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ऋतिक रोशन और सुज़ैन में बढ़ती नज़दीकियां, सुज़ैन के स्टोर पहुंचे ऋतिक (Hrithik Roshan and ex-wife Sussanne Khan Spend Quality Time Together)

Hrithik Roshan Sussanne

Hrithik Roshan Sussanne

ऋतिक रोशन ( Hrithik Roshan ) और कंगना रनौत की बीच चल रही कॉन्ट्रोवर्सी के बीच एक बार फिर क़रीब आ रहे हैं ऋतिक रोशन और सुज़ैन खान ( Sussanne Khan ). सुज़ैन और ऋतिक भले ही एक-दूसरे से अलग हो चुके हों, लेकिन अब भी सुज़ैन हर कदम पर ऋतिक का साथ देती हैं. अक्सर दोनों कभी डिनर करते हुए, तो कभी अपने बच्चों के छुट्टियां मनाते नज़र आ जाते हैं.

इस बार ऋतिक पहुंचे सुज़ैन के इंटीरियर डिज़ाइन स्टोर पर, जिसका नाम है चारकोल प्रोजेक्ट. सुज़ैन और ऋतिक दोनों ने ही ये पिक्चर सोशल मीडिया पर शेयर की है. इस पिक्चर को शेयर करते हुए ऋतिक ने सुज़ैन और उनके गर्ल्स गैंग की तारीफ़ भी की है.

कंगना और ऋतिक के बीच चल रहे विवाद के बीच सुज़ैन ने भी ऋतिक की तरफ़दारी करते हुए एक पिक्चर भी शेयर की थी.

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सेक्स से जुड़े मिथ्स कहीं कमज़ोर न कर दें आपके रिश्ते को (Sex Myths Can Ruin Your Relationship)

Sex Myths

हमारे देश में सेक्स को लेकर आज भी संकोच, ग़लतफ़हमियों, भ्रांतियों की भरमार है. कई बार सेक्स से जुड़े मिथ्स के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दूरियां तक आ जाती हैं. साथ ही यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं और कई बार तलाक़ तक की नौबत आ जाती है. इसी विषय पर हमने सेक्सोलॉजिस्ट व मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद से बात की.

Sex Myths

–  अक्सर लोग सेक्स से जुड़ी फैंटेसी व कल्पनाओं पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकि ज़रूरत है इससे जुड़े हेल्दी व साइंटिफिक पहलुओं पर ग़ौर करने की.

– अधिकतर पुरुष पढ़ी-देखी हुई बातें, किताबें, फिल्में आदि में दिखाई गई अतिशयोक्ति को देख-सुन, उसी को सच समझने लगते हैं.

– उन्हें यह समझना होगा कि जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसमें सच्चाई कम और सनसनी पैदा करनेवाली बातें व तथ्य अधिक होते हैं.

– ऐसी उपलब्ध सामग्री के कारण ही पार्टनर के मन में ग़लत धारणाएं विकसित होने लगती हैं और वे दिखाई गई चीज़ों से अपनी ज़िंदगी व अनुभव की तुलना करने लगते हैं.

– कपल्स साइज़ (ब्रेस्ट/पेनिस), सेक्स की अवधि(सेक्सुअल रिलेशन) आदि को लेकर कई तरह के मिथ्स को सच मानने लगते हैं व ग़लत अपेक्षाओं के शिकार हो जाते हैं.

– अक्सर पुरुष यह सोचते हैं कि पेनिस का साइज़ बड़ा होने से वे अपने पार्टनर को अधिक संतुष्ट कर सकते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यहां पर कपल्स का मानसिक व शारीरिक जुड़ाव अधिक महत्व रखता है.

– इसलिए सच्चाई को जानना या समझना ज़रूरी है. सेक्स में साइज़ से अधिक आपसी नज़दीकियां, प्यार, इंटीमेट पल शेयर करना अधिक ज़रूरी है, जो प्यार के हर पल को ख़ूबसूरत व यादगार बनाने में मददगार होता है.

– लेकिन सेक्स से जुड़े तमाम मिथ्स के कारण लोग ग़लत बातों में दिलचस्पी लेने लग जाते हैं.

– दुनियाभर में सेक्स से जुड़ा बिज़नेस, जैसे- ब्रेस्ट साइज़ बढ़ाने के लिए मेडिसिन, पोर्न किताबें-फिल्में, चीज़ें, टॉयज़ आदि का मल्टी मिलियन डॉलर का कारोबार फैला हुआ है. इसी के चलते कंपनियां बहुत-सी ऐसी बातों का प्रचार-प्रसार भी करती हैं, जिनका हक़ीक़त से कोई लेना-देना नहीं रहता.

– लेकिन इन्हीं सबसे प्रभावित हो पुरुष अपने पार्टनर से ग़लत अपेक्षाएं व व्यवहार करने लगते हैं, ख़ासतौर से पति के लिए पत्नी उनकी इच्छाओं को पूरी करनेवाली ऑब्जेक्ट बनकर रह जाती है.

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– पत्नी का पति को ख़ुश करना व संतुष्ट करना परम कर्त्तव्य बन जाता है और जब वह ऐसा नहीं कर पाती है, तब वह पति के रिजेक्शन का शिकार हो जाती है.

– भ्रांतियां ग़लत अपेक्षाओं को जन्म देती हैं… ग़लत अपेक्षाएं असफलताएं पैदा करती हैं… असफलताओं से निराशा पनपने लगती है… और निराशा दुख का नेतृत्व करने लगती हैं… तब अंत में डिप्रेशन… तलाक़ तक स्थिति पहुंच जाती है. इसलिए इन सबसे बचने के लिए ज़रूरी है कि हम मिथ्स की बजाय पार्टनर पर विश्‍वास करें.

– पुरुषों के बीच यह मिथ भी ख़ूब मशहूर है कि कंडोम के इस्तेमाल से सेक्स एंजॉय नहीं कर पाते हैं. जबकि अक्सर सही ढंग से कंडोम का इस्तेमाल न करने की वजह ऐसा होता है. इसलिए इस तरह की ग़लतफहमियों से परे होकर अपने वैवाहिक जीवन को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करें.

– मन में कोई भी भ्रांति, ग़लतफ़हमी हो, तो उस पर खुलकर बात करें. सवालों को मन में ना रखें, पार्टनर से बातचीत करें, क्योंकि मिथ पर विश्‍वास कर हम ख़ुद ही दुख क्रिएट करते हैं. तो क्यों न पार्टनर पर विश्‍वास कर सुख की दुनिया बसाई जाए.

– कई बार तो ऐसा भी होता है कि पति फर्स्ट नाइट पर पति अपनी पत्नी से खुलकर वर्जिनिटी के बारे में बात नहीं कर पाते और जीवनभर मन ही मन आशंकित रहते हैं.

– ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप पार्टनर से खुलकर बात करें. सेक्स को लेकर कोई भी दुविधा या परेशानी हो, तो पार्टनर से कहें. स्थिति अधिक गंभीर हो जाए, तो सेक्सोजॉलिस्ट या फिर मैरिज काउंसलर की मदद लेने से भी न हिचकें.

