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शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों? (Sex Education: Why We Should Talk About Sex Before Marriage)

Sex Education Sex Before Marriage

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शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों? (Sex Education: Why We Should Talk About Sex Before Marriage)

ससुराल में जाकर सबका मन जीत लेना… धीरे-धीरे मीठी आवाज़ में सबसे बात करना… ज़ोर से मत हंसना और न ही ऊंची आवाज़ में बात करना… घर के कामकाज में हाथ बंटाना… इस तरह की तमाम हिदायतें उस लड़की को ज़रूर दी जाती हैं, जिसकी शादी होनेवाली होती है… यह हर घर में आम है, लेकिन क्या कभी इस बात पर हम ग़ौर करते हैं कि इतनी हिदायतों के बीच सेक्स को लेकर हम बेटी को या बेटे को कितना एजुकेट करते हैं? नहीं न? क्योंकि इस स्तर पर बात करना तो दूर, हम सोचते भी नहीं. हमें यह ज़रूरी ही नहीं लगता. वैसे भी सेक्स (Sex) को लेकर आज भी हम उतना खुलकर बात नहीं करते. हमारे समाज में आज भी सेक्स को गंदा या ग़लत ही माना जाता है, लेकिन बात जब शादी-ब्याह की हो, तब भी हम इसे ज़रूरी क्यों नहीं मानते? 

ये किस तरह का समाज है?
  • क्या यह समाज का दोगलापन नहीं है कि हमारे यहां शादी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है और शादी का जो सबसे महत्वपूर्ण आधार है, उस पर ही बात करने से परहेज़ भी किया जाता है.
  • शादी के बाद गुड न्यूज़ की सबको जल्दी रहती है, लेकिन उससे पहले सेक्स से जुड़ी ज़रूरी बातें बताना किसी को ज़रूरी नहीं लगता.
  • जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है यानी सेक्स करने से किसी को परहेज़ नहीं, लेकिन इस पर एजुकेट करना बेहद शर्मनाक माना जाता है.
  • टीवी कमर्शियल्स में कंडोम, कॉन्ट्रासेप्शन या फिर इससे जुड़ी चीज़ें दिखाए जाने पर परिवार के लोग इस कदर शर्मिंदगी महसूस करते हैं, जैसे यह कोई आपराधिक या शर्मनाक बात हो.
क्या होते हैं दुष्परिणाम?
  • सेक्स एजुकेशन की कमी के चलते सेक्स को लेकर कोई जागरूकता हमारे समाज में नहीं है.
  • नए शादीशुदा जोड़े भी उतना ही जान पाते हैं, जितना उनके यार-दोस्त उन्हें बताते-समझाते हैं.
  • किस तरह से सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचाव करना चाहिए, किस तरह से फैमिली प्लानिंग और कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल करना चाहिए, पर्सनल हाइजीन का क्या महत्व है… इस तरह की तमाम बातों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है.
  • यही वजह है कि अधिकांश लड़कियां सेक्स को लेकर एक फैंटसी में जीती हैं और सुहागरात को किसी फिल्मी सीन की तरह देखती हैं. लेकिन जब उनका सामना हक़ीक़त से होता है, तो उनके सपने बिखर जाते हैं.
  • बात स़िर्फ लड़कियों की ही नहीं, लड़कों को भी यह सीख नहीं दी जाती कि पहली रात को सेक्स करना ज़रूरी नहीं. सबसे ज़रूरी होता है एक-दूसरे को कंफर्टेबल महसूस कराना, क्योंकि सेक्स एक क्रिया नहीं, भावना है और आपके रिश्ते की नींव का महत्वपूर्ण आधार भी.
  • हमारे यहां दोस्तों की बातें या फिर पोर्नोग्राफी ही सेक्स एजुकेशन का सबसे बड़ा आधार व ज़रिया होती है, जिससे बहुत ही ग़लत जानकारियां हासिल कर कपल्स अपनी-अपनी सोच के साथ एक-दूसरे के क़रीब आते हैं.
  • इसके अलावा अधिकांश लड़कियों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि सेक्स बेहद शर्मनाक और गंदी चीज़ होती है, जिससे वो शादी के बाद भी स़िर्फ पति की इच्छा मानकर इस क्रिया को अंजाम देती हैं. वो न तो अपनी चाहतें बयां कर पाती हैं और न ही अपनी सोच. यहां तक कि वो पति को सहयोग भी नहीं दे पातीं, क्योंकि यहां उनके चरित्र से जोड़कर इसे देखा-परखा जाता है.

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Sex Education Sex Before Marriage

नो सेक्स एजुकेशन का मतलब नो सेक्स नहीं है…
  • यह तो हम सभी जानते हैं कि सेक्स एजुकेशन नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति सेक्स नहीं करेगा, लेकिन इसका यह मतलब ज़रूर है कि वो सेक्स को लेकर कम संवेदनशील होगा, कम जानकार होगा और सेक्स के प्रति उसमें भ्रांतियां अधिक होंगी.
  • सेक्स एजुकेशन न होने का मतलब यह भी है कि यौन शोषण के मामले अधिक होंगे.
  • यह मान लेते हैं और शोध भी इसी ओर इशारा करते हैं कि लगभग 70-80% पैरेंट्स सेक्स एजुकेशन के लिहाज़ से भी बच्चों से सेक्स पर बात ही नहीं करते, लेकिन एडल्ट होने के बाद, शादी से पहले तो कम से कम उन्हें इस विषय पर ज़रूर बात करनी चाहिए, ताकि उनकी शादी की नींव मज़बूत हो.
  • बच्ची को यह तो सिखाया जाता है कि पति को ख़ुश रखना ही तेरा फ़र्ज़ है, लेकिन उसे यह नहीं बताया जाता कि अपनी सेक्सुअल हेल्थ के प्रति सतर्कता बरतना भी ज़रूरी है.
  • कॉन्ट्रासेप्शन क्यों और कितना ज़रूरी है, मेडिकल टेस्ट्स कितने ज़रूरी हैं, इस विषय पर पति से बात करना कितना ज़रूरी है… ये तमाम बातें कभी किसी नई-नवेली दुल्हन को नहीं सिखाई जातीं और न ही दूल्हे को भी इस संदर्भ में एजुकेट किया जाता है.
  • उन्हें इस विषय पर बात करने से भी डर लगता है कि कहीं उन्हें चरित्रहीन न समझ लिया जाए या उनके बारे में कोई राय न कायम कर ली जाए.
  • यही वजह है कि सेक्सुअल हाइजीन को लेकर देश की शहरी महिलाएं तक बहुत पिछड़ी हुई हैं.
  • नई-नवेली दुल्हन के वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर जितनी जागरूकता हमारा समाज दिखाता है, क्या उतनी ही जागरूकता लड़के की सेक्सुअल एक्टिविटीज़, सेक्सुअल हेल्थ और सेक्सुअल जानकारी के प्रति दर्शाई जाती है?

