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Personal Problems: मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग कहीं गंभीर समस्या तो नहीं? (What Does It Mean If You’re Bleeding After Menopause?)

मैं 53 वर्षीया महिला हूं. तीन साल पहले मेरा मेनोपॉज़ (Menopause) हो चुका है. इन दिनों अचानक मुझे हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding) शुरू हो गई है. क्या यह कोई गंभीर समस्या है? क्या मुझे चेकअप करवाना चाहिए?
– सुमति राव, मैंगलोर.

एक बार जब मासिकधर्म एक साल के लिए बंद हो जाए तो यह स्थिर हो जाता है. इसके बाद कभी आपको वेजाइनल ब्लीडिंग नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दाग़-धब्बे भी नहीं दिखनेे चाहिए. आपको तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से चेकअप करवाना चाहिए, जो इंटरनल एक्ज़ामिनेशन या पीएपी स्मीअर जांच से सर्विक्स के कैंसर का पता लगा सकते हैं. यूट्रीन लाइन पर सूजन है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप सोनोग्राफ़ी भी करवा लें. यूट्रीन लाइन पर सूजन एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया, कैंसर या ओवरी ट्यूमर का संकेत है. वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, इसलिए सही जांच ज़रूरी है.

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 Bleeding After Menopause
मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि उन्होंने पीएपी स्मीअर करवाया है. यह क्या है और इस उम्र में क्या यह सभी को करवाना
पड़ता है?
– रजनी शर्मा, दिल्ली.

40 वर्ष की उम्र ऐसी उम्र है, जहां किसी भी तरह के कैंसर या ट्यूमर की संभावना से पहले ही नियमित चेकअप करवाते रहना चाहिए. पीएपी स्मीअर एक साधारण-सा टेस्ट है, जिसमें कॉटन या ब्रश को सर्विक्स से छूकर स्लाइड तैयार की जाती है और इस स्लाइड की जांच द्वारा कैंसर या अन्य किसी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह जांच किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में दो मिनट में की जा सकती है. यह जांच हर साल करवानी चाहिए और इसकी शुरुआत तभी कर देनी चाहिए, जब महिला सेक्सुअली एक्टिव हो. इसके अलावा 40 की उम्र में पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवानी चाहिए, जिससे गर्भाशय और ओवरी के कैंसर का पता चलता है. साथ ही मैमोग्राफ़ी भी करवा लेनी चाहिए, जिससे स्तन कैंसर का पता चलता है. किसी भी महिला को कैंसर की जांच के लिए ये सामान्य से टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

अंडरगार्मेंट से जुड़ी 10 सच्चाइयां (10 Interesting Facts About Undergarment)

Facts About Undergarment

अंडरगार्मेंट से जुड़ी 10 सच्चाइयां (10 Interesting Facts About Undergarment)

हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स (Undergarments) पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें. हम अपने आउटफिट्स से तो सभी को इंप्रेस करना चाहते हैं, लेकिन हम शायद ही अपने अंडरगार्मेंट्स पर ध्यान देते हैं, क्योंकि हमें लगता है वो तो छिपे हुए होते हैं, तो जैसे-तैसे काम चला लो, क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन फ़र्क़ पड़ता है, आपकी हेल्थ से लेकर पर्सनैलिटी तक उनसे प्रभावित होती है. इसलिए आपको भी अंडरगार्मेंट्स से जुड़ी ये बातें ज़रूर जाननी चाहिए, ताकि आप सही अंडरगार्मेंट्स का सिलेक्शन कर सकें.

– एक सर्वे से पता चला है कि लगभग तीन में से दो महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, इनमें से 29% महिलाएं इस बात को जानते हुए भी ऐसा करती हैं.

– अधिकतर थॉन्ग्स लेसी और सैटिन के फैब्रिक में ही मिलते हैं, जो स्किन को ब्रीद नहीं करने देते और स्किनी होने के कारण वहां बैक्टीरिया ज़्यादा पनपते हैं, जिनसे इंफेक्शन का ख़तरा रहता है. –

– कॉटन पैंटीज़ सबसे सेफ होती हैं. इन्हें पहनने से पसीना कम आता है, जिससे बैक्टीरिया का जमाव और इंफेक्शन नहीं हो पाता.

– अक्सर यह माना जाता है कि अंडरवियर पहनने से पुरुषों के स्पर्म काउंट पर असर होता है, लेकिन जब तक कि अंडरवियर बहुत ज़्यादा टाइट न हो, तो कोई ख़तरा नहीं है.

– अधिकतर महिलाएं एक ही तरह की ब्रा हर ड्रेस पर पहनती हैं, क्योंकि उन्हें अलग-अलग तरह की ब्रा के बारे में पता ही नहीं होता, जैसे- स्मूद, टी-शर्ट ब्रा, पुशअप ब्रा, मिनिमाइज़र ब्रा आदि.प यही हाल पैंटीज़ का भी है, इसमें भी हाई वेस्ट, लो वेस्ट, बिकनी, बॉय शॉर्ट पैंटीज़ मिलती हैं, जो ड्रेस के अनुसार पहनी जानी चाहिए.

– जिन महिलाओं के पास रोज़ाना के लिए अलग-अलग ब्रा नहीं होती, वो एक ही ब्रा को दो-तीन दिनों तक लगातार पहनती हैं, जिससे बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है.

– ज़्यादा लंबे समय तक अंडरगार्मेंट्स को रिप्लेस नहीं करेंगे, तो इंफेक्शन्स का भी ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि उनका मटेरियल ख़राब होने लगता है, साथ ही उनका शेप भी सही नहीं रहता. बेहतर होगा कि समय-समय पर नए अंडरगार्मेंट्स ख़रीदते रहें.