Sex Myths

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– आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी सेक्स के बारे में न केवल खुलकर बात करती हैं, बल्कि अपनी पसंद-नापसंद भी पार्टनर को बताती हैं. माना इससे कपल्स की सेक्स लाइफ अच्छी और एंजॉयमेंट से भरपूर हो जाती है, लेकिन यदि पुरुष पार्टनर संकीर्ण विचारों का हो या फिर इन बातों को ग़लत ढंग से ले, तो ऐसे में रिश्तों में तनाव आते देर नहीं लगती. इस तरह की परिस्थितियों से बचने के लिए बेहतर होगा कि पत्नियां पति के स्वभाव व सोच को अच्छी तरह से समझें. फिर धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार पहल करें. कोई भी बदलाव तुरंत नहीं आता, उसके लिए धैर्य, अपनापन व सूझबूझ की बेहद ज़रूरत होती है.

– पुरुषों के बीच सेक्स को लेकर और भी ऐसी कई भ्रांतियां हैं, जिनके कारण वैवाहिक जीवन प्रभावित होने लगता है, जैसे-

– कई पुरुषों का मानना है कि जिस लड़की के पेट का निचला हिस्सा निकला हुआ होता है, वो वर्जिन नहीं होती…

– सेक्स से लड़कियों के कूल्हे बड़े हो जाते हैं…

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन होने पर ब्लड निकलना ज़रूरी है, ये लड़की के वर्जिन होने का प्रमाण है.

– जिन महिलाओं ने शादी के पहले सेक्स किया होता है, उनके स्तन ढीले पड़ जाते हैं…

– जो महिला मास्टरबेशन करती है, वो मां नहीं बन सकती…

ऐसी तमाम बातें हर पल पुरुषों को अपने पार्टनर को लेकर सशंकित करती रहती हैैं. इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि कपल्स हर पहलू पर खुलकर बात करें. रिश्ते में पारदर्शिता रिश्तों को मज़बूत बनाने का काम करती हैं. यह न भूलें कि आप दोनों का ज़िंदगीभर का साथ है, इसलिए जो भी परेशानी, ग़लतफ़हमियां, भ्रांतियां, शंकाएं हों, पार्टनर से ज़रूर कहें. उन्हें अपनी अपेक्षाएं और इच्छाओं से भी रू-ब-रू कराएं, ताकि दोनों ख़ुशहाल सेक्सुअल लाइफ एंजॉय कर सकें. अक्सर न कहने और मन ही मन कुढ़ते रहने के कारण भी रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं. अतः ऐसा न करें.

डिफरेंट स्ट्रोक्स

– एक रिसर्च के अनुसार, जिन्हें इज़ैक्युलेशन (शीघ्रपतन) की शिकायत है, वे यदि सेक्स करने के दो घंटे पहले मास्टरबेशन (हस्तमैथुन) करें, तो यह समस्या दूर हो सकती है.

– पहली बार सेक्स कर रहे हैं, तो डरे नहीं, बल्कि खुले दिमाग़ से पार्टनर को सहयोग दें.

– एक रिसर्च के अनुसार, 14 % पुरुष हर सात मिनट में सेक्स के बारे में सोचते हैं, पर इसका यह मतलब नहीं है कि वे हमेशा सेक्स करने के लिए तैयार रहते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

Healthy Relationship

बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

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क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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पहला अफेयर: एक अधूरा ख़्वाब… (Pahla Affair: Ek Adhoora Khwab)

Pahla Affair: Ek Adhoora Khwab

Pahla Affair: Ek Adhoora Khwab

पहला अफेयर: एक अधूरा ख़्वाब… (Pahla Affair: Ek Adhoora Khwab)

“शाम को पार्टी में आना न भूलना. एक नामचीन हस्ती को बुलाया है, उनसे तुम्हारी मुलाक़ात करवाऊंगी”, इतना कहने के साथ ही अवनि ने लाइन काट दी. …न जाने इस बार किससे मिलवाने वाली है अवनि? एक क्षण सोचकर मैं फिर अपने काम में मसरूफ़ हो गई. दिनभर के काम निपटाने के बाद पार्टी में जाने की तैयारी करने लगी.

पार्टी में कई चेहरे जाने-पहचाने थे और कुछ बिल्कुल अनजाने. मिलने-जुलने का सिलसिला जारी था. मैं भी इसी सिलसिले में शामिल हो गई. तभी मेरी दोस्त अवनि ने मुझे आवाज़ दी, “अरे राजी, इधर आओ. इनसे मिलो- जाने-माने लेखक शेखरजी.” सामने खड़े शख़्स को देखकर चंद लम्हों के लिए मेरे भीतर एक जलजला-सा महसूस हुआ, फिर मैं सामान्य हो गई.

“आपका नया नॉवेल एक अधूरा ख़्वाब पढ़ा, काफ़ी अच्छा है.” मैंने ख़ुद को समेटकर कहा.

“तारीफ़ के लिए शुक्रिया. कुछ ख़्वाब कभी हक़ीक़त की शक्ल अख़्तियार नहीं करते और कुछ ख़्वाबों को हम ख़ुद अपने हाथों से तार-तार कर देते हैं. कई बार ऐसा होता है, जब हम ख़ुद को बंधनों में न बंधने देकर उस पल तो राहत महसूस करते हैं, पर व़क़्त बीतने के साथ वही आज़ादी हमें काटने-कचोटने लगती है.” इस जुमले के साथ ही शेखर दूसरों से बातचीत करने में मशगूल हो गए.

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घर लौटने पर उनके शब्द मेरे कानों में गूंजने लगे. गुज़रा हुआ व़क़्त करवटें लेने लगा-
पहली बार मैं और शेखर एक काव्य सम्मेलन में मिले थे. मुझे कविताएं लिखने का शौक़ था और शेखर तो अपने फन में माहिर थे ही. मैं शेखर की लेखनी से बहुत प्रभावित थी. धीरे-धीरे शेखर मेरे दिलो-दिमाग़ पर छाने लगे. अक्सर हम लोगों का मिलना-जुलना लगा रहता.
एक दिन हल्की बारिश हो रही थी और हम दोनों कॉफ़ी हाउस में बैठे हुए थे. सहसा शेखर ने कहा, “तुम्हें नहीं लगता कि हम दोनों में बहुत कुछ एक-सा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी पसंद भी एक-सी है.” बहुत देर तक शेखर मेरी आंखों में आंखें डाले देखते रहे. मैं लाजवश कुछ न कह सकी.

“मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं.” प्रेम का इज़हार इस तरह सुनकर मेरा चेहरा सुर्ख हो गया. फिर तो मेरे दिल में हरदम शेखर की बातें और उसका ख़याल रहने लगा. देखते-देखते अरसा बीत गया. जब घरवालों ने शादी के लिए मुझ पर दबाव डालना शुरू किया तो मैंने शेखर से कहा, “हमारे प्रेम को अगर सामाजिक स्वीकृति मिल जाए तो…”

“राजी, मुझे बंधन पसंद नहीं. मैं खुले आकाश में आज़ादी से उड़ना चाहता हूं. मैंने अभी तक वो मुक़ाम हासिल नहीं किया है, जिसकी मुझे तमन्ना है. यदि शादी की, तो आगे बढ़ने का कोई सवाल ही कहां रहेगा? हम दोनों चाहें तो ताउम्र अच्छे दोस्त बनकर रह सकते हैं, पर हमारे प्यार को रिश्ते में बांधने की कोशिश न करो, प्लीज़…” मेरा दिल तोड़ने में शेखर ने ज़रा भी संकोच नहीं किया. मैं हतप्रभ रह गई. आंखों से आंसू थमे ही नहीं. वो हमारी आख़िरी मुलाक़ात थी.

जब रास्ते ही बदल गए तो शेखर के वजूद को भी मैंने अपनी ज़िंदगी और अपने दिल से अलग कर दिया. कहते हैं, व़क़्त के साथ ज़ख़्म भर जाते हैं. शेखर ने शोहरत व दौलत कमाई और मैंने अपना घर बसाया. जब उसने रिश्ता तोड़ा था तो कितना आहत हुई थी मैं, लेकिन आज शेखर से मिलने के बाद लगा कि उसके ज़ख़्म नासूर बन चुके हैं और वो आज अपने फैसले पर पछता रहा है. दिल ने कहा, “शेखर, तुम मेरी ज़िंदगी का ऐसा ख़्वाब हो, जिसे मैं भूल से भी याद नहीं करना चाहती और मैं तुम्हारी आंखों का वो अधूरा ख़्वाब हूं, जिसे तुमने कभी पूरा करना ही नहीं चाहा. तुम्हें बद्दुआ भी तो नहीं दे सकती. आख़िर मेरे जीवन का पहला प्यार हो तुम.”

– राजेश्‍वरी शुक्ला

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बेहतर करियर के लिए समझदारी से चुनें लाइफ पार्टनर (Choose Your Spouse Wisely For Better Career)

Spouse Wisely For Better Career

ज़िंदगी इत्तेफ़ाक नहीं है… हमारे फैसले, हमारी राय, हमारी सोच और हमारे निर्णय हमारी ज़िंदगी को दिशा देते हैं. हो सकता है कुछ चीज़ें हमारे मन के हिसाब से न हों, लेकिन सवाल यह है कि हमने कितना प्रयास किया? अक्सर शादी के निर्णय में हम और ख़ासतौर से लड़कियां अपनी सारी सोच और तमाम ख़्वाहिशों को ताक पर रख देती हैं, जबकि यही वो व़क्त होता है, जब हमें सबसे ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक ज़िम्मेदार व समझदार पति आपकी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकता है, जबकि एक ग़लत निर्णय आपको उम्रभर का पछतावा भी दे सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या और किस तरह से सिलेक्ट करें आप अपना लाइफ पार्टनर, ताकि आपको परिवार व शादी के बाद अपने अच्छे-ख़ासे सफल करियर को यूं ही अलविदा न कहना पड़े.

क्या करें?

  • सबसे पहले आपको ख़ुद यह सोचना होगा कि आप क्या करना चाहती हैं? श्र अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • डबल माइंड में न रहें.श्र आख़िर यह आपकी ज़िंदगी है, तो आपको ही यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या करना है.
  • अक्सर लड़कियां या तो ख़ुद यह सोच लेती हैं या फिर उनके परिवार की तरफ़ से उनको यह समझा दिया जाता है कि शादी के बाद देखा जाएगा, फ़िलहाल तो शादी हो जाए, यह ज़रूरी है.
  • ऐसे में लड़कियों पर भी दबाव होता है कि वो अपने होनेवाले पति से साफ़-साफ़ बात नहीं कर पातीं, क्योंकि उन्हें ससुरालपक्ष की नाराज़गी का डर रहता है.
  • अगर आप करियर ओरिएंटेड हैं और शादी के बाद भी करियर छोड़ना नहीं चाहतीं, तो सबसे बेहतर है कि अपने होनेवाले पति से इस बारे में खुलकर बात करें.
  • इससे आपको उनकी सोच व राय का भी अंदाज़ा हो जाएगा.श्र आपके लिए निर्णय लेना भी आसान हो जाएगा कि अब आपको किस चीज़ को प्राथमिकता देनी है.
  • आपकी राय भी महत्वपूर्ण है, आपका करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आपके पति का, इसलिए आपको अपनी बात बिना किसी संकोच के कहने की हिम्मत जुटानी ही होगी.

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Spouse Wisely For Better Career

क्या-क्या पूछें होनेवाले पार्टनर से?

  • आपके करियर को कितना महत्व देते हैं?
  • शादी के बाद आपके करियर को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ़ से क्या मदद होगी?
  • क्या घरेलू ज़िम्मेदारियों में आपका हाथ बंटाएंगे?श्र घर के कामों में आपकी कितनी मदद करेंगे?
  • महिलाओं के प्रति और ख़ासतौर से कामकाजी महिलाओं के प्रति उनकी क्या राय है?
  • फैमिली बढ़ने के बाद भी क्या वो आपके करियर को उतना ही महत्वपूर्ण समझेंगे?
  • परिवार के लोग यदि नौकरी छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वो आपको किस तरह से और किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
  • बच्चे की ज़िम्मेदारी में किस तरह से आपको सपोर्ट करेंगे… आदि… इत्यादि… ये तमाम सवाल आपको बेझिझक पूछने होंगे, ताकि आगे चलकर आपको अपने करियर को लेकर किसी तरह का समझौता न करना पड़े.
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कितना कॉम्प्रोमाइज़ करें, कितना नहीं?

  • बातचीत के बाद आपको स्वयं यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपका होनेवाला पार्टनर आपकी बातों से कितना सहमत है.
  • आपको यह भी पता लग जाएगा कि शादी के बाद आपकी क्या चुनौतियां होंगी.
  • आपको कितना कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ेगा और आपकी कितनी बातों को समर्थन दिया जाएगा.
  • इसी के अनुसार आप अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं. आप प्लानिंग कर सकती हैं कि आपको कितना बदलना है और किस तरह से बदलना है, ताकि  आपको करियर से भी समझौता न करना पड़े और परिवार को भी व़क्त दे सकें.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • सर्वे बताते हैं कि 48% महिलाएं अपने रियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, ताकि वो अपने परिवार को समय दे सकें.
  • यदि ये महिलाएं काम करती रहें, तो भारत का जीडीपी 2% तक ऊपर जा सकता है.
  • जबकि पूरे एशिया की बात करें, तो 21% महिलाएं अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं.
  • इसी तरह से 43% उच्च शिक्षित महिलाएं बच्चों की परवरिश की ख़ातिर कुछ समय के लिए अपना करियर छोड़ देती हैं.
  • यही नहीं, विदेशों में भी यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

Spouse Wisely For Better Career

कारण क्या है?

  • दरअसल, महिलाएं परिवार के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी महसूस करती हैं.
  • न स़िर्फ ज़िम्मेदारी, विशेषज्ञ बताते हैं कि उनमें अपराधबोध की भावना भी पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होती है.
  • उन्हें लगता है कि बच्चों और परिवार को उनकी अधिक ज़रूरत है.
  • परिवार को समय न दे पाने की चिंता व गिल्ट उन्हें अधिक होता है.
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बदलाव ही रास्ता है…

  • बदलाव हो रहा है. लड़कियों की सोच भी बदल रही है और वो भी अब अपने करियर को गंभीरता से लेने लगी हैं.
  • लेकिन ज़रूरत है समाज व लड़कियों के माइंडसेट को बदलने की, जहां उन्हें यह साफ़तौर पर निर्णय लेना होगा कि उन्हें परिवार और करियर दोनों ही चाहिए.
  • इस सकारात्मक सोच के साथ यदि वो आगे बढ़ेंगी, तो यक़ीनन दोनों के बीच सामंजस्य बेहतर तरी़के से बैठा पाएंगी.
  • अपने हक़ के लिए और सही बात के लिए उन्हें बोलना होगा और बोलने का सबसे सही व़क्त शादी से पहले ही है.
  • शादी से पहले ही उन्हें अपनी राय साफ़ करनी होगी और उन्हें ख़ुद भी यह तय करना होगा कि वो क्या चाहती हैं.
  • आख़िर उन्हें भी अपनी ज़िंदगी व अपने करियर से जुड़े फैसले लेने का पूरा-पूरा हक़ है, तो स़िर्फ त्याग या बलिदान जैसे शब्दों का बोझ वो अकेले ही क्यों ढोएं.
  • बेहतर होगा अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर को जांचें, परखें और समझदारी से काम लें, क्योंकि एक समझदार लाइफ पार्टनर के साथ ही बेहतर ज़िंदगी और बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद होंगी.

 

– विजयलक्ष्मी

पहला अफेयर: आवाज़ की दुल्हन (Pahla Affair: Awaaz Ki Dulhan)

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पहला अफेयर: आवाज़ की दुल्हन (Pahla Affair: Awaaz Ki Dulhan)

“उर्दू में ग़ज़ल सीखने के लिए कुछ क़िताबों से देखनी, पढ़नी-समझनी होगी. ज़रा अपना नाम बताएं.” मुझे लगा जैसे उसने मेरी पूरी शख़्सियत को उछाला है. बस ज़रा-सी हिली कि मेरी दुनिया कांधों पर से लुढ़क ज़र्रा-ज़र्रा हो जाएगी. “जी, चांदनी है.” पापा से मालूमात हुई- सलीम नाम से जाने जाते हैं. चुनांचे उर्दू के उस्ताद हैं और उर्दू उनकी ज़ुबान पर फिसलती रहती है.

छह माह तक मैं उर्दू की चट्टानों पर सिर पटकती रही, तब कहीं जाकर कुछ पल्ले पड़ा. उनकी पहली ग़ज़ल का मतला था-एक ग़लती कर गया, आ गया तेेरे शहर मेंकट चुके पेड़ थे, बस शोर था तेरे शहर मेंयह ग़ज़ल मुझे बड़ी अटपटी-छटपटी-सी लगी. पेड़ों का कटना फिर शोर! जिस इलाके में मैं रहती हूं, वहां क्या कम शोरगुल होता है? बच्चों की चिल्ल-पों, बुज़ुर्गों की खों-खों.अब सलीम मियां ने एक कव्वाली भी सीखने की हिदायत दी. जैसे मुझे कव्वाल बनना हो. अलबत्ता कव्वाल का तख़ल्लुस (उपनाम) जोड़ा. जब वे कोई ग़ज़ल गुनगुनाते, उनकी पुरसोज़ आवाज़ कमरे में थिरकने लगती.

धीरे-धीरे उनकी आवाज़ का जादू, मेरे सिर चढ़ बोलने लगा और मैं उनकी आवाज़ की दुल्हन बन चली. यह जानते हुए भी कि 23 की उम्र पार करने के बाद मेरे लिए रिश्तों का तांता ज़ारी है.उस आवाज़ में ऐसी कशिश थी कि मैं मीलों दूर तक बंधी चली गई. कभी-कभी लगता यह एक ख़ुशनुमा ख़्वाब है. ख़ुदा से बस यही दुआ मांगती कि यह ख़्वाब बिखरने न पाए.

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उस दिन जब मैंने अपने मामाजी को उनकी लिखी ग़ज़ल गाकर सुनाई-बंद क़िताबें खोलो तुम, खुलकर मेरे हो लो तुमउड़ना हम सिखला देंगे, पर अपने भी खोलो तुम…मामाजी ने मेरी आंखों में उनके लिए जो प्रशंसा के भाव थे को पढ़ लिया. “माशा अल्लाह! यह ग़ज़ल आप पर ही लिखी गई है.” मैं शर्म से पानी-पानी हो गई.बस! फिर क्या था. मास्टरजी का हमारे यहां आना कम और मेरा दूल्हा ढूंढ़ने की मुहीम तेज़ हुई.

अब समझ में आया कि क्यों मियां ग़ालिब इतनी ग़मज़दा ग़ज़लें कहते थे-ये न थी हमारी क़िस्मत कि वसल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतज़ार होताइसी ग़म में घुट-घुट हमने भी कुछ ग़ज़लें लिख मारीं. हमें लगता कि हर मौत इतनी क़ातिलाना क्यों होती है कि छाती पीट-पीट रोने का अंदाज़ तक बदल जाता है.

मैं भटकी चिड़िया-सी फ़िज़ाओं में कुछ ढूंढ़ने चल पड़ी!मेरी तड़प व रुलाई पर क़िस्मत को ज़रा भी तरस न आया. आनन-फानन में मां व मामाजी ने मिल मेरे लिए एक महंगा और टिकाऊ दूल्हा तलाश लिया. वाह रे, क़िस्मत के मदारी! नाक में नकेल डाल, नचाने का इतना ही शौक़ था तो मुझे ही क्यों बलि का बकरा बनाया?बस! मैंने सलीम को अपने ङ्गपहले प्यारफ के इज़हार में ख़त लिखा. शायद वो मेरा पहला और आख़िरी ख़त था-

मेरे अज़ीज़ दोस्त!आपकी सोहबत में जितनी कटी, अच्छी कटी. बाकी भी कट जाएगी. आपसे कट कर भी, यह पर कटी चिड़िया, उड़ने की कोशिश करेगी! नहीं जानती! कोशिशें सदा क़ामयाब होती हैं. ख़ुदा हाफिज़!आपकी मुरीद  चांदउनके ग़ज़ल के अल्फाज़ आज भी मेरे दिल में ख़लिश पैदा कर देते हैं-उड़ना हम सिखला देंगे, पर अपने भी खोलो तुम…

– मीरा हिंगोरानी

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7 स्मार्ट ट्रिक्स से सुपरचार्ज करें अपनी सेक्स लाइफ (7 Smart Tricks To Supercharge Your Sex Life)

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कभी ऑफिस का वर्कलोड, तो कभी घर की टेंशन और समय की कमी के चलते कपल्स की सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है. यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो धीरे-धीरे उनके रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं. यदि आप अपने प्यार भरे पलों को हमेशा तरोताज़ा बनाए रखना चाहते हैं, तो आज़माइए ये तरी़के.

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1. तनाव को करें टाटा

तनाव न स़िर्फ आपकी सेहत और सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि ये सेक्स लाइफ का भी दुश्मन है. तनाव में रहने पर कोई भी इंसान रोमांटिक नहीं हो सकता और जब रोमांस ही नहीं रहेगा, तो नज़दीकियां कैसे बढ़ेंगी. आज की लाइफस्टाइल में तनाव से पूरी तरह बचा तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ आसान तरक़ीब, जैसे- योगा व मेडिटेशन के ज़रिए आप उससे दूर रह सकते हैं. अंतरंग पलों का रोमांच बनाए रखने के लिए बेडरूम में स्ट्रेस की नो एंट्री ज़रूरी है.

2. जादू की झप्पी

आप कितने भी थके क्यों न हों यदि बेडरूम में जाते ही पार्टनर आपको प्यार भरी जादू की झप्पी दे, तो आपकी थकान पल भर में छूमंतर हो जाती है और आपका मूड भी रोमांटिक हो जाता है. दरअसल, प्यार भरे स्पर्श से ऑक्सिटोसिन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं. ऐसे में पार्टनर से आपकी क़रीबी बढ़ती है.

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3. बहकी-बहकी बातें

बेडरूम में जाने के बाद न तो उनसे किचन की बातें डिस्कस करें और न ही ऑफिस की. उस व़क्त स़िर्फ आप दोनों अपने बारे में बात करें. अपनी कुछ पुरानी यादें ताज़ा करें. पहली मुलाक़ात व शादी से जुड़ी दिलचस्प बातें शेयर करें. उस व़क्त साथ बिताए अच्छे पलों की ही बात करें. बुरे अनुभवों को भूल जाएं. इससे आप दोनों अच्छा महसूस करेंगे और एक-दूसरे के क़रीब आएंगे.

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4. बेवजह करें फोन

शादी के शुरुआती कुछ महीनों तक तो पति-पत्नी दोनों को फोन पर बातें करना अच्छा लगता है, मगर साल बीतते-बीतते कुछ काम होने पर ही पार्टनर को फोन करते हैं. आप ऐसी ग़लती न करें, कभी-कभार यूं ही बेवजह उन्हें फोन मिला लें और रोमांटिक बातें करें. यदि ये आपको अटपटा लगे, तो कुछ ऐसी बात करें जो आप अपने रिश्ते की शुरुआत में किया करते थे. पार्टनर के लिए यदि कुछ स्पेशल प्लान बनाया है, तो फोन करके उन्हें हिंट दे दें. इससे वो बेताबी से शाम को आपसे मिलने का इंतज़ार करते रहेंगे, ये सोचकर कि आख़िर आप उन्हें क्या सरप्राइज़ देने वाले हैं.

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5. करें रोमांटिक डिनर प्लान

आजकल ज़्यादातर कपल्स वर्किंग हैं, जिसके कारण उन्हें एकसाथ समय बिताने का मौक़ा कम ही मिलता है. ऐसे में यदि कभी आप ऑफिस से जल्दी आ जाएं, तो घर पर ही कैंडल लाइट डिनर का अरेंजमेंट करें. ज़रूरी नहीं कि आप पूरा खाना बनाएं, कोई एक या दो उनकी पसंद की डिश बनाएं और बाहर से खाना ऑर्डर करके रोमांटिक अंदाज़ में डिनर टेबल अरेंज करें. जब पार्टनर आए, तो सेक्सी डे्रस पहनकर उनका स्वागत करें, यक़ीन मानिए, आपकी इस अदा पर वो फिदा हो जाएंगे.

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6. लाइट डिनर करें

अक्सर लोग दिनभर बाहर रहने के कारण रात को घर आकर जमकर खाते हैं, मगर आप ऐसी ग़लती न करें, रात का डिनर हमेशा लाइट ही होना चाहिए. रात को हैवी डिनर करने से आपको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाएगी और आप पार्टनर के साथ प्यार भरे पलों का आनंद नहीं ले पाएंगे. बेहतर होगा कि सोने से एक-डेढ़ घंटे पहले ही डिनर कर लें. इससे बेड पर जाते ही आपको नींद नहीं आएगी.

7. बेडरूम को दें रोमांटिक टच

यदि आपके पास थोड़ा टाइम है, तो अपने बोरिंग-से बेडरूम के इंटीरियर में मामूली बदलाव करके उसे रोमांटिक टच दीजिए, जैसे- ख़ूबसूरत सैटिन की बेडशीट बिछाएं, हो सके तो फ्रेश फ्लावर रखें. बेडरूम की लाइट को डिम करें और पार्टनर के आने से पहले ही कोई रोमांटिक म्यूज़िक ऑन कर दें. फिर देखिए, इस रोमांटिक माहौल का कैसा जादुई असर होता है. यदि पार्टनर बहुत थका हुआ नज़र आ रहा है, तो मसाज से उसकी थकान दूर करके उसके दिल के क़रीब आ जाइए.

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September Born: पैशनेट लव पसंद करते हैं सितंबर में जन्मे लोग (What Does Your Birth Month Say About Your Love Life)

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  • पैशनेट होते हैं, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू रखना भी अच्छी तरह से जानते हैं.
  • प्यार दिखाने का अंदाज़ अलग ही होता है.
  • अकेले रहना पसंद नहीं करते. रिलेशनशिप में रह कर ही वे ख़ुश रहते हैं. ज़रूरी नहीं कि वो रिलेशनशिप लव अफेयर ही हो. परिवार के बीच रहना उन्हें पसंद होता है.

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  • ये पैशनेट ज़रूर होते हैं, लेकिन जब बात सेक्स की आती है, तो पार्टनर के साथ बिना इमोशनल कनेक्शन के ये परफॉर्म नहीं कर सकते हैं.
  • अपने पार्टनर से कुछ छिपाने या सीक्रेट्स रखने में विश्वास नहीं करते हैं.

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हेल्दी रिश्ते के लिए 7 हेल्दी हैबिट्स (7 Healthy Habits For Healthy Relationship)

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रिश्ते की अच्छी सेहत के लिए स़िर्फ प्यार, विश्‍वास, समर्पण और अंतरंगता ही काफ़ी नहीं, आपकी कुछ आदतें भी रिश्ते की सेहत सुधारने में कारगर साबित हो सकती हैं. यक़ीन नहीं होता, तो आज़माकर देख लीजिए. हेल्दी रिश्ते के लिए कौन-सी आदतें अपनाना है ज़रूरी? आइए, जानते हैं.

 

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आज के दौर में जब शादीशुदा रिश्ते चट मंगनी पट ब्याह वाली कहावत के इतर चट ब्याह पट डिवोर्स की राह पर चल पड़े हैं, ऐसे में रिश्तों की सलामती और मज़बूती के लिए सबसे ज़रूरी है कपल्स का एक साथ समय बिताना, मगर पति-पत्नी दोनों के वर्किंग होने की वजह से अधिकांश कपल्स के पास एक-दूसरे के लिए वीकेंड के अलावा और कभी समय ही नहीं रहता. ये समय की कमी रिश्तों की कड़ी को कमज़ोर बना रही है. ऐसे में ज़रूरी है कि कपल्स थोड़ी स्मार्टनेस दिखाकर एक-दूसरे के साथ ज़्यादा समय बिताने के अन्य विकल्प तलाशें. व़क्त के हिसाब से ख़ुद में थोड़ा बदलाव करके और कुछ आदतों को अपनाकर आप अपने रिश्ते की डोर को कमज़ोर होने से बचा सकते हैं.

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1. साथ करें सुबह की सैर

पूरे दिन तो आपको साथ रहने का समय नहीं मिलने वाला, तो क्यों न सुबह की शुरुआत साथ-साथ करें. माना सुबह उठने के बाद आपके पास ढेरों काम रहते हैं, लेकिन आप यदि सुबह थोड़ा जल्दी उठें और पार्टनर के साथ मॉर्निंग वॉक पर जाएं, तो सुबह की ताज़ी हवा में की गई कुछ देर की चहलक़दमी आपको पूरे दिन फ्रेश रखेगी. सुबह की सैर से जहां सेहत दुरुस्त रहेगी, वहीं मूड फ्रेश रहने से आप अपना काम भी मन लगाकर करेंगी और सुबह-सुबह पार्टनर के साथ बिताए ये कुछ पल आप दोनों को एक-दूसरे के क़रीब लाएंगे.

2. साथ खाना बनाने का है अपना मज़ा

वर्किंग कपल्स दिन में तो अपने-अपने काम में व्यस्त रहने के कारण साथ खाना नहीं खा पाते और रात में भी थके होने की वजह से अक्सर होटल में खा लेते हैं या फिर घर पर ही पार्सल मंगवा लेते हैं. आप ऐसी ग़लती न करें, क्योंकि घर का बना खाना न स़िर्फ सेहत, बल्कि आपके रिश्ते के लिए भी हेल्दी होता है. ऑफिस से आने के बाद दोनों पार्टनर यदि साथ मिलकर खाना बनाते हैं, तो इससे न स़िर्फ एक पार्टनर का बोझ हल्का हो जाता है, बल्कि खाने का स्वाद और रिश्ते की सेहत दोनों अच्छी हो जाती है. यक़ीन न हो, तो इस नुस्ख़े को आज़माकर देख लीजिए.

3. मिलकर करें प्लानिंग

बात चाहे हॉलिडे प्लान करने की हो, फायनांशियल प्लानिंग या फिर लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ख़ुद में बदलाव लाने की, अकेले ये सब करने की बजाय इसमें हमसफ़र को भी शामिल करें. साथ मिलकर प्लानिंग करने से पार्टनर को भी अच्छा महसूस होगा कि आप उन्हें अहमियत देेते हैं और आप दोनों ज़्यादा व़क्त साथ बिता पाएंगे. छुट्टियों आदि की प्लानिंग साथ मिलकर करने से दोनों एक-दूसरे को अपने आइडियाज़ बता सकते हैं, जिससे छुट्टियां मज़ेदार बन सकती हैं.

4. न छुपाएं दिल की बात

यदि आप अपने रिश्ते में किसी बात को लेकर बहुत परेशान हैं या आपको किसी चीज़ की कमी महसूस हो रही है, तो बिना किसी झिझक के पार्टनर से इस बारे में बात करें. अपने रिश्ते की भलाई के लिए हमसफ़र से बात करने में कोई बुराई नहीं है. आपकी समस्या जानने के बाद ही तो वो उसे हल करने के बारे में सोचेंगे. यदि आप कहेंगे ही नहीं, तो पार्टनर को पता कैसे चलेगा. हां, एक बात का ध्यान रखें कि बात करने का ये मतलब कतई नहीं है कि आप हमेशा उनसे हर बात के लिए शिकायत करने लगें.

5. बेड पर साथ जाएं 

आपकी पत्नी रात में डिनर के बाद यदि किचन का काम समेटती रहती है और आप बेडरूम में आराम फरमाते हैं, तो अपनी ये आदत बदल लीजिए. यदि आप किचन में उनकी मदद नहीं कर रहे हैं, तो भी सोने की बजाय अपना कुछ और काम कर लीजिए और पत्नी का काम ख़त्म होने पर साथ ही बिस्तर पर जाएं. ऐसा करने पर उन्हें भी अच्छा लगेगा और आपके रिश्ते की ताज़गी भी बनी रहेगी.

 

 6. कमरे को रखें साफ़-सुथरा

क्या कभी आपने महसूस किया है कि किसी गंदी जगह जाने पर आपको बुरा महसूस होता है और ख़ूबसूरत, साफ़-सुथरी जगह/घर में आने पर आपको सुकून और ख़ुशी का अनुभव होता है. दरअसल, गंदा और अस्त-व्यस्त कमरा न स़िर्फ स्ट्रेस बढ़ाता है, बल्कि इससे निगेटिव एनर्जी निकलती है, जो सेहत और रिश्ते दोनों के लिए अच्छी नहीं है. इसके विपरीत यदि कमरा साफ़-सुथरा व व्यवस्थित है, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आपको मानसिक शांति मिलेगी. ज़ाहिर है, जब आप रिलैक्स और अच्छा महसूस करेंगे, तो पार्टनर के साथ रिश्ता भी बेहतर बनेगा.

 

7. मैं सही हूं, तुम ग़लत

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो किसी भी क़ीमत पर झुकने को तैयार नहीं होते. कई बार ख़ुद को सही साबित करने के लिए वो पार्टनर की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से भी पीछे नहीं हटते, मगर वो ये भूल जाते हैं कि भले ही बहस करके पार्टनर से जीत जाएं और ख़ुद को सही साबित कर दें, लेकिन असल में तो ये उनकी हार ही है, क्योंकि उन्होंने हमसफ़र का दिल तोड़ा. अतः बेहतर होगा कि कुछ चीज़ों को यूं ही छोड़ दिया जाए, बजाय उन्हें लेकर सही/ग़लत पर बहस करने के, क्योंकि रिश्ते में सही और ग़लत देखने की बजाय भावनाएं ज़्यादा अहमियत रखती हैं.

फैक्ट फाइल

– शिकागो यूनिवर्सिटी द्वारा किए एक अध्ययन के मुताबिक़, यदि एक पार्टनर बहुत ज़्यादा सकारात्मक है, तो ऐसे कपल्स के बीच टकराव अन्य कपल्स की अपेक्षा बहुत कम होता है.

– एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ज़्यादातर कपल्स के बीच मनमुटाव व झगड़े की सबसे बड़ी वजह पैसा और संवादहीनता होती है.

– कई सर्वे में ये बात साबित हुई है कि जो कपल्स शादी के रिश्ते के साथ ही अपने दोस्तों के साथ रिश्ता निभाते हैं और अपनी हॉबी के लिए समय निकालते हैं, वो उन कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं जिनकी लाइफ स़िर्फ पार्टनर के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

– अध्ययन बताते हैं कि अपनी ज़िंदगी में नई चीज़ें ट्राई करने वाले कपल्स दूसरे कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं.

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क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं? (How Hormones Influence Love And Relationships)

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ये रूह के रिश्ते क्यों स़िर्फ जिस्म तक ही सिमटते जा रहे हैं… और जिस्म से होते हुए सिसक-सिसक कर दम तोड़ते जा रहे हैं… दूरियां जो आ रही हैं दरमियान, मन का पंछी ढूंढ़ने लगा है एक नया आशियान… लेकिन मुहब्बत जो कभी हममें-तुममें थी… अब भी कह रही है कि बचे हैं उसके कुछ तो नामो-निशान… न कुसूर तुम्हारा था, न ख़ता हमारी थी… बस व़क्त के सितम हमें तन्हा करते चले गए… और क़रीब आने की हसरत में हम दूर होते चले गए…

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जी हां, यह बात सच है कि मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रूहानी रिश्तों को जिस्मानी बना दिया है. भावनाओं की जगह ज़रूरतों ने ले ली है और सपनों की जगह कठोर हक़ीक़तों ने अपना डेरा जमा लिया. यही वजह है कि सब कुछ बदल रहा है. हम बदल रहे हैं… हमारा खान-पान बदल रहा है… दिनचर्या बदल रही है… और इसका सीधा प्रभाव हमारी सेहत और हमारे रिश्तों की सेहत पर पड़ रहा है.
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारी तमाम गतिविधियों को हर्मोंस ही प्रभावित करते हैं. ऐसे में उनमें होनेवाले बदलाव हम में भी बहुत कुछ बदल देते हैं. हार्मोंस में यह बदलाव काफ़ी हद तक हमारी लाइफस्टाइल व डायट पर भी निर्भर करता है. यही वजह है कि आजकल तेज़ी से हमारा मूड और हमारे रिश्ते बदल रहे हैं, क्योंकि हर्मोंस बदल रहे हैं.

शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि आज के दौर में हम और ख़ासतौर से महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक हार्मोनल बदलाव से गुज़रती हैं. लेकिन अब यह बात भी लोग मानने लगे हैं कि हार्मोंस में होनेवाले यह बदलाव हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करने लगे हैं.

हार्मोंस और मूड

हार्मोंस के बदलाव से बहुत कुछ बदलता है- हमारा मूड हो या शरीर में कोई परिवर्तन, हार्मोंस की उसमें अहम् भूमिका होती है.
बदलते हार्मोंस से बदलते हैं रिश्ते: जब कभी भी शरीर में हार्मोंस का असंतुलन होता है, आपकी सेक्स की इच्छा कम हो जाती है और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं. ये दोनों ही चीज़ें रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर बनाए रखने के लिए प्रोजेस्टेरॉन और इस्ट्रोजेन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. लेकिन अधिकांश महिलाओं में इस्ट्रोजन की अधिकता होती है, जिससे सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

प्रोजेस्टेरॉन शांत हार्मोन होता है, जो महिलाओं की सेक्सुअल हेल्थ व सामान्य सेहत को भी बेहतर बनाता है. इसी तरह से इस्ट्रोजेन का स्तर भी यदि सही व संतुलित रहेगा, तो सेक्स की इच्छा बढ़ेगी और सेक्स लाइफ बेहतर होगी. सेक्स लाइफ और रिलेशनशिप का बहुत गहरा संबंध होता है, यदि आपकी सेक्स लाइफ अच्छी है, तो आपका रिश्ता और बेहतर बनेगा और यदि सेक्स लाइफ सामान्य नहीं, तो रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ़तौर पर नज़र आएगा. यही वजह है कि हार्मोंस का संतुलन आपके रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी है.

सेल्फ इमेज पर प्रभाव: अगर अपने शरीर में कुछ परिवर्तन महसूस कर रहे हैं, तो इसका संबंध हार्मोंस से हो सकता है. हर्मोंस के असंतुलन से वज़न बढ़ना, थकान रहना, अचानक तेज़ गर्मी लगकर पसीना आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. ये तमाम शारीरिक समस्याएं आपके ख़ुद को देखने के नज़रिए पर असर डालती हैं और इससे आपका रिश्ता भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.
प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टॉसटेरॉन और इस्ट्रोजेन- इन तीनों हार्मोंस के असंतुलन का आपके मूड पर और सेल्फ एस्टीम (आत्मसम्मान) पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है.
इन हार्मोंस को संतुलित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने बारे में अच्छा महसूस करें और यही सकारात्मक भाव आपके रिश्ते को भी सकारात्मक रखेगा.

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आपके स्वभाव और व्यवहार भी होते हैं प्रभावित: इस्ट्रोजेन का बढ़ता स्तर आपको चिड़चिड़ा बना सकता है. साथ ही आपको अनिद्रा और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं भी दे सकता है. वहीं प्रोजेस्टेरॉन का घटता स्तर आपको स्वाभाव से चिंतित बना सकता है. ऐसे में यदि आप अपने स्वभाव को नियंत्रित नहीं कर पाते, तो दूसरों की नज़रों में आपकी इमेज प्रभावित हो सकती है. आपका पार्टनर भी आपको ग़लत समझ सकता है और आपके रिश्ते पर इसका बुरा असर हो सकता है.
प्रोजेस्टेरॉन के स्तर का सामान्य बनाए रखकर इस्ट्रोजेन के असर को कम किया जा सकता है, जिससे आपके स्वभाव व व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

आपके दोस्तों व रिश्तेदारों पर भी असर हो सकता है: हर किसी की चाहत होती है कि अपने दोस्तों व क़रीबी लोगों के साथ वो अच्छा व़क्त गुज़ारे, लेकिन आपके हार्मोंस आपको बेवजह को स्ट्रेस देकर आपसे यह अच्छा व़क्त छीन सकते हैं.
किसी भी हार्मोंस के स्तर का बेहद बढ़ना या एकदम कम होना आपके स्वभाव में निराशा, चिड़चिड़ापन, चिंता, अवसाद जैसे नकारात्मक भाव को जन्म दे सकता है. इसके अलावा वज़न बढ़ना या नींद न आना जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं. जिससे आपकी ख़ुशियां बहुत हद तक प्रभावित हो सकती हैं.

क्या करें?

– जब कभी भी आप ख़ुद में इस तरह के बदलाव देखें और जब ये चीज़ें आपके व्यवहार व रिश्तों पर असर डालने लगें, तो फ़ौरन एक्सपर्ट की मदद लें. ऐसा करके आप ख़ुद को भी ख़ुश रख सकते हैं और अपने रिश्तों को भी बचा सकते हैं.
– पीरियड्स से पहले व बाद में महिलाओं के हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं, यही वजह है कि उनका मूड इस दौरान काफ़ी बदलता रहता है, ऐसे में अन्य लोगों को थोड़ी समझदारी दिखानी चाहिए, ताकि इसका असर उनके रिश्ते पर न पड़े.
– हेल्दी डायट लें, क्योंकि अनहेल्दी लाइफस्टाइल से हर्मोंस असंतुलित होते हैं. चाय, कॉफी, अल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड जितना हो सके कम लें. इनकी जगह गाजर, ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, फ्लैक्ससीड, ग्रीन टी, ड्राइ फ्रूट्स, ओट्स, दही, फ्रेश फ्रूट्स, हरी सब्ज़ियां, अदरक, लहसुन आदि अपने डायट में शामिल करें. यह तमाम चीज़ें शरीर को डिटॉक्सिफाइ करके हार्मोंस को संतुलित करती हैं.
– डार्क चॉकलेट्स भी मूड को बेहतर बनाकर डिप्रेशन दूर करता है.
– वेजीटेबल ऑयल्स की जगह ऑलिव ऑयल व कोकोनट ऑयल को शामिल करें.
– लाइट एक्सरसाइज़, योग व प्राणायाम से हार्मोंस संतुलित होते हैं.

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हार्मोंस और बिहेवियर

हार्मोंस एंड बिहेवियर के नाम से हुए एक विस्तृत अध्ययन में यह पाया गया है कि किस तरह से महिलाओं के हार्मोंस, उनका अपने पार्टनर को देखने का नज़रिया और उनके रिश्ते में मज़बूत संबंध है.
दरअसल इन सबका संबंध महिलाओं के मासिक धर्म से है. अगर कोई महिला अपने पार्टनर को हॉट समझती है, तो जब उसका पीरियड क़रीब होता है, तो वो अधिक ख़ुश रहती है और अपने पार्टनर के और क़रीब आती है. जबकि यदि महिला अपने पार्टनर को बहुत हॉट नहीं समझती, तो ऑव्युलेशन के समय वो उसकी अधिक निंदा करने लगती है और उससे दूरी बनाए रखती है.

हैप्पी हार्मोंस

मात्र सेक्स ही वो शारीरिक क्रिया नहीं है, जो आपके तनाव को कम करके आपको हेल्दी रख सकती है. जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि गले मिलने के बाद महिलाओं और पुरुषों में ऑक्सिटोसिन का स्तर अधिक पाया गया और कार्टिसोल का स्तर कम पाया गया.
दरअसल, ऑक्सिटोसिन वो हार्मोन है, जो तनाव कम करके मूड को बेहतर बनाता है, जबकि कार्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है. ऐसे में नतीजा यह निकला कि हाथ पकड़ना, प्यार से छूना, दुलार करना आदि केयरिंग बिहेवियर भी आपको
तनावमुक्त रखककर हेल्दी बना सकता है.

– गीता शर्मा

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पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना (Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana)

पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना

पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना

पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना (Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana) 

मैं ज़िद्दी, बेपरवाह, अल्हड़-सा था. रोज़ पापा कहते हैं सुबह जल्दी शोरूम पहुंच जाना और मैं हूं कि हर रोज़ लेट होता हूं.
“राज, कहां हो तुम? बहुत हो गया गाना-बजाना, कब ज़िम्मेदार होगा ये लड़का.”
हमेशा की तरह मां ने मुझे पीछे के दरवाज़े से भगा दिया और मैं बाइक लेकर सीधे अपने दोस्त विक्की के पास पहुंच गया.

“राज, एक गुड न्यूज़ है. वो शर्मा अंकल के कैफेटेरिया की एक ब्रांच अपने कॉलेज के पास खुली है, उन्होंने सामने से ऑफर दिया है. शाम को उनसे मिलने जाना है.” मुझे शर्मा अंकल के कैफेटेरिया को संभालने का काम मिल गया था, मम्मी-पापा भी बेहद ख़ुश हुए.
अगली सुबह कैफेटेरिया पहुंचा, तो सब कुछ किसी कॉफी हाउस जैसा ही था, लेकिन वहां एक छोटी-सी लाइब्रेरी भी थी, जो उसे दूसरे कॉफी हाउस से अलग बना रही थी.

अक्टूबर महीने की गुलाबी शाम वैसे ही रोमांटिक होती है, उस पर मैं एक रोमांटिक गाना गा रहा था. मेरे गाने की धुन ने सबको मदहोश कर दिया था, लेकिन कोई एक था, जिस पर मेरी मधुर आवाज़ का कोई असर ही नहीं हो रहा था. वो लड़की अपनी किताब पढ़ने में ही बिज़ी थी, बीच-बीच में डायरी में भी कुछ लिखती. उसे देखकर मैं चौंक गया, अरे! ये तो वही है… हां वही तो है, जिसके साथ मैं बस में ट्रैवल करता था, इसे देखने के चक्कर में ही तो मैं बाइक को घर पर छोड़कर बस में जाता था. मैं तब 12वीं का स्टूडेंट था. कभी उससे बात नहीं की थी, लेकिन कहीं न कहीं उसकी ख़ामोशी मेरे दिल को छू जाती थी. लेकिन आज उसकी ख़ामोशी मुझे अच्छी नहीं लगी. शायद उसकी संगीत की समझ मुझसे अच्छी हो, यही सोचकर मैंने अपना रियाज़ और बढ़ा दिया.

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मेरे गाने का जादू सब पर सिर चढ़कर बोलने लगा, लेकिन जिसे इंप्रेस करना चाहता था, बस उस पर ही कोई असर न हुआ. वो मेरी तरफ़ देखती तक नहीं थी.

एक दिन घर जाते समय देखा सड़क पर भीड़ जमा है. पास जाकर देखा, तो वो लड़की खून से लथपथ थी, कोई गाड़ी टक्कर मारकर निकल गई थी. मैंने उसे अस्पताल पहुंचाया. उसके घरवालों को भी ख़बर कर दी. उसका नाम पलक था, जिसे मैं अपलक देखता रह जाता था. अगले दिन मैं उसे देखने पहुंचा, उसके घरवालों ने मुझे धन्यवाद कहा, लेकिन उसकी बेरूख़ी ने मेरी जान ले ली, उसने मुझे थैंक्स तक नहीं कहा. उसके बाद मैं कभी अस्पताल नहीं गया.

वो ठीक होकर कैफेटेरिया आई, तो मैंने देखा उसका एक दोस्त उससे साइन लैंग्वेज में बात कर रहा है. पहली बार पलक को किताबों के बाहर किसी से बात करते देखा, लेकिन वो भी उसी साइन लैंग्वेज में उससे बात कर रही थी. मुझे समझते देर न लगी कि जिसे मैं उसकी बेरूख़ी और घमंड समझ रहा था, वह उसकी मजबूरी थी. वो न सुन सकती थी, न बोल सकती थी.

मेरे दिल का हाल जानकर विक्की ने मेरा साथ दिया और उसकी मदद से मैंने साइन लैंग्वेज भी सीख ली. वैलेंटाइन डे आया और उस रूमानी माहौल में मैंने साइन लैंग्वेज की मदद से अपने दिल की बात गुनगुनाते हुए पलक से कह दी. पलक ने भी इशारा किया कि मैं बहुत अच्छा गाता हूं. जैसे-जैसे मैं गाता गया, उसकी आंखें भीगती गईं. कुछ देर बाद वो आंसू पोंछते हुए बाहर जाने लगी कि तभी उसकी डायरी नीचे गिर गई, मैंने वो डायरी उठाई, उसमें लिखा हर लफ़्ज़ उसके प्यार की गवाही दे रहा था. हर पन्ना जज़्बात से भरा था. मैंने पलक से कुछ कहना चाहा, मगर पानी में तैरते रह गए मेरे अनबोले शब्द, जो हमारे होंठों तक का सफ़र तय नहीं कर पा रहे थे. जहां शब्दों की सीमाएं ख़त्म हो जाती हैं, वहां रह जाता है स़िर्फ एहसास! हम दोनों के बीच अनायास ऐसा लम्हा आ गया था, जब पूरी ताक़त के बावजूद भी शब्दों को आकार नहीं मिल पा रहा था. इस ख़ूबसूरत एहसास का हर लम्हा हम अपने अंदर समेटना चाह रहे थे.

– नीतू मुकुल

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रिचा चड्ढा और अली फजल कर रहे हैं एक-दूसरे को डेट? (Richa chadha And Ali Fazal Confirms Their Relationship?)

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रिचा चड्ढा और अली फजल की दोस्ती क्या प्यार में बदल गई है? लगता तो कुछ ऐसा ही है, क्योंकि दोनों की ये तस्वीरें कुछ यही बयां कर रही है. रिचा और अली ने फिल्म फुकरे में साथ काम किया था और जल्द ही दोनों फुकरे रिटर्न्स में भी नज़र आने वाले हैं. लेकिन जिन तस्वीरों की हम बात कर रहे हैं, वो इस फिल्म के सेट की नहीं है, बल्कि वेनिस की हैं, जहां अली की फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल के वर्ल्ड प्रीमियर पर अली का साथ देने पहुंची रिचा.

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रिचा ने अली के साथ सेल्फी शेयर करते हुए लिखा, ‘इससे ज्यादा प्राउड की बात नहीं हो सकती कि तुमने सब ख़ुद से किया है! फिल्म में भी शानदार और शानदार फिल्म.’

अली भी रिचा की फिल्म जिया और जिया का प्रमोशन करते रहते हैं.