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कच्चा प्याज़ या पका हुआ प्याज़, क्या है ज़्यादा सेहतमंद? ( Are Raw Onions More Healthy Than Cooked Onions)

Raw Onions, Cooked Onions

प्याज़ (Benefits Of Onion) की पौष्टिकता पर ज़्यादा चर्चा नहीं की जाती है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्याज़ सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. यह विटामिन सी, फ्लैवोनाइड्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और सल्फर कम्पाउंड्स का बेहतरीन स्रोत है. कई लोगों के मन मेें सवाल उठता है कि कच्चा प्याज़ ज़्यादा सेहतमंद होता है या पका हुआ? फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्याज़ हर तरह से सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है, चाहे उसे पकाकर खाया जाए या फिर कच्चा. फ़र्क़ स़िर्फ इतना है कि कच्चे प्याज़ में अधिक मात्रा में सल्फर कम्पाउंड्स पाए जाते हैं.

Benefits Of Onion
जब हम प्याज़(Benefits Of Onion) को काटते या पीसते हैं तो उसमें एक प्रकार का एन्ज़ाइमैटिक रिएक्शन होता है, जिससे सल्फर बनता है. बहुत से शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि सल्फर कम्पाउंड्स कैंसर से बचाव करते हैं, ब्लड शुगर कम करने में मदद करते हैं और शरीर में अनहेल्दी कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को कम करते हैं. इसके अलावा सल्फर कम्पाउंड्स ब्लड क्लॉट होने से रोकते हैं और साथ ही ब्लड क्लॉट को तोड़ने में भी मदद करते हैं, जिससे हृदय संबंधी रोग और स्ट्रोक का ख़तरा कम होता है. इसलिए सल्फर का अधिक से अधिक फ़ायदा उठाने के लिए प्याज़ को कच्चा खाएं, क्योंकि प्याज़ को पकाने से सल्फ़र कम्पाउंड्स की मात्रा घट जाती है. हालांकि सल्फर कम्पाउंड्स से कुछ नुक़सान भी हैं, जिसके कारण प्याज़ से तेज़ महक आती है और प्याज़ काटते समय आंखों से आंसू निकलने लगते हैं. सल्फर के अलावा प्याज़ में दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. प्याज़ के ऊपरी पर्तों में क्यूर्सेटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है, जो शरीर में नुक़सान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, प्याज़ को पकाने से क्यूर्सेटिन ज़्यादा कॉन्सन्ट्रेट हो जाता है. अगर आपको प्याज़(Benefits Of Onion) का स्वाद पसंद है तो सलाद, बर्गर या सैंडविच में कच्चे प्याज़ डालें. अगर आपको कच्चे प्याज़ की तेज़ महक पसंद नहीं है तो उसे हल्का पकाकर खाएं.

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फुल क्रीम मिल्क या टोन्ड मिल्क, क्या है ज़्यादा सेहतमंद ( Full Cream Milk or Toned Milk, Which is more Healthy?)

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आज के समय में ज़्यादातर लोग  दूध बाजार से ही खरीदकर पीते हैं. वैसे तो बाजारों में कई तरह के दूध उपलब्ध हैं लेकिन जिस तरह के दूध का प्रयोग सबसे अधिक किया जाता है वह है फुलक्रीम मिल्क (Full Cream Milk) और टोन्ड मिल्क (Toned Milk). कुछ लोगों को टोन्ड दूध का सेवन करना पसंद होता है और कुछ लोगों को फुलक्रीम दूध. लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि आपके लिए इनमें से कौनसा सही है? आज इस लेख में हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि टोन्ड(Toned Milk) और फुलक्रीम दूध में क्या अंतर है और कौनसा दूध पीना किस उम्र के लोगों के लिए सही होता है.

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दूध बच्चों का संपूर्ण आहार माना जाता है. यह कैल्शियम और प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है. जहां तक फुल क्रीम(Full Cream Milk) और टोन्ड मिल्क में से चुनने का प्रश्‍न है तो 100 मिलीलीटर ग्लास फुल क्रीम मिल्क में 67 कैल एनर्जी, 4.2 फैट, 120 एमजी कैल्शियम और 3.2 प्रोटीन होता है, जबकि 100 मि.ली टोन्ड मिल्क में 61 कैल एनर्जी, 1.2 फैट, 120 एमजी कैल्शियम और 3.2 प्रोटीन होता है.

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किसको करना चाहिए टोन्ड मिल्क का सेवन? 
टोन्ड दूध(Toned Milk) का सेवन गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को करना चाहिए. इसके अलावा वो लोग जिनका कि पाचन खराब है वो लोग भी इस दूध का सेवन कर सकते हैं. शिशुओं और किशोरों को यह दूध(Toned Milk) नहीं पीना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में उनके शरीर में प्रोटीन और कैलोरी की बहुत ज्यादा खपत होती है.

किसके लिए है फुल क्रीम मिल्क बेहतर?

5 साल तक के बच्चों को फुल क्रीम मिल्क(Full Cream Milk) देना चाहिए, क्योंकि यह इसमें मौजूद फैट में कुछ ज़रूरी पोषक तत्व, जैसे- बिटा कैरोटिन, विटामिन डी, ई को पचाने और बच्चों के विकास में मदद करता है, लेकिन 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों को इसकी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि इसके बाद फैट स़िर्फ आर्टरिज़ में जाती है, जिससे बच्चे का वज़न बढ़ता है.
ध्यान रखें
फुल क्रीम दूध(Full Cream Milk) में पानी मिलाना सही ऑप्शन नहीं है. पानी मिलाने से फैट तो कम हो जाता है, लेकिन इसके साथ कैल्शियन और प्रोटीन लेवल भी घट जाता है.

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