Vinod Khanna

बात तो सभी जानते हैं कि विनोद खन्ना और महेश भट्ट में बड़ी गहरी दोस्ती थी. विनोद खन्ना को रजनीश के आश्रम पहुंचाने में भी महेश भट्ट का ही हाथ था और महेश भट्ट के कहने पर ही विनोद खन्ना ने उनके भाई मुकेश भट्ट को अपना सेक्रेटरी बना लिया था, लेकिन मुकेश भट्ट पर एक बार विनोद खन्ना इतना भड़क गए कि उन्हें एक दो नहीं, बल्कि कई थप्पड़ जड़ दिए. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अपने सबसे अच्छे फ्रेंड के भाई पर ही भड़क गए विनोद खन्ना. जानिए पूरा मामला क्या था.

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महेश भट्ट ने क्यों दी थी रजनीश की शरण में जाने की सलाह?

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महेश भट्ट को पहले से ही आदत रही है लोगों की पर्सनल लाइफ में दखल देने की, रिया चक्रवर्ती ही नहीं अपने दोस्त विनोद खन्ना की लाइफ में वो अक्सर दखल दिया करते थे. दरअसल अस्सी के दशक में विनोद खन्ना का करियर एकदम पीक पर था. ऐसा माना जा रहा था कि जल्द ही विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ देंगे, लेकिन इसी दौरान विनोद खन्ना की मां की डेथ हो गयी. इस घटना से विनोद खन्ना बहुत दुखी थे, उस पर महेश भट्ट ने उन्हें आध्यात्म की ओर जाने की सलाह दे दी और महेश भट्ट के उकसाने पर ही विनोद खन्ना उनके साथ ओशो रजनीश के आश्रम चले गए थे. कहते हैं उन दिनों महेश भट्ट का पूरा खर्च विनोद खन्ना ही उठाया करते थे. अपनी मर्सिडीज में महेश भट्ट को बिठाकर ओशो आश्रम ले जाया करते थे. खुद महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘तब मेरे पास पैसा नहीं था. विनोद ही मेरी देखभाल करते थे और मेरी ट्रेवलिंग का खर्चा उठाते थे.”

गुस्से में विनोद ने लगातार 40 दिन तक शूटिंग कैंसिल कराई थी

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फिर विनोद खन्ना का रजनीश से भी मोहभंग हो गया और वो वापस बॉलीवुड में लौट आए और आते ही उन्होंने फ़िल्म ‘इंसाफ’ से धमाकेदार वापसी भी की. महेश भट्ट इस मौके को कैश करना चाहते थे, इसलिए अपने भाई मुकेश भट्ट को प्रोड्यूसर बनाकर विनोद खन्ना को लेकर फ़िल्म ‘जुर्म’ की शुरुआत कर दी. जैसा कि अमूमन हमेशा होता है भट्ट अपने स्टार्स को उनकी फीस देने में आना कानी करते हैं, फिर विनोद खन्ना तो उनके करीबी थे, तो भट्ट ब्रदर्स विनोद खन्ना को पैसे देने में भी आनाकानी करने लगे. विनोद खन्ना इस बात से बहुत नाराज हुए और वो शूटिंग के लिए भट्ट ब्रदर्स को रखड़ाने लगे और इस तरह फ़िल्म लटक गई. कहते हैं गुस्से में विनोद ने लगातार 40 दिन तक शूटिंग कैंसिल कराई थी.

पहले महेश भट्ट ने विनोद खन्ना का सेक्रेटरी बना दिया मुकेश भट्ट को

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प्रोड्यूसर बनने से पहले मुकेश भट्ट शराबी हुआ करते थे और कोई काम धाम नहीं करते थे. बस शराब पीकर यहां वहां भटका करते थे. ऐसे में महेश भट्ट ने ही विनोद खन्ना से रिक्वेस्ट करके मुकेश को विनोद खन्ना का सेक्रेटरी बना दिया और इस तरह मुकेश भट्ट काफी दिनों तक उनका काम संभालते रहे.

