एक्टर सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) टीवी सीरियल 'अनुपमा' (Anupama's Vanraj Sudhanshu Pandey) से घर-घर में मशहूर हुए. वनराज शाह का रोल निभाकर कर उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. करीब दो साल पहले सुधांशु ने इस शो को छोड़ दिया था. लेकिन फैन्स इन्हें आज भी इन्हें इस सीरियल में मिस करते हैं. उम्मीद करते हैं कि वो वापसी करेंगे, लेकिन उनकी वापसी की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं लग रही. वो जल्दी ही एक और बड़े शो में और वनराज से भी ज़्यादा दिलचस्प किरदार में नज़र आएंगे. हाल ही में वो मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में बतौर गेस्ट पहुँचे थे, जहां उन्होंने मेन्टल हेल्थ, डिप्रेशन, अनुपमा शो छोड़ने की वजह और पेरेंटिंग जैसे मुद्दों पर बेबाकी से बात की. उन्होंने पैपराजी कल्चर पर भी खुलकर अपनी राय दी. आपके अपने वनराज यानी सुधांशु पांडे का पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें.

जया बच्चन (Jaya Bachchan) के बाद अब सुधांशु पैपराजी (Sudhanshu Pandey on paparazzi) के एक तबके से नाराज़ नज़र आये. उनका कहना है कि पैप्स का एक वर्ग है जो सिर्फ गलत चीज़ें दिखा रहा है. "कुछ पैप्स न्यूडिटी दिखा रहे हैं या ऐसी चीज़ दिखा रहे हैं, जिससे उनके नम्बर्स बढ़ें. इस तरह के कल्चर को मैं बिल्कुल रिलेट नहीं करता."

सुधांशु ने माना कि पैपराजी एक्टर्स के लिए ज़रूरी हैं, उन्होंने कहा, "ये लोग भी मीडिया का ज़रूरी हिस्सा हैं. फैंस जानना चाहते हैं कि एक्टर्स क्या करते हैं, कहां जाते हैं, क्या पहनते हैं, उनकी लाइफ कैसी है और पैप्स ये सारी चीजें कैप्चर करके फैंस तक पहुंचाते हैं, जो कि अच्छी बात है, लेकिन जब लड़कियां जब शार्ट या रिवीलिंग ड्रेस पहन कर आती हैं, तो इन्हीं में से कुछ पैप्स के कैमरे इन लड़कियों के एक खास पार्ट पर ज़ूम होते हैं, उनके एसेट्स पर, चाहे वो उनका टॉप एरिया हो या बॉटम एरिया हो, इन पर जब ये ज़ूम इन करते हैं, तो मुझे लगता है ये सेक्सुअल हरेसमेंट है और इसे क्राइम की तरह देखना चाहिए. ये वही चीज़ है जो सड़कछाप लड़के करते थे, वो लड़कियों को घूरते थे और इस कदर घूरते थे कि लड़की अनकंफर्टेबल हो जाती थी और डरकर भाग जाती थी. ये वही कल्चर है, फर्क बस इतना है कि ये कैमरे के ज़रिए हो रहा है. बल्कि ये ज़्यादा डेंजरस है, क्योंकि इसे आप कैमरे में रिकॉर्ड करके लाखों-करोड़ो लोगों तक पहुंचा रहे हैं. तो इसको क्राइम की तरह लेना चाहिए. मेरा तो मानना है कि ऐसे लोगों को सीधे जेल में डाल देना चाहिए."

सुधांशु यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, "जर्नलिज़्म लोगों की आवाज़ है और एक्टर की आवाज़ लोगों तक पहुंचाने का जरिया भी है. लेकिन यही लोग जब एक्टर्स के पर्सनल स्पेस में जाने लगेंगे और लोगों की इज़्ज़त नीलाम करने लगेंगे, तो ये बहुत ही गलत ट्रेंड है. देखिए अगर आप ऑनस्क्रीन कहानी की डिमांड के अनुसार कोई लव मेकिंग सीन कर रहे हैं तो वो जस्टीफ़ाइड है, क्योंकि वहां आप परफॉर्म कर रहे हैं. आप एक किरदार को जी रहे हैं. लेकिन आजकल कुछ लड़कियां जो न तो एक्टर हैं, न कुछ, ये सो कॉल्ड इंफ्लुएंसर सिर्फ न्यूडिटी (Sudhanshu Pandey on nudity) को प्रमोट कर रही हैं. ये ऐसी चीज़ है जो बाकी लड़कियों के लिए डेंजर बनती जा रही है, क्योंकि जब ये वीडियोज़ आम जनता तक पहुंचता है तो उन्हें लगता है कि ऐसा दिखना ओके है. उनका मजाक बनाना ओके है. क्योंकि जब पैपराजी ये वीडियो बनाते हैं तो मज़ाक भी करते हैं, भद्दे कॉमेंट्स करते हैं. फ्लिर्टिंग करते हैं. लोगों को ये नार्मल लगने लगता है, तो वो और लड़कियों के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करने लगते हैं."

अपनी बात जारी रखते हुए सुधांशु पांडे ने कहा, "मुझे लगता है कि इसे सेंसर करना चाहिए, इसके लिए कोई कानून आना चाहिए, ताकि हम जर्नलिज़्म की डिग्निटी को मेंटेन रख सकें, एक्ट्रेस और आम लड़कियों की डिग्निटी को मेंटेन रख सकें. उन पर एक अंकुश लगा सकें कि ये तुम्हारा दायरा है और इस दायरे के बाहर तुम नहीं जा सकते. हम हिंदुस्तान में रहते हैं, यहां का एक कल्चर है, एक संस्कृति है. हम उस संस्कृति को प्रमोट करने की बजाय एक ऐसे कल्चर को प्रमोट कर रहे हैं, जो आनेवाली पीढ़ी को डैमेज कर रही है, उनकी मानसिकता को डैमेज कर रही है. उनकी मानसिकता को विकृत बना रही है, क्योंकि उन्हें लगने लगा है कि इट्स ओके, लेकिन ऐसा नहीं है."

मेरी सहेली पॉडकास्ट में सुधांशु ने और भी कई मुद्दों पर बात की. अपनी कामयाबी, फेलियर, मेंटल हेल्थ, पेरेंटिंग... के साथ ही अनुपमा छोड़ने के मुद्दे पर भी खुलकर बात की है. उन्हें सुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट ज़रूर देखें.
