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कहीं आप ग़लत समय पर तो विटामिन्स नहीं ले रहे? (Are You Taking Your Vitamins Correctly?)

वॉटर सोल्यूबल विटामिन्स

ये ऐसे विटामिन्स हैं, जो न शरीर में बनते हैं और न ही शरीर में जमा होते हैं, इसलिए इन्हें डायट और सप्लीमेंट के ज़रिए ही लिया जा सकता है.

कौन-से हैं विटामिन्स?

– विटामिन सी और ज़्यादातर विटामिन बी टाइप्स वॉटर सोल्यूबल हैं.

विटामिन बी: बी 1 (थियामिन), बी 2 (राइबोफ्लेविन), बी 3 (नियासिन), बी 5
(पैंटोथेनिक एसिड), विटामिन बी 6, बी 7 (बायोटिन), बी 9 (फॉलिक एसिड) और बी 12 इस गु्रप के विटामिन्स हैं. ये आपके मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाते हैं, रक्तसंचार को संतुलित रखते हैं और शरीर में ऊर्जा का संचार बनाए रखते हैं.

विटामिन सी: इसे ‘एस्कॉर्बिक एसिड’ भी कहते हैं. विटामिन सी में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ भी होती हैं. यह हड्डियों के
साथ-साथ कार्टिलेज, दांतों, मसल्स, ब्लड वेसल्स आदि को भी स्ट्रॉन्ग बनाए रखता है. साथ ही यह मसूड़ों और मांसपेशियों की सुरक्षा करता है और घावों को तेज़ी से भरने में मदद करता है.

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कब और कैसे लें?

– वॉटर सोल्यूबल विटामिन्स खाली पेट शरीर में ज़्यादा अच्छी तरह एब्ज़ॉर्ब होते हैं, इसलिए सुबह-सुबह लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा.

– कुछ भी खाने के आधे घंटे पहले इसे लें या फिर खाने के 2 घंटे बाद लें.

– विटामिन सी और बी 12 कभी एक साथ न लें, वरना बी 12 अच्छी तरह एब्ज़ॉर्ब नहीं हो पाएगा. अगर आप दोनों सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, तो दोनों के बीच 2 घंटे का गैप रखें.

– विटामिन बी कॉम्पलेक्स के साथ विटामिन डी ले सकते हैं.

फैट सोल्यूबल विटामिन्स

इनकी बहुत कम मात्रा में शरीर को ज़रूरत होती है. ज़रूरत से ज़्यादा होने पर ये टॉक्सिक लेवल पर पहुंच जाते हैं, जो आपके लिए हानिकारक हो सकता है.

कौन-से हैं विटामिन्स?

– विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई और विटामिन के फैट सोल्यूबल विटामिन्स हैं. ये हमारे लिवर और फैटी टिश्यूज़ में जमा होते रहते हैं, इसलिए इनकी ज़रूरत उतनी नहीं होती, जितनी वॉटर सोल्यूबल फैट्स की. ज़रूरत से ज़्यादा इनका इस्तेमाल आपके लिए नुक़सानदेह हो सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आप रोज़ाना पोषण से भरपूर संतुलित भोजन ले रहे हैं, तो आपको सप्लीमेंट्स लेने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन आज हमारी लाइफस्टाइल जिस तरह बदल गई है, ऐसे में ख़ासतौर से शहरी महिलाओं में विटामिन डी की कमी पाई जा रही है, जिसकी पूर्ति उन्हें सप्लीमेंट्स लेकर करनी पड़ रही है.

विटामिन ए: यह बोन ग्रोथ, रिप्रोडक्शन और इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाए रखने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह बैक्टीरिया और जर्म्स से लड़ने की ताक़त देता है और साथ ही  हेल्दी व़िज़न, स्किन, बोन्स और बॉडी टिश्यूज़ को मेंटेन  रखता है.

कब और कैसे लें?

– विटामिन ए कभी भी सुबह-सुबह खाली पेट न लें. इससे आपको अपच या हार्टबर्न की समस्या हो सकती है.

– क्योंकि यह फैट सोल्यूबल विटामिन है, इसलिए इसे हमेशा फैटवाले खाने के
साथ लें.

– इसे आप दूध, दही, लिवर, ऑलिव ऑयल, साल्मन फिश, एवोकैडो आदि के साथ ले सकते हैं.

– विटामिन ए को एब्ज़ॉर्ब करने के लिए अपने डायट में पर्याप्त ज़िंक शामिल करें. इसके लिए आप काजू, बादाम, चिकन, काबुली चना, किडनी बीन्स आदि लें.

