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क्यों नहीं निभ रही शादियां? (Why Marriages Are Breaking?)

शादि

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सात जन्मों का बंधन कही जाने वाली शादी की उम्र दिन-प्रति-दिन घटती जा रही है. अग्नि को साक्षी मानकर मरते दम तक साथ निभाने की कसमें खाने वाले कपल्स अब कुछ साल भी साथ नहीं रह पाते. आज के मॉडर्न युग में जिस तेज़ी से तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, उससे शादी के अस्तित्व पर ही संकट मंडराता नज़र आ रहा है. आख़िर युवाओं के लिए शादी निभाना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

कमज़ोर होते रिश्ते
गांवों के मुक़ाबले महानगरों में तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. एक सर्वे के अनुसार, 1960 में सालभर में जहां तलाक़ के एक या दो मामले ही आते थे, वहीं 1990 तक ये आंकड़ा 1000 को पार कर गया. 2005 में फैमिली कोर्ट में तलाक़ के 7 हज़ार से भी ज़्यादा मामले दर्ज़ थे. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल तलाक़ के 8-9 हज़ार केस दर्ज़ हो रहे हैं, वहीं मुंबई में ये तादाद क़रीब 5 हज़ार है. जीवनसाथी डॉट कॉम के एक सर्वे के मुताबिक, तलाक़ लेने वालों में 25-35 साल के कपल्स की संख्या ज़्यादा है. मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद के मुताबिक, “आजकल के युवा शादी को कमिटमेंट की बजाय कन्वीनियंट (सुविधाजनक) रिलेशनशिप मानते हैं. जब तक सहजता से रिश्ता चलता है वो चलाते हैं और जब उन्हें असुविधा महसूस होने लगती है, तो बिना किसी गिल्ट के झट से रिश्ता तोड़ देते हैं.” कुछ जानकार टूटते रिश्तों के लिए शहरों में तलाक़शुदा महिलाओं को मिल रही स्वीकार्यता को भी ज़िम्मेदार मानते हैं. साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी कहती हैं, “तलाक़ को अब लोग कलंक नहीं मानते. पहले तलाक़शुदा महिलाओं को घर तोड़ने वाली कहकर आस-पड़ोस वाले और नाते-रिश्तेदार ताने मारते थे. इतना ही नहीं, माता-पिता भी तलाक़शुदा बेटी को अपनाने से कतराते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. तलाक़शुदा महिलाएं अब समाज से नज़रें चुराकर नहीं, बल्कि गर्व से सिर उठाकर जी रही हैं.”

आर्थिक स्वतंत्रता
डॉ. आनंद का मानना है, “महिलाओं की आत्मनिर्भरता से भी उनके रिश्तों की लय बिगड़ गई है. आर्थिक रूप से मज़बूत होने की वजह से उन्हें लगता है कि जब वो अकेले सब कुछ मैनेज कर सकती हैं, तो घुटन भरे रिश्ते को ढोने की भला क्या ज़रूरत है? दिलचस्प बात ये है कि पुरुषों को कमाऊ पत्नी तो चाहिए, लेकिन उसे वे ख़ुद से ऊपर उठता नहीं देख सकते. पत्नी के सामने अपना रुतबा कम होता देख पुरुषों के अहं को ठेस पहुंचती है और यही ठेस उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में दरार डाल देती है.” कुछ ऐसी ही राय साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी की भी है. उनके मुताबिक, “आजकल महिलाएं इंडिपेंडेंट हो गई हैं, आर्थिक रूप से वो किसी पर निर्भर नहीं हैं. ऐसे में पति से अलग होने का ़फैसला करने पर उन्हें इस बात का डर नहीं रहता कि अलग होने के बाद उनका ख़र्च कैसे चलेगा? बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा या समाज क्या कहेगा?” पहले ज़्यादातर महिलाएं मजबूरी में खोखले हो चुके रिश्तों का बोझ भी ढोती रहती थीं. शहरों में तलाक़ के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण डबल इनकम नो किड्स का बढ़ता चलन भी है. आजकल के ज़्यादातर दंपति करियर की ख़ातिर अकेले रहना पसंद करते हैं. ऐसे में तलाक़ की स्थिति में उन्हें ये डर भी नहीं रहता कि उनके अलग होने पर बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

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साथ व़क्त न बिताना
बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए व़क्त ही नहीं रहता. कभी-कभी तो हफ्तों-महीनों तक वे एक-दूसरे से सुकून से बात तक नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए एक-दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनमें भावनात्मक दूरियां बढ़ने लगती हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. औरतों से बहुत ज़्यादा उम्मीद की जाती है. पहले वो चुपचाप सब कुछ सह लेती थीं, लेकिन अब वो हिम्मत करके बोल रही हैं. जब बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है, तो वो रिश्ता ख़त्म करने में ही भलाई समझती हैं. वैसे भी जिस रिश्ते में तिल-तिलकर रोज़ मरना हो उसे तोड़ देना ही बेहतर है.

कपल्स ख़ुद की आइडेंटिटी को ज़्यादा महत्व देने लगे हैं. रिश्ता टूटने के लिए कोई एक ज़िम्मेदार नहीं होता, ताली दोनों हाथों से बजती है. हो सकता है, एक 70 फ़ीसदी ज़िम्मेदार हो तो दूसरा 30 फ़ीसदी ही हो, लेकिन ग़लती दोनों की होती है.

– मीता दोषी, साइकोलॉजिस्ट

समाज व परिवार का सीमित दायरा
डॉ. आनंद कहते हैं, “आजकल किसी भी कपल की ज़िंदगी में समाज और परिवार का रोल सीमित हो गया है, जिससे उनके बीच की छोटी-मोटी अनबन या झगड़ों को सुलझाने वाला कोई नहीं रहता. मनमुटाव की स्थिति में कपल्स अपना धैर्य खो देते हैं और तुरंत अलग होने का ़फैसला कर लेते हैं. आजकल के युवा बेस्ट पार्टनर चाहते हैं, जो हर चीज़ में परफेक्ट हो, लेकिन वो पार्टनर की मदद कर उसे किसी काम में परफेक्ट बनाने की ज़हमत नहीं उठाते. रिश्ते टूटने की एक बड़ी वजह धैर्य की कमी है, जिससे कुछ समय बाद कपल्स का एक-दूसरे के प्रति प्यार व आकर्षण कम हो जाता है, यही वजह है कि लव मैरिज करने वाले भी आसानी से तलाक़ ले रहे हैं.”

प्यार व विश्‍वास में कमी
आई लव यू बोल देना ही इस बात का सबूत नहीं कि पति-पत्नी के प्यार की डोर मज़बूत है. महानगरों में जहां वर्किंग कपल्स की तादाद दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, उनके बीच प्यार व विश्‍वास उतना ही कम होता जा रहा है. घर लेट से आने या फोन न उठाने पर पति-पत्नी दोनों को ही लगने लगता है कि पार्टनर का किसी और से संबंध है इसलिए वो उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है. फिर शक़ का यही बीज उनके रिश्तों को खोखला कर देता है. कई कपल्स तो अपने साथी की हर हरकत पर नज़र रखने के लिए उनके पीछे जासूस लगाने से भी नहीं हिचकिचाते. विश्‍वास ही शादी की बुनियाद है, अगर बुनियाद ही कमज़ोर हो जाए, तो शादी टिक पाना मुश्किल हो जाता है.

पहले जहां पति-पत्नी का रोल तय होता था, वहीं अब महिलाओं की भूमिका बदल रही है. उन्हें पहले से ज़्यादा अधिकार प्राप्त हैं और ये बात पुरुषों को हज़म नहीं हो रही. इसके अलावा आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक (सेक्सुअल) पहलू भी रिश्ता टूटने के लिए ज़िम्मेदार है. कपल्स को ढेर सारी उम्मीदें रखने की बजाय एक-दूसरे के अलग व्यक्तित्व को स्वीकारना चाहिए. शादी निभाने के लिए भव्य शादी समारोह की नहीं,
बल्कि समझदारी की ज़रूरत है.

– चित्रा सावंत, मीडिया प्रोफेशनल

बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं
डॉ. माधुरी सिंह के मुताबिक, “महिलाएं शादी निभाने की कोशिश करती हैं. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो वर्किंग वुमन के प्रति नज़रिए में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. आज भी पुरुष ऐसी बीवी चाहते हैं, जो अच्छी दिखती हो, अच्छा कमाती हो और जो उनके घर-परिवार को भी अच्छी तरह संभाल सके, यानी पत्नी उनकी हर कसौटी पर खरी उतरे, जो संभव नहीं है.” आजकल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को भी अपने साथी से बहुत-सी उम्मीदें रहती हैं, जैसे- पति अच्छा दिखे, अच्छा कमाए, उसकी हर बात सुने, उसके माता-पिता का ज़्यादा ध्यान रखे आदि. साइकोलॉजिस्ट दोषी कहती हैं, “आजकल कपल्स की शादी से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं. एक-दूसरे से की गई ये अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होतीं तो पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं और धीरे-धीरे ये दूरियां इस क़दर बढ़ जाती हैं कि उनके रास्ते ही अलग हो जाते हैं.”

