Tag Archives: weight

Personal Problems: प्रेग्नेंसी के दौरान वज़न को कैसे मैनेज करूं? (How Should I Manage Weight During Pregnancy?)

मेरी उम्र 29 वर्ष है और यह मेरी पहली प्रेग्नेंसी (First Pregnancy) है. पिछले कुछ सालों से मैंने रेग्युलर एक्सरसाइज़ करके अपना वज़न मेनटेन (Weight Maintain) किया है. पर प्रेग्नेंसी में मेरा वज़न बहुत बढ़ जाएगा, यह सोचकर मैं परेशान हूं. कृपया बताएं, प्रेग्नेंसी के दौरान अपने वज़न को कैसे मैनेज करूं?
– जेसिका कौर, अमृतसर.

यह तो बड़ी अच्छी बात है कि आप अपनी फ़िटनेस के प्रति जागरूक हैं. आप तब तक  एक्सरसाइज़ कर सकती हैं, जब तक कंफ़र्टेबल फील करें. प्रेग्नेंसी में सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ वॉकिंग होती है. इसके अलावा दूसरी अहम् बात है- प्रेग्नेंसी के दौरान सही डायट लेना. प्रेग्नेंसी के समय एक महिला को अपना वज़न नॉर्मल रखने के लिए पहले 3 महीने में 150- 200 अतिरिक्त कैलोरी रोज़ाना लेनी चाहिए. दूसरे और तीसरे महीने में हर रोज़ 400-500 अतिरिक्त कैलोरीज़ ज़रूरी होती हैं. इसके अलावा पहले 3 महीने में अतिरिक्त डायट में 1 ग्लास दूध, ड्रायफ्रूट, दलिया,  उपमा आदि लेे सकती हैं और दूसरी-तीसरी तिमाही में अतिरिक्त डायट में दाल, दही, फ़िश, चिकन और अंडा आदि ले सकती हैं.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: क्या ब्रेस्ट से लिक्विड डिस्चार्ज होना ख़तरनाक है? (Is Abnormal Nipple Discharge Dangerous?)

Manage Weight During Pregnancy

 

मेरी बेटी की उम्र 16 साल है. पिछले कुछ महीनों से उसका वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. हर समय नींद आने और थकान होने की शिकायत करती है. अभी तो वह बहुत छोटी है, उसके बढ़ते वज़न को देखकर मुझे बहुत चिंता होने लगी है. कृपया, उचित उपाय बताएं?
– नमिता साहनी, जोधपुर

आप अपनी बेटी को किसी जनरल फ़िज़िशियन या गायनाकोलॉजिस्ट को दिखाएं. वे आपकी बेटी का थायरॉइड टेस्ट कराएंगे. हो सकता है कि आपकी बेटी के बढ़ते वज़न का कारण थायरॉइड हार्मोन की कमी हो. अधिकतर युवाओं में इस तरह की समस्या का होना आम है. इसके अलावा गर्दन में हल्की-सी सूजन, स्किन का ड्राई होना, कब्ज़, थकान महसूस होना, वज़न बढ़ना, डिप्रेशन और आवाज़ का कर्कश होना आदि भी थायरॉइड हार्मोन की कमी के लक्षण हैं.

यह भी पढ़ेंPersonal Problems: पीरियड्स में होनेवाले दर्द के लिए क्या कोई ख़ास टेस्ट कराना होगा? (Menstrual Cramps- Diagnosis And Treatments)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा ऐप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

Gorgeous: करीना कपूर खान लौट रही हैं शेप में, देखें पिक्चर्स (Pictures: Mommy Kareena Kapoor Khan snapped at Gym)

Kareena Kapoor Khan

Kareena Kapoor Khan

मॉमी बनने के करीना कपूर खान अब पोस्ट प्रेग्नेंसी वज़न को कम करके दोबारा शेप में आने के लिए ख़ूब मेहनत कर रही हैं. डायट से लेकर वर्कआउट तक हर बात का ख़्याल रख रही हैं बेबो. एक इंटरव्यू में करीना ने कहा था कि उन्होंने टारगेट सेट कर रखा है कि उन्हें 7 महीनों में उन्हें अपना 18 किलो वज़न घटाना है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ गया था. देखें जिम से निकलते वक़्त करीना की ये तस्वीरें.

