World Heart Day: Ways Keep ...

सामान्य और स्वस्थ इंसान के हृदय की धडक़न 60 से 90 बीट प्रति मिनिट (बीएमपी) होती है, लेकिन कईं बार यह असंतुलित हो जाती है. दिल की धडक़न अत्यधिक बढऩे पर हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है. एनीमिया भी आसामान्य धडक़नों का एक कारण हो सकता है, क्योंकि इसके कारण लाल रक्त कणिकाओं की संख्या कम होने से हृदय को शरीर में रक्त की आपूर्ति करने के लिये अधिक मेहनत करनी पड़ती है जिससे उसकी धडक़न बढ़ जाती है और इससे एक गंभीर अवस्था लेफ्ट वेंट्रीक्युलर हाइपरट्रॉफी(एलवीएच) हो जाती है जिसमें हृदय की मांसपेशियां का आकार बढ़ जाता है. इससे हार्ट फैल होने या लाल रक्त कणिकाओं के जल्दी नष्ट  होने का खतरा बढ़ जाता है. तनाव से भी हृदय की धडक़नें भी बढ़ जाती हैं. सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. संजीव अग्रवाल दिल से जुड़ी प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और उनसे बचने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं. 
World Heart Day
कार्डिएक अरेस्ट
कार्डिएक अरेस्ट में दिल के बंद होने से रक्त का प्रवाह पूरी जरह बंद हो जाता है, इसे कार्डिएक पलमोनरी अरेस्ट या सक्र्यूलेटरी अरेस्ट भी कहते हैं. जो लोग दिल की बीमारियों से पीडि़त हैं या जिनके परिवार में अनुवांशिक रूप से हार्ट अटैक की समस्या है, उनमें कार्डिएक अरेस्ट की आशंका अधिक होती है, कईं बार पूरी तरह स्वस्थ, व्यक्ति पर भी इसकी चपेट में आ सकता है. हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अत्यधिक धूम्रपान इसकी वजह बन सकते हैं. 

हार्ट फेलियर
हार्ट फेलियर एक गंभीर  स्थिति है यह तब होती है जब हृदय की मांसपेशियां अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और पर्याप्त मात्रा में शरीर में रक्त का संचरण नहीं कर पाती हैं. यह समस्या बुजुर्ग लोगों को अधिक प्रभावित करती है. सांस उखडऩा, थकान और पंजों में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं. हार्ट फेलियर का यह अर्थ नहीं होता है कि हृदय बंद हो गया है या इसने कार्य करना बंद कर दिया है. इसका अर्थ है इसे जितना रक्त पंप करना चाहिए उतना नहीं कर रहा है. यह कोरोनरी हार्ट डिसीज, हृदय के वॉल्व या मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त होने या वाइरस के संक्रमण के कारण भी हो सकता है. 

एनजाइना
एनजाइना का सबसे प्रमुख लक्षण छाती में दर्द है. एनजाइना आर्थोस्लेरोसिस के द्वारा होता है जिसके कारण हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है. इससे छाती के अलावा बायें हाथ, कंधे या जबड़े में भी दर्द हो सकता है. शारीरिक श्रम के समय यह दर्द बढ़ जाता है और आराम करने पर थोड़ा कम हो जाता है. अगर एनजाइना के लक्षण तेजी से खराब हो रहे हैं तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाएं. 

कोरोनरी हार्ट डिसीज
कोरोनरी हार्ट डिसीज को हृदय की धमनियों की बीमारी या इसचेमिक हार्ट डिसीज के नाम से भी जाना जाता है. इसमें रक्त  नलिकाओं में प्लॉक जम जाता है जिससे वे संकरी हो जाती हैं और उनमें रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है. यह हृदय रोगों के सबसे प्रमुख रूपों में से एक है इसके परिणाम स्वरूप एनजाइना, हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर हो सकता है या हृदय से संबंधित दूसरी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है.

