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वेडिंग सीज़न में हैवी ट्रेडिशनल ड्रेस के साथ पोटली बैग बहुत अच्छे लगते हैं. इन करीना कपूर, सोनम कपूर, रेखा, विद्या बालन, करिश्मा कपूर, आलिया भट्ट, शिल्पा शेट्टी… इन बॉलीवुड अभिनेत्रियों की तरह आप भी पोटली बैग्स को बनाएं अपना स्टाइल स्टेटमेंट और वेडिंग सीज़न में ट्रेडिशनल ड्रेस के साथ पोटली बैग कैरी करें.

Bollywood Actresses

ऐसे करें पोटली बैग का चुनाव
सही हैंड बैग का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है. हर फंक्शन में कम्प्लीट लुक के लिए बेस्ट आउटफिट की तरह बेस्ट हैंड बैग का सलेक्शन बेहद ज़रूरी है. हर फंक्शन के लिए कैसे चुनें सही पोटली बैग? आइए, हम आपको बताते हैं.

  • गोल्डन और सिल्वर कलर का पोटली बैग अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखें. ये ज़्यादातर आउटफिट्स के साथ मैच हो जाते हैं.
Rekha
  • ब्लैक कलर का पोटली बैग भी रखें. इसे आप किसी भी आउटफिट के साथ जब चाहें कैरी कर सकती हैं.
Sonam
  • इंडियन वेयर के साथ सिल्क, सैटिन, ब्रोकेड आदि फैब्रिक से बने ब्राइट कलर के पोटली बैग अच्छे लगते हैं.

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Karishma
  • आजकल बोल्ड एंड ब्राइट कलर के पोटली बैग फैशन में हैं, इसलिए अपने बैग कलेक्शन में रेड, ग्रीन, पिंक, पर्पल, ब्लू जैसे ब्राइट कलर के पोटली बैग भी रख सकती हैं.
Sonam
  • साड़ी, सलवार-कमीज़, लहंगा-चोली, अनारकली जैसे ट्रेडिशनल आउटफिट्स के साथ ज़रदोज़ी, कुंदन, मोती, डायमंड जड़े ज्वेल्ड पोटली बैग कैरी करें.

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Alia

ट्रेडिशनल ड्रेस के साथ आप इन बॉलीवुड अभिनेत्रियों की तरह ये पोटली बैग्स भी कैरी कर सकती हैं:

Shilpa
Kareena
Bollywood Celebs
Karishma and Kareena
Karishma and Kareena
Rekha
Vidya Balan

टेलीविज़न एक्ट्रेसेस को हमने कभी पत्नी, कभी बहू, कभी भाभी, तो कभी बहन के अवतार में देखा है. इनके हर अवतार के हम दीवाने हैं, तभी तो इनके ऑनस्क्रीन ब्राइडल लुक्स को देखकर हम सभी के मन में ये ख़्याल आता है कि ऑनस्क्रीन इतनी ख़ूबसूरत दिखनेवाली ये दीवा, जब सचमुच में दुल्हन बनेंगी, तो कितनी ख़ूबसूरत लगेंगी. और हुआ भी कुछ ऐसा ही, जब ये पॉप्युलर टीवी एक्ट्रेसेस रियल लाइफ में दुल्हन बनीं, तो दर्शक इनके लुक्स के इस कदर दीवाने हुए कि इन्हें देखते ही रह गए. अपनी मनमोहक ख़ूबसूरती और ग़ज़ब की अदाकारी से सबको सम्मोहित करनेवाली इन एक्ट्रेसेस के रियल लाइफ ब्राइडल लुक्स देखकर आप भी तारीफ़ किए बिना नहीं रह पाएंगे.

आमना शरीफ

Aamna Sharif
Aamna Sharif

टीवी के पॉप्युलर शो ‘कहीं तो होगा’ शो में कशिश का किरदार निभानेवाली आमना शरीफ ने 2013 में डिस्ट्रीब्यूटर से प्रोड्यूसर बने अमित कपूर से शादी की थी. लाल लहंगे में सजी-धजी दुल्हन आमना ग़ज़ब की ख़ूबसूरत लग रही थीं. लाल लहंगे पर उन्होंने पीच कलर की चुनरी ओढ़ रखी थी, जो उन्हें बेहद गॉर्जियस लुक दे रहा था.

दृष्टि धामी

Drashti Dhami
Drashti Dhami

टीवी की मधुबाला यानी दृष्टि धामी की शादी 2015 में नीरज खेमका से मुम्बई के एक हॉटेल में बड़ी ही धूमधाम से हुई थी. दृष्टि ने मारसला कलर का क्लासिक लहंगा पहन रखा था, जिसमें उनकी खूबसूरती और भी निखरकर आ रही थी. उनकी प्यारी सी डायमंड नथ आज भी सभी को याद है.

काम्या पंजाबी

Kamya Punjabi
Kamya Punjabi

टेलीविज़न शोज में वैम्प यानी नेगेटिव किरदारों के लिए मशहूर पॉप्युलर एक्टर काम्या पंजाबी ने 2020 में शलभ डांग से शादी की. शादी में काम्या ने पारंपरिक चुनरी बेस्ड डिज़ाइनर लहंगा पहन रखा था, जिसमें वो बेहद हसीन लग रही थीं.

भारती सिंह

Bharti Singh
Bharti Singh

लाफ्टरक्वीन और होस्ट भारती सिंह ने 2017 में हर्ष लिम्बचिया से शादी की थी. इस ख़ास मौके पर भारती ने ब्लू और फुशिया पिंक लहंगा पहना था, कहने की ज़रूरत नहीं कि दुल्हन के रूप में भारती बहुत प्यारी लग रही थीं.

सनाया ईरानी

Sanaya Irani
Sanaya Irani

मिले जब हम तुम में गुंजन और इस प्यार को क्या नाम दूं में ख़ुशी का किरदार निभानेवाली सनाया ने 2016 में अपने ऑनस्क्रीन पार्टनर मोहित सहगल के साथ रोमांटिक बीच वेडिंग की थी. सनाया ने येलो और गोल्डन कलर का लहंगा पहना था और ट्रेडिशनल लाल चुनरी ओढ़ रखी थी.

अनीता हसनंदानी

Anita Hasanandani
Anita Hasanandani

काव्यांजलि और नागिन जैसे सीरियल्स से घर घर में अपनी पहचान बनानेवाली अनीता हसनंदानी ने 2013 में रोहित रेड्डी से शादी की. अनीता पंजाबी हैं, जबकि उनके पति आंध्र प्रदेश से हैं, इसलिए उनकी शादी में दोनों ही रीति रिवाज देखने को मिले. अनीता ने शादी के ख़ास मौके पर गोल्डन और व्हाइट कलर की साउथ इंडियन कांजीवरम साड़ी पहन रखी थी.

सरगुन मेहता

Sargun Mehta
Sargun Mehta

टीवी के पॉप्युलर कपल सरगुन मेहता और रवि दुबे 7 दिसंबर, 2013 को शादी के पवित्र बंधन में बंध गए. सरगुन ने मैरून और गोल्डन लहंगा पहन रखा था. इस पारंपरिक रंग में वो बेहद गॉर्जियस लग रही थीं.

दीपिका सिंह

Deepika Singh
Deepika Singh

दीया और बाती हम में संध्या का किरदार निभारकर घर घर में अपनी पहचान बनानेवाली दीपिका सिंह ने 2014 में अपने डायरेक्टर रोहित राज गोयल से शादी कर ली थी. शादी में दीपिका दुल्हन के पारंपरिक लिबास लाल और गोल्डन कलर का बेहद ख़ूबसूरत लहंगा पहना था, जिसमें उनकी खूबसूरती और निखर रही थी.

दीपिका कक्कड़

Deepika Kakkar
Deepika Kakkar

दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम ने 22 फरवरी, 2018 को एक दूसरे को क़ुबूल किया था. दीपिका ने पिंक कलर का शरारा पहना था, जिसमें उनकी ख़ूबसूरती और भी निखर रही थी. मुस्लिम रीति रिवाज से हुई यह शादी शोएब के घर भोपाल में हुई थी.

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कोरोना वायरस के प्रकोप से सारी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है. आम आदमी से लेकर सेलिब्रिटीज़ तक हर कोई इससे प्रभावित है. एक ओर दफ्तरों में ताले लग गए हैं, वहीं टीवी और फिल्म इंडस्ट्री का सारा कामकाज भी ठप्प पड़ गया है. लेकिन हर कोई सरकार की कोशिशों में साथ दे रहा है, क्योंकि जान है तो जहान है. शादियों पर भी इसका असर पड़ रहा है. कोरोना वायरस के कारण बॉलीवुड एक्ट्रेस रिचा चड्ढा और अली फजल जो अप्रैल में शादी के बंधन में बंधनेवाले थे, अब अक्टूबर में शादी करेंगे. वरुण धवन ने भी अपनी शादी पोस्टपोन कर दी है.

