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लघुकथा- सुगंध (Short Story- Sugandh)

"क्षमा करो, ये फूल यहां से हटा दो और मेरी टोकरी,जिसमें मैं मछलियां लाई थी, उस पर ज़रा पानी छिड़क कर मेरे पास रख दो." मालिन ने कहा, "तू पागल हो गई है?"

एक मछली बेचने वाली महिला गांव से शहर मछली बेचने आई.

मछलियां बेच कर जब लौट रही थी तो अचानक बाज़ार में उसे बचपन की एक सहेली मिल गई, वह सहेली अब मालिन हो गई थी.

उस मालिन ने कहा, "आज रात मेरे घर रुको, कल सुबह होते ही चले जाना. कितने वर्षों बाद हम मिले हैं. हमें कितनी-कितनी बातें करनी हैं!"

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मछली बेचने वाली औरत मालिन के घर रुकी.

मालिन का घर बगिया से घिरा हुआ.

फिर पुरानी सहेली की मालिन ने ख़ूब दिल भर सेवा की और जब सोने का समय आया और मालिन सोने के पहले, वह बगिया में गई, जहां आकाश में चांद निकला था.

बगिया में बेले के फूल खिले थे.

उसने बेले के फूलों से झोली भर ली और बेलों का ढेर अपनी सहेली(उस मछली बेचने वाली औरत) के पास आकर लगा दिया, ताकि रात भर उसे बेलों की सुगंध आए.

लेकिन,थोड़ी देर बाद मालिन परेशान हुई, क्योंकि मछली बेचने वाली सहेली सो ही नहीं रही थी. बार-बार करवट बदल रही थी. तब उसने उससे पूछा कि,क्या नींद नहीं आ रही है?

उसने कहा, "क्षमा करो, ये फूल यहां से हटा दो और मेरी टोकरी,जिसमें मैं मछलियां लाई थी, उस पर ज़रा पानी छिड़क कर मेरे पास रख दो."

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मालिन ने कहा, "तू पागल हो गई है?"

उसने कहा; "मैं पागल नहीं हो गई. मैं तो एक ही सुगंध जानती हूं, मछलियों की, और बाकी सब मेरे लिए दुर्गंध है."

- अश्लेषा राहुरीकर

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Photi Courtesy: Freepik

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