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स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)

स्वतंत्रता दिवस के ख़ास मौ़के पर देश की आज़ादी के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर भी बात करना ज़रूरी है, जहां हमें आज़ादी की ज़रूरत है. यदि हम महिलाओं की बात करें, तो महिलाओं को अपनी कुछ आदतों से आज़ादी पाना बहुत ज़रूरी है. उनकी ये आदतें उन्हें आगे बढ़ने से रोकती हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी बाधक बनती हैं. हमारे देश की अधिकतर महिलाएं अपनी कुछ आदतों के कारण अपना बहुत नुक़सान करती हैं. ये आदतें बदलकर महिलाएं अपने आप में और अपने परिवार में बहुत बदलाव ला सकती हैं. कौन-कौन-सी हैं ये आदतें? आइए, जानते हैं.

Freedom

अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करना
हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को हुए कैंसर की ख़बर ने सभी को चौंका दिया, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह सोनाली बेंद्रे की ख़ुद के प्रति लापरवाही भी थी. सोनाली बेंद्रे को कुछ समय से शरीर में दर्द की शिकायत हो रही थी. लेकिन उन्होंने भी आम महिलाओं की तरह ख़ुद के प्रति लापरवाही के चलते इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. जब दर्द ज़्यादा बढ़ने लगा और डॉक्टर को दिखाया, तब सोनाली बेंद्रे का कैंसर एडवांस स्टेज तक पहुंच गया था. जब सोनाली बेंद्रे जैसी एक्ट्रेस अपनी सेहत के प्रति इतनी लापरवाह हो सकती हैं, तो आम महिलाओं की स्थिति का बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
क्या करें?
जिस तरह आप अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की सेहत का ध्यान रखती हैं, उनकी हर छोटी-बड़ी तकलीफ़ में उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ख़ास ध्यान रखें. शरीर में कोई भी असामान्यता या दर्द होने पर तुरंत घरवालों को इसके बारे में बताएं और उनके साथ डॉक्टर के पास जाएं.

अपने शौक़ के लिए समय न निकालना
महिलाएं अपने शौक़ और ख़ुशियों को हमेशा आख़िरी पायदान पर रखती हैं. घर-परिवार की तमाम ज़िम्मेदारियों के बाद यदि टाइम मिला, तो ही वो अपने शौक़ के बारे में सोचती हैं और ऐसा बहुत कम ही हो पाता है. महिलाएं पूरी ज़िंदगी अपने परिवार के लिए खटती रहती हैं, लेकिन उनके शौक़ अक्सर अधूरे रह जाते हैं. इसका असर उनकी पर्सनैलिटी, उनके आत्मविश्‍वास और उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब महिलाएं अपने शौक़ पूरे नहीं कर पातीं, तो उसकी खीझ उनके व्यवहार में झलकने लगती है. ऐसी स्थिति में महिलाएं या तो बहुत चिड़चिड़ी या मुखर हो जाती हैं या फिर अपनी भावनाओं को दबाने लगती हैं. ये दोनों ही स्थितियां उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
क्या करें?
घर-परिवार, बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपने लिए भी अलग से व़क्त निकालिए. उस समय आप अपने शौक पूरे कीजिए, जैसे- संगीत, पेंटिंग आदि. ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करेंगी और ख़ुश रहने लगेंगी.

घर के कामों के लिए परिवार की मदद न लेना
हमारे देश में घर के काम स़िर्फ महिलाओं के हिस्से ही आते हैं. भले ही वो वर्किंग हों, पति के बराबर कमाती हो, फिर भी घर के काम पुरुष नहीं करते. कई घरों में पुरुष घर के कामों में महिलाओं का हाथ बंटाना भी चाहते हैं, लेकिन महिलाएं ख़ुद उन्हें मना कर देती हैं. उन्हें लगता है कि उनके पति यदि घर का काम करेंगे, तो लोग क्या कहेंगे. ऐसी स्थिति में घर-बाहर दोनों जगहों की ज़िम्मेदारी निभाते हुए महिलाएं इतनी थक जाती हैं कि इससे उनका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. उनका व्यवहार रूखा होने लगता है, घर का माहौल बिगड़ जाता है, वो बात-बात पर चिढ़ने लगती हैं.
क्या करें?
आप घर के सभी काम अकेले नहीं कर सकतीं, इसलिए घर के सभी सदस्यों से थोड़ी-थोड़ी मदद लीजिए और अपनी ज़िम्मेदारी कम कीजिए. इस तरह घर का सारा काम भी हो जाएगा और आपके काम का बोझ भी हल्का हो जाएगा.

Healthy Habits

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छोटी-छोटी बात के लिए पति पर निर्भर रहना
भारतीय महिलाएं अपने पति पर इस कदर निर्भर रहती हैं कि बैंक से लेकर, बच्चों के स्कूल, घर के सामान तक ख़रीदने जैसे कामों के लिए पति का ही इंतज़ार करती हैं. पढ़ी-लिखी वर्किंग महिलाएं ऑफिस में तो सारे काम कर लेती हैं, लेकिन घर के लिए कोई भी ़फैसला लेते समय उन्हें पति की सहायता चाहिए होती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे देश में हमेशा से सारे अधिकार पुरुषों को ही दिए गए हैं, ऐसे में महिलाएं कहीं न कहीं ये मान लेती हैं कि किचन के बाहर के काम उनके बस की बात नहीं है. ख़ासकर पेपरवर्क के मामले में महिलाएं हमेशा पति पर ही निर्भर रहती हैं.
क्या करें?
आपका छोटे-छोटे कामों के लिए पति पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, इससे आपके पति को चिढ़ हो सकती है. जो काम आप पति के बिना कर सकती हैं, उन्हें करने की शुरुआत करें. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपके पति को राहत महसूस होगी.

