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मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) किसी महिला के जीवन की एक संक्रमणकालीन अवधि है, क्योंकि इस दौरान उसका मासिक धर्म आना बंद हो जाता है. यह अंतिम बार पीरियड आने के लगभग 12 महीने बाद माना जाता है. मतलब एक साल तक पीरियड न आए, तो इसे मेनोपॉज मानते हैं. मेनोपॉज के साथ गर्मी महसूस होना, रात को पसीना आना, अनिद्रा, मूड में अचानक से बदलाव होना और थकान जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं. मेनोपॉज के बाद वजन कम करना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा, इस दौरान हड्डियों को भी नुकसान हो सकता है. इसको रोकने का कोई तरीका तो नहीं है, लेकिन स्वस्थ आहार और जीवनशैली अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इन बदलावों से निपटा जा सकता है.
स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम करने से महिलाएं न सिर्फ बेहतर महसूस कर सकती हैं, बल्कि लंबी अवधि में ये उनके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मददगार साबित हो सकते हैं. मेनोपॉज से महिलाओं को कुछ अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, जिनके बारे में महिलाओं को अवगत होना चाहिए. इनमें से अधिकांश को सही मेडिकल केयर के साथ ठीक किया जा सकता है. यहां कुछ लक्षण दिए गए हैं जिन पर मेनोपॉज वाली महिलाओं को ध्यान देना चाहिए. इस संदर्भ में फिटनेस एंड न्यूट्रीशन एक्सपर्ट रोहित शेलातकर, वीपी, वीटाबायोटिक्स ने कई उपयोगी बातें बताई.
● धूम्रपान, शराब, उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ और फ़िज़ी ड्रिंक्स का सेवन मेनोपॉज के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं.
● सोया उत्पादों का सेवन मेनोपॉज के लक्षणों में मददगार हो सकते हैं, क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवोन्स नामक एक यौगिक होता है, जो एस्ट्रोजन के एक्शंस की नकल करता है.
●  लंबे समय में, मेनोपॉज के बार-बार आने वाले लक्षण, ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं.
●  अच्छी नींद के साथ भरपूर आराम करना बहुत आवश्यक है.
● केगेल एक्सरसाइज जैसे व्यायाम पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, जो पेशाब/दस्त (बॉविल इनकॉन्टीनेन्स) को रोकने या कम करने में मदद करते हैं.
● मेनोपॉज चिंता की वजह बन सकता है. मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज शरीर और दिमाग को आराम देने में मददगार हो सकते हैं.
● मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट से हड्डियों का नुकसान हो सकता है, क्योंकि महिलाओं में हड्डियों की सुरक्षा के लिए हार्मोन महत्वपूर्ण है. इस नुकसान की भरपाई के लिए मेनोपॉज वाली महिला को ऐसा आहार लेना चाहिए, जो हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस को रोकते हैं. उसे कैल्शियम, विटामिन डी और मैग्नीशियम से भरपूर भोज्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए.

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इन खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करें
जामुन (बेरीज): ये प्राकृतिक एंटी-इंफ्लामेटरी पावरहाउस हैं. बेरीज मस्तिष्क को स्वास्थ्य बनाते हैं, ब्लड प्रेशर को कम करते हैं और दिल की सेहत के लिए भी अच्छे हो सकते हैं. मेनोपॉज के दौरान खत्म हो जाने वाले एस्ट्रोजन के कार्डियो प्रोटेक्टिव बेनेफिट्स के साथ, दिल के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में बेरीज बहुत लाभकारी है. बेरीज एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं, जो तनाव से निपटने में मदद करते हैं, मेनोपॉज वाली महिलाओं की एक आम बीमारी, अनिद्रा को दूर करने में भी मददगार हो सकते हैं.
सैमेन मछली: विटामिन डी, ओमेगा -3 और अन्य फैटी एसिड का एक भरपूर स्रोत, सैमेन रक्तचाप को कम करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मददगार होती है. अनेक शोधों से पता चला है कि चिंता, अवसाद को दूर करने और मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संभावित रूप से मदद करने में ओमेगा -3 फैटी एसिड के बहुत फायदेमंद है. शाकाहारी महिलाएं विकल्प के तौर पर ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स ले सकती हैं.
फलियां: चने, काली बीन्स और राजमा जैसी फलियां ब्लड शुगर को कम करने और इंसुलिन सेंस्टिविटी को बढ़ाने में मददगार हैं. कैल्शियम और विटामिन डी प्रदान करने के अलावा, फलियां हड्डियों के घनत्व के नुकसान को कम करने में भी मददगार हो सकती हैं.
साबुत अनाज: साबुत अनाज, मेनोपॉज वाली महिलाओं के स्वस्थ आहार का हिस्सा होना चाहिए. बकव्हीट और क्विनोआ जैसे साबुत अनाज में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी और मैग्नीशियम होता है. ये अनाज भी ग्लूटेन-फ्री होने के साथ ही अधिकांश पारंपरिक अनाज की तुलना में अधिक पोषण से भरपूर होते हैं. इनकी फाइबर और प्रोटीन कंटेंट सैटिटी फैक्टर में मददगार हो सकते हैं. दूसरे शब्दों में, यह लंबे समय तक ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद करता है.
योगर्ट: यह कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है, जिसकी ज्यादातर महिलाओं में कमी होती है और जो ऑस्टियोपोरोसिस का प्राथमिक कारण है. योगर्ट में मौजूद विटामिन, इम्युनिटी-बूस्टिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को दूर करने के लिए बेहतर अवशोषण में मदद करते हैं. विटामिन डी के अलावा, योगर्ट भी एक प्रोबायोटिक फूड है, जो आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है, जो आमतौर पर थायराइड की गड़बड़ी से खत्म हो जाते हैं .
एक डेली मल्टीविटामिन को भी भोजन में शामिल किया जा सकता है.
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलाव कुछ के लिए परेशानी का सबब साबित हो सकते हैं. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन परिवर्तनों का स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर हो सकता है. हालांकि ये आहार और जीवनशैली में बदलाव इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं. वहीं यह भी जरूरी है कि मेनोपॉज वाली महिलाएं अपने मानसिक स्वास्थ्य पर भी अधिक ध्यान दें.