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दोनों ज़िम्मेदार
तलाक़ के लिए हर बार पति ही ज़िम्मेदार हो, ये ज़रूरी नहीं. 3 साल पहले लव मैरिज करने वाले मुंबई के दिनेश इन दिनों अकेले हैं. दिनेश कहते हैं, “मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं. शादी के बाद मेरी पत्नी को बेवजह न जाने क्यों मेरे पैरेंट्स से परेशानी होने लगी. वो चाहती थी कि मैं अपने मां-बाप को छोड़कर उसके साथ दूसरे फ्लैट में रहूं, जो संभव नहीं था. मैं अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता, ये कहने पर वो मुझे ही छोड़कर चली गई और तलाक़ का नोटिस भेज दिया.”

तलाक क़ानून
हमारे देश में तलाक़ लेना आसान नहीं है. इसके लिए लंबी क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है, जिसमें सालों लग जाते हैं. हालांकि पिछले साल कैबिनेट ने हिंदू मैरिज एक्ट में कुछ संशोधन करके इसे आसान बनाने की कोशिश की है यानी अब पति-पत्नी यदि स्वेच्छा से अलग होना चाहें, तो ऐसे मामलों को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा. अदालत को ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाना होगा. पहले तलाक़ की अर्ज़ी देने के बाद पति-पत्नी को सुलह के लिए 6 महीने की समय सीमा दी जाती थी, लेकिन अब ये बाध्यता ख़त्म हो चुकी है. फिर भी अदालत को सही लगे, तो वो कपल्स को सुलह के लिए कुछ व़क्त दे सकती है.


– कंचन सिंह

Royal Wedding! नील और रुक्मिणी हुए एक-दूसरेे के, देखें दोनों की शादी की तस्वीरें (Pictures: Neil Nitin Mukesh, Rukmini Sahay are married now)

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neilनील नितिन मुकेश और रुक्मिणी सहाय शादी के बंधन में बंध गए. इनकी शादी का गवाह बना उदयपुर. इस रॉयल वेडिंग में दूल्हा-दुल्हन को आशिर्वाद देने के लिए उनका पूरा परिवार मौजूद था. रुक्मिणी और नील दोनों ही बेहद अच्छे लग रहे थे. रुक्मिणी ने लाल और ऑरेंज रंग के कॉम्बिनेशन का दुल्हन का जोड़ा पहना था, वहीं नील ने क्रीम और मरून कॉम्बिनेशन की शेरवानी पहली थी. देखे तस्वीरें.

17 फरवरी को मुंबई में नील और रुक्मिणी की शादी का एक ग्रै़ड रिसेप्शन रखा जाएगा.

– प्रियंका सिंह

Very Classy! नील और रुक्मिणी का प्री-वेडिंग फोटोशूट (Neil Nitin Mukesh and Rukmini’s pre-wedding shoot)

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नील नितिन मुकेश और रुक्मिणी सहाय 9 फरवरी को उदयपुर में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. दोनों ने पिछले साल ही सगाई कर ली थी. शादी नज़दीक हैं और उससे पहले दोनों ने करवाया है एक प्यारा-सा प्री-वेडिंग शूट. ये फोटोशूट काफ़ी क्लासी है. इस ब्लैक एंड व्हाइट फोटोशूट में नील और रुक्मिणी काफ़ी क्यूट लग रहे हैं. फोटोशूट के दौरान कभी आंखों में आंखें डाले, तो कभी मस्ती के मूड में दिखे दोनों. देखें ये पिक्चर्स.

फोटो सौजन्य: द वेडिंग स्टोरी

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Tag your #MineForever ❤️😘

A photo posted by Neil Nitin Mukesh (@neilnitinmukesh) on

– प्रियंका सिंह

Strong रिलेशनशिप के लिए Effective टेक्नीक्स(Effective techniques for strong relationship)

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कहीं चाहतें हैं, कहीं राहतें हैं… कहीं दर्द है, तो कहीं बंदिशें… दवा भी हैं ये और दुआ भी… मीठी बारिश भी हैं और ठंडी हवा भी… दरअसल रिश्तों के ताने-बानों में हर वो एहसास शामिल होते हैं, जो हमारे जीने का मक़सद बनते हैं और हमें आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं. ऐसे में तेज़ी से किसी अनजानी व अनदेखी दिशा में भाग रहे हम सभी के लिए बेहद ज़रूरी है कि थोड़ा ठहरें और अपने रिश्तों को जीएं, ताकि प्यार और दुलार की ऑयलिंग से उनकी सर्विसिंग होती रहे.

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क्यों ज़रूरी है relationship टेक्नीक्स?

– हर रिश्ता, चाहे बच्चों और पैरेंट्स के बीच का हो, भाई-बहन का हो, पति-पत्नी या फिर अन्य दोस्त व रिश्तेदार हों, सभी हमसे समय और अटेंशन की डिमांड करते हैं, जो आज की तारीख़ में हमारे पास है ही नहीं.
– वक़्त की कमी के चलते हम अपने रिश्तों को पूरी तरह से जी नहीं पाते. छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हम महरूम रह जाते हैं और साथ ही अपने साथ जुड़े लोगों को भी उनसे दूर रखते हैं. ऐसे में रिश्तों में शिकायतें पैदा होनी शुरू हो जाती हैं.
– हर वक़्त अगर हम यही रोना रोते रहेंगे कि समय नहीं मिलता, तो एक दिन हमारे रिश्तों के पास हमारे लिए समय नहीं होगा.
– चाहे हम कितने ही क़ामयाब हो जाएं या कितना ही ऊंचा मुक़ाम हासिल कर लें, अपनों के साथ की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है, वरना जीवन में एकाकीपन हमें निराशा की गर्त में धकेल सकता है. यदि समय रहते रिश्तों को सहेजने की ओर हम ध्यान नहीं देंगे, तो जब हमें उन रिश्तों की ज़रूरत होगी, तो शायद हमारे आस-पास कोई नहीं होगा.
– आपसी मेलजोल और एक साथ समय बिताने से न स़िर्फ रिश्ते मज़बूत होते हैं, बल्कि हमारा हौसला और आत्मविश्‍वास भी बना रहता है. हम अपने अंदर सकारात्मकता का अनुभव करते हैं.
– आपको अपनों की परवाह है, उनकी ज़रूरत है, उन्हें इस बात का एहसास कराने के लिए भी रिश्तों की सर्विसिंग ज़रूरी है.
कैसे करें रिश्तों की सर्विसिंग?
– कम्युनिकेशन हर रिश्ते की नींव होती है. बहुत ज़रूरी है कि आपसी बातचीत और अपनों के साथ कुछ बातें शेयर करने का वक़्त ज़रूर निकाला जाए.
– ज़रूरी है शेयरिंग और केयरिंग भी. अपने जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी जब हम अपनों से शेयर करते हैं, तो अपनेपन का एहसास और बढ़ जाता है. चाहे हमारे दोस्त हों या रिश्तेदार, उन्हें यह महसूस होता है कि हमारे जीवन में उनका कितना महत्व है.
– इसी तरह से केयरिंग भी ज़रूरी है. ऑफिस में व्यस्त दिनचर्या के बीच भी समय निकालकर घर पर फोन करके हालचाल पूछना एक अच्छा आइडिया हो सकता है.
– अगर घर में कोई बीमार है, तो एक-दो बार हालचाल पूछने पर उन्हें यह एहसास होगा कि आपको सचमुच उनकी
परवाह है.
– विशेष अवसरों पर समय निकालकर फैमिली गेट-टुगेदर या पिकनिक वगैरह आयोजित करते रहें.
– अगर कोई ख़ास अवसर है, तो गिफ्ट ले जाना न भूलें.
– सबकी सालगिरह की तारीख़ रिमाइंडर पर सेट कर लें, ताकि आप अपनों के उन ख़ास दिनों को भूल न पाएं और आपकी शुभकामनाएं उनकी ख़ुशी को और बढ़ा दें.
– जिनसे आप प्यार करते हैं, उन पर विश्‍वास करना सीखें. विश्‍वास पर ही हर रिश्ते की गहराई टिकी होती है. अगर कोई आपसे यह उम्मीद रखता है कि आप उन्हें समझें, उन्हें हर बार सही-ग़लत के तराज़ू में तौलकर न देखें, तो आप उनका विश्‍वास न तोड़ें.
– रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रयास लगातार करते रहें.
– हर किसी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें. यह सच है कि हर रिश्ते से हमारी कई उम्मीदें जुड़ी होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी ध्यान रखें कि आपकी उम्मीदें कितनी सही हैं और सामनेवाला उन्हें किन मजबूरियों के चलते पूरी नहीं कर पा रहा. अगर आप अपनों से यह आशा करते हैं कि वो आपकी उम्मीदों पर खरे उतरें, तो ख़ुद से भी सवाल पूछें कि क्या आप भी उनकी सारी उम्मीदों पर उतने ही खरे उतरते हैं?
– सरप्राइज़ दें. कभी-कभी ऑफिस से जल्दी आकर फैमिली के साथ वक़्त बिताएं या फिर मूवी या डिनर प्लान करके सबको चौंका दें.
– एक रिश्ते को निभाने में ऐसा न हो कि दूसरे रिश्तों को नज़रअंदाज़ कर दें. ज़िंदगी में हर रिश्ते की अपनी ख़ास जगह और अहमियत होती है. इस बात को समझें और हर रिश्ते में संतुलन बनाए रखें.
– शादी के बाद दोस्तों को भूल न जाएं. कुछ लोग शादी के बाद स़िर्फ अपनी फैमिली लाइफ में बिज़ी हो जाते हैं, तो कुछ पहले की ही तरह यार-दोस्तों की महफ़िल का मज़ा लेकर फैमिली को भूल जाते हैं. ये दोनों ही रवैया ग़लत है. संतुलन बनाए रखें. याद रखें, दोस्त भी ज़रूरी हैं.
– तारीफ़ करने से पीछे न हटें. किसी की प्रशंसा में कहे दो शब्द भी आपके रिश्ते को नई ऊर्जा से भर सकते हैं.
– रिश्तों को ईगो की भेंट न चढ़ने दें. अपने अहम् को अपने रिश्तों के बीच में न आने दें, वरना रिश्तों के सच्चे सुख से वंचित रह जाएंगे.
– अगर जाने-अनजाने आपने किसी को आहत कर दिया हो, तो अपनी ग़लती स्वीकारें और सॉरी कहकर मनमुटाव दूर कर लें.
– घर-परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि कल को पैसों और संपत्ति को लेकर आपस में कोई विवाद न हो. एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि पैसे कमाना फिर भी आसान है, लेकिन प्यार, अपनापन और रिश्ते कमाना उतना ही मुश्किल, इसलिए रिश्तों के महत्व को समझें.