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प्रोफेशनल की लें मदद
  • यदि पैरेंट्स से सेक्स एजुकेशन नहीं मिली, तो कपल्स को चाहिए प्रोफेशनल की मदद लें.
  • काउंसलर के पास जाएं. प मन में छिपे डर, भ्रांतियों और आशंकाओं पर खुलकर आपस में बात करें.
  • पैरेंट्स की मानें, तो उनका यही तर्क होता है कि हमें तो किसी ने नहीं दी सेक्स एजुकेशन, फिर भी हमारी ज़िंदगी बेहतर है, लेकिन समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदला है, आज एक्सपोज़र ज़्यादा है, सेक्स को लेकर सवाल ज़्यादा हैं, डर ज़्यादा हैं, भ्रांतियां ज़्यादा हैं.
  • समय के साथ बदलाव होना ज़रूरी है, हमारी सोच में भी और हमारे तरीक़ों में भी.
  • कपल्स शादी से पहले ख़ुद भी बात कर सकते हैं और उन्हें जो सही लगे, वो ऐक्शन ले सकते हैं, ताकि उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बेहतर हो और उनका जीवन ख़ुशहाल. प पैरेंट्स भी यह ख़्याल रखें कि संस्कारों के साथ-साथ सेक्स एजुकेशन भी उतनी ही ज़रूरी है, ताकि आपकी बेटी का जीवन बेहतर हो.
  • दूसरी ओर ससुरालपक्ष को भी जानना ज़रूरी है कि नई दुल्हन से उम्मीदें, अपेक्षाएं करना, उसे ज़िम्मेदरियां देना, उसके कर्त्तव्यों की जानकारी देना तो ठीक है, साथ ही अपने बेटे को बेडरूम एटीकेट्स और सेक्स एटीकेट्स की जानकारी देनी भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि यह आख़िर उसकी बेहतरी के लिए ही है.

 

– गीता शर्मा

ज़हीर खान और सागरिका अब हैं ऑफिशियली मैरिड! देखें शादी की पहली तस्वीरें! (Zaheer Khan Ties The Knot With Sagarika)

Zaheer Khan Ties The Knot With Sagarika

Zaheer Khan Ties The Knot With Sagarika

ज़हीर खान और सागरिका अब हैं ऑफिशियली मैरिड! देखें शादी की पहली तस्वीरें! (Zaheer Khan Ties The Knot With Sagarika)
  • क्रिकेटर ज़हीर खान और सागरिका ने मुंबई के अपने घर में शादी रचा ली है. उन्होंने सादे से समारोह में रजिस्टर मैरिज की है. इस अवसर पर दोनों के क़रीबी दोस्त व फैमिली के लोग मौजूद थे.
  • यह एक पर्सनल सेरेमनी थी, इसके बाद पांच सितारा होटल में पार्टी होगी.
  • रविवार को मेहंदी और सोमवार को रिसेप्शन होगा.

Zaheer Khan Ties The Knot With Sagarika

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  • जैसाकि आप सभी जानते हैं कि ज़हीर और सागरिका काफ़ी समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे और हाल ही में उनकी सगाई भी हुई थी.
  • अब दोनों ऑफिशियली मैरिड होकर काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे हैं.
  • इस ख़ूबसूरत जोड़ी को हमारी भी शुभकामनाएं!

जानें हैप्पी लव लाइफ का रोमांटिक साइंस (Romantic Science Of Happy Love Life)

Romantic Science Of Happy Love Life
कहते हैं, अपोज़िट अट्रैक्ट्स, मगर शादी के बाद ये अट्रैक्शन कहीं खो जाता है. कपल्स के रिश्ते कई बार इतने जटिल हो जाते हैं कि उसमें प्यार की गुंजाइश ही नहीं रह जाती. यदि आप अपने रिश्ते की नाज़ुक डोर को उम्रभर थामे रखना चाहते हैं, तो कौन से लव रूल्स फॉलो करें? बता रही हैं कंचन सिंह.

ख़र्च करने की आदत

यदि आपको हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड और फैशन के मुताबिक़ अपना वॉर्डरोब चेंज करने की आदत है और पति बस चार जोड़ी शर्ट और दो जोड़ी जूतों में ही रहना पसंद करते हैं, तो ज़ाहिर है आपकी ये अति ख़र्चीली आदत पति को बिल्कुल रास नहीं आएगी. वो आपके ख़र्च पर उंगली उठाएंगे, जिससे आपके बीच मनमुटाव हो सकता है. सुनैना कहती हैं, “मुझे ऑनलाइन शॉपिंग की बुरी लत है, जिससे कई बार मैं ज़रूरत न होने पर भी चीज़ें मंगा लेती हूं, ये सोचकर कि अभी न सही, बाद में काम आएंगी, मगर मेरी ये आदत पति को बिल्कुल पसंद नहीं. इस बात को लेकर उनका मुझसे कई बार झगड़ा भी हो चुका है. वो बिना ज़रूरत के एक पैसा भी ख़र्च नहीं करना चाहते.”

क्या कहती है स्टडी?

एक जैसी ख़र्च की आदत न होने पर कपल्स के बीच मनमुटाव ज़्यादा होता है, वो अपने रिश्ते से संतुष्ट नहीं होते. इसके विपरीत यदि पति-पत्नी दोनों ख़र्चीले हैं या फिर दोनों बहुत किफ़ायती हैं, तो उनके बीच मनमुटाव की गुंजाइश बहुत कम रहती है.

मैं नहीं हम

शादी के बाद भले ही आपकी अलग-अलग पहचान हो, मगर बतौर कपल आप एक हो जाते हैं. जो कपल ‘मैं’ से ऊपर नहीं उठ पाते उनके रिश्ते में मुश्किलें आ ही जाती हैं और वो अपने रिश्ते से ख़ुश नहीं रहते. बातचीत या बहस के दौरान मैं की बजाय हम जैसे शब्दों का इस्तेमाल करनेवाले पति-पत्नी अन्य कपल्स की तुलना में ज़्यादा संतुष्ट और ख़ुश रहते हैं. रिश्तों की सफलता के लिए अब से आप भी मैं की बजाय हम कहना सीख जाइए.

क्या कहती है स्टडी?

जो कपल्स हम, हमारा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उनके बीच प्यार ज़्यादा होता है. उनके रिश्ते में ग़ुस्से और नेगेटिव बिहेवियर के लिए जगह नहीं होती. किसी मुद्दे पर सहमत न होने की स्थिति में उनका साइकोलॉजिकल स्ट्रेस लेवल भी कम होता है. वहीं यदि कपल्स मैं, तुम, मैंने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो ये उनके बीच अलगाव और असंतुष्टि को दर्शाता है.

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सकारात्मक सोच

ज़िंदगी के हर मोर्चे पर सफलता के लिए सकारात्मक सोच जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी रिश्ते की सफलता के लिए भी है. पॉज़िटिव इंसान ये नहीं सोचता कि उसके पास क्या नहीं है, बल्कि जो है उसके लिए वो भगवान का शुक्रिया अदा करके ख़ुश रहता है. अपने रिश्ते को पॉज़िटिव बनाए रखने के लिए पार्टनर के प्रति आभार व्यक्त करें, एक-दूसरे की क़ामयाबी का साथ मिलकर जश्‍न मनाएं, फन एक्टिविटी साथ में एन्जॉय करें, पार्टनर को स्पेशल फील कराएं.

क्या कहती है स्टडी?

सकारात्मक सोच रखने वाले कपल्स के रिश्ते मज़बूत बनते हैं और वो पार्टनर से संतुष्ट भी रहते हैं. सकारात्मक सोच का मतलब ये नहीं है कि वो समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हैं, बल्कि सकारात्मक सोच से उनके विचारों को विस्तार मिलता है, जिससे दोनों मिलकर किसी भी समस्या का आसानी से हल निकाल लेते हैं.

