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ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए महिलाएं हर तरह की एक्सरसाइज़ और डायटिंग करने के साथ ही आउटफ़िट से लेकर एक्सेसरीज़ तक ढेरों एक्सपेरिमेंट करती हैं, लेकिन ऐसा करते समय कई बार वो ऐसी गलतियां करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं. आइए, हम आपको सेहत से जुड़ी ऐसी 10 गलतियों के बारे में बताते हैं, जो लगभग सभी महिलाएं करती हैं.

Health Mistakes All Women Make

1) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. दरअसल, हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

2) हैवी हैंडबैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
कैसे बचें इस गलती से?
प्लस साइज़ की बजाय छोटी साइज़ का हैंडबैग यूज़ करें और अगर आप ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

3) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. नतीजतन पिंपल्स की समस्या हो जाती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
पार्टी से आने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप उतारें.

4) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
कैसे बचें इस गलती से?
सेहतमंद बने रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

5) गलत साइज़ की ब्रा पहनना
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन के चांसेस बढ़ जाते हैं. साथ ही स्किन इरीटेशन, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
कैसे बचें इस गलती से?
ब्रा ख़रीदने से पहले अपनी ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

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6) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
कैसे बचें इस गलती से?
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों के साथ हॉलिडे पर चली जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

7) साइज़ ज़ीरो फिगर पाने के लिए डायटिंग
साइज़ ज़ीरो फिगर के प्रति महिलाओं की दीवानगी उन्हें डायटिंग के लिए मजबूर कर रही है, लेकिन ऐसा करते समय वो ये नहीं सोचती कि स्लिम होने की उनकी इस कोशिश का उनकी सेहत पर कितना बुरा असर होता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिसका नतीजा आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, कमज़ोर हड्डियों और लो ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है. इतना ही नहीं, क्रश डायटिंग (जल्दी पतला होने के लिए डायनिंग करना) से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
कैसे बचें इस गलती से?
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छे डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम ़फैट, हाई प्रोटीन व फ़ाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

8) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
कैसे बचें इस गलती से?
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

9) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं ही होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
कैसे बचें इस गलती से?
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

10) ख़ुद की अनदेखी
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
कैसे बचें इस गलती से?
परिवार के साथ ही अपना भी ख़्याल रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. संतुलिट डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

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आज भी ज़्यादातर महिलाएं यूरिन इंफेक्शन के बारे में बात करने से कतराती हैं, लेकिन जब तकलीफ़ बढ़ जाती है, तो कई बार इसके ट्रीटमेंट के लिए उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट तक होना पड़ता है. यूरिन इंफेक्शन का इलाज बहुत आसान है, लेकिन समय पर इलाज न करने से समस्या जटिल हो सकती है, इसलिए इसके इलाज में देर बिल्कुल न करें.

Urinary Tract Infection

 

 

यदि किसी महिला को यूरिन इंफेक्शन हुआ है, तो ज़रूरी नहीं कि वो यूरिन संबंधी शिकायत ही करे. उसे पैरों में दर्द, कमर में दर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है. ऐसे में जब वो डॉक्टर के पास जाती है, तो कई बार डॉक्टर उसे कैल्शियम और विटामिन्स की दवाइयां देते हैं, वो उससे ये नहीं पूछते कि तुम्हारी यूरिन से बदबू तो नहीं आ रही है. ऐसे में जानकारी के अभाव में उसका सही इलाज नहीं हो पाता और समस्या जटिल हो जाती है. महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन कब, कैसे और क्यों होता है, बता रहे हैं कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड फिज़िशियन डॉ. अरुण शाह और डॉ. वसी शेख़.

Urinary Tract Infection

जानें यूटीआई (UTI) के रिस्क फैक्टर्स
* यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक ऐसा इंफेक्शन है, जो यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- किडनी, ब्लैडर, गर्भाशय आदि. लगभग 50% महिलाओं को जीवन में कभी-न-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता ही है, इसलिए महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन के कारण, बचाव और इसके सही इलाज के बारे में जानकारी होनी चाहिए.
* आमतौर पर यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है, लेकिन इसका इलाज यदि समय पर नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है.
* यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या तब और जटिल हो जाती है, जब इसके लक्षण असामान्य होते हैं, जैसे- कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि. ऐसी स्थिति में कई बार यूरिन इंफेक्शन का पता नहीं चल पाता और समस्या बढ़ जाती है.

यूटीआई (UTI) के कारण
आमतौर पर यूटीआई का प्रमुख कारण है बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग से मूत्राशय में प्रवेश करना. महिलाओं में यूटीआई के निम्न कारण हैं:
* पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मूत्रमार्ग की लंबाई छोटी होने के कारण उनमें यूटीआई का ख़तरा अधिक रहता है.
* सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं को यूटीआई होने की संभावना ज़्यादा होती है. सेक्स पार्टनर बदलने से भी यूटीआई होने की संभावना बढ़ जाती है.
* शुक्राणुनाशक क्रीम का उपयोग करने से यूटीआई हो सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कई महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन हो जाता है.
* जो लड़कियां पानी कम पीती हैं या पेशाब को रोककर रखती हैं, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
* जिन महिलाओं को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज़ है या जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं रहता, उनका ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.

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Urinary Tract Infection

यूटीआई (UTI) के लक्षण
जब तक यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक सीमित रहता है, तब यूटीआई के ये लक्षण दिखाई देते हैं:
* पेशाब करते समय जलन होना.
* योनि में खुजली होना और बदबू आना.
* बार-बार पेशाब जाना.
* पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना.
* पेशाब में खून आना.
* यूरिन इंफेक्शन के किडनी तक फैल जाने पर ठंड लगना और कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आना, पेटदर्द, थकान, बदनदर्द, मतली, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं.