Kareena Kapoor Khan Kareena Kapoor KhanKareena Kapoor Khan Kareena Kapoor Khan

वैसे वर्कआउट का असर अब दिखने भी लगा है, करीना ने काफ़ी वज़न घटा लिया है. करीना एक इवेंट पर डेनिम आउटफिट में नज़र आईं, जिसमें वो बेहद फिट लग रही हैं. जल्द ही करीना वीरे दी वेडिंग फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगी.

Kareena Kapoor Khan

Kareena Kapoor Khan Kareena Kapoor Khan

प्यार का साइड इफेक्ट- 100 किलो की हुई लड़की (Love side effect: girl put on weight more than 100kg)

Love side effect

Love side effect

ये दिल बड़ी अजीब चीज़ होती है, किसी से लगा लो, तो रातों की नींद उड़ जाती है और जब कोई इसे तोड़ दे, तो ज़िंदगी का सुकून कहीं खो जाता है और जब प्यार एकतरफ़ा हो तो समझिए कि ये आपकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल है. एकतरफ़ा प्यार में पागल प्रेमी के कारनामों के तो आपने बहुत से किस्से सुने होंगे, लेकिन एकतरफ़ा प्यार में पागल इस लड़की के साथ जो हुआ वो सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे.

ये वाक़या मुंबई का है, जहां एक 22 साल की लड़की एकतरफ़ा प्यार में मिली नाकामी के बाद डिप्रेशन का शिकार हो गई और इस डिप्रेशन में उसने इतना खाया कि कुछ ही महीनों में उसका वज़न 100 किलों के पार हो गया. फिलहाल उसका मुंबई के केईएम हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. वहां उसके बार-बार खाने की आदत में भी कमी आई है. इलाज के साथ ही उसकी काउंसलिंग भी की जा रही है. फिलहाल उसका वज़न घटकर 80 किलो हो गया है.

ये है कहानी
क़रीब एक साल पहले इस लड़की ने वेट कम करने के लिए जिम जॉइन किया. वहां इसका दिल एक लड़के पर आ गया और वो उससे एकतरफ़ा प्यार करने लगी. कुछ दिनों बाद लड़के ने किसी और से शादी कर ली. इससे लड़की का दिल टूट गया और वो डिप्रेशन में चली गई. वह दुखी होकर हमेशा पुरानी बातें याद करती रहती और ख़ूब खाती. जब भी उसे अकेलापन महसूस होता, वो खाने को अपना साथी बना लेती, मगर उसकी ये आदत धीरे-धीरे बीमारी में तब्दील हो गई.

ईटिंग डिसऑर्डर
डिप्रेशन में कई लोग चॉकलेट या अपनी कोई पसंदीदा चीज़ खाने लगते हैं, जिससे ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या हो जाती है. इस लड़की के साथ भी वही हुआ. अपना ग़म भुलाने के लिए खाने की उसकी आदत ने उसका वज़न इतना बढ़ा दिया कि उसे हॉस्पिटलाइज़ करना पड़ा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मानसिक बीमारियों में 1-2 प्रतिशत मरीज ईटिंग डिसऑर्डर का शिकार हो जाते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये बीमारी अक्सर लड़कियों में देखने को मिलती है. दरअसल, लड़कियां खुद को ग़म से उबारने के लिए खाने और शॉपिंग का सहारा लेती हैं.

मोटापा है बीमारियों का घर
बढ़ा हुआ वज़न अपने आप में एक बीमारी तो है ही, ये कई और बीमारियों को भी जन्म देता है. मोटापे से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है.

तो अब किसी से भी दिल लगाने से पहले अलर्ट रहें और ख़ुद को इतना मज़बूत रखें कि दिल टूटने पर आपको खाने का सहारा न लेना पड़े.

