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महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन? (How To Prevent Urinary Tract Infection- UTI)

आज भी ज़्यादातर महिलाएं यूरिन इंफेक्शन के बारे में बात करने से कतराती हैं, लेकिन जब तकलीफ़ बढ़ जाती है, तो कई बार इसके ट्रीटमेंट के लिए उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट तक होना पड़ता है. यूरिन इंफेक्शन का इलाज बहुत आसान है, लेकिन समय पर इलाज न करने से समस्या जटिल हो सकती है, इसलिए इसके इलाज में देर बिल्कुल न करें.

Urinary Tract Infection

 

 

यदि किसी महिला को यूरिन इंफेक्शन हुआ है, तो ज़रूरी नहीं कि वो यूरिन संबंधी शिकायत ही करे. उसे पैरों में दर्द, कमर में दर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है. ऐसे में जब वो डॉक्टर के पास जाती है, तो कई बार डॉक्टर उसे कैल्शियम और विटामिन्स की दवाइयां देते हैं, वो उससे ये नहीं पूछते कि तुम्हारी यूरिन से बदबू तो नहीं आ रही है. ऐसे में जानकारी के अभाव में उसका सही इलाज नहीं हो पाता और समस्या जटिल हो जाती है. महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन कब, कैसे और क्यों होता है, बता रहे हैं कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड फिज़िशियन डॉ. अरुण शाह और डॉ. वसी शेख़.

Urinary Tract Infection

जानें यूटीआई (UTI) के रिस्क फैक्टर्स
* यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक ऐसा इंफेक्शन है, जो यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- किडनी, ब्लैडर, गर्भाशय आदि. लगभग 50% महिलाओं को जीवन में कभी-न-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता ही है, इसलिए महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन के कारण, बचाव और इसके सही इलाज के बारे में जानकारी होनी चाहिए.
* आमतौर पर यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है, लेकिन इसका इलाज यदि समय पर नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है.
* यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या तब और जटिल हो जाती है, जब इसके लक्षण असामान्य होते हैं, जैसे- कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि. ऐसी स्थिति में कई बार यूरिन इंफेक्शन का पता नहीं चल पाता और समस्या बढ़ जाती है.

यूटीआई (UTI) के कारण
आमतौर पर यूटीआई का प्रमुख कारण है बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग से मूत्राशय में प्रवेश करना. महिलाओं में यूटीआई के निम्न कारण हैं:
* पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मूत्रमार्ग की लंबाई छोटी होने के कारण उनमें यूटीआई का ख़तरा अधिक रहता है.
* सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं को यूटीआई होने की संभावना ज़्यादा होती है. सेक्स पार्टनर बदलने से भी यूटीआई होने की संभावना बढ़ जाती है.
* शुक्राणुनाशक क्रीम का उपयोग करने से यूटीआई हो सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कई महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन हो जाता है.
* जो लड़कियां पानी कम पीती हैं या पेशाब को रोककर रखती हैं, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
* जिन महिलाओं को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज़ है या जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं रहता, उनका ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.

यह भी पढ़ें: वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से राहत पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Home Remedies To Cure Vaginal Infection)

 

Urinary Tract Infection

यूटीआई (UTI) के लक्षण
जब तक यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक सीमित रहता है, तब यूटीआई के ये लक्षण दिखाई देते हैं:
* पेशाब करते समय जलन होना.
* योनि में खुजली होना और बदबू आना.
* बार-बार पेशाब जाना.
* पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना.
* पेशाब में खून आना.
* यूरिन इंफेक्शन के किडनी तक फैल जाने पर ठंड लगना और कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आना, पेटदर्द, थकान, बदनदर्द, मतली, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं.