यूटीआई (UTI) का इलाज
* यूटीआई का इलाज यूरिन और ब्लड टेस्ट के बाद ही किया जा सकता है. उसके बाद इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर इलाज करते हैं.
* महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, यूटीआई का इतिहास देखते हुए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं.
* यदि आपको हल्का बुख़ार है, आप खाने-पीने में सक्षम हैं, तो आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक्स का एक छोटा कोर्स भी पर्याप्त हो सकता है.
* असहनीय पेटदर्द, तेज़ बुख़ार, खाने-पीने में असमर्थता जैसी स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है.
* अच्छा महसूस करने पर भी इलाज बीच में न रोकें, वरना फिर से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* एंटीबायोटिक्स के अलावा बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने के लिए ख़ूब सारा पानी पीएं.

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Urinary Tract Infection
यूटीआई (UTI) से बचाव
जिन महिलाओं को बार-बार यूटीआई की तकलीफ़ होती है, उन्हें इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
* ख़ूब पानी पीएं.
* लंबे समय तक पेशाब न रोकें.
* प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें.
* शौच के समय जननांग की सफ़ाई आगे से पीछे की तरफ़ करें. ऐसा करने से मलद्वार की गंदगी योनि तक नहीं पहुंचती और संक्रमण की संभावना कम रहती है.
* यदि आपको कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो समय-समय पर पेट साफ़ करने की दवा लेते रहें.
* सेक्स से पहले और सेक्स के बाद पेशाब के समय जननांग साफ़ करें.
* सेक्स के समय शुक्राणुनाशक क्रीम के प्रयोग से बचें.
* जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो गया है, उन्हें वेजाइनल एस्ट्रोजन से फ़ायदा हो सकता है.
* यदि आपको बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाता है, तो एहतियात के तौर पर आप डॉक्टर की बताई हुई एंटीबायोटिक्स ले सकती हैं.

महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन, जानने के लिए देखें वीडियो:

महिलाओं में उम्र के अनुसार यूरिन इंफेक्शन
महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन कभी भी हो सकता है, लेकिन हर उम्र में इसके कारण और संकेत अलग-अलग होते हैं.
* पांच साल तक की बच्ची यदि पेशाब रोककर रखती है, तो उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में यदि वो बिना सर्दी-ज़ुकाम के बार-बार बीमार पड़ती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.
* पांच से दस साल की लड़की की पैंटी के रंग में यदि बदलाव नज़र आए, यदि उसकी टीचर शिकायत करे कि वो बार-बार पेशाब जाती है, वो रात में बार-बार पेशाब जाने के लिए उठती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं. ऐसे में उस लड़की को बुख़ार हो, ये ज़रूरी नहीं.
* प्यूबर्टी पीरियड में जब लड़की को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो हाइजीन के अभाव में उसे यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. इस समय यूरिन इंफेक्शन के संकेत होते हैं- व्हाइट डिस्चार्ज, खुजली, पैंटी और वेजाइनल एरिया से बदबू आना.
* शादीशुदा महिलाओं में शादी के छह महीने से लेकर एक साल तक यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, इसे हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं. इस समय तक महिला के शरीर को बाहरी ऑर्गन की आदत नहीं होती, इसलिए सेक्स के दौरान उनका ब्लड फ्लो बढ़ सकता है. हाइजीन के अभाव में भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है.
* प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद हाइजीन के अभाव में अक्सर महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन हो जाता है. प्रेग्नेंसी के समय यूरिन इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ सकता है.
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के अभाव में महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है. इस समय कई महिलाओं को डायबिटीज़ हो जाता है, जिसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
* जिन महिलाओं को डायबिटीज़ या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा होती है.

डॉक्टर से न छुपाएं सेक्स की बात
सेक्सुअली एक्टिव अविवाहित लड़कियों को यूरिन इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है. ऐसे में जब लड़कियां यूरिन इंफेक्शन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाती हैं और सेक्स की बात छुपाती हैं, तो उनका सही इलाज नहीं हो पाता और उनकी हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है. अत: जो लड़कियां सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें डॉक्टर से ये बात नहीं छुपानी चाहिए और अपना सही उपचार कराना चाहिए.
– कमला बडोनी

मेट्रो सिटीज़ में जहां महिलाओं (Women) को काम के सिलसिले में देर रात तक घर से बाहर रहना पड़ता है. ऐसे में उनकी सुरक्षा एक अहम् मुद्दा है. महिलाओं के साथ होनेवाले दुर्व्यवहार, यौन शोषण और बलात्कार जैसे अपराधों की ब़ढ़ती दर को देखते हुए महिला सुरक्षा चिंता का मुख्य विषय बनता जा रहा है. हालांकि सरकार की ओर से इस दिशा में कठोर क़दम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इनके अलावा कुछ सेफ्टी ऐप्स (Safety Apps) भी हैं, जो उन्हें सुरक्षित रहने में मदद करेंगे.

 

  1. सेफ्टीपिन (Safetipin)

महिला सुरक्षा पर बनाए गए अनगिनत ऐप्स में से सबसे बेहतरीन ऐप है सेफ्टीपिन, जिसे ऑपरेट करना बहुत आसान है. इस ऐप की ख़ासियत है कि यह ऐप यूज़र (उपयोगकर्ता) के जीपीएस लोकेशन को लगातार ट्रैक करता है. आपातकाल के दौरान यूज़र को आपातकालीन नंबर पर वन-टच अलर्ट मैसेज देता है, ताकि कोई अनहोनी होने से पहले ही यूज़र सावधान हो जाए. यह ऐप संकट में यूज़र को आसपास के सुरक्षित स्थानों के बारे में अवगत कराता है. अन्य महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यूज़र इस ऐप के ज़रिए सुरक्षित व असुरक्षित स्थानों को पिन कर सकती है. यह ऐप केवल हिंदी या अंग्रेज़ी में ही नहीं, बल्कि स्पैनिश में भी उपलब्ध है.

  1. आयएम शक्ति सेफ्टी ऐप (I’m Shakti Safety App)

इस ऐप की विशेषता है कि आपातकालीन स्थितियों में पावर बटन को 2 सेकंड में 5 बार दबान सेे रजिस्टर्ड नंबर पर मैसेज ऑटोमेटिकली चला जाता है यानी कि इस ऐप के माध्यम से यूज़र संकट की स्थिति में किसी विशेष व्यक्ति को इमर्जेंसी मैसेज भेज सकती है. इसमें लोकेशन डिटेल भी होती है. यदि मोबाइल का जीपीएस ऑन नहीं होगा, तो यह ऐप नज़दीकी सेल फोन टॉवर की लोकेशन को मैसेज भेज देता है.

