडीशनर या पंखा जिसके चलने पर आवाज़ हो, उसे तुरंत ठीक करवा लें. इसके कारण कपल्स के संबंधों में परेशानी पैदा हो सकती है.

* कमरे में रॉट आयरन के बेड न रखें. जहां तक हो सके, लकड़ी का ही बेड रखें. बेडरूम में मकड़ी के जाले भूलकर भी न हों.
भीनी-भीनी ख़ुशबू व रोमांटिक म्यूज़िक

* बेडरूम में सुगंधित कैंडल, रूम फ्रेशनर्स व ऑयल ज़रूर रखें.

* परफ्यूम सिलेक्ट करते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि परफ्यूम व डियो जो भी इस्तेमाल करें, वह ऐसा हो जिसकी ख़ुशबू आप दोनों को  पसंद हो.

* मंगलवार को मोगरा व शुक्रवार को गुलाब का इत्र अवश्य छिड़कें.

* पार्टनर का मूड सेक्सी बनाने के लिए रोमांटिक म्यूज़िक लगाएं.

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता

यह भी पढ़ें: करियर में कामयाबी के लिए इफेक्टिव वास्तु ट्रिक्स

वास्तु से जुड़े 20 सवाल-जवाब (20 Questions and answers related to architectural)

architectural

 

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वास्तुशास्त्र के अनुसार पति-पत्नी को कहां सोना चाहिए?
आपको बिस्तर पर दक्षिण-पश्‍चिम की ओर तथा आपकी पत्नी को दक्षिण-पूर्व की ओर सोना चाहिए.

हमारे बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार में दरार आ गई है. क्या इससे कोई नुक़सान है?
वैसे तो किसी भी रूम की किसी भी दीवार पर दरार का होना अशुभ माना जाता है, पर दक्षिण दिशा में दरार का रहना उस रूम विशेष में होनेवाले कार्यों में बाधा डालता है, जैसे- आपके बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार पर दरार काम सुख में कमी एवं वैचारिक मतभेदों को बल दे सकता है.

अक्सर यह सुनने में आता है कि बड़ों को दक्षिण में सिर व उत्तर में पैर रखकर सोना चाहिए. क्या यही नियम बच्चों पर भी लागू होता है?
जी हां, यह नियम सभी पर लागू होता है, पर यदि बच्चे पूर्व की तरफ़ सिर एवं पश्‍चिम की ओर पैर रखें, तो और उत्तम होगा. उत्तर दिशा की तरफ़ कभी भी सिर करके नहीं सोना चाहिए.

हमारे मकान में यदि अज्ञानतावश दक्षिण में ज़्यादा खिड़कियां हों और उत्तर में कम, तो ऐसे में क्या करना चाहिए?
यह स्थिति ठीक नहीं है, इनके दोषों से बचने के लिए दक्षिण की कुछ खिड़कियां बंद करके गहरे नीले रंग के डबल परदे डाल दें.

मैंने सुना है, वास्तु के दोष या गुण से शारीरिक शक्ति पर गहरा असर पड़ता है. यदि यह बात सच है तो कृपया बताएं कि भूमिगत पानी की टंकी यदि उत्तर दिशा में हो, तो कौन-सी शक्ति पर क्या और कौन-सा प्रभाव पड़ता है?
इससे घर के प्रमुख व ज़िम्मेदार व्यक्ति की छठी इन्द्रिय मजबूत होती है और उन्हें उचित पूर्वाभास की शक्ति प्राप्त होती है.

टेरेस पर हम टीवी एंटीना किस दिशा में लगा सकते हैं?
एंटीना दक्षिण-पश्‍चिम कॉर्नर में लगाना ठीक रहेगा.

वास्तु विज्ञान की बड़ी-बड़ी जटिल परिभाषाएं पढ़ने में आती हैं, फिर भी कुछ आधा-अधूरा सा लगता है, एकदम सरल भाषा में बताएं कि वास्तु शास्त्र क्या है?
प्रकृति के अनुरूप रहने का अत्यंत प्रभावशाली ज्ञान-विज्ञान है यह अर्थात् सुख-शांति व समृद्धि देने वाला अद्भुत विज्ञान.

