World AIDS Day

वर्ल्ड एड्स डे पर टीवी एक्टर्स ने लोगों को जागरूक करने के लिए अपने विचार व्यक्त किए और अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों को जागरूक किया. वर्ल्ड एड्स डे पर दिव्यांका त्रिपाठी, अर्जुन बिजलानी, रश्मि देसाई, विवियन डिसेना इन टीवी एक्टर्स ने दिया ये संदेश.

World AIDS Day

दिव्यांका त्रिपाठी
वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर इस ज़रूरी मुद्दे पर सेलिब्रिटीज़ का योगदान बेहद ज़रूरी है. यदि सेलिब्रिटीज़ आम जनता से एड्स के प्रति सचेत और सतर्क रहने को कहते हैं, तो लोग उनकी बातों पर ध्यान देते हैं. इससे एड्स से पीड़ित लोगों का भी मनोबल बढ़ेगा. यदि हम सब ठान लें, तो एड्स से लड़ना नामुमकिन नहीं है.

Divyanka Tripathi

अर्जुन बिजलानी
सेलिब्रिटीज़ की बातों का लोगों पर तेज़ी से प्रभाव होता है इसीलिए बड़े-बड़े ब्रांड्स सेलिब्रिटीज़ को अपने ऐड कैम्पेन में शामिल करते हैं. जहां तक ग्राउंड लेवल पर जागरूकता फैलाने की बात है, तो टेलीविज़न एक सशक्त माध्यम है. टेलीविज़न और टीवी स्टार्स ये काम आसानी से कर सकते हैं. हम सभी को अपनी तरफ़ से कोशिश ज़रूर करनी चाहिए.

Arjun Bijlani

रश्मि देसाई
सेलिब्रिटीज़ हमेशा अच्छे काम के लिए आगे आते हैं और अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर यदि हमारे द्वारा अपील करने से लोग जागरूक होते हैं, तो मैं लोगों से ज़रूर कहूंगी कि हम सब मिलकर एड्स मुक्त दुनिया का सपना सच कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: टीवी सेलिब्रिटीज़ के ब्रेकअप और तलाक की अनोखी दास्तान, ब्रेकअप के बाद भी इनकी दोस्ती में कोई कमी नहीं आई (Breakup Stories: TV Celebrities Who Remained Friends After An Ugly Breakup)

विवियन डिसेना 
मुझे लगता है कि सेलिब्रिटीज़ की बातों का लोगों पर असर होता है, क्योंकि लोग ख़ुद को सेलिब्रिटीज़ से जुड़ा हुआ पाते हैं इसलिए सेलिब्रिटीज़ को समाज के प्रति अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी ज़रूर निभानी चाहिए. मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि एचआईवी एड्स जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए अपनी सेहत के प्रति सचेत और जागरूक रहें, क्योंकि आप से ज़रूरी कुछ भी नहीं है.

हर साल 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस (World Aids Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना, एड्स पीड़ित लोगों के लिए फंड जुटाना और इससे जुड़े मिथ्स को दूर कर इस बीमारी के प्रति लोगों को एजुकेट करना है.

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एड्स क्या है?
– एड्स बीमारी एचआईवी वायरस से होती है.
– यह वायरस इंसान के इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर देता है.
– एचआईवी पाज़िटिच प्रेग्नेंट स्त्री से उसके बच्चे, असुरक्षित सेक्स और इंफेक्टेड इंजेक्शन के यूज़ से होता है.
कारण
– इसका मुख्य कारण है एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति से अनसेफ सेक्स.
– इश्रेेव ढीरपीर्षीीळेप यानी एचआईवी से संक्रमित रक्त चढाए जाने पर
– एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का इस्तेमाल करने पर.
– एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला के शिशु को भी इसके इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.
– इसके अलावा ब्लड या शरीर के अन्य फ्लूइड जैसे वीर्य के दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने पर, एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के ब्लड, उस्तरा या टूथ ब्रश के इस्तेमाल से भी इसका ख़तरा रहता है.

