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Exclusive Interview: जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है… रेसलर संग्राम सिंह (When The World Says ‘Give UP’ Hope Whispers, Try It One More Time: Wrestler Sangram Singh)

Wrestler Sangram Singh Interview

मैंने सूरज को कैद किया था आंखों में, मैंने चांद उगाया था हथेली पर… स्याह रातें जब अंधेरा बिखेर रही थीं, मैंने उम्मीद का चिराग़ जलाया था अपनी पलकों पर… थककर रुक जाता, तो वहीं टूट जाता… रास्ता बदल देता, तो हर ख़्वाब पीछे छूट जाता… चलता रहा मैं कांटों पर भी, रुक न सका मैं उलझी हुई राहों पर भी… अपने पैरों की बेड़ियों को तोड़ दिया जब मैंने, सारी दुनिया ने कहा, हर नाउम्मीदी को बड़े जिगर से पीछे छोड़ दिया मैंने… लोग कहते थे लड़ना छोड़ दे, यही तेरी नियति है प्यारे… मैंने कहा, जो लड़ने से डर जाए, वो इंसान नहीं, जो नियति से हार जाए, वो संग्राम नहीं… क्या कोई सोच सकता है कि बचपन के आठ साल व्हील चेयर पर गुज़ारने के बाद कोई बंदा पहलवानी की दुनिया को अपने दम पर इस क़दर जीत सकता है कि आज बड़े अदब और सम्मान से उसका नाम लिया जाता है. उसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पहलवान कहा जाता है… जी हां, हम बात कर रहें हैं रेसलर संग्राम सिंह (Wrestler Sangram Singh) की. क्या था उनका संघर्ष और कैसे लड़े वो अपनी नियति से, आइए उन्हीं से पूछते हैं…

Wrestler Sangram Singh Interview

आपको बचपन में आर्थराइटिस था लेकिन वहाँ से लेकर वर्ल्ड के बेस्ट रेस्लर बनने तक की जर्नी कैसी रही आपकी?

बचपन में मुझे रूमैटॉइड आर्थराइटिस हुआ था. जब मैं 3 साल का था, तो पैरों में दर्द हुआ और फिर पैरों में गांठ-सी बन गई. चूंकि मैं हरियाणा के रोहतक डिस्ट्रिक्ट के मदीना गांव से हूं, तो मेरे पैरेंट्स भी बहुत ही सिंपल हैं और उस समय इतनी जानकारी नहीं थी, सुविधाएं नहीं थीं और न ही इतने पैसे थे, सो मुझे कभी इस डॉक्टर को दिखाया, तो कभी किसी दूसरे को. इसी में इतना समय निकल गया कि जब बड़े हॉस्पिटल में डॉक्टर्स को दिखाया गया, तो उन्होंने सीधेतौर पर कह दिया कि यह बीमारी तो मेरी मौत के साथ ही ख़त्म होगी. लेकिन मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ मेरी भी इच्छाशक्ति थी कि 8 साल तक व्हील चेयर पर रहने के बाद आज मैं रेसलर हूं.
दरसअल मेरे बड़े भाई स्टेट लेवल के रेसलर थे, तो मैंने भी टूर्नामेंट यानी दंगल के बारे में सुना कि उन्हें घी-दूध सब मिलता है, तो मैं उसके साथ दंगल देखने गया. दंगल देखकर मुझे न जाने क्यों यह महसूस हुआ कि काश मैं भी रेसलर बन सकता. फिर अपने दोस्त को कहा कि मुझे अखाड़े में लेकर चल. वहां गया, तो सब मुझे देखकर मेरा मज़ाक उड़ाने लगे. अखाड़े के उस्ताद ने भी मुझसे पूछा कि आप क्या करना चाहते हो, तो मैंने अपने मन की बात कही कि मैं भी रेसलर बनना चाहता हूं. मेरी बात सुनकर उन्होंने भी यही कहा कि अगर भी आप बन गए, तो सब बन जाएंगे… खंडहर देखकर इमारत का पता चल जाता है… इत्यादि बातें… न जाने क्या कुछ नहीं कहा उन्होंने मुझे.
लेकिन मेरी मां ने गिवअप नहीं किया और न मैंने हिम्मत हारी. आप सोच सकते हैं कि गांव में नेचर कॉल के लिए भी बाहर जाना पड़ता था, हमारे पास व्हील चेयर तक के पैसे नहीं होते थे… मैं सुबह उठ तो जाता था, आंखें खुल जाती थीं, लेकिन मेरी बॉडी मूव नहीं होती थी. 8 साल तक बिस्तर पर पड़े रहना आसान नहीं था, क्योंकि यह बीमारी मेरे शरीर में फैलती जा रही थी. हर जॉइंट में आ गई थी. यहां तक कि मैं अपना मुंह भी खोलता था, तो मुझे दर्द होता था. मैं हर रोज़ जीने की एक नई कोशिश करता था, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए संघर्ष करता था… मेरा यही मानना है कि यदि इंसान हिम्मत न हारे, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं… मुझे प्रोफेशनल रेसलिंग में वर्ल्ड के बेस्ट रेसलर का टाइटल मिला, तो मैं यही कहूंगा कि जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है.
यही वजह है कि अपने इस संघर्ष को मैं भूलता नहीं और मैं उन बच्चों की हर तरह से मदद करने की कोशिश करता हूं, जो इस बीमारी से पीड़ित हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई, रोज़ी-रोटी के लिए मुझसे जो बन पड़ता है, मैं ज़रूर करने की कोशिश करता हूं. दरअसल, हम स़िर्फ एक ज़रिया हैं, भगवान ही सब कुछ करता है.

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आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में फिटनेस कितनी महत्वपूर्ण है? और आप अपनी फ़िट्नेस के लिए क्या कुछ ख़ास करते हैं?

फिटनेस के लिए आप कहीं भी समझौता नहीं कर सकते और न करना चाहिए. ख़ासतौर से आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में. यह एक ऐसा इंवेस्टमेंट है कि कोई भी मुझसे पूछे, तो यही कहूंगा कि अपने शरीर में इंवेस्ट करो रोज़ाना, चाहे एक घंटा, दो घंटा या जब भी, जितना भी टाइम मिले, आपको अपने शरीर में इंवेस्टमेंट करना चाहिए, क्योंकि शेयर मार्केट हो या आपका बिज़नेस हो, वो आपको धोखा दे सकता है, लेकिन यह शरीर धोखा नहीं देगा. मैं फिटनेस के लिए हर रोज़ 3 घंटे वर्कआउट करता ही हूं, चाहे कितना ही बिज़ी क्यों न होऊं. कोशिश करता हूं अलग-अलग चीज़ें करने की, जो मैं 15 साल की उम्र में नहीं कर पाता था, वो वर्कआउट मैं आज करता हूं. रेसलिंग भी करता हूं. युवाओं को मोटिवेशनल स्पीच भी देता हूं, टीवी शोज़ करता हूं, फिल्म भी कर रहा हूं. तो हर चीज़ बैलेंस करने की कोशिश करता हूं. 5-6 घंटे सोता हूं.

