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पैसे की भारी तंगी झेल रही हैं टीवी की ये मशहूर अदाकारा ( This TV Actress Is Facing Acute Financial Crisis)

indian TV Actress jaya bhattacharya Is Facing Acute Financial Crisis

टेलिविजन जगत की जानीमानी कलाकार और एकता कपूर के लोकप्रिय शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में विलेन पायल का किरदार निभाने वाली जया भट्टाचार्य (Jaya Bhattacharya) जीवन के काफ़ी मुश्किल दौर से गुज़र रही हैं. जानकारी के मुताबिक, टीवी एक्ट्रेस जया पैसे की तंगी (Financial Crisis) झेल रही हैं और उन्हें काम की सख्त ज़रूरत हैं.

indian TV Actress jaya bhattacharya Is Facing Acute Financial Crisis

 

एक इंटरटेनमेंट वेबसाइट से हुई बातचीत में जया ने बताया कि उनकी 79 वर्षीय मां हार्ट प्रॉब्लम के चलते 26  नवंबर से हॉस्पिटल में एडमिट हैं और अभी भी आईसीयू में हैं.  जया के अनुसार,” मां की बीमारी में उनकी सारी सेविंग ख़र्च हो चुकी है. इसके अलावा उनके घर के रेनोवेशन में भी काफ़ी पैसा ख़र्च हो गया है. जया ने इंटरव्यू में कहा कि, मेरे आगे-पीछे कोई नहीं है इसलिए मुझे काम की सख्त ज़रूरत है. मैं बहुत स्ट्रॉन्ग हूं और कभी हार नहीं मानूंगी.”

 

indian TV Actress jaya bhattacharya Is Facing Acute Financial Crisis

आपको बता दें कि जया मूलरूप से असम की रहने वाली हैं और आखिरी बार इन्हें कलर्स के हिट शो ‘थपकी प्यार की’ में देखा गया था. जया पिछले दो दशक से टीवी इंडस्ट्री में एेक्टिव हैं.  जया ने ‘कसम से’, ‘पलछिन’, ‘केसर’, ‘हातिम’ और ‘कोशिश एक आशा’ जैसे शोज में काम किया है. इसके अलावा कुछ फ़िल्मों में भी नज़र आई हैं. टीवी शोज के अलावा जया कुछ फिल्मों में भी नज़र आई हैं. वर्ष 2001 में लज्जा और वर्ष 2002 में देवदास के अलावा इन्होंने शबाना आजमी की इस साल आई फिल्म ‘The Wishing Tree’ में भी काम किया है.

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क्या काम करने के इन 5 नियमों को जानते हैं आप? (5 Work rules for career growth)

Career growth

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करियर में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है कि आप ऑफिस में बताए गए सभी रूल्स को फॉलो करें. वर्क रूल्स फॉलो करने से आपका काम भी ठीक रहेगा और ऑफिस का माहौल भी. ऐसे में तरक्क़ी करने के चांस भी ज़्यादा होंगे. वर्कप्लेस पर अपना रूल्स न बनाएं. इससे बॉस और आपको दोनों को नुक़सान होगा. ऑफिस चाहे छोटा हो बड़ा, उसके नियमों का पालन आपको करना ही चाहिए. वहां काम करने के रूल्स को आप बदल नहीं सकते. हां, अगर आपको किसी चीज़ से परहेज़ है, तो उसके लिए बॉस से बात करें. क्या हैं ऑफिस में काम करने के नियम? आइए, जानते हैं.

रूल नं 1- माइंड योर बिज़नेस
जी हां, वर्कप्लेस पर काम करने का पहला रूल है कि आप अपने काम से काम रखें. किसी दूसरे के काम में टांग अड़ाने की ज़रूरत नहीं है. इससे आपका ही नुक़सान होता है. एक तो आपकी रेप्युटेशन ख़राब होती है और दूसरे आपका काम पीछे रह जाता है. दूसरे आपसे आगे निकल जाते हैं.

रूल नं 2- अपनी पोस्ट का ख़्याल
आमतौर पर ऑफिस के प्यून भी जब आपस में बात करते हैं, तो ख़ुद को बॉस ही समझते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि बॉस को उनके हिसाब से चलना चाहिए. आपकी मानसिकता भी अगर कुछ ऐसी ही है, तो इससे बचिए. जिस पोस्ट पर काम कर रहे हैं, उसके हिसाब से ही बात कीजिए. अपने सीनियर्स की बुराई कीजिए, लेकिन ऐसा कभी मत कहिए कि सारा काम तो आप ही करते हैं, वो तो बस गॉसिप करते हैं.

