Women’s Day

छोटे पर्दे की सबसे पॉपुलर और महंगी एक्ट्रेस में शुमार दिव्यांका त्रिपाठी अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं. सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो जो भी पोस्ट करती हैं वो देखते ही देखते वायरल हो जाता है. अपनी दिलकश अदायगी और खूबसूरती से दिलों को जीतने वाली दिव्यांका के चाहने वाले आपको लगभग हर घर में मिल जाएंगे. अक्सर अपनी लेटेस्ट तस्वीरों और वीडियो के ज़रिए फैन्स के साथ जुड़ी रहने वाली दिव्यांका त्रिपाठी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कोई वीडियो पोस्ट न करें ऐसा कैसे हो सकता है?

Divyanka Tripathi
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जी हां, ‘इंटरनेशनल वुमन्स डे’ पर दिव्यांका ने अपने पति विवेक दहिया के साथ एक मज़ेदार वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो भूख लगने पर अपने पति के गाल को ही खाती हुई दिख रही हैं. करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिव्यांका ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल से जो वीडियो शेयर किया है, उसमें वो अपने पति के साथ मस्ती के मूड़ में नज़र आ रही हैं. इस वीडियो को फैन्स बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं और यह तेज़ी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को अब तक ढाई लाख के करीब व्यूज़ मिल चुके हैं और फैन्स कमेंट्स के ज़रिए कपल के लिए अपना प्यार ज़ाहिर कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: International Women’s Day 2021: राज कुंद्रा ने वाइफ शिल्पा शेट्टी को खास अंदाज़ में दी महिला दिवस की बधाई, शेयर किया ये वीडियो (Raj Kundra Wishes Wife Shilpa Shetty On International Women’s Day With a Special Video)

Divyanka Tripathi
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इस वीडियो के साथ दिव्यांका ने कैप्शन लिखा है- ‘ईट एनीथिंग यू लव टूडे, नो डायटिंग’ यानी आज आप कुछ भी खा सकते हैं, जिससे आपको प्यार है. कोई परहेज़ नहीं. इसके साथ ही एक्ट्रेस ने लिखा है- ‘हैप्पी इंटरनेशनल वुमन्स डे.’ इस वीडियो में दिव्यांका त्रिपाठी का एक अलग ही अंदाज़ फैन्स को देखने को मिल रहा है, जबकि विवेक दहिया के एक्स्प्रेशन्स ने भी फैन्स को कायल कर दिया है. वीडियो में दिव्यांका भूख लगने पर अपने पति के गाल को खाती हुई नज़र आ रही हैं. दोनों के इस लाजवाब वीडियो पर फैन्स दिल खोलकर अपना प्यार लुटा रहे हैं.

दिव्यांका त्रिपाठी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली एक्ट्रेसेस में से एक हैं, जो अक्सर अपनी फोटोज़ को फैन्स के साथ शेयर करती हैं. इससे पहले दिव्यांका ने ‘वैलेंटाइन डे’ पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें विवेक दहिया को पत्नी दिव्यांका से खास अंदाज़ में प्यार का इज़हार करते हुए देखा गया था. वीडियो रोमांटिक होने के साथ-साथ बेहद क्यूट भी था, क्योंकि विवेक दहिया कुछ बोले बगैर ही इशारों-इशारों में दिव्यांका से प्यार का इज़हार करते दिखे. वीडियो को फैन्स ने काफी पसंद किया था. यह भी पढ़ें: रश्मि देसाई ने इस बोल्ड अंदाज़ में विमेंस डे पर कहा, दुनिया में दो शक्तियों का हमें पता है, पर एक तीसरी शक्ति भी है…! (Women’s Day 2021: Rashmi Desai Shares Bold Post, Says There Are Two Powers We Know Of But There Is A Third Power Too)

दिव्यांका के वर्क फ्रंट की बात करें तो वो इन दिनों ‘क्राइम पेट्रोल’ शो को होस्ट कर रही हैं. इसके अलावा उन्होंने कई फेमस सीरियल्स में काम किया है, जिनमें ‘बनूं मैं तेरी दुल्हन’, ‘ये है मोहब्बतें’, ‘नच बलिए’ और ‘द वॉयस’ शामिल है. इन शोज़ में अपने दमदार अभिनय से दिव्यांका ने लाखों-करोड़ों दिलों को जीता है और घर-घर में अपनी खास पहचान बनाई है. बहरहाल, वुमन्स डे पर शेयर किए गए इस वीडियो को उनके चाहने वाले बेहद पसंद कर रहे हैं.

रश्मि देसाई की फ़ैन फ़ॉलोइंग तो काफ़ी है और उनके फैंस उनकी हर अदा पर जान देते हैं. इन दिनों रश्मि काफ़ी हॉट भी होती जा रही हैं और वो सोशल मीडिया पर काफ़ी ऐक्टिव भी रहती हैं. रश्मि ने एक कवर के फोटो शूट की तस्वीरें भी महिला दिवस के मौक़े पर शेयर की हैं और लिखा है ख़ास कैप्शन. इसी कैप्शन के ज़रिए उन्होंने महिला दिवस की सभी को शुभकामनाएँ भी दी हैं.