अपने डाइयट कि बारे में बताइए…

मैं प्योर वेजीटेरियन हूं. मेरा यही मानना है कि यदि ज़िंदगी में आपको सच में स्ट्रॉन्ग बनना है, आगे बढ़ना है, तो खाओ कम, काम ज़्यादा करो. एक और दिलचस्प बात ज़रूर करना चाहूंगा, हालांकि मैं किसी की बुराई नहीं करना चाहूंगा, लेकिन जैसे हम जिम में जाते हैं, तो ट्रेनर डरा देते हैं कि अरे, आपका वज़न इतना है, तो आपको तो इतने ग्राम प्रोटीन खाना है… आप 70 किलो के हैं, तो और ज़्यादा प्रोटीन खाओ… सब वहम की बातें हैं. आप ख़ुद अपने डायट का ध्यान रखो, हेल्दी खाओ. पानी पीओ. सूखी रोटी और प्याज़ में भी इतनी ताकत और विटामिन होते हैं, जितना किसी बड़े होटल के खाने में भी नहीं होंगे. हर रोज़ वर्कआउट करो, ख़ुश रहो. अच्छी हेल्थ का यही फॉर्मूला है कि खाना भूख से कम, पानी डबल, वर्कआउट ट्रिप्पल और हंसना चार गुना.
मैं सुबह दलिया खाता हूं. आंवला-एलोवीरा का जूस लेता हूं. अश्‍वगंधा, शहद, गुड़, दूध, रोटी, दाल-सब्ज़ी और घी. यह सभी चीज़ें संतुलित रूप से खाता हूं. आजकल एक मूवी के लिए वज़न कम कर रहा हूं. 20 किलो वज़न कम किया है, इसलिए संतुलन ज़रूरी है.

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रेसलिंग को आज इंडिया में किस मुक़ाम पर देखते हैं?

रेसलिंग आज इंडिया में क्रिकेट बाद नंबर 2 स्पोर्ट है, जबकि क्रिकेट में तो प्रोफेशनलिज़्म बहुत पहले से था, लेकिन अब यह अन्य स्पोर्ट्स में भी आ रहा है. इसी तरह रेसलिंग भी आगे बढ़ रहा है, लोग भी काफ़ी जागरूक हुए हैं. सुविधाएं भी बढ़ी हैं. एक समय था, जब इतनी जागरूकता और फैसिलीटीज़ नहीं थीं, लेकिन अब वैसा नहीं है. हमें मेडल्स भी मिलते रहे हैं. जब किसी और स्पोर्ट्स में ऑलिंपिक्स या अन्य टूर्नामेंट में हमें मेडल्स नहीं मिल रहे थे, तब रेसलिंग ही थी, जहां हमें मेडल्स मिले. इसके बाद अब तो बहुत-से स्पार्ट्स हैं, जो आगे बढ़ रहे हैं. कुल मिलाकर रेसलिंग को आज बेहद सम्मान मिलने लगा है और यह आगे और बढ़ेगा.

आपने हाल ही में के डी जाधव चैंपियनशिप शुरुआत की उसके विषय में बताइए?

के डी जाधव जी जैसा कोई दूसरा नहीं हुआ देश में. वे बेहद सम्मानित हैं और उनका दर्जा बहुत ऊंचा है. वे पहले भारतीय थे, जिन्होंने कुश्ती में हमें ओलिंपिक मेडल दिलाया था. मैं चाहता हूं कि लोग उनके बारे में और जानें, ताकि युवाओं को प्रेरणा मिले, इसलिए मैं दिल से चाहता था कि उनके लिए कुछ कर सकूं, तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी उन्हें.

यह भी पढ़ें: आज मैं अपने सपने को जी रही हूं… श्‍वेता मेहता: फिटनेस एथलीट/रोडीज़ राइज़िंग 2017 विनर 

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इंडियन रेसलर्स कितने प्रोफेशनल हैं अगर विदेशी प्लेयर्स से कम्पेयर करें तो…

हम काफ़ी प्रोफेशनल हैं और अब तो हम किसी भी तरह से विदेशी प्लेयर्स से पीछे नहीं हैं. चाहे टेकनीक हो या फिटनेस- हर स्तर पर हम उन्हें तगड़ा कॉम्पटीशन दे रहे हैं और भारतीय पहलवान तो अब दुनियाभर में नाम कमा रहे हैं, सारा जग उनका लोहा मान चुका है.

यहां सुविधाएं कैसी हैं? क्या बदलाव आने चाहिए?

सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. प्रशासन की तरफ़ से भी बहुत गंभीरता से लिया जाता है हर चीज़ को, इसलिए पहले जो द़िक्क़तें हुआ करती थीं, वा अब नहीं हैं. बदलाव तो यही है कि हम और बेहतर करें, आगे बढ़ें. जो ग़रीब बच्चे हैं, जिनमें हुनर है, उन्हें ज़रूर बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए, ताकि वे बेहतर स्पोर्ट्समैन बन सकें. अब तो महिलाएं भी ख़ूब नाम कमा रही हैं रेसलिंग में भी और अन्य खेलों में भी. तो बस, उन्हें बढ़ावा मिलना चाहिए. हम भी अपने स्तर पर प्रयास करते ही हैं.

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आप मोटिवेशनल स्पीकर और स्पोर्ट्स सायकोलॉजिस्ट भी हैं, तो फैंस और आम लोगों को कोई संदेश देना चाहेंगे?

मैं यही कहना चाहूंगा कि जीवन में कभी भी निराश मत होना. उम्मीद का दामन कभी मत छोड़ना. अपने प्रयास हमेशा जारी रखना. मंज़िल ज़रूर मिलेगी. मैं भी अगर अपनी कोशिशें छोड़ देता, मेरी मां भी थक-हरकर नाउम्मीद हो जाती, तो कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंचता. बाकी तो ऊपरवाले का साथ और चाहनेवालों की दुआएं तो हौसला देती ही हैं. फैंस ने मुझे काफ़ी प्यार दिया, मैं भी अपनी तरफ़ से जितना संभव हो सके, करने की कोशिश हमेशा करता रहा हूं और करता रहूंगा.