अपने खानपान पर ध्यान न देना
हमारे देश की अधिकतर महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का अपने खानपान पर ध्यान न देना. गरीब घर की महिलाएं ही नहीं, अमीर परिवार की महिलाएं भी एनीमिया से ग्रस्त पाई जाती हैं. हमारे देश में महिलाओं को ये बचपन से सिखाया जाता है कि उन्हें पूरे परिवार को खिलाने के बाद ही भोजन करना चाहिए, तभी वो कुशल गृहिणी कहलाई जाएंगी. माता-पिता भी बेटे के खानपान पर बेटी से ज़्यादा ध्यान देते हैं. अपनी मां को ऐसा करते देख बेटी भी अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो जाती है. अगर परिवार को खाना खिलाने के बाद भोजन नहीं बचा, तो महिलाएं अपने लिए और बनाने की बजाय भूखी ही रह जाती हैं. पूरे परिवार को महिलाएं दूध, फल, मेवे आदि नियम से खिलाती हैं, लेकिन अपने लिए ऐसा नियम नहीं बनाती हैं.
क्या करें?
जब तक पति ऑफिस से घर नहीं आ जाते, तब तक भोजन न करना समझदारी नहीं है. इससे एक तो आपको एसिडिटी की शिकायत हो जाएगी और आपकी भूख भी मर जाएगी. संपन्न होते हुए भी कुपोषण का शिकार होना स़िर्फ लापरवाही है. आप हैं तो सबकुछ है, आपके बीमार होने से पूरा परिवार बिखर जाता है, इसलिए आपका स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है. जिस तरह आप अपने परिवार का ध्यान रखती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ध्यान रखें.

मन की बात न कहना
महिलाएं घर में सभी को ख़ुश रखने के चक्कर में अक्सर अपनी ख़ुशियों को अनदेखा कर देती हैं. यदि उन्हें किसी की कोई बात बुरी लगती है, तो वो उसे मन में ही रखती हैं. उन्हें लगता है कि पलटकर जवाब देने से घर का माहौल बिगड़ जाएगा, सबकी ख़ुशी के लिए चुप रहना ही सही है. हर बात मन में रखने से कई महिलाओं को डिप्रेशन की शिकायत होने लगती है, उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है, वो अपने में ही सिमट जाती हैं.
क्या करें?
मन की बात मन में रखने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और रिश्तों में भी दूरियां आने लगती हैं. किसी की कोई बात बुरी लगने पर आप उसे जवाब भले ही न दें, लेकिन आपके मन में गांठ रह ही जाती है और आप फिर उस इंसान से पहले जैसी आत्मीयता से व्यवहार नहीं कर पातीं. अत: परिवार में किसी की कोई बात बुरी लगे, तो उसे मन में न रखें, बल्कि उस व्यक्ति से उस बारे में बात करें. ऐसा करने से आपका मन हल्का हो जाएगा और उस व्यक्ति को भी पता चल जाएगा कि उसकी कौन-सी बात आपको बुरी लग सकती है. वो फिर आपसे कभी ऐसी बात नहीं करेगा.

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शर्म-हिचक हो सकती है जानलेवा
महिलाएं अक्सर वेजाइनल प्रॉब्लम्स, ब्रेस्ट प्रॉब्लम्स आदि के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं, जिसके चलते समस्या गंभीर हो जाती है. महिलाओं की शर्म और हिचक उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए सेहत के मामले में कभी भी शर्म ना करें और शरीर के किसी भी हिस्से में तकलीफ़ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

– कमला बडोनी

क्या होता है जब आप बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा आज़ादी देते हैं, देखें वीडियो:

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय (How To Prevent Miscarriage Naturally- Top 5 Home Remedies)

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय आपको मां बनने का सुख देते हैं. गर्भपात के कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पातीं और उनका मां बनने का सपना अधूरा रह जाता है. गर्भपात के कारण महिलाओं को शारीरिक-मानसिक कष्ट से गुज़रना पड़ता है, इससे बचने के लिए हम आपको बता रहे हैं गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय.

Home Remedies

1) हरी दूब के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल) को पीसकर, उसमें मिश्री व दूध मिलाकर 150-200 ग्राम शरबत के रूप में सुबह-शाम पीने से गर्भपात नहीं होता.
2) गाय का ठंडा किया हुआ दूध व जेठीमधु का काढ़ा बनाकर पिलाएं. साथ-साथ इसी काढ़े को नाभि के नीचे के भाग पर लगाएं. इससे गर्भस्राव की संभावना कम हो जाती है.
3) अशोक की छाल का क्वाथ बनाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम पिलाने से गर्भवती स्त्री के गर्भस्राव की संभावना नहीं रहती.
4) एक पके केले को मथकर, उसमें शहद मिलाकर गर्भवती को खिलाएं. ऐसा करके गर्भपात की संभावना को रोका जा सकता है.
5) पीपल और बड़ी कंटकारी की जड़ पीसकर भैंस के दूध के साथ कुछ दिनों तक लेने से भी गर्भपात नहीं होता.

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गर्भपात रोकने के लिए ये नुस्ख़े भी हैं बहुत काम के

* वंशलोचन, मिश्री, नागकेशर को लेकर बारीक चूर्ण कर लें. इसे 2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खाने से लाभ होता है.
* मूली के बीजों का कपड़छन बारीक चूर्ण और भीमसेनी कपूर को गुलाब के अर्क में मिलाकर गर्भ ठहरने के बाद योनि में कुछ दिनोें तक मलने से बहुत लाभ होता है. अगर किसी स्त्री को बार-बार गर्भस्राव होता है तो उसके लिए यह प्रयोग बहुत ही फ़ायदेमंद है.

