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हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए बेस्ट योगासन (Best Yogasan For Healthy Sex Life)

धर्म, अर्थ, काम (सेक्स) और मोक्ष- ये चार पुरुषार्थ कहे गए हैं. इन्ही चारों की प्राप्ति के लिए हर मनुष्य प्रयत्नशील रहता है. यह तभी संभव है, जब शरीर और मन पूर्ण रूप सें स्वस्थ (Health) हों, क्योंकि शरीर के स्वास्थ्य से ही अर्थ, काम (सेक्स) जैसे लौकिक कार्यों का संपादन होता है. अस्वस्थ तन-मन से न तो धनोपार्जन किया जा सकता है और न ही यौन सुख प्राप्त किया जा सकता है. शरीर की पुष्टी, अंगों की दृढ़ता, मन और इंद्रियों की प्रसन्नता, शरीर की आरोग्यता आदि योग और यौगिक क्रियाओं से ही संभव है. योग (Yoga) मन और शरीर को स्वस्थ करने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ाता है. योग से ही मानसिक शक्ति का विकास होता है. मन ही काम (सेक्स) का नियंत्रक और संचालक है. स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर से ही सही मायने में यौन-आनंद प्राप्त किया जा सकता है.

Yogasan For Healthy Sex Life
यौनांगों को विकारमुक्त रखता है योग

– शरीर का मध्य  भाग काम-ऊर्जा से संबंधित है. यदि शरीर का यह भाग पूर्णतया विकसित न हो अथवा विकारग्रस्त हो तो सेक्स क्रिया का संपादन संभव नहीं है. शरीर स्वस्थ भी हो और पूर्णतया विकसित भी हो, ये योग से ही संभव है. योग में प्राय: अधिकांश आसन ऐसे हैं, जो शरीर के मध्य भाग पर किसी न किसी रूप में सीधा प्रभाव डालते हैं, चाहे वह सूर्य नमस्कार हो, उत्तानपादासन हो, भुजंगासन हो अथवा पवनमुक्तासन- ऐसे अनेक यौगिक आसन शरीर के मध्य भाग को स्वस्थ और सशक्त बनाकर सेक्स शक्ति
बढ़ाते हैं.

– वैज्ञानिक शोधों से भी पता चला है कि यौगिक आसनों से यौन विकारों का शमन तथा प्रजनन अंगों की पुष्टी होती है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास की सायकोलॉजिस्ट सिंडी मेस्टन के अनुसार, योगासन करने से महिलाओं के दिल की धड़कन और रक्त प्रवाह में जो तेज़ी आती है, उसका सीधा प्रभाव योनि पर भी पड़ता है, जिसके कारण योनि की मांसपेशियों में रक्तसंचार बढ़ जाता है. इसलिए योग करने वाली स्त्रियों की सेक्स क्षमता आम स्त्रियों से  बेहतर होती है.

– कुछ लोग मन की दुर्बलता के कारण नपुंसकता महसूस करते हैं, उनके लिए योगासन किसी वरदान से कम नहीं, क्योंकि योगासन से मन के सभी विकार दूर हो जाते हैं और वह शक्तिशाली बनता है. हाल ही में हुए अध्ययनों से पता चला है कि जो पुरुष नियमित रूप से योगासन करते हैं, उनके नपुंसक होने की आशंका तीन गुना कम हो जाती है. यह अध्ययन अमेरिका के मेसाच्यूसेट्स के एक शोध संस्थान में किया गया.

कामग्रंथियों पर योगासनों का प्रभाव

– योग हमारे सेक्स जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, ये जानने के लिए शरीर स्थित ग्लैंड्युलर सिस्टम (ग्रंथियों की कार्य प्रणाली) को जान लेना ज़रूरी है, क्योंकि ये ग्रंथियां ही यौनशक्ति और सेहत के लिए ज़िम्मेदार हैं. इन्हें ङ्गएन्डोक्राइन ग्लैंड्सफ कहते हैं.

– ये ग्रंथियां ऐसे हार्मोंस का स्राव करती हैं, जिनसे शरीर की अधिकांश क्रियाएं नियंत्रित होती हैं. इन्हीं में से कुछ काम ग्रंथियां हैं (स्त्रियों मे डिंब ग्रंथि और पुरुषों में वृषण ग्रंथि), जिनसे सेक्स हार्मोंस का स्राव होता है. इन्हीं ग्रंथियों पर हमारा सेक्सुअल हेल्थ निर्भर है. यह तभी संभव है, जब ये ग्रंथियां स्वस्थ और विकार रहित हों.

– ग्रंथियों को विकारहित और स्वस्थ रखने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हलासन, सेतुबंध, सर्वांगासन, शीर्षासन ऐसे आसन हैं, जिनके अभ्यास से ग्रंथियों की कार्यप्रणाली दुरुस्त बनी रहती है, जिससे हार्मोंस का स्राव सुचारु रूप से होता है – न कम और न अधिक. यही कारण है कि यौगिक आसनों के अभ्यास से जहां अतिकामुकता पर नियंत्रण होता है, वहीं कामशीतलता की स्थिति में कामेच्छा भी जागृत होती है.

– सामान्यत: जहां यौगिक आसन हमारे शरीर में प्राणशक्ति एवं लचीलापन बढ़ाकर हमें यौन दृष्टी से स्वस्थ रखते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष यौगिक मुद्राएं एवं बंध हैं, जो हमारी खोई हुई यौनशक्ति को पुन: प्राप्त करने में हमारी सहायता करते हैं, जैसे – महामुद्रा, उद्दीय मुद्रा, अश्‍विनी मुद्रा, मूलबंध, जालंधर बंध आदि. ये मुद्राएं कामेच्छा को बढ़ाकर शरीर में यौन ग्रंथियों एवं प्रजनन अंगों को दृढ़ता तथा उत्तेजना प्रदान करती हैंै. पेल्विक और स्पाइन को भी गतिशीलता एवं लचीलापन प्रदान करने के साथ-साथ ये मुद्राएं शीघ्रपतन, मासिक रक्तस्राव एवं मेनोपॉज़ में आने वाली कठिनाइयों, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना, स्त्रियों में कामशीतलता तथा पुरुषों में नपुंसकता आदि विकारों को रोकने में भी सहायक होती हैं.

सेक्सुअल हेल्थ में कुछ उपयोगी आसन

काम की उत्तेजना के लिए कोई विशेष आसन नहीं है. यौगिक आसनों का काम यही है कि वे यौन संस्थानों को स्वस्थ और शरीर के अंग-प्रत्यंगों को शक्तिवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे जहां कामशक्ति व्यवस्थित होती है, वहीं यौन रोगों से मुक्ति मिलती है. ऐसे ही कुछ आसन यहां दिए जा रहे हैं, जो हमारे सेक्सुअल हेल्थ को बढ़ाते हैं.

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Yogasan For Healthy Sex

चक्रासन

–     पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें. एड़ियां नितंबों के समीप लगी हुई हों.

–     दोनों हाथों को उल्टा करके कंधों के पीछे थोड़े अंतर पर रखें. इससे संतुलन बना रहता है.

–     सांस अंदर भरकर कमर एवं छाती को ऊपर उठाएं.

–     धीरे-धीरे हाथ एवं पैरों को समीप लाने का प्रयत्न करें, जिससे शरीर की चक्र जैसी आकृति बन जाए.

–     आसन छोड़ते समय शरीर को ढीला करते हुए कमर ज़मीन पर टिका दें. यह क्रिया 3-4 बार करें.

यह आसन करने से कामशक्ति बढ़ती है. थायरॉइड, थायमस तथा काम ग्रंथियां उत्प्रेरित होती हैं, जिससे हार्मोंस का स्त्राव संतुलित ढंग से होता है. महिलाओं के डिंबाशय और गर्भाशय को अत्याधिक प्रभावित कर यह आसन उनके समस्त रोगों को दूर करता है. बच्चियों और किशोरियों को यह आसन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे उनके जननांगों एवं स्तनों का उचित विकास होता है.

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Yogasan For Sex
जानुशिरासन

–   दण्डासन में बैठकर दाएं पैर को मोड़कर पंजे को बाएं जंघा के मूल में लगाएं और एड़ी को सिवनी (उपस्थ व गुदाभाग के बीच का भाग) से सटाकर रखें.

–    दोनों हाथों से बाएं पैर के पंजे को पकड़कर सांस बाहर निकालकर सिर को घुटने से लगाएं. थोड़ी देर रुकने के पश्‍चात् सांस लेते हुए ऊपर उठ जाएं और दूसरे पैर से भी इसी प्रकार दोहराएं.

