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India women’s cricket team

खेल की हर विधा में भारतीय महिला खिलाड़ियों की तूती बोल रही है. महिला हॉकी खिलाड़ियों के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वेस्ट इंडीज़ से तीनों वनडे मैच जीतकर टीम का मान बढ़ाया है. 2 वनडे जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ियों का दमखम देखने लायक था. मैच बेहद रोमांचक था. मैदान पर इंडीज़ प्लेयर कुछ ख़ास नहीं कर पाए.

वेस्टइंडीज को 15 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज़ में 3-0 से क्लीन स्वीप किया. भारत ने 50 ओवर में छह विकेट पर 199 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाने के बाद कैरेबियाई टीम को 49.1 ओवर में 184 रन पर समेट दिया. आईसीसी महिला चैम्पियनशिप के तहत भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज़ को बुधवार को खेले गए तीसरे और अंतिम मैच में 15 रनों से हरा दिया. इस जीत के साथ भारतीय टीम ने तीन मैचों की शृंखला 3-0 से अपने नाम कर ली.
हालांकि इस जीत के बावजूद भारतीय टीम आईसीसी चैम्पियनशिप की अंकतालिका में 18 मैचों में 9 जीत हासिल करते हुए 19 अंक लेकर पांचवां स्थान ही हासिल कर सकी और अगले वर्ष होने वाले आईसीसी विश्व कप में सीधे प्रवेश हासिल करने से चूक गई.

India women’s cricket team

भारत के लिए वेदा कृष्णमूर्ति (71) ने सबसे अधिक रन बनाए, जबकि सलामी बल्लेबाज़ दीप्ति शर्मा ने 23 रनों का अहम योगदान दिया. देविका वैद्य 32 रन बनाकर अंत तक नाबाद रहीं. भारत की ओर से एकमात्र छक्का झूलन गोस्वामी (18) ने लगाया. भारत से मिले लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज़ की टीम को केसिया नाइट (55) ने और हैली मैथ्यू (44) ने अच्छी शुरुआत दिलाई. कैरेबियाई टीम एक समय पांच विकेट पर 166 रन बना चुकी थी और उसे आख़िरी की 32 गेंदों में स़िर्फ 34 रन चाहिए थे, लेकिन राजेश्‍वरी गायकवाड के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाज़ों ने यहां से बेहतरीन वापसी की और बेहद कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए लगातार विकेट हासिल किए.

राजेश्वरी को सबसे अधिक चार विकेट मिले, जबकि दीप्ति शर्मा, हरमनप्रीत कौर और विद्या ने एक-एक विकेट चटकाए. क्षेत्ररक्षण में भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारतीय क्षेत्ररक्षकों ने वेस्टइंडीज के तीन बल्लेबाज़ों को रन आउट किया.

 

 

architectural significance

वास्तु से जीवन में ख़ुशहाली लाने के लिए सबसे पहले दिशाओं का ज्ञान बेहद ज़रूरी है. दिशाओं के अनुसार ही घर का इंटीरियर डिज़ाइन कराएं, इससे काफ़ी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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उत्तर दिशा
इस दिशा में भूमि तुलनात्मक रूप से नीची होनी चाहिए तथा बालकनी भी इसी दिशा में हो, तो बेहतर है. इसी तरह ज़्यादा से ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियां इसी दिशा में होने चाहिए. बरामदा, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि भी इसी दिशा में होने चाहिए. उत्तर में वास्तुदोष हो तो धन हानि या करियर में बाधाएं आती हैं. ऐसी स्थिति में घर में बुध यंत्र रखें, बुधवार को व्रत रखें और दीवारों पर हल्का रंग करवाएं.

उत्तर-पूर्व दिशा
इस दिशा को ईशान भी कहते हैं. इस दिशा में ज़्यादातर स्थान खुला होना चाहिए. पढ़ाई का कमरा, पूजास्थल, बोरिंग एवं स्विमिंग पूल आदि इसी दिशा में होने चाहिए. घर का मुख्य द्वार भी यदि इसी दिशा में हो तो बेहद शुभ माना जाता है. ईशान में वास्तुदोष हो तो द्वार पर रुद्र तोरण लगाएं, शिव उपासना करें तथा सोमवार का व्रत रखें.

