Women Achievers

वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है. वर्ष 2019 ही नहीं 2020 भी महिला प्रधान फिल्मों के नाम रहनेवाला है यानी इस साल भी एक से बढ़कर एक महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ के लिए तैयार हैं. इस साल आपको ये महिला प्रधान फिल्में ज़रूर देखनी चाहिए:

1) छपाक
जनवरी 2020 में रिलीज़ हुई दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. ये फिल्म आज की ज़रूरत है. इस फिल्म के माध्यम से एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने का संदेश दिया गया है और लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई है. हालांकि दीपिका पादुकोण के जेएनयू दौरे के कारण कई जगहों पर फिल्म के प्रदर्शन में द़िक्क़त आई, लेकिन इस फिल्म को एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म कहा जा सकता है.

2) पंगा
जनवरी 2020 में ही एक और महिला प्रधान फिल्म पंगा रिलीज़ हुई. ये फिल्म भारतीय महिला कबड्डी टीम की भूतपूर्व कप्तान रह चुकी जया निगम की कहानी है. फिल्म में जया निगम का क़िरदार कंगना रनौत ने निभाया है. फिल्म पंगा को भी दर्शकों ने पसंद किया. इस फिल्म में ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि महिला को यदि अपने परिवारवालों का सपोर्ट मिले, तो वो अपने सपनों को आसानी से पूरा कर सकती है और सपनों को हासिल करने में उम्र कभी बाधा नहीं बनती.

3) थप्पड़
महिला प्रधान फिल्मों में तापसी पन्नू का होना ही फिल्म को स्पेशल बनाता है. फिल्म थप्पड़ में भी तापसी पन्नू ने दमदार अभिनय किया है. फरवरी 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म थप्पड़ एक ड्रामा थ्रिलर है और एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म भी.

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4) गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल
इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इसकी चर्चा 2019 में भी काफ़ी हो चुकी है. गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल फिल्म में जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं. यह फिल्म महिलाओं के लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है. वर्ष 2020 की महिला प्रधान फिल्मों में गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल एक महत्वपूर्ण फिल्म है.

5) धाकड़
कंगना रनौत का शानदार एक्शन आप पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं. फिल्म धाकड़ में एक बार फिर कंगना एक्शन करती नज़र आएंगी. महिला प्रधान फिल्मों में कंगना रनौत का हमेशा से विशेष योगदान रहा है और इस फिल्म में भी वो अपनी एक अलग पहचान बनाती नज़र आएंगी.

6) शकुंतला देवी
बॉलीवुड की मोस्ट टैलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन जल्द ही फिल्म शकुंतला देवी में नज़र आनेवाली हैं. इस फिल्म की कहानी महान गणितज्ञ शकुंतला देवी पर आधारित है. शकुंतला देवी तेज़ी से गणित का हिसाब करने की कला में माहिर थीं. इसी वजह से उन्हें मानव कंप्यूटर का उपनाम भी दिया गया था. फिल्म में विद्या बालन के पति का क़िरदार बांग्ला फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता जीशु सेनगुप्ता निभाएंगे.

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7) थलाइवी
जानी-मानी राजनीतिज्ञ और फिल्म अभिनेत्री रहीं जयललिता की बायोपिक थलाइवी में कंगना रनौत उनका क़िरदार निभाएंगी. इस फिल्म को ए एल विजय निर्देशित कर रहे हैं. 2020 में थलाइवी फिल्म को तमिल, तेलुगू और हिंदी में एक साथ रिलीज़ किया जाएगा.

8) गंगूबाई काठियावाड़ी
संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी भी वर्ष 2020 की एक प्रमुख महिला प्रधान फिल्म है. इस फिल्म में आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में हैं. मुंबई के कमाठीपुरा में रहनेवाली एक माफिया क्वीन गंगूबाई पर आधारित फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी हुसैन ज़ैदी की क़िताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई से ली गई है.

वर्ष 2019 की ये महिला प्रधान फिल्में हर महिला को देखनी चाहिए
वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है.

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1) सांड की आंख
तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की फिल्म सांड की आंख वर्ष 2019 की सबसे बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म थी. इस फिल्म की सबसे ख़ास बात ये थी कि पहली बार कोई महिला प्रधान फिल्म दीपावली के समय रिलीज़ हुई और सांड की आंख फिल्म को दर्शकों ने ख़ूब पसंद भी किया. इस फिल्म में दोनों अभिनेत्रियों ने शूटर दादी का ज़बर्दस्त क़िरदार निभाया. फिल्म की कहानी और तापसी-भूमि की शानदार एक्टिंग के लिए फिल्म को काफी सराहना मिली. फिल्म सांड की आंख ने बॉक्स आफिस पर शानदार कमाई की.

2) मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी
बॉलीवुड की क्वीन कही जानेवाली एक्ट्रेस कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी इस साल की सबसे बड़ी महिला प्रधान फिल्म है. यह फिल्म झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है. इस फिल्म में कंगना ने झांसी की रानी की भूमिका निभाई है और फिल्म में कंगना के काम को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. हालांकि फिल्म अपने कुछ अंदरूनी मसलों के कारण विवादों में रही, लेकिन इसके बावजूद फिल्म को दर्शकों की अच्छी सराहना मिली. महिला प्रधान फिल्म होने के साथ ही इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इस फिल्म की निर्देशक भी कंगना रनौत ही हैं.

3) मिशन मंगल
इसरो की पहली ही कोशिश में मंगल पहुंचने की कहानी पर आधारित फिल्म मिशन मंगल में मुख्य क़िरदार में विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी और नित्या मेनन हैं. हालांकि फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य अभिनेता के रूप में थे, लेकिन ये फिल्म पूरी तरह से महिला प्रधान है. मार्स मिशन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था और मिशन मंगल फिल्म में यही बताया गया है. हालांकि फिल्म के प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार के नाम का सहारा लेने के लिए इस फिल्म की आलोचना भी हुई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और सभी एक्ट्रेस की एक्टिंग की ख़ूब तारीफ़ भी हुई.

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4) बदला
ये एक ऐसी महिला प्रधान फिल्म है, जिसने ये साबित कर दिखाया कि कम बजट में भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है. कम बजट में बनी शाहरुख ख़ान के रेड चिलीज़ प्रोडक्शन की फिल्म बदला ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की. फिल्म में तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म में तापसी एक कत्ल के इल्ज़ाम में फंस जाती है और ख़ुद को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन से मदद मांगती है. फिल्म बदला की कहानी और कलाकारों की एक्टिंग इतनी अच्छी है कि इसी कारण कम बजट में इतनी बेहतरीन फिल्म बन पाई है.

5) द स्काई इज़ पिंक
देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा लंबे समय से हिंदी फिल्मों में नज़र नहीं आईं, लेकिन जब उनकी फिल्म द स्काई इज़ पिंक रिलीज़ हुई, तो एक बार फिर दर्शक उनकी एक्टिंग के कायल हो गए. फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने जिस तरह एक प्रेमिका और मां की भूमिका निभाई है, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया. फिल्म में प्रियंका के साथ फरहान अख़्तर भी हैं. इस फिल्म की कहानी और प्रियंका चोपड़ा की एक्टिंग इतनी भावुक है कि द स्काई इज़ पिंक फिल्म की तारीफ़ न स़िर्फ दर्शकों ने की, बल्कि कई कलाकारों ने भी की.

6) मर्दानी 2
पिछले कुछ समय से रानी मुखर्जी लगातार महिला प्रधान फिल्मों में काम कर रही हैं. मर्दानी, हिचकी जैसी संवेदनशील फिल्मों में काम करने के बाद 2019 में रानी मुखर्जी फिल्म मर्दानी 2 में इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी राव बनकर महिलाओं पर ज़ुल्म करनेवाले अपराधियों पर कहर बरपाती नज़र आईं. मर्दानी 2 फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया और इसे रिलीज़ के पहले दिन से ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला.

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7) एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
इस फिल्म में यूं तो सोनम कपूर के साथ अनिल कपूर और राजकुमार राव भी मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन अपने नाम और कहानी के कारण फिल्म सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा फिल्म की कहानी लेस्बियन यानी समलैंगिकता पर आधारित है. फिल्म का विषय अच्छा होते हुए भी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन वर्ष 2019 की महिला प्रधान फिल्मों में इस फिल्म को शामिल किए बिना महिला प्रधान फिल्मों की बात अधूरी रह जाएगी.

