Tag Archives: Relationship

5 तरह के होते हैं पुरुषः जानें उनकी पर्सनैलिटी की रोचक बातें(5 types of Men and Interesting facts about their Personality)

Capture

अगर रिसर्च की मानें तो 5 तरह के पुरुष होते हैं और उनकी टाइप के अनुसार ही उनकी पर्सनैलिटी और दूसरी बातें पता चलती हैं. कुछ बातें आप भी जानें अपने जीवन में आनेवाले पुरुष के बारें में.

Capture
1. चार्मर (आकर्षक)

ये पुरुष हैंडसम, स्टाइलिश और सबको अपनी ओर आकर्षित करनेवाले होते हैं. अपनी बातों और अदाओं से सबको रिझाना इनको अच्छा लगता है. इनके साथ रहने पर ऐसा महसूस होता है, जैसे आप ही उनके लिए सब कुछ हैं. आपसे ज़रूरी और कोई नहीं है इनके लिए. रोमांस की सारी कल्पनाओं और सपनों पर ये चार्मर पूरी तरह से खरे उतरते हैं. प्रेमिका को ख़ुश करने और रखने की सारी कलाएं इनको आती हैं. समय-समय पर उपहार देना इनकी ख़ासियत होती है.
आपकी पर्सनैलिटी
यदि आप मोहक व सेक्सी हैं, आत्मविश्‍वास आपमें कूट कूट कर भरा है, धैर्यवान हैं, किसी भी समस्या को समझदारी से हल कर लेती हैं तो आपके लिए चार्मर पुरुष एकदम उपयुक्त हैं.
सीक्रेट पहलू
इनकी पर्सनैलिटी और अदाओं से लड़कियां आसानी से इनकी ओर आकर्षित हो जाती हैं और इनसे प्यार करने लगती हैं. ऐसे पुरुष आपकी सहेलियों व सहयोगियों को भी इंप्रेस करने में लगे रहते हैं, जो आपको बुरा लग सकता है. ये शादी के बंधन में बंधना नहीं चाहते, परंतु लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप पर विश्‍वास रखते हैं. लड़कियां भी ऐसे पुरुषों को लाइफ़ पार्टनर के रूप में गंभीरता से नहीं लेतीं. इस बात का इन्हें गहरा दुख रहता है.

2. गीक(पढ़ाकू)

ऐसे पुरुष शांत स्वभाव और ख़ुशमिज़ाज होते हैं, जो वातावरण को रोचक बना देते हैं. ये विचारवान होते हैं. हर बात का सही विश्‍लेषण करनेवाला दिमाग़ एवं बुद्धि दोनों का अनोखा संगम इनमें होता है. ये हमेशा उचित सलाह देते हैं. इनका सारा ध्यान पढ़ने, ज्ञान बटोरने और सीखने में लगा होता है. ये अपने जीवनसाथी को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं.
आपकी पर्सनैलिटी
यदि आप पढ़ने में ठीकठाक हैं, सेंसिटिव स्वभाव की हैं, आपको ़ज़्यादा भीड़भाड़ पसंद नहीं है, अपनी शामें आप घर पर बिताना पसंद करती हैं, तो ऐसी पर्सनैलिटी के लिए गीक पऱफेक्ट चॉइस है.
सीक्रेट पहलू
आपके दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दिन व तारीख़ें इन्हें याद नहीं रहतीं. इसलिए जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर बधाई या तोहफ़ा ना मिले, तो नाराज़ न हों. ये कई तरीक़ों से आपको ख़ुश करना चाहेंगे, पर हर बार कुछ और ही कर बैठेंगे, क्योंकि ये सब करना इन्हें आता ही नहीं. बाहर घूमना या डिनर पर जाना इन्हें समय का दुरुपयोग लगता है. लड़कियां इनकी बुद्धिमानी देखकर इनकी ओर आकर्षित हो जाती हैं.

3. ड्रीमर

इनका सपना होता है पऱफेक्ट लाइफ़, पऱफेक्ट जॉब, पऱफेक्ट पत्नी व घर. परंतु वास्तविक जीवन में इनका यह सपना पूरा नहीं होता, क्योंकि हर चीज़ में पऱफेक्शन संभव नहीं है. ये बड़े ही नम्र, सीधे, शांतिप्रिय, दृढ़ और मेहनती होते हैं. ये कभी भी आक्रामक नहीं होते. गृहस्थ जीवन में ये शिष्ट, सभ्य एवं ज़िम्मेदार पति और पिता की भूमिका अदा करते हैं. ये आपकी आकांक्षाओं व इच्छाओं को पूरा करने में हर तरह से मदद करते हैं.

आपकी पर्सनैलिटी
यदि आप स्थिर व शांत वैवाहिक जीवन चाहती हैं, साथ ही ऐसा पति चाहती हैं, जो हमेशा बड़े प्यार व ज़िम्मेदारी से आपकी देखभाल करे तो ड्रीमर को ही चुनिए. यदि आप एडवेंचर पसंद करती हैं,
ब्रॉड माइंडेड और आत्मविश्‍वासी हैं तो ड्रीमर आपके लिए बेस्ट है. क्योंकि ड्रीमर भी एडवेंचर पसंद करते हैं, परंतु स़िर्फ सपनों में. यदि आप दोनों ट्रैकिंग पर जा रहे हैं और अचानक वो ट्रैकिंग के बजाय, पेड़ के नीचे क़िताब पढ़ते हुए मिलें, तो निराश न हों, क्योंकि एडवेंचर इनके स्वभाव में नहीं है. ये तो बस, आपकी इच्छा को पूरी करने आए हैं. ये हर क़दम पर आपका साथ देंगे.
सीक्रेट पहलू
जब भी आप दोनों रोमांटिक मूड में हों, नज़दीकियां बढ़ने लगें और वो आपकी जगह प्रियंका या ऐश्‍वर्या की कल्पना करें, तो इसे उनकी बेवफ़ाई समझ नाराज़ न हों. ये ड्रीमर हैं और सपनों में रहना उनकी ख़ासियत है.

4. फादर फिगर

ये दृढ़निश्‍चयी, आत्मविश्‍वासी और आत्मनिर्भर होते हैं. पिता के पैसों पर ऐश करने की बजाय स्वयं कुछ करना पसंद करते हैं. यदि पत्नी बीमार हो जाए, तो पिता की तरह देखभाल करते हैं. केयरिंग होते हैं. घर व बाहर के कामों व परेशानियों से ख़ुद ही जूझते हैं. रोमांस में भी पत्नी की ख़ुशी का ख़याल रखते हैं. ऐसे पुरुष ईगोइस्ट होते हैं.
आपकी पर्सनैलिटी
यदि आप बुद्धिमान, चार्मिंग व केयरिंग हैं और ऐसा पति चाहती हैं, जो आपकी अच्छी तरह से देखभाल करे, तो फादर फिगर आपके लिए पऱफेक्ट मैच है. यदि आप करियर वूमन बनना चाहती हैं, तो आपको निराशा होगी, क्योंकि ये अपनी पत्नी को घर में ही देखना चाहते हैं. अगर आप ज़िम्मेदारियों से बचना चाहती हैं, तो फादर फिगर पति बड़े प्यार से सब कुछ संभाल लेगा और आप ख़ुशहाल जीवन बिताएंगी. यदि आप करियर ओरिएंटेड, डॉमीनेटिंग व आत्मनिर्भर हैं तो इस कैटेगरी के पुरुष आपके लिए पऱफेक्ट मैच नहीं हैं.
सीक्रेट पहलू
ख़र्च करने के मामले में थोड़े-से कंजूस होते हैं. फिज़ूलख़र्ची इन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आती.

5. पार्टी एनिमल

istock-155369432
ये ख़ुशमिज़ाज, हंसमुख, अतिउत्साही और सबको अपनी बातों से लुभानेवाले होते हैं. इनके दोस्तों का दायरा काफ़ी बड़ा होता है. इन्हें घूमने-फिरने व पार्टियों का बहुत शौक़ होता है. पत्नी को पार्टी में ले जाना ये स्टेटस सिंबल समझते हैं. दोस्तों या मेहमानों द्वारा पत्नी को ख़ूबसूरत, हॉट और सेक्सी कहे जाने पर बहुत गर्व महसूस करते हैं. पार्टी के होस्ट होने पर इन्हें अपनी रेपुटेशन की बड़ी चिंता सताती है.
आपकी पर्सनैलिटी
यदि आप हंसमुख व उत्साही हैं, लोगों से घिरे रहना पसंद करती हैं, तो पार्टी एनिमल चुनिए. यदि आप शर्मीली व संकोची हैं, भीड़भाड़ पसंद नहीं करतीं, समय व पैसों के मामले में समझदार हैं तो पार्टी एनिमल से दूर रहने में ही समझदारी है.
सीक्रेट पहलू
ऐसे पुरुष पार्टियों में काफ़ी पैसे बरबाद करते हैं. इन्हें बैंक बैलेंस की परवाह नहीं होती, परंतु 32 वर्ष की उम्र के बाद. इनके स्वभाव में परिवर्तन आना शुरू हो जाता है और ये जीवन को गंभीरता से लेने लगते हैं.
•

पहला अफेयर: कसक (Pahla Affair: Kasak)

pahla affair

pahla affair

पहला अफेयर: कसक (Pahla Affair: Kasak)

सुबह नींद खुली, तो देखा काफ़ी तेज़ हवा चल रही थी. थोड़ी देर में पानी बरसने लगा… दिसंबर महीने में इस बारिश से ठंड काफ़ी बढ़ गई थी. कॉलेज जाने का भी मन नहीं था… वैसे भी शोधकार्य में रोज़ जाना ज़रूरी भी नहीं होता. आज खाना बनाने में मां की मदद करूंगी और बारिश रुकी, तो शॉपिंग करने जाएंगे.