इन बातों का भी ध्यान रखें

– अपने रिश्तों की ज़रूरतों को पहचानें.
– फैंटेसाइज़ करें यानी कल्पना में जीने का मज़ा ज़रूर लें, लेकिन हक़ीक़त की ज़मीं को ध्यान में रखकर.
– अपने डरोें से भागें नहीं, बल्कि अपनों के साथ उन्हें शेयर करें.
– बिना बोले भी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. कई बार बहुत कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, ऐसे में सामनेवाले की भावनाओं को समझने की क्षमता ही आपके रिश्तों की मज़बूती दर्शाती है.
– ज़िम्मेदारियां लेने से घबराएं नहीं.
– दोषारोपण से बचें. बेवजह के वाद-विवाद और एक-दूसरे को दोष देने की बजाय अपने ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें और बातों या बहस को यह सोचकर हल्के में लें कि ये रिश्तों का ही हिस्सा है.

– गीता शर्मा

पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

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पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

बरखा की इन बूंदों में अपने महबूब को ढूंढ़ती मेरी नज़रें… उसकी प्यास, उसकी आस और उसकी बांहों में अपने वजूद का एहसास… इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं निगाहों में… बादल बन उड़ने लगता है दिल आसमान में… उस अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश में, जिसके सपने हम दोनों ने मिलकर बुने थे… पर जब आंख खुली, तो कांच के खिलौनों की तरह सब टूट गए… आज फिर वही बरसात है… महबूब की याद है… वही अधूरी प्यास और वही अधूरी आस भी…

बीते दिन जब भी याद आते हैं, स़िर्फ आखों को ही नम नहीं करते, बल्कि हर एहसास को भिगो जाते हैं. तुम्हारी आंखों की वो शरारत, बातों का अंदाज़, वो बेपरवाह-सा जीने की अदा जब भी याद आती है, मेरे दिल की धड़कनों को आज भी तेज़ कर देती है. मुहब्बत का मीठा एहसास क्या होता है, तुमसे मिलने के बाद ही तो समझ पाई थी मैं, लेकिन मुहब्बत में इतना दर्द भी होता है यह भी तुमसे ही सीखूंगी सोचा न था. कहते हैं प्यार के रिश्ते में अपने साये तक एक हो जाते हैं, ऐसे में किसी ग़ैर के लिए जगह ही कहां बचती है. लेकिन हमारे बीच कब किसी और ने अपनी जगह बना ली पता ही नहीं चला.

हम स़िर्फ प्रेमी ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त भी थे. कहीं कोई पर्दा न था, कोई तकल्लुफ़ नहीं. दो नहीं, एक ही तो थे हम. ज़िंदगी बेहद हसीं लगती थी तब, हर लम्हा ख़ास था. आज़ाद पंछी की तरह खुला छोड़ दिया था मैंने तुम्हें, क्योंकि मेरा मानना था कि प्यार में बंधन नहीं होना चाहिए, प्यार तो आज़ाद होता है… लेकिन कब, क्यों और कैसे तुम्हारे दिल में किसी और के लिए भी जगह बनती चली गई इसका एहसास जब होने लगा, तब जैसे हर सपना धीरे-धीरे टूटता चला गया…

जहां तक मुझे पता था तुम्हें मेरी वो सहेली ज़्यादा पसंद नहीं थी, लेकिन न जाने कब वो तुम्हारे इतने क़रीब आ गई कि तुम छिप-छिपकर उससे बातें-मुलाक़ातें करने लगे. जब मुझे तुमसे दूरी का एहसास होने लगा, तुम में बदलाव नज़र आने लगा तो अपने प्यार का वास्ता देकर यक़ीन दिलाते रहे कि तुम स़िर्फ मुझसे प्यार करते हो. मैं भी बार-बार दिल को समझाकर तुम पर यक़ीन करती गई और हर बार मेरा यक़ीन टूटा…

आख़िर इस कशमकश में कब तक ज़िंदा रह पाता हमारा मासूम प्यार और कोमल रिश्ता. सिसक-सिसककर दम तोड़ दिया आख़िर इस
रिश्ते ने… लेकिन कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं… इतने सालों बाद तुमसे फिर एक मोड़ पर जब टकराई, तो एहसास हुआ कि तुम सही थे, सच्चे थे, तुम्हारा प्यार कोई फरेब नहीं था, वरना अब तक तुम उसके हो चुके होते, लेकिन तुम्हेें तो स़िर्फ मेरा इंतज़ार था… अगर कुछ ग़लत था तो स़िर्फ वो हालात और वो लोग, जिनसे हमारे बीच दूरी पैदा हुई.

लेकिन अब जब व़क़्त ने सारे घाव भर दिए हैं, तो इन फ़ासलों को भी हम हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दें, ताकि फिर कोई तीसरा हमारे बीच न आने पाए… अब किसी ग़लतफ़हमी की कोई गुंजाइश न बचे… मुझे भी शायद इसी मोड़ का इंतज़ार था, इसलिए तुम पर तमाम अविश्‍वासों के बावजूद मैं भी तो किसी और की न हो पाई.

तुम ही मेरी पहली मुहब्बत हो, तुम ही मेरा यक़ीन. तुम्हें ही तो तलाशती रहीं हर पल ये नज़रें, तुम नहीं तो मैं नहीं. तुम अक्सर कहा करते थे, प्यार विश्‍वास का ही दूसरा नाम है. तुमने मुझे सिखा ही दिया आख़िर इस विश्‍वास के साथ जीना… अब मुझे यक़ीन है कि तुम मेरे हो, स़िर्फ मेरे!

– योगिनी 

टॉप 4 मोस्ट रोमांटिक हनीमून डेस्टिनेशन (top 4 most romantic honeymoon destination)

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शादियों का सीज़न चल रहा है. ऐसे में लाज़मी है कि अपनी स्वीटहार्ट को आप किसी स्पेशल जगह ले जाना चाहते हों. आप सोच रहे होंगे कि आपका हनीमून डेस्टिनेशन कुछ ऐसा हो कि ताउम्र आपकी पार्टनर को याद रहे. तो चलिए, हम बताते हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में, जो आपके हनीमून को बना देंगे बेहद रोमांटिक और ख़ास.

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उदयपुर
सर्दी की सुहानी धूप के साथ उदयपुर का नज़ारा और भी आकर्षक हो जाता है. उदयपुर घूमने का सही मौसम यही है. ख़ूबसूरत महल और झीलों के इस शहर का नज़ारा तब और ख़ास हो जाता है, जब आपके हाथों में पार्टनर का हाथ हो.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर आदि से आप सीधे उदयपुर के लिए फ्लाइट ले सकते हैं. इसके साथ ही देश के दूसरे शहरों से ट्रेन की सुविधा भी है.

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क्या देखें?
झीलों और महलों के इस शहर में ऐसी बहुत-सी जगहें हैं जिन्हें आप अपनी यादों के एल्बम में कैद कर सकते हैं.
दुनिया के सबसे रोमांटिक पैलेस में से एक उदयपुर लेक पैलेस की सैर करना न भूलें.
पार्टनर के साथ गुलाब बाग में दो पल ज़रूरी बैठें.
पिचोला झील के किनारे बना उदयपुर सिटी पैलेस भागदौड़ से दूर आपको सुख और चैन का एहसास दिलाएगा.