8) द ज़ोया फैक्टर
सोनम कपूर ने वर्ष 2019 में दो महिला प्रधान फिल्मों (एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा और द ज़ोया फैक्टर) में काम किया, लेकिन अफ़सोस उनकी दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाईं. फिल्म द ज़ोया फैक्टर में सोनम कपूर ने एक ऐसी लड़की का क़िरदार निभाया है, जो इंडियन क्रिकेट टीम का लकी चार्म होती है, उसकी मौजूदगी में टीम सारे मैच जीतने लगती है. हालांकि फिल्म में सोनम कपूर के साथ दुलकर सलमान भी हैं, लेकिन फिल्म की कहानी पूरी तरह से सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. सोनम कपूर की ये फिल्म भी ख़ास नहीं चली, लेकिन इस फिल्म को भी महिला प्रधान फिल्मों की कैटेगरी में रखना ज़रूरी है.
कमला बडोनी

निगाहों से छलके वो क़तरे अब नहीं हैं उसकी पहचान… ख़ामोशी को छोड़ उसने छू लिया है आसमान… पथरीली राहों पर चलना अब लगता है उसे आसान, हौसला और हिम्मत ही है अब उसकी असली पहचान… लोगों ने कहा छोड़ दे यह रास्ता, इससे तेरा क्या वास्ता… उसने कहा, साहस ही मेरा दूसरा नाम, तुमने अब तक पहचाना नहीं मुझे, लेकिन फूलों का आंगन छोड़, मैंने कांटों का लिया है दामन थाम… मुश्किलों से मुझे डर नहीं लगता, अड़चनें मुझे लुभाती हैं… हां औरत हूं मैं और अब हर चुनौती मुझे भाती है…

 

Inspiring Women Achievers

आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपने अस्तित्व की पहचान बना चुकी हैं, ऐसे में वुमन्स डे यानी महिला दिवस के अवसर पर हम भी उनके जश्‍न में शामिल हैं और उन्हें सलाम करते हैं. हमारे देश में भी महिला एचीवर्स की कमी नहीं है, उन्हीं में से कुछ का ज़िक्र हम अपने पन्नों पर कर रहे हैं, लेकिन हमारे दिलों में सभी के लिए प्यार और सम्मान है.

अंशु जमसेंपा

हौसले बुलंद हों, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं. अंशु इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. अंशु दुनिया की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने एक ही सीज़न में दो बार एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ाई की. अंशु ने मात्र 5 दिनों के अंतराल पर ही यह कारनामा कर दिखाया. अरुणाचल प्रदेश की रहनेवाली अंशु दो बच्चों की मां हैं. अंशु के इस वर्ल्ड रिकॉर्ड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दंग हैं और उन्होंने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी थी. अंशु कुल मिलाकर 4 बार माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकी हैं. उम्मीद है, अंशु इसी तरह देश का तिरंगा सबसे ऊंचाई पर फहराती रहेंगी और हमें गौरवान्वित करती रहेंगी.

अनीता कुंडू

बात जब महिला पर्वतारोहियों की ही चल रही है, तो हम अनीता कुंडू को कैसे भूल सकते हैं. अनीता कुंडू पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने चाइना साइड से माउंट एवरेस्ट फतेह किया और देश का सीना गर्व से चौड़ा किया. हरियाणा के हिसार में 29 वर्षीया अनीता सब इंस्पेक्टर हैं और उनकी उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट करके बधाई दी. इसके अलावा अनीता कुंडू चीन और नेपाल दोनों तरफ़ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़नेवाली पहली भारतीय महिला भी बनीं. अनीता ने दो वर्ष पहले भी यह कोशिश की थी, लेकिन भूकंप के कारण मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा. वर्ष 2017 की 11 अप्रैल को अनीता ने फिर यह मिशन शुरू किया. इसी बीच यह ख़बर भी आई कि अनीता से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है, लेकिन 20 अप्रैल को ख़बर मिली कि वो अपनी मंज़िल के क़रीब हैं और अगले ही दिन उन्होंने सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया.

साहिथी पिंगली

बैंगलुरू की इस टीनएजर और 12वीं की छात्रा ने एक अनोखी उपलब्धि हासिल की है. मिल्की वे के एक ग्रह का नाम साहिथी के नाम पर रखा जाएगा. साहिथी ने इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (आईएसईएफ) में गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि हासिल की है. इस छोटी उम्र में इतना बड़ा मुक़ाम हासिल कर साहिथी ने देश का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया. साहिथी ने बैंगलुरू की झीलों के प्रदूषण पर शोध कार्य किया था. साहिथी ने अपने पेपर्स आईएसईएफ कॉम्पटीशन में रखे. यह फेयर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित प्री कॉलेज स्तर का साइंस कॉम्पटीशन माना जाता है. साहिथी ने अपने पेपर्स- ‘एन इनोवेटिव क्राउडसोर्सिंग अप्रोच टु मोनिटरिंग फ्रेश वॉटर बॉडीज़’ फेयर में प्रेज़ेंट किए और उसे गोल्ड मेडल मिला. साहिथी ने एक ऐप डेवलेप किया है और इस रिसर्च में उन तत्वों के बारे में बताया गया है, जो झीलों के प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. पर्यावरण संरक्षण के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और इसी के मद्देनज़र एमआईटी यानी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की लिंकन लैबोरेटरीज़ ने साहिथी के नाम पर एक छोटे ग्रह का नाम रखने का निर्णय लिया.