यूटीआई (UTI) का इलाज
* यूटीआई का इलाज यूरिन और ब्लड टेस्ट के बाद ही किया जा सकता है. उसके बाद इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर इलाज करते हैं.
* महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, यूटीआई का इतिहास देखते हुए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं.
* यदि आपको हल्का बुख़ार है, आप खाने-पीने में सक्षम हैं, तो आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक्स का एक छोटा कोर्स भी पर्याप्त हो सकता है.
* असहनीय पेटदर्द, तेज़ बुख़ार, खाने-पीने में असमर्थता जैसी स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है.
* अच्छा महसूस करने पर भी इलाज बीच में न रोकें, वरना फिर से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* एंटीबायोटिक्स के अलावा बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने के लिए ख़ूब सारा पानी पीएं.

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Urinary Tract Infection
यूटीआई (UTI) से बचाव
जिन महिलाओं को बार-बार यूटीआई की तकलीफ़ होती है, उन्हें इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
* ख़ूब पानी पीएं.
* लंबे समय तक पेशाब न रोकें.
* प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें.
* शौच के समय जननांग की सफ़ाई आगे से पीछे की तरफ़ करें. ऐसा करने से मलद्वार की गंदगी योनि तक नहीं पहुंचती और संक्रमण की संभावना कम रहती है.
* यदि आपको कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो समय-समय पर पेट साफ़ करने की दवा लेते रहें.
* सेक्स से पहले और सेक्स के बाद पेशाब के समय जननांग साफ़ करें.
* सेक्स के समय शुक्राणुनाशक क्रीम के प्रयोग से बचें.
* जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो गया है, उन्हें वेजाइनल एस्ट्रोजन से फ़ायदा हो सकता है.
* यदि आपको बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाता है, तो एहतियात के तौर पर आप डॉक्टर की बताई हुई एंटीबायोटिक्स ले सकती हैं.

महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन, जानने के लिए देखें वीडियो:

महिलाओं में उम्र के अनुसार यूरिन इंफेक्शन
महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन कभी भी हो सकता है, लेकिन हर उम्र में इसके कारण और संकेत अलग-अलग होते हैं.
* पांच साल तक की बच्ची यदि पेशाब रोककर रखती है, तो उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में यदि वो बिना सर्दी-ज़ुकाम के बार-बार बीमार पड़ती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.
* पांच से दस साल की लड़की की पैंटी के रंग में यदि बदलाव नज़र आए, यदि उसकी टीचर शिकायत करे कि वो बार-बार पेशाब जाती है, वो रात में बार-बार पेशाब जाने के लिए उठती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं. ऐसे में उस लड़की को बुख़ार हो, ये ज़रूरी नहीं.
* प्यूबर्टी पीरियड में जब लड़की को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो हाइजीन के अभाव में उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. इस समय यूरिन इंफेक्शन के संकेत होते हैं- व्हाइट डिस्चार्ज, खुजली, पैंटी और वेजाइनल एरिया से बदबू आना.
* शादीशुदा महिलाओं में शादी के छह महीने से लेकर एक साल तक यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, इसे हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं. इस समय तक महिला के शरीर को बाहरी ऑर्गन की आदत नहीं होती, इसलिए सेक्स के दौरान उनका ब्लड फ्लो बढ़ सकता है. हाइजीन के अभाव में भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद हाइजीन के अभाव में अक्सर महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन हो जाता है. प्रेग्नेंसी के समय यूरिन इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के अभाव में महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है. इस समय कई महिलाओं को डायबिटीज़ हो जाता है, जिसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* जिन महिलाओं को डायबिटीज़ या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा होती है.

डॉक्टर से न छुपाएं सेक्स की बात
सेक्सुअली एक्टिव अविवाहित लड़कियों को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है. ऐसे में जब लड़कियां यूरिन इंफेक्शन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाती हैं और सेक्स की बात छुपाती हैं, तो उनका सही इलाज नहीं हो पाता और उनकी हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है. अत: जो लड़कियां सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें डॉक्टर से ये बात नहीं छुपानी चाहिए और अपना सही उपचार कराना चाहिए.
– कमला बडोनी

Personal Problems: क्या फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन से सेक्सुअल एक्टिविटी का पता लग सकता है? (Can A Doctor Tell If You Are Sexually Active?)

