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किस थेरेपीः Kiss के 11 Amazing हेल्थ बेनीफिट्स(Kiss therapy: 11 Amazing Health Benefits of Kiss)

Uyumadan önce sevgiliye söylenecek en güzel sözler, en güzel aşk mesajları (2015) 3
मुहब्बत के इज़हार का ख़ूबसूरत तरीका है किस यानि चुंबन. किस दो प्यार करनेवालों को और क़रीब लाने में मदद करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं किस के कई हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं और कई शोधों से ये बात साबित भी हो चुकी है.

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1. स्ट्रेस दूर करता है

किसिंग के दौरान स्त्री-पुरुष शरीर में कोर्टिज़ोल हार्मोन का स्तर कम होता है और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन में बढ़ोतरी होने लगती है. चूंकि स्ट्रेस के लिए ये दोनों हार्र्मोेन्स ज़िम्मेदार होते हैं, इसलिए कोर्टिज़ोल हार्मोन के कम होने और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ने से शरीर का तनाव दूर हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इतना ही नहीं, चुंबन तनाव के लिए ज़िम्मेदार ऑक्सीटोसिन हार्मोन के स्तर को कम करके चिंता को भी दूर कर देता है.

 

2. दिल को रखे तंदुरुस्त

चुंबन के दौरान शरीर में एड्रेनालिन नाम का हार्मोन बनता है जो दिल के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है. चुंबन रक्त में एपिनेफ्रीन भी छोड़ता है, जिसके कारण दिल में रक्त का संचार बहुत तेज़ी से होता है. चुंबन पूरे शरीर में रक्त संचार के लिए दिल की मदद करता है. इससे ब्लडप्रेशर कम करने और शरीर में रक्त संचार ठीक रखने में मदद मिलती है. तो अब न सिर्फ़ दिल को ख़ुश करने, बल्कि इसे सेहतमंद रखने के लिए किस करें.

 

3. इम्यूनिटी को सुधारे

चुंबन संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडीज़ बढ़ाता है, जिससे रक्त में हिस्टामाइन भी बढ़ता है. यह छींक व आंसू या सूजन के रूप में दिखता है. इन क्रियाओं का मतलब शरीर वायरस या बैक्टीरिया से लड़ रहा है. इससे इम्यून सिस्टम बहुत मज़बूत होता है. यह महिलाओं को मसाइटोमेगालोफ वायरस से बचाने में मदद करता है जो गर्भावस्था में शिशु को जन्मजात अंधा बना सकता है. यह वायरस केवल गर्भवती महिलाओं को नुकसान पहुंचाता है.

 

4. रखे हमेशा फिट

जब स्त्री-पुरुष के होंठ एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं, तब दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो जाती है. उस समय दिल एड्रेनालाइन हार्मोन या एपिनेफ्रीन के साथ न्यूरोट्रांसमीटर रक्त में रिलीज़ करता है. एड्रेनालाइन के स्तर में बढ़ोतरी से मेटाबॉलिज़्म दर भी बढ़ती है, जो ज़्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करता है. क़रीब एक मिनट के किस के दौरान दो से तीन कैलोरी बर्न होती है. हर पैशनेट किस से 8 से 16 कैलोरीज़ बर्न की जा सकती है.

 

5. चेहरे पर ग्लो लाता है

एक किसिंग सेशन से टिश्यूज़ टाइट व टोन्ड होते हैं और पूरे चेहरे में रक्त संचार तेज़ी से होता है. इसके फलस्वरूप त्वचा ख़ूबसूरत हो जाती है. किस सेशन के समय ओर्बिचुलारिस ओरिस नाम का हार्मोन सबसे ज़्यादा सक्रिय रहता है जो चेहरे से जुड़े अंगों को टोन करते हैं, जिससे आप लंबे समय तक यंग नज़र आते हैं.

 

6. दांतों को बनाए चमकीला

चुंबन दांतों की सफ़ाई करने का सबसे सहज, सरल और नैसर्गिक तरीक़ा है. किस सेशन के दौरान मुंह के अंदर जो लार बनती है, वह अपने एसिडिक गुणों के कारण दांतों पर जमे प्लाक को तोड़ने और दांतों में कैविटी बनने से रोकता है, क्योंकि लार आपके दांतों में फंसे खाने के टुकड़ों को साफ़ करके दांतों को सड़ने से रोकता है. जो लोग मोतियों जैसे सफ़ेद दांतों की ख़्वाहिश रखते हैं, उनके लिए किस फ़ायदेमंद है. किस दांतों मेें कैविटी भरते हैं और बैक्टीरिया ख़त्म करते हैं.

 

7. दर्द को करे कम

किस से शरीर में एड्रेनालाइन हार्मोन बनता है जो दर्द की कम करने में मददगार होता है और इसके साथ-साथ शरीर एंडोर्फिन नामक नेचुरल केमिकल को शरीर में छोड़ता है जो दर्द कम या दूर करने के लिए मॉर्फिन जैसी नशीली दवाई से ज़्यादा पावरफुल होती है.

 

8. लंबी उम्र के लिए करें किस

हर महिला अपने पति को सुबह के समय गुडबाय किस देकर उनकी ज़िंदगी के पांच साल बढ़ा सकती है. जर्मन चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के समूह ने दावा किया है कि शादीशुदा पुरुष अगर सुबह के समय अलविदा किस अपने पार्टनर को दें, तो उनका जीवन उन शादीशुदा पुरुषों से ज़्यादा लंबा होता है जो सुबह के समय अपने पार्टनर को अलविदा किस नहीं देते.

 

9. मनोदशा में सुधार

चुंबन डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे मूड अच्छा होता है और भावनात्मक उथल-पुथल शांत होती है. अगर आपका मन ठीक नहीं है, तो अपने पार्टनर के साथ जमकर एक किस सेशन कीजिए. आप फ्रेश फील करने लगेंगे.

 

10. संबंधों में प्रगाढ़ता

चुंबन दो लोगों के आपसी रिश्ते को बहुत ज़्यादा मज़बूत और मधुर बनाता है. इसीलिए जब भी हम चुंबन लेते हैं, तब पुरुष और महिला दोनों के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन बहुत तेज़ी से बनता है. इसीलिए इस हार्मोन को लव हार्मोन भी कहते हैं, क्योंकि यह अपोज़िट सेक्स के बीच रिश्ते को और गहरा करता है. संबंध अच्छे होने पर आदमी ख़ुश रहता है और स्वस्थ रहने के लिए ख़ुश होना पड़ता है.

 

11. दांपत्य जीवन करे सफल

पति-पत्नी के बीच मन-मुटाव के बाद सुलह के लिए किस सबसे बढ़िया ज़रिया है. जो दंपति हमेशा एक-दूसरे को किस करते रहते हैं, उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत अच्छी चलती है. जब चुंबन लेते हैं, तब दोनों के शरीर एक-दूसरे के साथ संवाद करने लगते हैं. विवाह के लिए और विवाह के बाद हेल्दी बच्चों के लिए भी किसिंग सेशन बहुत ज़रूरी है.

पहला अफेयर: यादों का झोंका (Pahla Affair: Yaadon ka Jhonka)

Love (1)

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पहला अफेयर:  यादों का झोंका (Pahla Affair: Yaadon ka Jhonka)

तुम्हारी याद अब भी बहुत आती है. मुद्दत गुज़र गए तुमसे बिछड़े, पर मेरी यादों के कारवां में आज भी तुम मेरे साथ हो. तन्हाई में जब भी बैठती हूं, तुम्हारी तस्वीर पलकों की चिलमन पर आंसू की बूंद बन आ बैठती है. वे कितने ख़ुशनसीब पल थे, जब तुम मेरे साथ थे. तुमने अपनी मुहब्बत का इज़हार खुलेआम कभी नहीं किया था, पर क्या मुहब्बत शब्दों की मोहताज होती है? मेरी हर वक़्त फ़िक्र करना, अपनी हर बात मुझसे शेयर करना, मेरी हर समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करना… क्या ये सब बातें गवाह नहीं थीं कि तुम मुझसे कितना प्यार करते थे?

तुम मेरे परिवार की भी उतनी ही फ़िक्र करते थे. पापा बीमार थे, तो मैंने कहा था तुमसे, “मैं अकेली हूं. कभी-कभी मिलने आते रहना.” तो तुम हमेशा उनकी बीमारी के दौरान अपने व्यस्ततम पलों से समय निकालकर पापा को देखने आते रहे. मैं कॉलेज में व्यस्त थी, तुम पत्रकारिता के छात्र थे. तुम्हारा करियर नहीं बना था. तुम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी काफ़ी मेहनत से कर रहे थे.

तुम्हारी भाषा अच्छी थी, अच्छा लिखते थे. मुझे उम्मीद थी कि तुम सफल पत्रकार बनोगे. मैं कविताएं लिखती थी. मेरी हर कविता के पाठक थे तुम और शायद प्रशंसक भी. मुझे ऐसा लगता था कि तुम मुझसे कभी नहीं बिछड़ोगे, हमेशा साथ रहोगे, पर मुझे क्या पता था कि वक़्त एक ऐसा तूफ़ान लाएगा कि हमारी ज़िंदगी बिखर जाएगी और हम ऐसे अलग होंगे कि फिर कभी नहीं मिल पाएंगे.

मुझे तो उस नादां उम्र में पता भी नहीं था कि हमारे बीच यह जो कुछ भी है, उसे प्यार कहते हैं. यह सच है कि यह ऐसा प्यार था कि हमने एक-दूसरे को कभी स्पर्श तक नहीं किया था. स़िर्फ मन की छुअन थी हमारे बीच, लेकिन जब तुम्हें मुझसे अलग किए जाने की कोशिश की जाने लगी, तो मैं दर्द से तड़प उठी और शायद तुम्हारा भी यही हाल हुआ और तब मैंने जाना कि तुम्हारे और मेरे बीच और कुछ नहीं, बल्कि प्यार ही था.

मेरे और तुम्हारे प्यार के बीच मेरा परिवार आड़े आया और यह मैं आज तक नहीं जान पाई कि क्यों? हम एक ही जाति के थे, जाति-बंधन की समस्या नहीं थी. तुम बहुत ही अच्छे परिवार के सभ्य, सुसंस्कृत व नेक लड़के थे. तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल था. हम विवाह बंधन में भी बंध सकते थे. फिर क्यों मेरे परिवार, ख़ासकर पापा ने तुम्हारा इतना उग्र विरोध किया? वो भी इतने दिनों के घनिष्ठ घरेलू संबंधों के बाद. अचानक उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा.