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– ब्रा को ताउम्र के लिए न रखें. जी हां, हर छह महीने में ब्रा को बदल दें, क्योंकि उसका इलास्टिक लूज़ होने लगता है.

– आपका साइज़ बदलता है, तो ब्रा का साइज़ भी बदलें. जी हां, ब्रेस्ट्स का आकार व शेप समय के साथ बदलता है. ऐसे में आप उसी साइज़ की ब्रा हमेशा पहनेंगी, तो इसका मतलब है कि आप ग़लत साइज़ की ब्रा पहन रही हैं.

– वर्कआउट के बाद अंडरगार्मेंट्स ज़रूर बदलें, क्योंकि पसीने की वजह से बैक्टीरियल इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.

अंडरगार्मेंट्स से जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– यूके की महिलाओं का ब्रा साइज़ अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन सबसे बड़ा होता है.

– जापान की महिलाओं का ब्रा साइज़ सबसे छोटा होता है.

– अमेरिका में औसत ब्रा साइज़ है 36 सी.

– अमेरिका में महिलाओं के पास औसतन अंडरवेयर के 22 पेयर होते हैं.

– कप साइज़ का सिस्टम 1930 में चलन में आया था.

– इटली में महिलाएं न्यू ईयर में रेड कलर की अंडरवेयर पहनती हैं, क्योंकि इसको गुड लक से जोड़कर देखा जाता है.

– स्पोर्ट्स ब्रा की शुरुआत साल 1975 से हुई थी.

– फ्रेंच में लॉन्जरी शब्द महिला व पुरुष दोनों के अंडरगार्मेंट्स के लिए यूज़ किया जाता है. प एक कपल ने विक्टोरिया सीक्रेट सेक्सी लॉन्जरी को पॉप्युलर करने के लिए बनाया था, जिसमें रोज़ाना पहनने के अंडरगार्मेंट्स हों और एक ऐसी जगह हो, जहां महिलाएं व पुरुष बेझिझक अंडरगार्मेंट्स ख़रीद सकें. आज विक्टोरिया सीक्रेट बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है.

 – विजयलक्ष्मी

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Personal Problems: क्या मुझे डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी टेस्ट की ज़रूरत है? (Do I Need Diagnostic Laparoscopy Test?)

मेरी उम्र 35 साल है. शादी को 5 साल हो गए हैं, पर अभी तक मैं कंसीव नहीं कर पाई हूं. मेरी और मेरे पति की सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, फिर भी डॉक्टर ने मुझे डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी (Diagnostic Laparoscopy) की सलाह दी है, मुझे इस टेस्ट (Test) की ज़रूरत है?
– रजनी जोगी, भागलपुर.

मैं समझ सकती हूं कि आप ऑपरेशन की प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं. डायग्नॉस्टिक लैप्रोस्कोपी टेस्ट एनीस्थिसिया की मदद से किया जाता है, जिसमें पेट, गर्भाशय, ट्यूब्स, ओवरीज़, पिछला कोई पेल्विक इंफेक्शन या फिर एंडोमिटिरियोसिस की संभावना की जांच की जाती है. कुछ मामलों में देखा गया है कि ओवरीज़ में एग तो बनते हैं, पर किसी इंफेक्शन के कारण ट्यूब्स के सिकुड़न या टेढ़ेपन की वजह से महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं. इसलिए यह टेस्ट ज़रूरी है, ताकि सही तरी़के से आपकी जांच हो सके.

Diagnostic Laparoscopy Test

मेरी पिछली प्रेग्नेंसी बहुत कष्टदायक थी. डिलीवरी के बाद नाल अपने आप नहीं निकली, इसलिए एनीस्थिसिया देकर निकालना पड़ा. इसके बाद खून की कमी हो गई और मुझे ब्लड चढ़ाना पड़ा. उसके बाद कई दिनों तक मुझे बहुत कमज़ोरी महसूस हुई. मैं दोबारा प्रेग्नेंट हूं और मुझे डर है कि कहीं पिछली बार वाली प्रॉब्लम दोबारा न हो जाए?
– ममता मेहता, चंडीगढ़.

जिस प्रकिया से आप गुज़री हैं, उसे नाल का मैन्युअल रिमूवल कहते हैं. इसका कारण गर्भाशय के आकार का असामान्य होना हो सकता है. असामान्य आकार के कारण नाल को निकलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए उसे डॉक्टर को मैन्युअली निकालना पड़ता है. ऐसा दोबारा होने की भी संभावना है. अपने ऑब्सट्रेटीशियन को इस बारे में बता दें, ताकि वो पहले से ही ब्लड का इंतज़ाम कर सकें और ज़्यादा परेशानी न हो.

यह भी पढ़ें: क्या इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव्स के साइड इफेक्ट्स होते हैं? (Does Emergency Contraceptives Have Any Side Effects?)

यह भी पढ़ें:  पीरियड्स देरी से आने के क्या कारण हो सकते हैं? (What Could Be The Reasons For Delayed Periods?)

Dr. Rajshree Kumar

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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Personal Problems: क्या पति का स्पर्म काउंट टेस्ट कराना ज़रूरी है? (Should You Get Your Husband’s Sperm Count Checked?)

मैं 30 वर्षीया महिला हूं और मेरे पति की उम्र भी इतनी ही है. पिछले 3 सालों से हम प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रहे हैं, पर अभी तक हमें कोई सफलता नहीं मिली. क्या महिलाओं की ही तरह पुरुषों में भी इंफर्टिलिटी की समस्या होती है?
– पार्वती मिश्रा, नोएडा.

रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि महिलाओं की तरह पुरुषों में भी इंफर्टिलिटी की समस्या काफ़ी कॉमन है. इंफर्टिलिटी के मामलों में ऐसा देखा गया है कि 1/3 मामलों में पुरुषों में होनेवाली इंफर्टिलिटी, 1/3 मामलों में महिलाओं की इंफर्टिलिटी और 1/3 मामलों में दोनों या फिर किन्हीं अज्ञात कारणों से गर्भधारण में प्रॉब्लम हो सकती है. आपको किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलना चाहिए, वो आप दोनों की जांच करके सही इलाज की सलाह देंगे.

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मैं 28 वर्षीया महिला हूं. मेरे पति को लगता है कि उनकी स्पर्म क्वालिटी में कुछ समस्या है. इस बात को लेकर उनमें हीनभावना आ गई है. हम प्रेग्नेंसी प्लान करने के बारे में सोच रहे हैं, इसलिए जानना चाहते हैं कि क्या पति का स्पर्म काउंट टेस्ट कराना ज़रूरी है? और पुरुषों के लिए नॉर्मल स्पर्म काउंट क्या है?
– शशि मेहरा, हैदराबाद.

सीमेन टेस्ट के ज़रिए पुरुषों के सीमेन में स्पर्म काउंट और उसकी क्वालिटी की जांच की जाती है. आमतौर पर 1 मिलीलीटर सीमेन में 15 से 100 मिलियन स्पर्म होते हैं. 10 मिलियन से नीचे स्पर्म काउंट लो माना जाता है, जबकि 15 मिलियन या उससे अधिक का स्पर्म काउंट सामान्य माना जाता है, बशर्ते उसकी क्वालिटी अच्छी हो. स्टडी में यह बात पता चली है कि क़रीब 10-15% पुरुषों में स्पर्म काउंट ज़ीरो होता है, जिसके कारण उन्हें इंफर्टाइल कहा जा सकता है, इसलिए अगर किसी का स्पर्म काउंट 10 मिलियन से कम हो, तो उन्हें इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलकर अपना इलाज कराना चाहिए. आप सबसे पहले अपने पति को सीमेन टेस्ट कराने की सलाह दें, ताकि उनका स्पर्म काउंट पता चल सके.

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Personal Problems: योनि से पीले रंग के स्राव का क्या कारण हो सकता है? (Reasons For Yellow Vaginal Discharge)

मैं 20 वर्षीय अविवाहित लड़की हूं. मेरे योनि (Vagina) मार्ग से पीले रंग (Yellow Color) का स्राव होता है, जिससे दुर्गंध-सी भी आती है. योनि में अक्सर खुजली की शिकायत भी बनी रहती है. इसके लिए मैंने कई तरह की एंटी फंगल क्रीम भी इस्तेमाल की, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. मुझे ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरी यह बीमारी (Disease) दूर हो सके.
-सुनीता कपूर, हरियाणा.

आपकी योनि में इंफेक्शन हो गया है. एंटी फंगल क्रीम इस्तेमाल करने की बजाय बेहतर होगा कि इंफेक्शन के समय आप किसी गायनाकोलॉजिस्ट से अपना चेकअप करवाएं. दवाइयां इस्तेमाल करने के साथ–साथ सफ़ाई पर भी ख़ास ध्यान दें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके अंदरूनी वस्त्र नायलॉन के न हों. दिन में दो बार स्नान करें और अंदरूनी वस्त्र भी बदलें. आप एंटी फंगल पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. इसके अलावा अपने यूरिन की जांच भी करवाएं, ताकि इंफेक्शन के बारे में पूरी तरह मालूम हो सके.

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Yellow Vaginal Discharge

मैं 26 साल की हूं. मेरे घर में धार्मिक अनुष्ठान है. उसी समय मेरे पीरियड का भी समय है, जिसकी वजह से मैं बेहद चिंतित हूं, क्योंकि पीरियड हो गया तो मैं वो फंक्शन अटेंड नहीं कर पाऊंगी. मैं अपना पीरियड पोस्टपोन करने के लिए क्या करूं?
– रोहिणी कुमारी, छत्तीसगढ.

यह आपके मासिक चक्र पर निर्भर करता है. अगर आपका पीरियड बस अभी बिता ही है तो आप एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोनयुक्त गर्भनिरोधक गोलियां ले सकती हैं, जिसे आपको पीरियड आने तक ज़ारी रखना होगा. अगर आपका पीरियड आकर 10 से 15 दिन बीत चुके हैं तो आप प्रोजेस्ट्रोन के हाई डोज़ वाली दवाएं ले सकती हैं. इसके लिए आप अपने डॉक्टर से मिलें.

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वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से कैसे छुटकारा पाएं? (How To Get Rid Of Vaginal Yeast Infection)

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) (Vaginal Infections) महिलाओं को कभी न कभी हो ही जाता है और इससे उन्हें कई परेशानियां होती हैं, जैसे- योनि में दर्द (Pain In Vagina), खुजली, सूजन… और इसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर भी पढ़ता है. कई महिलाओं को बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, जिसके कारण वो चिड़चिड़ी हो जाती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में भी परेशानियां आने लगती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि इलाज के बावजूद बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है.

