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1021 सूर्य नमस्कार के साथ योग गुरु शम्मी गुप्ता की टीम ने मनाया इंटरनेशनल योगा डे! (International Yoga Day: 1021 Surya Namaskar Done By Yoga Guru Shammi Gupta’s Students)

इंटरनेशनल योगा डे के ख़ास मौ़के पर जानीमानी योग गुरु शम्मी गुप्ता ने मुंबई में सूर्याथॉन का आयोजन किया. इस सूर्याथॉन में हर उम्र के लोगों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया और सुबह पांच बजे से अपने सामर्थ्य के अनुसार सूर्य नमस्कार किए. इस सूर्याथॉन की सबसे ख़ास बात ये थी कि इसमें शम्मी गुप्ता की टीम के स्टूडेंट्स नुपूर बिस्वास, किश्‍लय कुमार, राजीव कुमार और प्रिया गुप्ता ने 1021 बार सूर्य नमस्कार का रिकॉर्ड बनाया.

Yoga Guru Shammi Gupta

 

 

6 महीने पहले से शुरू की प्रैक्टिस
शम्मी गुप्ता की स्टूडेंट नुपूर बिस्वास ने बताया कि इन सभी स्टूडेंट्स ने इंटरनेशनल योगा डे के मौके पर 1021 बार सूर्य नमस्कार करने की प्रैक्टिस 6 महीने पहले से ही शुरू कर दी थी. शम्मी गुप्ता ने अपने स्टूडेंट्स का हौसला बढ़ाया और उन्हें 1021 बार सूर्य नमस्कार करने के लिए तैयार किया. नुपूर बिस्वास ने हमें बताया कि वो पिछले 8 सालों से शम्मी के साथ लगातार योगा की प्रैक्टिस कर रही हैं. उन्होंने धीरे-धीरे प्रैक्टिस करके सूर्य नमस्कार की संख्या बढ़ाई. 6 महीने पहले उन्होंने 108 बार से प्रैक्टिस शुरू की और धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाती गईं. इसके साथ ही वो नियमित रूप से योगा भी कर रही थीं.

Yoga Guru Shammi Gupta

एक हफ्ते पहले क्या प्रैक्टिस की?
पिछले हफ्ते से इन स्टूडेंट्स ने सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस नहीं की, स़िर्फ स्ट्रेचिंग, स्ट्रेंथनिंग पोश्‍चर किए, ताकि शरीर फ्लैक्सिबल बना रहे, लेकिन कोई शरीर में कोई चोट न लगे, वरना सूर्य नमस्कार करना मुश्किल हो जाता है.
पिछले दो दिनों से ये सभी स्टूडेंट्स अपनी डायट में ज़्यादा से ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट (चावल, आलू वगैरह) ले रहे हैं, ताकि उनके शरीर में एनर्जी बनी रहे.

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क्या आप भी सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस करना चाहते हैं?
योग से आप अपनी ज़िंदगी बदल सकते हैं. योग से आप न स़िर्फ अपने शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी ख़ुद को बेहतर बना सकते हैं. यदि आप भी योग व सूर्य नमस्कार की प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो पहले किसी अच्छे योग गुरु के साथ इसकी प्रैक्टिस करें. धीरे-धीरे आपके शरीर की क्षमता बढ़ने लगेगी और योग आपके जीवन में अपने आप शामिल होता जाएगा. इंटरनेशनल योगा डे के इस ख़ास अवसर से आप भी योग की शुरुआत कीजिए और ख़ुद को दीजिए स्वस्थ जीवन का तोहफ़ा!

जानें सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा, देखें वीडियो:

योग से 10 तरह के दर्द से छुटकारा पाएं (International Yoga Day: Yoga Poses That Relieve 10 Types Of Body Pain)

International Yoga Day

योग से 10 तरह के दर्द से छुटकारा पाने के लिए के लिए आपको कौन-से योगासन करने चाहिए? इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) के ख़ास मौके पर हम आपको बता रहे हैं योग से १० तरह के दर्द से छुटकारा पाने का आसान उपाय.

International Yoga Day

* घुटने के दर्द के लिए 4 योगासन (Top 4 Yoga Poses For Knee Pain)
1) नी रोटेशन-उत्तानासन
2) नी स्ट्रेचिंग-सुलभ उत्तानासन
3) अर्ध तितली आसन-गुल्फ घूर्णन
4) अर्ध कपोत आसन-नी स्ट्रेचिंग

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर बैक पेन (Top 4 Yoga Poses For Back Pain
1) मार्जरासन
2) पूर्व भुजंगासन
3) शलभासन
4) पवनमुक्तासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर स्पॉन्डिलाइसिस (Top 4 Yoga Poses For Spondylosis)
1) हैंड इन हैंड आउट ब्रीदिंग
2) प्रसरित चक्रासन
3) शोल्डर रोटेशन
4) एलिफेंट ईयर
5) स्विमिंग स्ट्रोक

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर सर्वाइकल प्रॉब्लम्स (Top 4 Yoga Poses for Cervical Problems)
1) सुखासन-साइड स्ट्रेच
2) दत्त मुद्रा
3) सुलभ वक्रासन
4) सिंह मुद्रा

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर अर्थराइटिस (Top 4 Yoga Poses for Arthritis)
1) गतियामत मेरु वक्रासन
2) चक्कीचालन क्रिया
3) पवनमुक्तासन क्रिया
4) वीरासन-शोल्डर स्ट्रेच

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर मसल्स क्रैम्प (Top 4 Yoga Poses for Muscle Cramps)
1) गटियामत-ताड़ासन-उत्तानासन क्रिया
2) पवनमुक्तासन क्रिया
3) अधोमुख श्‍वानासन-स्ट्रेच
4) पूर्ण तितली आसन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर साइटिका (Top 4 Yoga Poses for Sciatica)
1) उत्थित एकपादासन
2) सेतुबंधासन
3) पवनमुक्तासन-हिप स्ट्रेच
4) अर्ध शलभासन-शलभासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर हैप्पी पीरियड्स (Top 4 Yoga Poses For Period Problems)
1) उपविष्ट कोणासन
2) जानुशिरासन
3) पश्‍चिमोत्तानासन
4) बद्धकोणासन
5) प्रसरित पादोत्तानासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर माइग्रेन (Top 4 Yoga Poses for Migraine)
1) उत्तानासन
2) प्रसरित पादोत्तानासन
3) अधोमुख वीरासन
4) अधोमुख स्वस्तिकासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर वेरीकोज़ वेन्स (Top 4 Yoga Poses for Varicose Veins)
वेरीकोज़ वेन्स की समस्या में भी कई लोगों को दर्द होता है, ऐसे में ये 4 योगा पोज़ेज़ आपको दर्द से राहत दिलाएंगे:
1) सुलभ जानुशिरासन
2) उत्थित एकपादासन
3) विपरीत कर्णी मुद्रा
4) सपोर्टेड विपरीत कर्णी मुद्रा

 

 

मोटापा कम करने के १० योगासन (10 Yoga For Weight Loss Fast And Naturally)

Weight Loss Fast And Naturally

मोटापा कम करने के लिए १० योगासन करके आप कुछ ही दिनों में अपना मोटापा कम (Weight Loss Fast And Naturally) कर सकते हैं. मोटापा कम करने के १० योगासन से आप अपनी बढ़ी हुई तोंद को भी कम कर सकते हैं. स्वस्थ व निरोगी रहने के लिए योग बहुत ज़रूरी है. हम आपको बता रहे हैं मोटापा कम करने के लिए १० योगासन, जिन्हें नियमित रूप से करने से जल्दी ही आपका मोटापा कम हो जाएगा और आपकी तोंद भी कम हो जाएगी.

