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इंटरनेशनल योगा डे…बॉलीवुड स्टार्स ने भी किया योग

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फोटो सौजन्य- आईएएनएस

देश-विदेशो में 21 जून को दूसरा इंटरनेशनल योगा डे बड़े ही ज़ोर-शोर से मनाया गया. आम लोगों के साथ-साथ कई नेता, खिलाड़ी, बॉलीवुड स्टार्स ने भी योग किया और योग के ज़रिए फिट रहने का संदेश दिया. टाइगर श्रॉफ, बिपाशा बासु ने भी योग किया.

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फोटो सौजन्य- आईएएनएस

बिपाशा पहुंचीं बैंगलोर जहां उन्होंने लोगों के बीच पहुंच कर न सिर्फ़ योग किया, बल्कि वहां मौजूद लोगों को योग सिखाया भी. देखें ये तस्वीरें.

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फोटो सौजन्य- आईएएनएस

 

 

 

आंखों के लिए योग (Yoga for Eyes to Improve Vision in Hindi)

आंखें न स़िर्फ किसी के व्यक्तित्व का आईना होती हैं, बल्कि ये आपकी सेहत भी दर्शाती हैं, ऐसे में बेहद ज़रूरी है कि इन आंखों का ख़ास ख़्याल रखा जाए. आंखों को हेल्दी रखने के लिए भी योग (Yoga for Eyes) बहुत लाभकारी है, तो इन आसनों को अपनाएं और अपनी आंखों को हेल्दी बनाएं.

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त्राटक
* किसी बिंदु पर अपलक दृष्टि से देखना त्राटक कहलाता है.
* आमतौर पर आप मोमबत्ती की ज्योति पर त्राटक करें. कमरे में पंखा, कूलर आदि न चलाएं. सूर्योदय के 30 मिनट बाद तक व सूर्यास्त के 30 मिनट पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य पर भी त्राटक कर सकते हैं.
* त्राटक आपकी नेत्र ज्योति बढ़ाने में लाभकारी है.
* इन क्रियाओं के दौरान अपनी पलकों को बार-बार न झपकाएं. अगर आंख से पानी आता है, तो घबराए नहीं. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

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जीह्व मुद्रा
* मुंह बंद करके जीभ को ऊपरी तालू से चिपकाएं.
* अब अपने मुंह को जितना खोल सकते हैं, खोलें.
* अपना पूरा ध्यान नाक के ऊपरी हिस्से पर लगाएं.
* सामान्य रूप से नाक से सांस लें और छोड़ें.
फ़ायदे
* रक्तसंचार को बेहतर बनाकर ब्लड प्रेशर को
कंट्रोल में रखता है.
* यह मुद्रा आंतरिक रूप से थायरॉइड और
पैराथायरॉइड ग्लैंड पर काम करती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती. इससे चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है.
सिंह मुद्रा
* आराम से बैठ जाएं. दोनों हथेली को घुटनों पर दबाकर रखें और शरीर को थोड़ा आगे की तरफ़ लाएं.
* सांस छोड़ते हुए जीभ को इस तरह बाहर निकालें, जैसे ठोडी को टच कर रहे हों. मुंह खुला रखें. आंखों से आज्ञा चक्र को देखने का प्रयास करें.
* मुंह या नाक से सांस लें.
* चेहरे का सौंदर्य बढ़ाता है और आंखों की रौशनी भी बेहतर करता है.

 

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सायना नेहवाल, बेडमिंटन प्लेयर
संतुलित डायट, नियमित एक्सरसाइज़ और टफ ट्रेनिंग सेशन में भी सायना रोज़ाना सुबह और शाम को रिलैक्सेशन के लिए योगाभ्यास ज़रूर करती हैं. वो योग निद्रा करती हैं, जो एक तरह का योग मेडिटेशन है.