Vaginal Yeast Infection

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कई कारण हो सकते हैं, मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होना, स्ट्रेस, पति से मनमुटाव, हाइजीन का ध्यान का रखना, डायट सही न होना. यदि आपको भी बार-बार वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) हो जाता है, तो इसके लिए आपको क्या करना चाहिए? किस तरह की लाइफ स्टाइल से वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) से बचा जा सकता है? मानसिक स्वास्थ्य का वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) पर कितना असर होता है? वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) होने पर आपको और आपके पति को क्या करना चाहिए? ऐसे तमाम सवालों के जवाब दे रही हैं साइकोलॉजिस्ट एंड वुमन हेल्थ काउंसलर नम्रता जैन.

यह भी पढ़ें: सेक्स के दौरान हो दर्द तो करें ये 5 आसान घरेलू उपाय (5 Home Remedies For Vaginal Pain And Dryness)

 

वजाइनल इंफेक्शन (योनि संक्रमण) के कारण और उपचार जानने के लिए देखें वीडियो:

Personal Problems: क्या लो स्पर्म काउंट से मां बन पाऊंगी? (Can I Still Get Pregnant With Low Sperm Count?)

मैं 28 साल की शादीशुदा महिला हूं. मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं. मेरी समस्या ये है कि मेरे पति के वीर्य में शुक्राणु (Sperm) कम हैं. क्या मैं मां बन सकती हूं? कृपया, उचित सलाह दें.
– अर्चना भाटिया, दिल्ली.

वीर्य में शुक्राणु की कमी के दो कारण हो सकते हैं- टेस्टकुलर फेलियर यानि अंडग्रंथि द्वारा शुक्राणु का निर्माण करने में असमर्थता और दूसरा अंडग्रंथि शुक्राणु का निर्माण करते हैं, लेकिन मार्ग में कोई रुकावट होती है. अगर दूसरा कारण है तो रुकावट हटाने के लिए छोटी सी सर्जरी करनी पड़ सकती है. अगर इसके बावजूद फ़ायदा नहीं होता या शुक्राणु का निर्माण ही नहीं हो रहा है तो टेस्टीकुलर बायोप्सी करवाई जा सकती है. अगर इसमें कुछ अच्छे शुक्राणु मिल जाते हैं तो आप टेस्टट्यूब बेबी का रास्ता अपना सकती हैं, जिसमें महिला के अंडे को निकाल कर लेज़र टेकनीक द्वारा शुक्राणु को उसमें इंजेक्ट कर दिया जाता है और इसके बाद टेस्टट्यूब बेबी को गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है. अगर बायोप्सी में शुक्राणु नहीं मिलते तो दूसरे का किसी दानकर्ता से शुक्राणु लिया जा सकता है.

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Low Sperm Count

मैं 21 साल की हूं. मेरा मासिक धर्म हमेशा नियमित रहता है, किंतु मासिक धर्म आने के पूर्व मेरा पेट फूल जाता है और अचानक वज़न भी बढ़ जाता है. ऐसा क्यों होता है? कृपया इस बारे में जानकारी दें.
– प्रतिमा सिंह, बिहार.

आपकी समस्याओं के बारे में जानकर ऐसा लगता है कि आप पीएमएस (प्रीमेन्सट्रुअल सिंड्रोम) यानि माहवारी से पहले होनेवाली तकलीफ़ों से गुज़र रही हैं. इस दौरान आपको अपने आप में और भी कई तरह के बदलाव नज़र आ सकते हैं, जैसे- स्तनों के आकार में वृद्धि, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना, अधिक भूख लगना आदि. ये सब माहवारी के दौरान के सामान्य लक्षण हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है. हां, अपने गायनाकोलॉजिस्ट से यह अवश्य जान लें कि आपके वज़न बढ़ने का कारण कहीं कोई और समस्या तो नहीं है.

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Dr. Rajshree Kumar

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)

स्वतंत्रता दिवस के ख़ास मौ़के पर देश की आज़ादी के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर भी बात करना ज़रूरी है, जहां हमें आज़ादी की ज़रूरत है. यदि हम महिलाओं की बात करें, तो महिलाओं को अपनी कुछ आदतों से आज़ादी पाना बहुत ज़रूरी है. उनकी ये आदतें उन्हें आगे बढ़ने से रोकती हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी बाधक बनती हैं. हमारे देश की अधिकतर महिलाएं अपनी कुछ आदतों के कारण अपना बहुत नुक़सान करती हैं. ये आदतें बदलकर महिलाएं अपने आप में और अपने परिवार में बहुत बदलाव ला सकती हैं. कौन-कौन-सी हैं ये आदतें? आइए, जानते हैं.

Freedom

अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करना
हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को हुए कैंसर की ख़बर ने सभी को चौंका दिया, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह सोनाली बेंद्रे की ख़ुद के प्रति लापरवाही भी थी. सोनाली बेंद्रे को कुछ समय से शरीर में दर्द की शिकायत हो रही थी. लेकिन उन्होंने भी आम महिलाओं की तरह ख़ुद के प्रति लापरवाही के चलते इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. जब दर्द ज़्यादा बढ़ने लगा और डॉक्टर को दिखाया, तब सोनाली बेंद्रे का कैंसर एडवांस स्टेज तक पहुंच गया था. जब सोनाली बेंद्रे जैसी एक्ट्रेस अपनी सेहत के प्रति इतनी लापरवाह हो सकती हैं, तो आम महिलाओं की स्थिति का बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
क्या करें?
जिस तरह आप अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की सेहत का ध्यान रखती हैं, उनकी हर छोटी-बड़ी तकलीफ़ में उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ख़ास ध्यान रखें. शरीर में कोई भी असामान्यता या दर्द होने पर तुरंत घरवालों को इसके बारे में बताएं और उनके साथ डॉक्टर के पास जाएं.