कहां से करें शापिंग?
इतने सालों बाद पार्टनर के साथ इस रोमांटिक जगह पर घूमने का मज़ा शॉपिंक के साथ दुगुना हो जाता है. आप इन जगहों से शॉपिंग कर सकते हैं.
उदयपुर का क्लॉक मार्केट गोल्ड, सिल्वर, कॉपर आदि से बनी आकर्षक वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है.
एम्ब्रॉयडरी, टेक्स्टाइल आदि वस्तुएं ख़रीदने के लिए लेक पैलेस रोड पर शॉपिंग करना न भूलें.
हैंडीक्राफ्ट्स के लिए जगदीश टेम्पल स्ट्रीट मार्केट ज़रूर जाएं.
कपड़ों की ख़रीददारी के लिए आप घंटा घर मार्केट जा सकते हैं.

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औली
समुद्र से 9 हज़ार फीट की उंचाई पर बसा औली उत्तराखंड का बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल है. कुछ लोग सालभर इंतज़ार करने के बाद ठंड के मौसम में औली घूमने का प्लान बनाते हैं. आप भी अगर प्रकृति की गोद में बर्फ की चादर पर बैठकर दो पल बिताना चाहते हैं, तो औली आपके लिए बेस्ट हनीमून डेस्टीनेशन है. पूरी दुनिया में औली स्कीइंग के लिए मशहूर है.

कैसे जाएं?
औली जाने के लिए सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांटरोड है. इसके अलावा आप ट्रेन से भी औली जा सकते हैं. हरिद्वार सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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क्या देखें?
त्रिशूल पीक यहां के आकर्षण का केंद्र है.
औली स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है. अल्पाइन स्कीइंग, नार्डिक स्कीइंग और टेलीमार्क स्कीइंग का आनंद लेना न भूलें.
एशिया की सबसे लंबी केबल कार औली में ही है. बर्फिले मौसम में इसका आनंद लेना न भूलें.
नंदा देवी नेशनल पार्क ज़रूर देखें.
जोशीमठ ट्रैकिंग भी आकर्षण का केंद्र है.

कहां से करें शॉपिंग?
औली से लौटते व़क्त आप जोशीमठ के लोकल बाज़ार से वुलन कैप्स, ब्लैंकेट्स, शॉल आदि ख़रीद सकते हैं.

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हवाई
दुनिया के बड़े और आकर्षक हनीमून डेस्टीनेशन में से हवाई एक है. यह जगह कपल्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं. ट्रॉपिकल बीचेस, जंगल, सर्फिंग, लक्ज़ीरियस होटल आदि चीज़ें हवाई को और जगहों से अलग करती हैं.

कैसे जाएं?
हवाई जाने के लिए आप दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंग्लोर आदि जगहों से फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं.

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क्या देखें?
हवाई का सबसे व्यस्त आईलैंड ओआहू घूमने के लिए बहुत ही बेहतरीन जगह है.
पार्टनर के साथ माउई जाना न भूलें. पूरी तरह से प्रकृति की गोद में समाई माउई में जगह-जगह वाटरफॉल और हरियाली इसके आकर्षण का केंद्र है.
वॉलकेनो लेशनल पार्क देखने के लिए बिग आईलैंड ज़रूर जाएं.
काउआई में हेलीकॉप्टर विज़िट करना न भूलें.
हवाई के बीचेज़ दुनिया के रोमांटिक बीचेज़ में माने जाते हैं. ऐसे में बीचेज़ पर घूमने ज़रूर जाएं.

कहां से शॉपिंग करें?
हवाई के वाईकीकी इंटरनेशनल मारकेट में ख़रीददारी करने का चांस मिस न करें. यहां की लोकल चीज़ों की शॉपिंग आपके लिए बेहतर होगी. हैंडीक्राफ्ट से लेकर फाइन आर्ट तक हर तरह की वस्तुएं यहां आपको मिलेंगी.

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पेरिस
फ्रांस की राजधानी पेरिस किसी स्वप्न लोक की तरह है. शहर के बीच में बहती सोन नदी और उसके किनारे पर खड़ा एफिल टावर दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. पेरिस को फैशन की राजधानी माना जाता है. फैशन की शुरुआत यहीं से होती है.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, बैंग्लोर, चेन्नई आदि बड़े शहरों से फ्लाइट की सीधे सुविधा है.

क्या देखें?
एफिल टावर की झलक के बिना पेरिस टूर की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
सैकड़ों तरह के फूल और पौधों की सुंदरता वाला ट्यूलेरी गार्डन घूमने ज़रूर जाएं.
दुनिया का सबसे बड़ा चित्र संग्रहालय लूब्रु देखने ज़रूर जाएं.

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कहां से शॉपिंग करें?
आर्टिस्टिक ज्वेलरी और डेकोर आइटम्स की शॉपिंग के लिए बेस्टील आर्ट मार्केट प्रसिद्ध है.
डिज़ाइनर कपड़ों और एक्सेसरीज़ के लिए कैनल सेंट मार्टीन मार्केट जाएं.
कुछ एंटीक और सेकंडहैंड चीज़ों की ख़रीददारी के लिए आप फ्ली मार्केट जा सकते हैं.

– श्वेता सिंह 

WOW! परदे पर फिर साथ दिखेंगी बॉलीवुड की ये हिट जोड़ियां (WOW! These hit Bollywood couples will pair up again)

Bollywood Hit Couples

Bollywood Hit Couples

बॉलीवुड में जहां हर दिन किसी न किसी नए कलाकार की एंट्री हो रही है, वहीं कुछ जोड़ियां ऐसी भी हैं, जिनकी सिज़लिंग केमेस्ट्री को देखते हुए फिल्ममेकर्स उन्हें दोबारा एक साथ परदे पर उतारने की तैयारी में हैं. आनेवाले दिनों में कौन-कौन सी हिट जोड़ियां दिखेंगी फिर से साथ? आइए, जानते हैं.

Bollywood Hit Couples

दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह (Deepika Padukone-Ranveer Singh)
दीपिका और रणवीर के अफेयर की चर्चा तो आए दिन होती ही रहती हैं, मगर दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी इतनी कमाल की है कि जब भी दोनों साथ आए फिल्म हिट रही. चाहे वो संजय लीला भंसाली की फिल्म गोलियों की रासलीला-रामलीला हो या बाजीराव मस्तानी, दोनों की केमेस्ट्री ने हमेशा दर्शकों का दिल जीता है. अब एक बार फिर दीपिका-रणवीर की हिट जोड़ी साथ दिखेगी संजय लीला भंसाली की अपकमिंग फिल्म पद्मावती में. इस फिल्म में रणवीर एक रसिक सुल्तान के क़िरदार में होंगे. यह एकतरफा प्यार की कहानी है. दोनों के फैन्स को इस फिल्म का ब्रेसब्री से इंतज़ार हैं, क्योंकि रियल लाइफ लवर्स को ऑनस्क्रीन इश्क फरमाते देखना बेहद दिलचस्प होगा.

 

Bollywood Hit Couples
सलमान खान-कैटरीना कैफ़ (Salman Khan-Katrina Kaif)
कभी सल्लू मियां के दिल की धड़कन रही कैटरीना कैफ़ से भले ही उनका ब्रेकअप हो चुका है, लेकिन सलमान ने उनसे प्रोफेशनल रिश्ता नहीं तोड़ा, तभी तो ब्रेकअप के बाद भी दोनों कई फिल्में साथ कर चुके हैं. 2005 में फिल्म मैंने प्यार क्यों किया? में दोनों पहली बार साथ नज़र आए. उसके बाद दोनों ने क़रीब आधा दर्जन फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया. हमेशा चर्चा में रहने वाली ये जोड़ी एक बार फिर साथ दिखेगी यशराज बैनर की फिल्म टाइगर ज़िंदा है में. ये फिल्म एक था टाइगर की सिक्वल होगी.

 

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शाहरुख ख़ान-कैटरीना कैफ़ (Shahrukh Khan-Katrina Kaif)
यश चोपड़ा की फिल्म जब तक है जान में शाहरुख़ और कटरीना की सिज़लिंग केमेस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. इस फिल्म में शाहरुख़ कई बार कैटरीना को किस करते नज़र आए. इतना ही नहीं, शाहरुख़ ने अपने 25 साल के करियर में अगर किसी हीरोइन को स्मूच किया तो वो कैटरीना हैं. अब दोनों की ये हिट जोड़ी दिखेगी डायरेक्टर आनंद ए राय की फिल्म बंधुआ में. इस फिल्म में शाहरुख़ बौने की भूमिका में होंगे. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि बौने बने शाहरुख़ 5.8 फिट की कैटरीना के साथ कैसे रोमांस करेंगे?

 

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श्रद्धा कपूर-आदित्य रॉय कपूर  (Shradha Kapoor-Aditya Roy Kapoor)
फिल्म आशिकी 2 में पहली बार साथ दिखी इस रोमांटिक जोड़ी ने पहली ही फिल्म में दर्शकों का दिल जीत लिया. फिल्म में इनकी केमेस्ट्री और लव स्टोरी लोगों को बहुत पसंद आई. अब ये रोमांटिक जोड़ी फिर साथ दिखेगी फिल्म ओके जानू में. फिल्म का ट्रेलर हाल ही में लॉन्च हुआ जिसमें दोनों की हॉट केमेस्ट्री दिख रही है. वैसे आशिकी 2 में ऑनस्क्रीन रोमांस के साथ ही रियल लाइफ में इनके अफेयर की ख़बरें भी सुर्ख़ियों में रहीं, मगर बाद में किसी वजह से दोनों अलग हो गए. ये बात और है कि इस रिलेशनशिप के बारे में श्रद्धा और आदित्य ने कभी कुछ कहा नहीं.