तुम तो जानते भी नहीं थे. तुम्हारे आने पर मुझे कमरे में कैद कर दिया जाता था. तुमसे कोई बात भी नहीं करता. अपनी नहीं, तुम्हारी इस उपेक्षा से आहत होकर एक दिन मैंने तुमसे कह ही दिया, “प्लीज़, आप मत आइए, पापा मना करते हैं.” और तुमने जवाब में बस इतना ही कहा था, “अगर पीछे हटना ही था, तो आगे बढ़ना ही नहीं चाहिए था.” पर शायद लड़ते-लड़ते मुझमें विद्रोह की ताक़त ख़त्म हो गई थी और मैं परास्त हो गई थी और इसी वजह से तुम मुझसे इस कदर रूठ गए कि फिर वापस नहीं लौटे.

लौटते तो जानते कि तुम्हें खोकर मेरी हालत पागलों जैसी हो गई थी. मेरा प्यार भी इतना ही मुक़म्मल था, जितना तुम्हारा, शायद तुमसे भी ज़्यादा हेमंत. हम दोनों को अलग करने के लिए मेरे परिवार ने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया. तुमसे संपर्क के सारे रास्ते उन्होंने मेरे लिए बंद कर दिए. कितने दिनों तक मैं तुम्हारी बाट जोहती रही, जीने की आस मरी नहीं थी, इसलिए ज़िंदा लाश बनकर जीती रही, पर तुम नहीं आए. अब तो सारी आस ही छोड़ चुकी हूं.

बस, सोचा कि मेरी सहेली को लिखकर अपने दिल का बोझ हल्का कर लूं. मैं जानती नहीं कि तुम आज कहां हो? किस हाल में हो? शादी कब की हो गई होगी, पर मैंने तो शादी भी नहीं की. इसी परिवार में उम्ऱकैद चुन लिया है मैंने. तुम्हारे लिए मेरी बस यही आरज़ू है, ङ्गङ्घमेरे दामन में कांटे ही कांटे आए तो क्या, रब तुम्हारी झोली फूलों से भर दें.फफ तुम जहां भी हो, मुझे माफ़ कर देना कि मैं अपना प्यार पाने के लिए तुम्हारा उस वक़्त साथ नहीं दे पाई, जिसकी सज़ा मैं आज तक भुगत रही हूं.

सभी प्यार करनेवालों के लिए मेरी यही दुआ है कि दुनिया छूटे, रब छूटे, पर साथी का साथ न छूटे.

– निमिषा कुमारी

रिश्तों में क्यों होता है इमोशनल अत्याचार? (Why is emotional abuse in relationship?)

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हर रिश्ते में कहीं न कहीं प्यार के भीतर स्वार्थ छुपा होता है और इस स्वार्थ को पूरा करने के लिए लोग जब अपनों को ही भावनात्मक रूप से आहत करने लगते हैं या हम ख़ुद अकारण भावनाओं का भार ढोने लगते हैं, तो ये इमोशनल अत्याचार बन जाता है. इसका दायरा किसी एक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी चपेट में हर रिश्ता आ चुका है. रिश्तों में बढ़ते इमोशनल अत्याचार पर पेश है ख़ास रिपोर्ट.

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हर रिश्ते में चाहे वो पति-पत्नी का हो, प्रेमी-प्रेमिका का या माता-पिता व बच्चे का हो… कहीं न कहीं स्वार्थ घर कर गया है और इसी स्वार्थ ने जन्म दिया है एक नए शब्द इमोशनल अत्याचार को. भावनाओं का सहारा लेकर अपनों से ज़बर्दस्ती कोई बात मनवाना या ऐसी स्थिति पैदा करना कि वो ख़ुद के बारे में सोच न पाएं, इमोशनल अत्याचार है. जब कोई अपना सीधे तरी़के से आपकी बात मानने के लिए तैयार नहीं होता, तो अक्सर आप भी अपनी भावनाओं का सहारा लेते हैं. मगर इस तरह भावनाओं की आड़ में थोपी गई मर्ज़ी कई बार बेहद ख़तरनाक हो सकती है. ये धीरे-धीरे रिश्ते की जड़ को खोखला कर देती है और अपनों के दिल में आपके लिए फिर कोई जगह नहीं रह जाती. इतना ही नहीं, कई बार हम ख़ुद अपने ऊपर भावनाओं का बोझ लाद लेते हैं जिससे कुछ समय बाद घुटन महसूस होने लगती है.

थोपे हुए रिश्ते का सच
दिल्ली की सुनीता ने घरवालों के दबाव और इमोशनली परेशान करने पर शादी तो कर ली, मगर वो इस रिश्ते को निभा नहीं पाई, क्योंकि उनका हमसफ़र सही इंसान नहीं निकला. सुनीता कहती हैं, “मैं शादी के लिए मेंटली तैयार नहीं थी, मैंने अपने घरवालों से थोड़ा व़क्त मांगा ताकि मेरी पीएचडी कंप्लीट हो जाए और मेरा प्रोफेसर बनने का सपना पूरा हो जाए, मगर वो नहीं माने. ख़ासकर मेरे दादाजी, जो हमेशा ये कहते रहते कि मेरे मर जाने पर तुम शादी करना, मेरी आख़िरी इच्छा है तुम्हें दुल्हन बनते देखना, तुम आजकल के बच्चे बस, अपने बारे में सोचते हो… बाकी घर वाले भी हमेशा ऐसा ही कुछ कहते रहते. उनके इस तरह के तानों से मैं इतनी तंग आ गई कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. न तो मैं चैन से सो पाती और न ही दिल से कोई काम कर पाती. आख़िरकार उनके इमोशनल अत्याचार से परेशान होकर मैंने बेमन से शादी के लिए हां कर दी. मेरी हां से घरवाले तो ख़ुश हो गए, मगर मैं अंदर ही अंदर घुट रही थी और अपने आप से लड़ रही थी. नतीजतन, मैं पीएचडी कंप्लीट नहीं कर पाई, जिससे मेरा प्रमोशन रुक गया. बावजूद इसके मैंने शादी निभाने की पूरी कोशिश की, मगर जब सामने वाला इंसान ही सही न हो तो भला आपकी कोशिश कैसे क़ामयाब हो सकती है. मेरे घरवालों ने अपनी ज़िद्द और स्वार्थ के लिए भावनाओं का सहारा लिया, लेकिन इससे मेरी न स़िर्फ पर्सनल, बल्कि प्रोफेशनल लाइफ भी ख़राब हो गई. पैरेंट्स का ऐसा प्यार भला किस काम का?” ऐसा स़िर्फ सुनीता के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि हमारे समाज में कई लड़कियों के साथ ऐसा हुआ है और अब भी हो रहा है. अपने बच्चों के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले पैरेंट्स भी कभी-कभी बच्चों की ख़ुशी से ज़्यादा अपने स्वार्थ को वरीयता देते हैं. ये स्वार्थ कभी सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है, तो कभी परिवार की मान-मर्यादा, तो कभी उनके सपनों से.

साइकोलॉजिस्ट श्रीकांत कोरघडे कहते हैं, “इस तरह का व्यवहार वही पैरेंट्स करते हैं जो अनकंडिशनल लव का मतलब नहीं समझते. उनका ये बिहेवियर ग़लत पैरेंटिंग का नतीजा है. इतना ही नहीं, वो अपने बच्चे को भी ऐसा ही अपरिपक्व व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. आगे चलकर बच्चा भी वही दोहराएगा, क्योंकि बच्चे माता-पिता से ही सीखते हैं.”

ज़रूरी है मज़बूत बॉन्डिंग
मैरिज काउंसलर व साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव आनंद कहते हैं, “रिश्तों का मतलब है मज़बूत बॉन्डिंग और एक-दूसरे को अच्छी तरह समझना, एक-दूसरे की परवाह करना, उनकी भावनाओं/विचारों की क़द्र करना. माता-पिता को अपनी बेटी को प्यार और सहानुभूति से समझने की कोशिश करनी चाहिए. उस पर जबरन अपनी इच्छाएं और विचार नहीं थोपने चाहिए. लविंग और केयरिंग पैरेंट्स होने के नाते आपको अपने बच्चों को ख़ुद से गहराई से जुड़े होने का एहसास दिलाना चाहिए, क्योंकि ये एहसास उन्हें आपके ख़िलाफ़ कोई भी क़दम उठाने से रोकेगा.”

पढ़ाई/करियर को लेकर
अब तो बच्चों की पढ़ाई और करियर बच्चों से ज़्यादा उनके पैरेंट्स के लिए पड़ोसी से ख़ुद को ऊंचा साबित करने का ज़रिया बन गया है. यदि पड़ोस वाली सविता भाभी का बेटा डॉक्टर बन गया, तो अपने बेटे/बेटी को भी डॉक्टर/इंजीनियर बनाना प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है, भले ही बच्चे की उस विषय में रुचि हो या न हो. ‘देखो बेटा, तुम्हारे लिए हम दिन-रात एक किए रहते हैं, हमारी सारी उम्मीदें तुम से ही हैं. तुम्हें किसी भी तरह एग्ज़ाम में 90 परसेंट तो लाना ही होगा, नहीं तो हमारा दिल टूट जाएगा. शर्मा जी के बेटे को 5 का पैकेज मिला है, तो तुम्हें भी कम से कम 4 का पैकेज तो मिलना ही चाहिए, वरना हम सोसायटी में क्या मुंह दिखाएंगे…’
ऐसी ही न जाने कितनी बातें या यूं कहें भावनात्मक तानों से पैरेंट्स बच्चों का जीना दुश्‍वार कर देते हैं. इससे बच्चा कभी भी कोई काम खुलकर नहीं कर पाता, हमेशा दबाव में जीता रहता है. साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, “यदि पैरेंट्स पॉज़िटिव तरी़के से अपने बच्चे की किसी से तुलना करते हैं या उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं तब तो ठीक है, वरना इससे बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है.”

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असुरक्षा का डर
हमारे लिए बच्चों की ख़ुशी से बढ़कर और कुछ नहीं है, हमारी तो सारी दुनिया ही बच्चों में बसती है… आपने अक्सर पैरेंट्स को ऐसा कहते सुना होगा और ये सच भी है, मगर कुछ पैरेंट्स ऐसा स़िर्फ कहते हैं, करते नहीं. मिसेज़ शर्मा ने अपने इकलौते बेटे राहुल की शादी बड़े धूम-धाम से की, बहू (स्मृति) भी बहुत सुंदर-सुशील मिली, मगर शादी के एक साल के भीतर ही कार एक्सिडेंट में राहुल की मौत हो गई. बेटे की अचानक मौत से पूरा परिवार सकते में आ गया. स्मृति की तो मानो दुनिया ही उजड़ गई, मगर दुख की इस घड़ी में भी ख़ुद को मज़बूत करके उसने सास-ससुर को संभाला. बीतते व़क्त के साथ ज़ख्म भी हल्के होते गए, मगर स्मृति की ज़िंदगी का सूनापन तो आज भी बरक़रार था. एक दिन स्मृति के मायकेवालों ने उसके सास-ससुर के सामने स्मृति की दूसरी शादी का प्रस्ताव रखा. शादी की बात सुनते ही बहू को हमेशा बेटी मानने वाले, उसकी ख़ुशियों की बात करने वाले स्मृति के सास-ससुर के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. उन्हें अपना बुढ़ापा असुरक्षित लगने लगा. हमेशा उसकी ख़ुशियों की चिंता करने वाले सास-ससुर आज ख़ुद दुबारा उसका घर नहीं बसाना चाहते, क्योंकि अब उन्हें अपनी जवान बहू से ज़्यादा चिंता अपने बुढ़ापे की थी.