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वैसे तो ज़्यादातर भारतीय महिलाएं अपनी सेहत को लेकर लापरवाह ही रहती हैं, जिसके चलते उन्हें कई तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी ग़लतियां भी हैं, जिन्हें महिलाएं अनजाने में करती हैं. आइए जानते हैं सेहत से जुड़ी ऐसी 10 ग़लतियों के बारे में, जिन्हें महिलाएं अक्सर करती हैं.

Health Mistakes

1) अपनी सेहत पर ध्यान न देना
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
क्या करें
परिवार के साथ-साथ अपना भी ध्यान रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. हेल्दी डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

2) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
क्या करें
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

3) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
क्या करें
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों से मिलें या उनके साथ घूमने जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

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Health Mistakes

4) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
क्या करें
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

5) ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, हड्डियां कमज़ोर होना, लो ब्लड प्रेशर जैसी तकलीफें हो सकती हैं. लंबे समय तक डायटिंग करने से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
क्या करें
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छी डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम फैट, हाई प्रोटीन व फाइबर से भरपूर चीज़ों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

6) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
क्या करें
हेल्दी रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

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7) ग़लत साइज़ की ब्रा
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही रैशेज़, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
क्या करें
ब्रा ख़रीदने से पहले ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

8) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
क्या करें
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

9) हैवी बैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
क्या करें
प्लस साइज़ की बजाय छोटे साइज़ का हैंडबैग इस्तेमाल करें और आप यदि ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

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Health Mistakes

10) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. इससे पिंपल्स की समस्या होती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
क्या करें
पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप जरूर उतारें, वरना आपकी स्किन को नुक़सान हो सकता है.

क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर की अधिकतर समस्याएं हमारे मन से जुड़ी होती है. जी हां, ज़्यादातर शारीरिक रोग मन से जुड़े होते हैं और उनका इलाज कहीं और नहीं ख़ुद हमारे पास होता है. स्वस्थ रहने के लिए तन को ही नहीं, मन को भी स्वस्थ रखना ज़रूरी है और इसके लिए हमारा हमारे मन पर कंट्रोल होना ज़रूरी है.

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हामरे देश में लोग मन की समस्याओं को रोग मानते ही नहीं हैं इसीलिए डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब तकलीफ़ बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है. स्कूल ऑफ एक्सलेंस की प्रमुख हरिनी रामचंद्रन के अनुसार, हमारे देश में मेंटल हेल्थ यानी मानसिक स्वास्थ्य को बहुत नज़रअंदाज़ किया जाता है, जबकि ज़्यादातर बीमारियों की वजह मन से जुड़ी होती है. ऐसे में एन एल पी (न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग) टेकनीक मेंटल हेल्थ और सेल्फ इंप्रूवमेंट में सहायक साबित होती है. इससे हम अपने दिमाग़ को ट्रेनिंग दे सकते हैं और नकारात्मक सोच व नकारात्मक भावनाओं से बच सकते हैं. हरिनी ने हमें बताया कि किस तरह मानसिक समस्याएं शारीरिक रोगों के रूप में सामने आती हैं और उनसे कैसे निपटा जा सकता है-

मन से जुड़ी तन की बीमारियां
हमारे देश में शारीरिक रोगों के लिए ही लोग मुश्किल से डॉक्टर के पास जाते हैं, तो मन की समस्याएं तो बहुत दूर की बात है. मन से जुड़ी समस्याओं को अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं जो बाद में बहुत बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम के रूप में बाहर आती है. मन की तकलीफ़ों में दर्द नहीं होता इसलिए शरीर दर्द या रोगों के माध्यम से हमें संकेत देता है कि तन-मन के बीच सही तालमेल नहीं है, कहीं कोई गड़बड़ है. जैसे-

  • तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याएं सीधे मन से जुड़ी होती हैं. जब हमारे मन मुताबिक काम नहीं होता तो हम तनावग्रस्त हो जाते हैं.
  • एलर्जी, सोरायसिस जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां भी कई बार मन से जुड़ी होती हैं. ऐसे में इलाज के बाद भी समस्या ठीक नहीं होती.
  • डायबिटीज़ भी कई मामलों में मन से ही जुड़ी बीमारी के रूप में ही सामने आती है, वरना कई लोग तो मीठा खाते भी नहीं, फिर भी उन्हें डायबिटीज़ हो जाता है और ऐसा तनाव व ग़लत लाइफ स्टाइल के कारण होता है.
  • कई लोगों में तनाव के कारण मोटापा बढ़ने लगता है. जब उन्हें कुछ नहीं सूझता तो वे खाने लग जाते हैं.
    ऐसी कई शारीरिक समस्याएं हैं, जिनका सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य से होता है. जब हमारा मन बीमार होता है, तो उसका असर हमारे शरीर में रोग के रूप में दिखाई देने लगता है.