– कंचन सिंह

ट्रेडमिल के 5 ईज़ी विकल्प (Best Treadmill Alternatives)

ट्रेडमिल के विकल्प, Best Treadmill Alternatives

3

 

क्या आपको ट्रेडमिल पर दौड़ना बोरिंग लगता है? क्या आपके पास जिम जाने का व़क्त नहीं है? या आपके पास ट्रेडमिल ही नहीं? अगर आपके मन में ट्रेडमिल को लेकर ऐसे और भी सवाल हैं और आप ट्रेडमिल एक्सरसाइज़ का कोई बेहतर विकल्प ढूंढ़. रहे हैं, तो आपके लिए हम लेकर आए हैं कुछ कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट्स, जो काफ़ी इंट्रेस्टिंग हैं और आपको बिल्कुल ट्रेडमिल जैसा ही इफेक्ट देंगे.

  1. स्किपिंग- रस्सी कूदना
    – वार्मअप करें.
    – अगर आप पहली बार रस्सी कूद रहे हैं, तो शुरुआत धीरे-धीरे करें. जितनी क्षमता हो, उतनी बार ही रस्सी कूदें.
    – धीरे-धीरे स्पीड और गिनती दोनों बढ़ाएं.
    – 30 सेकंड स्किपिंग करें, फिर 30 सेकंड के लिए रुक जाएं और फिर 30 सेकंड के लिए रस्सी कूदें. रोज़ाना 10 मिनट के लिए ये एक्सरसाइज़ करें.
    फ़ायदे
    – अतिरिक्त फैट्स कम होता है.
    – पॉश्‍चर सुधरता है.
    – वज़न कम करने में सहायक.
    – हाइट बढ़ती है.
    – मांसपेशियां मज़बूत बनती हैं और बॉडी टोन हो जाती है.
    – आसानी से उपलब्ध है.
    – सस्ता और सरल विकल्प है.
    – घर पर ही आसानी से अपने व़क्त के अनुसार आप ये वर्कआउट कर सकते हैं.

2. डांस
– डांस एक मज़ेदार एक्सरसाइज़ है. डांस करने में बोरियत नहीं होती. अच्छा म्यूज़िक आपको डांस करने के लिए इंस्पायर करता है.
– एरोबिक्स, ज़ुम्बा भी डांस का ही एक प्रकार है.
– रोज़ाना एक घंटे तक ज़ुम्बा करने से 50 से 60 किलो के लोग लगभग 300 कैलोरी बर्न कर सकते हैं, जबकि जिनका वज़न 60 से 80 किलो है वो 500 तक कैलोरी  घटा लेते हैं.
– हफ्ते में 5 दिन आधे घंटे एरोबिक्स करके आप 500 कैलोरी तक कम कर सकते हैं.
फ़ायदे
– 30 मिनट डांस करने से लगभग 150 कैलोरी घटती है.
– मांसपेशियों को मज़बूत और लचीला बनाता है.
– पूरे शरीर की एक्सरसाइज़ हो जाती है.
– दिमाग़ एक्टिव रहता है. तनाव कम होता है.
– मोटापा कम होता है, हृदय के रोग का ख़तरा कम हो जाता है.

3. स्पोर्ट्स

ट्रेडमिल के विकल्प, Best Treadmill Alternatives
– फिज़िकल एक्टिविटी या स्पोर्ट्स भी एक तरह का कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट है.
– दोस्तों के बिना किसी खेल में मज़ा नहीं है, इसलिए अपने दोस्तों को इकठ्ठा करें और जमकर खेलें.
– स्पोर्ट्स में आप बैडमिंटन, स्न्वॉश, टेनिस, बास्केट बॉल, फुटबॉल आदि खेल सकते हैं.
– साइकिलिंग भी बेहतरीन एक्टिविटी है. जिम के बोरिंग माहौल से बाहर निकल कर साइकिलिंग करने से न केवल आप फ्रेश महसूस करेंगे, बल्कि सेहतमंद भी रहेंगे.
– साइकिल की सीट एडजेस्ट करें, पीठ सीधी रखें और आठ से 10 राउंड्स लगाएं.
फ़ायदे
– खेल में एकाग्रता की बेहद ज़रूरत होती है. खेलने से न स़िर्फ एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि तनाव भी कम होता है.
– स्टेमिना बढ़ता है.
– खेलने के बाद इतनी थकान हो जाती है कि नींद अच्छी आती है. चैन की नींद यानी अच्छा स्वास्थ्य.
– खेल कैलोरी घटाने का सबसे मज़ेदार तरीक़ा है. खेल-खेल में वज़न कम हो जाता है और आप पूरे दिन तरोताज़ा भी महसूस करते हैं.