ड्रॉइंगरूम में आई, तो देखा मां किसी से फोन पर बात कर रही थीं. मां ने बताया कि शौर्य की शादी तय हो गई है. मोबाइल पर मंगनी की तस्वीरें भेजी थीं मधु आंटी ने. रेड गाउन में सुंदर लग रही थी शौर्य की मंगेतर और बगल में सिल्वर ग्रे कलर के सूट में राजकुमार-सा शौर्य, देखकर एक टीस उठी मन में…

फिर तो सारे प्लान धरे रह गए, शौर्य की छवि ही दिमाग़ में घूमती रही. जैसे-तैसे काम निपटाकर अपने रूम में आई, तो पुरानी बातें याद आने लगीं. मधु आंटी मां की बचपन की सहेली थीं. हम नाना के घर जयपुर जाते, तो ज़्यादा समय मधु आंटी के यहां ही बिताते. उनके दोनों बेटों और हम दोनों बहनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी. हम दिल्ली रहते थे. हमारे घर के हर मौ़के पर मधु आंटी परिवार सहित उपस्थित रहती थीं. शौर्य जयपुर के प्राइवेट कॉलेज से बीटेक करने लगा और मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीएससी में एडमिशन ले लिया. हम दोनों में फोन पर बहुत-सी बातें होतीं. धीरे-धीरे ये बातें प्यारभरी बातों में बदलने लगीं और फिर प्यार का इज़हार-इक़रार भी हो गया. देर रात तक हम फोन पर बातें करते रहते.

शौर्य को जब भी मौका मिलता, वो दिल्ली आ जाता और हम दिनभर घूमते. ज़ाहिर है, घरवालों से अपने प्यार का छिपाना हमने मुनासिब नहीं समझा, लेकिन उनका यही कहना था कि अभी तो हम स्टूडेंट हैं, पहले पढ़-लिखकर कुछ बन जाएं. मुझे भी यह महसूस हुआ कि शौर्य के मेरे जीवन में आने के बाद पढ़ाई पर मेरा ध्यान कम ही लग रहा है. मैंने शौर्य को समझाया कि हमें थोड़ा समझदारी से काम लेना चाहिए. अपना भविष्य बनाना चाहिए. शौर्य को शायद मेरी बातें पसंद नहीं आईं.

इस बीच वो मुझे हर बात के लिए टोकने लगा था. लड़कों से बात मत करो, यहां मत जाओ… ये मत करो… और भी न जाने क्या-क्या… शायद उसे लग रहा था कि मैं उससे दूर हो रही हूं. मैं भी उसकी इस रोज़ की रोक-टोक से तंग आ गई थी और फिर मैंने अपना फैसला सुना दिया कि हमें अलग हो जाना चाहिए. बात इतनी बढ़ गई कि हमने एक-दूसरे से सच में बात करनी बंद कर दी.

…लेकिन आज इतने अरसे बाद जब शौर्य को किसी और के साथ जुड़ते देखा, तो मन में ये दर्द, ये टीस क्यों होने लगी? क्या यही पहले प्यार की कसक है… जिसें मैंने नादान उम्र का आकर्षण समझ लिया था… वो सच्चा प्यार ही था शायद… वरना दिल इतना भारी न होता आज…

– कविता सिंह

पहला अफेयर: नादान दिल… (Pahla Affair: Nadan Dil)

best-free-wallpapers-hd-for-fb

best-free-wallpapers-hd-for-fb

पहला अफेयर: नादान दिल… (Pahla Affair: Nadan Dil)

फिर वही बरसात का मौसम आया है. आज फिर तुम्हारी याद आई है. सर्द हवाओं के झोंके अतीत के उन पन्नों को पलटने लगे हैं… जब छत्तीसगढ़ से 70 कि. मी. दूर… छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक कॉलेज में तुम एडमिशन लेने आई थी. पहली बार तुम्हें देखा था. तब क्या उम्र रही होगी? यही, कॉलेज में तुमने दाख़िला लिया ही था न!

मैं निर्निमेष एक अनोखी मासूमियत लिए तुम्हारे उस दुधिया मुखड़े को देख रहा था, जो स़फेद कुर्ते में और भी निखर आया था. रितिका- हां, यही नाम था तुम्हारा. अपना एडमिशन लेने के बाद अपने साथ आई कज़िन को लेकर वहां से चली गई, तो वहां का वातावरण अचानक बोझिल-सा हो उठा था.

इसी साल पास के एक शहर से आकर मैंने भी इसी कॉलेज में दाख़िला लिया था और यहीं के हॉस्टल में रहता था. तुम अपनी मौसी के पास रहने लगी थी. दूसरे दिन उन्हीं के यहां हमारी ये दूसरी मुलाक़ात थी. मौसी ने मेरा तुमसे परिचय कराते हुए कहा था… “ये योगेश है, बहुत अच्छा, होनहार और संस्कारी लड़का है. मेरे मायके के शहर से यहां पढ़ने आया है. हम लोग एक ही बिरादरी के हैं…” और तब अपनी नज़रें उठाकर तुमने मेरी ओर निहारा था, तुम्हारी आंखों में प्रशंसा के भाव थे.

फिर एक दिन शाम को अपनी कज़िन के साथ शॉपिंग करके तुम घर की ओर लौट रही थी, तुम्हारे ख़ूबसूरत सुनहरे बाल तुम्हारे दुधिया मुखड़े के चारों ओर बिखरे हुए थे. फिर मुझे देख पता नहीं क्या हुआ, तुम्हारे पांव थम गए… तुम अचरज से मुझे देखने लगी… उन निगाहों में ऐसा क्या था, आज तक समझ नहीं पाया.

शारीरिक आकर्षण या वह प्रेम, जो इस उम्र में किसी न किसी के साथ हो जाता है? नहीं-नहीं! शायद इससे भी अलग कोई और पावन वस्तु, जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता है! उस दिन पहली बार तुम्हारे प्रति एक गहरे लगाव का एहसास हुआ था. शायद ऐसी कोई अनुभूति उस समय तुम्हें भी हुई थी.

अगस्त माह का पहला रविवार था. इस साल कितनी बारिश हुई थी. सुबह से ही घटाएं घिर आई थीं. आज नोट्स लेने तुम्हें मेरे पास आना था. मैं खिड़की के पास जाकर आकाश को देखने लगा था. अचानक तेज़ बौछारें शुरू हो गईं… न जाने कब पीछे से आकर तुम मेरे पास खड़ी हो गई थी. मेरे इतने पास कि तुम्हारे शरीर से बड़ी मोहक ख़ुशबू आने लगी थी. नारी देह की ऐसी सुगंध का पहली बार एहसास हुआ था.

एक दिन किसी बात को लेकर अचानक मुझे लगा था कि तुम अन्य लड़कियों से अलग लगती हो… उनकी तरह मैंने तुम्हें कभी खुलकर हंसते नहीं देखा था और अनायास ही तुम मुझे बहुत रहस्यमयी लगने लगी थी. तुम्हें लेकर मेरा मन बेचैन होने लगा था. लेकिन अपने सिर को झटककर मैंने अपना सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगा दिया.

और फिर एक दिन अचानक यहां के कॉलेज की पढ़ाई अधूरी छोड़कर अपनी बहन के पास तुम अमेरिका चली गई और फिर मौसी ने बताया था, वहां तुम्हें एक प्रशासनिक विभाग में अच्छे पद पर जॉब मिल गया था. तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी, इसलिए तुम्हें यह क़दम उठाने के लिए विवश होना पड़ा.

…लेकिन तुम्हारे इस तरह अचानक चले जाने से मैं बड़ा हैरान था. मेरे भीतर कुछ टूटा था… और अपने दिल के टूटने की उस आवाज़ को स़िर्फ मैंने सुना था. मेरा नादान दिल रो रहा था… रात काफ़ी गुज़र गई थी और तेज़ हवाओं के साथ बारिश जारी थी. अपने हॉस्टल जाने के लिए मौसी के घर से निकलकर जब मैं बाहर आया, तो तेज़ बौछारें मेरे रोम-रोम में तीर की तरह चुभने लगीं थीं, लेकिन इससे बेपरवाह होकर तुम्हारा ग़म अपने दिल में लिए… उस बारिश में भीगता हुआ शहर की वीरान सड़कों पर मैं अकेला पैदल चला जा रहा था… ऐसी बरसात इसके पहले कभी नहीं हुई थी.