गुस्से में विनोद खन्ना ने मुकेश भट्ट को कई चांटे जड़ दिये

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जब ‘जुर्म’ से मुकेश भट्ट प्रोड्यूसर बने और पैसे न मिलने की वजह से विनोद खन्ना ने उनकी फिल्म अटका दी, तो मुकेश भट्ट ने विनोद खन्ना के खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया. वो उनके खिलाफ पब्लिक में ऊलजुलूल स्टेटमेंट्स देने लगे. कुछ समय तक तो विनोद खन्ना शांत रहे, लेकिन जब उन्हें लगा कि पानी सर के ऊपर जाने लगा है, तो उनका गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया. आखिर एक दिन स्टूडियो में उनका मुकेश भट्ट से सामना हो गया. विनोद खन्ना इतने गुस्से में थे कि मुकेश को देखते ही उन्हें कई चांटे जड़ दिए.

और महेश भट्ट के साथ भी विनोद के रिश्ते खराब हो गए

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महेश भट्ट, जो खुद को विनोद खन्ना का बहुत अच्छा दोस्त बताते थे, कहते हैं फ़िल्म ‘जुर्म’ के बाद उनकी दोस्ती भी खत्म हो गई. महेश भट्ट ने यहां तक कह दिया कि  ‘मैं विनोद के स्पॉट ब्वॉय को हीरो बना लूंगा, लेकिन विनोद को अपनी फिल्मों में साइन नहीं करूंगा’.

विनोद खन्ना ने खुद पूरी की वो फ़िल्म

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हमारे देश में राजनीति और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का बड़ा पुराना संबंध है. ऐसे कई एक्टर्स हैं, जिन्होंने पॉलिटिक्स को बतौर दूसरे करियर के रूप में शुरू किया और कामयाब भी रहे, पर बहुत से ऐसे भी रहे, जिन्हें राजनीति रास नहीं आई और वो लौटकर बॉलीवुड में वापस आ गए. आइये देखते हैं कौन से हैं वो बड़े सितारे जिन्होंने राजनीति में अपने हाथ आज़माएं.

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)

Amitabh Bachchan

शायद बहुतों की तरह आपको भी पता न हो कि बॉलीवुड के शहंशाह भी राजनीति में अपनी किस्मत आज़मा चुके हैं. दरअसल, साल 1984 में अपने दोस्त राजीव गांधी को सपोर्ट करने के लिए अमिताभ बच्चन ने राजनीति में कदम रखा था. बॉलीवुड से ब्रेक लेकर उन्होंने प्रयागराज (इलाहाबाद) सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और भारी मतों से जीते भी थे. लेकिन बिग बी को राजनीति रास नहीं आई और वो 3 साल बाद ही राजनीति छोड़कर मुंबई वापस आ गए.

सुनील दत्त (Sunil Dutt)

Sunil Dutt

एक ज़माने में बॉलीवुड के हैंडसम हीरो कहे जानेवाले सुनील दत्त ने बॉलीवुड में कई हिट फिल्में दी हैं. स्वर्गीय सुनील दत्त साहब न सिर्फ़ ऐक्टर थे, बल्कि उन्होंने बताहर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी काम किया है. सुनील दत्तजी ने 1984 में कांग्रेस पार्टी जॉइन की थी. उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया का सकता है कि वो लगातार 5 बार विजयी हुए थे. साथ ही साल 2004 से 2005 तक वो यूथ अफेयर्स और स्पोर्ट्स मंत्री भी थे. उनके ही पदचिह्नों पर चलते हुए उनकी बेटी प्रिया दत्त ने भी कांग्रेस पार्टी से जुड़कर उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीती ही भी.

विनोद खन्ना (Vinod Khanna)

Vinod Khanna

बॉलीवुड से पॉलिटिक्स में कदम रखनेवाले सभी एक्टर्स में से विनोद खन्ना का सफर सबसे दिलचस्प माना जाता है. विनोद खन्ना ने 1997 में बीजेपी जॉइन की थी और पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा सीट से 1998 से 2009 और फिर 2014 से 2018 तक लोकसभा सांसद रहे. साल 2002 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कल्चर और टूरिज्म मंत्रालय मिला. इसके 6 महीने बाद ही विनोद खन्ना एक्सटर्नल अफेयर्स में मिनिस्टर और स्टेट नियुक्त किये गए.