4. रनिंग
– रनिंग एक एरोबिक एक्सरसाइज़ है.
– रोज़ाना 30 मिनट दौड़ें.
– शुरुआत वॉक से करें. पहले ही दिन 30 मिनट तक दौड़ना न शुरू कर दें.
– पहले दिन 10 मिनट चलें. जिसमें एक मिनट दौड़ें और एक मिनट चलें. इस साइकल को धीरे-धीरे बढ़ाते जाएं.
– दौड़ने के लिए अच्छे ग्रिपवाले जूते और आरामदायक कपड़ों का चुनाव करें. पानी की बॉटल भी साथ में ज़रूर रखें.
– रोज़ाना 2 किलोमीटर चलने से 100 कैलोरी बर्न होती है.
फ़ायदे
– तनाव कम होता है. दौड़ते व़क्त शरीर में एंड्रोफिन केमिकल निकलता है, जो ख़ुशी का एहसास कराता है.
– दौड़ने से फेफड़े मज़बूत होते हैं.
– दौड़ते समय गहरी सांस लेने की वजह से ज़्यादा ऑक्सीजन शरीर में जाता है, जिससे रक्तसंचार बढ़ जाता है.
– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
– ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रहता है.
– धमनियों का व्यायाम होता है. दौड़ते व़क्त धमनियां फैलती व सिकुड़ती हैं, जो ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त करके हृदय रोग के ख़तरे को कम करती हैं.
– दौड़ने से हड्डियां व मांसपेशियां मज़बूत बनती हैं.
– वज़न घटाने में सहायक है. दौड़ने से काफ़ी कैलोरी घटती है.

5. ऊंचाई की ओर तेज़ चलना
– चलने या दौड़ने के लिए आप ऊंचाईवाला रास्ता भी अपना सकते हैं.
– रोज़ाना ऊंचाई की ओर 20 मिनट वॉक करें.
– चढ़ाई के लिए अच्छे ग्रिपवाले जूते इस्तेमाल करें.
– पानी की बॉटल साथ में रखें और बीच-बीच में पानी पीते रहें.
फ़ायदे
– यूं तो इसके फ़ायदे दौड़ने के फ़ायदों जैसे ही हैं, लेकिन एक ख़ास बात ये है कि ऊंचाई की ओर चढ़ने से चलने की गति धीमी हो जाती है, जिससे चोट लगने के चांसेस कम हो जाते हैं.

नोट
– कोई भी एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से पूछ लें.
– वज़न के मुताबिक़ कैलोरी बर्न होती है. हर एक्सरसाइज़ के परिणाम अलग-अलग तरह के लोगों पर अलग हो
सकते हैं.

20 हेल्थ अलर्ट्स ( Health Warning Signs of Serious Problems )

Health Warning Signs of Serious Problems
शरीर में छोटी-मोटी तकलीफ़ होती ही रहती है और अक्सर हम इन तकलीफ़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन यह अनदेखी महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि कभी-कभार ये छोटे-छोटे लक्षण ही किसी बड़ी व गंभीर बीमारी की ओर संकेत करते हैं. बेहतर होगा कि समय रहते इन्हें पहचानकर अलर्ट (Health Warning) रहें, ताकि आनेवाली किसी भी बड़ी समस्या से बचा जा सके.