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मन का हमारे व्यवहार से भी होता है गहरा संबंध
ये तो थे शारीरिक संकेत, लेकिन मन की स्थिति का हमारे व्यवहार पर भी असर होता है. मन यदि ठीक नहीं है, तो सिर्फ शारीरिक रोग ही हों, ऐसा ज़रूरी नहीं है, मन की स्थिति का हमारे व्यवहार पर भी असर होता है.

मन से जुड़ी आम व्यावहारिक समस्याएं
मन की स्थिति का हमारे व्यवहार पर भी असर होता है. कई बार हमें बेवजह कुछ चीज़ों से डर लगने लगता है. बेवजह ग़ुस्सा आने लगता है, किसी से मिलने का मन नहीं करता, हमें समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है, लेकिन ऐसी व्यवहार संबंधी समस्यओं का संबंध भी हमारे मन से ही होता है. ये हैं मन से जुड़ी कुछ आम व्यावहारिक समस्याएं:

  • लोगों के बीच घुल-मिल न पाना
  • याददाश्त कम हो जाना
  • सिगरेट-शराब की लत लग जाना
  • बात-बात पर ग़ुस्सा आना
  • निर्णय न ले पाना
  • ऊंचाई से डर लगना
  • गाड़ी चलाने से डरना
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मन से जुड़ी बच्चों की व्यावहारिक समस्याएं
कई बार बच्चे अचानक अजीब हरकतें करने लगते हैं और हम उसका कारण नहीं जान पाते. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हम सिर्फ बच्चे की शारीरिक गतिविधियां देख रहे होते हैं, हम कभी बच्चे का मन पढ़ने की कोशिश नहीं करते. ये हैं मन से जुड़ी बच्चों की कुछ आम व्यावहारिक समस्याएं:

  • अपने में ही गुमसुम रहना
  • नए लोगों से बातचीत न कर पाना
  • पढ़ाई में मन न लगना
  • किसी भी चीज़ में ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • अंधेरे से डर लगना
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मन से जुड़ी जॉब संबंधित समस्याएं
जी हां, मन का हमारे शरीर, व्यवहार, यहां तक हमारी सफलता और जॉब पर भी असर पड़ता है. यदि मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, तो इसका असर हमारे परफॉर्मेंस पर भी पड़ता है, जिससे हमें अपनी जॉब में भी समस्याएं आने लगती हैं. ये हैं मन से जुड़ी जॉब संबंधित समस्याएं:

  • ज़रूरी मीटिंग में अपनी बात न कह पाना
  • सहकर्मियों के साथ घुलमिल न पाना
  • काम समय पर पूरा न कर पाना
  • वर्कप्रेशर बर्दाश्त न कर पाना
  • जॉब बदलने से डरना
  • आत्मविश्वासस की कमी
  • नए लोगों से मिलने से डरना
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मन से जुड़ी महिलाओं की समस्याएं
हमारे देश में महिलाएं अपने स्वास्थ्य को सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ करती हैं. मानसिक स्वास्थ्य तो दूर, महिलाएं अपनी शरीरिक समस्याओं पर भी ध्यान नहीं देतीं. यही वजह है कि महिलाओं में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी बहुत देर से पता चलती हैं. आइए, जानते हैं महिलाओं की मन से जुड़ी तन की बीमारियों के बारे में:

  • मेनस्ट्रुअल साइकल यानी मासिक धर्म में अनियमितता
  • बार-बार सिस्ट हो जाना
  • गर्भधारण न कर पाना

मन को वश में कैसे करें?
दुनिया में जितने भी क़ामयाब लोग हैं, उनका चीज़ों और स्थितियों को देखने का नज़रिया हमेशा सकारात्मक होता है. वो ग्लास को हमेशा आधा भरा हुआ देखते हैं, खाली नहीं. अपनी सोच और जीने का तरीक़ा बदलकर आप भी अपने मन को वश में कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपने दिमाग़ को सही ट्रेनिंग देनी होगी. जी हां, अपने दिमाग़ को सही ट्रेनिंग देकर हम कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से छुटकारा पा सकते हैं.

क्या करें?

  • आप हैं तो सबकुछ है इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें.
  • अगर आप ख़ुश हैं तो आप दूसरों को भी ख़ुश रखते हैं इसलिए अपनी ख़ुशियों को प्राथमिकता दें.
  • अच्छी यादों को सहेजकर रखें और जब भी मन दुखी हो, तो उन यादों को ताज़ा कर लें.
  • ख़ुद पर ध्यान दें. यदि आपके व्यवहार या शरीर में कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी वजह समझ में नहीं आ रही है, तो इसका कारण पता करने की कोशिश करें. यदि आपको अपनी समस्या का हल नहीं मिल रहा है, तो साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.
  • ऐसे लोगों से दूर रहें, जिनके साथ रहने से आपको ग़ुस्सा आता है या जो लोग हर समय नकारात्मक बातें करते हैं.
  • ऐसे माहौल या लोगों के बीच रहने की कोशिश करें, जो हमेशा सकारात्मक बातें करते हैं, ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीते हैं और जिनका साथ आपको अच्छा लगता है.

क्या न करें?

  • बुरी यादों को भुलाना आसान तो नहीं, लेकिन उन्हें बार-बार याद न करें. साथ ही ऐसे लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपसे उन बुरी यादों का ज़िक्र करते हैं.
  • ऐसे लोगों से दूर रहें, जो हमेशा अपनी समस्याओं का रोना रोते रहते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास हमेशा नकारात्मकता ही फैलाते हैं.
  • अपनी कमियों या ग़लतियों को बार-बार याद न करें, बल्कि उन्हें दूर करने की कोशिश करें.
  • दूसरों से ईर्ष्या न करें, उनकी तरह आगे बढ़ने की कोशिश करें.

