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पहला अफेयर: यादें… (Pahla Affair: Yaaden)

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पहला अफेयर: यादें… (Pahla Affair: Yaaden)

कभी-कभी हम अपनी डायरी के पन्नों में घुसपैठ करने लगते हैं. कोई न कोई शब्द या उसकी गुहार या फिर दबी राख सामने उभर आती है. भीतरी रिसते घाव को छेड़ने का हमारा यह क्रम सतत चलता रहता है. ऐसे में डायरी में लिखे शब्द पुरानी यादों को छेड़ते ही नहीं, बल्कि हमें चौंका जाते हैं. ठीक उस दिन की तरह जब उमेश ने मेरी आंखें बंद कर मुझे चौंकाया था. उठी थी मन में बुलबुलों-सी गुदगुदी और मैं उसकी बांहों में झूल गई थी. हमारा साथ बस एक साल पुराना था. कॉलेज में ही परिचय हुआ था हमारा. ऊंचा क़द, गठीला बदन, सांवला रंग, तेज़ कटीले नैन-नक्श… कुछ कहती नशीली आंखें…

हर पल वह मेरे वजूद पर हावी रहता. मैं कब उसे मन-मंदिर में रमा बैठी, नहीं जानती. बस, हर व़क़्त वो मेरे तसव्वुर में आसमानी धुंध-सा छाया रहता. आज वर्षों उपरांत वो नीला रंग मेरे शरीर के रंगों में पिघलने लगा है. डायरी के पन्नों पर उसकी धुंधली तस्वीर मुझे मुंह चिढ़ा रही है. काश… पहले प्यार के इस पन्ने को डायरी से अलग कर पाती.

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लगता है जैसे कल ही की बात हो. उमेश अचानक ही मेरे घर पर आ धमका था. मां को प्रणाम करने के बाद मुझे कोने में ले जाकर जो ख़बर सुनाई, वह किसी धमाके से कम नहीं थी.
“निशा सुनो, कल शाम को घर पर मेरी सगाई की रस्म है. चाहता हूं तुम वहां मेरे साथ रहो…” उसने बात का सिरा वहीं काट दिया था. आगे के शब्द मुंह में ही घुल गए थे शायद. और… और मेरे शरीर में तो जैसे सीसा पिघलने लगा था. “अरे, न कोई भूमिका, न शब्दों का घुमाव-फेर. सीधे सगाई का निमंत्रण. वाह! कैसा विधि का विकट विद्रूप.”

मन किया उमेश को पकड़ ज़ोर से रो पड़ूं. उसके शब्दों से बासी अंधेरा पसरा था मेरे भीतर. जैसे किसी ने तिलस्मी चादर डालकर मेरे पहले प्यार को मेमना बना दिया है. उमेश वापस लौट चुका था. मुझे लगा जैसे पूरी क़ायनात मेमना बन गई है.

आज मैं डायरी के अधखुले पन्नों में उलझी हूं. ऐसा क्यों होता है कि कभी हमारी चाहतें ख़ुद ही तबाही का पैग़ाम बन हमारे नसीब की सांकले खटकाने आ पहुंचती हैं और हम गूंगे-बहरे बन उस आवाज़ को घूरने लगते हैं. तभी कोेई पीछे से धक्का देकर हमें माज़ी की गुफा में धकेल देता है और हम अपने पहले प्यार को पहलू में दबाए भीतर ही भीतर उबलते रहते हैं. तब उस खाई से बाहर आने का कोई विकल्प नहीं रहता हमारे पास!

दिल टूटने से थोड़ी तकलीफ़ तो हुई
मगर तमाम उम्र को आराम हो गया.

– मीरा हींगोरानी

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August Born: प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त में जन्मे लोग (What Your Birth Month Says About Your Love Life)

August Born

August Born

प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त (August) में जन्मे लोग

  • इन्हें कैज़ुअल रिलेशनशिप्स पसंद नहीं होतीं.
  • ये शादी की परंपरा पर बेहद विश्‍वास करते हैं.
  • इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही होती है कि ये अपने पार्टनर की कमियों को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ उनकी ख़ूबियों पर ध्यान देते हैं.
  • इन्हें रोमांस बहुत पसंद होता है.
  • ये अपने पार्टनर के प्रति बहुत ईमानदार होते हैं, साथ ही पार्टनर से भी उसी ऑनेस्टी की अपेक्षा रखते हैं.

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  • बेडरूम में कोई इन्हें समझाए, यह इन्हें पसंद नहीं आता.
  • ये इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि उनके पार्टनर में वो सब कुछ है, जो ये चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है, तो इन्हें उनसे अलग होकर कोई दूसरा साथी तलाशने में भी देर नहीं लगती.
  • प्यार और सेक्स के मामले में ये थोड़ा ईगोइस्ट होते हैं.
  • सेक्स व प्यार के मामले में ये या तो एकदम ही सेलफिश हो सकते हैं या फिर ये बेहद उदार होते हैं. यानी इनके व्यक्तित्व में ये विरोधाभास हो सकता है.

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ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स(How To Deal With A Stubborn Spouse: Some Easy Tips)

ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

क्या आपके पार्टनर भी ज़िद्दी हैं? तो घबराएं नहीं, बल्कि समझदारी और प्यार से उन्हें हैंडल करें. यहां हमने ऐसे पार्टनर को हैंडल करने के लिए आसान तरीके बताने की कोशिश की  है. साथ ही सायकोलॉजिस्ट रोहिणी गिरजा ने भी इस संबंध में कई उपयोगी टिप्स बताए हैं. 

ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

– यदि आपके पार्टनर बहुत ज़िद्दी हैं, तो उन्हें प्यार से डील करें.

– जब कभी वे किसी बात को लेकर ज़िद करने लगें, तो उस पर असहमति जताने की बजाय उनसे थोड़ा समय मांगें. कहें कि हम इस पर बाद में बात करेंगे. कोई बहाना बना लें कि अभी आपकी तबीयत ठीक नहीं या फिर आपको कोई ज़रूरी काम निपटाना है आदि.

– ज़िद्दी लोगों की ख़ासियत होती है कि वे उस ख़ास समय पर बेहद ज़िद करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ वे हथियार भी डाल देते हैं. बस, आप में स्थिति को हैंडल करने का धैर्य होना चाहिए.

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– जब भी ज़िद्दी पार्टनर की कोई बात ग़लत या बुरी लगे, तो उसी समय बता दें. उस बात को मन में ना रखें. कह देने से समस्याएं सुलझ जाती हैं, वरना छोटी-छोटी बातें दिल में रखे रहने से राई का पहाड़ बनते देर नहीं लगती.

– कभी-कभी ख़ुद डॉमिनेटिंग रुख अख़्तियार करें यानी पति के पैंतरे को उन्हीं पर आज़माएं. वे जिस बात की अधिक ज़िद करते हैं, उसे आप ख़ुद करें. इस तरह उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा.

– कभी भी किसी बात को लेकर अधिक समय तक बातचीत बंद न करें. ज़िद्दी पार्टनर के केसेस में अक्सर देखा गया है कि पार्टनर के ज़िद के कारण कपल्स आपस में बातचीत बंद कर देते हैं. ऐसा बिल्कुल भी न करें. ध्यान रहे, आपका ईगो आपके रिश्ते से बढ़कर है.

– ज़िद्दी पार्टनर को हैंडल करने का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप उनकी ख़ूब तारीफ़ करें. उनमें मौजूद टैलेंट की सराहना करें. देखिए, जल्द ही वे आपके मुरीद बन जाएंगे और आपकी हर बात मानेंगे.

– जब पार्टनर ग़ुस्सा या हठ करें, तो आप भी क्रोध में ना आ जाएं. ऐसे समय में आपके सब्र का भी इम्तिहान होता है. यदि आपको ग़ुस्सा आ रहा हो, तो उसे जब्त कर लें. पार्टनर को अपनी बात कहने दें. उनके शांत होने पर अपना पक्ष रखें और तस्वीर के दूसरे पहलू से भी उन्हें अवगत कराएं.