इस बारे में बात करते हुए रिचा और अली फजल के मैनेजर ने मीडिया को बताया कि कोरोना वायपस के कारण हालात को देखते हुए कपल ने शादी टालने का फैसला किया है और अब वे साल के आखिरी महीनों में शादी का प्लान बना रहे हैं. हम चाहते हैं कि सभी लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें. रिचा और अली किसी कीमत पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों की जान को खतरे में नहीं डालना चाहते.

मैनेजर ने आगे बात करते हुए कहा कि इन दिनों बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है. अली के परिवार के कुछ ओर कनाडा में रहते हैं और ट्रैवल रिस्ट्रिक्शन के कारण अप्रैल में शादी करना मुमकिन नहीं है. इसके साथ ही कपल यूके और यूएस से जुड़े इंडस्ट्री फ्रेंड्स को निमंत्रित करनेवाला था, वे अभी इन हालात में इंडिया नहीं आ सकते. फिलहाल के हालात को देखते हुए हम लोग अक्टूबर में शादी का मन बना रहे हैं. सारी चीज़ें, वैन्यू, आउटफिट्स वहीं रहेंगे.

रिचा और अली के साथ ही जिस एक और कपल की शादी पर गाज गिरी है, वो है वरुण धवन और नताशा दलाल. वरुण धवन (और नताशा दलाल से जुड़े सूत्रों ने उनकी शादी की जानकारी देते हुए बताया, “वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्होंने शादी को नवंबर तक टालने का फैसला किया है, इसके साथ ही शादी को थाइलैंड में करने का विचार बनाया गया है.” सूत्रों ने बताया कि वरुण और नताशा की शादी पहले भी थाइलैंड में ही होनी थी, लेकिन इसके बाद जोधपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग करने का प्लान किया गया, साथ ही मुंबई में भी एक छोटा सा समारोह करने पर विचार किया गया. हालांकि, कोरोनावायरस की खबर के बाद वरुण धवन और नताशा दलाल नवंबर में थाइलैंड में शादी कर सकते हैं. 

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रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ नवंबर में शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल रहते हैं, जबकि वैलेन्टाइन्स डे के दिन शादी करनेवाले 18-36% कपल्स के तलाक़ हो जाते हैं. आपकी शादी किस महीने में हुई है और आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी होगी, आइए जानते हैं.

Married Life

जनवरी

इस महीने में जिन लोगों की शादी होती है, उन पर कुंभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनका दांपत्य जीवन ख़ुशहाल रहता है. दोनों पार्टनर्स में आपसी समझ काफ़ी अच्छी रहती है. दोनों एक-दूसरे के प्रति वफ़ादार होते हैं. समय-समय पर इन कपल्स को रोमांटिक सरप्राइज़ेस और गिफ्ट्स मिलते ही रहते हैं.

लव टिप: हर रिश्ता उसे निभानेवाले पर निर्भर करता है, इसलिए अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए अपना सौ प्रतिशत दें.

फरवरी

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स की शादीशुदा ज़िंदगी को आप ‘इमोशनल जर्नी’ कह सकते हैं, क्योंकि दोनों ही पार्टनर्स एक-दूसरे के प्रति इमोशनल होते हैं. आप पर मीन राशि का प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आप एक-दूसरे के प्रति सारी ज़िम्मेदारियां निभाते हैं. कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि पति या पत्नी में से एक बहुत वफ़ादार होता है, पर दूसरा उतना वफ़ादार नहीं होता और रिश्ता बिखर जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में हुई स्टडी में पता चला है कि जो लव बर्ड्स वैलेंटाइन्स डे के दिन शादी करते हैं, उनके रिश्ते के टूटने के चांसेस 18 से 36% होता है.

लव टिप: जब भी आपको लगे कि रिश्ता कमज़ोर पड़ रहा है, तभी एक रोमांटिक हनीमून प्लान करें. अपने रिश्ते को ट्रैक पर लाने का इससे बेहतर उपाय नहीं हो सकता.

मार्च

अगर आपकी शादी इस महीने में हुई है, तो आपकी शादी पर मेष राशि का प्रभाव पड़ता है. आपका रिश्ता काफ़ी उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़रता है, जहां अच्छे समय के साथ-साथ आप दोनों बुरा समय भी देखते हैं. कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपको अपने पार्टनर का रवैया ही समझ में न आए. कल जिस बात पर वो आपसे सहमत थे, आज उसी चीज़ के लिए आपकी बहस हो जाए. छोटी-छोटी बातों पर इनकी बहस हो सकती है.

लव टिप: इतना याद रखें कि नोक-झोंक हर रिश्ते में होती है, इसलिए उसे मन में रखकर न बढ़ाएं. एक-दूसरे के व्यक्तित्व व विचारों को समझने का प्रयास ही आपके रिश्ते को मज़बूत बनाएगा.

अप्रैल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह महीना विवाह के लिए सबसे अनुकूल समय लेकर आता है. तभी तो आज भी ज़्यादातर शादियां अप्रैल के महीने में होती हैं. इस महीने शादी करनेवालों पर वृषभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी सेक्स लाइफ भी काफ़ी रोमांटिक होती है. वृषभ के प्रभाव के कारण कुछ पार्टनर्स में से एक बहुत डॉमिनेटिंग होता है, पर दूसरे के कूल होने के कारण रिश्ता आसानी से निभ जाता है.

लव टिप: अपने प्यार को जताने में ज़रा भी कंजूसी न करें. कभी चॉकलेट्स, कभी फूल, तो कभी प्रेमपत्र के ज़रिए समय-समय पर अपने प्यार को जताते रहें.

मई

इस महीने शादी करनेवालों पर मिथुन राशि का प्रभाव पड़ता है. जैसा कि इस राशि की ख़ूबी है, दो पहलू या दो रूप होने की, इस ख़ूबी का असर आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने शादी करनेवालों के रिश्ते के सफल होने की जितनी गुंजाइश होती है, उतनी ही गुंजाइश इसके असफल होने की भी होती है. मतलब या तो आप जन्म-जन्मांतर तक साथ निभानेवाले कपल बनते हैं या फिर जल्द ही अपनी-अपनी नई राह चुन लेते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि दो में से एक साथी का स्वभाव बहुत बुरा हो या फिर बहुत ही अच्छा हो.

लव टिप: अपने रिश्ते को सफल या असफल बनाना आप दोनों के हाथ में है. सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शादी को पूरे दिल से निभाएं. कभी कुछ बुरा लगे, तो भी रिश्ते को बचाने की पूरी कोशिश करें.

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Married Life
जून

प्यार-दुलार के साथ-साथ दया भाव इन कपल्स में कूट-कूटकर भरा होता है, तभी तो लोग इनकी सफल शादी और प्यार की मिसालें देते हैं. अगर आपकी शादी इस महीने हुई है, तो आप पर कर्क राशि का प्रभाव पड़ता है. ये कपल्स एक-दूसरे के साथ एक-दूसरे के परिवार को भी बख़ूबी संभालते हैं. इसके अलावा अपनी आनेवाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने की पूरी कोशिश करते हैं. कुल-मिलाकर कहें, तो ये सबसे ज़िम्मेदार और केयरिंग कपल्स होते हैं.

लव टिप: जब भी पार्टनर आपके या परिवार के लिए कुछ ख़ास करता है, तो उसके प्रयासों की सराहना करें. उन्हें जताएं कि वो आपके लिए कितने बहुमूल्य हैं.

जुलाई

इस महीने शादी करनेवालों पर सिंह राशि का प्रभाव पड़ता है. आप दोनों ही अपने रिश्ते को सफल बनाने के लिए अपना सौ प्रतिशत देते हैं और उसमें पूरी तरह सफल भी होते हैं. इस राशि का ऐसा प्रभाव है कि आप एक-दूसरे के प्रति हमेशा आकर्षण महसूस करते हैं. एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं. आपका शाही अंदाज़ आप अपने पार्टनर कोे भी देते हैं, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी रौनक़ से भरपूर होती है. आप अपने शादीशुदा रिश्ते से हमेशा संतुष्ट रहते हैं.

लव टिप: सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए हमेशा बेडरूम में कुछ नया ट्राई करें. आप चाहें, तो दोनों किसी एडवेंचर ट्रिप पर भी जा सकते हैं. यह आपके रिश्ते में नई जान डाल देगा.

अगस्त

एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ इस महीने शादी करनेवाले कपल्स को बच्चे बहुत पसंद होते हैं, इसीलिए वो दो से ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं. इन्हें बड़ा परिवार  अच्छा लगता है. इस महीने शादी करनेवालों पर कन्या राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी ज़िंदगी में कई परेशानियां भी आती हैं, पर दोनों मिलकर उनका समाधान निकाल लेते हैं. अगर ये एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखें, तो इनका रिश्ता बहुत मज़बूत साबित होता है.