सेक्स के प्रति उदासीन स्त्रियों में इस आसन से कामवासना जागृत होती है. स्त्री-पुरुष दोनों के यौनांग बलवान होते हैं.

Yogasan For Healthy Sex Life
सुप्त वज्रासन

–     वज्रासन में बैठकर हाथों को पीछे की तरफ़ रखकर उनकी सहायता से शरीर को पीछे झुकाते हुए ज़मीन पर सिर को टिका दें. घुटने मिले हुए तथा ज़मीन पर टिके हुए हों.

–     धीरे-धीरे कंधे, गले और पीठ को भी ज़मीन पर टिकाने की कोशिश करें. हाथों को जंघाओं पर सीधा रखें.

–    आसन को छोड़ते समय कोहनियों और हाथों का सहारा लेते हुए वज्रासन में बैठ जाएं.

इससे स्त्रियों का योनि प्रदेश मज़बूत होता है तथा उन्हें प्रसव के समय अधिक पीड़ा नहीं होती. स्त्री-पुरुष दोनों की जांघें मज़बूत होती हैं. सेक्स संबंध में यह आसन बहुत उपयोगी है.

इनके अतिरिक्त और भी अनेक आसन और मुद्राएं हैं, जो यौनांगों के विकारों को दूर कर उन्हें सबल और क्रियाशील बनाते हैं. ये आसन कामशक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ उसे संतुलित और नियंत्रित भी करते हैं. लेकिन इन आसनों का अभ्यास किसी योग विशेषज्ञ गुरु के निर्देशन में करने से ही समुचित लाभ उठाया जा सकता है.

– आलोक शुक्ल

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हेल्दी व ग्लोइंग स्किन के लिए योग (Yoga For Healthy And Glowing Skin)

Yoga For Healthy And Glowing Skin

हेल्दी यंग-ग्लोइंग स्किन (Yoga For Healthy And Glowing Skin) की चाहत भला किसे नहीं होती. आप भी चाहती होंगी कि जहां भी आप जाएं आपके ही हुस्न के चर्चे हों, तो क्यों न इसके लिए थोड़ी मेहनत की जाए. जी हां, रोज़ाना कुछ योगासन करके आप भी पा सकती हैं ऐसी ही खिली-खिली निखरी त्वचा. कौन-से हैं वो योगासन और क्या हैं उनके ब्यूटी बेनीफिट्स आइए जानते हैं.

Yoga For Healthy And Glowing Skin

योग के अमेज़िंग ब्यूटी बेनीफिट्स

योग की ख़ूबियों और फ़ायदों के बारे में हमें अधिक जानकारी दी सर्वा योगा के को-फाउंडर योग गुरु सर्वेश शशि ने.

–     योग नेचुरल क्लींज़र और टोनर की तरह काम करता है.

–     यह फेस अपलिफ्टिंग में काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.

–     यह ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे आपको बेहतर कॉम्प्लेक्शन, टाइट और क्लीयर स्किन मिलती है.

–     इसकी वजह से आपको घने और लंबे बालों के साथ-साथ हेल्दी और शाइनी नेल्स मिलते हैं.

–     वेट लॉस के साथ-साथ बॉडी टोनिंग और शेपिंग में भी मदद करता है.

–     बॉडी टॉक्सिंस को क्लींज़ करके आपको रेडियंट और ग्लोइंग स्किन देता है.

–     यह आपकी फिटनेस का पूरा ध्यान रखता है, जिससे आप रहते हैं चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त.

बेस्ट ब्यूटी आसन

उत्तानासन

–    सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथों को कमर पर रखें.

–     सांस छोड़ते हुए कमर से झुकते हुए नीचे आ जाएं और दोनों हाथों से ज़मीन को छुएं.

–     छाती को जांघों से सटाएं और दोनों हाथों से पैरों की एड़ियों के ऊपर पकड़ें.

–     धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.

–     इसे 30-50 सेकंड्स तक करें.

ब्यूटी बेनीफिट्स

–     डिटॉक्सिफिकेशन के लिए यह बेस्ट आसन माना जाता है. बॉडी से टॉक्सिंस को निकालकर यह उसे हेल्दी बनाता है, जिससे स्किन क्लीयर दिखती है.

–     हार्मोंस को संतुलित करके मुंहासों की समस्या से छुटकारा दिलाता है.

–     यह रक्त को शुद्ध करता है, जिससे चेहरे पर नई रौनक़ आती है, रैशेज़ से छुटकारा मिलता है और नई एनर्जी महसूस होती है.

हलासन

–    पीठ के बल लेट जाएं.

–     सांस लेते हुए धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं.

–     पैरों को सिर के पीछे की ओर ले जाएं. पीठ को भी ऊपर उठाते हुए पैरों को ज़मीन पर टिका दें.

–     शुरू-शुरू में हाथों से कमर को सपोर्ट दें.

–     कुछ क्षण रुकें. जिस तरह इस स्थिति में आए थे, वैसे ही वापस आ जाएं.

–     गर्भवती स्त्रियां यह आसन बिल्कुल न करें.

ब्यूटी बेनीफिट्स

–     यह आपकी बॉडी से टॉक्सिंस को निकालने में मदद करता है, जिससे डल स्किन को मिलता है ग्लोइंग इफेक्ट.

–     साथ ही यह कील-मुंहासे से छुटकारा दिलाता है.

–     यह नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है, जिससे महिलाएं अच्छा फील करती हैं.

–     मस्तिष्क और हृदय में रक्त संचार बढ़ाता है, जिससे त्वचा में नई जान आती है.

सर्वांगासन

–    पीठ के बल लेट जाएं. पैरों को मिलाकर रखें.

–     हाथों को दोनों ओर बगल में सटाकर रखें. हथेलियां ज़मीन की ओर रखें.

–     सांस लेकर पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं. पैरों को उठाते व़क्त हाथों की सहायता भी ले सकते हैं.

–     पैरों को 90 डिग्री या 120 डिग्री पर ले जाकर हाथों को उठाकर कमर के पीछे लगाएं.

–     कोहनी को न उठने दें. पैरों को मिलाकर सीधा रखें.

–     कुछ क्षण रुकें, फिर धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.

–     आंखों को बंदकर ध्यान दोनों भौहों के बीच तीसरे नेत्र पर सहजता से रखें.

ब्यूटी बेनीफिट्स

–     यह आसन चेहरे की तरफ़ ब्लड फ्लो को बढ़ा देता है, जिससे चेहरे में नई जान नज़र आती है.

–     चेहरे के दाग़-धब्बों से आपको छुटकारा दिलाता है.

–     ड्राई स्किनवालों के लिए ख़ासतौर से यह आसन फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह स्किन को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है.

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अर्द्ध मत्स्येंद्रासन

–    दोनों पैरों को फैलाकर बैठ जाएं.

–     दाहिने पैर को घुटनों से मोड़कर एड़ी को नितंब के पास लगाएं.

–     बाएं पैर को मोड़कर दाहिने घुटने के बाहर की ओर ज़मीन पर रखें.

–     दाहिने हाथ को बाएं घुटने के पास से ले जाते हुए बाएं पैर के पंजे को पकड़ लें.

–     बाएं हाथ को बाईं तरफ़ से कमर पर लपेट लें.

–     गर्दन को पीछे की ओर घुमाकर पीछे देखें.

–     धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.

–     यही क्रिया दूसरी तरफ़ से भी करें.

ब्यूटी बेनीफिट्स

–     यह थायरॉइड ग्लैंड की फंक्शनिंग को बेहतर बनाता है, जिससे हार्मोंस संतुलित रहते हैं और हार्मोनल बदलाव के कारण होनेवाली स्किन प्रॉब्लम्स आपको परेशान नहीं करतीं.

–     यह गले और चेहरे की त्वचा को फ्लेक्सिबल बनाता है.

–     चेहरे में कसाव आता है, जिससे आपको मिलती है टोन्ड स्किन.

शवासन

–     पीठ के बल लेट जाएं.

–     दोनों पैरों के बीच एक फीट का फासला रखें.

–     कमर व हाथों के बीच छह इंच के क़रीब फासला रखें. हथेलियां खुली हुई हों.

–     पैरों के पंजों की तरफ़ से शरीर को धीरे-धीरे ढीला छोड़ते जाएं.

–     पूरे शरीर को पूरी तरह से शिथिल छोड़ दें.

–     सांस के अलावा पूरा तन और मन बिल्कुल शांत हो.

–     इसे 3-10 मिनट तक करें, फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं.

ब्यूटी बेनीफिट्स

–    यह बेस्ट रिलैक्सिंग पोज़ है, जिससे आप बहुत अच्छा फील करते हैं.