भावनाओं का भार
साइकोलॉजिस्ट माधवी सेठ कहती हैं, “हर रिश्ते में लोग कहीं न कहीं एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं, मगर जब ये निर्भरता ज़रूरत से ज़्यादा हो यानी सारी हदें पार कर जाए तो ये बर्डन या बैगेज बन जाता है. भावनाओं के इस भार को इमोशनल अत्याचार कहा जा सकता है. हाल ही में मेरे पास कॉल सेंटर में काम करने वाली एक लड़की का केस आया. पिता की मौत के बाद मां और उसकी बहन दोनों उस पर निर्भर हो गई. हालांकि मां ने खुलकर कभी उससे मदद नहीं मांगी, फिर भी लड़की मां की आर्थिक मदद करने लगी. मां और बहन की मदद के चक्कर में 5-6 साल निकल गए. इस बीच न तो वो आगे पढ़ाई कर सकी और न ही सेटल हो पाई. साथ ही कॉल सेंटर की नौकरी की वजह से उसकी सेहत भी ख़राब हो गई, वज़न बहुत बढ़ गया. अब जब वो सेटल होना चाहती है, तो उसके पास पैसे नहीं हैं और मां कहती है कि मैं कहां से तुम्हारी मदद करूं, मेरे पास कुछ नहीं है. ये लड़की बिना कहे अपने परिवार का बोझ तो ढोती रही, मगर किसी ने उसकी भावनाओं की क़द्र नहीं की और भावनाओं के इस बवंडर में फंसकर वो लड़की ख़ुद डिप्रेशन का शिकार हो गई है.” एक अन्य मामले में मां-बाप अपने दोनों बेटों में भेदभाव करते थे. बड़ा बेटा दिमाग़ से कमज़ोर था और देखने में भी बहुत अच्छा नहीं था, जबकि छोटा बेटा बहुत स्मार्ट दिखता था. पैरेंट्स हमेशा बड़े बेटे की उपेक्षा करते और छोटे को ज़्यादा अहमियत देते थे, जिससे वो अंदर ही अंदर टूट गया. जब वो मेरे पास काउंसलिंग के लिए लाया गया तो उसका एकेडमिक बहुत ख़राब था. फिर धीरे-धीरे काउंसलिंग के ज़रिए मैंने उसमें आत्मविश्‍वास जगाया और वो अपनी फैमिली का पहला ग्रैज्युएट बन गया. पैरेंट्स को कभी भी अपने दो बच्चों में फ़र्क़ नहीं करना चाहिए. इससे बच्चों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और पैरेंट्स के इमोशनल अत्याचार से उनका आत्मविश्‍वास कमज़ोर हो जाता है.

 

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रिश्तों में खोखलापन
आजकल के रिश्ते ऊपरी तौर पर भले ही मज़बूत दिखें, मगर अंदर से वो बिल्कुल खोखले और सतही होते जा रहे हैं. उनमें गहराई नहीं है, इसलिए लोग अपनों को भावनात्मक रूप से परेशान/टॉर्चर करने से परहेज़ नहीं करते. इस तरह का इमोशनल अत्याचार बाप-बेटी, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका… हर रिश्ते की जड़ों को कमज़ोर कर देता है. फिर इन रिश्तों में वो पहले वाला प्यार, सम्मान, विश्‍वास नहीं रह जाता.

हम ख़ुद भी हैं ज़िम्मेदार
कई बार इमोशनल बैगेज के लिए दूसरे नहीं, हम ख़ुद ही ज़िम्मेदार होते हैं. डॉ. माधवी कहती हैं, “कुछ दिनों पहले मेरे पास एक केस आया, एक परिवार में 3 बहनें रहती हैं. पिता की मौत के बाद एक कज़िन बड़ी बहन का शोषण करता है जिससे वो डिप्रेशन की शिकार हो जाती है और शादी न करने का फैसला करती है. उसकी देखा-देखी या यूं कहें कि उसे इमोशनल सपोर्ट देने के लिए दूसरी और तीसरी नंबर की बहन भी शादी न करने का निर्णय लेती हैं, मगर कुछ सालों बाद सबसे छोटी बहन शादी कर लेती है. अब दूसरे नंबर की बहन को लगता है कि वो अकेली हो गई, क्योंकि बड़ी की तो उम्र ज़्यादा हो गई है और छोटी ने घर बसा लिया, ऐसे में भावनाओं के बवंडर में वो ख़ुद को अकेला महसूस करने लगती है. यहां किसी और ने नहीं, बल्कि ख़ुद उसने अपने ऊपर अत्याचार किया.”

जब रिश्ता हो गहरा
डॉ. राजीव आनंद कहते हैं, “जो रिश्ते गहराई से जुड़े होते हैं वहां किसी तरह का दबाव, ज़बर्दस्ती, अत्याचार, मैं और तुम जैसे शब्द नहीं आते. ऐसे रिश्ते में दो लोग चाहे वो कोई भी हों (पति-पत्नी, बच्चे-पैरेंट्स, प्रेमी-प्रेमिका), एक-दूसरे के इतने क़रीब और इस तरह जुड़े होते हैं जैसे वो एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हों. ऐसे में वो कभी एक-दूसरे का दिल नहीं दुखा सकते, क्योंकि कोई अपने ही हाथ-पैर और चेहरे को चोट नहीं पहुंचा सकता. हां, वो दूसरों को चोट पहुचांने के बारे में ज़रूर सोच सकता है. दरअसल, जब हमारे अनुभव हमें एक-दूसरे से दूर और अलग कर देते हैं, तब इमोशनल अत्याचार की गुंजाइश बढ़ जाती है.” किसी भी रिश्ते में जब ‘मैं’ हावी हो जाता है, तब एक-दूसरे की ख़ुशी से ज़्यादा उनके लिए अपने अहं की संतुष्टि ज़रूरी होती है, इसके लिए वो कोई भी रास्ता अख़्तियार करने से पीछे नहीं हटते.

– कंचन सिंह

6 Interesting टाइप्स के कपल्सः जानें आप कैसे कपल हैं? (6 Interesting Types of Couples: What Type of Couple are You?)

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हर कपल्स में कोई न कोई ख़ास बात होती है और अपनी इसी ख़ासियत के लिए ही वे पहचाने जाते हैं. किसी को परफेक्ट कपल्स से नवाज़ा जाता है, तो कोई ड्रामेबाज़ी में अव्वल होता है. आप भी तो जानना चाहेंगे कि आप किस तरह के कपल हैं, तो देर किस बात की? आइए, आप भी जानें कि कैसे कपल्स हैं आप?

 

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1. पैरेंटिंग कपल्स

इस तरह के कपल्स में पति-पत्नी में से कोई एक पैरेंट्स (अभिभावक) की तरह व्यवहार करता है.
– पति चाहता है कि पत्नी मां की तरह उसकी देखभाल करे.
– अच्छा खाना खिलाए.
– उसकी सारी ज़रूरतों का ध्यान रखे.
– मां की तरह वात्सल्य दे.
– कई बार पत्नी भी इसी तरह की इच्छा रखती है और पति में अपने पिता को देखती है.
– वो चाहती है कि पति, पिता की तरह उससे स्नेह भरा व्यवहार करे.
– उसकी मुसीबतों से रक्षा करे और केयर करे.
समस्याः बात यदि इतनी-सी हो, तो ज़्यादा मुश्किल नहीं आती और एक हेल्दी रिलेशनशिप चलती रहती है, लेकिन जब अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं, तब रिलेशनशिप में दरार पड़ सकती है.
कारणः सुधा के पैरेंट्स ओवर प्रोटेक्टिव थे और उससे बेहद प्यार करते थे. सुधा चाहती थी कि उसके पति रोज़ सुबह उठने के बाद उसके गालों पर किस करें, क्योंकि उसके पिता भी ऐसा ही करते थे. कुछ समय तक तो सब ठीक चलता रहा, मगर बाद में पति को इससे चिढ़ होने लगी और यही बात उनके आपसी झगड़े की वजह बन गई. इस तरह के व्यवहार का गहरा संबंध व्यक्ति के बचपन से जुड़ा होता है.

2. पेंडुलम कपल्स

ये कपल्स कभी एक-दूसरे की केयर, तो कभी उपेक्षा करते हैं यानी पेंडुलम की तरह कभी इस तरफ़, तो कभी उस तरफ़. इनका मूड बदलता रहता है, कभी प्यार, तो कभी उपेक्षा.
– इस तरह के कपल्स में एक पार्टनर दूसरे का बहुत ज़्यादा ख़्याल रखता है, जबकि दूसरा पार्टनर उसके द्वारा की जानेवाली केयर पर ध्यान नहीं देता.
– फिर कभी दूसरा पार्टनर केयर करने लगता है, तो पहला पार्टनर उपेक्षा करता है.
– इनकी रिलेशनशिप एक पहेली बनी रहती है.
समस्याः रवि अपनी पत्नी को ख़ुुश करने के लिए रोज़ सुबह चाय बनाता था, लेकिन पत्नी इन सबके प्रति उदासीन रहती थी. जब पत्नी कभी अपना प्यार दर्शाने के लिए रवि के लिए कुछ करती, तब रवि उसकी ओर ध्यान न देता. इस तरह के कपल्स शादीशुदा होने के बावजूद अपना पसंदीदा पार्टनर ढूंढ़ते रहते हैं, जिस कारण हमेशा एक तरह के अपराध भाव से भी ग्रस्त रहते हैं.
कारणः इस तरह की संभावनाएं अक्सर उन कपल्स में पाई जाती है, जो मानसिक रूप से एक-दूसरे के अनुरूप नहीं होते. इसका एक कारण दोनों का अलग-अलग कल्चरल बैकग्राउंड होना भी हो सकता है. ये बात दोनों अच्छी तरह जानते हैं कि वे ङ्गमेड फॉर इच अदरफ नहीं हैं, पर वे एक-दूसरे को कह नहीं पाते.

