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पहला अफेयर: समर्पित प्यार (Pahla Affair: Samarpit Pyar)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: समर्पित प्यार (Pahla Affair: Samarpit Pyar)

प्यार एक ख़ूबसूरत एहसास (Emotion) है. कहते हैं, लोग प्यार में जान दे देते हैं, तो ले भी लेते हैं. न जाने कैसा जुनून छा जाता है प्यार भरे दिलों पर. पर बरसों पहले प्यार (Love) करने वालों के ख़याल कुछ अलग ही हुआ करते थे. जिसे चाहा उसके प्रति पूर्ण समर्पण और उसकी ख़ुशी की ख़ातिर त्याग भरी भावना हुआ करती थी. अपने हिस्से चाहे जितने ग़म व तन्हाई आए, पर प्यार को वे रुसवा न होने देते थे. ऐसी ही प्यार भरी अनुभूति से सराबोर हूं मैं भी. आज भी उसके प्यार व समर्पण का ख़याल आते ही दिल में एक टीस-सी उठती है. बिना कुछ कहे-सुने भी अपने सेवा भाव से प्यार का इज़हार किया जा सकता है, यह मैंने उसी से जाना. अब तो कई सदियां बीत गयीं, लेकिन आज भी उसका रुहानी प्यार मेरे दिल में महफूज़ है.

अब तो प्यार-मोहब्बत को जानते हुए मैं इस दौर तक आ गई हूं, जब मेरे नाती अपने प्यार की बातें कहने-सुनने लगे हैं. आज से चार-पांच दशक पहले प्यार करना क्या है, ये तो हम जान ही नहीं पाते थे. आज जैसा खुलापन और बड़ों का उदारवादी स्नेह हमें प्राप्त नहीं था.

बात उन दिनों की है जब हम गुड्डे-गुड़ियों से खेला करते थे. मासूम बचपन और हरदम चेहरे पर शरारत रहती. लेकिन तब का व़क़्त अलग था. बड़े-बुज़ुर्गों के लिहाज और संस्कारों के चलते बड़े घरों की बहू-बेटियों का बाहर आना-जाना उतना होता न था. वह हमारे मुनीमजी का बड़ा बेटा था. बचपन से काम के बहाने घर के अंदर आता रहता. वह कब हमारे दिल में बस गया, जान ही न पाए हम.

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मास्टर साहब मुझे पढ़ाने आते तो वह भी साथ ही पढ़ने बैठ जाता. महाराजिन दाई मां के साथ वह खाना भी बहुत अच्छा बना लेता. शाम की संध्या पूजा की तैयारी, जो मेरी ज़िम्मेदारी थी, कब उसका फ़र्ज बन गया, यह देख मैं हैरान थी. बचपन के 8-10 वर्ष का यह साथ किशोरावस्था का संकोच बनता चला गया. मैं साड़ी पहनने लगी तो वह मेरे लिए बाग से फूल ले आता. अमराई के आम, कच्ची इमली, अमरूद, करौंदे के दाने मेरे लिए झट तोड़ कर ले आता. हर पल मुझे हंसते-खेलते, इठलाते देखने की तमन्ना रहती उसकी.

लेकिन तक़दीर मेें तो कुछ और ही होना लिखा था. दरअसल, मेरा विवाह मेरे जन्म के समय ही बुआ के देवर के बेटे से तय हो गया था, पर जाने क्यों दिल इसे मानने को तैयार न था. मन हर पल उसके ख़यालों में खोया रहता. अब इस वजह से मैं घरवालों से दूर रहकर घंटों अकेले सोचती रहती और उसे याद कर मुस्कुराती. पर ज़ुबां न खुलती, नज़रें ऊपर न उठतीं. लेकिन एक दिन मां के उन शब्दों ने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी, ङ्गङ्घअर्चु, बाबा की पगड़ी कभी तेरी वजह से उतर ना पाए.फफ शायद मेरे दिल का हाल, मुझसे पहले मां समझ गई थी, तभी तो मां ने मुनीम जी से कह कर उसकी नौकरी मेरी मौसी के यहां करवा दी.

मेरे विवाह तक उसने सारा काम बड़ी ईमानदारी से किया और मेरे विदा होने से पहले ही ख़ुद अलविदा कहकर चला गया. उसके प्यार के समर्पण ने मेरी गृहस्थी की सुरक्षा की है. जब कभी उसे याद करती हूं तो उसके समर्पण और प्यार से भावुक हो उठता है मन.

– अर्चना

जानें कैसे पुरुषों पर भी असर डालता है तलाक़ (5 Reasons Why Divorce Is More Stressful On Men Than Women)

Divorce

आमतौर पर लोगों की यही सोच होती है कि तलाक़ का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर होता है और इसका पुरुषों पर कोई असर नहीं होता, लेकिन ये सच नहीं है. तलाक़ पुरुषों को भी प्रभावित करता है. पार्टनर से अलगाव उन्हें भी अकेला करता है, उन्हें भी तकलीफ़ देता है. तलाक़ का पुरुषों पर और क्या असर होता है, आइए जानते हैं.

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आमतौर पर तलाक़ के केस में सबकी सहानुभूति व तवज्जो पत्नी के साथ होती है. और माना जाता है कि किसी भी महिला के लिए तलाक़ की प्रक्रिया बेहद तकलीफ़देह होती है. लेकिन शायद ही किसी ने इस बात पर गौर किया हो कि तलाक़ पुरुषों के लिए भी उतना ही मुश्किलोंभरा व चुनौतीपूर्ण होता है. तलाक़ एक पुरुष को भी डिप्रेशन में डाल देता है. उसे अकेला बना देता है. साथ ही दोस्तों, परिवार, समाज की नज़रों में विलेन भी.
डॉ. प्रीति नंदा के अनुसार, यह एक मिथ है कि स़िर्फ महिलाएं ही अपने पति से बहुत प्यार करती हैं व उनसे दिल से जुड़ी रहती हैं. जबकि पुरुष भी अपनी पत्नी से भावनात्मक लगाव रखते हैं और डिवोर्स के बाद भी उस लगाव, संवेदनाओं व चाह को तोड़ नहीं पाते व बेचैन रहते हैं.
– तलाक़ पुरुषों को भावनात्मक रूप से अस्थिर कर देता है.
– कई बार मानसिक अवसाद इतना बढ़ जाता है कि उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति पनपनेे लगती है.
– मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुष एक स्त्री की तुलना में अपने दुख को 1% भी व्यक्त नहीं करते, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका दुख-दर्द पत्नी की तुलना में कम है.
– तलाक़ के बाद पुरुष किस-किस तरह से प्रभावित होते हैं, आइए जानते हैं.

मानसिक रूप से कमज़ोर होना

– पुरुष शारीरिक रूप से नारी की तुलना में भले ही बेहद ताक़तवर होते हैं, लेकिन मानसिक मज़बूती में वे स्त्री की तुलना में कहीं नहीं ठहरते.
– ये अलग बात है कि वे दुनिया के सामने कठोर बने रहते हैं.
– यहां तक कि तलाक़ जैसी त्रासदी को भी बिना शिकन के झेल लेते हैं, लेकिन यह महज़ दिखावा होता है.
– जीवनसाथी से अलगाव, आगे का जीवन तन्हा जीना, दोस्तों, रिश्तेदारों, महिला कलीग्स की चुभती निगाहें, ताने-उलाहने, तीखे कमेंट्स पुरुषों को अंदर से तोड़ देते हैं.
– उनका मन कमज़ोर और भावनाएं घायल होती जाती हैं.
– लेकिन हमेशा से जो सिखाया-बताया जाता है कि पुरुष बहादुर होता है, रोता नहीं है, उसे दर्द नहीं होता है… बस, यही बातें उन्हें कठोर बने रहने पर मजबूर कर देती हैं.

दर्द व्यक्त न कर पाना

– पुरुष अपने दुख-तकलीफ़ को उतनी सहजता से नहीं कह पाते, जितनी सरलता से महिलाएं कहती हैं. फिर चाहे बात छोटी-सी खरोंच लगने की हो या तलाक़ जैसी दुखद घटना.
– जहां स्त्री अपने-पराए हर किसी से अपने तलाक़ पर बात कर लेती है, पति के अत्याचार, व्यवहार के बारे में सब कुछ बता अपना मन हल्का कर लेती है, वहीं पुरुष ये सब नहीं कर पाते.
– पुरुष के लिए तो अपने बेस्ट फ्रेंड से भी अपनी पत्नी, तलाक़ और उससे जुड़े हालात, वजहों को डिसकस करना, अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना टेढ़ी खीर साबित होता है.
– पुरुष अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण अपने ग़म को अपने अंदर ही पालता रहता है.
– तलाक़ से उपजा अवसाद, सदमा और पत्नी का रिजेक्शन पुरुष को लंबे समय तक तोड़कर रख देता है.
– पुरुष का यही अंतर्मुखी स्वभाव आगे चलकर कई गंभीर मानसिक व शारीरिक हेल्थ प्रॉब्लम्स को जन्म देता है.