Weight Loss Fast And Naturally

मोटापा कम करने के लिए कौन-से योगासन करने चाहिए, जानने के लिए देखें ये वीडियो:
* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर वेट लॉस (Top 4 Yoga Poses For Weight Loss)
1) मार्जरासन
2) हस्त दंडासन-चतुरंगा-भुजंगासन
3) नवासन
4) सेतु बंध आसन

बढ़ी हुई तोंद को कम करने के लिए यानी पेट की चर्बी घटाने के लिए कौन-से योगासन करने चाहिए, जानने के लिए देखें ये वीडियो:
* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर फ्लैट टमी (Top 4 Yoga Poses For Flat Tummy) 
1) उत्थित द्विपादासन-नवासन
2) उत्थित द्विपादासन-बद्धकोणासन-सुलभ हलासन
3) हस्तदंडासन-अधोमुख श्‍वानासन
4) अधोमुख श्‍वानासन

सीखें सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा (How To do Surya Namaskar)
* स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सूर्य नमस्कार को सर्वोत्तम अभ्यास माना गया है.
* इससे समस्त अंगों में क्रियाशीलता आती है तथा हार्मोंस संतुलित होते हैं.
* सम्भव हो सके, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं.
* दोनों हाथों को प्रणामासन की स्थिति में लाएं.
* दोनों पैरों के टखने व अंगूठे मिलाकर रखें.
* श्‍वास अंदर भरकर, हाथों को खोलते हुए कंधे के ऊपर से पीछे की ओर जितना ले जा सकें, ले जाएं (चित्र देखें).
* श्‍वास छोड़ते हुए हाथों को पीछे से सामने की ओर झुकाते हुए पैरों के पास रखें (अगर रख सकें तो).
* पैर घुटने से मुड़ने नहीं चाहिए.
* सिर को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें.
* नीचे झुकते हुए हाथों को मजबूती से ज़मीन पर लगाएं.
* बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. सिर ऊपर की तरफ़ तथा दाहिना घुटना सीने के पास दोनों हाथों के बीच में रहे.
* दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं.
* दोनों घुटनों को, चेस्ट को और ठुड्डी को ज़मीन से टच करें.
* श्‍वास भरते हुए आगे की तरफ़ आते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाएं. भुजंगासन की तरह श्‍वास छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं (चित्रानुसार).
* एड़ियां ज़मीन से टच होनी चाहिए.
* दाहिने पैर को आगे की ओर करें, दोनों हाथों के बीच लाकर रखें. सिर ऊपर की ओर रहे.
* बाएं पैर को भी आगे लाएं.
* सिर को पुनः घुटनों से स्पर्श करने का प्रयास करें.
* श्‍वास लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे की ओर करें.
* और फिर पूर्ववत् यानी प्रणामासन की स्थिति में आ जाएं.
* नीचे झुकते हुए हाथों को मजबूती से ज़मीन
पर लगाएं.
* दायां पैर दोनों हाथों के बीच रखें. घुटना छाती के सामने रखें.
* सिर ऊपर की तरफ़ रखें, अर्द्ध भुजंगासन की तरह.
* दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं.
* सिर व गर्दन दोनों हाथों के बीच में रखें.
* इस समय शरीर का सारा वज़न दोनों हाथों और पैरों पर रखें.
* श्‍वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं और पूर्ववत् प्रणामासन की स्थिति में आ जाएं.
* 3 राउंड से शुरू करें और अपनी क्षमतानुसार राउंड्स बढ़ाएं.

सूर्य नमस्कार करने का सही तरीक़ा जानने के लिए देखें ये वीडियो:

हेल्थ बेनिफिट्स
* सूर्य नमस्कार पेट की चर्बी कम करने के साथ ही कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखता है.
* विशेषकर मधुमेह, मेरुदण्ड, पाचन संबंधी, समस्त प्रकार के पेट संबंधी विकारों, आमाशय, अग्नाशय, फेफड़ों व हृदय संबंधी विकारों तथा मोटापे से संबंधी समस्या हेतु बहुत उपयोगी है.
* संपूर्ण शरीर में रक्त परिभ्रमण को
सुचारू करता है.
* बल और तेज की वृद्धि करता है.
* मानसिक शांति प्रदान करता है.
* रीढ़ का लचीलापन बढ़ाता है.

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पेट की चर्बी कम करने के लिए ऐसे करें साइक्लिगं: (Weight Loss Fast And Naturally)
* पीठ के बल लेट जाएं.
* बाएं पैर के घुटने को पेट तक लाएं.
* दाहिने पैर को सीधा रखें.
* बाएं पैर को इस तरह घुमाएं, जैसे साइकिल चला रहे हों और फिर सीधा कर लें.
* अब दाहिने पैर से यही क्रिया करें.
* इस प्रकार इस साइक्लिगं की क्रिया को करते रहें.
* 21 से 51 राउंड्स.
* धीरे-धीरे क्षमतानुसार ज़्यादा भी कर सकते हैं.
* फिर विपरीत दिशा में साइक्लिगं करें यानी पहले क्लॉकवाइज़, फिर एंटी क्लॉकवाइज़ करें.

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हेल्थ बेनिफिट्स (Weight Loss Fast And Naturally)
* यह पेट के विकारों के साथ-साथ पेट व कमर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है.
* कूल्हे व घुटने के जोड़ों के दर्द लिए लाभदायक है.
* पैर व जंघा को पुष्ट करता है.
* तेज़ी से वज़न घटाता है.

अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

योग से दूर भगाएं रोग… छठा अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन प्रतियोगिता व उत्सव! (6th International Yoga Convention/Competition & Festival)

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

  • अगर हम यह कहें कि आज का दौर चुनौतियों से भरा पड़ा है, तो ग़लत नहीं होगा.
  • हर जगह, हर तरफ़ चुनौतियां ही चुनौतियां हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी बदली हुई जीवनशैली, जिसने हमें ढेरों तनाव व समस्याएं दे डाली हैं.
  • इन तनावों के चलते सबसे अधिक जो प्रभावित हो रहा है, वह है हमारा स्वास्थ्य. यहां स़िर्फ शारीरिक स्वास्थ्य की ही हम बात नहीं कर रहे, बल्कि मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य का भी ज़िक्र कर रहे हैं.
  • ऐसे में हम में से अधिकांश लोग आज मन की शांति व बेहतर स्वास्थ्य के जुगाड़ के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं.
  • इस भटकाव को रोकने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है योग साधना.
  • हम सभी योग के वैज्ञानिक आधार व लाभ से वाक़िफ़ हैं, यही वजह है कि अब पूरी दुनिया योग की शरण में आ रही है.
  • इसी कड़ी में हमेशा की तरह बेहतरीन व सार्थक प्रयास हो रहा है डॉ. ओमानंदजी (गुरुजी) (Om Anandji) की देखरेख में, इंदौर (Indore) के स्वामी परमानंद इंस्टिट्यूट ऑफ योगा साइंसेस एंड रिसर्च (Parmanand Institute Of Yoga Science & Research) की ओर से. जी हां, 23-24 दिसंबर को छठे अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन प्रतियोगिता व उत्सव (6th International Yoga Convention/Competition & Festival) का आयोजन किया जाएगा, जिसका लाभ आप सभी ले सकते हैं.

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6th International Yoga Convention/Competition & Festival

  • उत्सव की ख़ास बातेंश्र अंतर्राष्ट्रीय योग कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें योग का स्वास्थ्य, शिक्षा व विश्‍व शांति पर प्रभाव विषय पर चर्चा होगी.
  • अंतर्राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता का आयोजन.
  • अंतर्राष्ट्रीय मलखम्ब प्रतियोगिता का आयोजन.
  • योग थेरेपी, जिसमें 50 से अधिक रोगों के योग चिकित्सा के सत्र होंगे.
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वादिष्ट व्यंजन व यौगिक कार्यक्रमों का आयोजन.
  • ये तमाम कार्यक्रम राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से किए जाएंगे, इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, सिंगापुर, इज़रायल व श्रीलंका से कई इंटरनेशनल योगी व प्रज़ेंटर्स हिस्सा लेंगे.
  • इस संदर्भ में अधिक जानकारी व रजिस्ट्रेशन के लिए यहां संपर्क करें-परमानंद कैंपस, खंडवा रोड, लिंबोदी, न्यू दिगंबर स्कूल के पास, इंदौर- 452020.