– कई बार पार्टनर के ज़िद के पीछे पुराना इतिहास भी रहता है, जैसे- पैरेंट्स द्वारा बचपन में अधिक लाड़-प्यार करना, सही-ग़लत हर बात मानना… आदि. यदि ऐसा है, तो इसे एक चुनौती के तौर पर लेते हुए पार्टनर की अच्छी-बुरी हर बात, आदत को बारीक़ी से देखें-समझें. फिर जब कभी वे बहुत अच्छे मूड में हों, तो उन्हें तर्क और उदाहरण के साथ इनके बारे में बताएं. यक़ीन मानें, वे आपकी सूझबूझ की सराहना किए बगैर नहीं रह पाएंगे, क्योंकि आज तक कभी किसी ने इस तरह से उन्हें समझने और समझाने की कोशिश ही नहीं की थी.

– महिलाओं के पास एक लाजवाब ऑप्शन भी होता है, आंसू. जब कभी ऐसा लगे कि बात हाथ से निकल रही है, तब अपने इस हथियार का इस्तेमाल करें. पुरुषों की यह कमज़ोरी रही है कि वे महिलाओं की आंखों में आंसू नहीं देख सकते और इसे देख जल्दी पिघल भी जाते हैं.

– अपने रिश्ते को थोड़ा वक़्त दें. यदि आपकी हाल ही में शादी हुई है और आप अपने ज़िद्दी पार्टनर से परेशान हैं, तो थोड़ा-सा बड़ा दिल रखें, बड़प्पन दिखाएं और उनकी छोटी-छोटी बातों को अनदेखा करने की कोशिश करें. बात को पकड़कर ना बैठ जाएं कि आपने ऐसा कहा था… यह सही नहीं है… आदि-आदि. अपने नए रिश्ते को थोड़ा समय दें, इससे यक़ीनन समय के साथ हर उलझन सुलझ जाएगी, साथ ही पार्टनर का ज़िद्दी व्यवहार भी.

– पार्टनर की ग़लतियों को माफ़ करना और भूलना सीखें. आपकी यह आदत न केवल आपके रिश्ते को मज़बूती देगी, बल्कि आपसी प्यार भी बढ़ेगा.

– इन सब के बावजूद यदि आपके पार्टनर अक्सर अपनी बात पर अड़े रहते हैं. आपकी बिल्कुल भी नहीं सुनते, तो ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि आप काउंसलर की मदद लें. लेकिन इसे आपको समझदारी से स्मार्टली हैंडल करना होगा.

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 – मूरत गुप्ता

पहला अफेयर: दिल क्यों दिया… (Pahla Affair: Dil Kyun Diya)

पहला अफेयर: दिल क्यों दिया

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पहला अफेयर: दिल क्यों दिया…

कॉलेज पूरा होते ही मुझे एक बैंक में सर्विस मिल गई. मैं बहुत ख़ुश थी. आत्मनिर्भर होने का एहसास अलग ही होता है, इसलिए मैं स्वयं पर गर्वान्वित थी.

अपने काम को मैं दिल लगाकर किया करती थी, ताकि मेरे काम में कोई कमी न निकाल दे. व़क़्त इसी तरह बीत रहा था. एक दिन बैंक में एक स्मार्ट नौजवान आया, अपना अकाउंट खुलवाने के लिए. जानकारी व पूछताछ के लिए वह मेरे काउंटर पर आया. इसके बाद वो अक्सर बैंक में आने लगा. कभी खाते में पैसा डिपोज़िट करने के लिए तो कभी पैसा निकलवाने के लिए. जब भी वो मेरे काउन्टर पर आता तो ऐसे लगता जैसे वो मुझसे कुछ कहना चाह रहा हो.

एक दिन जब वह मेरे काउटंर पर आया तो ज़्यादा भीड़ नहीं थी. वह मौक़ा मिलते ही बोल पड़ा, “मैं आदित्य शर्मा, सिंचाई विभाग में कार्यरत हूं. आप बहुत ख़ूबसूरत हैं. आपकी शालीनता, सौम्यता, गंभीरता और इन सबके साथ आपके चेहरे पर कभी-कभी आनेवाली मुस्कुराहट किसी को भी अपनी तरफ़ खींच सकती है.”

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अपनी तारीफ़ सुनकर मैं मन ही मन बहुत ख़ुश हुई. उसे देख मेरे चेहरे की रौनक अचानक बढ़ जाती. शायद उसे भी इस बात का एहसास हो गया था. अब आदित्य बैंक के काम से कम और मुझसे मिलने ज़्यादा आता.

मुझ पर भी आदित्य का नशा चढ़ने लगा. उसकी आवाज़ मेरे कानों में हर पल गूंजती रहती. उसका चेहरा हर पल मेरी आंखों के सामने छाया रहता. मुझे लगने लगा कि मैं उससे प्यार करने लगी हूं. और यही एहसास मुझे आदित्य की बातों मेें भी नज़र आने लगा. पर मैं प्यार के चक्कर से दूर ही रहना चाहती थी. जब हक़ीक़त के धरातल पर सोचने लगी तो मैंने अपने आपको सतर्क कर लिया. इसीलिए जब आदित्य ने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर मांगा तो मैंने उसे यह कहकर टाल दिया कि ये मोबाइल अक्सर मेरे पापा के पास ही रहता है.

आदित्य जब भी काउंटर पर आता तो मैं उससे कतराने लगती, क्योंकि मुझे मेरी ग़लती का एहसास हो गया था. मैं सपनों की दुनिया से यथार्थ में आ गई थी. जो हासिल नहीं हो सकता, उससे कैसा प्यार? मैंने अपनी विवशता के आगे अपने प्यार को मन ही मन रौंद डाला था.

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आदित्य को मेरा उसे नज़रअंदाज़ करना समझ में आने लगा था. वो मुझे अपना जीवनसाथी बनाना चाहता था. मेरे इनकार करने पर उसने मुझे अपनी क़सम दे दी. कहने लगा, “बात क्या है, आख़िर मुझमें क्या कमी है?फफ उसके बार-बार दबाव डालने पर मैं परेशान हो गई और मैंने मजबूर होकर उससे कहा, ङ्गङ्घठीक है. चलो बगल के रेस्टॉरेंट में चलते हैं. वहीं बैठकर सारी बातें
हो जाएंगी.”

इसके बाद अपने काउंटर से उठकर जैसे ही मैंने एक-दो क़दम बढ़ाए, आदित्य भौंचक्का होकर मुझे देखता ही रह गया. कभी मेरे चेहरे को देखता, तो कभी मेरे पोलियोग्रस्त पैरों की ओर. उसके मुंह से निकल पड़ा, “तुम बैठो. रेस्टोरेंट किसी और दिन चलेंगे. मुझे कोई ज़रूरी काम याद आ गया.” और वो चला गया. फिर कभी वह मेरे काउंटर पर नज़र नहीं आया. जिसका मुझे डर था, वही हुआ. मेरे पोलियोग्रस्त पैर के कारण उसने मेरा हाथ नहीं थामा. मेरी विकलांगता के आगे उसका प्यार छू-मंतर हो गया.

आज दस साल बीत गए, पर आदित्य शर्मा आज भी जब जाने-अनजाने याद आ जाता है तो मुंह से अनायास ही निकल पड़ता है-
हे ईश्‍वर, जिसके नसीब में प्यार नहीं उसको दिल ही क्यों दिया?

– संगीता बलवंत

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सेक्स से जुड़े टॉप 12 मिथ्सः जानें हक़ीकत क्या है(Top 12 Sex Myths Busted)

Sex Myths Busted
सेक्स से जुड़े मिथक किसी पहेली से कम नहीं. कोई इन्हें सच कहता है, तो कोई सरासर झूठ. ऐसे में क्या है सच और क्या है मिथक?

 

Sex Myths Busted

मिथकः सेक्स फूड खाने से सेक्स का मूड बन जाता है.

सच्चाईः ऐसी बातें महज़ क़िताबों तक सीमित होती हैं, असल ज़िंदगी में लागू नहीं होतीं. हां, ये कहा जा सकता है कि रोज़ाना या नियमित रूप से सेक्स फूड, जैसे- अनार, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, गाजर, किशमिश, लहसुन आदि का सेवन सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाता है, मगर सेक्स फूड के सेवन के तुरंत बाद सेक्स का मूड बन जाता है, ये स़िर्फ एक भ्रम है.

मिथकः पुरुषों की तरह महिलाएं सेक्स के बारे में कभी नहीं सोचतीं.