 

हेल्दी लाइफ के लिए योग ( Yoga For Healthy Life )

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स्वस्थ रहना भी आज के दौर में किसी चुनौती से कम नहीं. लेकिन नियमित योगासन से आप हेल्दी लाइफ जी सकते हैं. यूं तो स्वस्थ जीवन के लिए नियमित रूप से सारे आसन करने ज़रूरी हैं, लेकिन जो सबसे ज़रूरी हैं, वो यहां बताए जा रहे हैं. इनके अलावा सूर्य नमस्कार भी ज़रूर करें.

कपालभाति

* सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं.
* दोनों हाथों को घुटनों पर रखें.
* आंखों को बंद कर लें.
* सांस लेते हुए सीने को ऊपर की तरफ़ रखें और लगातार सांस छोड़ते जाएं.
* शुरुआत में धीमे-धीमे फिर तेज़ी से प्रश्‍वास करें यानी सांस छोड़ें.
* इस दौरान नाभि प्रदेश पर हल्का-सा धक्का-सा लगता है.
* आरम्भ में 1 बार में 30 से 40 स्ट्रोक करें.
* धीरे-धीरे अभ्यास द्वारा 100 या अधिक स्ट्रोक भी किए जा सकते हैं. क्षमतानुसार बढ़ाएं.
* माइग्रेन, हाई बीपी वाले धीमे-धीमे करें एवं प्रेग्नेन्ट महिलाएं न करें.

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अनुलोम-विलोम

* सुखासन में बैठ जाएं.
* अनामिका और कनिष्ठा (छोटी अंगुली) से बाईं नाक को बंद करें. दाईं नाक से सांस लें.
* अब अंगूठे से दाहिनी नाक बंद करें. बाईं नाक से सांस निकाल दें. कुछ क्षण रुकें.
* बाईं नाक से सांस लें और फिर बाईं नाक बंद करें.
* दाहिनी नाक से अंगूठा हटाएं और सांस छोड़ें.
* यह एक साइकल है. 5-10 साइकल से शुरुआत करें और धीरे-धीरे नंबर बढ़ाएं.

शवासन

* पीठ के बल लेट जाएं. दोनों पैरों के बीच लगभग 1 फीट का फ़ासला रखें. कमर व हाथों के बीच 6 इंच के क़रीब फ़ासला रखें. हथेलियां ऊपर की तरफ़ खुली हुई हों.
* पैरों के पंजों की तरफ़ से शरीर को धीरे-धीरे ढीला छोड़ते जाएं. पूरे शरीर को पूरी तरह से शिथिल छोड़ दें. मन शांत रखें.
* शवासन के तुरंत बाद स्नान न करें.

त्रिकोणासन

* अपने स्थान पर खड़े हो जाएं.
* दोनों पैरों के बीच 3-3.5 फीट का फासला रखें.
* दाहिना पैर 90 डिग्री दाहिनी तरफ़ और बायां पैर 30-40 डिग्री दाहिनी तरफ़ मोड़ें.
* सांस लेते हुए अपने हाथों को कंधे के समानांतर लाएं.
* सांस छोड़ते हुए दाईं तरफ़ कमर से झुकें.
* दायां हाथ नीचे और बाएं हाथ को ऊपर की तरफ़ ले जाएं. चित्रानुसार.
* यही क्रिया दूसरे हाथ से करें.
* 5-5 राउंड्स तक, प्रत्येक अवस्था में 30 सेकंड्स तक रुक सकते हैं.

अन्य लाभः कमर, गर्दन, कंधे एवं पैरों को स्ट्रॉन्ग बनाता है और पैरों की विकृति को ठीक करता है.