– विजय दीप

7 टाइप के किस: जानें कहां किसिंग का क्या होता है मतलब?(7 different Kisses and their hidden Meaning)

Loving-couple-images-hd-1-650x366

प्यार के इज़हार का ख़ूबसूरत तरीका है किस यानि चुंबन. लेकिन क्या आप जानते हैं चुंबन की भी ज़बान होती है. आप किस अंग पर किस करते हैं, उससे आपकी फीलिंग का पता चलता है.

Romantic-Couple-Kiss-Sleep-Pose-Full-HD-Wallpapers

 

माथे पर चुंबन

माथे पर चुंबन आपकी घबराहट दूर करता है और आपके अंदर आत्मविश्वास जगाता है. इसलिए रिश्तों के आरंभ में आत्मीयता बढ़ाने के लिए लोग अपने साथी का माथा चूमते हैं.

गाल पर चुंबन

गाल पर चुंबन का मतलब शारीरिक संबंध की ओर बढ़ना नहीं, बल्कि प्रेम और वात्सल्य का इज़हार भी होता है. इसीलिए गाल पर मर्यादित चुंबन किसी के प्रति आपका स्नेह दर्शाता है.

कॉलरबोन पर चुंबन

कॉलरबोन यानी गले और छाती के जोड़ पर चुंबन आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है. इसका मतलब यह भी होता है कि रिश्ते को अगले चरण में ले जाने के लिए मन से पूरी तरह तैयार है.

कान पर चुंबन

कान पर चुंबन यानी रिश्ते के अगले चरण में पहुंच जाना है, जहां आप अपने साथी से हास-परिहास कर सकते हैं. इस तरह के चुंबन में एक तरह से अक्सर शरारत का भी आभास होता है.

हाथ पर चुंबन

हाथ पर चुंबन जिसे आप प्रेम करते हैं, उसके हाथ पर होंठ रखकर चुंबन लेते हैं. हाथ पर चुंबन किसी की प्रशंसा में भी लिए जाते हैं. कभी-कभी अच्छी भावना व्यक्त करने के लिए हाथ चूम लेते हैं.

होंठ पर चुंबन

होंठ पर चुंबन बेहद संवेदनशील होता है. आमतौर पर आप जिसे प्रेम करते हैं उसके होंठों का चुंबन लेते हैं. इसके अलावा किसी दोस्त के होंठ का चुंबन लेने का मतलब आप उसके साथ डेट पर जाने के लिए तैयार हैं.

चुंबन व टाइट आलिंगन

चुंबन व टाइट आलिंगन जिसे दिलोजान से चाहते हैं उसका करते हैं. होंठों का गहरा मिलन और साथी का कसकर आलिंगन यह भी इंगित करता है कि आप मोहब्बत के चरम अवस्था पर जाने के लिए तन और मन से तैयार हैं.

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

love-proposal-by-him

love-proposal-by-him

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

मन बड़ा बेईमान होता है. आप उसे लाख समझाएं कि वह काबू में रहे, पर वो नादान कहां आपकी सुनता है. बस आपको दगा दे जाता है. और आपके कई राज़ों को फाश कर देता है. उसके कहे में चेहरे और आंखें क्या कह-सुन जाते हैं. आपको पता ही नहीं चलता कि कब आपका मन आपका रहा ही नहीं… वह तो किसी और का हो गया.

मेरी नज़रों में वो मंज़र और ज़ेहन में वो सफ़र आज भी ताज़ा है, जब कसौली में एक अजनबी ज़िंदगी में आया और फिर इश्क़ वादियों में घुल-मिल गया. कहां तो बस सफ़र में एक पड़ाव पर मिले और बाद में मन में उसकी हर ख़ुशबू बस गई.

हर साल गर्मियों की छुट्टियों में पूरा परिवार पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने जाता था. उत्तर भारत की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बर्फीले पहाड़ों से बेहतर पनाह कहां मिलती. और इस बार योजना बनी, तो कसौली जाने की ठानी, जहां मामाजी एयरफोर्स में पदस्थ थे.

सुना था छोटी-सी मगर प्यारी-सी जगह है और मामाजी का ख़ूब आग्रह भी था. तपिश के बीच ट्रेन में सवार हुए. फिर टैक्सी से पहाड़ों के घुमावदार रास्ते पर चलते चले गए. चीड़ के पेड़ों के साथ-साथ दौड़ते-दौड़ते आख़िरकार हमारी मंज़िल भी आ गई.

मामाजी का घर बेहद ख़ूबसूरत था. चारों ओर बस पहाड़ ही पहाड़. हम सब बहुत ख़ुश हुए. मामाजी ने बताया कि हम लोगों के आने की ख़ुशी में एक छोटी-सी दावत रखी है रात को. वाह, कहते हुए पता नहीं था कि क्या करवट लेगी ज़िंदगी. दोपहर में थकान उतारने के लिए जो सोई, तो मां के जगाने पर ही आंख खुली.

रात की दावत में मामाजी ने बहुत सारे लोगों को बुलाया था. उन्हीं में से एक थे पंकज. उस रात पार्टी में हम लोग मिले, यहां-वहां की बातें कीं. फिर अपनी-अपनी राह चल दिए. अगले दिन सुबह यूं ही टहलते हुए हम फिर मिले. फिर बातें हुईं. जाने क्यों पंकज की बातें बड़ी भली-सी लगीं. मन बावरा दिनभर पकंज के बारे में सोचता रहा. शाम को चर्च की छांव तले फिर हम मिले. मन में कुछ गुदगुदाहट-सी हुई. “कीनू, इस ड्रेस में तुम बहुत सुंदर लग रही हो.” पंकज कहने लगे. मेरे गाल गुलाबी हो गए. हफ़्तेभर से ज़्यादा हम लोग रहे और पंकज लगातार मिलते रहे.

फिर एक दिन मामाजी ने शिमला चलने का ऐलान कर दिया. मन कुछ बुझ गया. जब जीप में सवार हुए, तो पंकज एक सरप्राइज़ की तरह मिले. हौले-हौले मैंने उनकी आंखों में देखा. उनमें ग़ज़ब का आकर्षण था. शिमला में रहने के दौरान हमारी बातें-मुलाक़ातें जारी रहीं. देवदार के पेड़ों तले टहलते कितनी ही बातें कीं. फिर जुदाई का दिन आ गया. औपचारिक रूप से एक-दूसरे को अलविदा कह दिया.

घर लौटने के बाद मन बुझ गया. पंकज की बातें और उनकी सूरत ही हर ओर दिखती. परिवार में इश्क़ की बात कहना और क्या पता पंकज को भी ऐसा कुछ महसूस हुआ कि नहीं. मन को समझा लिया कि पंकज को एक मीठी याद समझकर अपनी नींद में दफ़न कर ले.

दिन बीते, व़क्त गुज़रा, साल बीत गया. मामाजी का ट्रांसफर हो गया. कॉलेज की पढ़ाई भी ख़त्म हो चली. लेक्चररशिप मिल गई. एक दिन मां ने कहा, “शाम को लड़केवाले आ रहे हैं. आज छुट्टी कर लो.” उस समय न जाने क्यों अचानक पंकज आंखों में तिर गए. मन को समझाया और परीक्षा देने के लिए जुट गई.

शाम को लड़केवाले आए. लड़का साथ नहीं था. पर उसके मम्मी-पापा से मिलकर लगा कि पहले से पहचान हो. उनके अपनेपन ने कुछ पलों के लिए पंकज को कहीं गुम कर दिया. मां-पापा ख़ुश थे. अगले ही दिन मंगनी भी होनेवाली थी. मन में बड़ी बेचैनी थी. एक अंजान के साथ बंधने की. मन में दुविधा-सी थी. एक ओर प्यार, जो मेरी तरफ़ से था और दूसरी ओर परिवार की ख़ुशी. मंगनी की रस्म के लिए जब पहुंची, तो सिर शर्म से झुका रहा. “अरे देख लो, बाद में न कहना कि कहां ब्याह दिया.” मां ने टल्ला मारा. मैंने सिर उठाकर सामनेवाले शख़्स को देखा, “अरे, आप…” इतना ही कह सकी. सब हंस पड़े.

कहने की ज़रूरत ही नहीं थी कि प्यार एक तरफ़ा नहीं था. वह तो दोनों ओर से था. यह पूरी साज़िश मेरे मामाजी ने रची थी, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के कसौली बुलाकर हम लोगों को मिलने-जुलने का मौक़ा दिया था, ताकि हम जीवन की राह में हमक़दम बनें.