प्रभावित होती प्रोफेशनल लाइफ

– भारतीय पुरुष शादी होते ही अपनी हर तरह की ज़रूरतों के लिए पत्नी पर कुछ इस कदर निर्भर हो जाते हैं कि उनका डेली रूटीन बिना पत्नी की मदद के पूरा नहीं होता.
– तलाक होने पर अचानक जब यह सपोर्ट सिस्टम फेल हो जाता है, तो उनकीज़िंदगी अव्यवस्थित हो जाती है. इन सबका असर उनकी नौकरी यानी प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ने लगता है.
– वे काम में पहले जैसे स्मार्ट और परफेक्ट नहीं रह जाते.
– देर रात तक की मीटिंग अटेंड नहीं कर पाते.
– वे लॉन्ग टूर पर नहीं जा पाते हैं, क्योंकि अब उन्हें घर मैनेज करने के साथ-साथ बच्चों के स्कूल (यदि बच्चे हैं), उनकी सुरक्षा की भी चिंता लगी रहती है.
– पहले की तरह स़िर्फ अपने करियर पर फोकस नहीं रख पाते, जिससे वे प्रोफेशनल फ्रंट पर पिछड़ने लगते हैं.
– सायकोलॉजिस्ट के अनुसार, घर-बाहर की ज़िम्मेदारी के साथ समाज व रिश्तेदारों के व्यवहार में उनके प्रति आया परिवर्तन, ठंडापन उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर करता है.
– जीवनसाथी की कमी उनके मन में खालीपन का एहसास पैदा करने लगती है.
– वे ग़ुस्सैल, चिड़चिड़े व आक्रामक होते जाते हैं.
– कभी-कभी अल्कोहल, ड्रग्स, जुए आदि की लत उनके पतन का कारण बन जाती है.

फाइनेंशियल प्रेशर

– पुरुषों के लिए डिवोर्स फाइनेंशियली भी बहुत भारी पड़ता है.
-तलाक़ के बाद भारी एलीमनी देनी पड़ती है.
– जॉइंट एसेट्स का लिक्विडेशन करना होता है.
– घर, चल-अचल संपत्ति में भी पत्नी व बच्चोें की हिस्सेदारी देना ज़रूरी होता है.
– इन सब को पूरा करते-करते पुरुष की ज़िंदगीभर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ख़र्च हो जाता है.
– फाइनेंशियल प्रेशर का असर उनके परफॉर्मेंस पर पड़ने लगता है, जिससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम होता जाता है.
– तलाक़ पुरुष को मानसिक रूप से तो तोड़ता ही है, साथ ही कमोबेश पैसों की तंगी होेना उनके लिए दोहरी मार साबित होता है, जिसे झेल पाना पुरुषों के लिए कतई आसान नहीं होता.

इमोशनल अत्याचार

– डिवोर्स होने पर छोटे बच्चों की कस्टडी अक्सर मां को मिलती है. पिता के हिस्से में आती हैं कोर्ट के आदेशानुसार नियत समय पर चंद मुलाक़ातें.
– पुरुष अपनी पत्नी से अलग रह सकते हैं, लेकिन अपने बच्चों का दूर जाना उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देता है.
– बच्चे के जन्म से लेेकर परवरिश से जुड़ी छोटी-छोटी बातें, यादें उन्हें ग़मगीन करती चली जाती हैं, यह औैर बात है कि वे अपना यह दर्द किसी से साझा नहीं करते.
– तलाक़ के बाद अपने बच्चे से पिता को दूर कर दिया जाना उनके लिए किसी इमोशनल अत्याचार से कम नहीं है.
तलाक़ का पुरुषों के मान-सम्मान और इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. लेकिन अफ़सोस यह कि जहां पत्नी को हर तरफ़ से सहयोग मिलता है, वहीं पति के पास एक कंधा भी नहीं होता, जिस पर सिर रखकर, वह अपना मन हल्का कर सके. इसलिए यह कह देना कि तलाक़ का असर पुरुषों पर नहीं होता न्यायसंगत नहीं है.

– निधि निगम

रिश्ते से डिलीट करें इन 10 आदतों को (10 Bad Habits That Could Ruin Your Marriage )

Bad Habits

पति-पत्नी का रिश्ता प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से मज़बूत बनता है, पर अगर पति-पत्नी की कुछ बुरी आदतें रिश्ते को नुक़सान पहुंचाने लगें, तो ऐसी आदतों को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए, वरना गृहस्थी की गाड़ी को डगमगाने में देर नहीं लगती.

Bad Habits
आदत- बातें छिपाना या झूठ बोलना

शादीशुदा ज़िंदगी में अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे से कई बातें छुपाते हैं, बहाने बनाते हैं और अपनी ग़लतियों को छुपाने के लिए अक्सर झूठ भी बोलते हैं, पर हमें यह एहसास ही नहीं होता कि ये छोटे-छोटे झूठ हमारे रिश्ते को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं. और सबसे बड़ी बात कि ये आपके रिश्ते से विश्‍वास को ख़त्म कर देते हैं.
डिलीट करें: अगर आपसे कोई ग़लती हुई है, तो झूठ बोलने की बजाय उसे मान लें. पार्टनर को इस बारे में बताएं, भले ही उस समय पार्टनर आपसे ग़ुस्सा होगा, लेकिन आपकी बात को ज़रूर समझेगा और सबसे बड़ी बात आपके रिश्ते में हमेशा विश्‍वास बना रहेगा.

आदत- बदलने की कोशिश करना

यह एक बहुत ही ख़तरनाक आदत है. कभी-कभी तो लगता है कि लोग एक-दूसरे को सुधारने के मक़सद से ही शादी करते हैं, ख़ासकर नए शादीशुदा जोड़े, जो सब कुछ अपने मुताबिक़ चाहते हैं. याद रहे, आपकी यह आदत पार्टनर को ग़ुस्सा दिलाने और चिड़चिड़ा बनाने के लिए काफ़ी है, जो आपके रिश्ते के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं.
डिलीट करें: शादी का मतलब एक-दूसरे को अपने मुताबिक़ ढालना नहीं, बल्कि ज़रूरत के मुताबिक़ ढल जाना है. आपको यह बात समझनी होगी कि आप दोनों ही अब तक अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े हैं, जिससे आपकी आदतें भी काफ़ी अलग हैं, पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि आपकी आदतें अच्छी हैं और उनकी ग़लत. अपने रिश्ते को थोड़ा समय दें और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें.

आदत- फॉर ग्रांटेड लेना

अक्सर शादी के कुछ सालों बाद लोग अपने रिश्ते को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं. फॉर ग्रांटेड लेना यानी पार्टनर व रिश्ते के प्रति
लापरवाही भरा रवैया अपनाना, उसके त्याग-समर्पण को महत्व न देना आदि. आपका यह रवैया आपके पार्टनर के मन में आपके लिए चिढ़ और ग़ुस्से के अलावा कुछ और नहीं लाएगा.
डिलीट करें: अपने रिश्ते को इससे बचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. पार्टनर जब भी आपके लिए कुछ स्पेशल करता है या आपकी किसी समस्या को बिना कहे सुलझा देता है, तो ङ्गथैंक्यूफ कहकर उसे प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि आप भी समय-समय पर कुछ ऐसा करें, जिससे आपके रिश्ते में हमेशा गर्माहट बनी रहे.

आदत- बातचीत से उठकर चले जाना

अक्सर पार्टनर्स अपनी बात कहकर, सामनेवाले की बात बिना सुने वहां से हट जाते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वो बहस को टाल रहे हैं, पर वो यह नहीं जानते कि अपने पार्टनर को अपनी बात रखने का मौक़ा न देकर, वो उसके साथ ज़्यादती कर रहे हैं. ऐसा करने से पार्टनर को बुरा लग सकता है, जिससे वो अगली बार किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखना बंद कर सकता है. इससे रिश्ते में खटास आती है, जो आपके रिश्ते को बिगाड़ सकती है.
डिलीट करें: पति-पत्नी के बीच यह एक नियम होना चाहिए कि जब भी एक किसी समस्या या मुद्दे पर अपनी बात रख रहा हो या सफ़ाई मांग रहा हो, तो दूसरा उसे सुनेगा और उस पर अपनी राय रखेगा और किसी भी हाल में वहां से उठकर नहीं जाएगा. यह नियम आपकी हर समस्या को सुलझा देगा. इस ख़्याल को दिमाग़ से निकाल दें कि उठकर चले जाने से आप बात को ख़त्म कर रहे हैं, बल्कि आप उसे और बढ़ा रहे हैं.

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आदत- हर बात में तुलना करना

तुलना किसी को भी अच्छी नहीं लगती, क्योंकि हर व्यक्ति अपनी समझ व क्षमतानुसार काम व व्यवहार करता है, पर कुछ लोगों की आदत होती है, हर बात में पार्टनर की तुलना अपने दोस्तों, पड़ोसी या कलीग्स से करने की. हमेशा तुलना का मकसद पाटर्नर को नीचा दिखाना ही नहीं होता है, बल्कि जाने-अनजाने की गई तुलना भी किसी के आत्मविश्‍वास को कमज़ोर कर सकती है. इसलिए इस तुलनात्मक आदत से अपने रिश्ते को कमज़ोर न होने दें.
डिलीट करें: किसी भी रिश्ते की मज़बूती दो लोगों के मान-सम्मान से बनती है, पर अगर आपके पार्टनर का आत्मविश्‍वास ही कमज़ोर हो, तो भला वह अपने रिश्ते को क्या मज़बूती देगा. पार्टनर का मान-सम्मान आपकी ज़िम्मेदारी है, इसे निभाएं और हर बात में किसी और से तुलना करना छोड़ दें.