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Meditation

भारत है सबसे अवसादग्रस्त देश
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा अवसादग्रस्त देश है. इसका कारण है लोगों का मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार होना और सही तरह से उसका इलाज न हो पाना. डिप्रेशन किस वजह से हो रहा है ये लोग समझ नहीं पाते, जिससे उनका सही इलाज नहीं हो पाता. लापरवाही के चलते अक्सर लोग डिप्रेशन का इलाज नहीं कराते. बेहतर होगा कि आप इससे बचें और अपनों को भी इस गंभीर बीमारी से बचाएं.

जानें डर का मनोविज्ञान
क्या आप जानते हैं कि डर सिर्फ हमारे मन की उपज है? दरअसल, इंसान जन्म से सिर्फ दो डर लेकर पैदा होता है- तेज़ आवाज़ और गिरने का डर, बाकी सारे डर इंसान के मन की उपज होते हैं.

इस तरह रखें मन को स्वस्थ
मन को वश में रखना और उसे स्वस्थ रखना हमारी ज़िम्मेदारी है. मन को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये तरी़के:

  • हम चीज़ों को जिस नज़रिये से देखते हैं, उन पर हम प्रतिक्रिया भी वैसी ही करते हैं. अतः सबसे पहले अपना माइंडसेट बदलें. जब आप पॉज़िटिव सोचने लगेंगे, तो आपको हर चीज़ पॉज़िटिव नज़र आएगी.
  • आपको क्या चाहिए ये आपसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता. अतः अपनी इच्छा और क्षमता के बीच सही मूल्यांकन करके ही कोई निर्णय लें.
  • आपकी बॉडी लैंग्वेज और बात करने के तरी़के से लोगों पर आपका पॉज़िटिव और निगेटिव इंप्रेशन पड़ता है. अतः हमेशा ख़ुश व एनर्जेटिक रहने की कोशिश करें. जितना हो सके दूसरों की मदद करें.
  • दिमाग़ यदि डरना सीख सकता है तो उससे बाहर निकलना भी आसानी से सीख सकता है. अतः अपने मन से डर को बाहर निकालें.
  • कॉन्शियस और सब कॉनिशयस माइंड के बीच अच्छा तालमेल होने पर ही हम तन-मन से स्वस्थ रह सकते हैं. अतः अपने सब कॉनिशयस माइंड की भी सुनें.
  • कमला बडोनी

अधिकांश महिलाओं के लिए पीरियड्स एक बेहद दर्दनाक अनुभव होता है, उन्हें इतना दर्द होता है कि पीरियड्स को लेकर मन में डर बैठ जाता है. इससे छुटकारा पाने के लिए वो अक्सर पेनकिलर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन दर्दनिवारक दवाओं के अपने साइडइफेक्ट होते हैं इसलिए बेहतर होगा कि घरेलू उपायों को जाना और अपनाया जाए तो बेहद सरल होने के साथ साथ कारगर भी हैं.

पपीते का सेवन: पपीते की तासीर गर्म मानी जाती है और अक्सर दर्द की वजह होती है खुलकर फ्लो का ना होना, ऐसे में पपीता खायें क्योंकि इससे खुलकर फ्लो होता है और दर्द में आराम आता है. यही नहीं पपीता पेट के लिए भी काफ़ी अच्छा माना जाता है और पाचन को सही रखता है.

अदरक और काली मिर्च: अदरक को पानी में उबाल कर चाय की तरह पिएँ. अदरक के टुकड़े करके पानी में डालकर चाय बना लें, चाहें तो काली मिर्च भी मिला लें या फिर अदरक के टुकड़े करके उन्हें चबाकर खाएँ. यह पाचन को भी बेहतर करता है.
अजवायन: यह भी पेट के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. इसकी भी तासीर गर्म होती है और यह गैस की समस्या से निजात दिलाने में कारगर है. अक्सर माहवारी के समय गैस की समस्या बढ़ जाती है जो दर्द की एक वजह होती है.

तुलसी की पत्तियाँ: चाय में इसे डालें क्योंकि इसमें दर्दनिवारक तत्व होते हैं जो काफ़ी तहाए पहुँचाते हैं.

जीरा: यह गर्भाशय को साफ़ करता है. इसमें दर्दनिवारक गुण भी हैं. जीरे की चाय बनाकर पिएं, पानी में भी उबालकर इसे पी सकती हैं या यूं ही चटकीभर जीरा चबा चबा कर खाएँ. इससे काफ़ी आराम मिलेगा.

Menstrual Cramps

मेथी: रात को एक कप पानी में एक टीस्पून मेथीदाना भिगो दें और अगले दिन इस पानी क सेवन करें.

गर्म पानी से सिकाई: एक बोतल में गर्म पानी भरकर उससे सिकाई करें काफ़ी आराम मिलेगा. यह पारंपरिक उपाय काफ़ी लोग अपनाते हैं, क्योंकि यह सबसे आसान और कारगर भी है.