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सावधानियां

प्राणायाम करने के पहले निम्न सावधानियां बरतें:
1. प्राणायाम हमेशा खाली पेट करना चाहिए.
2. प्राणायाम सबके लिए है.
3. भस्त्रिका और कपालभाति सब कर सकते हैं, लेकिन हृदय रोगी, गर्भवती स्त्री और पीरियड्स के दौरान न करें.
4. पूरी प्रसन्नता और एकाग्रता से प्राणायाम करें.
5. प्राणायाम करते समय आंखें बंद रखें और अपने आप को विचारों से मुक्त रखने का प्रयास करें.
6. पूरा ध्यान प्राणों की होनेवाली गति पर रखें.
7. अधिक शारीरिक दर्द या बेचैनी होने पर प्राणायाम न करें.
8. बैठकर, रीढ़ को, गर्दन को और सिर को एक लाइन में रखकर प्राणायाम का अभ्यास अधिक लाभदायक होता है.
9. यदि आप बैठ नहीं सकते, तो पूरी सजगता से लेटे-लेटे, धीमे-धीमे अभ्यास जारी रखें.
10. कुछ तरह के प्राणायाम अपने शिक्षक या गुरु की उपस्थिति में ही करने चाहिए.
11. पीरियड्स के दौरान स़िर्फ अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उदगीथ प्राणायाम धीरे-धीरे कर सकते हैं. अन्य प्राणायाम न करें.

 

एसिडिटी में फ़ायदेमंद योगासन

असंतुलित खान-पान के चलते हमें पेट सबंधी कई समस्याओं का सामना अक्सर करना पड़ता है. अधिकतर लोग आजकल गैस व एसिडिटी की समस्या से पीड़ित रहते हैं. ऐसे में उन्हें ये योगासन ज़रूर करने चाहिए- पवनमुक्तासन, वज्रासन, सर्वांगासन, मारिच्य आसन, शलभासन व धनुरासन.

 

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सचिन तेंदुलकर, क्रिकेटर

योग गुरु स्वर्गीय बी. के. एस. अय्यंगर को याद करते हुए सचिन तेंदुलकर ने कहा था, “मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा, क्योंकि उन्होंने योग के जो अद्भुत आसन मुझे सिखाए, उनसे मुझे अपने पूरे करियर में बहुत मदद मिली है. तक़रीबन दस वर्ष पूर्व मेरे पैर में दर्द हुआ था, जिसके लिए मुझे सर्जरी की सलाह दी गई थी, लेकिन मैं सर्जरी को लेकर भी इतना कॉन्फिडेंट नहीं था. उसी समय ज़हीर ख़ान ने मुझे गुरुजी के पास जाने की सलाह दी और उनकी सकारात्मकता व मार्गदर्शन ने मुझे रिकवर होने में इस हद तक मदद की कि सर्जरी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी.”

पीठदर्द से राहत के लिए योग (Yoga for Backpain)

कमरदर्द (Yoga for Backpain) एक आम समस्या है, लेकिन अक्सर हम इसे नज़रअंदाज़ करते रहते हैं, नतीजतन तकलीफ़ दिन-ब-दिन बढ़ती ही जाती है. लेकिन नियमित योग से आप कमरदर्द से छुटकारा पा सकते हैं.

ताड़ासन

* सीधे खड़े हो जाएं. पैरों में ज़्यादा फासला न रखें.
* सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपने हाथों को साइड से ऊपर उठाएं.
* धीरे-धीरे हथेली को, कलाई को, हाथों को, कंधे, सीने व पैरों को भी ऊपर की तरफ़ खींचें और अंत में पैरों के पंजों पर आ जाएं.
* सारा शरीर ऊपर की तरफ़ खिंचा हुआ लगे. कुछ क्षण इस स्थिति में रहें.
* धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं.
* यदि आंखें बंद करके करें, तो अधिक लाभ होगा.

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अन्य लाभः नियमित ये आसन करने से बच्चों की हाइट बढ़ती है. घुटनों और एंकल की हेल्थ के लिए भी फ़ायदेमंद.