– राजेश्‍वरी शुक्ला

Relationship Apps: अब ऐप से बन सकते हैं रिश्ते बेहतर (Apps that make your relationship stronger)

11 n

कई बार अपनी बात सही ढंग से न कह पाने… सामनेवाले शख़्स को न समझ पाने के कारण हमारे रिश्तों में दरार आ जाती है. अब इन मामलों में आपकी मदद करेंगे मोबाइल ऐप्स (apps) और आपके रिश्ते (relationship) को बनाएंगे रिफ्रेशिंग और फॉरएवर यंग. कुछ कहने, ख़ासकर पत्र, ईमेल, सोशल साइट्स पर अपनी बात को सही तरी़के से न कह पानेवालों के लिए एक ख़ुशख़बरी है कि वे ऐप के ज़रिए अपनी इस कमज़ोरी से निजात पा सकेंगे. यूं देखा जाए, तो वर्तमान समय में हम एक-दूसरे से आमने-सामने कम ही बात कर पाते हैं. हमारी अधिकतर बातें ईमेल, चैटिंग, फेसबुक, टेक्स्ट मैसेज, वीडियो चैटिंग आदि से होती है. ऐसे में यह बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप इलेक्ट्रॉनिक टूल्स की मदद से ही सही, पर अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखें. आइए, उन ऐप के बारे में जानते हैं, जो इनमें आपकी मदद कर सकते हैं.

11 n

‘इमोशनल लेबर’

अमेरिका के जोआन मैक्नील ने ‘इमोशनल लेबर’ नाम का एक प्लगइन फीचर डेवलप किया है, जो जीमेल के साथ कनेक्टेड है. यह आपके मैसेज, ईमेल के मैटर को न केवल बेहतर बनाता है, बल्कि सामनेवाले पर इम्प्रेशन भी डालता है.
– इमोशनल लेबर आपके मैटर में फेर-बदल कर, उसमें ढेर सारे डॉट्स, एक्सक्लेमेशन मार्क, प्रश्‍नचिह्न आदि लगाकर आपकी बात को प्रभावशली ढंग से रखता है.
– मैटर में तरह-तरह के इमेजेज़, फेसेस यानी इमोजी आदि का उपयोग करता है, जिससे आपकी बातें सामनेवाले शख़्स को अधिक प्रभावित कर सकें.
– यानी आप कह सकते हैं कि इमोशनल लेबर आपके इमोशन को बेहतर तरी़के से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश
करता है.
– इस ऐप की कामयाबी ने यह साबित कर दिखाया है कि आज अधिक से अधिक लोग अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने की ख़्वाहिश रखते हैं, फिर चाहे वो गर्लफ्रेंड को मनाना हो, ईमेल के ज़रिए बीमार दोस्त का हालचाल जानना हो या फिर पत्नी की ग़ैरज़रूरी डिमांड को ख़ूबसूरती से इंकार करना हो… आपके हर तरह की भावनाओं को शब्दों का ख़ूबसूरत जामा पहनाने में यह ऐप आपकी मदद करता है.

‘क्राउडपायलट’

कैलिफोर्निया यूनिवसिर्टी की प्रोफेसर लॉरेन मैकार्थी ने भी ‘क्राउडपायलट’ नामक ऐप (app) तैयार किया है. इस ऐप की ख़ासियत-
– यह आपको बताता है कि आपका बिहेवियर कैसा है और आपको अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र, प्रेमिका, पत्नी आदि के साथ किस तरह व्यवहार करना चाहिए.
– आपको अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या करना है और क्या नहीं
करना है.
– यदि आप डेट पर जा रहे हैं, तो आपको उस समय किस तरह की बातें
करनी चाहिए.
– इस ऐप के ज़रिए आप अपने दोस्त और अजनबियों से जुड़े रहते हैं.
– लॉरेन ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी बनाया है, जो लोगों के बीच काफ़ी मशहूर रहा.

‘यूएसप्लस’

लॉरेन मैकार्थी ने ही अपने मित्र काइल मैक्डॉनल्ड के साथ मिलकर ‘यूएसप्लस’ नाम से एक और ऐप बनाया है.
– यह ऐप वीडियो चैटिंग के दौरान आपकी मदद करता है और सामनेवाले के चेहरे को पढ़कर यह बख़ूबी बता देता है कि अगला आपसे बात करके आनंदित हो रहा है
या निराश.
– यह ऐप काफ़ी मज़ेदार है. यह आपको दिलचस्प ढंग से यह बताएगा कि आपको किससे दोस्ती रखनी है और
किससे नहीं.
– जो ग़लत क़िस्म के दोस्त हैं या फिर बहुत बोर करते हैं, उनके फोन नंबर और ईमेल आईडी ये ऐप आपके फोन से हटा देगा.

दिलचस्प ऐप्स (apps)

पीपलकेपीआर’

– ‘पीपलकेपीआर’ ऐप आपके स्मार्टफोन के जीपीएस डाटा और आपकी कलाई में बंधे वेयरेबल जैसे ऐप की सहायता से आपके रिश्ते को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

‘क्रिस्टलनोज़’

– ‘क्रिस्टलनोज़’ ऐप आपके लिंक्डइन अकाउंट को किस तरह से बेहतर बना सकते हैं के बारे में उपयोगी जानकारी देता है. साथ ही बिज़नेस में किस तरह से रिलेशन को मेंटेन करें यानी अपने रिश्ते को किस तरह मज़बूत बनाएं, इसके लिए ज़रूरी गाइडेंस देता है.

– रुचि गुप्ता

पहला अफेयर: ज़ख़्म सहलाए नहीं… (Pahla Affair: Zakhm Sehlaye Nahi…)

Pahla Affair

Pahla Affair

पहला अफेयर: ज़ख़्म सहलाए नहीं… (Pahla Affair: Zakhm Sehlaye Nahi…)

उस रोज़ तरुण से सामना हुआ, तो बहुत ख़फा-ख़फा लगा. सबब पूछा, तो बोला, “पापा को फिर से दिल का दौरा पड़ा है. मौत से लड़ रहे हैं.” सुनकर दिल में एक अजीब-सी हलचल मची. कारण- कुछ दिन पहले तरुण से ही मालूम हुआ था कि उसकी कानपुर वाली मामी की भतीजी, जो मेडिकल कर रही है, वहां से उसके लिए रिश्ता आया है. “एक तो मां के पक्ष का रिश्ता, फिर अमीर पिता की बेटी, तिस पर मां उसकी सुंदरता की तारीफ़ों के पुल बांधते नहीं थकती.” फिर कुछ रुककर वह बोला था, “पापा तो बस बीमार अवस्था में बिस्तर पर लेटे-लेटे, ख़ामोश निगाहों से छत की कड़ियां गिनते हैं.” उसकी उदासी ने मुझे भी बहुत उदास कर दिया.

तरुण से मेरी पहली मुलाक़ात कॉलेज के कॉरीडोर में मेरी सखी रेखा ने करवाई थी. “इनसे मिलो, ये हैं मियां तरुण. हमारे कॉलेज की जान, कुड़ियों की शान. गाने में तानसेन और कविताएं ऐसी लिखते हैं कि कालीदास और निराला को भी मात दे जाएं.” मेरे कॉलेज का वो पहला दिन मेरी ज़िंदगी का बहुत ख़ास दिन बन गया.

मैं शुरू से ही शर्मीली, अपने आप में गुमसुम रहनेवाली लड़की थी. संगीत की थोड़ी-बहुत शिक्षा मैंने भी ली थी. उस दिन हम दोनों पार्क में घास पर बैठे थे. तरुण की फ़रमाइश पर मैंने एक ग़ज़ल गुनगुनाई-
चिराग़ इश्क़ के हुए जो रौशन,
जहां हसरतों का खिल उठा…
मिली तुमसे निगाह,
हर एहसास चुलबुला उठा…
फ़िज़ाएं भी सुर की सरगम में शामिल हो लीं उस दिन. तरुण ने मेरा हाथ थाम इतना ही कहा, “मीरा, शायद हम दोनों एक-दूजे के लिए ही बने हैं. ये साथ जीवनभर का हो, तो कैसा रहेगा?” वो लम्हा, मेरी ज़िंदगी
का ख़ास लम्हा बन गया. मैं अक्सर तन्हाई में गुनगुनाया करती-
चंद लम्हों का हमें साथ मिला है दोस्त…
चंद लम्हों को तो, ख़ुशबू में लपेटा जाए…

मेरे सेकंड ईयर के पेपर ख़त्म होते ही मैं अपनी नानी के घर राजकोट आ गई. कुछ ही दिन बीते थे कि एक दिन मां की चिट्ठी मिली. दो ही ख़बरें मेरे वजूद को हिलाने के लिए काफ़ी थीं. तरुण के पिता का देहांत और तरुण का कानपुर में रिश्ता पक्का होना. तरुण ने पिता की बात का मान रखा, उनकी रूह को राहत दी और मेरी रूह को लाश बना दिया.