रूल नं 3- सेल्फ मार्केटिंग
अगर आपको लगता होगा कि अपनी सेल्फ मार्केटिंग करके आप बॉस के दिमाग़ में अपनी अच्छी इमेज डाल देंगे, लेकिन कुछ समय के बाद आपके बार-बार ऐसा करने पर सबको आपकी सच्चाई पता चल जाती है. अगर आप काम में अच्छे हैं, तो भी सेल्फ मार्केटिंग इतनी मत कीजिए कि कंपनी का प्रोफाइल आपसे नीचे हो जाए.

रूल नं 4- नो वर्क प्रेशर
ऐसा नहीं है कि सारे वर्क रूल्स आपको ही फॉलो करने होते हैं. ऑफिस के सीनियर्स के लिए भी रूल्स हैं. उन्हें भी इसको फॉलो करना चाहिए. ऑफिस में वर्क प्रेशर न बनाना, वर्क रूल्स का अहम हिस्सा है. प्रेशर में न तो काम किया जा सकता है और न ही किसी से काम कराया जा सकता है

रूल नं 5- ब्रेक टाइम
हर ऑफिस का अपना नियम होता है. आप जहां भी काम करें उसके अनुसार ही करें. ख़ुद को ऑफिस रूल्स से बढ़कर न समझें. ऑफिस में लंच ब्रेक, टी ब्रेक आदि का एक टाइम निश्‍चित होता है. आपको उनके अनुसार ही काम करना चाहिए. कभी भी इस टाइम को क्रॉस न करें. इससे आपकी रेप्युटेशन डाउन हो सकती है.

क्या आप जानते हैं?
नौकरीपेशा लोगों के लिए पुर्तगाल किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां के एंप्लॉयमेंट लॉ में किसी एंप्लाई को टर्मिनेट करने का क़ानून नहीं है. बॉस वहां से किसी को फायर नहीं कर सकता. हां, अगर किसी एंप्लॉई के साथ नहीं जम रही है, तो कंपनी को उसे एक हैंडसम रेज़िगनेशन पैकेज ऑफर करना होता है.

– श्वेता सिंह

वर्क फ्रॉम होम के लिए 6 रूल्स (6 rules for work from home)

work from home

work from home

घर से काम करना धीरे-धीरे ट्रेंड बनता जा रहा है. लोग ऑफिस में 8 घंटे वेस्ट करने की बजाय ऐसे काम को ज़्यादा पसंद करने लगे हैं, जो घर से हो सके. ऐसे में उनका बहुत सारा समय बचने के साथ-साथ घर के काम भी हो जाते हैं. वर्क फ्रॉम होम ख़ास तौर से महिलाओं के लिए ईज़ी और बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. क्या आप भी वर्क फ्रॉम होम में विश्‍वास करते हैं? अगर हां, तो घर से काम करते समय ध्यान रखें इन बातों का, ताकि काम हो परफेक्ट और आप रहें रिफ्रेश.

फुल फ्रेशनेस
अगर आप सोच रहे हैं कि घर से काम का मतलब है कि बिना ब्रश किए, बेड पर पड़े ही काम शुरू कर दें, तो ये भले ही आपका समय बचाएगा, लेकिन आपका माइंड पूरी तरह से फ्रेश नहीं रहेगा. काम में परफेक्शन और फ्रेशनेस के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप सुबह अपना रुटीन फॉलो करने के बाद ही काम शुरू करें.

वेल ड्रेसअप
पढ़कर भले ही आपको हंसी छूट रही हो, लेकिन ये सच है. ज़रा सोचिए, ऑफिस जाते समय आप कितनी बार मिरर में ख़ुद को देखते हैं और एक नहीं, बल्कि कई बार तो 2-3 ड्रेस बदलकर भी देखते हैं. ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह से आप फ्रेश और एनर्जेटिक रहते हैं. फुल मोटीवेशन के साथ काम शुरू करते हैं. मन में उत्साह रहता है, जिसका असर काम पर दिखाई देता है. अगली बार जब भी घर से काम करने की सोचें, तो इस बात को फॉलो करके देखें. काम पर इसका असर दिखेगा.