  1. शेक2सेफ्टी (Shake2Safety)

यह ऐप टॉप 10 वुमेन सेफ्टी ऐप्स में से एक है, जिसे महिलाओं के लिए गंभीर परिस्थितियोें में सहायता प्राप्त करने के लिए बनाया गया है. इस ऐप की ख़ासियत है कि यूज़र फोन को हिलाकर (शेक) या पावर बटन को चार बार दबाकर अपने परिवार और मित्रों को संदेश भेज सकती है. फोन को शेक करने के ऑप्शन को यूज़र कभी भी एक्टिवेट और डीएक्टिवेट कर सकती है. ऐसी स्थिति में जहां यूज़र स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने में असमर्थ है, वहां पर यह ऐप बहुत फ़ायदेमंद है, क्योंकि इमर्जेंसी की स्थिति में ऐप के द्वारा इमर्जेंसी संदेश भेजना बहुत आसान है.

  1. निर्भया: बी फीयरलेस ऐप (Nirbhaya: Be Fearless App)

वर्ष 2012 में हुए निर्भया बलात्कार मामले के बाद महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्भया ऐप बनाया गया. इस ऐप के ज़रिए महिला संकट की स्थिति में सेट कॉन्टैक्ट नंबर पर कॉल या मैसेज भेज सकती है. इसके लिए महिला को एसओएस यानी सेव आवर सोल्स (डर्रींश र्ेीी र्डेीश्री) टाइप करना होता है. घबराहट या जल्दबाज़ी में अगर फोन लॉक हो जाए, तो इमर्जेंसी मैसेज भेजने के लिए मोबाइल को हिलाना होता है. एसओएस नंबर के सेट होने पर अपने आप मैसेज सेंट हो जाता है. यह ऐप यूज़र को असुरक्षित स्थानों के बारे में नोटिफिकेशन भी देता है.

  1. सर्कल ऑफ 6 (Circle of 6 App)

महिला सुरक्षा के हिसाब से यह ऐप बहुत उपयोगी है. इस ऐप में यूज़र को अलग-अलग नोटिफिकेशन्स आते हैं, जिनकी मदद से यूज़र अपने पहचान के सर्कल (नज़दीकी लोगों) को अलर्ट कर सकता है. इस ऐप में महिला हेल्पलाइन, वुमेन राइड डेवोकेसी और इमर्जेंसी नंबर दिए रहते हैं. इन नंबर्स पर एक क्लिक करके यूज़र महिला अपने सर्कल के लोगों को कॉल कर सकती है. इसे ऑपरेट करना बेहद आसान है और इच्छानुसार यूज़र्स अपने सर्कल के लोगों में बदलाव कर सकता है. इस ऐप को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपयोग किया जा सकता है.

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  1. बीसेफ (bSafe)

महिलाओं की सुरक्षा के प्रति आश्‍वस्त रहने के लिए यह ऐप एक चैनल का काम करता है. यह ऐप वुमेन यूज़र की लाइव लोकेशन को

जानने में उसके परिवार, गार्जियन और दोस्तों की मदद करता है. यूज़र आपातकालीन स्थितियों में एसओएस मैसेज फीचर का लाभ उठा सकता है. यह फीचर सभी इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट को जीपीएस लोकेशन के साथ संदेश भेजता है.

  1. स्मार्ट24×7 (Smart (24×7)

स्मार्ट24×7 की मदद से महिलाएं संदिग्ध परिस्थितियों में एसओएस मैसेज को चुनिंदा लोगों को भेज सकती हैं. इस ऐप में संदिग्ध परिस्थितियों के लिए एक पैनिक बटन दिया गया है, जब महिलाएं किसी संकट में फंस जाती हैं, तो इस पैनिक बटन को दबाने पर तुरंत मैसेज संपर्क सूत्रों (परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों) को भेज सकती हैं.

  1. वुमेन फाइट बैक ऐप (Women Fight Back app)

सुरक्षा के लिहाज़ से यह ऐप भी महिलाओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. इस ऐप के द्वारा संकट की स्थिति में अपने क़रीबी लोगों, परिवार व मित्रों के पास एसओएस मैसेज भेजकर जीपीएस ट्रैकिंग के ज़रिए इमर्जेंसी कॉल भी किया जा सकता है. इस ऐप में रजिस्टे्रशन और लॉग इन करने के बाद इसमें दिए गए फीचर को अपनी इच्छा से चुनना होता है. इस ऐप में पैनिक बटन भी होता है, जिसका इस्तेमाल एसएमएस भेजने के लिए किया जाता है. जब यह मैसेज रिसीवर के पास पहुंचता है, तो महिला की मदद के लिए चिल्लाने की आवाज़ में बीप करता है.

  1. वुमन्स सिक्योरिटी (Women’s Security)

बहुत सारे सेफ्टी ऐप्स यूज़र्स को इंस्टेंट मैसेज भेजने के लिए इमर्जेंसी नंबर की सुविधा प्रदान करते हैं, जबकि इस ऐप में एक और सेफ्टी फीचर है. इसमें जाकर यूज़र 45 सेकंड्स तक आवाज़ रिकॉर्ड करके आपातकालीन नंबर्स पर संदेश भेज सकता है.

  1. वॉच ओवर मी ऐप (Watch Over Me App)

महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्‍चित करने के लिए ज़रूरी है कि उनके लोकेशन को ट्रैक किया जाए. इस ऐप के द्वारा यूज़र के लोकेशन को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है.

  1. सिक्योर हर ऐप (Secure Her App)

इस ऐप के द्वारा महिला मुश्किल घड़ी में अपने परिवार व क़रीबी लोगों को संदेश भेेज सकती है. महिला को बस दो बार ही ऐप आइकन को टैप करना होता है, फिर एसओएस मैसेज महिला के संपर्क-सूत्रों तक पहुंच जाता है.