आदत- पार्टनर पर नज़र रखना

पार्टनर के मोबाइल में कॉल लॉग चेक करना, सभी मैसेजेस पढ़ना, ईमेल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नज़र रखना कुछ लोगों की आदत होती है. इस तरह नज़र रखने का मतलब है कि आप अपने पार्टनर पर शक कर रहे हैं और आपको उन पर विश्‍वास नहीं. ऐसा करके आप अपने पार्टनर के विश्‍वास को तोड़ते हैं, जो आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं.
डिलीट करें: पार्टनर पर नज़र रखने से पहले यह ध्यान रखें कि हर व्यक्ति का अपना पर्सनल स्पेस होता है, जिसमें अतिक्रमण किसी को भी पसंद नहीं आता. आपको हर व़क्त सैटेलाइट बनकर घूमने की ज़रूरत नहीं, अपने पार्टनर पर विश्‍वास करना भी सीखें. कुछ लोग एहतियात के तौर पर ऐसा करते हैं, ताकि समय रहते अपने रिश्ते को संभाल सकें, पर अक्सर बेवजह का शक रिश्तों को बर्बाद कर देता है. अगर आपके मन में कोई बात है, तो जासूसी करने की बजाय पार्टनर से आमने-सामने बैठकर बात करें.

आदत- दूसरों के सामने बेइज़्ज़ती करना

दूसरों के सामने ख़ुद की अहमियत बढ़ाने के लिए पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना एक बचकानी आदत है. इसका इस्तेमाल ज़्यादातर पुरुष करते हैं, पर महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं. ऐसा करनेवाले पार्टनर्स अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनकी इस आदत को लोग उनके रिश्ते की असफलता मानते हैं.
डिलीट करें: पति-पत्नी का व्यवहार घर-बाहर एक समान होना चाहिए. आप एक-दूसरे का सम्मान जितना घर में करते हैं, उतना ही दूसरों के सामने भी करें. अगर कभी मन-मुटाव भी हो गया है, तो उसे अपने घर के बाहर न ले जाएं. दूसरों के सामने हमेशा अपने पार्टनर की तारीफ़ करें, पर अगर यह नहीं कर सकते, तो कम से कम ऐसी बात न कहें, जिससे उन्हें बेइज़्ज़ती महसूस हो.

आदत- हर व़क्त कमियां गिनाना

ङ्गआप किसी काम के नहीं हो,फ ङ्गआपने ऐसा क्यों किया,फ ङ्गआपको कुछ आता भी है,फ जैसे उलाहनों से अपने पार्टनर की कमियां गिनाना बहुत ग़लत आदत है. पार्टनर में कमियां और ख़ामियां निकालना बहुत आसान है, पर उनकी ख़ूबियों को पहचानकर उनकी तारीफ़ करना बहुत मुश्किल.
डिलीट करें: पति-पत्नी का फज़र्र् एक-दूसरे की कमियां गिनाना नहीं, बल्कि उन कमियों के साथ अपनाना है. आख़िर कमियां किसमें नहीं होतीं, इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है. हम सबमें कुछ न कुछ कमी है. शादी का मतलब ही होता है, पार्टनर को उसकी ख़ूबियों और कमियों के साथ अपनाना, फिर शिकायत किस बात की. पार्टनर की कमियां गिनाने से पहले ख़ुद का आकलन भी कर लें. अगर आप परफेक्ट नहीं, तो भला दूसरों से ऐसी उम्मीद क्यों.

आदत- इमोशनल ब्लैकमेल करना

अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. अक्सर अपनी ज़िद मनवाने के लिए कपल्स इसका इस्तेमाल करते हैं. ङ्गङ्घअगर आप मुझसे प्यार करते हैं, तो ऐसा ज़रूर करेंगे…फफ जैसी इमोशनल बातों से अपनी ज़िद मनवाते हैं. अपनी बात को मनवाने के लिए कभी रोना-धोना, तो कभी सेक्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं.
डिलीट करें: अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करके भले ही आप अपनी बात मनवा लेते हैं, पर इससे पार्टनर आपको ज़िद्दी और स्वार्थी समझने लगता है. उनके मन में अपनी ऐसी छवि न बनने दें और जल्द से जल्द अपनी इस आदत को डिलीट करें.

आदत- स़िर्फ अपने बारे में सोचना

मेरी पसंद, मेरी आदतें, मेरा विचार, मेरा रहन-सहन, मेरा कंफर्ट… जैसी बातें आपके वैवाहिक जीवन के लिए उचित नहीं. अपने बारे में सोचना अच्छी आदत है, पर स़िर्फ अपने बारे में सोचकर पार्टनर को तवज्जो न देना सही नहीं है, जो आपके वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करता है. शादी का मतलब पहले स़िर्फ मैं नहीं, बल्कि हम होता है, इस बात को समझें.
डिलीट करें: ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन दो लोगों से जुड़ा रिश्ता है. शादी में कई समझौते करने पड़ते हैं, इसलिए हमेशा ख़ुद को आगे रखने की बजाय, अपने रिश्ते को आगे रखें, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी हमेशा ख़ुशहाल बनी रहे.

– सुनीता सिंह

पहला अफेयर: आंखों आंखों में… (Pahla Affair: Ankhon Ankhon mein…)

Pahla Affair
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पहला अफेयर: आंखों आंखों में… (Pahla Affair: Ankhon Ankhon mein…)

मेरी प्रिय मधु,

रजनी की इस बेला में जब सारा संसार सो रहा है और मैं अतीत के ख़ामोश पृष्ठों को दोहराने का प्रयत्न कर रहा हूं. इस नीरव क्षण के एकांत प्रहर में एक अत्यंत वेदना, एक विवशता मेरे हृदय में कोलाहल कर रही है. अंत में एक अतीत की स्मृति को भारी कर रही है. इस व्यथा भरे संसार में जहां टीस का साम्राज्य है और उसमें दो रतनारी आंखें तैर रही हैं. मैं उन्हें बेसुध-सा देख रहा हूं और सोच रहा हूं ‘कैसी है ये दुनिया?

कोई तो अपनी अधखिली आशाओं को लेकर चला जाए और कोई मुझ जैसा स्मृति चिह्न ही मिटा देना चाहे. स्मृति एक दर्दनाक पुकार है, जिसे कोई सुन नहीं सकता. ऐसी पीड़ा है, जिसे कोई देख नहीं सकता. जिसकी कोई दवा नहीं. मैंने उस दो रतनारी आंखोंवाली से प्रेम किया था. क्या प्रेम का उपहार यही होता है? हृदय से स्मृति को चिपटाए रखूं, तो चोट पहुंचती है और स्मृति को भूलना चाहूं, तो जीवन खाली-खाली-सा लगता है. फिर भी इस वेदनाभार के सम्मान को सहन करूंगा, क्योंकि यह तुम्हारा प्रेमोपहार जो है.

अचानक ही तुम मेरी जीवन सरिता में आ मिली थीं. मुझे सब याद है, मैं सार्वजनिक पुस्तकालय में बैठा समाचार पत्र पढ़ रहा था… अचानक तुम्हारी मधुर आवाज़ मेरे कानों में पड़ी. मैंने पहली बार तुम्हें पानी के नल पर पानी भरते देखा. हम एक-दूसरे की आंखों में देखते रहे और सारी दुनिया भूल गए. तुम्हारी गागर छलक रही थी. तुम और मैं बेसुध से एक-दूसरे की आंखों में खो गए थे. तुम्हारे उस क्षणिक मिलन के असीम सुख को तुम्हारे पास खड़ी सहेली ने झकझोर दिया और तुम घबराई-सी गागर लेकर भाग गईं. आज तक मेरे हृदय में उस सुखद क्षण की अमिट छाप है, जो समयान्तर नहीं मिटा सका.

उस दिन के बाद मैं प्रतिदिन कितनी बार तुमसे आंखों ही आंखों में मिला. लेकिन समाज हमारे अद्भुत मिलन पर हंसने लगा. इतना होते हुए भी हमारा प्रेममिलन मुक्त वायु की तरह स्वतंत्र था. अपनी मूक भाषा हम ही समझ पाते थे. मैंने उन सुखी क्षणों को अपने जीवन का स्थाई अंग बनाना चाहा, पर ऐसा न हुआ.

समाज के ईर्ष्यालु लोगों ने और तुम्हारे घरवालों ने तुम्हारा बाहर आना बंद कर दिया. आख़िर में तुम्हारा मन अकुलाया और तुम्हारी भावनाएं पत्र द्वारा मिलीं. आंखों का मिलन बंद होने के पश्‍चात् हमारा पत्र मिलन शुरू हुआ. अचानक ही फिर एक दिन तुम्हें पानी भरते हुए देखा. उन आंखों के मिलन में दर्द और ख़ुशी दोनों थी.

धीरे-धीरे पत्र मिलन पर भी पाबंदी हो गई और पता चला कि तुम्हारी शादी तय हो गई. तुम शोक में थी और मेरा दिल कराह रहा था. शादी तो शरीर की हो गई, पर प्रेम का संबंध तो आत्मा से है… जिस वस्तु का संबंध तन से है, वह वासना है, क्योंकि वासना बाह्य है. आत्मा का संबंध अमर है.

तुम हृदय में टीस लिए हुए अजनबी पति के साथ ससुराल चली गईं, जहां तुम्हें थोपी हुई ज़िंदगी जीना है. मैं तुम्हारी इस ज़िंदगी में दख़ल नहीं देना चाहता. हमारा प्रेम अमर है.

अलविदा! तुम्हारा वही सत्य प्रेमी.

– सत्यनारायण पवार

सेक्सुअल हेल्थ के 30+ घरेलू नुस्खे(30+ Homemade Tips For Improving Sexual Health)

Sexual Health

अक्सर सेक्सुअल पावर की कमी, ग़लत खानपान, ग़लतफ़हमियां, डर या फिर आधी-अधूरी जानकारी के कारण सेक्सुअल हेल्थ प्रभावित होती है. तो क्यों न सेक्स से जुड़े कुछ आसान ट्रिक्स के बारे में जानें और अपनी सेक्स लाइफ को ख़ुशहाल बनाएं.