अपने शौक़ के लिए समय न निकालना
महिलाएं अपने शौक़ और ख़ुशियों को हमेशा आख़िरी पायदान पर रखती हैं. घर-परिवार की तमाम ज़िम्मेदारियों के बाद यदि टाइम मिला, तो ही वो अपने शौक़ के बारे में सोचती हैं और ऐसा बहुत कम ही हो पाता है. महिलाएं पूरी ज़िंदगी अपने परिवार के लिए खटती रहती हैं, लेकिन उनके शौक़ अक्सर अधूरे रह जाते हैं. इसका असर उनकी पर्सनैलिटी, उनके आत्मविश्‍वास और उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब महिलाएं अपने शौक़ पूरे नहीं कर पातीं, तो उसकी खीझ उनके व्यवहार में झलकने लगती है. ऐसी स्थिति में महिलाएं या तो बहुत चिड़चिड़ी या मुखर हो जाती हैं या फिर अपनी भावनाओं को दबाने लगती हैं. ये दोनों ही स्थितियां उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
क्या करें?
घर-परिवार, बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपने लिए भी अलग से व़क्त निकालिए. उस समय आप अपने शौक पूरे कीजिए, जैसे- संगीत, पेंटिंग आदि. ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करेंगी और ख़ुश रहने लगेंगी.

घर के कामों के लिए परिवार की मदद न लेना
हमारे देश में घर के काम स़िर्फ महिलाओं के हिस्से ही आते हैं. भले ही वो वर्किंग हों, पति के बराबर कमाती हो, फिर भी घर के काम पुरुष नहीं करते. कई घरों में पुरुष घर के कामों में महिलाओं का हाथ बंटाना भी चाहते हैं, लेकिन महिलाएं ख़ुद उन्हें मना कर देती हैं. उन्हें लगता है कि उनके पति यदि घर का काम करेंगे, तो लोग क्या कहेंगे. ऐसी स्थिति में घर-बाहर दोनों जगहों की ज़िम्मेदारी निभाते हुए महिलाएं इतनी थक जाती हैं कि इससे उनका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. उनका व्यवहार रूखा होने लगता है, घर का माहौल बिगड़ जाता है, वो बात-बात पर चिढ़ने लगती हैं.
क्या करें?
आप घर के सभी काम अकेले नहीं कर सकतीं, इसलिए घर के सभी सदस्यों से थोड़ी-थोड़ी मदद लीजिए और अपनी ज़िम्मेदारी कम कीजिए. इस तरह घर का सारा काम भी हो जाएगा और आपके काम का बोझ भी हल्का हो जाएगा.

Healthy Habits

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छोटी-छोटी बात के लिए पति पर निर्भर रहना
भारतीय महिलाएं अपने पति पर इस कदर निर्भर रहती हैं कि बैंक से लेकर, बच्चों के स्कूल, घर के सामान तक ख़रीदने जैसे कामों के लिए पति का ही इंतज़ार करती हैं. पढ़ी-लिखी वर्किंग महिलाएं ऑफिस में तो सारे काम कर लेती हैं, लेकिन घर के लिए कोई भी ़फैसला लेते समय उन्हें पति की सहायता चाहिए होती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे देश में हमेशा से सारे अधिकार पुरुषों को ही दिए गए हैं, ऐसे में महिलाएं कहीं न कहीं ये मान लेती हैं कि किचन के बाहर के काम उनके बस की बात नहीं है. ख़ासकर पेपरवर्क के मामले में महिलाएं हमेशा पति पर ही निर्भर रहती हैं.
क्या करें?
आपका छोटे-छोटे कामों के लिए पति पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, इससे आपके पति को चिढ़ हो सकती है. जो काम आप पति के बिना कर सकती हैं, उन्हें करने की शुरुआत करें. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपके पति को राहत महसूस होगी.

अपने खानपान पर ध्यान न देना
हमारे देश की अधिकतर महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का अपने खानपान पर ध्यान न देना. गरीब घर की महिलाएं ही नहीं, अमीर परिवार की महिलाएं भी एनीमिया से ग्रस्त पाई जाती हैं. हमारे देश में महिलाओं को ये बचपन से सिखाया जाता है कि उन्हें पूरे परिवार को खिलाने के बाद ही भोजन करना चाहिए, तभी वो कुशल गृहिणी कहलाई जाएंगी. माता-पिता भी बेटे के खानपान पर बेटी से ज़्यादा ध्यान देते हैं. अपनी मां को ऐसा करते देख बेटी भी अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो जाती है. अगर परिवार को खाना खिलाने के बाद भोजन नहीं बचा, तो महिलाएं अपने लिए और बनाने की बजाय भूखी ही रह जाती हैं. पूरे परिवार को महिलाएं दूध, फल, मेवे आदि नियम से खिलाती हैं, लेकिन अपने लिए ऐसा नियम नहीं बनाती हैं.
क्या करें?
जब तक पति ऑफिस से घर नहीं आ जाते, तब तक भोजन न करना समझदारी नहीं है. इससे एक तो आपको एसिडिटी की शिकायत हो जाएगी और आपकी भूख भी मर जाएगी. संपन्न होते हुए भी कुपोषण का शिकार होना स़िर्फ लापरवाही है. आप हैं तो सबकुछ है, आपके बीमार होने से पूरा परिवार बिखर जाता है, इसलिए आपका स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है. जिस तरह आप अपने परिवार का ध्यान रखती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ध्यान रखें.