तिल का तेल: इससे पेडू में यानी पेट के निचले भाग में हल्के हाथों से मालिश करें. यह गर्माहट और आराम देगा.
एक्सरसाइज़: शोध बताते हैं कि एरोबिक्स से पेन में काफ़ी राहत मिलती है. जो महिलाएँ लगातार दो महीनों तक हफ़्ते में तीन बार आधे घंटे एरोबिक्स करती हैं उन्हें पीरियड्स में दर्द बेहद कम होने लगता है. अगर एरोबिक्स नहीं करना चाहतीं तो सिर्फ़ नंगे पैर ज़मीन पर या घास पर चलें इससे भी दर्द में आराम मिलता है. अगर आप नियमित रूप से योग करती हैं तो भी पेन में आराम मिलेगा और आप ऐसे योगा पोज़ भी ट्राई कर सकती हैं जो इस दर्द में आराम दिलाते हैं.

मेडिटेशन: सांस लेने की तकनीक आपको काफ़ी निजात दिला सकती है. यह मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और इसे रिलैक्सेशन टेकनीक ही कहा जाता है. यह रक्त संचार बेहतर करके मस्तिष्क को सुकून का एहसास कराती हैं, दर्द पैदा करनेवाले हार्मोन्स को कम करके राहत का आभास कराती है.
नमक का सेवन कम करें और पानी खूब पिएं: पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले से नमक खाना या तो बंद कर दें या कम करें, मसालेदार भोजन, तला-भुना भी ना खाएँ और फ़र्क़ देखें. इस तरह का खाना वॉटर रिटेंशन को बढ़ाता है जिससे गैस, अपच, भारीपन होता है और दर्द का एहसास ज़्यादा होता है. साथ ही पानी खूब पिएँ ताकी डीहाईड्रेट ना हों.

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ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए महिलाएं हर तरह की एक्सरसाइज़ और डायटिंग करने के साथ ही आउटफ़िट से लेकर एक्सेसरीज़ तक ढेरों एक्सपेरिमेंट करती हैं, लेकिन ऐसा करते समय कई बार वो ऐसी गलतियां करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं. आइए, हम आपको सेहत से जुड़ी ऐसी 10 गलतियों के बारे में बताते हैं, जो लगभग सभी महिलाएं करती हैं.

Health Mistakes All Women Make

1) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. दरअसल, हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

2) हैवी हैंडबैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
कैसे बचें इस गलती से?
प्लस साइज़ की बजाय छोटी साइज़ का हैंडबैग यूज़ करें और अगर आप ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

3) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. नतीजतन पिंपल्स की समस्या हो जाती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
पार्टी से आने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप उतारें.

4) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
कैसे बचें इस गलती से?
सेहतमंद बने रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

5) गलत साइज़ की ब्रा पहनना
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन के चांसेस बढ़ जाते हैं. साथ ही स्किन इरीटेशन, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
कैसे बचें इस गलती से?
ब्रा ख़रीदने से पहले अपनी ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

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6) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
कैसे बचें इस गलती से?
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों के साथ हॉलिडे पर चली जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

7) साइज़ ज़ीरो फिगर पाने के लिए डायटिंग
साइज़ ज़ीरो फिगर के प्रति महिलाओं की दीवानगी उन्हें डायटिंग के लिए मजबूर कर रही है, लेकिन ऐसा करते समय वो ये नहीं सोचती कि स्लिम होने की उनकी इस कोशिश का उनकी सेहत पर कितना बुरा असर होता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिसका नतीजा आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, कमज़ोर हड्डियों और लो ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है. इतना ही नहीं, क्रश डायटिंग (जल्दी पतला होने के लिए डायनिंग करना) से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
कैसे बचें इस गलती से?
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छे डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम ़फैट, हाई प्रोटीन व फ़ाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

8) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
कैसे बचें इस गलती से?
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

9) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं ही होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
कैसे बचें इस गलती से?
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

10) ख़ुद की अनदेखी
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
कैसे बचें इस गलती से?
परिवार के साथ ही अपना भी ख़्याल रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. संतुलिट डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

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आज भी ज़्यादातर महिलाएं यूरिन इंफेक्शन के बारे में बात करने से कतराती हैं, लेकिन जब तकलीफ़ बढ़ जाती है, तो कई बार इसके ट्रीटमेंट के लिए उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट तक होना पड़ता है. यूरिन इंफेक्शन का इलाज बहुत आसान है, लेकिन समय पर इलाज न करने से समस्या जटिल हो सकती है, इसलिए इसके इलाज में देर बिल्कुल न करें.

Urinary Tract Infection

 

 

यदि किसी महिला को यूरिन इंफेक्शन हुआ है, तो ज़रूरी नहीं कि वो यूरिन संबंधी शिकायत ही करे. उसे पैरों में दर्द, कमर में दर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है. ऐसे में जब वो डॉक्टर के पास जाती है, तो कई बार डॉक्टर उसे कैल्शियम और विटामिन्स की दवाइयां देते हैं, वो उससे ये नहीं पूछते कि तुम्हारी यूरिन से बदबू तो नहीं आ रही है. ऐसे में जानकारी के अभाव में उसका सही इलाज नहीं हो पाता और समस्या जटिल हो जाती है. महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन कब, कैसे और क्यों होता है, बता रहे हैं कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड फिज़िशियन डॉ. अरुण शाह और डॉ. वसी शेख़.

Urinary Tract Infection

जानें यूटीआई (UTI) के रिस्क फैक्टर्स
* यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक ऐसा इंफेक्शन है, जो यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- किडनी, ब्लैडर, गर्भाशय आदि. लगभग 50% महिलाओं को जीवन में कभी-न-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता ही है, इसलिए महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन के कारण, बचाव और इसके सही इलाज के बारे में जानकारी होनी चाहिए.
* आमतौर पर यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है, लेकिन इसका इलाज यदि समय पर नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है.
* यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या तब और जटिल हो जाती है, जब इसके लक्षण असामान्य होते हैं, जैसे- कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि. ऐसी स्थिति में कई बार यूरिन इंफेक्शन का पता नहीं चल पाता और समस्या बढ़ जाती है.