गर्भपात रोकने के 5 चमत्कारी घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

मल्टी टास्किंग के १० ख़तरे महिलाओं के लिए हैं हानिकारक (10 Risks of Multitasking Every Woman Must Know)

मल्टी टास्किंग के १० ख़तरे महिलाओं के लिए हानिकारक हैं. मल्टी टास्किंग महिलाओं का ख़ास गुण माना जाता है, लेकिन एक साथ बहुत सारे काम करने से कई बार उनकी हेल्थ, पर्सनल लाइफ, सोशल लाइफ पर बुरा असर पड़ने लगता है. कितनी नुक़सानदायक हो सकती है मल्टी टास्किंग? आइए, जानते हैं.

Risks Of Multitasking

1) मल्टी टास्किंग से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में मल्टी टास्किंग यानी एक साथ कई काम करना ज़रूरी हो गया है, लेकिन ऐसा करना ख़तरनाक भी हो सकता है. महिलाओं के लिए कहा जाता है कि वो बहुत आसानी से मल्टी टास्किंग कर लेती हैं, लेकिन ऐसा करना उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के बहुत नुक़सानदायक हो सकता है.

2) मल्टी टास्किंग से काम की क्वालिटी पर असर पड़ता है
मल्टी टास्किंग का असर सबसे पहले काम की क्वालिटी पर पड़ता है. आप चाहे कितने ही क़ाबिल क्यों न हों, यदि आप एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो आपके काम की क्वालिटी कम होगी हो. मल्टी टास्किंग करते समय आपका ध्यान सभी कामों पर रहता है, जिससे आप किसी भी काम को पूरी लगन से नहीं कर पाते. इससे काम तो पूरा हो जाता है, लेकिन वो उतना अच्छा नहीं हो पाता, जितना आप उसे कर सकते हैं.

3) मल्टी टास्किंग से काम में ग़लतियां अधिक होती हैं
फ्रांस में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग एक समय पर एक से अधिक काम करते हैं, वो अपने काम में अधिक ग़लतियां करते हैं. ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि मल्टी टास्किंग करते समय हम किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाते, जिसके कारण काम में ग़लतियां छूट जाती हैं. कोई इंसान कितना भी अलर्ट क्यों न हो, यदि वो एक समय पर बहुत सारे काम करता है, तो उससे ग़लतियां छूटेंगी ही. कई बार काम में इतनी बड़ी ग़लती छूट जाती है कि बाद में उसे ठीक करना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने पर तनाव बढ़ जाता है, जिसका असर सेहत पर भी पड़ने लगता है.

4) मल्टी टास्किंग से काम की स्पीड (गति) कम हो जाती है
एक साथ बहुत सारे काम करने वाले लोग इस भ्रम में रहते हैं कि ऐसा करके वो समय बचा लेंगे, लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है. जब आप एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो आप किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाते, जिससे आपके काम की स्पीड स्लो हो जाती है. यदि आप एक-एक करके अपने सारे काम निपटाते जाएं, तो आपका काम भी अच्छा होगा और काम की स्पीड भी अच्छी होगी.

5) मल्टी टास्किंग से क्रिएटिविटी कम हो जाती है
जी हां, मल्टी टास्किंग का असर आपकी क्रिएटिविटी पर भी पड़ता है. जब आप एक समय पर एक से अधिक काम करते हैं, तो आपका पूरा ध्यान काम को निपटाने में लगा रहता है. उस समय आप ये नहीं सोच पाते कि इस काम को और रचनात्मक तरी़के से कैसे किया जाए. मल्टी टास्किंग से बहुत सारे काम निपट तो जाते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी काम बेस्ट नहीं हो पाता. साथ ही आपको काम करने की संतुष्टि भी नहीं मिलती.

6) मल्टी टास्किंग से याददाश्त कमज़ोर होने लगती है
जब हम एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, तो चीज़ों को भूलने लगते हैं, जिससे हमारी याददाश्त कमज़ोर होने लगती है. उम्र बढ़ने के साथ ये समस्या तेज़ी से बढ़ने लगती है. महिलाएं एक साथ बहुत सारे कामों की ज़िम्मेदारी ओढ़ तो लेती हैं, लेकिन ऐसा करते समय जब वो चीज़ों को भूलने लगती हैं, तो उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है. इससे उनका स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, उनके रिश्तों में भी तनाव बढ़ने लगता है.

7) मल्टी टास्किंग से तनाव बढ़ जाता है
एक साथ बहुत सारे काम करने से काम पर से फोकस तो बिगड़ता ही है, साथ ही काम समय पर पूरा करने का प्रेशर भी बना रहता है, जिससे तनाव बढ़ जाता है. कैलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार, एक साथ बहुत सारे काम करने से दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं, जिससे तनाव बढ़ जाता है. यही वजह है कि मल्टी टास्किंग करने वाले लोग अक्सर तनाव में रहते हैं.

8) मल्टी टास्किंग से मोटापा बढ़ने लगता है
आपको जानकर अजीब लग सकता है, लेकिन ये सच है. मल्टी टास्किंग करने वाले लोग अक्सर खाते समय भी काम करते रहते हैं, जिससे उन्हें ये पता नहीं चल पाता कि उन्होंने कितना खाना खाया है. इसके अलावा एक साथ अधिक काम करने से तनाव बढ़ता है और तनाव में भूख ज़्यादा लगता है, जिसके कारण व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा खाता है और उसका मोटापा बढ़ने लगता है.