सिर में दर्द रहना

हमें लगता है- मामूली दर्द या एसिडिटी.
हो सकता है- माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन ट्यूमर, साइनस या फिर ब्रेन हैमरेज.
आपको सिर में अक्सर दर्द रहता है, जो पेनकिलर्स लेने पर ठीक भी हो जाता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. अगर दर्द के साथ उल्टियां भी होती हों, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें. इसके अलावा आंखों की रौशनी कम होती जाए या दृष्टिभ्रम होने लगे, चक्कर भी आएं, तो यह ट्यूमर का संकेत हो सकता है.

अचानक वज़न कम होना

हमें लगता है- थकान, स्ट्रेस या खाने-पीने में गड़बड़ी के चलते ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- टीबी, पेप्टिक अल्सर, थायरॉइड, डायबिटीज़ या फिर कैंसर.
बिना डायटिंग के या फिर बिना किसी बीमारी के अचानक वज़न कम होने लगे, तो सतर्क हो जाइए. मुमकिन है, एंडोक्राइन ग्लैंड्स में किसी असामान्यता के चलते ऐसा हो रहा हो या फिर कैंसर भी इसकी एक वजह हो सकती है.

चोट लगने पर ब्लड क्लॉट न होना या फिर ज़ख़्म का देरी से भरना

हमें लगता है- स्किन या ख़ून में बदलाव के कारण ऐसा होता हो.
हो सकता है- डायबिटीज़ या फिर प्लेटलेट्स में कमी.
ज़ख़्म भरने में अगर सामान्य से ज़्यादा वक़्त लग रहा हो, तो यह डायबिटीज़ का लक्षण हो सकता है. इसके साथ-साथ यदि स्किन एलर्जी भी हो और चक्कर व वज़न कम होने की समस्या भी हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं.

दिल का ज़ोर-ज़ोर से धड़कना

हमें लगता है- उत्तेजना या कमज़ोरी.
हो सकता है- हार्ट अटैक का लक्षण या फिर हाई ब्लडप्रेशर.
हो सकता है कि कमज़ोरी या नींद न पूरी होने पर धड़कन असामान्य हो रही हो, लेकिन यह हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है. अलर्ट रहें और यदि यह लक्षण लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

पेशाब करते समय तेज़ दर्द होना

हमें लगता है- सामान्य इंफेक्शन.
हो सकता है- स्टोन, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना, मूत्राशय का कैंसर.
मूत्र त्याग के समय अगर हमेशा ही बहुत दर्द होता हो, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. यदि पेशाब के साथ ख़ून भी आने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय रहते इलाज हो सके.

उठते वक़्त चक्कर आना

हमें लगता है- मामूली कमज़ोरी.
हो सकता है- नर्व से संबंधित समस्या, कान की नसों में कोई गड़बड़ी, साइनस, स्पॉन्डिलाइटिस, लो ब्लड प्रेशर.
यूं तो इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन लो ब्लडप्रेशर भी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है और लो ब्लडप्रेशर के भी कई कारण हो सकते हैं, जो आपको टेस्ट करवाने पर ही पता चलेंगे. इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलें.

अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाना

हमें लगता है- नींद न पूरी होने पर या कमज़ोरी के कारण ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- स्ट्रोक, लो ब्लडप्रेशर.
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो आप स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं. यदि आंखों के सामने अंधेरा छाने के साथ-साथ शरीर के एक तरफ़ का भाग सुन्न होता है, तो अलर्ट हो जाएं. इसके अलावा अगर उच्चारण में भी तकलीफ़ होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

हाथों का कांपना, घबराहट, नाक से ख़ून आना

हमें लगता है- कमज़ोरी, शरीर में गर्मी का बढ़ जाना इसकी वजह हो सकती है.
हो सकता है- थायरॉइड, पार्किंसन्स.
अचानक घबराहट होने के साथ-साथ हाथ-पैर कांपने लगते हैं, नाक से ख़ून आने लगता है और उल्टियां भी होने लगती हैं. ऐसी स्थिति को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं. हो सकता है बहुत ज़्यादा एसिडिटी या शरीर में गर्मी बढ़ने के कारण भी ऐसा हो, लेकिन ये तमाम लक्षण किसी गंभीर समस्या के भी संकेत हो सकते हैं.

