Tag Archives: women health

Personal Problems: क्या प्रेग्नेंसी में ब्लडप्रेशर की दवा लेना सेफ है? (Is It Safe To Have Blood Pressure Medicine During Pregnancy?)

Safe, Blood Pressure. Medicine During Pregnancy
मेरी नौ महीने की बेटी है, जिसे मैं ब्रेस्ट फीडिंग करती हूं. मेरी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आई है और सोनोग्राफी में 5 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी का पता चला है. मेरे डॉक्टर ने मुझे सर्जिकल एबॉर्शन की बजाय मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है. क्या यह सेफ और इफेक्टिव है?
– महिमा झा, हिसार.

स्टडीज़ में यह बात साबित हो चुकी है कि मेडिकल एबॉर्शन सेफ और इफेक्टिव तरीक़ा है. इसमें दो गोलियां दी जाती हैं. सर्जिकल प्रोसीजर भले ही कितना भी छोटा हो, फिर भी उसमें एनीस्थिसिया दिया जाता है और प्रोसीजर में कॉम्प्लीकेशंस की संभावना भी बनी रहती है, क्योंकि आपके डॉक्टर ने आपको मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है, तो उन्होंने इसके बारे में आपको पूरी जानकारी भी दी होगी. इसलिए बेफिक्र रहें. ये बिल्कुल सेफ है.

 Blood Pressure Medicine During Pregnancy
मैं पहली बार मां बनी हूं और मेरी 8 महीने की प्रेग्नेंसी है. डॉक्टर ने कहा है कि मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, जिसे कंट्रोल करने के लिए मुझे दवा लेनी होगी. कहीं ये दवाएं मेरे बच्चे को कोई नुक़सान तो नहीं पहुंचाएंगी? मुझे क्या करना चाहिए?
– अमृता जैन, राजकोट.

पहली बार मां बननेवाली बहुत-सी महिलाओं को यह समस्या होती है, जिसे प्रेग्नेंसी के कारण होनेवाला हाइपरटेंशन कहते हैं. अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल न किया गया, तो यह आपके और आपके बच्चे की सेहत को नुक़सान पहुंचा सकता है. ज़्यादातर एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं टेस्टेड ही होती हैं, इसलिए इफेक्टिव और बच्चों के लिए सेफ हैं. अगर आपके डॉक्टर ने आपको इसकी सलाह दी है, तो वैसा ही करें.

 

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं, क्या मुझमें कोई प्रॉब्लम है?

 

 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होता है (Possible Reasons For Painful Periods)

Reasons For Painful Periods
मैं 24 वर्षीया अविवाहित युवती हूं. हर महीने पीरियड्स के दौरान मुझे असहनीय दर्द होता है और मेरी रूटीन एकदम से बिगड़ जाती है. कृपया, कोई उचित मार्गदर्शन करें.
– नूपुर सेन, दिल्ली.

पीरियड्स के शुरुआती दिनों में दर्द नहीं होता, लेकिन कुछ सालों बाद दर्द शुरू हो जाता है. यह ओव्यूलेशन के कारण होता है. पीरियड्स के पहले दिन ज़्यादा दर्द होता है, पर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगता है. आपके दर्द का कारण एंडोमेट्रियोसिस भी हो सकता है. सामान्य एंडोमेट्रियोसिस की स्थिति में दवा से आसानी से इलाज हो जाता है, लेकिन गंभीर एंडोमेट्रियोसिस के मामले में आपको लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ सकती है.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

Reasons For Painful Periods

कई सालों पहले फायब्रॉइड्स के कारण मुझे अपना यूटरस निकलवाना पड़ा था. अब जब भी खांसती हूं या किसी काम के लिए ज़ोर लगाती हूं, तो वेजाइना बाहर की तरफ़ आ जाता है. मुझे क्या करना चाहिए?
 – रचना जाधव, पुणे.

आपके द्वारा बताए गए लक्षणों से लगता है कि आपको वॉल्ट प्रोलैप्स है. यूटरस निकलवाने के बाद कभी-कभी इस तरह की समस्या सामने आ जाती है. इसके लिए आपको वेजाइनल या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ेगी. इस विषय में अधिक जानकारी के लिए जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं, क्या मुझमें कोई प्रॉब्लम है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या पति का सीमेन टेस्ट करवाना ज़रूरी है? (How Important Is Semen (Sperm Count) Test?)

How Important Is Semen Sperm Count Test
मैं 25 वर्षीया महिला हूं और शादी के 4 साल बाद भी कंसीव नहीं कर पाई हूं. मेरी सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, पर पति का सीमेन टेस्ट नहीं हुआ है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें.
– मीनाक्षी यादव, वाराणसी.

यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कंसीव न कर पाने के 1/3 मामलों में कारण पुरुषों से जुड़े होते हैं. इसके लिए ज़रूरी है कि आपके पति किसी तरह की एंटीबायोटिक्स न ले रहे हों और उन्हें बुख़ार न हो. टेस्ट के 3-4 दिन पहले से ही शारीरिक संबंध न बनाएं, पर यह भी ध्यान रहे कि कई हफ़्तों का गैप न हो. अगर पति टूर पर थे, तो शारीरिक रिश्ते सामान्य होने पर ही टेस्ट कराएं. सीमेन मास्टरबेशन के ज़रिए लैब द्वारा दी गई शीशी में ही रखें. कभी भी कंडोम में सीमेन इकट्ठा न करें. रिपोर्ट आने पर ही अगला क़दम उठा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: वेजाइनल डिस्चार्ज के साथ होनेवाली खुजली कहीं एसटीडी तो नहीं?