झूलन गोस्वामी

झूलन का नाम आज बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर है. चंद साल पहले तक महिला क्रिकेटर्स को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी जगह बनाने के बाद और जीत का जज़्बा दिखाने के बाद हर महिला क्रिकेटर सबकी फेवरेट बन चुकी हैं. इन्हीं में से एक नाम झूलन का भी है. झूलन की उपलब्धि बहुत बड़ी है. आज की तारीख़ में वो विश्‍व में सर्वश्रेष्ठ महिला गेंदबाज़ का ख़िताब हासिल कर चुकी हैं. झूलन वनडे में 200 विकेट्स हासिल करनेवाली पहली महिला गेंदबाज़ भी बन गईं. देश को इन पर नाज़ है.

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मिताली राज

झूलन की ही तरह मिताली भी सबकी आंख का तारा बन चुकी हैं. मिताली न स़िर्फ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं, बल्कि एकदिवसीय क्रिकेट में विश्‍व में सर्वाधिक रन बनानेवाली खिलाड़ी भी हैं. 6000 से अधिक रन बनानेवाली वो एकमात्र महिला क्रिकेटर हैं. वो एकमात्र ऐसी खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने एकदिवसीय खेल में लगातार 7 बार हाफ सेंचुरी बनाई. मिताली ही एकमात्र ऐसी क्रिकेटर हैं (पुरुष व महिला दोनों में) जिन्होंने आईसीसी वर्ल्ड कप फाइनल में दो बार भारत का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 2005 के बाद वर्ष 2017 में भी मिताली के प्रतिनिधित्व में भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची. 10 वर्ष की उम्र से ही क्रिकेट खेल रहीं मिताली का जन्म तमिल परिवार में हुआ था और आज पूरे भारत को उन पर नाज़ है.

महिला बाइकर्स ने दिखाए ख़तरनाक स्टंट

इस साल गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2018 की परेड में पुरुषों की बजाय सीमा सुरक्षा बल की महिला बाइकर्स ने अपने जौहर दिखाए. यह पहली बार हुआ और सभी इनके दमखम के आगे नतमस्तक हो गए. बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स ने 350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बाइक्स पर एरोबेटिक्स व अन्य कलाबाज़ियां दिखाकर सबका दिल भी जीत लिया और इस गणतंत्र दिवस को और भी ख़ास बना दिया. उनके हुनर, कौशल और साहस को हम भी सलाम करते हैं.

आईएनएस तारिणी की महिला स्क्वैड

महिला सशक्तिकरण और समुद्र में महिलाओं की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय नौसेना ने दुनिया भ्रमण के लिए ऑल वुमन टीम भेजने का निर्णय लिया था, जिसमें उनका साथी बना आईएनएस तारिणी. यह नौकायन पोत लेटेस्ट सैटलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस है. इस प्रोजेक्ट के लिए छह महिला ऑफिसर्स की टीम चुनी गई है, जिसका नेतृत्व कर रही हैं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी. उनका यह समुद्री विश्‍व भ्रमण इसी वर्ष यानी 2018 मार्च के अंत तक पूरा होने का अनुमान है.

आंचल ठाकुर

स्कीइंग जैसे स्पोर्ट्स में भारत में शायद ही किसी को दिलचस्पी हो, लेकिन आंचल ठाकुर ने इंटरनेशनल स्तर पर स्कीइंग प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर न स़िर्फ इतिहास रच दिया, बल्कि सरकार व लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. आंचल यह मुकाम हासिल करनेवाली पहली भारतीय हैं. आंचल ने एल्पाइन एज्डेर 3200 कप में ब्रॉन्ज़ जीता, जिसका आयोजन स्की इंटरनेशनल फेडरेशन करता है. आंचल ने जीत के बाद ट्वीट किया था कि ‘आख़िर ऐसा कुछ हो गया, जिसकी उम्मीद नहीं थी. मेरा पहला इंटरनेशनल मेडल. हाल ही में तुर्की में ख़त्म हुए फेडरेशन इंटरनेशनल स्की रेस (ऋखड) में मैंने शानदार परफॉर्म किया.’ ज़ाहिर है आंचल की यह उपलब्धि बेहद ख़ास है, क्योंकि विंटर स्पोर्ट्स को हमारे देश में ख़ास तवज्जो नहीं दी जाती. न तो उसका कोई कल्चर है, न ही इतनी सुविधाएं, लेकिन आंचल की जीत ने इस दिशा में भी उम्मीद जगाई है और उम्मीद है आगे और भी ऐसे मेडल्स हमारे देश की बेटियां लाएंगी.