Rashmi Desai

रश्मि ने लिखा है कि दुनिया में दो शक्तियों का तो हमें पता है- एक है तलवार और दूसरी है कलम लेकिन एक तीसरी शक्ति भी है और वो है जो इन दोनों से भी मज़बूत और शक्तिशाली है, वो है नारी! सभी प्यारी महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं!

आपकी शालीनता और मज़बूती हीरे की तरह चमकती रहे बिल्कुल आप ही की तरह!

Rashmi Desai

रश्मि की इस पोस्ट को फैंस का बेहद प्यार मिल रहा है और उनके लुक को भी लोग बहुत पसंद कर रहे हैं. रश्मि पिंक स्कर्ट और सेक्सी कोट में काफ़ी बोल्ड भी लग रही हैं.

Rashmi Desai
Rashmi Desai

Photo Courtesy: Instagram (All Photos)

यह भी पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर स्वरा भास्कर का ट्वीट,फैंस ने किया ट्रोल (Swara Bhaskar’s Tweet on the Occasion of International Women’s Day, Fans Troll)

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ख़ास मौके पर रिया चक्रवर्ती ने अपनी मां के लिए एक इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की है. सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद रिया लंबे समय तक सोशल मीडिया से दूर थी. रिया ने अपनी आखिरी पोस्ट पिछले साल अगस्त में पोस्ट की थी. रिया चक्रवर्ती ने इस भावुक पोस्ट में अपनी मां के लिए लिखा ये नोट…

Rhea Chakraborty

सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बढ़ गई थी रिया चक्रवर्ती की मुसीबतें
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद रिया चक्रवर्ती की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं. 14 जून को सुशांत के निधन के बाद उनके परिवार और फैन्स ने एक्टर को न्याय दिलाने की जो मुहिम छेड़ रखी थी, वो अभी तक जारी है. सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद रिया चक्रवर्ती से लंबी पूछताछ की गई. रिया को सोशल मीडिया पर सुशांत के फैन्स के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था. 14 जून साल 2020 को सुशांत सिंह ने अपने बांद्रा के घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद एनसीबी ने इस मामले में रिया चक्रवर्ती समेत कई बड़े सितारों से पूछताछ की थी. साथ ही रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती सहित कई अन्य बड़े सेलिब्रिटीज़ से ड्रग्स मामले में भी पूछताछ की गई और उन्हें हिरासत में भी रखा गया. यह भी बता दें कि कुछ दिन पहले ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक के साथ-साथ करीब 33 लोगों के खिलाफ लगभग 12,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. बॉलीवुड ड्रग्स मामले में अभिनेत्री सारा अली खान, दीपिका पादुकोण जैसे बड़े स्टार्स का नाम भी सामने आया है.

Rhea Chakraborty

अगस्त 2020 में रिया ने शेयर की थी ये पोस्ट
दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी. बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने पिछली पोस्ट अगस्त 2020 में पोस्ट की थी. रिया ने अपनी इस पोस्ट में अपने घर की एक वीडियो शेयर किया था. ये वीडियो उस समय का है जब रिया से सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामलों में पूछताछ की जा रही थी. रिया ने अपने घर के बाहर लगी मीडिया की भीड़ से परेशान होकर यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था और मुंबई पुलिस से अपने परिवार सुरक्षा के लिए मदद मांगी थी.

महिला दिवस के मौके पर रिया चक्रवर्ती ने मां के लिए लिखी ये भावुक पोस्ट
लंबे समय तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद रिया चक्रवर्ती ने महिला दिवस के ख़ास मौके पर अपनी मां के लिए एक भावुक पोस्ट इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. रिया चक्रवर्ती ने अपनी इस पोस्ट में एक फोटो भी शेयर की है, जिसमें उन्होंने अपनी मां का हाथ पकड़ रखा है. इस फोटो को शेयर करते हुए रिया चक्रवर्ती ने लिखा है, ‘हमें महिला दिवस मुबारक हो… मां और मैं… एक साथ हमेशा… मेरी ताकत, मेरा विश्वास, मेरा भाग्य- मेरी मां.’

रिया चक्रवर्ती की इस भावुक पोस्ट के बारे में आपका क्या कहना है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

कोरोना महामारी के दौरान लंबे समय तक काम करना और घर से काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम में महिलाओं को सबसे ज्यादा काम करना पड़ा. उन्हें कामकाजी यानी प्रोफेशनल के साथ-साथ हाउस वाइफ़ और घर पर सबका ख़याल रखने की भूमिका भी निभानी पड़ी. भारत में 80% से ज्यादा कामकाजी महिलाओं पर कोविड-19 के दौरान नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. कामकाजी जीवन को संतुलित करना बेहद मुश्किल हो गया है. भारत के औपचारिक क्षेत्र में महिला कामगारों पर कोविड-19 के प्रभाव से संबंधित एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.