9)  मल्टी टास्किंग का रिश्तों पर भी पड़ता है असर
जो लोग एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, वो अपने काम में इतने बिज़ी रहते हैं कि अपने परिवार व क़रीबी रिश्तों के लिए भी टाइम नहीं निकाल पाते. इससे रिश्तों में तनाव और दूरियां बढ़ने लगती हैं. यही वजह है कि बहुत ज़्यादा काम करने वाले लोगों के लाइफ पार्टनर या परिवार के लोग उनसे ख़ुश नहीं रहते. ऐसे लोग अपनी पर्सनल या सोशल लाइफ के लिए टाइम नहीं निकाल पाते, जिससे उनके रिश्तों में तनाव बढ़ जाता है. ऐसे लोग आगे चलकर अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

10) मल्टी टास्किंग की शिकार वर्किंग वुमन
एसोचैम के अध्ययन के अनुसार, 77% वर्किंग वुमन डिप्रेशन, मोटापा, डायबिटीज़, हार्ट और किडनी डिसीज़, पीठदर्द, हाइपरटेंशन जैसी लाइस्टाइल डिसीज़ की शिकार हैं. इस अध्ययन में 32 से 57 वर्ष की वर्किंग वुमन को शामिल किया गया था. एक्सपर्ट्स के अनुसार, वर्किंग वुमन घर और करियर दोनों जगह प्रेशर झेल रही हैं. करियर में उन्हें डेड लाइन का प्रेशर झेलना पड़ता है और घर में उन पर परिवार व बच्चों की ज़िम्मेदारी निभाने का दबाव रहता है. लगातर तनाव में रहने के कारण महिलाओं के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

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How to Avoid Multi Tasking?

मल्टी टास्किंग से कैसे बचें?
मल्टी टास्किंग के प्रेशर से आप थोड़ी स्मार्टनेस से बच सकते हैं. मल्टी टास्किंग से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय:

* टाइम मैनेजमेंट है बेस्ट उपाय
मल्टी टास्किंग के नुक़सान से बचने का सबसे आसान तरीफ़ा है टाइम मैनेजमेंट. यदि आप अपने सभी काम समय पर करें और हर काम के लिए निश्‍चित समय तय कर लें, तो आपको मल्टी टास्किंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. एक समय पर एक काम करके आप अपने काम की क्वालिटी, स्पीड और क्रिएटिविटी बढ़ा सकते हैं.

* दूसरों की हेल्प लें
महिलाएं अमूमन घर के सारे काम अपने सिर ओढ़ लेती हैं और बाद में काम के प्रेशर में चिढ़ने लगती हैं. इससे बचने के लिए घर के कुछ काम परिवार के अन्य सदस्यों में बांट लें. इससे आपके काम का प्रेशर भी कम हो जाएगा और आपको मदद भी मिल जाएगी.

* स्टेमिना बढ़ाएं
काम का प्रेशर झेलने के लिए स्टेमिना बढ़ाना ज़रूरी है. इसके लिए आप योग, मेडिटेशन, एक्सरसाइज़, डांस या किसी खेल का सहारा ले सकते हैं. फिज़िकल एक्टिविटी से स्टेमिना भी बढ़ता है और फोकस भी, इसलिए दिनभर में कुछ समय इसके लिए ज़रूर निकालें.

* झूठी तारीफ़ से बचें
महिलाओं को अक्सर मल्टी टास्कर, सुपर वुमन आदि का ख़िताब देकर उनसे ज़रूरत से ज़्यादा काम कराया जाता है. यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो ऐसी झूठी तारीफ़ों के झांसे में न आएं. यदि आपके घर या ऑफिस में आपकी तारीफ़ करके आपसे ज़्यादा काम कराया जा रहा है, तो इससे ख़ुश होने के बजाय पहले ये देख लें कि आप उतना काम करने में सक्षम हैं या नहीं. यदि आपको लगता है कि ये काम आपके लिए ज़्यादा है तो साफ़ मना कर दें.

* ना कहना सीखें
कुछ लोगों को इसलिए भी ज़्यादा काम करना पड़ता है, क्योंकि वो किसी को किसी भी काम के लिए ना नहीं कह पाते. ऐसा करना ठीक नहीं है. किसी के काम आना या किसी की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन उसके लिए अपनी सेहत को ख़तरे में डालना समझदारी नहीं है. आप जो काम नहीं कर सकते, उसके लिए ना कहना सीखें.

* अपने लिए व़क्त निकालें
हर व़क्त काम में डूबे रहने वाले लोगों की पर्सनल और सोशल लाइफ अच्छी नहीं रहती. वो लोगों से जल्दी घुल-मिल नहीं पाते, जिससे वो अक्सर अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं. इससे बचने के लिए थोड़ा समय अपने लिए ज़रूर निकालें. इस समय में अपने शौक पूरे करें, परिवार के साथ समय बिताएं, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें, ऐसा करके आपको ज़रूर ख़ुशी मिलेगी.

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स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय (Breast Enhancement: 5 Home Remedies To Increase Breast Size)

Breast Enhancement

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय अपनाकर आप भी अपने स्तनों का आकार बढ़ा(Breast Enhancement) सकती हैं. स्तनों (Breast) के आकार को लेकर महिलाएं बहुत चिंतित रहती हैं. बड़े और सुडौल स्तन महिलाओं की ख़ूबसूरती को बढ़ाते हैं इसलिए महिलाएं अपने स्तनों के आकार को लेकर बहुत कॉन्शियस रहती हैं. महिलाओं के स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने में ये 5 अचूक घरेलू उपाय बहुत लाभदायक हैं.