  1. स्टे सिक्योर (Stay Secure)

अन्य सेफ्टी ऐप्स की तरह स्टे सिक्योर ऐप में महिला उपयोगकर्ता संकट की स्थिति में आपातकालीन संदेश भेज सकती है. इस ऐप का इस्तेमाल करने के लिए महिला को 5 बार पावर बटन दबाना होता है. इसके बाद इमर्जेंसी नंबर्स पर संदेश पहुंच जाता है. इस ऐप में एसओएस मैसेज की सुविधा भी है, जिसे वह 5 लोगों को भेज सकती है. इंटरनेट न होने पर भी महिला उपयोगकर्ता इस ऐप का इस्तेमाल कर सकती है.

उपरोक्त वुमेन सेफ्टी ऐप्स के अलावा और भी बहुत सारे ऐप्स हैं, जिनका इस्तेमाल वह आपातकालीन स्थितियों में कर सकती हैं.

–     लाइफ360फैमिली लोकेटर ऐप (Life360   Family Life360   Family  Locator App)

–     वुमेन सेफ्टी ऐप (Women safety App)

–     रक्षा वुमेन सेफ्टी अलर्ट (Raksha WomenRaksha Women Safety Alert)

–     विदयू ऐप (VithU App)

–     टैक्सीपिक्सी (TaxiPixi)

–     चिल्ला (Chilla)

 – पूनम नागेंद्र शर्मा

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Safety Apps For Women

Safetipin (सेफ्टीपिन)

बात जब महिलाओं (Women) की सेफ्टी (Safety) और सुरक्षा की हो, तो सेफ्टीपिन एक बेहतरीन ऑप्शन है. महिलाओं की पर्सनल सेफ्टी को ध्यान में रखकर यह ऐप बनाया गया है. इसमें उनकी सुरक्षा से जुड़ी सभी ज़रूरी बातों को शामिल किया गया है. इसमें जीपीएस ट्रैकिंग, इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स, सेफ लोकेशन के डायरेक्शन्स आदि की सुविधा है. इस ऐप में सभी सुरक्षित जगहों को पिन किया गया है, ताकि ज़रूरत के व़क्त आप सुरक्षित स्थान पर पहुंच सको. इसके अलावा यूज़र्स अनसेफ लोकेशन्स को भी पिन कर सकते हैं, ताकि बाकी के लोग सतर्क रहें. यह ऐप हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध है.

Raksha – women safety alert (रक्षा- वुमेन सेफ्टी अलर्ट)

यह ऐप भी ख़ासतौर से महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. इस ऐप में एक बटन है, जिसे प्रेस करने से आपके अपनों को आपका लोकेशन मिल जाएगा, इमर्जेंसी के व़क्त आप इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. इस ऐप की एक ख़ास बात और है कि अगर इमर्जेंसी के व़क्त आपका मोबाइल स्विचऑफ हो गया हो, तो भी आप वॉल्यूम बटन को 3 सेकंड तक प्रेस करके रखने पर ऐप अलर्ट भेज देता है. अगर आप नो इंटरनेट एरिया में चली जाएं, तो यह ऐप आपके इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट्स को एसएमएस भेजता है.

Himmat (हिम्मत)

दिल्ली पुलिस का महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह एक और फ्री मोबाइल ऐप है. ऐप को इस्तेमाल करने के लिए यूज़र को दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करना होगा. रजिस्ट्रेशन पूरा होते ही आपको ओटीपी मिलेगी, जिसे फीड करके आप ऐप को इंस्टॉल कर पाएंगी. अगर कभी इमर्जेंसी के हालात बनें, तो आप एसओएस एलर्ट के ज़रिए पुलिस को इतल्ला कर सकती है. जैसे ही आप एसओएस एलर्ट जारी करेंगे, दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में आपकी लोकेशन, ऑडियो और वीडियो अपनेआप पहुंच जाएंगे, जिसकी मदद से पुलिस आपकी लोकेशन पर जलद से जल्द पहुंच जाएगी.

Women safety (वुमन सेफ्टी)

वुमन सेफ्टी के लिए यह एक और उपयोगी ऐप है. बाकी ऐप्स की ही तरह यह भी ज़रूरत के व़क्त आपके बारे में आपके करीबी लोगों को जानकारी देगा. आपको स़िर्फ एक बटन दबाना होगा और आपके लोकेशन की पूरी जानकारी आपके करीबियों के पास पहुंच जाएगी. एसएमएस के साथ-साथ गूगल मैक के ज़रिए आपकी लोकेशन का लिंक भी आपके आपनों के पास पहुंच जाएगा. आपके मोबाइल का फ्रंट कैमरा आपका सेफ्टी डिवाइस बन जाता है, यह पिक्चर्स क्लिक करके तुरंत सर्वर को भेज देता है. इसमें तीन कलर के बटन्स हैं, आप अपनी सुविधानुसार और हालात की गंभीरता के मुताबिक बटन प्रेस कर सकती हैं.

VithU (विदयू)

यह चैनल वी के प्रोग्राम गुमराह द्वारा शुरू किया गया ऐप है. बाकी ऐप्स की तरह इसे भी डाउनलोड करके एक्टिवेट करें. ज़रूरत के व़क्त मदद के लिए एक्टिवेट बटन पर दो बार क्लिक करें. एक्टिवेट होते ही ऐप आपके सेव किए हुए कॉन्टैक्ट्स को ऑटोमैटिकली मदद के लिए मैसेज और लोकेशन भेजना शुरू कर देता है और जब तक स्टॉप न किया जाए, हर दो मिनट में मैसेज भेजता रहता है. इसके अलावा इस ऐप में कई सेफ्टी टिप्स भी दिए गए हैं, जो महिलाओं के लिए काफ़ी उपयोगी सिद्ध होंगे.