यूटीआई (UTI) के कारण
आमतौर पर यूटीआई का प्रमुख कारण है बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग से मूत्राशय में प्रवेश करना. महिलाओं में यूटीआई के निम्न कारण हैं:
* पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मूत्रमार्ग की लंबाई छोटी होने के कारण उनमें यूटीआई का ख़तरा अधिक रहता है.
* सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं को यूटीआई होने की संभावना ज़्यादा होती है. सेक्स पार्टनर बदलने से भी यूटीआई होने की संभावना बढ़ जाती है.
* शुक्राणुनाशक क्रीम का उपयोग करने से यूटीआई हो सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कई महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन हो जाता है.
* जो लड़कियां पानी कम पीती हैं या पेशाब को रोककर रखती हैं, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
* जिन महिलाओं को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज़ है या जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं रहता, उनका ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.

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Urinary Tract Infection

यूटीआई (UTI) के लक्षण
जब तक यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक सीमित रहता है, तब यूटीआई के ये लक्षण दिखाई देते हैं:
* पेशाब करते समय जलन होना.
* योनि में खुजली होना और बदबू आना.
* बार-बार पेशाब जाना.
* पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना.
* पेशाब में खून आना.
* यूरिन इंफेक्शन के किडनी तक फैल जाने पर ठंड लगना और कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आना, पेटदर्द, थकान, बदनदर्द, मतली, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं.

यूटीआई (UTI) का इलाज
* यूटीआई का इलाज यूरिन और ब्लड टेस्ट के बाद ही किया जा सकता है. उसके बाद इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर इलाज करते हैं.
* महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, यूटीआई का इतिहास देखते हुए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं.
* यदि आपको हल्का बुख़ार है, आप खाने-पीने में सक्षम हैं, तो आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक्स का एक छोटा कोर्स भी पर्याप्त हो सकता है.
* असहनीय पेटदर्द, तेज़ बुख़ार, खाने-पीने में असमर्थता जैसी स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है.
* अच्छा महसूस करने पर भी इलाज बीच में न रोकें, वरना फिर से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* एंटीबायोटिक्स के अलावा बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने के लिए ख़ूब सारा पानी पीएं.

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Urinary Tract Infection
यूटीआई (UTI) से बचाव
जिन महिलाओं को बार-बार यूटीआई की तकलीफ़ होती है, उन्हें इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
* ख़ूब पानी पीएं.
* लंबे समय तक पेशाब न रोकें.
* प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें.
* शौच के समय जननांग की सफ़ाई आगे से पीछे की तरफ़ करें. ऐसा करने से मलद्वार की गंदगी योनि तक नहीं पहुंचती और संक्रमण की संभावना कम रहती है.
* यदि आपको कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो समय-समय पर पेट साफ़ करने की दवा लेते रहें.
* सेक्स से पहले और सेक्स के बाद पेशाब के समय जननांग साफ़ करें.
* सेक्स के समय शुक्राणुनाशक क्रीम के प्रयोग से बचें.
* जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो गया है, उन्हें वेजाइनल एस्ट्रोजन से फ़ायदा हो सकता है.
* यदि आपको बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाता है, तो एहतियात के तौर पर आप डॉक्टर की बताई हुई एंटीबायोटिक्स ले सकती हैं.

महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन, जानने के लिए देखें वीडियो:

महिलाओं में उम्र के अनुसार यूरिन इंफेक्शन
महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन कभी भी हो सकता है, लेकिन हर उम्र में इसके कारण और संकेत अलग-अलग होते हैं.
* पांच साल तक की बच्ची यदि पेशाब रोककर रखती है, तो उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में यदि वो बिना सर्दी-ज़ुकाम के बार-बार बीमार पड़ती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.
* पांच से दस साल की लड़की की पैंटी के रंग में यदि बदलाव नज़र आए, यदि उसकी टीचर शिकायत करे कि वो बार-बार पेशाब जाती है, वो रात में बार-बार पेशाब जाने के लिए उठती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं. ऐसे में उस लड़की को बुख़ार हो, ये ज़रूरी नहीं.
* प्यूबर्टी पीरियड में जब लड़की को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो हाइजीन के अभाव में उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. इस समय यूरिन इंफेक्शन के संकेत होते हैं- व्हाइट डिस्चार्ज, खुजली, पैंटी और वेजाइनल एरिया से बदबू आना.
* शादीशुदा महिलाओं में शादी के छह महीने से लेकर एक साल तक यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, इसे हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं. इस समय तक महिला के शरीर को बाहरी ऑर्गन की आदत नहीं होती, इसलिए सेक्स के दौरान उनका ब्लड फ्लो बढ़ सकता है. हाइजीन के अभाव में भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद हाइजीन के अभाव में अक्सर महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन हो जाता है. प्रेग्नेंसी के समय यूरिन इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के अभाव में महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है. इस समय कई महिलाओं को डायबिटीज़ हो जाता है, जिसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* जिन महिलाओं को डायबिटीज़ या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा होती है.