बद्ध कोणासन

* दंडासन में बैठ जाएं. पीठ सीधी रखें और दोनों हाथ कूल्हे के पास ज़मीन पर.
* घुटने मोड़ें. दोनों पैरों के तलवों को नमस्ते की मुद्रा में लाएं.
* दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों या पंजों को पकड़ें. इसी अवस्था में 1-2 मिनट तक रहें. घुटनों पर ज़्यादा दबाव न डालें.
* अगर सीधे बैठने में तकलीफ़ हो रही है, तो सपोर्ट के लिए कूल्हों के नीचे तकिया या चादर रख सकते हैं.
* आगे की ओर झुकें और फिर सीधे बैठ जाएं. पैरों को सीधा फैलाते हुए पूर्वावस्था में आ जाएं.

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अन्य लाभः हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, हार्मोनल प्रॉब्लम और इंफर्टिलिटी में लाभदायक. प्रेग्नेंसी के आख़िरी महीनों तक ये आसन करने से डिलीवरी आसानी से हो जाती है.

 

जाथरा परिवर्तासन

* पीठ के बल लेट जाएं.
* दोनों हाथ कंधे के समानांतर रखें.
* सांस लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं. सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे दाईं तरफ ले जाकर ज़मीन को टच करें.
* दोनों पैर आपस में मिले होेंं. सिर बाईं दिशा में हो.
* दाहिने हाथ से दोनों पैरों को पकड़ने की कोशिश करें. सांस सामान्य रहे. एक मिनट इस स्थिति में रहें. अब यही क्रिया दूसरी ओर से भी दोहराएं.
* अगर पैर उठाने में तकलीफ़ या असुविधा हो रही हो, तो घुटनों को मोड़कर यही क्रिया कर सकते हैं.

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अन्य लाभः पैरों, जोड़ों, पीठदर्द व डायबिटीज़ में लाभदायक.

 

सेतु बंधासन

* पीठ के बल लेट जाएं. दोनों हाथ साइड में हों. पैरों को मोड़कर एड़ियों को कूल्हे के पास रखें और
* धीरे-धीरे सांस लेते हुए कमर व कूल्हे को ऊपर उठाएं. जांघें और पंजे ज़मीन के समानांतर होने चाहिए.
* कुछ क्षण रुकिए. सांस सामान्य रहे. अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस पहलेवाली स्थिति में आ जाएं.
* 3-7 बार या क्षमतानुसार करें.
* चाहें तो कमर और पीठ को उठाते समय कमर को हाथों से सपोर्ट दें.
* पेट की सभी बीमारियों, एंज़ाइटी, थकान, सिरदर्द, अनिद्रा में लाभदायक. गले को स्ट्रॉन्ग बनाता है.
* अत्यधिक कमरदर्द, गर्दन दर्द या घुटनों में दर्द हो तो ये आसन न करें.
* गर्भवती महिलाएं छह महीने तक यह आसन कर सकती हैं.

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उत्तान वक्रासन

* पीठ के बल लेट जाएं. दोनों घुटनों को मोड़ें. पंजे ज़मीन पर टिके हों. दोनों हथेलियों को चित्रानुसार सिर के नीचे रखें.
* सांस छोड़ें और घुटनों को बाईं तरफ़ व सिर को दाईं तरफ़ ले आएं.
* कंधे से ज़मीन पर दबाव डालें.
* 1 मिनट तक इसी अवस्था में रहें. पूर्वावस्था में आ जाएं.
* दूसरी तरफ़ से भी यही क्रिया दोहराएं.
* पेट में अत्यधिक दर्द हो, स्पाइन की प्रॉब्लम हो या लिवर में सूजन हो, तो ये आसन न करें. गर्भवती महिलाएं भी ये आसन न करें.

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अन्य लाभः पेट, पीठ, पैर को सुडौल बनाता है.

 

ये आसन भी हैं फ़ायदेमंद
कमरदर्द के लिए शशांकासन, मारिच्य आसन और शलभासन भी फ़ायदेमंद हैं.