6th International Yoga Convention/Competition & Festival

फोन– 8839209014

ईमेल[email protected]

लिंकhttps://paramyoga.org/?page=6th-Internation-Yoga-Convention

  • आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन व फॉर्म भर सकते हैं.

फीस

  • कॉन्फ्रेंस पेपर प्रज़ेंटेशन के लिए 500
  • योग व मलखम्ब प्रतियोगिता के लिए 500
  • जो स्टूडेंट्स व प्रतिभागी सर्टिफिकेट पाना चाहते हैं, उनके लिए 100
  • अन्य प्रतिभागी- निमंत्रण पत्र/पास के ज़रिए आ सकते हैं.

योग व डायट से बनाएं अपनी सेक्स लाइफ को हॉट, हेल्दी और स्पाइसी (Yoga & Diet For Hot, Healthy & Spicy Sex Life)

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन में सेक्सुअल रिलेशन एक अहम् भूमिका अदा करती है. पर कभीकभी शारीरिक व मानसिक कारणों से इसमें मुश्किलें आने लगती हैं. तो क्यों न सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए योग व डायट टिप्स को अपनाएंपतिपत्नी के रिश्ते को मज़बूत और ख़ुशनुमा बनाने में सेक्स की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है. लेकिन कई बार अच्छी ख़ुशनुमा सेक्स लाइफ में मुश्किलें आने लगती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में दरार पड़ जाती है. ऐसा इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) यानी लिंग उत्तेजित न होने के कारण होता है. कई बार सेक्स टॉनिक या वियाग्रा जैसी कामोत्तेजक गोलियां लेकर समस्या को सुलझाने की कोशिश की जाती है, पर इससे स्थिति सुधरने की बजाय और भी बिगड़ जाती है. बेहतर सेक्स लाइफ का रहस्य इन गोलियों में नहीं, बल्कि संतुलित डायट और योग में छुपा है. इस संदर्भ में हमें विस्तृत जानकारी दे रही हैं न्यूट्रीशनिस्ट व योग इंस्ट्रक्टर नुपूर पद्मनाभन.

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

कारण

1. रक्त संबंधी बीमारी

लिंग में इरेक्शन (उत्तेजना) ख़ून के ज़्यादा बहाव के कारण आता है. यदि किसी कारणवश ख़ून का बहाव कम हो जाता है, तो इरेक्शन की समस्या होती है. ऐसा रक्त कोशिकाओं के डैमेज होने या धमनियों के कठोर होने से होता है.

2. नर्व डैमेज

डायबिटीज़, प्रोस्टेट सर्जरी या स्पाइनल कॉर्ड के क्षतिग्रस्त होने पर भी इरेक्शन की समस्या होती है.

3. दवाइयां

हाई ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन, ह्रदय संबंधी बीमारियों व प्रोस्टेट कैंसर के लिए ली

जानेवाली दवाइयों के प्रयोग से सेक्सुअल क्रियाएं प्रभावित होती हैं.

4. मानसिक कारण

अनेक मानसिक कारणों, जैसेतनाव, डिप्रेशन, व्याकुलता, डर, अपराधबोध से भी सेक्स क्रिया पर असर पड़ता है.

5. हार्मोंस

टेस्टोस्टेरॉन, थायरॉइड एवं पिट्टयूटरी हार्मोंस के असामान्य स्तर से भी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

6. बीमारियां

एनीमिया, डिप्रेशन, आर्थराइटिस, डायबिटीज़, हाइपोथायरॉइड़िज़्म, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी बीमारियां भी सेक्स को प्रभावित करती हैं.

समाधान

सेक्स लाइफ़ को बेहतर बनाने के लिए योग बहुत ही लाभकारी है.

  • इससे शरीर रिलैक्स होता है और तनाव भी दूर होता है.
  • इससे हृदय गति व ब्लडप्रेशर सामान्य होने में मदद मिलती है.
  • योग से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ जाती है.

ये सारी बातें इरेक्शन पर असर डालती हैं.

बद्ध कोणासन (बटरफ्लाई)

– दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़कर, दोनों हाथों से पकड़ लें.

– अब इन्हें बटरफ्लाई की तरह हिलाएं.

इस क्रिया को दस बार दोहराएं.

फ़ायदे

इस आसन से पेट, पीठ और पेल्विक एरिया में ब्लड सप्लाई ठीक तरह से होने लगती है. यह आसन किडनी, प्रोस्टेट और यूरिनरी ब्लैडर को हेल्दी रखता है.

बालासन (चाइल्ड पोज़)

दोनों पैरों को घुटने से मोड़ लें एवं एड़ियां जोड़कर उस पर बैठ जाएं (हलासन की स्थिति में).

सिर सामने झुकाकर ज़मीन पर टिका दें. इससे कमर ऊपर उठ जाएगी.

अब दोनों हाथों को पैरों के समानांतर इस तरह रखें कि हथेलियां ज़मीन पर टिकी रहें. (तलवे नहीं).

2 मिनट तक इसी पोज़ में रहें.

ऐसा 5 से 10 बार करें.

फ़ायदे

इस आसन से तनाव दूर होता है और सेक्सुअल क्रियाओं में काफ़ी लाभ मिलता है.

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Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

डायट

इरेक्टाइल डिस़फंक्शन का मुख्य कारण होता हैलिंग की धमनियों के अवरुद्ध होने से रक्त प्रवाह का कम होना. इसलिए इस स्थिति में शाकाहारी डायट की सलाह दी जाती है, ताकि धमनियां अवरुद्ध न होने पाएं.

डायट में ताज़े फल, हरी एवं फली वाली सब्ज़ियां, फिश आदि लें.

मैदा, प्रोसेस्ड व जंक फूड, शक्कर, आर्टिफ़िशियल स्वीटनर, जैसेसैकरीन आदि न लें.

तिल के तेल व ऑलिव ऑयल का प्रयोग बेहतर परिणाम देता है.

सादे नमक की जगह समुद्री नमक या सेंधा नमक का प्रयोग करें.

टमाटर खाएं. टमाटर का लाइक्रोपीन प्रोस्टेट ग्लैंड को हेल्दी रखता है.

कद्दू के बीज, तरबूज आदि पुरुष जननांगों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं.

वज़न अधिक न बढ़ने दें. संतुलित भोजन करें और वज़न को नियंत्रित रखें.

तलेमसालेदार एवं कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ न लें.

चाय, कॉफी, सिगरेट व शराब का अधिक सेवन न करें.

डॉ. सुषमा श्रीराव

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष: हेल्दी रहने के लिए अपनाएं यौगिक लाइफस्टाइल (International Yoga Day: Follow Yogic Lifestyle For Healthy life)

International Yoga Day

स्वस्थ व सेहतमंद बने रहने के लिए सुबह से शाम तक आपकी जीवनशैली भी बहुत मायने रखती है. सुबह से लेकर शाम तक की सभी गतिविधियां अगर योग के अनुसार हों, तो आप हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहेंगे.