 How Important Is Semen Sperm Count Test
मैं 48 वर्षीया महिला हूं और ट्रीटमेंट के बावजूद पिछले कई सालों से हेवी ब्लीडिंग से परेशान हूं. डॉक्टर ने मुझे हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह दी है. कृपया, इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में बताएं.
– रेखा वर्मा, कानपुर.

हिस्टेरेक्टॉमी में सर्जरी के ज़रिए यूटरस और सर्विक्स निकाल दी जाती हैं. यह सर्जरी एब्डॉमिनल, वेजाइनल और लैप्रोस्कोपिक तरीक़ों से की जा सकती है. वेजाइनल और लैप्रोस्कोपिक दोनों ही बेहतरीन तरी़के हैं, क्योंकि इनमें रिकवरी तेज़ी से होती है और ज़्यादा ब्लीडिंग भी नहीं होती. कुछ ही हफ़्तों में आप अपनी नॉर्मल लाइफ शुरू कर सकती हैं. सर्जरी के दौरान ओवरीज़ भी निकाल देने से एस्ट्रोजेन की कमी हो जाती है, जिससे मेनोपॉज़ के सभी लक्षण महसूस होते हैं. हालांकि सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको क्या करें, क्या न करें की पूरी लिस्ट देंगे. सर्जरी के बाद आपको हाई फाइबर डायट लेना होगा, ताकि कफ़ या कब्ज़ की शिकायत न हो, वरना आपकी सर्जरी पर इसका असर पड़ेगा.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: एग फ्रीज़िंग की प्रक्रिया में कितना वक्त लगता है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स पोस्टपोन कैसे करूं? (How Can I Postpone My Periods?)

How Can I Postpone My Periods
मैं ट्रैवेलिंग पर जानेवाली हूं, इसलिए अपने पीरियड्स प्रीपोन या पोस्टपोन करना चाहती हूं. पिछले 4 सालों से मैं बर्थ कंट्रोल पिल्स ले रही हूं और मेरा पीरियड साइकल 30-32 दिनों का है. ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?
– रंजना कुमार, नई दिल्ली.

पीरियड्स प्रीपोन करने की बजाय पोस्टपोन करना ज़्यादा अच्छा होगा. जैसा कि आपने बताया कि आप बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं, तो 7 दिन का जो पिल फ्री वीक का ब्रेक होता है, उसे नज़रअंदाज़ करें और बिना किसी ब्रेक के आप अपनी पिल्स लगातार लेती रहें. पिल्स बंद करते ही कुछ ही दिनों में आपके पीरियड्स आ जाएंगे. बेहतर होगा कि अपने गायनाकोलॉजिस्ट सेे मिलें, वो आपको बेहतर गाइड कर पाएंगे.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

How Can I Postpone My Periods

मैं 16 वर्षीया लड़की हूं. मेरी बाकी सहेलियों की तरह मुझे पीरियड्स नहीं आते, जबकि 14 साल की उम्र से ही हर महीने मुझे पेटदर्द होता है. अल्ट्रासाउंड से पता चला है कि मेरे गर्भाशय और योनि में खून जमा है. डॉक्टर के मुताबिक़ पीरियड्स के लिए मुझे एक छोटा-सा ऑपरेशन करवाना होगा. क्या ऐसा होता है?
– प्रगति सिन्हा, रायपुर.

आमतौर पर 11 से 14 साल के बीच लड़कियों के पीरियड्स आ जाते हैं, पर आपकी जो स्थिति है उसे हेमाटोकोल्पोस और हेमाटोमेत्रा कहते हैं, जिसमें ब्लड वेजाइना और यूटरस में जमा होता रहता है. आपकी वेजाइनल ओपनिंग बंद है, जिसके कारण ब्लड वेजाइना और यूटरस में जमा हो रहा है. जैसा कि आपने बताया कि 14 साल की उम्र से ही आपको हर महीने दर्द होता है, पर पीरियड्स नहीं होते, दरअसल तभी से आपके पीरियड्स शुरू हो गए हैं, पर वेजाइनल ओपनिंग के बंद होने के कारण ब्लड बाहर नहीं निकल पाया. आपको डरने की कोई ज़रूरत नहीं. बस, एक छोटे-से ऑपरेशन से सब ठीक हो जाएगा और आपके पीरियड्स नॉर्मल हो जाएंगे.

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या आईवीएफ की मदद से कंसीव कर पाऊंगी? (How In Vitro Fertilization Can Help Me Conceive?)

Vitro Fertilization Can Help Me Conceive
मैं 35 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. पिछले 2 सालों से मैं कंसीव नहीं कर पा रही हूं. कृपया, बताएं कि आईवीएफ की मदद से किन रिप्रोडक्टिव प्रॉब्लम्स को सुलझाया जाता है?
– अंकिता शाह, राजकोट.