कभी-कभी ऐसा क्यों लगता है, जैसे हमारे ऊपर से रेत-सा कुछ सरक रहा है. मुझे यह एहसास होने लगा कि ख़ुशियां कभी खून से सने दरवाज़ों पर दस्तक नहीं देतीं. क्यों तरुण की भीतरी ज़मीन पर किसी पराए पेड़ का साया पड़ गया है? मुझे यूं लगने लगा कि वो पेड़ किसी कंटीली झाड़ी का रूप ले रहा है. और… मैं उसमें धंसती जा रही हूं. एक सूखा तालाब… दलदल… मुरझाए फूल… एक बेदम हाथी-सी मैं कीचड़ में फंसी… तड़प रही हूं, छटपटा रही हूं… मैंने बहुत बार पतझड़ में फूलों को झड़ते हुए देखा है और आज…?

उ़फ्! बस, एक ही फूल था, उस डाल पर… आंधियों के बवंडर से वो भी झड़ गया… मैंने काग़ज़ उठाया और सोचा तरुण के नाम लिखूं एक आख़िरी पैग़ाम. हाथ ऐसे कांपे कि क़लम हाथ से छूटते-छूटते बची. ऐसी नाज़ुक घड़ियों में काग़ज़-क़लम सभी धोखा दे जाते हैं. ऐसे में शब्दों का साथ भी छूटने लगता है- शायद यहीं से हमारे रिश्तों के रिसने की शुरुआत भी हो रही थी… फिर भी दिल को मज़बूती से पकड़ मैंने तरुण को एक पुर्ज़ा लिखही डाला-
हवाओं की बेरुख़ी, चिराग़ हमने जलाए नहीं
ज़ख़्म जो गहराए, तो हमने सहलाए नहीं…
उठे दिल से जो हूक, तो प्यार भरा इक ख़त लिखना…
तुम्हारी मीरा,

– मीरा हींगोरानी

पहला अफेयर: अधूरे प्रेम की पूरी कहानी (Pahla Affair: Adhure Prem Ki Poori Kahani)

Pahla Affair

Pahla Affair

पहला अफेयर: अधूरे प्रेम की पूरी कहानी (Pahla Affair)

परीक्षा का समय आता था और मैं एक्ज़ाम फ़ीवर से पीड़ित हो जाती थी. इस बार भी ऐसा ही हुआ. मुझे पढ़ा हुआ कुछ भी याद नहीं रहता था और इस बार भी ऐसा ही हुआ. तब मेरी एक सहेली ने बताया कि शहर में एक डॉक्टर हैं, जिनके पास इसका इलाज है. मैं मम्मी को लेकर डॉक्टर से मिली. वे बैच फ्लावर थेरेपी से ट्रीटमेंट करते थे.

डॉ. प्रसून ने ढेर सारे प्रश्‍न पूछे. फिर कहा, “ज़रा जीभ बाहर निकालिए.” उन्होंने दवा की 3-4 बूंदें जीभ पर टपका दीं. कुछ चमत्कार-सा अनुभव हुआ. मैं नियमित दवा लेती रही. मेरे पेपर्स अच्छे होने लगे. साथ ही मुझे एहसास हुआ कि मेरी स्मरणशक्ति धीरे-धीरे लौट रही है, मगर दिल का नियंत्रण छूट-सा रहा है.

26 वर्षीय डॉ. प्रसून का व्यक्तित्व मुझे आकर्षित कर रहा था. वे होमियोपैथी के साथ-साथ बैच फ्लावर थेरेपी द्वारा मरीज़ों का उपचार करते थे. मेरी परीक्षा कब समाप्त हो गई, पता भी नहीं चला.  “आपकी दवा ने तो कमाल कर दिया.” मैंने उनसे कहा. वे स़िर्फ मुस्कुरा दिए. उनकी सौम्य मुस्कुराहट पर मैं मर मिटी.

किसी ने सच ही कहा है, “आप यूं ही अगर हमसे मिलते रहे, देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा…” और मेरे साथ भी यही हुआ. उन्होंने एक दिन मुझसे कहा, “छुट्टियों में तुम मेरी डिस्पेंसरी में बैठकर मरीज़ों को क्यों नहीं देख लेती? तुम्हें दवाओं के विषय में धीरे-धीरे बताता रहूंगा. अगर तुम चाहो, तो होमियोपैथी का कोर्स भी कर सकती हो.” कहते हुए उन्होंने स्टेथोस्कोप पकड़ा दिया.

होमियोपैथी में धीरे-धीरे मेरी रुचि बढ़ने लगी. वे बीच-बीच में मुझे गाइड भी करते रहते और क़िताबें व नोट्स भी देते रहते. मैं दवाओं व मरीज़ों के बीच रम-सी गई. मैं घंटों डिस्पेंसरी में बैठी रहती. हमारी आत्मीयता रंग लाने लगी. कुछ मरीज़ मुझे डॉक्टर साहिबा कहकर संबोधित करते, तो मैं गौरव का अनुभव करती.

बाहर बारिश हो रही थी, “दही-कचौड़ी खाओगी?” उनकी आवाज़ में आत्मीयता थी. मैंने ङ्गहांफ में सिर हिलाया. धीरे-धीरे हमारा मूक प्यार अंगड़ाई लेने लगा. “कल शाम को मैं अपने परिवार के सदस्यों से तुम्हारा परिचय करवाऊंगा.” उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक कहा.
मैंने यह बात अपनी मम्मी से कही. वे मुस्कुरा दीं, शायद मम्मी को हमारे मेल-जोल से कोई आपत्ति नहीं थी. मेरे दिल में प्रसून मुहब्बत बन महकने लगे. मैं अपने भाग्य पर इतराने लगी. मुझे लगने लगा कि मैं अब प्रसून के बिना जी नहीं पाऊंगी.

यही हाल शायद प्रसून का भी था. “एक गोलगप्पा और लोगी… मेरी क़सम.” प्रसून ने मुझ पर अधिकार जमाया. मुझे लगा हर लड़की की यही इच्छा होती है कि कोई उस पर अपना अधिकार जताए. शायद अधिकार के पीछे उसका प्यार ही होता है. मैं अप्रत्यक्ष रूप से प्रसून की हो चुकी थी. बस, प्रतीक्षा थी, तो परीक्षा परिणाम की.

परीक्षा में तो मैं पास हो गई, मगर हमारा प्यार फेल हो गया. हताश-निराश प्रसून ने जब बताया कि उसकी बहन छुटकी का विवाह जिस परिवार में हो रहा है, उनकी एक शर्त है कि प्रसून के होनेवाले जीजाजी की बहन से वह विवाह कर लें. “और मैंने हां कर दी. मैं आख़िर करता भी क्या? बड़े लाड़ से छुटकी को हमने पाला है. मेरा फ़र्ज़ बनता है न कि मैं बड़े भाई होने का कर्तव्य निभाऊं.” वे नम आंखें पोंछते हुए बोले.

मैं उनके त्याग पर फिर मर मिटी. मैं अपने प्यार पर फ़क़्र महसूस कर रही थी. मैंने उनका समर्थन करते हुए कहा, “प्रसून, सच तो यह है कि प्यार एक गोलगप्पे की ही तरह खट्टा-मीठा होता है. गोलगप्पे कितने नाज़ुक होते हैं न, इधर झटका लगा और उधर फूटा. मगर हमारा प्यार तो चटपटी कचौड़ी-सा है न, आज यह स्वाद भी आज़मा लें.” मैंने अपने पहले प्यार की कुर्बानी देकर प्रसून को धीरे से “बेस्ट ऑफ़ लक” कह दिया.

– नलिनी मेहता

किस थेरेपीः Kiss के 11 Amazing हेल्थ बेनीफिट्स(Kiss therapy: 11 Amazing Health Benefits of Kiss)

Uyumadan önce sevgiliye söylenecek en güzel sözler, en güzel aşk mesajları (2015) 3
मुहब्बत के इज़हार का ख़ूबसूरत तरीका है किस यानि चुंबन. किस दो प्यार करनेवालों को और क़रीब लाने में मदद करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं किस के कई हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं और कई शोधों से ये बात साबित भी हो चुकी है.

Uyumadan önce sevgiliye söylenecek en güzel sözler, en güzel aşk mesajları (2015) 3

 

1. स्ट्रेस दूर करता है

किसिंग के दौरान स्त्री-पुरुष शरीर में कोर्टिज़ोल हार्मोन का स्तर कम होता है और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन में बढ़ोतरी होने लगती है. चूंकि स्ट्रेस के लिए ये दोनों हार्र्मोेन्स ज़िम्मेदार होते हैं, इसलिए कोर्टिज़ोल हार्मोन के कम होने और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ने से शरीर का तनाव दूर हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इतना ही नहीं, चुंबन तनाव के लिए ज़िम्मेदार ऑक्सीटोसिन हार्मोन के स्तर को कम करके चिंता को भी दूर कर देता है.