 

Bollywood Hit Couples
सिद्धार्थ मल्होत्रा-आलिया भट्ट (Sidharth Malhotra-Alia Bhatt)
करण जौहर की फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर में आलिया के प्यार में पागल सिद्धार्थ बहुत कोशिश के बाद आख़िरकार अंत में आलिया को पाने में कामयाब हो जाते हैं. अगली फिल्म कपूर एंड सन्स में भी आलिया को फवाद ख़ान से प्यार रहता है, मगर आख़िर में वो और सिद्धार्थ एक हो जाते हैं. अब एक बार फिर दोनों परदे पर साथ दिखने वाले हैं. आनेवाली फिल्म आशिकी 3 में आलिया और सिद्धार्थ लवर्स के रोल में दिखेंगे. रियल लाइफ में भी दोनों को कई बार एकसाथ छुट्टियां मनाते हुए देखा गया है. ऑफस्क्रीन भी इनकी बॉन्डिंग काफ़ी अच्छी है.

 

Bollywood Hit Couples

शाहरुख ख़ान-अनुष्का शर्मा (Shahrukh Khan-Anushka Sharma)
फिल्म रब ने बना दी जोड़ी से बॉलीवुड में एंट्री करनेवाली अनुष्का शर्मा की इस फिल्म में शाहरुख़ के साथ उनकी जोड़ी को लोगों ने बहुत पसंद किया. इसके बाद इस जोड़ी का जादू दिखा फिल्म जब तक है जान में और अब ये सुपरहिट जोड़ी एक बार फिर अपना मैजिक दिखाएगी इम्तियाज़ अली की फिल्म द रिंग में. कहा जा रहा है कि ये एक अलग तरह की लव-स्टोरी होगी. इस फिल्म की शूटिंग पंजाब के साथ ही यूरोप में भी हुई है. हाल ही में सलमान ने अपने ट्वीट पर इम्तियाज़ अली की इस फिल्म की रिलीज़ डेट बताई थी. सलमान ने मज़ाकिया अंदाज़ में ट्वीट किया था, शाहरुख खान की फिल्म आ रही है… डेट मैंने डिसाइड कर दी है, टाइटिल तुम लोग डिसाइड कर दो. दरअसल, फिल्म का टाइटल अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है ‘द रिंग’ वर्किंग टाइटल है.

 

Bollywood Hit Couples

सुशांत सिंह राजपूत-परिणीति चोपड़ा (Sushant Singh Rajput-Parineeti Chopra)
फिल्म शुद्ध देसी रोमांस की रोमांटिक जोड़ी सुशांत सिंह राजपूत और परिणीति चोपड़ा दोबारा स्क्रीन शेयर करने के लिए तैयार हैं. शुद्ध देसी रोमांस में इनकी केमेस्ट्री को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया था. अब ये सुपर हॉट जोड़ी अपकमिंग फिल्म तकदुम में साथ दिखेगी. एक इंटरव्यू के दौरान परिणीति ने माना कि सुशांत के साथ काम करना उन्हें अच्छा लगता है और शुद्ध देसी रोमांस की शूटिंग के समय भी उनकी सुशांत से अच्छी बॉन्डिंग हो गई थी. वैसे इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों की बढ़ती नज़दीकियों की भी ख़बर आई थी, हालांकि दोनों ने इन ख़बरों को सिरे से खारिज किया था. इस फिल्म में सुशांत और परिणीति के 27 किसिंग सीन्स ने सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियां बंटोरीं थीं.

 

Bollywood Hit Couples
आलिया भट्ट-वरुण धवन (Varun Dhawan-Alia Bhatt)
फिल्म हम्पटी शर्मा की दुल्हनियां के बाद आलिया फिर से वरुण की दुल्हन बनेंगी फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनियां में. इतना ही नहीं, ख़बर है कि दोनों की जोड़ी को करन जौहर अपनी फिल्म शिद्दत में ले सकते हैं. सबसे पहले दोनों करन जौहर की फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर में साथ दिखे थे. उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री गज़ब की है. वैसे रियल लाइफ में भी दोनों अच्छे दोस्त हैं.

– कंचन सिंह

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर- क्यों हो जाता है दिल बेइमान? (How extra marital affair affect relationship?)

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बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आकांक्षाएं, उम्मीदें या विश्‍वास की कमज़ोर होती डोर… वजह चाहे जो भी हो, मगर ये सच है कि पिछले एक-डेढ़ दशक से हमारे देश में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले बढ़े हैं. आख़िर क्यों लोगों को अपने घर के बाहर प्यार तलाशना पड़ रहा है, क्यों शादी का रिश्ता कमज़ोर होता जा रहा है? पेश है मेरी सहेली की ख़ास रिपोर्ट.

 

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प्रिंजल और सिद (परिवर्तित नाम) का दो वर्ष पूर्व प्रेम विवाह हुआ था, दोनों ही अपनी शादीशुदा ज़िंदगी से बहुत ख़ुश थे, मगर धीरे-धीरे दोनों के बीच न जाने कब शारीरिक फिर मानसिक दूरियां पनपने लगी. जिसकी वजह से प्रिंजल डिप्रेशन का शिकार हो गई. अपनी नीरस ज़िंदगी से परेशान प्रिंजल जब पति सिद के साथ मनोवैज्ञानिक के पास पहुंची, तो सवाल-जवाब के दौरान उसे पता चला कि उसके पति सिद का उसकी सहेली के साथ अफेयर चल रहा है. बहुत पूछने पर सिद ने सच कुबूल किया, मगर उसके अनुसार एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह ख़ुद प्रिंजल थी, जो बाकी मामलों में तो बहुत अच्छी थी, मगर अपने काम में इस कदर व्यस्त रहती कि वो सिद को समय नहीं दे पाती थी और न ही सेक्स में उसकी ख़ास रुचि थी. दूसरी ओर प्रिंजल की सहेली जो शादीशुदा और स्मार्ट थी, वो भी अपने पति से असंतुष्ट थी, ऐसे में जब उसकी मुलाक़ात सिद से हुई, तो दोनों बहुत जल्दी एक-दूसरे के क़रीब आ गए, मगर सही समय पर मनोवैज्ञानिक से संपर्क करने से सिद और प्रिंजल की शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद होने से बच गई, मगर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. कई मामलों में तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के कारण कई ज़िंदगियां बर्बाद हो जाती है.

क्या कहते हैं आकड़ें?

* महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अधिक होते हैं. जहां महिलाओं की संख्या 12% है, वहीं पुरुषों की संख्या 28% है.

* एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में लिप्त ज़्यादातर पुरुष इसके लिए ख़ुद को दोषी नहीं मानते, जबकि महिलाओं के मन में मलाल बना रहता है.

* सेक्स के लिए स़िर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि पुरुषों में नपुंसकता के चलते महिलाएं भी एक्स्ट्रा मैरिटल करने से नहीं हिचकिचातीं.

* शहरों की बात की जाए तो सबसे अधिक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले मुंबई में समाने आए हैं. राजधानी दिल्ली का नंबर दूसरा है.

* कुछ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ऐसे भी हैं जो जीवनसाथी की रज़ामंदी से चलते, तो कुछ जीवनसाथी जानकर भी अनजान बने रहते हैं.

दो तरह के होते हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स
विशेषज्ञों की मानें तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ख़ासकर दो तरह के होते हैं, पहला सेक्सुअल और दूसरा इमोशनल. सेक्सुअल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में दो ऐसे लोग क़रीब आते हैं, जो अपने-अपने पार्टनर से संतुष्ट नहीं होते और अपनी सेक्सुअल डिज़ायर को पूरा करना चाहते हैं. इमोशनल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर दो लोग एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए क़रीब आते हैं. रिसर्च के अनुसार, अधिकांशतः महिलाएं इमोशनल अटैचमेंट यानी भावनात्मक ज़ुडाव के चलते एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर क़दम बढ़ाती हैं जबकि पुरुष अक्सर सेक्सुअल डिज़ायर को पूरा करने के लिए.

क्यों बाहर तलाशते हैं प्यार?
आख़िर क्यों आए दिन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के केसेस बढ़ते जा रहे हैं? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

कमज़ोर होते रिश्ते
प्रोफेसर एवं काउंसलर रश्मि अग्निहोत्री के अनुसार, “वो दिन लद गए जब पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए मरने-जीने को तैयार रहते थे. आज रिश्तों की डोर कमज़ोर हो गई है. जिसे टूटने में पलभर का भी समय नहीं लगता. इसकी सबसे बड़ी वजह है प्यार में कमी. यंगस्टर्स प्यार से ज़्यादा अब अपने कंफर्ट को महत्व देने लगे हैं. वो जीवनसाथी का चुनाव इसलिए नहीं करते, क्योंकि वो उनसे प्यार करते हैं, बल्कि अपनी सहूलियत के लिए ऐसे जीवनसाथी का चुनाव करते हैं, जिनके साथ को नहीं, बल्कि जिनके साथ वो ज़िंदगी को एंजॉय कर सकें. ऐसे में जब रिश्ते की नींव ही कमज़ोर होती है, तो रिश्ता टूटने में देरी नहीं लगती.”