एस्‍पायर फॉर हर और सस्‍टेनेबल एडवांसमेंट ‘वुमेन@वर्क’ रिपोर्ट जारी की है, इसके अनुसार सर्वेक्षण में भाग लेने वाली कामकाजी महिलाओं में 38.5% ने कहा कि घर का काम बढ़ जाने, बच्चों की देखभाल के साथ बुजुर्गों का ख्याल रखने जैसे कामों से उनपर प्रतिकूल असर हुआ. 43.7% ने कहा कि कामकाजी जीवन से संतुलन बनाना सबसे मुश्किल हो गया है.

Women's Day Special

इस रिपोर्ट पर एक वर्चुअल पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया था, जिसमें कई जाने-माने पैनेलिस्ट थे. ये हैं – सुश्री मधुरा दासगुप्ता सिन्हा (एस्‍पायर फॉर हर की संस्थापक और सीईओ), डॉ. नयन मित्रा (सस्‍टेनेबल एडवांसमेंट्स के संस्थापक), सुश्री निष्ठा सत्यम (डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव, यूएन वूमेन) और सुश्री नव्या नवेली नंदा (संस्थापक, प्रोजेक्ट नवेली और सह-संस्थापक तथा सीएमओ आरा हेल्थ). हमिंगबर्ड एडवाइजर्स की सीईओ सुश्री पूर्णिमा शेनॉय ने इसका संचालन किया.

इस रिपोर्ट के अनुसार जो सबसे आम प्रतिक्रिया मिली वह यह कि महामारी के समय उन्हें ज्यादा समय तक ज्यादा परिश्रम के साथ काम करना पड़ा. इस तरह काम और जीवन के बीच संतुलन बिगड़ गया. मिड करियर यानी 16-20 साल काम करने का अनुभव रखनेवाली महिलाओं में 50.4% ने इसका कारण बताया, घर के बढ़े हुए काम के कारण यह बोझ बढ़ा. इनमें बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है.

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रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए एस्पायर फॉर हर की संस्थापक और सीईओ सुश्री मधुरा दासगुप्ता सिन्हा ने कहा, इस महामारी का महिलाओं पर बहुत ही गहरा असर हुआ है और ये अलग-अलग क्षेत्रों में काम करनेवाली महिलाओं ने खुद महसूस किया है. इस रिसर्च से हमें रणनीति में बनाने में काफी मदद मिलेगी, जिससे हम करियर में आगे बढ़ने की चाह रखनेवाली महिलाओं को मानसिक रूप से संबल दे पाएंगे और उनकी मनःस्थिति को बेहतर बना पाएंगे. इस रिसर्च से हमें पांच पॉइंट्स पर बदलाव लाने में सहायता मिली है, इनमें मेनटॉर और रोल मॉडल, सीखने और रीस्किलिंग के मौके, करियर की समीक्षा और मौके तथा मजबूत टीम व सपोर्ट की आवश्यकता शामिल है. ये रिसर्च 800 महिलाओं पर हुआ है, जिसमें मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, भुवनेश्‍वर, रांची, जयपुर, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को शामिल किया गया.

सिुश्री पूर्णिमा शेनॉय, सीईओ – हमिंगबर्ड एडवाइजर्स ने कहा, दुनिया जब कोविड-19 वायरस के प्रभाव से जूझ रही थी तब एक और वायरस था जो सामाजिक संरचनाओं को प्रभावित कर रहा था. दुनिया भर में कामकाजी महिलाएं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं और यह बढ़ती बेरोजगारी के कारण था. रिपोर्ट से पता चलता है कि महामारी के दौरान जेंडर के आधार पर असमानताएं और भेदभाव काफ़ी हावी था. महिलाओं के साथ भेदभाव वाला व्यवहार किए जाने या फिर घरेलू काम की जिम्मेदारी के बंटवारे का अनुपात ठीक नहीं होने से महिलाएं काफ़ी परेशान रहीं.

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विभिन्न प्रोफ़ेशन व क्षेत्रों में पुरुषों-महिलाओं के बीच फ़र्क़ पर भी रिसर्च ने प्रकाश डाला है- कोविड-19 के कारण अपनी नौकरी गंवाने वाली 61.1% महिलाओं ने महसूस किया कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा बुरी स्थिति में हैं, इसके बाद वो महिलाएं हैं जिन्होंने ब्रेक लिया (46.7%), फिर कामकाजी महिलाएं (42.3%) जबकि 35.6% छात्राएं और स्व रोजगार करने वाली 30.3% महिलाएं ऐसा मानती हैं.

स्वरोज़गार वाली महिलाएं बेहद प्रभावित हुईं: रिपोर्ट में कहा गया की स्वरोजगार करने वाली 41.6% महिलाओं ने बताया कि वे कोविड-19 से नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई थीं. कोई नया बिज़नेस मॉडल अपनाने के मामले में सबसे बड़ी समस्या मार्केट में सप्लाई और डिमांड को समझने या अनुमान लगाने में अपर्याप्त जानकारी और आर्थिक संसाधनों की कमी रही है.