आईवीएफ निम्नलिखित परिस्थितियों में आपकी मदद कर सकता है- अगर आपकी इंफर्टिलिटी के कारण का पता नहीं चल पाया है, आपके फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक्ड हैं, आप फर्टिलिटी ड्रग्स और इंट्रायूटेराइन इंसेमिनेशन प्रक्रिया में असफल हो चुकी हैं या फिर जहां इसके साथ मेल सब-फर्टिलिटी की थोड़ी-बहुत संभावना है. आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन, जिसका अर्थ है ‘ग्लास में फर्टिलाइज़ेशन’ जिसे आमतौर पर ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ के नाम से भी जाना जाता है. आईवीएफ की प्रक्रिया में महिला की ओवरी से अंडों को निकालकर पुरुष के स्पर्म्स के साथ लैब में फर्टिलाइज़ किया जाता है और इसके बाद इस फर्टिलाइज़्ड अंडे को दोबारा महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है.

यह भी पढ़ें: क्या डायबिटीज़ में गर्भधारण सुरक्षित है?

Vitro Fertilization Can Help Me Conceive

मैं 29 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं और एंडोमिट्रियोसिस के बारे में जानना चाहती हूं. यह क्या होता है और इसके लिए क्या उपचार उपलब्ध हैं?
– कुसुम देसाई, अमरावती.

एंडोमिट्रियोसिस ऐसी अवस्था है, जब गर्भाशय की लाइनिंग गर्भाशय के बाहर ओवरीज़ पर या पेल्विक के भीतर चली जाती है. इसके कारण दर्दयुक्त माहवारी, पेल्विक एरिया में दर्द, इंफर्टिलिटी जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. हालांकि पेनकिलर्स, हार्मोन ट्रीटमेंट्स और सर्जरी की मदद से इससे छुटकारा पाया जा सकता है, पर मरीज़ की अवस्था को देखते हुए डॉक्टर उपयुक्त उपचार की सलाह देते हैं. हार्मोनल ट्रीटमेंट्स में बर्थ  कंट्रोल पिल्स, मिरेना इंट्रा यूटेराइन सिस्टम और हार्मोनल इंजेक्शन के ज़रिए इसका इलाज किया जाता है.

यह भी पढ़ें: पीरियड्स के पहले ब्रेस्ट्स में गाँठ कहीं कैंसर तो नहीं?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या गर्भनिरोधक गोलियों से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है? (Do Contraceptive Pills Increase Risk Of Breast Cancer?)

Contraceptive Pills, Risk Of Breast Cancer
मेरी कई सहेलियां गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं, पर उनके अनुसार इसके ज़्यादा सेवन से ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. क्या यह सच है?
– रश्मि भूषण, रोहतक.

स्टडीज़ में यह बात साबित हो चुकी है कि जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं, उनमें बाकी महिलाओं के मुक़ाबले बे्रस्ट कैंसर, लिवर व सर्वाइकल कैंसर की संभावना थोड़ी ज़्यादा बढ़ जाती है. वैसे कई और कारण हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को बढ़ा देते हैं, जैसे- कम उम्र में पीरियड्स की शुरुआत, हार्मोनल कारण, देरी से मेनोपॉज़ होना, पहली प्रेग्नेंसी ज़्यादा उम्र में होना, बच्चे न होना आदि.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं, क्या मुझमें कोई प्रॉब्लम है?

 

 Contraceptive Pills, Risk Of Breast Cancer
मैं 41 वर्षीया महिला हूं और कमरदर्द से परेशान हूं. पेनकिलर्स लेने पर आराम हो जाता है, पर फिर स्थिति वही हो जाती है. डॉक्टर ने मुझे विटामिन डी3 लेवल चेक कराने की सलाह दी है. क्या यह ज़रूरी है?
– ज्योति पांडे, भोपाल.

विटामिन डी दो प्रकार के होते हैं, डी2 और डी3. जहां डी2 भोजन और सप्लीमेंट से प्राप्त होता है, वहीं डी3 भोजन के अलावा सूरज की रोशनी से भी मिलता है. कैल्शियम मेटाबॉलिज़्म और बोन रिमॉडलिंग में इसका इस्तेमाल होता है. विटामिन डी हमारे इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाने के साथ-साथ, बे्रन को डेवलप करने और हार्ट को हेल्दी बनाने का काम करता है. हड्डियों की मज़बूती के लिए यह बहुत ज़रूरी है, इसलिए अपना डी3 लेवल चेक कराएं, ताकि पता चल सके कि कहीं आपमें इसकी कमी तो नहीं.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: सेक्स के दौरान वेजाइनल ब्लीडिंग के क्या कारण हो सकते हैं?

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या सीज़ेरियन डिलीवरी में आईयूसीडी सेफ है? (Is IUCD Safe in Cesarean Delivary?)

IUCD Safe in Cesarean

दो महीने पहले ही मेरी पहली सीज़ेरियन डिलीवरी हुई है. डॉक्टर ने अगला बच्चा 2-3 साल बाद प्लान करने की सलाह दी है. मैं जानना चाहती हूं कि क्या मैं इंट्रा यूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (आईयूसीडी) इस्तेमाल कर सकती हूं? क्या यह सीज़ेरियन डिलीवरी में सेफ है और इसे कितने समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं?