सच्चाईः हम ये कह सकते हैं कि पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं सेक्स के बारे में कम सोचती हैं, मगर ये कतई नहीं कह सकते कि महिलाएं सेक्स के विषय में सोचती ही नहीं हैं. रिसर्च की मानें तो न स़िर्फ पुरुष, बल्कि महिलाएं भी सेक्स के बारे में सोचती हैं, लेकिन ऐसा उस वक़्त होता है, जब वो हार्मोनल बदलाव के दौर से गुज़रती हैं.

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मिथकः महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.

सच्चाईः पॉर्न मूवी के नाम पर भले ही हमेशा से पुरुषों को बदनाम किया जाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं. ये बात सर्वे से भी साबित हो चुकी है कि पुरुषों की तरह महिलाएं भी पॉर्न मूवी देखना पसंद करती हैं. हां, पुरुषों की तरह महिलाएं इस बात को स्वीकार नहीं करतीं, इसलिए लोग इस ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.

मिथकः सेक्स के दौरान महिला पार्टनर अगर सुखद आवाज़ें न निकाले, तो इसका मतलब वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही.

 

Sex Myths Busted
सच्चाईः ये बात शत-प्रतिशत झूठ है. सेक्स के दौरान, ख़ासकर
ऑर्गेज़्म के वक़्त कुछ महिलाएं सुखद आवाज़ें निकालती हैं, मगर ये ज़रूरी नहीं कि सारी महिलाएं ऐसा ही करें. अगर वो ऐसा नहीं करतीं, तो वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही हैं, ऐसा नहीं है. विशेषज्ञों की मानें तो हर कोई अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करे, ये ज़रूरी नहीं, कई महिलाएं चुप रहकर ही सेक्स क्रिया का आनंद लेती हैं.

मिथकः सेक्स पोजीशन में बदलाव महिलाओं को प्रेग्नेंट होने से बचाता है.

सच्चाईः कई लोग इस बात को सच मानते हैं, लेकिन ये सरासर ग़लत है. प्रेग्नेंसी का संबंध स्पर्म से होता है न कि सेक्स की किसी ख़ास पोजीशन से. कोई भी महिला तभी प्रेग्नेंट होती है, जब वो पुरुष स्पर्म के संपर्क में आती है. ऐसे में सेक्स पोज़ीशन कैसी थी, कैसी नहीं, प्रेग्नेंसी के लिए ये बात मायने नहीं रखती.

मिथकः सुरक्षित सेक्स के लिए दो कॉन्डम का इस्तेमाल बेहतरीन विकल्प है.

सच्चाईः सेक्स के दौरान कॉन्डम फटने की वजह से लोग ऐसा सोचते हैं, लेकिन ये सच नहीं है. दो कॉन्डम का इस्तेमाल करने से इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कॉन्डम को क्षति नहीं पहुंचेगी. हो सकता है, दो कॉन्डम इस्तेमाल करने पर भी वो फट जाएं.

मिथकः सेक्स के बाद अगर महिला प्रेग्नेंट होती है, तो प्रेग्नेंसी के लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं.

सच्चाईः इस बात में ज़रा भी सच्चाई नहीं है. सेक्स के तुरंत बाद तो क्या, कई बार कई महीने बीत जाने पर भी प्रेग्नेंसी के लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ मामलों में एक महीने के अंदर महिलाओं में ये लक्षण दिखने लगते हैं. विशेषज्ञों की मानें, तो ये बात महिलाओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है.

मिथकः सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है.

सच्चाईः ये सोच सरासर ग़लत है कि सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है. सेक्स की न स़िर्फ इच्छा, बल्कि ज़रूरत भी स्त्री-पुरुष दोनों को होती है. हां, ये बात और है कि पुरुष अपनी इच्छा ज़ाहिर कर देते हैं, मगर महिलाएं कभी संकोचवश, तो कभी शर्म के मारे सेक्स की पहल नहीं करतीं, लेकिन सेक्स में उनकी रुचि नहीं होती, ऐसा नहीं कह सकते.

मिथकः ड्रिंक करके सेक्स करने से सेक्स का मज़ा दुगुना हो जाता है.

सच्चाईः ड्रिंक करने (शराब पीने) के बाद सेक्स करने से सेक्स का मज़ा बढ़ जाता है, ये बात भी ग़लत है. दरअसल, ड्रिंक से सेक्स का कोई संबंध नहीं होता, बल्कि कई बार शराब का सेवन सेक्स के अनुभव से आपको वंचित कर देता है, तो कई बार शराब पीने से सेक्स का सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है.

मिथकः महिलाएं फैंटेसी सेक्स में शामिल नहीं होतीं.

सच्चाईः अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप ग़लत हैं. सर्वे के अनुसार, पुरुष जिस तरह सेक्स क्रिया के दौरान फैंटेसी की दुनिया में खो जाते हैं, उसी तरह महिलाएं भी फैंटेसी की दुनिया में जाकर सेक्स क्रिया को एंजॉय करती हैं. हां, ये कहा जा सकता है कि इस मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है.

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मिथकः अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं.

सच्चाईः पुरुषों में ख़ासकर ये ग़लत धारणा होती है कि अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं, लेकिन ये ज़रूरी नहीं है. सर्वे के ज़रिए कई पुरुषों ने इस बात को साबित कर दिया है कि सेक्स क्रिया के दौरान उनका ध्यान पार्टनर के फिगर पर नहीं, बल्कि सेक्स क्रिया पर होता है.

मिथकः अगर पहली बार आप सेक्स में असफल हो जाते हैं, तो इसका मतलब आप में कमी है.

सच्चाईः ये एक ग़लत धारणा है. जिस तरह हर चीज़ की प्रैक्टिस ज़रूरी होती है, उसी तरह बेहतर सेक्स का आनंद भी कई बार प्रैक्टिस करने के बाद मिलता है. हो सकता है, शुरुआती दौर में आप सेक्स को उस तरह एंजॉय न कर पाएं, जिस तरह कई बार प्रैक्टिस के बाद.

सेक्स अलर्टः क्यों आ जाती है सेक्स ड्राइव में कमी?(Sex Alert: Sex-Drive Killer)

पार्टनर की पहल पर भी कई बार ऐसा होता होगा कि आप उनके क़रीब नहीं आना चाहतीं, प्यार भरे उन पलों का आनंद लेने का मन नहीं करता, कभी-कभार ऐसा होना आम बात है, लेकिन आपके साथ यदि अक्सर ऐसा होता है, तो सतर्क हो जाइए. ये आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं है. सेक्स ड्राइव में कमी के कई कारण हो सकते हैं. 

 

ब्रेन गेम

शायद आप भी सेक्स को फिज़िकल एक्ट ही मानती होंगी, मगर इसमें शरीर से ज़्यादा अहम् दिमाग़ होता है. मस्तिष्क के कुछ हिस्सों की सेक्सुअल एक्ट में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यहीं पर अंतरंग पलों की चाहत उभरती है. यदि किसी कारणवश ये हिस्से प्रभावित होते हैं, तो इससे आपकी सेक्स डिज़ायर पर असर होगा. यदि कुछ समय से आप भी अंतरंग पलों से दूर भाग रही हैं और आपका पार्टनर के साथ उन ख़ास पलों का आनंद लेने का मन नहीं करता, तो बहुत ज़रूरी है कि डॉक्टर से जांच करवाएं.

 

उम्र से संबंध

आमतौर पर माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ ही सेक्स की इच्छा घट जाती है, मगर ये सच नहीं है. कई अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि बढ़ती उम्र के साथ महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं. हां,  उनकी फर्टिलिटी ज़रूर कम हो जाती है, मगर उन ख़ास पलों की चाहत नहीं. विशेषज्ञों के मुताबिक़, मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं का कंसीव करने का डर ख़त्म हो जाता है, जिससे वो अपने अंतरंग पलों को बेहतर तरी़के से एंजॉय करती हैं.