 

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सेक्स पावर बढ़ानेवाले फूड

– हर दिन लहसुन खाएं. लहसुन में मौजूद कामोत्तेजक गुण स्त्री-पुरुष दोनों में सेक्स की इच्छा को बढ़ाते हैं.
– पोटैशियम से भरपूर ऐवोकैडो फ्रूट में कामेच्छा को बढ़ाने के सारे गुण होते हैं. इसमें मौजूद फॉलिक एसिड से एनर्जी व स्टेमिना भी बढ़ता है.
– तरबूज़ में सिट्रुलिन नाम का अमीनो एसिड होता है, जो रक्त धमनियों को आराम देकर सेक्स की इच्छा को बढ़ाता है.
– एक शोध के अनुसार, केसर के इस्तेमाल से सेक्सुअल डिज़ायर बढ़ती है, इसलिए अपने भोजन में केसर को भी ज़रूर शामिल करें.
– चॉकलेट हमेशा से रोमांस व पैशन का प्रतीक रहा है. ऐसा कहा जाता है कि एक पैशनेट फोरप्ले के बाद महिलाएं जितना इंडॉरफिन हार्मोन उत्पन्न करती हैं, उससे चार गुना अधिक इंडॉरफिन केवल चॉकलेट खाने से महिलाओं के शरीर में बन जाता है.
– अंडे में मौजूद विटामिन बी5 व बी6 स्ट्रेस को कम करने व सेक्स को आसान करने में मदद करते हैं. इसके अलावा अंडा खाने से हेल्थ व फिटनेस भी बनी रहती है.
– सेब, केला, चेरीज़, नारियल, खजूर, अंजीर, अंगूर, आम, पपीता, नाशपाती, अनार, रसभरी आदि फल सेक्स पावर को बढ़ाते हैं.
– गाजर, प्याज़, खीरा, बैंगन व अन्य मौसमी ताज़ी हरी सब्ज़ियां आदि अपने कामोत्तेजक गुणों के लिए जानी जाती हैं. वैज्ञानिकों ने भी अपने शोधों द्वारा यह प्रमाणित कर दिया है कि फलों व सब्ज़ियों में कामोत्तेजक शक्ति अधिक होती है.
– उड़द की दाल पकाकर उसमें नींबू निचोड़कर भोजन के साथ लेने, दूध में उड़द की खीर या उड़द दाल का लड्डू बनाकर खाने से कामशक्ति बढ़ती है.
– दालचीनी, अश्‍वगंधा व मूसली- तीनों को समभाग में लेकर कपड़छान चूर्ण बनाकर रख लें. इसे 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ लेने से सेक्स पावर बढ़ता है.
– 3 ग्राम इलायची चूर्ण अनार के रस के साथ सेवन करने से कामशक्ति में वृद्धि होती है.
– रात को सोने से पहले उबले हुए दूध में शतावरी चूर्ण मिलाकर सेवन करें.
– दूध में छुहारे या अंजीर पकाकर दूध के साथ चबाकर खाना बहुत पौष्टिक होता है, जिससे सेक्सुअल डिज़ायर बढ़ता है.
– मूंगफली व गुड़ की पट्टी व भिगोए हुए चने भी यौनशक्तिवर्द्धक भोजन माने जाते हैं.
– 10-15 ग्राम उड़द की दाल रात को पानी में भिगो दें. सुबह इसको दरदरा पीसकर 250 मि.ली. दूध में डालकर 15-20 मिनट तक पकाएं. थोड़ी-सी शक्कर भी डाल दें. फिर आंच पर से उतारकर ठंडा होने के लिए रख दें. सुबह खाली पेट खाएं.
– साठी चावल का भात उड़द की दाल के साथ घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पुरुषों का सेक्सुअल पावर बढ़ता है.
– रात को सोते समय गुनगुने मीठे दूध में पाचनशक्ति के अनुसार थोड़ा घी डालकर पीना, पके केले को दूध या मलाई के साथ खाना व सुबह खाली पेट मक्खन, कालीमिर्च, कच्चा नारियल व सौंफ उचित व अनुकूल मात्रा में सेवन करने से चमत्कारिक रूप से सेक्स पावर बढ़ता है.
– 5 ग्राम प्याज़ का रस, 2 ग्राम घी व 3 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें और ऊपर से एक ग्लास दूध पीएं.
हेल्थ अलर्ट
– शक्कर, नमक, सैचुरेटेड फैट व प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से सेक्स की इच्छा में कमी आती है.
– गरिष्ठ, अधिक मिर्च-मसालेवाले पदार्थ, तले हुए व्यंजन, चटनी, अचार, क्रीमवाले सॉसेज के सेवन से भी सेक्सुअल पावर प्रभावित होता है.

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सेक्सुअल प्रॉब्लम्स

यदि आपको स्वप्नदोष (नाइट फॉल) की समस्या है, तो-

– मुलहठी को कूट-पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें. इसे 3 ग्राम की मात्रा में एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर चाटें.
– इलायची के दानों का चूर्ण व शक्कर सम मात्रा में लेकर आंवले के रस में खरल करके गोलियां बना लें. 1-1 गोली
सुबह-शाम सेवन करें.
– 150 ग्राम त्रिफला (हरड़, आंवला व बहेड़ा) का बारीक़ चूर्ण लेकर उसमें 30 ग्राम कपूर व 150 ग्राम गुड़ मिलाकर
छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें. 1-1 गोली सुबह व रात को सोने से पहले पानी के साथ लें.
– 10 ग्राम ताज़े आंवले का रस, 10 ग्राम गिलोय का रस व चुटकीभर शिलाजीत- सभी को मिलाकर मिश्री के चूर्ण के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष की शिकायत दूर हो जाती है.
– 10-15 छुहारा घी में भूनकर सुबह चबाकर खाएं व ऊपर से इलायची, शक्कर व कौंच बीज का चूर्ण मिलाकर उबला हुआ दूध पीएं.

शीघ्रपतन (प्री-इजैकुलेशन) की शिकायत होने पर-

– 4-5 छुहारों को दूध में उबालकर खाएं व दूध पीएं. ऐसा सुबह-शाम 2-3 महीने तक करें.
– आंवले का मुरब्बा बनाकर रख लें. 2-3 मुरब्बे हर रोज़ 40 दिनों तक खाएं. इससे सीमन (वीर्य) गाढ़ा होता है व शीघ्रपतन की समस्या भी दूर होती है.
– 2 गोली चंद्रप्रभावटी व 3 ग्राम शतावरी चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ लें.
– 10 ग्राम तुलसी के बीज, 20 ग्राम अकरकरा व 30 ग्राम मिश्री का चूर्ण बना लें व उसे बॉटल में भरकर रख दें.
सुबह-शाम एक ग्राम चूर्ण दूध के साथ सेवन करें.
– तुलसी की जड़ को सुखाकर चूर्ण बना लें. 1 ग्राम तुलसी का चूर्ण व 1 ग्राम अश्‍वगंधा का चूर्ण मिलाकर खाएं व ऊपर से गाय का दूध पीएं.
– 30 ग्राम जैतून का तेल व 10 ग्राम दालचीनी तेल को मिलाकर रख लें. इस तेल की 1-2 बूंद प्राइवेट पार्ट पर लगाकर मालिश करें.

नपुंसकता (इंपोटेंसी)

– कद्दूकस किए हुए नारियल में 4-5 चम्मच बरगद का दूध व 2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें. इस नुस्ख़े का
एक-डेढ़ महीने तक सेवन करें. ध्यान रहे, इस दौरान सेक्सुअल रिलेशन न रखें.
– एक ग्लास दूध में 2 छुहारे डालकर पकाएं. थोड़ा-सा केसर भी डाल दें. जब दूध आधा रह जाए, तो आंच पर से उतार लें. ठंडा होने पर छुहारे को चबा-चबाकर खाएं और ऊपर से वही दूध पीएं. पानी बिल्कुल न पीएं. इसे रात को सोने से पहले लें.
– 300 ग्राम कद्दूकस किया हुआ नारियल, 150 ग्राम नारियल का पानी, 150 ग्राम गाय का घी व 300 ग्राम शक्कर- सब को मिलाकर धीमी आंच पर रखकर पाक तैयार करें. फिर 5-5 ग्राम दालचीनी, तमालपत्र, इलायची, जायफल, जावित्री, कालीमिर्च, सोंठ, जीरा, वायविडंग व सौंफ- सभी का चूर्ण उसमें मिलाकर पाक तैयार कर लें. ठंडा होने पर ढंक दें. इस पाक को 10 ग्राम की मात्रा में हर रोज़ खाकर ऊपर से दूध पीएं.

– ऊषा गुप्ता

पहला अफेयर: सावन के महीने का मदमस्त प्यार (Pahla Affair: Romance In The Rain)

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पहला अफेयर: सावन के महीने का मदमस्त प्यार (Pahla Affair: Romance In The Rain)

मौक़ा मिलते ही खुली छत पर जाकर चांद-सितारे निहारना, जुगनुओं के पीछे भागना, स्कूल से आते ही तितलियां पकड़ना, किसी की भी नकल उतारना, दादी मां का चश्मा छिपा देना, मां के आंचल से गंदे हाथ पोंछना- और भी न जाने कैसी-कैसी ऊटपटांग हरक़तें करना, वो दिन भी क्या दिन थे.