अचानक कांच का टूटना कोई दोष होता है?
कभी किसी वजह से कांच का टूटना दोषपूर्ण नहीं होता है, परन्तु अचानक बार-बार कांच का टूटना या चटकना निश्‍चित ही बड़े दोष का कारण हो सकता है.

खेल के मैदान के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कौन-सा है?
पूर्व या उत्तर, विशेष परिस्थिति में पूर्वी-उत्तर के कोने में भी खेल का मैदान बना दें.

हमने उत्तर की दिशा में आईना लगा रखा है, पता नहीं किस कारण से वह बार-बार टूट जाता है?
टूटने का कारण ढूंढ़ें, यदि कोई स्पष्ट कारण समझ में नहीं आए, तो चांदी का एक सिक्का आईने के पीछे दीवार के सहारे लगा दें.

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कृपया यह बताएं कि नहाते समय हमारा मुंह किस दिशा में होना चाहिए?
वैसे तो नहाते समय मुंह पूर्व, पश्‍चिम और उत्तर की ओर रख सकते हैं, पर यदि आप बाथटब का उपयोग करते हैं, तो उस समय आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए.

बैंक में मुझे एक लॉकर लेना है, कृपया बताएं मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर खुलनेवाला लॉकर लें, इस लॉकर के सामने खिड़की हो, तो उत्तम होगा. ध्यान रहे, सामने कोई द्वार न हो.

क्या एक बिल्डिंग के सभी फ्लैट वास्तु के अनुरूप बन सकते हैं?
जी हां, सारे फ्लैट वास्तु नियमों के आधार पर बन तो सकते हैं, पर उनकी शुभता में कुछ अंतर अवश्य आएगा.

क्या बेडरूम में टेलीफोन रख सकते हैं? यदि हां, तो किस तरफ़ रखें?
टेलीफोन को पश्‍चिम या दक्षिण-पूर्वी कोने में रखना चाहिए.

मैं व्यापारी हूं. पहले माल का उत्पादन बहुत धीमा होता था और मांग ज़्यादा रहती थी, कुछ वास्तुदोष निवारण के बाद उत्पादन तो संतोषजनक हो गया, पर माल की मांग घट गई है. इसका क्या कारण हो सकता है?
निश्‍चित ही आपने कुछ संशोधन किया होगा, पर संशोधन प्रक्रिया में कुछ कमी और ग़लतियां रहने के कारण मांग की गति धीमी पड़ गई है. आप पुनः नए सिरे से वास्तु दोष का परीक्षण कर संशोधन कराएं और मन में विश्‍वास रखें कि सब ठीक हो जाएगा.

बैंक में हमारा लॉकर पश्‍चिम की ओर खुलता है. वास्तु नियमों के हिसाब से क्या यह उचित है?
लॉकर को दक्षिण दीवार के सहारे होना चाहिए और उसे उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए.

प्राकृतिक आपदाएं क्यों आती हैं? क्या किसी देश-प्रदेश के वास्तु से इसका कोई संबंध है?
वास्तु विज्ञान पंच तत्वों एवं विभिन्न ऊर्जा पर आधारित है. जब इन पंच तत्वों एवं ऊर्जाओं के समीकरण में कोई असंतुलन होता है, तो बाढ़, तूफान या अन्य आपदाएं आती हैं. इन तत्वों में हुए असंतुलन का व्यापक प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है. कहते हैं, हर दिशा के कोई न कोई अधिष्ठाता देवता होते हैं, कृपया इसका पूरा विवरण दें कि किस दिशा के कौन-कौन से देवता अधिष्ठाता हैं? दिशा और इनके अधिष्ठाता देवता इस प्रकार हैं- पूर्व दिशा के सूर्य एवं इन्द्र, पश्‍चिम दिशा के वरुण, उत्तर दिशा के सोम एवं कुबेर, दक्षिण दिशा के यम, ईशान के शिव एवं सोम, आग्नेय के ब्रह्मा एवं अग्नि, नैऋत्य के निऋति, वायव्य के वायु हैं.