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स्ट्रेस और सेक्स

तनाव का असर पुरुष और महिला दोनों पर अलग तरह से होता है. स्ट्रेस का महिलाओं की सेक्सुअल लाइफ पर बहुत नकारात्मक असर होता है, जिससे कई बार उनके रिश्ते में भी दूरियां आ जाती हैं, इसलिए बहुत ज़रूरी है कि स्ट्रेस से दूर रहने की कोशिश करें. स्ट्रेस दूर करने के लिए दिनभर में कम से कम एक काम अपनी पसंद का करें. 24 घंटे में से कुछ समय स़िर्फ अपने लिए निकालें और अपने मन की करें. जब आप रिलैक्स होंगी तभी पार्टनर के साथ उन ख़ास पलों का आनंद ले पाएंगी.

 

दवाइयों का असर

कई बार दवाइयों के कारण भी कामेच्छा में कमी आती है. यदि आप किसी बीमारी की दवा ले रही हैं और कुछ समय से आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि आप अंतरंग पलों का आनंद नहीं ले पा रही हैं  या उन पलों में आपकी दिलचस्पी कम हो रही है, तो बेझिझक इस मुद्दे पर डॉक्टर से बात करें. हो सकता है, ये दवाइयों का ही असर हो. ऐसे में डॉक्टर आपको दवा चेंज करके देंगे. कुछ बर्थ कंट्रोल पिल्स और ब्लड प्रेशर की दवाइयों के असर से भी सेक्स में दिलचस्पी ख़त्म हो सकती है. अतः ऐसा होने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

 

डायट पर फोकस

कुछ फूड ऐसे हैं, जो आपका मूड अच्छा करके कामेच्छा बढ़ाते हैैं, जैसे- स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरीज़, वॉटरमेलन, एवोकाडो, चना, शहद आदि. अतः अपनी बोरिंग सेक्स लाइफ में रोमांच भरने के लिए डायट में ये फूड ज़रूर शामिल करें. सेक्स ड्राइव में कमी को अधिकांश महिलाएं गंभीरता से नहीं लेतीं. उन्हें लगता है कि व़क्त के साथ यह समस्या ठीक हो जाएगी, मगर ऐसा होता नहीं है. कई बार यह कपल्स के बीच दूरियां बढ़ा देता है. अतः अपने रिश्ते को बचाने के लिए ज़रूरी है कि आप समस्या को समझें और बेझिझक उसके समाधान के लिए डॉक्टर/एक्सपर्ट की हेल्प लें.

योगा फॉर सेक्स 

योगा न स़िर्फ आपको फिट एंड फाइन रखता है, बल्कि कुछ योगा पोज़ीशन कामेच्छा बढ़ाने में भी मदद करते हैं. तो देर मत कीजिए, एक्सपर्ट्स से सलाह लेकर आज से ही ख़ास योगाभ्यास शुरू कर दीजिए. मगर ध्यान रखिए इससे बेनिफिट तभी होगा जब आप लगातार कुछ महीनों तक ऐसा करेंगी.

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कामेच्छा बढ़ाने के घरेलू उपाय
  • जिन महिलाओं की सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, उन्हें अजवायन का सेवन करना चाहिए. इसमें एंड्रोस्टेरोन होता है, जो कामेच्छा बढ़ाने में बहुत मददगार है
  • कई पोषक तत्वों से भरपूर एवोकाडो में फॉलिक एसिड भी होता है जो महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी है. ये उन्हें ताकत और ऊर्जा प्रदान करता है.
  • प्रोटीन और विटामिन का बेहतरीन स्रोत  अंडा खाने से भी महिलाओं को फ़ायदा होता है. कामेच्छा बढ़ाकर ये आपकी बोरिंग सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने में मदद करता है.
  • एक शोध से पता चला है कि सेब खाने से भी महिलाओं की कामेच्छा में वृद्धि होती है. अतः रोज़ाना 1-2 सेब खाएं.

पहला अफेयर: वह मेरी प्रेरणा है (Pahla Affair: Wo Meri Prerna Hai)

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पहला अफेयर: वह मेरी प्रेरणा है (Pahla Affair: Wo Meri Prerna Hai)

तुमसे ल़फ़्ज़ों का नहीं, रूह का रिश्ता है मेरा
मेरी सांसों में बसी रहती हो ख़ुशबू की तरह!

ये पंक्तियां शायर ने शायद मेरे ही लिए लिखी हैं. आज भी उसकी महक मेरी यादों में बसी है और उसका चेहरा आंखों में… वह मेरा पहला प्यार थी… एक ऐसा एहसास जो आज भी तन-मन में ताज़गी और उत्साह भर देता है… वसंत ऋतु में जिस तरह आमों की बौराई की गंध कोयल को कूकने के लिए मज़बूर कर देती है, उसी तरह प्यार का एहसास ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बना देता है, दुनिया की हर शै अपनी-सी लगने लगती है और प्रेम की मदहोशी छा जाती है.

हम पड़ोसी थे और सहपाठी भी, इसलिए खुलकर हर विषय पर चर्चा करते. लड़ते भी तो दो दिन से अधिक नाराजग़ी को खींच नहीं पाते. अधिकतर पहल वही करती, शायद इसीलिए मेरा अहम कुछ बढ़ गया और यही उसे खोने का कारण बना.

स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद हम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. उसी बीच उसकी शादी के प्रस्ताव आने लगे थे. उसने इस संबंध में मुझे बताया भी, परंतु मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया. मैं कोचिंग करने दिल्ली गया तो मैंने न ही उसे कुछ कहा और न ही अपना साथ देने के लिए आश्‍वस्त किया.

मैं सोचता था कि वह मुझे चाहती है तो मेरा इंतज़ार करेगी ही, लेकिन मैं एक लड़की की स्थिति को समझ नहीं पाया. बिना किसी वादे या आश्‍वासन के वह कितने दिन मेरा इंतज़ार करती, अपने परिवार को कैसे समझाती, उसने उनके कहे अनुसार शादी कर ली.

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अपनी नादानी में मैंने उसे खो दिया. मैं तो पूरी तरह से आश्‍वस्त था कि जब वो मुझे चाहती है तो मेरे सिवा किसी और की हो ही नहीं सकती. पर शायद हमारी क़िस्मत में एक होना लिखा न था.

कभी-कभी दिल में बरबस यह ख़याल आने लगता है कि वह मेरी अच्छी जीवनसंगिनी बन सकती थी. मेरी हर पसंद का ख़याल रखने वाली, मेरी ग़लतियों को समझाने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाली, ऐसी साथी मुझे कोई और नहीं मिल सकती थी.

वह अब भी मेरी सच्ची दोस्त है तथा मुझे सुखी देखना चाहती है. पर कहते हैं ना कभी किसी को मुक़म्मल जहां नहीं मिलता-कहीं जमीं, तो कहीं आसमां नहीं मिलता.

माना कि उसकी जुदाई से कुछ दिनों तक दीवानों-सी हालत रही. पर उसके समझाने पर घर-परिवार का ख़याल कर मैंने ख़ुद को बिखरने से बचा लिया. इसका श्रेय भी उसे ही जाता है.

कितनी कशिश रहती है उसकी आंखों में. दिल को इस बात का सुकूं है कि क्या हुआ वो मेरी न हो सकी, लेकिन उसके संग बिताए वे पल, वे प्यार भरे एहसास तो मेरे यादों के घरौंदे में महफूज़ हैं. आज भी निराशा, अकेलेपन में मेरे जीने का सबब बन जाती हैं, उसकी बातें, उसकी यादें. साथ ही ज़िंदगी-ज़िंदादिली से जीने की प्रेरणा देती है.

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– समीर चौबे

पहला अफेयर: तोहफ़ा (Pahla Affair: Tohfa)

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पहला अफेयर: तोहफ़ा (Pahla Affair: Tohfa)

ऑफिस से लौटने के बाद मैं अक्सर वॉक पर जाता हूं. तेज़ क़दमों से वॉक करने पर ताज़गी का अनुभव होता है. घर के पास ही लगभग 1.5 किलोमीटर का वॉकिंग ट्रैक बना हुआ है, जो बेहद ख़ूबसूरत है. ट्रैक के दोनों तरफ़ हवा में झूमते बड़े-बड़े पेड़ भी हैं. ट्रैक एलईडी लाइट्स से रोशन है और ट्रैफिक भी ज़्यादा नहीं है. कुल मिलाकर वॉक के लिए परफेक्ट जगह है.