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सुश्री नव्या नवेली नंदा, संस्थापक – प्रोजेक्ट नवेली और सह-संस्थापक तथा सीएमओ आरा हेल्थ ने कहा: कोविड महामारी के चलते स्व रोज़गार वाली महिलाओं के लिए कई चुनौतियाँ खड़ी हो गई, वो पूरी तरह से अकेली पड़ गईं, जबकि इसके लिए एक सामूहिक मंच aur प्रयास की आवश्यकता है – एक ऑनलाइन कम्यूनिटी होनी चाहिए जहां अपने अनुभव और स्ट्रगल स्टोरीज़ को शेयर किया जा सके और करियर के लिए संसाधन, सुविधाएं व अन्य तरह की मदद मुहैया कराए जा सकें. उस हिसाब से ये रिसर्च काफ़ी लाभकारी व आंखें खोलनेवाला है.
सस्टेनेबल एडवांसमेंट्स के संस्थापक और रिपोर्ट को लिखनेवाले डॉ. नयन मित्रा, सीएसआर के विशेषज्ञ हैं उनका मानना है कि यह रिपोर्ट भारत में महिलाओं और पुरुषों को सतर्क करने के लिए है. अगर हम ऐसा करते हैं जो हम पिछले 15 वर्षों से करते आए हैं तो देश उच्च शिक्षित, विविध क्षेत्रों में काम करने योग्य शानदार प्रतिभा के इस भंडार को खो देगा और खरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था हाथ से निकल जाएगी.

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– शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाली 50.6% महिलाओं ने महसूस किया कि महामारी के दौरान पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक खराब स्थिति में थीं. कई टीचर्स को ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म की मदद लेनी पड़ी, लेकिन जो इतने टेक्नोसैवी नहीं थे उनके लिए ये जीवन का सबसे मुश्किल काम था. 21.8% महिलाओं ने महसूस किया कि उनपर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और कहा कि उनमें से ज्यादातर (54.1%) को कठिन / लंबे समय तक काम करना पड़ा जबकि 41.8% ने कहा कि उनपर गृहकार्य / बच्चों की देखभाल / बुजुर्गों का ख्याल रखने का अतिरिक्त बोझ था.

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पिछले 15 वर्षों से महिलाओं से संबंधितग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में उनका खराब होता रैंक चिंता का एक बड़ा कारण है, जो महामारी से और बिगड़ा है. ऐसे में ye रिसर्च आंखें खोलनेवाला है जिससे महिलाओं की स्थिति को बेहतर करने की दिशा में कदम ज़रूर बढ़ाया जा सकता है! इंटरनेशनल विमन्स डे पर इतना तो किया और सोचा ही जा सकता है!

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निगाहों से छलके वो क़तरे अब नहीं हैं उसकी पहचान… ख़ामोशी को छोड़ उसने छू लिया है आसमान… पथरीली राहों पर चलना अब लगता है उसे आसान, हौसला और हिम्मत ही है अब उसकी असली पहचान… लोगों ने कहा छोड़ दे यह रास्ता, इससे तेरा क्या वास्ता… उसने कहा, साहस ही मेरा दूसरा नाम, तुमने अब तक पहचाना नहीं मुझे, लेकिन फूलों का आंगन छोड़, मैंने कांटों का लिया है दामन थाम… मुश्किलों से मुझे डर नहीं लगता, अड़चनें मुझे लुभाती हैं… हां औरत हूं मैं और अब हर चुनौती मुझे भाती है…

 

Inspiring Women Achievers

आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपने अस्तित्व की पहचान बना चुकी हैं, ऐसे में वुमन्स डे यानी महिला दिवस के अवसर पर हम भी उनके जश्‍न में शामिल हैं और उन्हें सलाम करते हैं. हमारे देश में भी महिला एचीवर्स की कमी नहीं है, उन्हीं में से कुछ का ज़िक्र हम अपने पन्नों पर कर रहे हैं, लेकिन हमारे दिलों में सभी के लिए प्यार और सम्मान है.

अंशु जमसेंपा

हौसले बुलंद हों, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं. अंशु इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. अंशु दुनिया की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने एक ही सीज़न में दो बार एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ाई की. अंशु ने मात्र 5 दिनों के अंतराल पर ही यह कारनामा कर दिखाया. अरुणाचल प्रदेश की रहनेवाली अंशु दो बच्चों की मां हैं. अंशु के इस वर्ल्ड रिकॉर्ड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दंग हैं और उन्होंने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी थी. अंशु कुल मिलाकर 4 बार माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकी हैं. उम्मीद है, अंशु इसी तरह देश का तिरंगा सबसे ऊंचाई पर फहराती रहेंगी और हमें गौरवान्वित करती रहेंगी.