बेड पर रहें बेस्ट

हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए एक्टिव सेक्स लाइफ बेहद ज़रूरी है. जो कपल्स सेक्सुअली कम एक्टिव होते हैं, वो अपने रिश्ते से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते. वहीं दूसरी ओर सेक्सुअली एक्टिव पति-पत्नी का रिश्ता मज़बूत व संतुष्ट रहता है. कुछ लोगों को लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ सेक्स लाइफ का रोमांच कम हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं है. इसके विपरीत ‘प्रैक्टिस मेक्स मैन परफेक्ट’ की तर्ज पर कपल्स की सेक्स लाइफ बढ़ती उम्र के साथ और परफेक्ट होती जाती है.

क्या कहती है स्टडी?

30, 40 की बजाय 50 साल की उम्र में पुरुष अपनी सेक्स लाइफ को ज़्यादा एन्जॉय करते हैं, जिससे पार्टनर के साथ उनका रिश्ता भी मज़बूत बनता है.

थैंक्यू कहना भी है ज़रूरी

छोटा-सा शब्द थैंक्यू आपके रिश्ते के लिए बहुत अहम् साबित हो सकता है. ज़रा याद करिए, शादी के शुरुआती दिनों में पार्टनर द्वारा कोई काम करने पर जब आप उन्हें थैंक्यू कहते थे, तो कैसे उनके चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती थी. पति-पत्नी यदि एक-दूसरे की मदद की एवज़ में एक-दूसरे के प्रति आभार प्रकट करें, तो निश्‍चय ही ये उनके रिश्ते को सकारात्मक दिशा में ले जाता है और उनके बीच बॉन्डिंग गहरी होती है. अतः इस छोटे शब्द को छोटा समझने की भूल न करें और झट से हमसफ़र को थैंक्यू कहकर स्पेशल फील कराएं.

क्या कहती है स्टडी?

दिल से पार्टनर को कहा गया थैंक्यू शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशहाल और नई ऊर्जा से भर देता है. जब कपल्स के बीच किसी तरह का मनमुटाव होता है, तो ऐसे नकारात्मक माहौल में किसी छोटी-सी बात के लिए भी दिल से बोला गया थैंक्यू रिश्ते के लिए मरहम का काम करता है.

साथ हंसना भी है फ़ायदेमंद

हंसना भला कौन नहीं चाहता और हंसी से तनाव भी घटता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पार्टनर के साथ किसी बात/जोक पर हंसना आपके रिश्ते की सेहत के लिए भी अच्छा है? अतः अकेले में कोई जोक/मैसेज पढ़कर मुस्कुराने की बजाय उसे पार्टनर के साथ शेयर करें और दोनों दिल खोलकर हंसें. इससे सेहत और रिश्ता दोनों बने रहेंगे.

क्या कहती है स्टडी?

साथ हंसने वाले कपल्स का रिश्ता मधुर और मज़बूत होता है. अध्ययन के अनुसार, ऐसे कपल्स एक-दूसरे के प्रति ज़्यादा समर्पित और संतुष्ट रहते हैं. कपल्स का एक साथ हंसना उनके रिश्ते की गहराई और अपनेपन को बढ़ाने के लिए टॉनिक का काम करता है. अध्ययन से ये भी साबित हुआ है कि जो पुरुष पार्टनर अपनी हमसफ़र को हंसने के लिए प्रेरित करते हैं उनका पार्टनर से गहरा लगाव होता है.

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बाहुबली प्रभास और अनुष्का की सगाई दिसंबर में? (Prabhas And Anushka Shetty’s Engagement in December?)

Prabhas And Anushka Shetty's Engagement

Prabhas And Anushka Shetty's Engagement

बाहुबली और देव सेना की रियल सगाई जल्द ही हो सकती है. जी हां  न जाने कितने हज़ार शादी के रिश्ते को ना कह चुके प्रभास का दिल देवसेना यानी अनुष्का शेट्टी पर आ गया है. ख़बरें हैं कि प्रभास और अनुष्का इस साल के अंत तक यानी दिसंबर में सगाई कर सकते हैं.

Prabhas And Anushka Shetty's Engagement

दोनों की अफेयर की ख़बरें पहले भी कई बार आती रही हैं, लेकिन दोनों ने ही एक-दुसरे को अच्छा दोस्त बताया है. लेकिन बार फिर दोनों के बीच की नज़दीरकियां ख़बरों में हैं. दोनों की साथ में पहली फिल्म थी बिल्ला. इस फिल्म के बाद दोनों ने कई फिल्में साथ में की हैं, लेकिन बाहुबली- द कंक्लूज़न में दोनों की केमेस्ट्री को काफ़ी पसंद किया गया.

Prabhas And Anushka Shetty's Engagement

अब दोनों की सगाई की ख़बर में कितनी सच्चाई है, ये तो यही दोनों बता सकते हैं, लेकिन अगर ये सगाई होती है, तो इन दोनों के फैंस काफ़ी ख़ुश होंगे.

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Congratulations! स्पेन में अश्मित पटेल और महक चहल ने की सगाई, देखें पिक्चर्स (Ashmit Patel And Maheck Chahal Get Engaged in Spain)

स्पेन में अश्मित पटेल और महक चहल ने की सगाई, देखें पिक्चर्स

स्पेन में अश्मित पटेल और महक चहल ने की सगाई, देखें पिक्चर्स

अश्मित पटेल ने महक चहल से कर ली है सगाई. घुटनों पर बैठकर अश्मित ने महक को सगाई के लिए प्रपोज़ किया और महक ने हां कर दी. ये पिक्चर अश्मित ने ख़ुद शेयर की है इंस्टाग्राम पर. ये पावर कपल पिछले दो साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं.

दोनों स्पेन में साथ छुट्टियां बिता रहे हैं, जहां मारबेला के एक रेस्टोरेंट में उन्होंने महक को शादी के लिए प्रपोज़ किया और महक के हां के बाद रिंग पहनाकर सगाई कर ली.

ख़बरे हैं कि दोनों 6 महिनों में शादी भी कर सकते हैं.

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 श्रीदेवी की बर्थडे पार्टी में रेखा से लेकर ऐश्वर्या तक ख़ूबसूरती की महफिल

देखें दोनों की ज़बरदस्त केमेस्ट्री इन पिक्चर्स में.

पहला अफेयर: तन्हाई, अब सहेली है… (Pahla Affair: Tanhai Ab Saheli Hai…)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: तन्हाई, अब सहेली है… (Pahla Affair: Tanhai Ab Saheli Hai…)

भोपाल स्टेशन पर खड़ी मैं बार-बार घड़ी देख रही थी. मेरा गला सूख रहा था, दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी कि तभी धड़धड़ करती ट्रेन स्टेशन पर आ गई. मैं उत्सुकता से हर डिब्बे को ध्यान से देख रही थी कि किसी डिब्बे से मलय उतरेगा. मलय को देखे एक युग बीत चला था. उस समय मैं और मलय एडीबी कॉलेज से एमए (इतिहास) कर रहे थे. एक दिन परीक्षा के दौरान कॉलेज जाते व़क्त मेरी स्कूटी पंचर हो गई थी. मैं परेशान हो गई थी कि तभी मलय का स्कूटर मेरे पास आकर रुका और उसने मुझे लिफ्ट ऑफर की. न जाने क्यों उसका यह साथ मुझे बहुत पसंद आ रहा था. जब कभी उसकी पीठ से मेरा हाथ छू जाता, तो एक नशा-सा छाने लगता.