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मानुषी छिल्लर

भारत की मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड 2017 का ख़िताब जीता और एक बार फिर दुनिया ने माना कि भारत है टैलेंट और खूबसूरती के संगम का सबसे बेहतरीन स्रोत. चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में भारत की सुंदरी मानुषी ने ये टाइटल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. मिस वर्ल्ड 2017 ब्यूटी पेजेंट में कुल 118 हसीनाओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानुषी ने बाज़ी मार ली. हरियाणा के सोनीपत की रहनेवाली मानुषी मेडिकल की स्टूडेंट हैं और फाइनल राउंड में मानुषी से जूरी ने ट्रिकी सवाल पूछा था कि किस प्रोफेशन में सबसे ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए, जिसका जवाब मानुषी ने बड़ी ही समझदारी से दिया कि मां को सबसे अधिक सम्मान मिलना चाहिए. मां को सैलरी या कैश की ज़रूरत नहीं, उन्हें सम्मान और प्यार मिलना चाहिए. उनके इस जवाब ने सबका दिल जीत लिया और मिस वर्ल्ड का ख़िताब भारत के नाम हो गया.

भवानी देवी

तलवारबाज़ी एक प्राचीन कला है और उसे मॉडर्नाइज़ करके फेंसिंग खेल के रूप में अब खेला जाता है. भारत की भवानी देवी वाक़ई अपने नाम को सार्थक सिद्ध करके तलवारबाज़ी यानी फेंसिंग में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. भवानी चेन्नई की रहनेवाली हैं और स्कूल के दिनों से ही वो इस खेल में अपना भविष्य तलाश रही थीं. 2017 में आइसलैंड में हुई तलवारबाज़ी की प्रतियोगिता में भवानी ने सीधे गोल्ड पर निशाना साधा और देश को सिर ऊंचा करने का एक और मौक़ा दिया. भवानी नेे तीसरी बार इस चैंपियनशिप में भाग लिया था, लेकिन इस साल उनकी मेहनत रंग लाई. इससे पहले भवानी एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीत चुकी हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिखर पर पहुंचने का सुकून ही अलग होता है.

ख़ास बातचीत…

श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला ने सेलिंग करियर में दिखाया ग़ज़ब का हौसला: जी हां, हम श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला जैसी मरीन इंजीनियर्स की बात कर रहे हैं, जिन्होंने पुरुषों के दख़लवाले क्षेत्र में ख़ुद को साबित किया और एक अलग मुक़ाम हासिल किया. सुनीती ने हमें बताया कि उनके बैच में कुल दो ही महिला स्टूडेंट्स थीं. ऐसे में यह किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि हर किसी की नज़र हम पर ही रहती थी, यहां तक कि हमारे प्रोफेसर्स की भी कि हम कैसा परफॉर्म कर रही हैं, कितनी गंभीर हैं अपने करियर को लेकर आदि.
धीरे-धीरे सबको भरोसा हो गया. फिर बारी आई अगली चुनौती की. शिप पर बोर्ड करते समय भी मुझे हर पल यह साबित करना पड़ता था कि हां, मैं पुरुषों के समान ही परफॉर्म कर सकती हूं, बल्कि उनसे बेहतर हूं. चूंकि मेरे परिवार का बहुत सपोर्ट था, तो मैं हर चुनौती पार कर गई.

इंटरनेशनल वुमन सीफेयरर्स फाउंडेशन… एक बेहतरीन पहल 

सुनीती कहती हैं शिपिंग करियर बेहद अलग और सम्मोहक है. वो आपको फाइटर बनाता है और विपरीत परिस्थितियों में सरवाइव करना सिखाता है. मैं ख़ुद एक ट्रेंड फायर फाइटर भी हूं, जिससे मुझे काफ़ी मदद मिलती है.आप दुनिया की सैर कर सकती हैं, पॉल्यूशन फ्री माहौल में काम कर सकती हैं, तो लड़कियों को इस क्षेत्र में भी करियर ज़रूर आज़माना चाहिए. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग से संबंधित डर, भेदभाव जैसी चीज़ें कम हो सकें. मैं हर बार जब भी नया शिप जॉइन करती हूं, तो हर बार मुझे ख़ुद को साबित करना पड़ता है, क्योंकि मेरे पुरुष साथी मेरी परफॉर्मेंस को लेकर इतने आश्‍वस्त नहीं होते, उनके मन में स़िर्फ इसलिए शंका होती है, क्योंकि मैं लड़की हूं, पर मेरा काम देखकर उनकी शंकाएं स्वत: ही दूर हो जाती हैं. इसलिए ऐसी कोई चुनौती नहीं, जिनका सामना करके जीता न जा सके.