डॉक्टर से न छुपाएं सेक्स की बात
सेक्सुअली एक्टिव अविवाहित लड़कियों को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है. ऐसे में जब लड़कियां यूरिन इंफेक्शन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाती हैं और सेक्स की बात छुपाती हैं, तो उनका सही इलाज नहीं हो पाता और उनकी हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है. अत: जो लड़कियां सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें डॉक्टर से ये बात नहीं छुपानी चाहिए और अपना सही उपचार कराना चाहिए.
– कमला बडोनी

मैं एक कॉलेज स्टूडेंट हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि हैवी पीरियड्स किसे कहते हैैं? क्या दिन में कई पैड्स बदलना हैवी पीरियड्स कहलाता है?
– रेणु चौहान, नागपुर.

दिनभर में कई सैनीटरी पैड्स बदलने का मतलब यह नहीं कि आपके पीरियड्स हैवी हैं. हो सकता है, ऐसा आप हाइजीन के लिहाज़ से करती हों. पीरियड्स को तभी हैवी या असामान्य कह सकते हैं, जब यह आपके रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खलल डालता हो. अगर आप कॉलेज या ऑफिस नहीं जा पा रही हैं और रोज़ाना के काम अपने आप नहीं कर पा रही हैं, तो यह हैवी कहलाता है. ऐसे में आपको डॉक्टर को मिलना होगा. वैसे हैवी पीरियड्स का कारण थायरॉइड भी हो सकता है, इसलिए बेहतर होगा कि डॉक्टर से इस बारे में बात करें.

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Sexually Active

मैं 28 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. अभी मुझे फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन के लिए डॉक्टर के पास जाना है. क्या डॉक्टर शारीरिक जांच करके पता लगा सकते हैं कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं? दरअसल, डॉक्टर हमारे फैमिली फ्रेंड हैं और मैं नहीं चाहती कि मेरे पैरेंट्स को पता चले कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं.
– रागिनी, नई दिल्ली.

यह बहुत मुश्किल है या यूं कहें कि नामुमकिन है, क्योंकि स़िर्फ फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन से कोई डॉक्टर पूरे दावे के साथ यह नहीं बता सकता. वर्जिनिटी के लिए जिस हाइमन की बात की जाती है, कुछ महिलाओं में तो यह जन्म से ही नहीं होता. इसके अलावा फिज़िकल एक्टिविटी के कारण बहुतों का हाइमन सेक्स से पहले ही फट जाता है. सही तो यही होगा कि आप अपने डॉक्टर से कुछ न छिपाएं, क्योंकि वो आपको किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचा सकते हैं. अगर आप उन्हें सच बता देंगी, तो वो उस नज़रिए से एक्ज़ामिनेशन करेंगे और आप भविष्य में होनेवाली किसी हेल्थ प्रॉब्लम से बच सकती हैं.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

मेरी उम्र 22 साल है. मेरे शरीर पर बहुत बाल हैं, ख़ासतौर से चिन पर. मैंने हेयर रिमूवल क्रीम्स, वैक्सिंग, थ्रेडिंग सभी टेम्प्रेरी तरी़के अपनाए, पर कोई लाभ नहीं हुआ. 
 – शीतल झा,पुणे.

आपको हिरसूट़िज़्म यानी एक्सेसिव हेयर ग्रोथ की समस्या है, जिसमें शरीर पर पतले, कठोर और काले बाल होते हैं, जैसे पुरुषों के होते हैं. हार्मोंस में असंतुलन के कारण महिलाओं में यह समस्या होती है. आपको हार्मोनल टेस्ट करवाना चाहिए. यदि हार्मोंस में असंतुलन हो गया है या हार्मोंस ब्लॉक हो गए हैं, तो आपको ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या एंटीएंड्रोजन की ज़रूरत होगी. बेहतर होगा कि आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

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Unwanted Facial Hair
मेरी 65 वर्षीया सहेली को 10 वर्ष पहले मेनोपॉज़ हो चुका था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे थोड़ी ब्लीडिंग हुई. क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना ठीक है? मुझे भी  मेनोपॉज़ हो चुका है और मुझे डर है कि कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही न हो?
– पूजा गौतम, पंजाब.

हो सकता है एट्रोफिक वेजिनाइटिस या वेजाइना के थिक होने के कारण आपकी सहेली के साथ ऐसा हुआ हो. लेकिन ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतना ठीक नहीं. यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे- सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर, एंडोमेट्रियल पोलिप्स, यूरिनल ट्यूमर आदि.  इसलिए मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को हल्के से नहीं लेना चाहिए. जहां तक आपका सवाल है तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी सहेली के साथ जो हुआ है, वो आपके साथ भी हो.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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मैं 53 वर्षीया महिला हूं. तीन साल पहले मेरा मेनोपॉज़ (Menopause) हो चुका है. इन दिनों अचानक मुझे हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding) शुरू हो गई है. क्या यह कोई गंभीर समस्या है? क्या मुझे चेकअप करवाना चाहिए?
– सुमति राव, मैंगलोर.

एक बार जब मासिकधर्म एक साल के लिए बंद हो जाए तो यह स्थिर हो जाता है. इसके बाद कभी आपको वेजाइनल ब्लीडिंग नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दाग़-धब्बे भी नहीं दिखनेे चाहिए. आपको तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से चेकअप करवाना चाहिए, जो इंटरनल एक्ज़ामिनेशन या पीएपी स्मीअर जांच से सर्विक्स के कैंसर का पता लगा सकते हैं. यूट्रीन लाइन पर सूजन है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप सोनोग्राफ़ी भी करवा लें. यूट्रीन लाइन पर सूजन एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया, कैंसर या ओवरी ट्यूमर का संकेत है. वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, इसलिए सही जांच ज़रूरी है.