उस दिन संडे था. छुट्टी के दिन मैं कुछ जल्दी ही वॉक पर निकल गया. बारिश का मौसम शुरू ही हुआ था, लेकिन उस दिन हल्के बादल छाए हुए थे. देखकर ऐसा लगा नहीं था कि तेज़ बारिश होगी. मैं बिना छतरी के ही निकल गया.

अभी आधा ट्रैक ही पार किया था कि मूसलाधार बारिश शुरू हो गई. साथ ही बिजली कड़कने लगी, बादल गरजने लगे. मौसम अचानक बदल गया. तूफ़ानी बारिश होने लगी. मन ही मन मैं ख़ुद को कोसने लगा कि क्यों बिना छतरी के निकल पड़ा. अपने आलस पर मुझे ग़ुस्सा आ रहा था. ख़ैर सबक तो मिलना ही था.

देखते ही देखते पूरा ट्रैक खाली हो गया. जिनके पास छतरियां थीं, वो आगे निकल पड़े और कुछ स्कूटर पर ही भीगते हुए हवा से बातें करते तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ गए.

आसपास कहीं कोई छिपने की जगह नहीं थी, इसलिए मैं एक घने पेड़ के नीचे ही खड़ा हो गया. सोचा कुछ तो बचाव होगा, लेकिन भीगी पत्तियों से गिरती तेज़ बूंदों ने मुझे पूरी तरह से तर-बतर कर दिया था. उस पर आसमान में चमकती तेज़ बिजली ने मंज़र को थोड़ा भयावह कर दिया था. मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं?

तभी एक अप्रत्याशित घटना घटी. सामने से आती एक तेज़ रफ़्तार कार अचानक मेरे पास आकर रुक गई. उसमें से एक युवती निकली और अपना छाता मुझे थमाते हुए तेज़ी से कार में बैठकर बोली, “मैं आपको घर छोड़ देती, पर मैं अपने पापा को रिसीव करने एयरपोर्ट जा रही हूं, उनकी फ्लाइट का टाइम हो गया है…”

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इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वो तेज़ी से आगे बढ़ गई और देखते ही देखते उसकी कार आंखों से ओझल हो गई. न मैं कुछ पूछ सका, न ही कार का नंबर नोट कर पाया. आंधी की तरह वो लड़की आई और मेरे मन में सवालों का तूफ़ान छोड़कर चली गई.

अगले तीन-चार दिन मौसम बिल्कुल साफ़ रहा, लेकिन मैं रोज़ वो छतरी लेकर जाता रहा, ताकि ‘थैंक्स’ कह सकूं, लेकिन वो नहीं दिखी. मैं निराश हो गया.

तभी एक दिन मम्मी ने कहा, “तेरे लिए एक रिश्ता आया है. शाम को लड़कीवालों के यहां चलना है.”
मैं तैयार होकर सबके साथ चला गया, तो देखा वही लड़की चाय लेकर आई. मैं उसे देखता ही रह गया और वो भी मुझे ही निहार रही थी. हम दोनों मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे. लड़की ख़ूबसूरत तो थी ही, इंजीनियर भी थी, मैं तो पहले ही उससे इंप्रेस हो गया था और अब तो बस शादी के लिए ‘हां’ कहना बाकी था.

चलते समय मैंने हौले से उससे कहा, “आज फिर मैं आपका छाता लाना भूल गया…”
“लौटाने की ज़रूरत नहीं. अपने पास ही रखिए, लेकिन शाम को उसे अपने साथ लेकर ज़रूर जाइए, जिससे कोई दूसरी लड़की आपको अपनी छतरी भेंट न कर सके.” उसके होंठों पर एक शरारतभरी मुस्कान थी. कुछ शायद उसने बिना कहे ही अधूरा छोड़ दिया था… मेरे अनुमान के लिए.

जिसने हमारी मुलाक़ात करवाई उस प्रिय छतरी के तले बरसते पानी की झमाझम में, शीतल फुहारों का आनंद उठाते मैं शाम को फिर वॉक पर निकल पड़ा… मन में पहले प्यार का मदभरा एहसास था, लबों पर गीत और आंखों में होनेवाले जीवनसाथी के प्यारभरे सपने…

– सत्य स्वरूप दत्त

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पहला अफेयर: रूहानी रिश्ता (Pahla Affair: Roohani Rishta)

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पहला अफेयर: रूहानी रिश्ता (Pahla Affair: Roohani Rishta)

इतने सालों बाद अचानक तुम्हारा फ़ोन आया तो मैं हैरान रह गई. मैंने कहा, “इतने वर्षों के बाद मुझे अचानक कैसे याद किया?” तुमने हंसते हुए कहा “मैं तो तुम्हें एक पल के लिए भी नहीं भूला. हमारे घर में अक्सर तुम्हारी बात होती है.” मैंने पूछा, “क्या बात होती है? बताओ न प्लीज़.” तुमने शरमाते हुए कहा, “यही कि थी कोई एक अच्छी-सी लड़की. उसी के लिए पढ़ लेता था. मेरे इस पद पर पहुंचने में तुम्हारा बहुत बड़ा हाथ है.”

अरसे बाद अचानक तुमसे पहली बार बात हुई और वह भी इस तरह. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं. फिर तुमने कहा, “बहुत दिनों से तुमसे बात करने की सोच रहा था, पर हिम्मत ही नहीं हो रही थी.” मैंने पूछा, “क्यों?” तुमने कहा, “यही सोचकर कि न जाने कौन फ़ोन उठाएगा?” मैंने कहा, “अब हम बच्चे थोड़े हैं, युवा बच्चों के माता-पिता हैं.”

तुमने बहुत-सी बातें की और फिर कहा, “तुम जानती हो, मैं तुम्हें स्कूल के दिनों से ही प्यार करता रहा हूं. जब तुम स्कूल की प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी तो मैं तुम्हें जी भर कर देखा करता था. तुम्हारा नाम अपनी क़िताबों में न जाने कितनी बार लिख दिया करता था. मैं अपने घर से स्कूल के लिए तभी निकलता था, जब तुम निकलती थीं. हम कक्षा में सबसे आगे की सीट पर बैठा करते थे.

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उसके बाद हमारी साथ-साथ नौकरी लगी. एक बार तुम मुझे बस में मिलीं. उस दिन भी हम पास-पास बैठे थे. एक-दो औपचारिक बातों के सिवाय हमने कोई ख़ास बात नहीं की.” तुमने कहा, “मैं सारे रास्ते अपने दिल की बात कहने के लिए हिम्मत जुटा रहा था, पर कह नहीं पाया. तुमने सोचा कि कहीं मैं नाराज़ न हो जाऊं. इसलिए पहले कुछ बनना चाहते थे. तुमने सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा दी और उसमें पास भी हो गए, पर तब तक मेरा विवाह हो चुका था. तुम बिल्कुल टूट चुके थे. दस दिनों तक तुम्हारी तबीयत बहुत ख़राब रही. उसके बाद तुम अधिकारी बन कर नई जगह पर चले गए और मेरी यादों के सहारे जीने लगे.”

“अकेले में मैंने तुमसे कितनी बातें की हैं. तुम्हारा नाम मैंने अपने हस्ताक्षर में मिला लिया और अब हर रोज़ तीन-चार सौ चिट्ठियां साइन करता हूं. मेरा पासवर्ड भी तुम्हारे नाम से ही है. मैंने तुम्हें अपनी ज़िंदगी में किस तरह से मिला लिया है, इसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकती. तब से आज तक तुम्हारी यादों के सहारे अपना जीवन बिता रहा हूं.

मैंने शादी की, मेरे बच्चे भी हैं. समाज में रहकर समाज के नियमों का पालन तो करना ही पड़ता है, पर आज भी मैं तुम्हें भुला नहीं पाया. तुमसे मेरा रूहानी रिश्ता है. मैं चाहता तो पहले भी तुम्हारा पता लेकर तुमसे मिल सकता था, पर उससे क्या होता? तुम अपने परिवार में ख़ुश थीं. मेरे लिए इससे बढ़कर और कोई ख़ुशी नहीं थी. हमेशा तुम्हारे सुख की कामना करता हूं. स़िर्फ एक ख़्वाहिश थी कि मरने से पहले तुमसे यह पूछूंगा कि क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो?”