राइट प्लेस
ऑफिस में हर एंप्लॉई की एक जगह होती है. जब तक आप काम करते हैं एक ही डेस्क पर. ऐसे में आप उस जगह से फेमिलियर हो जाते हैं. वहीं बैठते ही आपको काम करने की आदत अपने आप आ जाती है. इसी तरह घर पर भी एक जगह निश्‍चित कर लें. बार-बार जगह बदलने से काम सही समय पर पूरा नहीं होता और साथ में आप डिस्टर्ब भी होते हैं.

नो घर का काम
जी हां, ऑफिस का काम घर से शुरू करना इतना आसान नहीं होता. परिवार बार-बार आपको डिस्टर्ब कर सकता है. महिलाओं के मामले में ये और भी मुश्किल हो जाता है. महिलाएं घर से काम करने पर ज़्यादा समय घर के काम के बारे में सोचती रहती हैं. काम के बीच में उठकर कभी वो कपड़े धोने की सोचती हैं, तो कभी ख़ुद के लिए चाय बनाने की, ये छोटे-छोटे काम बहुत डिस्टर्ब करते हैं. आप इन चीज़ों से बचें.

ज़रूरी है लंच टाइम
जिस तरह से ऑफिस में काम करते समय एक सही समय पर आप लंच ब्रेक लेते हैं, ठीक उसी तरह घर पर भी आपको काम के बीच में लंच ब्रेक लेना चाहिए. इससे आपका काम बाधित नहीं होता. बिना टाइम के लंच ब्रेक न लें.

टेम्पटेंशन को रखें साइड में
ये बहुत ही प्रैक्टिकल है. घर से काम करने पर बगल में ही स्नैक्स का डिब्बा रखने वालों में से हैं, तो घर से काम करना आपके लिए ठीक नहीं है. ऐसा करने से आप ज़्यादा खा लेते हैं और इसका असर आपकी बॉडी पर पड़ता है. इतना ही नहीं कुछ लोग तो काम पर कम और फ्रिज के पास ज़्यादा दिखते हैं. कभी सॉफ्ट ड्रिंक्स, कभी वेफर्स, तो कभी फ्रूट जूस. इन चीज़ों से आप बचें.

इन 6 रूल्स को फॉलो करके आप वर्क फ्रॉम होम में सफल हो सकते हैं. तो देर किस बात की, बस अपनाइए ये रूल्स और घर बैठे करिए काम.

श्वेता सिंह 

कैसे रहें ऑफिस में स्ट्रेस फ्री? (how to keep yourself stress free in the office?)

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वर्कप्लेस पर स्ट्रेस न हो, ये तो संभव नहीं है, मगर आप थोड़ी कोशिश करके ख़ुद को स्ट्रेस फ्री ज़रूर रख सकते हैं. आज के दौर में जब तनाव कई बीमारियों को जन्म दे रहा है, इससे बचना बहुत ज़रूरी है. ऑफिस में स्ट्रेस फ्री रहने के लिए आज़माइए ये आसान तरी़के.

डेस्क पर रखें ग्रीन प्लांट
अपने डेस्क को साफ़-सुथरा रखने के साथ ही उस पर हरा पौधा लगा छोटा-सा गमला रखें. एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, हरा पौधा देखने से आप अच्छा महसूस करते हैं और मन को शांति मिलती है. अब से जब भी ऑफिस में आपको किसी बात पर ग़ुुस्सा आए या फिर थकान महसूस हो, तो डेस्क पर रखे ग्रीन प्लांट को देखकर कुछ अच्छा सोचने की कोशिश करें. आप रिलैक्स महसूस करेंगे.

थोड़ी चहलक़दमी है ज़रूरी
यदि आपकी अपने सहकर्मी या बॉस से किसी बात पर अनबन हो गई है, तो ग़ुस्से को शांत करने के लिए अपनी चेयर से उठकर थोड़ी देर के लिए बाहर टहलें. इससे तनाव कम होगा. चलने से मांसपेशियां फैलती हैं और मन में सकारात्मक विचार आते हैं.

बॉडी को स्ट्रेच करें
लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करते रहने से मांसपेशियां अकड़ जाती हैं. साथ ही फ्रस्ट्रेशन भी होता है. अतः काम के बीच-बीच में अपनी चेयर पर बैठकर या फिर खड़े होकर बॉडी को स्ट्रेच करें. साथ ही थोड़ा समय निकालकर कुछ आसान एक्सरसाइज़ भी कर लें ताकि मसल्स अकड़े नहीं.