श्रावणी भी यही कहती हैं कि परिवार की तरफ़ से पूरा सपोर्ट था. 120 के बैच में मात्र दो ही लड़कियों का होना यही बताता है कि अभी भी लड़कियां इस क्षेत्र में करियर को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि ज़ाहिर है चुनौतियां हैं इसमें, लेकिन अगर आपको चुनौतियां पसंद हैं, तो आपको कोई रोक नहीं सकता. हमारे साथ जो लड़के पढ़ते थे, वो भी पारंपरिक भारतीय सोच में पले-बढ़े थे, लेकिन एक समय के बाद सभी ने यह माना कि लड़के-लड़की का भेदभाव किसी भी क्षेत्र में नहीं होना चाहिए. पर हां, भारत में आज भी इतनी खुली सोच नहीं है कुछ क्षेत्रों को लेकर, क्योंकि हमें बहुत-सी कंपनियां नौकरी देने में हिचक रही थीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लड़कियां शिपिंग के माहौल में काम नहीं कर पाएंगी. वहां की चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएंगी. साथ ही अब तक सही पॉलिसीज़ भी नहीं बन पाई हैं, जिससे लड़कियों को इसमें अधिक बढ़ावा नहीं मिला. कॉलेज में एडमिशन को लेकर कोई भेदभाव नहीं है, यहां तक कि सरकार लड़कियों को डिस्काउंट भी देती है, फिर भी हमारा समाज अब तक कुछ चीज़ों को लेकर आज भी हिचकिचाता है. लिंग के आधार पर समानता अब भी उनकी सोच से मेल नहीं खाती. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग आधारित डर व भेदभाव कम हो सके.

इनका ज़िक्र भी है ज़रूरी…
  • महिला क्रिकेटर्स में पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, हरमनप्रीत कौर व अन्य सभी ने अपने-अपने स्तर पर सराहनीय काम किया है.
  • बॉक्सिंग में मेरी कॉम, बैडमिंटन में पीवी सिंधु और साइना नेहवाल, टेनिस में सानिया मिर्ज़ा… ये तमाम ऐसे नाम हैं, जिनकी उपलब्धियों को मात्र किसी एक वर्ष में बांधकर या सीमित करके नहीं देखा जा सकता, ये उससे भी ऊपर उठ चुकी हैं और लगातार उम्दा प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन कर रही हैं.
  • महिला आईस हॉकी टीम ने भी अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय जीत दर्ज की.
  • डॉक्टर नीरू चड्ढा पहली भारतीय महिला हैं, जो इंटरनेशनल ट्रीब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ सी की न स़िर्फ सदस्य बनीं, बल्कि वो जज चुनी गईं.
  • आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पहली ऐसी भारतीय महिला बनीं, जिन्हें ग्लोबल कॉर्पोरेट सिटिज़नशिप के लिए अमेरिका के टॉप अवॉर्ड (वुड्रो विल्सन अवॉर्ड) से नवाज़ा गया.
  • पेप्सीको की चेयरपर्सन और सीईओ इंदिरा नुई भी पहली ऐसी महिला बनीं, जिन्हें आईसीसी ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया.

– गीता शर्मा

Women Achievers

बात चाहे खेल के मैदान की हो या बिज़नेस की हमारे देश की महिलाएं हर क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवा चुकी हैं. पिछले साल हुए रियो ओलंपिक में बेटियों ने ही देश का मान बढ़ाया, वहीं बिज़नेस के क्षेत्र में भी कई महिलाओं ने अपना परचम लहराया. ग्लैमर वर्ल्ड में भी महिलाओं का बोलबाला रहा.

स्पोर्ट्स अचीवर्स
खेल की दुनिया में छाई रहीं ये महिलाएं

sakshi mallik

साक्षी मलिक
रियो ओलंपिक में देश को पहला मेडल दिलाकर साक्षी ने महिलाओं के साथ ही देश का मान भी बढ़ाया. 58 किलोग्राम की फ्री-स्टाइल रेसलिंग में साक्षी ने ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया. साक्षी का ये मेडल इसलिए और ख़ास था, क्योंकि रियो की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था, ऐसे में साक्षी के मेडल से सबकी उम्मीदें और हौसला बढ़ा था. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ानेवाली हरियाणा के एक छोटे-से गांव की पहलवान बेटी साक्षी मलिक जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं.