3. इनसिक्योर कपल्स

इस तरह के कपल्स में एक पार्टनर का आत्मविश्‍वास इतना कम होता है कि वे दूसरे पार्टनर को आत्मविश्‍वास के मामले में बहुत ऊंचाई पर रखते हैं.
– ये कोई भी काम या निर्णय लेने के लिए अपने पार्टनर पर निर्भर रहते हैं.
– ये दूसरे पार्टनर को अपना आदर्श मानते हैं.
– इन्हें ख़ुद से ज़्यादा अपने पार्टनर पर विश्‍वास होता है.
समस्याः इनकी ख़ुद के बारे में बहुत ही नकारात्मक व ग़लत धारणाएं होती हैं, इसीलिए दूसरा पार्टनर हमेशा इन पर हावी रहता है और हमेशा पहले पार्टनर को उनकी कमियों की याद दिलाता रहता है. इससे ये ख़ुद को असुरक्षित महसूस करते हैं.
कारणः वैसे ये इस सच्चाई को जानते हैं कि दूसरा पार्टनर भले ही ख़ुद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा हो, लेकिन वो भी परफेक्ट नहीं है. उसमें भी कमियां हैं, पर साथ ही ये भी सोचते हैं कि ख़ुद अकेले तो ये कुछ कर नहीं पाते और इससे बेहतर पार्टनर इन्हें मिल ही नहीं सकता था, इसलिए दांपत्य जीवन की गाड़ी चलती रहती है.

4. परफेक्ट कपल्स

परफेक्ट कपल्स एक-दूसरे की हर बात का पूरा ख़्याल रखते हैं और लोगों के सामने आदर्श जोड़े का उदाहरण पेश करते हैं.
– इस तरह के कपल्स एक-दूसरे के प्यार में इस तरह डूबे रहते हैं कि इनकी घनिष्ठता दूसरों के दिल में जलन और डर पैदा
करती है.
– ये लोगों से हमेशा अपने पार्टनर की तारीफ़ ही करते रहते हैं.
– ये हर वो काम करते हैं, जिससे लोग इन्हें परफेक्ट कपल्स समझें.
– ये कपल्स पार्टियों या फंक्शन में एक-दूसरे की पसंद और मैच करते हुए कपड़े पहनते हैं.
– ये हर छोटी-छोटी बात पर अपने पार्टनर को कॉम्पलीमेंट देना नहीं भूलते.
समस्याः इस तरह के रिश्ते में संभावना होती है कि एक पार्टनर बॉसगिरी नेचर का हो और दूसरा सहनशील या दब्बू प्रवृत्ति का हो, लेकिन ये कपल्स अपनी रिलेशनशिप में कुछ ग़लत होने की बात से हमेशा इंकार करते हैं.
कारणः इन्हें देखकर लोगों को भले ही ङ्गपरफेक्ट कपलफ का भ्रम हो, लेकिन हो सकता है कि अंदर की स्थिति इतनी अच्छी न हो और शायद उसे छुपाने के लिए ये ङ्गहैप्पी मैरिजफ का दिखावा कर रहे हों.

5. ड्रामेबाज़ कपल्स

इस तरह के कपल्स छोटी-छोटी बातों पर भी बहस करने से बाज़ नहीं आते. साथ ही एक-दूसरे की कमियों को हमेशा लोगों के सामने उजागर करने से भी नहीं चूकते.
– इसमें दोनों कपल्स में परिपक्वता की कमी होती है.
– इन्हें पार्टनर की भावनाओं की क़दर नहीं होती.
– ये कपल्स अक्सर बेवजह बहस करते रहते हैं.
समस्याः कई बार ये कपल्स सार्वजनिक स्थानों पर आपस में कलह करना शुरू कर देते हैं. जब तक दोनों एक-दूसरे से वाद-विवाद न कर लें, इन्हें चैन नहीं आता. दोस्तों-रिश्तेदारों के सामने झगड़ा होने पर ये पारिवारिक मुद्दों के साथ-साथ सेक्स लाइफ पर भी कटाक्ष करने से गुरेज़ नहीं करते.
कारणः इसका कारण शायद यह हो सकता है कि एक या दोनों पार्टनर अपने माता-पिता को लड़ते-झगड़ते देखते हुए ही बड़े हुए हों. इनकी रिलेशनशिप हेल्दी न होने के कारण ये ख़ुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. ये हमेशा एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश में लगे रहते हैं. ये साथ-साथ इसलिए रहते हैं कि या तो इन्हें आर्थिक फ़ायदा हो रहा हो या तलाक़ लेने में कोई बड़ी अड़चन हो.

6. मैच्योर कपल्स

ये स्थिर व प्रतिष्ठित कपल्स होते हैं. इन्हें एक-दूसरे को केवल आदर देना ही नहीं आता, बल्कि एक-दूसरे को स्पेस और प्राइवेसी देना भी आता है.
– इस तरह के कपल्स अपने पार्टनर की अच्छाइयों व बुराइयों को अच्छी तरह समझते हैं.
– ये रिलेशनशिप में होनेवाले उतार-चढ़ाव को भी सहजता से स्वीकार करते हैं.
– इस तरह के कपल्स सार्वजनिक जगहों पर अपनी समस्याओं की कभी भी चर्चा नहीं करते.
– ये पार्टनर्स एक-दूसरे पर हावी होने की बजाय खुलकर लोगों से बातचीत का लुत्फ़ उठाते हैं.
समस्याः कभी-कभी ज़रूरत से ज़्यादा मैच्योरिटी इनके रिश्ते को नीरस बना देती है. इन कपल्स में विवाहित जोड़ों के बीच होनेवाली मीठी नोंक-झोंक कम ही देखने को मिलती है.
कारणः अपने रिश्ते को हेल्दी बनाने के लिए ये हावी होना, ईर्ष्या व अन्य समस्याओं को दूर ही रखते हैं. ये एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझ व जानकर एक-दूसरे की इच्छाओं व भावनाओं का सम्मान करते हुए एक हेल्दी मैरिज लाइफ जीते हैं.

पहला अफेयर: हरसिंगार के फूल (Pahla Affair: Harsingar ke Phool)

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पहला अफेयर: हरसिंगार के फूल (Pahla Affair: Harsingar ke Phool)
मन की दहलीज़ पर, रख यादों के चराग़
ख़त चुपके से वो, मेरा पढ़ती थी!
ऐसी थी मेरी रेखा, मेरे दोस्त की बहन. उसी के घर रेखा से मुलाक़ात हुई. पहली नज़र में पहले प्यार के बारे में सुना तो था, लेकिन उसका सुखद एहसास रेखा को देखने के बाद ही महसूस हुआ! चौड़े माथे पर सजी बिंदी, पनीली आंखों में मासूम-सी शोख़ी, गुलाबों से नाज़ुक सुर्ख़ लब और लहराते रेशमी बाल. जब वह बालों में गुड़हल का फूल लगाती, तो झरनों के पत्थर मुड़-मुड़ कर उसे ताकते. यूं लगता आसमान से फ़रिश्ते भी उसे देखने को तरसते हैं. यूं प्रेम का वो नन्हा पौधा, प्रणय-सूत्र में बंध गया.

तुम यादों को उखाड़कर कहीं भी फेंको, वे कैक्टस की तरह उगने की ग़लती दोहराती हैं. चाय का प्याला हाथ में है, मेज़ पर रखी क़िताब के उस पुर्ज़े पर नज़र डालता हूं, जो मुझे मुंह चिढ़ा रहा है. “मैं जा रही हूं. मुझे ख़ुद नहीं पता कि कहां! मुझे ढूंढ़ने की ग़लती मत करना…” उ़फ्! मेरे गूंगेपन की साथी हैं ये दीवारें! जो बोल रही हैं, फुसफुसा रही हैं- “अरे मूर्ख! यह ईंट-गारे से बना घर है, यादों का संगमरमरी ताज नहीं.”
“हम थे जो कभी, रातों को हंसा देते थे
अब ये हाल कि थमते अपने नहीं आंसू”

रेखा के सौंदर्य का जादू मेरे सिर चढ़कर बोला था. उसके रूप में इस कदर खो गया था कि आसपास की बाकी हक़ीक़तों को देख ही न सका. अपने प्यार के अंजाम के बारे में उस वक़्त यथार्थ के धरातल पर खड़े होकर सोच न सका. शायद मैं भूल गया था कि अमीर पिता की ज़िद्दी बेटी मेरे साथ निबाह कर पाएगी भी या नहीं. माना मेरे पास ऐशो-आराम का वो सामान न था, मगर प्यार का उमड़ता लबालब समंदर था सीने में.

आज भी याद हैं वे दिन. सागर किनारे कभी भेलपूरी खाते, कभी फ़िल्मी गीत गुनगुनाते… तो कभी बारिश की फुहारों में भीगते, कितने ख़्वाब बुने थे हमने अपने प्यार को लेकर. ये हवाएं, इनमें बसी हमारे प्यार की महक गवाह हैं हमारे उन हसीं दिनों की.
उसके हंसने का अंदाज़. उ़फ्! जब वो हंसती तो लगता हरसिंगार झर रहा है. जैसे कई गुलाबों का एक साथ खिलना… जैसे बरखा की पहली बूंद का थिरकना… जैसे मंदिर में घंटियों का गूंजना… नवंबर की मीठी धूप में रखे ये कैक्टस, हमारे प्यार के गवाह हैं. रेखा की यादों को ताज़ा करने का सामान भी हैं.

घाटी में शाम का झुरमुट घिर आया है. मैं सोचते-सोचते काफ़ी दूर निकल आया हूं. पथरीली पगडंडी पर पहला पड़ाव और… कोई भी दरख़्त मेरा हाथ पकड़ने को आगे नहीं बढ़ता. अब इतने सवालों से घिरा पिंजरे में मरे शेर-सा मैं. अपने पर तरस आता है. सोचता हूं खोलूं इस बंद पिंजरे के द्वार, जहां सदियों से कैद प्रश्‍नों के परिंदे फड़फड़ा रहे हैं.

अर! ये कैसा प्यार था? ज़रा धागा खिंचा नहीं कि पूरा स्वेटर उधड़ गया… अब लौटने का मन नहीं है. वहां है केवल बोलती दीवारें… मेरे ग़म में शरीक़ मोम-सी पिघलती दीवारें… मेरे साथ सिसकती दीवारें… घर की दीवारों से भी अलग होती हैं कुछ दीवारें, जो भीतर एक घुटन भर देती हैं…
“मैं सिसकने की आवाज़ साफ़ सुन रहा हूं,
तुम कहते हो घर में, दूसरा कोई नहीं.”

– मीरा हिंगोरानी

सेफ सेक्स के 20 + असरदार ट्रिक्स(20 + effective tricks for safe sex)

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सेफ सेक्स न सिर्फ आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचाता है, बल्कि आप अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से भी सुरक्षित रहती हैं, इसलिए ज़रूरी कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल.

