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करें एक वादा ख़ुद से (Make a Promise to yourself )

वादा

वादा

कभी अपनों के लिए तो कभी ग़ैरों को ख़ुश करने के लिए आपने उनसे कई वादे किए होंगे और उन्हें पूरा करने के लिए भी आप जी-जान लगाते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने ख़ुद से कोई वादा किया? कभी सोचा कि आपको भी अपने आप से एक ऐसा वादा करना चाहिए जो आपको भी प्रसन्न रखे. तो चलिए एक वादा ख़ुद के लिए करें.

सब कुछ ख़ुद ही न करने का वादा
कुछ लोगों की आदत होती है कि वो घर-बाहर सारी ज़िम्मेदारी ख़ुद ही निभाना चाहते हैं. वो ये भूल जाते हैं कि सारा काम वो ख़ुद नहीं कर
सकते. परिवार और ऑफिस की सारी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेने से आप काम के बोझ तले दब जाते हैं. इसका असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है. इतना ही नहीं सारी ज़िम्मेदारी ख़ुद ही निभाने की ज़िद्द आपको कहीं न कहीं असफल बनाने लगती है और लोग आपसे निराश होने लगते हैं. तो अगर आप भी स्वयं ही सब कुछ करने की ग़लत आदत के शिकार हैं, तो जल्द ही इससे मुक्त हो जाइए.

ताक़त-कमज़ोरी दोनों को पहचानने का वादा
अच्छाई और बुराई दोनों का मिश्रण हैं आप, इसलिए जिस तरह से अपनी फैमिली के सामने आप बहुत ख़ुश होकर अपनी ख़ुबियां गिनाते हैं, ठीक उसी तरह अपनी कमियों पर भी आपकी निगाह होनी चाहिए. आपकी ताक़त से आपके परिवार और ख़ुद आपको भी बहुत फ़ायदा मिलता है. लोगों की निर्भरता आप पर बढ़ जाती है. आपके अपने आपके साथ होने पर किसी तरह की चिंता नहीं करते. यानी आप हैं तो उनके लिए दुनिया की कोई भी चीज़ मुश्किल नहीं है. इसी तरह जब आप अपनी कमियों को भी सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे और उसके अनुरूप कार्य करेंगे तो आपको भविष्य में कभी भी परेशानी नहीं होगी.

अपने बारे में अच्छी राय रखने का वादा
मेरी लंबाई बहुत कम है, मेरी जॉब अच्छी नहीं है, मैं सुंदर नहीं हूं…जैसी आदि बातें जब आप ख़ुद के बारे में कहने लगते हैं, तो धीरे-धीरे आसपास के लोग भी आपको उसी तरह से देखने लगते हैं. इसी तरह जब आप अपने बारे में कुछ सकारात्मक जैसे- आप बहुत सुंदर हैं, दूसरे भी आपको बहुत पसंद करते हैं, आप का व्यवहार बहुत अच्छा है आदि बातें करते हैं, तो दूसरे भी आपकी तारीफ़ करते हैं. हर बार अपने बारे में ग़लत बातें कहकर न स़िर्फ आप अपने आसपास नकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, बल्कि लोगों को भी ऐसा करने के लिए उकसाते हैं. इस तरह से धीरे-धीरे आपका मनोबल गिरने लगता है और आप अपने किसी भी काम को सही तरह से नहीं कर पाते. जिस पल से आप अपनी क्षमता पर विश्‍वास करना शुरू करेंगे दुनिया भी आपकी मुरीद हो जाएगी. तो अब ये आप पर है कि आप अपने बारे में नकारात्मक बातें फैलाना चाहते हैं या सकारात्मक.

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निर्णय की ज़िम्मेदारी लेने का वादा

अगर घर के सारे काम और निर्णय लेने की आपने ज़िम्मेदारी ले रखी है, तो उसके परिणाम को स्वीकारना भी आपका फ़र्ज़ है. बहुत से लोग ऐसे होते हैं कि किसी निर्णय के ग़लत हो जाने पर वो सारा दोष दूसरों पर मढ़ देते हैं. उन्हें लगता है कि उनके द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय ग़लत हो ही नहीं सकता. यहीं पर वो ग़लत हो जाते हैं. आज से आप ये वादा करें कि अगर आपका कोई निर्णय ग़लत भी हो गया है तो उसकी ज़िम्मेदारी ख़ुद लें. इससे आपका क़द लोगों की निगाह में बढ़ जाएगा. अपने इस छोटे से वादे के बाद आप और भी परिस्कृत हो जाएंगे.

दूसरों के बारे में पहले से राय न बनाने का वादा
आमतौर पर ये कमी हर दूसरे व्यक्ति में होती है. किसी से मिलने के पहले ही हम उसके बारे में ढेर सारी मनगढ़ंत कहानियां बना लेते हैं. दूसरों से उसके बारे में कई तरह की फ़ालतू बातें करने से भी परहेज़ नहीं करते. हद तो तब हो जाती है जब किसी तीसरे के चरित्र के बारे में हम अपनी सहेली/अपने दोस्त के कहने पर कमेंट करने से भी पीछे नहीं हटते. उस समय आप अपने दोस्त से इतने प्रभावित होते हैं कि स़िर्फ उसके कहने पर उस तीसरे व्यक्ति के बारे में बुरा-भला कहना शुरू कर देते हैं, जिससे आपने कभी हैलो भी नहीं कहा होगा या फिर उसे जानते भी नहीं. इस तरह की आदत आपके चरित्र को ख़राब करती जाती है. इससे ऊपर उठिए और लोगों के बारे में राय बनाने की बजाय अपने बारे में सोचें और अगर किसी के बारे में सोचना आपकी मजबूरी है, तो कुछ अच्छा और सकारात्मक सोचें.