मन की बात न कहना
महिलाएं घर में सभी को ख़ुश रखने के चक्कर में अक्सर अपनी ख़ुशियों को अनदेखा कर देती हैं. यदि उन्हें किसी की कोई बात बुरी लगती है, तो वो उसे मन में ही रखती हैं. उन्हें लगता है कि पलटकर जवाब देने से घर का माहौल बिगड़ जाएगा, सबकी ख़ुशी के लिए चुप रहना ही सही है. हर बात मन में रखने से कई महिलाओं को डिप्रेशन की शिकायत होने लगती है, उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है, वो अपने में ही सिमट जाती हैं.
क्या करें?
मन की बात मन में रखने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और रिश्तों में भी दूरियां आने लगती हैं. किसी की कोई बात बुरी लगने पर आप उसे जवाब भले ही न दें, लेकिन आपके मन में गांठ रह ही जाती है और आप फिर उस इंसान से पहले जैसी आत्मीयता से व्यवहार नहीं कर पातीं. अत: परिवार में किसी की कोई बात बुरी लगे, तो उसे मन में न रखें, बल्कि उस व्यक्ति से उस बारे में बात करें. ऐसा करने से आपका मन हल्का हो जाएगा और उस व्यक्ति को भी पता चल जाएगा कि उसकी कौन-सी बात आपको बुरी लग सकती है. वो फिर आपसे कभी ऐसी बात नहीं करेगा.

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शर्म-हिचक हो सकती है जानलेवा
महिलाएं अक्सर वेजाइनल प्रॉब्लम्स, ब्रेस्ट प्रॉब्लम्स आदि के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं, जिसके चलते समस्या गंभीर हो जाती है. महिलाओं की शर्म और हिचक उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए सेहत के मामले में कभी भी शर्म ना करें और शरीर के किसी भी हिस्से में तकलीफ़ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

– कमला बडोनी

क्या होता है जब आप बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा आज़ादी देते हैं, देखें वीडियो:

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय (How To Prevent Miscarriage Naturally- Top 5 Home Remedies)

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय आपको मां बनने का सुख देते हैं. गर्भपात के कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पातीं और उनका मां बनने का सपना अधूरा रह जाता है. गर्भपात के कारण महिलाओं को शारीरिक-मानसिक कष्ट से गुज़रना पड़ता है, इससे बचने के लिए हम आपको बता रहे हैं गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय.

Home Remedies

1) हरी दूब के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल) को पीसकर, उसमें मिश्री व दूध मिलाकर 150-200 ग्राम शरबत के रूप में सुबह-शाम पीने से गर्भपात नहीं होता.
2) गाय का ठंडा किया हुआ दूध व जेठीमधु का काढ़ा बनाकर पिलाएं. साथ-साथ इसी काढ़े को नाभि के नीचे के भाग पर लगाएं. इससे गर्भस्राव की संभावना कम हो जाती है.
3) अशोक की छाल का क्वाथ बनाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम पिलाने से गर्भवती स्त्री के गर्भस्राव की संभावना नहीं रहती.
4) एक पके केले को मथकर, उसमें शहद मिलाकर गर्भवती को खिलाएं. ऐसा करके गर्भपात की संभावना को रोका जा सकता है.
5) पीपल और बड़ी कंटकारी की जड़ पीसकर भैंस के दूध के साथ कुछ दिनों तक लेने से भी गर्भपात नहीं होता.

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गर्भपात रोकने के लिए ये नुस्ख़े भी हैं बहुत काम के

* वंशलोचन, मिश्री, नागकेशर को लेकर बारीक चूर्ण कर लें. इसे 2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खाने से लाभ होता है.
* मूली के बीजों का कपड़छन बारीक चूर्ण और भीमसेनी कपूर को गुलाब के अर्क में मिलाकर गर्भ ठहरने के बाद योनि में कुछ दिनोें तक मलने से बहुत लाभ होता है. अगर किसी स्त्री को बार-बार गर्भस्राव होता है तो उसके लिए यह प्रयोग बहुत ही फ़ायदेमंद है.

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

मल्टी टास्किंग के १० ख़तरे महिलाओं के लिए हैं हानिकारक (10 Risks of Multitasking Every Woman Must Know)

मल्टी टास्किंग के १० ख़तरे महिलाओं के लिए हानिकारक हैं. मल्टी टास्किंग महिलाओं का ख़ास गुण माना जाता है, लेकिन एक साथ बहुत सारे काम करने से कई बार उनकी हेल्थ, पर्सनल लाइफ, सोशल लाइफ पर बुरा असर पड़ने लगता है. कितनी नुक़सानदायक हो सकती है मल्टी टास्किंग? आइए, जानते हैं.

Risks Of Multitasking

1) मल्टी टास्किंग से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में मल्टी टास्किंग यानी एक साथ कई काम करना ज़रूरी हो गया है, लेकिन ऐसा करना ख़तरनाक भी हो सकता है. महिलाओं के लिए कहा जाता है कि वो बहुत आसानी से मल्टी टास्किंग कर लेती हैं, लेकिन ऐसा करना उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के बहुत नुक़सानदायक हो सकता है.

2) मल्टी टास्किंग से काम की क्वालिटी पर असर पड़ता है
मल्टी टास्किंग का असर सबसे पहले काम की क्वालिटी पर पड़ता है. आप चाहे कितने ही क़ाबिल क्यों न हों, यदि आप एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो आपके काम की क्वालिटी कम होगी हो. मल्टी टास्किंग करते समय आपका ध्यान सभी कामों पर रहता है, जिससे आप किसी भी काम को पूरी लगन से नहीं कर पाते. इससे काम तो पूरा हो जाता है, लेकिन वो उतना अच्छा नहीं हो पाता, जितना आप उसे कर सकते हैं.