 

एड्स के लक्षण
शुरुआत में वैसे एड्स के कोई ख़ास लक्षण नहीं दिखते. हां, दूसरी बीमारियों में होनेवाले लक्षण इसमें ज़रूर दिखते हैं, आमतौर पर टर्मिनल स्टेज में इसके लक्षण कमज़ोरी के रूप में नज़र आने लगते हैं.
– मरीज़ का वज़न घट जाता है.
– एक मीने से ज़्यादा समय तक उसे डायरिया रहती है.
– मरीज़ को लगातार बुख़ार बना रहता है.
– रोगी को लगातार खांसी रहती है.
– वह सिरदर्द से भी परेशान रहता है.
– स्किन इंफेक्शन भी हो जाता है.
– हरपीज, ग्लैंड्स वृद्धि व दस्त शिकायत होती है
– मरीज़ के गले की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है.
– मुंह में खुजली होती रहती है.
– रात में सोते समय बहुत ज़्यादा पसीना आने लगता है.
हालांकि ये सभी लक्षण दूरी बीमारियों में भी नज़र आते हैं, इसलिए अलर्ट रहना चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से हर ऐंगल से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करवा लेनी चाहिए.
उपचार
इसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है सारे टेस्ट्स करवाना
एड्स से संबंधित टेस्ट्स
– एलीसा टेस्ट
– वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
– एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन(पीसीआर)
– सीडी-4 काउंट
कैसे करते हैं उपचार
इसके उपचार के लिए कई दवाओं को इस्तेमाल किया जाता है. एचआईवी के उपचार का मुख्य उद्देश्य एड्स के विषाणु को ख़त्म करना, इम्युन सिस्टम को मज़बूत करना और लोगों के मन को डर को दूर करना होता है.

 

कैसे करें बचाव
फिर भी उपचार से बेहतर है सावधानी बरतें.
– अपने पार्टनर के प्रति वफादार रहें.
– एक से अधिक पार्टनर के साथ सेक्स संबंध न रखें.
– अनसेफ सेक्स से बचें.
– हॉस्पिटल में हमेशा नई सीरिंज इस्तेमाल करने को कहें.
– बाहर शेविंग आदि करवाने से बचें. अगर बाहर शेव करा ही रहे हैं, तो नए ब्लेड का इस्तंमाल करने को कहें.
– अगर ब्लड चढवाने की ज़रूरत हो तो पहले कंफर्म कर लें कि जो ब्लड आपको चढाया जा रहा है, वो इंफेक्टेड न हो.
ये सिर्फ मिथक हैं, न करें इन पर यक़ीन
– एड्स के संक्रमण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी हैं. इन पर विश्‍वास न करें.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को छूने, गले लगने या हाथ मिलाने से संक्रमण नहीं होता.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना खाने या उनके साथ रहने से.
– छींकने या खांसने से.
– मच्छर के काटने से.
– आंसू या थूक से भी एड्स फैलने के ख़तरे का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

 

क्या एड्स हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा?
कल्पना कीजिए, दुनिया में एड्स बीमारी ही न हो. यानी धरती पर कोई भी व्यक्ति एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव से पीड़ित न हो. जी हां, अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में एड्स के उन्मूलन के लिए गेटिंग टू जीरो अभियान शुरू किया गया है और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में ये मिशन चलाया जाएगा.
चूंकि एचआईवी पॉज़िटिव अथवा एड्स जेनेटिक बीमारी नहीं है, इसलिए अगर इस बीमारी का इनफेक्शन पूरी तरह रुक जाए यानी कोई नया व्यक्ति इससे इनफेक्टेड न हो तो 25-30 साल बाद दुनिया में एड्स का नामोनिशान भी नहीं रह जाएगा.

 