– अनीता सिंह

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देश की पहली महिला ब्लैक बेल्ट (ताइक्वांडो) किरण उपाध्या से सीखें सेल्फ डिफेंस की टॉप १० टेक्नीक्स
किरण उपाध्या देश की पहली महिला ब्लैक बेल्ट (ताइक्वांडो) हैं और उनका नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, फरहार अख़्तर, करिश्मा कपूर, संजय दत्त आदि के बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देने वाली किरण उपाध्या से आप भी सीखें सेल्फ डिफेंस की टॉप १० टेक्नीक्स.

 

जानें किरण उपाध्या के बारे में
* देश की पहली महिला ब्लैक बेल्ट (ताइक्वांडो) किरण उपाध्या बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, फरहार अख़्तर, करिश्मा कपूर, संजय दत्त आदि के बच्चों को किरण ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दे रही हैं.
* बॉलीवुड से जुड़े लोगों लिए फिट रहना ज़रूरी होता है, इसलिए बॉलीवुड से जुड़े कई सेलिब्रिटीज़ भी किरण से ट्रेनिंग ले रहे हैं.
* किरण उपाध्या का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है.
* किरण उपाध्या का जन्म मुंबई के एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है.
* किरण की मां हेमलता उपाध्या डॉक्टर और पिता गजेन्द्र इंजीनियर हैं.
* किरण ने 10 वर्ष की उम्र से ही ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था.
* 1984 में किरण देश की पहली महिला ताइक्वांडो ब्लैक बेल्ट होल्डर बनीं.
* किरण ये मानती हैं कि आत्मरक्षा के लिए हर लड़की को मार्शल आर्ट सीखना चाहिए.
* मुंबई ‘किरण ताइक्वांडो ट्रेनिंग अकादमी’ वह स्थान है जहां अनेक सेलेब्रिटीज़ के बच्चे प्रशिक्षित होने के लिए आते हैं.

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Top Self Defense Techniques, Woman Should Know

 

सेल्फ डिफेंस की 10 टेक्नीक्स हर महिला को जाननी ज़रूरी हैं (देखें वीडियो):

* जब कोई आपका बैग छीनने की कोशिश करें
* बैग में रखी चाबी, कंघी, फोन, मैगज़ीन को बनाएं हथियार
* कैसे करें पेपर स्प्रे (मिर्च का स्प्रे, बाज़ार में उपलब्ध) का इस्तेमाल
* जब कोई आपका हाथ पकड़े
* जब कोई आपका गला पकड़े
* जब कोई आपको बलपूर्वक जकड़ ले
* चौकन्ने रहें, तैयार रहें, कॉन्फिडेंट रहें
* जब कोई मोबाइल पर बात करते समय आपको छेड़े
* जब ऑटो/टैक्सी वाला ग़लत रास्ते से ले जाए
* जानें ऑटो/टैक्सी में बैठने का सही तरीक़ा

– कमला बडोनी

तमाम एहतियात और शोर-शराबे के बावजूद महिलाओं के साथ अपराध और यौन शोषण की घटनाएं कम नहीं हो रहीं. लेकिन डर के साथ तो जीया नहीं जा सकता ना, ना ही दुर्घटना होने का इंतज़ार किया जा सकता है. इसलिए बेहतर होगा कि हर महिला अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ख़ुद ले. हमेशा सतर्क रहे और हर स्थिति से लड़ने के लिए तैयार भी.

Women's Self Defence Tips

अलर्ट रहें

  • हमेशा अलर्ट रहें. ये सोचकर लापरवाह न बनी रहें कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
  • अजनबी लोगों पर कभी भरोसा न करें. ऐसे लोगों के साथ ट्रैवल भी न करें. ये आपके लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं.
  • जब भी अकेली हों, सावधान रहें. आपकी बॉडी लैंग्वेज और चाल में भी कॉन्फ़िडेंस होना चाहिए.
  • रात में अकेले बाहर जाना रिस्की है, इसलिए हमेशा ग्रुप में ही बाहर जाएं.
  • शॉर्टकट के चक्कर में सुनसान रास्ते पर जाने से बचें. यहां दुर्घटना होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.
  • अगर रात में लिफ्ट में जाना सेफ नहीं लग रहा, तो बेहतर है सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें.
  • अगर आपको लगे कि कोई आपका पीछा कर रहा है, तो फ़ौरन रास्ता बदल दें. किसी भीड़भाड़वाले रास्ते पर मुड़ जाएं.
  • किसी अजनबी से लिफ्ट लेना भी रिस्की हो सकता है. ऐसा न करें.
  • रास्ते में मोबाइल पर बातें करते हुए या म्यूज़िक सुनते हुए न चलें. आपके आसपास कौन क्या बातें कर रहा है, उसके प्रति अलर्ट रहें.
  • ख़ुद ही अपने को प्रोटेक्ट करें. भीड़ से बचने के लिए अपना बैग, बुक्स या फोल्डर को शील्ड के तौर पर इस्तेमाल करें.
  • ज़्यादातर अपराधी अपराध करने के पहले कुछ दिनों या कुछ महीनों तक अपने टारगेट पर नज़र रखते हैं, ताकि उसका रूटीन जान सकें. इसलिए किसी भी अनहोनी से बचने के लिए बेहतर होगा कि अपना रूटीन थोड़े-थोड़े दिनों में बदलते रहें. स्कूल-कॉलेज जाने का रास्ता हो, जिम-ऑफिस का या फिर शॉपिंग का- हमेशा एक ही रास्ते पर न जाएं. थोड़े-थोड़े दिनों में अपना रूट और टाइम बदलती रहें.
  • कभी-कभी अपने फ्रेंड्स या ग्रुप को भी साथ ले जाएं, ताकि किसी को ये न लगे कि आप अकेली हैं.