मैं एक कॉलेज स्टूडेंट हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि हैवी पीरियड्स किसे कहते हैैं? क्या दिन में कई पैड्स बदलना हैवी पीरियड्स कहलाता है?
– रेणु चौहान, नागपुर.

दिनभर में कई सैनीटरी पैड्स बदलने का मतलब यह नहीं कि आपके पीरियड्स हैवी हैं. हो सकता है, ऐसा आप हाइजीन के लिहाज़ से करती हों. पीरियड्स को तभी हैवी या असामान्य कह सकते हैं, जब यह आपके रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खलल डालता हो. अगर आप कॉलेज या ऑफिस नहीं जा पा रही हैं और रोज़ाना के काम अपने आप नहीं कर पा रही हैं, तो यह हैवी कहलाता है. ऐसे में आपको डॉक्टर को मिलना होगा. वैसे हैवी पीरियड्स का कारण थायरॉइड भी हो सकता है, इसलिए बेहतर होगा कि डॉक्टर से इस बारे में बात करें.

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Sexually Active

मैं 28 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. अभी मुझे फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन के लिए डॉक्टर के पास जाना है. क्या डॉक्टर शारीरिक जांच करके पता लगा सकते हैं कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं? दरअसल, डॉक्टर हमारे फैमिली फ्रेंड हैं और मैं नहीं चाहती कि मेरे पैरेंट्स को पता चले कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं.
– रागिनी, नई दिल्ली.

यह बहुत मुश्किल है या यूं कहें कि नामुमकिन है, क्योंकि स़िर्फ फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन से कोई डॉक्टर पूरे दावे के साथ यह नहीं बता सकता. वर्जिनिटी के लिए जिस हाइमन की बात की जाती है, कुछ महिलाओं में तो यह जन्म से ही नहीं होता. इसके अलावा फिज़िकल एक्टिविटी के कारण बहुतों का हाइमन सेक्स से पहले ही फट जाता है. सही तो यही होगा कि आप अपने डॉक्टर से कुछ न छिपाएं, क्योंकि वो आपको किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचा सकते हैं. अगर आप उन्हें सच बता देंगी, तो वो उस नज़रिए से एक्ज़ामिनेशन करेंगे और आप भविष्य में होनेवाली किसी हेल्थ प्रॉब्लम से बच सकती हैं.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

Personal Problems: हार्मोंस के कारण चिन पर बहुत बाल हैं, कोई उपाय बताएं? (Please Suggest Something For Unwanted Facial Hair)

मेरी उम्र 22 साल है. मेरे शरीर पर बहुत बाल हैं, ख़ासतौर से चिन पर. मैंने हेयर रिमूवल क्रीम्स, वैक्सिंग, थ्रेडिंग सभी टेम्प्रेरी तरी़के अपनाए, पर कोई लाभ नहीं हुआ. 
 – शीतल झा,पुणे.

आपको हिरसूट़िज़्म यानी एक्सेसिव हेयर ग्रोथ की समस्या है, जिसमें शरीर पर पतले, कठोर और काले बाल होते हैं, जैसे पुरुषों के होते हैं. हार्मोंस में असंतुलन के कारण महिलाओं में यह समस्या होती है. आपको हार्मोनल टेस्ट करवाना चाहिए. यदि हार्मोंस में असंतुलन हो गया है या हार्मोंस ब्लॉक हो गए हैं, तो आपको ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या एंटीएंड्रोजन की ज़रूरत होगी. बेहतर होगा कि आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

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Unwanted Facial Hair
मेरी 65 वर्षीया सहेली को 10 वर्ष पहले मेनोपॉज़ हो चुका था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे थोड़ी ब्लीडिंग हुई. क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना ठीक है? मुझे भी  मेनोपॉज़ हो चुका है और मुझे डर है कि कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही न हो?
– पूजा गौतम, पंजाब.