उन दिनों लड़कियों को आज जितनी आज़ादी नहीं थी, लेकिन घर-आंगन में, मुहल्ले में हिरणियों की तरह कुलांचे भरना, बिना बात के खी-खी करना और सावन की बरसात में तो जैसे पागलपन ही सवार हो जाता था. ऐसी ही बरसात की एक शाम ने मेरा सारा बचपन छीन लिया और मैं न जाने कितनी बड़ी हो गई. कॉलेज के फंक्शन की तैयारी चल रही थी. सजावट का काफ़ी काम मेरे ज़िम्मे था.

काम समेटकर जब बाहर निकली, तो शाम ढल चुकी थी. कॉलेज लगभग खाली हो चुका था. जैसे ही मैंने साइकिल उठाई, तो होश उड़ गए. साइकल पंक्चर थी, अब क्या किया जाए? छोटा शहर और कॉलेज से शहर की दूरी तीन किलोमीटर. उस समय रिक्शा मिलने का भी कोई सवाल नहीं था, उस पर सुनसान रास्ता. पैदल जाने की हिम्मत जुटा ही रही थी कि एक साइकल आकर मेरे पास रुकी. देखा तो मेरा सीनियर था. भले ही को-एजुकेशन थी, लेकिन लड़कियां गिनती की ही थीं. लड़कों से भी बातचीत न के बराबर ही होती थी. शिष्टाचार के नाते उसने मदद की पेशकश की और मुझे मजबूरी में लिफ्ट लेनी ही पड़ी. समस्या यह भी थी कि उसकी साइकल में

कैरियर नहीं था, इसलिए मुझे आगे ही बैठना पड़ा. रात होने को थी, हल्की-हल्की फुहार भी पड़ रही थी. मेरी सोचने-समझने की शक्ति मानो ख़त्म हो चुकी थी. इसके अलावा मन में यह भी डर था कि कहीं कोई देख न ले. ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे मोमबत्ती पिघल रही हो. मेरे दोनों ओर मज़बूत बांहों का घेरा, मदहोश करनेवाली ठंडी हवा में जैसे मैं ज़मीन में गड़ी जा रही थी.

शहर के शुरू होते ही उसने साइकल रोक दी और बिना एक शब्द बोले मैं उतरकर चल दी. धन्यवाद तक कहने के लिए मेरा मुंह नहीं खुला. कॉलेज में दो साल तक कई बार हमारा आमना-सामना हुआ. निगाहें कई बार मिलीं, उसकी मासूम-सी नज़र मेरी ओर हसरत से देखती-सी प्रतीत होती थी, लेकिन वो दौर ऐसा था कि न उसने कुछ कहने की हिम्मत जुटाई, न ही मैं पहल करके कुछ बात कर सकी. हमारी राहें जुदा हो गईं, बिना एक भी शब्द बोले.

उस पहले प्यार को मैं आज तक भूल नहीं पाई. सावन के महीने का वो निशब्द पहला प्यार याद आते ही आज भी तन-मन महक उठता है. कई सावन आए और गए, लेकिन उस सावन की याद मात्र से ही आज भी भीतर तक भीग जाती हूं. वो सावन के मदमस्त महीने का पहला अफेयर ताउम्र नहीं भूलेगा ये दिल.

– विमला गुगलानी

इन 6 Situations में कैसे हैंडल करें पार्टनर को? (How To Handle your partner in these 6 Situations)

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वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. यही उतार-चढ़ाव रिश्तों की मज़बूती का पैमाना तय करते हैं. जिन कपल्स का दृष्टिकोण इन उतार-चढ़ावों के प्रति सकारात्मक होता है, वे आसानी से इन्हें पार कर जाते हैं और जिन अनहैप्पी कपल्स का नज़रिया नकारात्मक होता है, वेे इन मुश्किल परिस्थितियों से घबराकर हार मान लेते हैं. आइए जानें, दांपत्य जीवन की इन कठिन परिस्थितियों के बारे में, जिनसे दंपतियों को दो-चार होना पड़ता है.

 

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स्थिति नं. 1: जब पार्टनर की नौकरी छूट जाए

हैप्पी कपल्स: नौकरी छूटने पर दंपति एक-दूसरे के प्रति दया का भाव नहीं दिखाते, क्योंकि उन्हें अपने पार्टनर की काबिलीयत पर पूरा भरोसा होता है.
– उन्हें इस बात का एहसास रहता है कि उनका पार्टनर पहले से ही परेशान है, इसलिए उस पर व्यंग्य करने की बजाय उसे इमोशनली व मेंटली सपोर्ट करते हैं.
– पार्टनर को ख़ुश रखने का प्रयास करते हैं.
– हैप्पी कपल्स अपनी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर बजट बनाते हैं और उसी के अनुसार अपनी वित्तीय समस्याओं को हल करते हैं.
– नौकरी छोड़ने के बाद भी हैप्पी कपल्स का नज़रिया सकारात्मक रहता है. अपने इसी सकारात्मक नज़रिए के कारण वे अपना अगला लक्ष्य तय करते हैं.
अनहैप्पी कपल्स: नौकरी छूटने के बाद दंपति तनावग्रस्त और चिड़चिड़े रहते हैं, जिससे घर की शांति भंग होती है.
– तनावग्रस्त और अवसाद से घिरने के कारण वे बातचीत करना बंद कर देते हैं.
– स्थिति को समझने की बजाय दंपति के बीच में छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े होने लगते हैं.

स्थिति नं. 2: जब पार्टनर वर्कोहॉलिक हो

हैप्पी कपल्स: कॉरपोरेट ऑफिस में काम के महत्व और पार्टनर की पोज़ीशन को ध्यान में रखते हुए कपल एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं करते.
– एक-दूसरे में बिज़ी या वर्कोहॉलिक होने का ताना नहीं देते.
– वर्कोहॉलिक होने पर भी हैप्पी कपल्स साथ बैठकर पारिवारिक ज़िम्मेदारियों का बंटवारा करते हैं, जिससे एक ही पार्टनर पर अनावश्यक बोझ न पड़े.
– एक पार्टनर के वर्कोहॉलिक होने पर दूसरा पार्टनर बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताता है.
– साथ ही परिवार की ज़रूरतों, पसंद-नापसंद का ख़्याल रखता है.
– हैप्पी कपल्स अपनी प्राथमिकताओं व लक्ष्यों की तुलना दूसरे दंपतियों के साथ नहीं करते.
– टाइम मैनेजमेंट टेकनीक को अपनाकर दंपति अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हैं.
– हैप्पी कपल्स की ख़ासियत होती है कि वर्कोहॉलिक और बिज़ी रूटीन होने के बाद भी ख़ुशियों के पल चुराना. अपनी इसी ख़ासियत की वजह से वे ख़ुश रहते हैं
अनहैप्पी कपल्स: वर्कोहॉलिक होने पर दंपति के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं, उनमें भावनात्मक लगाव कम होने लगता है.
– इस स्थिति में अनहैप्पी पार्टनर दूसरे पार्टनर के काम का महत्व नहीं समझते.
– एक-दूसरे की मनोस्थिति को समझने की कोशिश नहीं करते.
– असंतुष्ट दंपति अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं.

स्थिति नं. 3: जब पार्टनर आर्थिक रूप से कमज़ोर हो

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हैप्पी कपल्स: ऐसे दंपति भविष्य की अनिश्‍चितताओं के प्रति सजग रहते हैं, इसलिए पहले से सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश करके रखते हैं.
– अपने बजट को ध्यान में रखकर ख़र्च और निवेश करते हैं.
– समय-समय पर निकलनेवाली निवेश योजना के प्रति जागरूक रहते हैं.
– फ़िज़ूलख़र्ची से बचने के लिए हर काम बजट बनाकर करते हैं.
– जॉइंट अकाउंट खोलते हैं, ताकि पार्टनर की आर्थिक गतिविधियों की पूरी जानकारी मिलती रहे.
अनहैप्पी कपल्स: इस तरह के दंपति ख़र्च अधिक और बचत कम करते हैं.
– मनमाना बचत और ख़र्च करते हैं.
– आर्थिक मुद्दों पर निर्णय लेते समय पार्टनर के साथ सलाह-मशविरा नहीं करते.
– कोई काम बजट के अनुसार नहीं करते हैं, जिससे उन पर ख़र्चों का अनावश्यक बोझ बढ़ जाता है.
– बार-बार पार्टनर के आगे अपनी वित्तीय कमज़ोरियों का रोना रोते रहते हैं.
– आर्थिक रूप से कमज़ोर होने पर कुछ दंपतियों में असुरक्षा की भावना पनपने लगती है, जिसका बुरा असर उनके रिश्ते पर भी पड़ता है.

स्थिति नं. 4: जब पार्टनर के पास प्यार के लिए समय न हो?

हैप्पी कपल्स: ये दंपति रिलेशन बनाने के लिए एक-दूसरे पर दबाव नहीं डालते.
– रिलेशनशिप के दौरान अपनी भावनाओं को शेयर करते हैं.
– पार्टनर का मूड रोमांटिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते.
– अंतरंग क्षणों में उन्हें ख़ास होने का एहसास कराते हैं.
– सेक्सुअल प्रॉब्लम होने पर पार्टनर के साथ ज़ोर-ज़बर्दस्ती नहीं करते.
– घर के झगड़ों को बेडरूम में लेकर नहीं जाते.
अनहैप्पी कपल्स: सेक्सुअल संतुष्टि (यौन संतुष्टि) न मिलने पर एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगते हैं.
– एक-दूसरे की भावनाओं का ख़्याल नहीं रखते.
– मन-मुटाव होने पर बातचीत करना छोड़ देते हैं.

स्थिति नं. 5: जब एक पार्टनर गंभीर रूप से बीमार (या कोई संक्रमित रोग होने पर) हो?