 

2. दिल को रखे तंदुरुस्त

चुंबन के दौरान शरीर में एड्रेनालिन नाम का हार्मोन बनता है जो दिल के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है. चुंबन रक्त में एपिनेफ्रीन भी छोड़ता है, जिसके कारण दिल में रक्त का संचार बहुत तेज़ी से होता है. चुंबन पूरे शरीर में रक्त संचार के लिए दिल की मदद करता है. इससे ब्लडप्रेशर कम करने और शरीर में रक्त संचार ठीक रखने में मदद मिलती है. तो अब न सिर्फ़ दिल को ख़ुश करने, बल्कि इसे सेहतमंद रखने के लिए किस करें.

 

3. इम्यूनिटी को सुधारे

चुंबन संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडीज़ बढ़ाता है, जिससे रक्त में हिस्टामाइन भी बढ़ता है. यह छींक व आंसू या सूजन के रूप में दिखता है. इन क्रियाओं का मतलब शरीर वायरस या बैक्टीरिया से लड़ रहा है. इससे इम्यून सिस्टम बहुत मज़बूत होता है. यह महिलाओं को मसाइटोमेगालोफ वायरस से बचाने में मदद करता है जो गर्भावस्था में शिशु को जन्मजात अंधा बना सकता है. यह वायरस केवल गर्भवती महिलाओं को नुकसान पहुंचाता है.

 

4. रखे हमेशा फिट

जब स्त्री-पुरुष के होंठ एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं, तब दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो जाती है. उस समय दिल एड्रेनालाइन हार्मोन या एपिनेफ्रीन के साथ न्यूरोट्रांसमीटर रक्त में रिलीज़ करता है. एड्रेनालाइन के स्तर में बढ़ोतरी से मेटाबॉलिज़्म दर भी बढ़ती है, जो ज़्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करता है. क़रीब एक मिनट के किस के दौरान दो से तीन कैलोरी बर्न होती है. हर पैशनेट किस से 8 से 16 कैलोरीज़ बर्न की जा सकती है.

 

5. चेहरे पर ग्लो लाता है

एक किसिंग सेशन से टिश्यूज़ टाइट व टोन्ड होते हैं और पूरे चेहरे में रक्त संचार तेज़ी से होता है. इसके फलस्वरूप त्वचा ख़ूबसूरत हो जाती है. किस सेशन के समय ओर्बिचुलारिस ओरिस नाम का हार्मोन सबसे ज़्यादा सक्रिय रहता है जो चेहरे से जुड़े अंगों को टोन करते हैं, जिससे आप लंबे समय तक यंग नज़र आते हैं.

 

6. दांतों को बनाए चमकीला

चुंबन दांतों की सफ़ाई करने का सबसे सहज, सरल और नैसर्गिक तरीक़ा है. किस सेशन के दौरान मुंह के अंदर जो लार बनती है, वह अपने एसिडिक गुणों के कारण दांतों पर जमे प्लाक को तोड़ने और दांतों में कैविटी बनने से रोकता है, क्योंकि लार आपके दांतों में फंसे खाने के टुकड़ों को साफ़ करके दांतों को सड़ने से रोकता है. जो लोग मोतियों जैसे सफ़ेद दांतों की ख़्वाहिश रखते हैं, उनके लिए किस फ़ायदेमंद है. किस दांतों मेें कैविटी भरते हैं और बैक्टीरिया ख़त्म करते हैं.

 

7. दर्द को करे कम

किस से शरीर में एड्रेनालाइन हार्मोन बनता है जो दर्द की कम करने में मददगार होता है और इसके साथ-साथ शरीर एंडोर्फिन नामक नेचुरल केमिकल को शरीर में छोड़ता है जो दर्द कम या दूर करने के लिए मॉर्फिन जैसी नशीली दवाई से ज़्यादा पावरफुल होती है.

 

8. लंबी उम्र के लिए करें किस

हर महिला अपने पति को सुबह के समय गुडबाय किस देकर उनकी ज़िंदगी के पांच साल बढ़ा सकती है. जर्मन चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के समूह ने दावा किया है कि शादीशुदा पुरुष अगर सुबह के समय अलविदा किस अपने पार्टनर को दें, तो उनका जीवन उन शादीशुदा पुरुषों से ज़्यादा लंबा होता है जो सुबह के समय अपने पार्टनर को अलविदा किस नहीं देते.

 

9. मनोदशा में सुधार

चुंबन डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे मूड अच्छा होता है और भावनात्मक उथल-पुथल शांत होती है. अगर आपका मन ठीक नहीं है, तो अपने पार्टनर के साथ जमकर एक किस सेशन कीजिए. आप फ्रेश फील करने लगेंगे.

 

10. संबंधों में प्रगाढ़ता

चुंबन दो लोगों के आपसी रिश्ते को बहुत ज़्यादा मज़बूत और मधुर बनाता है. इसीलिए जब भी हम चुंबन लेते हैं, तब पुरुष और महिला दोनों के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन बहुत तेज़ी से बनता है. इसीलिए इस हार्मोन को लव हार्मोन भी कहते हैं, क्योंकि यह अपोज़िट सेक्स के बीच रिश्ते को और गहरा करता है. संबंध अच्छे होने पर आदमी ख़ुश रहता है और स्वस्थ रहने के लिए ख़ुश होना पड़ता है.

 

11. दांपत्य जीवन करे सफल

पति-पत्नी के बीच मन-मुटाव के बाद सुलह के लिए किस सबसे बढ़िया ज़रिया है. जो दंपति हमेशा एक-दूसरे को किस करते रहते हैं, उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत अच्छी चलती है. जब चुंबन लेते हैं, तब दोनों के शरीर एक-दूसरे के साथ संवाद करने लगते हैं. विवाह के लिए और विवाह के बाद हेल्दी बच्चों के लिए भी किसिंग सेशन बहुत ज़रूरी है.

पहला अफेयर: यादों का झोंका (Pahla Affair: Yaadon ka Jhonka)

Love (1)

Love (1)

पहला अफेयर:  यादों का झोंका (Pahla Affair: Yaadon ka Jhonka)

तुम्हारी याद अब भी बहुत आती है. मुद्दत गुज़र गए तुमसे बिछड़े, पर मेरी यादों के कारवां में आज भी तुम मेरे साथ हो. तन्हाई में जब भी बैठती हूं, तुम्हारी तस्वीर पलकों की चिलमन पर आंसू की बूंद बन आ बैठती है. वे कितने ख़ुशनसीब पल थे, जब तुम मेरे साथ थे. तुमने अपनी मुहब्बत का इज़हार खुलेआम कभी नहीं किया था, पर क्या मुहब्बत शब्दों की मोहताज होती है? मेरी हर वक़्त फ़िक्र करना, अपनी हर बात मुझसे शेयर करना, मेरी हर समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करना… क्या ये सब बातें गवाह नहीं थीं कि तुम मुझसे कितना प्यार करते थे?

तुम मेरे परिवार की भी उतनी ही फ़िक्र करते थे. पापा बीमार थे, तो मैंने कहा था तुमसे, “मैं अकेली हूं. कभी-कभी मिलने आते रहना.” तो तुम हमेशा उनकी बीमारी के दौरान अपने व्यस्ततम पलों से समय निकालकर पापा को देखने आते रहे. मैं कॉलेज में व्यस्त थी, तुम पत्रकारिता के छात्र थे. तुम्हारा करियर नहीं बना था. तुम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी काफ़ी मेहनत से कर रहे थे.

तुम्हारी भाषा अच्छी थी, अच्छा लिखते थे. मुझे उम्मीद थी कि तुम सफल पत्रकार बनोगे. मैं कविताएं लिखती थी. मेरी हर कविता के पाठक थे तुम और शायद प्रशंसक भी. मुझे ऐसा लगता था कि तुम मुझसे कभी नहीं बिछड़ोगे, हमेशा साथ रहोगे, पर मुझे क्या पता था कि वक़्त एक ऐसा तूफ़ान लाएगा कि हमारी ज़िंदगी बिखर जाएगी और हम ऐसे अलग होंगे कि फिर कभी नहीं मिल पाएंगे.

मुझे तो उस नादां उम्र में पता भी नहीं था कि हमारे बीच यह जो कुछ भी है, उसे प्यार कहते हैं. यह सच है कि यह ऐसा प्यार था कि हमने एक-दूसरे को कभी स्पर्श तक नहीं किया था. स़िर्फ मन की छुअन थी हमारे बीच, लेकिन जब तुम्हें मुझसे अलग किए जाने की कोशिश की जाने लगी, तो मैं दर्द से तड़प उठी और शायद तुम्हारा भी यही हाल हुआ और तब मैंने जाना कि तुम्हारे और मेरे बीच और कुछ नहीं, बल्कि प्यार ही था.

मेरे और तुम्हारे प्यार के बीच मेरा परिवार आड़े आया और यह मैं आज तक नहीं जान पाई कि क्यों? हम एक ही जाति के थे, जाति-बंधन की समस्या नहीं थी. तुम बहुत ही अच्छे परिवार के सभ्य, सुसंस्कृत व नेक लड़के थे. तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल था. हम विवाह बंधन में भी बंध सकते थे. फिर क्यों मेरे परिवार, ख़ासकर पापा ने तुम्हारा इतना उग्र विरोध किया? वो भी इतने दिनों के घनिष्ठ घरेलू संबंधों के बाद. अचानक उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा.