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मैं अतीत में खो गई. “इतने वर्षों तक तुम अकेले ही जलते रहे और उसकी आंच तक मुझे नहीं आने दी. मैं भी शायद तुम्हें प्यार करती थी. निगाहें तुम्हें ही खोजती थीं. कक्षा में इतने पास-पास बैठने पर भी हमने कभी एक-दूसरे से बात नहीं की थी. तुम पढ़ाई में बहुत अच्छे थे, मैं भी ठीक थी. स्कूल में न सही स्कूल के ऑर्नर बोर्ड पर तो हम दोनों के नाम एक साथ हैं.” और तुम रोने लगे. तुम कितने भावुक हो! तुम्हारा प्यार कितना गहरा है. कितना आत्मिक है, यह सोचकर मेरा मन श्रद्धा से झुक जाता है.

– गुरुशरण

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पहला अफेयर: समर्पित प्यार (Pahla Affair: Samarpit Pyar)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: समर्पित प्यार (Pahla Affair: Samarpit Pyar)

प्यार एक ख़ूबसूरत एहसास (Emotion) है. कहते हैं, लोग प्यार में जान दे देते हैं, तो ले भी लेते हैं. न जाने कैसा जुनून छा जाता है प्यार भरे दिलों पर. पर बरसों पहले प्यार (Love) करने वालों के ख़याल कुछ अलग ही हुआ करते थे. जिसे चाहा उसके प्रति पूर्ण समर्पण और उसकी ख़ुशी की ख़ातिर त्याग भरी भावना हुआ करती थी. अपने हिस्से चाहे जितने ग़म व तन्हाई आए, पर प्यार को वे रुसवा न होने देते थे. ऐसी ही प्यार भरी अनुभूति से सराबोर हूं मैं भी. आज भी उसके प्यार व समर्पण का ख़याल आते ही दिल में एक टीस-सी उठती है. बिना कुछ कहे-सुने भी अपने सेवा भाव से प्यार का इज़हार किया जा सकता है, यह मैंने उसी से जाना. अब तो कई सदियां बीत गयीं, लेकिन आज भी उसका रुहानी प्यार मेरे दिल में महफूज़ है.

अब तो प्यार-मोहब्बत को जानते हुए मैं इस दौर तक आ गई हूं, जब मेरे नाती अपने प्यार की बातें कहने-सुनने लगे हैं. आज से चार-पांच दशक पहले प्यार करना क्या है, ये तो हम जान ही नहीं पाते थे. आज जैसा खुलापन और बड़ों का उदारवादी स्नेह हमें प्राप्त नहीं था.

बात उन दिनों की है जब हम गुड्डे-गुड़ियों से खेला करते थे. मासूम बचपन और हरदम चेहरे पर शरारत रहती. लेकिन तब का व़क़्त अलग था. बड़े-बुज़ुर्गों के लिहाज और संस्कारों के चलते बड़े घरों की बहू-बेटियों का बाहर आना-जाना उतना होता न था. वह हमारे मुनीमजी का बड़ा बेटा था. बचपन से काम के बहाने घर के अंदर आता रहता. वह कब हमारे दिल में बस गया, जान ही न पाए हम.

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मास्टर साहब मुझे पढ़ाने आते तो वह भी साथ ही पढ़ने बैठ जाता. महाराजिन दाई मां के साथ वह खाना भी बहुत अच्छा बना लेता. शाम की संध्या पूजा की तैयारी, जो मेरी ज़िम्मेदारी थी, कब उसका फ़र्ज बन गया, यह देख मैं हैरान थी. बचपन के 8-10 वर्ष का यह साथ किशोरावस्था का संकोच बनता चला गया. मैं साड़ी पहनने लगी तो वह मेरे लिए बाग से फूल ले आता. अमराई के आम, कच्ची इमली, अमरूद, करौंदे के दाने मेरे लिए झट तोड़ कर ले आता. हर पल मुझे हंसते-खेलते, इठलाते देखने की तमन्ना रहती उसकी.

लेकिन तक़दीर मेें तो कुछ और ही होना लिखा था. दरअसल, मेरा विवाह मेरे जन्म के समय ही बुआ के देवर के बेटे से तय हो गया था, पर जाने क्यों दिल इसे मानने को तैयार न था. मन हर पल उसके ख़यालों में खोया रहता. अब इस वजह से मैं घरवालों से दूर रहकर घंटों अकेले सोचती रहती और उसे याद कर मुस्कुराती. पर ज़ुबां न खुलती, नज़रें ऊपर न उठतीं. लेकिन एक दिन मां के उन शब्दों ने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी, ङ्गङ्घअर्चु, बाबा की पगड़ी कभी तेरी वजह से उतर ना पाए.फफ शायद मेरे दिल का हाल, मुझसे पहले मां समझ गई थी, तभी तो मां ने मुनीम जी से कह कर उसकी नौकरी मेरी मौसी के यहां करवा दी.

मेरे विवाह तक उसने सारा काम बड़ी ईमानदारी से किया और मेरे विदा होने से पहले ही ख़ुद अलविदा कहकर चला गया. उसके प्यार के समर्पण ने मेरी गृहस्थी की सुरक्षा की है. जब कभी उसे याद करती हूं तो उसके समर्पण और प्यार से भावुक हो उठता है मन.

– अर्चना

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जानें कैसे पुरुषों पर भी असर डालता है तलाक़ (5 Reasons Why Divorce Is More Stressful On Men Than Women)

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आमतौर पर लोगों की यही सोच होती है कि तलाक़ का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर होता है और इसका पुरुषों पर कोई असर नहीं होता, लेकिन ये सच नहीं है. तलाक़ पुरुषों को भी प्रभावित करता है. पार्टनर से अलगाव उन्हें भी अकेला करता है, उन्हें भी तकलीफ़ देता है. तलाक़ का पुरुषों पर और क्या असर होता है, आइए जानते हैं.

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आमतौर पर तलाक़ के केस में सबकी सहानुभूति व तवज्जो पत्नी के साथ होती है. और माना जाता है कि किसी भी महिला के लिए तलाक़ की प्रक्रिया बेहद तकलीफ़देह होती है. लेकिन शायद ही किसी ने इस बात पर गौर किया हो कि तलाक़ पुरुषों के लिए भी उतना ही मुश्किलोंभरा व चुनौतीपूर्ण होता है. तलाक़ एक पुरुष को भी डिप्रेशन में डाल देता है. उसे अकेला बना देता है. साथ ही दोस्तों, परिवार, समाज की नज़रों में विलेन भी.
डॉ. प्रीति नंदा के अनुसार, यह एक मिथ है कि स़िर्फ महिलाएं ही अपने पति से बहुत प्यार करती हैं व उनसे दिल से जुड़ी रहती हैं. जबकि पुरुष भी अपनी पत्नी से भावनात्मक लगाव रखते हैं और डिवोर्स के बाद भी उस लगाव, संवेदनाओं व चाह को तोड़ नहीं पाते व बेचैन रहते हैं.
– तलाक़ पुरुषों को भावनात्मक रूप से अस्थिर कर देता है.
– कई बार मानसिक अवसाद इतना बढ़ जाता है कि उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति पनपनेे लगती है.
– मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुष एक स्त्री की तुलना में अपने दुख को 1% भी व्यक्त नहीं करते, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका दुख-दर्द पत्नी की तुलना में कम है.
– तलाक़ के बाद पुरुष किस-किस तरह से प्रभावित होते हैं, आइए जानते हैं.

 

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मानसिक रूप से कमज़ोर होना

– पुरुष शारीरिक रूप से नारी की तुलना में भले ही बेहद ताक़तवर होते हैं, लेकिन मानसिक मज़बूती में वे स्त्री की तुलना में कहीं नहीं ठहरते.
– ये अलग बात है कि वे दुनिया के सामने कठोर बने रहते हैं.
– यहां तक कि तलाक़ जैसी त्रासदी को भी बिना शिकन के झेल लेते हैं, लेकिन यह महज़ दिखावा होता है.
– जीवनसाथी से अलगाव, आगे का जीवन तन्हा जीना, दोस्तों, रिश्तेदारों, महिला कलीग्स की चुभती निगाहें, ताने-उलाहने, तीखे कमेंट्स पुरुषों को अंदर से तोड़ देते हैं.
– उनका मन कमज़ोर और भावनाएं घायल होती जाती हैं.
– लेकिन हमेशा से जो सिखाया-बताया जाता है कि पुरुष बहादुर होता है, रोता नहीं है, उसे दर्द नहीं होता है… बस, यही बातें उन्हें कठोर बने रहने पर मजबूर कर देती हैं.