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स्ट्रेस दूर करने के लिए क्या करते हैं?

स्ट्रेस को दूर करने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है वर्कआउट. मैं दुखी होता हूं, तो वर्कआउट करता हूं, ख़ुश होता हूं, तो भी वर्कआउट करता हूं. स्ट्रेस को दूर करने का सिंपल सा उपाय है, यहां सब कुछ टेम्प्रेरी है. चाहे दुख हो, तकलीफ़ हो, स्ट्रेस हो… यहां तक कि ख़ुशियां भी टेम्प्रेरी ही हैं. तो जब सब कुछ टेम्प्रेरी है, तो यहां किस चीज़ के लिए दुखी होना, उदास होना. मैं स़िर्फ 500 लेकर मुंबई आया था और आज भगवान की दया से इतना कुछ कर रहा हूं, लेकिन मैं अगर आज भी वापस जाता हूं, तो भी बहुत ख़ुश रहूंगा, क्योंकि इतने लोगों का प्यार मिला, सब कुछ मिला, तो दुख किस बात का. मैं अब यहां हूं, तो ढेर सारे बच्चों की मदद का ज़रिया बन रहा हूं, क्योंकि मैं भी तो उस जगह से आया हूं, जहां रनिंग करते समय पैरों में जूते नहीं होते थे, बस का किराया नहीं होता था, 20 कि.मी. पैदल चलता था नंगे पैर. क्योंकि एक जोड़ा जूते-चप्पल होते थे, जो टूट जाते थे. आज मालिक का दिया हुआ सब है, तो किस बात की शिकायत और किस बात का स्ट्रेस. मैं तो आप सबसे भी यही कहूंगा कि जो नहीं है, उसका स्ट्रेस न लो, जो है, उसके लिए ईश्‍वर को धन्यवाद कहो और ख़ुश रहो.

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आज की लाइफस्टाइल में कैसे पॉज़िटिव और फ़िट रहा जाए उसके लिए आपके स्पेशल टिप्स?

आज की लाइफस्टाइल में फिट और पॉज़िटिव रहने के लिए थोड़ा-सा अपनी लाइफ में डिसिप्लिन लाओ. शेड्यूल बनाओ, घर का खाना खाओ. फैमिली के साथ समय बिताओ. अपने पैरेंट्स के साथ, भाई-बहन, दोस्तों के साथ, पार्टनर के साथ हंसों, खेलो, शेयर करो. माता-पिता का आशीर्वाद लो. छोटी-सी ये ज़िंदगी है, पता नहीं कल क्या हो, कल किसने देखा और ज़िंदगी में किसी को भी कम मत आंको. कहते हैं न कि बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखाती है. एक प्यारी-सी तितली को देखा है आपने कभी, कितनी रंग-बिरंगी, कितनी चमक होती है उसमें, जबकि उसकी ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, फिर भी वो अपने रंगों से लोगों को आकर्षित करते ख़ुशियां देती है. तो हमें ज़िंदगी में किस बात का तनाव? हमें तो इतना कुछ मिला है, बस उसकी कद्र करने का हुनर आना चाहिए. हमेशा ख़ुश रहो, नए-नए अवसरों को क्रिएट करने का प्रयास करो. अगर आज नहीं हुआ, तो कल होगा, कल नहीं, तो परसों हो जाएगा… कहां जाएगा यार, सारी चीज़ें यहीं तो हैं. कई बार आख़िरी चाभी ताला खोल देती है. तो प्रयास जारी रखो.

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जन्मदिन मुबारक सुशील कुमार (Happy Birthday Sushil Kumar)

Wrestler Sushil Kumar

sushil-kumar

जन्मदिन मुबारक सुशील कुमार (Happy Birthday Sushil Kumar)
  • मज़बूत इरादे और अपने पेशे की इबादत आपको ज़िंदगी में उस मुकाम पर पहुंचा देती है, जहां सभी आपका नाम अदब से लेते हैं और ऐसा ही मुकाम हासिल किया है पहलवान सुशील कुमार ने.
  • ऐसा सितारा जिस धरती पर जन्म लेता है, वो धरती ख़ुद को धन्य समझती है.
  • हम धन्य हैं कि भारत का यह सुपूत भारत का नाम पूरे विश्‍व में रोशन कर रहा है.
  • सुशील कुमार को उनके जन्मदिन पर मेरी सहेली की ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं! (happy birthday)
  • भारत को ओलिंपिक्स में दो बार मेडल दिला चुके सुशील कुमार साधारण परिवार में जन्मे थे, लेकिन उन्होंने अपनी शख़्सियत को साधारण नहीं रहने दिया.
  • ओलिंपिक्स में अपने ब्रॉन्ज़ मेडल को सिल्वर में तब्दील करनेवाले सुशील आज वर्ल्ड रेसलिंग में जाना-माना नाम हैं.
  • अर्जुन अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म श्री से सम्मानित सुशील अब अपनी एकेडमी के ज़रिए देश के लिए अच्छे पहलवानों को तराशने के काम में लगे हुए हैं.

मुझे भी लग रहा था कि इस बार अपना राष्ट्रगान सुनना है, चाहे जो हो जाए- बजरंग पुनिया! (Exclusive Interview: Wrestler Bajrang Punia gives India first gold at Asian Wrestling Championship)

Bajrang Punia

किसी के क़दमों के निशां जब दूसरों के लिए मंज़िल का पता बन जाते हैं, तब यह एहसास होना लाज़मी है कि यह शख़्स मामूली तो बिल्कुल भी नहीं है. जिसकी नज़र सूरज पर हो और आसमान को क़दमों पर झुका देने का साहस, जिसके हर दांव पर विरोधी भी अदब से सर झुका रहे हों और जिसका नाम आज बेहद गर्व और ग़ुरूर से ले रही है दुनिया, आज की तारीख़ में वो शख़्स स़िर्फ एक ही है- बजरंग पुनिया!