– वेट लॉस के लिए अगर कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो अवॉइड करें, वरना लो फैट के कारण विटामिन ए का पूरा फ़ायदा आपको नहीं मिलेगा.

विटामिन ई: ग्लोइंग स्किन और शाइनी हेयर के लिए विटामिन ई बेहद ज़रूरी है. यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है. साथ ही फ्री रैडिकल्स से हमारी सुरक्षा भी करता है.

कब और कैसे लें?

– विटामिन ए की तरह इसे भी खाने के साथ लें.

– आप चाहें, तो लंच या डिनर के साथ इसे ले सकते हैं.

– इसे खाली पेट कभी न लें.

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Vitamins

विटामिन डी: यह ‘सनशाइन विटामिन’ भी कहलाता है, क्योंकि यह हमें सूरज की रोशनी से मिलता है. यह हार्ट डिसीज़ जैसी गंभीर बीमारियों से हमें बचाता है. साथ ही हमारे डिप्रेशन को कम करके वेट लॉस में भी मदद करता है.

कब लें?

– एक्सपर्ट्स की मानें, तो विटामिन डी ऐसा सप्लीमेंट है, जिसे आप खाली पेट, खाने के साथ, सुबह, दोपहर या रात- कभी भी ले सकते हैं.

– हालांकि रात के व़क्त विटामिन डी लेने से कुछ लोग नींद की समस्या की शिकायत करते हैं, अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो आप उसे सुबह के व़क्त लें.

– फैट सोल्यूबल होने के नाते इसे खाने के साथ लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद माना जाता है.

– इसे विटामिन के 2 के साथ लेने से हड्डियां मज़बूत बनती हैं.

विटामिन के: हेल्दी हार्ट, हेल्दी बोन्स, बोन डेन्सिटी में, मेंस्ट्रुअल साइकल में ब्लीडिंग को कम करने में और कैंसर से बचाव में यह काफ़ी मदद करता है. यह ब्लड क्लॉटिंग में फ़ायदेमंद है. हालांकि अक्सर इसे अनदेखा किया जाता है, इसलिए इसे ‘फॉरगॉटेन विटामिन’ भी कहा जाता है.

कब लें?

– फैटयुक्त भोजन के साथ लें.

– इसे विटामिन डी, कैल्शियम, विटामिन सी के साथ लेना ़ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.

– प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीडिंग करानेवाली महिलाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के इसे न लें.

प्रीनैटल विटामिन्स

महिलाओं के लिए प्रीनैटल विटामिन्स काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होते हैं, इसलिए इनके सेवन, इफेक्ट्स और साइड इफेक्ट्स के बारे में सभी को पता होना चाहिए. कहने को इन्हें विटामिन्स कहते हैं, पर इनमें मिनरल्स भी शामिल हैं.

डॉक्टर्स के मुताबिक़, जो महिलाएं कंसीव करना चाहती हैं, उन्हें प्रेग्नेंसी के एक साल पहले से ही फॉलिक एसिड लेते रहना चाहिए. प्रेग्नेंसी के दौरान भी रोज़ाना उन्हें प्रीनैटल विटामिन्स लेते रहना चाहिए. कभी भी प्रीनैटल विटामिन्स की डबल डोज़ न लें. वैसे तो प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर्स ख़ुद ही बताते हैं कि कौन-सा विटामिन कब लें, फिर भी प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन्स लेने से पहले डॉक्टर को इन बातों के बारे में बताएं-

– मॉर्निंग सिकनेस है या नहीं.

– उल्टी स़िर्फ सुबह हो रही है या पूरे दिन.

– दिनभर चक्कर आता है या स़िर्फ किसी एक समय पर आदि.

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Correct Vitamins
कौन-से हैं विटामिन्स?

फॉलिक एसिड (विटामिन बी 9), आयरन और कैल्शियम.

फॉलिक एसिड: इसे ‘विटामिन बी 9’ या ‘फोलेट’ भी कहते हैं. जहां यह महिलाओं को बर्थ डिफेक्ट से बचाता है, वहीं गर्भावस्था के दौरान गर्भ के ब्रेन डेवलपमेंट, सेल्स डेवलपमेंट और टिश्यू ग्रोथ में भी मदद करता है. यह रेड सेल्स को बढ़ाने में मदद करता है और साथ ही अल्ज़ाइमर, कैंसर, डायबिटीज़, हार्ट प्रॉब्लम्स जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद करता है.

कब और कैसे लें?

– सारे प्रीनैटल विटामिन्स खाली पेट लेने चाहिए यानी खाना खाने के 1 घंटा पहले या फिर खाना खाने के 2 घंटे बाद.