–     इससे नए सेल्स तेज़ी से बनते हैं, जिससे स्किन डल नज़र नहीं आती.

–     इससे आपको न स़िर्फ ग्लोइंग स्किन मिलती है, बल्कि बाल भी शाइनी नज़र आते हैं.

सूर्य नमस्कार

उपरोक्त आसनों के अलावा आप रोज़ाना सूर्य नमस्कार भी कर सकती हैं. यह ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, जिससे चेहरे का रेडियंट ग्लो वापस आ जाता है. साथ ही यह झुर्रियों को रोकने के साथ ही एजिंग की प्रक्रिया को भी धीमा कर देता है.

फेस योगा

–     ग्लोइंग यंग स्किन के अलावा और क्या-क्या फ़ायदे हैं फेस योगा के आइए जानते हैं.

द वी

–     दोनों हाथों की मिडल फिंगर (मध्यमा) को आईब्रो के बीच में रखकर प्रेस करें और इंडेक्स फिंगर (तर्जनी) को आईब्रोज़ के बाहरी कोनों पर प्रेस करें.

–     गर्दन को बिना हिलाए आंखों से छत की तरफ़ देखने का प्रयास करें.

–     रिलैक्स करें.

–     यह प्रक्रिया छह बार करें और अंत में 10 सेकंड तक आंखों को ज़ोर से बंद करें.

फ़ायदे: आंखों के आसपास सूजन और पफीनेस से राहत. आंखों के पास बारीक़ लकीरें व झुर्रियां जल्दी नहीं पड़तीं.

पफर फिश

–    गालों में हवा भरकर उन्हें फुला लें.

–     होंठों को जितना हो सके उतना भींच लें.

–     हाथों से गालों को 30 सेकंड तक टैप करें.

फ़ायदे: यह प्रक्रिया गालों की त्वचा में कसाव लाती है.

किस द स्काई

–    सिर को पीछे की तरफ़ झुकाएं और ऊपर की तरफ़ किस करें.

–     रिलैक्स करें. सांस बाहर छोड़ते हुए अपने सामने की तरफ़ किस करें.

–     रिलैक्स करें और फिर यही प्रक्रिया दोहराएं.

फ़ायदे: इससे होंठों के आसपास की बारीक़ रेखाओं से छुटकारा मिलता है. गर्दन व जॉलाइन भी अपलिफ्ट होती है.

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ब्यूटीफुल स्किन के लिए मुद्रा

वरुण मुद्रा: अंगूठे और सबसे छोटी उंगली (कनिष्का) के पोरों यानी अग्र भाग से टच करें. रोज़ाना 45 मिनट करें. आप इसे एक बार में या फिर तीन बार में 15-15 मिनट भी कर सकते हैं.

फ़ायदे: जल मुद्रा होने के कारण यह शरीर को हाइड्रेटेड रखती है, जिससे ड्राई स्किन और बालों की समस्या से छुटकारा मिलता है.

–    बॉडी में मॉइश्‍चर लेवल बढ़ता है.

–    झुर्रियों से छुटकारा मिलता है.

पृथ्वी मुद्रा: अंगूठे से अनामिका यानी रिंग फिंगर के पोरों को स्पर्श करें. आप इसे एक बार में 30-45 मिनट या फिर दो-तीन बार में 15-15 मिनट भी कर सकते हैं.

फ़ायदे: यह मुद्रा स्किन, बालों और नेल्स के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है.

–     एजिंग स्किन की समस्या, नाख़ूनों का बार-बार टूटना, बालों का झड़ना जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाती है.

–     अगर कम उम्र में आपके बाल स़फेद हो रहे हैं, तो यह मुद्रा रोज़ाना करें.

– जयप्रकाश सिंह

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दीपिका पादुकोण के फिटनेस मंत्र (Fitness Mantra Of Deepika Padukone)

Deepika Padukone Fitness

दीपिका (Deepika) अपनी फिटनेस (Fitness) को लेकर बेहद सजग है. वह अपनी बॉडी को शेप में रखने के लिए स्ट्रिक्ट वर्कआउट (Strict Workout) और डायट प्लान (Diet Plan) फॉलो करती है. आइए जाने दीपिका की परफेक्ट फिगर का राज़.

डायट सीक्रेट्स
अपने आपको स्लिम-ट्रिम रखने के लिए दीपिका कठोर डायट प्लान को फॉलो करती हैं. इस डायट प्लान को फॉलो करते हुए वे हेल्दी डायट लेती हैं और जंक, ऑयली व स्पाइसी फूड खाने से बचती है. आइए जाने उनका डायट प्लान और डायट रूटीन
ब्रेकफास्ट: 2 अंडे+लो फैट मिल्क/साउथ इंडियन ब्रेकफास्ट- इडली, उपमा, डोसा आदि.
लंच: 2 चपाती+ग्रिल्ड फिश या ताज़ी सब्ज़ियां.
इवनिंग स्नैक्स: नट्स+फिल्टर कॉफी.
डिनर: चपाती+सब्ज़ी+सलाद.

– उन्हें फ्रेश सीज़नल फ्रूट्स खाना बहुत पसंद है. हर दो घंटे में फ्रेश जूस या नारियल पानी पीती हैं.

– रात में नॉनवेज बिल्कुल नहीं खातीं.

– डार्क चॉकलेट खाने का बहुत शौक़ है.

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वर्कआउट रूटीन
– दीपिका पादुकोन का फिटनेस फार्मूला है- मिक्स कार्डियो एक्सरसाइज़, वेट ट्रेनिंग (जिम), डांस और योगा. वह बहुत ही फिटनेस फ्रीक ऐक्टर है, जिन्होंने खेल, योग, जिम, बैलेंस्ड डायट और डिसीप्लीन्ड लाइफ से अपनी बॉडी को टोन्ड और परफेक्ट शेप दी है.

– वह सुबह 6 बजे उठती हैं और फिर आधे घंटे योग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करती हैं.

– अपने कॉन्संट्रेशन, स्ट्रेंथ और स्टेमिना में सुधार लाने के लिए उन्हें पाइलेट्स करना पसंद है. पुश-अप्स, पुल-अप्स, क्रंचैज, स्कवैट्स भी उनके वर्कआउट रिज़ीम का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

– लाइट वेट एक्सरसाइज़ करती हैं.

– पैरों की एक्सरसाइज़ के लिए करने के लिए डांस करती है.

– स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ उनके वर्कआउट रिज़ीम का अभिन्न अंग है.

फिटनेस टिप्स
– दीपिका का फिटनेस मंत्र है कि फिटनेस को अपने जीवन जीने का तरीक़ा बनाओ.

– हमेशा हेल्दी, फ्रेश और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें.
– फिटनेस का मतलब वज़न कम करना या पतला होना नहीं है, बल्कि फिटनेस का अर्थ अंदरूनी तौर पर   स्ट्रॉन्ग होना.
– अपने आप को हेल्दी व फिट रखने के लिए ज़रूरी है कि फिटनेस को नियमित रूप से अपनी दिनचर्या का   अभिन्न अंग बनाएं.
– फिट व हेल्दी रहने के लिए केवल डायट और एक्सरसाइज़ ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अपने वर्कआउट     प्रोग्राम में कुछ खेलों को शामिल करें.

– अपने वर्कआउट रूटीन फॉलो करते हुए जब दीपिका का मूड एक्सरसाइज़ करने का नहीं होता है, तो वह डांस करती हैं. उनका मानना है कि जिम में वर्कआउट करने पर भी अगर आपकी कैलोरीज़ बर्न नहीं हो रही है, तो डांस करें. डांस करने से एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है.

– योग करें. योग करने से आप ज़्यादा हेल्दी, यंग और फ्रेश दिखते हैं.

– अगर जिम जाने का समय नहीं मिल पा रहा है, तो स्ट्रेचिंग और हैंड फ्री एक्सरसाइज़ करें.

योगा
– उनके योगा सेशन में 10 सूर्य नमस्कार, वीरभद्रासन, सर्वांगासन, मार्जरासन, डीप ब्रीदिंग, प्राणायाम और ध्यान शामिल है.

डांस एक्सरसाइज़
– दीपिका का मूड जब जिम जाने का नहीं होता है, तो वे भारत नाट्यम, कत्थक और जैज आदि डांस करती हैं.