अनीता कुंडू

बात जब महिला पर्वतारोहियों की ही चल रही है, तो हम अनीता कुंडू को कैसे भूल सकते हैं. अनीता कुंडू पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने चाइना साइड से माउंट एवरेस्ट फतेह किया और देश का सीना गर्व से चौड़ा किया. हरियाणा के हिसार में 29 वर्षीया अनीता सब इंस्पेक्टर हैं और उनकी उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट करके बधाई दी. इसके अलावा अनीता कुंडू चीन और नेपाल दोनों तरफ़ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़नेवाली पहली भारतीय महिला भी बनीं. अनीता ने दो वर्ष पहले भी यह कोशिश की थी, लेकिन भूकंप के कारण मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा. वर्ष 2017 की 11 अप्रैल को अनीता ने फिर यह मिशन शुरू किया. इसी बीच यह ख़बर भी आई कि अनीता से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है, लेकिन 20 अप्रैल को ख़बर मिली कि वो अपनी मंज़िल के क़रीब हैं और अगले ही दिन उन्होंने सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया.

साहिथी पिंगली

बैंगलुरू की इस टीनएजर और 12वीं की छात्रा ने एक अनोखी उपलब्धि हासिल की है. मिल्की वे के एक ग्रह का नाम साहिथी के नाम पर रखा जाएगा. साहिथी ने इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (आईएसईएफ) में गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि हासिल की है. इस छोटी उम्र में इतना बड़ा मुक़ाम हासिल कर साहिथी ने देश का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया. साहिथी ने बैंगलुरू की झीलों के प्रदूषण पर शोध कार्य किया था. साहिथी ने अपने पेपर्स आईएसईएफ कॉम्पटीशन में रखे. यह फेयर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित प्री कॉलेज स्तर का साइंस कॉम्पटीशन माना जाता है. साहिथी ने अपने पेपर्स- ‘एन इनोवेटिव क्राउडसोर्सिंग अप्रोच टु मोनिटरिंग फ्रेश वॉटर बॉडीज़’ फेयर में प्रेज़ेंट किए और उसे गोल्ड मेडल मिला. साहिथी ने एक ऐप डेवलेप किया है और इस रिसर्च में उन तत्वों के बारे में बताया गया है, जो झीलों के प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. पर्यावरण संरक्षण के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और इसी के मद्देनज़र एमआईटी यानी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की लिंकन लैबोरेटरीज़ ने साहिथी के नाम पर एक छोटे ग्रह का नाम रखने का निर्णय लिया.

झूलन गोस्वामी

झूलन का नाम आज बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर है. चंद साल पहले तक महिला क्रिकेटर्स को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी जगह बनाने के बाद और जीत का जज़्बा दिखाने के बाद हर महिला क्रिकेटर सबकी फेवरेट बन चुकी हैं. इन्हीं में से एक नाम झूलन का भी है. झूलन की उपलब्धि बहुत बड़ी है. आज की तारीख़ में वो विश्‍व में सर्वश्रेष्ठ महिला गेंदबाज़ का ख़िताब हासिल कर चुकी हैं. झूलन वनडे में 200 विकेट्स हासिल करनेवाली पहली महिला गेंदबाज़ भी बन गईं. देश को इन पर नाज़ है.

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मिताली राज

झूलन की ही तरह मिताली भी सबकी आंख का तारा बन चुकी हैं. मिताली न स़िर्फ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं, बल्कि एकदिवसीय क्रिकेट में विश्‍व में सर्वाधिक रन बनानेवाली खिलाड़ी भी हैं. 6000 से अधिक रन बनानेवाली वो एकमात्र महिला क्रिकेटर हैं. वो एकमात्र ऐसी खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने एकदिवसीय खेल में लगातार 7 बार हाफ सेंचुरी बनाई. मिताली ही एकमात्र ऐसी क्रिकेटर हैं (पुरुष व महिला दोनों में) जिन्होंने आईसीसी वर्ल्ड कप फाइनल में दो बार भारत का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 2005 के बाद वर्ष 2017 में भी मिताली के प्रतिनिधित्व में भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची. 10 वर्ष की उम्र से ही क्रिकेट खेल रहीं मिताली का जन्म तमिल परिवार में हुआ था और आज पूरे भारत को उन पर नाज़ है.

महिला बाइकर्स ने दिखाए ख़तरनाक स्टंट

इस साल गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2018 की परेड में पुरुषों की बजाय सीमा सुरक्षा बल की महिला बाइकर्स ने अपने जौहर दिखाए. यह पहली बार हुआ और सभी इनके दमखम के आगे नतमस्तक हो गए. बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स ने 350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बाइक्स पर एरोबेटिक्स व अन्य कलाबाज़ियां दिखाकर सबका दिल भी जीत लिया और इस गणतंत्र दिवस को और भी ख़ास बना दिया. उनके हुनर, कौशल और साहस को हम भी सलाम करते हैं.