हो सकता है एट्रोफिक वेजिनाइटिस या वेजाइना के थिक होने के कारण आपकी सहेली के साथ ऐसा हुआ हो. लेकिन ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतना ठीक नहीं. यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे- सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर, एंडोमेट्रियल पोलिप्स, यूरिनल ट्यूमर आदि.  इसलिए मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को हल्के से नहीं लेना चाहिए. जहां तक आपका सवाल है तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी सहेली के साथ जो हुआ है, वो आपके साथ भी हो.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग कहीं गंभीर समस्या तो नहीं? (What Does It Mean If You’re Bleeding After Menopause?)

मैं 53 वर्षीया महिला हूं. तीन साल पहले मेरा मेनोपॉज़ (Menopause) हो चुका है. इन दिनों अचानक मुझे हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding) शुरू हो गई है. क्या यह कोई गंभीर समस्या है? क्या मुझे चेकअप करवाना चाहिए?
– सुमति राव, मैंगलोर.

एक बार जब मासिकधर्म एक साल के लिए बंद हो जाए तो यह स्थिर हो जाता है. इसके बाद कभी आपको वेजाइनल ब्लीडिंग नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दाग़-धब्बे भी नहीं दिखनेे चाहिए. आपको तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से चेकअप करवाना चाहिए, जो इंटरनल एक्ज़ामिनेशन या पीएपी स्मीअर जांच से सर्विक्स के कैंसर का पता लगा सकते हैं. यूट्रीन लाइन पर सूजन है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप सोनोग्राफ़ी भी करवा लें. यूट्रीन लाइन पर सूजन एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया, कैंसर या ओवरी ट्यूमर का संकेत है. वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, इसलिए सही जांच ज़रूरी है.

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 Bleeding After Menopause
मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि उन्होंने पीएपी स्मीअर करवाया है. यह क्या है और इस उम्र में क्या यह सभी को करवाना
पड़ता है?
– रजनी शर्मा, दिल्ली.

40 वर्ष की उम्र ऐसी उम्र है, जहां किसी भी तरह के कैंसर या ट्यूमर की संभावना से पहले ही नियमित चेकअप करवाते रहना चाहिए. पीएपी स्मीअर एक साधारण-सा टेस्ट है, जिसमें कॉटन या ब्रश को सर्विक्स से छूकर स्लाइड तैयार की जाती है और इस स्लाइड की जांच द्वारा कैंसर या अन्य किसी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह जांच किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में दो मिनट में की जा सकती है. यह जांच हर साल करवानी चाहिए और इसकी शुरुआत तभी कर देनी चाहिए, जब महिला सेक्सुअली एक्टिव हो. इसके अलावा 40 की उम्र में पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवानी चाहिए, जिससे गर्भाशय और ओवरी के कैंसर का पता चलता है. साथ ही मैमोग्राफ़ी भी करवा लेनी चाहिए, जिससे स्तन कैंसर का पता चलता है. किसी भी महिला को कैंसर की जांच के लिए ये सामान्य से टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: दो साल में सिर्फ दो बार पीरियड्स आए (Reasons For Irregular Periods)

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

अंडरगार्मेंट से जुड़ी 10 सच्चाइयां (10 Interesting Facts About Undergarment)

Facts About Undergarment

अंडरगार्मेंट से जुड़ी 10 सच्चाइयां (10 Interesting Facts About Undergarment)

हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स (Undergarments) पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें. हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें.

– एक सर्वे से पता चला है कि लगभग तीन में से दो महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, इनमें से 29% महिलाएं इस बात को जानते हुए भी ऐसा करती हैं.

– अधिकतर थॉन्ग्स लेसी और सैटिन के फैब्रिक में ही मिलते हैं, जो स्किन को ब्रीद नहीं करने देते और स्किनी होने के कारण वहां बैक्टीरिया ज़्यादा पनपते हैं, जिनसे इंफेक्शन का ख़तरा रहता है. –

– कॉटन पैंटीज़ सबसे सेफ होती हैं. इन्हें पहनने से पसीना कम आता है, जिससे बैक्टीरिया का जमाव और इंफेक्शन नहीं हो पाता.