अगर अकेले ट्रैवल कर रही हैं

  • अपना ट्रिप एडवांस में ही प्लान कर लें और जहां जा रही हैं, जिस होटल में रुक रही हैं, वहां की सेफ्टी के प्रति पूरी तरह आश्‍वस्त हो जाने के बाद ही ट्रिप फाइनल करें.
  • आजकल कई टूऱिज़्म कंपनियां अकेली महिलाओं के लिए अलग से टूर पैकेज देती हैं, जिसमें उनकी सुरक्षा की एक्स्ट्रा केयर की जाती है. बेहतर होगा कि आप भी ऐसा ही कोई पैकेज लें.
  • ट्रैवलिंग के दौरान किसी अजनबी या सहयात्री से अपना फोन नंबर या कोई और डिटेल शेयर न करें, भले ही आपकी उससे कितनी भी अच्छी दोस्ती क्यों न हो गई हो. ये कई बार रिस्की भी हो सकता है.
  • हमेशा एक्स्ट्रा पैसे साथ में ज़रूर रखें. ये इमर्जेंसी में आपके बहुत काम आएंगे.
  • इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स की एक लिस्ट अपने पास रखें. मोबाइल फोन के अलावा इसे एक या दो जगह और नोट करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप इसका इस्तेमाल कर सकें.
  • बहुत ज़्यादा एडवेंचर के चक्कर में न पड़ें. रात में अकेले अनजान जगह पर घूमने का साहस न दिखाएं. जहां भी घूमना चाहती हैं, दिन में ही घूम लें. आपकी सेफ्टी के लिए ये ज़रूरी है.

ऑफिस से लेट नाइट निकल रही हों

  • अगर कोई पिकअप करने आ रहा है या आपने कोई गाड़ी बुक की है, तो उसके पहुंचने तक इनडोर ही इंतज़ार करें. ऑफिस गेट से बाहर इंतज़ार न करें.
  • सिक्योरिटी गार्ड से कहें कि वो सारी लाइट्स ऑन ही रखे.
  • अगर कोई घूरते हुए या संदेहास्पद स्थिति में नज़र आए, तो फ़ौरन एक्शन लें. पर्स में पेपर स्प्रे भी साथ रखें.
  • ऑफिस के किसी कलीग का बर्ताव भी ठीक न लगे, तो चुप बैठने की ग़लती न करें. तुरंत उसकी शिकायत टॉप ऑथोरिटीज़ से करें. ऐसा करके आप दूसरी महिलाओं की सेफ्टी भी सुनिश्‍चित कर सकेंगी.

रात में अकेले टैक्सी या ऑटो से सफ़र कर रही हों

  • सबसे पहले परिवार के किसी सदस्य या फ्रेंड को बता दें कि आप कहां जा रही हैं और कब तक लौटेंगी.
  • गाड़ी में बैठने से पहले ही टैक्सी ड्राइवर और टैक्सी के नंबर प्लेट की फोटो क्लिक कर लेें और उसे परिवार या फ्रेंड को भेज दें. ध्यान रखें कि ड्राइवर को पता चलना चाहिए कि आप ऐसा कर रही हैं.
  • फोन पर ज़ोर से बात करते हुए बताएं कि आप कहां पहुंची हैं, कैसे ट्रैवल कर रही हैं आदि. इससे ड्राइवर आपको किसी भी तरह का कोई नुक़सान पहुंचाने की हिम्मत नहीं करेगा.
  • जिस रास्ते से परिचित हों, ड्राइवर से वही रूट अपनाने को कहें. किसी शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें. अगर आपको रास्ता नहीं पता है तो किसी ऐप की सहायता लें. जीपीएस ऑन रखें. ये आपको एकदम सही रूट की ओर गाइड करेगा.

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अगर अकेली रहती हों

कभी करियर की चाह, तो कभी पढ़ाई के लिए कई बार अकेले रहना मजबूरी बन जाता है. ऐसी स्थिति में बड़ी चुनौती है अपनी सेफ्टी यानी आत्मरक्षा. ये उतना मुश्किल भी नहीं बशर्ते आप कुछ एहतियात बरतें.

  • अकेली रहने के लिए सबसे पहले तो जिस एरिया में घर लेने जा रही हैं या रह रही हैं, उसका सुरक्षित होना ज़रूरी है. अच्छी तरह तहक़ीक़ात करने के बाद ही घर फाइनल करें.
  • ये भी सुनिश्‍चित कर लें कि आपकी सोसाइटी द्वारा अपॉइंट किए गए सिक्योरिटी गार्ड्स का बैकग्राउंड वगैरह चेक करने के बाद ही उन्हें अपॉइंट किया गया है या आपकी सोसाइटी ने लाइसेंस्ड सिक्योरिटी सर्विस की ही सेवा ली है.
  • घर के कामों के लिए मेड रखते समय उसकी भी ठीक से जांच-पड़ताल कर लें और उससे संबंधित सारी जानकारी पुलिस में रजिस्टर कर दें.
  • सेफ्टी डोर ज़रूर लगवाएं.
  • किसी अजनबी को घर में न आने दें, ख़ासकर तब जब आप घर पर अकेली हों.
  • पड़ोसियों से मधुर संबंध बनाकर रखें. कुछ इमर्जेंसी पड़ने पर सबसे पहले पड़ोसी ही सहायता के लिए पहुंचते हैं.
  • सोसाइटी में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं. इसमें थोड़ा ख़र्च ज़रूर लगेगा, लेकिन आपकी सेफ्टी के लिए ये ज़रूरी है.

सीखें सेल्फ डिफेंस

  • सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के कुछ तरी़के सीख लें.
  • किसी हमले की हालत में अटैकर की आंखों में उंगलियों से वार करें.
  • हथेली का कप बनाकर कानों पर मारें या उसके घुटनों पर किक करें.
  • कभी किसी के चेहरे पर मुक्के से न मारें. उसके दांतों से आप ख़ुद घायल हो सकती हैं. इसकी बजाय कुहनी का इस्तेमाल करें.
  • इन ट्रिक्स को आज़माएंगी, तो आपको इतना टाइम मिल जाएगा कि आप वहां से बच निकलें.

सहायता के लिए फोन करें

  • मोबाइल फोन हमेशा चार्ज रखें. किसी भी इमर्जेंसी की स्थिति में आप फोन करके सहायता मांग सकती हैं.
  • कुछ इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट को स्पीड डायल में सेव करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर तुरंत फोन कर सकें.
  • 100 नंबर पर कॉल करें. कई हेल्पलाइन भी ख़ास आपकी मदद के लिए बनाए गए हैं. इन्हें अपने मोबाइल में सेव करके रखें.