– कोशिश करें कि फॉलिक एसिड रोज़ाना निर्धारित एक ही समय पर लें. इसके लिए चाहें तो रिमाइंडर लगा लें.

– कोशिश करें कि फॉलिक एसिड लेने के 2 घंटे पहले और 2 घंटे बाद तक कोई एंटासिड्स या एंटीबायोटिक्स न लें.

आयरन: यह रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जिससे आप एनीमिया की समस्या से बच जाते हैं. यह आपके इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है, जिससे आप जल्दी बीमार नहीं पड़ते. आयरन कई गंभीर बीमारियों से भी आपकी रक्षा करता है. ख़ासतौर से महिलाओं के लिए आयरन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें ज़्यादा ब्लड की ज़रूरत होती है, इसलिए उनकी डायट आयरन से भरपूर होनी चाहिए.

कब और कैसे लें?

– आयरन सुबह ब्रेकफास्ट के साथ लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है, पर किसी और की बजाय इसे विटामिन सी के साथ लेने से यह पूरी तरह एब्ज़ॉर्ब हो जाता है, इसलिए इसे आप ऑरेंज जूस के साथ लें.

– आयरन-कैल्शियम कभी भी एक साथ न लें, वरना कैल्शियम आयरन को एब्ज़ॉर्ब नहीं होने देगा.

– इसे लेने के दो घंटे पहले और दो घंटे बाद तक कोई डेयरी प्रोडक्ट न लें.

कैल्शियम: हर कोई जानता है कि हड्डियों की मज़बूती के लिए कैल्शियम कितना ज़रूरी है, पर यह स़िर्फ यही काम नहीं करता. कैल्शियम आपके हार्ट, मसल्स और नर्व्स की सही फंक्शनिंग में भी मदद करता है. कुछ स्टडीज़ के मुताबिक कैल्शियम और विटामिन डी साथ में लेने से  कैंसर, डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर की संभावना कम हो जाती है. महिलाओं को पीएमएस की तकलीफ़ों में राहत दिलाने के साथ-साथ ये उन्हें स्लिम-ट्रिम बनाए रखता है.

कब और कैसे लें?

– कैल्शियम मार्केट में दो तरह से मिलता है- कैल्शियम सिट्रेट और कैल्शियम कार्बोनेट. कैल्शियम कार्बोनेट सबसे सस्ता होता है, जिसे खाने के साथ लेना चाहिए.

– कैल्शियम सिट्रेट महंगा आता है, जिसे खाली पेट या खाने के साथ भी ले सकते हैं.

– आमतौर पर कैल्शियम से कब्ज़ की शिकायत नहीं होती, लेकिन अगर आपको हो रही है, तो कैल्शियम सिट्रेट आपके लिए बेहतर विकल्प होगा.

– एक दिन में 500 एमजी कैल्शियम किसी के लिए भी उपयुक्त है, पर अगर डॉक्टर ने 1000 एमजी प्रिस्क्राइब किया है, तो उसे दो बार में सुबह-शाम लें.

– अगर आयरन-कैल्शियम दोनों एक साथ ले रहे हैं, तो आयरन ब्रेकफास्ट में और कैल्शियम लंच या डिनर के साथ लें.

– कैफीन लेने के 3 घंटे बाद ही कैल्शियम लें.

– अनीता सिंह

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इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं?(Top Immunity booster food)

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हमारी इम्यूनिटी काफ़ी हद तक हमारे खान-पान व लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है. अगर आप भी चाहते हैं कि हमेशा हेल्दी और फिट रहें और बीमारियां आपके पास आने से भी डरें, तो आप भी ऐसी चीज़ें खाएं, जिनसे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े.