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– सेफ सेक्स के लिए कंडोम को सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है. कंडोम न केवल आपको अनचाहे गर्भ से बचाता है, बल्कि इंफेक्शन, एचआईवी/एड्स या फिर अन्य सेक्सुअल डिसीज़ से भी आपका बचाव करता है.
– यदि सेक्सुअल रिलेशन में लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल करें, तो ज़्यादा अच्छा है. लुब्रिकेशन न केवल कंडोम को फटने से बचाता है, बल्कि इसे इस्तेमाल करना भी आसान होता है.
– ध्यान रहे कि एक समय में एक ही कंडोम पहनें, दो कंडोम पहनने से आपको नुक़सान हो सकता है.
– ओरल सेक्स से बचें, क्योंकि इससे कई तरह के इंफेक्शन्स होने का ख़तरा रहता है. कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जब ओरल सेक्स से व्यक्ति को कैंसर व सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ हुई हैं.
– यदि आप गर्भनिरोधक के रूप में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही हैं, तो इसे कभी भी मिस न करें. यानी इसे रेग्युलर नियत समय पर लेना न भूलें. हां, यदि कभी एक दिन मिस हो जाए, तो दूसरे दिन दो पिल्स एक साथ ले लें. फिर दोबारा नियमित रूप से पिल्स लेती रहें.
– आमतौर पर पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सेफ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कंसीव करने के चांस कम होते हैं. लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता है, ख़ासतौर से तब जब आपका मेन्स्ट्रुअल साइकल छोटा हो. इसलिए महिलाएं पीरियड्स के सर्कल को समझते हुए दिनों को कैलकुलेट करके अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रह सकती हैं.
– सेफ सेक्स के रूप में कुछ कपल्स एक तरीक़ा ऐसा भी अपनाते हैं, जिसमें मेल पार्टनर ऑर्गेज़्म के समय बाहर ही डिस्चार्ज कर देता है. लेकिन यह तरीक़ा भी अधिक सुरक्षित नहीं है. कई बार पुरुष एक्साइटमेंट के समय यह जान ही नहीं पाते कि उनके प्राइवेट पार्ट के आगेवाले हिस्से पर वीर्य गिर चुका होता है व उसमें शुक्राणु हो सकते हैं, जिससे शायद प्रेग्नेेंसी भी हो सकती है.
– सेफ सेक्स के रूप में गर्भनिरोधकों के बारे में तो सभी बहुत कुछ जानते होंगे, पर कुछ ऐसे गर्भनिरोधक भी हैं, जिनका इस्तेमाल अनसेफ सेक्स के बाद भी प्रभावकारी होता है, जिसे इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव कहते हैं.
हाल ही में हुए रिसर्च में 59% महिलाओं ने माना कि उन्हें इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव की बहुत कम जानकारी है, जबकि 12% महिलाएं इनके बारे में जानती तक नहीं हैं.
तो आइए, सेफ सेक्स के रूप में इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव के बारे में जानते हैं.
– यूं तो अनसेफ सेक्सुअल रिलेशन के बाद गर्भनिरोध के रूप में सबसे अधिक भरोसा इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स पर किया जाता है, पर इनके अलावा भी कुछ विकल्प हैं, जो पूरी तरह से सेफ हैं.
– ऐसे में इमर्जेंसी इंट्रायूटेराइन डिवाइस (आईयूडी) का इस्तेमाल भी बेहतर विकल्प हो सकता है.
– आईयूडी प्लास्टिक या तांबे का बना छोटा-सा उपकरण होता है, जिसे अनसेफ सेक्स के बाद भी महिलाएं यूटेरस में फिक्स करवा सकती हैं. एक बार लगाया गया आईयूडी कम से कम 5 से 10 साल तक गर्भनिरोध में मदद करता है.
– अक्सर हिलाएं यह सोचकर इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव्स का सेवन नहीं करती हैं कि इससे उनकी फर्टिलिटी कम हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं है. हां, यह ज़रूर है कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के इस्तेमाल से उस महीने के पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं, पर ये इंफर्टिलिटी की वजह नहीं होता है, अतः इनका इस्तेमाल सेफ समझा जाता है.
– ध्यान रहे कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल सामान्य इस्तेमाल के लिए नहीं है. इसका इस्तेमाल उसी स्थिति में करते हैं, जब सामान्य कॉन्ट्रासेप्टिव लेने से चूक जाएं. वैसे बेहतर तरीक़ा यह भी हैै कि आप किसी डॉक्टर से इनके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी पहले ही ले लें.
– रिसर्च में पाया गया कि 50% महिलाओं के बीच यह मिथ है कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल एबॉर्शन के लिए किया जाता है, जो कि ग़लत है.
– इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का काम एबॉर्शन करना नहीं है. इनके सेवन से अंडाशय में बन रहे अंडकोष का निर्माण रुक जाता है या वो गर्भाशय में नहीं जाते, जिससे प्रेग्नेंसी हो ही नहीं सकती.
– इस बात का भी ख़ास ख़्याल रखें कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल केवल इमर्जेंसी में ही लें, क्योंकि इनका नियमित रूप से इस्तेमाल करना नुक़सानदायक हो सकता है.
– यह एक मिथ है कि असुरक्षित सेक्सुअल रिलेशन होने के तुरंत बाद या फिर 24 घंटों के अंदर ही इनका सेवन लाभदायक हो सकता है, जबकि हक़ीक़त में ऐसा नहीं है.
– असुरक्षित सेक्स के 72 घंटों यानी 3 दिनों के अंदर तक इसका इस्तेमाल प्रभावकारी होता है. वैसे आप जितनी जल्दी इसका इस्तेमाल करेेंगी फ़ायदा उतना ही जल्दी होगा.
– सेक्स के दौरान अनचाहे गर्भ से बचने के लिए न अब महिलाओं को कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की ज़रूरत है और न ही पुरुषों के लिए कंडोम ही एकमात्र विकल्प है, क्योंकि अब पुरुषों के लिए भी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल तैयार किया जा रहा है, जो उनके पुरुषत्व को भी प्रभावित नहीं करेगी. ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने फैमिली प्लानिंग के लिए पुरुषों की कॉन्ट्रासेप्टिव पिल को तैयार कर ली है, जो जल्द ही बाज़ार में उपलब्ध होगी.

सेक्स अलर्ट

– गर्भनिरोध के लिए प्रचलित तरीक़ों में जो महिलाएं गर्भनिरोधक इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं, वे अलर्ट हो जाएं, क्योंकि हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार, जो महिलाएं
कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल अधिक करती हैं, उन्हें दूसरों की अपेक्षा एचआईवी इंफेक्शन का ख़तरा 40% अधिक होता है.
– दुनियाभर में 14.4 करोड़ महिलाएं हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन को अधिक महत्व देती हैं, जिनमें क़रीब 4.1 करोड़ महिलाएं कंट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि 10.3 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं.
– पुरुष प्रजनन क्षमता को अवरोध कर उन्हें कंट्रोल कर सकनेवाली मेडिसिन एच2-गैमेंडाजोल व जेक्यू1 पर भी रिसर्च चल रहा है. ये मेडिसिन शरीर में स्पर्म बनाने की प्रक्रिया को ब्लॉक कर देंगी और भविष्य में सेफ सेक्स के रूप में इनका भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.
– अपने पार्टनर के साथ ईमानदार रहकर न केवल आप अपनी सेक्सुअल लाइफ अच्छी तरह से एंजॉय कर सकते हैं, बल्कि सेक्सुअल डिसीज़ के ख़तरों को भी कम कर सकते है.

 

कुछ दिलचस्प बातें

– अक्सर पुरुष नसबंदी कराने से कतराते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण यह मिथ है कि इससे उनमें कमज़ोरी आ जाती है, जबकि ऐसा नहीं है.
– स्पर्म की संख्या पूरे वीर्य में 1 फ़ीसदी से भी कम होती है. 99 फ़ीसदी वीर्य प्रोस्टेट (30%) व शुक्राशय (69%) से ही बनता है.
– कई पुरुषों को ऐसा लगता है कि उनके पुरुषत्व का प्रमाण प्रजनन क्षमता पर ही आधारित है. ऐसे लोगों को अपना शक दूर करने के बाद ही नसबंदी करानी चाहिए.
– नसबंदी कराने के बाद वीर्य की दो रिपोर्ट स्पर्म निगेटिव होनी ज़रूरी है. इसके बाद आप नॉर्मल सेक्स लाइफ एंजॉय कर सकते हैं.

– रेषा गुप्ता

Strong रिलेशनशिप के लिए Effective टेक्नीक्स(Effective techniques for strong relationship)

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कहीं चाहतें हैं, कहीं राहतें हैं… कहीं दर्द है, तो कहीं बंदिशें… दवा भी हैं ये और दुआ भी… मीठी बारिश भी हैं और ठंडी हवा भी… दरअसल रिश्तों के ताने-बानों में हर वो एहसास शामिल होते हैं, जो हमारे जीने का मक़सद बनते हैं और हमें आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं. ऐसे में तेज़ी से किसी अनजानी व अनदेखी दिशा में भाग रहे हम सभी के लिए बेहद ज़रूरी है कि थोड़ा ठहरें और अपने रिश्तों को जीएं, ताकि प्यार और दुलार की ऑयलिंग से उनकी सर्विसिंग होती रहे.

relationship tips

क्यों ज़रूरी है relationship टेक्नीक्स?