चुप न रहें, आवाज़ उठाएं

अगर कोई आपको परेशान कर रहा हो, तो चुप न बैठें, न ही ये सोचें कि चुप बैठने या कोई एक्शन न लेने से मामला ख़ुद सुलझ जाएगा. ये भी न सोचें कि आप उसे अकेली हैंडल कर लेंगी. ऐसी स्थिति में अपनी सोसाइटी, टीचर्स, पैरेंट्स, फैमिली, ऑफिस और आवश्यक हो, तो पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराएं. किसी अनहोनी के होने का इंतज़ार न करें. फ़ौरन एक्शन लें.

लें सेल्फ डिफेंस टेस्ट

आप अपनी सुरक्षा को लेकर कितनी जागरूक हैं और मुसीबत के समय हालात से लड़ने के लिए कितनी तैयार,  ये जानने के लिए इस क्विज़ में हिस्सा लें.

  • क्या आप अपने साथ हमेशा पेपर स्प्रे, स्विस नाइफ या कोई और सेल्फ डिफेंस टूल कैरी करती हैं?
  • क्या आपको कोई ऐसा वुमन हेल्पलाइन नंबर याद है या आपके फोन में सेव है, जिसका इमर्जेंसी के समय आप इस्तेमाल कर सकती हैं?
  • क्या आपके मोबाइल फोन में कोई लेटेस्ट सेफ्टी ऐप इंस्टॉल है?
  • आप अपने घर के दरवाज़े का लॉक हमेशा बदलती रहती हैं या आप बेहतर लॉकिंग सिस्टम लगाने की सोच रही हैं?
  • घर में अकेली होने पर आप सेल्समैन, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर या किसी अजनबी को घर में आने की इजाज़त नहीं देतीं.

जानें अपना स्कोर- अगर आपके तीन या उससे ज़्यादा के जवाब ‘हां’ हैं, तो आप अपनी सेफ्टी को लेकर काफ़ी अलर्ट हैं. अगर तीन से कम ‘हां’ है, तो अब भी देरी नहीं हुई है. आपको अपनी सेफ्टी को लेकर एक्स्ट्रा केयरफुल होने की ज़रूरत है और इसकी शुरुआत आपको आज से ही करनी होगी.

क्या आप जानते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज़ से देश का कौन-सा राज्य कितना सुरक्षित और कौन सबसे असुरक्षित है? नहीं, तो हम आपको बताते हैं, ये रिपोर्ट. 1 नवंबर, 2017 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्लान इंडिया की वह रिपोर्ट सार्वजनिक की, जो उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा पर सर्वे के आधार पर बनाई है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज़ से गोवा देश में अव्वल है और दिल्ली, बिहार सबसे बदतर. 

Women Safety Report india

गोवा सबसे सुरक्षित राज्य

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज़ से गोवा देश में अव्वल है. इस बात का पता लगाने के लिए जेंडर वल्नरेबिलिटी इंडेक्स यानी जीवीआई का इस्तेमाल किया गया है. राज्यों को 0 से 1 के बीच में नंबर दिए गए यानी जो राज्य 1 नंबर के क़रीब है, वो सबसे सुरक्षित और जो 0 के क़रीब वो सबसे असुरक्षित. इस रिपोर्ट में गोवा का जीवीआई 0.656 है, जो देश के औसत जीवीआई 0.5314 से ज़्यादा है. लोगों की सुरक्षा के मामले में भी गोवा देश का नंबर 1 राज्य है. सुरक्षा के अलावा इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, जीविका कमाने और गरीबी के भी आंकड़े जारी किए गए. गोवा शिक्षा के मामले में पांचवे, स्वास्थ्य में छठे, जीविका कमाने में छठे और गरीबी के मामले में पांचवे नंबर पर है.

केरल दूसरे नंबर पर

महिलाओं की सुरक्षा के मामले में केरल दूसरे नंबर पर है. इसका जीवीआई 0.634 है. रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि केरल ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफ़ी सुधार करके नई ऊंचाइयां छुई हैं. इसके बाद मिज़ोरम, सिक्किम और मणिपुर का नंबर आता है. यानी ग़ौर करें, तो पूर्वोत्तर भारत के ये राज्य राजधानी दिल्ली और मेट्रो शहरों के मुकाबले महिलाओं के लिए काफ़ी सुरक्षित हैं.

राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित

देश की राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए बेहद असुरक्षित है. 30 राज्यों की इस रिपोर्ट में दिल्ली 28वें नंबर पर है यानी बिहार से स़िर्फ दो पायदान ऊपर. दिल्ली का जीवीआई स्कोर 0.436 है.

बिहार सबसे नीचे

बिहार का नंबर इस लिस्ट में सबसे नीचे है यानी बिहार देश में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य है. इसका जीवीआई स्कोर 0.410 है. सुरक्षा के अलावा लड़कियों की शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले में भी सबसे पीछे हैं. बिहार को सबसे नीचे रखने का कारण कम उम्र में लड़कियों की शादी और उनका मां बनना है. राज्य के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो बिहार में 39 फ़ीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है, जिससे वो जल्द ही मां बन जाती हैं और मां और बच्चे दोनों का ही स्वास्थ्य बहुत कमज़ोर होता है. 15-19 साल की उम्र की 12.2 लड़कियां गर्भवती थीं या मां बन चुकी थीं.

इस लिस्ट में जहां झारखंड 27वें नंबर पर है, वहीं उत्तर प्रदेश 29वें नंबर पर. यानी देखा जाए, तो देश के किसी अन्य राज्यों के मुकाबले, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और झारखंड सबसे असुरक्षित हैं.

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हाल ही में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ रहे आपराधिक मामलों से निपटने और उनकी सुरक्षा के लिए कई मोबाइल और सॉफ्टवेयर कंपनियों ने सेफ्टी ऐप्स लॉन्च किए हैं. सावधानी और सुरक्षा के ज़रिए ही हम किसी भी अनजाने ख़तरे से ख़ुद को बचा सकते हैं. इसीलिए हम अपने पाठकों के लिए ख़ासतौर पर कुछ चुनिंदा सेफ्टी ऐप्स लेकर आए हैं, जिन्हें ऑपरेट करना बेहद आसान है. आइए, जानें ऐसे ही कुछ लेटेस्ट सेफ्टी ऐप्स के बारे में.