– सरस्वती मेहता, जयपुर.

सीज़ेरियन डिलीवरी में आईयूसीडी का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता. दरअसल, यह एक बेहतरीन गर्भनिरोधक है. अगर आपको वेजाइनल ब्लीडिंग, जेनिटल कैंसर, गर्भ का असामान्य आकार, गर्भाशय में फायब्रॉइड्स, बार-बार पेल्विक इंफेक्शन आदि की समस्या नहीं है, तो यह आपके लिए एक सुरक्षित विकल्प है. बस, एक बार इसे इंसर्ट कराएं और आप बेफ़िक़्र रह सकती हैं. पर हर महीने आपको पीरियड्स के दौरान इसे चेक करते रहना होगा कि कहीं धागा बाहर तो नहीं आ रहा है, क्योंकि पीरियड्स के दौरान ही इसके बाहर निकलने की संभावना सबसे अधिक होती है.
शुरू-शुरू में पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग और दर्द हो सकता है, पर 2-3 महीने में यह ठीक हो जाएगा. इसमें आप कॉपर टी 380ए अगले
10 सालों के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं.

Cesarean Delivary

 

मैं 29 वर्षीया एक बच्चे की मां हूं. हाल ही में मुझे शुरुआती स्टेज पर ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ है. हालांकि सर्जरी में स़िर्फ गांठ कट करके निकालेंगे, पर फिर भी डॉक्टर ने कीमोथेरेपी की संभावना जताई है. इसलिए दूसरे बच्चे के लिए अपने एग्स को स्टोर करके रखने की सलाह दी है.
हम क्या करें?

– पल्लवी राणे, नागपुर.

यह अच्छी बात है कि शुरुआत में ही ब्रेस्ट कैंसर का पता चल गया. दरअसल, कीमो थेरेपी का असर आपके एग्स की क्वालिटी पर पड़ सकता है, इसलिए अगर आप दूसरे बच्चे के बारे में सोच रही हैं, तो आपके डॉक्टर ने बहुत अच्छी सलाह दी है. आप अपने एग्स को स्टोर कर लें. इसके लिए एक पूरी प्रक्रिया है, जिससे गुज़रने के बाद आपके एग्स को आपके पति के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज़ करके फ्रीज़ करके रखा जाएगा, जिससे भविष्य में आप इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

 

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)

Second Baby, Planning, Precaution Tips
मेरी उम्र 34 और मेरे पति की 36 है. हमारा 7 साल का एक बेटा है. दूसरे बच्चे के लिए हमें क्या एहतियात बरतनी चाहिए?
– अदिती श्रीवास्तव, मेरठ.

अगर आप दूसरे बच्चे के बारे में सोच रही हैं, तो बिल्कुल भी देर न करें, क्योंकि जल्द ही आप 35 की होनेवाली हैं. अगर आप किसी तरह के प्रीकॉशन्स ले रही हैं, तो तुरंत बंद कर दें और फॉलिक एसिड टैबलेट्स लेना शुरू कर दें. अगर आपको डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या थायरॉइड जैसी कोई समस्या है, तो सबसे पहले किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर तसल्ली कर लें कि आपका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार है. अगर नेचुरल तरी़के से आप 3-6 महीने के भीतर गर्भधारण करने में असक्षम हैं, तो आपको किसी गाइनाकोलॉजिस्ट से मिलना होगा.

पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)
मैं 24 साल की युवती हूं. पीरियड्स के दौरान मुझे व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जिससे बदबू आती है और खुजली भी होती है. मुझे क्या करना चाहिए?
– धरा पंडित, श्रीनगर.

पीरियड्स के दौरान व्हाइट डिस्चार्ज दिखना मुश्किल है. हो सकता है, सैनिटरी पैड्स के कारण जलन व खुजली हो रही हो. खुजली और वेजाइनल डिस्चार्ज का कारण वेजाइना में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है. इसके लिए गाइनाकोलॉजिस्ट आपको 3-6 दिनों के लिए वेजाइनल टैबलेट्स, एंटी फंगल मेडिसिन्स, एंटी बायोटिक्स या कोई क्रीम दे सकते हैं. ध्यान रहे कि हमेशा कॉटन की अंडरवेयर्स ही पहनें और मेडिकेटेड पेरिनियल वॉशेज़ (प्राइवेट पार्ट के लिए इस्तेमाल होनेवाले लिक्विड वॉशेज़) से दूर रहें.

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर का क्या कारण हो सकता है? (What Can Cause High BP In Pregnancy?)

Cause High BP In Pregnancy
मैं 33 वर्षीया महिला हूं और हाल ही में मेरी डिलीवरी (Delivery) हुई है. प्रेग्नेंसी (Pregnancy) की आख़िरी तिमाही में मुझे हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) की समस्या हो जाने से डॉक्टर ने दवा शुरू की, पर उनका कोई असर नहीं हुआ और अभी भी मेरी दवा जारी है. यह दवा मुझे कब तक लेनी होगी? क्या 33 साल की उम्र हाई बीपी के लिए बहुत कम नहीं है?
– पद्मा गिल, लुधियाना.