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इम्यूनिटी बढ़ानेवाले फूड्स

दही: प्रोबायोटिक्स, जिन्हें हम गुड बैक्टीरिया भी कहते हैं, दही में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इनका नियमित सेवन इम्यूनिटी बढ़ाता है.
ग्रीन टी: यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और इम्यून सिस्टम पर इसके सकारात्मक प्रभाव से आजकल सभी वाक़िफ़ हैं. कुछ शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद पॉलीफीनॉल्स के एक प्रकार के कारण इंफ्लूएंज़ा के वायरस का ख़ात्मा होता है. तो रोज़ाना ग्रीन टी ज़रूर पीएं. इसका पूरा फ़ायदा लेने व कड़वापन दूर करने के लिए पानी उबलने से थोड़ा पहले ग्रीन टी मिलाएं और 1-2 मिनट से ज़्यादा पानी में ग्रीन टीन को न रखें. इसके स्वाद में इज़ाफ़ा करना हो, तो नींबू का रस व शहद मिलाकर पी सकते हैं, लेकिन दूध न मिलाएं, वरना प्रोटीन्स पॉलीफीनॉल्स के साथ मिलकर उसे बेअसर कर देंगे.
विटामिन डी: अमेरिका में एक अध्ययन किया गया, जिसमें यह पता चला कि जिन बच्चों को रोज़ाना विटामिन डी सप्लीमेंट्स दिए गए, उन्हें अन्य बच्चों के मुकाबले फ्लू होने की संभावना 40% तक कम हो गई. ऐसे माना जाता है कि विटामिन डी हमारे इम्यून सेल्स को उन बैक्टीरिया व वायरस को पहचानकर ख़त्म करने में मदद करता है, जो हमें बीमार कर सकते हैं. विटामिन डी आपको धूप से मिलेगा. खाने में साल्मन जैसी फैटी फिश से भी कुछ मात्रा में विटामिन डी मिल सकता है.
चिकन सूप: अगर सर्दी है, नाक बह रही है, तो चिकन सूप बेहतरीन इलाज है. यह कफ को पतला करके वायरस व बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करता है और आपके इम्यून सिस्टम को सर्दी से लड़ने में मदद करता है. चिकन सूप में थोड़ी हरी मिर्च मिलाकर और स्पाइसी बना लें, तो दुगुना लाभ होगा.
सोल्यूबल फाइबर्स: सिट्रस फ्रूट्स, सेब, गाजर, बींस और ओट्स सोल्यूबल फाइबर्स से भरपूर होते हैं. ये शरीर को विभिन्न प्रकार के शोथों से लड़ने में मदद करते हैं.
जौ और ओट्स: इनमें बीटा-ग्लूकैन होता है, जो एक तरह का फाइबर है, जिसमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ होती हैं और यह कई तरह की बीमारियों व फ्लू से रक्षा करता है. यह इम्यूनिटी तो बढ़ाता ही है, साथ ही घाव को जल्दी भरने में मदद करता है और एंटीबायोटिक्स को भी और असरकारक बनाने में मदद करता है.
लहसुन: इसमें अलाइसिन नाम का तत्व होता है, जो इंफेक्शन्स और बैक्टीरिया से लड़ता है. जो लोग लहसुन का नियमित सेवन करते हैं, उन्हें सर्दी व अन्य इंफेक्शन्स होने की संभावना काफ़ी कम रहती है. यही नहीं, जो लोग एक हफ़्ते में लहसुन की 6 कलियां खाते हैं, उन्हें कोलोरेक्टल कैंसर होने की 30% संभावना और पेट के कैंसर की संभावना 50% तक कम होती है.
ब्लैक टी: हार्वर्ड की एक स्टडी में यह पाया गया, जिन लोगों ने 2 हफ़्तों तक दिन में 5 कप ब्लैक टी पी, उनके रक्त में अन्य लोगों की अपेक्षा 10 गुना अधिक वायरस से लड़नेवाले इंटरफिरॉन यानी विषाणु अवरोधक पाए गए. दरअसल, उसमें मौजूद अमीनो एसिड इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार है.
मशरूम: यह सेलिनियम (एक प्रकार का मिनरल) और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. सेलिनियम की कमी से फ्लू की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है. साथ ही इसमें राइबोफ्लेविन और नायसिन भी पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को हेल्दी रखते हैं.
तरबूज़: इसमें बहुत ही स्ट्रॉन्ग एंटीऑक्सीडेंट- ग्लूटाथायॉन होता है, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करके इंफेक्शन्स से लड़ने में मदद करता है.
पत्तागोभी: इम्यूनिटी बढ़ानेवाले तत्व ग्लूटामाइन से यह भरपूर होती है. इसका सूप भी बनाकर पी सकते हैं या सब्ज़ी बनाकर खाएं.
बादाम: विटामिन ई से भरपूर बादाम भी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. विटामिन ई इम्यूनिटी को बढ़ाता है, साथ ही इसमें राइबोफ्लेविन और नायसिन भी होता है, जो तनाव के कारण हुए नुक़सान से उबरने में मदद करता है.
पालक: इसे सुपर फूड कहा जाता है. यह कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है. नई कोशिकाओं के निर्माण व डीएनए के रिपेयर में मदद करता है. हेल्दी रहने के लिए व इसका भरपूर लाभ लेने के लिए हल्का या कम पके रूप में इसका सेवन करें.
शकरकंद: एंटीऑक्सीडेंट्स और बीटाकेरोटीन से भरपूर शकरकंदरोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है और कैंसर से भी बचाव करता है.
एंटीऑक्सीडेंट्स: ब्रोकोली, हरी मिर्च, पपीता, संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करके आपको हेल्दी रखती हैं.

– गीता शर्मा