International Yoga Day
सुबह की सही शुरुआत

– योग के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना लाभदायक होता है, लेकिन अगर आप 5.30 बजे तक भी उठें, तो ठीक रहेगा.
– उठने के बाद 2 ग्लास पानी पीएं. पानी रात को तांबे के बर्तन में भरकर रख दें और सुबह उठकर पीएं. पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए. बैठकर पीएं, उकड़ू बैठकर पीना और भी फ़ायदेमंद होता है. वज़न ज़्यादा है, तो गर्म पानी पीएं.
– पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और एक घंटे तक योग व प्राणायाम करें. चाहें तो, मॉर्निंग वॉक पर भी जा सकते हैं.
– नहा-धोकर तैयार हो जाएं. ईश्‍वर का ध्यान करें और अपने सफल दिन की सही शुरुआत के लिए प्रार्थना करें.
– 7.30-8 बजे तक नाश्ता करें. नाश्ते में फल, पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, दूध जैसी पौष्टिक चीज़ों को शामिल करें.
– उसके बाद दिनभर के कामों की लिस्ट बना लें. जैसे-जैसे आपके काम ख़त्म होते जाएं, उन्हें टिक कर दें और बचे हुए कामों को अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.

दोपहर को दुरुस्त बनाएं

– अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो लंच टाइम में खाना खाएं और खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें.
– खाने को ख़ूब चबा-चबाकर खाएं और खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीएं. खाते समय भी पानी नहीं पीना चाहिए.
– ऑफिस में दो घंटे से ज़्यादा लगातार सीट पर न बैठें. ऑफिस के छोटे-छोटे काम, मसलन- पानी की बॉटल भरकर लाना, चाय-कॉफी लेना, प्रिंटर से प्रिंटआउट लाना आदि ख़ुद ही करें.
– खाने के बाद अगर आपके पास फ्री टाइम है, तो थोड़ी देर टहलें.
– घर पर हैं, तो बाकी काम निपटाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं. खाना खाकर अपनी पसंद का कुछ काम कर सकते हैं. काम ख़त्म कर रात – खाने की तैयारी कर लें.

शाम हो सुकूनभरी

– ऑफिस में हैं, तो 4 बजे के क़रीब सीट पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेचिंग करें. इससे आप रिलैक्स और फ्रेश महसूस करेंगे.
– शाम की भूख मिटाने के लिए भुने हुए चने, मूंगफली, कुरमुरा, भेल, फल, चाय-बिस्किट आदि लें. पकौड़े और वड़े-समोसे से दूर रहें.
– दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीएं.
– ऑफिस से लौटकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.
– 7 बजे थोड़ा ध्यान करना आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा. 20 मिनट तक ध्यान करें. दिनभर की सारी थकान, तनाव और निगेटिविटी दूर हो जाएगी.

ताकि न हो रतजगा

– रात 8 बजे तक खाना खा लें. रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए.
– रात का भोजन टीवी देखते हुए या बातचीच करते हुए न लें. खाना खाते व़क्त बातें न करें, स़िर्फ खाने पर ध्यान दें, इससे खाना जल्दी व अच्छी तरह पचता है. ओवरईटिंग से बचें.
– रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर ज़रूर होना चाहिए और खाने के थोड़ी देर बाद 15 मिनट तक हल्की वॉक करनी चाहिए.
– खाने के बाद ज़रूरी काम निपटा लें. सोने में जब तक समय है, तब तक आप बच्चों के होमवर्क देख सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं या फिर गप्पे मार सकते हैं.
– अपने लिए थोड़ा समय निकालकर म्यूज़िक सुनें या कोई अच्छी क़िताब पढ़ें.
– रात 10 से 10.30 बजे तक सो जाएं. सोने से पहले पूरे दिन का विश्‍लेषण कर लें. अगर कोई काम अधूरा रह गया हो, तो उसे अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.
– रोज़ाना 6-8 घंटे सोएं. ऐसा कहा जाता है कि रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इन चार घंटों की नींद बाकी समय के आठ घंटों के बराबर है. ऐसे में देर से सोने का मतलब है नींद की क्वॉलिटी के साथ समझौता करना. और हां, दिन में सोने से बचें.

 

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– सत्येंद्र सिंह

11 योगासन जो आपके बच्चे को बनाएंगे फिट एंड इंटेलिजेंट(11 yoga that will make your child fit and intelligent)

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सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा हेल्दी व फिट रहे, लेकिन आज की स्ट्रेस व कॉम्पटीशन वाली ज़िंदगी में यह आसान नहीं. ऐसे में उन्हें ज़रूरत है एक सेहतमंद शुरुआत की. तो क्यों न आज ही इस दिशा में एक हेल्दी क़दम बढ़ाएं और बच्चों को दें एक बेहतरीन लाइफस्टाइल के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास का हेल्दी तोहफ़ा.

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वेक एंड स्ट्रेच

1. डाउन डॉग- अधो मुख स्वानासन
– ज़मीन पर पेट के बल सीधे लेट जाएं.
– दोनों हथेलियों को सीने के पास लाकर ऊपर की ओर उठें.
– कूल्हे को ज़मीन से उठाएं, ताकि शरीर का आकार वी शेप जैसा बन जाए.
– अब दोनों पैरों की ओर देखें.
– सामान्य अवस्था में आ जाएं.
फ़ायदे: मस्तिष्क का विकास होता है, श्‍वसन प्रणाली को बेहतर बनाता है, शरीर के ऊपरी हिस्से को मज़बूत बनाने के साथ-साथ थकान भी दूर करता है.

 

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प्राणायाम

1. ॐ का उच्चारण
– सुखासन में बैठ जाएं.
– हाथों को ज्ञानमुद्रा में रखें या फिर दोनों हथेलियों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ें.
– लंबी सांस लेकर ॐ का उच्चारण करते हुए सांस छोड़ें.
– 3-5 बार दोहराएं.
फ़ायदे: इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन से भरपूर रक्तसंचार बढ़ जाता है. उनमें ध्यान लगाने की शक्ति का विकास होता है.

 

पेशेंस प्लीज़

1. हमिंग बी- ब्राह्मरी

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– सुखासन में बैठें.
– आंखें बंद करके सांस लें और कानों में उंगली डालकर ङ्गहम्मम की आवाज़ से सांस छोड़ें.
फ़ायदे: ग़ुस्से और थकान के कारण होनेवाले तनाव को कम करता है, वोकल कॉर्ड्स को मज़बूत बनाता है, नींद की कमी को दूर भगाता है और बॉडी टिश्यूज़ को हील करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है.
2. टीज़ अप- शितकारी शीतली प्राणायाम

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– सुखासन या पद्मासन में बैठें.
– जीभ को दोनों तरफ़ से रोल करके ट्यूब जैसा बनाएं. अगर आप जीभ को रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो मुंह से छोटा ओ बनाएं.
– जीभ से सांस लें और नाक से सांस छोड़ें.
– 5-10 बार अपनी सुविधानुसार यह क्रिया दोहराएं.
फ़ायदे: यह आसन ब्लड को प्यूरिफाई करके बच्चों को मानसिक व शारीरिक रूप से शांत बनाता है.
3. ट्री पोज़- एकपदासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाएं पैर के घुटने के ऊपर या नीचे चित्रानुसार रखें.
– आप चाहें, तो दो बच्चों को अगल-बगल में खड़ा करके एक-दूसरे के हाथों को पकड़कर यह आसन करने के लिए प्रेरित करें.
फ़ायदे: यह बच्चों में एकाग्रता, आत्मविश्‍वास और संतुलन को बढ़ाता है. यह आसन पैरों को मज़बूत बनाता है.

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कॉन्फिडेंस व बैलेंस के लिए

1. बो पोज़- धनुरासन

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– पेट के बल सीधे लेट जाएं और दोनों हाथों को सीधा रखें.
– दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर लंबी सांस लें और सीने को ऊपर उठाएं.
– दोनों हाथों से दोनों पैरों की एड़ियों को पकड़ें, जिससे चित्रानुसार धनुष का आकार बन जाएगा.
– सांस छोड़कर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं.
फ़ायदे: इससे सीने, कंधों, बांहों, पेट और जांघों की अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती है. यह आसन पीठ व पैरों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाकर बॉडी पोश्‍चर को सही रखता है और पाचनशक्ति भी बढ़ाता है.