हंसते-खांसते वक़्त या फिर अचानक ही पेशाब निकल जाना

हमें लगता है- बढ़ती उम्र या कमज़ोरी.
हो सकता है- यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर की कोई बीमारी या डायबिटीज़.
अचानक पेशाब निकल जाने की समस्या को हम कमज़ोरी या बढ़ती उम्र से जोड़कर ही देखते हैं, लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन की वजह से या फिर कुछ मामलों में डायबिटीज़ के कारण भी हो सकता है. इसलिए किसी भी तकलीफ़ को नज़रअंदाज़ न करें और न ही ख़ुद अंदाज़ा लगाएं. बेहतर होगा एक बार डॉक्टर की सलाह ले ली जाए.

shutterstock_225460834

सीने में दर्द रहना

हमें लगता है- गैस या एसिडिटी का दर्द.
हो सकता है- हृदय रोग या एंजाइना पेन.
सीने में या उसके आस-पास दर्द बना रहे और सांस लेने में भी दिक़्क़त आए, तो शायद यह हार्ट ट्रबल यानी हृदय रोग का संकेत हो सकता है, या फिर एंजाइना का दर्द भी हो सकता है, जिसमें हार्ट अटैक की आशंका हमेशा बनी रहती है. बेहतर होगा कि इस तरह के दर्द को गैस का छोटा-मोटा दर्द न समझकर डॉक्टरी परामर्श ले लिया जाए.

मुंह में छाले होना

हमें लगता है- पेट या आंतों की गड़बड़ी या गर्मी से.
हो सकता है- एड्स, हर्पिस, सेक्स संबंधी किसी इंफेक्शन के कारण या फिर मुंह या गले का कैंसर.
मुंह में छाले होना आम-सी बात है. हमें लगता है पेट साफ़ नहीं होगा, इसलिए छाले हो रहे हैं या फिर कभी-कभार बुख़ार या दवाओं की गर्मी से भी छाले हो जाते हैं. लेकिन यदि ये छाले लंबे समय तक बने रहें या फिर इनका आकार और इनमें दर्द बढ़ रहा हो, तो देर न करें.

शरीर में सूजन

हमें लगता है- थकान या खान-पान की गड़बड़ी हो सकती है.
हो सकता है- एनीमिया, किडनी की बीमारी, हृदय रोग.
अक्सर दिनभर एक ही पोज़िशन में बैठे रहने या फिर बहुत ज़्यादा थकान या वॉटर रिटेंशन से शरीर में या पैरों में सूजन आ जाती है, लेकिन यदि सूजन शरीर के ऊपरी भाग में है तो यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और अगर निचले हिस्से में सूजन आती है तो हृदय रोग का लक्षण हो सकता है.

जोड़ों में दर्द

हमें लगता है- कमज़ोरी, किसी बीमारी या फिर बढ़ती उम्र का असर.
हो सकता है- चिकनगुनिया के कारण, कैल्शियम व मिनरल की कमी, आमवात, गठियावात, ऑस्टियोआर्थराइटिस या फिर स्पॉन्डिलाइटिस.
यदि उम्र 40 से कम है और जोड़ों में अचानक दर्द शुरू हो गया हो, तो आमवात हो सकता है, जिसमें जोड़ों में सूजन, गर्मी व दर्द महसूस होता है. यदि छोटे जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द है, तो यह गठियावात हो सकता है. इसके अलावा शरीर का पोश्‍चर भी जोड़ों में दर्द का कारण हो सकता है. जो लोग दिनभर कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें भी गर्दन, पीठ या पैरों में दर्द हो सकता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी यह दर्द हो सकता है.
यदि 40 के बाद दर्द होता है, तो इसकी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस या स्पॉन्डिलाइटिस हो सकती है, जिसमें शुरुआत में हल्का-हल्का दर्द होता है और ध्यान न दिया जाए, तो बढ़ जाता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी दर्द हो सकता है.