Women Achievers

पीवी सिंधु
ओलंपिक में देश को पहला सिल्वर मेडल दिलानेवाली बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधु हाल ही में चाइना ओपन के साथ-साथ सैयद मोदी ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड बैडमिंटन टूर्नामेंट का ख़िताब भी अपने नाम कर चुकी हैं. ओलंपिक सिल्वर मेडल जीतनेवाली वो पहली भारतीय महिला हैं. पीवी सिंधु का पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधु है. मात्र 8 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलनेवाली सिंधु विश्‍व बैडमिंटन रैंकिंग में महिला सिंगल्स में दो पायदान के फ़ायदे के साथ सातवें स्थान पर पहुंच गई हैं. 2015 में सिंधु को पद्मश्री और 2016 में राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया.

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दीपा करमाकर
अगरतला की 23 साल की जिमनास्ट दीपा भले ही ओलंपिक मेडल से चूक गई हों, मगर अपने बेहतरीन प्रदर्शन से उन्होंने सबका दिल जीत लिया था. ओलंपिक के फाइनल में पहुंचनेवाली वो पहली महिला जिमनास्ट थीं. 6 साल की उम्र से ही जिम्नास्टिक की प्रैक्टिस करनेवाली दीपा ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. बेहतरीन खेल के लिए दीपा को अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है. सुनने में आया है कि दीपा पर एक किताब लिखी जाएगी, जिसमें उनके कोच बिश्‍वेश्‍वर नंदी सह लेखक की भूमिका निभाएंगे. इस किताब का नाम ङ्गदीपा करमाकर: द स्मॉल वंडरफ होगा, जिसमें उनके जीवन में आई बाधाओं और जीत की कहानी बयां की जाएगी, जबकि इसमें करमाकर के निजी एलबम के कुछ फोटोज़ और ओलंपिक व राष्ट्रमंडल खेलों के फोटो भी शामिल होंगे.

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दीपा मलिक
36 साल की दीपा मलिक ने रियो पैरालिंपिक में महिलाओं की शॉटपुट स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर सबको हैरान कर दिया. पैरालाइज़्ड दीपा के कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता, मगर इससे उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई है. शॉटपुट के अलावा उन्हें जैवलिन थ्रो, तैराकी और मोटर रेस में भी दिलचस्पी है. इतना ही नहीं, वो अपना रेस्टोरेंट भी चलाती हैं. निश्‍चय ही दीपा की कामयाबी हज़ारों-करो़ड़ों लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.\

इंडियन ई कॉमर्स में है इन महिलाओं का दबदबा

पिछले कुछ सालों से भारत में स्टार्टअप बिज़नेस काफ़ी फल-फूल रहा है. इन स्टार्टअप की शुरुआत करनेवाली यंग जनरेशन में कई ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने तमाम विरोधों और मुश्किलों को दरकिनार करते हुए ई-कॉमर्स बिज़नेस में अपनी अलग पहचान बनाई.

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स्वाति भार्गव

भारत में कैशबैक का कॉन्सेप्ट लॉन्च करने का श्रेय जाता है यंग एंड टैलेंटेड स्वाति भार्गव को. अंबाला की स्वाति भार्गव ने 2013 में CashKaro.com की शुरुआत अपने पति के साथ मिलकर की और 3 सालों में वेबसाइट बेहद पॉप्युलर हो गई है. ऑनलाइन शॉपिंग करनेवालों के लिए ये डिस्काउंट पाने का बेहतरीन ज़रिया है. लंदन में पढ़ाई और नौकरी के दौरान ही स्वाति को कैशबैक कॉन्सेप्ट का आइडिया मिला. दरअसल, स्वाति ने पहले 2011 में यूके में पोरिंग पाउंड्स नामक कैशबैक वेबसाइट शुरू की और उसकी सफलता के बाद उन्हें महसूस हुआ कि भारत में कैशबैक कॉन्सेप्ट के लिए बहुत स्कोप है. बस, फिर क्या था, उरीहघरीे.लेा के रूप में उन्होंने कामयाबी की नई इबारत लिख दी.