 

क्रिएटिविटी बढाने के लिए

1. टीपॉट पोज़- नटराजासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं हाथ से पकड़ें.
– बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर चित्रानुसार टीपॉट का शेप बनाएं.
फ़ायदे: पैरों, कूल्हों और गर्दन को मज़बूत और फ्लेक्सिबल बनाता है. रीढ़ की हड्डी को भी मज़बूत बनाता है. इस पोश्‍चर से बच्चे डांस के नए-नए स्टेप्स ख़ुद बनाना सीखते हैं, जिससे उनकी क्रिएटिव थिंकिंग का भी विकास होता है.

रॉक एंड रोल

1. स्टार पोज़- उत्थिट ताड़ासन

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– सीधे खड़े हो जाएं.
– दोनों हाथों और पैरों को दाईंं या बाईं ओर झुकते हुए इस तरह फैलाएं कि चित्रानुसार स्टार शेप बने.
– सामान्य रूप से सांस लेते रहें. 2-4 बार यही क्रिया दोहराएं.
फ़ायदे: इससे वॉकिंग, बैलेंसिंग और रोलिंग जैसी फिज़िकल एक्टिविटीज़ और भी बेहतर होती है.

 

2. स्नेक पोज़- भुजंगासन

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– पेट के बल सीधे लेट जाएं. दोनों हथेलियों को सीने के पास रखें.
– सांस लेकर सिर, कंधे और सीने को चित्रानुसार ऊपर की ओर उठाएं.
– सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे लाएं और थोड़ी देर रिलैक्स करें.
फ़ायदे: इस आसन से हाथ की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं, जिससे बच्चों को लेखन में काफ़ी मदद मिलती है. बच्चों की रीढ़ की हड्डी और पीठ भी मज़बूत बनती है. साथ ही यह आसन पाचनक्रिया को बेहतर बनाकर फेफड़ों को मज़बूत बनाता है.
3. फॉलिंग स्टार पोज़- त्रिकोणासन

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– सीधे खड़े होकर सांस अंदर लें.
– दोनों पैरों के बीच दूरी बनाते हुए सांस छोड़ें.
– दोनों हाथों को ऊपर उठाकर बाईं ओर झुकें.
– दाएं हाथ से बाएं पैर को छुएं और बाईं हथेली की ओर देखें. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें, फिर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं.
– यही क्रिया दाईं ओर भी दोहराएं.
फ़ायदे: यह बॉडी स्ट्रेचिंग के लिए बहुत अच्छा आसन है. इससे हाथ, पैर, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी, सीना आदि मज़बूत होते हैं. यह नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है.

 

बैलेंसिंग आर्ट के लिए

1. ऑस्ट्रिच पोज़

yoga for children
– सीधे खड़े हो जाएं. दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें.
– कमर से आगे की तरफ़ थोड़ा झुकें और दोनों हाथों को पीछे की ओर रखकर उंगलियों को हिलाएं.
– धीरे-धीरे पैरों की उंगलियों पर खड़े होने की कोशिश करें और अब इसी पोज़ में ऑस्ट्रिच की तरह दौड़कर एक
चक्कर लगाएं.
फ़ायदे: यह आसन बच्चों में एकाग्रता और ध्यान बढ़ाता है, साथ ही उन्हें अपने कार्यों में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है. ऑस्ट्रिच की तरह दौड़ने से उनका तनाव दूर होता है.

सौजन्य:
योगाज़ू फाउंडर्स: रविंदर कौर व जसमीत कौर

 

– अनीता सिंह

बच्चों के मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक विकास के लिए देखें ये योग वीडियो:

 

आंखों के लिए योग व एक्सरसाइज़(Yoga and Exercise for Eyes)

Yoga and Exercise for Eyes

जब ज़ुबां ख़ामोश होती है, तब ये बात करती हैं… दिल के हर राज़ खोलती हैं… जी हां, हमारी आंखें बहुत महत्वपूर्ण हैं और हम अपनी नज़रों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, पर आज की लाइफस्टाइल में समय व उम्र से पहले ही आंखों की रोशनी कमज़ोर होने लगी है. ऐसे में ज़रूरत है आंखों से जुड़ी सही जानकारी, कुछ योगा, एक्सरसाइज़ व सही खान-पान की, ताकि बेनूर न हों ये ख़ूबसूरत आंखें.

Yoga and Exercise for Eyes

 

पलकें झपकाएं

– आमतौर पर कंप्यूटर पर काम करनेवाले व टीवी देखनेवाले सामान्य की बजाय कम पलकें झपकाते हैं. इससे आंखों पर स्ट्रेस पड़ता है और ड्रायनेस आ जाती है. पलकों के झपकने से आंखें फ्रेश और हाइड्रेटेड रहती हैं, साथ ही हम ज़्यादा देर तक फोकस कर पाते हैं. यह आसान-सी एक्सरसाइज़ करें-
– 2 मिनट में हर 3-4 सेकंड में पलकें झपकाएं. काम के दौरान थोड़ा समय निकालकर यह एक्सरसाइज़ करें.

हथेली से ढंकना (पामिंग)

– आंखों के स्ट्रेस को दूर करने और उन्हें रिलैक्स करने के लिए यह एक्सरसाइज़ करें. कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं. कोहनियों को टेबल पर टिका दें. कुछ देर तक गहरी सांसें लें. दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें और इनसे आंखों को ढंकें. 5-15 मिनट तक इसी तरह रहें और गहरी सांसें लें.
– रोज़ाना यह एक्सरसाइज़ कुछ मिनटों तक ज़रूर करें. इससे न स़िर्फ आंखों का स्ट्रेस दूर होगा, बल्कि दिमाग़ के साथ-साथ पूरा शरीर भी रिलैक्स होगा. साथ ही इससे आंखों की रोशनी भी तेज़ होगी.

दीवार पर आठ बनाएं

– इससे आंखों के मसल्स की एक्सरसाइज़ होती है और वे फ्लेक्सिबल बनती हैं. इसके लिए एक दीवार के सामने खड़े हो जाएं. कल्पना करें कि दीवार पर एक बड़ा-सा अंक 8 बना हुआ है. पहले कुछ मिनट तक अंक पर 8 आकार बनाते हुए ऊपर से नीचे देखें और फिर नीचे से ऊपर.

कभी दूर कभी पास

– इस एक्सरसाइज़ से आपकी आंखों के मसल्स मज़बूत होते हैं और साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. अगर आप अपने चश्मे के बढ़ रहे नंबर से परेशान हैं, तो यह एक्सरसाइज़ ट्राई करें. यह एक्सरसाइज़ आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं. इसके लिए आप अपनी इच्छानुसार खड़े रहें या बैठ जाएं. अपने हाथ के अंगूठे को चेहरे से 10 इंच की दूरी पर रखें. सामने 10-20 फीट की दूरी पर किसी चीज़ पर फोकस करें. अब पहले अंगूठे को देखें, फिर 10-20 फीट दूर उस चीज़ पर. इस दौरान गहरी सांसें लें.

