Geet / Gazal

ग़ज़ल (Shayari: Gazal)

दग़ाबाज़ दुनिया हसीं दिख रही है बता साकिया तूने क्या दे दिया है दराज़-ए-उमर की दुआ देने वालों न दो ...

काव्य- कसक (Kavay- Kasak)

बिखरते ख़्वाबों को देखा सिसकते जज़्बातों को देखा रूठती हुई ख़ुशियां देखीं, बंद पलकों से, टूटते ...

काव्य- सावन से पहले चले आना… (Kavay- Sawan Se Pahle Chale Aana…)

सुनो ना… सावन से पहले चले आना बड़ा तरसी है आरज़ू तेरी ख़ातिर इस बरस खुल के बरस जाना मद्धिम हवा को ...

काव्य- क्यों है? (Kavay- Kyon Hai?

किसी की ज़िंदगी इतनी आसान तो किसी की इतनी मुश्किल क्यों है? किसी के पास सब कुछ है तो कोई कंगाल ...

ग़ज़ल- जब भी मैंने देखा है… (Gazal- Jab Bhi Maine Dekha Hai…)

जब भी मैंने देखा है दिलदार तुम्हारी आंखों में चाहत का इक़रार मिला हर बार तुम्हारी आंखों में   ...

काव्य- कौन कहता है… (Kavay- Kaun Kahta Hai…)

  कौन कहता है अकेले ज़िंदगी नहीं गुज़रती मैंने चांद को तन्हा देखा है सितारों के बीच में   कौन ...

ग़ज़ल- मेरे होंठों के तबस्सुम कहीं गुम हो गए हैं (Gazal- Mere Honthon Ke Tabassum Kahin Gum Ho Gaye Hain…)

  मेरे होंठों के तबस्सुम कहीं गुम हो गए हैं जब से सुना है ग़ैर के वो हो गए हैं मेरे अरमानों को ना ...

काव्य- तुम सम्हालो ख़ुद को… (Kavay- Tum Samhalo Khud Ko…)

बेटी तो होती है एक कली अगर खिलेगी वह नन्ही कली तो बनेगी एक दिन फूल वह कली चाहे हो वह बेटी किसी की ...

काव्य- स्त्री हूं… (Kavya- Stri Hoon…)

मैं पीतल नहीं सोना हूं और चमकूंगी सितम की आंधियां कितनी चला लोगे? स्त्री हूं दीया हिम्मत का ...

काव्य- मुझ पर एक किताब… (Kavay- Mujh Par Ek Kitab…)

लिख दे लिखनेवाले मुझ पर एक किताब संग बैठ आ किसी पहर दूं जीवन का हिसाब   अश्क दिखें ना किसी ...

काव्य- जीवन-मृत्यु (Kavay- Jeevan-Mrityu)

जीवन-मृत्यु अद्भुत प्रेमी मिल जाने को हैं ये आतुर जीवन जूझ रहा है पल-पल बढ़ा जा रहा है मिलने उससे ...

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