इसी मदहोशी के आलम में कॉलेज आ गया और मैंने ख़ुद को जैसे-तैसे संभालकर पेपर दिया. वापसी में मलय मेरी स्कूटी को गैराज तक ले गया. मैंने उसे धन्यवाद के रूप में चाय पिलाने की पेशकश की, तो उसने अपने घर चलने का आग्रह किया. उसके घर पहुंचकर सबसे मिली. उसकी छोटी बहन तीषा मुझे देखते ही बोली, “दादा ने बताया नहीं कभी कि तुम उसके साथ पढ़ती हो. भालोबाशी, तुम बहुत अच्छी हो.” तभी मलय की मम्मी भी आ गई थीं.

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चाय पीकर मैं घर चली आई. अगले पेपर की तैयारी करना दुश्‍वार हो गया था. ऐसा लग रहा था मलय अभी भी मेरे साथ है. यह था मेरे पहले प्यार का पहला एहसास. व़क्त के साथ-साथ यह एहसास और गहरा होता चला गया. एमए फाइनल की क्लासेस शुरू हो गई थीं कि तभी मलय के पिताजी का देहांत हो गया और उनकी जगह मलय को दिल्ली में नौकरी मिल गई. कुछ ही दिनों में वो दिल्ली शिफ्ट हो गया. इसके बाद मोबाइल पर बातें होती रहीं, लेकिन फिर अचानक मलय की तरफ़ से फोन और मैसेज आने बंद हो गए. लंबा अरसा गुज़र गया, मलय की कोई ख़बर नहीं मिली. मेरे घर पर मुझ पर भी शादी का दबाव डाला जा रहा था, लेकिन इसी बीच मुझे नौकरी मिल गई और मैंने शादी को और कुछ समय के लिए टाल दिया. तभी एक दिन अचानक तीषा का मैसेज आया कि वो लोग फलां तारीख़ को तमिलनाडु एक्सप्रेस से भोपाल आ रहे हैं.

“संतोष, कैसी हो?” की आवाज़ से मेरी विचारधारा टूटी, तो तीषा ने मुझे पहचान लिया. तीषा बड़ी हो चुकी थी. उसके माथे पर बड़ी बिंदी और मांग में सिंदूर था. मैं उसके गले लग गई और यहां-वहां देखकर मलय को ढूंढ़ने लगी. तीषा ने कहा, “संतोष, जिसे तुम ढूंढ़ रही हो, वो अब नहीं आएगा. मलय एक एक्सीडेंट में हम सबको छोड़कर चला गया. वो तुमसे बहुत प्यार करता था. मां भी उसकी शादी तुमसे करवाना चाहती थीं, लेकिन दादा यूं अचानक हम सबको छोड़कर चला गया और उसके जाने के कुछ समय बाद मां भी नहीं रहीं.” इतना कहकर वो बुरी तरह रो पड़ी, फिर संभलकर बोली, “तुमने शादी नहीं की अब तक?” “मलय के बिना मैं कैसे शादी कर सकती थी…” इतना कहकर मैं स्टेशन से बाहर निकल आई. मुझे इस बात का संतोष था कि मलय मुझे भूला नहीं था. उसके दिल में मैंने जगह बना ली थी. आज पैंतालिस साल की हो गई हूं, मलय की याद और तन्हाई को सहेली बनाकर जीने की आदत पड़ गई है.

– संतोष श्रीवास्तव

पहले प्यार के मीठे एहसास से भीगे ऐसे ही अफेयर्स के लिए यहां क्लिक करें: Pahla Affair

क्यों नहीं निभ रही शादियां? (Why Marriages Are Breaking?)

शादि

शादि

सात जन्मों का बंधन कही जाने वाली शादी की उम्र दिन-प्रति-दिन घटती जा रही है. अग्नि को साक्षी मानकर मरते दम तक साथ निभाने की कसमें खाने वाले कपल्स अब कुछ साल भी साथ नहीं रह पाते. आज के मॉडर्न युग में जिस तेज़ी से तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, उससे शादी के अस्तित्व पर ही संकट मंडराता नज़र आ रहा है. आख़िर युवाओं के लिए शादी निभाना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

कमज़ोर होते रिश्ते
गांवों के मुक़ाबले महानगरों में तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. एक सर्वे के अनुसार, 1960 में सालभर में जहां तलाक़ के एक या दो मामले ही आते थे, वहीं 1990 तक ये आंकड़ा 1000 को पार कर गया. 2005 में फैमिली कोर्ट में तलाक़ के 7 हज़ार से भी ज़्यादा मामले दर्ज़ थे. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल तलाक़ के 8-9 हज़ार केस दर्ज़ हो रहे हैं, वहीं मुंबई में ये तादाद क़रीब 5 हज़ार है. जीवनसाथी डॉट कॉम के एक सर्वे के मुताबिक, तलाक़ लेने वालों में 25-35 साल के कपल्स की संख्या ज़्यादा है. मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद के मुताबिक, “आजकल के युवा शादी को कमिटमेंट की बजाय कन्वीनियंट (सुविधाजनक) रिलेशनशिप मानते हैं. जब तक सहजता से रिश्ता चलता है वो चलाते हैं और जब उन्हें असुविधा महसूस होने लगती है, तो बिना किसी गिल्ट के झट से रिश्ता तोड़ देते हैं.” कुछ जानकार टूटते रिश्तों के लिए शहरों में तलाक़शुदा महिलाओं को मिल रही स्वीकार्यता को भी ज़िम्मेदार मानते हैं. साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी कहती हैं, “तलाक़ को अब लोग कलंक नहीं मानते. पहले तलाक़शुदा महिलाओं को घर तोड़ने वाली कहकर आस-पड़ोस वाले और नाते-रिश्तेदार ताने मारते थे. इतना ही नहीं, माता-पिता भी तलाक़शुदा बेटी को अपनाने से कतराते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. तलाक़शुदा महिलाएं अब समाज से नज़रें चुराकर नहीं, बल्कि गर्व से सिर उठाकर जी रही हैं.”