ज़ूम इन ज़ूम आउट

इस एक्सरसाइज़ से आपकी फोकसिंग पावर बेहतर होती है. आंखों के मसल्स की एक्सरसाइज़ होती है और वे मज़बूत बनती हैं. कंफर्टेबल पोज़ीशन में बैठ जाएं. अपना हाथ चेहरे के सामने सीधा फैलाएं. अंगूठा ऊपर रखें. अब अंगूठे पर फोकस करें. अंगूठे पर फोकस बनाए रखें और उसे धीरे-धीरे चेहरे के पास लाएं और फिर धीरे-धीरे दूर ले जाएं. रोज़ाना 10 बार ये एक्सरसाइज़ करें. अंगूठे की बजाय आप पेन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

गोल-गोल आंखें घुमाएं

– आंखों को पहले 10 बार क्लॉकवाइज़ और 10 बार एंटी-क्लॉकवाइज़ घुमाएं. आंखों की बेहतर रोशनी के लिए यह एक बढ़िया एक्सरसाइज़ है.

आंखों को आराम भी दें

कुर्सी पर आराम से बैठें और सिर पीछे करके आंखें बंद कर लें. 3 मिनट तक इसी पोज़ीशन
में रहें. दिन में कम से कम एक बार यह एक्सरसाइज़ करें.

ज़रूरी हैं ये योगासन

सर्वांगासन

– पीठ के बल लेट जाएं. पैर आपस में सटे हुए हों.
– हाथों को दोनों ओर बगल में सटाकर रखें.
– हथेलियां ज़मीन की ओर रखें.
– श्‍वास भरकर पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं.
– पैरों को उठाते समय हाथ की सहायता भी ले सकते हैं.

– पैरों को 90 डिग्री या 120 डिग्री पर ले जाकर हाथों सेे कमर को सपोर्ट दें.
– कोहनी को न उठने दें. पैरों को मिलाकर सीधा करें.
– कुछ पल रुकें. धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.
– आंखों को बंद कर ध्यान दोनों भौहों के बीच (तीसरे नेत्र) पर केंद्रित करें.
– इसे 1 मिनट से आरंभ कर 3 मिनट तक या अधिक भी किया जा सकता है.
नोट- इसे हाई ब्लड प्रेशरवाले, माइग्रेन से पीड़ित लोग व प्रेग्नेन्ट महिलाएं न करें.

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शवासन

– पीठ के बल लेट जाएं.
– दोनों पैरों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखें.
– कमर व हाथों के बीच 6 इंच की दूरी रखें. हथेलियां खुली हुई हों.
– पैरों के पंजों की तरफ़ से शरीर को धीरे-धीरे ढीला छोड़ते जाएं.
– पूरे शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें.
– श्‍वास के अलावा पूरा तन और मन बिल्कुल शांत हो.
– अवधि: 3-10 मिनट.

 

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आई केयर टिप्स

– स्वस्थ आंखों व बेहतर रोशनी के लिए रोज़ाना 6-8 घंटे की नींद ज़रूरी है.
– नियमित रूप से आंखों का चेकअप करवाते रहें.
– धूप में निकलते समय हमेशा सनग्लासेस का इस्तेमाल करें.
– अगर आप स्पोर्ट्स के लिए जाते हैं, तो खेलते व़क्त आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें.
– कंप्यूटर पर काम करते समय हर 50 मिनट में 10 मिनट का ब्रेक लें. इससे आंखों को आराम मिलेगा.
– अगर आपके विज़न में ज़रा भी बदलाव आया है या फिर आपको लगातार सिरदर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को मिलें.
– ब्रेक के दौरान आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें.
– अच्छी क्वालिटी का आई मेकअप इस्तेमाल करें.

डायट का भी रखें ख़्याल

-प विटामिन ए, सी, ई और कॉपर व ज़िंक जैसे मिनरल्स बेहतर दृष्टि के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
– इसके लिए आप विटामिन ए युक्त चीज़ें, जैसे- गाजर, पालक, टमाटर, तरबूज, एप्रीकोट, शकरकंद, अंगूर आदि लें.
– विटामिन सी युक्त पदार्थ, जैसे- पार्सले, ब्रोकोली, पालक, फूलगोभी, पत्तागोभी, सेलेरी, स्ट्रॉबेरी, संतरा, पपीता, अंगूर, रसबेरी,
पाइनेप्पल, अमरूद आदि व विटामिन ई युक्त पदार्थ, जैसे- सूरजमुखी के बीज, बादाम, मूंगफली, पालक, सोयाबीन, कीवी, आम, शलगम आदि को अपने डायट में शामिल करें.
– बीटा कैरोटीन व ल्यूटिन युक्त एंटी-ऑक्सीडेंट्स मैक्यूला को सूरज की ख़तरनाक किरणों से बचाता है. एंटी-ऑक्सीडेंट युक्त हरी सब्ज़ियां, अंडे की ज़र्दी, पीली शिमला मिर्च, कद्दू, शकरकंद और गाजर का सेवन करें.
– सल्फर, किस्टाइन और लैसिथिन आंखों को मोतियाबिंद से बचाते हैं और लहसुन व प्याज़ में ये भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
– डीएचए एक फैटी एसिड है, जिससे आंखों के सेल्स मज़बूत होते हैं और आंखें भी स्वस्थ रहती हैं. वाइल्ड साल्मन, सार्डाइन, मैकरेल, कॉड आदि मछलियों में यह पाया जाता है.

– संतारा सिंह

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डायबिटीज़ कंट्रोल करने के लिए 10 योगासन(10 Yoga for Diabetes Control)

Yoga for Diabetes Control

डायबिटीज़ को कंट्रोल करना है तो व्यायाम और योगासन को अपने रूटीन में शामिल करें. यक़ीन मानिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का सबसे इफेक्टिव और ईज़ी तरीका है योग (Yoga for Diabetes Control).

1. प्राणायाम

गहरी सांस लेने और छोड़ने से रक्त संचार दुरुस्त रहता है. इससे नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है, जिससे अमूमन दिमाग़ शांत रहता है. इसलिए हर किसी को सुबह फ्रेश होने के बाद पद्मासन मुद्रा में बैठकर प्राणायाम करने की सलाह दी जाती है.

Yoga for Diabetes Control
2. सेतुबंधासन

यह आसन डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. यह न स़िर्फ ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है, बल्कि मन को शांति और सुकून देता है. इसे नियमित करने से पाचनतंत्र ठीक रहता है. गर्दन और रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ-साथ यह आसन पीरियड में आराम दिलाता है.

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3. बलासन

डायबिटीज़ को जड़ से समाप्त करनेवाला यह आसन बच्चों की मुद्रा नाम से भी जाना जाता है. इससे सारा तनाव और थकान दूर हो जाती है. यह स्पाइन, जंघा और टखनों की स्ट्रेचिंग करता है. इससे तनाव और थकान से राहत मिलती है. लोअर बैक पेन में भी यह सहायक है.

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4. वज्रासन

यह बेहद सरल आसन है जो डायबिटीज़ के मरीज़ों को ज़रूर आज़माना चाहिए. इससे मन शांत और पाचन तंत्र ठीक रहता है. इससे स्पाइन की हड्डियों और शरीर के निचले हिस्से का मसाज हो जाता है. इस कारण यह बहुत अच्छे नतीजे देता है.

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5. सर्वांगासन

डायबिटीज़ में फ़ायदेमंद यह आसन वस्तुतः थायरॉइड ग्रंथि का कामकाज दुरुस्त करता है. थायरॉइड की ग्रंथियां पूरे शरीर की ऐक्टिविटीज़ सही रखती हैं. इस आसन से पाचन तंत्र, नर्वस सिस्टम और ब्रीदिंग सिस्टम अच्छा रहता हैं. यह स्पाइन को भी मज़बूत करता है.

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6. हलासन

इस आसन को डायबिटीज़ के लिए इसलिए अनुकूल माना गया है, क्योंकि यह लंबे समय तक बैठनेवालों के लिए फ़ायदेमंद है. यानी पोस्चर संबंधी समस्या के लिए यह वरदान है. यह गले की ग्रंथि, फेफड़ों और दूसरे अंगों को उत्तेजित करता है, जिससे पूरे शरीर में रक्त संचार तेज़ी से होता है.