लव टिप: पतियों के लिए बहुत ज़रूरी है कि ‘तुम’ या ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ शब्द का इस्तेमाल ज़्यादा करें. ‘हमें ऐसा करना चाहिए, हमारे लिए यह सही होगा…’ जैसे वाक्यों का ज़्यादा उपयोग करें. पत्नी को कभी अलग-थलग पड़नेवाली भावना का एहसास न होने दें.

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Married Life
सितंबर

अगर आपकी शादी भी इस महीने में हुई है, तो आप पर तुला राशि का प्रभाव रहता है. तुला की ख़ूबियों के कारण ये कपल काफ़ी बैलेंस्ड रहते हैं और इसीलिए ‘परफेक्ट कपल’ कहलाते हैं. इनके बीच शायद ही कभी बड़ा झगड़ा होता हो. हर तरह के विवाद को ये आपसी सहमति से सुलझाते हैं. दोनों के बीच का तालमेल ही इनकी ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का राज़ है.

लव टिप: हर रोज़ रोमांस के लिए थोड़ा समय निकालें. एक-दूसरे को यूं ही निहारना, बांहों में भरना, चुपके से किस कर लेना… इन छोटी-छोटी शरारतों से लाइफ में रोमांस बनाए रखें.

अक्टूबर

इस महीने शादी करनेवालों के वैवाहिक जीवन पर वृश्‍चिक राशि का प्रभाव पड़ता है. वृश्‍चिक राशि के गुणों के प्रभाव के कारण इनकी सेक्स लाइफ बेहद रोमांटिक होती है. ये कपल एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार और आकर्षण को बिल्कुल छिपाते नहीं. ज़िंदगी को खुलकर जीने के इनके फलस़फे का असर इनकी सक्सेसफुल मैरिड लाइफ में नज़र आता है. इनकी एक और ख़ूबी है कि ये किसी भी विपरीत परिस्थिति में पार्टनर को अकेला नहीं छोड़ते.

लव टिप: ‘तुम कितनी अच्छी हो…’ ‘मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं…’ ‘मैं समझता हूं…’ ‘मुझे माफ़ कर दो…’ ‘थैंक यू जी…’ ये वो वाक्य हैं, जो आपके रिश्ते में मिठास भरते हैं. रोज़ाना इन शब्दों का इस्तेमाल करें और देखें, किस तरह आपकी मैरिड लाइफ में मिठास बनी रहती है.

नवंबर

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल या यूं कहें ‘हैप्पीएस्ट कपल’ माने जाते हैं. इन पर धनु राशि का प्रभाव होता है, जिसके कारण ये काफ़ी संवेदनशील होते हैं. एक-दूसरे की कमियों और ख़ामियों को समझकर रिश्ता निभा लेना ही इनके रिश्ते की ख़ूबी है. ये कपल अपने प्यार को पहली प्राथमिकता देते हैं.

लव टिप:  रोज़ाना ऑफिस से आने के बाद एक-दूसरे को गले लगाएं. शादी के पहलेवाले रोमांच को बनाए रखने के लिए शादी के बाद भी हर महीने या दो महीने में डेट पर ज़रूर जाएं. प्यार के ख़ूबसूरत एहसास से अपने रिश्ते को सराबोर रखें.

दिसंबर

इस महीने शादी करनेवालों पर मकर राशि का प्रभाव रहता है. ऐसा देखा गया है कि सबसे रोमांटिक कपल्स दिसंबर में शादी करते हैं. सुरक्षित भविष्य की चाह में ये सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बहुत तवज्जो देते हैं, जिससे कभी-कभी एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते, पर प्यार हमेशा इनकी पहली प्राथमिकता बना रहता है.

लव टिप: उतार-चढ़ाव हर क्षेत्र में लगा रहता है, इसलिए फाइनेंस संबंधी मामलों में कभी ज़िद न करें.  रोज़ाना 10 मिनट का ‘वी टाइम’ ज़रूर निकालें. एक-दूसरे से दिनभर की बातें और क़िस्से शेयर करें.

– संतारा सिंह

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यह भी पढ़ेवेडिंग इंडस्ट्री में करियर की संभावनाएं (Career Opportunities In The Wedding Industry)

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ऊषा गुप्ता

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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शादी के बंधन में बंधनेवाले हर कपल के मन में सुहागरात को लेकर कई हसीन ख़्वाब पलते रहते हैं. नई ज़िंदगी की पहली रात को लेकर वैसे तो ज़्यादातर लोग एक्साइटेड रहते हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं, जिनके मन में संकोच और आशंकाएं भी होती हैं. इसमें कोई ग़लत बात नहीं है. यह बिल्कुल सामान्य है. सुहागरात को लेकर दिमाग़ में स़िर्फ सेक्स का ख़्याल आता है, लेकिन अगर कोई कपल सही तरी़के से सेक्सुअल रिलेशन नहीं बना पाता, तो उन्हें लगता है कि उनमें ही कोई कमी है, जबकि ऐसा बहुत-से कपल्स के साथ होता है. सेक्स एक कला है, जो तर्जुबे से सीखी जाती है, इसलिए सुहागरात के नाम पर स्ट्रेस न लें. हम यहां इसी से जुड़े कुछ सुपर सेक्स टिप्स दे रहे हैं, ताकि आपकी सेक्स लाइफ सुपर रोमांंटिक बनी रहे.

Sex Tips For First Night

– दिनभर शादी की रस्मों के कारण ज़्यादातर कपल्स थक जाते हैं और रात को इन्वॉल्व नहीं हो पाते. हो सकता है आपके साथ भी ऐसा हुआ हो, इसलिए रात को ही संबंध बनाना है, इसके लिए जल्दबाज़ी न करें. थकान मिटाने के लिए भरपूर नींद लें और सुबह उठकर अपने प्यार से अपने पार्टनर को सराबोर कर दें.

– सुहागरात रोमांटिक हो, इसके लिए आपको शादी के दिन ही थोड़ी फ्लर्टिंग करनी होगी. एक-दूसरे को छेड़ें, इशारों में बातें करें और देखिए कैसे आपका मूड सेट होता है.

– सुहागरात है, इसलिए स़िर्फ आपकी चलेगी, ऐसा न सोचें. अपने पार्टनर की पसंद-नापसंद के बारे में जानें और उसे तवज्जो दें. याद रखें, ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी की नींव सुहागरात को ही पड़ती है, इसलिए अपने पार्टनर को बिल्कुल भी ऐसा महसूस न होने दें कि आप अपनी भावनाएं उन पर थोप रहे हैं.

– सुहागरात से पहले अगर कुछ सेक्स बुक्स पढ़ेंगे, तो आपको अपने पार्टनर को ख़ुश करने के कई बेहतरीन आइडियाज़ भी मिल जाएंगे. पर कोई भी सेक्स बुक न पढ़ें. बुक स्टोर से अच्छी किताब ख़रीदें और उसे समझें.

– बेड पर आते ही एक्शन की उम्मीद किए बिना एक-दूसरे से बातें करें. पहली रात को लेकर एक-दूसरे ने क्या सोच रखा था, इस बारे में बात करें.

– पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए आप सेक्सी लिंगरी ट्राई कर सकती हैं. आजकल मार्केट में बहुत सेक्सी लिंगरीज़ मिलती हैं. इनका इस्तेमाल करके आप अपने पार्टनर को सरप्राइज़ दे सकते हो.

– ख़ासतौर से महिलाओं को रिलैक्स रहने की ज़रूरत है. नई जगह और नए लोगों के बीच उनके मन में कई भावनाएं आती रहती हैं, ऐसे में सेक्सुअल रिलेशन के बारे में वो सोच भी नहीं पातीं, लेकिन अगर आप रिलैक्स रहेंगी, तो बेहतर महसूस करेंगी और अपने पार्टनर के साथ अच्छी तरह रेस्पॉन्ड करेंगी.

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Sex Tips For Wedding Night

– बॉलीवुड फिल्मों जैसी सुहागरात की कल्पना करेंगे, तो अपने साथ-साथ अपने पार्टनर को भी निराश करेंगे. ख़ुद पर परफेक्ट सेक्सुअल रिलेशन का दबाव न बनाएं. बस, पार्टनर को प्यार से छू लें, वो ख़ुद निहाल हो जाएगा.

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन बनाने में असहजता होती ही है, इसलिए लुब्रिकेंट अपने पास ज़रूर रखें. यह आपको रिलेशन बनाने में मदद करेगा.