 

निर्भया

दिसंबर, 2012 में दिल्ली में दिल दहला देनेवाली घटना के बाद स्मार्टक्लाउड इंफोटेक ने निर्भया नामक सेफ्टी ऐप बनाया. यह एक एन्ड्रॉइड ऐप है यानी जिनके फोन में एंड्रॉइड है, वो ही इसे डाउनलोड कर सकते हैं. इसे आप बड़ी ही आसानी से स्टेप-बाई-स्टेप फॉलो करके डाउनलोड कर सकते हैं. एक बार ऐप आपके मोबाइल में इंस्टॉल हो गया, तो किसी भी आपातकालीन स्थिति में निर्भया शॉर्ट कट हॉट की पर एक बार क्लिक करने मात्र से यह हॉट की में स्टोर कॉन्टैक्ट्स को मदद के लिए मैसेज और आपकी लोकेशन भेज देता है, ताकि जल्द से जल्द आप तक मदद पहुंच सके.

फाइट बैक

यह ऐप जीपीएस यानी ग्लोबल पोज़ीशनिंग सिस्टम के माध्यम से मोबाइल यूज़र को ट्रैक करता है और किसी भी आपातकालीन स्थिति में पैनिक बटन प्रेस करने पर आपकी लोकेशन को आपके कॉन्टैक्ट्स को एसएमएस या ईमेल के ज़रिए भेज देता है. साथ ही यह गूगल मैप पर भी आपकी लोकेशन भेज देता है. इस ऐप के लिए आपका मोबाइल ऑनलाइन मोड पर होना चाहिए. साथ ही इसमें वैलिड सिमकार्ड व जीपीआरएस कनेक्शन होना चाहिए.

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हेल्प अलर्ट

इमर्जेंसी में यह आपके कॉन्टैक्ट्स पर आपकी लोकेशन के साथ-साथ आपकी वॉइस रिकॉर्डिंग भी भेजता है. साथ ही एक क्लिक के साथ यह आपके फेसबुक स्टेटस को मदद के लिए अपडेट कर देता है. अलर्ट मैसेजेस आपके कॉन्टैक्ट्स को तब तक जाते रहेंगे, जब तक कि मोबाइल यूज़र ख़ुद कोड डालकर उसे बंद न कर दे.

गो सुरक्षित

इस ऐप की ख़ास बात यह है कि इसमें आप 10 लोगों को एक साथ मैसेज भेज सकते हैं. मुसीबत के व़क्त पावर बटन को 4 बार दबाने से यह ऐप एक्टीवेट हो जाएगा और आपके कॉन्टैक्ट्स पर एसएमएस भेजने लगेगा. एसएमएस में आपकी लोकेशन के साथ-साथ मैसेज और लिंक के ज़रिए मैप पर एक्ज़ैक्ट लोकेशन भी जाएगा. इसमें मौजूद लाउड अलार्म के ज़रिए आप शोर मचाकर आस-पास से मदद भी मांग सकती हैं.

दामिनी

इस ऐप की ख़ास बात है इसके वीडियोज़. ऐप एक्टीवेट करने पर मोबाइल का कैमरा भी अपने आप ऑन हो जाता है, जो वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर देता है. मैसेज के साथ-साथ यह आपके कॉन्टैक्ट्स को वीडियो लिंक्स भी भेजता रहता है. इस ऐप में आप अपना अलर्ट ग्रुप भी बना सकते हैं.

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स्क्रीम अलार्म

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह औरत की चिल्लाने की ऊंची आवाज़वाला ऐप है. इसके लिए आपको स़िर्फ ऐप का बटन प्रेस करना होगा और किसी के कान के पास लगा देना है. इससे उसका कान डैमेज हो जाएगा. साथ ही इतना शोर होगा कि अगल-बगल के लोगों को इसकी ख़बर हो जाएगी. इसकी मदद से आप किसी भी ख़तरे को ख़ुद से दूर कर सकती हैं.

विद यू

यह चैनल वी के प्रोग्राम गुमराह द्वारा शुरू किया गया ऐप है. बाकी ऐप्स की तरह इसे भी डाउनलोड करके एक्टिवेट करें. ज़रूरत के व़क्त मदद के लिए एक्टिवेट बटन पर दो बार क्लिक करें. एक्टिवेट होते ही ऐप आपके सेव किए हुए कॉन्टैक्ट्स को ऑटोमैटिकली मदद के लिए मैसेज और लोकेशन भेजना शुरू कर देता है और जब तक स्टॉप न किया जाए, हर दो मिनट में मैसेज भेजता रहता है. इसके अलावा इस ऐप में कई सेफ्टी टिप्स भी दिए गए हैं, जो महिलाओं के लिए काफ़ी उपयोगी सिद्ध होंगे.

आईफॉलो

यह ऐप एक्टिवेट करने के बाद अपने प्राइम कॉन्टैक्ट्स को कॉल करने के लिए आपको अपने मोबाइल को स़िर्फ हिलाना होगा और आपका कॉल लग जाएगा. प्राइम कॉन्टैक्ट्स में आप तीन लोगों के नंबर ऐड कर सकती हैं. अगर कभी
किसी मुसीबत में फंस जाएं, तो आपको स़िर्फ अपने मोबाइल को 5 सेकंड के भीतर तीन बार हिलाना होगा और आपके पहले कॉन्टैक्ट को कॉल जाएगा, अगर उन्होंने तुरंत रिस्पॉन्स नहीं दिया, तो ऐप तीनों कॉन्टैक्ट्स पर मैसेज और लोकेशन भेज देगा. इसके साथ ही जैसे-जैसे आपका लोकेशन बदलेगा, हर 10 मीटर पर आपके कॉन्टैक्ट्स को मैसेज जाता रहेगा.

– संतारा सिंह

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