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)

Rajesh Khanna

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना ने भी राजनीति में अपने हाथ आज़माएं थे. उन्होंने 1992 लोक सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर दिल्ली से चुनाव लड़ा था और जीते भी थे. बतौर सांसद उन्होंने 5 सालों का कार्यक्रम पूरा किया, लेकिन उन्हें राजनीति रास नहीं आई और उसके बाद उन्होंने पॉलिटिक्स छोड़ दी.

शत्रुघन सिन्हा (Shatrughan Sinha)

Shatrughan Sinha

साल 1992 में शत्रुघन सिन्हा ने बीजेपी जॉइन की और शुरुआत अपने दोस्त और बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के सामने बाय इलेक्शन में खड़े हुए. यहां शत्रुघ्न सिन्हा राजेश खन्ना से 25 हज़ार वोटों से हार गए, लेकिन उसके बाद से दोनों के रिश्ते बिगड़ गए. 2009 में उन्होंने बिहार के पटना साहिब से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते. उसके बाद 2014 में भी वो वहां से विजयी हुए. अटल बिहारी बाजपेयी की तीसरी सरकार में वो कैबिनेट मंत्री बने. उन्हें स्वास्थ्य के साथ साथ शिपिंग विभाग भी दिया गया. हालांकि 2019 में उन्होंने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली है.

हेमा मालिनी (Hema Malini)

Hema Malini

बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी ने भी एक्टिंग के साथ साथ पॉलिटिक्स में एंट्री ली. 2004 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की और विनोद खन्ना के लिए उनके चुनाव क्षेत्र में प्रचार प्रसार किया. बॉलीवुड में कई ब्लॉकबस्टर फ़िल्में देनेवाली हेमा मालिनी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मथुरा से चुनाव लड़ा और जीतकर लोकसभ सांसद बनीं. उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी मथुरा की जनता ने भारी मतों से विजयी बनाया.

जया प्रदा (Jaya Prada)

Jaya Prada

जया प्रदा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1994 में तेलुगू देशम पार्टी से की थी, लेकिन चंद्रबाबू नायडू से चलते मतभेदों के कारण उन्होंने टीडीपी छोड़ दी और समाजवादी पार्टी जॉइन की. 2004 से 2014 तक वो उत्तर प्रदेश के रामपुर से लोकसभा सांसद रहीं. देखा जाये तो जया प्रदा का राजनीतिक करियर काफ़ी सफल रहा है. लेकिन समाजवादी पार्टी में चल रहे बदलावों के कारण कुछ ऐसे मतभेद हुए कि उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली.

जया बच्चन (Jaya Bachchan)

Jaya Bachchan

जया बच्चन ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की. साल 2004 में राजनीति से जुड़ने के बाद वो 2004 से 2006 तक समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुनी गईं. वो अब चौथी बार राज्यसभा सदस्य बनी हैं. 2006 से 2010 और फिर 2012 में वो एक बार फिर चुनकर आयीं. उसके बाद 2018 में उन्हें फिर राज्यसभा सदस्यता मिली.

राज बब्बर (Raj Babbar )

Raj Babbar

3 बार लोकसभा सदस्य और 2 बार राज्यसभा सदस्य राज बब्बर की राजनीतिक पारी काफी सफल मानी जाती है. साल 1989 में वो जनता दल से जुड़ते हुए राजनीति में आए. कुछ साल बाद वो जनता दल छोड़कर समाजवादी पार्टी से जुड़ गए. लेकिन वहां भी बहुत ज़्यादा समय तक उनका मन नहीं लगा और उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली. वो उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

स्मृति ईरानी (Smriti Irani)

Smriti Irani

मॉडल, एक्ट्रेस और अब सक्सेसफुल पॉलिटिशियन स्मृति ईरानी ने 2003 में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की. 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी को हराकर वो लोकसभा सदस्य बनीं. इससे पहले वो गुजरात से राज्यसभा सांसद थीं और नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. फ़िलहाल वो टेक्सटाइल मिनिस्टर हैं और महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार भी उन्हें दिया गया है.