– अगर आप पहली ही बार में ऑर्गैज़्म की उम्मीद कर रही हैं, तो शायद ऐसा न हो. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपने सेक्स एंजॉय नहीं किया. अपने पार्टनर को पा लेने की ख़ुशी कपल्स के चेहरे पर साफ़ दिखाई देती है. इसलिए ऑर्गैज़्म को दिमाग़ से निकाल दें और स़िर्फ पार्टनर पर ध्यान लगाएं.

– भले ही सुहागरात में संबंध बने या ना बने, फिर भी यह रात आप दोनों पूरी जिंदगी नहीं भूलेंगे. इसलिए हंसे, मुस्कुराएं, खिलखिलाएं और एक-दूसरे को जीवनभर के लिए अपना बना लें.

– अनीता सिंह

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सगाई से शादी (Marriage) तक का समय लड़के-लड़की दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण होता है. भावी जीवन को लेकर जहां मन में कई रूमानी ख़्वाब व ख़्वाहिशें होती हैं, तो कुछ अनकही आशंकाएं और ऊटपटांग सवाल भी दिलोदिमाग़ में गूंजते रहते हैं. कौन-से हैं वे ऊटपटांग या क्रेज़ी सवाल, आइए जानते हैं.

Marriage Problems

लड़कियों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी से पहले हर लड़की के मन में अपने भावी जीवन को लेकर एक तस्वीर बसी होती है, जहां सब कुछ बहुत रोमांटिक और परफेक्ट होता है, पर शादी से पहले मन में कुछ के्रज़ी सवाल भी कुलबुलाते हैं. कभी उसकी आदतों को लेकर, तो कभी अपनी. हो सकता है, आपके दिमाग़ में भी ये सवाल आए हों.

  1. क्या ये मेरे नखरे उठा पाएगा?

–    आमतौर पर लड़कियां नखरीली ही होती हैं, पर वो सभी से नखरे नहीं करतीं. उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि कौन उनके नखरे बर्दाश्त कर सकता है और कौन नहीं.

–     बात जब शादी की होती है, तो उनके दिमाग़ में यह सवाल ज़रूर आता है कि क्या ये (भावी पति) मेरे नखरे उठा पाएगा? इसका जवाब जानने के लिए वो कभी-कभी अटपटी हरकतें भी करती हैं, जैसे- अपनी सहूलियत की जगह और समय के मुताबिक़ लड़के को मिलने बुलाना, ज़िद करके कुछ ख़रीदवाना, खाने-पीने में ज़िद करना आदि.

– यक़ीनन आपने भी शादी से पहले अपने मंगेतर के साथ ऐसी कोई ज़िद ज़रूर की होगी. इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है. हर लड़की शादी से पहले श्योर होना चाहती है कि उसने जिस लड़के से शादी का निर्णय लिया है, वो पूरी तरह सही है या नहीं.

  1. नाराज़ हो गया, तो कैसे मनाऊंगी?

– शादी के रिश्ते में हंसी-मज़ाक, नोंक-झोंक और ताने-उलाहने तो आम बात हैं, पर कभी-कभी हंसी-मज़ाक या शरारत भारी भी पड़ जाती है, ऐसे में आपको उन्हें मनाने के लिए भी अभी से तैयार रहना होगा.

–  ‘रूठे-रूठे पिया मनाऊं कैसे…’  अच्छाजी मैं हारी चलो मान जाओ ना…’ ‘देखो रूठा ना करो, बात नज़रों की सुनो…’ जैसे कुछ एवरग्रीन बॉलीवुड गाने यहां आपकी मदद करेंगे. उन्हें गाकर सुनाएं या फिर गाना उन्हें व्हाट्सऐप कर दें. आपकी इस अदा पर वो ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह पाएंगे.

– थोड़ा रोमांटिक हो जाएं, तो गुलाब का फूल या चॉकलेट या फिर एक प्यारा-सा लव लेटर आपका काम बख़ूबी कर देंगे.

  1. क्या मुझे अपना ब्लैंकेट शेयर करना पड़ेगा?

रिंकू बचपन से अपने ब्लैंकेट को लेकर बहुत पज़ेसिव थी. कोई और अगर उसे इस्तेमाल कर ले, तो वो हंगामा कर देती थी, लेकिन जब उसकी शादी तय हुई, तो सबसे पहले उसके दिमाग़ में जो क्रेज़ी सवाल आया, वो ब्लैंकेट का ही था. हालांकि उसने इसका तोड़ निकाला. पति को इतने प्यार से अपनी बात समझाई कि उन्होंने कभी उसके और उसके ब्लैंकेट के बीच आने की कोशिश नहीं की.

–     रिंकू की तरह ही बहुत-सी लड़कियां अपनी चीज़ों को लेकर पज़ेसिव रहती हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि शादी के बाद आपको हर जगह एडजस्टमेंट्स करने पड़ें. इस बारे में अपने पार्टनर से खुलकर बातें करें.

–     किसी भी चीज़ को लेकर मन में कोई शंका न रखें. जो भी क्रेज़ी सवाल मन में आएं, पार्टनर से डिस्कस कर लें.

  1. कहीं मम्मी से मेरी शिकायत कर दी तो?

–     लड़कियों को अपनी रेप्युटेशन सबसे ज़्यादा प्यारी होती है. ख़ासकर शादी के बाद ससुराल में वो चाहती हैं कि हर कोई उनकी तारी़फ़ करे.

–     ऐसे में मम्मी से अपनी शिकायत को लेकर वो सबसे ज़्यादा डरती हैं और यह बात सब लड़कों को पता होती है, तभी तो शादी के बाद ज़्यादातर पति यही धमकी देते हैं कि मम्मीजी को बता दूं…

–     ग़लतियां तो सभी से होती हैं, आपसे भी होंगी ही, इसलिए इसे हौवा न बनाएं. बस, अपनी सासूमां को पटाकर रखें. ऐसे में वो ही आपकी ढाल बनेंगी.

  1. कहीं मेरी पहचान खो न जाए?

–     सबसे पहले तो इस बात को अपने दिमाग़ से निकाल दें कि शादी आपकी पहचान आपसे छीन लेगी, बल्कि शादी के बाद तो आपको कई नए रिश्ते, नाम और पहचान मिलती है.

–     अगर मायके के निक नेम से ससुराल में कोई नहीं बुलाता, तो उदास न हों. पतिदेव ने आपको कोई लव नेम और ननद-देवर ने कुछ नए निक नेम दिए होंगे, तो उन्हें एंजॉय करें.

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Marriage Tips

लड़कों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी के नाम से जितना डर लड़कियों को लगता है, उससे कम लड़कों को नहीं लगता. उनके मन में भी शादी को लेकर कई टेढ़े-मेढ़े सवाल आते रहते हैं.

  1. क्या मैं भी जोरू का ग़ुलाम बन जाऊंगा?

–     लड़कों में जोरू के ग़ुलाम का ऐसा हौवा है कि कोई भी अपनी पहचान इस रूप में नहीं चाहता.

–     होनेवाली पत्नी की देखभाल और  इच्छाओं का ख़्याल रखना आपकी ज़िम्मेदारी है, पर उसे तवज्जो देने में दूसरों को अनदेखा न करें.

–     एक अच्छा बेटा होने के साथ-साथ आपको एक अच्छा दामाद भी बनना चाहिए, पर इस चक्कर में बेटे की ज़िम्मेदारियों को न भूल जाएं.

  1. नाराज़ होकर मायके चली गई तो?

–    यह सवाल अक्सर उनके दिमाग़ में आता है, जिनकी ससुराल उसी शहर में होती है. कहीं कुछ गड़बड़ हो गई और यह बोरिया-बिस्तर लेकर मायके चली गई, तो मैं क्या करूंगा?

–    जाने का सवाल तो तब पैदा होगा, जब कोई गड़बड़ होगी. रिश्ते में प्यार और अपनापन बनाए रखें, यक़ीनन आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा.

–     शादी के पहले से ही उनके विचारों और पसंद-नापसंद को जानने की कोशिश करें.

–     अगर कभी ग़लती हो भी गई, तो ‘सॉरी’ कहने में झिझकें नहीं.

  1. कहीं मुझे ममाज़ बॉय न समझे?

–    आमतौर पर जो लड़के अपनी हर छोटी-बड़ी ज़रूरतों के लिए मां पर पूरी तरह आश्रित होते हैं, उनके मन में यह सवाल ज़रूर आता है.

–     अगर आप यह टैग नहीं चाहते, तो थोड़ा इंडिपेंडेंट बन जाएं और शादी से पहले ही अपने कुछ काम ख़ुद करना शुरू कर दें.

–     खाने के बाद थाली उठाकर बेसिन में रखना, कपड़े वॉशिंग मशीन में डालना, अपनी आलमारी को व्यवस्थित रखना, जो चीज़ जहां से उठाई, उसे वहीं वापस रखना जैसी आदतें सभी लड़कों में होनी चाहिए.