हैप्पी कपल्स: ऐसी स्थिति में दंपति एक-दूसरे को मॉरल सपोर्ट देते हैं.
– बीमार पार्टनर को अकेला छोड़ने की बजाय आपस में लगातार बातचीत करते रहते हैं, उसे ख़ुश रखने का प्रयास करते हैं.
– पार्टनर के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं.
– उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताते हैं और उसे नॉर्मल होने का एहसास कराते हैं.
अनहैप्पी कपल्स: पति/पत्नी के गंभीर रूप से बीमार होने पर दूसरा पार्टनर ख़ुद को बेचैन या निराश महसूस करता है.
– जिन पार्टनर्स में आत्मविश्‍वास की कमी होती है, वे बिल्कुल सपोर्ट नहीं करते या फिर बिना बोले ही पीछे हट जाते हैं.
– ख़ुद को अकेला, दुखी और तनावग्रस्त महसूस करते हैं.
– अनहैप्पी कपल्स पार्टनर के साथ अपनी भावनाओं को शेयर नहीं करते, जिससे उनके रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगती हैं.

स्थिति नं. 6: पार्टनर पर हाथ उठाना

हैप्पी कपल्स: ऐसे दंपतियों के बीच प्यार, विश्‍वास, सहयोग व समर्पण की भावना इतनी मज़बूत होती है कि उनके बीच ऐसी स्थितियां कभी उत्पन्न नहीं होतीं.
अनहैप्पी कपल्स: दंपति के बीच ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब वे अपने रिश्ते से ख़ुश नहीं होते हैं.
– ग़ुस्सा, जलन, शक और नफ़रत के कारण दूसरे पार्टनर पर हाथ उठाते हैं.
– रिश्तों में तनाव होने पर आपस में दोषारोपण करने लगते हैं.
– यदि पार्टनर शक्की हो, तो धीरे-धीरे रिश्ते में विश्‍वास कम होने लगता है.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

पहला अफेयर: वो लूनावाली लड़की (Pahla Affair: Wo Loonawali Ladki)

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पहला अफेयर: वो लूनावाली लड़की (Pahla Affair: Wo Loonawali Ladki)

आज भी याद है वो 27 साल पहले की दोपहर, जब बड़ी दीदी अचानक ही घर आईं और आते ही बोलीं, “चल राजेश, तेरे लिए किसी ने एक बहुत ही अच्छी लड़की सुझाई है. पास ही के एक स्कूल में पढ़ाती है. चलकर देख आते हैं.”

मेरी पढ़ाई हाल ही में पूरी हुई थी और मैं शिक्षा के क्षेत्र में पैर जमाने की कोशिश में था. अभी दो-चार साल तक तो मैं शादी करने के मूड़ में ही नहीं था, तो मैंने दीदी को टालने की कोशिश की, “क्या दीदी, आप भी. अच्छा लगता है क्या किसी लड़की के स्कूल में जाकर इस तरह से शादी के हिसाब से उसे देखना. क्यों स्टूडेंट्स के सामने उसका तमाशा बनाना.”

लेकिन दीदी भला कहां माननेवाली थीं. तुरंत ही बोल पड़ीं, “अरे, किसी के एडमिशन के बहाने जाकर देख आएंगे. उसे तो पता भी नहीं चलेगा कि हम उसे देखने आए हैं.”

“ऐसा ही है, तो क्यों न बाद में जाकर उसके घर पर ही देख आएं.” मैंने फिर टालने की कोशिश की.

“घर जाकर देखने पर तो हमारी मंशा स्पष्ट हो जाएगी और अगर लड़की पसंद न आई, तो उसे मना करने पर उसका दिल भी बहुत आहत होगा. इससे तो अच्छा है चुपचाप देख आते हैं. पसंद आई, तो घर जाकर बात कर लेंगे.” दीदी ने सुझाया.

उनके तर्क के आगे मैं कुछ न कह सका और मुझे उनके साथ जाना ही पड़ा. स्कूल पहुंचकर दीदी ने कहा, “मैं पता लगाती हूं कि प्रिया किस क्लास में पढ़ा रही होगी, तब तक तू बाइक पार्क करके आ.”

मैंने उन्हें स्कूल की इमारत के सामने उतारा और पार्किंग स्पेस में चला गया. दो मिनट बाद ही स्कूल की मुख्य इमारत से एक युवती बाहर आई. कुछ क्षणों तक वह खड़ी होकर अपने पर्स में कुछ टटोलती रही, फिर उसने चाबी निकाली और आगे बढ़ गई. न जाने उसके नमकीन चेहरे में क्या आकर्षण था, मैं अपनी सुध-बुध खोकर उसे ही एकटक निहारे जा रहा था.

सीधी-सादी-सी, मासूम-सी थी वो. आगे बढ़कर उसने अपनी लूना निकाली और स्टार्ट करके निकल पड़ी. बस, 5-7 मिनट तक उसका दीदार हुआ होगा, लेकिन इस बीच जो कुछ भी मेरे दिल में हुआ, वो बस मैं ही जानता हूं. शायद इसे ही कहते हैं पहली नज़र का प्यार! मैंने मन ही मन तय कर लिया कि शादी करूंगा, तो इसी लूनावाली लड़की से, वरना किसी से नहीं.

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तभी दीदी आईं, तो उनके सामने मैंने अपने दिल का हाल बयां कर दिया, ताकि वो मुझे लड़की देखने के लिए फोर्स न करें. दीदी हैरान थीं कि कहां तो मैं लड़की देखने के लिए इतनी आनाकानी कर रहा था और कहां मुझे 5 मिनट में प्यार हो गया. वो बोलीं, “कौन थी, कहां से आई थी, न उसकी

जात-पात का पता, न परिवार का. यह कैसी ज़िद है तेरी? और अगर वो शादीशुदा हुई तो?”

पर मैं तो अपनी ज़िद पर अड़ा हुआ था. मेरी हालत देख, दीदी ने सोचा कुछ तो करना होगा. वहीं ग्राउंड पर कुछ स्टूडेंट्स खेल रहे थे, दीदी ने उनसे पूछताछ की कि अभी-अभी जो नीली लूना पर गई थी, वो कौन थी? ज़्यादातर बच्चों ने तो देखा ही नहीं था, लेकिन एक छात्रा ने कहा, “वो तो दुबे मैडम थीं, प्रिया दुबे.”

दीदी ने राहत की सांस ली. “ओह, तो ये वही लड़की थी, जिसे हम देखने आए थे. ले, तू तो अभी से दीवाना हो गया. ये अनोखी अरेंज मैरिज होगी.”

फिर तो दीदी और घरवालों ने मुझे जमकर चिढ़ाया. मैंने दीदी से मिन्नत की कि जल्दी से लूनावाली लड़की के घर जाकर बात पक्की कर दो. दीदी ने सब कुछ तय कर दिया.

शादी के लिए 3 महीने इंतज़ार का समय भी मैंने बड़ी बेसब्री से बिताया. सचमुच मेरा पहला प्यार एकदम अनोखा था. आज भी वो नीली लूना हमने संभालकर रखी है. जब भी उसे देखता हूं, अपनी पहली नज़र के प्यार की यादें ताज़ा हो जाती हैं.

– डॉ. विनीता राहुरीकर

रोमांस के भीगे एहसास को करीब से महसूस करने के लिए पढ़ें पहला अफेयर : Pahla Affair

11 सेक्स किलर फूड, जो बिगाड़ सकते हैं आपकी सेक्स लाइफ(11 Sex Killer Food That Are Killing Your Sex Life)

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सेक्स लाइफ के लिए अच्छा खानपान बेहद ज़रूरी है. इसके लिए अपने डायट में ऐसी चीज़ें शामिल करें, जो आपकी सेक्सुअल डिज़ायर को बढ़ाएं. यदि आप बेहतर सेक्स लाइफ चाहते हैं, तो बचें इन सेक्स किलर फूड्स से, जो आपकी सेक्सुअल डिज़ायर को कम कर सकते हैं.

 

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इसे सेक्स किलर फूड भी कहते हैं, क्योंकि इसमें ऐसे कंपाउंड्स मिक्स होते हैं, जो सेक्स लाइफ को प्रभावित करते हैं. हालांकि इसे प्यार, उत्साह और रोमांस का प्रतीक मानते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को कम करता है.

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कॉफी

कॉफी का एक कप आपके मूड को फ्रेश तो करता है, लेकिन इसका बुरा असर आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है. यह जितनी जल्दी थकान को दूर करती है, उतनी ही जल्दी सेक्स क्षमता को भी कम करती है. अधिक मात्रा में कॉफी का सेवन करने पर एड्रेनल ग्लैंड्स को नुक़सान होता है, जिससे तनाव बढ़ानेवाले हार्मोंस का उत्पादन होता है. यदि एड्रेनल ग्लैंड्स सुचारू रूप से काम नहीं करता है, तो धीरे-धीरे सेक्स हार्मोंस प्रभावित होने लगते हैं.

तेल

घटिया क्वालिटी के तेल और प्रोसेस्ड वेजीटेबल ऑयल का सेवन करने से फैट्स बढ़ता है, जो शरीर को एक्टिव नहीं रहने देता और सेक्स लाइफ के दौरान उत्तेजना को भी कम करता है. घटिया क्वालिटी के तेल का इस्तेमाल करने से कंसीव करने में प्रॉब्लम होती है. इसी तरह से डायटरी फैट्स भी अनेक प्रकार के होते है. इनमें से कुछ फैट्स फ़ायदेमंद होते हैं और कुछ फैट्स को नज़रअंदाज़ करना चाहिए, जो सेक्स एनर्जी को कम करते हैं.