राहुल द्रविड़, क्रिकेटर

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बेहद शांत मिज़ाज राहुल द्रविड़ अपनी फिटनेस को लेकर काफ़ी सतर्क रहते हैं. लाइट एक्सरसाइज़, योग और मेडिटेशन उनकी फिटनेस रूटीन में शामिल हैं. कॉन्संट्रेशन और फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने के लिए राहुल द्रविड़ नियमित रूप से योग करते हैं.

अगर हों स्ट्रेस में
* जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखें. आपकी पॉज़िटिव सोच आपको सभी समस्याओं को देखने का सकारात्मक नज़रिया देती है.
* लाफ्टर थेरेपी अपनाएं. खुलकर हंसें और मुस्कुराएं. ये आपके तनाव, थकान व डिप्रेशन को तुरंत दूर कर देता है.
* सुबह-सुबह प्राणायाम आपके लिए बहुत हेल्दी साबित होगा. 15-20 मिनट जॉगिंग से शरीर और मन एकदम फ्रेश रहता है.
* रोज़ाना योग व प्राणायाम से शरीर में रक्तसंचार बेहतर होता है, जिससे तनाव व थकान दूर होती है.

स्ट्रेस फ्री रहने के लिए ट्राई करें ये आसन
सर्वांगासन, हलासन, शवासन, नाड़ीशोधन क्रिया और चंद्रभेदन प्राणायाम स्ट्रेस व थकान को दूर करने के लिए बेस्ट हैं.

मेडिटेशन इन 5 मिनट्स (Health Benefits of Meditation)

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भागदौड़ और तनाव से भरी ज़िंदगी में मस्तिष्क और मन को शांत बनाए रखना बेहद ज़रूरी है. इसका एक आसान और कारगर तरीक़ा है मेडिटेशन यानी ध्यान. कुछ लोगों को लगता है कि ध्यान करने के लिए किसी ट्रेनर की आवश्यकता होती है या इसमें काफ़ी समय लगता है, पर ऐसा कुछ भी नहीं है. कुछ बातों का ध्यान रखकर आप घर पर ही आसानी से 5 मिनट मेडिटेट करके ख़ुद को स्वस्थ रख सकते हैं.

Health Benefits of Meditation

टाइम सेट कर लें

ध्यान लगाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप अपने मन को शांत बनाए रखें. मोबाइल में टाइमर सेट कर दें, जिससे आपको ध्यान लगाते समय ये चिंता न रहे कि कहीं आप लेट तो नहीं हो रहे. टाइमर आपका ध्यान भटकने नहीं देगा.

आराम से बैठ जाएं

– घर में किसी एकांत और हवादार जगह पर आराम से बैठ जाएं.
– मेडिटेशन के दौरान ढीले-ढाले आरामदायक कपड़े पहनें.
– शरीर को तनावमुक्त रखें.
– ज़रूरी नहीं कि आप ध्यान लगाने के लिए सुखासन में ही बैठें. अगर पालथी मारकर बैठना आपके लिए असुविधाजनक है, तो आप उस अवस्था में बैठें, जिसमें आप सहज महसूस कर रहे हों. मेडिटेशन तभी पूरी तरह प्रभावकारी होगा जब आप कंफर्टेबल होंगे.
– आप बेड, कुर्सी या ज़मीन पर चादर या कालीन बिछा कर भी मेडिटेट कर सकते हैं.

ब्रीदिंग पर ध्यान दें

– ध्यान लगाने के लिए ज़रूरी है कि आप अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें.
– टाइमर स्टार्ट करें और आंखें बंद करके मेडिटेशन शुरू करें.
– आराम से सांस लें और छोड़ें. इस प्रक्रिया की ओर ध्यान लगाएं.
– ब्रीदिंग पैटर्न न बदलें और न ही कोई और हलचल करें. जैसे सांस लेते हैं, वैसे ही लेते रहें.
– अगर आप आराम से गहरी सांस ले सकते हैं, तो और भी बेहतर होगा. धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें.