प्रेग्नेंसी की आख़िरी तिमाही में बहुत-सी महिलाओं को हाई बीपी की समस्या हो जाती है, जिसे प्रेग्नेंसी के कारण होनेवाला हाइपरटेंशन कहते हैं. ज़्यादातर यह पहली बार मां बनी महिलाओं को होता है, जो डिलीवरी के बाद या डिलीवरी के 6-12 हफ़्तों बाद सामान्य हो जाता है. आपने यह नहीं बताया है कि डिलीवरी को कितना समय हो गया है. हाई बीपी के कारणों का पता लगाने के लिए आपको अपनी जांच करानी होगी, तभी पता चल पाएगा कि इस उम्र में आपको यह समस्या क्यों हुई. अपनी लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव करें. एक्सरसाइज़ और मेडिटेशन
को अपने रूटीन में शामिल करें और संतुलित भोजन लें.

यह भी पढ़ें: क्या कंसीव करने की संभावना को जानने के लिए कोई टेस्ट है?

Cause High BP In Pregnancy
पिछले हफ़्ते मेरी ऑफिस की सहेली अचानक बेहोश हो गई, जो प्रेग्नेंट थी. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी इमर्जेंसी सर्जरी करनी पड़ी. डॉक्टर ने बताया कि वह एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) की शिकार हुई है. यह क्या है? क्या भविष्य में उसकी प्रेग्नेंसी नॉर्मल होगी?
– सरला पटेल, रोहतक.

इस अवस्था में भू्रण यूटेरस के अंदर रहने की बजाय बाहर आमतौर पर ट्यूब्स में रह जाता है, जिससे भू्रण 5-6 हफ़्तों से ज़्यादा सुरक्षित नहीं रहता. आमतौर पर महिलाओं को पेट में मरोड़, वेजाइनल ब्लीडिंग, कंधों आदि में दर्द होता है. एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी सर्विक्स, ओवरीज़ या एब्डोमेन में भी हो सकती है. अगर उनका दूसरा ट्यूब ठीक है, तो भविष्य में वह प्रेग्नेंट हो सकती हैं.

यह भी पढ़ें: क्या प्रेग्नेंसी में बहुत ज़्यादा उल्टियां होना नॉर्मल है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

हर बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार  उपाय जानने के लिए इंस्टॉल करे मेरी सहेली आयुर्वेदिक होम रेमेडीज़ ऐप

 

सार्थक पहल- महिलाओं के लिए हेल्थ कार्ड (Worthy Initiative- Health Card For Women)

womens-health-2

स्त्री घर-बाहर दोनों ही ज़िम्मेदारियों को बख़ूबी निभाती रही है, पर इन सबके चलते वह ख़ुद पर ख़ासकर अपनी सेहत पर अधिक ध्यान नहीं दे पाती. साथ ही इन दिनों ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, एनीमिया जैसी बीमारियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए अब सरकार महिलाओं के लिए हेल्थ कार्ड मुहैया करवाएगी.

* इस योजना के तहत देश की सभी महिलाओं को हेल्थ कार्ड दिया जाएगा.

* चूंकि यह कार्ड आधार से लिंक्ड रहेगा, इसलिए इसे हासिल करने के लिए महिलाओं का आधार कार्ड होना भी ज़रूरी होगा.

* इस कार्ड के ज़रिए महिलाओं का साल में एक बार फ्री चेकअप होगा.

* महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी महिलाओं में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, गर्भाशय कैंसर आदि से चिंतित थीं. उनके अनुसार, कैंसर से बचाव के लिए महिलाओं को जागरूक किया जाना बहुत ज़रूरी है. इसी कारण उन्होंने महिलाओं के लिए हेल्थ कार्ड का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सर्व सम्मति से मंज़ूर कर लिया गया.

* यह कार्ड बच्चों के टीकाकरण कार्ड की तरह होगा. इसके ज़रिए समय-समय पर महिलाओं के हेल्थ चेकअप सुनिश्‍चित किए जाएंगे.

* इस कार्ड को हर स्त्री तक पहुंचाने के लिए मंत्रालय गांव-कस्बे, दूर-दराज़ इलाके, राज्यों आदि से सहयोग लेगी, ताकि हर नारी को यह सुविधा मिल सके.

* हेल्थ कार्ड धारक स्त्रियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सभी सरकारी अस्पतालों में चेकअप की सुविधा दी जाएगी.
सरकार गर्भवती महिला, मां की सेहत को लेकर हमेशा से ही फ्रिकमंद रही है, तभी तो कुछ समय पहले गर्भवती महिलाओं के लिए हर महीने की 9 तारीख़ को फ्री हेल्थ चेकअप की सुविधा मुहैया करवाई गई. इसके अलावा प्रेग्नेंट वुमन के लिए कैशलेस मेडिकल सर्विस का प्रावधान भी दिया गया है.