Breast Enhancement

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक नुस्ख़े:
१) स्तनों के चारों ओर गोलाई में जैतून के तेल से दिन में दो बार, नहाने के पहले व रात में सोने से पहले दस मिनट तक मालिश कीजिए. इससे स्तन विकसित होने लगते हैं.
२) गर्म-शीत सेंक करने से भी उरोज़ पुष्ट होते हैं. पहले 5 मिनट तक गर्म पानी में भीगा कपड़ा, फिर 5 मिनट तक ठंडे पानी में भीगा कपड़ा उरोजों पर रखें.
३) रोज़ाना 3-4 कली लहसुन खाने से स्तनों का ढीलापन दूर होता है और वे दृढ़ बनते हैं.
४) बरगद के पेड़ की लटकती डाली की नरम टहनी तोड़कर उसे छाया में सुखा लें. इसे पानी के साथ पीसकर स्तनों पर लेप करने से लटकते हुए स्तन पुष्ट और कड़े हो जाते हैं.
५) अनार का छिलका पीसकर स्तनों पर लगातार सात दिन तक सोने से पूर्व लगाने से स्तनों का ढीलापन दूर होता है.

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महिलाओं के सौंदर्य का मुख्य आधार है पुष्ट और उन्नत स्तन (Breast). स्त्री का सौंदर्य, आकर्षण और मोहकता उसके सुडौल, स्वस्थ व उभरे हुए स्तनों में ही है. परंतु किन्हीं कारणों से कई युवतियों के स्तनों का आकार बहुत छोटा होता है. उनके स्तनों का वैसा विकास नहीं हो पाता जैसा कि सामान्य स्वस्थ स्त्री का होना चाहिए. यह एक बीमारी है, जिसे स्तन क्षय कहा जाता है. जिन लड़कियों को यह रोग होता है, वे एक तरह की हीनभावना से ग्रस्त हो जाती हैं.

स्तनों (Breast) को बड़ा और सुडौल बनाने 5 अचूक घरेलू उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो:

 

Personal Problems: पैप स्मियर टेस्ट क्यों किया जाता है? (What Do They Check For In A Pap Smear Test?)

पैप स्मियर टेस्ट, Pap Smear Test
मैं 33 वर्षीया कामकाजी महिला हूं और मेरी 7 महीने की एक बच्ची है. कुछ दिनों पहले ही मुझे पता चला कि प्रेग्नेंसी के दौरान अगर मां को थायरॉइड हो, तो वो बच्चे को भी हो सकता है. हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान दवाई लेने के कारण मेरा थायरॉइड नॉर्मल था, पर क्या इसकी संभावना है? कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें.
– सरोजनी भारद्वाज, पटना.

सबसे पहले तो आपको डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि प्रेग्नेंसी में थायरॉइड की शिकायत होना कोई बड़ी बात नहीं. यह किसी तरह का इंफेक्शन नहीं है, जो मां से बच्चे को हो जाएगा. थायरॉइड डिसफंक्शन प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है, पर ज़्यादातर मामलों में डिलीवरी के 6 हफ़्तों के भीतर ही इसका समाधान कर दिया जाता है. इसलिए ज़रूरी है कि आप डिलीवरी के बाद थायरॉइड का लेवल चेक करते रहें. अगर मां को थायरॉइड डिसफंक्शन है, तो इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि भविष्य में यह बच्चे को हो सकता है. आमतौर पर डिलीवरी के बाद नियोनैटोलॉजिस्ट बच्चे के थायरॉइड हार्मोंस लेवल चेक करते हैं, ताकि किसी भी तरह की असामान्यता को तुरंत ठीक किया जा सके.

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पैप स्मियर टेस्ट, Pap Smear Test

 

मैं 26 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. हाल ही में मैंने पैप स्मियर टेस्ट के बारे में सुना. यह क्या है और क्यों किया जाता है?
– वृंदा नलावडे, नागपुर.

पैप स्मियर एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जो सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच के लिए किया जाता है. वैसे हर शादीशुदा महिला को यह टेस्ट साल में एक बार और लगातार तीन सालों तक ज़रूर कराना चाहिए. अगर तीनों सालों की रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो फिर हर तीन साल में एक बार यह टेस्ट कराना चाहिए. इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य सर्विक्स के सेल्स में होनेवाले बदलावों को देखकर कैंसर की संभावना को तुरंत ख़त्म करना है. दरअसल, शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर अचानक से नहीं हो जाता, बल्कि सालों पहले उसके लक्षण दिखाई देते हैं, इसलिए रेग्युलर चेकअप से कैंसर की किसी भी आशंका को दूर किया जा सकता है.

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 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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व्हाइट डिस्चार्ज (श्‍वेत प्रदर) की समस्या के 5 आसान घरेलू उपाय (5 Best Home Remedies To Cure White Discharge)

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व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) यानी स़फेद पानी आने की बीमारी स्त्रियों को होने वाला सामान्य रोग है, जो उन्हें पीड़ादाई स्थिति में पहुंचा देता है. व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) के कई कारण हैं, जैसे- गुप्तांगों की सफ़ाई न करना, ख़ून की कमी, ज़्यादा सेक्स, तेल, मसाले, चटपटे व तीखे पदार्थों का ज़्यादा सेवन, कामुक विचार, वेजाइना में इंफेक्शन, वेजाइना या यूटरस के मुंह पर छाले, पीरियड की विकृति, ज़्यादा संतान होना, मूत्र स्थान में संक्रमण आदि.

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व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) के लक्षण
सफ़ेद पानी आना शुरू होने पर स्त्री को कमज़ोरी महसूस करती है. ख़ून कम होने से चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, भूख न लगना, पेट साफ़ न होना, बार-बार पेशाब, पेट में भारीपन, कमर दर्द, वेजाइना में खुजली आदि लक्षण पाए जाते हैं. पीरियड से पहले या बाद में श्वतप्रदर स़फेद लसदार होता है. इसमें रोगी का चेहरा पीला पड़ जाता है.