ध्यान केंद्रित करें

– मेडिटेशन के व़क्त मस्तिष्क में कई ख़्याल आते हैं, जो इस प्रक्रिया में बाधक बनते हैं.
– इन ख़्यालों को आने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि आप उनसे अपना ध्यान हटाकर ब्रीदिंग पर लगाएं.
– हर एक सांस पर ध्यान दें. आपका पूरा ध्यान तब तक केवल सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर होना चाहिए, जब तक टाइमर का अलार्म समय समाप्ति की घोषणा न कर दे.

फ़ायदे

– रोज़ाना ध्यान लगाने से शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रहा जा सकता है.
– तनाव और थकान दूर होता है.
– मस्तिष्क शांत रहता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है.
– काम में ध्यान लगता है और कार्यक्षमता भी बढ़ती है.
– भावनात्मक रूप से मज़बूत बनाता है.
– हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रण में रहता है.
– सिरदर्द से आराम मिलता है.
– जिन्हें ग़ुस्सा अधिक आता है, उन्हें ग़ुस्से पर कंट्रोल रखने के लिए मेडिटेशन करना चाहिए.
– 2011 में हुए एक रिसर्च के मुताबिक़, गठिया से ग्रसित लोग अगर नियमित रूप से मेडिटेशन करते हैं, तो उन्हें आराम मिलता है.
– गर्भावस्था के दौरान अक्सर पांच में से एक महिला डिप्रेशन की शिकार होती है. इस समस्या से बचने के लिए मेडिटेशन एकमात्र आसान उपाय है.
– मेडिटेशन आत्मबल को बढ़ाता है, जो एक स्वस्थ जीवन के लिए ज़रूरी है.

अगर आपके पास व़क्त है, तो 20 मिनट तक ध्यान करें. 20 मिनट तक मेडिटेशन करने से 4 घंटे तक सोने जितनी ऊर्जा मिलती है.

सावधानियां

अगर आप किसी तरह की बीमारी से पीड़ित हों, तो ज़्यादा देर तक मेडिटेट न करें. आपके लिए मेडिटेशन का सही तरीक़ा कौन-सा है? ये जानने के लिए किसी प्रोफेशनल की मदद लें.

योगा फॉर फ्लैट टमी (Yoga For Flat Tummy)

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जंक फूड, अनहेल्दी लाइफस्टाइल ने एक ऐसी सबसे बड़ी समस्या हमें दे दी है, जो ख़ुद कई समस्याओं व रोगों की जड़ है, वो है- मोटापा. मोटापे से मुक्ति और फ्लैट टमी (Yoga For Flat Tummy) के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ इन आसनों को अपनाएं.

शशांकासन

– वज्रासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें.
– सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं.
– धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और हाथों को स्ट्रेच करते हुए ज़मीन को छुएं.
– यह भी विश्राम प्रदान करने के लिए एक उत्तम अभ्यास है.
– गैस्ट्राइटिस और पेप्टिक अल्सर से पीड़ित लोग और गर्भवती महिलाएं यह आसन न करें. घुटने में दर्द, आर्थराइटिस, पीठ दर्द और हाई बीपी हो, तो वज्रासन में न बैठें, बल्कि कोई और सरल आसन चुनें.

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अन्य लाभः स्फूर्ति, चुस्ती प्रदान कर स्लिम बनाए रखता है. यह पेट की मसल्स को टोन करता है. साथ ही पेट के फैट्स को कम करने के लिए भी यह एक बेहतरीन आसन है. शरीर में रक्तसंचार को सुचारू बनाए रखता है और पेट व लिवर की कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है.