तुम तो जानते भी नहीं थे. तुम्हारे आने पर मुझे कमरे में कैद कर दिया जाता था. तुमसे कोई बात भी नहीं करता. अपनी नहीं, तुम्हारी इस उपेक्षा से आहत होकर एक दिन मैंने तुमसे कह ही दिया, “प्लीज़, आप मत आइए, पापा मना करते हैं.” और तुमने जवाब में बस इतना ही कहा था, “अगर पीछे हटना ही था, तो आगे बढ़ना ही नहीं चाहिए था.” पर शायद लड़ते-लड़ते मुझमें विद्रोह की ताक़त ख़त्म हो गई थी और मैं परास्त हो गई थी और इसी वजह से तुम मुझसे इस कदर रूठ गए कि फिर वापस नहीं लौटे.

लौटते तो जानते कि तुम्हें खोकर मेरी हालत पागलों जैसी हो गई थी. मेरा प्यार भी इतना ही मुक़म्मल था, जितना तुम्हारा, शायद तुमसे भी ज़्यादा हेमंत. हम दोनों को अलग करने के लिए मेरे परिवार ने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया. तुमसे संपर्क के सारे रास्ते उन्होंने मेरे लिए बंद कर दिए. कितने दिनों तक मैं तुम्हारी बाट जोहती रही, जीने की आस मरी नहीं थी, इसलिए ज़िंदा लाश बनकर जीती रही, पर तुम नहीं आए. अब तो सारी आस ही छोड़ चुकी हूं.

बस, सोचा कि मेरी सहेली को लिखकर अपने दिल का बोझ हल्का कर लूं. मैं जानती नहीं कि तुम आज कहां हो? किस हाल में हो? शादी कब की हो गई होगी, पर मैंने तो शादी भी नहीं की. इसी परिवार में उम्ऱकैद चुन लिया है मैंने. तुम्हारे लिए मेरी बस यही आरज़ू है, ङ्गङ्घमेरे दामन में कांटे ही कांटे आए तो क्या, रब तुम्हारी झोली फूलों से भर दें.फफ तुम जहां भी हो, मुझे माफ़ कर देना कि मैं अपना प्यार पाने के लिए तुम्हारा उस वक़्त साथ नहीं दे पाई, जिसकी सज़ा मैं आज तक भुगत रही हूं.

सभी प्यार करनेवालों के लिए मेरी यही दुआ है कि दुनिया छूटे, रब छूटे, पर साथी का साथ न छूटे.

– निमिषा कुमारी

रिश्तों में क्यों होता है इमोशनल अत्याचार? (Why is emotional abuse in relationship?)

shutterstock_71231986

हर रिश्ते में कहीं न कहीं प्यार के भीतर स्वार्थ छुपा होता है और इस स्वार्थ को पूरा करने के लिए लोग जब अपनों को ही भावनात्मक रूप से आहत करने लगते हैं या हम ख़ुद अकारण भावनाओं का भार ढोने लगते हैं, तो ये इमोशनल अत्याचार बन जाता है. इसका दायरा किसी एक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी चपेट में हर रिश्ता आ चुका है. रिश्तों में बढ़ते इमोशनल अत्याचार पर पेश है ख़ास रिपोर्ट.

shutterstock_71231986
हर रिश्ते में चाहे वो पति-पत्नी का हो, प्रेमी-प्रेमिका का या माता-पिता व बच्चे का हो… कहीं न कहीं स्वार्थ घर कर गया है और इसी स्वार्थ ने जन्म दिया है एक नए शब्द इमोशनल अत्याचार को. भावनाओं का सहारा लेकर अपनों से ज़बर्दस्ती कोई बात मनवाना या ऐसी स्थिति पैदा करना कि वो ख़ुद के बारे में सोच न पाएं, इमोशनल अत्याचार है. जब कोई अपना सीधे तरी़के से आपकी बात मानने के लिए तैयार नहीं होता, तो अक्सर आप भी अपनी भावनाओं का सहारा लेते हैं. मगर इस तरह भावनाओं की आड़ में थोपी गई मर्ज़ी कई बार बेहद ख़तरनाक हो सकती है. ये धीरे-धीरे रिश्ते की जड़ को खोखला कर देती है और अपनों के दिल में आपके लिए फिर कोई जगह नहीं रह जाती. इतना ही नहीं, कई बार हम ख़ुद अपने ऊपर भावनाओं का बोझ लाद लेते हैं जिससे कुछ समय बाद घुटन महसूस होने लगती है.

थोपे हुए रिश्ते का सच
दिल्ली की सुनीता ने घरवालों के दबाव और इमोशनली परेशान करने पर शादी तो कर ली, मगर वो इस रिश्ते को निभा नहीं पाई, क्योंकि उनका हमसफ़र सही इंसान नहीं निकला. सुनीता कहती हैं, “मैं शादी के लिए मेंटली तैयार नहीं थी, मैंने अपने घरवालों से थोड़ा व़क्त मांगा ताकि मेरी पीएचडी कंप्लीट हो जाए और मेरा प्रोफेसर बनने का सपना पूरा हो जाए, मगर वो नहीं माने. ख़ासकर मेरे दादाजी, जो हमेशा ये कहते रहते कि मेरे मर जाने पर तुम शादी करना, मेरी आख़िरी इच्छा है तुम्हें दुल्हन बनते देखना, तुम आजकल के बच्चे बस, अपने बारे में सोचते हो… बाकी घर वाले भी हमेशा ऐसा ही कुछ कहते रहते. उनके इस तरह के तानों से मैं इतनी तंग आ गई कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. न तो मैं चैन से सो पाती और न ही दिल से कोई काम कर पाती. आख़िरकार उनके इमोशनल अत्याचार से परेशान होकर मैंने बेमन से शादी के लिए हां कर दी. मेरी हां से घरवाले तो ख़ुश हो गए, मगर मैं अंदर ही अंदर घुट रही थी और अपने आप से लड़ रही थी. नतीजतन, मैं पीएचडी कंप्लीट नहीं कर पाई, जिससे मेरा प्रमोशन रुक गया. बावजूद इसके मैंने शादी निभाने की पूरी कोशिश की, मगर जब सामने वाला इंसान ही सही न हो तो भला आपकी कोशिश कैसे क़ामयाब हो सकती है. मेरे घरवालों ने अपनी ज़िद्द और स्वार्थ के लिए भावनाओं का सहारा लिया, लेकिन इससे मेरी न स़िर्फ पर्सनल, बल्कि प्रोफेशनल लाइफ भी ख़राब हो गई. पैरेंट्स का ऐसा प्यार भला किस काम का?” ऐसा स़िर्फ सुनीता के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि हमारे समाज में कई लड़कियों के साथ ऐसा हुआ है और अब भी हो रहा है. अपने बच्चों के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले पैरेंट्स भी कभी-कभी बच्चों की ख़ुशी से ज़्यादा अपने स्वार्थ को वरीयता देते हैं. ये स्वार्थ कभी सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है, तो कभी परिवार की मान-मर्यादा, तो कभी उनके सपनों से.

साइकोलॉजिस्ट श्रीकांत कोरघडे कहते हैं, “इस तरह का व्यवहार वही पैरेंट्स करते हैं जो अनकंडिशनल लव का मतलब नहीं समझते. उनका ये बिहेवियर ग़लत पैरेंटिंग का नतीजा है. इतना ही नहीं, वो अपने बच्चे को भी ऐसा ही अपरिपक्व व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. आगे चलकर बच्चा भी वही दोहराएगा, क्योंकि बच्चे माता-पिता से ही सीखते हैं.”

ज़रूरी है मज़बूत बॉन्डिंग
मैरिज काउंसलर व साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव आनंद कहते हैं, “रिश्तों का मतलब है मज़बूत बॉन्डिंग और एक-दूसरे को अच्छी तरह समझना, एक-दूसरे की परवाह करना, उनकी भावनाओं/विचारों की क़द्र करना. माता-पिता को अपनी बेटी को प्यार और सहानुभूति से समझने की कोशिश करनी चाहिए. उस पर जबरन अपनी इच्छाएं और विचार नहीं थोपने चाहिए. लविंग और केयरिंग पैरेंट्स होने के नाते आपको अपने बच्चों को ख़ुद से गहराई से जुड़े होने का एहसास दिलाना चाहिए, क्योंकि ये एहसास उन्हें आपके ख़िलाफ़ कोई भी क़दम उठाने से रोकेगा.”