– ऊषा गुप्ता

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान गर्भनिरोधक की ज़रूरत नहीं पड़ती? (Do I Need Birth Control While Breastfeeding?)

family planning
मैं 29 वर्षीया महिला हूं. पिछले महीने ही मेरी सीज़ेरियन डिलीवरी हुई है. फैमिली प्लानिंग के बारे में सलाह देने के लिए डॉक्टर ने छह हफ़्ते बाद बुलाया है, पर मेरी सहेली का कहना है कि चूंकि मैं ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) करा रही हूं, तो ऐसे में किसी गर्भनिरोधक की ज़रूरत नहीं पड़ती. क्या यह सच है? कृपया बताएं.
– राधिका तारे, मुंबई.

आपके लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपकी सीज़ेरियन डिलीवरी हुई है और आपके सीज़ेरियन घाव को भरने में समय लगेगा, इसीलिए डॉक्टर ने आपको फैमिली प्लानिंग के लिए बुलाया है. आपके लिए गर्भनिरोधक इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर घाव भरने से पहले ही आप प्रेग्नेंट हो गईं, तो कई तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती हैं, जो आपके लिए ठीक नहीं है. आपके बच्चे को भी आपके प्यार, समय और देखभाल की ज़रूरत है, जो तभी संभव है, जब आप 2-3 साल तक प्रेग्नेंसी से बची रहेंगी.

यह भी पढ़ें: क्या गर्भधारण के लिए फॉलिक एसिड की सलाह सही है?

Breast Feeding
मैं 32 वर्षीया महिला हूं. मेरा एक साल का बेटा भी है. मेरे पति विदेश में रहते थे, इसलिए मैंने कभी कोई फैमिली प्लानिंग (Family Planning) नहीं की थी, लेकिन पिछले महीने मेरे पति विदेश से लौटे, तो मैंने कंसीव कर लिया था, पर चूंकि मेरा बेटा बहुत छोटा है, इसलिए मैंने एबॉर्शन करा लिया. अभी मैं एक साल और कंसीव नहीं करना चाहती. कृपया, मुझे फैमिली प्लानिंग की सही सलाह दें.
– कविता गुप्ता, इंदौर.

एबॉर्शन के 10-12 दिनों बाद ही महिलाओं में फर्टिलिटी लौट आती है, इसलिए आपको कोई गर्भनिरोधक विकल्प ज़रूर अपनाना चाहिए. आज मार्केट में कई प्रकार के गर्भनिरोधक मिलते हैं. आपकी मेडिकल हिस्ट्री, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ की हिस्ट्री आदि देखने के बाद ही आपका डॉक्टर आपको सही सलाह दे पाएगा. इसलिए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी सुविधानुसार सही विकल्प चुनें.

यह भी पढ़ें:  पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या एबॉर्शन के बाद कंसीव करने में समस्या आती है?

ब्रेस्टफीडिंग व गर्भनिरोध का क्या है कनेक्शन?

अगर कोई महिला ब्रेस्टफीड नहीं करती, तो ओव्यूलेशन (फर्टिलिटी) जल्दी शुरू हो जाता है, पर इसका यह भी मतलब नहीं है कि अगर आप बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हैं, तो आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं. अगर आप छह महीने तक बच्चे को अपने दूध के अलावा कुछ और नहीं खिलाती-पिलाती हैं, तो हो सकता है ओव्यूलेशन आने में थोड़ा समय लगे. सीज़ेरियन डिलीवरी के बाद यह बहुत ज़रूरी है कि प्रेग्नेंसी के लिए 2-3 साल का अंतर रखा जाए. सीज़ेरियन डिलीवरी के बाद एबॉर्शन कराना सेफ नहीं होता है, इसलिए गर्भनिरोधक का इस्तेमाल ज़रूर करें. ब्रेस्टफीडिंग करानेवाली मांओं के लिए आजकल हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन भी उपलब्ध है, जिसे आप अपने डॉक्टर की मदद से ले सकती हैं. इसके अलावा कई अन्य विकल्प भी हैं, जिन्हें आप अपनी सुविधानुसार ले सकती हैं.

यह भी पढ़ें: एग्ज़ाम्स के व़क्त पीरियड्स अनियमित क्यों हो जाते हैं?

rajeshree-kumar-167x250

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

महिलाओं के 5 टॉप दुश्मन(5 Top women’s health problems which she should never ignore)

women’s health problems

महिलाओं के पांच हेल्थ दुश्मन- हृदय रोग,ऑस्टियोपोरोसिस, ब्रेस्ट कैंसर- सर्वाइकल कैंसर, डिप्रेशन और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम उन्हें कब चपेट में ले लेते हैं, उन्हें ख़ुद पता नहीं चलता. इसलिए ज़रूरी है समय रहते ध्यान देना और किसी भी संकेत की अनदेखी न करना.

women’s health problems

1. हृदय रोग

दुनियाभर के विभिन्न शोधों में यह बात सामने आई है कि पूरी दुनिया में 53.1% महिलाओं की मौत हृदय रोग के कारण होती है. पिछले कुछ सालों में कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय रोग के कई मामले सामने आए हैं. इसका कारण वर्कलोड, तनाव, ़फैमिली हिस्ट्री, खान-पान की ग़लत आदतें आदि हैं. ज़्यादातर महिलाएं पहले डायबिटीज़, मोटापा आदि से पीड़ित होती हैं और फिर उन्हें हृदय रोग की समस्या हो जाती है. हायपरटेंशन और हाई कोलेस्ट्रॉल भी इसके प्रमुख कारण हैं