3) मल्टी टास्किंग से काम में ग़लतियां अधिक होती हैं
फ्रांस में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग एक समय पर एक से अधिक काम करते हैं, वो अपने काम में अधिक ग़लतियां करते हैं. ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि मल्टी टास्किंग करते समय हम किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाते, जिसके कारण काम में ग़लतियां छूट जाती हैं. कोई इंसान कितना भी अलर्ट क्यों न हो, यदि वो एक समय पर बहुत सारे काम करता है, तो उससे ग़लतियां छूटेंगी ही. कई बार काम में इतनी बड़ी ग़लती छूट जाती है कि बाद में उसे ठीक करना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने पर तनाव बढ़ जाता है, जिसका असर सेहत पर भी पड़ने लगता है.

4) मल्टी टास्किंग से काम की स्पीड (गति) कम हो जाती है
एक साथ बहुत सारे काम करने वाले लोग इस भ्रम में रहते हैं कि ऐसा करके वो समय बचा लेंगे, लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है. जब आप एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो आप किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाते, जिससे आपके काम की स्पीड स्लो हो जाती है. यदि आप एक-एक करके अपने सारे काम निपटाते जाएं, तो आपका काम भी अच्छा होगा और काम की स्पीड भी अच्छी होगी.

5) मल्टी टास्किंग से क्रिएटिविटी कम हो जाती है
जी हां, मल्टी टास्किंग का असर आपकी क्रिएटिविटी पर भी पड़ता है. जब आप एक समय पर एक से अधिक काम करते हैं, तो आपका पूरा ध्यान काम को निपटाने में लगा रहता है. उस समय आप ये नहीं सोच पाते कि इस काम को और रचनात्मक तरी़के से कैसे किया जाए. मल्टी टास्किंग से बहुत सारे काम निपट तो जाते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी काम बेस्ट नहीं हो पाता. साथ ही आपको काम करने की संतुष्टि भी नहीं मिलती.

6) मल्टी टास्किंग से याददाश्त कमज़ोर होने लगती है
जब हम एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो चीज़ों को भूलने लगते हैं, जिससे हमारी याददाश्त कमज़ोर होने लगती है. उम्र बढ़ने के साथ ये समस्या तेज़ी से बढ़ने लगती है. महिलाएं एक साथ बहुत सारे कामों की ज़िम्मेदारी ओढ़ तो लेती हैं, लेकिन ऐसा करते समय जब वो चीज़ों को भूलने लगती हैं, तो उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है. इससे उनका स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, उनके रिश्तों में भी तनाव बढ़ने लगता है.

7) मल्टी टास्किंग से तनाव बढ़ जाता है
एक साथ बहुत सारे काम करने से काम पर से फोकस तो बिगड़ता ही है, साथ ही काम समय पर पूरा करने का प्रेशर भी बना रहता है, जिससे तनाव बढ़ जाता है. कैलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार, एक साथ बहुत सारे काम करने से दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं, जिससे तनाव बढ़ जाता है. यही वजह है कि मल्टी टास्किंग करने वाले लोग अक्सर तनाव में रहते हैं.

8) मल्टी टास्किंग से मोटापा बढ़ने लगता है
आपको जानकर अजीब लग सकता है, लेकिन ये सच है. मल्टी टास्किंग करने वाले लोग अक्सर खाते समय भी काम करते रहते हैं, जिससे उन्हें ये पता नहीं चल पाता कि उन्होंने कितना खाना खाया है. इसके अलावा एक साथ अधिक काम करने से तनाव बढ़ता है और तनाव में भूख ज़्यादा लगता है, जिसके कारण व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा खाता है और उसका मोटापा बढ़ने लगता है.

9)  मल्टी टास्किंग का रिश्तों पर भी पड़ता है असर
जो लोग एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, वो अपने काम में इतने बिज़ी रहते हैं कि अपने परिवार व क़रीबी रिश्तों के लिए भी टाइम नहीं निकाल पाते. इससे रिश्तों में तनाव और दूरियां बढ़ने लगती हैं. यही वजह है कि बहुत ज़्यादा काम करने वाले लोगों के लाइफ पार्टनर या परिवार के लोग उनसे ख़ुश नहीं रहते. ऐसे लोग अपनी पर्सनल या सोशल लाइफ के लिए टाइम नहीं निकाल पाते, जिससे उनके रिश्तों में तनाव बढ़ जाता है. ऐसे लोग आगे चलकर अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

10) मल्टी टास्किंग की शिकार वर्किंग वुमन
एसोचैम के अध्ययन के अनुसार, 77% वर्किंग वुमन डिप्रेशन, मोटापा, डायबिटीज़, हार्ट और किडनी डिसीज़, पीठदर्द, हाइपरटेंशन जैसी लाइस्टाइल डिसीज़ की शिकार हैं. इस अध्ययन में 32 से 57 वर्ष की वर्किंग वुमन को शामिल किया गया था. एक्सपर्ट्स के अनुसार, वर्किंग वुमन घर और करियर दोनों जगह प्रेशर झेल रही हैं. करियर में उन्हें डेड लाइन का प्रेशर झेलना पड़ता है और घर में उन पर परिवार व बच्चों की ज़िम्मेदारी निभाने का दबाव रहता है. लगातर तनाव में रहने के कारण महिलाओं के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

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How to Avoid Multi Tasking?

