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‘क्या मुझे भी कोई राखी बांधेगा?’ अजमल कसाब ने भरी अदालत में अपने वकील से पूछा था ये सवाल, अब्बास काज़मी ने सुनाया चौंकाने वाला किस्सा (‘Would Anyone Tie Me a Rakhi?’ Ajmal Kasab Asked His Lawyer; Abbas Kazmi Recalls the Courtroom Moment)

26 नवंबर 2008 की रात देश के लिए सबसे भयावह रात थी. भारत की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई पर आतंकियों ने कई बड़ी लोकेशन्स पर सिलसिलेवार तरीके से आतंकी हमलों को अंजाम दिया। संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने सोची समझी साजिश के तहत इस हमले को अंजाम दिया था. इन हमलों में 150 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी. मुंबई पर हुए इस हमले को 26/11 के नाम से जाना जाता है. दस हमलावरों में बस एक अजमल कसाब (Ajmal Kasab) ही जिंदा पकड़ा जा सका था. अजमल कसाब को 21 नवंबर, 2012 को पुणे के यरवडा जेल में सुबह साढ़े सात बजे फांसी दे दी गई.

26/11 mumbai

इस घटना को 18 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके जख्म अभी भी टीसते हैं. 26/11 (26/11 attack) इस इस हमले और अजमल कसाब के बारे में बातें करने के लिए हाल ही में कसाब के वकील अब्बास काज़मी (Ajmal Kasab’s lawyer Abbas Kazmi) मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में पहुंचे थे, जिन्होंने पूरे केस के बारे में बात की, साथ ही कसाब के बारे (Abbas Kazmi Recalls the Courtroom Moment) में कुछ ऐसी भी बातें बताईं, जो आज से पहले कभी सामने नहीं आई थीं.

 

पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

एडवोकेट अब्बास काज़मी ने बताया कि कसाब का केस लेने के बाद वो इंडिया के most hated man बन गए थे. लेकिन कसाब का केस उन्होंने अपनी मर्ज़ी से नहीं लिया था. “मुझे सम्माननीय जज साहब ने ये केस लड़ने के लिए कहा. और हमारे कानून में ये प्रावधान है कि आरोपी को भी अपना पक्ष रखने का कानूनी अधिकार है, इसलिए भारत सरकार ने कसाब को भी ये अधिकार दिया था.”

kasab

ये पूछे जाने पर की कसाब के साथ कोर्ट रूम का कौन सा पल उन्हें अब भी याद है, इस पर एडवोकेट काज़मी ने बताया, “एक बार राखी के दिन उसकी डेट थी. कोर्ट में सभी कुर्ता पायजामा पहनकर आए थे. सबके हाथ पर राखी बंधी थी. कसाब हिंदी फिल्में तो देखता ही था. तो उसे पता था कि राखी का त्योहार क्या होता है. तो उसने मुझसे कहा ‘क्या कोई मेरे हाथ पर भी राखी बांधेगा’. तो मैंने उससे कहा कि तुमने ऐसा कोई काम किया होता तो ज़रूर तुम्हें राखी बांधी जाती, लेकिन तुमने तो ऐसा काम किया नहीं है. तो वो मोमेंट मुझे आज भी याद है.”

Abbas Kazmi

इसके अलावा उन्होंने एक इंसिडेंस और शेयर किया, “एक 9 साल की बच्ची जब कोर्ट में गवाही देने आई थी, उस पल को भी मैं कभी नहीं भूल सकता. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस भवन के अंदर भीड़ पर जब कसाब और उसके साथी ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, तो 9 वर्ष की देविका भी वहीं थी. उसके दाहिने पैर में गोली लगी थी और उसका पैर काटना पड़ा था. जब छोटी सी बच्ची बैसाखी के सहारे कोर्ट में गवाही देने आई, तो कोर्ट में सबका दिल पसीज उठा. मेरे लिए भी ये इमोशनल मोमेंट था, लेकिन क्या करता मुझे अपनी ड्यूटी तो करनी ही थी.”

kasab

पॉडकास्ट में कसाब से जुड़े और भी कई मुद्दों पर अब्बास काज़मी ने बात की है. पूरी बातचीत जानने के लिए मेरी सहेली का ये पॉडकास्ट ज़रूर सुनें.


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