आईएनएस तारिणी की महिला स्क्वैड

महिला सशक्तिकरण और समुद्र में महिलाओं की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय नौसेना ने दुनिया भ्रमण के लिए ऑल वुमन टीम भेजने का निर्णय लिया था, जिसमें उनका साथी बना आईएनएस तारिणी. यह नौकायन पोत लेटेस्ट सैटलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस है. इस प्रोजेक्ट के लिए छह महिला ऑफिसर्स की टीम चुनी गई है, जिसका नेतृत्व कर रही हैं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी. उनका यह समुद्री विश्‍व भ्रमण इसी वर्ष यानी 2018 मार्च के अंत तक पूरा होने का अनुमान है.

आंचल ठाकुर

स्कीइंग जैसे स्पोर्ट्स में भारत में शायद ही किसी को दिलचस्पी हो, लेकिन आंचल ठाकुर ने इंटरनेशनल स्तर पर स्कीइंग प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर न स़िर्फ इतिहास रच दिया, बल्कि सरकार व लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. आंचल यह मुकाम हासिल करनेवाली पहली भारतीय हैं. आंचल ने एल्पाइन एज्डेर 3200 कप में ब्रॉन्ज़ जीता, जिसका आयोजन स्की इंटरनेशनल फेडरेशन करता है. आंचल ने जीत के बाद ट्वीट किया था कि ‘आख़िर ऐसा कुछ हो गया, जिसकी उम्मीद नहीं थी. मेरा पहला इंटरनेशनल मेडल. हाल ही में तुर्की में ख़त्म हुए फेडरेशन इंटरनेशनल स्की रेस (ऋखड) में मैंने शानदार परफॉर्म किया.’ ज़ाहिर है आंचल की यह उपलब्धि बेहद ख़ास है, क्योंकि विंटर स्पोर्ट्स को हमारे देश में ख़ास तवज्जो नहीं दी जाती. न तो उसका कोई कल्चर है, न ही इतनी सुविधाएं, लेकिन आंचल की जीत ने इस दिशा में भी उम्मीद जगाई है और उम्मीद है आगे और भी ऐसे मेडल्स हमारे देश की बेटियां लाएंगी.

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मानुषी छिल्लर

भारत की मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड 2017 का ख़िताब जीता और एक बार फिर दुनिया ने माना कि भारत है टैलेंट और खूबसूरती के संगम का सबसे बेहतरीन स्रोत. चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में भारत की सुंदरी मानुषी ने ये टाइटल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. मिस वर्ल्ड 2017 ब्यूटी पेजेंट में कुल 118 हसीनाओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानुषी ने बाज़ी मार ली. हरियाणा के सोनीपत की रहनेवाली मानुषी मेडिकल की स्टूडेंट हैं और फाइनल राउंड में मानुषी से जूरी ने ट्रिकी सवाल पूछा था कि किस प्रोफेशन में सबसे ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए, जिसका जवाब मानुषी ने बड़ी ही समझदारी से दिया कि मां को सबसे अधिक सम्मान मिलना चाहिए. मां को सैलरी या कैश की ज़रूरत नहीं, उन्हें सम्मान और प्यार मिलना चाहिए. उनके इस जवाब ने सबका दिल जीत लिया और मिस वर्ल्ड का ख़िताब भारत के नाम हो गया.

भवानी देवी

तलवारबाज़ी एक प्राचीन कला है और उसे मॉडर्नाइज़ करके फेंसिंग खेल के रूप में अब खेला जाता है. भारत की भवानी देवी वाक़ई अपने नाम को सार्थक सिद्ध करके तलवारबाज़ी यानी फेंसिंग में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. भवानी चेन्नई की रहनेवाली हैं और स्कूल के दिनों से ही वो इस खेल में अपना भविष्य तलाश रही थीं. 2017 में आइसलैंड में हुई तलवारबाज़ी की प्रतियोगिता में भवानी ने सीधे गोल्ड पर निशाना साधा और देश को सिर ऊंचा करने का एक और मौक़ा दिया. भवानी नेे तीसरी बार इस चैंपियनशिप में भाग लिया था, लेकिन इस साल उनकी मेहनत रंग लाई. इससे पहले भवानी एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीत चुकी हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिखर पर पहुंचने का सुकून ही अलग होता है.

ख़ास बातचीत…

श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला ने सेलिंग करियर में दिखाया ग़ज़ब का हौसला: जी हां, हम श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला जैसी मरीन इंजीनियर्स की बात कर रहे हैं, जिन्होंने पुरुषों के दख़लवाले क्षेत्र में ख़ुद को साबित किया और एक अलग मुक़ाम हासिल किया. सुनीती ने हमें बताया कि उनके बैच में कुल दो ही महिला स्टूडेंट्स थीं. ऐसे में यह किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि हर किसी की नज़र हम पर ही रहती थी, यहां तक कि हमारे प्रोफेसर्स की भी कि हम कैसा परफॉर्म कर रही हैं, कितनी गंभीर हैं अपने करियर को लेकर आदि.
धीरे-धीरे सबको भरोसा हो गया. फिर बारी आई अगली चुनौती की. शिप पर बोर्ड करते समय भी मुझे हर पल यह साबित करना पड़ता था कि हां, मैं पुरुषों के समान ही परफॉर्म कर सकती हूं, बल्कि उनसे बेहतर हूं. चूंकि मेरे परिवार का बहुत सपोर्ट था, तो मैं हर चुनौती पार कर गई.