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समय की कमी ने लाई प्यार में कमी
रिसर्च के अनुसार, वर्क प्लेस पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की संभावना अधिक होती है. आज मेट्रो सिटीज़ में अच्छी लाइफस्टाइल के लिए कपल्स ने ख़ुद को इस हद तक बिज़ी कर दिया है कि उनके पास घर-परिवार की छोड़िए, एक-दूसरे के लिए भी समय नहीं है. 8-10 घंटे की जॉब और ट्रैवलिंग में 1-2 घंटे बर्बाद करने के बाद वो इस क़दर थक जाते हैं कि एक-दूसरे से बात करने कि बजाय नींद की आगोश में जाना ज़्यादा पसंद करते हैं. नतीजतन दोनों के बीच दूरियां बढ़ती जाती हैं और पार्टनर की प्यार की कमी की भरपाई के लिए वो बाहर प्यार तलाशने लगते हैं.

ज़रूरत से ज़्यादा प्रैक्टिकल होना
सबसे आगे निकलने की होड़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने युवाओं बहुत कम उम्र में प्रैक्टिकल बना दिया है. प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ वो अब अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में भी प्रैक्टिकल होकर सोचने लगे हैं. एक-दूसरे के इमोशन्स, फिलिंग आदि से उन्हें कोई ख़ास मतलब नहीं होता. ऐसे में ख़ुद को ख़ुश रखने के लिए वो प्रैक्टिकल तरी़के से सोचते हुए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को ग़लत नहीं समझते.

स्ट्रेस कम करने के लिए भी रखते हैं अफेयर
रिसर्च की मानें तो मेट्रो सिटीज़ में रहने वाले कपल्स हेक्टिक लाइफस्टाइल और स्ट्रेस को कम करने के लिए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखते हैं. इस विषय में मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी कहती हैं “वर्क प्लेस पर होने वाले एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की एक वजह स्ट्रेस भी है, जिससे छुटकारा पाने के लिए कुछ पाटर्नर अपने कलीग के साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाते हैं. इससे उन्हें सुख का एहसास होता है और वो ख़ुद को संतुष्ट भी महसूस करते हैं. ऐसे लोग एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को ज़्यादा एंजॉय करते हैं, क्योंकि ऐसे अफेयर्स में पार्टनर के प्रति उन पर किसी तरह की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती है.”

है सबसे बड़ा रुपइया
कई बार पैसों की अधिकता तो कभी पैसों की कमी की वजह से भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बनते हैं. पार्टनर यदि अपने जीवनसाथी की इच्छाओं को पूरा करने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होता है, तो दूसरा पार्टनर अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भी किसी दूसरे की ओर आकर्षित होने लगता है, तो कुछ पार्टनर ख़ासकर पुरुष ऐसे भी होते हैं जो पैसों की अधिकता के चलते भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का शौक़ रखते हैं.

ईगो भी है एक वजह
जहां प्यार होता है, वहां अहंकार की कोई जगह नहीं होती, लेकिन आज कपल्स के बीच प्यार के लिए कोई जगह नहीं है, उनकी नज़र में ईगो ही सबसे बड़ा हो जाता है, जिसकी वजह से न वो पार्टनर के आगे कभी झुकते हैं और ना ही कभी आपसी सहमति से रिश्तों की नींव को मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं. नतीजतन अहंकारवश हमसफ़र के आगे झुकने की बजाय वो किसी और से रिश्ता जोड़ना बेहतर समझते हैं.

मीडिया भी है ज़िम्मेदार
मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी कहती हैं, “एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के लिए बहुत हद तक मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री भी ज़िम्मेदार है. कई ऐसी फिल्में हैं, जो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को बढ़ावा देती हैं. तो कई बार मीडिया भी एक्स्ट्रा मैरिटल के मुद्दे को इस तरह से पेश करता है जैसे एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होना हर एक के लिए आम बात है या सामाजिक तौर पर ग़लत नहीं है.”

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से बढ़ रहे हैं अपराध
मुंबई की फैमिली कोर्ट के अनुसार, प्रत्येक तीन में से एक तलाक़ की वजह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है. एडवोकेट मनोज कुमार पाण्डेय के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते न स़िर्फ दिनों दिन तलाक़ के मामलों में इज़ाफा हो रहा है, बल्कि अपराध भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. कभी प्रेमी को पाने के लिए पत्नियां अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की, तो कभी पैर की बेड़ी बने बच्चों की भी बलि चढ़ा देती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ अपनी धोखेबाज़ पत्नी को सबक सिखाने के लिए पति भी हत्यारे बन जाते हैं. कुछ पति-पत्नी ऐसे भी हैं, जो जीवनसाथी से धोखा पाने के बाद ख़ुद ही फांसी के फंदे पर चढ़ जाते हैं. ग़ौर फरमाया जाए तो अधिकाशतः एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर महज अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं.”

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का दर्दनाक अंत

पिछले कुछ सालों में एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के चलते हुए दिल दहलाने वाले वारदातों पर एक नज़र.

* मार्च, 2014 (गुड़गांव) :  44 वर्षीय रजनीश कुमार सिंह को जब इस बात की जानकारी मिली कि उसकी 36 वर्षीया पत्नी श्‍वेता बिंद्रा का किसी ग़ैर  मर्द के साथ अफेयर चल रहा है, तो उसने अपनी पत्नी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी.

* अक्टूबर, 2014 (जयपुर) : योगा टीचर दिनेश कुमार ने अपनी 32 वर्षीया पत्नी एवं दो बच्चों की मां कविता कुमावत के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की   ख़बर सुनते ही उस पर अनगिनत बार चाकू से वार करके मौत के घाट उतार दिया.

* नवंबर, 2013 (मुंबई) : 23 वर्षीया पत्नी तृप्ति का कुछ सालों से अफेयर चल रहा है, जब इसकी जानकारी पति जयेश राउत को मिली, तो उसने    सिलिंग फैन से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

* दिसंबर, 2012 (कोलकत्ता) : दो बच्चों की मां निलोफर (29 वर्षीया) का ऑटो रिक्शा चालक के साथ प्रेम संबंध है, ये जानने के बाद निलोफर के बड़े  भाई मेहताब आलम ने आरी से गला रेतकर निलोफर की हत्या कर दी.

एक्स्पर्ट स्पीक

मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का अंत तलाक़ है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. ग़लतियां इंसान से ही होती हैं और हर किसी को सुधरने का एक मौक़ा ज़रूर देना चाहिए. अनजाने में ही सही मगर हो सकता है कि आपकी ओर से भी कुछ ग़लती हुई हो, जिसके चलते आपके पार्टनर किसी दूसरे की तरफ़ आकर्षित हुए हों. ऐसे में न स़िर्फ उन्हें, बल्कि ख़ुद को भी बदलने का मौक़ा दीजिए और सब कुछ भूलाते हुए नई शुरुआत करें.”

प्रोफेसर एवं काउंसलर रश्मि अग्निहोत्री के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का एकमात्र हल तलाक़ नहीं है. कपल्स चाहें तो आपसी सहमति से एक नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं. बशर्ते जीवनसाथी को अपनी ग़लती का एहसास हो और वो दिल से ख़ुद को गुन्हगार मानते हुए आपके साथ नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करना चाहता हो. लोग क्या सोचेंगे, समाज क्या कहेगा? जैसी बातें सोचकर ऐसे रिश्ते में रहने की भूल न करें.”

एडवोकेट मनोज कुमार पाण्डेय के अनुसार, “पिछले कुछ सालों की बात करें, तो तक़रीबन 20% तलाक़ की वजह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है, मगर 10% मामले ऐसे भी हैं, जो तलाक से पहले होने वाले मैरिज कॉन्सलिंग से सुलझ भी गए हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप किसी धोखेबाज़ इंसान के साथ अपनी ज़िंदगी बिताएं.”

मनोवैज्ञानिक डॉ. अंशु कुलकर्णी के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का अंत तलाक़ है या नहीं, ये इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाला पार्टनर किस हद तक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में इंवॉल्व है, अगर उनके मन में गिल्ट है या वो ख़ुद उससे बाहर निकलना चाहता है, तो बेझिझक आप उसे एक मौक़ा दे सकते हैं, मगर वो ख़ुद नहीं चाहता तो ऐसे रिश्ते को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं. बेहतर है कि आप तलाक़ लेकर अपनी ज़िंदगी अपने तरी़के से जिएं.”

ताकि न आए ऐसी नौबत

किसी ने सच ही कहा है ताली एक हाथ से नहीं बजती, अगर आप दोनों के बीच किसी तीसरे ने जगह ले ली है, तो इसका मतलब स़िर्फ ये नहीं कि आपका पार्टनर ही ग़लत है, हो सकता है कि कमी आपमें भी हो. अपनी शादी को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से बचाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखेंः

* झगड़ा छोटा हो या बड़ा, एक-दूसरे से बातचीत बंद न करें, अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करें और समस्या का हल ढूंढ़ें. वरना आपकी चुप्पी आपके रिश्ते में  दरार डाल सकती है.