आर्थिक स्वतंत्रता
डॉ. आनंद का मानना है, “महिलाओं की आत्मनिर्भरता से भी उनके रिश्तों की लय बिगड़ गई है. आर्थिक रूप से मज़बूत होने की वजह से उन्हें लगता है कि जब वो अकेले सब कुछ मैनेज कर सकती हैं, तो घुटन भरे रिश्ते को ढोने की भला क्या ज़रूरत है? दिलचस्प बात ये है कि पुरुषों को कमाऊ पत्नी तो चाहिए, लेकिन उसे वे ख़ुद से ऊपर उठता नहीं देख सकते. पत्नी के सामने अपना रुतबा कम होता देख पुरुषों के अहं को ठेस पहुंचती है और यही ठेस उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में दरार डाल देती है.” कुछ ऐसी ही राय साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी की भी है. उनके मुताबिक, “आजकल महिलाएं इंडिपेंडेंट हो गई हैं, आर्थिक रूप से वो किसी पर निर्भर नहीं हैं. ऐसे में पति से अलग होने का ़फैसला करने पर उन्हें इस बात का डर नहीं रहता कि अलग होने के बाद उनका ख़र्च कैसे चलेगा? बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा या समाज क्या कहेगा?” पहले ज़्यादातर महिलाएं मजबूरी में खोखले हो चुके रिश्तों का बोझ भी ढोती रहती थीं. शहरों में तलाक़ के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण डबल इनकम नो किड्स का बढ़ता चलन भी है. आजकल के ज़्यादातर दंपति करियर की ख़ातिर अकेले रहना पसंद करते हैं. ऐसे में तलाक़ की स्थिति में उन्हें ये डर भी नहीं रहता कि उनके अलग होने पर बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

शादि

साथ व़क्त न बिताना
बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए व़क्त ही नहीं रहता. कभी-कभी तो हफ्तों-महीनों तक वे एक-दूसरे से सुकून से बात तक नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए एक-दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनमें भावनात्मक दूरियां बढ़ने लगती हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. औरतों से बहुत ज़्यादा उम्मीद की जाती है. पहले वो चुपचाप सब कुछ सह लेती थीं, लेकिन अब वो हिम्मत करके बोल रही हैं. जब बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है, तो वो रिश्ता ख़त्म करने में ही भलाई समझती हैं. वैसे भी जिस रिश्ते में तिल-तिलकर रोज़ मरना हो उसे तोड़ देना ही बेहतर है.

कपल्स ख़ुद की आइडेंटिटी को ज़्यादा महत्व देने लगे हैं. रिश्ता टूटने के लिए कोई एक ज़िम्मेदार नहीं होता, ताली दोनों हाथों से बजती है. हो सकता है, एक 70 फ़ीसदी ज़िम्मेदार हो तो दूसरा 30 फ़ीसदी ही हो, लेकिन ग़लती दोनों की होती है.

– मीता दोषी, साइकोलॉजिस्ट

समाज व परिवार का सीमित दायरा
डॉ. आनंद कहते हैं, “आजकल किसी भी कपल की ज़िंदगी में समाज और परिवार का रोल सीमित हो गया है, जिससे उनके बीच की छोटी-मोटी अनबन या झगड़ों को सुलझाने वाला कोई नहीं रहता. मनमुटाव की स्थिति में कपल्स अपना धैर्य खो देते हैं और तुरंत अलग होने का ़फैसला कर लेते हैं. आजकल के युवा बेस्ट पार्टनर चाहते हैं, जो हर चीज़ में परफेक्ट हो, लेकिन वो पार्टनर की मदद कर उसे किसी काम में परफेक्ट बनाने की ज़हमत नहीं उठाते. रिश्ते टूटने की एक बड़ी वजह धैर्य की कमी है, जिससे कुछ समय बाद कपल्स का एक-दूसरे के प्रति प्यार व आकर्षण कम हो जाता है, यही वजह है कि लव मैरिज करने वाले भी आसानी से तलाक़ ले रहे हैं.”

प्यार व विश्‍वास में कमी
आई लव यू बोल देना ही इस बात का सबूत नहीं कि पति-पत्नी के प्यार की डोर मज़बूत है. महानगरों में जहां वर्किंग कपल्स की तादाद दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, उनके बीच प्यार व विश्‍वास उतना ही कम होता जा रहा है. घर लेट से आने या फोन न उठाने पर पति-पत्नी दोनों को ही लगने लगता है कि पार्टनर का किसी और से संबंध है इसलिए वो उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है. फिर शक़ का यही बीज उनके रिश्तों को खोखला कर देता है. कई कपल्स तो अपने साथी की हर हरकत पर नज़र रखने के लिए उनके पीछे जासूस लगाने से भी नहीं हिचकिचाते. विश्‍वास ही शादी की बुनियाद है, अगर बुनियाद ही कमज़ोर हो जाए, तो शादी टिक पाना मुश्किल हो जाता है.

पहले जहां पति-पत्नी का रोल तय होता था, वहीं अब महिलाओं की भूमिका बदल रही है. उन्हें पहले से ज़्यादा अधिकार प्राप्त हैं और ये बात पुरुषों को हज़म नहीं हो रही. इसके अलावा आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक (सेक्सुअल) पहलू भी रिश्ता टूटने के लिए ज़िम्मेदार है. कपल्स को ढेर सारी उम्मीदें रखने की बजाय एक-दूसरे के अलग व्यक्तित्व को स्वीकारना चाहिए. शादी निभाने के लिए भव्य शादी समारोह की नहीं,
बल्कि समझदारी की ज़रूरत है.

– चित्रा सावंत, मीडिया प्रोफेशनल

बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं
डॉ. माधुरी सिंह के मुताबिक, “महिलाएं शादी निभाने की कोशिश करती हैं. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो वर्किंग वुमन के प्रति नज़रिए में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. आज भी पुरुष ऐसी बीवी चाहते हैं, जो अच्छी दिखती हो, अच्छा कमाती हो और जो उनके घर-परिवार को भी अच्छी तरह संभाल सके, यानी पत्नी उनकी हर कसौटी पर खरी उतरे, जो संभव नहीं है.” आजकल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को भी अपने साथी से बहुत-सी उम्मीदें रहती हैं, जैसे- पति अच्छा दिखे, अच्छा कमाए, उसकी हर बात सुने, उसके माता-पिता का ज़्यादा ध्यान रखे आदि. साइकोलॉजिस्ट दोषी कहती हैं, “आजकल कपल्स की शादी से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं. एक-दूसरे से की गई ये अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होतीं तो पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं और धीरे-धीरे ये दूरियां इस क़दर बढ़ जाती हैं कि उनके रास्ते ही अलग हो जाते हैं.”

शादि

दोनों ज़िम्मेदार
तलाक़ के लिए हर बार पति ही ज़िम्मेदार हो, ये ज़रूरी नहीं. 3 साल पहले लव मैरिज करने वाले मुंबई के दिनेश इन दिनों अकेले हैं. दिनेश कहते हैं, “मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं. शादी के बाद मेरी पत्नी को बेवजह न जाने क्यों मेरे पैरेंट्स से परेशानी होने लगी. वो चाहती थी कि मैं अपने मां-बाप को छोड़कर उसके साथ दूसरे फ्लैट में रहूं, जो संभव नहीं था. मैं अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता, ये कहने पर वो मुझे ही छोड़कर चली गई और तलाक़ का नोटिस भेज दिया.”

तलाक क़ानून
हमारे देश में तलाक़ लेना आसान नहीं है. इसके लिए लंबी क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है, जिसमें सालों लग जाते हैं. हालांकि पिछले साल कैबिनेट ने हिंदू मैरिज एक्ट में कुछ संशोधन करके इसे आसान बनाने की कोशिश की है यानी अब पति-पत्नी यदि स्वेच्छा से अलग होना चाहें, तो ऐसे मामलों को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा. अदालत को ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाना होगा. पहले तलाक़ की अर्ज़ी देने के बाद पति-पत्नी को सुलह के लिए 6 महीने की समय सीमा दी जाती थी, लेकिन अब ये बाध्यता ख़त्म हो चुकी है. फिर भी अदालत को सही लगे, तो वो कपल्स को सुलह के लिए कुछ व़क्त दे सकती है.