इंटरनेशनल वुमन सीफेयरर्स फाउंडेशन… एक बेहतरीन पहल 

सुनीती कहती हैं शिपिंग करियर बेहद अलग और सम्मोहक है. वो आपको फाइटर बनाता है और विपरीत परिस्थितियों में सरवाइव करना सिखाता है. मैं ख़ुद एक ट्रेंड फायर फाइटर भी हूं, जिससे मुझे काफ़ी मदद मिलती है.आप दुनिया की सैर कर सकती हैं, पॉल्यूशन फ्री माहौल में काम कर सकती हैं, तो लड़कियों को इस क्षेत्र में भी करियर ज़रूर आज़माना चाहिए. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग से संबंधित डर, भेदभाव जैसी चीज़ें कम हो सकें. मैं हर बार जब भी नया शिप जॉइन करती हूं, तो हर बार मुझे ख़ुद को साबित करना पड़ता है, क्योंकि मेरे पुरुष साथी मेरी परफॉर्मेंस को लेकर इतने आश्‍वस्त नहीं होते, उनके मन में स़िर्फ इसलिए शंका होती है, क्योंकि मैं लड़की हूं, पर मेरा काम देखकर उनकी शंकाएं स्वत: ही दूर हो जाती हैं. इसलिए ऐसी कोई चुनौती नहीं, जिनका सामना करके जीता न जा सके.

श्रावणी भी यही कहती हैं कि परिवार की तरफ़ से पूरा सपोर्ट था. 120 के बैच में मात्र दो ही लड़कियों का होना यही बताता है कि अभी भी लड़कियां इस क्षेत्र में करियर को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि ज़ाहिर है चुनौतियां हैं इसमें, लेकिन अगर आपको चुनौतियां पसंद हैं, तो आपको कोई रोक नहीं सकता. हमारे साथ जो लड़के पढ़ते थे, वो भी पारंपरिक भारतीय सोच में पले-बढ़े थे, लेकिन एक समय के बाद सभी ने यह माना कि लड़के-लड़की का भेदभाव किसी भी क्षेत्र में नहीं होना चाहिए. पर हां, भारत में आज भी इतनी खुली सोच नहीं है कुछ क्षेत्रों को लेकर, क्योंकि हमें बहुत-सी कंपनियां नौकरी देने में हिचक रही थीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लड़कियां शिपिंग के माहौल में काम नहीं कर पाएंगी. वहां की चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएंगी. साथ ही अब तक सही पॉलिसीज़ भी नहीं बन पाई हैं, जिससे लड़कियों को इसमें अधिक बढ़ावा नहीं मिला. कॉलेज में एडमिशन को लेकर कोई भेदभाव नहीं है, यहां तक कि सरकार लड़कियों को डिस्काउंट भी देती है, फिर भी हमारा समाज अब तक कुछ चीज़ों को लेकर आज भी हिचकिचाता है. लिंग के आधार पर समानता अब भी उनकी सोच से मेल नहीं खाती. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग आधारित डर व भेदभाव कम हो सके.

इनका ज़िक्र भी है ज़रूरी…
  • महिला क्रिकेटर्स में पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, हरमनप्रीत कौर व अन्य सभी ने अपने-अपने स्तर पर सराहनीय काम किया है.
  • बॉक्सिंग में मेरी कॉम, बैडमिंटन में पीवी सिंधु और साइना नेहवाल, टेनिस में सानिया मिर्ज़ा… ये तमाम ऐसे नाम हैं, जिनकी उपलब्धियों को मात्र किसी एक वर्ष में बांधकर या सीमित करके नहीं देखा जा सकता, ये उससे भी ऊपर उठ चुकी हैं और लगातार उम्दा प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन कर रही हैं.
  • महिला आईस हॉकी टीम ने भी अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय जीत दर्ज की.
  • डॉक्टर नीरू चड्ढा पहली भारतीय महिला हैं, जो इंटरनेशनल ट्रीब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ सी की न स़िर्फ सदस्य बनीं, बल्कि वो जज चुनी गईं.
  • आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पहली ऐसी भारतीय महिला बनीं, जिन्हें ग्लोबल कॉर्पोरेट सिटिज़नशिप के लिए अमेरिका के टॉप अवॉर्ड (वुड्रो विल्सन अवॉर्ड) से नवाज़ा गया.
  • पेप्सीको की चेयरपर्सन और सीईओ इंदिरा नुई भी पहली ऐसी महिला बनीं, जिन्हें आईसीसी ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया.

– गीता शर्मा

जी हां, पॉप्युलर टीवी एक्टर शरद मल्होत्रा ने मुंबई के कमाटीपुरा स्थित रेड लाइट एरिया में जाकर विमेन्स डे सेलिब्रेट किया. एक एक्टर का समाज की उन औरतों के बारे में सोचना, जिन्हें मजबूरी में देह का व्यापार करना पड़ता है और समाज में उनके बारे में बात तक नहीं की जाती, वाकई एक सराहनीय कदम है. 