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फाल्गुनी नायर
18 साल तक इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम करने के बाद फाल्गुनी नायर ने 2012 में ब्यूटी और ई-कॉमर्स पोर्टल Nykaa.com की स्थापना की. आज महिलाओं के बीच ये वेबसाइट काफ़ी पॉप्युलर है. इस वेबसाइट की ख़ासियत ये है कि इसमें महिलाओं की त्वचा की ज़रूरत के हिसाब से उन्हें प्रोडक्ट बेचे जाते हैं. यही वजह है कि कम समय में ये महिलाओं ख़ासकर यंग जनरेशन के बीच काफ़ी पॉप्युलर हो गई.
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रिचा कर

पॉप्युलर लॉन्जरी बेवसाइट ज़िवामे ((Zivame)  की को-फाउंडर और सीईओ रिचा भले ही आज बेहद सफल बिज़नेसवुमन बन गई हैं, मगर उनके लिए अपनी अलग सोच को अमली जामा पहनना बेहद मुश्किल रहा. शुरुआत में उन्हें अपनी मां के ही विरोध का सामना करना पड़ा. 2011 में जब उन्होंने इस बिज़नेस की शुरुआत की तो उनकी मां ने कहा था कि वे अपनी सहेलियों को कैसे बताएंगी कि उनकी बेटी कंप्यूटर पर ब्रा और पैंटी बेचती है. लोग उनके बिज़नेस पर हंसते थे, मगर तमाम मुश्किलों के बावजूद उनके हौसले कम नहीं हुए और आज उनकी 270 करोड़ की कंपनी ज़िवामे देश का सबसे बड़ा प्रीमियर ऑनलाइन अंडरगार्मेंट स्टोर बन गया है. इतना ही नहीं, ये महिलाओं को सही साइज़ की ब्रा ख़रीदने के लिए भी प्रेरित करता है.
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सुची मुखर्जी

पॉप्युलर फैशन वेबसाइट लाइमरोड (Limeroad.com) की शुरुआत सुची मुखर्जी ने की. वो इसकी संस्थापक और सीईओ हैं. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करनेवाली सुची मुखर्जी ने जब अपनी ई-कॉमर्स कंपनी लॉन्च करने की सोची, तो उन्हें लोगों की कुछ ऐसी राय मिली कि तुम लड़की हो, ये काम तुम्हारे बस का नहीं, मगर सुची ने ऐसी सलाह देनेवालों की एक न सुनी और मंज़िल की तरफ़ बढ़ती रहीं. आज उनकी कंपनी 2 लाख महिलाओं को रोज़गार दे रही है.
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उपासना टाकु
भारत में तेज़ी से मशहूर होते मोबाइल वॉलेट Mobikwik की को-फाउंडर व डायरेक्टर हैं. उन्होंने अपने पति बिपिन प्रीत सिंह के साथ मिलकर 2009 में मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की शुरुआत की. अब तो इसका मोबाइल ऐप भी आ चुका है. हाल ही में Mobikwik ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ मिलकर मोबाइल ऐप से ऑन डिलीवरी भुगतान की सुविधा शुरू कर चुका है. Mobikwik पॉप्युलर ई वॉलेट में से एक है.
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ग्लैमर वर्ल्ड में इनकी रही चर्चा

* बॉलीवुड की मस्तानी दीपिका पदुकोण को एशिया की सबसे सेक्सी महिला का ख़िताब मिल चुका है. ब्रिटिश वीकली न्यूज़पेपर ईस्टर्न आई द्वारा  कराए गए यूके पोल में दीपिका को सबसे ज़्यादा वोट मिले. इससे पहले प्रियंका चोपड़ा चार बार एशिया की सबसे सेक्सी महिला होने का ख़िताब जीत  चुकी हैं

* प्रियंका चोपड़ा भले ही एशिया की सबसे सेक्सी महिला का ख़िताब जीतने में कामयाब न रही हों, मगर अपनी हॉलीवुड फिल्म व अमेरिकन टीवी शो  को लेकर चर्चा में बनी रहीं. मल्टी टैलेंडेट पिग्गी चॉप्स देश ही नहीं, विदेश में भी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं.

* 2016 में कई महिला प्रधान फिल्मों ने न स़िर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी राज किया, इसमें ङ्गनीरजाफ और ङ्गपिंकफ  सबसे ज़्यादा पॉप्युलर रहीं.

 

* फोर्ब्स की 2016 की लिस्ट में दुनिया की 100 सबसे पावरफुल महिलाओं की सूची में 4 भारतीय महिलाएं भी शामिल हैं.
* स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य फोर्ब्स की 100 पावरफुल महिलाओं की सूची में 25वें पायदान पर हैं.
* आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर इस लिस्ट में 40वें नंबर पर हैं.
* बायोकॉन कंपनी की चेयरमैन व एमडी किरण मजूमदार शॉ 2016 की फोर्ब्स की सूची में 77वें स्थान पर हैं.
* हिंदुस्तान टाइम्स की चेयरपर्सन व एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया को फोर्ब्स की लिस्ट में 93 रैंकिंग मिली है.

 

– कंचन सिंह