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7. धनुरासन

जिन्हें लंबे समय से डायबिटीज़ की शिकायत हो, उनके लिए यह आसन कारगर है. इससे पीठ और रीढ़ की बहुत अच्छी एक्सरसाइज़ हो जाती है. इसे नियमित करनेवाले हमेशा तनावमुक्त रहते हैं. यह क़ब्ज़ से राहत दिलाता है. इसे नियमित करनेवालों के प्रजनन संबंधी अंग ठीक रहते हैं.

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8. चक्रासन

डायबिटीज़ को हमेशा के लिए ख़त्म करनेवाला यह आसन रीढ़ की स्ट्रेचिंग और पीठ के टिश्यूज़ को रिलैक्स करने में कारगर होता है. इस आसन को बिना नागा किए रोज़ाना करने से दिमाग़ को बहुत सुकून मिलता है और जीवन तनाव-मुक्त रहता है.

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9.पश्‍चिमोत्तासन

यह आसन डायबिटीज़ और ब्लडप्रेशर के लिए बहुत कारगर माना जाता है. इसमें शरीर को आगे की ओर मोड़ा जाता है, जिससे रक्त संचार चेहरे की तरफ़ होता है. इसे करने से पेट संबंधी विकार ख़त्म हो जाते हैं. जांघ के टिश्यूज़ के साथ पीठ और बांह के टिश्यूज़ को मज़बूत करता है.

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10. अर्ध मत्स्येन्द्रासन

इस आसन को डायबिटीज़ ठीक करनेवाले आसन की कैटेगरी में इसलिए भी रखा गया है, क्योंकि यह आसन विशेष रूप से फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सीजन ज़्यादा समय तक रोकने की क्षमता बढ़ाता है. यह स्पाइन को आराम देता है. पीठदर्द या पीठ संबंधी दूसरी समस्यों से निजात दिलाता है.

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5 आम रोग, 5 ईज़ी योग (Easy Yoga For Common Diseases)

Easy Yoga For Common Diseases

बदलती जीवनशैली और खानपान की ग़लत आदतों का बुरा प्रभाव सीधा हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिसके कारण माइग्रेन, थायरॉइड, डायबिटीज़ आदि बीमारियां हमारे शरीर को जकड़ लेती हैं. लेकिन योग और कुछ घरेलू इलाज से इनसे राहत पाई जा सकती है.

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1. पीठदर्द

कारण: मांसपेशियों में खिंचाव, उठने-बैठने का ग़लत तरीक़ा, प्रेग्नेंसी के बाद और बहुत अधिक शारीरिक श्रम करने से.

 

हलासन

Hal-Aashan
– ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएं. दोनों हथेलियों को ज़मीन पर रखें.
– दोनों पैरों की एड़ियों व पंजों को मिलाकर रखें.
– दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ़ उठाते हुए 90 डिग्री का कोण बनाते हुए सिर के पीछे की तरफ़ ले जाएं और पैरों को बिल्कुल सीधा रखें.
– हाथों को ज़मीन पर सटाकर रखें और घुटनों को माथे पर सीधा रखें, मोड़ें नहीं.
– 1-2 मिनट तक इसी स्थिति में रहते हुए सांस लें और छोड़ें.
– धीरे-धीेरे पूर्व स्थिति में आ जाएं. पूर्व स्थिति में आते समय घुटनों को सीधे रखें.

अन्य आसन भी हैं फ़ायदेमंद: त्रिकोणासन, पश्‍चिमोत्तासन, सुप्त वक्रासन, सेतु बंधासन, भुजंगासन.

 

क्विक टिप्स:

– हर्बल ऑयल (कोकोनट ऑयल/आल्मंड ऑयल/नीलगिरी ऑयल/ऑलिव ऑयल) को गुनगुना करके पीठ पर मसाज करें.
– सरसों या नारियल के तेल को गरम करके 8-10 लहसुन की कलियां डालकर पका लें. ठंडा करके तेल को छानकर पीठ पर लगाएं.
– क्रश्ड आइस को प्लास्टिक बैग में भर लें. तौलिए में लपेटकर पीठ पर 10-15 मिनट तक सेंक लें.
– 100-100 ग्राम खसखस और मिश्री को पीस लें. दिन में 2 बार गुनगुने दूध के साथ 2 टीस्पून लेने से दर्द में राहत मिलेगी.

 

2. सर्दी-ज़ुकाम

कारण: मौसम में बदलाव, ग़लत खान-पान और जीवनशैली, विपरीत तापमान में अधिक समय तक रहना और वायरस.

 

सर्वांगासन

bhujangasana
– पीठ के बल लेट जाएं.
– दोनों हाथों को ज़मीन पर रखें.
– सांस लेते हुए पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं. पैरों को ऊपर उठाते हुए हाथों से कमर को सपोर्ट दें.
– पैरों को 90 डिग्री या 120 डिग्री पर ले जाकर हाथों को उठाकर कमर के पीछे लगाएं.
– कोहनियां ज़मीन पर टिकी हों. पैरों को मिलाकर सीधा करें. थोड़ी देर रुकें. फिर पूर्व अवस्था में आ जाएं.
– आंखों को बंद करके दोनों भौंहों के बीच 1-3 मिनट तक ध्यान केंद्रित करें.

अन्य आसन भी हैं फ़ायदेमंद: मकरासन, शवासन, धनुरासन.

 

क्विक टिप्स:

– 2 टीस्पून पान के पत्ते के रस में 1 टीस्पून शहद मिलाकर दिन में 2 बार खाने के बाद लें.
– 4 कप पानी में 1 टेबलस्पून हल्दी पाउडर और 3-4 तुलसी के पत्ते मिलाकर 10 मिनट तक उबाल लें. छानकर 1 टीस्पून शहद और स्वादानुसार नींबू का रस मिलाकर पीएं.
– 5-6 साबूत कालीमिर्च, आधा टीस्पून जीरा, थोड़े-से गुड़ को 1 कप पानी में मिलाकर 1/4 रह जाने तक उबाल लें. छानकर व ठंडा करके पीएं.
– 3-4 तुलसी की पत्तियों को क्रश करके आधा-आधा टीस्पून अदरक का रस और शहद मिलाकर खाएं.
– देसी घी में 3-4 लहसुन की कलियां भूनकर खाएं. यह खाने में थोड़ा-सा कसैला, लेकिन बहुत फ़ायदेमंद होता है.

 

3. माइग्रेन

 

कारण: नींद की कमी, तनाव, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, अल्कोहल का अधिक मात्रा में सेवन, एलर्जिक रिएक्शन.

 

अनुलोम-विलोम-प्राणायाम

– सुखासन में बैठ जाएं. कमर बिल्कुल सीधी रखें.
– अनामिका और कनिष्का से बाईं नाक को बंद करें. दाईं नाक से सांस लें. अब अंगूठे से दाईं नाक बंद करें.
– बाईं नाक से सांस निकाल लें. कुछ क्षण रुकें.
– दाईं नाक से सांस निकाल दें. कुछ क्षण रुकें. दोबारा दाईं नाक से सांस लें.
– सांस को बिना आवाज़ के धीरे-धीरे अंदर लें और बाहर छोड़ें. इस प्रक्रिया को 10 मिनट तक दोहराएं.

अन्य आसन भी हैं फ़ायदेमंद: भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा और महासिर मुद्रा.