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– देवांश शर्मा

1021 सूर्य नमस्कार के साथ योग गुरु शम्मी गुप्ता की टीम ने मनाया इंटरनेशनल योगा डे! (International Yoga Day: 1021 Surya Namaskar Done By Yoga Guru Shammi Gupta’s Students)

इंटरनेशनल योगा डे के ख़ास मौ़के पर जानीमानी योग गुरु शम्मी गुप्ता ने मुंबई में सूर्याथॉन का आयोजन किया. इस सूर्याथॉन में हर उम्र के लोगों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया और सुबह पांच बजे से अपने सामर्थ्य के अनुसार सूर्य नमस्कार किए. इस सूर्याथॉन की सबसे ख़ास बात ये थी कि इसमें शम्मी गुप्ता की टीम के स्टूडेंट्स नुपूर बिस्वास, किश्‍लय कुमार, राजीव कुमार और प्रिया गुप्ता ने 1021 बार सूर्य नमस्कार का रिकॉर्ड बनाया.

Yoga Guru Shammi Gupta

 

 

6 महीने पहले से शुरू की प्रैक्टिस
शम्मी गुप्ता की स्टूडेंट नुपूर बिस्वास ने बताया कि इन सभी स्टूडेंट्स ने इंटरनेशनल योगा डे के मौके पर 1021 बार सूर्य नमस्कार करने की प्रैक्टिस 6 महीने पहले से ही शुरू कर दी थी. शम्मी गुप्ता ने अपने स्टूडेंट्स का हौसला बढ़ाया और उन्हें 1021 बार सूर्य नमस्कार करने के लिए तैयार किया. नुपूर बिस्वास ने हमें बताया कि वो पिछले 8 सालों से शम्मी के साथ लगातार योगा की प्रैक्टिस कर रही हैं. उन्होंने धीरे-धीरे प्रैक्टिस करके सूर्य नमस्कार की संख्या बढ़ाई. 6 महीने पहले उन्होंने 108 बार से प्रैक्टिस शुरू की और धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाती गईं. इसके साथ ही वो नियमित रूप से योगा भी कर रही थीं.

Yoga Guru Shammi Gupta

एक हफ्ते पहले क्या प्रैक्टिस की?
पिछले हफ्ते से इन स्टूडेंट्स ने सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस नहीं की, स़िर्फ स्ट्रेचिंग, स्ट्रेंथनिंग पोश्‍चर किए, ताकि शरीर फ्लैक्सिबल बना रहे, लेकिन कोई शरीर में कोई चोट न लगे, वरना सूर्य नमस्कार करना मुश्किल हो जाता है.
पिछले दो दिनों से ये सभी स्टूडेंट्स अपनी डायट में ज़्यादा से ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट (चावल, आलू वगैरह) ले रहे हैं, ताकि उनके शरीर में एनर्जी बनी रहे.

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क्या आप भी सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस करना चाहते हैं?
योग से आप अपनी ज़िंदगी बदल सकते हैं. योग से आप न स़िर्फ अपने शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी ख़ुद को बेहतर बना सकते हैं. यदि आप भी योग व सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो पहले किसी अच्छे योग गुरु के साथ इसकी प्रैक्टिस करें. धीरे-धीरे आपके शरीर की क्षमता बढ़ने लगेगी और योग आपके जीवन में अपने आप शामिल होता जाएगा. इंटरनेशनल योगा डे के इस ख़ास अवसर से आप भी योग की शुरुआत कीजिए और ख़ुद को दीजिए स्वस्थ जीवन का तोहफ़ा!

जानें सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा, देखें वीडियो:

योग से 10 तरह के दर्द से छुटकारा पाएं (International Yoga Day: Yoga Poses That Relieve 10 Types Of Body Pain)

International Yoga Day

योग से 10 तरह के दर्द से छुटकारा पाने के लिए के लिए आपको कौन-से योगासन करने चाहिए? इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) के ख़ास मौके पर हम आपको बता रहे हैं योग से १० तरह के दर्द से छुटकारा पाने का आसान उपाय.

International Yoga Day

* घुटने के दर्द के लिए 4 योगासन (Top 4 Yoga Poses For Knee Pain)
1) नी रोटेशन-उत्तानासन
2) नी स्ट्रेचिंग-सुलभ उत्तानासन
3) अर्ध तितली आसन-गुल्फ घूर्णन
4) अर्ध कपोत आसन-नी स्ट्रेचिंग

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर बैक पेन (Top 4 Yoga Poses For Back Pain
1) मार्जरासन
2) पूर्व भुजंगासन
3) शलभासन
4) पवनमुक्तासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर स्पॉन्डिलाइसिस (Top 4 Yoga Poses For Spondylosis)
1) हैंड इन हैंड आउट ब्रीदिंग
2) प्रसरित चक्रासन
3) शोल्डर रोटेशन
4) एलिफेंट ईयर
5) स्विमिंग स्ट्रोक

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर सर्वाइकल प्रॉब्लम्स (Top 4 Yoga Poses for Cervical Problems)
1) सुखासन-साइड स्ट्रेच
2) दत्त मुद्रा
3) सुलभ वक्रासन
4) सिंह मुद्रा

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर अर्थराइटिस (Top 4 Yoga Poses for Arthritis)
1) गतियामत मेरु वक्रासन
2) चक्कीचालन क्रिया
3) पवनमुक्तासन क्रिया
4) वीरासन-शोल्डर स्ट्रेच

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर मसल्स क्रैम्प (Top 4 Yoga Poses for Muscle Cramps)
1) गटियामत-ताड़ासन-उत्तानासन क्रिया
2) पवनमुक्तासन क्रिया
3) अधोमुख श्‍वानासन-स्ट्रेच
4) पूर्ण तितली आसन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर साइटिका (Top 4 Yoga Poses for Sciatica)
1) उत्थित एकपादासन
2) सेतुबंधासन
3) पवनमुक्तासन-हिप स्ट्रेच
4) अर्ध शलभासन-शलभासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर हैप्पी पीरियड्स (Top 4 Yoga Poses For Period Problems)
1) उपविष्ट कोणासन
2) जानुशिरासन
3) पश्‍चिमोत्तानासन
4) बद्धकोणासन
5) प्रसरित पादोत्तानासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर माइग्रेन (Top 4 Yoga Poses for Migraine)
1) उत्तानासन
2) प्रसरित पादोत्तानासन
3) अधोमुख वीरासन
4) अधोमुख स्वस्तिकासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर वेरीकोज़ वेन्स (Top 4 Yoga Poses for Varicose Veins)
वेरीकोज़ वेन्स की समस्या में भी कई लोगों को दर्द होता है, ऐसे में ये 4 योगा पोज़ेज़ आपको दर्द से राहत दिलाएंगे:
1) सुलभ जानुशिरासन
2) उत्थित एकपादासन
3) विपरीत कर्णी मुद्रा
4) सपोर्टेड विपरीत कर्णी मुद्रा

 

 

मोटापा कम करने के १० योगासन (10 Yoga For Weight Loss Fast And Naturally)

Weight Loss Fast And Naturally

मोटापा कम करने के लिए १० योगासन करके आप कुछ ही दिनों में अपना मोटापा कम (Weight Loss Fast And Naturally) कर सकते हैं. मोटापा कम करने के १० योगासन से आप अपनी बढ़ी हुई तोंद को भी कम कर सकते हैं. स्वस्थ व निरोगी रहने के लिए योग बहुत ज़रूरी है. हम आपको बता रहे हैं मोटापा कम करने के लिए १० योगासन, जिन्हें नियमित रूप से करने से जल्दी ही आपका मोटापा कम हो जाएगा और आपकी तोंद भी कम हो जाएगी.

Weight Loss Fast And Naturally

मोटापा कम करने के लिए कौन-से योगासन करने चाहिए, जानने के लिए देखें ये वीडियो:
* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर वेट लॉस (Top 4 Yoga Poses For Weight Loss)
1) मार्जरासन
2) हस्त दंडासन-चतुरंगा-भुजंगासन
3) नवासन
4) सेतु बंध आसन

बढ़ी हुई तोंद को कम करने के लिए यानी पेट की चर्बी घटाने के लिए कौन-से योगासन करने चाहिए, जानने के लिए देखें ये वीडियो:
* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर फ्लैट टमी (Top 4 Yoga Poses For Flat Tummy) 
1) उत्थित द्विपादासन-नवासन
2) उत्थित द्विपादासन-बद्धकोणासन-सुलभ हलासन
3) हस्तदंडासन-अधोमुख श्‍वानासन
4) अधोमुख श्‍वानासन