– हर रिश्ता, चाहे बच्चों और पैरेंट्स के बीच का हो, भाई-बहन का हो, पति-पत्नी या फिर अन्य दोस्त व रिश्तेदार हों, सभी हमसे समय और अटेंशन की डिमांड करते हैं, जो आज की तारीख़ में हमारे पास है ही नहीं.
– वक़्त की कमी के चलते हम अपने रिश्तों को पूरी तरह से जी नहीं पाते. छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हम महरूम रह जाते हैं और साथ ही अपने साथ जुड़े लोगों को भी उनसे दूर रखते हैं. ऐसे में रिश्तों में शिकायतें पैदा होनी शुरू हो जाती हैं.
– हर वक़्त अगर हम यही रोना रोते रहेंगे कि समय नहीं मिलता, तो एक दिन हमारे रिश्तों के पास हमारे लिए समय नहीं होगा.
– चाहे हम कितने ही क़ामयाब हो जाएं या कितना ही ऊंचा मुक़ाम हासिल कर लें, अपनों के साथ की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है, वरना जीवन में एकाकीपन हमें निराशा की गर्त में धकेल सकता है. यदि समय रहते रिश्तों को सहेजने की ओर हम ध्यान नहीं देंगे, तो जब हमें उन रिश्तों की ज़रूरत होगी, तो शायद हमारे आस-पास कोई नहीं होगा.
– आपसी मेलजोल और एक साथ समय बिताने से न स़िर्फ रिश्ते मज़बूत होते हैं, बल्कि हमारा हौसला और आत्मविश्‍वास भी बना रहता है. हम अपने अंदर सकारात्मकता का अनुभव करते हैं.
– आपको अपनों की परवाह है, उनकी ज़रूरत है, उन्हें इस बात का एहसास कराने के लिए भी रिश्तों की सर्विसिंग ज़रूरी है.
कैसे करें रिश्तों की सर्विसिंग?
– कम्युनिकेशन हर रिश्ते की नींव होती है. बहुत ज़रूरी है कि आपसी बातचीत और अपनों के साथ कुछ बातें शेयर करने का वक़्त ज़रूर निकाला जाए.
– ज़रूरी है शेयरिंग और केयरिंग भी. अपने जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी जब हम अपनों से शेयर करते हैं, तो अपनेपन का एहसास और बढ़ जाता है. चाहे हमारे दोस्त हों या रिश्तेदार, उन्हें यह महसूस होता है कि हमारे जीवन में उनका कितना महत्व है.
– इसी तरह से केयरिंग भी ज़रूरी है. ऑफिस में व्यस्त दिनचर्या के बीच भी समय निकालकर घर पर फोन करके हालचाल पूछना एक अच्छा आइडिया हो सकता है.
– अगर घर में कोई बीमार है, तो एक-दो बार हालचाल पूछने पर उन्हें यह एहसास होगा कि आपको सचमुच उनकी
परवाह है.
– विशेष अवसरों पर समय निकालकर फैमिली गेट-टुगेदर या पिकनिक वगैरह आयोजित करते रहें.
– अगर कोई ख़ास अवसर है, तो गिफ्ट ले जाना न भूलें.
– सबकी सालगिरह की तारीख़ रिमाइंडर पर सेट कर लें, ताकि आप अपनों के उन ख़ास दिनों को भूल न पाएं और आपकी शुभकामनाएं उनकी ख़ुशी को और बढ़ा दें.
– जिनसे आप प्यार करते हैं, उन पर विश्‍वास करना सीखें. विश्‍वास पर ही हर रिश्ते की गहराई टिकी होती है. अगर कोई आपसे यह उम्मीद रखता है कि आप उन्हें समझें, उन्हें हर बार सही-ग़लत के तराज़ू में तौलकर न देखें, तो आप उनका विश्‍वास न तोड़ें.
– रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रयास लगातार करते रहें.
– हर किसी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें. यह सच है कि हर रिश्ते से हमारी कई उम्मीदें जुड़ी होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी ध्यान रखें कि आपकी उम्मीदें कितनी सही हैं और सामनेवाला उन्हें किन मजबूरियों के चलते पूरी नहीं कर पा रहा. अगर आप अपनों से यह आशा करते हैं कि वो आपकी उम्मीदों पर खरे उतरें, तो ख़ुद से भी सवाल पूछें कि क्या आप भी उनकी सारी उम्मीदों पर उतने ही खरे उतरते हैं?
– सरप्राइज़ दें. कभी-कभी ऑफिस से जल्दी आकर फैमिली के साथ वक़्त बिताएं या फिर मूवी या डिनर प्लान करके सबको चौंका दें.
– एक रिश्ते को निभाने में ऐसा न हो कि दूसरे रिश्तों को नज़रअंदाज़ कर दें. ज़िंदगी में हर रिश्ते की अपनी ख़ास जगह और अहमियत होती है. इस बात को समझें और हर रिश्ते में संतुलन बनाए रखें.
– शादी के बाद दोस्तों को भूल न जाएं. कुछ लोग शादी के बाद स़िर्फ अपनी फैमिली लाइफ में बिज़ी हो जाते हैं, तो कुछ पहले की ही तरह यार-दोस्तों की महफ़िल का मज़ा लेकर फैमिली को भूल जाते हैं. ये दोनों ही रवैया ग़लत है. संतुलन बनाए रखें. याद रखें, दोस्त भी ज़रूरी हैं.
– तारीफ़ करने से पीछे न हटें. किसी की प्रशंसा में कहे दो शब्द भी आपके रिश्ते को नई ऊर्जा से भर सकते हैं.
– रिश्तों को ईगो की भेंट न चढ़ने दें. अपने अहम् को अपने रिश्तों के बीच में न आने दें, वरना रिश्तों के सच्चे सुख से वंचित रह जाएंगे.
– अगर जाने-अनजाने आपने किसी को आहत कर दिया हो, तो अपनी ग़लती स्वीकारें और सॉरी कहकर मनमुटाव दूर कर लें.
– घर-परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि कल को पैसों और संपत्ति को लेकर आपस में कोई विवाद न हो. एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि पैसे कमाना फिर भी आसान है, लेकिन प्यार, अपनापन और रिश्ते कमाना उतना ही मुश्किल, इसलिए रिश्तों के महत्व को समझें.

इन बातों का भी ध्यान रखें

– अपने रिश्तों की ज़रूरतों को पहचानें.
– फैंटेसाइज़ करें यानी कल्पना में जीने का मज़ा ज़रूर लें, लेकिन हक़ीक़त की ज़मीं को ध्यान में रखकर.
– अपने डरोें से भागें नहीं, बल्कि अपनों के साथ उन्हें शेयर करें.
– बिना बोले भी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. कई बार बहुत कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, ऐसे में सामनेवाले की भावनाओं को समझने की क्षमता ही आपके रिश्तों की मज़बूती दर्शाती है.
– ज़िम्मेदारियां लेने से घबराएं नहीं.
– दोषारोपण से बचें. बेवजह के वाद-विवाद और एक-दूसरे को दोष देने की बजाय अपने ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें और बातों या बहस को यह सोचकर हल्के में लें कि ये रिश्तों का ही हिस्सा है.

– गीता शर्मा

पहला अफेयर: नाज़ है इश्क़ पर (Pahla Affair: Naaz Hai Ishq Per)

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पहला अफेयर: नाज़ है इश्क़ पर… (Pahla Affair: Naaz Hai Ishq Per)

कुछ रिश्ते इतने ख़ूबसूरत होते हैं कि ज़िंदगी महक उठती है. मेरा और मुजीब का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था. उस समय मैं बी.ए. द्वितीय वर्ष में थी. मुजीब मुझसे दो वर्ष सीनियर थे और हिंदी साहित्य के स्टूडेंट थे. उन्हीं दिनों कॉलेज में एक स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता शुरू होनेवाली थी. इसी सिलसिले में मैं मुजीब से मिली. शांत किंतु आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक थे मुजीब. उन्होंने बड़ी तन्मयता के साथ मेरी कविता पढ़ी और उसमें कुछ सुधार भी किया.

पहली ही मुलाक़ात में इतनी कशिश थी कि घर लौटने तक मैं उनकी गिऱफ़्त में ही रही. मुजीब की बदौलत मैंने प्रथम स्थान प्राप्त किया. अगली बार जब उनका शुक्रिया अदा करने गई तो मुलाक़ातों के सिलसिले शुरू हो गए, जो धीरे-धीरे नज़दीकियों में बदल गए.
इससे हमारे रिश्ते को एक नई दिशा मिली. हमारे इश्क़ को तो जैसे पंख ही लग गए थे और हम दुनिया-जहान से बेख़बर सुदूर आसमान में उड़ रहे थे. सब कुछ बेहद हसीं लग रहा था और हम मुहब्बत के एहसास में डूबते चले गए. कब हम दोनों एक-दूसरे के इतने क़रीब आ गए, पता ही नहीं चला.

वह मुजीब के कॉलेज का आख़िरी साल था, जब हमारे कॉलेज के एक हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की का प्रेम प्रसंग उजागर हो गया. इस बात पर कुछ गुटों ने कॉलेज विभाग पर पथराव कर अपना रोष प्रकट किया. हर तरफ़ इश्क़ करने वालों पर थू-थू हो रही थी. मजबूरन विभाग ने दोनों को ही कॉलेज छोड़ने का आदेश दे दिया.

इस वाकये ने मेरे दिल में दहशत भर दी थी. हमारा मज़हब अलग था और यही हमारे इश्क़ की पहली रुकावट थी. अब मुजीब से मिलते समय मैं नज़रें चुराने लगी थी. धीरे-धीरे मुजीब भी मेरे हालात और मजबूरी को समझने लगे थे. उन्हीं दिनों इम्तिहान भी शुरू हो गए थे और हम दोनों ही अपनी-अपनी पढ़ाई में रम गए.

मेरे आख़िरी इम्तिहान के दिन वे मुझे गेट के पास खड़े मिले. बड़ी हिम्मत के साथ मैं उनकी तरफ़ बढ़ी, मगर कुछ बोल नहीं पाई. मुजीब भी अपना दर्द छिपाकर मुझसे बोले, “कुछ कहना चाहता हूं तुमसे. लेकिन अगर कुछ कहूंगा तो तुम आज सुनोगी, कल भूल जाओगी, इसलिए यह ख़त दे रहा हूं, पढ़ लेना.” यह कहकर उन्होंने एक लिफ़ाफ़ा मेरी तरफ़ बढ़ा दिया, और मुस्कुराते हुए चले गए.

मैं उन्हें जाते हुए देखती रही, फिर कांपते हाथों से लिफ़ा़फे से ख़त निकाला. उसमें लिखा था, ङ्गइश्क़ वह है, जो किसी की ज़िंदगी को रोशनी दे, न कि उसे अंधेरों की तरफ़ ढकेल दे. मुझे नाज़ है… इस इश्क़ पर… तुम पर… कि तुमने हमें, हम दोनों के इश्क़ को ज़माने भर में बदनाम होने से बचा लिया. बेहतर होगा कि अब मुझे भूलकर अपनी नई सुबह के शबाब का पूरी गर्मजोशी से इस्तकबाल करो. मेरी दुआ तुम्हारे साथ है. अलविदा.
यह पढ़कर मैं सकते में आ गई. कितना कुछ कहना था उनसे, मगर सब अनकहा ही रह गया. आज जब मैं अपने घर-परिवार में बेहद ख़ुश हूं तो लगता है शायद यही सही था हम दोनों के लिए और अब मुझे भी नाज़ है इस इश्क़ पर… जो आज भी मुझे अंधेरों में रोशनी दिखाता है.
वो जो गया है आज हमसे बिछड़ के
मेरे वजूद में रहता है रोशनी की तरह…

– आरती चौरसिया

पहला अफेयर: कच्ची उम्र का प्यार (Pahla Affair: Kachchi Umra Ka Pyar)

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flowers-images-for-love-22 कच्ची उम्र का प्यार (Pahla Affair: Kachchi Umra Ka Pyar)

सोचा न था इतने सालों बाद आज आपसे इस मोेड़ पर इस तरह से मुलाक़ात होगी. आपको देखकर दिल में फिर वही पहले प्यार की ख़ुशबू महक गई, जिसे मैंने आज तक सहेजकर रखा है. अक्सर सुनते हैं कच्ची उम्र का प्यार भी कच्चा ही होता है… उसमें न सोच होती है, न समझ और न ही परिपक्वता. बस, एक कशिश और शारीरिक आकर्षण का नाम दिया जाता है 16 साल के अल्हड़ प्यार को. आपने भी तो यही कहा था न मुझे, जब आपसे अपने प्यार का इज़हार किया था मैंने.