– कंचन सिंह

Royal Wedding! नील और रुक्मिणी हुए एक-दूसरेे के, देखें दोनों की शादी की तस्वीरें (Pictures: Neil Nitin Mukesh, Rukmini Sahay are married now)

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neilनील नितिन मुकेश और रुक्मिणी सहाय शादी के बंधन में बंध गए. इनकी शादी का गवाह बना उदयपुर. इस रॉयल वेडिंग में दूल्हा-दुल्हन को आशिर्वाद देने के लिए उनका पूरा परिवार मौजूद था. रुक्मिणी और नील दोनों ही बेहद अच्छे लग रहे थे. रुक्मिणी ने लाल और ऑरेंज रंग के कॉम्बिनेशन का दुल्हन का जोड़ा पहना था, वहीं नील ने क्रीम और मरून कॉम्बिनेशन की शेरवानी पहली थी. देखे तस्वीरें.

17 फरवरी को मुंबई में नील और रुक्मिणी की शादी का एक ग्रै़ड रिसेप्शन रखा जाएगा.

– प्रियंका सिंह

Very Classy! नील और रुक्मिणी का प्री-वेडिंग फोटोशूट (Neil Nitin Mukesh and Rukmini’s pre-wedding shoot)

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नील नितिन मुकेश और रुक्मिणी सहाय 9 फरवरी को उदयपुर में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. दोनों ने पिछले साल ही सगाई कर ली थी. शादी नज़दीक हैं और उससे पहले दोनों ने करवाया है एक प्यारा-सा प्री-वेडिंग शूट. ये फोटोशूट काफ़ी क्लासी है. इस ब्लैक एंड व्हाइट फोटोशूट में नील और रुक्मिणी काफ़ी क्यूट लग रहे हैं. फोटोशूट के दौरान कभी आंखों में आंखें डाले, तो कभी मस्ती के मूड में दिखे दोनों. देखें ये पिक्चर्स.

फोटो सौजन्य: द वेडिंग स्टोरी

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Tag your #MineForever ❤️?

A photo posted by Neil Nitin Mukesh (@neilnitinmukesh) on

– प्रियंका सिंह

Strong रिलेशनशिप के लिए Effective टेक्नीक्स(Effective techniques for strong relationship)

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कहीं चाहतें हैं, कहीं राहतें हैं… कहीं दर्द है, तो कहीं बंदिशें… दवा भी हैं ये और दुआ भी… मीठी बारिश भी हैं और ठंडी हवा भी… दरअसल रिश्तों के ताने-बानों में हर वो एहसास शामिल होते हैं, जो हमारे जीने का मक़सद बनते हैं और हमें आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं. ऐसे में तेज़ी से किसी अनजानी व अनदेखी दिशा में भाग रहे हम सभी के लिए बेहद ज़रूरी है कि थोड़ा ठहरें और अपने रिश्तों को जीएं, ताकि प्यार और दुलार की ऑयलिंग से उनकी सर्विसिंग होती रहे.

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क्यों ज़रूरी है relationship टेक्नीक्स?

– हर रिश्ता, चाहे बच्चों और पैरेंट्स के बीच का हो, भाई-बहन का हो, पति-पत्नी या फिर अन्य दोस्त व रिश्तेदार हों, सभी हमसे समय और अटेंशन की डिमांड करते हैं, जो आज की तारीख़ में हमारे पास है ही नहीं.
– वक़्त की कमी के चलते हम अपने रिश्तों को पूरी तरह से जी नहीं पाते. छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हम महरूम रह जाते हैं और साथ ही अपने साथ जुड़े लोगों को भी उनसे दूर रखते हैं. ऐसे में रिश्तों में शिकायतें पैदा होनी शुरू हो जाती हैं.
– हर वक़्त अगर हम यही रोना रोते रहेंगे कि समय नहीं मिलता, तो एक दिन हमारे रिश्तों के पास हमारे लिए समय नहीं होगा.
– चाहे हम कितने ही क़ामयाब हो जाएं या कितना ही ऊंचा मुक़ाम हासिल कर लें, अपनों के साथ की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है, वरना जीवन में एकाकीपन हमें निराशा की गर्त में धकेल सकता है. यदि समय रहते रिश्तों को सहेजने की ओर हम ध्यान नहीं देंगे, तो जब हमें उन रिश्तों की ज़रूरत होगी, तो शायद हमारे आस-पास कोई नहीं होगा.
– आपसी मेलजोल और एक साथ समय बिताने से न स़िर्फ रिश्ते मज़बूत होते हैं, बल्कि हमारा हौसला और आत्मविश्‍वास भी बना रहता है. हम अपने अंदर सकारात्मकता का अनुभव करते हैं.
– आपको अपनों की परवाह है, उनकी ज़रूरत है, उन्हें इस बात का एहसास कराने के लिए भी रिश्तों की सर्विसिंग ज़रूरी है.
कैसे करें रिश्तों की सर्विसिंग?
– कम्युनिकेशन हर रिश्ते की नींव होती है. बहुत ज़रूरी है कि आपसी बातचीत और अपनों के साथ कुछ बातें शेयर करने का वक़्त ज़रूर निकाला जाए.
– ज़रूरी है शेयरिंग और केयरिंग भी. अपने जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी जब हम अपनों से शेयर करते हैं, तो अपनेपन का एहसास और बढ़ जाता है. चाहे हमारे दोस्त हों या रिश्तेदार, उन्हें यह महसूस होता है कि हमारे जीवन में उनका कितना महत्व है.
– इसी तरह से केयरिंग भी ज़रूरी है. ऑफिस में व्यस्त दिनचर्या के बीच भी समय निकालकर घर पर फोन करके हालचाल पूछना एक अच्छा आइडिया हो सकता है.
– अगर घर में कोई बीमार है, तो एक-दो बार हालचाल पूछने पर उन्हें यह एहसास होगा कि आपको सचमुच उनकी
परवाह है.
– विशेष अवसरों पर समय निकालकर फैमिली गेट-टुगेदर या पिकनिक वगैरह आयोजित करते रहें.
– अगर कोई ख़ास अवसर है, तो गिफ्ट ले जाना न भूलें.
– सबकी सालगिरह की तारीख़ रिमाइंडर पर सेट कर लें, ताकि आप अपनों के उन ख़ास दिनों को भूल न पाएं और आपकी शुभकामनाएं उनकी ख़ुशी को और बढ़ा दें.
– जिनसे आप प्यार करते हैं, उन पर विश्‍वास करना सीखें. विश्‍वास पर ही हर रिश्ते की गहराई टिकी होती है. अगर कोई आपसे यह उम्मीद रखता है कि आप उन्हें समझें, उन्हें हर बार सही-ग़लत के तराज़ू में तौलकर न देखें, तो आप उनका विश्‍वास न तोड़ें.
– रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रयास लगातार करते रहें.
– हर किसी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें. यह सच है कि हर रिश्ते से हमारी कई उम्मीदें जुड़ी होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी ध्यान रखें कि आपकी उम्मीदें कितनी सही हैं और सामनेवाला उन्हें किन मजबूरियों के चलते पूरी नहीं कर पा रहा. अगर आप अपनों से यह आशा करते हैं कि वो आपकी उम्मीदों पर खरे उतरें, तो ख़ुद से भी सवाल पूछें कि क्या आप भी उनकी सारी उम्मीदों पर उतने ही खरे उतरते हैं?
– सरप्राइज़ दें. कभी-कभी ऑफिस से जल्दी आकर फैमिली के साथ वक़्त बिताएं या फिर मूवी या डिनर प्लान करके सबको चौंका दें.
– एक रिश्ते को निभाने में ऐसा न हो कि दूसरे रिश्तों को नज़रअंदाज़ कर दें. ज़िंदगी में हर रिश्ते की अपनी ख़ास जगह और अहमियत होती है. इस बात को समझें और हर रिश्ते में संतुलन बनाए रखें.
– शादी के बाद दोस्तों को भूल न जाएं. कुछ लोग शादी के बाद स़िर्फ अपनी फैमिली लाइफ में बिज़ी हो जाते हैं, तो कुछ पहले की ही तरह यार-दोस्तों की महफ़िल का मज़ा लेकर फैमिली को भूल जाते हैं. ये दोनों ही रवैया ग़लत है. संतुलन बनाए रखें. याद रखें, दोस्त भी ज़रूरी हैं.
– तारीफ़ करने से पीछे न हटें. किसी की प्रशंसा में कहे दो शब्द भी आपके रिश्ते को नई ऊर्जा से भर सकते हैं.
– रिश्तों को ईगो की भेंट न चढ़ने दें. अपने अहम् को अपने रिश्तों के बीच में न आने दें, वरना रिश्तों के सच्चे सुख से वंचित रह जाएंगे.
– अगर जाने-अनजाने आपने किसी को आहत कर दिया हो, तो अपनी ग़लती स्वीकारें और सॉरी कहकर मनमुटाव दूर कर लें.
– घर-परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि कल को पैसों और संपत्ति को लेकर आपस में कोई विवाद न हो. एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि पैसे कमाना फिर भी आसान है, लेकिन प्यार, अपनापन और रिश्ते कमाना उतना ही मुश्किल, इसलिए रिश्तों के महत्व को समझें.