ड्राईफ्रूट्स खाएं
ऑफिस में हल्की भूख लगने पर चिप्स, नमकीन खाने की बजाय ड्राईफ्रूट्स खाएं. काम के बीच-बीच में ड्राईफ्रूट्स खाने से तनाव कम होता है, साथ ही इससे मेंटल प्रेशर कम करने में भी मदद मिलती है और ग़ुस्सा जल्दी शांत हो जाता है.

मनपंसद लंच करें
काम का तनाव हो या किसी से अनबन हुई हो, मूड अच्छा करना चाहते हैं, तो उस दिन अपनी पसंद का खाना खाएं. इससे संतुष्टि मिलेगी और मूड भी अच्छा हो जाएगा. फिर आपका बाकी दिन स्ट्रेस फ्री रहेगा.

मेडिटेशन करें
ऑफिस के माहौल से यदि आपको ज़्यादा तनाव हो रहा हो, तो कुछ देर के लिए मेडिटेशन करें. 5 मिनट के लिए अपनी कुर्सी पर बैठकर आंखें बंद करके कुछ सकारात्मक सोचें. ऐसा करने से ग़ुस्सा और तनाव दूर हो जाएगा.

पसंदीदा म्यूज़िक सुनें
स्ट्रेस दूर करने का सबसे आसान तरीक़ा है म्यूज़िक. यदि ऑफिस में मनाही न हो, तो कुछ समय के लिए अपना पसंदीदा म्यूज़िक सुनें. इससे स्ट्रेस कम होता है और दिमाग़ की नसों को भी आराम पहुंचता है.

 – कंचन सिंह

वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ

जमकर करें अपने काम की मार्केटिंग (Fiercely marketing your work)

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करीब 5 साल से एक ही कंपनी में जॉब कर रही है. वो बहुत ईमानदार और मेहनती लड़की है, फिर भी आजतक उसे वो सफलता नहीं मिली जिसकी वो हक़दार है. उसका काम भी नोटिस नहीं किया जाता. इससे अंजली को दुख तो होता है, मगर अपने संकोची स्वभाव के कारण वो बॉस से खुलकर बात नहीं कर पाती. जिस प्रोजेक्ट के लिए उसने दिन-रात मेहनत की, कोई और उसे अपना आइडिया बताकर क्रेडिट ले जाता है और अंजली बस मुंह देखती रह जाती है. झिझक के कारण आजतक उसने अपनी उपलब्धियों और गुणों के बारे में बॉस को नहीं बताया, जिसका ख़ामियाज़ा कम इंक्रीमेंट और प्रमोशन के रूप में उसे उठाना पड़ता है. यदि आपकी स्थिति भी अंजली जैसी है, तो अब से मुंह खोलिए, बताइए कि आपने क्या-क्या किया है और आप कौन-कौन-से काम बेहतर तरी़के से कर सकते हैं.

अपना काम दिखाएं
अपने दिमाग़ से ये बात निकाल दें कि आप जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसे मैनेजर या सीनियर लीडर्स जानते हैं, क्योंकि ज़्यादातर लोग स़िर्फ अपने काम पर ध्यान देते हैं और उनकी नज़र ऐसे एंप्लॉई पर ज़्यादा रहती है जो ऑफिस में लाइमलाइट में रहते हैं. अतः कोशिश करें कि आप जो भी काम करें उसके बारे में अपने सीनियर और बॉस को बताएं कि मैंने फलां काम किया. आपने काम कितने समय में किया इसका ब्यौरा भी अपने पास रखें ताकि कभी बॉस पूछे तो आप बता सकें. साथ ही हर इंसान में कुछ ख़ास क्वालिटी होती है, यदि आपको भी किसी काम में महारत हासिल है, तो उसके बारे में भी बॉस को ज़रूर बताएं.
स्मार्ट टिप:
अपने काम के बारे में बताते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका लहज़ा आत्मप्रशंसा वाला न हो. साथ ही स़िर्फ अपने काम के बारे में बताएं. दूसरा क्या नहीं कर रहा है इसका ज़िक्र भूलकर भी न करें.

लक्ष्य तय करें
अपने लिए कुछ लक्ष्य तय करें जिन्हें आप हासिल करना चाहते हैं और जिनसे कंपनी का फ़ायदा हो. बॉस को इस बात से अवगत कराएं और तय समयसीमा में अपना लक्ष्य पूरा करने की कोशिश करें. इससे निश्‍चय ही बॉस इंप्रेस होंगे और उनकी नज़रों में आपकी सकारात्मक छवि बनेगी.
स्मार्ट टिप:
जोश में आकर कोई ऐसा लक्ष्य न तय कर बैठें जिसे पूरा करना आपके लिए बहुत मुश्किल हो या फिर समयसीमा इतनी कम न रखें कि उसमें वो काम पूरा ही न हो पाए.