इन संकेतों को गंभीरता से लें
1. छाती में बेचौनी और भारीपन महसूस होना
2.  छाती में दर्द के साथ सांस फूलना
3.  अत्यधिक पसीना आना
4.  लगातार चक्कर आना, थकान या कमजोरी
5.  बांहों का सुन्न हो जाना
6.  बोलने में जुबान लड़खड़ाना

दिल के लिए जरूरी टिप्स
इन उपायों को अपनाकर आप दिल को बीमार होने से बचा सकते हैं. 
. सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट का सेवन कम से कम करें. लाल मांस को अपने डाइट चार्ट में से निकाल दें और फल व सब्जियों को शामिल कर लें.
. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. इससे न केवल अतिरिक्त वसा जल जाएगी बल्कि आपका कोलेस्ट्रॉल और भार भी नियंत्रण में रहेगा.
. तनाव से बचें और प्रसन्न रहने का प्रयास करें.
. ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना हार्ट अटैक से बचने का एक महत्वपूर्ण तरीका है.
. धूम्रपान और शराब का सेवन न करें.
.  हृदय रोग अनुवांशिकी से सीधे संबंधित हैं. जिनके माता-पिता या भाई-बहनों को हृदय रोग है उन्हें  दोगुनी सावधानी बरतनी चाहिए
उपचार की नई तकनीकें
हृदय रोगों को एक गंभीर स्वास्थ्य  समस्या  माना जाता है. ऐसे उपाय अपनाएं जिससे आपके इनकी चपेट में आने की आशंका ना हो लेकिन अगर आप इनकी चपेट में आ भी जाएं तो घबराएं नहीं आजकल नई-नई तकनीकें उपलब्ध हैं जो जीवन बचाने वाली मानी जातीं हैं इसलिये यह जरूरी है कि हृदयरोगों के लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
एंजियोप्लॉस्टी और बायपास सर्जरी
हृदय की मांसपेशियों को बचाने के लिये सबसे आवश्यक यह है कि भोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति फिर से प्रारंभ की जाए. इसके लिये एंजियोप्लॉस्टीज एक कारगर उपचार माना जाता है जिसने हार्ट अटैक से मरने वाले लोगों की संख्या में कमी की जा सकती है. पहले रक्त के धक्के को घुलने के लिये दवाइयां दी जाती थीं लेकिन यह उस विशेष स्थान पर पहुंचने के बजाय पूरे शरीर में फैल जाती थीं जिससे कभी-कभी ब्लीडिंग की समस्या हो जाती थी. प्राथमिक एंजियोप्लॉस्टी में रक्त नलिकाओं में जमे क्लॉट को स्क्रीन पर देखा जा सकता है, इसे निकालकर रक्त के प्रवाह को पुन: प्रारंभ किया जाता है. आवश्यकता पडऩे पर एडवांस एंजियोप्लॉस्टी की जाती है जिसमें धमनियों में रक्त के प्रवाह को सुधारने के लिये एक लचीली नली डाली जाती है जिसे स्टेंट कहते हैं. इसके अलावा रक्त के प्रवाह को सुधारने के लिये बायपास सर्जरी भी की जाती है जिसमें सर्जरी के द्वारा हृदय की क्षतिग्रस्त धमनियों को शरीर के किसी अन्य क्षेत्र की रक्त नलिकाओं से बदल दिया जाता है. 
एऑरटिक वॉल्व रिप्लेसमेंट
अगर हृदय का कोई वॉल्व ठीक प्रकार से काम नहीं कर रहा है तो इसे बदलने के लिये सर्जरी आवश्यक है. इस वॉल्व को निकालकर उसके स्थान पर कृत्रिम वॉल्व लगा दिया जाता है.
हृदय प्रत्यॉरोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट)
इसमें बीमार या क्षतिग्रस्त हृदय को निकालकर उसके स्थान पर स्वस्थ हृदय को लगा दिया जाता है. इस प्रक्रिया का उपयोग हार्ट फेलियर से पीडि़त लोगों के लिये अंतिम उपचार के रूप में किया जाता है. इस प्रक्रिया में उन लोगों का हृदय लिया जाता है जिन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया हो. इसे डोनर के शरीर से निकालने के बाद छह घंटे के अंदर प्रत्यारोपित करना आवश्यक है.  इस सर्जरी के सफल होने की संभावना 30 प्रतिशत होती है.  डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव लाना सबसे जरूरी है क्योंकि इसके बगैर कोई दवाई या उपचार कारगर साबित नहीं हो पाएगा.