क्विक टिप्स:
– आधा ग्लास गाजर के जूस में आधा ग्लास पालक का जूस मिलाकर पीएं.
– पत्तागोभी की पत्तियों को क्रश करके माथे पर 20-25 मिनट तक लगाकर रखें.
– 3-4 नींबू के सूखे छिलकों को पीसकर पाउडर बना लें. थोड़ा-सा पानी मिलाकर माथे पर लगाएं.
– 2 टेबलस्पून गुनगुने तिल के तेल में आधा-आधा टीस्पून दालचीनी पाउडर और इलायची पाउडर मिलाकर माथे पर हल्के-से मालिश करें. 3-4 घंटे बाद धो लें.
– 1 ग्लास पानी में 1-1 टेबलस्पून एप्पल साइडर विनेगर और शहद मिलाकर रोज़ाना पीएं.
– 4-5 ब़र्फ के टुकड़ों को तौलिए में रखकर पोटली बना लें. इससे माथा, कनपटी और गर्दन के पीछे सेंकें.

 

4. डायबिटीज़

कारण: ग़लत जीवनशैली, खान-पान में गड़बड़ी, तनाव, वंशानुगत, मोटापा और बढ़ती उम्र.

 

नौकासन

 

Easy Yoga For Common Diseases

– ज़मीन पर सीधे लेट जाएं. सिर और कंधों को ऊपर उठाएं.
– फिर पैरों को भी सीधा उठाएं. हाथ, पैर और सिर समान्तर रहें.
– कुछ क्षण इसी स्थिति में रहें. धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं. इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएं.

अन्य आसन भी हैं फ़ायदेमंद: हलासन, बालासन, शवासन, अनुलोम-विलोम-प्राणायाम, मांडुक्य आसन, अर्धमत्स्येंद्रासन.

 

क्विक टिप्स:

– रोज़ाना सुबह खाली पेट आधा कप करेले का जूस पीएं.
– नियमित रूप से गुनगुने दूध के साथ 2 टेबलस्पून मेथी पाउडर लें.
– 1 कप करेले के जूस में 1 टेबलस्पून आंवले का रस मिलाकर 1 महीने तक लगातार पीएं.
– 10-15 आम की नरम पत्तियों को 1 ग्लास पानी में रातभर भिगोकर रखें. रोज़ाना सुबह छानकर पानी पी लें.
– आम की पत्तियों को सुखाकर मिक्सर में पीस लें. आधा टीस्पून पाउडर को दिन में 2 बार लें.

 

5. थायरॉइड

कारण: ग़लत जीवनशैली, तनाव, मोटापा, अवसाद, ब्लड प्रेशर आदि.

 

बालासन

 

– वज्रासन में बैठ जाएं. धीरे-धीरे आगे की तऱफ़ झुकें और सिर को ज़मीन से स्पर्श करें.
– हाथों को पीछे की तरफ़ ले जाएं. धीरे-धीरे शरीर को ढीला छोड़ते जाएं.
– 2-3 मिनट तक इसी अवस्था में रहें.

अन्य आसन भी हैं फ़ायदेमंद: सर्वांगासन, मकरासन, सिंहासन, हलासन, शवासन, पश्‍चिमोत्तासन.

 

क्विक टिप्स:

– 2 टेबलस्पून साबूत धनिया को 1 ग्लास पानी में रातभर भिगाकर रखें. सुबह इस पानी को आधा रह जाने तक उबालकर पी लें. शाम को इसी प्रक्रिया को दोहराएं.
– 2 कप पानी में अदरक, पुदीना, दालचीनी, इलायची, नींबू का रस और शहद मिलाकर 2-3 मिनट तक उबाल लें. थोड़ी-सी ग्रीन टी मिलाकर आधा रह जाने तक उबाल लें. छानकर पीएं.
– डेढ़ कप पानी में 2-3 टुकड़े अदरक डालकर आधा रह जाने तक उबाल लें. छानकर 3-4 बूंदें नींबू का रस और आधा टीस्पून शहद मिलाकर पीएं.

रेडी फॉर योगा क्लासेस? (How to get ready for Yoga Class)

अगर आप योगा क्लासेस ज्वॉइन करने की सोच रहे हैं और समझ में नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से और कैसे की जाए, तो परेशान न हों. चलिए, आपको देते हैं कुछ टिप्स, जिससे आपके योगा क्लासेस का सेशन बन जाएगा और भी दिलचस्प.

 

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घर के पास हो योगा क्लास

– योगा करते व़क्त दिमाग़ शांत होना चाहिए. आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि योगा क्लास आपके घर के आसपास ही हो, ताकि ट्रैवेलिंग की थकावट न हो.
–  योग्य योगा प्रशिक्षक से ही ट्रेनिंग लें.

 

क्लासेस जाने के पहले की शॉपिंग

– योगा आरामदायक कपड़ों में करना चाहिए.

– ऐसे कपड़े ख़रीदें, जो न ़ज़्यादा टाइट हों और न ही ज़्यादा ढीले. टाइट कपड़ों में रक्तसंचार बाधित हो सकता है, जबकि ढीले-ढाले कपड़ों में फंसकर गिरने का ख़तरा तो रहता ही है और टीचर को आपके पॉश्‍चर भी ठीक से नज़र नहीं आएंगे.

– कपड़ों की शॉपिंग के दौरान यह भी ध्यान रखें कि आपके कपड़े ज़्यादा रिविलिंग न हों. कई आसान काफ़ी कठिन होते हैं, इसलिए शालीन कपड़े पहनें. स़फेद रंग के  टाइट पैंट्स न पहनें, क्योंकि स़फेद पैंट्स काफ़ी रिविलिंग लगते हैं.

– मार्केट में योगा के लिए ख़ास कपड़े भी मिलते हैं.

– वैसे क्लासेस में योगा मैट्स तो होते ही हैं. लेकिन आप अपनी योगा मैट भी साथ ले जा सकते हैं. इसके लिए एक बार क्लासेस में पूछ लें. योगा मैट ऐसी हो, जो  फ्लोर पर फिसले न.

–  पानी की बॉटल भी साथ ले जाएं.

– किसी भी प्रकार के एक्सरसाइज़ के दौरान पसीना बहुत निकलता है. पसीने की वजह से इंफेक्शन न हो, इसलिए एक तौलिया भी पास रखें और पसीना पोंछते रहें.

 

इन बातों का रखें ख़्याल

-समय से 15 मिनट पहले पहुंचने की कोशिश करें.

– क्लास के भीतर जाने से पहले अपने फुटवेयर बाहर ही या जहां शू रैक हो वहां उतार दें.

– योगा सेंटर ध्यान लगाने की जगह है. अगर आप क्लास के लिए लेट हो गए हैं तो अंदर शांती से प्रवेश करें, ताकि किसी को ध्यान लगाने में परेशानी न हो.

– योगा टीचर को अपने बारे में सारी जानकारियां दें, जैसे- शरीर में किसी प्रकार का दर्द या हाल ही में लगी चोट के बारे में सारी जानकारियां दें, ताकि टीचर आपके आसान में परिवर्तन कर सकें और आपको किसी तरह की चोट न लगे.

– क्लास के बीच में दोस्तों से बात करके दूसरों को परेशान न करें.

– अगर कोई आसान समझ न आ रहा हो, तो विनम्रता से टीचर से पूछ लें.

– क्लास में जाने से पहले अपना फोन बंद कर दें या फिर साइलेंट मोड पर रख दें.

– अपनी जगह तक ध्यान से जाएं. ध्यान रखें कि दूसरों के मैट पर आपका पैर न पड़े.

-योगा करते व़क्त काफ़ी पसीना आता है, जिसकी दुर्गंध दूसरों को परेशान कर सकती है. योगा क्लास नहाकर और डियोड्रेंट लगा कर जाएं. एक बात का ख़्याल रखें कि डियो की सुंगध ज़्यादा स्ट्रॉन्ग न हो.

– तनाव योगा क्लास के बाहर ही छोड़ दें. जितना आप तनावमुक्त रहेंगे, उतने ही अच्छे से योगासन कर पाएंग और लाभ भी ज़्यादा होगा.

– अपने योगा टीचर पर भरोसा करें. टीचर द्वारा सिखाए गए आसन को ध्यान से देख कर करें.