जी हां, एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम के वर्ग में बजरंग ने भारत को गोल्ड दिलाकर देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. यह कीर्तिमान उन्होंने दक्षिण कोरिया के ली सुंग चुल को हराकर रचा. यह मुकाबला आख़िरी राउंड तक गया और शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद बजरंग आख़िर में अपने रंग में ही नज़र आए और सामनेवाले पहलवान को धूल चटाकर देश के लिए पहला गोल्ड लाए. उनकी इस अद्भुत जीत पर कई नामी हस्तियों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी. इस जीत को लेकर और कुश्ती के खेल को लेकर क्या कुछ कहते हैं बजरंग, आइए उनसे ही जानते हैं.

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किस तरह की ख़ास तैयारी की थी आपने?

तैयारी तो हर टूर्नामेंट से पहले करते हैं. लगातार प्रैक्टिस और ट्रेनिंग चलती रहती है, लेकिन अपने होम ग्राउंड पर मैच खेलने का अलग ही जोश होता है और लोगों की भी उम्मीद होती है कि हम होम ग्राउंड पर कुछ बेहतर करेंगे, इसलिए बस मन में ठान रखा था कि गोल्ड लेना ही है, क्योंकि जब मेडल जीतने के बाद अपना राष्ट्रगान बजाया जाता है, तो अलग ही किस्म के गर्व का अनुभव होता है. मुझे भी लग रहा था कि इस बार अपना राष्ट्रगान सुनना है, चाहे जो हो जाए.

यह एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में पहला स्वर्ण पदक है, क्या वजह है कि गोल्ड के लिए इतना इंतज़ार करना पड़ा?

कुश्ती भी एक गेम है और गेम में हार-जीत लगी रहती है. कोशिश तो करते ही हैं कि हम हमेशा बेहतर करें, पर कभी कामयाबी मिलती है, तो कभी नहीं मिलती. यह है कि हमारे प्रयासों में कमी नहीं आनी चाहिए. कोशिश जारी रहेगी, तो एक क्या और भी गोल्ड ज़रूर मिलेंगे.

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भारत में कुश्ती के भविष्य को लेकर क्या कहना चाहेंगे?

पहले से तो काफ़ी बढ़ा है गेम, इसके फॉलोअर्स भी बढ़े हैं. यह अपनी मिट्टी से जुड़ा खेल है, तो हमें अपने देसी खेल पर गर्व होना चाहिए और मैं यह देख रहा हूं कि लोगों में कुश्ती के प्रति जागरूकता, सजगता और लगाव अब बढ़ रहा है. हमें लोग पहचानते हैं, प्यार करते हैं और रेसलिंग से अब लोगों को काफ़ी उम्मीदें भी हैं. कुल मिलाकर यही कहा जाएगा कि कुश्ती का भविष्य बहुत उज्ज्वल है.

लीग के आने से क्या फ़ायदा हुआ है?

लीग से काफ़ी फ़ायदा हुआ है, क्योंकि इसमें वर्ल्ड के बेस्ट रेसलर्स पार्टिसिपेट करते हैं और उन पहलवानों से जब हमारा सामना होता है, तो हमें अपनी कमियां भी पता चलती हैं और अपनी स्ट्रेंथ भी. हम अपनी कमज़ोरियों पर और काम करते हैं और अपनी स्ट्रेंथ को और बेहतर कर सकते हैं.

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कुश्ती को लेकर क्या विश्‍व स्तर की सुविधाएं भारत में हैं?

जी हां, सुविधाएं काफ़ी अच्छी हैं. कहीं कोई कमी नहीं. हमें सामने से कहा जाता है कि आपको क्या चाहिए बताओ… हर सुविधा मिलेगी आप बस मेडल लेकर आओ. तो सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, चाहे ट्रेनिंग को लेकर हो या खाने-पीने को लेकर सब सही दिशा में चल रहा है.

आप फिटनेस के लिए क्या ख़ास करते हैं?

हफ़्ते में एक-दो बार जिम करता हूं और मैं फुटबॉल व बास्केट बॉल भी खेलता हूं, क्योंकि दूसरे स्पोर्ट्स से आपकी स्ट्रेंथ बढ़ती है और आप मेंटली भी फ्रेश महसूस करते हैं. इसके अलावा बेसिक ट्रेनिंग तो होती ही है.

डायट किस तरह की लेते हैं?

बहुत ही सिंपल. मैं वेजीटेरियन हूं, तो शुद्ध देसी भोजन करता हूं.

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हमने सुना है कि भारतीय पहलवान चूंकि नॉन वेज नहीं खाते, तो उनकी फिटनेस का स्तर विदेशी पहलवानों से थोड़ा कम होता है, यह बात कितनी सही है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. शाकाहार में भी शक्ति होती है. अगर ऐसा नहीं होता, भारतीय पहलवान दुनिया में विश्‍वस्तर पर इतना नाम नहीं कमाते. आप इसी से अंदाज़ा लगा लीजिए कि हाथी सबसे शक्तिशाली जानवर होता है और वो शुद्ध शाकाहारी है. यह सब कहने की बात है, वेज-नॉन वेज तो पर्सनल चॉइस है. इसका फिटनेस से कोई ख़ास लेना-देना नहीं है.

अपने फैंस को कुछ कहना चाहते हैं?

फैंस को धन्यवाद कहना चाहूंगा, अब तक सपोर्ट किया. आगे भी सपोर्ट करते रहें. कुश्ती सबसे पुराना खेल है, देसी गेम है. फैंस जितना फॉलो करेंगे, उतना ही गेम को बढ़ावा मिलेगा.

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योगेश्‍वर दत्त आपके गुरु भी हैं, भाई भी हैं, दोस्त भी हैं और मार्गदर्शक भी, उनके लिए कुछ कहना चाहेंगे.

योगी भइया के लिए तो मेरे पास शब्द नहीं हैं. जो हूं, उनकी ही वजह से हूं. उन्हें दिल से धन्यवाद कहूंगा. बाकी तो अगर मैं उनके बारे में कुछ कहना चाहूं तो, शब्द कम पड़ जाएंगे. उनका सहयोग ही है, जो मुझे हौसला देता है.

आगे के गेम्स के लिए क्या तैयारी है? अगले ओलिंपिक्स के लिए कुछ गेम प्लान होगा?

अभी तो वर्ल्ड चैंपियनशिप है, बाकी भी इवेंट्स हैं, उनमें अच्छा करना है. चाहे ओलिंपिक्स हो या अन्य इवेंट बस यही ध्यान रखना है कि इंजिरी न हो. चोट से बचना ही सबसे बड़ा चैलेंज है, वरना तैयारी तो पूरी है.