.
हृदय रोग में आम शिकायतें

* नींद न आने की समस्या.
* सांस लेने में तकलीफ़.
* कमरदर्द, गर्दन या ठुड्डी में दर्द.
* अपच के कारण उबकाई आना या
उल्टी आना.
* चक्कर आना और थकान.
हृदय रोग से लड़ाई
* अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो अपने डॉक्टर की दी हुई दवाओं का नियमित सेवन करें. अगर आप डायबिटीज़ से जूझ रही हैं, तो अपने ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें.
* हेल्दी डायट लें. खाने में सब्ज़ियां, फल, साबूत अनाज, फाइबरयुक्त भोजन, प्रोटीन से भरपूर आहार व मछली
शामिल करें.
* डेली रूटीन में एक्सरसाइज़ को शामिल करें और अपना वज़न नियंत्रित रखें.
* सिगरेट और शराब से दूर रहें.
* तनाव को दूर कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

2. ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जो हड्डियों को कमज़ोर कर देती है और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसकी संभावना महिलाओं में पुरुषों से पांच गुना ज़्यादा होती है. पचास वर्ष से अधिक उम्र की क़रीब 50% महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस पाया जाता है. ये एक ऐसी बीमारी है, जिसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम ज़रूर किया जा सकता है. कमरदर्द, झुकी हुई कमर, शरीर दर्द और कमज़ोरी- ये सारे लक्षण इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि अब आप को संभलने की ज़रूरत है. कहीं आपका कमरदर्द आपके जीवन का दर्द न बन जाए.

ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क फैक्टर्स
* मेनोपॉज़ के दौरान ओवरीज़ (अंडाशय) में बननेवाले एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में कमी आ जाती है, जिसके कारण
हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है.
* सर्जरी के द्वारा ओवरी निकलवाने से हड्डियां बहुत तेज़ी से कमज़ोर होती हैं.
* कैल्शियम और विटामिन ङ्गडीफ हमारी हड्डियों की मज़बूती में अहम् भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी कमी इस बीमारी का एक प्रमुख कारण बनती है.
* ग़लत खानपान और जीवनशैली भी ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क ़फैक्टर्स में से एक है.
* जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हो चुका है और जो धुम्रपान और शराब का सेवन करती हैं, उनमें इसका ख़तरा ज़्यादा बढ़ जाता है.

कम करें रिस्क फैक्टर्स
* आपकी हड्डियों के लिए विटामिन ङ्गडीफ बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आपको ज़्यादा कुछ नहीं करना है, बस रोज़ाना 10 मिनट की धूप आपको भरपूर मात्रा में विटामिन ङ्गडीफ देती है. इसके अलावा खाने में अंडे की जर्दी और मछली का तेल इसकी कमी को पूरा करते हैं.
* कैल्शियम को अकेले लेने की बजाय विटामिन ङ्गडीफ के साथ लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.
* कैल्शियम से भरपूर भोजन दूध, दही, चीज़, हरी सब्ज़ियां, टोफू, मछली व साबूत अनाज का सेवन करें.
* एक्सरसाइज़ और जॉगिंग से अपने आप को एक्टिव रखें.

3. कैंसर

कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बॉडी सेल्स ठीक से काम नहीं करते. सेल्स बहुत तेज़ी से बंटते हैं और एक्स्ट्रा सेल्स ट्यूमर बन जाते हैं. भारत में अन्य देशों के मुक़ाबले कैंसर पीड़ितों की संख्या बहुत ज़्यादा है. महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.
ब्रेस्ट कैंसर
हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. इसका कारण जागरूकता में कमी और बदलती जीवनशैली है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, हर 22 में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार होती है. देर से शादी होना, बच्चे होना और फिर बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग न कराना, रेडियोएक्टिव व केमिकल्स का एक्सपोज़र, ़फैमिली हिस्ट्री, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी आदि इस समस्या के प्रमुख कारण हैं. बदलती जीवनशैली के कारण जल्दी पीरियड्स आना और देर से मेनोपॉज़ होने के कारण शरीर के हार्मोंस में काफ़ी बदलाव आते हैं, जिसके कारण ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. भारत की क़रीब 22-25% महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं.
ब्रेस्ट की जांच ज़रूरी
ब्रेस्ट की जांच समय-समय पर करती रहें, ताकि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर इससे छुटकारा पाया जा सके. निप्पल डिस्चार्ज, निप्पल या ब्रेस्ट में दर्द, ब्रेस्ट में गांठ या सूजन, अंडरआर्म्स में गांठ या
सूजन, ब्रेस्ट के आकार में बदलाव, निप्पल का अंदर धंसना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं.
अपनाएं हेल्दी हैबिट्स
* वज़न नियंत्रित रखें.
* जितना ज़्यादा हो सके, फल और
सब्ज़ियां खाएं.
* एक्सरसाइज़ करें और एक्टिव रहें.
* ब्रेस्ट फीडिंग काफ़ी हद तक आपको सुरक्षित रखता है, इसलिए अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराएं.
* शराब से दूर ही रहें.
* तनाव से दूर रहें और सकारात्मक सोच रखें.
सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स, जो यूटेरस (गर्भाशय) के निचले हिस्से में होता है, में होनेवाला एक कैंसर है. जब सर्विक्स के सेल्स कैंसर सेल्स में बदल जाते हैं, तब सर्वाइकल कैंसर होता है. ज़्यादातर मामलों में सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है, जो एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर तक शारीरिक संबंध के ज़रिए फैलता है.
रिस्क फैक्टर्स
* कम उम्र में सेक्स.
* एक से ज़्यादा सेक्स पार्टनर्स.
* धूम्रपान, एचआईवी, कमज़ोर रोग
प्रतिरोधक क्षमता और अनियमित पैप टेस्ट. पैप टेस्ट के ज़रिए सर्विक्स के सेल्स में होनेवाले गंभीर बदलावों का पता लगाया जाता है.
रिस्क फैक्टर्स को कम करें
* सर्वेरिक्स और गार्डसिल ऐसे दो वैक्सिन्स या टीके हैं, जिनके इस्तेमाल से लड़कियों और महिलाओं को एचपीवी से सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि वे सर्वाइकल कैंसर की शिकार न हो सकें.
* सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इं़फेक्शन से बचने के लिए इस दौरान सेक्स न करें.
* अपने पार्टनर के प्रति वफ़ादार रहें.
* कंडोम का इस्तेमाल करें.