  1. मेरी चीज़ों पर कब्ज़ा न कर ले?

–     पति-पत्नी पार्टनर्स होते हैं यानी आपकी सभी चीज़ों पर पत्नी का पूरा हक़ होता है. शादी से पहले ही इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाएं.

–     एकाधिकार की भावना को छोड़कर शेयरिंग करना सीखें.

–     अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि शादी के बाद भी आपका कमरा बैचलर जैसा रहेगा, तो यह ज़्यादती ही होगी.

–     शादी से पहले ही कमरे की सजावट और डेकोर के बारे में अगर होनेवाली पत्नी से बात करें, तो उसे अच्छा फील होगा.

  1. अपने दोस्तों से मिलाना चाहिए या नहीं?

–   अपने दोस्तों के बारे में लड़कों को अच्छे से पता होता है, स़िर्फ उनकी ख़ूबियां ही नहीं कमियां भी वो बख़ूबी जानते हैं, इसीलिए बात जब होनेवाली पत्नी को दोस्तों से मिलाने की होती है, तो वो सोच में पड़ जाते हैं, मिलाऊं या नहीं?

–     दोस्तों से मिलाया और उन्होंने शेखी बघारने के चक्कर में कोई पोल खोल दी, तो ज़िंदगीभर ताने सुनने पड़ सकते हैं.

–     आप बेहिचक पूरी टोली को होनेवाली पत्नी से मिलाएं. अगर कुछ दोस्त शादीशुदा हैं, तो यक़ीनन आपकी रेप्यूटेशन का पूरा ख़्याल रखेंगे और जमकर तारीफ़ भी करेंगे.

– संतारा सिंह 

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नवीन व सीमा एक ही कॉलेज में थे. नवीन का आकर्षक व्यक्तित्व, सहायक स्वभाव, एक ही मुलाक़ात में दूसरों को अपना बना लेने का अंदाज़ क़ाबिले-तारीफ़ था, इसीलिए हर लड़की उसका साथ पसंद करती थी. दोस्तों के बीच भी वह काफ़ी लोकप्रिय था. जब नवीन की रुचि सीमा के प्रति बढ़ी तो उनकी दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई और झटपट शादी तय हो गई, किन्तु विवाह के बाद यही क़ाबिले तारीफ़ अंदाज़ और समाज सेवा का रवैया दोनों की तक़रार का कारण बना. सीमा नवीन से घरेलू ज़िम्मेदारियों की अपेक्षा करती थी, लेकिन नवीन से जग भलाई छूटती नहीं थी.

Marriage Material

राखी और निरंजन अच्छे दोस्त थे. ऑफ़िस के बाद दोनों रोज़ ही कभी कॉफ़ी हाउस, तो कभी रेस्टॉरेन्ट में बैठते. निरंजन अकेला रहता था. राखी भी माता-पिता की स्वतन्त्र विचारों वाली इकलौती बेटी थी. उनके लिए घर से ज़्यादा कैरियर महत्वपूर्ण था. दोस्ती गहरी होती गई. एक-दूसरे का साथ बहुत प्रिय था, इतना कि लगा एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं सकेंगे. परिवारों को भी कोई ऐतराज नहीं हुआ तो सहर्ष शादी के बंधन में बंध गए. कहा-सुनी तब शुरू हुई जब निरंजन रेस्टॉरेन्ट के बजाए घर के खाने को ज़्यादा पसंद करने लगा. वह चाहता था कि राखी गृहस्थी में भी थोड़ी रुचि ले, किन्तु राखी ने तो अपने घर में पहले कभी घरेलू कामों में रुचि ली ही नहीं थी. फिर तो छोटी-छोटी बातों पर भी तू-तू मैं-मैं होने लगी और इस रिश्ते का अंत हुआ तलाक़ के साथ.

जब इस तरह की बातें सामने आती हैं तब पछतावा होता है अपने चुनाव पर. तब लगता है जल्दबाज़ी तो नहीं कर दी निर्णय लेने में. दरअसल, प्यार का नशा ऐसा होता है कि साथी में कुछ ग़लत या कमी दिखाई नहीं देती है और यदि कुछ महसूस भी होता है तो साथी का साथ पाने की प्रबल चाह के आगे सब कुछ बौना हो जाता है. पहले विवाह हमेशा माता-पिता द्वारा तय किए जाते थे. लड़के से अधिक घर-परिवार को महत्व दिया जाता था. मुश्किलें तब भी आती थीं, लेकिन उस समय समझौता करना और आजीवन इस बंधन को निभाने की भावना सर्वोपरि होती थी. बेमेल विवाह भी निभाए जाते थे और समझौतों के साथ निभाते-निभाते समय के साथ अनुकूलता और परिपक्वता भी आ जाती थी. निभाना स्त्री का प्रथम गुण था भले ही वह उसकी मजबूरी थी, क्योंकि उस समय वह आर्थिक रूप से स्वतन्त्र नहीं थी. उनके पास इतना कोई विकल्प नहीं होता था. किन्तु अब ऐसा नहीं है, बल्कि लड़कियां ख़ुद अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव कर रही हैं. वे शारीरिक रूप-रंग से ़ज़्यादा मानसिक स्तर पर मेल चाहती हैं. प्रेम-विवाह न भी हो तो आज शादी से पहले मिलना-जुलना, एक-दूसरे के विचारों को जानना, साथ समय गुज़ारना दोनों परिवारों को भी मान्य होने लगा है. इसके बावजूद कई बार विवाह के बाद बहुत कुछ ऐसी बातें सामने आती हैं, जिनके बारे में पहले ज़रा भी ख़याल नहीं आया होता. विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण विवाहित जीवन का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि आप अकेली नहीं हैं. परस्पर अनुकूलता, परिपक्वता और विश्‍वास ज़रूरी है इस बंधन में, अतः ज़रूरी हो जाता है यह आंकना कि जिस व्यक्ति के साथ आप ज़िंदगी गुज़ारने का फैसला ले रही हैं, वह शादी जैसे पवित्र बंधन के योग्य है या नहीं?

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Marriage Material

– लेकिन यह भी ज़रूरी है कि प्रेमी के बारे में अपनी राय बनाने से पहले आप अपना आत्मावलोकन भी करें, जैसे- अपने आपको जानना, अपने स्वभाव, अपनी क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं को पहचानना, अपनी अपेक्षाओं को समझना, शादी की मैच्योरिटी को गम्भीरता से समझना और उससे जुड़ी ज़िम्मेदारियों को स्वीकारना.

– शादी एक पवित्र बंधन ही नहीं है, बल्कि यहां अनेक समझौते और कभी-कभी त्याग व समर्पण भी करने पड़ते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि विचारों में समानता या अनुकूलता के साथ ही निभाना बेहतर होता है, किन्तु ऐसा नहीं है. अनुकूल स्वभाव के बावजूद टकराव हो ही जाता है. अहम का टकराव हो ही जाता है और कभी-कभी प्रतिकूल विचारधाराएं भी परिपूरक बन ज़िंदगी आसान बना देती हैं. जैसे यदि आप किन्हीं स्थितियों में कमज़ोर हैं तो साथी वहां पूरक बन जाए. उसे आपसे प्रेम है, आप पर भरोसा है और आपको समझता है, तो शादी का यह रिश्ता ख़ूबसूरत बन जाता है.

– विवाह की पहली शर्त है प्यार व विश्‍वास के साथ उसके गुण-अवगुण सहित स्वीकारना, साथ ही उसके परिजन व प्रियजनों को भी स्वीकारना. जिसके साथ जीवन बिताना है, उसे शर्तों में न बांधें, न ही उसकी शर्तें स्वीकार करें. प्रेमी या बॉयफ्रेंड अकेला होता है, किन्तु विवाह के बाद घर-परिवार होता है, हर रिश्ते से जुड़ना होता है, हर किसी के प्रति ज़िम्मेदारियां निभानी होती हैं.

– किसी भी रिश्ते या संबंध के निर्वाह में कम्यूनिकेशन यानी बातचीत अहम भूमिका रखती है, अतः बॉयफ्रेंड के साथ हर एक विषय पर स्पष्ट बात करें. उसके विचारों को जानें, अपनी भावनाओं को व्यक्त करें, उसकी प्रतिक्रिया महसूस करें. यदि स्वयं निर्णय ले पाने में दुविधा है तो किसी मैच्योर व्यक्ति या काउंसलर की सलाह भी ली जा सकती है. यदि व्यक्ति प्यार का वास्ता देकर अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है या आपके प्यार में पागल हो अपने परिवार को छोड़ देने की बात करता है तो याद रहे, ये स्थिति न तो सामान्य है, न व्यावहारिक. आगे निश्‍चय ही परेशानियां आ सकती हैं. जो अब आपके लिए माता-पिता को छोड़ने की बात करता है, वह कल आपको भी छोड़ सकता है. कोई पति-पत्नी परिवार-समाज से दूर दुनिया बसा कर ख़ुश नहीं रह सकते हैं, बल्कि इससे तनाव व कुंठा महसूस होने लगती है, फिर शुरू होने लगता है एक-दूसरे पर आरोपों व प्रत्यारोपों का सिलसिला.