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व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) से छुटकारा पाने के आसान घरेलू नुस्ख़े
* रोज़ाना दो-तीन केला खाने से श्वेतप्रदर की समस्या दूर होती है.
* 3 ग्राम आंवले का पाउडर शहद के साथ दिन में तीन बार चाटने से लाभ होता है.
* गूलर का फूल पीसकर और उसमें मिश्री व शहद मिलाकर दो-तीन बार सेवन करने से फ़ायदा मिलता है.
* स़फेद मूसली पाउडर या ईसबगोल को सुबह- शाम शर्बत के साथ पीने से आराम मिलता है.
* हरे आंवले को पीस कर उसे जौ के आटे में मिलाकर उसकी रोटी एक महीने तक खाने से श्वेतप्रदर से आराम मिलता है.
* टमाटर का रोज़ाना सेवन करने से भी फ़ायदा मिलता है.
* फालसे का शर्बत पीने से श्वेत प्रदर में आराम मिलता है.
* कच्ची भिंडी रोज़ सुबह खाने से लाभ होता है.
* मुलहठी 10 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम, जीरा 5 ग्राम, अशोक की छाल 10 ग्राम- इन सभी का चूर्ण बनाकर रख लें. इसमें 3 से 4 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार खाएं.
* कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लें. उसमें समान मात्रा में गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार कुछ दिन तक लेने से आराम मिलता है.
* सिंघाड़ा, गोखरू, बड़ी इलायची, बबूल की गोंद, शक्कर, सेमल की गोंद समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम लें.

व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) की समस्या से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) होने पर इन चीज़ों से परहेज़ करें
* श्वेतप्रदर में स्त्रियों को खाने-पीने में विशेष सावधानी रखनी चाहिए.
* खट्टी-मीठी चीज़ें, तेल-मिर्च, ज़्यादा मसालेदार चीज़ों से परहेज़ करें.
* गुप्तांगों को नियमित साफ़ करें.
* ख़ून की कमी को पूरा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें.
* बंदगोभी, पालक, टमाटर, सिंघाड़ा, गूलर आदि फलों का नियमित सेवन करें.

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Personal Problems: पीरियड्स के पहले बाएं स्तन में कंपन महसूस होती है? (Reasons For Palpitations In Left Breast Before Periods)

Breast, Periods, menstrual cycle
मैं 29 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. पिछले कुछ महीनों से पीरियड्स के पहले मेरे बाएं स्तन में थोड़ी-थोड़ी देर पर कंपन या धकधकी महसूस होती है, पर कुछ देर बाद वह शांत हो जाती है. कहीं मुझे कोई बड़ी प्रॉब्लम तो नहीं?
– राजश्री पांचाल, मुंबई.

पीरियड्स के पहले हार्मोनल बदलावों के कारण छाती में बदलाव नज़र आते हैं. आपने महसूस किया होगा कि पीरियड्स के बाद यह कंपन बंद हो जाती है. आपको किसी गायनाकोलॉजिस्ट को मिलना चाहिए, ताकि अगर इससे आपके स्वास्थ्य पर कोई असर पड़ रहा हो, तो वो ज़रूरी टेस्ट्स व ट्रीटमेंट कर सकें. कंपन की जांच करवानी ज़रूरी है, क्योंकि वो हार्ट या थायरॉइड प्रॉब्लम्स के कारण भी हो सकती है. ऐसे ट्रीटमेंट में डॉक्टर आपको मल्टीविटामिन या फिर इवनिंग प्रिमरोज़ ऑयल सप्लीमेंट दे सकते हैं.

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Breast, Periods, menstrual cycle

मैं 26 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. पिछले कुछ समय से खाना खाने के बाद मेरी नाभि के पास मुझे हल्का-हल्का दर्द महसूस होता है. इस दर्द का क्या कारण हो सकता है? कृपया, मेरी मदद करें.
– कोयल महापात्रा, कसौली.

स्टूडेंट्स अक्सर भागदौड़ व पढ़ाई के कारण अपने खानपान का ठीक से ध्यान नहीं देते. हो सकता है कि आप खाने के बीच में काफ़ी लंबा गैप कर देती हों, या फिर खाना समय से नहीं खातीं या फिर फास्टफूड ज़्यादा खाती हों. आमतौर पर नाभि के आसपास दर्द का सबसे बड़ा कारण एसिडिटी होती है. आपको ध्यान रखना होगा कि आप हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाएं और तले व मसालेदार खाने से बचें. अगर दर्द लगातार बना हुआ है, तो आपको किसी गैस्ट्रोइंटरोलॉजिस्ट को मिलना चाहिए.

यह भी पढ़ें: क्या कंसीव करने की संभावना को जानने के लिए कोई टेस्ट है?

 

 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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Personal Problems: मिसकैरेज के बाद प्रेग्नेंसी के कितने चांसेज़ हैं? (What Are The Chances For Pregnancy After Miscarriage?)

Chances For Pregnancy After Miscarriage
मैं 40 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि मेरे लिए इस उम्र में कौन-से टेस्ट्स करवाने ज़रूरी हैं?
– महक वर्मा, जालंधर.

किसी भी हेल्थ प्रोफेशनल से आप अपना जनरल चेकअप करवा सकती हैं, जिसमें बीपी, पल्स रेट, चेस्ट व हार्ट की जांच के अलावा सिर से पैर तक की जांच की जाती है. इसके साथ ही पैप स्मियर टेस्ट व पेल्विक की जांच भी ज़रूर करवाएं. अगर कुछ डिटेक्ट हुआ, तो आपको सोनोग्राफी भी करानी पड़ सकती है. इसके अलावा साल में एक बार बेसिक एक्ज़ामिनेशन, जैसे- ब्लड टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, लीवर और किडनी प्रोफाइल, चेस्ट एक्स-रे और ईसीजी ज़रूर करवाएं. अगर आप फिट और हेल्दी हैं, फिर भी हर साल आंख और दांत की जांच ज़रूर करवाएं.