किरण खेर (Kirron Kher)

Kirron Kher

इंडियन फिल्म, टेलीविज़न और थियटर आर्टिस्ट किरण खेर ने 2009 में बीजेपी से जुड़ीं. यहीं से इनके राजनीतिक पारी की शुरुआत हुई. साल 2014 में चंडीगढ़ से वो लोकसभा सदस्य बनीं और 2019 में वो दोबारा लोकसभा सदस्य बनीं.

इनके अलावा टैलेंटेड एक्टर और कॉमेडियन परेश रावल 2014 में अहमदाबाद से लोकसभा सदस्य रहे, फिल्म स्टार गोविंदा 2004 में मुंबई से लोकसभा सांसद बने और अपना टर्म पूरा किया. 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां गुरदासपुर से बीजेपी के कैंडिडेट सन्नी देओल ने चुनाव जीता, वहीं कांग्रेस की उर्मिला मातोंडकर को हार का सामना करना पड़ा.

बॉलीवुड के अलावा टॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स हैं, जिन्होंने लंबी राजनीतिक पारियां खेली हैं. एम जी रामचंद्रन और जयललिता की राजनीतिक पारियां काफ़ी सफल रहीं. वहीं मेगास्टार चिरंजीवी, रजनीकांत और पवन कल्याण भी राजनीति से जुड़ गए हैं.

– अनीता सिंह

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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सत्तर-अस्सी के दशक में अपने अभिनय, स्टाइल, हैंडसम पर्सनैलिटी से जिस कलाकार ने सबसे अधिक आकर्षित किया, वो थे विनोद खन्ना. उनके एक्शन, इमोशन, कॉमेडी में ग़ज़ब का तालमेल था. उनका खलनायक से शुरू हुआ सफ़र नायक के शिखर तक पहुंचा. फिर अध्यात्म की तरफ़ झुकाव, संन्यास, ओशो आश्रम जाना, दोबारा फिल्मों में आना, राजनीति, छोटे पर्दे पर आना… वे अपनी ज़िंदगी में हर दौर में न जाने कितने पड़ाव से गुज़रे, पर हर जगह अपनी क़ाबिलियत से हर किसी को प्रभावित किया. आज उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कई कही-अनकही बातों को जानने की कोशिश करते हैं.

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* विनोद खन्ना के पिता का टेक्सटाइल, केमिकल का बिज़नेस था. जब विनोदजी ने अभिनय करने की इच्छा ज़ाहिर की, तो उन्होंने उनकी तरफ़ बंदूक तान दिया था. लेकिन पत्नी के समझाने पर शांत हुए और विनोद को दो साल तक का समय दिया फिल्मों में ख़ुद को स्थापित करने के लिए. यदि वे असफल होते हैं, तो फिर उन्हें पिता के बिज़नेस में हाथ बंटाना होगा.

* विनोद पांच भाई-बहन थे, जिनमें तीन बहन और दो भाई थे. देश के बंटवारे के समय उनके पिता पेशावर से हिंदुस्तान आकर मुंबई में बस गए थे.

* विनोद खन्ना को पहली पत्नी गीतांजली से दो बेटे अक्षय व राहुल हैं और दूसरी बीवी से दो बच्चे साक्षी व श्रद्धा हैं.

* बचपन में विनोद काफ़ी शर्मीले स्वभाव के थे. एक बार उनके शिक्षक ने उन्हें नाटक में ज़बर्दस्ती काम करवाया, तब से अभिनय के प्रति उनका रुझान बढ़ने लगा.

* जब वे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, तब वे सोलवां साल और मुग़ल-ए-आज़म फिल्म से काफ़ी प्रभावित हुए और उन्होंने फिल्म में करियर बनाने का सोचा.

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* सुनील दत्त की फिल्म मन का मीत से खलनायक के तौर पर अभिनय के सफ़र की शुरुआत हुई और विलेन के रोल में दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया.