फ्लैट टमी के लिए टॉप ४ योगा पोज़ेज़ हैं फायदेमंद– देखें वीडियो:

शलभासन

– पेट के बल लेट जाएं. हथेलियां जांघों के नीचे रखें.
– ठोड़ी ज़मीन से लगाकर रखें.
– धीरे-धीरे अपने पैरों को ऊपर उठाएं.
– घुटनों को मुड़ने न दें (चित्र देखें).
– दोनों पैरों को जितना ऊपर ला सकते हैं, लाएं.
– कुछ क्षण इस स्थिति में रुकें.
– धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आ जाएं.
– 30-30 सेकंड के 3-5 राउंड्स.
– आंखें बंद एवं एकाग्रता पीठ व पेट पर हो.
– अगर पीठ या कमर में ज़्यादा दर्द हो, तो एक पैर से भी इसे किया जा सकता है. हर्निया और अपेंडिक्स से पीड़ित व्यक्ति यह आसन न करें.

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अन्य लाभः जोड़ों के दर्द निवारण में सहायक है. पाचनशक्ति को बढ़ाकर एसिडिटी की समस्या से भी निजात दिलाता है.

धनुरासन

– पेट के बल लेट जाएं.
– अपने दोनों पैरों को घुटने से मोड़ें.
– दोनों हाथों से दोनों पैरों को टखने के पास से पकड़ें.
– धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर की तरफ़ खींचें. हाथ एकदम खिंचे हों.
– शरीर को नाभि पर भी उठा सकते हैं (चित्र देखें).
– पेटदर्द, पीठदर्द, गर्दन दर्द और घुटने के दर्द में यह आसन न करें.

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अन्य लाभः रीढ़ को लचीला बनाकर रक्तसंचार को बेहतर बनाता है. सांस संबंधी समस्याओं में भी काफ़ी
लाभदायक है, इसलिए अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस से पीड़ित लोगों को इसकी सलाह दी जाती है.

बचें इन ग़लतियों से

– योग कभी भी सीधे ज़मीन पर न करें, बल्कि योगा मैट, दरी या कालीन बिछाकर करें.
– योग में सांसों का बहुत महत्व है, इसलिए ध्यान रखें कि जब भी शरीर को फैलाएं, तो सांस लें और शरीर को सिकोड़ते व़क्त सांस छोड़ें.
– योगासन सुबह-शाम कर सकते हैं. पर ध्यान रहे कि पानी पीने के तुरंत बाद योगासन न करें, बल्कि 15-20 मिनट रुककर करें. चाय-कॉफी आदि के आधे घंटे बाद ही योगासन करें.
– अपनी क्षमता अनुसार योग करें. उतना ही योगाभ्यास करें, जितना आसानी से कर पाएं. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.
– योग करते व़क्त फाइनल पोश्‍चर तक पहुंचने की जल्दबाज़ी कभी न करें और न ही किसी पोज़ को ज़बर्दस्ती ट्राई करें.
– ज़्यादा असर चाहते हैं, तो लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें भी बदलें. तभी आपको पूरा फ़ायदा होगा.
– फ़ौरन परिणाम की उम्मीद न करें. योग धीरे-धीरे असर करता है. ख़ुद को कम से कम छह महीने का समय दें.
– योग शुरू करते ही ये सोचकर दवाएं न बंद कर दें कि अब सारी बीमारियां ठीक हो जाएंगी. ध्यान रखें कि योग तुरंत असर नहीं करता. कुछ महीने योगाभ्यास करने के बाद अपना चेकअप करवाएं और डॉक्टर की सलाह के बाद ही कोई फैसला लें.

विराट कोहली, क्रिकेटर

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“योगाभ्यास करें. इससे आप अधिक रिलैक्स्ड, एनर्जेटिक और एक्टिव महसूस करेंगे.” विराट कोहली ने योग पर ट्वीट करके इस तरह से योग के प्रति अपना प्यार जताया. इंडियन क्रिकेट के पोस्टर बॉय विराट कोहली का मानना है कि किसी भी प्लेयर के लिए फिटनेस बहुत ज़रूरी होती है. फिट रहने के लिए संतुलित भोजन और नियमित एक्सरसाइज़ से बेहतर कुछ भी नहीं.

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