नए आइडियाज़ बताएं
किसी भी फील्ड में कंपनी ऐसे कर्मचारियों को ज़्यादा तवज्जो देती है जो क्रिएटिव होते हैं, जो हमेशा अपनी नई सोच से कंपनी को आगे बढ़ाने की बात करते हैं. यदि आपके दिमाग़ में कभी कोई आइडिया आए, तो अपने किसी कलीग से शेयर करने की बजाय बेझिझक बॉस से कहें. हो सकता है, पहली बार में आपका आइडिया उन्हें पसंद न आए, मगर आपकी पहल हमेशा उनकी नज़रों में रहेगी. अपनी बात कह देने से आपकी छवि अच्छी बनेगी.
स्मार्ट टिप:
कोई भी आइडिया आते ही तुरंत बॉस के पास जाने की बजाय अपने स्तर पर पहले उसके परिणाम और उसे लागू करने के तरीक़ों पर विचार कर लें. फिर पूरी तैयारी के साथ बॉस के बास जाएं ताकि उन्हें लगे कि आप पूरा होमवर्क करके आए हैं. यूं ही हवा में बात नहीं कर रहे.

काम का रिकॉर्ड रखें
यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि काम करने के बाद भी आपके साथ सैलरी के मामले में सौतेला व्यवहार हो रहा है, तो अपने सभी काम और ज़िम्मेदारियों का रिकॉर्ड रखें. आपको कोई प्रोजेक्ट कब मिला, उसे आपने कितने दिनों में तैयार किया, आपने कंपनी द्वारा दी गई किन-किन ज़िम्मेदारियों को किस तरह निभाया आदि. आपने शायद देखा होगा कि ऑफिस में कुछ लोग बहुत काम नहीं करते, मगर एचआर डिपार्टमेंट और बॉस के सामने अपने उन्हीं छोटे-मोटे काम का पूरा रिकॉर्ड इस तरह पेश करते हैं कि वो बहुत मेहनती हैं. अतः अब से आप भी अपने पूरे काम की सही तरह से लिस्ट बनाएं और जब कोई आप पर उंगली उठाए, तो वो लिस्ट सीनियर मैनेजमेंट/बॉस को दिखाएं.
स्मार्ट टिप:
काम के रिकॉर्ड में कभी भी कोई ऐसी चीज़ न लिखें जो आपने नहीं की है. पूरी ईमानदारी से लिस्ट बनाएं.

प्रेज़ेंटेबल रहें
ब्रांडिंग और मार्केटिंग के इस ज़माने में अच्छी से ज़्यादा सुंदर चीज़ें बिकती हैं. विश्‍वास न हो तो ख़ुद ज़रा ध्यान दीजिए. बाज़ार जाने पर हम सामान की क्वालिटी तो बाद में देखते हैं, मगर पैकिंग अच्छी हो तो उसे देखकर तुरंत इंप्रेस हो जाते हैं. इसी तरह ऑफिस में यदि कोई एंप्लॉई अच्छे कपड़े पहनकर, हमेशा प्रेज़ेंटेबल दिखता है, तो लोग उसे ज़्यादा नोटिस करते हैं. इस बात में कोई दो राय नहीं कि आगे बढ़ने के लिए काम करना ज़रूरी है, मगर सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए आपका प्रेज़ेंटेबल दिखना भी ज़रूरी है. कभी किसी से डरे नहीं, पूरे आत्मविश्‍वास के साथ अपनी बात रखें और ये आत्मविश्‍वास आपके चेहरे व पर्सनैलिटी में भी नज़र आना चाहिए.
स्मार्ट टिप:
भले ही आपके ऑफिस का कोई ड्रेस कोड न हो फिर भी अपनी तरफ़ से फॉर्मल आउटफिट व फुटवेयर ही पहनें. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और इमेज भी अच्छी बनेगी.

न बोलने के नुक़सान

  • आपका काम नोटिस नहीं होता.
  • कोई नई ज़िम्मेदारी देते समय बॉस सोचेंगे कि आप ये काम नहीं कर सकते.
  • प्रमोशन/इंक्रीमेंट पर असर पड़ता है.
  • आपकी गिनती मेहनती और काम करनेवाले लोगों में नहीं होती, ये सोचकर आपका मनोबल गिरता है.
  • कोई दूसरा आपके काम का क्रेडिट ले जाता है.