4. डिप्रेशन

तनाव और अवसाद के बीच मामूली-सा फ़र्क़ है. महिलाएं अक्सर अवसाद का शिकार इसलिए हो जाती हैं, क्योंकि वे जल्दी तनावग्रस्त हो जाती हैं. महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं. जहां एक ओर गृहस्थी संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर ऑफ़िस का कामकाज भी संभालती हैं. घर और ऑफ़िस से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं होती हैं, जिन्हें किसी और से शेयर न करके ख़ुद सुलझाना चाहती हैं. ऐसे में कई बार वे तनाव और फिर अवसाद का शिकार हो जाती हैं.
डिप्रेशन के रिस्क फैक्टर्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिप्रेशन न स़िर्फ बायोलॉजिकल (जैविक), बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तत्वों के कारण भी होता है यानी आपके रिश्ते-नाते, आपकी जीवनशैली और आपकी सहनशक्ति भी काफ़ी मायने रखती है.
* अकेलापन, सोशल सपोर्ट की कमी, तनावभरी ज़िंदगी, डिप्रेशन की ़फैमिली हिस्ट्री, वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक तंगी, बचपन की कड़वी यादें, शराब या ड्रग्स का इस्तेमाल, बेरोज़गारी या बेकारी और शारीरिक समस्याएं.
हेल्दी लाइफ़स्टाइल अपनाएं
* अच्छे दोस्त बनाएं.
* अच्छी नींद लें और एक्सरसाइज़ करें.
* हेल्दी खाएं और मूड अच्छा रखें.
* जितना हो सके, तनाव को नियंत्रित करें.
* संगीत सुनें और ख़ुद को रिलैक्स रखें.
* नकारात्मक ख़्यालों से लड़ें. इसके लिए आप काउंसलर की मदद भी ले सकती हैं.
* कोई भी समस्या जो आपको परेशान कर रही हो, अपने क़रीबी दोस्तों या रिश्तेदारों से शेयर करें.
* पॉज़िटिव लाइफ़स्टाइल अपनाए, ख़ुद की मदद करें और इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनें.

5. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) एक हार्मोनल समस्या है. इसमें ओवरी में कई सिस्ट हो जाते हैं, जिसके कारण महिलाओं को इंफ़र्टिलिटी की समस्या से दो चार होना पड़ता है. यह 5-10% महिलाओं में पाया जाता है. कई बार ये समस्या किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती है, लेकिन शादी के बाद ही इसका पता चल पाता है.
पीसीओएस में आम शिकायतें
* अनियमित माहवारी या माहवारी के समय अधिक रक्तस्राव.
* एंड्रोजन हार्मोंस के घटते-बढ़ते स्तर के कारण मुंहासे, अचानक से चेहरे और शरीर के विभिन्न अंगों में बालों का बढ़ना.
* थकान और डिप्रेशन.
* अचानक बालों का झड़ना.
* सिरदर्द और नींद न आना.
* याद्दाश्त पर असर.
* बार-बार प्यास लगना.
* वज़न बढ़ने के कारण मोटापा.
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का ट्रीटमेंट
* इससे छुटकारा पाने में रोज़ाना
एक्सरसाइज़ काफ़ी कारगर है. यह न स़िर्फ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है, बल्कि वज़न भी कम करके शारीरिक समस्याओं को दूर रखता है.
* हेल्दी डायट में फल, सब्ज़ियां, बींस, मेवे और साबूत अनाज ज़रूर शामिल करें.
* डॉक्टर आपको कुछ बर्थ कंट्रोल पिल्स या फ़र्टिलिटी मेडिसिन या डायबिटीज़ मेडिसिन दे सकते हैं, जिससे आपके पीरियड्स रेग्युलर हो जाएंगे.

  1. – अनीता सिंह

 

किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं ये 10 आदतें (10 Habits Which Are Harmful For Your Kidney)