* इसके बाद आन मिलो सजना, पूरब और पश्‍चिम, मेरा गांव मेरा देश जैसी फिल्मों में अपनी खलनायकी के जलवे उन्होंने दिखाए, पर नायक के तौर पर ब्रेक गुलज़ार साहब ने दिया.

* उनकी मेरे अपने फिल्म ने विनोद खन्ना को हीरो के तौर पर पहचान दी. गुलज़ार-विनोद की जुगलबंदी ने फिर तो कई फिल्में कीं, जिसमें अचानक, इम्तिहान, रिहाई, लेकिन, मीरा जैसी लाजवाब फिल्में रहीं.

* मीडिया द्वारा अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को एक-दूसरे का प्रबल प्रतिद्वंदी माना जाता था, जबकि हक़ीक़त में ऐसा कुछ भी नहीं था. यह और बात है कि बिग बी अमिताभ को सुपरस्टार विनोद खन्ना ने अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, ख़ून-पसीना, हेरा फेरी, मुकद्दर का सिकंदर जैसी तमाम फिल्मों में जमकर टक्कर दी. और ये सभी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर-डुपर हिट साबित हुईं.

* बहुत कम लोग जानते है कि अमिताभ बच्चन ने कुर्बानी फिल्म करने से मना कर दिया था, तब विनोद खन्ना को अप्रोच किया गया और फिरोज खन्ना की यह फिल्म उस दौर की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक रही. इसके गीत-संगीत का जादू आज भी लोगों के दिलों को गुदगुदाता है, ख़ासकर- गाना लैला मैं लैला…

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* विनोद खन्ना कम मूडी नहीं थे. अपने अभिनय सफ़र के शिखर पर रहते हुए उन्होंने सब कुछ यानी फिल्मेें, पत्नी, दोनों बच्चे अक्षय व राहुल को छोड़छाड़ कर अमेरिका में ओशो रजनीश के आश्रम चले गए.

* वहां पर उन्हें स्वामी विनोद भारती, द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ मर्सीडीज़, हैंडसम संन्यासी जैसे नामों से पुकारा जाता था. ग्लैमर वर्ल्ड को दरकिनार कर वे वहां पर साफ़-सफ़ाई करना, खाना बनाना, बागवानी करना जैसे तमाम काम करते थे.

* लेकिन वहां पर ध्यान-ज्ञान, काम सब कुछ करते हुए भी उनका मन स्थिर न रह पाया और उन्होंने दोबारा फिल्मों की तरफ़ रुख किया.

* उनकी फिल्मों में सेकंड एंट्री भी धमाकेदार रही. लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया. इंसाफ़, सत्यमेव जयते, दयावान, ज़ुर्म, रिहाई जैसी बेहतरीन उम्दा फिल्में कीं.

* उन्होंने राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से गुरदासपुर से चार बार चुनाव लड़ा और विजयी रहे. इस बार वहां से सनी देओल चुनाव लड़े थे और भारी बहुमत से जीत भी हासिल की थी.

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* फिल्मों में विनोद खन्ना के उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई अवॉर्डस के अलावा फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

आज वे हमारे बीच नहीं है, पर अपने दमदार अभिनय, मस्ताने अंदाज़ से आज भी वे सभी की यादों में ज़िंदा है.

जब भी उनके जीवन में उतार-चढ़ाव आया, तब उन्होंने अपनी ही फिल्म के गाने से प्रेरणा ली- रुक जाना नहीं. तू कहीं हार के.. कांटों पे चलकर मिलेंगे साये बहार प्यार के, ओ रही, ओ रही…

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विनोद खन्ना की प्रार्थना सभा में पहुंचे बॉलीवुड, खेल और बिज़नेस जगत से जुड़े लोग. 27 अप्रैल 2017 को विनोद खन्ना सभी को अलविदा कह गए थे. लंबे वक़्त से बीमार विनोद खन्ना के यूं चले जाने से हर कोई दुखी है. बॉलीवुड के हैंडसम हंक कहे जाने वाले विनोद खन्ना की इस प्रार्थना सभा में उनके परिवार के साथ कई सेलेब्स मौजूद थे, लेकिन पिछले दिनों अपने एक ट्वीट की वजह से टि्वटर पर छाए रहने वाले ऋषि कपूर नज़र नहीं आए. देखे पिक्चर्स.