इन बातों का भी ध्यान रखें

– अपने रिश्तों की ज़रूरतों को पहचानें.
– फैंटेसाइज़ करें यानी कल्पना में जीने का मज़ा ज़रूर लें, लेकिन हक़ीक़त की ज़मीं को ध्यान में रखकर.
– अपने डरोें से भागें नहीं, बल्कि अपनों के साथ उन्हें शेयर करें.
– बिना बोले भी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. कई बार बहुत कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, ऐसे में सामनेवाले की भावनाओं को समझने की क्षमता ही आपके रिश्तों की मज़बूती दर्शाती है.
– ज़िम्मेदारियां लेने से घबराएं नहीं.
– दोषारोपण से बचें. बेवजह के वाद-विवाद और एक-दूसरे को दोष देने की बजाय अपने ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें और बातों या बहस को यह सोचकर हल्के में लें कि ये रिश्तों का ही हिस्सा है.

– गीता शर्मा

पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

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पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

बरखा की इन बूंदों में अपने महबूब को ढूंढ़ती मेरी नज़रें… उसकी प्यास, उसकी आस और उसकी बांहों में अपने वजूद का एहसास… इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं निगाहों में… बादल बन उड़ने लगता है दिल आसमान में… उस अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश में, जिसके सपने हम दोनों ने मिलकर बुने थे… पर जब आंख खुली, तो कांच के खिलौनों की तरह सब टूट गए… आज फिर वही बरसात है… महबूब की याद है… वही अधूरी प्यास और वही अधूरी आस भी…

बीते दिन जब भी याद आते हैं, स़िर्फ आखों को ही नम नहीं करते, बल्कि हर एहसास को भिगो जाते हैं. तुम्हारी आंखों की वो शरारत, बातों का अंदाज़, वो बेपरवाह-सा जीने की अदा जब भी याद आती है, मेरे दिल की धड़कनों को आज भी तेज़ कर देती है. मुहब्बत का मीठा एहसास क्या होता है, तुमसे मिलने के बाद ही तो समझ पाई थी मैं, लेकिन मुहब्बत में इतना दर्द भी होता है यह भी तुमसे ही सीखूंगी सोचा न था. कहते हैं प्यार के रिश्ते में अपने साये तक एक हो जाते हैं, ऐसे में किसी ग़ैर के लिए जगह ही कहां बचती है. लेकिन हमारे बीच कब किसी और ने अपनी जगह बना ली पता ही नहीं चला.

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हम स़िर्फ प्रेमी ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त भी थे. कहीं कोई पर्दा न था, कोई तकल्लुफ़ नहीं. दो नहीं, एक ही तो थे हम. ज़िंदगी बेहद हसीं लगती थी तब, हर लम्हा ख़ास था. आज़ाद पंछी की तरह खुला छोड़ दिया था मैंने तुम्हें, क्योंकि मेरा मानना था कि प्यार में बंधन नहीं होना चाहिए, प्यार तो आज़ाद होता है… लेकिन कब, क्यों और कैसे तुम्हारे दिल में किसी और के लिए भी जगह बनती चली गई इसका एहसास जब होने लगा, तब जैसे हर सपना धीरे-धीरे टूटता चला गया…

जहां तक मुझे पता था तुम्हें मेरी वो सहेली ज़्यादा पसंद नहीं थी, लेकिन न जाने कब वो तुम्हारे इतने क़रीब आ गई कि तुम छिप-छिपकर उससे बातें-मुलाक़ातें करने लगे. जब मुझे तुमसे दूरी का एहसास होने लगा, तुम में बदलाव नज़र आने लगा तो अपने प्यार का वास्ता देकर यक़ीन दिलाते रहे कि तुम स़िर्फ मुझसे प्यार करते हो. मैं भी बार-बार दिल को समझाकर तुम पर यक़ीन करती गई और हर बार मेरा यक़ीन टूटा…

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आख़िर इस कशमकश में कब तक ज़िंदा रह पाता हमारा मासूम प्यार और कोमल रिश्ता. सिसक-सिसककर दम तोड़ दिया आख़िर इस
रिश्ते ने… लेकिन कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं… इतने सालों बाद तुमसे फिर एक मोड़ पर जब टकराई, तो एहसास हुआ कि तुम सही थे, सच्चे थे, तुम्हारा प्यार कोई फरेब नहीं था, वरना अब तक तुम उसके हो चुके होते, लेकिन तुम्हेें तो स़िर्फ मेरा इंतज़ार था… अगर कुछ ग़लत था तो स़िर्फ वो हालात और वो लोग, जिनसे हमारे बीच दूरी पैदा हुई.

लेकिन अब जब व़क़्त ने सारे घाव भर दिए हैं, तो इन फ़ासलों को भी हम हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दें, ताकि फिर कोई तीसरा हमारे बीच न आने पाए… अब किसी ग़लतफ़हमी की कोई गुंजाइश न बचे… मुझे भी शायद इसी मोड़ का इंतज़ार था, इसलिए तुम पर तमाम अविश्‍वासों के बावजूद मैं भी तो किसी और की न हो पाई.