सीखें सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा (How To do Surya Namaskar)
* स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सूर्य नमस्कार को सर्वोत्तम अभ्यास माना गया है.
* इससे समस्त अंगों में क्रियाशीलता आती है तथा हार्मोंस संतुलित होते हैं.
* सम्भव हो सके, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं.
* दोनों हाथों को प्रणामासन की स्थिति में लाएं.
* दोनों पैरों के टखने व अंगूठे मिलाकर रखें.
* श्‍वास अंदर भरकर, हाथों को खोलते हुए कंधे के ऊपर से पीछे की ओर जितना ले जा सकें, ले जाएं (चित्र देखें).
* श्‍वास छोड़ते हुए हाथों को पीछे से सामने की ओर झुकाते हुए पैरों के पास रखें (अगर रख सकें तो).
* पैर घुटने से मुड़ने नहीं चाहिए.
* सिर को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें.
* नीचे झुकते हुए हाथों को मजबूती से ज़मीन पर लगाएं.
* बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. सिर ऊपर की तरफ़ तथा दाहिना घुटना सीने के पास दोनों हाथों के बीच में रहे.
* दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं.
* दोनों घुटनों को, चेस्ट को और ठुड्डी को ज़मीन से टच करें.
* श्‍वास भरते हुए आगे की तरफ़ आते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाएं. भुजंगासन की तरह श्‍वास छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं (चित्रानुसार).
* एड़ियां ज़मीन से टच होनी चाहिए.
* दाहिने पैर को आगे की ओर करें, दोनों हाथों के बीच लाकर रखें. सिर ऊपर की ओर रहे.
* बाएं पैर को भी आगे लाएं.
* सिर को पुनः घुटनों से स्पर्श करने का प्रयास करें.
* श्‍वास लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे की ओर करें.
* और फिर पूर्ववत् यानी प्रणामासन की स्थिति में आ जाएं.
* नीचे झुकते हुए हाथों को मजबूती से ज़मीन
पर लगाएं.
* दायां पैर दोनों हाथों के बीच रखें. घुटना छाती के सामने रखें.
* सिर ऊपर की तरफ़ रखें, अर्द्ध भुजंगासन की तरह.
* दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं.
* सिर व गर्दन दोनों हाथों के बीच में रखें.
* इस समय शरीर का सारा वज़न दोनों हाथों और पैरों पर रखें.
* श्‍वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं और पूर्ववत् प्रणामासन की स्थिति में आ जाएं.
* 3 राउंड से शुरू करें और अपनी क्षमतानुसार राउंड्स बढ़ाएं.

सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा जानने के लिए देखें ये वीडियो:

हेल्थ बेनिफिट्स
* सूर्य नमस्कार पेट की चर्बी कम करने के साथ ही कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखता है.
* विशेषकर मधुमेह, मेरुदण्ड, पाचन संबंधी, समस्त प्रकार के पेट संबंधी विकारों, आमाशय, अग्नाशय, फेफड़ों व हृदय संबंधी विकारों तथा मोटापे से संबंधी समस्या हेतु बहुत उपयोगी है.
* संपूर्ण शरीर में रक्त परिभ्रमण को
सुचारू करता है.
* बल और तेज की वृद्धि करता है.
* मानसिक शांति प्रदान करता है.
* रीढ़ का लचीलापन बढ़ाता है.

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पेट की चर्बी कम करने के लिए ऐसे करें साइक्लिगं: (Weight Loss Fast And Naturally)
* पीठ के बल लेट जाएं.
* बाएं पैर के घुटने को पेट तक लाएं.
* दाहिने पैर को सीधा रखें.
* बाएं पैर को इस तरह घुमाएं, जैसे साइकिल चला रहे हों और फिर सीधा कर लें.
* अब दाहिने पैर से यही क्रिया करें.
* इस प्रकार इस साइक्लिगं की क्रिया को करते रहें.
* 21 से 51 राउंड्स.
* धीरे-धीरे क्षमतानुसार ज़्यादा भी कर सकते हैं.
* फिर विपरीत दिशा में साइक्लिगं करें यानी पहले क्लॉकवाइज़, फिर एंटी क्लॉकवाइज़ करें.

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हेल्थ बेनिफिट्स (Weight Loss Fast And Naturally)
* यह पेट के विकारों के साथ-साथ पेट व कमर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है.
* कूल्हे व घुटने के जोड़ों के दर्द लिए लाभदायक है.
* पैर व जंघा को पुष्ट करता है.
* तेज़ी से वज़न घटाता है.

अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

योग से दूर भगाएं रोग… छठा अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन प्रतियोगिता व उत्सव! (6th International Yoga Convention/Competition & Festival)

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

  • अगर हम यह कहें कि आज का दौर चुनौतियों से भरा पड़ा है, तो ग़लत नहीं होगा.
  • हर जगह, हर तरफ़ चुनौतियां ही चुनौतियां हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी बदली हुई जीवनशैली, जिसने हमें ढेरों तनाव व समस्याएं दे डाली हैं.
  • इन तनावों के चलते सबसे अधिक जो प्रभावित हो रहा है, वह है हमारा स्वास्थ्य. यहां स़िर्फ शारीरिक स्वास्थ्य की ही हम बात नहीं कर रहे, बल्कि मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य का भी ज़िक्र कर रहे हैं.
  • ऐसे में हम में से अधिकांश लोग आज मन की शांति व बेहतर स्वास्थ्य के जुगाड़ के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं.
  • इस भटकाव को रोकने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है योग साधना.
  • हम सभी योग के वैज्ञानिक आधार व लाभ से वाक़िफ़ हैं, यही वजह है कि अब पूरी दुनिया योग की शरण में आ रही है.
  • इसी कड़ी में हमेशा की तरह बेहतरीन व सार्थक प्रयास हो रहा है डॉ. ओमानंदजी (गुरुजी) (Om Anandji) की देखरेख में, इंदौर (Indore) के स्वामी परमानंद इंस्टिट्यूट ऑफ योगा साइंसेस एंड रिसर्च (Parmanand Institute Of Yoga Science & Research) की ओर से. जी हां, 23-24 दिसंबर को छठे अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन प्रतियोगिता व उत्सव (6th International Yoga Convention/Competition & Festival) का आयोजन किया जाएगा, जिसका लाभ आप सभी ले सकते हैं.

यह भी पढ़ें: दूसरों का भला करें 

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

  • उत्सव की ख़ास बातेंश्र अंतर्राष्ट्रीय योग कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें योग का स्वास्थ्य, शिक्षा व विश्‍व शांति पर प्रभाव विषय पर चर्चा होगी.
  • अंतर्राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता का आयोजन.
  • अंतर्राष्ट्रीय मलखम्ब प्रतियोगिता का आयोजन.
  • योग थेरेपी, जिसमें 50 से अधिक रोगों के योग चिकित्सा के सत्र होंगे.
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वादिष्ट व्यंजन व यौगिक कार्यक्रमों का आयोजन.
  • ये तमाम कार्यक्रम राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से किए जाएंगे, इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, सिंगापुर, इज़रायल व श्रीलंका से कई इंटरनेशनल योगी व प्रज़ेंटर्स हिस्सा लेंगे.
  • इस संदर्भ में अधिक जानकारी व रजिस्ट्रेशन के लिए यहां संपर्क करें-परमानंद कैंपस, खंडवा रोड, लिंबोदी, न्यू दिगंबर स्कूल के पास, इंदौर- 452020.

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

फोन– 8839209014

ईमेल[email protected]

लिंकhttps://paramyoga.org/?page=6th-Internation-Yoga-Convention

  • आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन व फॉर्म भर सकते हैं.

फीस

  • कॉन्फ्रेंस पेपर प्रज़ेंटेशन के लिए 500
  • योग व मलखम्ब प्रतियोगिता के लिए 500
  • जो स्टूडेंट्स व प्रतिभागी सर्टिफिकेट पाना चाहते हैं, उनके लिए 100
  • अन्य प्रतिभागी- निमंत्रण पत्र/पास के ज़रिए आ सकते हैं.

योग व डायट से बनाएं अपनी सेक्स लाइफ को हॉट, हेल्दी और स्पाइसी (Yoga & Diet For Hot, Healthy & Spicy Sex Life)

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन में सेक्सुअल रिलेशन एक अहम् भूमिका अदा करती है. पर कभीकभी शारीरिक व मानसिक कारणों से इसमें मुश्किलें आने लगती हैं. तो क्यों न सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए योग व डायट टिप्स को अपनाएंपतिपत्नी के रिश्ते को मज़बूत और ख़ुशनुमा बनाने में सेक्स की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है. लेकिन कई बार अच्छी ख़ुशनुमा सेक्स लाइफ में मुश्किलें आने लगती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में दरार पड़ जाती है. ऐसा इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) यानी लिंग उत्तेजित न होने के कारण होता है. कई बार सेक्स टॉनिक या वियाग्रा जैसी कामोत्तेजक गोलियां लेकर समस्या को सुलझाने की कोशिश की जाती है, पर इससे स्थिति सुधरने की बजाय और भी बिगड़ जाती है. बेहतर सेक्स लाइफ का रहस्य इन गोलियों में नहीं, बल्कि संतुलित डायट और योग में छुपा है. इस संदर्भ में हमें विस्तृत जानकारी दे रही हैं न्यूट्रीशनिस्ट व योग इंस्ट्रक्टर नुपूर पद्मनाभन.