* न स़िर्फ शारिरीक संतुष्टि, बल्कि पार्टनर की मानसिक संतुष्टि का भी ख़्याल रखें, कई बार पार्टनर मानसिक सुख और सुकून की आस में भी किसी  तीसरे की ओर क़दम बढ़ाते हैं, ख़ासकर महिलाएं.

* घर या बाहर की अनगिनत ज़िम्मेदारियां भले ही आपके कंधों पर हों, मगर जीवनसाथी को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती न करें. आपकी ओर से  ध्यान हटने पर हो सकता है कि उनका ध्यान किसी दूसरे में लग जाए.

* ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए स़िर्फ एकसाथ घर में रहना काफ़ी नहीं, पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना भी ज़रूरी है.

* न स़िर्फ पार्टनर, बल्कि शादी जैसे पवित्र बंधन पर भी विश्‍वास रखें.

* पार्टनर पर हावी न हों. जीवनसाथी को उनके मन मुताबिक जीने दें. कई मामलों में पार्टनर का डॉमिनेटिंग होना भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह  होता है.

फैक्ट फाइल

* रिसर्च के अनुसार, ऐसी महिलाएं जिनके पति कई महीनों या वर्षों के लिए घर-देश से दूर रहते हैं, वो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं.

* रिसर्च के अनुसार, पत्नी की प्रेग्नेंसी के चलते सेक्सुअल डिज़ायर पूरी न होने से पुरुषों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की संभावना बढ़ जाती है.

– कंचन सिंह

परफेक्ट कपल बनने के स्मार्ट ट्रिक्स

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जब भी ज़िंदगी की धूप ने थकाया, तेरा आंचल बना मेरा साया… जब भी ज़माने ने सताया, मैं तेरे ही पास चला आया… तेरी पलकों की छांव में ही मिलती हैं मुझे राहतें, तेरी बांहों की पनाह में ही पलती हैं मेरी हसरतें… उलझाती है ये दुनिया अपने सवालों में, सुलझ जाता हूं मैं पाकर सारे जवाब तेरी निगाहों में… तू और मैं एक ही हैं, दो नहीं… तेरे ही वजूद से है मेरा अक्स, जो तू नहीं तो मैं नहीं!  

जब दो दिल एक जान बन जाते हैं, तभी बनता है सच्चा रिश्ता और ऐसे लोगों को ही हम कहते हैं परफेक्ट कपल. यह परफेक्शन आप भी अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में ला सकते हैं, बस ज़रूरत है ज़रा-सी सलाह व समझदारी की. सलाह हम देंगे, जिसे समझदारी से आपको अपने जीवन में लागू करना होगा और आप भी बन जाएंगे परफेक्ट कपल.

स्मार्ट ट्रिक्स

आप जैसे हैं वैसे ही रहें, साथ ही अपने पार्टनर को भी उसके उसी रूप में स्वीकारें: एक अच्छी रिलेशनशिप की शुरुआत ही एक्सेपटेंस यानी स्वीकारने के भाव से होती है. कपल्स को कभी भी एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और न ही एक-दूसरे से परफेक्शन की उम्मीद करनी चाहिए.

शेयररिंग ज़रूरी है: जब आप एक रिश्ते में बंधे होते हैं, तो मन में यह बात नहीं आनी चाहिए कि यह मेरा है और यह तेरा. जो भी कुछ है आप दोनों का है. आप पर आपके पार्टनर का भी हक़ है, इसलिए शेयरिंग बेहद ज़रूरी है, फिर चाहे वो बातें शेयर करना हो या कोई छोटी से छोटी चीज़. इससे आपकी बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी.

बहुत ज़्यादा रोक-टोक न करें: जो चीज़ आपके पार्टनर को ख़ुशी देती हो, उसे करने दें. हर बात पर एक-दूसरे को रोकना-टोकना ठीक नहीं. अगर आपके पति को दोस्तों के साथ पार्टी करने का मन है, तो करने दें. इसी तरह यदि पत्नी को भी शॉपिंग करनी हो, तो उसे उत्साहित करें, न कि ताना दें.

तुम्हें जिससे प्यार है, मुझे भी उससे प्यार है: एक-दूसरे को यह एहसास दिलाते रहें कि आप दोनों को ही एक-दूसरे की पसंद से प्यार है. अक्सर ज़्यादातर कपल्स एक-दूसरे के रिश्तेदारों को पसंद नहीं करते और यही बातें झगड़े की वजहें भी बनती हैं. आप यही सोचें कि शादी के बाद आपको एक-दूसरे के परिवारों को स्वीकारना ही होगा, आख़िर वो आपका भी परिवार है अब.

एक-दूसरे के स्वभाव के अंतर को सकारात्मक रूप से लें: दो अलग चीज़ें भी मिलकर लाजवाब हो सकती हैं, इसी थ्योरी को ध्यान में रखें और एक-दूसरे के अलग व्यक्तित्व को सराहें और इस अंतर को एंजॉय करें. कभी भी एक जैसा बनने की कोशिश करने की ग़लती न करें.

जलन की भावना को बहुत ज़्यादा हावी न होने दें: यह इंसानी फ़ितरत है कि कभी न कभी हमें किसी न किसी बात से ईर्ष्या या द्वेष होता ही है. लेकिन इन कमज़ोरियों को इतना हावी न होने दें कि आपके रिश्ते को ये प्रभावित करने लगें. मन में बेवजह के शक व शंकाएं न पालें. भरोसा करना सीखें.

समस्या से बचें या भागें नहीं: आपके दिन की शुरुआत आपके पार्टनर से होती है, तो झगड़ा या विवाद होने की स्थिति में आपकी शाम भी एक-दूसरे से बिना बात किए नहीं ढलनी चाहिए. रात को मुंह फेरकर मन में ग़ुस्सा रखने से समस्या अगले दिन तक खिंच जाती है. बेहतर होगा उसे उसी दिन बात करके सुलझा लिया जाए.

सरल बनें, ख़ुश रहें: रिश्तों में हम जितना ज़्यादा सरल बनेंगे और छल-कपट से दूर रहेंगे, रिश्ते उतने ही मज़बूत बनेंगे. आप दोनों साथ इसीलिए हो कि एक-दूसरे को अपनी उपस्थिति से ख़ुश रख सकें, जीने का हौसला व उमंग दे सकें. हमेशा इस बात को ध्यान में रखेंगे, तो कोई भी नकारात्मक विचार हावी नहीं होगा.

जो तुम्हारी पसंद, वही मेरी पसंद: अगर आप दोनों की पसंद और रुचियां अलग भी हैं, तो भी एक-दूसरे की हॉबीज़ में दिलचस्पी लेना सीखें. पति को क्रिकेट मैच पसंद है और पत्नी को कुकरी शो, ऐसे में क्रिकेट के वक़्त पत्नी कोसे और कुकरी शो के वक़्त पति, तो छोटी-सी बात का बतंगड बनते देर नहीं लगेगी. और अगर पत्नी भी थोड़ा क्रिकेट में रुचि दिखाए व पति कुकिंग में तो बात बन जाए.

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अपने प्रॉमिसेज़ ब्रेक न करें: एक-दूसरे से वादा करें, तो हर हाल में निभाएं, वरना विश्‍वास खोता चला जाता है. भले ही किसी मूवी या डिनर का भी वादा किया हो, तो अगर किसी कारणवश निर्धारित दिन को न जा पाएं हों, तो किसी और दिन प्लान करें. इससे यह संदेश जाएगा कि आप पार्टनर की ख़ुशी का ख़्याल रखते हैं और अपने वादे ज़रूर निभाते हैं.

चीटिंग न करें: आपके पास दुनिया का सबसे अच्छा पार्टनर है, तो भला किसी और से फ्लर्ट क्यों करना. अक्सर फ्लर्टिंग के चक्कर में ही इमोशनल रिश्ते बन जाते हैं, जिससे समस्या हो सकती है. फ्लर्ट ही करना है, रोमांस ही करना है, तो एक-दूसरे से करें, इससे आपके रिश्तों की गर्माहट भी बनी रहेगी और वो गहरा भी होगा.

प्यार का इज़हार करते रहें: प्यार का इज़हार आपके रिश्ते में रोमांस को बरक़रार रखता है, इसलिए कभी फोन पर, तो कभी मैसेज द्वारा आई लव यू जैसे प्यारे शब्द कहते रहें.

अच्छे सपोर्टर बनें: ऑफिस के काम में या फिर घर की किसी भी ज़िम्मेदारी में एक-दूसरे का हाथ बंटाएं. अपनी तरफ़ से हमेशा पूछते रहें कि क्या हम आपकी मदद कर सकते हैं? अक्सर पत्नियां यह सोचती हैं कि घर-प्रापर्टी या पति के प्रोफेशन से जुड़ी परेशानियों में वो कुछ नहीं कर सकतीं और पति यह सोचते हैं घरेलू ज़िम्मेदारियां, रिश्ते-नाते तो पत्नी का डिपार्टमेंट है. यह सोच न रखें, आप दोनों को ही हर वक़्त, हर मौ़के पर एक-दूसरे के सहयोग की ज़रूरत होती ही है. एक-दूसरे को सपोर्ट करते रहें.