हमारे छोटे-से गांव में आप नए मास्टरजी के नाम से मशहूर हो गए थे. आपके नाम की ही तरह आपके व्यक्तित्व में भी सूर्य की तरह ही तेज था, प्रकाश था. प्रकाश, कितना सही और सटीक था आपका नाम… ज्ञान से भरपूर, हर अंधेरे से दूर… लोगों की ज़िंदगी में भी प्रकाश फैलाने की इच्छा से ही आप हमारे गांव में आए थे. मैं तो जैसे आपको देखने और सुनने के लिए ही अब स्कूल आने लगी थी. सबकी तरह
आप भी प्यार से मुझे छुटकी ही बुलाते थे. आपकी प्रिय शिष्या थी मैं और होती भी क्यों न, आख़िर पढ़ाई-लिखाई में तेज़ भी तो थी.

अपने प्रति आपके इस स्नेह को मैं न जाने कब प्यार समझ बैठी और प्यार के उस सागर में इतनी डूब गई कि मैं यह भूल गई कि आप मेरे मास्टरजी हैं. आपको निहारती रहती, हर पल आपके ही ख़यालों में खोई रहती. और अब तो पढ़ाई भी इसी मक़सद से करने लगी थी कि आप ख़ुश हों, मेरी तारीफ़ करें, मुझ पर ध्यान दें. लेकिन आप न जाने क्यों मुझसे कुछ दूर भागने लगे थे. शायद मेरे मन में पल रहे नए ख़्वाब का आपको आभास हो गया था. एक दिन मैंने ठान लिया कि आपसे जवाब लेकर ही रहूंगी आपकी दिन ब दिन बढ़ती बेरुखी का. परीक्षाएं ख़त्म हुईं और मैं आपके घर पहुंच गई.

बिना कुछ सोचे-समझे मैंने एक सांस में सब कुछ कह डाला. आपकी बेरुखी से मैं कितनी आहत थी, यह बताने के साथ-साथ अपने दिल में पनप रहे उस कोमल, मधुर एहसास से भी आपको उसी व़क़्त वाक़िफ़ कराना मुनासिब समझा मैंने. कह दिया कि आपसे प्यार करती हूं. अपने जीवनसाथी के रूप में आपको ही देखती हूं. किसी और की कल्पना तक नहीं कर सकती, लेकिन आपने मेरे इस प्यार को कच्ची उम्र का आकर्षण कहकर मेरा दिल तोड़ दिया था. मुझे आज भी शब्दश: याद है आपकी वो बड़ी-बड़ी बातें, जिन्हें मेरा मासूम प्यार न तब समझने को तैयार था, न अब…!

ङ्गदेखो छुटकी, तुम अभी बच्ची हो. ये प्यार-व्यार क़िताबों में ठीक है, तुम फ़िलहाल इन चीज़ों से दूर रहो. यह महज़ कच्ची उम्र का आकर्षण है, दो-चार साल बाद तुम्हें ख़ुद अपने इस प्यार पर हंसी आएगी. प्यार का मतलब भी जानती हो?फ
मैंने स़िर्फ इतना कहा था, “प्यार और आकर्षण के फ़र्क़ को समझने लायक़ समझ है मुझमें. दो-चार साल बाद तो क्या, सारी उम्र भी आपका इंतज़ार करना पड़ा तो करूंगी.”

इसके बाद आप हमारे गांव से चले गए. आपने शादी कर ली, घर बसा लिया और शहर में हमेशा के लिए बस गए.
आज मैं एक क़ामयाब डॉक्टर हूं. आप मेरे मरीज़ बनकर मेरे क्लिनिक में आए. आपके शरीर के ज़ख़्म जल्द ही भर जाएंगे, लेकिन मेरे दिल का ज़ख़्म शायद कभी न भर पाता अगर आज आप यह नहीं कहते कि कच्ची उम्र का प्यार भी सच्चा हो सकता है, यह तुमने साबित कर दिया छुटकी. तुम मेरी शिष्या हो, क़ामयाबी का यह मुक़ामहासिल करके मेरी गुरुदक्षिणा तो तुमने दे दी, लेकिन तुम आज भी मेरा इंतज़ार कर रही हो, मेरे ही कारण घर नहीं बसा सकीं, मैं इस अपराधबोध से कैसे मुक्त हो पाऊंगा? काश, तुम्हारे प्यार की गहराई को मैं समझ पाता. प्यार के मामले में तो तुम मेरी गुरु निकली, लेकिन मैं ही अच्छा शिष्य नहीं बन पाया…!

– गीता शर्मा

पहला अफेयर: चंपा के फूल (Pahla Affair- Champa ke phool)

Pahla Affair

Pahla Affair

पहला अफेयर (Pahla Affair) : चंपा के फूल  
कभी-कभी न चाहते हुए भी हठात् कोई मन के द्वार ज़ोर-ज़बरदस्ती से खुलवाकर मन में बलपूर्वक प्रवेश कर ही जाता है. द्वार पर चाहे संस्कारों, आदर्शों के कितने भी भारी-भरकम ताले क्यों न लगे हों, सेंध कहां से लगती है, पता नहीं चलता. कहां तो नींव डोल जाती है, कहां तो दीवारें कच्ची रह जाती हैं… या क्याA पता, अपना ही मन पापी चोर बनकर सारे संस्कारों, आदर्शों को ताक पर रखकर चुपके से स्वयं ही द्वार खोल देता हो. किसे पता चलता है?

बड़ा नाज़ था ख़ुद पर कि मेरे मन को कोई छू नहीं सकता. लेकिन जिस दिन उन्हें देखा, लगा कि अपने आप पर नाज़ करना मेरा भ्रम था. कब एक-एक संस्कारों, आदर्शों के ताले टूटते चले गए पता ही नहीं चला. पता चल ही जाता तो ये पीड़ा, ये छटपटाहट होती ही क्यूं? मन में चौबीसों घंटे ये दाह भी क्यों रहता?

Pahla Affair
आते-जाते हुए क़दम दरवाज़े पर पल भर के लिए अपने आप ही ठिठक जाते. ठिठकने का समय चाहे कितना ही कम क्यों न हो, इतना भी कम नहीं होता था कि जाना ही न जा सके. एक ओर किसी को नज़रभर देख लेने का ज़बरदस्त लोभ और दूसरी ओर किसी की नज़र में न आ जाए, इसका डर. न तो एक झलक देख पाने के लोभ का संवरण किया जा सकता था और न ही लोक-लाज के भय को ही त्यागा जा सकने का साहस जुटाया जा सकता था. अजीब असमंजस की स्थिति थी. एक तरफ़ दिल मुझे उनकी ओर खींचता था, तो दूसरी तरफ़ लोक-लाज का डर क़दमों की बेड़ियां बनकर मुझे रोक लेता था.

दिल की हालत अजीब होती जा रही थी. मैं हंसना-खेलना भूल गई थी. हमेशा उदास और चुप रहती. एक दिन शाम को पार्क में जाने का प्रोग्राम बना. घर भर के बच्चों को लेकर जाने का ज़िम्मा मुझ पर और उन पर ही पड़ा. पार्क में सारे बच्चे खेलने लगे. वे पता नहीं कहां चले गए. मैं घास पर चुपचाप बैठ गई.

“अब ज़रा पीछे देखो.” अचानक उनकी आवाज़ सुनकर मैंने पीछे देखा. अंजुल भर चंपा के फूल लेकर वे मेरे पीछे बैठे थे. सुनहरे पीले किनारीवाले हल्के पीले, स़फेद चंपा के सुवासित फूल हृदय की गहराइयों तक उतर गए थे. उनकी सुगंध हृदय की गहराइयों में कोने-कोने को महका गई. मेरे तन और मन दोनों को अपनी गंध में सराबोर कर गई. न जाने कब किस क्षण दरवाज़े पर उन्हें देखने को ठिठके हुए मेरे क़दमों ने उनके मन के द्वार पर दस्तक दे दी थी.

चंपा के उन फूलों ने मुझे प्यार और विश्‍वास के नर्म-मुलायम, मगर मज़बूत धरातल पर खड़ा कर दिया. विश्‍व का संपूर्ण स्नेह, विश्‍वास और प्रेम सिमटकर उनकी आंखों में समा गया था. अब मुहब्बत के कई फूल हमारे दिल में खिल चुके थे. लोक-लाज क्या होती है, दुनिया की रीत क्या कहती है जैसी तमाम बातें प्यार के गहरे, अथाह सागर के सामने अब गौण लग रही थीं. चंपा के ये फूल मेरे जीवन को इस तरह से महका देंगे सोचा ही न था. अब बस मैं थी, वो थे और हमारे बीच पनप रही हमारी मुहब्बत के गवाह ये चंपा के फूल ही हमारे दरमियां थे…
“इन फूलों को और मेरे प्यार को हमेशा अपने मन और जीवन में संभालकर रखना.” कहते हुए उन्होंने सारे फूल मेरी गोद में डाल दिए… उस रोज़ जैसे मेरे दामन ने प्यार की मीठी ख़ुशबू को इन चंपा के फूलों के रूप में ताउम्र के लिए समेट लिया हो…
अठारह साल हो गए, आज भी चंपा के उन फूलों की सुगंध हृदय में बसी हुई है और फूलों की उन पंखुड़ियों की सुगंध हमारे जीवन को महका रही है…

– विनिता राहुरीकर

पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

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पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

बरखा की इन बूंदों में अपने महबूब को ढूंढ़ती मेरी नज़रें… उसकी प्यास, उसकी आस और उसकी बांहों में अपने वजूद का एहसास… इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं निगाहों में… बादल बन उड़ने लगता है दिल आसमान में… उस अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश में, जिसके सपने हम दोनों ने मिलकर बुने थे… पर जब आंख खुली, तो कांच के खिलौनों की तरह सब टूट गए… आज फिर वही बरसात है… महबूब की याद है… वही अधूरी प्यास और वही अधूरी आस भी…

बीते दिन जब भी याद आते हैं, स़िर्फ आखों को ही नम नहीं करते, बल्कि हर एहसास को भिगो जाते हैं. तुम्हारी आंखों की वो शरारत, बातों का अंदाज़, वो बेपरवाह-सा जीने की अदा जब भी याद आती है, मेरे दिल की धड़कनों को आज भी तेज़ कर देती है. मुहब्बत का मीठा एहसास क्या होता है, तुमसे मिलने के बाद ही तो समझ पाई थी मैं, लेकिन मुहब्बत में इतना दर्द भी होता है यह भी तुमसे ही सीखूंगी सोचा न था. कहते हैं प्यार के रिश्ते में अपने साये तक एक हो जाते हैं, ऐसे में किसी ग़ैर के लिए जगह ही कहां बचती है. लेकिन हमारे बीच कब किसी और ने अपनी जगह बना ली पता ही नहीं चला.