हम अपने नए ऑफिस की सीलिंग में हल्का गुलाबी रंग कराना चाहते हैं. क्या यह ठीक रहेगा?
सीलिंग में सफेद रंग ही कराएं. भूलकर भी किसी दूसरे रंग के बारे में न सोचें.

मकान की मरम्मत करानी है, उसके लिए मज़दूर आदि हमारे मकान के बाहर अहाते में ही रहेंगे. उन्हें अस्थायी स्थान किस दिशा में देना श्रेष्ठकर होगा?
उनके रहने की व्यवस्था उत्तर-पश्‍चिम में करें.

यदि नींव की मिट्टी में मूंगा रत्न दिखलाई दे, तो यह कैसा लक्षण है?
यह बेहद ही शुभ लक्षण है, क्योंकि वह भूमि अत्यंत शुभ मानी जाएगी.

वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

damaged architectural

 

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ

वास्तु के अनुसार कैसी होनी चाहिए सीढ़ियां?

आपके घर की सीढ़ियां आपकी क़ामयाबी की सीढ़ियां भी बन सकती हैं. बस, सीढ़ियां बनवाते समय वास्तु के कुछ नियमों का पालन करें और आप क़ामयाबी की ऊंचाइयों को छू सकते हैं.

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* मकान की सीढ़ियां पूर्व से पश्‍चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाली होनी चाहिए.
* बड़े मकानों में सीढ़ी का पूरा हिस्सा मकान के दक्षिण या दक्षिण-पश्‍चिम हिस्से में होना चाहिए. मकान के उत्तर-पूर्व कोने में तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए.
* कई ऐसे घरों में जहां दो मंज़िला मकान होता है, वहां अक्सर यह देखने में आता है कि लोग ऊपर का घर किराए पर दे देते हैं और नीचे की मंज़िल में स्वयं रहते हैं और वहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ी घर के सामने ही बना देते हैं, यह एकदम ग़लत है. ऐसे में मकान मालिक को आर्थिक तकलीफ़ से गुज़रना पड़ता है, जबकि उसका किराएदार फ़ायदे में रहता है.
* हमेशा मकान के दक्षिण या पश्‍चिम हिस्से में ही सीढ़ियां बनाएं. साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि सीढ़ियां उत्तर से दक्षिण की ओर तथा पूर्व से पश्‍चिम की ओर जाती हों और जब पहली मंज़िल की ओर निकलती हों तो हमारा मुख उत्तर-पश्‍चिम या दक्षिण-पूर्व में होना चाहिए.
* जहां तक हो सके, अंदरूनी या बाहरी सीढ़ियां उत्तर या पूर्वी दीवार से जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए. उनके बीच कम-से-कम तीन इंच का अंतर होना चाहिए. यदि आपके घर के भीतर सीढ़ियां बनी हुई हों तो ध्यान रखें कि वह आपके लिए लाभदायी कोण में हों अन्यथा परिवार में अनबन रहती है.
* ग़लत स्थान पर ग़लत ढंग से ग़लत नियमों के आधार पर यदि सीढ़ियों का निर्माण होता है, तो पागलपन, विवाद, नीलामी, आयकर के छापे, बीमारी एवं निर्धनता का प्रवेश शनै:-शनै: होने लगता है.

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ध्यान रखें
* भवनों में सीढ़ियां वास्तु के अनुरूप बनाएं.
* सीढ़ियों का द्वार पूर्व व दक्षिण दिशा में होना चाहिए.
* सीढ़ियां घुमावदार निर्मित करानी हों तो घुमाव सदैव पूर्व से दक्षिण, दक्षिण से पश्‍चिम, पश्‍चिम से उत्तर और उत्तर से पूर्व दिशा में हों.
* सीढ़ियों में घुमाव चाहे कितने भी हों, संख्या विषम ही रहे यानी 5,11,17,23 आदि संख्या में सीढ़ियां हों. सीढ़ियों के शुरू और अंत में द्वार बनाना चाहिए.
* उतरते समय सीढ़ियों की समाप्ति पर हमारा मुंह पूर्व वा उत्तर की ओर होना चाहिए.