– कंचन सिंह

हेक्टिक वर्क शेड्यूल में कैसे रहें फिट? (How to Stay Fit despite a Busy Work Schedule?)

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मॉडर्न लाइफस्टाइल और हेक्टिक वर्क शेड्यूल के बीच हम इस कदर बिज़ी हो गए हैं, मानो हमारी दुनिया ही ऑफिस और घर तक सिमट कर रह गई है. सुबह ऑफिस पहुंचने की जल्दी… ऑफिस में क़रीब 8 से 10 घंटे लगातार कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने के बाद फिर शाम को थक-हार कर घर पहुंचने की जल्दी… इस भागती-दौड़ती ज़िंदगी के बीच हम अपनी सेहत को अक्सर नज़रअंदाज़ कर जाते हैं, लेकिन शायद हम यह नहीं जानते हैं कि ऐसा करके हम न जाने कितनी बीमारियों को न्योता दे रहे हैं.

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हेक्टिक जॉब शेड्यूल में अपनी सेहत पर ध्यान देना भले ही मुश्किल लगता हो, लेकिन कुछ बातों को रूटीन में शामिल करके ख़ुद को फिट रखा जा सकता है.

क्या करें ?

  • हेक्टिक शेड्यूल के बीच थोड़ा समय अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए निकालें.
  • प्लानिंग के साथ अपने डेली रूटीन के काम को पूरा करें.
  • डेली रूटीन में फिज़िकल वर्कआउट को शामिल करें.
  • थोड़ी देर ही सही, पर अपनी पसंदीदा एक्सरसाइज़ करें. मानसिक और शारीरिक फिटनेस के लिए एक्सरसाइज़ ज़रूरी है.
  • लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.
  • अपनी कार को ऑफिस के गेट से दूर पार्क करें और पैदल चलें.
  • लंच के लिए घर का बना खाना ले जाएं, बाहर का खाना खाने से बचें.

ऑफिस में वर्कआउट के फ़ायदे

  • ऑफिस में 2 मिनट के वॉक से सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है.
  • आंखों और रीढ़ की हड्डियों को आराम मिलता है.
  • टहलने से शरीर में रक्त का संचार सही तरी़के से होता है.
  • टहलने से शरीर को ऊर्जा मिलती है.
  • वर्कआउट से मूड दिनभर अच्छा रहता है.
  • एक्सरसाइज़ करने से बीमारियों के होने का ख़तरा कम होता है.
  • व्यायाम करने से मानसिक और शारीरिक तनाव कम होता है.

काम के साथ वर्कआउट भी

ऑफिस में एक ही जगह पर बैठकर घंटों काम करने के बावजूद हम ख़ुद को फिट रख सकते हैं. कुछ ऐसे एक्सरसाइज़ हैं, जिन्हें ऑफिस में काम के साथ किया जा सकता है.

  • ऑफिस में लगातार बैठने का काम है, तो अच्छी सेहत के लिए हर घंटे में दो मिनट वॉक करें.
  • ऑफिस में अपनी फाइलें, रजिस्टर जैसी चीज़ें ख़ुद उठाकर रखें.
  • पीने के लिए पानी ख़ुद लेने जाएं और आते व़क्त अपनी चेयर तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता अपनाएं.
  • लंच करने के बाद अपनी केबिन में कुछ देर तक टहलें.
  • कंप्यूटर पर काम करते-करते थक जाएं, तो कुर्सी पर ही विश्रामदायक मुद्रा में बैठ जाएं.
  • लगातार चेयर पर बैठने की बजाय ज़्यादा से ज़्यादा फिज़िकल मूवमेंट करें.
  • चेयर पर बैठे-बैठे अपने कंधों को 10 बार पीछे की तरफ़ घुमाएं, फिर 10 बार आगे की तरफ़ घुमाएं.
  • चेयर पर बैठकर अपने पैरों को स्ट्रेच करें, चेयर के बराबर ज़मीन से ऊपर उठाएं.
  • अपने दोनों हाथों को अपनी पीठ की ओर ले जाएं, दोनों हाथों की उंगलियों को लॉक करें और अपने हाथ को जितना मुमक़िन हो, उतना पीछे की तरफ़ स्ट्रेच करें.
  • अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर में लाएं. मुट्ठी बंद करके 10 बार अंदर की तरफ़ घुमाएं, फिर 10 बार बाहर की तरफ़ घुमाएं.