हम स़िर्फ प्रेमी ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त भी थे. कहीं कोई पर्दा न था, कोई तकल्लुफ़ नहीं. दो नहीं, एक ही तो थे हम. ज़िंदगी बेहद हसीं लगती थी तब, हर लम्हा ख़ास था. आज़ाद पंछी की तरह खुला छोड़ दिया था मैंने तुम्हें, क्योंकि मेरा मानना था कि प्यार में बंधन नहीं होना चाहिए, प्यार तो आज़ाद होता है… लेकिन कब, क्यों और कैसे तुम्हारे दिल में किसी और के लिए भी जगह बनती चली गई इसका एहसास जब होने लगा, तब जैसे हर सपना धीरे-धीरे टूटता चला गया…

जहां तक मुझे पता था तुम्हें मेरी वो सहेली ज़्यादा पसंद नहीं थी, लेकिन न जाने कब वो तुम्हारे इतने क़रीब आ गई कि तुम छिप-छिपकर उससे बातें-मुलाक़ातें करने लगे. जब मुझे तुमसे दूरी का एहसास होने लगा, तुम में बदलाव नज़र आने लगा तो अपने प्यार का वास्ता देकर यक़ीन दिलाते रहे कि तुम स़िर्फ मुझसे प्यार करते हो. मैं भी बार-बार दिल को समझाकर तुम पर यक़ीन करती गई और हर बार मेरा यक़ीन टूटा…

आख़िर इस कशमकश में कब तक ज़िंदा रह पाता हमारा मासूम प्यार और कोमल रिश्ता. सिसक-सिसककर दम तोड़ दिया आख़िर इस
रिश्ते ने… लेकिन कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं… इतने सालों बाद तुमसे फिर एक मोड़ पर जब टकराई, तो एहसास हुआ कि तुम सही थे, सच्चे थे, तुम्हारा प्यार कोई फरेब नहीं था, वरना अब तक तुम उसके हो चुके होते, लेकिन तुम्हेें तो स़िर्फ मेरा इंतज़ार था… अगर कुछ ग़लत था तो स़िर्फ वो हालात और वो लोग, जिनसे हमारे बीच दूरी पैदा हुई.

लेकिन अब जब व़क़्त ने सारे घाव भर दिए हैं, तो इन फ़ासलों को भी हम हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दें, ताकि फिर कोई तीसरा हमारे बीच न आने पाए… अब किसी ग़लतफ़हमी की कोई गुंजाइश न बचे… मुझे भी शायद इसी मोड़ का इंतज़ार था, इसलिए तुम पर तमाम अविश्‍वासों के बावजूद मैं भी तो किसी और की न हो पाई.

तुम ही मेरी पहली मुहब्बत हो, तुम ही मेरा यक़ीन. तुम्हें ही तो तलाशती रहीं हर पल ये नज़रें, तुम नहीं तो मैं नहीं. तुम अक्सर कहा करते थे, प्यार विश्‍वास का ही दूसरा नाम है. तुमने मुझे सिखा ही दिया आख़िर इस विश्‍वास के साथ जीना… अब मुझे यक़ीन है कि तुम मेरे हो, स़िर्फ मेरे!

– योगिनी 

सफल शादी के 25+ amazing बेनीफिट्स(25+ super amazing benefits of happy married life)

Marriage Benefits

 

शादी ख़ुशहाल जीवन के लिए तो ज़रूरी है ही, साथ ही एक सर्वे के अनुसार शादी व ख़ुशी के बीच एक पॉज़ीटिव रिलेशनशिप होता है, जिससे शादीशुदा लोग अविवाहितों की तुलना में अधिक ख़ुुश रहते हैं. सफल शादीशुदा जीवन बिताने वाले लोग ज़्यादा ख़ुश व लंबा जीवन भी जीते हैं.

 

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सफल शादी के बेनीफिट्स

1. सफल शादी एक सुरक्षा कवच की तरह होती है, जो पति-पत्नी दोनों को एक निश्‍चिंत जीवन जीने का आश्‍वासन देती है.
2. ऐसे कपल बहुत शांत और बेफ़िक्र ढंग से न स़िर्फ परिवार को सुखमय बनाने में क़ामयाब रहते हैं, बल्कि अपने करियर में भी निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं.
3. सफल शादी में शेयरिंग करने से पति-पत्नी दोनों जहां एक तरफ़ अपनी सारी परेशानियों से बाहर निकल आते हैं, वहीं फ़ाइनेंशियली भी बहुत सिक्योर महसूस करते हैं.
4. शारीरिक संतुष्टि अगर एक तरफ़ उन्हें कुंठा से बचाती है, तो दूसरी ओर साथ होने का विश्‍वास व एहसास, उन्हें मानसिक रूप से भी सक्षम बनाता है.
5. सुख-दुख में कोई उनके साथ है, यह एहसास इतना स्ट्रॉन्ग होता है कि वे किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने को तत्पर रहते हैं.
6. यदि उनके साथ कुछ ग़लत या बुरा हो भी गया, तो उनका पार्टनर उन्हें सपोर्ट करेगा और उस
स्थिति से बाहर आने में मदद करेगा, यह बात उन्हें बड़े से बड़े ़फैसले लेने में भी मदद करती है.
7, पार्टनर का साथ पति-पत्नी दोनों को एक कॉन्फ़िडेंस देता है, जिसके बल पर वे कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहते हैं.
8.सफल शादी पति-पत्नी को हमेशा ख़ुशी के एहसास से भरे रहती है, जिससे उन्हें पॉज़ीटिव इमोशन्स का अनुभव होता है और अभाव या परेशानियां होने के बावजूद वे निराश या कुंठित नहीं होते हैं.
9. उन्हें इस बात का डर नहीं सताता कि यदि कल किसी वजह से वे मुसीबत से घिर जाते हैं, तो उनका भविष्य ख़राब हो सकता है.
10. जीवनसाथी किसी प्रकार की दुविधा होने या निर्णय लेने की स्थिति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उस पर आंख बंद करके विश्‍वास किया जा सकता है कि वह उसका अहित नहीं करेगा, इसलिए उसके निर्णय से उलझन को सुलझाने में मदद मिलती है.
11. सफल शादी से स्ट्रेस लेवल कम होता है.
12. अकेला व्यक्ति जब घंटों किसी चीज़ में उलझा रहता है, तो उसका डिप्रेशन का शिकार होना स्वाभाविक है, पर सफल विवाहित जोड़ों के साथ ऐसा नहीं होता है.
13. उसकी ख़ुशी न स़िर्फ उसके चेहरे, हाव-भाव, बातचीत करने के ढंग आदि से झलकती है, बल्कि वह उसकी परफ़ॉर्मेंस में भी दिखाई देती है.
14. जब तनाव न हो, तो मन शांत रहता है और काम करना बोझ नहीं लगता. फिर चाहे वह घर का काम हो या ऑफ़िस का, व्यक्ति मन लगाकर करता है.
15. काम से थकने पर पार्टनर से कुछ पल बात कर वह फ्रेश हो जाता है.
16. घर का टेंशन फ्री माहौल उसे हमेशा दुखी व च़िड़चिड़ा होने से बचाता है.
17. जहां पति-पत्नी दोनों वर्किंग होते हैं, वहां एक पार्टनर के बीमार होने या नौकरी छूट जाने पर भी टेंशन नहीं होती. पार्टनर का इमोशनल सपोर्ट भी लगातार मिलने से उसका मनोबल नहीं टूटता. जो साथी काम कर रहा है, उसकी आय से घर चलता रहता है.
18. एक सर्वे के अनुसार, जिन पुरुषों का वैवाहिक जीवन सफल होता है, वे अपने वर्कप्लेस में भी सक्सेसफुल होते हैं. वे न तो ज़्यादा छुट्टियां लेते हैं और न ही ऑफ़िस देर से पहुंचते हैं.
19. सफल शादीशुदा कपल्स की मेंटल हेल्थ पऱफेक्ट होती है. स्ट्रेस-फ्री लाइफ़स्टाइल आपको फिज़िकली ही नहीं, मेंटली भी फ़िट रखता है.
20. घर में अगर तनाव नहीं रहता, तो बाहर जाकर कुछ करने में झुंझलाहट महसूस नहीं होती है. तब पति-पत्नी दोनों की प्रतिभा खुलकर सबके सामने आती है.

 

सफल शादीशुदा जीवन बिताने वाली पत्नियों को होनेवाले कुछ ख़ास फ़ायदे

21. जिन महिलाओं का वैवाहिक जीवन क़ामयाब रहता है, वे खुले मन और सोच के साथ काम कर पाती हैं, जिससे तरक़्क़ी करने के अवसर निरंतर उन्हें मिलते रहते हैं.
22. पति का सहयोग मिलने व उनके काम की महत्ता व मांग को समझने के कारण उन्हें रात को देर से घर पहुंचने की टेंशन नहीं होती, जिससे वे अपना 100% काम को दे पाती हैं.
23. सफल शादीशुदा जीवन का सबसे बड़ा मानसिक फ़ायदा यह है कि इस कारण पत्नी का एनर्जी लेवल हमेशा हाई रहता है.
24. जीवन के प्रति सकारात्मक नज़रिया होने के कारण उन पर प्रेशर कम होते हैं.
25. कोई घुटन या कुंठा न होने के कारण वह बेहतर ढंग से समाज में अपना योगदान दे पाती है.
26. यदि पति कॉपरेटिव हो, तो पत्नी के सोशल रिलेशनशिप बेहतर होते हैं और वे अपनी क्षमताओं का प्रयोग पूरी तरह से कर पाती हैं.
27. यदि पार्टनर समझदार हो, तो अधिक ज़िम्मेदारियां आसानी से पूरे किए जा सकते हैं. तब पत्नी घर व ऑफ़िस में बैलेंस बना पाती है, जिससे उसे मानसिक संतुष्टि होती है कि वह अपने उत्तरदायित्वों को ठीक से निभाने में सक्षम है.
28. सुखी विवाहित महिला अपने व्यवहार व मुस्कान से सबका दिल जीत लेती है और प्रशंसा का पात्र बनती है.
29. सफल विवाहित कपल्स को दूसरों को सहयोग व सम्मान देने में ख़ुशी मिलती है और इस तरह वे समाज में अपनी एक ख़ास पहचान व जगह बनाने में क़ामयाब हो पाते हैं.

– वत्सल बाजपेयी