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विनोद खन्ना

इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म बाहुबली: द कंक्लुज़न का मुंबई में होने वाला प्रीमियर कैंसल कर दिया गया है. विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देने के लिए बाहुबली 2 के निर्माता करण जौहर ने फिल्म की टीम के साथ मिलकर ये फैसला लिया. इस ख़बर की जानकारी करण ने टि्वटर के ज़रिए दी. उन्होंने लिखा, “अपने प्रिय अभिनेता के सम्‍मान में बाहुबली की पूरी टीम ने तय किया है कि आज रात होने वाला प्रीमियर कैंसल कर दिया जाए.”  

बाहुबली 2 के प्रीमियर के लिए ख़ूब तैयारियां की गईं थी. एक ख़ास इनविटेशन कार्ड भी छपवाया गया था और बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स प्रीमियर अटेंड भी करने वाले थे. लेकिन विनोद खन्ना के निधन के बाद उनके सम्मान में फिल्म का प्रीमियर कैंसल कर दिया गया है.

विनोद खन्ना70 और 80 के दशक के हार्टथ्रॉब विनोद खन्ना नहीं रहे. जैसे ही ये ख़बर सामने आई, बॉलीवुड से लेकर उनके फैन्स तक, हर कोई सन्न रह गया. 70 साल के नेता और अभिनेता विनोद खन्ना 70 साल के थे. का़फ़ी वक़्त से कैंसर से जूझ रहे विनोद की कुछ दिनों पहले एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें साफ़ नज़र आ रहा था कि वो बेहद बीमार हैं. एक साल पहले तक वो फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय थे. बीजेपी सांसद रह चुके विनोद खन्ना की आख़िरी फिल्म दिलवाले थी. इस बेहतरीन ऐक्टर ने भले ही अपने करियर की शुरुआत विलन के तौर पर की थी, लेकिन उनके रोमांटिक अंदाज़ को भी दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया. 1987-1994 में विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे महंगे स्टार बन गए थे. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनके पिता बिल्कुल नहीं चाहते थे कि विनोद फिल्मों में अभिनय करें. उनके पिता ने उन्हें केवल दो महिनों का समय दिया था, इन दो महिनों में विनोद खन्ना ने ख़ुद को साबित किया और बॉलीवुड में अपनी जगह बना ली. उन्होंने आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश, सच्चा झूठा, मुकद्दर का सिकंदर, परवरिश, अमर अकबर एंथोनी, कुर्बानी, इम्तिहान, दयावान, दबंग, दिलवाले जैसी कई सुपरहिट फिल्में बॉलीवुड को दी हैं.

भले ही विनोद खन्ना आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए यादगार किरदार और फिल्मों के गाने उनकी याद हमेशा दिलाते रहेंगे.

आइए, उन्हें याद करते हैं उनके टॉप 10 गानों के साथ.

फिल्म- जुर्म (1990)

https://www.youtube.com/watch?v=B-5zMnCD4_o

फिल्म- चांदनी (1989)

https://www.youtube.com/watch?v=_HXDFHK0dZw

फिल्म- कुर्बानी (1980)

फिल्म- इम्तिहान (1974)

https://www.youtube.com/watch?v=heZC52CKtLQ

फिल्म- मेरे अपने (1971)

https://www.youtube.com/watch?v=dPvoWyeSsxU

फिल्म- लहु के दो रंग (1979)

https://www.youtube.com/watch?v=srfhnpDqZWg

फिल्म- हाथ की सफ़ाई (1974)

फिल्म- सत्यमेव जयते (1987)

https://www.youtube.com/watch?v=98AKKz4dGz0

फिल्म- अमर अकबर एंथोनी (1977)

https://www.youtube.com/watch?v=sev0D5P8wRE

फिल्म- दौलत (1982)

 

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अभिनेता विनोद खन्ना नहीं रहे. कुछ समय से वो कैंसर से जूझ रहे थे. कुछ दिनों पहले उनकी एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें वो काफ़ी कमज़ोर भी नज़र आ रहे थे. 70 साल की उम्र में विनोद खन्ना सभी को अलविदा कह गए. विनोद खन्ना ने 140 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया. उनकी आख़िरी फिल्म दिलवाले थी. पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज मुंबई के अस्पताल में चल रहा था.