– गीता शर्मा

 

Wedding Bell: सत्यव्रत की हुईं साक्षी मलिक (Wrestler Sakshi Malik Gets Married To Wrestler Satyawrat)

Sakshi Malik

हाल ही में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित भारत की स्टार रेस्टलर साक्षी मलिक अपने मंगेतर सत्यव्रत के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. साक्षी की शादी की डेट पिछले साल ही निर्धारित कर दी गई थी. रियो ओलिंपिक 2016 में भारत की ओर से पहला मेडल जीतनेवाली साक्षी ने पिछले साल ही सगाई की थी. मीडिया से शादी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा था कि अभी शादी की तारीख़ में देरी है. बहरहाल, साक्षी को मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से शादी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

सत्यव्रत रोहतक स्थित अपने आवास से बरात लेकर पहुंचे. साक्षी वहां तक सिंड्रेला बग्घी में बैठकर आईं. वरमाला की रस्म अदा की गई. इस शादी में किसी तरह की लेन-देन नहीं की गई. सत्यव्रत के अखाड़े में संपन्न हुई टीके की रस्म अदा की गई. दूल्हे सत्यव्रत ने लग्न टीका में महज़ चांदी का एक सिक्का स्वीकार किया. वहीं साक्षी और सत्यव्रत ने मंगलगीत के बीच अपने घरों पर परंपरागत रस्में निभाई.

Sakshi Malik

मेंहदी लगवाते हुए साक्षी मलिक. इस फोटो को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर किया था और साथ में मैसेज भी लिखा था. आप भी देखिए, क्या था वो मैसेज.

शादी से पहले साक्षी और सत्यव्रत ने कुछ इस तरह से फोटोशूट कराया. इसमें दोनों एक स्लेट पर लिखी अपनी वेडिंग डेट शो कर रहे हैं. दोनों इस फोटो में बेहद क्यूट लग रहे थे. शादी के पहले अपनी शादी की डेट को कुछ इस अंदाज़ में बयां करना ये अलग अंदाज़ था.

Sakshi Malik

आप भी देखें शादी की कुछ और फोटोज़.

Sakshi Malik

Sakshi Malik

Sakshi Malik

Sakshi Malik

Sakshi Malik

 

Reel vs Real: गीता फोगट की असली कुश्ती, जो दंगल में नहीं दिखी (Reel vs Real: Dangal missed Geeta’s real wrestling)

Geeta Phogat

आमिर ख़ान स्टारर फिल्म दंगल दर्शकों के बीच ख़ूब प्रशंसा बटोर रही है, लेकिन साथ ही फिल्म में गीता फोगट की फाइट को लेकर भी ख़ूब चर्चा हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि रील और रियल फाइट में बहुत अंतर है. लोगों का मानना है कि उस असली मोमेंट को फिल्म में दर्शाने में निर्देशक असफल रहे. हम आपको बता दें कि 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता फोगट ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने के साथ ही भारत की पहली महिला रेसलर बन गई थी. आप भी देखें गीता फोगट की असली कुश्ती.

एक्सक्लूसिव इंटरव्यू- योगेश्‍वर दत्त का बेबाक अंदाज़! (Exclusive Interview of Star Wrestler Yogeshwar Dutt)

हर अंदाज़ बेबाक, हर बात लाजवाब… ज़िंदगी के दांव-पेंच हों या कोई दंगल… मैट पर विरोधियों को चित्त कर देने की कला हो या अपने बुलंद हौसलों से आलोचना करनेवालों का मुंह बंद कर देने की अदा… सबमें माहिर है यह एक शख़्स, जिसे हम कहते हैं योगेश्‍वर दत्त!

जी हां, पहलवानी के दांव-पेंच से तो वो हमारा दिल जीत ही चुके हैं, ऐसे में समाज व खेल से जुड़े मुद्दों पर भी अपने बेबाक अंदाज़, अपनी राय और अपनी बात खुलकर कहने का जिगर रखनेवाले 2012 के लंदन ओलिंपिक्स के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट (60 कि. ग्रा. फ्रीस्टाइल कुश्ती) योगेश्‍वर दत्त ने हमें अपना समय दिया, हमसे बात की. तो जानते हैं उन्हें और क़रीब से. खेल के बारे में वो क्या सोचते हैं, उन्हीं से पूछते हैं.

वैसे भी जनवरी से प्रो रेसलिंग लीग फिर शुरू होने जा रही है, जहां दुनियाभर के बेहतरीन पहलवानों का जमावड़ा लगेगा और आपको देखने को मिलेंगे उनके लाजवाब दांव-पेंच. जल्द ही इसका ऑक्शन भी होगा. ऐसे में भारत के फेवरेट योगेश्‍वर दत्त (Yogeshwar Dutt) क्या कहते हैं पहलावानी व प्रो रेसलिंग लीग के बारे में, यह जानना भी दिलचस्प होगा.

Yogeshwar Dutt

योगी सर सबसे पहले तो कॉन्ग्रैचुलेशन्स आपकी एंगेजमेंट के लिए.
जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका.

बात रेसलिंग की करें, तो रेसलिंग का फ्यूचर कैसा है भारत में?
रेसलिंग का फ्यूचर बहुत ही अच्छा है, क्योंकि पिछले कुछ समय में, ख़ासतौर से 10-15 सालों में रेसलिंग काफ़ी बढ़ी है, क्योंकि लगातार 3 ओलिंपिक्स में मेडल आना कुश्ती से, यह बहुत बड़ी बात है.

जिस तरह की सुविधाएं कुश्ती को मिलती हैं, इसमें सुधार की कितनी गुंजाइश है?
हमें सुविधाएं तो पहले से ही काफ़ी अच्छी मिलती हैं, लेकिन आज भी ग्रास रूट पर काम करने की बेहद ज़रूरत है, क्योंकि खिलाड़ी गांव-देहात से ही निकलते हैं और वहां पर इतनी सुविधाएं नहीं हैं. सरकार कोशिश में लगी हुई है, पर आज भी वो सुविधाएं नहीं हैं, जो होनी चाहिए और जब तक ज़मीनी स्तर पर हम मज़बूत नहीं होंगे, तब तक वो नहीं हो पाएगा या उस तरह के परिणाम नहीं आएंगे, जैसा हम चाहते हैं. ऐसे में स्कोप उतना नहीं होगा, जितना हम अपेक्षा रखते हैं. ग्रास रूट मज़बूत होगा, तो अपने आप प्रतिभाएं निकलकर आएंगी और चाहे ओलिंपिक हो या वर्ल्ड चैंपियनशिप हमारे मेडल बढ़ेंगे.