– विवाह का सच्चा सुख है केयरिंग व शेयरिंग में. साथी के साथ हर व्यवहार में सहजता महसूस होनी चाहिए. चाहे अपनी समस्या शेयर करनी हो या अपनों को केयरिंग की ज़रूरत हो. एक-दूसरे के अलावा आपकी ज़िंदगी में अपनों के लिए भी जगह होनी चाहिए. मेरा-तुम्हारा न होकर हर स्थिति मे ङ्गहमाराफ भाव होना चाहिए. एक-दूसरे को बदलने के बजाय एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए.

– विचारों में समानता, ज़िंदगी के प्रति नज़रिया, घर-परिवार या भविष्य के प्रति दृष्टिकोण के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण के प्रति भी अपने बॉयफ्रेंड की प्लानिंग को जानने की कोशिश करें. प्यार में आसमान से तारे तोड़े जा सकते हैं, किन्तु शादीशुदा ज़िंदगी के लिए ठोस धरातल चाहिए. पैसों के बिना ज़िंदगी नहीं चलती. पैसों से ख़ुशियां नहीं पाई जा सकतीं, लेकिन पैसों से ही सुख के साधन जुटाए जा सकते हैं और सुख के माध्यम से आनंद की अनुभूति होती है.

– साथी का चरित्र जानना भी बहुत ज़रूरी है. चरित्र उसकी संगत, उसके व्यवहार, उसके अंदाज़ आदि से आसानी से पता लग सकता है, बस आपको अपनी सोच पर, प्यार के एहसास पर भरोसा होना चाहिए. शादी का ़फैसला लेना है, जीवनभर किसी का प्यार पाना है, उसे बनाए रखना है, फिर जल्दबाज़ी क्यों? सोच-समझकर निर्णय लें कि क्या वाकई आपका बॉयफ्रेंड ऐसा है कि उसके साथ आप ज़िंदगीभर निभा पाएंगी.

– वैसे भी विवाह नामक संस्था से आज की पीढ़ी का विश्‍वास उठता-सा जा रहा है. काफ़ी लोगों के लिए शादी ज़िंदगीभर का सामाजिक बंधन नहीं रह जाता है, बल्कि अब विवाह व्यक्तिगत परिपूर्णता के साधन के रूप में देखा जाता है. साथी यदि अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता है, तो बंधन को निभाते जाना मूर्खता समझी जाती है, अतः ज़रूरी है कि इस बात को पहले ही समझ लिया जाए कि गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड परस्पर एक-दूसरे की कसौटी पर खरे उतर पाएंगे या नहीं.

– प्रसून भार्गव

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आज समाज में बड़ी उम‘ की कुंवारी लड़कियां जब मज़े से अपनी ज़िंदगी जीती नज़र आती हैं, तो बड़े-बुज़ुर्गों के चेहरे पर आश्‍चर्य की लकीरें खिंच आती हैं. भले ही वे मुंह से कुछ न कहें. वाकई यह एक बड़ा बदलाव है. समाज में आज 25-30 वर्ष की बिन ब्याही लड़कियां आत्मसम्मान के साथ जी रही हैं. अब न उनकी शादी चिंता का विषय बनती है, न ही उनकी मौज-मस्ती पर प्रश्‍न उठते हैं.

Married

हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, ज़्यादातर शहरी लड़कियों को अब शादी की जल्दी नहीं है. उन्हें करियर बनाना है. पैरेंट्स भले ही उनकी शादी की चिंता करें, लेकिन लड़कियां न तो इस बात से चिंतित हैं, न ही किसी प्रकार का अपराधबोध महसूस करती हैं, बल्कि अपने कुंवारेपन को ख़ूब एंजॉय करती हैं और शादी के मंडप में क़दम रखने से पहले विवाहित जीवन के हर पहलू पर भलीभांति विचार करना चाहती हैं. उनके लिए नारी जीवन का एकमात्र लक्ष्य शादी नहीं है. संभवतः पढ़ी-लिखी बेटियों की इस सोच से जाने-अनजाने पैरेंट्स भी सहमत होने लगे हैं और धीरे-धीरे समाज भी इसे स्वीकारने लगा है.

बदलाव कब और कैसे आया?

समाजशास्त्रियों के अनुसार, यदि लड़कियों के दृष्टिकोण पर ध्यान दिया जाए तो उनमें विवाह की जल्दी न होने के कई ठोस कारण हैं, जैसे- शिक्षा सबसे प्रमुख कारण है लड़कियों का शिक्षित होना. शिक्षा ने न स़िर्फ लड़कियों को, बल्कि समाज की सोच को भी परिवर्तनशील व व्यापक नज़रिया प्रदान किया है.

आत्मनिर्भरता

शिक्षा के कारण लड़कियों की विचारशक्ति व सोच में बदलाव आया है, उनमें आत्मविश्‍वास बढ़ा है. आत्मनिर्भर होने की आकांक्षा जागृत हुई है.

आर्थिक स्वतंत्रता

इसने लड़कियों को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बना दिया है. उन्हें शादी से ़ज़्यादा अपने करियर पर फोकस करना महत्वपूर्ण लगता है. कई लड़कियां तो परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं. ऐसे में शादी का ख़्याल ही नहीं आता है.

बेमेल विवाह

समाज या परिवार में हुए बेमेल विवाहों ने भी लड़कियों की सोच बदली है. शादी भले ही देर से हो, लेकिन साथी ऐसा हो जिसके साथ ज़िंदगी की सार्थकता बनी रहे, सामंजस्य बना रहे, उचित तालमेल के साथ भावी जीवन ख़ुशहाल रहे.

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Married Goals
टूटते रिश्ते

‘चट मंगनी पट ब्याह’ की सोच में आज की पीढ़ी विश्‍वास नहीं रखती है. आए दिन होनेवाले तलाक़ की ख़बरों ने भी शादी के प्रति उनकी भावनाओं को बदल दिया है.

एकल परिवार

छोटे-छोटे परिवारों में (जहां स़िर्फ एक बेटी है) बेटियां पैरेंट्स की देखभाल की ज़िम्मेदारी को समझते हुए शादी का ़फैसलाजल्दी नहीं लेना चाहती हैं,  बल्कि उन्हें ऐसे साथी की तलाश होती है, जो पैरेंंट्स की ज़िम्मेदारी के प्रति उनकी भावनाओं को समझे.

कमिटमेंट का डर

यंग जनरेशन आज कमिटमेंट से डरती है, किसी भी बंधन से कतराती है. उनकी अपनी वैल्यूज़ हैं, अपनी पसंद है. इसलिए इस मामले में वे ज़रा भी जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते.

बड़ी उम में भी नॉर्मल चाइल्ड बर्थ

पहले कहा जाता था कि 25-30 तक की उम‘ में गर्भधारण कर लिया जाए तो हेल्दी बच्चा पैदा होता है और बड़ी उम‘ में गर्भधारण करने से होनेवाले शिशु के असामान्य होने की संभावना बढ़ जाती है. इस कारण समय से शादी करना ज़रूरी माना जाता था, लेकिन मेडिकल साइंस की नई टेक्नोलॉजी के चलते अब यह कोई बड़ी समस्या नहीं रह गई है.

पाश्‍चात्य प्रभाव

टीवी और इंटरनेट की दुनिया ने पूरे विश्‍व की संस्कृति को एक कर दिया है. आज हम संस्कृति भी एक्सचेंज कर रहे हैं. शादी को अब उम‘ से नहीं जोड़ा जाता है. 35-40 की उम‘ में भी आज शादियां होती हैं.

लड़के-लड़कियों की दोस्ती

आज यंग एज से ही इमोशनल सपोर्ट मिलने लगता है. पहले जिन भावनाओं का पूरक जीवनसाथी हुआ करता था, उसके लिए आज गर्लफ‘ेंड व बॉयफ‘ेंड हैं.

आदर्श साथी की तलाश

लड़कियों में मैच्योरिटी बढ़ गई है, लेकिन सहनशक्ति, त्याग व बलिदान जैसी भावनाएं कम हो रही हैं. वो ऐसा साथी चाहती हैं, जो उन्हें समझे. पैसा, स्टेटस जैसी चीज़ों के बावजूद वे साथी से इमोशनल सपोर्ट चाहती हैं.