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 Bleeding After Menopause
मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि उन्होंने पीएपी स्मीअर करवाया है. यह क्या है और इस उम्र में क्या यह सभी को करवाना
पड़ता है?
– रजनी शर्मा, दिल्ली.

40 वर्ष की उम्र ऐसी उम्र है, जहां किसी भी तरह के कैंसर या ट्यूमर की संभावना से पहले ही नियमित चेकअप करवाते रहना चाहिए. पीएपी स्मीअर एक साधारण-सा टेस्ट है, जिसमें कॉटन या ब्रश को सर्विक्स से छूकर स्लाइड तैयार की जाती है और इस स्लाइड की जांच द्वारा कैंसर या अन्य किसी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह जांच किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में दो मिनट में की जा सकती है. यह जांच हर साल करवानी चाहिए और इसकी शुरुआत तभी कर देनी चाहिए, जब महिला सेक्सुअली एक्टिव हो. इसके अलावा 40 की उम्र में पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवानी चाहिए, जिससे गर्भाशय और ओवरी के कैंसर का पता चलता है. साथ ही मैमोग्राफ़ी भी करवा लेनी चाहिए, जिससे स्तन कैंसर का पता चलता है. किसी भी महिला को कैंसर की जांच के लिए ये सामान्य से टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

Facts About Undergarment

अंडरगार्मेंट से जुड़ी 10 सच्चाइयां (10 Interesting Facts About Undergarment)

हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स (Undergarments) पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें. हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें.

– एक सर्वे से पता चला है कि लगभग तीन में से दो महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, इनमें से 29% महिलाएं इस बात को जानते हुए भी ऐसा करती हैं.

– अधिकतर थॉन्ग्स लेसी और सैटिन के फैब्रिक में ही मिलते हैं, जो स्किन को ब्रीद नहीं करने देते और स्किनी होने के कारण वहां बैक्टीरिया ज़्यादा पनपते हैं, जिनसे इंफेक्शन का ख़तरा रहता है. –

– कॉटन पैंटीज़ सबसे सेफ होती हैं. इन्हें पहनने से पसीना कम आता है, जिससे बैक्टीरिया का जमाव और इंफेक्शन नहीं हो पाता.

– अक्सर यह माना जाता है कि अंडरवियर पहनने से पुरुषों के स्पर्म काउंट पर असर होता है, लेकिन जब तक कि अंडरवियर बहुत ज़्यादा टाइट न हो, तो कोई ख़तरा नहीं है.

– अधिकतर महिलाएं एक ही तरह की ब्रा हर ड्रेस पर पहनती हैं, क्योंकि उन्हें अलग-अलग तरह की ब्रा के बारे में पता ही नहीं होता, जैसे- स्मूद, टी-शर्ट ब्रा, पुशअप ब्रा, मिनिमाइज़र ब्रा आदि.प यही हाल पैंटीज़ का भी है, इसमें भी हाई वेस्ट, लो वेस्ट, बिकनी, बॉय शॉर्ट पैंटीज़ मिलती हैं, जो ड्रेस के अनुसार पहनी जानी चाहिए.

– जिन महिलाओं के पास रोज़ाना के लिए अलग-अलग ब्रा नहीं होती, वो एक ही ब्रा को दो-तीन दिनों तक लगातार पहनती हैं, जिससे बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है.

– ज़्यादा लंबे समय तक अंडरगार्मेंट्स को रिप्लेस नहीं करेंगे, तो इंफेक्शन्स का भी ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि उनका मटेरियल ख़राब होने लगता है, साथ ही उनका शेप भी सही नहीं रहता. बेहतर होगा कि समय-समय पर नए अंडरगार्मेंट्स ख़रीदते रहें.

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– ब्रा को ताउम्र के लिए न रखें. जी हां, हर छह महीने में ब्रा को बदल दें, क्योंकि उसका इलास्टिक लूज़ होने लगता है.

– आपका साइज़ बदलता है, तो ब्रा का साइज़ भी बदलें. जी हां, ब्रेस्ट्स का आकार व शेप समय के साथ बदलता है. ऐसे में आप उसी साइज़ की ब्रा हमेशा पहनेंगी, तो इसका मतलब है कि आप ग़लत साइज़ की ब्रा पहन रही हैं.

– वर्कआउट के बाद अंडरगार्मेंट्स ज़रूर बदलें, क्योंकि पसीने की वजह से बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.

अंडरगार्मेंट्स से जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– जापान की महिलाओं का ब्रा साइज़ सबसे छोटा होता है.

– अमेरिका में औसत ब्रा साइज़ है 36 सी.

– अमेरिका में महिलाओं के पास औसतन अंडरवेयर के 22 पेयर होते हैं.

– कप साइज़ का सिस्टम 1930 में चलन में आया था.

– इटली में महिलाएं न्यू ईयर में रेड कलर की अंडरवेयर पहनती हैं, क्योंकि इसको गुड लक से जोड़कर देखा जाता है.

– स्पोर्ट्स ब्रा की शुरुआत साल 1975 से हुई थी.

– फ्रेंच में लॉन्जरी शब्द महिला व पुरुष दोनों के अंडरगार्मेंट्स के लिए यूज़ किया जाता है. प एक कपल ने विक्टोरिया सीक्रेट सेक्सी लॉन्जरी को पॉप्युलर करने के लिए बनाया था, जिसमें रोज़ाना पहनने के अंडरगार्मेंट्स हों और एक ऐसी जगह हो, जहां महिलाएं व पुरुष बेझिझक अंडरगार्मेंट्स ख़रीद सकें. आज विक्टोरिया सीक्रेट बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है.

 – विजयलक्ष्मी

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