World Poetry Day

World Poetry Day

World Poetry Day

मैं जब भी अकेला होता हूं
क्यों ज़ख़्म हरे हो जाते हैं

क्यों याद मुझे आ जाती हैं
वो बातें सारी दर्द भरी

मैं जिनको भूल नहीं पाता
वो घाव कितने गहरे हैं

किस-किसने दिए हैं ग़म कितने
किस-किसका नाम मैं लूं हमदम

जिस-जिसने मुझपे वार किए
वो सारे अपने थे हमदम

एक बात समझ में आई है
है चलन यही इस दुनिया का

जिस पेड़ ने धूप में छांव दी
उस पेड़ को जड़ से काट दिया…

 

वेद प्रकाश पाहवा ‘कंवल’

 

यह भी पढ़े: Shayeri