इन कारणों के अतिरिक्त कुछ व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं, जिनकी वजह से शादियां देर से होने लगी हैं. दूसरी ओर पैरेंट्स की सोच में भी बदलाव आया है, जैसे- कोई मां यदि अपने जीवन में मनचाहा नहीं कर पाई है तो उसकी पूरी कोशिश होती है कि उसकी बेटी उसकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सके. इसके लिए वह उसे हर प्रकार से सहयोग देती है.

– आज पैरेंट्स को अपने बच्चों पर भरोसा है. उनकी तरफ़ से भी बच्चों पर कोई प्रेशर नहीं होता है. पैरेंट्स बच्चों को पढ़ाई व करियर के प्रति प्रेरित करते हैं. जब तक लड़के-लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते, शादी की चर्चा नहीं की जाती.

– पारिवारिक समारोह के दौरान अब ऐसा नहीं पूछा जाता कि ‘शादी कब हो रही है’, बल्कि हर कोई जानना चाहता है कि ‘बेटी क्या कर रही है’. बेटी की एजुकेशन या सफलता का ज़िक‘ करते समय पैरेंट्स गर्व महसूस करते हैं तो बच्चों का हौसला भी बढ़ता है, उनका दृष्टिकोण बदलता है.

– आज के पैरेंट्स अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए परिवार-समाज के सामने झुकना ठीक नहीं समझते. उनके लिए उनकी बेटी की ख़ुुशियां सर्वोपरि होती हैं. हां, उन्हें चिंता ज़रूर होती है और वे चाहते भी हैं कि उनके जीते जी ही बेटी को सही साथी मिल जाए, क्योंकि उनके बाद बेटी को कौन सपोर्ट करेगा? बुढ़ापे में अकेली कैसे रहेगी? लेकिन बच्चों की ख़ुशी के आगे ये चिंताएं धरी की धरी रह जाती हैं और आख़िरी निर्णय वे अपने बच्चों पर ही छोड़ देते हैं.

– प्रसून भार्गव

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सभी पैरेंट्स की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चों की शादी सही उम्र और समय पर हो जाए, लेकिन कभी-कभी किसी ग्रह या नक्षत्र के कारण बात बनते-बनते रह जाती है, जिससे परिवार में काफ़ी तनाव रहता है, ऐसे में आप ये उपाय करके उन वैवाहिक दोषों को दूर कर सकते हैं. क्या हैं वो उपाय बता रहे हैं पंडित राजेंद्रजी दुबे. 

Marriage Problems

जन्म कुंडली में दिए गए योग के अनुसार, विवाह का विचार मुख्य रूप से सप्तम भाव से किया जाता है. इस भाव से ही शादी के अलावा वैवाहिक जीवन से जुड़ी अन्य बातें, पति-पत्नी के आपसी संबंध, जुड़ाव, रिश्तों में मज़बूती आदि पर चिंतन-मनन किया जाता है. आइए, इससे जुड़े उपायों के बारे में जानते हैं.

–     शनि की प्रतिकूल स्थिति से भी विवाह में बाधा आती है. शनि के कारण आनेवाली बाधा को दूर करने के लिए प्रत्येक शनिवार को शिव लिंग पर काले तिल अर्पित करना चाहिए.

–      शनिवार को काले कपड़े में साबुत उड़द, लोहा, काला तिल और साबुन बांधकर दान करने से भी लाभ मिलता है.

–      गुरू की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर भी विवाह में देरी होती है. गुरू को अनुकूल बनाने के लिए गुरूवार के दिन पीला वस्त्र धारण करना चाहिए. चने की दान, केला, हल्दी एवं केसर का सेवन लाभप्रद होता है.

–      जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है, उनको उत्तर या उत्तर-पश्‍चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए. इससे विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं. उस कमरे में उन्हें सोते समय अपना सिर हमेशा पूर्व दिशा में रखना चाहिए.

–     किसी कन्या की शादी हो रही हो तो उसमें अपनी क्षमता एवं श्रद्धा के अनुसार गुप्तदान करना भी बहुत फायदेमंद होता है. इससे जल्दी शादी होती है तथा वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है, लेकिन दान की चर्चा कभी भी किसी से न करना चाहिए.

–     गुरुवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है.

–     गुरुवार को विवाह योग्य लड़की को तकिए के नीचे हल्दी की गांठ पीले कपड़े में लपेटकर रखनी चाहिए.

–     यदि लड़का या लड़की पीपल की जड़ में लगातार 13 दिन तक जल चढ़ाते हैं, तो विवाह से संबंधित परेशानियां दूर हो जाती हैं.

–     जिस युवती की शादी में अड़चनें आ रही हों, उसे घर की वायव्य दिशा में सोना चाहिए.

–    अविवाहित लड़के/लड़की को ऐसे कमरे में नहीं रहना चाहिए, जहां अधूरा काम किया हो यानी कमरे के पेंट, मरम्मत आदि का काम अधूरा पड़ा हो या जिस कमरे में बीम लटका हुआ दिखाई देता हो.

–     कई बार ऐसा भी होता है कि कोई युवक या युवती शादी के लिए राजी नहीं होते हैं, तो उनके कमरे की उत्तर दिशा की ओर क्रिस्टल बॉल कांच की प्लेट में रखें.

–     जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों की शादी नहीं हो रही हो, उनके कमरे, बेडरूम व दरवाज़े का रंग गुलाबी, हल्का पीला या ब्राइट व्हाइट रंग का होना चाहिए. इससे स्थितियों में बदलाव आएगा.

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Marriage Problems

–     इसके अलावा उन्हें अपने कमरे में पूर्वोत्तर दिशा में वॉटर फाउंटेन रखना चाहिए.

–     कुंआरी कन्याएं शीघ्र विवाह के लिए गुरुवार का व्रत करें. साथ ही केले के पेड़ के नीचे बैठकर बृहस्पति मंत्र के पाठ की एक माला का जाप करें.

–     यदि कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान में मंगल स्थित है, तो जातक को मंगली योग होता है. इस योग के होने से शादी में देरी, शादी के बाद कपल्स में मतभेद, वाद-विवाद आदि समस्याएं होती हैं.

–    इससे बचने के लिए मंगली युवक या युवती मंगलवार का व्रत करें.

–     मंगल मंत्र का जाप करें और घट विवाह करें.

–     सप्तम में शनि स्थित होने से भी शादी-ब्याह में परेशानियां आती हैं.

–     इसके लिए ‘शं शनैश्‍चराय नम:’ मंत्र का जाप करें.

–     साथ ही शमी की लकड़ी, घी, शहद व मिश्री से हवन करें. अजब-ग़ज़ब टोटके

–     योग्य दूल्हे की प्राप्ति के लिए बालकांड का पाठ करना श्रेयस्कर होता है.

–     जब बेटी के पिता लड़केवालों से शादी की बात करने जाएं, तो बेटी बाल खुले रखे, तब तक जब तक पिता लौटकर घर न आ जाएं.

–     जो माता-पिता यह सोचते हैं कि उनकी बहू सुंदर व बुद्धिमान हो, तो वे गुरुवार व रविवार को बेटे के नाख़ून काटकर किचन में चूल्हे पर जला दें.

–     बेटी की शादी हो जाने के बाद विदाई के समय एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी-सी हल्दी और एक सिक्का डालकर बेटी के सिर के ऊपर से सात बार घुमाकर उसके आगे फेंक दें. उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा.

– ऊषा गुप्ता

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यह सच है कि शादी (Wedding) के कुछ समय बाद ही प्यार और रोमांस पर ज़िम्मेदारियों की जिल्द चढ़ने लगती है. ऐसे में रूमानी ख़्याल बीते दिनों की बात बनकर रह जाते हैं और उनकी जगह ले लेते हैं बिल्स, ख़र्चे, आटे-दाल के भाव, रिश्ते निभाने का दबाव, बच्चे, परवरिश, लोन आदि. यही वजह है कि मन के साथ-साथ शरीर पर भी ये ज़िम्मेदारियां परत बनकर मोटापे (Fats) व बीमारियों (Diseases) के रूप में उभरने लगती हैं. हम लापरवाह होते जाते हैं और कमर व पेट का साइज़ हमारी मौजूदा परिस्थिति, शादीशुदा ज़िंदगी, हेल्थ, फिटनेस और सेक्स लाइफ की पहचान बन जाते हैं. 

Fitness Tips

हम अक्सर यही सोचते हैं कि जब तक शादी न हो जाए, तब तक हमारे लिए फिट रहना बहुत ज़रूरी है, ताकि हम अट्रैक्टिव लगें. शादी के बाद न स़िर्फ अपनी फिटनेस को लेकर, बल्कि हेल्थ और अट्रैक्शन को लेकर भी हमारी अप्रोच बहुत कैज़ुअल हो जाती है. चाहे लड़कियां हों या लड़के, सबका यही हाल होता है. शादी के शुरुआती समय को छोड़ दें, तो बाद में अपने प्रति इतने लापरवाह हो जाते हैं कि धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति आकर्षण भी कम होने लगता है और इसका असर उनके रिश्ते व सेक्स लाइफ पर भी पड़ने लगता है.