मेरी सहेली की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि.

 

Vinod Khanna

विनोद खन्ना की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वो बहुत ही कमज़ोर और बीमार नज़र आ रहे हैं. विनोद खन्ना को शुक्रवार को डिहाइड्रेशन के शिकायत के चलते गिरगांव के एचएन रिलायंस फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया. उनके फैन्स उन्हें इस हाल में देखकर बेहद ही चौंक गए हैं. विनोद खन्ना में ये बदलाव एक साल की भीतर आया है. इससे पहले फिल्म दिलवाले में वो काफ़ी फिट नज़र आ रहे थे.

जो ख़बरों सामने आ रही हैं, उसमें यही कहा जा रहा है कि विनोद खन्ना को ब्लैडर कैंसर है. ये ख़बर कितनी सही है, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है. उनके बेटे राहुल खन्ना ने बताया था कि डैड अब बिल्कुल स्वस्थ हैं और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी. विनोद राजनीति में भी सक्रिय हैं, वो पंजाब की गुरदासपुर सीट से बीजेपी के सांसद हैं.

Akshay Khannaअपने अलग अंदाज़ और ऐक्टिंग से बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने वाले अक्षय खन्ना आज हो गए हैं 42 साल के. यूं तो स्टार किड होने के नाते बॉलीवुड में एंट्री लेने के लिए उन्हें स्ट्रगल नहीं करना पड़ा, लेकिन बॉलीवुड में ख़ुद को साबित करने के लिए अक्षय को मेहनत करनी पड़ी. अक्षय ने हिमालय पुत्र से अपने करियर की शुरुआत की, फिल्म भले ही फ्लॉप रही, लेकिन अक्षय को लोगों ने नोटिस किया. इसके बाद रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर ने अक्षय के करियर को कुछ वक़्त तक संभाले रखा, लेकिन अक्षय को अब भी एक ऐसी फिल्म की तलाश थी, जो उन्हें ऐक्टर को तौर वो पहचान दिलाए, जिसके वो हकदार थे. साल 2001 अक्षय के करियर के लिए लकी साबित हुआ, जब उन्हें मिली फिल्म दिल चाहता है. इस फिल्म से शुरु हुआ सफलता का दौर, ताल हलचल, हंगामा, हमराज़, रेस जैसी फिल्मो में उनकी ऐक्टिंग को सराहा गया. सिर्फ़ हीरो ही नहीं, विलेन के किरदार में भी अक्षय को पसंद किया गया. निगेटिव रोल से लेकर कॉमेडी तक हर तरह का किरदार अक्षय ने निभाया है. फिल्म गांधी, माय फादर में उन्होंने मोहनदास गांधी के चौथे बेटे हरिलाल गांधी का किरदार निभाकर साबित कर दिया की गंभीर रोल को भी निभाने की
क्षमता उनमें है. लंबे ब्रेक के बाद अक्षय फिल्म ढिशूम में नज़र आए थे. भले ही अक्षय कम ही फिल्में करते हैं, लेकिन हर फिल्म में अपनी ऐक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से उन्हें जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

देखें उनकी फिल्मों के ये टॉप 10 सॉन्ग्स.

फिल्म- ताल

फिल्म- हमराज़

फिल्म- बेनक़ाब

फिल्म- दिल चाहता है

फिल्म- रेस

फिल्म- दहक

https://www.youtube.com/watch?v=YLQ3_TJ81oQ

फिल्म- बॉर्डर

फिल्म- हंगामा

फिल्म- हलचल

https://www.youtube.com/watch?v=UPxWZmFd5H8

फिल्म- आ अब लौट चलें

https://www.youtube.com/watch?v=DIbc7G-q6Rg