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शोले फिल्म में गब्बर सिंह के क़िरदार को इतने दशकों के बाद भी कोई भूल नहीं पाया है. आज गब्बर सिंह यानी अमजद ख़ान का जन्मदिन है. उनसे जुड़ी कई कही-अनकही बातों के बारे में जानते हैं. ख़ासकर किस तरह उन्हें गब्बर का रोल मिला और अमिताभ बच्चन के साथ उनका याराना…

Amjad Khan’s Birth Anniversary

शोले फिल्म के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ अमजद ख़ान की अच्छी दोस्ती हो गई थी. अमिताभ ने उनसे जुड़े कई मज़ेदार क़िस्से बताए.

* अमिताभ के अनुसार अमजद चाय के बेहद शौकीन थे. दिनभर में कभी-कभी वे बीस कप तक चाय पी जाते थे.

* एक बार कैंटीन में दूध ख़त्म हो गया और अपनी चाय की तलब की ख़ातिर अमजद साहब ने भैंस ही लाकर कैंटीन में बांध दी थी.

* वे काफ़ी मज़ाकिया भी थे. उन्हें बात-बात पर मज़ाक करने की आदत थी. वे अपनी मौत को लेकर भी अक्सर हंसी-मज़ाक किया करते थे.

* उनका कहना था कि वे पांच मिनट के अंदर ही इस दुनिया से विदा ले लेंगे और ऐसा हुआ भी. उनकी पत्नी के अनुसार, शाम सात बजे उन्हें किसी से मिलना था और वे तैयार हो रहे थे, तभी उनका बेटा दौड़ता हुआ आया और कहा कि पापा के हाथ-पैर ठंडे हो रहे हैं. पांच मिनट के अंदर ही वे इस दुनिया से रुख़सत हो गए. ऐसे में मुकद्दर का सिकंदर का वो गाना कितना सार्थक बैठता है कि ज़िंदगी तो बेवफ़ा है साथ छोड़ जाएगी, मौत तो महबूबा है अपनी साथ ले के जाएगी… मर के जीने की अदा को दुनिया को दिखलाएगा…

* अमिताभ व अमजद की ऑन स्क्रीन नायक व ख़लनायकवाली जोड़ी को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया, जैसे- शोले, याराना, नास्तिक, मुकद्दर का सिकंदर, महान, सत्ते पे सत्ता, बरसात की एक रात आदि.

* रमेश सिप्पी की गब्बर के रोल के लिए पहली पसंद डैनी डैन्जोंगपा थे, पर कई कारणों से वे यह फिल्म नहीं कर सके.

* गब्बर के रोल के लिए जब किसी ने निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी को अमजद ख़ान का नाम सुझाया, तब पहली बार मिलने पर ही उन्होंने उन्हें रिजेक्ट कर दिया.

* उस समय अमजद काफ़ी दुबले-पतले थे. लेकिन अपने काम के धुन के पक्पके अमजद ने सिप्पीजी से एक महीने का समय मांगा और न केवल अपना वज़न बढ़ाया, बल्कि अपने लुक को भी बदला और वे चुन लिए गए.

* बहुत कम लोगों को पता है कि संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन व धर्मेंद्र तीनों ही गब्बर सिंह का रोल करना चाहते थे. लेकिन रमेश सिप्पी ने तीनों के क़िरदार जैसे जय-वीरू व ठाकुर फाइनल कर लिए थे. उनका यह मानना था कि ये तीनों ही इन क़िरदारों के साथ न्याय कर पाएंगे और यह सच भी साबित हुआ.

* गौर करनेवाली बात है कि गब्बर सिंह के क़िरदार पर अब तक कम से कम छह-सात फिल्में बन चुकी हैं. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है हिंंदी फिल्म के इतिहास में यह क़िरदार कितना प्रभावशाली था.

* अमजद ख़ान ने अपने फिल्मी करियर में हर तरह की भूमिकाएं निभाई यानी नायक, खलनायक, सहायक कलाकार और हर भूमिका में जंचे और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उनकी दादा, याराना कुछ ऐसी ही फिल्में थीं.

* आज वे हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी बहुआयामी भूमिकाएं, दमदार संवाद, लाजवाब अभिनय सदा दिलों में ज़िंदा रहेगी.

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विशेष: आज एक और मशहूर व प्रभावशाली विलेन रंजीतजी का भी जन्मदिन है, उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं.

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  • शब्द कम पड़ जाते हैं… तारी़फें बेमानी सी लगने लगती हैं… जब इनका हुनर हम देखते हैं, तो आसमान की ऊंचाई भी कम लगने लगती है… कहने को तो ये अभिनेता कहे जाते हैं, लेकिन अभिनय ख़ुद को अभिभूत महसूस करता है, जब सामने नाना (nana patekar) जैसा कलाकार होता है. कला के क्षेत्र को इन्होंने और भी रोशन किया है, एक अद्भुत व बेमिसाल अभिनेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक लाजवाब व्यक्तित्व के नाते भी.

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  • यूं तो नाना का फिल्मी सफ़र गमन मूवी से शुरू हुआ था, लेकिन फिल्म परिंदा में जो उन्होंने नकारात्मक भूमिका निभाई उसने इस उम्दा कलाकार को सबके बीच पहचान दिलाई. एक सायकॉटिक पर्सनैलिटी का रोल करके उन्होंने सबके रोंगटे खड़े कर दिए थे.
  • यही वजह है कि इस रोल के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार व सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.
  • इसके बाद नाना ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय की जो छाप छोड़ी, वो आज भी सबके दिलों पर चस्पा है.

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  • अंकुश, क्रांतिवीर, यशवंत, राजनीति, तिरंगा, अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में सबने उनको सराहा और वेलकम जैसी फिल्मों में कॉमेडी करके उन्होंने ख़ुद को एक कंप्लीट एक्टर के तौर पर साबित किया.
  • 1 जनवरी 1951 को जन्मे नाना को उनके जन्मदिन पर मेरी सहेली की ओर से ढेरों शुभकामनाएं!

– गीता शर्मा