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

कारण

1. रक्त संबंधी बीमारी

लिंग में इरेक्शन (उत्तेजना) ख़ून के ज़्यादा बहाव के कारण आता है. यदि किसी कारणवश ख़ून का बहाव कम हो जाता है, तो इरेक्शन की समस्या होती है. ऐसा रक्त कोशिकाओं के डैमेज होने या धमनियों के कठोर होने से होता है.

2. नर्व डैमेज

डायबिटीज़, प्रोस्टेट सर्जरी या स्पाइनल कॉर्ड के क्षतिग्रस्त होने पर भी इरेक्शन की समस्या होती है.

3. दवाइयां

हाई ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन, ह्रदय संबंधी बीमारियों व प्रोस्टेट कैंसर के लिए ली

जानेवाली दवाइयों के प्रयोग से सेक्सुअल क्रियाएं प्रभावित होती हैं.

4. मानसिक कारण

अनेक मानसिक कारणों, जैसेतनाव, डिप्रेशन, व्याकुलता, डर, अपराधबोध से भी सेक्स क्रिया पर असर पड़ता है.

5. हार्मोंस

टेस्टोस्टेरॉन, थायरॉइड एवं पिट्टयूटरी हार्मोंस के असामान्य स्तर से भी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

6. बीमारियां

एनीमिया, डिप्रेशन, आर्थराइटिस, डायबिटीज़, हाइपोथायरॉइड़िज़्म, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी बीमारियां भी सेक्स को प्रभावित करती हैं.

समाधान

सेक्स लाइफ़ को बेहतर बनाने के लिए योग बहुत ही लाभकारी है.

  • इससे शरीर रिलैक्स होता है और तनाव भी दूर होता है.
  • इससे हृदय गति व ब्लडप्रेशर सामान्य होने में मदद मिलती है.
  • योग से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ जाती है.

ये सारी बातें इरेक्शन पर असर डालती हैं.

बद्ध कोणासन (बटरफ्लाई)

– दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़कर, दोनों हाथों से पकड़ लें.

– अब इन्हें बटरफ्लाई की तरह हिलाएं.

इस क्रिया को दस बार दोहराएं.

फ़ायदे

इस आसन से पेट, पीठ और पेल्विक एरिया में ब्लड सप्लाई ठीक तरह से होने लगती है. यह आसन किडनी, प्रोस्टेट और यूरिनरी ब्लैडर को हेल्दी रखता है.

बालासन (चाइल्ड पोज़)

दोनों पैरों को घुटने से मोड़ लें एवं एड़ियां जोड़कर उस पर बैठ जाएं (हलासन की स्थिति में).

सिर सामने झुकाकर ज़मीन पर टिका दें. इससे कमर ऊपर उठ जाएगी.

अब दोनों हाथों को पैरों के समानांतर इस तरह रखें कि हथेलियां ज़मीन पर टिकी रहें. (तलवे नहीं).

2 मिनट तक इसी पोज़ में रहें.

ऐसा 5 से 10 बार करें.

फ़ायदे

इस आसन से तनाव दूर होता है और सेक्सुअल क्रियाओं में काफ़ी लाभ मिलता है.

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डायट

इरेक्टाइल डिस़फंक्शन का मुख्य कारण होता हैलिंग की धमनियों के अवरुद्ध होने से रक्त प्रवाह का कम होना. इसलिए इस स्थिति में शाकाहारी डायट की सलाह दी जाती है, ताकि धमनियां अवरुद्ध न होने पाएं.

डायट में ताज़े फल, हरी एवं फली वाली सब्ज़ियां, फिश आदि लें.

मैदा, प्रोसेस्ड व जंक फूड, शक्कर, आर्टिफ़िशियल स्वीटनर, जैसेसैकरीन आदि न लें.

तिल के तेल व ऑलिव ऑयल का प्रयोग बेहतर परिणाम देता है.

सादे नमक की जगह समुद्री नमक या सेंधा नमक का प्रयोग करें.

टमाटर खाएं. टमाटर का लाइक्रोपीन प्रोस्टेट ग्लैंड को हेल्दी रखता है.

कद्दू के बीज, तरबूज आदि पुरुष जननांगों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं.

वज़न अधिक न बढ़ने दें. संतुलित भोजन करें और वज़न को नियंत्रित रखें.

तलेमसालेदार एवं कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ न लें.

चाय, कॉफी, सिगरेट व शराब का अधिक सेवन न करें.

डॉ. सुषमा श्रीराव

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष: हेल्दी रहने के लिए अपनाएं यौगिक लाइफस्टाइल (International Yoga Day: Follow Yogic Lifestyle For Healthy life)

International Yoga Day

स्वस्थ व सेहतमंद बने रहने के लिए सुबह से शाम तक आपकी जीवनशैली भी बहुत मायने रखती है. सुबह से लेकर शाम तक की सभी गतिविधियां अगर योग के अनुसार हों, तो आप हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहेंगे.

International Yoga Day
सुबह की सही शुरुआत

– योग के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना लाभदायक होता है, लेकिन अगर आप 5.30 बजे तक भी उठें, तो ठीक रहेगा.
– उठने के बाद 2 ग्लास पानी पीएं. पानी रात को तांबे के बर्तन में भरकर रख दें और सुबह उठकर पीएं. पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए. बैठकर पीएं, उकड़ू बैठकर पीना और भी फ़ायदेमंद होता है. वज़न ज़्यादा है, तो गर्म पानी पीएं.
– पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और एक घंटे तक योग व प्राणायाम करें. चाहें तो, मॉर्निंग वॉक पर भी जा सकते हैं.
– नहा-धोकर तैयार हो जाएं. ईश्‍वर का ध्यान करें और अपने सफल दिन की सही शुरुआत के लिए प्रार्थना करें.
– 7.30-8 बजे तक नाश्ता करें. नाश्ते में फल, पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, दूध जैसी पौष्टिक चीज़ों को शामिल करें.
– उसके बाद दिनभर के कामों की लिस्ट बना लें. जैसे-जैसे आपके काम ख़त्म होते जाएं, उन्हें टिक कर दें और बचे हुए कामों को अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.

दोपहर को दुरुस्त बनाएं

– अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो लंच टाइम में खाना खाएं और खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें.
– खाने को ख़ूब चबा-चबाकर खाएं और खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीएं. खाते समय भी पानी नहीं पीना चाहिए.
– ऑफिस में दो घंटे से ज़्यादा लगातार सीट पर न बैठें. ऑफिस के छोटे-छोटे काम, मसलन- पानी की बॉटल भरकर लाना, चाय-कॉफी लेना, प्रिंटर से प्रिंटआउट लाना आदि ख़ुद ही करें.
– खाने के बाद अगर आपके पास फ्री टाइम है, तो थोड़ी देर टहलें.
– घर पर हैं, तो बाकी काम निपटाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं. खाना खाकर अपनी पसंद का कुछ काम कर सकते हैं. काम ख़त्म कर रात – खाने की तैयारी कर लें.

शाम हो सुकूनभरी

– ऑफिस में हैं, तो 4 बजे के क़रीब सीट पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेचिंग करें. इससे आप रिलैक्स और फ्रेश महसूस करेंगे.
– शाम की भूख मिटाने के लिए भुने हुए चने, मूंगफली, कुरमुरा, भेल, फल, चाय-बिस्किट आदि लें. पकौड़े और वड़े-समोसे से दूर रहें.
– दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीएं.
– ऑफिस से लौटकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.
– 7 बजे थोड़ा ध्यान करना आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा. 20 मिनट तक ध्यान करें. दिनभर की सारी थकान, तनाव और निगेटिविटी दूर हो जाएगी.