– अक्सर यह माना जाता है कि अंडरवियर पहनने से पुरुषों के स्पर्म काउंट पर असर होता है, लेकिन जब तक कि अंडरवियर बहुत ज़्यादा टाइट न हो, तो कोई ख़तरा नहीं है.

– अधिकतर महिलाएं एक ही तरह की ब्रा हर ड्रेस पर पहनती हैं, क्योंकि उन्हें अलग-अलग तरह की ब्रा के बारे में पता ही नहीं होता, जैसे- स्मूद, टी-शर्ट ब्रा, पुशअप ब्रा, मिनिमाइज़र ब्रा आदि.प यही हाल पैंटीज़ का भी है, इसमें भी हाई वेस्ट, लो वेस्ट, बिकनी, बॉय शॉर्ट पैंटीज़ मिलती हैं, जो ड्रेस के अनुसार पहनी जानी चाहिए.

– जिन महिलाओं के पास रोज़ाना के लिए अलग-अलग ब्रा नहीं होती, वो एक ही ब्रा को दो-तीन दिनों तक लगातार पहनती हैं, जिससे बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है.

– ज़्यादा लंबे समय तक अंडरगार्मेंट्स को रिप्लेस नहीं करेंगे, तो इंफेक्शन्स का भी ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि उनका मटेरियल ख़राब होने लगता है, साथ ही उनका शेप भी सही नहीं रहता. बेहतर होगा कि समय-समय पर नए अंडरगार्मेंट्स ख़रीदते रहें.

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– ब्रा को ताउम्र के लिए न रखें. जी हां, हर छह महीने में ब्रा को बदल दें, क्योंकि उसका इलास्टिक लूज़ होने लगता है.

– आपका साइज़ बदलता है, तो ब्रा का साइज़ भी बदलें. जी हां, ब्रेस्ट्स का आकार व शेप समय के साथ बदलता है. ऐसे में आप उसी साइज़ की ब्रा हमेशा पहनेंगी, तो इसका मतलब है कि आप ग़लत साइज़ की ब्रा पहन रही हैं.

– वर्कआउट के बाद अंडरगार्मेंट्स ज़रूर बदलें, क्योंकि पसीने की वजह से बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.

अंडरगार्मेंट्स से जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– जापान की महिलाओं का ब्रा साइज़ सबसे छोटा होता है.

– अमेरिका में औसत ब्रा साइज़ है 36 सी.

– अमेरिका में महिलाओं के पास औसतन अंडरवेयर के 22 पेयर होते हैं.

– कप साइज़ का सिस्टम 1930 में चलन में आया था.

– इटली में महिलाएं न्यू ईयर में रेड कलर की अंडरवेयर पहनती हैं, क्योंकि इसको गुड लक से जोड़कर देखा जाता है.

– स्पोर्ट्स ब्रा की शुरुआत साल 1975 से हुई थी.

– फ्रेंच में लॉन्जरी शब्द महिला व पुरुष दोनों के अंडरगार्मेंट्स के लिए यूज़ किया जाता है. प एक कपल ने विक्टोरिया सीक्रेट सेक्सी लॉन्जरी को पॉप्युलर करने के लिए बनाया था, जिसमें रोज़ाना पहनने के अंडरगार्मेंट्स हों और एक ऐसी जगह हो, जहां महिलाएं व पुरुष बेझिझक अंडरगार्मेंट्स ख़रीद सकें. आज विक्टोरिया सीक्रेट बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है.

 – विजयलक्ष्मी

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Personal Problems: क्या मुझे डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी टेस्ट की ज़रूरत है? (Do I Need Diagnostic Laparoscopy Test?)

मेरी उम्र 35 साल है. शादी को 5 साल हो गए हैं, पर अभी तक मैं कंसीव नहीं कर पाई हूं. मेरी और मेरे पति की सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, फिर भी डॉक्टर ने मुझे डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी (Diagnostic Laparoscopy) की सलाह दी है, मुझे इस टेस्ट (Test) की ज़रूरत है?
– रजनी जोगी, भागलपुर.

