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कहानी- सबसे बड़ा दान (Short Story- Sabse Bada Daan)

डॉक्टर ने धीमे से कहा, “अगर किसी से थोड़ी मदद मिल जाए तो?” महिला तुरंत भागकर बाहर आई. उसने भीड़ में खड़े धर्मपाल जी के सामने हाथ जोड़ दिए, “सेठ जी! मेरे बच्चे का ऑपरेशन करा दीजिए, वरना वह मर जाएगा.”

शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति धर्मपाल जी हर साल बड़े-बड़े दान करते थे. कभी अस्पताल को चेक देते, कभी अनाथालय में कंबल बांटते. अख़बारों में अक्सर उनकी तस्वीर छपती- समाजसेवी धर्मपाल जी ने किया लाखों का दान…

लोग उनकी बहुत प्रशंसा करते. एक दिन शहर के सरकारी अस्पताल में एक गरीब महिला अपने बीमार बेटे को लेकर पहुंची. डॉक्टर ने जांच के बाद कहा, “तुरंत ऑपरेशन करना होगा, वरना बच्चे की जान ख़तरे में है.”

महिला रोते हुए बोली, “साहब! मेरे पास पैसे नहीं हैं.”

डॉक्टर ने असहाय होकर सिर झुका लिया. सरकारी अस्पताल में भी कई चीज़ों के लिए पैसे लगते थे. उसी समय अस्पताल के बाहर हलचल मची थी. धर्मपाल जी अस्पताल आए थे. वे अस्पताल को पचास लाख का दान देने आए थे. पत्रकार, कैमरे, माला सब तैयार थे.

अस्पताल के गेट पर बड़ा बैनर लगा- धर्मपाल फाउंडेशन का उदार दान!

उधर वही गरीब महिला अभी भी डॉक्टर के सामने हाथ जोड़ रही थी, “साहब… मेरे बच्चे को बचा लीजिए.”

डॉक्टर ने धीमे से कहा, “अगर किसी से थोड़ी मदद मिल जाए तो?”

महिला तुरंत भागकर बाहर आई. उसने भीड़ में खड़े धर्मपाल जी के सामने हाथ जोड़ दिए, “सेठ जी! मेरे बच्चे का ऑपरेशन करा दीजिए, वरना वह मर जाएगा.”

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धर्मपाल जी ने एक पल उसे देखा, फिर कैमरों की तरफ़ मुस्कुराकर बोले, “अभी कार्यक्रम चल रहा है, बाद में देखेगें.”

महिला वहीं बैठकर रोने लगी. अंदर मंच पर भाषण शुरू हो चुका था.

धर्मपाल जी ने माइक पकड़ा, “गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, मैं यह धर्म जीवनभर निभाऊंगा.” उनका भाषण सुनकर भीड़ तालियां बजाने लगी.

तभी एक नर्स भागती हुई मंच तक पहुंची और डॉक्टर से धीरे से बोली, “साहब! वह बच्चा…” डॉक्टर समझ गए. उन्होंने मंच की ओर देखा और धीमे से कहा, “मर गया!”

तालियां अभी भी बज रही थीं. अगले दिन अख़बार की हेडलाइन थी- धर्मपाल जी ने अस्पताल को पचास लाख का दान दिया!..

छोटी सी ख़बर नीचे भी छपी थी- एक गरीब महिला का बच्चा इलाज के अभाव में मर गया…

– पूर्ति खरे

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