क्यों हो जाते हैं बेपरवाह?

–    शादी के बाद ज़िंदगी शुरू होती है, जबकि हमारी यह सोच बन जाती है कि अब तो शादी हो चुकी, अब कुछ करने के लिए बचा नहीं लाइफ में, तो हम में एक नीरसता पनपने लगती है.

–     ज़िम्मेदारियों का बोझ जैसे-जैसे बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे हेल्थ, आकर्षण, फिटनेस, प्यार-मुहब्बत जैसी बातें गौण होने लगती हैं.

–     कभी घर के लिए लोन की किश्तें, कभी बच्चों की फीस, तो कभी घर के बड़ों की हेल्थ प्रॉब्लम्स हमें अपने प्रति बेपरवाह बना देती हैं.

–     करियर की चुनौतियां और तमाम तरह के तनावों के बीच हेल्थ और फिटनेस जैसी चीज़ों के लिए हमें समय निकालना समय की बर्बादी लगने लगती है.

–     थकान, मोटापा और बेडौल बदन शादी के कुछ समय बाद ही हमारी पहचान बन जाते हैं.

–     न कोई चार्म रहता है, न कोई ग्लैमर और न ही ऊर्जा.

क्यों ज़रूरी है फिटनेस?

–     फिटनेस का प्रभाव आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. शादी के बाद फिटनेस का ख़्याल रखना और भी ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि इससे आप में यह एहसास बढ़ता है कि आप एक-दूसरे के लिए हेल्दी और आकर्षक नज़र आना चाहते हैं. इसके अलावा आप अधिक उत्साह व उमंग का अनुभव भी करते हैं.

–     कुछ कपल्स पर किए गए एक सर्वे के अनुसार, फिटनेस पर ध्यान देने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि फिटनेस से न केवल उनके व्यक्तित्व पर, बल्कि उनके आपसी रिश्ते पर सकारात्मक प्रभाव हुआ.

–     जब कपल्स को यह महसूस कराया गया कि स़िर्फ हेल्दी रहने के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने पार्टनर के लिए भी फिट रहना चाहिए, ताकि उनके बीच का चार्म बना रहे, तो उन्होंने इस सोच के साथ वर्कआउट और डायट करना शुरू किया कि यह कोई पर्सनल एजेंडा नहीं है, बल्कि यह रिश्ते में ताज़गी और गर्माहट बनाए रखने के लिए भी बेहद ज़रूरी है, तो वाकई उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा और उनके रिश्ते भी सुधरे.

–     कपल्स को यह कहा गया कि आप अपने पार्टनर से यह कहें कि मुझे तुम्हारे लिए फिट, हेल्दी और आकर्षक बने रहना है. इसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बॉन्डिंग और स्ट्रॉन्ग हुई.

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How To Stay Fit
कैसे एचीव करें गोल?

–     यह बात सही है कि शादी के कुछ समय बाद ही बहुत-सी चीज़ें बदलने लगती हैं. समय की कमी के साथ-साथ ऊर्जा व उत्साह की कमी भी होने लगती है. ऐसे में नीरसता पनपने लगती है, जो आप दोनों को एक-दूसरे से दूर भी कर सकती है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप ख़ुद कोई रास्ता निकालें.

–     अपना टाइमटेबल और शेड्यूल तैयार करें.

–    एक डायरी बनाएं, जिसमें रोज़ की एक्टिविटीज़ और कैलोरीज़ की डिटेल्स रात को सोने से कुछ समय पहले नोट करें.

–    हर संडे उस डायरी में नोट की हुई चीज़ों पर आपस में बातचीत करें और देखें कि कहां क्या कमी रह गई.

–     सुबह जल्दी उठकर एक साथ वर्कआउट, वॉकिंग या जॉगिंग करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताएंगे.

–    एक-दूसरे को चैलेंज और मोटिवेट करें कि कौन ज़्यादा फिट और एनर्जेटिक है.

–     एक साथ वर्कआउट करने से पार्टनर एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. दोनों में समन्वय व सामंजस्य बेहतर होता है, साथ ही शेयरिंग की भावना भी बढ़ती है.

–     घर के काम मिल-जुलकर करें. इससे एक्सरसाइज़ भी हो जाएगी और बॉन्डिंग भी स्ट्रॉन्ग होगी.

–     रियलिस्टिक गोल्स सेट करें. अगर आपको लग रहा है कि शादी के छह महीने बाद ही 4-5 किलो वज़न बढ़ गया है, तो कोशिश करें धीरे-धीरे डायट व रूटीन में बदलाव लाने की.

–     घर में खाने के हेल्दी ऑप्शन्स रखें. अनहेल्दी स्नैक्स की जगह ड्रायफ्रूट्स, भुने चने, मूंगफली आदि रखें.

–     हर महीने गोल बदलें कि अगले दो महीनों में कितना वज़न कम करना है और दोनों एक-दूसरे को चैलेंज करें.

–     पार्टनर को मोटिवेट करने के लिए आप यह भी कर सकते हैं कि तुम्हारे बर्थडे या हमारी एनीवर्सरी तक अगर तुम इस आउटफिट में फिट आ गए, तो मैं तुम्हें गिफ्ट, पार्टी या हॉलीडे पर ले चलूंगा/चलूंगी.

–     नियमित रूप से हेल्थ टेस्ट्स व चेकअप, जैसे- बीपी, ब्लड शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल व अन्य टेस्ट्स करवाएं.  बच्चे होने के बाद ख़ुद को महत्वहीन

न समझें

–     अक्सर कपल्स बच्चे होने के बाद ख़ुद के प्रति और भी उदासीन हो जाते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ज़्यादा हेल्थ कॉन्शियस होता है, दूसरा बिल्कुल लापरवाह.

–     ऐसे में आप अपने फिट पार्टनर से ही सीख लें कि क्यों वो आपके सामने ज़्यादा यंग और एनर्जेटिक लगता है.

–     कई बार बच्चों के स्कूल में भी पीटीएम में आप देखेंगे कि कुछ कपल्स परफेक्ट लगते हैं. इसे भगवान की देन समझने की बजाय उनकी मेहनत को श्रेय दें और उनसे सीखें.

–     ख़ुद को चैलेंज करें कि अगली पीटीएम में आप भी परफेक्ट कपल नज़र आएंगे, इसके लिए कोशिश कल से नहीं, आज और अभी से ही शुरू कर दें.

–     यह भी ध्यान में रखें कि स़िर्फ अपने लिए या एक-दूसरे के लिए नहीं, बल्कि आपको अपने बच्चों के लिए भी फिट और हेल्दी रहना है.

–     बच्चों के साथ बहुत एनर्जी की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में आप ही थके-थके रहेंगे, तो बच्चों के साथ एक्टिविटीज़ में पार्टिसिपेट नहीं कर पाएंगे.

–     आप अगर हेल्दी खाएंगे और फिटनेस कॉन्शियस रहेंगे, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे, क्योंकि बच्चों के पहले रोल मॉडल उनके पैरेंट्स ही होते हैं और वो आपसे ही सीखते हैं.

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Fitness Tips
फिटनेस का संबंध आपकी सेक्स लाइफ से भी है

–     अगर आप फिट होते हैं, तो आपका एनर्जी लेवल अधिक होता है, जिसका असर आपकी बॉडी इमेज व आपसी आकर्षण पर सकारात्मक तौर पर पड़ता है. इससे ज़ाहिर है कि आपकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है.

–     हेल्दी डायट से आपकी सेक्स क्षमता भी बेहतर होती है. सेक्स लाइफ अच्छी होगी, तो आपसी संबंध और गहरे होंगे.

–     आप अपने रिश्ते में अधिक ऊर्जा व उत्साह का अनुभव करते हैं, क्योंकि फिटनेस से आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है.

–     आप यदि थके हुए और तनाव में रहेंगे, तो इसका सीधा असर आपकी सेक्स ड्राइव पर पड़ेगा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

–     वर्कआउट, रेग्युलर एक्सरसाइज़, योगा, मेडिटेशन आदि से स्ट्रेस लेवल कम होता है.

–     एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्ट्रेस किसी भी व्यक्ति को शारीरिक व भावनात्मक रूप से कमज़ोर बनाता है, जिससे रिश्तों में गर्माहट, जोश व आत्मीयता धीरे-धीरे कम होने लगती है.

–     सेक्स लाइफ को ख़राब करने में सबसे बड़ा रोल स्ट्रेस का ही होता है. जहां सेक्स लाइफ अच्छी नहीं होगी, वहां रिश्ता भी कमज़ोर होता चला जाएगा.

– विजयलक्ष्मी

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