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विजय दिवस- क्या याद है आपको वो ऐतिहासिक जीत? (Vijay Diwas- Do you remember that historical Victory?)

vijay diwas

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साल 1971… भारतीय इतिहास का गौरवमयी स्वर्णिम साल, जब भारतीय सेना ने अपना दमखम दिखाते हुए पाकिस्तानी सेना पर विजय प्राप्त की थी. भारतीय जवानों ने पाक के उस नापाक इरादे को कुचलते हुए देश का गौरव बढ़ाया था. अपनी जान की परवाह किए बिना भारतीय जवानों ने जी-जीन लगा दी थी. इसका परिणाम ये हुआ कि भारतीय सेना का परचम देश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व में लहराया. जवानों के उसी पराक्रम को हम विजय दिवस के रूप में मनाते हैं.

वर्तमान स्थिति की ही तरह उस बार भी पाक सैनिकों की ओर से लड़ाई का आगाज़ हुआ. हर बार चोरी-छुपे वार करनेवाले पाकिस्तानियों को लगा था कि वो इस युद्ध में जीत जाएंगे, लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत. बादलों की तरह गरजनेवाले पाक सैनिकों की हालत भारतीय जवानों ने कुछ ऐसी कर दी कि वो समझ ही नहीं पा रहे थे कि अब किया क्या जाए.

एक नज़र इतिहास के उन पन्नों पर
4 व 5 दिसंबर को जब दो हज़ार से ज़्यादा पाकिस्तानी सैनिक लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर का सपना लिए आधी रात को भारतीय सीमाओं की ओर बढ़ रहे थे, तो पंजाब रेजीमेंट के स़िर्फ 120 जवानों इन पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया. उस युद्ध में पाकिस्तानियों को ऐसा लगा था जैसे वो भारतीय सेना को हराकर हमारे देश में विजय पताका फहराएंगे. पाकिस्तानियों की यही ग़लती उनकी सबसे बड़े हार की वजह बनी. भारतीय जवानों ने पाक सैनिकों का मनोबल कुछ ऐसा तोड़ा कि वो आत्मसमर्पण करने के लिए आतुर हो गए. लगभग 93 हज़ार सैनिक हथियार नहीं उठा पाए और 16 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना के हज़ारों सैनिकों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ पाकिस्तानी जनरल एके नियाजी सहित भारतीय सेना के समक्ष ढाका में आत्मसमर्पण किया.

देश के जवानों को हमारी शुभकामनाएं. सीमा पर आप हैं, तभी हम अपने घरों में चैन की सांस ले पा रहे हैं. मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से हमारे शहीदों को शत शत नमन.

– श्वेता सिंह