श्वेता सिंह 

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उम्मीद ख़ुद से करें, दूसरों से नहीं (Believe in yourself, do not expect from others)

believe in yourself

believe in yourself

‘उम्मीद पर दुनिया क़ायम है’ इस जुमले से परे एक सच्चाई ये भी है कि दूसरों से की गई ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदें सामने वाले के साथ ही हमारे लिए भी दुखदायी होती हैं. कई बार इन उम्मीदों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि उस बोझ तले हमारे कई रिश्ते दबकर दम तोड़ देते हैं, इसलिए दूसरों से उम्मीदें बांधने से अच्छा है कि आप ख़ुद से उम्मीद करें.

वर्तमान में तलाशें ख़ुशी
आज मैं बेटे की देखभाल करूंगा तभी तो वो बुढ़ापे में मेरा सहारा बनेगा… इस तरह की उम्मीद करना बहुत आम है, मगर आप यदि जीवन में ख़ुशी चाहते हैं, तो दूसरों से उम्मीदें रखना छोड़ दीजिए. अपनी क्षमताओं के बल पर ज़िंदगी जीना सीखिए. जब हम बिना किसी उम्मीद के निःस्वार्थ होकर अपना काम और ज़िम्मेदारियां निभाते रहेंगे, तो हमें किसी तरह का दुख भी नहीं होगा. आज मैं इसकी मदद कर रहा हूं ताकि आगे ये भी मेरी मदद करे, इस सोच के साथ यदि आप सामने वाले की मदद कर रहे हैं, तो भविष्य में जब वो आपसे मुंह फेर लेगा या ज़रूरत के व़क्त साथ नहीं देगा, तो आपके दिल को ठेस पहुंचेगी, लेकिन आप बिना कोई उम्मीद लगाए किसी की मदद स़िर्फ इसलिए कर रहे हैं कि आप ऐसा करने में सक्षम हैं, तो उस व्यक्ति द्वारा नकारे जाने पर भी आपको कोई दुख नहीं होगा. अपने बच्चों की परवरिश में हर पैरेंट्स को ख़ुशी मिलती है, तो आप उस व़क्त मिलने वाली ख़ुशियों का आनंद लें, वो भविष्य में आपके लिए कुछ करेगा इसकी उम्मीद करने की क्या ज़रूरत है?

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दूसरों से उम्मीदें दुख देती हैं

आज मैंने किसी काम को अच्छी तरह किया है, लेकिन कल मैं इसे और बेहतर तरी़के से करूंगा या फिर मैंने 1 महीने में 2 किलो वज़न घटाया है, तो अगले महीने तक 5 किलो घटा लूंगा… किसी ने तारीफ़ नहीं की तो क्या हुआ आज खाना अच्छा बनाया था, कल मैं और वैरायटी बनाऊंगी, उसकी तो झूठ बोलने की आदत ही है, मैं उसे बदल नहीं सकता, मगर मैं अब हमेशा सच बोलूंगा/बोलूंगी… ख़ुद से की गई ऐसी उम्मीदें हमें हमेशा ख़ुश और ज़िंदगी के प्रति सकारात्मक रखती हैं. अतः आप भी दूसरों से तारीफ़ पाने, उन्हें अपने मुताबिक़ बदलने या फिर उनसे कुछ बेहतर पाने की उम्मीद करने की बजाय अपने आप से ही उम्मीद रखें कि कल आप और बेहतर करेंगे. माना ऑफिस में आपने पूरी मेहनत और लगन से कोई प्रोजेक्ट कंप्लीट किया और ये सोचकर बॉस के सामने सीना तान कर खड़े थे कि बॉस तो बस अब आपकी तारीफ़ों के पुल बांध देगा, मगर तारीफ़ करना तो दूर बॉस उल्टा आपके प्रोजेक्ट की ख़ामियां गिनाने लगा, ज़ाहिर है आपको बहुत बुरा लगेगा… लेकिन आप यदि ख़ुद को थोड़ा बदल दें, तो इस दुख से बच सकते हैं. अपना काम ईमानदारी से करें. भले ही बॉस ने आपके काम में ग़लतियां निकाली हों, लेकिन आपने तो ईमानदारी से काम किया था, इसलिए ख़ुद को इसके लिए शाबाशी दें. साथ ही बॉस की बताई ग़लतियों पर ग़ौर करें और ख़ुद से प्रॉमिस करें कि अगली बार आप और अच्छा परफॉर्म करेंगे, मगर ये मत सोचिए कि शायद अगली बार बॉस आपकी तारीफ़ करेंगे.

काम मुश्किल ज़रूर है, मगर…
अपने परिवार, हमसफ़र, दोस्तों से उम्मीदें लगाना हमारी आदत है, जिसे बदलना आसान नहीं है, मगर ये काम नामुमक़िन भी नहीं है. इसके लिए
आपको थोड़ी मेहनत करके ख़ुद को बदलना होगा. इसके लिए हर दिन अपने लिए कोई टारगेट रखें और उसे पूरा करने की कोशिश करें. घर-ऑफिस के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के साथ ही थोड़ा समय ख़ुद के लिए भी निकालें. ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए उम्मीद ज़रूर करें, मगर अपने आप से न कि हालात और दूसरे व्यक्तियों से, क्योंकि आप ख़ुद से की गई उम्मीदों को तो अपने बल पर पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं, मगर दूसरों को इसके लिए विवश नहीं कर सकते.

– कंचन सिंह

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