एड्स के मरीज़ों के लिए सरकार की पहल
एड्स के बारे में लोगों के मन में ग़लत धारणाएं होती हैं. इसका बड़ा दुष्प्रभाव यह होता है कि समाज एड्स मरीज़ों को भय की नज़र से देखता है. वैसे भी यौन विषयों पर बातचीत भारतीय समाज में वर्जित है. ऐसे में यौन संक्रमण से फैलनेवाली इस बीमारी के प्रति भी लोगों का नकारात्मक रुख होता है. इस भयावह स्थिति से निपटने का महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक बदलाव लाना था, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने एचआईवी-एड्स संशोधन बिल-2014 को मंजूरी दी है.
कह सकते हैं कि जो लोग, संगठन या अस्पताल अब तक एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ों को हेय दृष्टि से देखते या उनके साथ पक्षपात या उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करते रहे हैं, उनकी शामत आने वाली है. ऐसा करनै वाले व्यक्ति को अब तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल की सज़ा सुनिश्चित करने के लिए क़ानून बन रहा है. कहने का मतलब देर से ही सही समाज में उपेक्षित तब़के को सरकार का साथ मिल ही गया.
दरअसल, जब किसी को पता चलता है कि अमुक व्यक्ति एचआईवी पॉज़िटिव या एड्स से पीड़ित है, तब उसके प्रति हर किसी की धारणा ही बदल जाती है. लोग हर कोई उस व्यक्ति को हेय दृष्टि से देखने लगता है. इस पक्षपात और उपेक्षा का ख़ौफ़ इस कदर है कि कई लोग यह पता चलने पर कि उन्हें एड्स हो गया है, मौत का वरण कर लेते हैं. बहरहाल, एचआईवी-एड्स मरीज़ों को सरकार का संबल मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन बदनसीब लोगों के प्रति ,माज की धारणा बदलेगी, क्योंकि सरकार की ओर से एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव के मरीज़ों के साथ भेदभाव करने वाले पर सख़्त सज़ा और ज़ुर्माने का प्रावधान किया गया है.
संसद में पेश किए जाने वाले बिल के मुताबिक, एचआइवी से संक्रमित लोगों की सूचना का रिकॉर्ड रखने वाले संस्थानों को डेटा सुरक्षा संबंधी क़दम उठाने होंगे. 18 वर्ष से कम आयु के एचआइवी संक्रमित या पीड़ित मरीज़ को शेयरिंग होम में रहने और घर की सुविधाओं का अधिकार है. बिल में एड्स मरीज़ों और उनके साथ रहने वाले के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने की वकालत करने या उनसे संबंधित सूचना प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
विधेयक में बच्चों और नाबालिग एड्स संक्रमितों को भी संरक्षण मुहैया देने की कोशिश की पूरी कोशिश की गई है. एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति रखने का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीज़ों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा. नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज़ को अपनी बीमारी के बारे में बताना ज़रूरी नहीं होगा. अगर मरीज़ जानकारी देता भी है तो उसका नाम सार्वजनिक करने वाले के लिएसज़ा और जुर्माना के प्रावधान है.

वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर टीवी स्टार्स ने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए लोगों को जागरूक करने की सार्थक पहल की है. आइए, हम सब भी इस पहल में शामिल हो जाएं.

AIDS Day
विवियन डिसेना (Vivian Dsena)
मुझे लगता है कि सेलिब्रिटीज़ की बातों का लोगों पर असर होता है, क्योंकि लोग ख़ुद को सेलिब्रिटीज़ से जुड़ा हुआ पाते हैं इसलिए सेलिब्रिटीज़ को समाज के प्रति अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी ज़रूर निभानी चाहिए. मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि एचआईवी एड्स जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए अपनी सेहत के प्रति सचेत और जागरूक रहें, क्योंकि आप से ज़रूरी कुछ भी नहीं है.

AIDS Day

रश्मि देसाई (Rashmi Desai)
सेलिब्रिटीज़ हमेशा अच्छे काम के लिए आगे आते हैं और अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर यदि हमारे द्वारा अपील करने से लोग जागरूक होते हैं, तो मैं लोगों से ज़रूर कहूंगी कि हम सब मिलकर एड्स मुक्त दुनिया का सपना सच कर सकते हैं.

AIDS Day

अर्जुन बिजलानी (Arjun Bijlani)
सेलिब्रिटीज़ की बातों का लोगों पर तेज़ी से प्रभाव होता है इसीलिए बड़े-बड़े ब्रांड्स सेलिब्रिटीज़ को अपने ऐड कैम्पेन में शामिल करते हैं. जहां तक ग्राउंड लेवल पर जागरूकता फैलाने की बात है, तो टेलीविज़न एक सशक्त माध्यम है. टेलीविज़न और टीवी स्टार्स ये काम आसानी से कर सकते हैं. हम सभी को अपनी तरफ़ से कोशिश ज़रूर करनी चाहिए.

AIDS Day

दिव्यांका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi)
वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर इस ज़रूरी मुद्दे पर सेलिब्रिटीज़ का योगदान बेहद ज़रूरी है. यदि सेलिब्रिटीज़ आम जनता से एड्स के प्रति सचेत और सतर्क रहने को कहते हैं, तो लोग उनकी बातों पर ध्यान देते हैं. इससे एड्स से पीड़ित लोगों का भी मनोबल बढ़ेगा. यदि हम सब ठान लें, तो एड्स से लड़ना नामुमकिन नहीं है.

AIDS Day

– कमला बडोनी