कॉम्प्लिमेंट्स देना कभी न भूलें: चाहे लुक्स के मामले में हो, फिटनेस के मामले में या फिर किसी कामयाबी पर भी एक-दूसरे को कॉम्प्लिमेंट ज़रूर दें.  आपकी सराहना आपके पार्टनर के लिए ख़ास मायने रखती है. वो उम्मीद करते हैं कि अपने साथी से उन्हें कॉम्प्लिमेंट मिले.

जो आदतें या बातें नापसंद हों, उन्हें भी कहें: ज़्यादातर रिश्ते कुछ ग़लतफ़हमियों के चलते ही टूटते हैं. ये ग़लतफ़हमियां तब होती हैं, जब हमें एक-दूसरे की आदतें पसंद नहीं होतीं. बेहतर होगा कि जो बातें पसंद न हों या जिन्हें लेकर विवाद होता हो, उन्हें आपसी बातचीत से सुलझा लें.

पर्सनल अटेंशन दें: आप दोनों कितने ही बिज़ी क्यों न हों, पर एक-दूसरे के लिए समय ज़रूर निकालें. दो-चार दिन की छुट्टि लेकर कहीं बाहर जाएं, जहां स़िर्फ आप दोनों ही हों. परिवार की भीड़ में भी सबसे नज़रें बचाकर थोड़ी-बहुत शरारतें ़व छेड़छाड़ जरूर करें. यही पर्सनल अटेंशन आप दोनों को और क़रीब लाएगी और आप कहलाएंगे परफेक्ट कपल.

पति-पत्नी नहीं, दोस्त बनें: दोस्ती का रिश्ता बहुत अनमोल और सबसे अलग होता है. हम अपने दोस्तों के साथ सबकुछ शेयर कर सकते हैं, क्योंकि हमें यह पता होता है कि वो ही हैं, जो हमें समझ सकते हैं, हमारा भला चाहते हैं और वो हमारी बुरी बातों और अदतों पर भी जजमेंटल नहीं होंगे. यही विश्‍वास पति-पत्नी के बीच जबतक नहीं बनेगा, तब तक वो परफेक्ट कपल नहीं बन पाएंगे. ऐसा विश्‍वास जहां पता हो कि यह तो हमारा दोस्त है, यही हमें समझ पाएगा और किसी भी बात का बुरा नहीं मानेगा.

एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश कभी न करें: एक-दूसरे को मुट्ठी में रखने की जो हमारे यहां प्रवृत्ति है, उससे बाहर निकलें. डॉमिनेटिंग होने की कोशिश में आप अपने साथी से दूर न हो जाएं कहीं. कभी भी अपने साथी को प्रभावित करने या उसे कंट्रोल करने की कोशिश न करें. आप दोनों जीवनसाथी हैं, ख़ुद को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी न समझें.

साथी की कमज़ोरियों और इनसेक्योरिटीज़ को समझें: आप जानते हैं कि आपका साथी किन बातों पर जल्दी अपसेट हो जाता है और आपका कौन-सा व्यवहार उसमें असुरक्षा की भावना को बढ़ता है, ऐसे में सबसे अच्छा होगा कि वो बातों और व्यवहार न किया जाए, जिससे साथी को तकलीफ़ होती है. कई बार मात्र अपने मज़े के लिए पार्टनर को जलाने के उद्देश्य से भी लोग ऐसी चीज़ें करते हैं. उन्हें लगता है पार्टनर को जलाने से उनमें प्यार और बढ़ेगा, लेकिन यह सोच ग़लत है. ऐसा करके आप उन्हें हर्ट करेंगे, न कि प्यार बढ़ाएंगे.

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कुछ बातें न बताना ही बेहतर होता है: माना आपको ईमानदार रहना चाहिए और सब कुछ शेयर करना चाहिए, लेकिन अगर आपको किसी के प्रति कोई आकर्षण महसूस हो रहा है या आपकी कोई सेक्सुअल फैंटसी है, तो उसे शेयर न ही करें, तो बेहतर होगा, क्योंकि भले ही आपका साथी कितना ही समझदार क्यों न हो, पर इन मामलों में मन में बेवजह की शंका घर कर सकती है.

ख़ुद को पार्टनर की जगह रखकर सोचें: जब भी कोई वाद-विवाद या बहस हो जाए या पार्टनर से अनबन हो, जो उसकी प्रतिक्रिया को एकदम से सही-ग़लत कहकर मुंह न फुला लें. हमेशा ऐसी परिस्थितियों में ख़ुद को एक-दूसरे की जगह रखकर ज़रूर सोचें कि अगर आप उनकी जगह होते, तो आप कैसे रिएक्ट करते और आपको कैसा लगता. यक़ीन मानिए इससे बहुत हद तक समस्या और आपसी विवाद सुलझ जाएगा.

कभी-कभी एक-दूसरे को अकेला भी छोड़ें: अगर आपके पार्टनर का मूड ठीक नहीं और वो कुछ देर अकेले रहना चाहे, तो भी पीछे न पड़े रहें कि मूड ख़राब होने की वजह वो आपको उसी वक़्त बताए. उसे समय दें, थोड़ी देर बाद वो ख़ुद ही आपसे शेयर करेंगे/करेंगी. स्पेस देना बहुत ज़रूरी है, वरना एक-दूसरे से खीझ होने लगती है.

शुक्रिया अदा करना सीखें: अक्सर पति-पत्नी के रिश्ते में शुक्रिया की औपचारिकता नहीं रहती, लेकिन जब भी आपका पार्टनर आपकी कोई भी मदद करे या कॉम्प्लिमेंट भी दे, तो उसे शुक्रिया कहें या कुछ ऐसा कहें, जो उसके दिल को छू जाए, जैसे- आप उन्हें यह एहसास दिलाएं कि आपका उनके जीवन में क्या महत्व है और उनके बिना आप कितने अधूरे हैं.

पैंपर करें, केयरिंग बनें: जैसे किसी बच्चे की देखभाल करते हैं, उसी तरह से एक-दूसरे की केयर भी करें और पैंपर भी करें. रिश्तों में कभी-कभी बचपना भी अच्छा लगता है, बच्चों जैसी निश्छलता रिश्ते का परफेक्ट बनाती है.

सरप्राइज़ दें: किसी ख़ास ओकेज़न पर ही सरप्राइज़ दें यह ज़रूरी नहीं, जिस दिन आप कोई सरप्राइज़ प्लान करेंगे आपके साथी के लिए तो वही दिन ख़ाद बन जाएगा. कभी कोई गिफ्ट ले आएं, तो कभी घर पर ही कुछ स्पेशल करें, जिससे रूमानियत बढ़े और आप दोनों एंजॉय करें.

सुरक्षाकवच बनें: अपने साथी को हमेशा यह महसूस कराएं कि आप उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा उनकी ढाल बनोगे. दुनिया की कितनी ही बड़ी मुसीबत क्यों न आ जाए, आप उनका साथ कभी नहीं छोड़ोगे. एक-दूसरे पर यह विश्‍वास ही आपके रिश्ते को बेहद मज़बूत बनाएगा.

ईगो को बीच में कभी न आने दें: अक्सर हम अपने छोटे-से ईगो के लिए बड़ी-बड़ी ख़ुशियां दांव पर लगा देते हैं, लेकिन जहां प्यार होगा, वहां ईगो की जगह ही नहीं होनी चाहिए. बहस के दौरान एक-दूसरे को जितनी आसानी से बुरा-भला कह देते हैं, उतनी ही आसानी से अगर सॉरी भी बोल देंगे, तो कोई समस्या ही नहीं होगी. अगर बोल नहीं पा रहे, तो एसएमएस कर दें, किसी पेपर पर लिखकर भेज दें या फिर फूलों के गुलदस्ते के साथ कोई नोट और प्यारा-सा गिफ्ट भी बुरा आइडिया नहीं है.

सेक्स लाइफ को नज़रअंदाज़ न करें: किसी भी शादी में सेक्स की भी उतनी ही अहमियत होती है, जितना प्यार का होना ज़रूरी है. बिज़ी लाइफ में सेक्स को नज़रअंदाज़ न करें. अपने रिश्ते में ठंडापन कभी न आने दें. एक-दूसरे की सेक्स की ज़रूरतों को भी महत्व दें. यह कोई ज़रूरी नहीं कि सेक्स में पहल स़िर्फ पति ही करे, पत्नी को भी उतना ही उत्साह और पॉज़ीटिव तरी़के से रुचि दिखनी चाहिए.

फिटनेस रखें बरक़रार: आप फिट रहेंगे, तो पार्टनर को अच्छा ही लगेगा. आपका आकर्षण उन्हें आपकी तारीफ़ करने से रोक नहीं पाएगा. दोनों साथ में जॉगिंग पर जाएं, साथ में योगा क्लास जॉइन करें, एक्सरसाइज़ करें. यह भी ज़रूर जताएं कि आप दोनों स़िर्फ हेल्थ के लिए ही नहीं, एक-दूसरे का आकर्षित करने के लिए भी फिट बने रहना चाहते हैं. फिर देखिए, आपके पार्टनर की निगाहों में बस आप ही आप और उनके दिल में आपके लिए बेशुमार प्यार.