सोयाबीन

यह सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है, लेकिन सेक्स लाइफ में रुकावट पैदा करता है. शाकाहारी लोगों के लिए मीट की जगह सोयाबीन बेस्ट ऑप्शन है, लेकिन सोयाबीन में मौजूद फोटोएस्ट्रोजन पुरुषों के सेक्स हार्मोंस में बदलाव लाता है, जिससे सेक्स इच्छा में कमी आती है.

पुदीना (मिंट)

मिंट या मिंट बेस्ड प्रोडक्ट्स न केवल माउथफ्रेशनर का काम करते हैं, बल्कि भोजन को पचाने का काम भी करते हैं. मिंट का लगातार सेवन करने से सेक्सुअल डिज़ायर में कमी आती है, साथ ही यह सेक्स ड्राइव को भी शांत करता है. इसीलिए माउथफ्रेशनर के तौर पर मिंट की जगह अन्य हर्ब का इस्तेमाल करें.

पनीर (डेयरी प्रोडक्ट)

इसमें विटामिन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, लेकिन बाज़ार में मिलनेवाले इस डेयरी प्रोडक्ट में प्राकृतिक तत्व नहीं होते है, जो सेक्स क्षमता को प्रभावित करते हैं. बाज़ार में मिलनेवाले इस डेयरी प्रोडक्ट में एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरॉन और प्रोजेस्टेरॉन होते हैं, जो हार्मोंस के उत्पादन को प्रभावित करने के साथ-साथ शरीर में टॉक्सिन्स को बढ़ाते हैं. इन टॉक्सिन्स से यौन रोग होने की संभावना होती है.

फ्राइड और जंक फूड

फ्रेंच फ्राइज़, प़िज़्ज़ा और बर्गर को रोमांस किलर फूड कहते हैं. इनमें मिश्रित हाइड्रोजेनटेड फैट्स टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम
करते हैं, जिसके कारण पुरुषों में शुक्राणुओं का उत्पादन असामान्य होता है और उनकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं होती. अगर आप अपने पार्टनर को रोमांटिक डेट पर ले जा रहे हैं, तो फास्ट फूड का सेवन न करें, विशेष रूप से तब जब कंसीव करने की प्लानिंग कर रहे हों.

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मीट

इसमें प्रोटीन और जिंक नहीं होता, साथ ही कोलेस्ट्रॉल और वसा की मात्रा भी बहुत अधिक होती है, जो ब्लड सर्कुलेशन और सेक्सुअल लाइफ को स्लो करता है. भोजन में मीट का सेवन करने से सेक्सुअल डिज़ायर में कमी आती है, इसीलिए सेक्सुअल रिलेशन बनाने से पहले भोजन में मीट न खाएं.

एमएसजी

मोनोसोडियम ग्लूटामेट का इस्तेमाल भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. इसका अधिकतर प्रयोग डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में किया जाता है, ताकि उनका स्वाद बना रहे. मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, खाने में एमएसजी का अधिक उपयोग करने पर कार्डियोवैस्कुलर और डिप्रेशन संबंधी समस्याएं होती हैं और डिप्रेशन बढ़ने पर सेक्सुअल डिज़ायर कम होने लगती है.

ऐरिएटेड ड्रिंक्स

द न्यू इंग्लैंड जनरल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, शुगर स्वीटेन्ड बे्रवरेज (चीनी मिश्रित पेय ड्रिंक्स) का सेवन करने से वज़न बढ़ना और डायबिटीज़ जैसी बीमारियां होती हैं, इसके अतिरिक्त मीठे जहर (जिन ऐरिएटेड ड्रिंक्स में शुगर बहुत अधिक मात्रा में हो) का सेवन करने से डेंटलकैवेटीज़, मोटापा, डीहाइड्रेशन और हड्डियों का कमज़ोर होना जैसी समस्याएं होती हैं इन सब बीमारियों के कारण भी सेक्सुअल डिज़ायर कम होती है.

अल्कोहलिक ड्रिंक्स 

इनका लगातार सेवन करने से शरीर में सेक्स हार्मोन प्रभावित होता है और सेक्स पावर कम होने लगती है. शोधों से भी यह साबित हुआ है कि अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करनेवाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होता है, जिसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

– पूनम शर्मा

कब और क्यों लें रिश्तों से डिजिटल ब्रेक? (How To Know When To Take A Digital Break In Your Relationship?)

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यह सच है कि दुनिया डिजिटल होती जा रही है. डिजिटल होना अब न स़िर्फ हमारे शौक़ तक जुड़ा रह गया है, बल्कि हमारी ज़रूरत बन चुका है. ऐसे में हम पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो चुके हैं. लेकिन कहीं न कहीं इन सबसे हमारे रिश्ते ज़रूर प्रभावित हो रहे हैं. चाहे समय की कमी हो या रिश्तों में पसर रहा ठंडापन- डिजिटल वर्ल्ड की परिधि ने हमें इस कदर घेर लिया है कि हम चाहकर भी उससे बाहर नहीं आ पा रहे. क्या करें, कैसे करें और कब करें… ताकि हमारे रिश्ते बने रहें और रिश्तों में ख़ुशियां भी कायम रहें.

 

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कब लें डिजिटल ब्रेक?

– हर व़क्त अपने मोबाइल से चिपके रहना आजकल हम सभी की आदत बन चुकी है, लेकिन इसका असर हमारे रिश्तों पर बहुत अधिक पड़ता है. ऐसे में जब आपके अपने बार-बार इस बात की शिकायत करने लगें, तब समझ जाएं कि आपको डिजिटल ब्रेक की ज़रूरत है.
– जब आपको कुछ हेल्थ सिग्नल्स मिलने लगें, जैसे- सिरदर्द, मसल्स में ऐंठन, मितली, धुंधलापन, चिड़चिड़ापन, आलस, एसिडिटी या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं.
– जब आप जाने-अनजाने हर कुछ सेकंड्स में अपना फोन बार-बार चेक करने के आदी हो चुके हों.
– जब आप घर पर आने के बाद भी अपने फोन या लैपटॉप से ही चिपके रहते हों.
– जब आप परिवार के साथ डिनर पर भी अपने फोन पर अपडेट्स करते रहते हों.
– जब आप शारीरिक रूप से तो सबके साथ बैठे हों, पर मानसिक तौर पर अपनी ही डिजिटल दुनिया में हों.
– जब आपस में बोलचाल व हंसी-मज़ाक कम हो रहा हो.
– जब आप बाहरी लोगों के कुछ ज़्यादा ही नज़दीक हो रहे हों.
– जब आपको अपने ही परिवारवालों की दिनचर्या व समस्याएं पता ही न हों और डिजिटल दुनिया के दोस्तों की हरेक बात पर आप कमेंट करने में बिज़ी रहते हों.
– ये तमाम लक्षण बताते हैं कि आपको अगर अपनी सेहत व अपने रिश्ते बचाने हैं, तो अब डिजिटल ब्रेक की ज़रूरत है.

 

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क्यों लें ब्रेक?

– अपने रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए.
– अपने रिश्तों में आए ठंडेपन को दूर करने के लिए.
– अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए, क्योंकि बहुत अधिक डिजिटल वर्ल्ड में बिज़ी रहना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. इससे कई समस्याएं हो सकती हैं.
– अपनों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए, क्योंकि अक्सर आजकल हर कोई यही कहता है कि समय नहीं है, लेकिन ग़ौर किया जाए, तो समय का रोना हम स़िर्फ अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए ही रोते हैं.
– बेहतर होगा कि अपने समय को आप ख़ुद संतुलित करें और अपनी डिजिटल व पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखें.
– छुट्टी के दिन फोन व लैपटॉप से ब्रेक लें. फैमिली के साथ बाहर जाएं, चाहे शॉपिंग हो, पिकनिक हो या मूवी… फिर देखें कि आप कितना रिफ्रेश महसूस करते हैं.
– एक सामान्य ज़िंदगी जीने के लिए और अपने रिश्तों को भी सामान्य व ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि आप डिजिटल ब्रेक लें.
– ख़ुद को परखने के लिए कि कहीं आप इस तकनीकी दुनिया के मायाजाल में बुरी तरह घिर तो नहीं गए? आप कितने आदी हो गए हैं और कहीं आपको लत तो नहीं लग गई इस दुनिया की… यह जानने के लिए भी ज़रूरी है कि आप ब्रेक लेकर देखें और ज़रूरतानुसार ख़ुद को संभाले.
– आप जो करेंगे, आपके बच्चे भी वही करेंगे, तो परिवार व बच्चों में अनुशासन बनाए रखने के लिए भी यह क़दम उठाना ज़रूरी है. आपके बच्चे आपको आदर्श मानते हैं, तो उनके सामने सही, संतुलित व परिपक्व पैरेंट के रूप में ही ख़ुद को प्रस्तुत करना होगा, ताकि वे भी आगे चलकर बेहतर भविष्य बना सकें.
– अगर आपको कहीं भी यह महसूस हो रहा है कि डिजिटल दुनिया के कुछ रिश्ते आपकी निजी ज़िंदगी के रिश्तों पर हावी हो रहे हैं या आपको भटका रहे हैं, तो सावधान व सतर्क हो जाएं और ख़ुद को वहां से अलग कर लें.
– इस तरह के रिश्ते आपको बड़ी मुसीबत में भी फंसा सकते हैं, आजकल तो इस तरह की कई ख़बरें भी आम हो गई हैं, चाहे देश से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियां हों या फिर व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित नाजायज़ चीज़ें- आप कब इन सबके बीच फंसते चले जाते हैं, शायद आपको ख़ुद भी अंदाज़ा नहीं हो पाता. इसलिए बेहतर होगा कि अपने दिलो-दिमाग़ पर काबू रखें और जो भी करें, सोच-समझकर करें.
– अपनी निजी बातें या तस्वीरें किसी अंजान के साथ शेयर करने से बचें.
– अपने प्रोफेशनल व पर्सनल सीक्रेट्स किसी को न बताएं.
– कुल मिलाकर सतर्क रहें और पूरी तरह से डिजिटल वर्ल्ड पर निर्भर न रहें. उसके बाहर भी आपकी एक दुनिया है, रिश्ते हैं, जो बेहद ख़ूबसूरत हैं.