तुम ही मेरी पहली मुहब्बत हो, तुम ही मेरा यक़ीन. तुम्हें ही तो तलाशती रहीं हर पल ये नज़रें, तुम नहीं तो मैं नहीं. तुम अक्सर कहा करते थे, प्यार विश्‍वास का ही दूसरा नाम है. तुमने मुझे सिखा ही दिया आख़िर इस विश्‍वास के साथ जीना… अब मुझे यक़ीन है कि तुम मेरे हो, स़िर्फ मेरे!

– योगिनी 

टॉप 4 मोस्ट रोमांटिक हनीमून डेस्टिनेशन (top 4 most romantic honeymoon destination)

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शादियों का सीज़न चल रहा है. ऐसे में लाज़मी है कि अपनी स्वीटहार्ट को आप किसी स्पेशल जगह ले जाना चाहते हों. आप सोच रहे होंगे कि आपका हनीमून डेस्टिनेशन कुछ ऐसा हो कि ताउम्र आपकी पार्टनर को याद रहे. तो चलिए, हम बताते हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में, जो आपके हनीमून को बना देंगे बेहद रोमांटिक और ख़ास.

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उदयपुर
सर्दी की सुहानी धूप के साथ उदयपुर का नज़ारा और भी आकर्षक हो जाता है. उदयपुर घूमने का सही मौसम यही है. ख़ूबसूरत महल और झीलों के इस शहर का नज़ारा तब और ख़ास हो जाता है, जब आपके हाथों में पार्टनर का हाथ हो.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर आदि से आप सीधे उदयपुर के लिए फ्लाइट ले सकते हैं. इसके साथ ही देश के दूसरे शहरों से ट्रेन की सुविधा भी है.

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क्या देखें?
झीलों और महलों के इस शहर में ऐसी बहुत-सी जगहें हैं जिन्हें आप अपनी यादों के एल्बम में कैद कर सकते हैं.
दुनिया के सबसे रोमांटिक पैलेस में से एक उदयपुर लेक पैलेस की सैर करना न भूलें.
पार्टनर के साथ गुलाब बाग में दो पल ज़रूरी बैठें.
पिचोला झील के किनारे बना उदयपुर सिटी पैलेस भागदौड़ से दूर आपको सुख और चैन का एहसास दिलाएगा.

कहां से करें शापिंग?
इतने सालों बाद पार्टनर के साथ इस रोमांटिक जगह पर घूमने का मज़ा शॉपिंक के साथ दुगुना हो जाता है. आप इन जगहों से शॉपिंग कर सकते हैं.
उदयपुर का क्लॉक मार्केट गोल्ड, सिल्वर, कॉपर आदि से बनी आकर्षक वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है.
एम्ब्रॉयडरी, टेक्स्टाइल आदि वस्तुएं ख़रीदने के लिए लेक पैलेस रोड पर शॉपिंग करना न भूलें.
हैंडीक्राफ्ट्स के लिए जगदीश टेम्पल स्ट्रीट मार्केट ज़रूर जाएं.
कपड़ों की ख़रीददारी के लिए आप घंटा घर मार्केट जा सकते हैं.

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औली
समुद्र से 9 हज़ार फीट की उंचाई पर बसा औली उत्तराखंड का बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल है. कुछ लोग सालभर इंतज़ार करने के बाद ठंड के मौसम में औली घूमने का प्लान बनाते हैं. आप भी अगर प्रकृति की गोद में बर्फ की चादर पर बैठकर दो पल बिताना चाहते हैं, तो औली आपके लिए बेस्ट हनीमून डेस्टीनेशन है. पूरी दुनिया में औली स्कीइंग के लिए मशहूर है.

कैसे जाएं?
औली जाने के लिए सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांटरोड है. इसके अलावा आप ट्रेन से भी औली जा सकते हैं. हरिद्वार सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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क्या देखें?
त्रिशूल पीक यहां के आकर्षण का केंद्र है.
औली स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है. अल्पाइन स्कीइंग, नार्डिक स्कीइंग और टेलीमार्क स्कीइंग का आनंद लेना न भूलें.
एशिया की सबसे लंबी केबल कार औली में ही है. बर्फिले मौसम में इसका आनंद लेना न भूलें.
नंदा देवी नेशनल पार्क ज़रूर देखें.
जोशीमठ ट्रैकिंग भी आकर्षण का केंद्र है.

कहां से करें शॉपिंग?
औली से लौटते व़क्त आप जोशीमठ के लोकल बाज़ार से वुलन कैप्स, ब्लैंकेट्स, शॉल आदि ख़रीद सकते हैं.

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हवाई
दुनिया के बड़े और आकर्षक हनीमून डेस्टीनेशन में से हवाई एक है. यह जगह कपल्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं. ट्रॉपिकल बीचेस, जंगल, सर्फिंग, लक्ज़ीरियस होटल आदि चीज़ें हवाई को और जगहों से अलग करती हैं.

कैसे जाएं?
हवाई जाने के लिए आप दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंग्लोर आदि जगहों से फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं.

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क्या देखें?
हवाई का सबसे व्यस्त आईलैंड ओआहू घूमने के लिए बहुत ही बेहतरीन जगह है.
पार्टनर के साथ माउई जाना न भूलें. पूरी तरह से प्रकृति की गोद में समाई माउई में जगह-जगह वाटरफॉल और हरियाली इसके आकर्षण का केंद्र है.
वॉलकेनो लेशनल पार्क देखने के लिए बिग आईलैंड ज़रूर जाएं.
काउआई में हेलीकॉप्टर विज़िट करना न भूलें.
हवाई के बीचेज़ दुनिया के रोमांटिक बीचेज़ में माने जाते हैं. ऐसे में बीचेज़ पर घूमने ज़रूर जाएं.

कहां से शॉपिंग करें?
हवाई के वाईकीकी इंटरनेशनल मारकेट में ख़रीददारी करने का चांस मिस न करें. यहां की लोकल चीज़ों की शॉपिंग आपके लिए बेहतर होगी. हैंडीक्राफ्ट से लेकर फाइन आर्ट तक हर तरह की वस्तुएं यहां आपको मिलेंगी.

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पेरिस
फ्रांस की राजधानी पेरिस किसी स्वप्न लोक की तरह है. शहर के बीच में बहती सोन नदी और उसके किनारे पर खड़ा एफिल टावर दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. पेरिस को फैशन की राजधानी माना जाता है. फैशन की शुरुआत यहीं से होती है.

कैसे जाएं?
दिल्ली, मुंबई, बैंग्लोर, चेन्नई आदि बड़े शहरों से फ्लाइट की सीधे सुविधा है.

क्या देखें?
एफिल टावर की झलक के बिना पेरिस टूर की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
सैकड़ों तरह के फूल और पौधों की सुंदरता वाला ट्यूलेरी गार्डन घूमने ज़रूर जाएं.
दुनिया का सबसे बड़ा चित्र संग्रहालय लूब्रु देखने ज़रूर जाएं.

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कहां से शॉपिंग करें?
आर्टिस्टिक ज्वेलरी और डेकोर आइटम्स की शॉपिंग के लिए बेस्टील आर्ट मार्केट प्रसिद्ध है.
डिज़ाइनर कपड़ों और एक्सेसरीज़ के लिए कैनल सेंट मार्टीन मार्केट जाएं.
कुछ एंटीक और सेकंडहैंड चीज़ों की ख़रीददारी के लिए आप फ्ली मार्केट जा सकते हैं.

– श्वेता सिंह 

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