मैं समझ सकती हूं कि आप ऑपरेशन की प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं. डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी टेस्ट एनीस्थिसिया की मदद से किया जाता है, जिसमें पेट, गर्भाशय, ट्यूब्स, ओवरीज़, पिछला कोई पेल्विक इंफेक्शन या फिर एंडोमिटिरियोसिस की संभावना की जांच की जाती है. कुछ मामलों में देखा गया है कि ओवरीज़ में एग तो बनते हैं, पर किसी इंफेक्शन के कारण ट्यूब्स के सिकुड़न या टेढ़ेपन की वजह से महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं. इसलिए यह टेस्ट ज़रूरी है, ताकि सही तरी़के से आपकी जांच हो सके.

Diagnostic Laparoscopy Test

मेरी पिछली प्रेग्नेंसी बहुत कष्टदायक थी. डिलीवरी के बाद नाल अपने आप नहीं निकली, इसलिए एनीस्थिसिया देकर निकालना पड़ा. इसके बाद खून की कमी हो गई और मुझे ब्लड चढ़ाना पड़ा. उसके बाद कई दिनों तक मुझे बहुत कमज़ोरी महसूस हुई. मैं दोबारा प्रेग्नेंट हूं और मुझे डर है कि कहीं पिछली बार वाली प्रॉब्लम दोबारा न हो जाए?
– ममता मेहता, चंडीगढ़.

जिस प्रकिया से आप गुज़री हैं, उसे नाल का मैन्युअल रिमूवल कहते हैं. इसका कारण गर्भाशय के आकार का असामान्य होना हो सकता है. असामान्य आकार के कारण नाल को निकलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए उसे डॉक्टर को मैन्युअली निकालना पड़ता है. ऐसा दोबारा होने की भी संभावना है. अपने ऑब्सट्रेटीशियन को इस बारे में बता दें, ताकि वो पहले से ही ब्लड का इंतज़ाम कर सकें और ज़्यादा परेशानी न हो.

यह भी पढ़ें: क्या इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव्स के साइड इफेक्ट्स होते हैं? (Does Emergency Contraceptives Have Any Side Effects?)

यह भी पढ़ें:  पीरियड्स देरी से आने के क्या कारण हो सकते हैं? (What Could Be The Reasons For Delayed Periods?)

Dr. Rajshree Kumar

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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Personal Problems: क्या पति का स्पर्म काउंट टेस्ट कराना ज़रूरी है? (Should You Get Your Husband’s Sperm Count Checked?)

मैं 30 वर्षीया महिला हूं और मेरे पति की उम्र भी इतनी ही है. पिछले 3 सालों से हम प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रहे हैं, पर अभी तक हमें कोई सफलता नहीं मिली. क्या महिलाओं की ही तरह पुरुषों में भी इंफर्टिलिटी की समस्या होती है?
– पार्वती मिश्रा, नोएडा.

रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि महिलाओं की तरह पुरुषों में भी इंफर्टिलिटी की समस्या काफ़ी कॉमन है. इंफर्टिलिटी के मामलों में ऐसा देखा गया है कि 1/3 मामलों में पुरुषों में होनेवाली इंफर्टिलिटी, 1/3 मामलों में महिलाओं की इंफर्टिलिटी और 1/3 मामलों में दोनों या फिर किन्हीं अज्ञात कारणों से गर्भधारण में प्रॉब्लम हो सकती है. आपको किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलना चाहिए, वो आप दोनों की जांच करके सही इलाज की सलाह देंगे.

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मैं 28 वर्षीया महिला हूं. मेरे पति को लगता है कि उनकी स्पर्म क्वालिटी में कुछ समस्या है. इस बात को लेकर उनमें हीनभावना आ गई है. हम प्रेग्नेंसी प्लान करने के बारे में सोच रहे हैं, इसलिए जानना चाहते हैं कि क्या पति का स्पर्म काउंट टेस्ट कराना ज़रूरी है? और पुरुषों के लिए नॉर्मल स्पर्म काउंट क्या है?
– शशि मेहरा, हैदराबाद.