दर्द व्यक्त न कर पाना

– पुरुष अपने दुख-तकलीफ़ को उतनी सहजता से नहीं कह पाते, जितनी सरलता से महिलाएं कहती हैं. फिर चाहे बात छोटी-सी खरोंच लगने की हो या तलाक़ जैसी दुखद घटना.
– जहां स्त्री अपने-पराए हर किसी से अपने तलाक़ पर बात कर लेती है, पति के अत्याचार, व्यवहार के बारे में सब कुछ बता अपना मन हल्का कर लेती है, वहीं पुरुष ये सब नहीं कर पाते.
– पुरुष के लिए तो अपने बेस्ट फ्रेंड से भी अपनी पत्नी, तलाक़ और उससे जुड़े हालात, वजहों को डिसकस करना, अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना टेढ़ी खीर साबित होता है.
– पुरुष अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण अपने ग़म को अपने अंदर ही पालता रहता है.
– तलाक़ से उपजा अवसाद, सदमा और पत्नी का रिजेक्शन पुरुष को लंबे समय तक तोड़कर रख देता है.
– पुरुष का यही अंतर्मुखी स्वभाव आगे चलकर कई गंभीर मानसिक व शारीरिक हेल्थ प्रॉब्लम्स को जन्म देता है.

प्रभावित होती प्रोफेशनल लाइफ

– भारतीय पुरुष शादी होते ही अपनी हर तरह की ज़रूरतों के लिए पत्नी पर कुछ इस कदर निर्भर हो जाते हैं कि उनका डेली रूटीन बिना पत्नी की मदद के पूरा नहीं होता.
– तलाक होने पर अचानक जब यह सपोर्ट सिस्टम फेल हो जाता है, तो उनकीज़िंदगी अव्यवस्थित हो जाती है. इन सबका असर उनकी नौकरी यानी प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ने लगता है.
– वे काम में पहले जैसे स्मार्ट और परफेक्ट नहीं रह जाते.
– देर रात तक की मीटिंग अटेंड नहीं कर पाते.
– वे लॉन्ग टूर पर नहीं जा पाते हैं, क्योंकि अब उन्हें घर मैनेज करने के साथ-साथ बच्चों के स्कूल (यदि बच्चे हैं), उनकी सुरक्षा की भी चिंता लगी रहती है.
– पहले की तरह स़िर्फ अपने करियर पर फोकस नहीं रख पाते, जिससे वे प्रोफेशनल फ्रंट पर पिछड़ने लगते हैं.
– सायकोलॉजिस्ट के अनुसार, घर-बाहर की ज़िम्मेदारी के साथ समाज व रिश्तेदारों के व्यवहार में उनके प्रति आया परिवर्तन, ठंडापन उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर करता है.
– जीवनसाथी की कमी उनके मन में खालीपन का एहसास पैदा करने लगती है.
– वे ग़ुस्सैल, चिड़चिड़े व आक्रामक होते जाते हैं.
– कभी-कभी अल्कोहल, ड्रग्स, जुए आदि की लत उनके पतन का कारण बन जाती है.

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फाइनेंशियल प्रेशर

– पुरुषों के लिए डिवोर्स फाइनेंशियली भी बहुत भारी पड़ता है.
-तलाक़ के बाद भारी एलीमनी देनी पड़ती है.
– जॉइंट एसेट्स का लिक्विडेशन करना होता है.
– घर, चल-अचल संपत्ति में भी पत्नी व बच्चोें की हिस्सेदारी देना ज़रूरी होता है.
– इन सब को पूरा करते-करते पुरुष की ज़िंदगीभर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ख़र्च हो जाता है.
– फाइनेंशियल प्रेशर का असर उनके परफॉर्मेंस पर पड़ने लगता है, जिससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम होता जाता है.
– तलाक़ पुरुष को मानसिक रूप से तो तोड़ता ही है, साथ ही कमोबेश पैसों की तंगी होेना उनके लिए दोहरी मार साबित होता है, जिसे झेल पाना पुरुषों के लिए कतई आसान नहीं होता.

इमोशनल अत्याचार

– डिवोर्स होने पर छोटे बच्चों की कस्टडी अक्सर मां को मिलती है. पिता के हिस्से में आती हैं कोर्ट के आदेशानुसार नियत समय पर चंद मुलाक़ातें.
– पुरुष अपनी पत्नी से अलग रह सकते हैं, लेकिन अपने बच्चों का दूर जाना उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देता है.
– बच्चे के जन्म से लेेकर परवरिश से जुड़ी छोटी-छोटी बातें, यादें उन्हें ग़मगीन करती चली जाती हैं, यह औैर बात है कि वे अपना यह दर्द किसी से साझा नहीं करते.
– तलाक़ के बाद अपने बच्चे से पिता को दूर कर दिया जाना उनके लिए किसी इमोशनल अत्याचार से कम नहीं है.
तलाक़ का पुरुषों के मान-सम्मान और इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. लेकिन अफ़सोस यह कि जहां पत्नी को हर तरफ़ से सहयोग मिलता है, वहीं पति के पास एक कंधा भी नहीं होता, जिस पर सिर रखकर, वह अपना मन हल्का कर सके. इसलिए यह कह देना कि तलाक़ का असर पुरुषों पर नहीं होता न्यायसंगत नहीं है.

– निधि निगम

रिश्ते से डिलीट करें इन 10 आदतों को (10 Bad Habits That Could Ruin Your Marriage )

Bad Habits

पति-पत्नी का रिश्ता प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से मज़बूत बनता है, पर अगर पति-पत्नी की कुछ बुरी आदतें रिश्ते को नुक़सान पहुंचाने लगें, तो ऐसी आदतों को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए, वरना गृहस्थी की गाड़ी को डगमगाने में देर नहीं लगती.

Bad Habits
आदत- बातें छिपाना या झूठ बोलना

शादीशुदा ज़िंदगी में अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे से कई बातें छुपाते हैं, बहाने बनाते हैं और अपनी ग़लतियों को छुपाने के लिए अक्सर झूठ भी बोलते हैं, पर हमें यह एहसास ही नहीं होता कि ये छोटे-छोटे झूठ हमारे रिश्ते को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं. और सबसे बड़ी बात कि ये आपके रिश्ते से विश्‍वास को ख़त्म कर देते हैं.
डिलीट करें: अगर आपसे कोई ग़लती हुई है, तो झूठ बोलने की बजाय उसे मान लें. पार्टनर को इस बारे में बताएं, भले ही उस समय पार्टनर आपसे ग़ुस्सा होगा, लेकिन आपकी बात को ज़रूर समझेगा और सबसे बड़ी बात आपके रिश्ते में हमेशा विश्‍वास बना रहेगा.

आदत- बदलने की कोशिश करना

यह एक बहुत ही ख़तरनाक आदत है. कभी-कभी तो लगता है कि लोग एक-दूसरे को सुधारने के मक़सद से ही शादी करते हैं, ख़ासकर नए शादीशुदा जोड़े, जो सब कुछ अपने मुताबिक़ चाहते हैं. याद रहे, आपकी यह आदत पार्टनर को ग़ुस्सा दिलाने और चिड़चिड़ा बनाने के लिए काफ़ी है, जो आपके रिश्ते के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं.
डिलीट करें: शादी का मतलब एक-दूसरे को अपने मुताबिक़ ढालना नहीं, बल्कि ज़रूरत के मुताबिक़ ढल जाना है. आपको यह बात समझनी होगी कि आप दोनों ही अब तक अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े हैं, जिससे आपकी आदतें भी काफ़ी अलग हैं, पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि आपकी आदतें अच्छी हैं और उनकी ग़लत. अपने रिश्ते को थोड़ा समय दें और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें.

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आदत- फॉर ग्रांटेड लेना

अक्सर शादी के कुछ सालों बाद लोग अपने रिश्ते को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं. फॉर ग्रांटेड लेना यानी पार्टनर व रिश्ते के प्रति
लापरवाही भरा रवैया अपनाना, उसके त्याग-समर्पण को महत्व न देना आदि. आपका यह रवैया आपके पार्टनर के मन में आपके लिए चिढ़ और ग़ुस्से के अलावा कुछ और नहीं लाएगा.
डिलीट करें: अपने रिश्ते को इससे बचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. पार्टनर जब भी आपके लिए कुछ स्पेशल करता है या आपकी किसी समस्या को बिना कहे सुलझा देता है, तो ङ्गथैंक्यूफ कहकर उसे प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि आप भी समय-समय पर कुछ ऐसा करें, जिससे आपके रिश्ते में हमेशा गर्माहट बनी रहे.

आदत- बातचीत से उठकर चले जाना

अक्सर पार्टनर्स अपनी बात कहकर, सामनेवाले की बात बिना सुने वहां से हट जाते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वो बहस को टाल रहे हैं, पर वो यह नहीं जानते कि अपने पार्टनर को अपनी बात रखने का मौक़ा न देकर, वो उसके साथ ज़्यादती कर रहे हैं. ऐसा करने से पार्टनर को बुरा लग सकता है, जिससे वो अगली बार किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखना बंद कर सकता है. इससे रिश्ते में खटास आती है, जो आपके रिश्ते को बिगाड़ सकती है.
डिलीट करें: पति-पत्नी के बीच यह एक नियम होना चाहिए कि जब भी एक किसी समस्या या मुद्दे पर अपनी बात रख रहा हो या सफ़ाई मांग रहा हो, तो दूसरा उसे सुनेगा और उस पर अपनी राय रखेगा और किसी भी हाल में वहां से उठकर नहीं जाएगा. यह नियम आपकी हर समस्या को सुलझा देगा. इस ख़्याल को दिमाग़ से निकाल दें कि उठकर चले जाने से आप बात को ख़त्म कर रहे हैं, बल्कि आप उसे और बढ़ा रहे हैं.

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आदत- हर बात में तुलना करना

तुलना किसी को भी अच्छी नहीं लगती, क्योंकि हर व्यक्ति अपनी समझ व क्षमतानुसार काम व व्यवहार करता है, पर कुछ लोगों की आदत होती है, हर बात में पार्टनर की तुलना अपने दोस्तों, पड़ोसी या कलीग्स से करने की. हमेशा तुलना का मकसद पाटर्नर को नीचा दिखाना ही नहीं होता है, बल्कि जाने-अनजाने की गई तुलना भी किसी के आत्मविश्‍वास को कमज़ोर कर सकती है. इसलिए इस तुलनात्मक आदत से अपने रिश्ते को कमज़ोर न होने दें.
डिलीट करें: किसी भी रिश्ते की मज़बूती दो लोगों के मान-सम्मान से बनती है, पर अगर आपके पार्टनर का आत्मविश्‍वास ही कमज़ोर हो, तो भला वह अपने रिश्ते को क्या मज़बूती देगा. पार्टनर का मान-सम्मान आपकी ज़िम्मेदारी है, इसे निभाएं और हर बात में किसी और से तुलना करना छोड़ दें.

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आदत- पार्टनर पर नज़र रखना

पार्टनर के मोबाइल में कॉल लॉग चेक करना, सभी मैसेजेस पढ़ना, ईमेल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नज़र रखना कुछ लोगों की आदत होती है. इस तरह नज़र रखने का मतलब है कि आप अपने पार्टनर पर शक कर रहे हैं और आपको उन पर विश्‍वास नहीं. ऐसा करके आप अपने पार्टनर के विश्‍वास को तोड़ते हैं, जो आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं.
डिलीट करें: पार्टनर पर नज़र रखने से पहले यह ध्यान रखें कि हर व्यक्ति का अपना पर्सनल स्पेस होता है, जिसमें अतिक्रमण किसी को भी पसंद नहीं आता. आपको हर व़क्त सैटेलाइट बनकर घूमने की ज़रूरत नहीं, अपने पार्टनर पर विश्‍वास करना भी सीखें. कुछ लोग एहतियात के तौर पर ऐसा करते हैं, ताकि समय रहते अपने रिश्ते को संभाल सकें, पर अक्सर बेवजह का शक रिश्तों को बर्बाद कर देता है. अगर आपके मन में कोई बात है, तो जासूसी करने की बजाय पार्टनर से आमने-सामने बैठकर बात करें.

आदत- दूसरों के सामने बेइज़्ज़ती करना

दूसरों के सामने ख़ुद की अहमियत बढ़ाने के लिए पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना एक बचकानी आदत है. इसका इस्तेमाल ज़्यादातर पुरुष करते हैं, पर महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं. ऐसा करनेवाले पार्टनर्स अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनकी इस आदत को लोग उनके रिश्ते की असफलता मानते हैं.
डिलीट करें: पति-पत्नी का व्यवहार घर-बाहर एक समान होना चाहिए. आप एक-दूसरे का सम्मान जितना घर में करते हैं, उतना ही दूसरों के सामने भी करें. अगर कभी मन-मुटाव भी हो गया है, तो उसे अपने घर के बाहर न ले जाएं. दूसरों के सामने हमेशा अपने पार्टनर की तारीफ़ करें, पर अगर यह नहीं कर सकते, तो कम से कम ऐसी बात न कहें, जिससे उन्हें बेइज़्ज़ती महसूस हो.

आदत- हर व़क्त कमियां गिनाना

ङ्गआप किसी काम के नहीं हो,फ ङ्गआपने ऐसा क्यों किया,फ ङ्गआपको कुछ आता भी है,फ जैसे उलाहनों से अपने पार्टनर की कमियां गिनाना बहुत ग़लत आदत है. पार्टनर में कमियां और ख़ामियां निकालना बहुत आसान है, पर उनकी ख़ूबियों को पहचानकर उनकी तारीफ़ करना बहुत मुश्किल.
डिलीट करें: पति-पत्नी का फज़र्र् एक-दूसरे की कमियां गिनाना नहीं, बल्कि उन कमियों के साथ अपनाना है. आख़िर कमियां किसमें नहीं होतीं, इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है. हम सबमें कुछ न कुछ कमी है. शादी का मतलब ही होता है, पार्टनर को उसकी ख़ूबियों और कमियों के साथ अपनाना, फिर शिकायत किस बात की. पार्टनर की कमियां गिनाने से पहले ख़ुद का आकलन भी कर लें. अगर आप परफेक्ट नहीं, तो भला दूसरों से ऐसी उम्मीद क्यों.

आदत- इमोशनल ब्लैकमेल करना

अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. अक्सर अपनी ज़िद मनवाने के लिए कपल्स इसका इस्तेमाल करते हैं. ङ्गङ्घअगर आप मुझसे प्यार करते हैं, तो ऐसा ज़रूर करेंगे…फफ जैसी इमोशनल बातों से अपनी ज़िद मनवाते हैं. अपनी बात को मनवाने के लिए कभी रोना-धोना, तो कभी सेक्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं.
डिलीट करें: अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करके भले ही आप अपनी बात मनवा लेते हैं, पर इससे पार्टनर आपको ज़िद्दी और स्वार्थी समझने लगता है. उनके मन में अपनी ऐसी छवि न बनने दें और जल्द से जल्द अपनी इस आदत को डिलीट करें.

आदत- स़िर्फ अपने बारे में सोचना

मेरी पसंद, मेरी आदतें, मेरा विचार, मेरा रहन-सहन, मेरा कंफर्ट… जैसी बातें आपके वैवाहिक जीवन के लिए उचित नहीं. अपने बारे में सोचना अच्छी आदत है, पर स़िर्फ अपने बारे में सोचकर पार्टनर को तवज्जो न देना सही नहीं है, जो आपके वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करता है. शादी का मतलब पहले स़िर्फ मैं नहीं, बल्कि हम होता है, इस बात को समझें.
डिलीट करें: ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन दो लोगों से जुड़ा रिश्ता है. शादी में कई समझौते करने पड़ते हैं, इसलिए हमेशा ख़ुद को आगे रखने की बजाय, अपने रिश्ते को आगे रखें, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी हमेशा ख़ुशहाल बनी रहे.

– सुनीता सिंह