शरद मल्होत्रा

शरद मल्होत्रा कहते हैं, “जब मैं कमाटीपुरा गया, तो मैंने उन चेहरों को देखा, जिन्हें हम कभी नहीं देखते. उस प्रोफेशन के लोगों से मिला, जिनके बारे में हम बात तक नहीं करते. जब सूरज ढलता है, तो इस इलाके की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, रात से लेकर सवेरे तक इस इलाके में जाने कितनी कहानियां बनती हैं.
मेरे लिए ये एक बहुत ख़ास अनुभव था जब मैं उस इलाके की कई ख़ूबसूरत महिलाओं से मिला. ख़ास बात ये है कि उन महिलाओं ने मेरा मुस्कुराकर स्वागत किया. शुरुआत में मैं थोड़ा हिचकिचा रहा था, लेकिन कुछ समय बाद मैं उनके साथ घुल-मिल गया. मैं इस अनुभव को कभी नहीं भूल सकता.”

सेल्फ डिफेंस

आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार है. कोहनी मारें और छेड़ने वाले को मुंहतोड़ जवाब दें. जी हां, ये दमदार मैसेज दे रहे हैं अक्षय कुमार और ताप्सी पन्नू. इंटरनेशनल वुमेन्स डे के मौक़े पर अक्षय और ताप्सी एक ख़ास वीडियो लेकर आए हैं, जिसमें ताप्सी ये सिखा रही हैं कि लड़कियों को छेड़ने वालों को सबक कैसे सिखाया जाए. इस वीडियो में ताप्सी अक्षय के साथ मिलकर बता रही हैं कि जब कोई पुरुष किसी महिला पर हमला करता है, तो उसका मुकाबला कैसे करें.

1 मिनट 24 सेकेंड के वीडियो में ताप्सी ने कह रही हैं, “ख़तरा क़ीमती चीज़ों को होता है, जैसे की लड़कियां, औरतें. हम सब से ज़्यादा क़ीमती भला और क्या है. ख़तरा कहीं भी मिल सकता है, जैसे- रोड़, पार्क, बस, ट्रेन. कोई कहीं भी छू देता है, कुछ भी बोल देता है. पर अब हम चुप नहीं रहेंगे. अब हम जवाब देंगे.”

ताप्सी ने कोहनी मार तकनीक सिखाकर महिलाओं से कहा, “जब कोई छेड़े या बॉडी पार्ट्स को छुए, तो फ्रीज़ न हों, बल्कि रिएक्ट करें, चिल्लाएं, हेल्प के लिए बुलाएं, कुछ नहीं समझ न आए तो पत्थर उठा कर मारो या भाग जाओ, कुछ तो करो. आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार हैं, जैसे की आप उसको लात मार सकते हो, कोहनी मार सकते हो. मेरी फेवरेट तो कोहनी है, एक बार जो कोहनी लग जाए ना तो बंदा वापस नहीं उठता है.”

कोहनी मार तकनीक सिखाने के लिए ताप्सी अक्षय कुमार को बुलाती हैं और बताती हैं कि कैसे ख़ुद की सुरक्षा करें. देखे ये वीडियो, ये बहुत काम आ सकता है आपके.

वुमन्स डे

बदलते व़क्त के साथ महिलाओं का दायरा बहुत बढ़ा है. जमीं से लेकर आसमां तक अपनी उपलब्धियों का परचम लहरा चुकी महिलाओं के लिए इस बार का इंटरेशनल वुमन्स डे बहुत स्पेशल होगा. दरअसल, देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस एअर इंडिया की महिलाओं ने एक ख़ास रिकॉर्ड बनाकर देश की सभी महिलाओं का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. महिलाओं की बढ़ती ताकत दिखाने के लिए एयर इंडिया के एक विशेष विमान ने दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को के लिे उड़ान भरी. इसकी खास बात ये रही कि विमान के पायलट और क्रू मेंबर्स से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक सब महिलाएं थीं. ऐसा करने वाली एयर इंडिया दुनिया की पहली कंपनी है.

5 दिनों का सफ़र
एयर इंडिया फ्लाइट ने सभी महिला क्रू के साथ सोमवार को नई दिल्ली से सैन फ्रांसिसको के लिए उड़ान भरी और पूरी दुनिया की सैर के बाद शुक्रवार वापस आई. एयर इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक़ इस विमान की उड़ान के लिए ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ से लेकर इंजीनियर और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर तक महिलाओं का योगदान रहा.

वुमन्स डे

गिनिज़ बुक में नाम दर्ज कराने की मांग
एयर इंडिया ने महिलाओं के इस रिकॉर्ड को गिनीज़ बुक ऑफ द रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए आवेदन किया है. एयर इंडिया ने कहा है कि अब वो हर साल इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौ़के पर महिला टीमों वाली उड़ानों का संचालन करेगी.

 

– कंचन सिंह