सीमेन टेस्ट के ज़रिए पुरुषों के सीमेन में स्पर्म काउंट और उसकी क्वालिटी की जांच की जाती है. आमतौर पर 1 मिलीलीटर सीमेन में 15 से 100 मिलियन स्पर्म होते हैं. 10 मिलियन से नीचे स्पर्म काउंट लो माना जाता है, जबकि 15 मिलियन या उससे अधिक का स्पर्म काउंट सामान्य माना जाता है, बशर्ते उसकी क्वालिटी अच्छी हो. स्टडी में यह बात पता चली है कि क़रीब 10-15% पुरुषों में स्पर्म काउंट ज़ीरो होता है, जिसके कारण उन्हें इंफर्टाइल कहा जा सकता है, इसलिए अगर किसी का स्पर्म काउंट 10 मिलियन से कम हो, तो उन्हें इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलकर अपना इलाज कराना चाहिए. आप सबसे पहले अपने पति को सीमेन टेस्ट कराने की सलाह दें, ताकि उनका स्पर्म काउंट पता चल सके.

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Personal Problems: योनि से पीले रंग के स्राव का क्या कारण हो सकता है? (Reasons For Yellow Vaginal Discharge)

मैं 20 वर्षीय अविवाहित लड़की हूं. मेरे योनि (Vagina) मार्ग से पीले रंग (Yellow Color) का स्राव होता है, जिससे दुर्गंध-सी भी आती है. योनि में अक्सर खुजली की शिकायत भी बनी रहती है. इसके लिए मैंने कई तरह की एंटी फंगल क्रीम भी इस्तेमाल की, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. मुझे ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरी यह बीमारी (Disease) दूर हो सके.
-सुनीता कपूर, हरियाणा.

आपकी योनि में इंफेक्शन हो गया है. एंटी फंगल क्रीम इस्तेमाल करने की बजाय बेहतर होगा कि इंफेक्शन के समय आप किसी गायनाकोलॉजिस्ट से अपना चेकअप करवाएं. दवाइयां इस्तेमाल करने के साथ–साथ सफ़ाई पर भी ख़ास ध्यान दें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके अंदरूनी वस्त्र नायलॉन के न हों. दिन में दो बार स्नान करें और अंदरूनी वस्त्र भी बदलें. आप एंटी फंगल पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. इसके अलावा अपने यूरिन की जांच भी करवाएं, ताकि इंफेक्शन के बारे में पूरी तरह मालूम हो सके.

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Yellow Vaginal Discharge

मैं 26 साल की हूं. मेरे घर में धार्मिक अनुष्ठान है. उसी समय मेरे पीरियड का भी समय है, जिसकी वजह से मैं बेहद चिंतित हूं, क्योंकि पीरियड हो गया तो मैं वो फंक्शन अटेंड नहीं कर पाऊंगी. मैं अपना पीरियड पोस्टपोन करने के लिए क्या करूं?
– रोहिणी कुमारी, छत्तीसगढ.

यह आपके मासिक चक्र पर निर्भर करता है. अगर आपका पीरियड बस अभी बिता ही है तो आप एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोनयुक्त गर्भनिरोधक गोलियां ले सकती हैं, जिसे आपको पीरियड आने तक ज़ारी रखना होगा. अगर आपका पीरियड आकर 10 से 15 दिन बीत चुके हैं तो आप प्रोजेस्ट्रोन के हाई डोज़ वाली दवाएं ले सकती हैं. इसके लिए आप अपने डॉक्टर से मिलें.

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डॉ. राजश्री कुमार
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वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से कैसे छुटकारा पाएं? (How To Get Rid Of Vaginal Yeast Infection)

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) (Vaginal Infections) महिलाओं को कभी न कभी हो ही जाता है और इससे उन्हें कई परेशानियां होती हैं, जैसे- योनि में दर्द (Pain In Vagina), खुजली, सूजन… और इसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर भी पढ़ता है. कई महिलाओं को बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, जिसके कारण वो चिड़चिड़ी हो जाती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में भी परेशानियां आने लगती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि इलाज के बावजूद बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है.