Yogeshwar Dutt

आप लोग विदेशी प्लेयर्स के साथ खेलते हैं, तो उनमें और हम में क्या कुछ फ़र्क़ पाते हैं? चाहे फिटनेस हो या तकनीक?
विदेशी या इंटरनेशनल पहलवान जो होते हैं, तो कम वेट कैटेगरी में तो हम में कोई फ़र्क़ नहीं है, चाहे पावर हो, टेकनीक हो या फिटनेस हम सब समान हैं, क्योंकि हमारे पास 2003 से जॉर्जिया कोच हैं और उनके आने के बाद काफ़ी कुछ बदला है. हमारी परफॉर्मेंस भी बेहतर हुई है. हां, जहां तक ज़्यादा वेट कैटेगरी का सवाल है, तो वहां पावर में थोड़ा 19-20 हो जाता है, लेकिन अब वो भी दूर हो रहा है, क्योंकि अब हर पहलवान का लक्ष्य यही है कि ओलिंपिक में मेडल लाना है, जिससे वो अधिक फोकस्ड हो गए हैं. मन में जब एक लक्ष्य हासिल करने की ठान ही ली है, तो इससे सोच बदल गई है और इसी से हमें बहुत फ़ायदा मिलेगा.

आप अपनी फिटनेस के लिए क्या ख़ास करते हैं?
फिट रहने के लिए मेहनत तो बहुत ज़रूरी है ही, पर मैं डेली 5 स्टैंडर्ड ट्रेनिंग करता हूं. अलग-अलग दिन अलग शेड्यूल है हमारा. सुबह कभी गेम होता है, कभी क्रॉस कंट्री, तो कभी वेट ट्रेनिंग होती है. शाम को डेली मैट करते हैं. हफ़्ते में दो दिन- मंगलवार व शुक्रवार को दोनों टाइम मैट होता है हमारा.

डायट में क्या ख़ास ख़्याल रखते हैं? आपका मनपसंद खाना क्या है?
खाने में तो ऐसी कोई चॉइस नहीं है, कुछ भी मिल जाए, वही खा लेता हूं. घर का खाना खाता हूं, प्योर वेजीटेरियन हूं. मम्मी के हाथ के परांठे अच्छे लगते हैं और भिंडी की सब्ज़ी भी पसंद है.

Yogeshwar Dutt

जो युवा कुश्ती में अपना फ्यूचर देखते हैं, उन्हें क्या टिप्स देना चाहेंगे?
जो युवा कुश्ती में अपना भविष्य तलाश रहे हैं, तो उन्हें अपना लक्ष्य बड़ा रखना चाहिए, उसी पर फोकस करना चाहिए, जिसके लिए बहुत ज़्यादा मेहनत की ज़रूरत होती है और यह मेहनत करनी ही चाहिए. क्योंकि मेहनत के बिना कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए अपना मक़सद बड़ा बनाइए. ओलिंपिक्स हो या वर्ल्ड चैंपियन बनना हो उसके लिए जी-जान से जुट जाना चाहिए.

प्रो रेसलिंग लीग ने रेसलिंग को और भी पॉप्युलर किया है व खेल को बढ़ावा भी मिला है, इस बारे में कुछ और बताना चाहेंगे?
प्रो रेसलिंग का पहला सीज़न लोगों द्वारा काफ़ी पसंद किया गया था और पिछली बार 6 टीम्स थीं, जिससे नए खिलाड़ियों को भी मौक़ा मिला और अपने घर में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल मिला, जिसका बहुत फ़ायदा हुआ. पूरे देश ने देखा, पहलवानों ने भी पसंद किया. कुश्ती पॉप्युलर हुई है लीग से. हालांकि कुश्ती में ओलिंपिक्स में जब से मेडल आने लगे, तो यह लोगों की पहली पसंद बन गई है, लेकिन लीग से सबसे बड़ा फ़ायदा यह हुआ कि जूनियर पहलवानों को भी अलग पहचान मिली है. विदेशी व इंटरनेशनल प्लेयर्स के साथ खेलने से उन्हें एक्सपोज़र भी मिला है.

अन्य खेलों के मुकाबले कुश्ती पॉप्युलर तो बहुत हुई है, लेकिन क्या इसमें उतना पैसा व सुविधाएं भी बढ़ी हैं?
अन्य खेलों से कंपेयर नहीं कर सकते, लेकिन यह है कि आज के टाइम में माहौल बहुत अच्छा है गेम के लिए, क्योंकि देश में इसे काफ़ी पसंद किया जाता है. जहां तक पैसों की बात है, तो उसकी भी कमी नहीं है. जो देश में दंगल होते हैं, उसमें काफ़ी अच्छा पैसा मिलता है.

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बात अगर ओलिंपिक्स की करें, तो इस बार क्या वजह थी कि जो प्लेयर्स ख़ासतौर से विदेशी प्लेयर्स भी, आपकी टेकनीक के कायल थे या आपके फैन्स को भी ऐसा लग रहा था कि शायद कोई सायकोलॉजिकल प्रेशर था कि आप वो परफॉर्मेंस नहीं दे पाए, तो इसके लिए अपने फैन्स को कुछ कहना चाहेंगे?
जहां तक रियो की बात है, तो इस बार परफॉर्मेंस अच्छी नहीं रही. मेहनत बहुत ज़्यादा की थी. मैं सफ़ाई नहीं दे सकता, क्योंकि मैं हार गया था, लेकिन बस वो मेरा दिन नहीं था. मेरी परफॉर्मेंस ख़राब रही थी, लेकिन अब इस नकारात्मक भाव को ही लेकर मैं आगे नहीं चल सकता या मैं उसी के बारे में सोच-सोच के उस दुख के साथ नहीं रह सकता कि कैसे और क्यों हो गया… लेकिन आगे यही कोशिश करूंगा कि ऐसी कुश्ती, इतनी ख़राब कुश्ती मैं कभी न लड़ूं, क्योंकि मेरी आज तक की सबसे ख़राब कुश्तियों में से उसे कह सकते हो आप. ऐसी कुश्ती मैं कभी लड़ा ही नहीं. मुझे नहीं पता कि वो क्या था, क्या नहीं था. मैं ख़ुद समझ नहीं पाया कि कैसे इतनी ख़राब परफॉर्मेंस हो गई थी, लेकिन अब मैं यही चाहता हूं कि उस चीज़ को भूलकर आगे बढ़ा जाए, आगे की तैयारी करूं, जिससे 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप है और 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छा कर सकूं.
मेरे जो फैन हैं, वो इस हार के बाद भी मेरे साथ थे और आगे भी मेरे साथ खड़े रहेंगे, क्योंकि वो मुझे बहुत प्यार करते हैं. उनसे यही कहूंगा कि दुखी न हों, मैं आगे की अपनी परफॉर्मेंस से उनकी सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगा.