ताकि न हो रतजगा

– रात 8 बजे तक खाना खा लें. रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए.
– रात का भोजन टीवी देखते हुए या बातचीच करते हुए न लें. खाना खाते व़क्त बातें न करें, स़िर्फ खाने पर ध्यान दें, इससे खाना जल्दी व अच्छी तरह पचता है. ओवरईटिंग से बचें.
– रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर ज़रूर होना चाहिए और खाने के थोड़ी देर बाद 15 मिनट तक हल्की वॉक करनी चाहिए.
– खाने के बाद ज़रूरी काम निपटा लें. सोने में जब तक समय है, तब तक आप बच्चों के होमवर्क देख सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं या फिर गप्पे मार सकते हैं.
– अपने लिए थोड़ा समय निकालकर म्यूज़िक सुनें या कोई अच्छी क़िताब पढ़ें.
– रात 10 से 10.30 बजे तक सो जाएं. सोने से पहले पूरे दिन का विश्‍लेषण कर लें. अगर कोई काम अधूरा रह गया हो, तो उसे अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.
– रोज़ाना 6-8 घंटे सोएं. ऐसा कहा जाता है कि रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इन चार घंटों की नींद बाकी समय के आठ घंटों के बराबर है. ऐसे में देर से सोने का मतलब है नींद की क्वॉलिटी के साथ समझौता करना. और हां, दिन में सोने से बचें.

 

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– सत्येंद्र सिंह

11 योगासन जो आपके बच्चे को बनाएंगे फिट एंड इंटेलिजेंट(11 yoga that will make your child fit and intelligent)

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सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा हेल्दी व फिट रहे, लेकिन आज की स्ट्रेस व कॉम्पटीशन वाली ज़िंदगी में यह आसान नहीं. ऐसे में उन्हें ज़रूरत है एक सेहतमंद शुरुआत की. तो क्यों न आज ही इस दिशा में एक हेल्दी क़दम बढ़ाएं और बच्चों को दें एक बेहतरीन लाइफस्टाइल के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास का हेल्दी तोहफ़ा.

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वेक एंड स्ट्रेच

1. डाउन डॉग- अधो मुख स्वानासन
– ज़मीन पर पेट के बल सीधे लेट जाएं.
– दोनों हथेलियों को सीने के पास लाकर ऊपर की ओर उठें.
– कूल्हे को ज़मीन से उठाएं, ताकि शरीर का आकार वी शेप जैसा बन जाए.
– अब दोनों पैरों की ओर देखें.
– सामान्य अवस्था में आ जाएं.
फ़ायदे: मस्तिष्क का विकास होता है, श्‍वसन प्रणाली को बेहतर बनाता है, शरीर के ऊपरी हिस्से को मज़बूत बनाने के साथ-साथ थकान भी दूर करता है.

 

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प्राणायाम

1. ॐ का उच्चारण
– सुखासन में बैठ जाएं.
– हाथों को ज्ञानमुद्रा में रखें या फिर दोनों हथेलियों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ें.
– लंबी सांस लेकर ॐ का उच्चारण करते हुए सांस छोड़ें.
– 3-5 बार दोहराएं.
फ़ायदे: इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन से भरपूर रक्तसंचार बढ़ जाता है. उनमें ध्यान लगाने की शक्ति का विकास होता है.

 

पेशेंस प्लीज़

1. हमिंग बी- ब्राह्मरी

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– सुखासन में बैठें.
– आंखें बंद करके सांस लें और कानों में उंगली डालकर ङ्गहम्मम की आवाज़ से सांस छोड़ें.
फ़ायदे: ग़ुस्से और थकान के कारण होनेवाले तनाव को कम करता है, वोकल कॉर्ड्स को मज़बूत बनाता है, नींद की कमी को दूर भगाता है और बॉडी टिश्यूज़ को हील करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है.
2. टीज़ अप- शितकारी शीतली प्राणायाम

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– सुखासन या पद्मासन में बैठें.
– जीभ को दोनों तरफ़ से रोल करके ट्यूब जैसा बनाएं. अगर आप जीभ को रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो मुंह से छोटा ओ बनाएं.
– जीभ से सांस लें और नाक से सांस छोड़ें.
– 5-10 बार अपनी सुविधानुसार यह क्रिया दोहराएं.
फ़ायदे: यह आसन ब्लड को प्यूरिफाई करके बच्चों को मानसिक व शारीरिक रूप से शांत बनाता है.
3. ट्री पोज़- एकपदासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाएं पैर के घुटने के ऊपर या नीचे चित्रानुसार रखें.
– आप चाहें, तो दो बच्चों को अगल-बगल में खड़ा करके एक-दूसरे के हाथों को पकड़कर यह आसन करने के लिए प्रेरित करें.
फ़ायदे: यह बच्चों में एकाग्रता, आत्मविश्‍वास और संतुलन को बढ़ाता है. यह आसन पैरों को मज़बूत बनाता है.

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कॉन्फिडेंस व बैलेंस के लिए

1. बो पोज़- धनुरासन

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– पेट के बल सीधे लेट जाएं और दोनों हाथों को सीधा रखें.
– दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर लंबी सांस लें और सीने को ऊपर उठाएं.
– दोनों हाथों से दोनों पैरों की एड़ियों को पकड़ें, जिससे चित्रानुसार धनुष का आकार बन जाएगा.
– सांस छोड़कर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं.
फ़ायदे: इससे सीने, कंधों, बांहों, पेट और जांघों की अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती है. यह आसन पीठ व पैरों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाकर बॉडी पोश्‍चर को सही रखता है और पाचनशक्ति भी बढ़ाता है.

 

क्रिएटिविटी बढाने के लिए

1. टीपॉट पोज़- नटराजासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं हाथ से पकड़ें.
– बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर चित्रानुसार टीपॉट का शेप बनाएं.
फ़ायदे: पैरों, कूल्हों और गर्दन को मज़बूत और फ्लेक्सिबल बनाता है. रीढ़ की हड्डी को भी मज़बूत बनाता है. इस पोश्‍चर से बच्चे डांस के नए-नए स्टेप्स ख़ुद बनाना सीखते हैं, जिससे उनकी क्रिएटिव थिंकिंग का भी विकास होता है.

रॉक एंड रोल

1. स्टार पोज़- उत्थिट ताड़ासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दोनों हाथों और पैरों को दाईंं या बाईं ओर झुकते हुए इस तरह फैलाएं कि चित्रानुसार स्टार शेप बने.
– सामान्य रूप से सांस लेते रहें. 2-4 बार यही क्रिया दोहराएं.
फ़ायदे: इससे वॉकिंग, बैलेंसिंग और रोलिंग जैसी फिज़िकल एक्टिविटीज़ और भी बेहतर होती है.

 

2. स्नेक पोज़- भुजंगासन

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– पेट के बल सीधे लेट जाएं. दोनों हथेलियों को सीने के पास रखें.
– सांस लेकर सिर, कंधे और सीने को चित्रानुसार ऊपर की ओर उठाएं.
– सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे लाएं और थोड़ी देर रिलैक्स करें.
फ़ायदे: इस आसन से हाथ की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं, जिससे बच्चों को लेखन में काफ़ी मदद मिलती है. बच्चों की रीढ़ की हड्डी और पीठ भी मज़बूत बनती है. साथ ही यह आसन पाचनक्रिया को बेहतर बनाकर फेफड़ों को मज़बूत बनाता है.
3. फॉलिंग स्टार पोज़- त्रिकोणासन

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– सीधे खड़े होकर सांस अंदर लें.
– दोनों पैरों के बीच दूरी बनाते हुए सांस छोड़ें.
– दोनों हाथों को ऊपर उठाकर बाईं ओर झुकें.
– दाएं हाथ से बाएं पैर को छुएं और बाईं हथेली की ओर देखें. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें, फिर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं.
– यही क्रिया दाईं ओर भी दोहराएं.
फ़ायदे: यह बॉडी स्ट्रेचिंग के लिए बहुत अच्छा आसन है. इससे हाथ, पैर, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी, सीना आदि मज़बूत होते हैं. यह नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है.

 

बैलेंसिंग आर्ट के लिए

1. ऑस्ट्रिच पोज़

yoga for children
– सीधे खड़े हो जाएं. दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें.
– कमर से आगे की तरफ़ थोड़ा झुकें और दोनों हाथों को पीछे की ओर रखकर उंगलियों को हिलाएं.
– धीरे-धीरे पैरों की उंगलियों पर खड़े होने की कोशिश करें और अब इसी पोज़ में ऑस्ट्रिच की तरह दौड़कर एक
चक्कर लगाएं.
फ़ायदे: यह आसन बच्चों में एकाग्रता और ध्यान बढ़ाता है, साथ ही उन्हें अपने कार्यों में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है. ऑस्ट्रिच की तरह दौड़ने से उनका तनाव दूर होता है.