Vaginal Yeast Infection

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कई कारण हो सकते हैं, मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होना, स्ट्रेस, पति से मनमुटाव, हाइजीन का ध्यान का रखना, डायट सही न होना. यदि आपको भी बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, तो इसके लिए आपको क्या करना चाहिए? किस तरह की लाइफ स्टाइल से वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से बचा जा सकता है? मानसिक स्वास्थ्य का वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) पर कितना असर होता है? वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) होने पर आपको और आपके पति को क्या करना चाहिए? ऐसे तमाम सवालों के जवाब दे रही हैं साइकोलॉजिस्ट एंड वुमन हेल्थ काउंसलर नम्रता जैन.

यह भी पढ़ें: सेक्स के दौरान हो दर्द तो करें ये 5 आसान घरेलू उपाय (5 Home Remedies For Vaginal Pain And Dryness)

 

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कारण और उपचार जानने के लिए देखें वीडियो:

Personal Problems: क्या लो स्पर्म काउंट से मां बन पाऊंगी? (Can I Still Get Pregnant With Low Sperm Count?)

मैं 28 साल की शादीशुदा महिला हूं. मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं. मेरी समस्या ये है कि मेरे पति के वीर्य में शुक्राणु (Sperm) कम हैं. क्या मैं मां बन सकती हूं? कृपया, उचित सलाह दें.
– अर्चना भाटिया, दिल्ली.

वीर्य में शुक्राणु की कमी के दो कारण हो सकते हैं- टेस्टकुलर फेलियर यानि अंडग्रंथि द्वारा शुक्राणु का निर्माण करने में असमर्थता और दूसरा अंडग्रंथि शुक्राणु का निर्माण करते हैं, लेकिन मार्ग में कोई रुकावट होती है. अगर दूसरा कारण है तो रुकावट हटाने के लिए छोटी सी सर्जरी करनी पड़ सकती है. अगर इसके बावजूद फ़ायदा नहीं होता या शुक्राणु का निर्माण ही नहीं हो रहा है तो टेस्टीकुलर बायोप्सी करवाई जा सकती है. अगर इसमें कुछ अच्छे शुक्राणु मिल जाते हैं तो आप टेस्टट्यूब बेबी का रास्ता अपना सकती हैं, जिसमें महिला के अंडे को निकाल कर लेज़र टेकनीक द्वारा शुक्राणु को उसमें इंजेक्ट कर दिया जाता है और इसके बाद टेस्टट्यूब बेबी को गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है. अगर बायोप्सी में शुक्राणु नहीं मिलते तो दूसरे का किसी दानकर्ता से शुक्राणु लिया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: कंसीव न कर पाने के क्या कारण हो सकते हैं? (What Could Be Possible Reasons For Non Conception?)

Low Sperm Count

मैं 21 साल की हूं. मेरा मासिक धर्म हमेशा नियमित रहता है, किंतु मासिक धर्म आने के पूर्व मेरा पेट फूल जाता है और अचानक वज़न भी बढ़ जाता है. ऐसा क्यों होता है? कृपया इस बारे में जानकारी दें.
– प्रतिमा सिंह, बिहार.

आपकी समस्याओं के बारे में जानकर ऐसा लगता है कि आप पीएमएस (प्रीमेन्सट्रुअल सिंड्रोम) यानि माहवारी से पहले होनेवाली तकलीफ़ों से गुज़र रही हैं. इस दौरान आपको अपने आप में और भी कई तरह के बदलाव नज़र आ सकते हैं, जैसे- स्तनों के आकार में वृद्धि, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना, अधिक भूख लगना आदि. ये सब माहवारी के दौरान के सामान्य लक्षण हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है. हां, अपने गायनाकोलॉजिस्ट से यह अवश्य जान लें कि आपके वज़न बढ़ने का कारण कहीं कोई और समस्या तो नहीं है.

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डॉ. राजश्री कुमार
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