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Chances For Pregnancy After Miscarriage

मैं 34 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. 4 साल पहले मेरा मिसकैरेज हो गया था, जिसके बाद से अब तक मैं कंसीव नहीं कर पाई हूं. मेरी प्रेग्नेंसी के कितने चांसेज़ हैं? कृपया, मार्गदर्शन करें.

– राखी सक्सेना, नई दिल्ली.

35 साल की उम्र के बाद महिलाओं में फर्टिलिटी धीरे-धीरे घटने लगती है, जो 40 के बाद बहुत तेज़ी से घटती है. जैसा कि आपने बताया कि 4 साल पहले आपका मिसकैरेज हो चुका है, इसलिए सबसे पहले आपकी जांच करनी होगी. साथ ही आपके पति की फर्टिलिटी चेक करने के लिए उनका सिमेन एनालिसेस टेस्ट कराना होगा. अगर आपके पीरियड्स रेग्युलर हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी ओवरीज़ सही तरी़के से काम कर रही हैं. ऐसे में ट्यूब्स की जांच करनी होगी. कई बार ओवरीज़ और ट्यूब्स नॉर्मल होते हैं, पर बार-बार हो रहे पेल्विक इंफेक्शन के कारण भी कंसीव करने में परेशानी होती है, जिसके लिए लैप्रोस्कोपिक जांच ज़रूरी है. बेहतर होगा कि आप अपने गायनाकोलॉजिस्ट को कंसल्ट कर लें.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं, क्या मुझमें कोई प्रॉब्लम है?

 

 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: क्या 35 के बाद मां बनना रिस्की है? (Does Pregnancy After 35 Has Risks?)

Pregnancy after age 35, second pregnancy after 35
मैं 35 साल की हूं. मेरी शादी देर से हुई है. मैं मां बनना चाहती हूं, लेकिन मैंने सुना है कि 35 के बाद मां बनना रिस्की होता है और बच्चे सुंदर, स्वस्थ होने की पूरी गारंटी नहीं होती. क्या ये सच है. मैं क्या करूं?

ये सच है कि 30 की उम्र के बाद मां बनना थोड़ा ख़तरनाक होता है. वैज्ञानिक शोधों से भी यह बात साबित हो चुकी है.  ऐसे में एबनॉर्मल बच्चे (जैसे अपंग या विकलांग बच्चे) होने की संभावना बढ़ जाती है. पर ये ज़रूरी नहीं कि एबनॉर्मल बच्चा ही पैदा हो. आप जेनेटिक काउंसलिंग करवा सकती हैं. वैसे बता दूं कि मां बनने की सही उम्र 30- 35 है.

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

Pregnancy after age 35, second pregnancy after 35

 

मैं 20 साल की हूं. मेरी समस्या यह है कि अन्य लड़कियों की तुलना में मेरे स्तन बहुत छोटे हैं. मैंने कई ऐसे विज्ञापन पढ़े हैं, जो बिना किसी सर्जरी के स्तन का आकार बढ़ाने का दावा करते हैं. मेरी जल्दी ही शादी होनेवाली है. मैं उन इलाजों और उनके साइड इ़फेक्ट्स के बारे में जानना चाहती हूं.

ये सच है कि ब्रेस्ट एनलार्जमेंट के लिए आए दिन विज्ञापन प्रकाशित होते रहते हैं, लेकिन उनकी सच्चाई के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. अगर आप चाहें तो एक्सरसाइज़ करके अपने स्तनों का आकार बढ़ा सकती हैं. इसके लिए आप जिम ज्वाइन कर सकती हैं और इंस्ट्रक्टर को अपना उद्ददेश्य बता दें. इसके अलावा आप गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. ये न सिर्फ़ स्तनों का आकार बढ़ाएंगी, बल्कि अनचाहे गर्भ से भी सुरक्षित रखेंगी. वैसे सबसे अच्छा तरीका है-ब्रेस्ट इम्प्लांट, जिसमें 40,000 से 80,000 रुपए ख़र्च आता है. वैसे मेरा मानना है कि ये सब दिमागी फ़ितूर है. अगर आप अपने शरीर के बारे में पॉज़िटिव सोच रखें तो ब्रेस्ट का साइज़ कोई मायने नहीं रखता.

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 डॉ. राजश्री कुमार
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Personal Problems: क्या प्रेग्नेंसी में ब्लडप्रेशर की दवा लेना सेफ है? (Is It Safe To Have Blood Pressure Medicine During Pregnancy?)

Safe, Blood Pressure. Medicine During Pregnancy
मेरी नौ महीने की बेटी है, जिसे मैं ब्रेस्ट फीडिंग करती हूं. मेरी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आई है और सोनोग्राफी में 5 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी का पता चला है. मेरे डॉक्टर ने मुझे सर्जिकल एबॉर्शन की बजाय मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है. क्या यह सेफ और इफेक्टिव है?
– महिमा झा, हिसार.

स्टडीज़ में यह बात साबित हो चुकी है कि मेडिकल एबॉर्शन सेफ और इफेक्टिव तरीक़ा है. इसमें दो गोलियां दी जाती हैं. सर्जिकल प्रोसीजर भले ही कितना भी छोटा हो, फिर भी उसमें एनीस्थिसिया दिया जाता है और प्रोसीजर में कॉम्प्लीकेशंस की संभावना भी बनी रहती है, क्योंकि आपके डॉक्टर ने आपको मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है, तो उन्होंने इसके बारे में आपको पूरी जानकारी भी दी होगी. इसलिए बेफिक्र रहें. ये बिल्कुल सेफ है.