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पूर्व दिशा
इस दिशा में खुला स्थान तथा प्रवेश द्वार हो, तो गृहस्वामी को लंबी उम्र, मान-सम्मान तथा संतान सुख मिलता है. इस दिशा में भूमि नीची होनी चाहिए. बरामदा, दरवाज़े, खिड़कियां बालकनी, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि इस दिशा में बनाए जा सकते हैैं. बच्चे भी इसी दिशा की तरफ मुंह करके पढ़ें तो विद्यालाभ होता है. पूर्व में वास्तु दोष हो तो सूर्य यंत्र की स्थापना करें, सूर्य को अर्घ्य दें, सूर्य की उपासना करें तथा पूर्वी दरवाज़े पर मंगलकारी तोरण लगाएं.

 

दक्षिण-पूर्व दिशा
इसे आग्नेय भी कहते हैं. इस दिशा में अग्नि से संबंधित कार्य करने चाहिए. किचन, ट्रांसफ़ॉर्मर, जनरेटर, बॉयलर आदि इसी दिशा में होने चाहिए. इसके अलावा नौकर का कमरा, टॉयलेट आदि भी इस दिशा में बनाए जा सकते हैं. इस दिशा में वास्तुदोष हो तो प्रवेश द्वार पर मंगलकारी यंत्र लगाएं, गणेश जी की पूजा करें, हरे रंग के गणपति दरवाज़े के अंदर-बाहर स्थापित करें.

 

 

दक्षिण दिशा
इस दिशा में खुलापन, किसी भी प्रकार के गड्ढे अथवा शौचालय आदि बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए. यदि इस दिशा में भवन ऊंचा और भारी हो तो गृहस्वामी को सुखी, समृद्ध और निरोगी रखता है. इस दिशा में उत्तर की ओर मुख करके तिजोरी रखने से धन की बढ़ोत्तरी होती है. दक्षिण दिशा में यदि वास्तुदोष हो तो घर में या दरवाज़े पर मंगल यंत्र स्थापित करें, मंगलकारी तोरण या सूंड वाले गणपति दरवाज़े के बाहर स्थापित करें. हनुमान या भैरव की उपासना करें.

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उत्तर-पश्चिम दिशा
इसे वायव्य भी कह सकते हैं. इस दिशा में गोशाला, बेडरूम, गैरेज आदि बनाए जा सकते हैं. नौकर का कमरा भी इसी दिशा में होना चाहिए. वायव्य में यदि वास्तु दोष हो तो दरवाज़े के अंदर-बाहर श्‍वेत गणपति तथा श्री यंत्र की स्थापना करें. घर में चंद्र यंत्र लगाएं.

दक्षिण-पश्चिम दिशा
इस दिशा को नैऋत्य दिशा भी कहते हैं. परिवार के मुखिया का कमरा इसी दिशा में होना चाहिए, लेकिन भूलकर भी नौकर के रहने के लिए यह स्थान न चुनें. मशीनें, कैश कांउटर आदि इस दिशा में रखे जा सकते हैं. इस दिशा में खुलापन, जैसे- खिड़की, दरवाज़े आदि बिल्कुल नहीं होने चाहिए. नैऋत्य में वास्तुदोष हो तो घर में राहु यंत्र स्थापित करके पूजा करें, प्रवेश द्वार पर भूरे रंग के गणपति स्थापित करें.

पश्चिम दिशा
इस दिशा में भवन व भूमि तुलनात्मक रूप से ऊंची हो तो घर के लोगों को सफलता और कीर्ति मिलती है. भोजन कक्ष, टॉयलेट आदि इस दिशा में होने चाहिए. पश्चिम में वास्तुदोष हो तो घर में वरुण यंत्र की स्थापना करें तथा शनिवार का व्रत रखें.