पढ़ाई/करियर को लेकर
अब तो बच्चों की पढ़ाई और करियर बच्चों से ज़्यादा उनके पैरेंट्स के लिए पड़ोसी से ख़ुद को ऊंचा साबित करने का ज़रिया बन गया है. यदि पड़ोस वाली सविता भाभी का बेटा डॉक्टर बन गया, तो अपने बेटे/बेटी को भी डॉक्टर/इंजीनियर बनाना प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है, भले ही बच्चे की उस विषय में रुचि हो या न हो. ‘देखो बेटा, तुम्हारे लिए हम दिन-रात एक किए रहते हैं, हमारी सारी उम्मीदें तुम से ही हैं. तुम्हें किसी भी तरह एग्ज़ाम में 90 परसेंट तो लाना ही होगा, नहीं तो हमारा दिल टूट जाएगा. शर्मा जी के बेटे को 5 का पैकेज मिला है, तो तुम्हें भी कम से कम 4 का पैकेज तो मिलना ही चाहिए, वरना हम सोसायटी में क्या मुंह दिखाएंगे…’
ऐसी ही न जाने कितनी बातें या यूं कहें भावनात्मक तानों से पैरेंट्स बच्चों का जीना दुश्‍वार कर देते हैं. इससे बच्चा कभी भी कोई काम खुलकर नहीं कर पाता, हमेशा दबाव में जीता रहता है. साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, “यदि पैरेंट्स पॉज़िटिव तरी़के से अपने बच्चे की किसी से तुलना करते हैं या उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं तब तो ठीक है, वरना इससे बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है.”

shutterstock_125529989

असुरक्षा का डर
हमारे लिए बच्चों की ख़ुशी से बढ़कर और कुछ नहीं है, हमारी तो सारी दुनिया ही बच्चों में बसती है… आपने अक्सर पैरेंट्स को ऐसा कहते सुना होगा और ये सच भी है, मगर कुछ पैरेंट्स ऐसा स़िर्फ कहते हैं, करते नहीं. मिसेज़ शर्मा ने अपने इकलौते बेटे राहुल की शादी बड़े धूम-धाम से की, बहू (स्मृति) भी बहुत सुंदर-सुशील मिली, मगर शादी के एक साल के भीतर ही कार एक्सिडेंट में राहुल की मौत हो गई. बेटे की अचानक मौत से पूरा परिवार सकते में आ गया. स्मृति की तो मानो दुनिया ही उजड़ गई, मगर दुख की इस घड़ी में भी ख़ुद को मज़बूत करके उसने सास-ससुर को संभाला. बीतते व़क्त के साथ ज़ख्म भी हल्के होते गए, मगर स्मृति की ज़िंदगी का सूनापन तो आज भी बरक़रार था. एक दिन स्मृति के मायकेवालों ने उसके सास-ससुर के सामने स्मृति की दूसरी शादी का प्रस्ताव रखा. शादी की बात सुनते ही बहू को हमेशा बेटी मानने वाले, उसकी ख़ुशियों की बात करने वाले स्मृति के सास-ससुर के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. उन्हें अपना बुढ़ापा असुरक्षित लगने लगा. हमेशा उसकी ख़ुशियों की चिंता करने वाले सास-ससुर आज ख़ुद दुबारा उसका घर नहीं बसाना चाहते, क्योंकि अब उन्हें अपनी जवान बहू से ज़्यादा चिंता अपने बुढ़ापे की थी.

भावनाओं का भार
साइकोलॉजिस्ट माधवी सेठ कहती हैं, “हर रिश्ते में लोग कहीं न कहीं एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं, मगर जब ये निर्भरता ज़रूरत से ज़्यादा हो यानी सारी हदें पार कर जाए तो ये बर्डन या बैगेज बन जाता है. भावनाओं के इस भार को इमोशनल अत्याचार कहा जा सकता है. हाल ही में मेरे पास कॉल सेंटर में काम करने वाली एक लड़की का केस आया. पिता की मौत के बाद मां और उसकी बहन दोनों उस पर निर्भर हो गई. हालांकि मां ने खुलकर कभी उससे मदद नहीं मांगी, फिर भी लड़की मां की आर्थिक मदद करने लगी. मां और बहन की मदद के चक्कर में 5-6 साल निकल गए. इस बीच न तो वो आगे पढ़ाई कर सकी और न ही सेटल हो पाई. साथ ही कॉल सेंटर की नौकरी की वजह से उसकी सेहत भी ख़राब हो गई, वज़न बहुत बढ़ गया. अब जब वो सेटल होना चाहती है, तो उसके पास पैसे नहीं हैं और मां कहती है कि मैं कहां से तुम्हारी मदद करूं, मेरे पास कुछ नहीं है. ये लड़की बिना कहे अपने परिवार का बोझ तो ढोती रही, मगर किसी ने उसकी भावनाओं की क़द्र नहीं की और भावनाओं के इस बवंडर में फंसकर वो लड़की ख़ुद डिप्रेशन का शिकार हो गई है.” एक अन्य मामले में मां-बाप अपने दोनों बेटों में भेदभाव करते थे. बड़ा बेटा दिमाग़ से कमज़ोर था और देखने में भी बहुत अच्छा नहीं था, जबकि छोटा बेटा बहुत स्मार्ट दिखता था. पैरेंट्स हमेशा बड़े बेटे की उपेक्षा करते और छोटे को ज़्यादा अहमियत देते थे, जिससे वो अंदर ही अंदर टूट गया. जब वो मेरे पास काउंसलिंग के लिए लाया गया तो उसका एकेडमिक बहुत ख़राब था. फिर धीरे-धीरे काउंसलिंग के ज़रिए मैंने उसमें आत्मविश्‍वास जगाया और वो अपनी फैमिली का पहला ग्रैज्युएट बन गया. पैरेंट्स को कभी भी अपने दो बच्चों में फ़र्क़ नहीं करना चाहिए. इससे बच्चों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और पैरेंट्स के इमोशनल अत्याचार से उनका आत्मविश्‍वास कमज़ोर हो जाता है.

 

shutterstock_96473720

रिश्तों में खोखलापन
आजकल के रिश्ते ऊपरी तौर पर भले ही मज़बूत दिखें, मगर अंदर से वो बिल्कुल खोखले और सतही होते जा रहे हैं. उनमें गहराई नहीं है, इसलिए लोग अपनों को भावनात्मक रूप से परेशान/टॉर्चर करने से परहेज़ नहीं करते. इस तरह का इमोशनल अत्याचार बाप-बेटी, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका… हर रिश्ते की जड़ों को कमज़ोर कर देता है. फिर इन रिश्तों में वो पहले वाला प्यार, सम्मान, विश्‍वास नहीं रह जाता.

हम ख़ुद भी हैं ज़िम्मेदार
कई बार इमोशनल बैगेज के लिए दूसरे नहीं, हम ख़ुद ही ज़िम्मेदार होते हैं. डॉ. माधवी कहती हैं, “कुछ दिनों पहले मेरे पास एक केस आया, एक परिवार में 3 बहनें रहती हैं. पिता की मौत के बाद एक कज़िन बड़ी बहन का शोषण करता है जिससे वो डिप्रेशन की शिकार हो जाती है और शादी न करने का फैसला करती है. उसकी देखा-देखी या यूं कहें कि उसे इमोशनल सपोर्ट देने के लिए दूसरी और तीसरी नंबर की बहन भी शादी न करने का निर्णय लेती हैं, मगर कुछ सालों बाद सबसे छोटी बहन शादी कर लेती है. अब दूसरे नंबर की बहन को लगता है कि वो अकेली हो गई, क्योंकि बड़ी की तो उम्र ज़्यादा हो गई है और छोटी ने घर बसा लिया, ऐसे में भावनाओं के बवंडर में वो ख़ुद को अकेला महसूस करने लगती है. यहां किसी और ने नहीं, बल्कि ख़ुद उसने अपने ऊपर अत्याचार किया.”

जब रिश्ता हो गहरा
डॉ. राजीव आनंद कहते हैं, “जो रिश्ते गहराई से जुड़े होते हैं वहां किसी तरह का दबाव, ज़बर्दस्ती, अत्याचार, मैं और तुम जैसे शब्द नहीं आते. ऐसे रिश्ते में दो लोग चाहे वो कोई भी हों (पति-पत्नी, बच्चे-पैरेंट्स, प्रेमी-प्रेमिका), एक-दूसरे के इतने क़रीब और इस तरह जुड़े होते हैं जैसे वो एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हों. ऐसे में वो कभी एक-दूसरे का दिल नहीं दुखा सकते, क्योंकि कोई अपने ही हाथ-पैर और चेहरे को चोट नहीं पहुंचा सकता. हां, वो दूसरों को चोट पहुचांने के बारे में ज़रूर सोच सकता है. दरअसल, जब हमारे अनुभव हमें एक-दूसरे से दूर और अलग कर देते हैं, तब इमोशनल अत्याचार की गुंजाइश बढ़ जाती है.” किसी भी रिश्ते में जब ‘मैं’ हावी हो जाता है, तब एक-दूसरे की ख़ुशी से ज़्यादा उनके लिए अपने अहं की संतुष्टि ज़रूरी होती है, इसके लिए वो कोई भी रास्ता अख़्तियार करने से पीछे नहीं हटते.

– कंचन सिंह