 Blood Pressure Medicine During Pregnancy
मैं पहली बार मां बनी हूं और मेरी 8 महीने की प्रेग्नेंसी है. डॉक्टर ने कहा है कि मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, जिसे कंट्रोल करने के लिए मुझे दवा लेनी होगी. कहीं ये दवाएं मेरे बच्चे को कोई नुक़सान तो नहीं पहुंचाएंगी? मुझे क्या करना चाहिए?
– अमृता जैन, राजकोट.

पहली बार मां बननेवाली बहुत-सी महिलाओं को यह समस्या होती है, जिसे प्रेग्नेंसी के कारण होनेवाला हाइपरटेंशन कहते हैं. अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल न किया गया, तो यह आपके और आपके बच्चे की सेहत को नुक़सान पहुंचा सकता है. ज़्यादातर एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं टेस्टेड ही होती हैं, इसलिए इफेक्टिव और बच्चों के लिए सेफ हैं. अगर आपके डॉक्टर ने आपको इसकी सलाह दी है, तो वैसा ही करें.

 

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 डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होता है (Possible Reasons For Painful Periods)

Reasons For Painful Periods
मैं 24 वर्षीया अविवाहित युवती हूं. हर महीने पीरियड्स के दौरान मुझे असहनीय दर्द होता है और मेरी रूटीन एकदम से बिगड़ जाती है. कृपया, कोई उचित मार्गदर्शन करें.
– नूपुर सेन, दिल्ली.

पीरियड्स के शुरुआती दिनों में दर्द नहीं होता, लेकिन कुछ सालों बाद दर्द शुरू हो जाता है. यह ओव्यूलेशन के कारण होता है. पीरियड्स के पहले दिन ज़्यादा दर्द होता है, पर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगता है. आपके दर्द का कारण एंडोमेट्रियोसिस भी हो सकता है. सामान्य एंडोमेट्रियोसिस की स्थिति में दवा से आसानी से इलाज हो जाता है, लेकिन गंभीर एंडोमेट्रियोसिस के मामले में आपको लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ सकती है.

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Reasons For Painful Periods

कई सालों पहले फायब्रॉइड्स के कारण मुझे अपना यूटरस निकलवाना पड़ा था. अब जब भी खांसती हूं या किसी काम के लिए ज़ोर लगाती हूं, तो वेजाइना बाहर की तरफ़ आ जाता है. मुझे क्या करना चाहिए?
 – रचना जाधव, पुणे.

आपके द्वारा बताए गए लक्षणों से लगता है कि आपको वॉल्ट प्रोलैप्स है. यूटरस निकलवाने के बाद कभी-कभी इस तरह की समस्या सामने आ जाती है. इसके लिए आपको वेजाइनल या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ेगी. इस विषय में अधिक जानकारी के लिए जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

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डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या पति का सीमेन टेस्ट करवाना ज़रूरी है? (How Important Is Semen (Sperm Count) Test?)

How Important Is Semen Sperm Count Test
मैं 25 वर्षीया महिला हूं और शादी के 4 साल बाद भी कंसीव नहीं कर पाई हूं. मेरी सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, पर पति का सीमेन टेस्ट नहीं हुआ है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें.
– मीनाक्षी यादव, वाराणसी.

यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कंसीव न कर पाने के 1/3 मामलों में कारण पुरुषों से जुड़े होते हैं. इसके लिए ज़रूरी है कि आपके पति किसी तरह की एंटीबायोटिक्स न ले रहे हों और उन्हें बुख़ार न हो. टेस्ट के 3-4 दिन पहले से ही शारीरिक संबंध न बनाएं, पर यह भी ध्यान रहे कि कई हफ़्तों का गैप न हो. अगर पति टूर पर थे, तो शारीरिक रिश्ते सामान्य होने पर ही टेस्ट कराएं. सीमेन मास्टरबेशन के ज़रिए लैब द्वारा दी गई शीशी में ही रखें. कभी भी कंडोम में सीमेन इकट्ठा न करें. रिपोर्ट आने पर ही अगला क़दम उठा सकते हैं.

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 How Important Is Semen Sperm Count Test
मैं 48 वर्षीया महिला हूं और ट्रीटमेंट के बावजूद पिछले कई सालों से हेवी ब्लीडिंग से परेशान हूं. डॉक्टर ने मुझे हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह दी है. कृपया, इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में बताएं.
– रेखा वर्मा, कानपुर.

हिस्टेरेक्टॉमी में सर्जरी के ज़रिए यूटरस और सर्विक्स निकाल दी जाती हैं. यह सर्जरी एब्डॉमिनल, वेजाइनल और लैप्रोस्कोपिक तरीक़ों से की जा सकती है. वेजाइनल और लैप्रोस्कोपिक दोनों ही बेहतरीन तरी़के हैं, क्योंकि इनमें रिकवरी तेज़ी से होती है और ज़्यादा ब्लीडिंग भी नहीं होती. कुछ ही हफ़्तों में आप अपनी नॉर्मल लाइफ शुरू कर सकती हैं. सर्जरी के दौरान ओवरीज़ भी निकाल देने से एस्ट्रोजेन की कमी हो जाती है, जिससे मेनोपॉज़ के सभी लक्षण महसूस होते हैं. हालांकि सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको क्या करें, क्या न करें की पूरी लिस्ट देंगे. सर्जरी के बाद आपको हाई फाइबर डायट लेना होगा, ताकि कफ़ या कब्ज़ की शिकायत न हो, वरना आपकी सर्जरी पर इसका असर पड़ेगा.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: एग फ्रीज़िंग की प्रक्रिया में कितना वक्त लगता है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
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