सौजन्य:
योगाज़ू फाउंडर्स: रविंदर कौर व जसमीत कौर

 

– अनीता सिंह

बच्चों के मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक विकास के लिए देखें ये योग वीडियो:

 

आंखों के लिए योग व एक्सरसाइज़(Yoga and Exercise for Eyes)

Yoga and Exercise for Eyes

जब ज़ुबां ख़ामोश होती है, तब ये बात करती हैं… दिल के हर राज़ खोलती हैं… जी हां, हमारी आंखें बहुत महत्वपूर्ण हैं और हम अपनी नज़रों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, पर आज की लाइफस्टाइल में समय व उम्र से पहले ही आंखों की रोशनी कमज़ोर होने लगी है. ऐसे में ज़रूरत है आंखों से जुड़ी सही जानकारी, कुछ योगा, एक्सरसाइज़ व सही खान-पान की, ताकि बेनूर न हों ये ख़ूबसूरत आंखें.

Yoga and Exercise for Eyes

 

पलकें झपकाएं

– आमतौर पर कंप्यूटर पर काम करनेवाले व टीवी देखनेवाले सामान्य की बजाय कम पलकें झपकाते हैं. इससे आंखों पर स्ट्रेस पड़ता है और ड्रायनेस आ जाती है. पलकों के झपकने से आंखें फ्रेश और हाइड्रेटेड रहती हैं, साथ ही हम ज़्यादा देर तक फोकस कर पाते हैं. यह आसान-सी एक्सरसाइज़ करें-
– 2 मिनट में हर 3-4 सेकंड में पलकें झपकाएं. काम के दौरान थोड़ा समय निकालकर यह एक्सरसाइज़ करें.

हथेली से ढंकना (पामिंग)

– आंखों के स्ट्रेस को दूर करने और उन्हें रिलैक्स करने के लिए यह एक्सरसाइज़ करें. कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं. कोहनियों को टेबल पर टिका दें. कुछ देर तक गहरी सांसें लें. दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें और इनसे आंखों को ढंकें. 5-15 मिनट तक इसी तरह रहें और गहरी सांसें लें.
– रोज़ाना यह एक्सरसाइज़ कुछ मिनटों तक ज़रूर करें. इससे न स़िर्फ आंखों का स्ट्रेस दूर होगा, बल्कि दिमाग़ के साथ-साथ पूरा शरीर भी रिलैक्स होगा. साथ ही इससे आंखों की रोशनी भी तेज़ होगी.

दीवार पर आठ बनाएं

– इससे आंखों के मसल्स की एक्सरसाइज़ होती है और वे फ्लेक्सिबल बनती हैं. इसके लिए एक दीवार के सामने खड़े हो जाएं. कल्पना करें कि दीवार पर एक बड़ा-सा अंक 8 बना हुआ है. पहले कुछ मिनट तक अंक पर 8 आकार बनाते हुए ऊपर से नीचे देखें और फिर नीचे से ऊपर.

कभी दूर कभी पास

– इस एक्सरसाइज़ से आपकी आंखों के मसल्स मज़बूत होते हैं और साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. अगर आप अपने चश्मे के बढ़ रहे नंबर से परेशान हैं, तो यह एक्सरसाइज़ ट्राई करें. यह एक्सरसाइज़ आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं. इसके लिए आप अपनी इच्छानुसार खड़े रहें या बैठ जाएं. अपने हाथ के अंगूठे को चेहरे से 10 इंच की दूरी पर रखें. सामने 10-20 फीट की दूरी पर किसी चीज़ पर फोकस करें. अब पहले अंगूठे को देखें, फिर 10-20 फीट दूर उस चीज़ पर. इस दौरान गहरी सांसें लें.

ज़ूम इन ज़ूम आउट

इस एक्सरसाइज़ से आपकी फोकसिंग पावर बेहतर होती है. आंखों के मसल्स की एक्सरसाइज़ होती है और वे मज़बूत बनती हैं. कंफर्टेबल पोज़ीशन में बैठ जाएं. अपना हाथ चेहरे के सामने सीधा फैलाएं. अंगूठा ऊपर रखें. अब अंगूठे पर फोकस करें. अंगूठे पर फोकस बनाए रखें और उसे धीरे-धीरे चेहरे के पास लाएं और फिर धीरे-धीरे दूर ले जाएं. रोज़ाना 10 बार ये एक्सरसाइज़ करें. अंगूठे की बजाय आप पेन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

गोल-गोल आंखें घुमाएं

– आंखों को पहले 10 बार क्लॉकवाइज़ और 10 बार एंटी-क्लॉकवाइज़ घुमाएं. आंखों की बेहतर रोशनी के लिए यह एक बढ़िया एक्सरसाइज़ है.

आंखों को आराम भी दें

कुर्सी पर आराम से बैठें और सिर पीछे करके आंखें बंद कर लें. 3 मिनट तक इसी पोज़ीशन
में रहें. दिन में कम से कम एक बार यह एक्सरसाइज़ करें.

ज़रूरी हैं ये योगासन

सर्वांगासन

– पीठ के बल लेट जाएं. पैर आपस में सटे हुए हों.
– हाथों को दोनों ओर बगल में सटाकर रखें.
– हथेलियां ज़मीन की ओर रखें.
– श्‍वास भरकर पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं.
– पैरों को उठाते समय हाथ की सहायता भी ले सकते हैं.

– पैरों को 90 डिग्री या 120 डिग्री पर ले जाकर हाथों सेे कमर को सपोर्ट दें.
– कोहनी को न उठने दें. पैरों को मिलाकर सीधा करें.
– कुछ पल रुकें. धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.
– आंखों को बंद कर ध्यान दोनों भौहों के बीच (तीसरे नेत्र) पर केंद्रित करें.
– इसे 1 मिनट से आरंभ कर 3 मिनट तक या अधिक भी किया जा सकता है.
नोट- इसे हाई ब्लड प्रेशरवाले, माइग्रेन से पीड़ित लोग व प्रेग्नेन्ट महिलाएं न करें.

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शवासन

– पीठ के बल लेट जाएं.
– दोनों पैरों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखें.
– कमर व हाथों के बीच 6 इंच की दूरी रखें. हथेलियां खुली हुई हों.
– पैरों के पंजों की तरफ़ से शरीर को धीरे-धीरे ढीला छोड़ते जाएं.
– पूरे शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें.
– श्‍वास के अलावा पूरा तन और मन बिल्कुल शांत हो.
– अवधि: 3-10 मिनट.

 

Yoga-33
आई केयर टिप्स

– स्वस्थ आंखों व बेहतर रोशनी के लिए रोज़ाना 6-8 घंटे की नींद ज़रूरी है.
– नियमित रूप से आंखों का चेकअप करवाते रहें.
– धूप में निकलते समय हमेशा सनग्लासेस का इस्तेमाल करें.
– अगर आप स्पोर्ट्स के लिए जाते हैं, तो खेलते व़क्त आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें.
– कंप्यूटर पर काम करते समय हर 50 मिनट में 10 मिनट का ब्रेक लें. इससे आंखों को आराम मिलेगा.
– अगर आपके विज़न में ज़रा भी बदलाव आया है या फिर आपको लगातार सिरदर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को मिलें.
– ब्रेक के दौरान आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें.
– अच्छी क्वालिटी का आई मेकअप इस्तेमाल करें.

डायट का भी रखें ख़्याल

-प विटामिन ए, सी, ई और कॉपर व ज़िंक जैसे मिनरल्स बेहतर दृष्टि के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
– इसके लिए आप विटामिन ए युक्त चीज़ें, जैसे- गाजर, पालक, टमाटर, तरबूज, एप्रीकोट, शकरकंद, अंगूर आदि लें.
– विटामिन सी युक्त पदार्थ, जैसे- पार्सले, ब्रोकोली, पालक, फूलगोभी, पत्तागोभी, सेलेरी, स्ट्रॉबेरी, संतरा, पपीता, अंगूर, रसबेरी,
पाइनेप्पल, अमरूद आदि व विटामिन ई युक्त पदार्थ, जैसे- सूरजमुखी के बीज, बादाम, मूंगफली, पालक, सोयाबीन, कीवी, आम, शलगम आदि को अपने डायट में शामिल करें.
– बीटा कैरोटीन व ल्यूटिन युक्त एंटी-ऑक्सीडेंट्स मैक्यूला को सूरज की ख़तरनाक किरणों से बचाता है. एंटी-ऑक्सीडेंट युक्त हरी सब्ज़ियां, अंडे की ज़र्दी, पीली शिमला मिर्च, कद्दू, शकरकंद और गाजर का सेवन करें.
– सल्फर, किस्टाइन और लैसिथिन आंखों को मोतियाबिंद से बचाते हैं और लहसुन व प्याज़ में ये भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
– डीएचए एक फैटी एसिड है, जिससे आंखों के सेल्स मज़बूत होते हैं और आंखें भी स्वस्थ रहती हैं. वाइल्ड साल्मन, सार्डाइन, मैकरेल, कॉड आदि मछलियों में यह पाया जाता है.

– संतारा सिंह

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