आपके मेडल अपग्रेडेशन को लेकर जो आपने स्टैंड लिया, उसको काफ़ी सराहना मिली, तो इससे पता चलता है कि आप एक समझदार व सुलझे हुए इंसान हैं, तो कितना ज़रूरी होता है कि इतने बड़े प्लेयर को अपनी ज़मीन से जुड़े रहना?
जो रशियन पहलवान सिल्वर जीता था, उसकी रोड एक्सिडेंट में मौत हो चुकी थी, ऐसे में उसके परिवार के पास स़िर्फ उसकी यादें ही थीं, इसलिए मुझे यही लगा कि उसकी चीज़ें उसकी सौग़ात के रूप में उसके परिवार के पास ही रहें. किसी की मौत के बाद उसकी यादें ही तो परिवार के पास रह जाती हैं, तो मैं वो उनसे नहीं छीन सकता था.
मेरा यही मानना है कि खिलाड़ी हो या कोई भी, इंसान को हमेशा ज़मीन से जुड़े रहना चाहिए. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम कहां से निकलकर आए हैं, हमारी कौन-सी जगह है और लोगों ने हमें यहां तक पहुंचाया है. उन्होंने इतना मान-सम्मान दिया, तभी हम यहां तक आ पाए हैं. इन बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए.

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आप समाज व स्पोर्ट्स से जुड़े मामलों में भी खुलकर स्टैंड लेते हैं, जबकि कुछ स्पोर्ट्समैन ऐसा नहीं करते. आपके इसमें पॉज़िटिव-नेगिटिव कमेंट्स भी मिलते हैं, तो क्या इससे आपका हौसला टूटता है या अन्य प्लेयर्स को भी स्टैंड लेना चाहिए इन सब मामलों में?
सबके अपने विचार होते हैं. सबका अपना सोचने का नज़रिया होता है, बोलने का तरीक़ा होता है. मुझे जब लगता है कि यह ग़लत है, तो चाहे वो कोई भी मुद्दा हो, मैं उसके लिए बोलता हूं और जो नहीं बोलता वो उसका अपना नज़रिया है. सबका स्वभाव अलग होता है, कोई बोलना पसंद करता है, कोई चुप रहना पसंद करता है. मेरा यह मानना है कि मुझे जो ठीक नहीं लगता, उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता हूं, फिर चाहे वो खेल की बात हो या देश की, क्योंकि सबसे पहले हम हिंदुस्तानी हैं और अपने देश के लिए मैं समझता हूं कि बोलना चाहिए. यह हमारा फ़र्ज़ बनता है.
इसके बाद निगेटिव कमेंट भी मिलते हैं, तो मैं उसके बारे में नहीं सोचता, क्योंकि ये ज़िंदगी का हिस्सा है. किसी को भी, किसी की हर बात अच्छी नहीं लगती, पर अगर आप यह सोचकर कि कोई क्या बोलेगा, अपनी बात नहीं कहेंगे, तो ये भी ग़लत है. जिस मुद्दे पर आपको यह लगे कि हां, मुझे बोलना चाहिए, तो बोलना ही पड़ेगा और मैं बोलता हूं. ऐसे में मैं किसी की परवाह नहीं करता कि कोई मेरे बारे में क्या कहेगा.

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इस बार प्रो रेसलिंग लीग की तैयारी कैसी है?
इस बार मैं प्रो रेसलिंग में शायद नहीं खेलूंगा, क्योंकि उसी समय मेरी शादी होनेवाली है. मैं नहीं चाहूंगा कि मैं बीच में सीरीज़ को छोड़ूं, क्योंकि पिछली बार भी 4 कुश्ती के बाद ही मेरी नी में फिर दर्द उभर आया था, जिस वजह से मैं बीच से हटा था… और मुझे बीच से हटना पसंद नहीं है. इसलिए मैं सोचता हूं कि उसमें हिस्सा ही न लूं.

शुक्रिया अपना समय देने के लिए. आपके फ्यूचर के लिए ऑल द बेस्ट और आपकी शादी के लिए हमारी शुभकामनाएं!
बहुत-बहुत धन्यवाद आपका. थैंक्यू.

– गीता शर्मा

गीता फोगट की शादी की धूम: आमिर सहित पहुंचेंगे कई सेलेब (Wedding celebration of Geeta Phogat: Amir will be special guest)

पहलवानी के अखाड़े से शुरू हुई पहलवान गीता फोगट (Geeta Phogat) की ज़िंदगी की दूसरी इनिंग जल्द ही शुरू होनेवाली है. अखाड़े में दुश्मनों को पछाड़नेवाली गीता बस दो दिन में पवन के प्यार के झोकों में बहकर उनकी दुल्हन बन जाएंगी. महिला पहलवानों में दुनिया में देश का नाम रोशन करनेवाली गीता फोगट 20 नवंबर को अपने हमसफ़र पहलवान पवन के साथ शादी के बंधन में बंध जाएंगी. सबसे पहले तो गीता फोगट को मेरी सहेली की पूरी टीम की तरफ़ से आनेवाले जीवन के लिए बहुत-बहुत बधाई!

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अपने पुश्तैनी घर से 15 किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में गीता और पवन की शादी का समारोह आयोजित होगा. देश के नामी हस्तियों के शामिल होने के पूरे आसार हैं. हो भी क्यों न, शादी भी तो हमारी नामी पहलवान गीता फोगट की है. वैसे हमें पता है कि आप बेसब्री से ये जानना चाह रहे होंगे कि आख़िर गीता को डोली में बिठाकर हम सब से दूर ले जानेवाले दुल्हे मियां हैं कौन? तो चलिए हम ही आपको बता देते हैं.

कौन हैं पवन?
अब भई गीता अगर किसी से शादी करेंगी, तो लाज़मी है कि वो भी बड़ा दांव लगाने वाला ही होगा. जी हां, बिल्कुल सही समझा आपने. गीता फोगट का हाथ मांगनेवाला कोई और नहीं, बल्कि पहलवान पवन हैं. पवन ने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में 86 किग्रा. भार वर्ग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.