मल्टी टास्किंग से कैसे बचें?
मल्टी टास्किंग के प्रेशर से आप थोड़ी स्मार्टनेस से बच सकते हैं. मल्टी टास्किंग से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय:

* टाइम मैनेजमेंट है बेस्ट उपाय
मल्टी टास्किंग के नुक़सान से बचने का सबसे आसान तरीफ़ा है टाइम मैनेजमेंट. यदि आप अपने सभी काम समय पर करें और हर काम के लिए निश्‍चित समय तय कर लें, तो आपको मल्टी टास्किंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. एक समय पर एक काम करके आप अपने काम की क्वालिटी, स्पीड और क्रिएटिविटी बढ़ा सकते हैं.

* दूसरों की हेल्प लें
महिलाएं अमूमन घर के सारे काम अपने सिर ओढ़ लेती हैं और बाद में काम के प्रेशर में चिढ़ने लगती हैं. इससे बचने के लिए घर के कुछ काम परिवार के अन्य सदस्यों में बांट लें. इससे आपके काम का प्रेशर भी कम हो जाएगा और आपको मदद भी मिल जाएगी.

* स्टेमिना बढ़ाएं
काम का प्रेशर झेलने के लिए स्टेमिना बढ़ाना ज़रूरी है. इसके लिए आप योग, मेडिटेशन, एक्सरसाइज़, डांस या किसी खेल का सहारा ले सकते हैं. फिज़िकल एक्टिविटी से स्टेमिना भी बढ़ता है और फोकस भी, इसलिए दिनभर में कुछ समय इसके लिए ज़रूर निकालें.

* झूठी तारीफ़ से बचें
महिलाओं को अक्सर मल्टी टास्कर, सुपर वुमन आदि का ख़िताब देकर उनसे ज़रूरत से ज़्यादा काम कराया जाता है. यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो ऐसी झूठी तारीफ़ों के झांसे में न आएं. यदि आपके घर या ऑफिस में आपकी तारीफ़ करके आपसे ज़्यादा काम कराया जा रहा है, तो इससे ख़ुश होने के बजाय पहले ये देख लें कि आप उतना काम करने में सक्षम हैं या नहीं. यदि आपको लगता है कि ये काम आपके लिए ज़्यादा है तो साफ़ मना कर दें.

* ना कहना सीखें
कुछ लोगों को इसलिए भी ज़्यादा काम करना पड़ता है, क्योंकि वो किसी को किसी भी काम के लिए ना नहीं कह पाते. ऐसा करना ठीक नहीं है. किसी के काम आना या किसी की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन उसके लिए अपनी सेहत को ख़तरे में डालना समझदारी नहीं है. आप जो काम नहीं कर सकते, उसके लिए ना कहना सीखें.

* अपने लिए व़क्त निकालें
हर व़क्त काम में डूबे रहने वाले लोगों की पर्सनल और सोशल लाइफ अच्छी नहीं रहती. वो लोगों से जल्दी घुल-मिल नहीं पाते, जिससे वो अक्सर अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं. इससे बचने के लिए थोड़ा समय अपने लिए ज़रूर निकालें. इस समय में अपने शौक पूरे करें, परिवार के साथ समय बिताएं, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें, ऐसा करके आपको ज़रूर ख़ुशी मिलेगी.

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स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय (Breast Enhancement: 5 Home Remedies To Increase Breast Size)

Breast Enhancement

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय अपनाकर आप भी अपने स्तनों का आकार बढ़ा(Breast Enhancement) सकती हैं. स्तनों (Breast) के आकार को लेकर महिलाएं बहुत चिंतित रहती हैं. बड़े और सुडौल स्तन महिलाओं की ख़ूबसूरती को बढ़ाते हैं इसलिए महिलाएं अपने स्तनों के आकार को लेकर बहुत कॉन्शियस रहती हैं. महिलाओं के स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने में ये 5 अचूक घरेलू उपाय बहुत लाभदायक हैं.

Breast Enhancement

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक नुस्ख़े:
१) स्तनों के चारों ओर गोलाई में जैतून के तेल से दिन में दो बार, नहाने के पहले व रात में सोने से पहले दस मिनट तक मालिश कीजिए. इससे स्तन विकसित होने लगते हैं.
२) गर्म-शीत सेंक करने से भी उरोज़ पुष्ट होते हैं. पहले 5 मिनट तक गर्म पानी में भीगा कपड़ा, फिर 5 मिनट तक ठंडे पानी में भीगा कपड़ा उरोजों पर रखें.
३) रोज़ाना 3-4 कली लहसुन खाने से स्तनों का ढीलापन दूर होता है और वे दृढ़ बनते हैं.
४) बरगद के पेड़ की लटकती डाली की नरम टहनी तोड़कर उसे छाया में सुखा लें. इसे पानी के साथ पीसकर स्तनों पर लेप करने से लटकते हुए स्तन पुष्ट और कड़े हो जाते हैं.
५) अनार का छिलका पीसकर स्तनों पर लगातार सात दिन तक सोने से पूर्व लगाने से स्तनों का ढीलापन दूर होता है.

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महिलाओं के सौंदर्य का मुख्य आधार है पुष्ट और उन्नत स्तन (Breast). स्त्री का सौंदर्य, आकर्षण और मोहकता उसके सुडौल, स्वस्थ व उभरे हुए स्तनों में ही है. परंतु किन्हीं कारणों से कई युवतियों के स्तनों का आकार बहुत छोटा होता है. उनके स्तनों का वैसा विकास नहीं हो पाता जैसा कि सामान्य स्वस्थ स्त्री का होना चाहिए. यह एक बीमारी है, जिसे स्तन क्षय कहा जाता है. जिन लड़कियों को यह रोग होता है, वे एक तरह की हीनभावना से ग्रस्त हो जाती हैं.

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो: