थकते चांद का सफ़र अभी बाकी है
ढलती रात का एक पहर अभी बाकी है
यादों की लंबी होती गलियों में
दीदार का रहगुज़र अभी बाकी है
बेख़बर ख़ुद की पहचान तलाशने के लिए
उन आंखों का समंदर अभी बाकी है
गुज़री मुलाक़ातों के नाम शामें मेरी
उन आहटों का सहर अभी बाकी है
हवाओं में घुली भटकती उम्मीदों की
मेरी मंज़िल, तुम्हारा दर अभी बाकी है
मुलाक़ात की बढ़ती प्यास में सुलगती
मेरी सांसें हमसफ़र अभी बाकी है…
– इला झा

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Photo Courtesy: Freepik
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