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…. और प्यार की कुश्ती में हार गए पवन अपना दिल
आमतौर पर हमारे भारतीय समाज में लड़के ही अपने प्यार का इज़हार करते हैं. गीता फोगट और पवन के केस में भी ऐसा ही हुआ. पहलवान पवन ने एक मैच में गीता को देखा और अपना दिल हार बैठे. दोनों ने एक-दूसरे से बातें कीं और उसी पल से एक-दूसरे के हो गए. पवन ने लगे हाथ अपने प्यार का इज़हार कर दिया और गीता ने उसे स्वीकार कर लिया.

पहलवानी पहले हनीमून बाद में
वैसे तो शादी के बाद कपल्स का पहला डेस्टिनेशन हनीमून पॉइंट होता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है. अब जब दोनों ही पहलवान हों, तो मैच को वरियता देना बनता ही है. असल में बात ये है कि शादी के तीसरे दिन ही गीता अपने मैच में उतरेंगी. दोनों ने पहलवानी पहले और हनीमून को बाद में टाल दिया है.

मेहंदी लगाकर मैट पर उतरेंगी गीता
हर तरह से गीता की शादी यादगार बननेवाली है. जहां दूसरी दुल्हनें मेहंदी लगाने के बाद एक क़दम भी नहीं चलतीं, वहीं गीता मैट पर उतरेंगी. जी हां, बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं आप. देश की पहली महिला ओलिम्पियन पहलवान गीता फोगट प्रो रेसलिंग लीग को लेकर इतनी गम्भीर हैं कि 20 नवम्बर को होने वाली अपनी शादी से एक दिन पहले तक कुश्ती का अभ्यास करती रहेंगी और शादी के तीन दिन बाद फिर अखाड़े में लौट आएंगी.

– श्वेता सिंह

साक्षी के सुल्तान सहित देश के पहलवानों ने लगाई पदकों की झड़ी (Indian wrestlers won many medals in Singapore commonwealth)

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बात चाहे रियो ओलिंपिक 2016 की हो या किसी दूसरे खेल इवेंट की, भारतीय खिलाड़ियों का जवाब नहीं. हर जगह वो अपना अच्छा प्रदर्शन करने के साथ ही मेडल के साथ दर्शकों का दिल जीतना नहीं भूलते. सिंगापुर में ख़त्म हुए कॉमनवेल्थ सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप के इंडियन मेन्स रेसलर ने एक बार फिर अपना दबदबा बनाए रखा.

सिंगापुर में चल रहे कॉमनवेल्थ सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों ने 13 गोल्ड सहित कुल 29 मेडल देश की झोली में डाले हैं. फ्री स्टाइल कैटिगरी के 61 किलोग्राम में हरफूल ने हमवतन विकास को हराकर गोल्ड मेडल जीता. इसी तरह 65 किलोग्राम कैटिगरी में बजरंग पुनिया ने राहुल मान को, 74 किलोग्राम कैटिगरी में जितेंदर कुमार ने संदीप काटे को और 125 किलोग्राम कैटिगरी में हितेंदर ने कृष्ण कुमार को हराकर गोल्ड जीता. 86 किलोग्राम कैटिगरी में दीपक को गोल्ड जबकि अरुण को ब्रॉन्ज़ मिला. फ्री स्टाइल कैटिगरी के 59 किलोग्राम में रविंदर सिंह ने हमवतन विक्रम को, 71 किलोग्राम कैटिगरी में दीपक ने रफिक को और 98 किलोग्राम कैटिगरी में हरदीप ने सचिन को हराकर गोल्ड अपने नाम किया.

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साक्षी के सुल्तान ने जीता स्वर्ण
रियो ओलिंपिक में देश को पहला मेडल दिलानेवाली साक्षी के मंगेतर सत्यव्रत ने पुरुष वर्ग से 97 किग्रा भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है.

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रितु फोगट ने दिलाया देश को गोल्ड
स़िर्फ पुरुष ही नहीं, महिला पहलवानों ने भी देश का नाम रोशन किया. रितु फोगट ने 48 किग्रा में गोल्ड जीता. 63 किग्रा में रेशमा माने ने स्वर्ण पदक देश की झोली में डाला. इसके अलावा बाकी महिला रेसलर ने भी कमाल का प्रदर्शन करते हुए सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में देश का गौरव बढ़ाया.

 

 

 

 

सुल्तान का टीज़र रिलीज़… दमदार लग रहे हैं सलमान खान

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पहलवान सुल्तान अली खान की बायोपिक सुल्तान का फर्स्ट टीज़र आउट हो गया है. 1 मिनट 25 सेकंड का ये टीज़र काफ़ी दमदार है. खुले अखाड़े में पहलवान सलमान ने अपने सामने वाले पहलवान को आसानी से उठाकर पटक दिया. बैंकगाउंड म्यूज़िक भी धमाकेदार है. प्रोमो में हरियाणा का शेर, हरियाणा की शान, हरियाणा की जान सुल्तान अली खान इन लाइन्स पर सलमान की एंट्री भी देखने लायक है. फिल्म में अनुष्का शर्मा भी हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें इस टीज़र में जगह नहीं मिली है. अनुष्का की पहलवानी देखने के लिए उनके टीज़र का इंतज़ार करना होगा, तब तक आप एंजॉय करें सुल्तान सलमान का ये दमदार अंदाज़.

सुल्तान का पहला दांव…फिल्म का पोस्टर हुआ लॉन्च

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सुल्तान का पहला दमदार दांव वाक़ई कमाल का है. सलमान खान स्टारर फिल्म सुल्तान का इंतज़ार हुआ ख़त्म और फिल्म के पोस्टर का फर्स्ट लुक हुआ लॉन्च. पोस्टर में मस्कुलर बॉडी के साथ लंगोट पहने और हाथों से धूल झाड़ते हुए सलमान को देखकर आपको पता लग ही गया होगा कि सलमान फिल्म में पहलवान की क़िरदार निभा रहे हैं. सुल्तान का फर्स्ट लुक सलमान ने अपने ट्विटर पर सुल्तान का पहला दांव लिखकर रिलीज़ किया. वैसे सुल्तान का पहला दांव सच में दमदार है, क्योंकि पोस्टर ट्वीट करते ही इस पोस्टर को ढेरों लाइक्स मिलने लगे और ये पोस्टर वायरल हो गया. हमेशा की तरह सलमान के लिए लकी ‘ईद’ पर यह फिल्म रिलीज़ होगी.