बहुत ज़्यादा हांफना

हमें लगता है- थकान, कमज़ोरी.
हो सकता है- कोलेस्ट्रॉल व ट्रायग्लिसरॉइड्स का बढ़ जाना, एनीमिया, थायरॉइड, मोटापा, बीमारी के बाद की कमज़ोरी.
अगर थोड़ा-सा चलने से ही बहुत ज़्यादा हांफने लगें, तो सचेत हो जाएं और अपना चेकअप ज़रूर करवाएं.

अत्यधिक भूख लगना

हमें लगता है- मौसम परिवर्तन के कारण या फिर हाज़मा अच्छा हो गया है.
हो सकता है- डायबिटीज़, मोटापा या फिर पेट में कीड़े.
जब ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगने लगे, तो इसे हर बार मौसम परिवर्तन से जोड़कर न देखें. हो सकता है वजह कुछ और हो. एक्सपर्ट की राय ज़रूर लें.

कब्ज़

हमें लगता है- पानी कम पीने या फिर खाने-पीने की गड़बड़ी से हो रहा है.
हो सकता है- अत्यधिक गैस, बवासीर, आंतों में गड़बड़ी या फिर कैंसर हो सकता है.
यदि कब्ज़ लंबे समय से है और कोई भी नुस्ख़ा काम नहीं कर रहा, तो डॉक्टरी परामर्श लेने में कोई नुक़सान नहीं है.

एनल ब्लीडिंग
हमें लगता है- शरीर में गर्मी बढ़ जाने या फिर बवासीर की समस्या से यह परेशानी हो रही है.
हो सकता है- आंतों में शोथ, ज़ख़्म या फिर कैंसर हो सकता है.
ख़ूनी बवासीर, फिशर्स या फिर कोलाइटिस के अलावा आंतों में शोथ व ज़ख़्म के कारण भी एनल ब्लीडिंग हो सकती है. लेकिन यह रेक्टल कैंसर का भी पहला लक्षण हो सकता है. यदि मोशन के बाद भी ख़ून, और वह भी ताज़ा ख़ून आता है, तो सतर्क हो जाइए.

मल के रंग में बदलाव

हमें लगता है- खाने-पीने में बदलाव के कारण हो सकता है.
हो सकता है- अल्सर या पित्ताशय में गड़बड़ी, पीलिया.
अगर मल का रंग स़फेद है, तो पित्त की कमी इसका कारण है, यदि रंग ब्लैकिश-रेड है, तो इसका मतलब है मल में ख़ून भी आ रहा है और इसकी वजह हो सकती है अल्सराइटिव कोलाइटिस. यदि शौच ज़रूरत से ज़्यादा पीला है, तो जॉन्डिस का लक्षण हो सकता है.

मूत्र के रंग में बदलाव

हमें लगता है- पानी कम पीने से या फिर खाने में कुछ बदलाव करने से ऐसा होता है.
हो सकता है- इंफेक्शन, जॉन्डिस, ब्लैडर की गड़बड़ी या फिर कैंसर.
यदि पेशाब का रंग दूधिया स़फेद है, तो इसका अर्थ है मूत्र के साथ प्रोटीन भी निकल रहा है. यदि रंग पीला है, तो जॉन्डिस या फिर यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. अगर रंग लाल है तो स्टोन, ब्लैडर, यूरिथ्रा में ज़ख़्म या फिर प्रोस्टेट कैंसर का भी लक्षण हो सकता है.

अत्यधिक थकान

हमें लगता है- सामान्य कमज़ोरी.
हो सकता है- मिनरल्स की कमी, आयरन, सोडियम, कैल्शियम और विटामिन्स की कमी, डायबिटीज़, लो ब्लड प्रेशर.
किसी-किसी केस में बहुत पसीना भी आता है तो, यह आनेवाली बीमारी का संकेत भी होता है, जैसे- जॉन्डिस, बुख़ार या फिर तनाव इत्यादि में पसीना ज़्यादा आता है.