– योगिनी भारद्वाज

पहला अफेयर: तुम मुस्कुराईं (Pahla Affair: Tum Muskurai)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: तुम मुस्कुराईं (Pahla Affair: Tum Muskurai)

एक गुनगुनाती सुबह, एक नए रंग की नई ख़ुशबू से महकती… तुम्हारा आना, तुम्हें देखकर कई निगाहें मंद-मंद मुस्कुरा रही थीं. आज ही तुमने कंपनी जॉइन की थी और मेरे ही विभाग में मेरे एकदम क़रीब ही तुम्हारे बैठने की व्यवस्था की गई थी. मुझे महसूस हुआ, तुम्हारी बातों में मिठास है, किसी को अपना बना लेने का गौरव. क्षितिज पर उगते सूर्य की हल्की-सी गर्माहट लिए तुम.

काम की व्यस्तता के साथ ही हम आपस में काफ़ी घुल-मिल गए थे. लंच के समय भी तुम्हारे टिफिन में मेरा भी शेयर अवश्य रहता था. कभी गाजर का हलवा, कभी कुछ और. विभाग के अधिकारियों व स्टाफ में हम गुप-चुप चर्चा का विषय बन गए थे. हर किसी की नज़र में कहीं कुछ शंका-सी थी. फिर भी तुम अनदेखा महसूस करातीं अपने स्वाभाविक व्यवहार से और अपने काम के प्रति भी तुम बेहद ईमानदारी से पेश आती थीं. अजीब संयोग था. तुम्हारा मिलना, क़रीब आना. कभी रूठना, कभी जलाना या फिर कभी दो-चार दिन बात ही न करना.

एक दिन तुमने अपनी दो तस्वीरें मुझे दिखाईं- एक सलवार-कुर्ते में और दूसरी हरी धानी साड़ीवाली तस्वीर थी. तुमने पूछा था, “बताओ, कौन-सी तस्वीर…” और मैंने बात काटते हुए कहा था, “साड़ी में ही भारतीय नारी की ख़ूबसूरती अधिक निखरकर आती है.” और तुम मुस्कुरा दी थी यह सुनकर. तुमने अपनी वह तस्वीर देने का वादा भी किया था.

हर रोज़ एक नई बात होती. फिल्मों की, खेल की चर्चा भी हम मज़े लेकर करते. चूंकि तुम विभाग के अन्य कर्मचारियों के प्रति उदासीन या यूं कहें फॉर्मल ही थी, इसलिए उनमें कुछ ईर्ष्या की भावना भी हमारे प्रति ज़ाहिर होती थी. मुझे भी इतने लंबे साथ के बाद तुम्हारे मन की बात जाननी ही थी और आख़िर लंच के बाद उस दिन मैंने तुम्हें प्रपोज़ किया था. तुम मुस्कुराईं, ठहरीं, कुछ सोचा और तुमने मुझे साफ़ रिफ्यूज़ कर दिया था. पहले मैं थोड़ा नर्वस हुआ, लेकिन जल्द ही सामान्य होने लगा. मुझे लगा- इट इज़ नॉट ए सीरियस केस. फिर भी हमारे बीच कुछ ऐसा था कि दो ग्रह आपस में टकराकर भी विस्फोटित नहीं हुए और विलग भी नहीं हुए. आपसी व्यवहार यथावत् चल रहे थे.

फिर शायद एक दरार ही पड़ गई थी. तुम्हारा विभाग ही चेन्ज कर दिया गया और एक दिन ऐसा भी आया कि तुम कंपनी ही छोड़कर चली गईं. तुमने कोई और कंपनी बतौर तऱक्क़ी जॉइन कर ली थी. कभी-कभी रास्ते में तुम्हारा मिलना एक सुखद क्षण होता. तुमसे मिलने की ललक बढ़ती. तुम्हारी भी रुचि कम न हुई थी, लेकिन…

और तुम आगे बढ़ती गई. फिर एक और शख़्स आया तुम्हारे जीवन में… कुछ ही दिनों में तुम्हारी शादी का निमंत्रण-पत्र मिला. सोचा चलो तुम्हें दुल्हन के रूप में देखें. तुम्हें मुबारक दुल्हन का रूप, नवजीवन की तुम्हें बधाई!

शायद तुम्हें याद हो, वो तुम्हारी धानी साड़ीवाली तस्वीर, सच काफ़ी ख़ूबसूरत लग रही थीं उस रोज़ तुम. अपनी वो तस्वीर देने का तुमने वादा किया था. शायद अब…!

– सदानंद ‘आनंद’

पहला अफेयर: हमसफ़र (Pahla Affair: Humsafar)

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पहला अफेयर: हमसफ़र (Pahla Affair: Humsafar)

मेरे साथी, एक साथ एक रास्ते पर चलते-चलते कई बरसों का सफ़र तय कर लिया है. जिन रास्तों पर से हम दोनों गुज़रे हैं, उनमें कई अंधे मोड़ आए और कई घुमावदार पड़ाव भी. उस समय लगा था कि तुम्हारा हाथ और तुम्हारा साथ छूट जाएगा और हम दोनों की राह भी जुदा होगी. कितनी बार हम दोनों के फैसले ग़लत साबित हुए. ढेरों बार हम एक-दूसरे को कोसते नज़र आए. सोचा कि तुमसे वास्ता ही न रखूं. ऐसा ही तुमने भी सोचा था. अनेक बार हमने तंगदिली दिखाई, सैकड़ों बार संगदिल की तरह पेश आए, पर हमारे बीच ऐसा क्या था, जो दोनों को बांधता रहा?

याद है, एक बार तो लगभग क़दम बढ़ने को हो गए, हमने एक घर को दो देशों की तरह बांटा और अपनी हदें तय कीं. अपनी आज़ादी को भरपूर जिया, मैंने तुम्हें और तुमने मुझे यह दिखाने में कोई कसर बाकी न रखी कि एक-दूसरे के बिना हम ज़्यादा बेहतर ज़िंदगी जी सकते हैं. पर यह फॉर्मूला भी बकवास साबित हुआ. हताश होकर फिर एक-दूसरे के कंधे पर ढहे और सरहदें मिट गईं. क्या ऐसा औरों के साथ भी होता है? इतनी नफ़रत के बाद भी एक होते हैं लोग. हमें तो यह एहसास साफ़ था कि हम दोनों एक-दूसरे के लिए परफेक्ट मैच नहीं हैं. यह तब भी पता था, जब हम दोनों ने एक नए रिश्ते की नींव रखी थी. कभी अपने प्यार को दिखाया नहीं. हर बार यही कहा कि यह तो नहीं है, पर क्या वाकई नहीं था या अब भी नहीं है? जिस रूमानियत के न होने के लाख दावे हमने किए थे, उसको अपने अंदर क्या हम खोज पाए थे?

क्या परफेक्ट मैच न होना हमारे लिए फ़ायदेमंद और हमारे रिश्ते के लिए कहीं अधिक बेहतर साबित हुआ. जब हम दोनों अपनी राह पर अलग-अलग, लेकिन चल रहे थे, तो यह कहां पता था कि मंज़िल एक ही होगी. जितने जतन किए, वो बेकार गए. अब जब ज़ुल्फ़ों में स़फेदी बसर हो गई है, तब भी हम उस एक बात को कहने में झिझकते हैं. दूसरे तरीक़ों से, आंखों के इशारों से, हमने उस रूमानियत को जिया है, पर ज़ुबां से कहा नहीं. इसलिए मैं इस ख़त के ज़रिए आज तुमसे यह कहना चाहती हूं कि बस, तुम और स़िर्फ तुम ही मेरे हमराज़, मेरे हमसफ़र और मेरा प्यार हो… हां, तुम ही मेरा प्यार हो. मेरा पहला और आख़िरी प्यार. तुम्हारे अलावा सच्चा प्यार किसी से नहीं हुआ. दिखावटी मोहब्बत का नाटक तो ख़ूब किया, लेकिन दिल की गहराई में जो समंदर था, उसमें लहरों का उफ़ान बस तुम्हारे कारण ही आया.

मैं भी यह जानती हूं कि इसे पढ़कर तुम्हारी आंखों में चमक जागेगी और फिरतुम एकदम गंभीर हो जाओगे. भीतर उमड़े तूफ़ान को चश्मे की आड़ में छिपा लोगे. पर तुम्हारी ख़ुशी दमकेगी और यह छिपाए न छिपेगी. कल ही तुमने कहा था कि पच्चीस बरस हमारे साथ को हो रहे हैं, मुझे क्या गिफ्ट देनेवाली हो? तुम्हारा तोहफ़ा… मेरी मोहब्बत…! यही चाहूंगी कि बस तुम भी यही तोहफ़ा मुझे दो. बस, उन जादुई शब्दों की बारिश कर दो.
तुम्हारी हमसफ़र!

– राजेश्‍वरी शुक्ला